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रविवार, 2 जनवरी 2022

आधारकार्ड से वोटर कार्ड को जोड़ के मोदी जी ने विपक्ष को नोटबन्दी से भी गहरी चोट लगेगी

*आधार कार्ड*
   🇮🇳🇮🇳🇮🇳

हमारा आधार कार्ड मोबाइल नंबर से जुड़ा हुआ है
हमारा आधार कार्ड बैंक एकाउंट से जुड़ा हुआ है

हमारा आधार कार्ड रेलवे के टिकट बुक करने वाली IRCTC की वेबसाइट पर पहचान पत्र के रूप में जुड़ा हुआ है 
हमारा आधार कार्ड हवाई टिकट से जुड़ा हुआ है

हमारा आधार कार्ड राशन कार्ड से जुड़ा हुआ है
हमारा आधार कार्ड जीवन बीमा LIC मेडिकल कार्ड से जुड़ा हुआ है

हमारा आधार कार्ड टीकाकरण सर्टिफिकेट से जुड़ा हुआ है
हमारा आधार कार्ड PAN कार्ड से जुड़ा हुआ है

रसोई गैस सिलिंडर से जुड़ा हुआ है
बिजली पानी के कनेक्शन से.. उसके बिल से जुड़ा हुआ है

हमारा आधार कार्ड बाइक मोटर साइकिल स्कूटर कार या जिस गाड़ी ऑटो ट्रक बस के हम मालिक हैं
उससे जुड़ा हुआ है..
उसके फाइनेंस के कागजों से जुड़ा हुआ है

हमारा आधार कार्ड हमारी गाड़ी की RC 
हमारे ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ा हुआ है 

और तो और..
हमारा आधार कार्ड फेसबुक ट्विट्टर मैट्रिमोनियल साइट्स के वेरिफाइड प्रोफाइल और एकाउंट तक से जुड़ा हुआ है

हमारा आधार कार्ड बच्चों के स्कूल में.. उनकी क्लास की मैडम के रजिस्टर तक में चढ़ा हुआ है
😀😀😀😀

*इतनी सारी चीजों से जुड़े होने पर भी किसी की निजता का हनन नहीं होता*
*प्राइवेसी को खतरा नहीं होता*

विपक्ष को भी इतनी सारी चीजों से आधार कार्ड जुड़ा हो तो कोई दिक्कत नहीं है

*बस आधार कार्ड अगर वोटर आई कार्ड से जुड़ जाय तो इनको यह निजता पर खतरा दिखाई देता है*

वाह क्या कहने..
कितना बड़ा ढोंग है यह
सोचिए जरा..!!

*सच तो यह है कि खान्ग्रेस सहित इसके काले धन से पैदा की हुई पार्टियां हर राज्य में किराए के वोटर पैदा किये पड़ी हैं*

आज गोवा में चुनाव हो तो बंगाल से लाखों फर्जी वोटर उधर ठेल दिए जाते हैं
बिल्कुल आधार कार्ड ..वोटर कार्ड के साथ ..सौ प्रतिशत सही कागजों के साथ

*दिल्ली में चुनाव होता है..*
*दूसरे राज्यों से ..अगल बगल युप्पी से हरियाणा से.. दिल्ली की हर विधानसभा में 2000 वोटर आधार कार्ड और वोटर आइडेंटिटी कार्ड सहित भेज दिए जाते हैं*

आज हर विधानसभा चुनाव में ये भाड़े के वोटर ही जीत हार तय कर रहे हैं
जहाँ हार जीत हजार पंद्रह सौ वोट से तय हो रही है

*विपक्ष क्यों बिलबिला रहा है*
*अब आप समझ गए होंगे*

ये मोदी जी ने भी ना..
चौंका दिया बिल्कुल..

*आधारकार्ड से वोटर कार्ड को जोड़ के मोदी जी ने विपक्ष को..*
*नोटबन्दी से भी गहरी चोट लगेगी.....!*

#ModiMatters 🤔

आखिर RSS की स्थापना क्यों हुई.?

RSS संस्था क्यों बनी* 
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आखिर RSS की स्थापना क्यों हुई.? इस प्रश्न का उत्तर पूरा पढ़िए.. 

संसद में मोदी जी ने हामिद मियां पर तंज कसते हुए कहा था कि आपके परिवार के लोगों ने खिलाफत आंदोलन में भाग लिया था, जिस पर हामिद मियां खींसे निपोरते रह गए !

*तो क्या था यह खिलाफत आंदोलन?* जिसे सुनते ही हामिद मियां और कांग्रेस असहज हो उठी? जानने के लिए पूरी पोस्ट को अंत तक अवश्य पढ़ें।

खिलाफत जानने से पहले आइए पहले जरा खलीफा को जान लें।

खलीफा एक अरबी शब्द है, जिसे अंग्रेज़ी में Caliph (खलीफ) या अरबी भाषा मे Khalifah (खलीफा) कहा जाता है।

*तो कौन होता है खलीफा?*

खलीफा मुसलमानों का वह धार्मिक शासक (सुल्तान) होता है जिसे मुसलमान मुहम्मद साहब का वारिस या successor मानते हैं।

खलीफा का काम होता है युद्ध कर के पूरे विश्व पर इस्लाम का निज़ाम कायम करना (जो कश्मीर में बुरहान वानी करना चाहता था)।

यानी इस्लाम की ऐसी हुकूमत कायम करना जिसमे इस्लामिक यानी शरीया कानून चले और जिसमे इस्लाम के अलावा किसी और धर्म की इजाज़त नही होती है।

