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बुधवार, 21 अगस्त 2019

ट्रू कॉलर से क्या खतरे हो सकते हैं ?

ट्रू कॉलर से क्या खतरे हो सकते हैं ?
Truecaller
इसका प्रयोग अधिकांश लोग करते है हो सकता है आप भी करते होंगे बस अपनी एक छोटी सी सुविधा के लिए कि आप इसकी मदद से अनजाने नंबर से आने वाले फोन या संदेश का पता लगा सकते है कि ये किस महाशय का नंबर है।
हमको आज भी याद है कि 5-6 साल पहले की बात है कि हमने पहली बार खुद का नंबर लिया और कुछ दिन बाद हमने हमारे अंग्रेजी के गुरुजी को वॉट्सऐप संदेश भेजा (गुरुजी के पास हमारा नंबर नहीं था ) हमने कोई प्रोफ़ाइल फोटो भी नहीं लगाई थी कि उनको पता चले कि ये हमारा नंबर है फिर उनका जवाब आया कि केसे हो टीकेंद्र।
मै बिल्कुल आश्चर्यचकित हो गया आखिर गुरुजी को पता केसे चला कि ये मेरा नंबर है।
True caller प्रथम दृष्टया तो बड़े काम की एप्लीकेशन लगती है कि कोई भी नंबर टाइप करो और पता लगा लो कि यह किसका नंबर है।
लेकिन जरा रुके एक बार सोचिए कि true caller को कैसे पता कि कौन सा नंबर किस महाशय का है।
तो अब आप को समझाते हैं कि True caller काम कैसे करता है जैसे ही आप true caller को अपने फोन में Install करते हैं तो वह आपके Contact  की अनुमति (Allow) मांगता है यहां अनुमति देते ही आपके सारे contact True Caller के पास चले जाते हैं और अब कोई और किसी ऐसे नंबर को सर्च करेगा जो मेरे कांटेक्ट में था तो True Caller उसको मैंने जिस नाम से सेव किया है वह दिखा देगा।
अब आप कहेंगे True Caller  तो बड़े काम की चीज है इसमें खतरा किस बात का लेकिन जरा रुकिए True Caller आपसे आपके Contact की ही नहीं बल्कि कुछ और परमिशन मांगता है।
यहां देखिए Contact के अलावा Camera, Location, माइक्रोफोन, फोन, SMS, Storage इतनी सारी परमिशन True Caller मांगता हैं और यह सारी परमिशन देते ही True Caller के पास आपकी फोन कॉल्स आप किस से बातें करते हैं क्या बातें करते हैं कहां रहते हैं सारी जानकारियां ट्रूकॉलर के पास चली जाती है और वहां इन जानकारियों को बाजार में बेचा जा सकता है।
आपके पास आने वाले सारे Messege  जिनमें बैंक से संबंधित OTP भी हो सकते हैं True Caller देख सकता है।
अब आप सोच सकते हैं कि True Caller हमारी प्राइवेसी के लिए कितना नुकसानदायक है। यहां आपके थोड़े से फायदे के लिए आपकी अमूल्य जानकारियां अपने पास रख लेता है। तो आप एक बार True Caller का इस्तेमाल करने से पहले जरूर सोच लीजिएगा।

जर्मनी के बारे में ऐसा हैं जिसे ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं?

  • जर्मनी में एक कैदी के लिए कोई सजा नहीं है जो जेल से भागने की कोशिश करता है, क्योंकि यह मुक्त होने के लिए एक स्वाभाविक मानव वृत्ति है।
  • जर्मनी में 65% राजमार्ग (ऑटोबान) की कोई गति सीमा नहीं है।
  • जर्मनी का एक-तिहाई हिस्सा अभी भी जंगलों और जंगली जमीन से भरा है।
  • जर्मनी यूरोप का सातवाँ सबसे बड़ा देश है, जनसंख्या 81 मिलियन।
  • बर्लिन में यूरोप का सबसे बड़ा ट्रेन स्टेशन है।
  • बर्लिन पेरिस से 9 गुना बड़ा है और इसमें वेनिस की तुलना में अधिक पुल हैं।
  • जर्मनी में 1,500 से अधिक विभिन्न किस्म की बियरें हैं।
  • जर्मनी दुनिया के सबसे घनी आबादी वाले देशों में से एक है।
  • जर्मनी नौ अन्य देशों के साथ सीमाएँ साझा करता हैं। डेनमार्क, पोलैंड, चेक गणराज्य, ऑस्ट्रिया, स्विट्जरलैंड, फ्रांस, बेल्जियम, लक्जमबर्ग और नीदरलैंड।
  • जर्मनी दुनिया के सबसे बड़े कार उत्पादकों में से एक है।
  • पहली मुद्रित (प्रिंटिड) पुस्तक जर्मन में थी।
  • जर्मनी दुनिया के प्रमुख पुस्तक राष्ट्रों में से एक है। हर साल लगभग 94,000 शीर्षकों का प्रकाशन होता है।
  • पहली बार देखी गई पत्रिका 1663 में जर्मनी में लॉन्च की गई थी।
  • जर्मन दुनिया भर में सबसे अधिक सिखाई जाने वाली तीसरी भाषा है।
  • Donaudampfschifffahrtselektrizitätenhauptbetriebswerkbauunterbeamtengesellschaft प्रकाशित होने वाला सबसे लंबा शब्द है। यह 79 अक्षर लंबा है।
  • जर्मनी दुनिया का पहला देश था जिसने डेलाइट सेविंग टाइम को अपनाया - DST, जिसे गर्मियों के समय के रूप में भी जाना जाता है। यह 1916 में WWI (world war one) के बीच में हुआ था।
  • जर्मनी में 400 से अधिक चिड़ियाघर हैं, जो दुनिया में सबसे अधिक हैं।
  • जर्मनी में ज्यादातर टैक्सियां ​​मर्सिडीज हैं।
  • बर्लिन में चांसलर के कार्यालय को स्थानीय रूप से "वॉशिंग मशीन" के रूप में जाना जाता है।
  • जर्मनी में पहली कक्षा के पहले दिन, हर बच्चे को खिलौने और कैंडी से भरा एक विशाल शंकु (cone) मिलता है।
  • जर्मनी में 300 से अधिक विभिन्न प्रकार के ब्रेड पाए जाते हैं।
  • जर्मनी में 1,000 से अधिक प्रकार के सॉसेज हैं।
  • बवेरिया में बीयर को आधिकारिक तौर पर एक भोजन माना जाता है।
  • दुनिया में सबसे बड़ा बीयर फेस्टिवल म्यूनिख, बवेरिया में ओकट्रैफेस्ट है, जहाँ बीयर ग्लास का आकार 500ml नहीं बल्कि एक पूरा लीटर होता है।
  • जर्मनी में एक बियर प्राप्त करने के लिए, आप अपना अंगूठा दिखाते हैं। अपनी पहली उंगली दिखाने का मतलब है कि आप 2 बियर चाहते हैं: एक अंगूठे के साथ, और एक उंगली के साथ।
  • सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर प्रतिबंध है लेकिन शराब पीना अभी भी कानूनी है।
  • कलेज सभी के लिए मुफ़्त है (गैर-जर्मन लोगों के लिए भी)।
  • सरकार बच्चों के अजीब नामों को अस्वीकार करती है और कर सकती है।
  • वेश्यावृत्ति कानूनी है।
  • रविवार को सब कुछ बंद होता है, सिवाय चर्च और शायद वेश्यालय के।
  • जर्मन चांसलर की अपनी बार्बी डॉल है, मैटल की 50 वीं वर्षगांठ के लिए, कंपनी जर्मनी की चांसलर, एंजेला मर्केल के बार्बी मॉडल के साथ सामने आई।
  • सरकार विकलांगों के सेक्स के लिए भुगतान करती है
  • किसी को पहले ही "जन्मदिन मुबारक" की शुभकामना देना बुरा माना जाता है।
  • जर्मनी परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को खत्म कर रहा है, उसने इसके बजाय नवीकरणीय ऊर्जा विकसित करने की प्रतिबद्धता जताई है।
  • जर्मनी में, "धन्यवाद" का मतलब 'नहीं' होता है
  • वे फैंटा के साथ केक बनाते हैं।
  • खुली खिड़कियां बीमारी का कारण बनती हैं, ये जर्मन लोकगीत आपको बताएंगे।
  • बीच की उंगली दिखाना गैरकानूनी है।
  • जर्मनी लोग पूरा राष्ट्रगान नहीं गाते हैं।

