यह ब्लॉग खोजें

मंगलवार, 15 जून 2021

नई गाइड लाइन दिशा निर्देश:- कल से लागू। 16 जून 2021

नई गाइड लाइन दिशा निर्देश:- 

कल से लागू। 

राजस्थान सरकार गृह ( ग्रुप -7 ) विभाग कमांक प . 7 ( 1 ) गृह -7 / 2021 जयपुर , दिनांकः 15.06.2021 आदेश विषय : विभागीय समसंख्यक आदेश दिनांक 07.06.2021 त्रिस्तरीय जन - अनुशासन मॉडिफाइड लॉकडाउन दिशा - निर्देश 2.0 के क्रम में अतिरिक्त दिशा - निर्देश । 

विभागीय समसंख्यक आदेश दिनांक 07.06.2021 त्रिस्तरीय जन - अनुशासन मॉडिफाइड लॉकडाउन दिशा - निर्देश 2.0 की निरन्तरता में निम्नानुसार अतिरिक्त दिशा - निर्देश जारी किये जाते हैं : 

1. प्रदेश के ऐसे समस्त सरकारी / निजी कार्यालय जहां कार्मिकों की संख्या 10 से कम है , वहां 100 प्रतिशत कार्मिक एवं जिन कार्यालयों में कार्मिकों की संख्या 10 या 10 से अधिक है , उनमें 50 प्रतिशत कार्मिक अनुमत होंगे । 

सभी कार्मिकों द्वारा कोरोना प्रोटोकॉल ( विशेषकर 2 गज की दूरी ) की पालना सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा । 

2. किसी भी प्रकार की खेल - कूद संबंधी गतिविधियों का आयोजन सम्बन्धित परिसर / स्टेडियम में कोच के निर्देशन में कोविड प्रोटोकॉल की पालना सुनिश्चित करते हुए सोमवार से शनिवार प्रातः 06:00 बजे से सायं 04:00 बजे तक अनुमत होगा । 

3. पूर्णतः वातानुकूलित शॉपिंग कॉम्पलेक्स / मॉल सोमवार से शनिवार प्रातः 06:00 बजे से सायं 04:00 बजे तक खोलने की अनुमति होगी । 
उनमें स्थित दुकानें अथवा व्यवसायिक प्रतिष्ठान , भवन की मंजिलों के अनुसार खुलेंगे । जैसे प्रथम दिन बेसमेंट एवं प्रथम फ्लोर की दुकानें तथा उसके अगले दिन ग्राउण्ड फ्लोर एवं द्वितीय फ्लोर पर स्थित दुकानें , एक छोडकर एक ( Alternate ) खोली जा सकेगी । जन अनुशासन कमेटी द्वारा इसकी मॉनिटरिंग की जायेगी । 

4. रेस्टोरेन्ट्स आदि संचालकों द्वारा बैठाकर खिलाने की सुविधा सोमवार से शनिवार प्रातः 09:00 बजे से सायं 04:00 बजे तक रेस्टोरेन्ट की बैठक व्यवस्था का 50 प्रतिशत के साथ , एक छोडकर एक ( Alternate ) रूप से अनुमत होगी । 

रेस्टोरेन्ट्स संचालकों द्वारा वायु का उचित संचार ( proper ventilation ) , कोविड प्रोटोकॉल जैसे मास्क पहनना , दो गज की दूरी बनाए रखना इत्यादि की सख्ती से पालना सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा । उल्लंघन करने पर जिला प्रशासन द्वारा सम्बन्धित रेस्टोरेन्ट के विरूद्ध सीलिंग की कार्यवाही की जायेगी ।

रेस्टोरेन्ट्स द्वारा होम डिलीवरी की सुविधा रात्रि 10:00 बजे तक अनुमत होगी एवं Take away सुविधा सोमवार से शनिवार प्रातः 06:00 बजे से सायं 04:00 बजे तक अनुमत होगी । रेस्टोरेन्ट संचालकों द्वारा रेस्टारेन्ट्स की बैठक क्षमता DOIT के माध्यम से बनाए गये वेब पोर्टल पर E - intimation के माध्यम से दिनांक 21.06.2021 तक अपडेट करनी होगी ।

