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रविवार, 30 दिसंबर 2012

उन नेताओं , उन दलालों की जीवन लीला का समापन मुझको करना है ||





आज माँ से कह दिया है मुझे भी आतंकवादी बनना है |
मुझे पढ़ाने को जो तूने गहने बेचे उसका कर्ज अदा करना है ||
एक गहना जो बचा हुआ है उसको भी ला मुझको दे दे|
AK 47 और कुछ बम, कुछ गोलियों का दाम अदा करना है ||
ये ले भगवा कपड़ा माँ इसको बाँध मेरे सर, तिलक कर |
बहनों की रक्षा की खातिर नरसंहार अब मुझको करना है ||
माँ भारती पर खतरा आया इटली वाली डायन की काली छाया से |
तंत्र मन्त्र यंत्र सबका अब उपयोग माँ उस पर मुझको करना है ||
दे आशीर्वाद माँ मुझको मैं विजयी हो जाऊं या वीरगति को पाऊं |
सरहद पर डंटे हुए जो सैनिक भाई मेरे उन पर बलिहारी हो आऊ ||
गणतंत्र के मुख पर कालिख पोती जिन भ्रष्ट नेताओं और दलालों ने |
उन नेताओं , उन दलालों की जीवन लीला का समापन मुझको करना है ||
हो सकता है माँ मेरी ये सब तो शायद मैं ना कर पाउँगा |
पर ये वादा है तुझसे मेरा न कर पाया तो जिन्दाना मैं आउंगा ||
विजय या वीरगति अब भाग्य मेरा मेरे हाथो में होगा |
लड़ कर मरुंगा ये कसम है तेरी वर्ना मर कर भी चेहरा न दिखाऊंगा ||
जय जय सियाराम ,, जय जय महाकाल ,,
जय जय जननी ,, जयजय माँ भारती

सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना आयंगे

सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना आयंगे
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छोडो मेहँदी खडक संभालो
खुद ही अपना चीर बचा लो
द्यूत बिछाये बैठे शकुनि,

मस्तक सब बिक जायेंगे
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना आयेंगे
कब तक आस लगाओगी तुम,
बिक़े हुए अखबारों से,
कैसी रक्षा मांग रही हो
दुशासन दरबारों से|
स्वयं जो लज्जा हीन पड़े हैं
वे क्या लाज बचायेंगे
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो अब गोविंद ना आयंगे
कल तक केवल अँधा राजा,
अब गूंगा बहरा भी है
होठ सील दिए हैं जनता के,
कानों पर पहरा भी है
तुम ही कहो ये अश्रु तुम्हारे,
किसको क्या समझायेंगे?
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना आयंगे