धन्यवाद आपका ।

हनुमानजी कलियुग में गंधमादन पर्वत पर निवास करते हैं

भगवान राम का निजधाम प्रस्थान
अश्विन पूर्णिमा के दिन मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने अयोध्या से सटे फैजाबाद शहर के सरयू किनारे जल समाधि लेकर महाप्रयाण किया। श्रीराम ने सभी की उपस्थिति में ब्रह्म मुहूर्त में सरयू नदी की ओर प्रयाण किया। जब श्रीराम जल समाधि ले रहे थे तब उनके परिवार के सदस्य भरत, शत्रुघ्न, उर्मिला, मांडवी और श्रुतकीर्ति सहित हनुमान, सुग्रीव आदि कई महान आत्माएं मौजूद थीं।
 
 
दरअसल, गरुढ़ पुराण अनुसार, 
‘अतो रोचननामासौ मरुदंशः प्रकीर्तितः रामावतारे हनुमान्रामकार्यार्थसाधकः।’ अर्थात ‘जब देवाधिदेव रामचंद्र अवतरित हुए तब उनके प्रतिनिधि मरुत् अर्थात वायुदेव उनकी सेवा और शुश्रुषा के हेतु उनके साथ अवतरित हुए जिन्हें सभी हनुमान इस नाम से जानते हैं।’
 
 
रामायण के बालकांड अनुसार,
‘विष्णोः सहायान् बलिनः सृजध्वम्’ अर्थात ‘भगवान विष्णु के सहायता हेतु सभी देवों ने अनेकों वानर, भालू और विविध प्राणियों के रूपमें जन्म लिया।’  अतः जब प्रभु राम स्वयं ही अपने धाम वापस चले गए तब सभी वानरों का इस मृत्युलोक में कार्य समाप्त हो चुका था। ऐसे में सवाल यह उठता है कि तब हनुमान जी कहां चले गए या उनका क्या हुआ?
 
 
कहते हैं कि श्रीराम के अपने निजधाम प्रस्थान करने के बाद हनुमानजी और अन्य वानर किंपुरुष नामक देश को प्रस्थान कर गए। वे मयासुर द्वारा निर्मित द्विविध नामक विमान में बैठकर किंपुरुष नामक लोक में प्रस्थान कर गए। किंपुरुष लोक स्वर्ग लोग के समकक्ष है। यह किन्नर, वानर, यक्ष, यज्ञभुज् आदि जीवों का निवास स्थान है। वहां भूमी के उपर और भूमी के नीचे महाकाय शहरों का निर्माण किया गया है। योधेय, ईश्वास, अर्ष्टिषेण, प्रहर्तू आदि वानरों के साथ हनुमानजी इस लोग में प्रभु रामकी भक्ति, कीर्तन और पूजा में लीन रहते हैं।
 

शास्त्र के प्रमाण
श्रीशुक उवाच। किम्पुरुषे वर्षे भगवन्तमादिपुरुषं लक्ष्मणाग्रजं सीताभिरामं रामं तच्चरण सन्निकर्षाभिरतः परमभागवतो हनुमान्सह किम्पुरुषैरविरतभक्तिरुपास्ते॥ - श्रीमद्भागवतम्
 
 
श्रील शुकदेव गोस्वामी जी ने कहाँ, “हे राजन्, किंपुरुष लोक में भक्तों में श्रेष्ठ हनुमान उस लोक के अन्य निवासियों के साथ प्रभु राम जो लक्ष्मण के बड़े भ्राता और सीता के पति है, उनकी सेवा में हमेशा मग्न रहते हैं।”
 
