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मंगलवार, 2 जून 2020

#कोविड19 स्कूली बच्चो के सभी अभिभावक जरूर पढ़ें

*कोविड 19,*  ( स्कूली बच्चो के सभी अभिभावक जरूर पढ़ें ) 

अपने मासूम बच्चो को कोरोना के सामने अकाल मृत्यु का निवाला बनने से रोकिए , निजी स्कूलों के झांसे में आने से बचे , एक साल स्कूलों का बायकॉट कीजिये !!!!!

 अब एक नया नाटक आरंभ होने जा रहा है।
 इस बार बलि के बकरे आपके हमारे बच्चे होंगे।
प्रदेश में एक जुलाई से स्कूल खोलने की बात की जा रही है।
अब स्कूल खोलने पर क्या होगा ,कितने भयावह परिणाम आपके और हमारे सामने आने वाले हैं ये कल्पना से परे है।
 कौन सा स्कूल इन बच्चों की जान की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेगा?? 
कौन सा स्कूल इन बच्चों को मास्क (वह भी ठीक से) पहनाकर रखेगा?? साबुन सैनिटाइजर का उपयोग बार बार करवाऐगा??  
और फिजिकल डिस्टेंसिंग की तो बात करना ही नहीं चाहिए, कौन ध्यान रखेगा इनका?
जब ये एक दिन की पिकनिक पर लापरवाही करते हैं, अपनी गपशप और फोन पर लगे रहते हैं तब रोज रोज की फिजिकल डिस्टेंसिंग, मास्क, सैनिटाइजर ये बच्चे सम्भालेंगे ऐसा सोचना हमारी नादानी होगी।
अपने बच्चों को अभी तो स्कूल भेजना उचित ही नहीं है, ये लोग एक्सपेरिमेंट बेसिस पर स्कूल खोलेंगे, *फीस लेंगे* और कोरोना के केसेस बढ़ने पर स्कूल सबसे पहले बंद करेंगे। 
दुर्भाग्यवश अगर कोई बच्चा कोरोना की चपेट में आ गया तो यह स्कूल वाले खबर लेने की कोशिश भी नहीं करेंगे।
क्या ये बच्चों की जान की गारंटी लेंगे ?
इतनी हड़बड़ी में, खासकर जब हम इस समय कोरोना इन्फेक्शन के पीक की प्रतीक्षा कर रहे हैं, हमारे नौनिहालों हमारे बच्चों को कोरोना का चारा बनाकर तमाशा देखना कहाँ की बुद्धिमानी है?
यह तो स्पष्ट समझा जा सकता है कि यह मामला केवल फीस की रकम के अरबों की हेराफेरी से ही संबंधित है,वरना बच्चे यदि 4-6 महीने बाद स्कूल जायेंगे तो क्या अंतर पड़ना है।यह तो तय है कि कोरोना इस साल जाने वाला नहीं है। 
वैसे भी हमारा स्कूल सिस्टम बच्चों को विकट परिस्थितियों में बचना (जिंदा बचे रहना) *कभी भी नहीं सिखाता है।*
यह तो बच्चों को हाथ कैसे धोना चाहिए अथवा दांतों पर ब्रश ठीक से कैसे करना है यह भी नहीं सिखाता है।
 स्कूल में lunch के पहले बच्चों को हाथ धोने की बात तक तो सिखाई नहीं जाती है??  
पर यही स्कूल फीस लेनी हो तो बच्चों को कोरोना के सामने डालने से गुरेज नहीं करता है।
ये वायरस पहले स्कूली बच्चों में एक से दूसरे में फैलेगा,फिर बच्चा घर आकर घर के दूसरे बच्चों, माता पिता, फिर बुजुर्गों में इन्फेक्शन फैलाऐगा। और इस तरह से यह वायरस पूरे घर को अपने आगोश में ले लेगा। 
 यह सच्चाई है,अगर हमने अपने बच्चों को बतौर Experiment स्कूल भेज दिया तो बहुत जल्दी अब हमें इस जानलेवा मुसीबत का भी सामना करना है। 
 ये कोरोना अब बच्चों के माध्यम से हमारे घरों में आकर फैलेगा।
जुलाई का महीना बरसात के मौसम का प्रारंभ है, बारिश और उमस के कारण वायरस और बैक्टीरिया बड़ी तेजी से फैलते हैं, कोरोना का ये वायरस इस सीजन में कितना भयानक रूप लेगा ये अकल्पनीय है।
ये सच है कि हर माता पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं, लेकिन बच्चों का भविष्य तो हम सब तब देखेंगे जब वह सुरक्षित होंगे। कोरोना लहर के सामने अपने बच्चों को स्कूल में  झोंक देने का अर्थ नरभक्षी जानवर के सामने बच्चों को लड़ने भेजने जैसा है।
यदि आप अभी भी अपने बच्चों को जल्दी स्कूल भेजना चाहते हैं तो स्वयं से कुछ प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास करें:
क्या आपको लग रहा है कि कोरोना वायरस का संक्रमण कम हो रहा है?
क्या आप ये मानते हैं कि कोरोना बच्चों पर रहम कर देगा ?
क्या ऑटो, टेंपो पर लटकते हुए बच्चों में फिजिकल डिस्टेंसिंग रह पायेगी?
 क्या स्कूल बस कोरोना संक्रमण से अछूती रह सकती है? 
क्या स्कूल के टीचर, आया बाई, चपरासी, बस ड्राइवर, कंडक्टर, गार्ड सभी कोरोना टेस्ट में नेगेटिव साबित होने के बाद ही बच्चों के सामने लाए जायेंगे?
एक एक कक्षा में जहां 40-50-60 बच्चे होते हैं वहां क्या 1-1 मीटर की दूरी बनाए रखी जाएगी?
क्या बच्चे इस दूरी का  8-9 घंटे पालन कर पाऐंगे?? 
प्रार्थना स्थल पर तथा छुट्टी के समय जब बच्चे आपस में टकराते हुए निकलते हैं तब क्या यह दूरी बनाए रखी जा सकेगी?
लगातार मास्क पहनने से शरीर में ऑक्सीजन की कमी (17%तक) देखी गई है, बच्चों को ऑक्सीजन की ज़रूरत हमसे ज़्यादा होती है, क्या बच्चे 8-9 घंटे मास्क लगा कर रह पाऐंगे?? 
समय समय पर मास्क कैसे उतारना, पुन: कैसे पहनना, पानी पीने व टिफिन खाते समय मास्क कैसे हटाना, उसके बाद हाथ  सैनिटाइजर से या सोप से कितनी देर तक कैसे धोना (रगड़ना) यह सब कौन बताएगा??
क्या पहले से काम के बोझ में दबा शिक्षक/शिक्षिका या स्कूल प्रबंधन आपके पैसे से कोई नया कोरोना सुपरवाइजर नियुक्त करेगा?
क्या बच्चों में कोरोना मॉरटालिटि कम होना आपके हिसाब से काफी है???
क्या बच्चे के इन्फेक्शन होने की अवस्था में स्कूल या शासन कोई जिम्मेदारी लेगा ?
इलाज के लाखों रूपए में कितना हिस्सा स्कूल या शासन वहन करेगा ?
कल को जब केसेस बढ़ेंगे, जो लगातार बढ़ रहें हैं, तब आपके गली मुहल्ले में होने वाली मौत आपको बच्चों समेत सेल्फ क्वाराईन्टिन को विवश कर देगी तब आपके बच्चे की पढ़ाई का साल और स्कूल में पटाई जा चुकी फीस का क्या होगा?
आपसे अनुरोध है कि एक जागरूक जनता और जिम्मेदार माता पिता बने और अपने बच्चों को कोरोना का ग्रास बनने न भेजें। तब तक जब तक कि स्थितियां पूरी तरह सामान्य ना हो जाऐं। 
आप किसी भी धर्म को मानने वाले हों या किसी भी राजनीतिक पार्टी के समर्थक हों, इतनी जल्दी स्कूल खोलने का विरोध करें।
बच्चे हमारी सम्पदा से बढ़कर हैं, उन्हें हम दॉव पर नहीं लगा सकते हैं। जिन्हें पैसे कमाने हैं उन्हें कमाने दीजिए, परन्तु इसके लिए हमारे बच्चे गोटियां नहीं बनेंगे।
आइए कोशिश करें कि स्कूल अभी न खोलें जाएं, हम सब मिलकर विरोध करेंगे तभी बात बनेगी।
यदि आपको इस पोस्ट में कुछ सही लगता है तो  इसे दूसरे पैरेंट्स को ज़रूर फारवर्ड करें।
🙏🏼🙏🏼☺️