 5. होटल संचालकों द्वारा अपने इन हाऊस ( in - house ) गेस्ट को सर्विस देना अनुमत होगा । 

6. शहर में संचालित सीटी / मिनी बसों का संचालन प्रातः 05:00 बजे से सायं 05:00 बजे तक अनुमति होगा । किसी भी यात्री को खड़े होकर यात्रा करने की अनुमति नहीं होगी ( no standing ) |

 7. कोविड प्रोटोकॉल की पालना सुनिश्चित करते हुए मेट्रो रेल संचालन ( no standing ) की अनुमति होगी ।

 8. सिनेमा हॉल्स / थियेटर / मल्टीप्लेक्स को खोलने की अनुमति नहीं होगी । संचालकों द्वारा बैठक क्षमता DOIT द्वारा बनाए गये वेब पोर्टल पर E - intimation के माध्यम से दिनांक 21.06.2021 तक अपडेट करना अनिवार्य होगा । 

9. जिम एवं योगा सेन्टर को कोविड प्रोटोकॉल की पालना सुनिश्चित करते हुए सोमवार से शनिवार प्रातः 06:00 बजे से सायं 04:00 बजे तक खोलने की अनुमति होगी । संचालकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि जिम एवं योगा सेन्टर में वायु का उचित संचार ( proper ventilation ) हो , कोविड प्रोटोकॉल जैसे मास्क पहनना , दो गज की दूरी बनाए रखना इत्यादि की सख्ती से पालना की जाए । जिम एवं योगा सेन्टर संचालकों द्वारा जिम एवं योगा सेन्टर की क्षमता की सूचना DoIT द्वारा बनाए गये वेब पोर्टल पर E - intimation के माध्यम से दिनांक 21.06.2021 तक अपडेट करना अनिवार्य होगा । 

10. प्रदेश के समस्त पर्यटन स्थल , कला एवं संस्कृति से जुड़े स्मारकों को खोले जाने की अनुमति होगी । इस सम्बन्ध में पर्यटन विभाग एवं कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा पृथक से दिशा - निर्देश जारी किये जायेंगे । 

11. शनिवार सायं 05:00 से सोमवार प्रातः 5:00 बजे तक जन अनुशासन वीकेंड कप y रहेगा । इसके अलावा प्रतिदिन सायं 05:00 बजे से अगले दिन प्रातः 5:00 बजे तक जन अनुशासन कप y रहेगा । पूर्व में खोले जाने हेतु अनुमत समस्त बाजार / व्यवसायिक प्रतिष्ठान जोकि सोमवार से शुक्रवार तक अनुमत थे उन बाजारों / व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को सोमवार से शनिवार तक खोले जाने की अनुमति होगी । 

12. यह आदेश दिनांक 16 जून , 2021 बुधवार से प्रभावी होगा ।

#जोधपुरसिटी #jodhpurcity #Jodhpursuncity

अब बहुत सारी धार्मिक पुस्तक खरीदने की आवश्यकता नहीं है। इस अद्भुत लिंक में सबकुछ शामिल है।

All Vedas and Slokas in
9 major Indian languages in one link.


 Please keep this link  for your permanent reference.


अब बहुत सारी धार्मिक पुस्तक खरीदने की आवश्यकता नहीं है। इस अद्भुत लिंक में सबकुछ शामिल है।

🙏🏼 जय श्री राम🙏

निवेदक
कैलाश चंद्र लढा

लास्ट लेसन : कोरोना

लास्ट लेसन : कोरोना
---------------------------

सभी को देख लिया,
सालों साल सुबह नियम से गार्डन जाने वालों को भी,

खेलकूद खेलने वालों को भी,

जिमिंग वालों को भी,

रोजाना योगा करने वालों को भी,

'अर्ली टू बेड अर्ली टू राइज' रूटीन वाले अनुशासितों को भी,

कोरोना ने किसी को नहीं छोड़ा !!