आर्ष्टिषेणेन सह गन्धर्वैरनुगीयमानां परमकल्याणीं भर्तृभगवत्कथां समुपशृणोति स्वयं चेदं गायति ॥- श्रीमद्भागवतम्
 
वहां गंधर्वों के समूह हमेशा रामचंद्र के गुणों का गान करते रहते हैं। वह गान अत्यंत शुभ और मनमोहक होता है। हनुमानजी और आर्ष्ट्रीषेण जो किंपुरुष लोक के प्रमुख है वे उन स्तुतिगानों को हमेशा सुनते रहते हैं।
 
किम्पौरुषाणाम् वायुपुत्रोऽहं ध्रुवे ध्रुवः मुनिः॥- ब्रह्म वैवर्त पुराण
किंपुरुष लोक के निवासियों में तुम मुझे वायुपुत्र हनुमान जानलो तथा ध्रुवलोक में मुझे ध्रुव ऋषि के रूप में देखो।  

 
कहां हैं किंपुरुष नामक क्षेत्र?
किंपुरुष नेपाल के हिमालययी क्षेत्र में आता है। प्राचीनकाल में जम्बूद्वीप के नौ खंडों में से एक किंपुरुष भी था। नेपाल और तिब्बत के बीच कहीं पर किंपुरुष की स्थिति बताई गई है। हालांकि पुराणों अनुसार किंपुरुष हिमालय पर्वत के उत्तर भाग का नाम है। यहां किन्नर नामक मानव जाति निवास करती थी। ऐसा भी उल्लेख मिलता है कि इस स्थान पर मानव की आदिम जातियां निवास करती थीं। यहीं पर एक पर्वत है जिसका नाम गंधमादन कहा गया है।
 
 
गंधमादन पर्वत कहां हैं?
हनुमानजी कलियुग में गंधमादन पर्वत पर निवास करते हैं, ऐसा श्रीमद भागवत में वर्णन आता है। उल्लेखनीय है कि अपने अज्ञातवास के समय हिमवंत पार करके पांडव गंधमादन के पास पहुंचे थे। एक बार भीम सहस्रदल कमल लेने के लिए गंधमादन पर्वत के वन में पहुंच गए थे, जहां उन्होंने हनुमान को लेटे देखा और फिर हनुमान ने भीम का घमंड चूर कर दिया था।
 
 
गंधमादन में ऋषि, सिद्ध, चारण, विद्याधर, देवता, गंधर्व, अप्सराएं और किन्नर निवास करते हैं। वे सब यहां निर्भीक विचरण करते हैं। हिमालय के कैलाश पर्वत के उत्तर में (दक्षिण में केदार पर्वत है) स्थित गंधमादन पर्वत की। यह पर्वत कुबेर के राज्यक्षेत्र में था। सुमेरू पर्वत की चारों दिशाओं में स्थित गजदंत पर्वतों में से एक को उस काल में गंधमादन पर्वत कहा जाता था। आज यह क्षेत्र तिब्बत के इलाके में है। पुराणों के अनुसार जम्बूद्वीप के इलावृत्त खंड और भद्राश्व खंड के बीच में गंधमादन पर्वत कहा गया है, जो अपने सुगंधित वनों के लिए प्रसिद्ध था।

चारों युगों के रहस्य -सतयुग -त्रेतायुग - द्वापर युग - कलियुग

सतयुग
17,28,000 वर्ष के सतयुग में मनुष्य की लंबाई 32 फिट और उम्र 100000 वर्ष की बतायी गई है। इसका तीर्थ पुष्कर और अवतार मत्स्य, हयग्रीव, कूर्म, वाराह, नृसिंह हैं। इस युग में पाप 0% जबकि 20 विश्वा अर्थात 100 प्रतिशत पुण कर्म करता है मनुष्य। इस युग की मुद्रा रत्न और पात्र स्वर्ण हैं।
 
त्रेतायुग
12,96,000 वर्ष की कालावधि का त्रेतायुग तीन पैरों पर खड़ा है। इस युग में मनुष्य की आयु 10000 वर्ष और लंबाई 21 फिट की बतायी गई है। इसका तीर्थ पुष्कर और अवतार वामन, परशुराम और राम हैं। इस युग में पाप 25% जबकि पुण्य कर्म 75% होते हैं। इस युग की मुद्रा स्वर्ण जबकि पात्र चांदी हैं।
 
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द्वापरयुग
8.64,000 वर्ष की कालावधि का द्वापरयुग दो पैरों पर खड़ा है। इस युग में मनुष्य की आयु 1000 वर्ष और लंबाई 11 फिट बतायी गई है। इस युग का तीर्थ कुरुक्षेत्र और अवतार भगवान श्रीकृष्ण हैं। इस युग में पाप कर्म 10 विश्‍वा अर्थात 50% और पुण्य भी 50% होते हैं। इस युग की मुद्रा चांदी और पात्र ताम्र के थे।
 
कलियुग
4,32,000 वर्ष की कालावधि के इस कलियुग को एक पैर पर खड़ा बताया गया है। इस युग में मनुष्य की आयु 100 वर्ष और लंबाई 5 फिट 5 इंच बतायी गई है। इसका तीर्थ गंगा और अवतार बुद्ध एवं कल्कि बताए गए हैं। इस युग में पाप कर्म 75% और पुण्य कर्म 25% होते हैं। इस युग की मुद्रा लोहा और पात्र मिट्टी के हैं।

क्या गांधारी के 100 बेटे थे, जिसका मतलब है कि एक आदमी उस समय 250 साल के आसपास उम्र का होना चाहिए?


क्या गांधारी के 100 बेटे थे, जिसका मतलब है कि एक आदमी उस समय 250 साल के आसपास उम्र का होना चाहिए?

