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बुधवार, 12 सितंबर 2018

आज का पंचांग 12 September 2018

.               *।। 🕉  ।।*
    🚩🌞 *सुप्रभातम्* 🌞🚩
📜««« *आज का पंचांग* »»»📜
कलियुगाब्द........................5120
विक्रम संवत्.......................2075
शक संवत्..........................1940
मास................................भाद्रपद
पक्ष....................................शुक्ल
तिथी.................................तृतीया
दोप 04.13 पर्यंत पश्चात चतुर्थी
रवि..............................दक्षिणायन
सूर्योदय...................06.12.35 पर
सूर्यास्त....................06.33.19 पर
सूर्य राशि...............................सिंह
चन्द्र राशि.............................कन्या
नक्षत्र...................................चित्रा
रात्रि 01.05 पर्यंत पश्चात स्वाति
योग.....................................ब्रह्मा
रात्रि 02.19 पर्यंत पश्चात इंद्र
करण...................................गरज
दोप 04.13 पर्यंत पश्चात वणिज
ऋतु......................................वर्षा
दिन..................................बुधवार

🇬🇧 *आंग्ल मतानुसार* :-
12 सितम्बर सन 2018 ईस्वी ।

👁‍🗨 *राहुकाल* :-
दोपहर 12.22 से 01.54 तक ।

🚦 *दिशाशूल* :-
उत्तरदिशा - यदि आवश्यक हो तो तिल का सेवन कर यात्रा प्रारंभ करें ।

☸ शुभ अंक...............3
🔯 शुभ रंग...............हरा

🌞 *चौघडिया :-*
प्रात: 06.15 से 07.47 तक लाभ ।
प्रात: 07.47 से 09.18 तक अमृत ।
प्रात: 10.50 से 12.22 तक शुभ ।
दोप. 03.25 से 04.57 तक चंचल ।
सायं 04.57 से 06.29 तक लाभ ।
रात्रि 07.57 से 09.25 तक शुभ ।

📿 *आज का मंत्र* :-
।।ॐ वक्रतुण्डाय नम: ।।

🎙 *सुभाषितम्* :-
बालस्तावत् क्रीडासक्तः,
तरुणस्तावत् तरुणीसक्तः।
वृद्धस्तावच्चिन्तासक्तः,
परे ब्रह्मणि कोऽपि न सक्तः॥७॥
अर्थात :-
बचपन में खेल में रूचि होती है , युवावस्था में युवा स्त्री के प्रति आकर्षण होता है, वृद्धावस्था में चिंताओं से घिरे रहते हैं पर प्रभु से कोई प्रेम नहीं करता है॥७॥

🍃 *आरोग्यं* :-
*खुशी के लिए सात योग  -*

*1. मुक्तासन -*
यह आसन विशेष रूप से तनाव को ध्यान में रखकर और राहत देने के लिए योग विशेषज्ञ द्वारा सिफारिश की जाती है। यह मुद्रा खुशी को बढ़ावा देने, अवसाद की भावनाओं को कम करने में सहायता करता है। मानसिक लाभ के अलावा यह बाह और कलाई, पैरों, नितंबों, पेट और रीढ़ की हड्डी के चारों ओर मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करता है। यह अस्थमा, पीठ दर्द, बांझपन, और ऑस्टियोपोरोसिस को कम करने में मदद करने के लिए भी जाना जाता है।

⚜ *आज का राशिफल :-*

🐏 *राशि फलादेश मेष* :-
बेरोजगारी दूर होगी। संपत्ति के कार्य बड़ा लाभ दे सकते हैं। परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे।

🐂 *राशि फलादेश वृष* :-
किसी पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने का मौका मिलेाग। स्वादिष्ट भोजन का आनंद मिलेगा। यात्रा, निवेश व नौकरी मनोनुकूल लाभ देंगे। प्रसन्नता में वृद्धि होगी। प्रमाद न करें। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। बेचैनी रहेगी।

👫 *राशि फलादेश मिथुन* :-
दौड़धूप अधिक होगी। शोक समाचार मिल सकता है। बेमतलब झुंझलाहट रहेगी। विवाद को बढ़ावा न दें। पुराना रोग उभर सकता है। जल्दबाजी में फैसला न लें। बुरी खबर मिल सकती है। उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। जल्दबाजी से बचें।

🦀 *राशि फलादेश कर्क* :-
घर-बाहर पूछ-परख बढ़ेगी। प्रयास सफल रहेंगे। आय में वृद्धि होगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। काम के प्रति समर्पण बढ़ेगा। निवेश मनोनुकूल लाभ देगा। स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। मेहनत सफल रहेगी। प्रमाद न करें।

🦁 *राशि फलादेश सिंह* :-
पुराने मित्र व संबंधियों से मुलाकात होगी। मेहमानों का आगमन होगा। शुभ सूचना प्राप्त होगी। मान बढ़ेगा। प्रसन्नता रहेगी। विवाद में न पड़ें। व्यवसाय ठीक चलेगा। भूले-बिसरे साथियों से मुलाकात होगी। मान बढ़ेगा।

👱🏻‍♀ *राशि फलादेश कन्या* :-
अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। जोखिम न उठाएं। कोई बड़ा काम होने से प्रसन्नता रहेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। प्रमाद न करें। निवेश शुभ रहेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। उत्साहवर्धक सूचना मिलेगी।