रविवार, 24 मई 2020

बड़ी बड़ी नामी #ब्रांडेड #गारमेंट #कंपनियों की कुछ गंदी #मार्केटिंग (#dirty_marketing) के बारे में

बड़ी बड़ी नामी #ब्रांडेड #गारमेंट #कंपनियों की कुछ गंदी #मार्केटिंग  (#dirty_marketing) के बारे में बताना चाहूँगा।

मैं नही जानता कि आपने कभी इन ब्रांडेड कंपनियों की इस #गंदी_मार्केटिंग पर ध्यान दिया है या नही।

आमतौर पर जब हम किसी बड़ी नामी ब्रांडेड कंपनी के पैंट या जीन्स या हाफ पैंट खरीदते हैं तो हम मुख्यतया निम्नलिखित चीजों पर ध्यान देते हैं :-

    1. कपड़ा
    2. रंग
    3. डिज़ाइन
    4. फिटिंग
ये सभी नामी बड़ी ब्रांडेड कंपनी अच्छे कपड़े इस्तेमाल करती हैं जिसे देख कर हम ग्राहक उस रेडीमेड कपड़े को खरीद लेते हैं। लेकिन ये कंपनियां पॉकेट में लगने वाले कपड़े की क़्वालिटी बहोत ही घटिया रखते हैं।

#पॉकेट के लिए #घटिया कपड़ा इस्तेमाल करने के पीछे गंदी मार्केटिंग पालिसी है।

चूंकि कंपनी इस बात से अच्छी तरह वाकिफ हैं कि पैंट का कपड़ा अच्छी क्वालिटी का है इसलिए जल्दी फटेगा नही इसलिए ग्राहक दूसरा कपड़ा जल्दी नही खरीदेगा। किन्तु अगर पॉकेट का कपड़ा फट जायेगा तो ग्राहक दूसरा पैंट खरीदने के लिए मजबूर हो जाएगा। इस प्रकार कंपनी को रोटेशन में ग्राहक मिलता रहेगा और कंपनी की बिक्री होती रहेगी।

सुरक्षा कारणों से मैं किसी भी कंपनी का नाम नही लिख रहा हूँ लेकिन अगली बार जब आप बड़ी नामी कंपनी (खास कर #विदेशी #ब्रांड) का पैंट खरीदने जाएं तो पॉकेट के कपड़े पर अवश्य ध्यान दें।

उत्तर #पढ़ने के लिए #धन्यवाद। #अपवोट करने के लिए अग्रिम में धन्यवाद। उत्तर #शेयर करने के लिए अग्रिम शुक्रिया।

तक्षशिला के खंडहरो से क्षमा मांगनी ही होगी, नालंदा की ख़ाक छाननी ही होगी


यूरोप का सूरज डूबने जा रहा !!

मध्य युग में पूरे यूरोप पे राज करने वाला रोम ( इटली ) नष्ट होने के कगार पे आ गया, मध्य पूर्व को अपने कदमो से रौंदने वाला ओस्मानिया साम्राज्य (ईरान,सऊदी, टर्की) अब घुटनो पर हैं, जिनके साम्राज्य का सूर्य कभी अस्त नहीं होता था, उस ब्रिटिश साम्राज्य के वारिस बर्मिंघम पैलेस में कैद हैं !!

जो स्वयं को आधुनिक युग की सबसे बड़ी शक्ति समझते थे, उस रूस के बॉर्डर सील हैं, जिनके एक इशारे पर दुनिया के नक़्शे बदल जाते हैं, जो पूरी दुनिया के अघोषित चौधरी हैं ?

