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मंगलवार, 25 जून 2024

चुना खाने के फायदे.....चूने के गुणों और सेवन के लाभ ....

चूना....
चुना खाने के फायदे.....

चूने के गुणों और सेवन के लाभ .....

- चूना जो पान में लगा के खाया जाता है , उसकी एक डिब्बी ला कर घर में रखे!

- चूना नपुंसकता की सबसे अच्छी दवा है - अगर किसी के शुक्राणु नही बनता उसको अगर गन्ने के रस के साथ चूना पिलाया जाये तो साल डेढ़ साल में भरपूर शुक्राणु बनने लगेंगे , जिन माताओं के शरीर में अन्डे नही बनते उन्हें भी इस चूने का सेवन करना चाहिए!

- विद्यार्थीओ के लिए चूना बहुत अच्छा है जो लम्बाई बढाता है - गेहूँ के दाने के बराबर चूना रोज दही में मिला के खाना चाहिए, दही नही है तो दाल में मिला के या पानी में मिला के लिया जा सकता है - इससे लम्बाई बढने के साथ साथ स्मरण शक्ति भी बहुत अच्छी होती है।

- जिन बच्चों की बुद्धि कम है ऐसे मतिमंद बच्चों के लिए सबसे अच्छी दवा है चूना . जो बच्चे बुद्धि से कम है, दिमाग देर में काम करता है, देर में सोचते है हर चीज उनकी स्लो है उन सभी बच्चे को चूना खिलाने से अच्छे हो जायेंगे।

- बहनों को अपने मासिक धर्म के समय अगर कुछ भी तकलीफ होती हो तो उसका सबसे अच्छी दवा है चूना । मेनोपौज़ की सभी समस्याओं के लिए गेहूँ के दाने के बराबर चूना हर दिन खाना दाल में, लस्सी में, नही तो पानी में घोल के पीना चाहिए ।इससे ओस्टीओपोरोसिस होने की संभावना भी नहीं रहती।



◼️गिल्टी (ट्यूमर) .....

चूना और शहद को एक साथ मिलाकर गिल्टी (टयूमर) पर बांधने से गिल्टी (टयूमर) में आराम मिलता है।

◼️चूना और अण्डे की सफेदी मिलाकर कपड़े में रखकर गिल्टी (टयूमर) पर बांधने से लाभ मिलता है।

◼️टीके से होने वाले दोष ....

 चूने को हल्दी में मिलाकर टीका लगी हुई जगह पर लेप करने से टीके का घाव ठीक हो जाता है।

◼️गुल्म (वायु गोला) ....

3 ग्राम कलई चूना की छोटी गोली बनाकर गुड़ में रखकर खाने से गैस का गोला खत्म हो जाता है।

◼️नकसीर (नाक से खून आना) ....

रात को सोने से पहले 400 मिलीलीटर पानी के अन्दर 50 ग्राम चूने को डालकर रख दें। सुबह उठकर इस पानी को छान लें। इस छने हुए पानी को लगभग 25 मिलीलीटर तक रोगी को पिलाने से नकसीर (नाक से खून बहना) बन्द हो जाता है।

◼️उपदंश (सिफलिस) ....

 लगभग 300 मिलीलीटर चूने के पानी में 1.80 मिलीलीटर कपूर का रस मिलाकर उपन्दश की फुंसियों पर लगाने से लाभ होता है।

◼️पेट में दर्द ....

 1 गिलास चूने के पानी में 1 चम्मच सोड़ा बाई-कार्ब डालकर पीने से पेट का दर्द शांत हो जाता है।

◼️गठिया रोग ...

हल्दी, चूना और गुड़ का लेप बनाकर लगातार कई दिन तक मालिश करने से कलाई और जोड़ों का दर्द मिट जाता है।

◼️फोड़े-फुंसियां ...

तेल या घी में पुराने चूने को मिलाकर लेप करने से फोड़े-फुंसीकी सूजन खत्म हो जाती है।

◼️फोड़ों पर चूने के पानी में भिगा हुआ कपड़ा रखने से फोड़े ठीक हो जाते हैं।

◼️दाद ...

पुराना चूना और तिल्ली के तेल को मिलाकर लगाने से दाद ठीक हो जाता है।

◼️सफेद दाग होने पर ....

1 चम्मच चूना और 5 ग्राम हरताल को एक साथ पीसकर नींबू के रस में मिलाकर लगभग 2 महीने तक सफेद दागों पर लगाने से लाभ होता है।

◼️सिर का दर्द ....