⚖ *राशि फलादेश तुला* :-
फालतू खर्च होगा। कुसंगति से बचें। वाणी पर संयम आवश्यक है। जोखिम न उठाएं। लेन-देन में सावधानी रखें। आय-व्यय बराबर रहेंगे। चिंता व तनाव रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। रोजगार मिलेगा। धन प्राप्ति सुगम होगी।

🦂 *राशि फलादेश वृश्चिक* :-
लेनदारी वसूल होगी। यात्रा, निवेश व नौकरी मनोनुकूल लाभ देंगे। रुके कामों में गति आएगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। प्रसन्नता बढ़ेगी। भेंट व उपहार की प्राप्ति होगी।

🏹 *राशि फलादेश धनु* :-
योजना फलीभूत होगी। रोजगार में वृद्धि होगी। वाणी पर नियंत्रण रखें। जल्दबाजी में कोई फैसला न लें। चिंता तथा तनाव रहेंगे। मान-सम्मान मिलेगा। लाभ होगा। परीक्षा व साक्षात्कार में सफलता मिलेगी। अप्रत्याशित लाभ संभव है।

🐊 *राशि फलादेश मकर* :-
तंत्र-मंत्र में रुचि रहेगी। कानूनी अड़चन दूर होगी। आय में निश्चितता रहेगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। काम में बाधा उत्पन्न हो सकती है। जल्दबाजी न करें। जोखिम न लें। अपरिचितों पर अतिविश्वास न करें, बाकी सामान्य रहेगा।

🏺 *राशि फलादेश कुंभ* :-
अपरिचित व्यक्ति पर अतिविश्वास न करें। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। क्रोध पर नियंत्रण रखें। कानूनी बाधा उत्पन्न हो सकती है। आय बनी रहेगी। आगंतुकों पर व्यय होगा। लेन-देन में सावधानी रखें।

🐋 *राशि फलादेश मीन* :-
राजकीय सहयोग प्राप्त होगा। रोजगार में वृद्धि होगी। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। प्रतिद्वंद्वी शांत रहेंगे। यात्रा, निवेश, नौकरी मनोनुकूल लाभ देंगे। व्यावसायिक यात्रा लाभदायक रहेगी। यात्रा सफल रहेगी। बकाया वसूली होगी।

☯ आज का दिन सभी के लिए मंगलमय हो ।

।। 🐚 *शुभम भवतु* 🐚 ।।

🇮🇳🇮🇳 *भारत माता की जय* 🚩🚩

शुक्रवार, 7 सितंबर 2018

बछ बारस की कहानी

💐💐बछ बारस की कहानी  💐💐
Bachh Baras Ki Kahani

बछ बारस की कहानी  ( 1 )

एक बार एक गांव में भीषण अकाल पड़ा। वहां के साहूकार ने गांव में एक बड़ा तालाब बनवाया परन्तु उसमे पानी नहीं आया। साहूकार ने पंडितों से उपाय पूछा।

पंडितो ने बताया की तुम्हारे दोनों पोतो में से एक की बलि दे दो तो पानी आ सकता है। साहूकार ने सोचा किसी भी प्रकार से गांव का भला होना चाहिए।

साहूकार ने बहाने से बहु को एक पोते हंसराज के साथ पीहर भेज दिया और एक पोते को अपने पास रख लिया जिसका नाम बच्छराज था । बच्छराज की बलि दे दी गई । तालाब में पानी भी आ गया।

साहूकार ने तालाब पर बड़े यज्ञ का आयोजन किया। लेकिन झिझक के कारण बहू को बुलावा नहीं भेज पाये। बहु के भाई ने कहा ” तेरे यहाँ इतना बड़ा उत्सव है तुझे क्यों नहीं बुलाया ? मुझे बुलाया है , मैं जा रहा हूँ।


बहू बोली ” बहुत से काम होते है इसलिए भूल गए होंगें ,  अपने घर जाने में कैसी शर्म ” मैं भी चलती हूँ।

घर पहुंची तो सास ससुर डरने लगे कि बहु को क्या जवाब देंगे। फिर भी सास बोली बहू चलो बछ बारस की पूजा करने तालाब पर चलें। दोनों ने जाकर पूजा की। सास बोली , बहु तालाब की किनार कसूम्बल से खंडित करो।

बहु बोली मेरे तो हंसराज और बच्छराज है , मैं खंडित क्यों करूँ। सास बोली ” जैसा मैं कहू वैसे करो “।  बहू ने सास की बात मानते हुए किनार खंडित की और कहा ” आओ मेरे हंसराज , बच्छराज लडडू उठाओ। ”

सास मन ही मन भगवान से प्रार्थना करने लगी –  हे बछ बारस माता मेरी लाज रखना।

भगवान की कृपा हुई। तालाब की मिट्टी में लिपटा बच्छराज व हंसराज दोनों दौड़े आये। बहू पूछने लगी “सासूजी ये सब क्या है ?” सास ने बहू को सारी बात बताई और कहा भगवान ने मेरा सत रखा है। आज भगवान की कृपा से सब कुशल मंगल है।  खोटी की खरी , अधूरी की पूरी

हे बछ बारस माता जैसे सास का सत रखा वैसे सबका रखना।

बछ बारस की कहानी  ( 2 )

एक सास बहु थी। सास को गाय चराने के लिए वन में जाना जाना था। उसने बहु से कहा “आज बज बारस है में वन जा रही हूँ तो तुम गेहू लाकर पका लेना और धान लाकर उछेड़ लेना। बहू काम में व्यस्त थी।

