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रविवार, 31 जुलाई 2011

मानव जाति का इतिहास


हमने पढ़ा है
कि राजा मनु को ही हजरत नूह माना जाता हैं। नूह ही यहूदी,ईसाई और इस्लाम के पैगंबर हैं। इस पर शोध भी हुए हैं। जल प्रलय की ऐतिहासिक घटना संसार की सभी सभ्यताओं में पाई जाती है। बदलती भाषा और लम्बे कालखंड के चलते इस घटना में कोईखास रद्दोबदल नहीं हुआ है। मनु की यह कहानी यहूदी, ईसाई और इस्लाम में ‘हजरत नूह की नौका’ नाम से वर्णित की जाती है। इंडोनेशिया, जावा, मलेशिया, श्रीलंका आदि द्वीपों के लोगों ने अपनी लोक परम्पराओं में गीतों के माध्यम से इस घटना को आज भी जीवंत बनाए रखा है। इसी तरह धर्मग्रंथों से अलग भी इस घटना को हमें सभी देशों की लोक परम्पराओं के माध्यम से जानने को मिलता है। नूह की कहानी : उस वक्त नूह की उम्र छह सौ वर्ष थी जब यहोवा (ईश्वर) ने उनसे कहा कि तू एक-जोड़ी सभी तरह के प्राणी समेत अपने सारे घराने को लेकर कश्ती पर सवार हो जा, क्योंकि मैं पृथ्वी पर जल प्रलय लाने वाला हूँ। सात दिन के उपरान्त प्रलय का जल पृथ्वी पर आने लगा। धीरे-धीरे जल पृथ्वी पर अत्यन्त
बढ़ गया। यहाँ तक कि सारी धरती पर जितने बड़े- बड़े पहाड़ थे, सब डूब गए। डूब गए वे सभी जो कश्ती से बाहर रह गए थे, इसलिए वे सब पृथ्वी पर से मिट गए। केवल हजरत नूह और जितने उनके साथ जहाज में थे, वे ही बच गए। जल ने पृथ्वी पर एक सौ पचास दिन तक पहाड़
को डुबोए रखा। फिर धीरे-धीरे जल उतरा तब पुन: धरती प्रकट हुई और कश्ती में जो बच गए थे उन्ही से दुनिया पुन: आबाद हो गई।

मनु की कहानी : द्रविड़ देश के राजर्षि सत्यव्रत (वैवस्वत मनु) के समक्ष भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप में प्रकट होकर कहा कि आज से सातवें दिन भूमि जल प्रलय के समुद्र में डूब जाएगी। तब तक एक नौका बनवा लो। समस्त प्राणियों के सूक्ष्म शरीर तथा सब प्रकार के बीज लेकर सप्तर्षियों के साथ उस नौका पर चढ़ जाना। प्रचंड आँधी के कारण जब नाव डगमगाने लगेगी तब मैं मत्स्य रूप में बचाऊँगा। तुम लोग नाव को मेरे सींग से बाँध देना। तब प्रलय के अंत तक मैं तुम्हारी नाव खींचता रहूँगा। उस समय भगवान मत्स्य ने नौका को हिमालय की चोटी ‘नौकाबंध’ से बाँध दिया। भगवान ने प्रलय समाप्त होने पर वेद का ज्ञान वापस दिया। राजा सत्यव्रत ज्ञान- विज्ञान से युक्त हो वैवस्वत मनु
कहलाए। उक्त नौका में जो बच गए थे उन्हीं से संसार में जीवन चला। विचारणीय है कि कितने लोग होंगे जो मनु और नूह को एक ही शख्स मानते होंगे या धार्मिक कट्टरता के चलते नहीं भी मानते होंगे। फिर भी यहाँ इतना तो कह ही सकते हैं कि तौरात, इंजिल, बाइबिल और कुरआन से पूर्व ही मत्स्य पुराण लिखा गया था, जिसमें उक्त कथा का उल्लेख मिलता है। यहाँ यह सिद्ध करने का प्रयास नहीं है कि अन्य धर्म ग्रंथों में पुराण से ही ली गई कथा है, जिसे अपने तरीके से गढ़ा। तथ्य यह है कि उक्त घटना का स्थान, समय और परम्परा के मान से अलग-
अलग प्रभाव पड़ा और लोगों ने इसे दर्ज किया। यह मानव जाति का इतिहास है न कि किसी धर्म विशेष का।

सोमवार, 25 जुलाई 2011

एक बात जो रोने को मजबूर कर दे !