चूना और नौसादर को बारीक करके शीशी में भरकर उसकी डॉट को लगाकर रख दें। सिर में दर्द होने पर इस शीशी की डॉट को खोलकर मिश्रण को सूंघें और सुंघाने के तुरन्त ही रोगी की नाक के पास से इस शीशी को दूर हटा लें। ऐसा करने से सिर दर्द खत्म हो जाता है।

◼️शुद्ध घी में खाने का चूना मिलाकर सिर पर लेप करने से गर्मी के कारण होने वाला सिर का दर्द ठीक हो जाता है।

◼️मस्सा और तिल ....

पान के डण्ठल पर चूना लगाकर मस्से की जड़ पर लगाने से सिर्फ 1 ही हफ्ते में मस्सा बिल्कुल साफ हो जाता है।

◼️आग से जलने पर ...

चूने का छना हुआ पानी और उसी के बराबर अलसी का तेल मिलाकर अच्छी तरह साफ कपड़े पर लगा लें। कपड़े को जले हुए भाग पर रखकर बांध दें। इससे जलन कम हो जाती है और जख्म भी ठीक हो जाते हैं।

◼️चूने के पानी और तिल्ली के तेल को कांसे की थाली में फेंटकर रूई से हर 4-4 घंटे के बाद शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से बहुत ज्यादा जला हुआ व्यक्ति भी ठीक हो जाता है और उसके शरीर में जले हुए के सफेद दाग भी नहीं पड़ते हैं।

◼️इस औषधि को अमृत व कैल्शियम की माँ कहा है सिर्फ एक ही इंसान इसका सेवन नही कर सकता जिसे पथरी हो या पथरी होती रहती है

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आइये जाने कैसे जीरा घटाता है वजन....



आइये जाने कैसे जीरा घटाता है वजन....
 
◼️1. दो बड़े चम्मच जीरा रात को एक गिलास पानी में गला दे और सुबह इसे उबालकर चाय की तरह पीये और बचे हुए जीरे को भी चबाले इसका रोजाना सेवन हमारा वजन कम करने में सहायक होता है ।
 

◼️ 2. एक बड़ा चम्म्च दही में यदि हम एक चम्म्च जीरा पाउडर डाल इसका रोजाना सेवन करने से भी हम वजन कम कर सकते है।
 

 ◼️3. 3 ग्राम जीरा पानी में डाल कर मिलाये और थोड़ा शहद डालकर पीयेंं यह दिन में दो बार प्रयोग करना चाहिए। 
 
◼️4. 200 ग्राम मेथी, 100 ग्राम अजवायन, 50 ग्राम काला जीरा गैस पर हल्का सा भून लेंं और पीसकर चूर्ण बनालेंं और रात को सोते समय गरम पानी से ले यह प्रयोग भी वजन कम करने में बहुत सहायक होता है।
 

 ◼️5. जीरा वजन घटाने के साथ-साथ कई प्रकार की बीमारियों से भी बचाता है जैसे कोलेस्ट्रोल (Cholesterol) को रोकता है साथ ही पेट की भी कई समस्योंं को काम करता है जैसे गैस बनना व पेट फूलना आदि।


पुरुषों की हर तरह कमजोरी को जड़ से मिटाने के घरेलु नुस्खे...

पुरुषों की हर तरह कमजोरी को जड़ से मिटाने के घरेलु नुस्खे....


अगर बचपन में की हुयी गलतियों से या अत्यधिक मैथुन से आपका शरीर बहुत कमज़ोर हो गया हैं और आपका वैवाहिक जीवन सही नहीं चल रहा हैं तो कुछ दिन ये घरेलु नुस्खे ज़रूर अपनाये और फर्क देखे। इनसे आपका दुबला पतला शरीर भी शक्तिशाली बनेगा। और ना सिर्फ आपका शरीर सुदृढ़ बनेगा अपितु आपकी वीर्य सम्बंधित सभी समस्याए भी हल होंगी।

◼️◼️उड़द.....

अगर आपकी पाचन क्रिया अच्छी हैं तो उड़द आपके लिए रामबाण हैं। उड़द के लड्डू, उड़द की दाल, दूध में बनाई हुई उड़द की खीर का सेवन करने से वीर्य की बढ़ोतरी होती है और संभोग शक्ति बढ़ती है।


◼️◼️तालमखाना.....