आपने दो तथ्यों को इस प्रशन में प्रकट किया है जो सत्य है परन्तु इनका आपस मे कोई लेना देना नही हैं।
पहला तथ्य- गांधारी के १०० पुत्र थे।
दूसरा तथ्य- उस समय आदमी कि उम्र २५० वर्ष थी
तो पहले आइए जानते हैं कि कौरवों का जन्म कैसे हुआ ।
धृतराष्ट्र का विवाह गांधारी के साथ हुआ था। विवाह के पश्चात् एक बार ऋषि व्यास हस्तिनापुर पहुंचे और तब गांधारी ने उनकी बहुत अच्छे से सेवा की जिससे ऋषि व्यास बेहद प्रसन्न हुए और उन्होंने गांधारी को १०० पुत्रों का आशीर्वाद दिया। इसके कुछ समय बाद गांधारी लगभग दो साल तक गर्भवती रही और प्रसव के दौरान गांधारी ने एक मृत मांस के लोथड़े को पैदा किया। ऋषि व्यास ने आदेश दिया कि उस मांस के लोथड़े को १०० टुकड़ो में काट दिया जाए। परन्तु गांधारी ने उन्हें कहा कि उन्हें एक पुत्री की भी इच्छा है। तब ऋषि व्यास ने लोथड़े को स्वयं १०१ टुकड़ों में काटकर अलग – अलग घड़ों में बंद किया। एक साल बाद उन घड़ों में से गांधारी के १०० पुत्रों और एक पुत्री दुःशला का जन्म हुआ।[1]
तो यहाँ पर आपको समझ आ गया होगा कि सभी का जन्म एक-एक करके अलग-अलग वर्षो में नही अपितु एक ही समय मे अलग-अलग घड़ो में हुआ था।

कौरवों के नाम
1. दुर्योधन
2. दुःशासन
3. दुःसह
4. दुःशल
5. जलसंघ
6. सम
7. सह
8. विंद
9. अनुविंद
10. दुर्धर्ष
11. सुबाहु
12. दुषप्रधर्षण
13. दुर्मर्षण
14. दुर्मुख
15. दुष्कर्ण
16. विकर्ण
17. शल
18. सत्वान
19. सुलोचन
20. चित्र
21. उपचित्र
22. चित्राक्ष
23. चारुचित्र
24. शरासन
25. दुर्मद
26. दुर्विगाह
27. विवित्सु
28. विकटानन्द
29. ऊर्णनाभ
30. सुनाभ
31. नन्द
32. उपनन्द
33. चित्रबाण
34. चित्रवर्मा
35. सुवर्मा
36. दुर्विमोचन
37. अयोबाहु
38. महाबाहु
39. चित्रांग
40. चित्रकुण्डल
41. भीमवेग
42. भीमबल
43. बालाकि
44. बलवर्धन
45. उग्रायुध
46. सुषेण
47. कुण्डधर
48. महोदर
49. चित्रायुध
50. निषंगी
51. पाशी
52. वृन्दारक
53. दृढ़वर्मा
54. दृढ़क्षत्र
55. सोमकीर्ति
56. अनूदर
57. दढ़संघ
58. जरासंघ
59. सत्यसंघ
60. सद्सुवाक
61. उग्रश्रवा
62. उग्रसेन
63. सेनानी
64. दुष्पराजय
65. अपराजित
66. कुण्डशायी
67. विशालाक्ष
68. दुराधर
69. दृढ़हस्त
70. सुहस्त
71. वातवेग
72. सुवर्च
73. आदित्यकेतु
74. बह्वाशी
75. नागदत्त
76. उग्रशायी
77. कवचि
78. क्रथन
79. कुण्डी
80. भीमविक्र
81. धनुर्धर
82. वीरबाहु
83. अलोलुप
84. अभय
85. दृढ़कर्मा
86. दृढ़रथाश्रय
87. अनाधृष्य
88. कुण्डभेदी
89. विरवि
90. चित्रकुण्डल
91. प्रधम
92. अमाप्रमाथि
93. दीर्घरोमा
94. सुवीर्यवान
95. दीर्घबाहु
96. सुजात
97. कनकध्वज
98. कुण्डाशी
99. विरज
100. युयुत्सु
101. दुहुसलाई
102. दुःशला(पुत्री)
अलग-अलग ग्रंथों में कौरवों के कुछ नामों में परिवर्तन भी मिलते हैं।

अब आते है अपकी दूसरी बात पर,
अगर हम चिरंजीवियों (अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और भगवान परशुराम) की बात नही करे तो ८,६४,०० वर्ष की कालावधि का द्वापरयुग में मनुष्य की आयु 1000 वर्ष और लंबाई 11 फिट बतायी गई है।[2] तो मुमकिन है कुछ व्यक्ति २५० वर्ष या इससे अधिक भी जिवित रहे हो।

मंगलवार, 20 अगस्त 2019

बस इन्ही जैसे लोगो के बल पर इस्लामिक जिहाद बढ़ता है!

मैं सोच रहा हूँ.....
पाकिस्तान में मुसलमानों को कौन मार रहा है ?
अफगानिस्तान में मुसलमानों को कौन मार रहा है ?
सीरिया में मुसलमानों की हत्या कौन कर रहा है ?
यमन में मुसलमानों को कौन मार रहा है ?
इराक में मुसलमानों को कौन मार रहा है ?
लीबिया में मुसलमानों की हत्या कौन कर रहा है ?
कौन है जो मिस्र में मुसलमानों को मार रहा है ?
जो सोमालिया में मुसलमानों को मार रहा है ?
बलूचिस्तान में भी मुसलमानों को मार रहा है ?
अब मैं सोच रहा हूँ जब ये सभी देश इस्लामिक हैं... तब शान्ति कहाँ है ?
मैं इस्लाम पर सवाल नहीं कर रहा हूँ, क्योंकि सभी लोग जानते हैं की इस्लाम एक
शांतिपूर्ण धर्म है... लेकिन शांति रहस्यमय रूप से से गायब है....!!  अफगानिस्तान, इराक, सीरिया, लेबनान, यमन और मिस्र को क्या बजरंग-दल या हिन्दू-महासभा ने बर्बाद किया है ? या वहां दंगा करने के लिए आर .एस. एस. के लोग गए थे?

अजीब विडम्बना है ,
कुछ ग़द्दारों के लियें यहाँ
इशरत "बेटी" है,
कन्हैया "बेटा" है,
दाऊद "भाई" है,
अफ़ज़ल "गुरू" है,
लेकिन,
भारत "माता" नहीं !!!
आखिर...ऐसा क्यों है........???