उसने ध्यान से सुना नहीं। उसे लगा सास ने कहा गेहूंला धानुला को पका लेना।  गेहूला और धानुला गाय के दो बछड़ों के नाम थे। बहू को कुछ गलत तो लग रहा था लेकिन उसने सास का कहा मानते हुए बछड़ों को काट कर पकने के लिए चढ़ा दिया ।


सास ने लौटने पर पर कहा आज बछ बारस है , बछड़ों को छोड़ो पहले गाय की पूजा कर लें। बहु डरने लगी , भगवान से प्रार्थना करने लगी बोली हे भगवान मेरी लाज रखना , भगवान को उसके भोलेपन पर दया आ गई।

हांड़ी में से जीवित बछड़ा बाहर निकल आया। सास के पूछने पर बहु ने सारी घटना सुना दी। और कहा भगवान ने मेरा सत रखा , बछड़े को फिर से जीवित कर दिया।

इसीलिए बछ बारस के दिन गेंहू नहीं खाये जाते और कटी हुई चीजें नहीं खाते है। गाय बछड़े की पूजा करते है।

हे बछ बारस माता जैसे बहु की लाज रखी वैसे सबकी रखना।🙏🏻🙏🏻

खोटी की खरी ,अधूरी की पूरी।

बुधवार, 5 सितंबर 2018

आज का पंचांग 5 september 2018

.           .   *।। 🕉  ।।*
    🚩🌞 *सुप्रभातम्* 🌞🚩
📜««« *आज का पंचांग* »»»📜
कलियुगाब्द........................5120
विक्रम संवत्.......................2075
शक संवत्..........................1940
मास................................भाद्रपद
पक्ष....................................कृष्ण
तिथी.................................दशमी
दोप 02.57 पर्यंत पश्चात एकादशी
रवि.............................दक्षिणायन
सूर्योदय..................06.10.29 पर
सूर्यास्त...................06.40.02 पर
सूर्य राशि..............................सिंह
चन्द्र राशि...........................मिथुन
नक्षत्र..................................आर्द्रा
संध्या 07.09 पर्यंत पश्चात पुनर्वसु
योग...................................सिद्धि
प्रातः 08.40 पर्यंत पश्चात वरिघ
करण..................................विष्टि
दोप 02.57 पर्यंत पश्चात बव
ऋतु.....................................वर्षा
दिन..................................बुधवार

🇬🇧 *आंग्ल मतानुसार* :-
05 सितम्बर सन 2018 ईस्वी ।

👁‍🗨 *राहुकाल* :-
दोपहर 12.25 से 01.58 तक ।

🚦 *दिशाशूल* :-
उत्तरदिशा - यदि आवश्यक हो तो तिल का सेवन कर यात्रा प्रारंभ करें ।

☸ शुभ अंक...............1
🔯 शुभ रंग...............हरा

💮 चौघडिया :-
प्रात: 06.13 से 07.46 तक लाभ ।
प्रात: 07.46 से 09.18 तक अमृत ।
प्रात: 10.51 से 12.24 तक शुभ ।
दोप. 03.30 से 05.03 तक चंचल ।
सायं 05.03 से 06.35 तक लाभ ।
रात्रि 08.03 से 09.30 तक शुभ ।

📿 *आज का मंत्र* :-
।।ॐ वक्रतुण्डाय नम: ।।

🎙 *सुभाषितम्* :-
यथा हि एकेन चक्रेण
न रथस्य गतिर्भवेत्।
एवं पुरूषकारेण विना
दैवं न सिध्यति॥
अर्थात :-
जिस प्रकार एक पहिये वाले रथ की गति संभव नहीं है, उसी प्रकार पुरुषार्थ के बिना केवल भाग्य से कार्य सिद्ध नहीं होते हैं।

🍃 *आरोग्यं* :-
*हृदय रोग के लिए प्राणायाम  -*

*3. कपालभाति प्राणायाम -*
कपालभाति प्राणायाम फेफड़ों, स्प्लीन, लीवर, पैनक्रियाज के साथ-साथ दिल के कार्य में सुधार करता है। यह न केवल कोलेस्ट्रॉल को कम करता है बल्कि धमनी के अवरोध को दूर करने में भी मददगार है। ध्यान के किसी आसन में बैठकर आंखें बंद कर लीजिए और पूरे शरीर को शिथिल या ढीला छोड़ दीजिए। अब नाक से तेजी से श्वास को बाहर निकालने की क्रिया करें। श्वास को बाहर निकालते वक्त पेट को भीतर की ओर खींचे। यह ध्यान दें कि सांस को छोड़ने के बाद, सांस को बाहर न रोककर बिना प्रयास किए सामान्य रूप से सांस को अन्दर आने दें। इससे एक सकेंड में एक बार सांस फेंकने की क्रिया कह सकते हैं। इसके बाद श्वास को अंदर लीजिए। ऐसा करते वक्त संतुलन बनाये रखें। वैसे दिल के मरीजों को कपालभाती प्राणायाम धीरे-धीरे करना चाहिए।

⚜ *आज का राशिफल :-*

🐏 *राशि फलादेश मेष* :-
मेहनत का फल मिलेगा। घर-बाहर पूछ-परख बढ़ेगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। शत्रु सक्रिय रहेंगे। परिवार की चिंता रहेगी। आय में वृद्धि होगी। नौकरी में तरक्की होगी। शुभ समाचार मिलेंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा।