तालमखाना ज्यादातर धान के खेतों में पाया जाता है इसे लेटिन भाषा में एस्टरकैन्था-लोंगिफोलिया कहते हैं। वीर्य के पतले होने पर, शीघ्रपतन रोग में, स्वप्नदोष होने पर, शुक्राणुओं की कमी होने पर रोजाना सुबह और शाम लगभग 3-3 ग्राम तालमखाना के बीज दूध के साथ लेने से लाभ होता है। इससे वीर्य गाढ़ा हो जाता है।


◼️◼️गोखरू.....

गोखरू का फल कांटेदार होता है और औषधि के रूप में काम आता है। बारिश के मौसम में यह हर जगह पर पाया जाता है। नपुंसकता रोग में गोखरू के लगभग 10 ग्राम बीजों के चूर्ण में इतने ही काले तिल मिलाकर 250 ग्राम दूध में डालकर आग पर पका लें। पकने पर इसके खीर की तरह गाढ़ा हो जाने पर इसमें 25 ग्राम मिश्री का चूर्ण मिलाकर सेवन करना चाहिए। इसका सेवन नियमित रूप से करने से नपुसंकता रोग में बहुत ही लाभ होता है।


◼️◼️मूसली.....

मूसली पूरे भारत में पाई जाती है। यह सफेद और काली दो प्रकार की होती है। काली मूसली से ज्यादा गुणकारी सफेद मूसली होती है। यह वीर्य को गाढ़ा करने वाली होती है।

मूसली के चूर्ण को लगभग 3-3 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम दूध के साथ लेने से वीर्य की बढ़ोत्तरी होती है और शरीर में कामउत्तेजना की वृद्धि होती है।

▪️▪️वीर्य वृद्धि और शुक्राणुओं को बढ़ाने के 4 विशेष प्रयोग....


◼️◼️विशेष प्रयोग – 1....

100 ग्राम तालमखाने के बीज, 100 ग्राम चोबचीनी, 100 ग्राम ढाक का गोंद, 100 ग्राम मोचरस तथा 250 ग्राम मिश्री को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। रोजाना सुबह के समय एक चम्मच चूर्ण में 4 चम्मच मलाई मिलाकर खाएं। यह मिश्रण यौन रुपी कमजोरी, नामर्दी तथा वीर्य का जल्दी गिरना जैसे रोग को खत्म कर देता है।


◼️◼️विशेष प्रयोग – 2.....

पीपल का फल और पीपल की कोमल जड़ को बराबर मात्रा में लेकर चटनी बना लें। इस 2 चम्मच चटनी को 100 मि.ली. दूध तथा 400 मि.ली. पानी में मिलाकर उसे लगभग चौथाई भाग होने तक पकाएं। फिर उसे छानकर आधा कप सुबह और शाम को पी लें। इसके इस्तेमाल करने से वीर्य में तथा संभोग करने की ताकत में वृद्धि होती है।


◼️◼️विशेष प्रयोग – 3....

बच्चा पैदा करने के लिए सिर्फ एक बलशाली शुक्राणु की जरूरत होती है, जो स्त्री के अंडाणु से संयोग कर गर्भ में परिवर्तित होता है। वीर्य में शुक्राणुओं की कमी होने या शुक्राणु कमजोर होने पर बच्चे पैदा करने में परेशानी होती है।


◼️◼️विशेष प्रयोग – 4....

इसके लिए शतावरी, गोखरू, बड़ा बीजबंद, बंशलोचन, कबाब चीनी, कौंच के छिलकारहित बीज, सेमल की छाल, सफेद मुसली, काली मुसली, सालम मिश्री, कमल गट्टा, विदारीकंद, असगन्ध सब 50-50 ग्राम और शक्कर 300 ग्राम, सभी द्रव्यों को अलग-अलग कूट-पीसकर कपड़छान कर लें। शक्कर को भी पीसकर महीन कर लें और सभी को मिला लें व तीन बार छान लें, ताकि एक जान हो जाएं। सुबह-शाम एक-एक चम्मच चूर्ण मीठे दूध के साथ 60 दिन तक सेवन करें और इसके बाद वीर्य की जाँच करवाकर देख लें कि शुक्राणुओं में क्या वृद्धि हुई है।

पर्याप्त परिणाम न मिलने तक प्रयोग जारी रखें।

यह नुस्खा शीघ्रपतन, स्वप्नदोष, नपुंसकता आदि बीमारियों में भी लाभ करता है।

 परंतु चिकित्सक की देख रेख में ही कोई प्रयोग करें....