बौद्ध +हिन्दू =रहने में समस्या नहीं
हिन्दू + ईसाई = रहने में समस्या नहीं ,
हिन्दू + यहूदी = रहने में समस्या नहीं,
ईसाई +नास्तिक =रहने में समस्या नहीं,
नास्तिक +बौद्ध = कोई समस्या नहीं,
बौद्ध + सिख = कोई समस्या नहीं,
सिख + हिन्दू = कोई समस्या नहीं,
कन्फ्यूशियस + हिन्दू =कोई समस्या नहीं,

अब थोड़ा और ध्यान दीजिए...

मुस्लिम +हिन्दू = समस्या
मुस्लिम +बौद्ध =समस्या
मुस्लिम + ईसाई = समस्या
मुस्लिम +Jews =समस्या
मुस्लिम + सिख = समस्या
मुस्लिम + Baha'is = समस्या
मुस्लिम + नास्तिक = समस्या
मुस्लिम +Atheists =समस्या
मुस्लिम +मुस्लिम =बहुत बड़ी समस्या!

उदाहरण देखिए, जहां-जहां मुस्लिम बहुसंख्यक है, वहाँ वे सुखी नहीं रहते हैं और न दूसरे को रहने देते हैं!

देखिए ...

मुस्लिम सुखी नहीं गाजा में
मुस्लिम सुखी नहीं Egypt में
मुस्लिम सुखी नहीं लीबिया में
मुस्लिम सुखी नहीं मोरोक्को में
मुस्लिम सुखी नहीं ईरान में
मुस्लिम सुखी नहीं ईराक में
मुस्लिम सूखी नहीं यमन में
मुस्लिम सुखी नहीं अफगानिस्तान में
मुस्लिम सुखी नहीं पाकिस्तान में
मुस्लिम सुखी नहीं सीरिया में
मुस्लिम सुखी नहीं लेबनान में
मुस्लिम सुखी नहीं नाइजीरिया में
मुस्लिम सुखी नहीं केन्या में
मुस्लिम सुखी नहीं सूडान में

अब गौर कीजिए .........!
मुस्लिम सुखी वहां हैं, जहाँ कम संख्या में है...??

मुस्लिम सुखी है आस्ट्रेलिया में
मुस्लिम सुखी है इंग्लैंड में
मुस्लिम सुखी है बेल्जियम में
मुस्लिम सुखी है फ्रांस में
मुस्लिम सुखी है इटली में
मुस्लिम सुखी है जर्मनी में
मुस्लिम सुखी है स्वीडन में
मुस्लिम सुखी है U.S.A. में
मुस्लिम सुखी है कनाडा में
मुस्लिम सुखी है भारत में
मुस्लिम सुखी है नार्वे में
मुस्लिम सुखी है नेपाल में

मुसलमान हर उस देश में सुखी है !
जो इस्लामिक देश नही है ........
और देखिये कि वो उन्ही देशो को दोषी ठहराते है जो इस्लामिक नही हैं....!
या जहां मुस्लिमो की लीडरशिप नही है.....!

मुस्लिम हमेशा उन देशो को ब्लैम करते है जहा वे सुखी हैं.......!
और मुस्लिम उन देशो को बदलना चाहते है..... जहा वे सुखी हैं !
और बदल कर वे उन देशो की तरह कर देना चाहते हैं!
जहा वे सुखी नही हैं........!
और अंत तक वो इसके लिए लड़ाई करते हैं....! और इसको ही बोलते हैं........
* #इस्लामिक_जिहाद*

अब थोड़ा आतंकवादी संगठनो पर नजर डालिए........!
जिनके द्वारा वह दुनिया को बदलना चाहते हैं....!

1.ISIS = इस्लामी आतंकवादी संगठन ,
2.अल कायदा = आतंकवादी संगठन ,
3.तालिबान = आतंकवादी संगठन
4.हमास = आतंकवादी संगठन
5.हिज्बुल मुजाहिदीन=आतंकवादी संगठन
6.बोको हराम =आतंकवादी संगठन
7.Al-Nusra =आतंकवादी संगठन
8.अबू स्याफ = आतंकवादी संगठन
9.अल बदर = आतंकवादी संगठन
10.मुस्लिम ब्रदरहुड = आतंकवादी संगठन
11.लश्कर-ए-तैयबा = आतंकवादी संगठन 12.Palestine Liberation Front
=आतंकवादी संगठन
13.ISLAMIC TERROR ORGANIZATION
Ansaru =आतंकवादी संगठन
14.जेमाह इस्लामिया = इस्लामी आतंकवाद
संगठन
15.अब्दुल्ला आजम ब्रिगेड = आतंकवादी
संगठन

आदि और भी हैं ऐसे ही इस्लामिक जेहादी आतंकवादी संगठन!

अब इतना तो आप सभी, जरूर समझ गए होंगे कि......
"आतंकवादी" का "मजहब" क्या होता है.....???

अब अगर कोई हिन्दुओ को बदनाम करता है........
भगवा आतंकवाद के नाम पर, तो .......
उसे वहीं पकड़ कर ...................
ये काला चिठ्ठा अवश्य दिखाएं...........!

बस इन्ही जैसे लोगो के बल पर इस्लामिक जिहाद बढ़ता है.........!