जितने हिस्से या राज्य पर खलीफा राज करता है उसे Caliphate यानी अरबी भाषा में Khilafa (खिलाफा) कहते हैं।

*खलीफा* यानी इस्लामिक सुल्तान और *खिलाफा* यानी इस्लामिक राज्य ।

1919-22 के दौरान Turkey यानी तुर्की में *ओटोमन वंश* के आखिरी सुन्नी खलीफा *अब्दुल हमीद-2* का खिलाफा यानी शासन चल रहा था जो कि जल्दी ही धराशाई होने वाला था। 

इस आखिरी इस्लामिक खिलाफा (शासन) को बचाने के लिए अब्दुल हमीद-2 ने *जिहाद का आवाहन* किया ताकि विश्व के मुसलमान एक हो कर इस आखिरी खिलाफा यानी इस्लामिक शासन को बचाने आगे आएं।

पूरे विश्व मे इसकी कोई प्रतिक्रिया नही हुई सिवाए भारत के। भारत के अलावा एशिया का कोई भी दूसरा देश इस मुहिम का हिस्सा नही बना। 

लेकिन भारत के कुछ मुट्ठी भर मुसलमान इस मुहिम से जुड़ गए और हजारों किलोमीटर दूर , सात समंदर पार *तुर्की के खिलाफा यानी इस्लामिक शासन* को बचाने और अंग्रेज़ों पर दबाव बनाने निकल पड़े, जबकि इस समय भारत खुद गुलाम था और अपनी आजादी के लिए संघर्ष कर रहा था।

लेकिन अंतः 1922 में तुर्की से सुलतान के इस्लामिक शासन को उखाड़ फेंका गया और वहाँ सेक्युलर लोकतंत्र राज्य की स्थापना हुई और कट्टर मुसलमानों का पूरे विश्व पर राज करने का सपना टूट गया, इसी सपने को संजोए आजकल ISIS काम कर रहा है ।

भारत के चंद मुसलमानों ने अंग्रेज़ी हुकूमत पर दबाव बनाने के लिए बाकायदा एक आंदोलन खड़ा किया , जिसका नाम था खिलाफा आंदोलन (Caliphate movement)

अब क्योंकि अंग्रेज़ी में लिखे जाने पर इसका हिन्दी उच्चारण खलिफत होता है (अरबी में caliphate को khilafa=खिलाफा लिखते है, 

तो *कांग्रेस ने बड़ी ही चतुराई से इसका नाम खिलाफत आंदोलन रख दिया* ताकि देश की जनता को मूर्ख बनाया जा सके और लोगों को लगे कि यह खिलाफत आंदोलन अंग्रेज़ो के खिलाफ है।

जबकि इसका असल मकसद *purely religious* यानी पूर्णतः धार्मिक था, इसका भारत की आज़ादी या उसके आंदोलन से कोई लेना देना नही था।

 *कुछ समझ मे आया?*

कैसे शब्दों की बाज़ीगरी से जनता को मूर्ख बनाया जा रहा था।

कैसे खलिफत को खिलाफत बताया जा रहा था, (ठीक वैसे ही जैसे Feroze Khan Ghandi (घांदी) को Feroze Gandhi (फ़िरोज़ गांधी) बना दिया गया) ।

उस समय भारत मे इतने पढ़े लिखे लोग और नेता नही थे कि गांधी-नेहरू की इस चाल को समझ सकें।

लेकिन इन सब के बीच कांग्रेस में एक पढ़ा लिखा व्यक्तित्व उपस्थित था, जिनका नाम था *डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार* था ! 

इन्होंने  इस आंदोलन का जम कर विरोध किया , क्योंकि खिलाफा सिर्फ तुर्की तक सीमित नही रहना था, इसका उद्देश्य तो पूरे विश्व पर इस्लाम की हुकूमत कायम करना था जिसमे गज़वा-ए-हिन्द यानी भारत भी शामिल था !

डॉ हेगड़ेवार ने कांग्रेस के गांधी और नेहरू को बहुत समझने की कोशिश की , लेकिन वे नही माने, *अंतः डॉ हेगड़ेवार ने कांग्रेस के इस खिलाफत आंदोलन का विरोध किया* और कांग्रेस छोड़ दी !

तो अब समझ मे आया मित्रों की कांग्रेसी जो कहते हैं कि RSS ने आज़ादी के आंदोलन का विरोध किया था, तो वो असल मे किस आंदोलन का विरोध था? आप डॉ हेगड़ेवार के स्थान पर होते तो क्या करते? 

क्या आप भारत को गज़वा-ए-हिन्द यानी इस्लामिक देश बनते देखते? या फिर डॉ साहब की भांति इसका विरोध करते?

*1919 में खिलाफत आंदोलन* शुरू हुआ था और 1920 में डॉ हेगड़ेवार ने कांग्रेस छोड़ दी और सभी को इस आंदोलन के बारे में जागरूक किया कि इस आंदोलन का भारत की स्वतंत्रता से कोई लेना देना नही है और यह *एक इस्लामिक आंदोलन है !*

जिसका परिणाम यह हुआ कि यह आंदोलन बुरी तरह फ्लॉप हुआ ! और 1922 में अंतिम इस्लामिक हुकूमत धराशाई हो गयी !

मुस्लिम नेता इस से बौखला गए और मन ही मन *हिन्दुओ और संघ  को अपना शत्रु मानने लगे* और इसका बदला उन्होंने 1922-23 में केरल के मालाबार में हिन्दुओ पर हमला कर के लिया ! 

