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सोमवार, 18 अप्रैल 2011

बजरंग बली की पूजा से शनि का प्रकोप शांत होता है।

बजरंग बली ने शनि महाराज को कष्टों से मुक्त कराया था, उनकी रक्षा की थी इसलिए शनि देवता ने यह वचन दिया था हनुमानजी की उपासना करने वालों को वे कभी कष्ट नहीं देंगे। बल्कि कष्टों को दूर कर उनकी रक्षा करेंगे। शनि या साढ़े साती की वजह से होने वाले कष्टों के निवारण हेतु हनुमानजी की आराधना करनी चाहिए। बजरंग बली की पूजा से शनि का प्रकोप शांत होता है। सूर्य व मंगल के साथ शनि की शत्रुता व योगों के कारण उत्पन्न कष्ट भी दूर हो जाते हैं।
संकटमोचन को ऐसे करें प्रसन्न
मंगलवार को सूर्योदय के समय नहाकर श्री हनुमते नमः मंत्र का जप करें।
मंगल को सुबह तांबे के लोटे में जल व सिंदूर मिश्रित कर श्री हनुमानजी को अर्पित करें।
श्री हनुमान यंत्र को सिद्ध कर लाल धागे में धारण करें, हर मंगलवार को इसका विधिवत पूजन करें।
लगातार 10 मंगलवार तक श्री हनुमान को गुड़ का भोग लगाएँ। शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार से इसे शुरु करें।
चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर श्री हनुमान को अर्पित करें। मंगलवार के दिन करने से शीघ्र सफलता मिलती है।
हर मंगलवार को श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें।
चित्रा या मृगशिरा नक्षत्रों में किसी भी मंगलवार से शुरु कर लगातार 10 मंगलवार तक श्री हनुमान के मंदिर में जाकर केले का प्रसाद चढ़ाएँ। 



ऐसा माना जाता है कि मंगलवार को हनुमानजी का जन्म हुआ है अत: इस दिन हनुमानजी की आराधना का विशेष फल मिलता है।

- हनुमानजी की पूजा करने वाले भक्त पर शनिदेव का बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है।

- मंगलवार को बजरंग बली को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाने से वे प्रसन्न होते हैं और हमारी परेशानियां दूर होती हैं।

- ज्योतिष के अनुसार मंगलवार मंगल देव का भी दिन है, इस दिन मंगल दोष का प्रभाव कम करने के लिए लाल फूल नदी में प्रवाहित करें।

- लाल वस्तुओं का दान करें।

 

सर्वप्रथम रामकथा हनुमानजी ने लिखी थी

कहते हैं कि सर्वप्रथम रामकथा हनुमानजी ने लिखी थी और वह भी शिला पर। यह रामकथा वाल्मीकिजी की रामायण से भी पहले लिखी गई थी और हनुमन्नाटक के नाम से प्रसिद्ध है।
'हनुमान' शब्द का ह ब्रह्मा का, नु अर्चना का, मा लक्ष्मी का और न पराक्रम का द्योतक है।
 

 
हनुमान को शिवावतार अथवा रुद्रावतार भी माना जाता है। रुद्र आँधी-तूफान के अधिष्ठाता देवता भी हैं और देवराज इंद्र के साथी भी। विष्णु पुराण के अनुसार रुद्रों का उद्भव ब्रह्माजी की भृकुटी से हुआ था। हनुमानजी वायुदेव अथवा मारुति नामक रुद्र के पुत्र थे।



हनुमान को सभी देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त था। वे सेवक भी थे और राजदूत, नीतिज्ञ, विद्वान, रक्षक, वैय्यारकरण, वक्ता, गायक, नर्तक, बलवान और बुद्धिमान भी। शास्त्रीय संगीत के तीन आचार्यों में से एक हनुमान भी थे। अन्य दो थे शार्दूल और कहाल। 'संगीत पारिजात' हनुमानजी के संगीत-सिद्धांत पर आधारित है। हनुमान के जन्म-स्थान के बारे में कुछ भी निश्चित नहीं है। मध्यप्रदेश के आदिवासियों का कहना है कि हनुमानजी का जन्म राँची जिले के गुमला परमंडल के ग्राम अंजन में हुआ था। कर्नाटकवासियों की धारणा है कि हनुमानजी कर्नाटक में पैदा हुए थे। पंपा और किष्किंधा के ध्वंसावशेष अब भी हाम्पी में देखे जा सकते हैं। अपनी रामकथा में फादर कामिल बुल्के ने लिखा है कि कुछ लोगों के अनुसार हनुमानजी वानर-पंथ में पैदा हुए थे।