आश्चर्य......घोर आश्चर्य.........?
👉🙏👈

सोमवार, 19 अगस्त 2019

राम के पुत्र लव और कुश की वंशावली

*🚩जानिए भगवान श्री राम के पूर्वज कौन थे और आज कौनसी पीढ़ी चल रही है?*

*🚩कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने भगवान श्री राम के वंशज के बारे में सबूत मांगा था। श्री राम के वंशज आज भी मौजूदा है इस लेख के माध्यम से जानिए आज उनके वंशज कौन है।*

*🚩राम के पुत्र लव और कुश की वंशावली-*

*राम के दो जुड़वा पुत्र लव और कुश थे। दोनों का ही वंश आगे चला। वर्तमान में दोनों के ही वंश के लोग बहुतायत में पाए जाते हैं। लव और कुश के कुल के लोग जो भारत में आज भी निवास करते हैं।*

*🚩- ब्रह्माजी के कई पुत्र थे जिनमें से 10 प्रमुख हैं- मरीचि, अंगिरस्, अत्रि, भृगु, वशिष्ठ, नारद, पुलस्त्सय, ऋतु, दक्ष, स्वायंभुव मनु।*

*🚩- मरीचि की पत्नि दक्ष- कन्या संभूति थी। इनकी दो और पत्निनयां थी- कला और उर्णा। कला से उन्हें कश्यप नामक एक पुत्र मिला। इन्होंने दक्ष की 13 पुत्रियों से विवाह किया था।*

*🚩- कश्यप पत्नी अदिति से देवता और दिति से दैत्यों की उत्पत्ति हुई। अदिति के 10 पुत्र थे, विवस्वान्, इंद्र, धाता, भग, पूषा, मित्र, अर्यमा, त्वष्टा, अंशु, वरुण, सविता। कहीं कहीं पर यह नाम इस तरह पाए जाते हैं- विवस्वान्, अर्यमा, पूषा, त्वष्टा, सविता, भग, धाता, विधाता, वरुण, मित्र, इंद्र और त्रिविक्रम (भगवान वामन)।*

*🚩- कश्यप के बड़े पुत्र विवस्वान् से वैवस्वत मनु का जन्म हुआ। वैवस्वत मनु के दस पुत्र थे- इल, इक्ष्वाकु, कुशनाम, अरिष्ट, धृष्ट, नरिष्यन्त, करुष, महाबली, शर्याति और पृषध। राम का जन्म इक्ष्वाकु के कुल में हुआ था। जैन धर्म के तीर्थंकर निमि भी इसी कुल के थे।*

*🚩- वैवस्वत मनु के दूसरे पुत्र इक्ष्वाकु से विकुक्षि, निमि और दण्डक पुत्र उत्पन्न हुए। इस तरह से यह वंश परम्परा चलते-चलते हरिश्चन्द्र रोहित, वृष, बाहु और सगर तक पहुँची। इक्ष्वाकु प्राचीन कौशल देश के राजा थे और इनकी राजधानी अयोध्या थी। (पुत्री इला का विवाह बुध से हुआ जिसका पुत्र पुरुरवा चंद्रवंशी था)।*

*- रामायण के बालकांड में गुरु वशिष्ठजी द्वारा राम के कुल का वर्णन किया गया है जो इस प्रकार है:- ब्रह्माजी से मरीचि का जन्म हुआ। मरीचि के पुत्र कश्यप हुए। कश्यप के विवस्वान् और विवस्वान् के वैवस्वत मनु हुए। वैवस्वत मनु के समय जल प्रलय हुआ था। वैवस्वतमनु के दस पुत्रों में से एक का नाम इक्ष्वाकु था। इक्ष्वाकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और इस प्रकार इक्ष्वाकु कुल की स्थापना की।*

*🚩- इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि हुए। कुक्षि के पुत्र का नाम विकुक्षि था। विकुक्षि के पुत्र बाण और बाण के पुत्र अनरण्य हुए। अनरण्य से पृथु और पृथु और पृथु से त्रिशंकु का जन्म हुआ। त्रिशंकु के पुत्र धुंधुमार हुए। धुन्धुमार के पुत्र का नाम युवनाश्व था। युवनाश्व के पुत्र मान्धाता हुए और मान्धाता से सुसन्धि का जन्म हुआ। सुसन्धि के दो पुत्र हुए- ध्रुवसन्धि एवं प्रसेनजित। ध्रुवसन्धि के पुत्र भरत हुए।*

*🚩- भरत के पुत्र असित हुए और असित के पुत्र सगर हुए। सगर अयोध्या के बहुत प्रतापी राजा थे। सगर के पुत्र का नाम असमंज था। असमंज के पुत्र अंशुमान तथा अंशुमान के पुत्र दिलीप हुए। दिलीप के पुत्र भगीरथ हुए। भगीरथ ने ही गंगा को पृथ्वी पर उतार था। भगीरथ के पुत्र ककुत्स्थ और ककुत्स्थ के पुत्र रघु हुए। रघु के अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी नरेश होने के कारण उनके बाद इस वंश का नाम रघुवंश हो गया। तब राम के कुल को रघुकुल भी कहा जाता है।*

*🚩- रघु के पुत्र प्रवृद्ध हुए। प्रवृद्ध के पुत्र शंखण और शंखण के पुत्र सुदर्शन हुए। सुदर्शन के पुत्र का नाम अग्निवर्ण था। अग्निवर्ण के पुत्र शीघ्रग और शीघ्रग के पुत्र मरु हुए। मरु के पुत्र प्रशुश्रुक और प्रशुश्रुक के पुत्र अम्बरीष हुए। अम्बरीष के पुत्र का नाम नहुष था। नहुष के पुत्र ययाति और ययाति के पुत्र नाभाग हुए। नाभाग के पुत्र का नाम अज था। अज के पुत्र दशरथ हुए और दशरथ के ये चार पुत्र राम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न हैं। वाल्मीकि रामायण- ॥1-59 से 72।।*

*🚩कुश की निम्नलिखित वंशावली भी मिलती है जिसकी हम पुष्टि नहीं करते हैं, क्योंकि अलग अलग ग्रंथों में यह अलग अलग मिलती है। कारण यह कि कुश से राजा सवाई भवानी सिंह के बीच जिन राजाओं का उल्लेख मिलता है उनके भाई भी थे जिनके अन्य वंश चले हैं इस तरह संपूर्ण देश में राम के वंश का एक ऐसे नेटवर्क फैला है जिसकी संपूर्ण वंशावली को यहां देना असंभव है।*