🐂 *राशि फलादेश वृष* :-
पुराने मित्र व संबंधियों से मुलाकात होगी। उत्साहवर्धक सूचना प्राप्त होगी। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। चिंता रहेगी। व्यवसाय संतोषजनक रहेगा। प्रसन्नता बनी रहेगी। लाभ होगा। बेरोजगारी दूर होगी। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है।

👫 *राशि फलादेश मिथुन* :-
बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। नवीन वस्त्राभूषण की प्राप्ति होगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। झंझटों से दूर रहें। धन प्राप्ति सुगम होगी। प्रसन्नता रहेगी।

🦀 *राशि फलादेश कर्क* :-
अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। शारीरिक कष्ट संभव है। नोकझोंक हो सकती है। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। लेन-देन में सावधानी रखें। दूसरों पर विश्वास न करें। डूबी हुई रकम प्राप्त हो सकती है। आय में वृद्धि होगी।

🦁 *राशि फलादेश सिंह* :-
रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है। यात्रा से लाभ होगा। प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। विवाद को बढ़ावा न दें। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। प्रमाद न करें।

👱🏻‍♀ *राशि फलादेश कन्या* :-
नए उपक्रम के प्रारंभ करने का मन बनेगा। कार्यों में सुधार होगा। लाभ के अवसर बढ़ेंगे। कार्य की प्रशंसा होगी। जल्दबाजी में निर्णय न लें। आय में वृद्धि होगी। यात्रा, निवेश व नौकरी मनोनुकूल रहेंगे।

⚖ *राशि फलादेश तुला* :-
कानूनी अड़चन दूर होकर लाभ की स्थिति बनेगी। पूजा-पाठ में मन लगेगा। कार्यों में गति आएगी। धन प्राप्ति सुगम होगी। थकान महसूस होगी। वरिष्ठ जनों की सलाह मानें। तंत्र-मंत्र में रुचि रहेगी।

🦂 *राशि फलादेश वृश्चिक* :-
कुसंगति से हानि होगी। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी आवश्यक है। विवाद से बचें। पुराना रोग उभर सकता है। व्यवसाय ठीक चलेगा। जोखिम न उठाएं। कार्यस्थल पर परिवर्तन संभव है। यात्रा मनोरंजक रहेगी।

🏹 *राशि फलादेश धनु* :-
प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। प्रसन्नता रहेगी। बेचैनी रहेगी। काम पर ध्यान दें। राजकीय बाधा दूर होगी। धनार्जन सहज होगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। नए अनुबंध हो सकते हैं। प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। जोखिम न उठाएं।

🐊 *राशि फलादेश मकर* :-
संपत्ति की खरीद-फरोख्त लाभदायक रहेगी। वाणी पर नियंत्रण रखें। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। बेरोजगारी दूर होगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। प्रमाद न करें। कानूनी अड़चन दूर होगी। धन प्राप्ति सुगम होगी।

🏺 *राशि फलादेश कुंभ* :-
पार्टी व पि‍कनिक का आनंद मिलेगा। रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। धन प्राप्ति के अवसर हाथ आएंगे। प्रसन्नता रहेगी। प्रतिद्वंद्वी शांत रहेंगे। जल्दबाजी न करें। वाहन व मशीनरी आदि के प्रयोग में सावधानी रखें।

🐋 *राशि फलादेश मीन* :-
बुरी सूचना प्राप्त हो सकती है। चिंता तथा तनाव रहेंगे। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। पुराना रोग उभर सकता है। विवाद को बढ़ावा न दें। वस्तुएं संभालकर रखें।

☯ आज का दिन सभी के लिए मंगलमय हो ।

।। 🐚 *शुभम भवतु* 🐚 ।।

🇮🇳🇮🇳 *भारत माता की जय* 🚩🚩

रविवार, 2 सितंबर 2018

मुसलमान ईद की तरह मनाते हैं कृष्ण जन्माष्टमी

मुसलमान ईद की तरह मनाते हैं कृष्ण जन्माष्टमी, हिंदुओं के साथ मिलकर बदल रहे इतिहास

भगवान कृष्ण के जन्मदिन यानी जन्माष्टमी के मौके पर जयपुर शहर में तीन दिनों का उत्सव आयोजित किया जाता है। इस दौरान यहां कव्वाली, नृत्य और नाटकों का आयोजन होता है। लोगों का कहना है कि यहां इस त्योहार को हिंदू, मुस्लिम और सिख एक साथ मिलकर मनाते हैं। एक बुजुर्ग ने बताया कि इस दरगाह में पिछले कई सालों से जन्माष्टमी मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि देश में हिंदू मुस्लिम में भाईचारे को कायम रखा जा सके।
देश में आज भी कई ऐसी जगह हैं जहां कुछ लोग धर्म व कट्टरवाद से ऊंचा उठकर आपसी खुशी को अहमियत देते हैं। और अपनी ही पहल से हिंदू-मुस्लिम की एकता की मिसाल बने हुए हैं। जयपुर से 200 किलोमीटर दूर झुंझुनू जिले के चिड़ावा स्थित नरहड़ दरगाह, शरीफ हजरत हाजिब शकरबार दरगाह लोगों के लिए विभिन्न धर्मों की एकता का सबक सिखाती है। यहां मुस्लिम समुदाय के लोग दरगाह में जन्माष्टमी का त्योहार धूमधाम से मनाते हैं।