उन स्वास्थ्य सजग व्यवहारिकों को भी, जिन्होंने फटाफट दोनों वैक्सीन लगवा ली थीं!!

बचा वही है, जिसका एक्स्पोज़र नहीं हुआ या कहिए कि किसी कारणवश वायरस से सामना नहीं हुआ!
हालांकि उनका खतरा अभी बरकरार है !!

दूसरी बात,
ऐसे बहुत लोग मृत्यु को प्राप्त हुए जिन्हें कोई को-मॉरबिडिटीज (अतिरिक्त बीमारियां) नहीं थीं!

वहीं, ऐसे अनेक लोग बहुत बिगाड़ के बावज़ूद बच गए जिनका स्वास्थ्य कमज़ोर माना जाता था.. और जिन्हें अनेक बीमारियां भी थीं!!

कारण क्या है ??

ध्यान से सुनिए,

हेल्थ, सिर्फ़ शरीर का मामला नहीं है !!

आप चाहें, तो खूब प्रोटीन और विटामिन से शरीर भर लें,
खूब व्यायाम कर लें और शरीर में ऑक्सीजन भर लें,
योगासन करें और शरीर को आड़ा तिरछा मोड़ लें,

मगर, संपूर्ण स्वास्थ्य सिर्फ  डायट, एक्सरसाइज़ और ऑक्सीजन से संबंधित नहीं है ..

चित्त, बुद्धि और भावना का क्या कीजिएगा ???

उपनिषदों ने बहुत पहले कह दिया था कि हमारे पांच शरीर होते हैं!

अन्न, प्राण, मन, विज्ञान और आनंदमय शरीर  !!

इसे ऐसे समझिए,

कि जैसे किसी प्रश्न पत्र में 20-20 नंबर के पांच प्रश्न हैं और टोटल मार्क्स 100 हैं !
सिर्फ बाहरी शरीर(अन्नमय) पर ध्यान देना ऐसा ही है, कि आपने 20 मार्क्स का एक ही क्वेश्चन अटेंप्ट किया है !
जबकि,

प्राण-शरीर का प्रश्न भी 20 नंबर का है,

भाव-शरीर का प्रश्न भी 20 नंबर का है,

बुद्धि और दृष्टा भी उतने ही नंबर के प्रश्न हैँ  !

जिन्हें हम कभी अटेम्प्ट ही नहीं करते, लिहाजा स्वास्थ्य के एग्जाम में फेल हो जाते हैं !

वास्तविक स्वास्थ्य पांचों शरीरों का समेकित रूप है  !

पांचों क्वेश्चंस अटेम्प्ट करना ज़रूरी हैं!

हमारे शरीर में रोग दो तरह से होता है  -

कभी शरीर में होता है और चित्त तक जाता है!

और कभी चित्त में होता है तथा शरीर में परिलक्षित होता है !!
दोनो स्थितियों में चित्तदशा अंतिम निर्धारक है!

कोरोना में वे सभी विजेता सिद्ध हुए, जिनका शरीर चाहे कितना कमजोर रहा हो, मगर चित्त मजबूत था ,

वहीं वे सभी हारे रहे, जिन का चित्त कमजोर पड़ गया  !!
अस्पताल में अधिक मृत्यु होने के पीछे भी यही बुनियादी कारण है!!

अपनों के बीच होने से चित्त को मजबूती मिलती है , जो स्वास्थ्य का मुख्य आधार है!

जिस तरह, गलत खानपान से शरीर में टॉक्सिंस रिलीज होते हैं

उसी तरह, कमज़ोर भावनाओं और गलत विचारों से चित्त में भी टॉक्सिंस रिलीज होते हैं !!

कोशिका हमारे शरीर की सबसे छोटी इकाई है  .. और एक कोशिका (cell) को सिर्फ न्यूट्रिएंट्स और ऑक्सीजन ही नहीं चाहिए बल्कि अच्छे विचारों की कमांड भी चाहिए होती है !