हनुमानजी का जन्म कैसे हुआ इस विषय में भी भिन्न मत हैं। एक मान्यता है कि एक बार जब मारुति ने अजंनी को वन में देखा तो वह उस पर मोहित हो गया। उसने अंजनी से बलात संयोग किया और वह गर्भवती हो गई। एक अन्य मान्यता है कि वायु ने अंजनी के शरीर में कान के माध्यम से प्रवेश किया और वह गर्भवती हो गई।
एक अन्य कथा के अनुसार महाराजा दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ से प्राप्त जो हवि अपनी रानियों में बाँटी थी उसका एक भाग गरुड़ उठाकर ले गया और उसे उस स्थान पर गिरा दिया जहाँ अंजनी पुत्र प्राप्ति के लिए तपस्या कर रही थी। हवि खा लेने से अंजनी गर्भवती हो गई और कालांतर में उसने हनुमानजी को जन्म दिया।

रविवार, 17 अप्रैल 2011

एक अर्ज मेरी सुनलो, दिलदार हे कन्हैया ।।

एक अर्ज मेरी सुनलो, दिलदार हे कन्हैया ।। 
कर दो अधम की नैया, भव पार हे कन्हैया ।।... 

अच्छा हूँ या बुरा हूँ , पर दास हूँ तुम्हारा । 
जीवन का मेरे तुम पर, है भार हे कन्हैया ।। 
एक अर्ज मेरी सुनलो, दिलदार हे कन्हैया ...

तुम हो अधम जनों का, उद्धार करने वाले ।
मैं हूँ अधम जनों का, सरदार हे कन्हैया ।। 
एक अर्ज मेरी सुनलो, दिलदार हे कन्हैया ...

करूणानिधान करूणा, करनी पडेगी तुमको । 
वरना ये नाम होगा, बेकार हे कन्हैया ।। 
एक अर्ज मेरी सुनलो, दिलदार हे कन्हैया ...

ख्वायश ये है कि मुझसे, दृग बिंदु अश्रु लेकर । 
बदले में दे दो अपना, कुछ प्यार हे कन्हैया ।। 
एक अर्ज मेरी सुनलो, दिलदार हे कन्हैया... 

कर दो अधम की नैया, भव पार हे कन्हैया....

शनिवार, 16 अप्रैल 2011

so never loose above three CONFIDENCE ,TRUST & HOPE

1.एक बार एक गावं ने सोचा क्यों ना हम बारिश के लिए
भगवान से प्रार्थना करे ! स्थान तय हुआ !! सारा गावं
वहा पंहुचा पर एक बच्चा छतरी ले के पंहुचा ! इसको
कहते हैं confidance ?
2.एक साल के बच्चे को हवा मैं उछाला और वो हंस रहा था
क्योंकी उसको विश्वास हैं की कोइ उसे पकड़ भी लेगा
इसको कहते हैं trust.
3.हम रोज रात को बिस्तर पे सोने जाते हैं !! हमे पता भी
नहीं की कल् हमारी आँख खुलेगी भी या नहीं पर
फिर भी हम अगले दिन की रूप रेखा बना के सोते हैं
इसको कहते हैं hope
so never loose above three CONFIDENCE ,TRUST & HOPE

एक काल्पनिक फ़ोन वार्ता पढ़िये

एक काल्पनिक फ़ोन वार्ता पढ़िये –

(नरेन्द्र मोदी भारत के लोहा व्यापारी हैं, जबकि परवेज़ मुशर्रफ पाकिस्तान के लोहे के व्यापारी हैं)
फ़ोन की घण्टी बजती है –
नरेन्द्र मोदी – क्यों बे मुशर्रफ, सरिया है क्या?
मुशर्रफ– हाँ है…
मोदी – मुँह में डाल ले… (फ़ोन कट…)