एक बात जो रोने को मजबूर कर दे ! 

स्रष्टि के निर्माण के समय श्री ब्रम्हा ने  सोचा ki में जिव को प्रथ्वी पर
केसे भेजू इन्हें तो हर पल प्रभु का साथ चाहिये प्रभु बिन तो ये रह नहीं
सकता तब श्रीक्रष्ण प्रभु ने स्वयं उन्हें माँ रूपी उपाय बताया क्योकि माँ
ही सर्वोपरि है जिसने माँ बाप को दुःख दिया वो कभी सुखी नहीं रह पाया !

सुबह से शाम सख्त और कड़ी मेहनत के बाद जब घर आया तो 

बाप ने पूछा क्या कमाया 

बीवी ने पूछा क्या बचाया 

ओलाद ने पूछा क्या लाया 

सिर्फ माँ  ने पूछा बेटा तुने क्या खाया ...............

श्री भागवत कथा कहती हे सारी समस्याओ से मुक्ति हेतु आज भी प्रात: उठकर
माता पिता के चरण स्पर्श करो आपको खुद ही महसूस हो जायेगा ,,,,,,,, क़ि माँ
क्या है ! 

 और आज भी कई लोग 

१) माँ बाप क़ि सेवा तो दूर आदर भी नहीं करते 
२) उन्हें सम्मान तो दूर प्यार भी नहीं दे सकते 

३) रखना तो दूर अनाथ आश्रम में भेज देते हे ..

४) इंदौर में जैन परिवार के एक बेटे ने पेसो के लिए माँ बाप को मार डाला ..

मत दो मान, सम्मान , इज्जत ,रुपये , पैसा , बंगले , मोटर गाड़ी , ५६ भोग , मत घुमाओ तीरथ , 

सिर्फ दे दो प्यार के दो बोल...

१) माँ तू केसी हे 

२) माँ तो भोजन कर ले

पहले पढाया जाता था

पहले  पढाया  जाता  था "ग" से "गणेश" , जिस शब्द  से बच्चा बुद्धि ,धर्म, भगवान गणेश,पितृ सेवा और संस्कृति सीखता था पर हमारी सरकार को पसंद नहीं आया ! सरकार कहने लगी इससे साम्प्रदायीक्ता फैलती है, इसलिए अब पढ़iना प्रारम्भ किया गया "ग" से "गधा"   !

परम तत्व को भूल बच्चा  क्या सीखेगा ?सिर्फ नाशवान भौतिक सुख के लिए कर्म करना और उनके पीछे भागना ! अधर्मयता !
Jannat Paana 
..........................................................................................
अधर्म कि घिरी घटा कुचक्र है पनप रहे 
पुण्य धर्म भूमि पर अधर्म कर्म बढ़ रहे 
व्यथा विशाल राष्ट्र कि    
आज हम समझ सके, विशुद्ध राष्ट्र भाव से ,  
ये देश महक उठे   

सोमवार, 18 जुलाई 2011

बचपन के दुःख कितने अच्छे हुआ करते थे

बचपन के दुःख कितने अच्छे हुआ करते थे
तब दिल नही खिलोने टुटा करते थे
आज एक आंसू गिरे तो सहा नही जाता
बचपन में तो जी भर कर रोया करते थे  :'

शनिवार, 25 जून 2011

280 लाख करोड़ का सवाल है ...