कोशिका की अपनी एक क्वांटम फील्ड होती है जो हमारी भावना और विचार से प्रभावित होती है!

 हमारे भीतर उठा प्रत्येक भाव और विचार,, कोशिका में रजिस्टर हो जाता है..फिर यह मेमोरी, एक सेल से दूसरी सेल में ट्रांसफर होते जाती है !!

यह क्वांटम फील्ड ही हमारे स्वास्थ्य की अंतिम निर्धारक है !

जीवन मृत्यु का अंतिम फैसला भी कोशिका की इसी बुद्धिमत्ता से तय होता है !!
इसीलिए,

बाहरी शरीर का रखरखाव मात्र एकांगी उपाय है!

भावना और विचार का स्वस्थ होना, स्थूल शरीर( gross body )के स्वास्थ्य से कहीं अधिक अहमियत रखता है !

हमारे बहुत से स्वास्थ्य सजग मित्र, खूब कसरत के बावजूद भी मोटे और बीमार हैं !

अनुवांशिकी के अलावा इस मोटापे का एक बड़ा एक बड़ा कारण भय, असुरक्षा और संग्रहण की मनोवृति भी है !!

नब्बे फीसदी बीमारियां मनोदेहिक ( psychosomatic) होती हैं!

अगर चित्त में भय है, असुरक्षा है, भागमभाग है.. तो रनिंग और जिमिंग जैसे उपाय अधिक काम नहीं आने वाले,

क्योंकि वास्तविक इम्युनिटी, पांचों शरीरों से मिलकर विकसित होती है!

यह हमारी चेतना के पांचों कोशो का  सुव्यवस्थित तालमेल है !!

और यह इम्यूनिटी रातों-रात नहीं आती, यह सालों-साल के हमारे जीवन दर्शन से विकसित होती है !!

असुरक्षा, भय, अहंकार और महत्वाकांक्षा का ताना-बाना हमारे अवचेतन में बहुत जटिलता से गुंथा होता है!

अनुवांशिकी, चाइल्डहुड एक्सपिरिएंसेस , परिवेश, सामाजिक प्रभाव आदि से मिलकर अवचेतन का यह महाजाल निर्मित होता है !!

इसमें परिवर्तन आसान बात नहीं !!

इसे बदलने में छोटे-मोटे उपाय मसलन..योगा, मेडिटेशन, स्ट्रेस मैनेजमेंट आदि ना-काफी हैं!

मानसिकता परिवर्तन के लिए, हमारे जीवन-दर्शन (philosophy of life) में आमूल परिवर्तन लाजमी है !!
मगर यह परिवर्तन विरले ही कर पाते हैं !

 मैंने अपने अनुभव में अनेक ऐसे लोग देखे हैं जो terminal disease से पीड़ित थे, मृत्यु सर पर खड़ी थी किंतु किसी तरह बचकर लौट आए !

जब वे लौटे तो कहने लगे कि

"हमने मृत्यु को करीब से देख लिया, जीवन का कुछ भरोसा नहीं है, अब हम एकदम ही अलग तरह से जिएंगे !"

किंतु बाद में पाया कि साल भर बाद ही वे वापस पुराने ढर्रे पर जीने लग गए हैं !

 वही ईर्ष्या, राग द्वेष, अभिनिवेश फिर से लौट आए  !
आमूल परिवर्तन बहुत कम लोग कर पाते हैं!

हमारे एक मित्र थे जो खूब जिम जाते थे!  एक बार उन्हें पीलिया हुआ और बिगड़ गया !

एक महीने में उनका शरीर सिकुड़ गया और वह गहन डिप्रेशन में चले गए !

दस साल जिस शरीर को दिए थे, वह एक महीने में ढह गया !!

अंततः इसी डिप्रेशन से उनकी मृत्यु भी हो गई !

 अंतिम वक्त में उन्हें डिप्रेशन इस बात का अधिक था कि अति-अनुशासन के चलते वे जीवन में मजे नहीं कर पाए,

 सुस्वादु व्यंजन नहीं चखे,

मित्रों के साथ नाचे गाए नहीं, लंगोट भी पक्के रहे.. मगर इतनी तपस्या से बनाया शरीर एक महीने में ढह गया  !!