उस अमेरिका में लॉक डाउन है और जो आने वाले समय में सब को निगल जाना चाहते थे, वो चीन, आज मुँह छिपाता फिर रहा है और सब की गालियां खा रहा है।

एक जरा से परजीवी ने विश्व को घुटनो पर ला दिया! न एटम बम काम आ रहे न पेट्रो रिफाइनारी! मानव का सारा विकास एक छोटे से जीवाणु से सामना नहीं कर पा रहा!! क्या हुआ, निकल गयी हेकड़ी ?

बस इतना ही कमाया था आपने इतने वर्षों में, कि एक छोटे से जीव ने घरो में कैद कर दिया ??

और ये सब देश आशा भरी नज़रो से देख रहे हैं हमारे देश  की तरफ, उस भारत की ओर जिसका सदियों अपमान करते रहे, रोंदते रहे, लूटते रहे। एक मामूली से जीव ने आपको आपकी औकात बता दी !

भारत जानता है कि युद्ध अभी शुरू हुआ है, जैसे जैसे ग्लोबल वार्मिंग बढ़ेगी, ग्लेशियरो की बर्फ पिघलेगी, और आज़ाद होंगे लाखो वर्षो से बर्फ की चादर में कैद दानवीय विषाणु, जिनका न आपको परिचय है और न लड़ने की कोई तैयारी, ये कोरोना तो झांकी है, चेतावनी है, उस आने वाली विपदा की, जिसे आपने जन्म दिया है ।

 मेनचेस्टर की औद्योगिक क्रांति और हारवर्ड की इकोनॉमिक्स संसार को अंत के मुहाने पे ले आयी!

 क्या आप जानते हैं, इस आपदा से लड़ने का तरीका कहाँ छुपा है❓ 
👉 #तक्षशिला के खंडहरो में, #नालंदा की राख में, #शारदा_पीठ के अवशेषों में, #मार्तण्डय के पत्थरो में।।


सूक्ष्म एवं परजीवियों से मनुष्य का युद्ध नया नहीं है, ये तो सृष्टि के आरम्भ से अनवरत चल रहा है, और सदैव चलता रहेगा, इस से लड़ने के लिए के लिए हमने हर हथियार खोज भी लिया था, मगर आपके अहंकार, आपके लालच, स्वयं को श्रेष्ठ सिद्ध करने की हठ धर्मिता ने सब नष्ट कर दिया।

क्या चाहिए था आपको ???

स्वर्ण एवं रत्नो के भंडार ? यूँ ही मांग लेते, #राजा_बलि के वंशज और #कर्ण के अनुयायी आपको यूँ ही दान में दे देते❗

सांसारिक वैभव को त्यागकर आंतरिक शांति की खोज करने वाले #महावीर और #गौतम_बुद्ध के समाज के लिए वे सब यूँ भी मूल्यहिन ही थे, ले जाते। मगर आपने ये क्या किया❓

विश्व बंधुत्व की बात करने वाले समाज को नष्ट कर दिया? जिस बर्बर का मन आया वही भारत चला आया, रौंदने, लूटने, मारने, जीव में शिव को देखने वाले समाज को नष्ट करने।

कोई विश्व विजेता बनने के लिए #तक्षशिला_ को तोड़ कर चला गया, कोई सोने की चमक में अँधा होकर #सोमनाथ लूट कर ले गया, तो कोई किसी को खुद को ऊँचा दिखाने के लिए #नालंदा_ की किताबो को जला गया, किसी ने बर्बरता को जिताने के लिए #शारदा पीठ के टुकड़े टुकड़े कर दिया, तो किसी ने अपने झंडे को ऊंचा दिखाने के लिए विश्व कल्याण का केंद्र बने #गुरुकुल परंपरा को ही नष्ट कर दिया, और आज करुण निगाहों से देख रहे हैं...

उसी पराजित, अपमानित, पद दलित, भारत भूमि की ओर, जिसने अभी अभी अपने घावों को भरके अंगड़ाई लेना आरम्भ किया है❗

किन्तु, हम फिर भी निराश नहीं करेंगे, फिर से माँ भारती का आँचल आपको इस संकट की घडी में छाँव देगा, #श्रीराम के वंशज इस दानव से भी लड़ लेंगे !!

किन्तु, मार्ग उन्ही नष्ट हुए हवन कुंडो से निकलेगा, "जिन्हे कभी आपने अपने पैरों की ठोकर से तोड़ा था। आपको उसी नीम और पीपल की छाँव में आना होगा, जिसके लिए आपने हमारा उपहास किया था। आपको उसी गाय की महिमा को स्वीकार करना होगा, जिसे आपने अपने स्वाद का कारण बना लिया। उन्ही मंदिरो में जाकर घंटा नाद करना होगा, जिनको कभी आपने तोड़ा था। उन्ही वेदों को पढ़ना होगा, जिन्हे कभी अट्टहास करते हुए नष्ट किया था। उसी चन्दन तुलसी को मस्तक पर धारण करना होगा, जिसके लिए कभी हमारे मस्तक धड़ से अलग किये गए थे"❗

ये प्रकृति का न्याय है और आपको स्वीकारना होगा।

  फिर कहता हूँ, इस दुनिया को अगर जीना है, तो #_सोमनाथ में सर झुकाने आना ही होगा, #_तक्षशिला के खंडहरो से क्षमा मांगनी ही होगी, #_नालंदा की ख़ाक छाननी ही होगी। #मंदिरों के घंटानाद की तीव्र ध्वनि तरंगों को चहुओर फैलाना होगा।

हाथ जोड़कर अभिवादन करना आपने शुरू कर दिया है। बहुत जल्दी भारत की छांव में पूरी तरह आपको आना पड़ेगा❗❗

"सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया,
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु,
मा कश्चिद् दुःख भाग् भवेत्"

साभार...🙏

सोमवार, 18 मई 2020

_Best clarification provided, as below_*Stimulus Package by FM announcement 13.05.2020

_Best clarification provided, as below_
*Stimulus Package by FM announcement 13.05.2020*

1. *MSME Step-1*- 20% top-up loan, to outstanding loan (as on 29.02.2020) Collateral Free Automatic Loan for MSME. Those MSME having Loan upto 25cr and turnover upto 100cr will be covered in this scheme. 100% Central Govt Guaranteed. This loan will be for 4 Yrs with a Moratorium of 12 Months.