यहां आयोजित मेले में दूरदराज से लोग पहुंचते हैं और मेले का लुत्फ उठाते हैं। इस दौरान यहां पहुंचने वाले हिंदू श्रद्धालु मंदिर में पूजा करने के साथ-साथ दरगाह में फूल, चादर, मिठाई आदि चढ़ाकर अपनी-अपनी मुरादें मांगते हैं। वाकई देश के लिए मिसाल है ये दरगाह।शक्करबार शाह अजमेर के सूफी संत ख्वाजा मोइनुदीन चिश्ती के समकालीन थे तथा उन्हीं की तरह सिद्ध पुरुष थे। शक्करबार शाह ने ख्वाजा साहब के 57 साल बाद देह त्यागी थी। राजस्थान व हरियाणा में तो शक्करबार बाबा को लोक देवता के रूप में पूजा जाता है। शादी, विवाह, जन्म, मरण कोई भी कार्य हो बाबा को अवश्य याद किया जाता है। इस क्षेत्र के लोग गाय, भैंसों के बछड़ा पैदा होने पर उसके दूध से जमे दही का प्रसाद पहले दरगाह पर चढ़ाते हैं। इसके बाद ही पशु का दूध घर में इस्तेमाल होता है।

जन्माष्टमी की रात करें -अचूक उपाय

जन्माष्टमी की रात इनमें से करें कोई 1 अचूक उपाय, हो जाएंगे मालामाल

इस विशेष दिवस को भगवान विष्णु के आठवें अवतार माने जाने वाले श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यही कारण है कि इस पर्व को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के नाम से जाना जाता है।
इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2 सितंबर दिन रविवार को मनाई जाएगी। हिंदूओं में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व बहुत शुभ माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन किये जाने वाले उपाय बहुत फलदायी साबित होते हैं और व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कृष्ण जन्माष्टमी पर लक्ष्मी-कृष्ण से जुड़े हम आपको 5 ऐसे महत्वपूर्ण उपाय बताने जा रहे हैं जिन्हें करने पर आपका घर में धन धान्य से संपन्न हो जाएगा। लक्ष्मी-कृष्ण से जुड़े इन पांच उपायों में से आप कृष्ण जन्माष्टमी के दिन कोई भी उपाय कर सकते हैं।

जन्माष्टमी की रात इनमें से करें कोई 1 उपाय
शंख

कृष्ण जन्माष्टमी के दिन प्रभु श्रीकृष्ण के नंदलाल स्वरूप का अभिषेक एक शंख में दूध डालकर अच्छी तरह से करें। अभिषेक करने के बाद माता लक्ष्मी की पूजा करें। भगवान कृष्ण और मां लक्ष्मी की कृपा से आपकी आर्थिक स्थिति बेहतर हो जाएगी और आपको धन की कभी कमी नहीं होगी।

फल और अनाज
यदि आप वास्तव में कृष्ण जन्मोत्सव और उपवास को सफल बनाना चाहते हैं तो जन्माष्टमी के शुभ दिन गरीबों को फल और अनाज दान करें। आप चाहें तो किसी धार्मिक जगह जैसे मंदिर और मठ जाकर भी गरीब लोगों को अपने सामर्थ्य के अनुसार दान दे सकते हैं। संभव हो तो आप किसी ज्योतिष से पूछ लें कि आपको कितना दान करना चाहिए। इस दिन दान करना वास्तव में फलदायी होता है।


सिक्का
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण की पूजा करते समय पूजा स्थल पर कुछ सिक्के रखें और उसके बाद पूजा शुरू करें। जब पूजा खत्म हो जाए तो उस सिक्के को उठाकर अपने बटुए में रख लें और हमेशा रखे रहें। माना जाता है कि यह उपाय करने से लक्ष्मी जी की कृपा होती है।

धन कौड़ी
कृष्ण जन्माष्टमी पर पूजा शुरू करने से पहले 11 कौड़ियों को एक पीले वस्त्र में बांधकर पूजा स्थल पर मां लक्ष्मी की प्रतिमा के पास रखें और भगवान श्रीकृष्ण और मां लक्ष्मी का पूजन एक साथ करें। माना जाता है कि कौड़ियां मां लक्ष्मी को बहुत प्रिय हैं। पूजा समाप्त करने के बाद कौड़ियों को पीली पोटली को अपने धन के भंडार या तिजोरी में रख दें। मां की कृपा से आपके धन धान्य में वृद्धि हो जाएगी।

दीया
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की शाम तुलसी पूजन करें। तुलसी के पौधे को लाल चुनरी ओढ़ाकर दीपक जलाएं। इसके बाद तुलसी के पौधे के सामने ही बैठकर माला लेकर "ॐ वासुदेवाय नम:" का जाप दो बार पूरी माला फेरकर करें। आपकी आर्थिक परेशानी दूर हो जाएगी और घर में समृद्धि आएगी।

जन्माष्टमी पर बनाएं धनिया पंजीरी



जन्माष्टमी के दिन रात को कृष्ण जन्म के समय भगवान कृष्ण को धनिया पंजीरी का भोग लगाया जाता है और इसके बाद इस प्रसाद को सभी भक्तों में बांट दिया जाता है। आप भी जन्माष्टमी पर अपने घर में धनिया पंजीरी बनाकर कान्हा को भोग लगाएं, इसे आसानी से बनाया जा सकता है। चलिए आपको बताते हैं धनिया पंजीरी बनाने की विधि...