जब वे स्वस्थ थे तो मैं अक्सर उनसे मजाक में कहा करता था

"शरीर में ऑक्सीजन तो डाल दिए हो, चेतना में प्रेम डाले कि नहीं ??

"शरीर में प्रोटीन तो भर लिए हो, चित्त में आनंद भरे कि नहीं? "

 छाती तो विशाल कर लिए हो, हृदय विशाल किए कि नहीं ?"

क्योंकि अंत में यही बातें काम आती हैं...

जीवन को उसकी संपूर्णता में जी लेने में भी ,

परस्पर संबंधों में भी, और स्वास्थ्य की आखिरी जंग में भी जीवन-दर्शन निर्धारक होता है, जीवन चर्या नहीं !!

कोरोना काल से हम यह सबक सीख लें तो अभी देर नहीं हुई  है!

बाहरी शरीर के भीतर परिव्याप्त चेतना का महा-आकाश अब भी हमारी उड़ान के लिए प्रतीक्षारत है !

सावधानी हटी दुर्घटना घटी सावधान रहें सुरक्षित रहे

एक शराबी की जब सुबह नींद खुली तो अचानक ही उसे याद आया कि कल रात जब वो अपने मित्रों के साथ पेलेस रोड स्थित गणेश  मंदिर से दर्शन करके घर आया तब अपनी बाईक वही भूल आया । बाईक भी महँगी थी कुछ दिनों पहले ही खरीदी थी, याद आते ही वह तुरंत ऑटो लेकर अपने घर से 7 km  मंदिर गया वहाँ जाकर अपनी बाईक ढूंढने लगा जो कि उसे मंदिर के पास जहा खड़ी की थी वहीं मिली, अपनी बाईक सही सलामत पाकर वो बड़ा खुश हुआ और 5 किलो शुद्ध देशी घी के लड्डू , ऐक बड़ी फूल माला और अगरबत्ती का पैकेट लेकर भगवान गणेश के मंदिर में पहुचा । हाथ जोड़कर भगवान को धन्यवाद देकर खुशी खुशी मंदिर से बाहर आया ।


बाहर आते ही उसके होश उड़ गए क्योंकि उसकी बाईक जो कल रात से सही सलामत खड़ी थी अब चोरी हो चुकी थी ।
😊
😂 
😊

ठीक इसी तरह कुछ लोग जो इस मुगालते में है कि कोरोना से अभी तक हमे कुछ नही हुआ तो आगे भी कुछ नही होगा और कुछ लोग जो ये सोचते है कि हमने वैक्सीन के दोनों डोज़ लगवा लिये है और अब कोरोना हमारा कुछ नही बिगाड़ सकता उन लोगो से यही कहना चाहूंगा कि जो बाईक रात भर में चोरी ना हुई सुबह चंद लम्हो में चोरी हो गयी क्यो ? 
आगे आप समझदार है क्योंकि
*सावधानी हटी दुर्घटना घटी*
*सावधान रहें सुरक्षित रहे*
*अपना और अपनों का  ख्याल रखे*
*कोविड़ नियमो का पालन करे* ।। धन्यवाद ।।,

टाइटैनिक फ़िल्म के अंत में रोज़ हीरे के हार को समुद्र में क्यों फेंक देती है?

 

टाइटैनिक फ़िल्म के अंत में रोज़ हीरे के हार को समुद्र में क्यों फेंक देती है?

क्योंकि समुद्र में डूबे टाइटैनिक की खोज करनेवाली बोट पर जाने का उसका मकसद यही था.

यदि आप इसपर विचार करें तो- बहुत अधिक वृद्ध और कमज़ोर होने के बाद भी रोज़ ने बीच समुद्र में स्थित बोट तक जाने के लिए यात्रा करने का कष्ट क्यों उठाया? क्या उसने ऐसा केवल अपनी लंबी दुखद कहानी सुनाने के लिए किया, जिसे वह फोन पर भी या टाइटैनिक के अन्वेषकों को उनके तट पर लौटने के बाद भी सुना सकती थी?