इसे कहते हैं Provocation करना…

अगले दिन फ़िर फ़ोन बजता है –
नरेन्द्र मोदी – क्यों बे मुशर्रफ, सरिया है क्या?
मुशर्रफ(स्मार्ट बनने की कोशिश) – सरिया नहीं है…
मोदी – क्यों, मुँह में डाल लिया क्या? (फ़िर फ़ोन कट…)

इसे कहते हैं, “Irritation” में डालना…

अगले दिन फ़िर फ़ोन बजता है –
नरेन्द्र भाई – क्यों बे मुशर्रफ, सरिया है क्या?
मुशर्रफ(ओवर स्मार्ट बनने की कोशिश) – अबे साले, सरिया है भी और नहीं भी…
नरेन्द्र भाई – अच्छा, यानी कि बार-बार उसे मुँह में डालकर निकाल रहा है? (फ़ोन कट…)

इसे कहते हैं Aggravation में डालना…

अगले दिन मुशर्रफ , मोदी जी से बदला लेने की सोचता है… खुद ही फ़ोन करता है…
मुशर्रफ – क्यों बे मोदी, सरिया है क्या?
नरेन्द्र मोदी – अबे मुँह में दो-दो सरिये डालेगा क्या? (फ़ोन कट…)

इसे कहते हैं Frustration पैदा कर देना…

परमात्मा का अंश तो परमात्मा ही

परमात्मा का अंश तो परमात्मा ही हुवा न छोटासा....

सोने की इतनी बड़ी डली लेलो उसमे से थोडा टुकडा काट लो तो वो सोना ही है.....

शुद्ध सोना है हम सब, परंतु इस सोने को माया का,कर्मो का कचरा लग गया है, लेकिन कचरे में भी सोना है तो उसका मोल थोडी कम हो गया कोई, साफ करो उसकी कीमत वही है

कोई दोष, कोई खोट नहीं है हममे, कोई पापी भी नहीं है, पाप भी अपवित्र नहीं कर सकता हमें, अगर परमात्मा का अंश अपवित्र हो गया तो, परमात्मा भी अपवित्र हो सकता है

भगवन के पास न पाप जायेगा न पुण्य जायेगा, अगर सिर्फ पुण्य ही वहा जा सकता है, तो गलत है, फिर वो भगवान नहीं है, वहा सौदा नहीं है, वहा सिर्फ शुद्ध जायेगा...........

पाप भी बोझ है और पुण्य भी, दोनों का फल भुगतना है अच्छा या बुरा.....

लेकिन परमात्मा की भक्ति एक एसा यज्ञ है सब स्वाहा,पाप क्या पुण्य भी नहीं बचेंगा


"पुरन प्रगटे भाग्य कर्म का कलसा फूटा"

एक दिन एसा आता है भगवन की भक्ति-ध्यान करते-करते इतना तेज आ जाता है जो घडा है कर्म का जिसमे पाप-पुण्य जो कुछ भी भरा पड़ा है वो फुट जाता है और ये अंश परमात्मा में समां जाता है और परमात्मा