और असहाय अनभिज्ञ *हिन्दुओ को बेरहमी से काटा गया*, हिन्दू लड़कियों की इज़्ज़त लूटी गई, जबकि इस आंदोलन का भारत या उसके पड़ोसी देशों तक से कोई लेना देना नही था ।

*1923 के दंगों में गांधी ने* हिन्दुओ को ही दोषी ठहराते हुए हिन्दुओ को कायर और बुजदिल कहा था, गांधी ने कहा हिन्दू अपनी कायरता के लिए मुसलमानों को दोषी ठहरा रहे हैं। 

अगर हिन्दू अपने जान माल की सुरक्षा नही कर सकता, तो इसमें मुसलमानों का क्या दोष? 

*हिन्दुओ की औरतों की इज़्ज़त लूटी जाती है* तो इसमें हिन्दू दोषी है, कहां थे उसके रिश्तेदार जब उस लड़की की इज़्ज़त लूटी जा रही थी? 

कुलमिला कर गांधी ने सारा दोष दंगा प्रभावित हिन्दुओ पर मढ़ दिया और कहा कि उन्हें हिन्दू होने पर शर्म आती है, जब हिन्दू कायर होगा तो मुसलमान उस पर अत्याचार करेगा ही ।

डॉ हेगड़ेवार को अब समझ आ चुका था कि सत्ता के भूखे भेड़िये, भारत की जनता की बलि देने से नही चूकेंगे।

इसलिए उन्होंने हिन्दुओ की रक्षा और उनको एकजुट करने के उद्देश्य से तत्काल *एक नया संगठन* बनाने का काम प्रारंभ कर दिया और अंततः 1925 में संघ *(RSS)*  की स्थापना हुई ! 

आज अगर हम होली और दीवाली मानते हैं, आज अगर हम हिन्दू हैं , तो केवल उसी खिलाफत आंदोलन के विरोध और *संघ की स्थापना की कारण*, अन्यथा तो जाने कब का *गज़वा-ए-हिन्द* बन चुका होता ।

13 साल के बच्चे का यौन उत्पीड़न करने के दोषी पादरी को विशेष को उम्रकैद

*🚩इस खबर पर मीडिया ने न डिबेट की और न ही ब्रेकिंग न्यूज चलाई, छुपाने के पैसे मिले क्या?*

*02 जनवरी 2022*
azaadbharat.org

*🚩इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हो अथवा प्रिंट मीडिया उसपर कई बुद्धिजीवी लोगों ने आरोप लगाया है कि कोई पेड खबर चलाने के जितने पैसे लेते हैं उससे ज्यादा पैसे कोई खास खबर छुपाने के पैसे भी लेते हैं।*

*🚩अक्सर देखा गया है कि जभी किसी साधु-संत पर षड्यंत्र के तहत कोई झूठा आरोप भी लगता है तो मीडिया महीनों तक प्राइम टाइम में ब्रेकिंग न्यूज़ व डिबेट चलाती है, उदाहरण के लिए- शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वतीजी और संत आशारामजी बापू; उनके खिलाफ कई महीनों तक झूठी खबरें दिखाई, अन्य और भी साधु/संतों के प्रति ऐसे ही खबर चलाते हैं लेकिन किसी पादरी अथवा मौलवी पर अपराध सिद्ध भी हो जाये तो भी कोई खबर नहीं दिखाई जाती है। इससे साफ होता है कि मीडिया झूठी खबरें चलाने व कई वास्तविक खबरें छुपाने के भी पैसे लेती होगी।*

*🚩इस खबर पर मीडिया मौन रही...*
*👉मुंबई के उपनगरीय क्षेत्र दादर में 2015 में 13 साल के बच्चे का यौन उत्पीड़न करने के दोषी पादरी को विशेष अदालत ने बुधवार को उम्रकैद की सजा सुनाई।*

*👉विशेष न्यायाधीश सीमा जाधव ने आरोपी पादरी जॉनसन लॉरेंस को यौन अपराध से बच्चों की सुरक्षा (पॉक्सो) कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत दोषी पाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, अगस्त से नवंबर 2015 के बीच पादरी ने दो बार नाबालिग बच्चे का यौन उत्पीड़न किया।*

*👉पुलिस को दिए गए बयान में किशोर ने बताया कि वह 27 नवंबर, 2015 को अपने भाई के साथ दादर के शिवाजी नगर इलाके में स्थित चर्च गया था। प्रार्थना के बाद आरोपी ने एक बक्सा रखने के लिए पीड़ित को अंदर बुलाया और दरवाजा बंद करके उसका यौन उत्पीड़न किया।*

*👉बच्चे ने आरोप लगाया कि पादरी ने कुछ महीने पहले भी उसके साथ ऐसा ही किया था। पीड़ित बच्चे ने मजिस्ट्रेट के समक्ष भी यही बयान दिया। विशेष लोक अभियोजक वीणा शेलार ने बताया कि इस मुकदमे में कम से कम नौ लोगों की गवाही हुई।*
https://twitter.com/ANI/status/1476456374385078274?t=v5rGAtMX_ZvUPJ3lihZeaA&s=19

*🚩सेक्युलर, बुद्धिजीवी और मीडिया के अधिकांश हिस्से हिन्दू धर्म के पवित्र मंदिरों, आश्रमों व साधु-संतों पर षड्यंत्र के तहत कोई आरोप भी लगा दे तो खूब बदनाम करते हैं, परंतु दुनियाभर में पादरी बच्चों का शोषण करते हैं फिर भी इन ईसाई पादरियों के दुष्कर्मों पर चुप रहते हैं। क्या उन्हें वेटिकन सिटी से भारी फंडिंग मिलती है?*