“दर्द होता रहा छटपटाते रहे, आईने॒ से सदा चोट खाते रहे, वो वतन बेचकर मुस्कुराते रहे
हम
वतन के लिए॒सिर कटाते रहे”
Anna_Hazare-300x235.jpg

280
लाख करोड़ का सवाल है ...
भारतीय
गरीब है लेकिन भारत देश कभी गरीब नहीं रहा"* ये कहना है स्विस बैंक के
डाइरेक्टर
का. स्विस बैंक के डाइरेक्टर ने यह
भी
कहा है कि भारत का लगभग 280
लाख
करोड़
रुपये
उनके स्विस
बैंक
में जमा है. ये रकम
इतनी
है कि भारत का आने वाले 30 सालों का बजट
बिना
टैक्स के
बनाया
जा सकता
है
.
या
यूँ कहें कि 60 करोड़
रोजगार
के अवसर
दिए
जा सकते है. या यूँ भी कह सकते है
कि
भारत के किसी भी गाँव से दिल्ली तक 4
लेन
रोड बनाया
जा
सकता है. ऐसा भी कह
सकते
है कि 500 से ज्यादा सामाजिक प्रोजेक्ट पूर्ण किये जा सकते है. ये
रकम
इतनी
ज्यादा है कि अगर हर भारतीय को 2000 रुपये हर महीने भी दिए जाये तो 60
साल
तक ख़त्म ना हो. यानी भारत को किसी वर्ल्ड बैंक से लोन लेने कि कोई जरुरत
नहीं
है. जरा सोचिये ... हमारे भ्रष्ट राजनेताओं
और
नोकरशाहों ने
कैसे
देश को

लूटा
है और ये लूट का सिलसिला अभी तक 2011 तक जारी है.
इस
सिलसिले को
अब
रोकना

बहुत
ज्यादा जरूरी हो गया है. अंग्रेजो ने हमारे भारत पर करीब 200 सालो तक राज
करके
करीब 1 लाख
करोड़
रुपये लूटा. मगर आजादी के केवल 64 सालों में हमारे भ्रस्टाचार ने 280
लाख
करोड़ लूटा है. एक तरफ 200 साल में 1 लाख करोड़ है और दूसरी तरफ केवल 64
सालों
में 280 लाख करोड़ है. यानि हर साल लगभग 4.37 लाख करोड़, या हर महीने
करीब
36 हजार करोड़ भारतीय मुद्रा स्विस बैंक में इन भ्रष्ट
लोगों
द्वारा जमा
करवाई
गई है. भारत को किसी वर्ल्ड बैंक के लोन की कोई दरकार नहीं है. सोचो की
कितना
पैसा हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और उच्च अधिकारीयों ने ब्लाक करके
रखा
हुआ
है
. हमे भ्रस्ट राजनेताओं और भ्रष्ट अधिकारीयों के खिलाफ जाने का पूर्ण अधिकार
है
.हाल ही में हुवे घोटालों का
आप
सभी को पता ही है - CWG घोटाला, जी
स्पेक्ट्रुम
घोटाला , आदर्श होउसिंग घोटाला ... और ना जाने कौन कौन
से
घोटाले
अभी
उजागर होने वाले है ........आप लोग जोक्स फॉरवर्ड करते ही हो. इसे भी इतना
फॉरवर्ड
करो की पूरा भारत
इसे
पढ़े ... और एक आन्दोलन बन जाये

जब Government इतनी जल्दी बाबा रामदेव की property की जांच करवा सकती है तो इतने घोटाले की जांच में क्यों इतनी देर लगती है ???????????? 

 
Why Government not doing any property investigation of any Ministers??????????????

Just think these type of points & join in fight against the corruption...................