रोज़ केल्दाइश नामक उस बोट पर इसलिए जाना चाहती थी क्योंकि वह टाइटैनिक की समाधिस्थल के ठीक ऊपर थी. उसने अन्वेषकों को अपनी कहानी इसलिए सुनाई क्योंकि वह उसके जीवन का सार और गहरा रहस्य था, जिसे सुना जाना ज़रूरी था. वह जैक के त्याग और अपने जीवन में उसके स्थान के बारे में अंततः सबको बताकर उसे वह सम्मान दिलाना चाहती थी जिसका वह हकदार था.

रोज़ ने अन्वेषकों को अपनी दुखांत कहानी का छोटे-से-छोटा किस्सा भी तफ़सील से सुनाया, और उस स्थान पर सुनाया जो इस काम के लिए सर्वथा उपयुक्त था. यह वह जगह थी जहां जैक ने रोज़ के लिए अपने जीवन को दांव पर लगा दिया था.

फिर रोज़ ने वह काम किया जिसे करने के लिए वह वहां गई थी. उसने वह हीरे का हार समुद्र को वापस सौंप दिया. ऐसा करने के पीछे कुछ खास वजह थी.

पहली यह कि फ़िल्म दर्शकों को यह बताना चाहती थी कि हीरे का वह हार उस समय तक रोज़ के पास ही था. वह चाहती तो उसे बेचकर अमेरिका में अपनी नई ज़िंदगी की शानदार शुरुआत कर सकती थी, क्योंकि हादसे से बचने के बाद उसके पास कुछ भी नहीं था. वह हादसे से पहले के जीवन का अपना नाम उपयोग में नहीं लाना चाहती था, क्योंकि तब उसका मंगेतर उसे खोज लेता और उसे विवाह करने पर मजबूर कर देता. हीरे का वह हार उसके पास अंत समय तक होने से यह बात साबित होती थी कि उसने अमेरिका में अपने जीवन की शुरुआत शून्य से की, और उसके किरदार को स्थापित करने के लिए यह बात बहुत महत्वपूर्ण है. हीरे के हार को अंत में समुद्र में अर्पित कर देना उसके लिए बहुत ज़रूरी बन गया था. यह हमें बताता है कि रोज़ बहुत मजबूत व्यक्तित्व के रूप में विकसित हुई थी.

दूसरी बात यह है कि इस बात से हमें इसका पता चलता है कि रोज़ जैक से ताउम्र प्रेम करती रही, हालांकि उसने हादसे के बाद किसी से विवाह भी कर लिया था. लेकिन अपने हृदय के एक कोने में उसने जैक को हमेशा संजो कर रखा. वह उसे और उसके त्याग को कभी नहीं भूली.

अंत में, हीरे के हार को समुद्र में छोड़ते समय वह जैक को मुक्त कर देती है. हार को पानी में छोड़ते हुए वह यह सुनिश्चित कर देती है कि कोई और इसे कभी न प्राप्त कर सके. वह जैक के स्मृतिचिह्न को उसे वापस कर देती है. यही कारण है कि वह टाइटैनिक की समाधिस्थल पर तैर रही नौका तक गईः ताकि कोई दूसरी स्त्री कभी भी उस हार को नहीं पहन सके या रोज़ की मृत्यु होने के बाद उसे बेचकर रूपयों में बदल सके. हीरे के उस हार का नाम था "the Heart of the Ocean". और रोमानी भाव में कहें तो रोज़ का हृदय ही वह हार था. और इस हृदय पर केवल जैक का ही अधिकार था.

"स्त्री का हृदय रहस्यों का गहरा सागर है - A woman's heart is a deep ocean of secrets."

उस हार को तिलांजलि देकर रोज़ अपने जीवन के हर रहस्य को उस स्थान पर मुक्त कर देती है जहां उनका जन्म हुआ था.

function disabled

Old Post from Sanwariya