सामग्री :-
धनिया पावडर- 1 कप
पावडर शक्कर- 1/2 कप
मखाने- 1 कप
घी- 2 कप
घिसा नारियल- 1/4 कप
मेवे- 1/2 कप कटे हुए
हरी इलायची- 4
किशमिश- 2 चम्मच

विधि :-
एक कढ़ाई में घी गरम करें, इसमें सारे मेवे डाल कर हल्का भून लें। उसके बाद इसी कढ़ाई में घिसा नारियल भूनें और इसे बाहर निकालकर कढ़ाई में और घी डालें, इस घी में धनिया पावडर डाल कर महक आने तक भूनें।
जब धनिया अच्छी तरह भुन जाएं तो गैस बंद कर दें, इसके बाद धनिया पावडर में इलायची पावडर और भुने मेवे, मखाने, किशमिश और शक्कर मिलाएं, पंजीरी को अच्छी तरह से मिलाएं। भोग के लिए धनिया पंजीरी बनकर तैयार है।

कृ्ष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर प्रसाद के लिये धनिया की बर्फी

कृ्ष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर प्रसाद के लिये पारंपरिक रूप से
धनिये की पंजीरी (Dhania Panjiri)

और
धनिया की बर्फी बनाई जाती है. धनिया बर्फी पिसे हुए धनिया में नारियल पाउडर, मावा या फूले हुये रामदाना - राजगिरा मिला कर बनाई जाती है. आप इस जन्माष्टमी पर नारियल का पाग और मिगी का पाग तो बना ही रहे होंगे, प्रसाद के लिये धनिया बर्फी भी बना डालिये.

आवश्यक सामग्री - Ingredients for Dhania Barfi

धनियां पाउडर - 1 कप
नारियल चूरा - 1 कप
चीनी - 1 कप
खरबूजे के बीज - 1/4 कप
छोटी इलाइची - 4
देशी घी - 2 टेबल स्पून

विधि:
पैन में घी डालकर गरम कीजिये, धनियां पाउडर डालिये और मीडियम फ्लेम पर 3-4 मिनिट, खुशबू आने तक भून लीजिये. भुना हुआ धनियां पाउडर प्याली में निकाल कर रख लीजिये.

पैन में नारियल चूरा डालकर 1 मिनिट चलाते हुये भून लीजिये. भुना नारियल पाउडर प्याली में निकालिये.
अब खरबूजे के बीज पैन में डालिये और लगातार चलाते हुये बीज फूलने तक भून लीजिये (खरबूजे के बीज भूनते समय उचटकर कढ़ाई से निकल कर बाहर आ रहे हों तो ऊपर से हाथ से पकड़ कर प्लेट ढककर रखें और कलछी से चलाते हुये बीज भूने, ये बहुत जल्दी भून जाते हैं). भुने बीज प्याले में निकाल लीजिये.

इलाइची को छील कर पाउडर बना लीजिये.
पैन में चीनी और आधा कप से थोड़ा कम पानी डालिये, चीनी घुलने के बाद चाशनी को और 2 मिनिट और पका लीजिये, चाशनी में भुना धनियां पाउडर, नारियल चूरा, इलाइची पाउडर और बीज डालकर मिलाइये और मिलाते हुये तब तक पका लीजिये जब तक कि मिश्रण जमने वाली कनिसिसटेन्सी पर न पहुंच जाय. चैक करने के लिये चम्मच से जरा सा मिश्रण प्याली में डालिये ठंडा होने पर उंगली और अंगूठे से चिपका कर देखिये, आप महसूस कर लेंगे कि वह जम जायेगा, अगर लगे कि गीला है, तो 1-2 मिनिट और पका लीजिये.
किसी प्लेट या ट्रे में घी लगाकर चिकना कीजिये, मिश्रण को प्लेट में एक जैसा फैला दिजिये. बर्फी जमने के बाद बर्फी को अपने मन पसन्द आकार में काट कर तैयार कर लीजिये.

धनिये की बर्फी तैयार है,
कृष्णा को प्रसाद चढ़ाने के बाद सभी को प्रसाद दीजिये और आप भी खाइये. धनिये की बर्फी को 15 दिन तक फ्रिज से बाहर रख कर खाया जा सकता है

श्रीकृष्‍ण की 5245वीं जयंती जन्‍माष्‍टमी

भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण की कई लीलाओं के बारे में आपने सुना होगा और टीवी पर देखा भी होगा.लेकिन जन्माष्टमी और कृष्ण भगवान के बारे में अपने कुछ हैरान करदेने वाली बात नहीं सुनी होगी,तो चलिए आपको बताते कुछ अद्बुध बाते.

भगवान कृष्ण के कुल 108 नाम हैं, जिनमें गोविंद, गोपाल, घनश्याम, गिरधारी, मोहन, बांके बिहारी, बनवारी, चक्रधर, देवकीनंदन, हरि, और कन्हैया प्रमुख हैं.अपने गुरु संदिपनी को गुरु दक्ष‍िणा देने के लिए भगवान ने उनके मृत बेटे को जीवित कर दिया था.श्रीकृष्ण की कुल 16108 पत्न‍ियां थीं, जिनमें से 8 पटरानी हैं.इन सभी का परिचिए करने के बाद आपको जन्माष्टमी से जुडी कुछ खास बताते है. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर चारों तरफ उत्साह बना हुआ है। लेकिन ज्योतिषाचार्यों की मानें तो इसबार कृष्ण जन्माष्टमी पर ठीक वैसा ही संयोग बना है, जैसा द्वापर युग में कान्हा के जन्म क समय बना था.
इस खास संयोग को कृष्ण जयंती के नाम से जाना जाता है। भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि में आधी रात यानी बारह बजे रोहिणी नक्षत्र हो और सूर्य सिंह राशि में तथा चंद्रमा वृष राशि में हों, तब श्रीकृष्ण ज
यंती योग बनता है.हम सब के प्‍यारे नटखट नंदलाल, राधा के श्‍याम और भक्‍तों के भगवान श्रीकृष्‍ण के जन्‍मदिन की तैयारियां पूरे देश में चल रही हैं.