गुरुवार, 16 जून 2011

अगर किसी से कोई सम्बन्ध रखना है तो सबसे अच्छा सम्बन्ध है की आप कृष्ण से सम्बन्ध रखो क्योंकि इस संसार मैं सभी नष्ट हो जायेगा जो भी हमारे सम्बन्ध है वो केवल शरीर के साथ रहने तक हमारे साथ रहेंगे और इस शरीर के नष्ट हो जाने पर कुछ भी नही रहेगा पर जो हमारा सम्बन्ध श्रीकृष्ण से होगा वो कभी नष्ट नही होगा ! तो हमारे लिए बेहतर यही होगा की हम सारे सम्बन्धो को
एक तरफ रखकर श्रीकृष्ण से अपना सम्बन्ध बनाये चाहे वो सखा , प्रेम वात्सल्य ,पिता ,माता किसी भी रूप मैं हो ! तो हमारे इस सम्बंम्ध से हमारा जन्म सुधर जायेगा !क्यूंकि हम जिस कम के लिए यहाँ आये है वो हमको पहचानना है की हम अपने श्रीकृष्ण को कैसे प्राप्त करे !
भक्त तथा कृष्ण के बीच मैं पॉँच तरह का सम्बन्ध हो सकता है
१ कोई निष्क्रिय अवस्था से भक्त हो सकता है 


२ कोई सक्रिय अवस्था से भक्त हो सकता है
३ कोई सखा रूप से भक्त हो सकता है
४ कोई माता या पिता के रूप में भक्त हो सकता है
५ कोई दंपत्ति-प्रेमी के रूप मैं भक्त हो सकता है
हरे कृष्ण 
मुझे जितना दिया सरकर ने ,उतनी तो मेरी औकात न थी !!
ये तो करम है मेरे कन्हैया का, वरना मुझमे तो ऐसी कोई बात नहीं !!




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मंगलवार, 14 जून 2011




क्या कुछ भारतीय मिडिया कांग्रेस & बड़े उद्योगपतियों के हाथो कि कटपुतली है ?
क्या कांग्रेश ने कुछ भारतीय मिडिया को भी काले धन के दम पर खरीद रखा है ?
क्या मिडिया वास्तव में स्वतंत & निष्पक्ष है ? कांग्रेस से आतंकित तो नहीं है ?
कुछ मिडिया लगता है कि सरकार और बडे नेताओ के हातो कि कटपुतली है तथा क्या अन्य मिडिया उनके पीछे पीछे नकल करने लगते है ?
मिडिया से जनता सवाल नहीं पूछ सकती क्या एसा कोई कानून है ? क्या मिडिया कि comment & बातो से पक्छ पात का अहसास होता है ?
आज ७/६/११ श्याम को इंडिया लाइव ने बाबा के औरतो कि आड़ में उनके खंधो पर सर रख उनकी सुरक्छा में निकलने कि विडिओ बताई पर एक बार वो भी पहले हमने पाई पहले हमने पाई कहते हुए ! प्रश्न बनता है कि यदि इतनी अहम विडियो पहले आपने जुटी तो एक बार बता के चेनल से हटा क्यों ली
मिडिय कांग्रेश से मुद्दे कि बात क्यों नहीं उठता ? या अगर उठाये तो भी थोड़ी देर चलते क्यों है ?
मीडिया कालेधन/भ्रस्ताचार/मुख्यत घोटालो कि बात क्यों नहीं उठता ?
क्या मिडिया भ्रस्टाचार & काले धन को मिटाना नहीं चाहता ?क्या देश से प्रेम नहीं ?भारत के मिडिया को भी कुछ अधिकार है और कुछ दायित्व है !

An Indian
अगर प्रश्न अच्हे लगे तो अग्रेषित जरूर करे वरना देश के लिए तो जरू करे !
Please, forward it for own country & DeshDharma ................Jai Hind ...


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क्या प्रत्येक बड़े कांग्रेसी नेता के विदेशी खाते में 1500 करोड़ रु. या ज्यादा होंगे ?

क्या प्रत्येक बड़े कांग्रेसी  नेता के विदेशी खाते  में 1500 करोड़ रु. या ज्यादा  होंगे ?
बाबा राम देव के ट्रस्ट कि कुल सम्पति 1177 करोड़ रु. पाई गई माने यदि
1300 करोड़ होगी पर सही साफ है ! ट्रस्ट कि सम्पति को  मिडिया ने बाबा कि
सम्पति बता कर बड़ा भ्रम व् आश्चर्य  किया पर यहा एक प्रशन है :-  क्या प्रत्येक बड़े संसदीय नेता के विदेशी खाते  में 1500 करोड़ रु. नहीं होंगे ?