2. *MSME Step-2*- 20,000Cr will be infused as Subordinate Debt for stressed MSME thru CGTSME Trust. 

3. *MSME Step-3*- Their is a Fund of Fund to be created. Rs 50,000cr will be infused as equity to standard MSME. Will help them to expand their capacities.

4. *MSME Step-4*- Definition of MSME changed. Investment Limit which defines a SME is changed. Now Turnover criteria is also introduced. Different between manufacturing and service SME is removed. Micro Units- Investment limit increased to 1Cr from 20Lakh. And Turnover can be upto 5Cr. Other changes are also done. For Medium Enterprise the limit increased to 10 Cr Investment and turnover 50Cr. 20Cr and 100Cr

5. *MSME Step-5*- Tenders upto 200Cr relating to Govt procurement will not be Global Tenders any more. MSME will get big benefit out of it

6. *MSME Step-6*- All Central Govt outstanding will be cleared within 45 Days by Govt Help of all MSME.

7. *EPF Step-1*- EPF Payment was paid by Govt for Mar, April and May now Extended by another 3 Months. 12%+12% will be paid by Govt of India.

8. *EPF Step-2*- Contribution reduced from 12% to 10% for those organisation having more than 100 employee is done now.

9. *NBFC, MFI, HFC-Step-1*- Special 30,000cr Liquidity window will be given. Govt will buy debt papers of these institutions even if investment grade. These will be fully guaranteed by govt of India.

10. *NBFC Step-2*- To Give 45,000cr Liquidity to NBFC. First 20% Loss will be born by Govt of India. Even unrated papers will get money under this scheme.

11. *Discom Steps*- Discom not able to pay the power generation Companies. 90,000cr Special fund created to pay all outstanding of Power Generation Companies. PFC and REC will give this money

12. *Contractors Step* 6 Month extension will be given to all Govt contractors of Railways, Roads, Other departments. Govt Agencies will partially release Bank Guarantees to the extent of work completed. A Big Step.

13. *Realestate Step*- Covid19 can be treated as act of God. Using the Force Major Clause the project registration will be extended by 6 Month automatically. Completion dates of existing projects to be extended automatically by 6 Months by Govt authorities. 

14. *Tax Related Step*- Non Salaried TDS and TCS rates will be reduced by 25% (from existing Level rates). This will be effective from tomorrow and will remain till 31-03-2021.

15. *Tax Related Step*- All Pending Refunds will be issued immediately to all to 5 Lakhs. 
For AY 2020-21 the *ITR filing* Dates extended to 30th Nov 2020, And Tax Audit Date extended to 31st October 2020.

Income Tax reliefs announced by FM on 13.05.2020

*Income Tax reliefs announced by FM on 13.05.2020*

1. All pending refunds (apart from those which are less than 5lakhs recently cleared) to all other persons (Corporates and Trusts) shall be issued immediately.
2. 25% Reduction in existing TDS rates for the whole of FY 2020-21
3.  Due date for filing tax returns for all assessee's is extended to 30th November 2020 for FY 2019-20
4. Due date for tax audit is extended to 31st October 2020 for FY 2019-20 (Existing 30th September 2020)
5. Limitation of Time barring Assessments due on 30th September extended to 31st December 2020 and which are due on 31st March 2021 extended to 30th September 2021.
6. *Vivad se vishwas* payment extended till 31st December 2020 without any additional payment.

*Other Measures impact the business*
1. Reduction in PF contribution rates from 12% to 10% for next 3 months
2.Change in Definition of MSME

रविवार, 17 मई 2020

सभी *वरिष्ठ नागरिक* (55 से ऊपर की उम्र के) कृपया अवश्य पढ़ें,

👨‍🏫👩‍🏫 सभी *वरिष्ठ नागरिक* (55 से ऊपर की उम्र के) कृपया अवश्य पढ़ें, हो सकता है आपके लिए फायदेमंद हो .. 
           
*आप जानते हैं कि मन चाहे कितना ही जोशीला हो पर साठ की उम्र पार होने पर यदि आप अपनेआप को फुर्तीला और ताकतवर समझते हों तो यह गलत है।  वास्तव में ढलती उम्र के साथ शरीर उतना ताकतवर और फुर्तीला नहीं रह जाता।*

आपका शरीर ढलान पर होता है, जिससे ‘हड्डियां व जोड़ कमजोर होते हैं, पर *कभी-कभी मन भ्रम बनाए रखता है कि ‘ये काम तो मैं चुटकी में कर लूँगा’।*  पर बहुत जल्दी सच्चाई सामने आ जाती है मगर एक नुकसान के साथ।

सीनियर सिटिजन होने पर जिन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए, ऐसी कुछ टिप्स दे रहा हूं। 

 -- *धोखा तभी होता है जब मन सोचता है कि ‘कर लूंगा’ और शरीर करने से ‘चूक’ जाता है।  परिणाम एक एक्सीडेंट और शारीरिक क्षति!*

ये क्षति फ्रैक्चर से लेकर ‘हेड इंज्यूरी’ तक हो सकती है।  यानी कभी-कभी जानलेवा भी हो जाती है।

-- *इसलिए जिन्हें भी हमेशा हड़बड़ी में काम करने की आदत हो, बेहतर होगा कि वे अपनी आदतें बदल डालें।*

*भ्रम न पालें, सावधानी बरतें क्योंकि अब आप पहले की तरह फुर्तीले नहीं रहे।*

छोटी सी चूक कभी बड़े नुक़सान का कारण बन जाती है।

-- *सुबह नींद खुलते ही तुरंत बिस्तर छोड़ खड़े न हों, क्योंकि आँखें तो खुल जाती हैं मगर शरीर व नसों का रक्त प्रवाह पूर्ण चेतन्य अवस्था में नहीं हो पाता ।*

अतः पहले बिस्तर पर कुछ मिनट बैठे रहें और पूरी तरह चैतन्य हो लें।  कोशिश करें कि बैठे-बैठे ही स्लीपर/चप्पलें पैर में डाल लें और खड़े होने पर मेज या किसी सहारे को पकड़कर ही खड़े हों। अक्सर यही समय होता है डगमगाकर गिर जाने का।