इस बार श्रीकृष्‍ण की 5245वीं जयंती है. मान्‍यता है कि भगवान श्रीकृष्‍ण का जन्‍म भाद्रपद यानी कि भादो माह की कृष्‍ण पक्ष की अष्‍टमी को हुआ था. हालांकि इस बार कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी (Krishna Janmashtami) की तारीख को लेकर लोगों में काफी असमंजस में हैं.

इस बार जन्‍माष्‍टमी दो दिन पड़ रही है क्‍योंकि यह त्‍योहार 2 सितंबर और सितंबर दोनों ही दिन मनाया जाएगा. वहीं, वैष्‍णव कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी 3 सितंबर को है. अब सवाल उठता है कि व्रत किस दिन रखें? जवाब है 2 सितंबर यानी कि पहले दिन वाली जन्माष्टमी (Janmashtami) मंदिरों और ब्राह्मणों के घर पर मनाई जाती है. 3 सितंबर यानी कि दूसरे दिन वाली जन्माष्टमी वैष्णव सम्प्रदाय के लोग मनाते हैं.
जन्माष्टमी पर भक्तों को दिन भर उपवास रखना चाहिए और रात्रि के 11 बजे स्नान आदि से पवित्र हो कर घर के एकांत पवित्र कमरे में, पूर्व दिशा की ओर आम लकड़ी के सिंहासन पर, लाल वस्त्र बिछाकर, उस पर राधा-कृष्ण की तस्वीर स्थापित करना चाहिए, इसके बाद शास्त्रानुसार उन्हें विधि पूर्वक नंदलाल की पूजा करना चाहिए।
मान्यता है कि इस दिन जो श्रद्धा पूर्वक जन्माष्टमी के महात्म्य को पढ़ता और सुनता है, इस लोक में सारे सुखों को भोगकर वैकुण्ठ धाम को जाता है।
जन्‍माष्‍टमी की तिथि और शुभ मुहूर्त

इस बार अष्टमी 2 सितंबर की रात 08:47 पर लगेगी और 3 तारीख की शाम 07:20 पर खत्म हो जाएगी.
अष्‍टमी तिथि प्रारंभ: 2 सितंबर 2018 को रात 08 बजकर 47 मिनट.
अष्‍टमी तिथि समाप्‍त: 3 सितंबर 2018 को शाम 07 बजकर 20 मिनट.
रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ: 2 सितंबर की रात 8 बजकर 48 मिनट.
रोहिणी नक्षत्र समाप्‍त: 3 सितंबर की रात 8 बजकर 5 मिनट.
निशीथ काल पूजन का समय: 2 सितंबर 2018 को रात 11 बजकर 57 मिनट से रात 12 बजकर 48 मिनट तक.
व्रत का पारण: 3 सितंबर की रात 8 बजकर 05 मिनट के बाद.
वैष्‍णव कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी 3 सितंबर को है और व्रत का पारण अगले दिन यानी कि 4 सितंबर को सूर्योदय से पहले 6:13 पर होगा.

कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी 3 सितंबर को है

कैसे मनाएं जन्माष्टमी का त्यौहार

हम सब के प्‍यारे नटखट नंदलाल, राधा के श्‍याम और भक्‍तों के भगवान श्रीकृष्‍ण  के जन्‍मदिन की तैयारियां पूरे देश में चल रही हैं। इस बार श्रीकृष्‍ण की 5245वीं जयंती है। मान्‍यता है कि भगवान श्रीकृष्‍ण का जन्‍म भाद्रपद यानी कि भादो माह की कृष्‍ण पक्ष की अष्‍टमी को हुआ था। हालांकि इस बार कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी  की तारीख को लेकर लोगों में काफी असमंजस में हैं।

इस बार जन्‍माष्‍टमी दो दिन पड़ रही है क्‍योंकि यह त्‍योहार 2 सितंबर और सितंबर दोनों ही दिन मनाया जाएगा। वहीं, वैष्‍णव कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी 3 सितंबर को है। अब सवाल उठता है कि व्रत किस दिन रखें? जवाब है 2 सितंबर यानी कि पहले दिन वाली जन्माष्टमी  मंदिरों और ब्राह्मणों के घर पर मनाई जाती है। 3 सितंबर यानी कि दूसरे दिन वाली जन्माष्टमी वैष्णव सम्प्रदाय के लोग मनाते हैं।