जीवन मरण का साथी

भगवान बडे अंतर्यामी हैं और सदा संकट के घेरे में भक्तों का साथ देते हैं। यह प्रभु की महानता ही है कि हम मांगते-मांगते नहीं थकते और देते-देते नहीं थकता।
भगवान समय-समय पर जो बिन मांगे देते रहते हैं। उसका तो हमें भान भी नहीं रहता मगर जो हमें नहंी मिला हो अज्ञानता वश हम उसी का शिकवा भगवान से करते रहते हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान की कृपा से ही हमें मानव जीवन प्राप्त हुआ है और उसी ने हमारे लालन-पालन का बंदोबस्त भी किया है। मानव सदा ही जो भगवान ने उसे बिन मांगे दे दिया है। उसका भगवान को शुक्रिया अदा नहीं करता मगर जो उसे नहंी मिला। उसी को पाने के लिए भगवान के दर पर आता है। मानव कभी संतुष्ट नहीं होता। वह सदा ही मांगता रहता है। कभी यह चाहिए, कभी वह चाहिए, कभी ऐसा चाहिए, कभी वैसा चाहिए, अब चाहिए और तब चाहिए बस चाह ही चाह, यही मानव जीवन का सार है। मगर जो उसे जीवन पर्यन्त देता आता है जो सदा संकट की घडी में मानव का सहारा बनता है। उसका आभार मानव कभी नहीं जताता। उसकी पूजा ध्यान के लिए मानव कभी समय निकालने का प्रयास नहीं करता। फिर भी दयावान भगवान सदा उसकी सहायता व रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। हम सो भी जाते हैं मगर भगवान सदा जागते रहते हैं। हम बेखबर हो भी जाते हैं पर वे खबरदार बने रहते हैं। हम संकटों में फंस जाते हैं परन्तु भगवान अपने अदृश्य हाथों से हमें उबार लेते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि हम अपने चारों तरफ देखते हैं तो सर्व समर्थ, सर्व शक्तिमान, व्यापक, सर्वज्ञ, सर्व नियंता, अनादि, अनंत, सर्व दुखहारीऔर जो सबका होते हुए भी हमारा बिल्कुल अपना सा लगे। साथ ही अभय दान देने वाला हो और जीवन मरण का साथी हो। ऐसे तो केवल जगत में प्रभु ही हैं। उन्हीं में वे सारी तो क्या और भी अपरिमित व अनगिनत विशेषताएं हैं। सभी सांसारिक व्यक्तियों के देह प्रेम पर मुग्ध रहते हैं। मगर एक भगवान ही हैं जिनका निश्चय प्रेम हमारे लिए छलकता रहता है और बिना किसी भेदभाव के सभी को समान रूप से मिलता है।

माँ की ममता का कोई क्या क़र्ज़ चुकाएगा

माँ से बड़ा दुनिया में
कोई हो न पायेगा माँ की ममता का कोई क्या क़र्ज़ चुकाएगा


अनमोल रतन
हमको माँ दुनिया से प्यारी है
देवी के जैसे हमको माँ ये हमारी है

माँ के आँचल में हर कोई जन्नत पायेगा
माँ की ममता का कोई क्या क़र्ज़ चुकाएगा
हर कोई बेटा बेटी माँ के साथ रहे ...
माँ की बातों का
कभी शिकवा न करे

जुल्म करेगा माँ पे जो वो दोजग जायेगा
माँ की ममता का कोई क्या क़र्ज़ चुकाएगा
जाने कितने दुःख सहकर माँ हमको पालती
माँ की ही ममता हर दुःख को है टालती
माँ छोड के सागर कुछ न कर पायेगा
माँ की ममता का कोई क्या क़र्ज़ चुकाएगा

एक नियम ऐसा बनाये जो कभी न टूटे चाहे सुख मिले या दुःख.