-- गिरने की सबसे ज्यादा घटनाएं बाथरुम/वॉशरुम या टॉयलेट में ही होती हैं।  आप चाहे अकेले हों, पति/पत्नी के साथ या संयुक्त परिवार में रहते हों लेकिन बाथरुम में अकेले ही होते हैं।

-- *यदि आप घर में अकेले रहते हों, तो और अधिक सावधानी बरतें क्योंकि गिरने पर यदि उठ न सके तो दरवाजा तोड़कर ही आप तक सहायता पहुँच सकेगी, वह भी तब जब आप पड़ोसी तक समय से सूचना पहुँचाने में सफल हो सकेंगे।*

— *याद रखें बाथरुम में भी मोबाइल साथ हो ताकि वक्त जरुरत काम आ सके।*

-- देशी शौचालय के बजाय हमेशा यूरोपियन कमोड वाले शौचालय का ही इस्तेमाल करें।  यदि न हो तो समय रहते बदलवा लें, इसकी तो जरुरत पड़नी ही है, अभी नहीं तो कुछ समय बाद।

संभव हो तो कमोड के पास एक हैंडिल लगवा लें।  कमजोरी की स्थिति में इसे पकड़ कर उठने के लिए ये जरूरी हो जाता है।

बाजार में प्लास्टिक के वेक्यूम हैंडिल भी मिलते हैं, जो टॉइल जैसी चिकनी सतह पर चिपक जाते हैं, पर *इन्हें हर बार इस्तेमाल से पहले खींचकर जरूर जांच-परख लें।*

-- *हमेशा आवश्यक ऊँचे स्टूल पर बैठकर ही नहायें।*

बाथरुम के फर्श पर रबर की मैट जरूर बिछाकर रखें ताकि आप फिसलन से बच सकें।

-- *गीले हाथों से टाइल्स लगी दीवार का सहारा कभी न लें, हाथ फिसलते ही आप ‘डिस-बैलेंस’ होकर गिर सकते हैं।*

-- बाथरुम के ठीक बाहर सूती मैट भी रखें जो गीले तलवों से पानी सोख ले।  कुछ सेकेण्ड उस पर खड़े रहें फिर फर्श पर पैर रखें वो भी सावधानी से। 

-- *अंडरगारमेंट हों या कपड़े, अपने चेंजरूम या बेडरूम में ही पहनें।  अंडरवियर, पाजामा या पैंट खडे़-खडे़ कभी नहीं पहनें।*

हमेशा दीवार का सहारा लेकर या बैठकर ही उनके पायचों में पैर डालें, फिर खड़े होकर पहनें, वर्ना दुर्घटना घट सकती है।

*कभी-कभी स्मार्टनेस की बड़ी कीमत चुकानी पड़ जाती है।*

-- अपनी दैनिक जरुरत की चीजों को नियत जगह पर ही रखने की आदत डाल लें, जिससे उन्हें आसानी से उठाया या तलाशा जा सके।

*भूलने की आदत हो, तो आवश्यक चीजों की लिस्ट मेज या दीवार पर लगा लें, घर से निकलते समय एक निगाह उस पर डाल लें, आसानी रहेगी।*

-- जो दवाएं रोजाना लेनी हों, उनको प्लास्टिक के प्लॉनर में रखें जिससे जुड़ी हुई डिब्बियों में हफ्ते भर की दवाएँ दिन-वार के साथ रखी जाती हैं।

*अक्सर भ्रम हो जाता है कि दवाएं ले ली हैं या भूल गये।प्लॉनर में से दवा खाने में चूक नहीं होगी।*

-- *सीढ़ियों से चढ़ते उतरते समय, सक्षम होने पर भी, हमेशा रेलिंग का सहारा लें, खासकर ऑटोमैटिक सीढ़ियों पर।*

ध्यान रहे अब आपका शरीर आपके मन का *ओबिडियेंट सरवेन्ट* नहीं रहा।

— बढ़ती आयु में कोई भी ऐसा कार्य जो आप सदैव करते रहे हैं, उसको बन्द नहीं करना चाहिए। 

कम से कम अपने से सम्बन्धित अपने कार्य स्वयं ही करें।

— *नित्य प्रातःकाल घर से बाहर निकलने, पार्क में जाने की आदत न छोड़ें, छोटी मोटी एक्सरसाइज भी करते रहें। नहीं तो आप योग व व्यायाम से दूर होते जाएंगे और शरीर के अंगों की सक्रियता और लचीला पन कम होता जाएगा।  हर मौसम में कुछ योग-प्राणायाम अवश्य करते रहें।*

— *घर में या बाहर हुकुम चलाने की आदत छोड़ दें। अपना पानी, भोजन, दवाई इत्यादि स्वयं लें जिससे शरीर में सक्रियता बनी रहे।*

बहुत आवश्यक होने पर ही दूसरों की सहायता लेनी चाहिए। 

— *घर में छोटे बच्चे हों तो उनके साथ अधिक समय बिताएं, लेकिन उनको अधिक टोका-टाकी न करें।  उनको प्यार से सिखायें।*

-- *ध्यान रखें कि अब आपको सब के साथ एडजस्ट करना है न कि सब को आपसे।*

-- इस एडजस्ट होने के लिए चाहे, बड़ा परिवार हो,  छोटा परिवार हो या कि पत्नी/पति हो, मित्र हो, पड़ोसी या समाज।

*एक मूल मंत्र सदैव उपयोग करें।*    
    
1. *नोन* अर्थात नमक।  भोजन के प्रति स्वाद पर नियंत्रण रखें।   

2. *मौन*  कम से कम एवं आवश्यकता पर ही बोलें।   

3. *कौन* (मसलन कौन आया  कौन गया, कौन कहां है, कौन क्या कर रहा है) अपनी दखलंदाजी कम कर दें।                 

*नोन, मौन, कौन* के मूल मंत्र को जीवन में उतारते ही *वृद्धावस्था* प्रभु का वरदान बन जाएगी जिसको बहुत कम लोग ही उपभोग कर पाते हैं। 

*कितने भाग्यशाली हैं आप, इसको समझें।*

*कृपया इस संदेश को अपने घर, रिश्तेदारों, आसपड़ोस के वरिष्ठ सदस्यों को भी अवश्य प्रेषित करें।*