*🚩कुश की एक यह वंशावली-*

*राम के जुड़वा पुत्र लव और कुश हुए। कुश के अतिथि हुए, अतिधि के निषध हुए, निषध के नल हुए, नल के नभस, नभस के पुण्डरीक, पुण्डरीक के क्षेमधन्वा, क्षेमधन्वा के देवानीक, देवानीक के अहीनगर, अहीनर के रुरु, रुरु के पारियात्र, पारियात्रा के दल, दल के छल (शल), शल के उक्थ, उक्थ के वज्रनाभ, वज्रनाभ के शंखनाभ, शंखनाभ के व्यथिताश्व, व्यथिताश्व से विश्वसह, विश्वसह से हिरण्यनाभ, हिरण्यनाभ से पुष्य, पुष्य से ध्रुवसन्धि, ध्रुवसन्धि से सुदर्शन, सुदर्शन से अग्निवर्णा, अग्निवर्णा से शीघ्र, शीघ्र से मुरु, मरु से प्रसुश्रुत, प्रसुश्रुत से सुगवि, सुगवि से अमर्ष, अमर्ष से महास्वन, महास्वन से बृहदबल, बृहदबल से बृहत्क्षण (अभिमन्यु द्वारा मारा गया था), वृहत्क्षण से गुरुक्षेप, गुरक्षेप से वत्स, वत्स से वत्सव्यूह, वत्सव्यूह से प्रतिव्योम, प्रतिव्योम से दिवाकर, दिवाकर से सहदेव, सहदेव से बृहदश्व, वृहदश्व से भानुरथ, भानुरथ से सुप्रतीक, सुप्रतीक से मरुदेव, मरुदेव से सुनक्षत्र, सुनक्षत्र से किन्नर, किन्नर से अंतरिक्ष, अंतरिक्ष से सुवर्ण, सुवर्ण से अमित्रजित्, अमित्रजित् से वृहद्राज, वृहद्राज से धर्मी, धर्मी से कृतन्जय, कृतन्जय से रणन्जय, रणन्जय से संजय, संजय से शुद्धोदन, शुद्धोदन से शाक्य, शाक्य (गौतम बुद्ध) से राहुल, राहुल से प्रसेनजित, प्रसेनजित् से क्षुद्रक, क्षुद्रक से कुंडक, कुंडक से सुरथ, सुरथ से सुमित्र, सुमित्र के भाई कुरुम से कुरुम से कच्छ, कच्छ से बुधसेन।*

*🚩बुधसेन से क्रमश: धर्मसेन, भजसेन, लोकसेन, लक्ष्मीसेन, रजसेन, रविसेन, करमसेन, कीर्तिसेन, महासेन, धर्मसेन, अमरसेन, अजसेन, अमृतसेन, इंद्रसेन, रजसेन, बिजयमई, स्योमई, देवमई, रिधिमई, रेवमई, सिद्धिमई, त्रिशंकुमई, श्याममई, महीमई, धर्ममई, कर्ममई, राममई, सूरतमई, शीशमई, सुरमई, शंकरमई, किशनमई, जसमई, गोतम, नल, ढोली, लछमनराम, राजाभाण, वजधाम (वज्रदानम), मधुब्रह्म, मंगलराम, क्रिमराम, मूलदेव, अनंगपाल, श्रीपाल (सूर्यपाल), सावन्तपाल, भीमपाल, गंगपाल, महंतपाल, महेंद्रपाल, राजपाल, पद्मपाल, आनन्दपाल, वंशपाल, विजयपाल, कामपाल, दीर्घपाल (ब्रह्मापल), विशनपाल, धुंधपाल, किशनपाल, निहंगपाल, भीमपाल, अजयपाल, स्वपाल (अश्वपाल), श्यामपाल, अंगपाल, पुहूपपाल, वसन्तपाल, हस्तिपाल, कामपाल, चंद्रपाल, गोविन्दपाल, उदयपाल, चंगपाल, रंगपाल, पुष्पपाल, हरिपाल, अमरपाल, छत्रपाल, महीपाल, धोरपाल, मुंगवपाल, पद्मपाल, रुद्रपाल, विशनपाल, विनयपाल, अच्छपाल (अक्षयपाल), भैंरूपाल, सहजपा,, देवपाल, त्रिलोचनपाल (बिलोचनपाल), विरोचनपाल, रसिकपाल, श्रीपाल (सरसपाल), सुरतपाल, सगुणपाल, अतिपाल, गजपाल (जनपाल), जोगेद्रपाल, भौजपाल (मजुपाल), रतनपाल, श्यामपा,, हरिचंदपाल, किशनपाल, बीरचन्दपाल, तिलोकपाल, धनपाल, मुनिकपाल, नखपाल (नयपाल), प्रतापपाल, धर्मपाल, भूपाल, देशपाल (पृथ्वीपाल), परमपाल, इंद्रपाल, गिरिपाल, रेवन्तपाल, मेहपाल (महिपाल), करणपाल, सुरंगपाल (श्रंगपाल), उग्रपाल, स्योपाल (शिवपाल), मानपाल, परशुपाल (विष्णुपाल), विरचिपाल (रतनपाल), गुणपाल, किशोरपाल (बुद्धपाल), सुरपाल, गंभीरपाल, तेजपाल, सिद्धिपाल (सिंहपाल), गुणपाल, ज्ञानपाल (तक गढ़ ग्यारियर राज किया), काहिनदेव, देवानीक, इसैसिंह (तक बांस बरेली में राज फिर ढूंढाड़ में आए), सोढ़देव, दूलहराय, काकिल, हणू (आमेर के टीकै बैठ्या), जान्हड़देव, पंजबन, मलेसी, बीजलदेव, राजदेव, कील्हणदेव, कुंतल, जीणसी (बाद में जोड़े गए), उदयकरण, नरसिंह, वणबीर, उद्धरण, चंद्रसेन, पृथ्वीराज सिंह (इस बीच पूणमल, भीम, आसकरण और राजसिंह भी गद्दी पर बैठे), भारमल, भगवन्तदास, मानसिंह, जगतसिंह (कंवर), महासिंह (आमेर में राजा नहीं हुए), भावसिंह गद्दी पर बैठे, महासिंह (मिर्जा राजा), रामसिंह प्रथम, किशनसिंह (कंवर, राजा नहीं हुए), कुंअर, विशनसिंह, सवाई जयसिंह, सवाई ईश्वरसिंह, सवाई मोधोसिंह, सवाई पृथ्वीसिंह, सवाई प्रतापसिंह, सवाई जगतसिंह, सवाई जयसिंह, सवाई जयसिंह तृतीय, सवाई रामसिंह द्वितीय, सवाई माधोसिंह द्वितीय, सवाई मानसिंह द्वितीय, सवाई भवानी सिंह (वर्तमान में गद्दी पर विराजमान हैं)*