विटामिन-डी की कमी ये 5 ड्राई फ्रूट्स बेहतर हो सकते...


विटामिन-डी की कमी  ये 5 ड्राई फ्रूट्स बेहतर हो सकते....

विटामिन-डी हड्डियां, बच्चों को दांत के पीसना, इम्यूनिटी और मेंटल हेल्थ के लिए आवश्यक है।

इसकी कमी को दूर करने में ड्राई फ्रूट्स फायदेमंद होते हैं।

बादाम, अंजीर, काजू आदि इसकी कमी को पूरा करने में मददगार हो सकते हैं।

हमारी सेहत को दुरुस्त रखने के लिए विटामिन-डी काफी आवश्यक होता है। शरीर में इसकी कमी होने की वजह से, कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ये परेशानियां शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक भी हो सकती हैं। विटामिन-डी हमारे शरीर में कैल्शियम के अब्जॉर्प्शन में मदद करता है, जिस कारण से हड्डियों के बनने और उन्हें मजबूत रखने में मदद मिलती है। बच्चों का दांत पीसना दांत किटकिटाना खत्म कर देता है यह हमारी डिप्रेशन, सीजनल अफेक्टिव डिस्ऑर्डर जैसी मानसिक समस्याओं से बचाव में भी मददगार होता है। विटामिन-डी इतना ही नहीं, बल्कि इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में भी हमारी सहायता करता है। इसलिए शरीर में इसकी भरपूर मात्रा उपलब्ध होना बेहद जरूरी है।


आमतौर पर, विटामिन-डी हमें सूरज की रोशनी से मिलता है। जब हमारी त्वचा सूरज की रोशनी में एक्सपोज होती है, तब हमारी त्वचा विटामिन-डी बनाती है। विटामिन-डी का मुख्य स्त्रोत सूरज की रोशनी ही है, लेकिन कई फूड आइटम्स भी हैं, जिन्हें खाने से विटामिन-डी की कमी को दूर किया जा सकता है। इन फूड आइटम्स में नट्स यानी ड्राई फ्रूट्स सबसे अधिक असरदार हो सकते हैं। विटामिन-डी की कमी को दूर करने के लिए इन्हें अपनी डाइट में शामिल करना आपके लिए लाभदायक हो सकता है। इनमें विटामिन-डी के अलावा, और भी कई ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होते हैं।

◼️◼️प्रून्स....

प्रून्स विटामिन-डी की कमी को दूर करने के अलावा और भी कई हेल्थ से जुड़े फायदे दे सकता है। इसमें फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जिस वजह से यह पाचन के लिए काफी लाभदायक होता है। साथ ही, यह कब्ज से राहत दिलाने और ओवर इटिंग की समस्या को भी कम करने में मदद करता है।


◼️◼️बादाम....

बादाम विटामिन-डी के साथ-साथ विटामिन-ई की कमी दूर करने में आपकी मदद कर सकता है। इसके अलावा, ये कोलेस्ट्रोल कम करने और ब्लड शुगर लेवल को रेगुलेट करने में भी आपकी मदद कर सकता है।

◼️◼️काजू....

काजू में विटामिन-डी काफी अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा, इसमें हेल्दी फैट्स और फाइबर पाए जाते हैं, जो इसे सेहत के लिए काफी फायदेमंद बनाता है। यह वजन कम करने, ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल करने और दिल की सेहत के लिए फायदेमंद होता है।


◼️◼️किशमिश....

किशमिश में विटामिन-डी के अलावा, भरपूर मात्रा में पोटेशियम और आयरन भी पाए जाते हैं। इस कारण से, किशमिश को सेहत के लिए गुणकारी माना जाता है। इसे खाने से एनिमिया और कब्ज से छुटकारा मिल सकता है।


◼️◼️अंजीर....

अंजीर में विटामिन-डी के साथ ही और भी कई जरूरी विटामिन पाए जाते हैं। सूखे हुए अंजीर, ताजा अंजीर की तुलना में अधिक पौष्टिक होते हैं। कैल्शियम और फॉस्फोरस मौजूद होने की वजह से यह आपकी हड्डियों के लिए काफी जरूरी है। यह हड्डियों के साथ-साथ मेंसुरल हेल्थ और पाचन के लिए भी काफी फायदेमंद होता है।

घुटनों के दर्द का ईलाज....विजयसार की चाय....