  
            *🙏🏻धन्यवाद!🙏🏻*

स्मार्ट फोन में "गूगल लेंस" सुविधा क्या है

 "गूगल लेंस" सुविधा क्या है।
देखिए यह एक बहुत ही अच्छा एप्लीकेशन है उस व्यक्ति के लिए,जो जिज्ञासा प्रवृत्ति का होता है, और जो अक्सर बाहरी यात्रा करता रहता है। क्यों कि सामान्यत हम अपने आसपास की तो बहुत सी चीजें जानते हैं लेकिन जब बाहर जाते हैं तो बहुत सी चीजें ऐसी देखने को मिलती है जिनके बारे में हम नहीं जानते। वो चीज कुछ भी हो सकती है जैसे, कोई प्लांट, कोई जीव, कोई प्रोडक्ट और कोई तस्वीर इत्यादि।
'गूगल लेंस' कैसे काम करता है
सबसे पहले आप इसे पलेस्टोर पर जाकर डाउनलोड कर सकते हैं।यह कुछ इस प्रकार का दिखाई देता है।👇👇👇
(इमेज स्रोत-गूगल प्लेस्टोर)[1]
जैसे ही आप इसको डाउनलोड करते हैं, डाउनलोड होने के बाद इसे खोल लिजिए।जो परमिशन मांगता है उन्हें अलाउ कर दिजिए।
इसमें आपको एक सर्च का ऑप्शन मिल जाएगा। उसे क्लिक करके उस प्रोडक्ट या प्लांट या तस्वीर पर ले जाइए। जैसे ही आप उसे किसी वस्तु पर लेकर जाते हैं तो उसपर छोटी-छोटी डॉट आने लगती हैं। जैसा कि नीचे चित्र में दिखाया गया है। जैसे ही आप उस डॉट पर क्लिक करते हैं आपको उस वस्तु से संबंधित जानकारी मिल जाती है।
(इमेज स्रोत-गूगल प्लेस्टोर)[2]
नोट:- इससे आप क्यू आर कोड, बार कोड, कोई एड्रेस आदि भी फाइंड कर सकते हैं।
है ना कमाल की एप्लिकेशन,अब आपको इसके बारे में जानकर कैसा लगा हमें बताइएगा जरूर।
फुटनोट

शनिवार, 16 मई 2020

आत्मनिर्भरता बनाम स्वदेशी आग्रह

आत्मनिर्भरता बनाम स्वदेशी आग्रह - 

विगत 2 दिनों से आत्मनिर्भरता शब्द को लेकर सोशल मीडिया के अधिकांश विद्वजन अपने अपने अर्थ लगा रहे है, कुछ लोग अपनी   जीवनचर्या को बदलने का भी ठान चुके है, ये भी राष्ट्र हित में ही है। कुछ बहुत दूर तक समझ रखने वाले लोग अपनी पूरी रचनात्मकता का उपयोग आत्मनिर्भरता के आह्वान का भांति भांति के उदहारण देकर मजाक बनाने में भी कर रहे है।
बड़े ही विश्वास के साथ देश के प्रधानमंत्री ने 130 करोड़ देशवासियों को संबोधित करते हुवे न केवल पुनः उठ खड़े होने, अपितु पहले से भी श्रेष्ठ भारत बनाने का आव्हान किया था, क्योंकि वे जानते थे की देश की जनता ने यदि ठान लिया तो देश को विश्व शक्ति बनने से कोई नहीं रोक सकता। 
और COVID-19 के काल ने पुरे विश्व में यह भली भांति स्पष्ट किया है ऐसे महासंकट का स्थानीय आत्मनिर्भरता के अतिरिक्त कोई बेहतर विकल्प हो ही नहीं सकता | 
चूँकि केवल वर्तमान संकट से लड़ना ही नहीं है अपितु देश को विश्व शक्ति बनाने का स्वप्न भी साकार करना है | अतः लोकल को बढ़ावा देने के साथ ही उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम् की अवधारणा पर भी बल दिया, क्योंकि केवल स्वदेशी शब्द का प्रयोग करने पर हम संकीर्णता में उलझ कर रह जाने वाले है। विश्वपटल पर यदि हम सिर्फ स्वदेशी को खरीदने का आग्रह रखेंगे तो क्या हम अपने प्रोडक्ट को विदेशों में बेचने की कल्पना कर सकते है ? 
अतः स्वदेशी का भाव आत्मसात करते हुवे हमारा आग्रह आत्मनिर्भर बनने की और रहना चाहिए |
आत्मनिर्भर का मतलब यह नही है की आई फोन की जगह लावा का फोन इस्तेमाल करना शुरु कर देना है। इसका मतलब है आई फोन जैसे फोन को निर्माण करने की क्षमता विकसित करनी है।
                आत्मनिर्भर का मतलब यह नहीं है की तुरन्त BMW को फेककर मारुती पर आ जाना है। इसका मतलब है BMW के क्वालिटी की गाङी हमारे देश के इंजिनीयर खुद विकसित कर सकें। आत्मनिर्भर का मतलब यह नहीं है राॅडो की घङी फेंककर टाईटन को लगा लेना है। इसका मतलब है खुद राॅडो के समानान्तर घङी को बनाने की क्षमता विकसित करना है।
                आत्मनिर्भर का मतलब यह नहीं है की देशी और विदेशी कंपनियों की लिस्ट बताकर जबरदस्ती देशी वस्तुएं खरीदना है। इसका मतलब ऐसा ब्रांड खङा कर देना है की लोग स्वयं उसे अपने पसंद से खरीदना शुरु कर दें। आज हम गर्व से कह सकते है की पतंजलि के दन्तकान्ति जैसा बेहतर टूथपेस्ट कोई दूसरा हमारी जानकारी में नहीं है | 
                आत्मनिर्भर का मतलब यह नहीं है कि हम चीन के सामान का आयात बन्द कर दें। इसका मतलब यह है की हमारा खुद का माल इतना सस्ता और अच्छा हो की चीन के माल को छोङकर लोग स्वयं ही उसे खरीद लें।
                आत्मनिर्भर का मतलब यह नहीं है की आप दुनिया भर के साॅफ्टवेयर का इस्तेमाल बन्द कर दें। इसका मतलब यह है की आप खुद इतना अच्छा साॅफ्टवेयर विकसित करें की दुनिया भर के लोग अपनी स्वेच्छा से उसका चयन करने को मजबूर हो जाय। 
         आत्मनिर्भरता को स्वदेशी शब्द के संकीर्ण अर्थ पर तौलना बन्द करिए। नये सिरे से सोचना शुरु करिए । आत्मनिर्भरता का मतलब केवल स्वदेशी खरीददारी मात्र नहीं है। इसका मतलब है देश और दुनिया को जिन वस्तुओं की, जिस क्वालिटी की आवश्यकता है, उन उन वस्तुओं को उन उन क्वालिटी का देश में बनाने की क्षमता विकसित करनी है। आत्मनिर्भरता का मतलब देश और दुनिया में गिङगिङा कर अपना माल बेचना नहीं है। इसका मतलब है की अपनी क्वालिटी और ब्रांडिंग इस स्तर की करनी है की लोग "बाई च्वाईस" उसे खरीदें।।
               आत्मनिर्भरता का मजाक उङाना स्वयं अपने वजूद का मजाक उङाना है। आत्मनिर्भर होना हर व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का स्वप्न होना ही चाहिए। देश को नई राह देने का भाव रखते हुवे एक साधु द्वारा देश को किए गए आह्वान का मजाक बनाने का अपराध साधु की हत्या के अपराध से कतई कम नहीं है। प्रभु इनके अपराधों को क्षमा करें।