*🚩भारत में साधु-संत देश, समाज और संस्कृति के उत्थान के लिए कार्य कर रहे हैं। उनको साजिश के तहत झूठे केस में जेल भेजा जाता है और मीडिया द्वारा पेड न्यूज एवं डिबेट दिखाकर तथा "आश्रम" जैसी फिल्में बनाकर उनको बदनाम किया जाता है। वहीं दूसरी ओर कई मौलवी व ईसाई पादरी मासूम बच्चे-बच्चियों और ननों के साथ रेप करते हैं, उनकी जिंदगी तबाह कर देते हैं फिर भी बिकाऊ मीडिया और प्रकाश झा जैसे बिकाऊ निर्देशक इसको देखकर आँखों पर पट्टी बांध लेते हैं क्योंकि इनको पवित्र हिन्दू साधु-संतों को बदनाम करने के पैसे मिलते है और हिंदू सहिष्णु हैं तो इन षड्यंत्रों को सहन कर लेते हैं।*

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शनिवार, 1 जनवरी 2022

काश ये सब हमारी प्राथमिक शिक्षा की पद्धति में शामिल होता

काश ये सब हमारी प्राथमिक शिक्षा की पद्धति में शामिल होता

दूध ना पचे तो ~ सोंफ
दही ना पचे तो ~ सोंठ
छाछ ना पचे तो ~जीरा व काली मिर्च
अरबी व मूली ना पचे तो ~ अजवायन
कड़ी ना पचे तो ~ कड़ी पत्ता,
तैल, घी, ना पचे तो ~  कलौंजी...
पनीर ना पचे तो ~ भुना जीरा,
भोजन ना पचे तो ~ गर्म जल
केला ना पचे तो  ~ इलायची             
ख़रबूज़ा ना पचे तो ~ मिश्री का उपयोग करें...