घुटनों के दर्द का ईलाज....

विजयसार की चाय....

विजयसार एक वृक्ष है जो के जोड़ों के दर्द कैल्शियम की कमी, और मधुमेह के लिए बहुत उपयोगी है। 

इसकी लकड़ी या इसकी लकड़ी का चूर्ण आपको पंसारी से मिल जाएगा, खाडी ग्रामोद्योग में इसके बने गिलास भी मिलते हैं। जिसमें रात्रि में रखा हुआ पानी सुबह पीने से भी लाभ मिलता है। 

आज हम आपको बताने जा रहे हैं इसके उपयोग से घुटनों के दर्द को कैसे सही करे। 

एक बार ये प्रयोग जरुर आजमाए।

▪️▪️कैसे करें इसका उपयोग....

रात्रि को सोते समय 6 ग्राम विजयसार की लकड़ी, 250 ग्राम दूध, डेढ़ गिलास पानी 375 ml, 2 चम्मच चीनी डालकर धीमी आंच पर पकाएं।

 जब पक कर दूध एक कप 200 ml रह जाए तब छान कर पी जाए। 

इससे घुटनों का दर्द सही हो जाता है।

घुटनों की हड्डियों का कैल्शियम खुस्क होने की शिकायत दूर होती है क्योंकि विजयसार हड्डियों के कैल्शियम को तर रखती है। पुरानी चोट के दर्द को भी ठीक करती है। इसके प्रयोग से टूटी हुई हड्डी शीघ्र जुड़ जाती है, हड्डी को पहले सेट करवा कर प्लास्टर करवा लें। इससे कमर का दर्द भी दूर होता है इसके सेवन करने वाले मनुष्य की वृद्धावस्था में कभी गर्दन नहीं कापेगी, हाथ नहीं कापंगे और हाथ पैरों व शरीर की हड्डियां चोट लगने पर सहज नहीं टूटेंगी। 

और हड्डियों में प्राय होने वाली कड़ कड़ भी बंद हो जाएगी।

मगर ये प्रयोग ज्यादा गर्मी के मौसम में नहीं करना चाहिए और गर्भवती औरतों को भी नहीं करना चाहिए।


▪️▪️गर्मियों में विजयसार का पानी...

विजयसार का पानी बनाने के लिए 6 ग्राम विजयसार की लकड़ी का बुरादा कर लें और रात को 250 ml पानी में भीगो कर रख दें और सुबह छान कर पी लें और इस तरह सुबह का भिगोया पानी रात को पी लें ।

 हर बार विजयसार की नई लकड़ी लें ।

हनुमानजी की अद्भुत पराक्रम कथा

हनुमानजी की अद्भुत पराक्रम कथा

राम रावण युद्ध के समय जब रावण ने देखा कि हमारी पराजय निश्चित है तो उसने अपने 60 हजार अमर राक्षसों को बुलाकर रणभूमि में भेजने का आदेश दिया ! ये ऐसे थे जिनको काल भी नहीं खा सका था! विभीषण के गुप्तचरों से समाचार मिलने पर श्रीराम को चिंता हुई कि हम लोग इनसे कब तक लड़ेंगे ? सीता का उद्धार और विभीषण का राज तिलक कैसे होगा? क्योंकि युद्ध कि समाप्ति असंभव है !

श्रीराम कि इस स्थिति से वानरवाहिनी के साथ कपिराज सुग्रीव भी विचलित हो गए कि अब क्या होगा ? हम अनंत काल तक युद्ध तो कर सकते हैं पर विजयश्री का वरण नहीं ! पूर्वोक्त दोनों कार्य असंभव हैं ! अंजनानंदन हनुमान जी आकर वानर वाहिनी के साथ श्रीराम को चिंतित देखकर बोले –प्रभु क्या बात है ? ……श्रीराम के संकेत से विभीषण जी ने सारी बात बतलाई ! अब विजय असंभव है !

पवन पुत्र ने कहा –असम्भव को संभव और संभव को असम्भव कर देने का नाम ही तो हनुमान है ! प्रभु आप केवल मुझे आज्ञा दीजिए मैं अकेले ही जाकर रावण की अमर सेना को नष्ट कर दूँगा ! कैसे हनुमान ? वे तो अमर हैं !