सरकार से कोई 400 लाख करोड़ रु. के बारे में क्यों नहीं पूछता जो उसने
विदेशी खातो में भर रखा है ? सरकार अपने विरोधी के सफ़ेद धन को कला साबित
करने में तुली है पर जो उन्होंने कला धन विदेशो में भर रखा है उससे मिडिया
का ध्यान कैसे हटा दिया गया ?


बाबा ने जो धन लिया उसे प्रतिफल बदले जनता से साफ कहकर  लिया तथा जनता ने
अपनी इच्छा से उन्हें दिया ! मंत्रियो ने पर्सनल जो लिया और दिया उसके बारे
में कोई न तो काली राय न सफ़ेद राय, क्यों ?
क्या ये धन देश कि जनता का
नहीं है जो विदेशो में कला धन बन सड रहा है ?
इससे देश कि कितनी समस्याए हल
हो सकती है ?
जब कलमाड़ी 3 -4000 करोड़ का घोटाला कर सकता है तो हमारे कांग्रेश के बड़े नेता क्या ईस से पीछे होंगे ?
राहुल जी और सोनिया जी ८जुन २०११ व् ११ जून २०११ को चुपके से इटली & स्विजरलैंड क्यों गये ?
Bhartiya midiya sahi / satya khabar meen sabse piche  piche..............





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हर घोटाले में पार्टी हाई कमान को कितना परसेंट हिस्सा मिलता है ?

हर घोटाले में पार्टी हाई कमान को कितना परसेंट हिस्सा मिलता है ? 


मुख्य सोनिया & मनमोहन है तो हर घोटाले में इनका हिस्सा पक्का होगा तो सिर्फ एक मुख्य मंत्री का ही इस्तीफा क्यों लिया जाता है ?  मंत्री अकेला ही घोटाला करता है, क्या  उससे बड़े नेताओ को पता नहीं रहता है ? 

माना एक घोटाला हुवा तो उसमे  एक को हटा दिया पर पार्टी  के राज में इतने एक के बाद एक घोटाले तो कही अध्यक्ष सोनिया/राहुल/मनमोहन में ही कमी होगी तो कांग्रेश अपनी पार्टी से सोनिया/राहुल/मनमोहन  गांदी का स्तीफा क्यों नहीं लेती & सजा क्यों नहीं दिलाती ? & प्रधान मंत्री अपने मंत्रियो के साथ स्तीफा क्यों नहीं देते ? बाबा के पीछे क्यों पड़े है ? 

कला धन तो सरकार ने बनाया है ! बाबा ने किसी को ठगा नहीं , योग सिखा कर साफ कह के धन लिया है ! बाबा का तो सारा धन सामने है जो सफ़ेद है ,  माना यदि बाबा का धन  कला है तो भ्रस्टा चार लोकपाल बिल में वो भी क्या नहीं आजायेंगे ?

सरकार सही कानून क्यों नहीं बनाती  जिसके दायरे  में सभी मंत्री व् प्रधान मंत्री अवस्य हो ? 
छोटे लोग तो अपनी मज़बूरी पर करते होंगे पर ये ये बड़े मंत्री & नेता तो अपने ना पाक कायर्यो के लिए भ्रस्ताचार करते है ? अन्ना का समर्थन सरकार क्यों नहीं करती ? 

क्या  सोनिया के पास कांग्रेस का रिमोट है ? अत रिमोट चलाने वाले को क्या सब घोटालो कि पहले ही खबर रहती होगी  ? सरकार के सभी घोटालो  के लिए रिमोट के  टन किसने दाबाए ? 

An Indian
अगर प्रश्न अच्हे लगे तो अग्रेषित जरूर करे वरना   देश के लिए तो जरू करे !  
Please, forward it for own country & DeshDharma ................Jai Hind ....


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