जन्‍माष्‍टमी का महत्‍व
श्रीकृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी का पूरे भारत वर्ष में विशेष महत्‍व है। यह हिन्‍दुओं के प्रमुख त्‍योहारों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्‍णु ने श्रीकृष्‍ण के रूप में आठवां अवतार लिया था।  देश के सभी राज्‍य अलग-अलग तरीके से इस महापर्व को मनाते हैं। इस दिन क्‍या बच्‍चे क्‍या बूढ़े सभी अपने आराध्‍य के जन्‍म की खुशी में दिन भर व्रत रखते हैं और कृष्‍ण की महिमा का गुणगान करते हैं। दिन भर घरों और मंदिरों में भजन-कीर्तन चलते रहते हैं। वहीं, मंदिरों में झांकियां निकाली जाती हैं और स्‍कूलों में  श्रीकृष्‍ण लीला का मंचन होता है।

जन्‍माष्‍टमी की तिथि और शुभ मुहूर्त
इस बार अष्टमी 2 सितंबर की रात 08:47 पर लगेगी और 3 तारीख की शाम 07:20 पर खत्म हो जाएगी।
अष्‍टमी तिथि प्रारंभ: 2 सितंबर 2018 को रात 08 बजकर 47 मिनट।
अष्‍टमी तिथि समाप्‍त: 3 सितंबर 2018 को शाम 07 बजकर 20 मिनट।

रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ: 2 सितंबर की रात 8 बजकर 48 मिनट।
रोहिणी नक्षत्र समाप्‍त: 3 सितंबर की रात 8 बजकर 5 मिनट।

 निशीथ काल पूजन का समय: 2 सितंबर 2018 को रात 11 बजकर 57 मिनट से रात 12 बजकर 48 मिनट तक।

व्रत का पारण: 3 सितंबर की रात 8 बजकर 05 मिनट के बाद।

वैष्‍णव कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी 3 सितंबर को है और व्रत का पारण अगले दिन यानी कि 4 सितंबर को सूर्योदय से पहले 6:13 पर होगा।

जो भक्‍त जन्‍माष्‍टमी का व्रत रखना चाहते हैं उन्‍हें एक दिन पहले केवल एक समय का भोजन करना चाहिए। जन्‍माष्‍टमी के दिन सुबह स्‍नान करने के बाद भक्‍त व्रत का संकल्‍प लेते हुए अगले दिन रोहिणी नक्षत्र और अष्‍टमी तिथि के खत्‍म होने के बाद पारण यानी कि व्रत खोल सकते हैं। कृष्‍ण की पूजा नीशीत काल यानी कि आधी रात को की जाती है।

जन्‍माष्‍टमी की पूजा विधि
कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी के दिन षोडशोपचार पूजा की जाती है, जिसमें 16 चरण शामिल हैं-

ध्‍यान- सबसे पहले भगवान श्री कृष्‍ण की प्रतिमा के आगे उनका ध्‍यान करते हुए इस मंत्र का उच्‍चारण करें।
ॐ श्री कृष्णाय नम:।  ध्‍यानात् ध्‍यानम् समर्पयामि।।

आवाह्न- इसके बाद हाथ जोड़कर श्रीकृष्‍ण का आवाह्न करें।

आसन- अब श्रीकृष्‍ण को आसन देते हुए श्री कृष्ण का ध्यान करें।

यह भी पढ़ें: Kajri Teej 2018: जानें पूजा की विधि संग व्रत कथा

पाद्य- आसन देने के बाद भगवान श्रीकृष्‍ण के पांव धोने के लिए उन्‍हें पंचपात्र से जल समर्पित करें।

अर्घ्‍य- अब श्रीकृष्‍ण को इस मंत्र का उच्‍चारण करते हुए अर्घ्‍य दें।

आचमन- अब श्रीकृष्‍ण को आचमन के लिए जल अर्पित करें।

स्‍नान- अब भगवान श्रीकृष्‍ण की मूर्ति को कटोरे या किसी अन्‍य पात्र में रखकर स्‍नान कराएं। सबसे पहले पानी से स्‍नान कराएं और उसके बाद दूध, दही, मक्‍खन, घी और शहद से स्‍नान कराएं। अंत में साफ पानी से एक बार और स्‍नान कराएं।

वस्‍त्र- अब भगवान श्रीकृष्‍ण की मूर्ति को किसी साफ और सूखे कपड़े से पोंछकर नए वस्‍त्र पहनाएं. फिर उन्‍हें पालने में रखें और इस मन्त्र का जाप करें-         शति-वातोष्ण-सन्त्राणं लज्जाया रक्षणं परम्।
देहा-लंकारणं वस्त्रमतः शान्ति प्रयच्छ में।।
ॐ श्री कृष्णाय नम:। वस्त्रयुग्मं समर्पयामि।

यज्ञोपवीत- इस मंत्र का उच्‍चारण करते हुए भगवान श्रीकृष्‍ण को यज्ञोपवीत समर्पित करें।

चंदन: अब श्रीकृष्‍ण को चंदन अर्पित करते हुए।

गंध: इस मंत्र का उच्‍चारण करते हुए श्रीकृष्‍ण को धूप-अगरबत्ती दिखाएं।

दीपक: अब श्रीकृष्‍ण की मूर्ति को घी का दीपक दिखाएं।

नैवैद्य: अब श्रीकृष्‍ण को भागे लगाते हुए।

ताम्‍बूल: अब पान के पत्ते को पलट कर उस पर लौंग-इलायची, सुपारी और कुछ मीठा रखकर ताम्बूल बनाकर श्रीकृष्‍ण को समर्पित करें।

दक्षिणा: अब अपनी सामर्थ्‍य के अनुसार श्रीकृष्‍ण को दक्षिणा या भेंट दें।

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