प्रभु ! इसकी चिंता आप न करें सेवक पर विश्वास करें ! उधर रावण ने चलते समय राक्षसों से कहा था कि वहां हनुमान नाम का एक वानर है उससे जरा सावधान रहना ! एकाकी हनुमानजी को रणभूमि में देखकर राक्षसों ने पूछा तुम कौन हो क्या हम लोगों को देखकर भय नहीं लगता जो अकेले रणभूमि में चले आये !

मारुति –क्यों आते समय राक्षस राज रावण ने तुम लोगों को कुछ संकेत नहीं किया था जो मेरे समक्ष निर्भय खड़े हो ! निशाचरों को समझते देर न लगी कि ये महाबली हनुमान हैं ! तो भी क्या ? हम अमर हैं हमारा ये क्या बिगाड़ लेंगे !भयंक र युद्ध आरम्भ हुआ पवनपुत्र कि मार से राक्षस रणभूमि में ढेर होने लगे चौथाई सेना बची थी कि पीछे से आवाज आई हनुमान हम लोग अमर हैं हमें जीतना असंभव है ! अतः अपने स्वामी के साथ लंका से लौट जावो इसी में तुम सबका कल्याण है !

आंजनेय ने कहा लौटूंगा अवश्य पर तुम्हारे कहने से नहीं ! अपितु अपनी इच्छा से ! हाँ तुम सब मिलकर आक्रमण करो फिर मेरा बल देखो और रावण को जाकर बताना ! राक्षसों ने जैसे ही एक साथ मिलकर हनुमानजी पर आक्रमण करना चाहां वैसे ही पवनपुत्र ने उन सबको अपनी पूंछ में लपेटकर ऊपर आकाश में फेंक दिया ! वे सब पृथ्वी कि गुरुत्वाकर्षण शक्ति जहाँ तक है वहां से भी ऊपर चले गए ! चले ही जा रहे हैं ………चले मग जात सूखि गए गात गोस्वामी तुलसीदास !  उनका शरीर सूख गया अमर होने के कारण मर सकते नहीं !

अतः रावण को गाली देते हुए और कष्ट के कारण अपनी अमरता को कोसते हुए अभी भी जी रहे हैं ! इधर हनुमान जी ने आकर प्रभु के चरणों में शीश झुकाया !श्रीराम बोले –क्या हुआ हनुमान ! प्रभो ! उन्हें ऊपर भेजकर आ रहा हूँ !

राघव –पर वे अमर थे हनुमान! हाँ स्वामी इसलिए उन्हें जीवित ही ऊपर भेज आया हूँ अब वे कभी भी नीचे नहीं आ सकते ? रावण को अब आप शीघ्रातिशीघ्र ऊपर भेजने की कृपा करें जिससे माता जानकी का आपसे मिलन और महाराज विभीषण का राजसिंहासन हो सके !

पवन पुत्र को प्रभु ने उठाकर गले लगा लिया ! वे धन्य हो गए अविरल भक्ति का वर पाकर ! श्रीराम उनके ऋणी बन गए ! और बोले –हनुमानजी—आपने जो उपकार किया है वह मेरे अंग अंग में ही जीर्ण शीर्ण हो जाय मैं उसका बदला न चुका सकूँ ,क्योकि उपकार का बदला विपत्तिकाल में ही चुकाया जाता है !

पुत्र ! तुम पर कभी कोई विपत्ति न आये !निहाल हो गए आंजनेय !

हनुमानजी की वीरता के समान साक्षात काल देवराज इन्द्र महाराज कुबेर तथा भगवान विष्णु की भी वीरता नहीं सुनी गयी –ऐसा कथन श्रीराम का है –

न कालस्य न शक्रस्य न विष्णर्वित्तपस्य च !

कर्माणि तानि श्रूयन्ते यानि युद्धे हनूमतः !

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जय श्रीराम


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इतिहास के पन्नों में कहाँ हैं ये नाम?? सेठ रामदास जी गुड़वाले - 1857 के महान क्रांतिकारी, दानवीर


#वंदेभारत 
इतिहास के पन्नों में कहाँ हैं ये नाम??