1.योग,भोग और रोग ये तीन अवस्थाएं है।
2. लकवा - सोडियम की कमी के कारण होता है ।
3. हाई वी पी में -  स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे ।
4. लो बी पी - सेंधा नमक डालकर पानी पीयें ।
5. कूबड़ निकलना- फास्फोरस की कमी ।
6. कफ - फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है , फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है । गुड व शहद खाएं 
7. दमा, अस्थमा - सल्फर की कमी ।
8. सिजेरियन आपरेशन - आयरन , कैल्शियम की कमी ।
9. सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें ।
10. अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें ।
11. जम्भाई- शरीर में आक्सीजन की कमी ।
12. जुकाम - जो प्रातः काल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें ।
13. ताम्बे का पानी - प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें ।
14. किडनी - भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये ।
15. गिलास एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेसटेन्स अधिक होता है । गिलास अंग्रेजो ( पुर्तगाल) की सभ्यता से आयी है अतः लोटे का पानी पियें,  लोटे का कम  सर्फेसटेन्स होता है ।
16. अस्थमा , मधुमेह , कैंसर से गहरे रंग की वनस्पतियाँ बचाती हैं ।
17. वास्तु के अनुसार जिस घर में जितना खुला स्थान होगा उस घर के लोगों का दिमाग व हृदय भी उतना ही खुला होगा ।
18. परम्परायें वहीँ विकसित होगीं जहाँ जलवायु के अनुसार व्यवस्थायें विकसित होगीं ।
19. पथरी - अर्जुन की छाल से पथरी की समस्यायें ना के बराबर है । 
20. RO का पानी कभी ना पियें यह गुणवत्ता को स्थिर नहीं रखता । कुएँ का पानी पियें । बारिस का पानी सबसे अच्छा , पानी की सफाई के लिए सहिजन की फली सबसे बेहतर है ।
21. सोकर उठते समय हमेशा दायीं करवट से उठें या जिधर का स्वर चल रहा हो उधर करवट लेकर उठें ।
22. पेट के बल सोने से हर्निया, प्रोस्टेट, एपेंडिक्स की समस्या आती है । 
23. भोजन के लिए पूर्व दिशा , पढाई के लिए उत्तर दिशा बेहतर है ।
24. HDL बढ़ने से मोटापा कम होगा LDL व VLDL कम होगा ।
25. गैस की समस्या होने पर भोजन में अजवाइन मिलाना शुरू कर दें ।
26. चीनी के अन्दर सल्फर होता जो कि पटाखों में प्रयोग होता है , यह शरीर में जाने के बाद बाहर नहीं निकलता है। चीनी खाने से पित्त बढ़ता है । 
27. शुक्रोज हजम नहीं होता है फ्रेक्टोज हजम होता है और भगवान् की हर मीठी चीज में फ्रेक्टोज है ।
28. वात के असर में नींद कम आती है ।
29. कफ के प्रभाव में व्यक्ति प्रेम अधिक करता है ।
30. कफ के असर में पढाई कम होती है ।
31. पित्त के असर में पढाई अधिक होती है ।
33. आँखों के रोग - कैट्रेक्टस, मोतियाविन्द, ग्लूकोमा , आँखों का लाल होना आदि ज्यादातर रोग कफ के कारण होता है ।
34. शाम को वात -नाशक चीजें खानी चाहिए ।
35. प्रातः 4 बजे जाग जाना चाहिए ।
36. सोते समय रक्त दवाव सामान्य या सामान्य से कम होता है ।
37. व्यायाम - वात रोगियों के लिए मालिश के बाद व्यायाम , पित्त वालों को व्यायाम के बाद मालिश करनी चाहिए । कफ के लोगों को स्नान के बाद मालिश करनी चाहिए ।
38. भारत की जलवायु वात प्रकृति की है , दौड़ की बजाय सूर्य नमस्कार करना चाहिए ।
39. जो माताएं घरेलू कार्य करती हैं उनके लिए व्यायाम जरुरी नहीं ।
40. निद्रा से पित्त शांत होता है , मालिश से वायु शांति होती है , उल्टी से कफ शांत होता है तथा उपवास(लंघन) से बुखार शांत होता है ।
41. भारी वस्तुयें शरीर का रक्तदाब बढाती है , क्योंकि उनका गुरुत्व अधिक होता है ।
42. दुनियां के महान वैज्ञानिक का स्कूली शिक्षा का सफ़र अच्छा नहीं रहा, चाहे वह 8 वीं फेल न्यूटन हों या 9 वीं फेल आइस्टीन हों , 
43. माँस खाने वालों के शरीर से अम्ल-स्राव करने वाली ग्रंथियाँ प्रभावित होती हैं ।
44. तेल हमेशा गाढ़ा खाना चाहिएं सिर्फ लकडी वाली घाणी का , दूध हमेशा पतला पीना चाहिए ।
45.छिलके वाली दाल-सब्जियों से कोलेस्ट्रोल हमेशा घटता है ।
46. कोलेस्ट्रोल की बढ़ी हुई स्थिति में इन्सुलिन खून में नहीं जा पाता है । ब्लड शुगर का सम्बन्ध ग्लूकोस के साथ नहीं अपितु कोलेस्ट्रोल के साथ है ।
47.मिर्गी दौरे में अमोनिया या चूने की गंध सूँघानी चाहिए ।
48.सिरदर्द में एक चुटकी नौसादर व अदरक का रस रोगी को सुंघायें ।
49. भोजन के पहले मीठा खाने से बाद में खट्टा खाने से शुगर नहीं होता है । 
50.भोजन के आधे घंटे पहले सलाद खाएं उसके बाद भोजन करें । 
51. अवसाद में आयरन , कैल्शियम , फास्फोरस की कमी हो जाती है । फास्फोरस गुड और अमरुद में अधिक है 
52. पीले केले में आयरन कम और कैल्शियम अधिक होता है । हरे केले में कैल्शियम थोडा कम लेकिन फास्फोरस ज्यादा होता है तथा लाल केले में कैल्शियम कम आयरन ज्यादा होता है । हर हरी चीज में भरपूर फास्फोरस होती है, वही हरी चीज पकने के बाद पीली हो जाती है जिसमे कैल्शियम अधिक होता है ।
53. छोटे केले में बड़े केले से ज्यादा कैल्शियम होता है ।
54.रसौली की गलाने वाली सारी दवाएँ चूने से बनती हैं ।
55.  हेपेटाइट्स A से E तक के लिए चूना बेहतर है ।
56. एंटी टिटनेस के लिए हाईपेरियम 200 की दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दे ।
57. ऐसी चोट जिसमे खून जम गया हो उसके लिए नैट्रमसल्फ दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दें । बच्चो को एक बूंद पानी में डालकर दें । 
58. मोटे लोगों में कैल्शियम की कमी होती है अतः त्रिफला दें । त्रिकूट ( सोंठ+कालीमिर्च+ मघा पीपली ) भी दे सकते हैं ।
59. अस्थमा में नारियल दें । नारियल फल होते हुए भी क्षारीय है ।दालचीनी + गुड + नारियल दें ।
60. चूना बालों को मजबूत करता है तथा आँखों की रोशनी बढाता है । 
61. दूध का सर्फेसटेंसेज कम होने से त्वचा का कचरा बाहर निकाल देता है ।
62. गाय की घी सबसे अधिक पित्तनाशक फिर कफ व वायुनाशक है ।
63. जिस भोजन में सूर्य का प्रकाश व हवा का स्पर्श ना हो उसे नहीं खाना चाहिए 
64. गौ-मूत्र अर्क आँखों में ना डालें ।
65. गाय के दूध में घी मिलाकर देने से कफ की संभावना कम होती है लेकिन चीनी मिलाकर देने से कफ बढ़ता है।
66.मासिक के दौरान वायु बढ़ जाता है , 3-4 दिन स्त्रियों को उल्टा सोना चाहिए इससे  गर्भाशय फैलने का खतरा नहीं रहता है । दर्द की स्थति में गर्म पानी में देशी घी दो चम्मच डालकर पियें ।
67.रात में आलू खाने से वजन बढ़ता है ।
68.भोजन के बाद बज्रासन में बैठने से वात नियंत्रित होता है ।
69.भोजन के बाद कंघी करें कंघी करते समय आपके बालों में कंघी के दांत चुभने चाहिए । बाल जल्द सफ़ेद नहीं होगा ।
70.अजवाईन अपान वायु को बढ़ा देता है जिससे पेट की समस्यायें कम होती है 
71.अगर पेट में मल बंध गया है तो अदरक का रस या सोंठ का प्रयोग करें 
72. कब्ज होने की अवस्था में सुबह पानी पीकर कुछ देर एडियों के बल चलना चाहिए । 
73. रास्ता चलने, श्रम कार्य के बाद थकने पर या धातु गर्म होने पर दायीं करवट लेटना चाहिए । 
74. जो दिन मे दायीं करवट लेता है तथा रात्रि में बायीं करवट लेता है उसे थकान व शारीरिक पीड़ा कम होती है ।
75. बिना कैल्शियम की उपस्थिति के कोई भी विटामिन व पोषक तत्व पूर्ण कार्य नहीं करते है ।
76.स्वस्थ्य व्यक्ति सिर्फ 5 मिनट शौच में लगाता है ।
77.भोजन करते समय डकार आपके भोजन को पूर्ण और हाजमे को संतुष्टि का संकेत है ।
78.सुबह के नाश्ते में फल , दोपहर को दही व रात्रि को दूध का सेवन करना चाहिए । 
79. रात्रि को कभी भी अधिक प्रोटीन वाली वस्तुयें नहीं खानी चाहिए । जैसे - दाल , पनीर , राजमा , लोबिया आदि । 
80. शौच और भोजन के समय मुंह बंद रखें , भोजन के समय टी वी ना देखें । 
81.मासिक चक्र के दौरान स्त्री को ठंडे पानी से स्नान , व आग से दूर रहना चाहिए । 
82. जो बीमारी जितनी देर से आती है , वह उतनी देर से जाती भी है ।
83. जो बीमारी अंदर से आती है , उसका समाधान भी अंदर से ही होना चाहिए ।
84.एलोपैथी ने एक ही चीज दी है , दर्द से राहत । आज एलोपैथी की दवाओं के कारण ही लोगों की किडनी , लीवर , आतें , हृदय ख़राब हो रहे हैं । एलोपैथी एक बिमारी खत्म करती है तो दस बिमारी देकर भी जाती है । 
85. खाने की वस्तु में कभी भी ऊपर से नमक नहीं डालना चाहिए , ब्लड-प्रेशर बढ़ता है । 
86 .रंगों द्वारा चिकित्सा करने के लिए इंद्रधनुष को समझ लें , पहले जामुनी , फिर नीला ..... अंत में लाल रंग । 
87 .छोटे बच्चों को सबसे अधिक सोना चाहिए , क्योंकि उनमें वह कफ प्रवृति होती है , स्त्री को भी पुरुष से अधिक विश्राम करना चाहिए 
88. जो सूर्य निकलने के बाद उठते हैं , उन्हें पेट की भयंकर बीमारियां होती है , क्योंकि बड़ी आँत मल को चूसने लगती है । 
89.बिना शरीर की गंदगी निकाले स्वास्थ्य शरीर की कल्पना निरर्थक है , मल-मूत्र से 5% , कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ने से 22 %, तथा पसीना निकलने लगभग 70 % शरीर से विजातीय तत्व निकलते हैं ।
90. चिंता , क्रोध , ईर्ष्या करने से गलत हार्मोन्स का निर्माण होता है जिससे कब्ज , बबासीर , अजीर्ण , अपच , रक्तचाप , थायरायड की समस्या उतपन्न होती है ।
91.गर्मियों में बेल , गुलकंद , तरबूजा , खरबूजा व सर्दियों में सफ़ेद मूसली , सोंठ का प्रयोग करें ।
92. प्रसव के बाद माँ का पीला दूध बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को 10 गुना बढ़ा देता है । बच्चो को टीके लगाने की आवश्यकता नहीं होती  है ।
93. रात को सोते समय सर्दियों में देशी मधु लगाकर सोयें त्वचा में निखार आएगा 
94. दुनिया में कोई चीज व्यर्थ नहीं , हमें उपयोग करना आना चाहिए।
95.जो अपने दुखों को दूर करके दूसरों के भी दुःखों को दूर करता है , वही मोक्ष का अधिकारी है । 
96.सोने से आधे घंटे पूर्व जल का सेवन करने से वायु नियंत्रित होती है , लकवा , हार्ट-अटैक का खतरा कम होता है । 
97.स्नान से पूर्व और भोजन के बाद पेशाब जाने से रक्तचाप नियंत्रित होता है। 
98 .तेज धूप में चलने के बाद , शारीरिक श्रम करने के बाद , शौच से आने के तुरंत बाद जल का सेवन निषिद्ध है 
99. त्रिफला अमृत है जिससे वात, पित्त , कफ तीनो शांत होते हैं । इसके अतिरिक्त भोजन के बाद पान व चूना ।  
100. इस विश्व की सबसे मँहगी दवा लार है , जो प्रकृति ने तुम्हें अनमोल दी है ,इसे ना थूके।
🙏🙏🙏🙏🙏