         एक बार की बात है एक संत एक गांव मै प्रवचन कर रहे थे ,तब एक बनिया भी उनके प्रवचन सुनने वह आया .और शांत भाव से प्रवचन सुनने लगा जब प्रवचन समाप्त हुआ तब वह संत के पास गया और हाथ जोड़ कर कहने लगा गुरूजी मुझे आप की बातो ने बहुत ही प्रभावित किया है मै चाहता हूँ आप मुझे कुछ ज्ञान का उपदेश करे .तब संत कहने लगे कि आजकल हर इंसान ज्यादा व्यस्त हो गया है उसके पास नियम धयान का समय नहीं है पर मै समझता हूँ तुम्हे एक नियम जीवन मै जरूर
करना चाहिये.तब बनिया कहने लगा आप मुझे आज्ञा करो .तब संत कहने लगे तुम आज से ये नियम लो कि तुम कभी झुट नहीं बोलोगे .तब बनिया कहने लगा गुरूजी मुझे नियम लेने मै
कोई आपत्ति नहीं है पर यदि मै ये नियम लेता हू तो मेरा व्यापार ही चौपट हो जायेगा क्युकि एक तो मै बनिया और दूसरा व्यापारी और व्यापार मै झूठ सच लगा ही रहता है वर्ना धंधा ही चोपट हो जायेगा और मेरा परिवार का पोषण कैसे होगा तो संत कहने लगे तो ऐसा करो ये नियम लो कि बिना भगवान के दर्शन किये तुम कुछ काम नहीं करोगे ,तब बनिया कहने लगा यदि ये नियम लेता हू तो हो सकता है ये भी पूरा न हो क्युकि मै
व्यापारी हू मुझे व्यापार के लिये देश परदेश की यात्रा करनी पड़ती है तो एक मंदिर दर्शन का नियम भी नहीं बना सकता हा ये हो सकता है मेरे घर के सामने एक कुम्हार रहता है मै उसे देखे बिना अपने दिन की शुरुआत नहीं करूँगा .तब संत ने कहा ठीक है पर नियम निष्ठा से करना .तब वह बनिया अपने घर आ गया.और सावधानी से रोज नियम का पालन करने लगा.वो रोज कुम्हार के घर जाता उसे देखता तब ही काम पर जाता.एक दिन
बनिया कुम्हार के घर गया वो उसे नहीं मिला.अब व्यापारी बड़ा परेशान होने लगा तब उसने उसके घर मै पूछा किवो कहा है तब उसकी पत्नी कहने लगी वो तो मिट्टी लेने सुबह तडके ही निकल गये तब व्यापारी ने सोचा यदि इन्तजार करूँगा तो व्यापार करने मै देरी हो जायेगी  इससे तो मै वही जाकर उसे देख आऊ
और वो बनिया वहाँ पहुच गया जहा वो कुम्हार मिट्टी लेने गया था .उस दिन कुम्हार का भाग्य अच्छा था मिट्टी खोदते समय उसे सोने से भरा एक कलश मिला वो उसे निकाल रहा था
तबही बनिया वहाँ पहुच गया वो कुम्हार को देखकर कहने लगा 
चलो मैंने देख ही लिया और ये कहकर वो वहाँ से चला गया ,वास्तव मै उसने वो कलश नहीं देखा था पर कुम्हार ने ये सुना चलो मैंने देख लिया ये सुन लिया था अब उसे ये भय सताने लगा इस बनिया ने मुझे देख लिया है तो हो सकता है
ये राजा को मेरी चुगलीकर दे और भाग्य वश मुझे मिला सारा धन राजकोष मै चला जायेगा और राजा मुझे न बताने के कारण दंड भी दे.इस डर से वो घर मै आकर सोचने लगा की क्या
किया जाये जो ये धन मेरे पास ही रहे तब उसने आधा धन बनिया को देने का निर्णय लिया और बनिया को आधा धन देकर राजा से न कहने का वादा लिया बनिया मान गया ,अब वो वहा से संत के पास गया और सारी बात कह सुनायी और सारा धन संत को दे दिया और कहा की आप ने मुझे जो ज्ञान दिया मेरे लिये अब वो ही अनमोल है और अब मै अपना सारा जीवन प्रभु भक्ति मै ही लगाऊंगा....
इसका सार ये है की हम जीवन मै बहुत चाहे कितना भी
व्यस्त रहे मगर जीवन मै एक नियम ऐसा बनाये जो कभी न टूटे चाहे सुख मिले या दुःख. प्रभु की कभी न कभी कृपा हम पर भी बरसेगी वो नियम यदि प्रभु दर्शन का हो तो जीवन
ही सँवर जाये


सोमवार, 28 मार्च 2011

Mistakes and Mistakes


Mistakes and Mistakes



If a barber makes a mistake,
It's a
If a driver makes a mistake,
It is a New Path
If an engineer makes a mistake,
It is a
If parents makes a mistake,
It is a
If a politician makes a mistake,
It is a
If a scientist makes a mistake,
It is a
If a tailor makes a mistake,
It is a
If a teacher makes a mistake,
It is a
If our boss makes a mistake,
It is a New idea
If an employee makes a mistake,
…..
……

….

……
….





It is a Mistake Only

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