जितेन्द्र लड्ढा 
राजसमन्द

गुरुवार, 14 मई 2020

अब इस महामारी से कम लोग, इसके डर के कारण लोग ज्यादा मरेंगे

ओशो गजब का ज्ञान दे गये, 
कोरोना जैसी महामारी के लिए

70 के दशक में हैजा भी महामारी के रूप में पूरे विश्व में फैला था, तब अमेरिका में किसी ने ओशो रजनीश जी से प्रश्न किया
-"इस महामारी से कैसे  बचें?"

ओशो ने विस्तार से जो समझाया वो आज कोरोना के सम्बंध में भी बिल्कुल प्रासंगिक है।

ओशो - "यह प्रश्न ही आप गलत पूछ रहे हैं,

प्रश्न ऐसा होना चाहिए था कि महामारी के कारण मेरे मन में मरने का जो डर बैठ गया है उसके सम्बन्ध में कुछ कहिए!

इस डर से कैसे बचा जाए?

क्योंकि वायरस से बचना तो बहुत ही आसान है,
लेकिन जो डर आपके और दुनिया के अधिकतर लोगों के भीतर बैठ गया है, उससे बचना बहुत ही मुश्किल है।

अब इस महामारी से कम लोग, इसके डर के कारण लोग ज्यादा मरेंगे।

’डर’ से ज्यादा खतरनाक इस दुनिया में कोई भी वायरस नहीं है।

इस डर को समझिये, 
अन्यथा मौत से पहले ही आप एक जिंदा लाश बन जाएँगे।
यह जो भयावह माहौल आप अभी देख रहे हैं, इसका वायरस आदि से कोई लेनादेना नहीं है।

यह एक सामूहिक पागलपन है, जो एक अन्तराल के बाद हमेशा घटता रहता है, कारण बदलते रहते हैं| कभी सरकारों की प्रतिस्पर्धा, कभी कच्चे तेल की कीमतें, कभी दो देशों की लड़ाई, तो कभी जैविक हथियारों की टेस्टिंग!

इस तरह का सामूहिक पागलपन समय-समय पर प्रगट होता रहता है। व्यक्तिगत पागलपन की तरह कौमगत, राज्यगत, देशगत और वैश्विक पागलपन भी होता है।
इस में बहुत से लोग या तो हमेशा के लिए विक्षिप्त हो जाते हैं या फिर मर जाते हैं ।

ऐसा पहले भी हजारों बार हुआ है, और आगे भी होता रहेगा और आप देखेंगे कि आने वाले बरसों में युद्ध तोपों से नहीं बल्कि जैविक हथियारों से लड़ें जाएंगे।

🌹मैं फिर कहता हूँ हर समस्या मूर्ख के लिए डर होती है, जबकि ज्ञानी के लिए अवसर!

इस महामारी में आप घर बैठिए| पुस्तकें पढ़िए| शरीर को कष्ट दीजिए और व्यायाम कीजिये, फिल्में देखिये| योग  कीजिये और एक माह में 15 किलो वजन घटाइए| चेहरे पर बच्चों जैसी ताजगी लाइये|
अपने शौक़ पूरे कीजिए।

मुझे अगर 15 दिन घर  बैठने को कहा जाए तो मैं इन 15 दिनों में 30 पुस्तकें पढूंगा और नहीं तो एक बुक लिख डालिये| इस महामन्दी में पैसा इन्वेस्ट कीजिये, ये अवसर है जो बीस तीस साल में एक बार आता है| पैसा बनाने की सोचिए| क्यों बीमारी की बात करके वक्त बर्बाद करते हैं?

ये ’भय और भीड़’ का मनोविज्ञान सब के समझ नहीं आता है।

’डर’ में रस लेना बंद कीजिए|

आम तौर पर हर आदमी डर में थोड़ा बहुत रस लेता है, अगर डरने में मजा नहीं आता तो लोग भूतहा फिल्म देखने क्यों जाते?