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गुरुवार, 30 दिसंबर 2021

संघ की शाखाओं का Placement देखकर Cambridge, Harvard, Oxford, IIM, IIT, BIT, NIT और पूरी दुनिया हैरान..


 ✍संघ की शाखाओं का Placement देखकर
Cambridge, Harvard, Oxford, IIM, IIT, BIT, NIT और पूरी दुनिया हैरान..

राष्ट्रपति,,,
उपराष्ट्रपति,,,
प्रधानमंत्री,,,
गृहमंत्री,,,
लोकसभा सभापती,,,

और

18 मुख्यमंत्री,,,
29 राज्यपाल,,,
1 लाख शाखाएं,,,
15 करोड़ स्वयंसेवक,,,
2 लाख सरस्वती विद्यामंदिर,,,
5 लाख आचार्य,,,
एक करोड़ विद्यार्थी,,,
2 करोड़ भारतीय मजदूर संघ के सदस्य,,,
1 करोड़ ABVP के कार्यकर्ता,,,
15 करोड़ बीजेपी सदस्य,,,
1200 प्रकाशन समूह,,,
9 हजार पूर्णकालिक एवं,,,
7 लाख पूर्व सैनिक परिषद,,,
1 करोड़ विश्व हिन्दू परिषद् सदस्य (पूरे विश्व में),,,
30 लाख बजरंग दल के हिन्दुत्व सेवक,,,
1.5 लाख सेवाकार्य,,,
18 राज्यों में सरकारें,,,
283 लोकसभा सांसद,,,
58 राज्यसभा सांसद,,,
1460 विधायक,,,          