*🚩अन्य तथ्य:*

*राजा लव से राघव राजपूतों का जन्म हुआ जिनमें बर्गुजर, जयास और सिकरवारों का वंश चला। इसकी दूसरी शाखा थी सिसोदिया राजपूत वंश की जिनमें बैछला (बैसला) और गैहलोत (गुहिल) वंश के राजा हुए। कुश से कुशवाह (कछवाह) राजपूतों का वंश चला।*

*🚩राम के दोनों पुत्रों में कुश का वंश आगे बढ़ा तो कुश से अतिथि और अतिथि से, निषधन से, नभ से, पुण्डरीक से, क्षेमन्धवा से, देवानीक से, अहीनक से, रुरु से, पारियात्र से, दल से, छल से, उक्थ से, वज्रनाभ से, गण से, व्युषिताश्व से, विश्वसह से, हिरण्यनाभ से, पुष्य से, ध्रुवसंधि से, सुदर्शन से, अग्रिवर्ण से, पद्मवर्ण से, शीघ्र से, मरु से, प्रयुश्रुत से, उदावसु से, नंदिवर्धन से, सकेतु से, देवरात से, बृहदुक्थ से, महावीर्य से, सुधृति से, धृष्टकेतु से, हर्यव से, मरु से, प्रतीन्धक से, कुतिरथ से, देवमीढ़ से, विबुध से, महाधृति से, कीर्तिरात से, महारोमा से, स्वर्णरोमा से और ह्रस्वरोमा से सीरध्वज का जन्म हुआ।*

*🚩कुश वंश के राजा सीरध्वज को सीता नाम की एक पुत्री हुई। सूर्यवंश इसके आगे भी बढ़ा जिसमें कृति नामक राजा का पुत्र जनक हुआ जिसने योग मार्ग का रास्ता अपनाया था। कुश वंश से ही कुशवाह, मौर्य, सैनी, शाक्य संप्रदाय की स्थापना मानी जाती है। एक शोधानुसार लव और कुश की 50वीं पीढ़ी में शल्य हुए, जो महाभारत युद्ध में कौरवों की ओर से लड़े थे। यह इसकी गणना की जाए तो लव और कुश महाभारतकाल के 2500 वर्ष पूर्व से 3000 वर्ष पूर्व हुए थे अर्थात आज से 6,500 से 7,000 वर्ष पूर्व।*

*🚩इसके अलावा शल्य के बाद बहत्क्षय, ऊरुक्षय, बत्सद्रोह, प्रतिव्योम, दिवाकर, सहदेव, ध्रुवाश्च, भानुरथ, प्रतीताश्व, सुप्रतीप, मरुदेव, सुनक्षत्र, किन्नराश्रव, अन्तरिक्ष, सुषेण, सुमित्र, बृहद्रज, धर्म, कृतज्जय, व्रात, रणज्जय, संजय, शाक्य, शुद्धोधन, सिद्धार्थ, राहुल, प्रसेनजित, क्षुद्रक, कुलक, सुरथ, सुमित्र हुए। माना जाता है कि जो लोग खुद को शाक्यवंशी कहते हैं वे भी श्रीराम के वंशज हैं।*

*तो यह सिद्ध हुआ कि वर्तमान में जो सिसोदिया, कुशवाह (कछवाह), मौर्य, शाक्य, बैछला (बैसला) और गैहलोत (गुहिल) आदि जो राजपूत वंश हैं वे सभी भगवान प्रभु श्रीराम के वंशज है। जयपूर राजघराने की महारानी पद्मिनी और उनके परिवार के लोग की राम के पुत्र कुश के वंशज है। महारानी पद्मिनी ने एक अंग्रेजी चैनल को दिए में कहा था कि उनके पति भवानी सिंह कुश के 309वें वंशज थे।*

*🚩इस घराने के इतिहास की बात करें तो 21 अगस्त 1921 को जन्में महाराज मानसिंह ने तीन शादियां की थी। मानसिंह की पहली पत्नी मरुधर कंवर, दूसरी पत्नी का नाम किशोर कंवर था और माननसिंह ने तीसरी शादी गायत्री देवी से की थी। महाराजा मानसिंह और उनकी पहली पत्नी से जन्में पुत्र का नाम भवानी सिंह था। भवानी सिंह का विवाह राजकुमारी पद्मिनी से हुआ। लेकिन दोनों का कोई बेटा नहीं है एक बेटी है जिसका नाम दीया है और जिसका विवाह नरेंद्र सिंह के साथ हुआ है। दीया के बड़े बेटे का नाम पद्मनाभ सिंह और छोटे बेटे का नाम लक्ष्यराज सिंह है।*
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*🚩मुसलमान भी राम के वंशज हैं?*

*हालांकि ऐसे कई राजा और महाराजा हैं जिनके पूर्वज श्रीराम थे। राजस्थान में कुछ मुस्लिम समूह कुशवाह वंश से ताल्लुक रखते हैं। मुगल काल में इन सभी को धर्म परिवर्तन करना पड़ा लेकिन ये सभी आज भी खुद को प्रभु श्रीराम का वंशज ही मानते हैं।*

*🚩इसी तरह मेवात में दहंगल गोत्र के लोग भगवान राम के वंशज हैं और छिरकलोत गोत्र के मुस्लिम यदुवंशी माने जाते हैं। राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली आदि जगहों पर ऐसे कई मुस्लिम गांव या समूह हैं जो राम के वंश से संबंध रखते हैं। डीएनए शोधाधुसार उत्तर प्रदेश के 65 प्रतिशत मुस्लिम ब्राह्मण बाकी राजपूत, कायस्थ, खत्री, वैश्य और दलित वंश से ताल्लुक रखते हैं।

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