सेठ रामदास जी गुड़वाले - 1857 के महान क्रांतिकारी, दानवीर जिन्हें फांसी पर चढ़ाने से पहले अंग्रेजों ने उनपर शिकारी कुत्ते छोड़े जिन्होंने जीवित ही उनके शरीर को नोच खाया।

सेठ रामदास जी गुडवाला दिल्ली के अरबपति सेठ और बेंकर थे.  इनका जन्म दिल्ली में एक अग्रवाल परिवार में हुआ था. इनके परिवार ने दिल्ली में पहली कपड़े की मिल की स्थापना की थी।

उनकी अमीरी की एक कहावत थी “रामदास जी गुड़वाले के पास इतना सोना चांदी जवाहरात है की उनकी दीवारो से वो गंगा जी का पानी भी रोक सकते है”

जब 1857 में मेरठ से आरम्भ होकर क्रांति की चिंगारी जब दिल्ली पहुँची तो

दिल्ली से अंग्रेजों की हार के बाद अनेक रियासतों की भारतीय सेनाओं ने दिल्ली में डेरा डाल दिया। उनके भोजन और वेतन की समस्या पैदा हो गई । रामजीदास गुड़वाले बादशाह के गहरे मित्र थे ।

रामदास जी को बादशाह की यह अवस्था देखी नहीं गई। उन्होंने अपनी करोड़ों की सम्पत्ति बादशाह के हवाले कर दी और कह दिया 

"मातृभूमि की रक्षा होगी तो धन फिर कमा लिया जायेगा "

रामजीदास ने केवल धन ही नहीं दिया, सैनिकों को सत्तू, आटा, अनाज बैलों, ऊँटों व घोड़ों के लिए चारे की व्यवस्था तक की।

सेठ जी जिन्होंने अभी तक केवल व्यापार ही किया था, सेना व खुफिया विभाग के संघठन का कार्य भी प्रारंभ कर दिया उनकी संघठन की शक्ति को देखकर अंग्रेज़ सेनापति भी हैरान हो गए ।
सारे उत्तर भारत में उन्होंने जासूसों का जाल बिछा दिया, अनेक सैनिक छावनियों से गुप्त संपर्क किया।

उन्होंने भीतर ही भीतर एक शक्तिशाली सेना व गुप्तचर संघठन का निर्माण किया। देश के कोने कोने में गुप्तचर भेजे व छोटे से छोटे मनसबदार और राजाओं से प्रार्थना की इस संकट काल में सभी सँगठित हो और देश को स्वतंत्र करवाएं।

रामदास जी की इस प्रकार की क्रांतिकारी गतिविधयिओं से अंग्रेज़ शासन व अधिकारी बहुत परेशान होने लगे

कुछ कारणों से दिल्ली पर अंग्रेजों का पुनः कब्जा होने लगा । एक दिन उन्होंने चाँदनी चौक की दुकानों के आगे जगह-जगह जहर मिश्रित शराब की बोतलों की पेटियाँ रखवा दीं, अंग्रेज सेना उनसे प्यास बुझाती और वही लेट जाती । अंग्रेजों को समझ आ गया की भारत पे शासन करना है तो रामदास जी का अंत बहुत ज़रूरी है 

सेठ रामदास जी गुड़वाले को धोखे से पकड़ा गया और जिस तरह से मारा गया वो क्रूरता की मिसाल है।

पहले उन्हें रस्सियों से खम्बे में बाँधा गया फिर उन पर  शिकारी कुत्ते छुड़वाए गए उसके बाद उन्हें उसी अधमरी अवस्था में दिल्ली के चांदनी चौक की कोतवाली के सामने फांसी पर लटका दिया गया। 

सुप्रसिद्ध इतिहासकार ताराचंद ने अपनी पुस्तक 'हिस्ट्री ऑफ फ्रीडम मूवमेंट' में लिखा है - 

"सेठ रामदास गुड़वाला उत्तर भारत के सबसे धनी सेठ थे।अंग्रेजों के विचार से उनके पास असंख्य मोती, हीरे व जवाहरात व अकूत संपत्ति थी।

सेठ रामदास जैसे अनेकों क्रांतिकारी इतिहास के पन्नों से गुम हो गए क्या सेठ रामदास जैसे क्रांतिकारियों के बलिदान का ऋण हम चुका पाये???
तुम न समझो देश को आज़ादी यूं ही मिली है।
हर कली इस बाग की,कुछ खून  पी कर ही खिली है।
मिट गये वतन के वास्ते,दीवारों में जो गड़े हैं।
महल अपनी आज़ादी के,शहीदों की छातियों पर ही खड़े हैं।।