वनवासी कल्याण आश्रम,
वनबंधु परिषद,
संस्कार भारती,
विज्ञान भारती,
लघु उद्योग भारती,
सेवा सहयोग,
सेवा इंटरनॅशनल,
राष्ट्रीय सेविका समिती,
आरोग्य भारती,
दुर्गा वाहिनी,
सामाजिक समरसता मंच,
ऑर्गनाजर,
पांच्यजन्य,
श्रीरामजन्म भूमी मंदिर निर्माण न्यास,
दीनदयाळ शोध संस्थान,
भारतीय विचार साधना,
संस्कृत भारती,
भारत विकास परिषद,
जम्मूकाश्मीर स्टडी सर्कल,
दृष्टी संस्थान,
हिंदू हेल्पलाईन,
हिंदू स्वयंवसेवक संघ,
हिंदू मुन्नानी,
अखिल भारतीय साहित्य परिषद,
भारतीय किसान संघ,
विवेकानंद केंद्र,
तरुण भारत,
अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत,
हिंदुस्थान समाचार,
विश्व संवाद केंद्र,
जनकल्याण रक्तपेढी,
इतिहास संकलन समिती,
स्त्री शक्ती जागरण,
एकल विद्यालय,
धर्म जागरण,
भारत भारती,
सावरकर अध्यासन,
शिवाजी अध्यासन,
पतित पावन संघटना,
हिंदू एकता
और ऐसी कई अनेक

बस इतना सा है RSS बाबू जी...!!!

ये कांग्रेस या कम्युनिस्ट पार्टी नहीं है जो इतनी जल्दी इसकी जड़े हिल जाएँगी,,,, बड़े बड़े सूरमा RSS मुक्त भारत के सपने देखते देखते दुनिया से ही चले गए...।
95 साल का आरएसएस आने वाले हजारो साल तक भारतवर्ष की सेवा करेगा।

परम: वैभवम ने तुम्हे तत्व राष्ट्रम:।

भारत माता की जय,
वन्देमातरम्।🙏

टेटनस रोग का कारण क्लॉस्ट्रीडियम टेटनाई नामक जीवाणु


 

ढेरों लोगों की तरह उनका भी सोचना था कि ज़ंग-लगी कील चुभने से टेटनस हो जाता है।

मैं यह नहीं कहूँगा कि उनका सोचना ग़लत था। लेकिन विचार की संक्षिप्तता के अपने लाभ हैं और सुदीर्घता के अपने। सो ज़ंग-लगी कील के चुभने से टेटनस के होने में सत्यता तो है। पर कितनी ? और किस तरह से यह चुभन इस रोग जो जन्म दे सकती है ?


टेटनस रोग का कारण क्लॉस्ट्रीडियम टेटनाई नामक जीवाणु हैं। ये जीवाणु हमारे आसपास की मिट्टी में बहुतायत में मौजूद हैं। जब ये किसी तरह से हमारे शरीर के भीतर प्रवेश कर जाते हैं , तो वहाँ प्रजनन करते हुए टॉक्सिन यानी विष का निर्माण करते हैं। यह विष पूरे शरीर पर अपना दुष्प्रभाव दिखाता है। यही विषैला दुष्प्रभाव ही टेटनस-रोग है।

टेनिस का रैकेट देखा है आपने ? मिट्टी में मौजूद टेटनसकारी जीवाणु उसी आकार में निष्क्रिय अवस्था में रहा करता है , जिसे स्पोर कहा जाता है। दिनों-दिन , महीनों-सालों स्पोर यों ही पड़े रह सकते हैं। मिट्टी के सम्पर्क में आने वाली हर वस्तु पर , चाहे वह लोहे का हो अथवा न हो। कीलें में इनमें शामिल हैं , चाहे उनपर ज़ंग लगी हो अथवा न लगी हो।

जिस घावों के कारण टेटनस होने की आशंका सर्वाधिक होती है , वे गहरे-नुकीले घाव होते हैं। जब कोई पतली-लम्बी-नुकीली वस्तु त्वचा को गहरा पंचर करती है। इससे उस वस्तु पर मौजूद निष्क्रिय क्लॉस्ट्रीडियम जीवाणु व्यक्ति के मांस में गहरे पहुँच जाते हैं। यह वह स्थान है , जिसका बाहर वायु से सम्पर्क नहीं होता। यहाँ ऑक्सीजन की कमी रहा करती है और यही वातावरण इन जीवाणुओं के पनपने के लिए एकदम उचित होता है।

इन गहरे-नुकीले , हवा के सम्पर्क से कटे घावों में ये जीवाणु पनपते हैं और अपना टेटनोस्पाज़्मिन नामक विष बनाते हैं। यह विष संसार के सबसे शक्तिशाली प्राकृतिक विषों में से एक है , जिसके प्रभाव से व्यक्ति की मांसपेशियाँ सिकुड़ कर अकड़ जाती हैं। चेहरा-छाती-हाथ-पैर सभी साथ यों कड़े होकर सिकुड़े रहते हैं , मानो व्यक्ति की धनुष की मुद्रा में आ गया हो। इस मुद्रा का नाम धनुष्टंक या ओपिस्थोटैनॉस है। लगातर सिकुड़ी मांसपेशियाँ जो ढीली पड़ती ही नहीं , व्यक्ति के प्राण ले लेती हैं।