☘ यह सिर्फ़ एक सामूहिक पागलपन है जो अखबारों और TV के माध्यम से भीड़ को बेचा जा रहा है|

लेकिन सामूहिक पागलपन के क्षण में आपकी मालकियत छिन सकती है| आप महामारी से डरते हैं तो आप भी भीड़ का ही हिस्सा है|

ओशो कहते है...TV पर खबरें सुनना या अखबार पढ़ना बंद करें|

ऐसा कोई भी विडियो या न्यूज़ मत देखिये जिससे आपके भीतर डर पैदा हो|

महामारी के बारे में बात करना बंद कर दीजिए|

डर भी एक तरह का आत्म-सम्मोहन ही है। 
एक ही तरह के विचार को बार-बार घोकने से शरीर के भीतर रासायनिक बदलाव होने लगता है और यह रासायनिक बदलाव कभी कभी इतना जहरीला हो सकता है कि आपकी जान भी ले ले|

महामारी के अलावा भी बहुत कुछ दुनिया में हो रहा है, उन पर ध्यान दीजिए|

ध्यान-साधना से साधक के चारों तरफ एक प्रोटेक्टिव Aura बन जाता है, जो बाहर की नकारात्मक ऊर्जा को उसके भीतर प्रवेश नहीं करने देता है|
अभी पूरी दुनिया की उर्जा नकारात्मक  हो चुकी है|

ऐसे में आप कभी भी इस ब्लैक-होल में  गिर सकते हैं| ध्यान की नाव में बैठ कर ही आप इस झंझावात से बच सकते हैं।

शास्त्रों का अध्ययन कीजिए|
साधू-संगत कीजिए, और साधना कीजिए, विद्वानों से सीखें|

आहार का भी विशेष ध्यान रखिए, स्वच्छ जल पिएँ|

अंतिम बात:
धीरज रखिए| जल्द ही सब कुछ बदल जाएगा|

जब  तक मौत आ ही न जाए, तब तक उससे डरने की कोई ज़रूरत नहीं है और जो अपरिहार्य है उससे डरने का कोई अर्थ भी नहीं  है| 

डर एक प्रकार की मूढ़ता है| अगर किसी महामारी से अभी नहीं भी मरे तो भी एक न एक दिन मरना ही होगा, और वो एक दिन कोई भी दिन हो सकता है| इसलिए विद्वानों की तरह जियें, भीड़ की तरह  नहीं!"

www.sanwariya.org 

बुधवार, 13 मई 2020

#corona आने वाले समय मेंलोगों को बहुत सावधान रहना होगा

*ध्यानपूर्वक पढ़ें*
*सावधान* *सावधान*
शहरों या कस्बों में हम सभी को स्थिति से अवगत होना चाहिए।
एक बार लॉकडाउन आंशिक रूप से / पूरी तरह से उठा लिया जाता है।

हमें यातायात नियमों का पालन करने के लिए जिम्मेदार नागरिक होने की आवश्यकता है और अपने आप को ,अपने परिवार और अपने सामान को बचाने में सक्रिय रहें।
जितने भी इन दिनों लाँकडाउन रहेगा , उन सभी दिनों में ज्यादा कमाई नहीं थी, इसलिए नौकरी छूटने / व्यापार पर प्रभाव के कारण असामाजिक घटनाओं में अचानक उछाल आ सकता है।
1. लोगों को बहुत सावधान रहना होगा। इसमें घर के लोग, बच्चे, स्कूल और कॉलेज जाने वाले लड़के / लड़कियां, कामकाजी महिला/पुरुष शामिल हैं।
2. इस दौरान हो सके तो महंगी घड़ियाँ न पहनें।
3. महंगे चेन, चूड़ियां, ईयर रिंग्स न पहनें । अपने हैंड बैग्स के साथ सावधानी बरते ।
4. पुरुष हाई एंड वॉच, महंगे कंगन और चेन पहनने से परहेज कर सकते हैं।
5. अपने मोबाइल फोन का ज्यादा इस्तेमाल जनता(सार्वजनिक) में न करें।  सार्वजनिक रूप से मोबाइल का उपयोग कम से कम करने की कोशिश करें।
6. किसी भी अजनबी को हो सके तो वाहन में लिफ्ट न दे।
7. आवश्यकता से अधिक धन लेकर साथ भ्रमण पर न जाएं।
8. अपने क्रेडिट और डेबिट कार्ड को सुरक्षित रखें।
9. अपने बड़ों, पत्नी और बच्चों के कल्याण के बारे में जानने के लिए समय-समय पर घर पर फोन करते रहें।
10. घर के बड़ों और लोगों को निर्देश दें कि दरवाजे की घंटी बजाते समय मुख्य दरवाजे से सुरक्षित दूरी बनाए रखें, यदि संभव हो तो ग्रिल गेट को किसी पार्सल या पत्र प्राप्त करने के लिए ग्रिल के करीब न जाने दें।
11. बच्चों को जितना हो सके समय पर घर जल्दी लौटने की हिदायत दें।
12. घर तक पहुँचने के लिए किसी भी एकांत या छोटी शॉर्टकट वाली सड़कों का प्रयोग न करें , कोशिश यही करें कि अधिकतम मुख्य सड़कों का उपयोग करें।
13. जब आप बाहर होते हैं तो अपने आसपास के संघ्दित लोगों पर नजर रखें।
14. हमेशा हाथ में एक आपातकालीन नंबर होना चाहिए।
15. लोगों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
16. *पब्लिक ज्यादातर मास्क पहेनेगी*।  *पहचानना मुश्किल  होगा*।

17. जो कैब सेवाओं का उपयोग करते हैं, कृपया अपनी यात्रा का विवरण अपने माता-पिता, भाई-बहन, रिश्तेदारों, दोस्तों या अभिभावकों के साथ साझा करें।
18. सरकारी परिवहन प्रणाली की कोशिश करें और उसका उपयोग करें।
19. भीड़ वाली बसों से बचें।
20. अपने दैनिक सैर के लिए जाते समय उजाले में लगभग सुबह 6.00 बजे के आसपास जाएं, शाम को अधिकतम 8:00 बजे तक मुख्य सड़कों का उपयोग करें।  खाली सड़कों से बचें।
20. मॉल, समुद्र तट और पार्कों में ज्यादा समय न बिताएं।
21. अगर बच्चों को ट्यूशन क्लासेस अटेंड करना है तो बड़ों को उन्हें लाने एवं छोडने की जिम्मेदारी दें। 
22. अपने वाहनों में कोई कीमती सामान न छोड़ें।

कम से कम 3 महीने या समग्र स्थिति में सुधार होने तक इसका पालन करना होगा।
आप सभी को साझा करें ...
हमारे देश के लोगों के सर्वोत्तम हित में एक अधिसूचना जारी करने के लिए सभी अधिकारियों से अनुरोध करें।
*सुरक्षित रहें*
जनहित में जारी 
कैलाश चंद्र लड्ढा 
सांवरिया
www.sanwariya.org 

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