पर इस पूरी रोग-कथा में ज़ंग लगी कील कहाँ है ? वस्तुतः इस तरह से तो कहीं नहीं है। ज़ंग यानी आयर्न ऑक्साइड का टेटनस से सीधे-सीधे कोई लेना-देना नहीं। लेकिन मिट्टी के सम्पर्क में मौजूद कीलों पर टेटनस के जीवाणु मौजूद हो सकते हैं ; चाहे उनपर ज़ंग लगी हो अथवा नहीं। फिर चूँकि कील का घाव नुकीला और गहरा होता है , इसलिए इनके माध्यम से ये जीवाणु मांस में गहरे पहुँच सकते हैं। इस तरह से टेटनस पैदा करने में कील का नुकीलापन एवं मिट्टी के सम्पर्क में होना ही उत्तरदायी है , ज़ंग की मौजूदगी नहीं।

बच्चों के जन्म के बाद उनकी कटी नाल पर गोबर लगाने से भी टेटनस इसीलिए होता है। मल में टेटनस-जीवाणु बहुतायत में वास करते हैं और कटी हुई नाल पर इसे मलने से ये ख़ून के बहाव से शिशु-देह में गहराई में पहुँच जाते हैं जहाँ ऑक्सीजन अनुपस्थित हो। बस वहाँ से पनपते हैं और अपना विष बनाकर छोड़ते हैं। नतीजन शिशु को टेटनस हो जाता है।

सुना गया है कि अमुक व्यक्ति को शेव बनाते समय रेज़र से टेटनस हो गया। या फिर ब्लेड से नाख़ून काटने पर इस रोग की पुष्टि हुई। हो सकता है ( सैद्धान्तिक तौर पर ) अगर क्लोस्ट्रीडियम टेटनाई रेज़र पर हो और गहराई से खाल में पहुँच जाए। लगभग असम्भव है अगर धारदार यन्त्र स्वच्छ है और त्वचा को उसके प्रयोग के बाद साफ़ किया गया है।

टेटनस का क्या इलाज है ? एक बार यह रोग हो गया , तब जान का बड़ा संकट सामने है। लेकिन ज्यों ही टेटनस की आशंका होती है , डॉक्टर इन जीवाणुओं को मारने के लिए एंटीबायटिक देते हैं। पर टेटनस में जीवाणु मर भी गये , तो क्या ? उनका विष अगर शरीर में उपस्थित रहा , तो वह अपना दुष्प्रभाव दिखाएगा ही ! इसलिए टेटनस-इम्यूनोग्लोबुलिन देकर इस विष को नष्ट किया जाता है। साथ ही अनेक दवाओं से रोगी की मांसपेशियों को ढीला करने की चेष्टा की जाती है।

और रोकथाम ? किसी भी तरह गन्दी , मिट्टी में पड़ी , धारदार ( विशेषकर नुकीली ) वस्तुओं से चोट न लगे , इसका प्रयास हो। वस्तु चुभ ही जाए तो टेटनस का टीका लिया जाए। एक बार लिया यह टीका वयस्कों में दस वर्षों तक रक्षण देता है। बाक़ी हर मामला अलग है , हर रोगी अलग। इसलिए अन्तिम निर्णय तो उसी डॉक्टर को करना है , जिसके पास दुर्घटना के बाद रोगी पहुँचता है।

ज़ंग-लगी कील से टेटनस के होने में ज़ंग का कोई हाथ नहीं है। भूमिका उसपर मौजूद टेटनस-जीवाणु की है , जिन्हें कील का नुकीला आकार मांस की गहराई में पहुँचा देता है।

स्त्रोत:

1.

Tetanus
Tetanus is a medical condition characterized by a prolonged contraction of skeletal muscle fibers, the primary symptoms are caused by tetanospasmin, a neurotoxin produced by the Gram-positive, obligate anaerobic bacterium Clostridium tetani. Infection generally occurs through wound contamination, and often involves a cut or deep puncture wound. As the infection progresses, muscle spasms in the jaw develop, hence the common name, lockjaw. This is followed by difficulty swallowing and general muscle stiffness and spasms in other parts of the body. The clinical manifestations of tetanus are caused when tetanus toxin blocks inhibitory nerve impulses, by interfering with the release of neurotransmitters. This leads to unopposed muscle contraction and spasm. Seizures may occur, and the autonomic nervous system may also be affected. Infection can be prevented by proper immunization and by post-exposure prophylaxis.

2.

Tetanus - an overview
Clinical Manifestations Tetanus is most often generalized but may also be localized. The incubation period typically is 2-14 days but may be as long as months after the injury. In generalized tetanus the presenting symptom in about half of cases is trismus (masseter muscle spasm, or lockjaw). Headache, restlessness, and irritability are early symptoms, often followed by stiffness, difficulty chewing, dysphagia, and neck muscle spasm. The so-called sardonic smile of tetanus ( risus sardonicus ) results from intractable spasms of facial and buccal muscles. When the paralysis extends to abdominal, lumbar, hip, and thigh muscles, the patient may assume an arched posture of extreme hyperextension of the body, or opisthotonos , with the head and the heels bent backward and the body bowed forward. In severe cases, only the back of the head and the heels of the patient are noted to be touching the supporting surface. Opisthotonos is an equilibrium position that results from unrelenting total contraction of opposing muscles, all of which display the typical boardlike rigidity of tetanus. Laryngeal and respiratory muscle spasm can lead to airway obstruction and asphyxiation. Because tetanus toxin does not affect sensory nerves or cortical function, the patient unfortunately remains conscious, in extreme pain, and in fearful anticipation of the next tetanic seizure. The seizures are characterized by sudden, severe tonic contractions of the muscles, with fist clenching, flexion, and adduction of the arms and hyperextension of the legs. Without treatment, the duration of these seizures may range from a few seconds to a few minutes in length with intervening respite periods. As the illness progresses, the spasms become sustained and exhausting. The smallest disturbance by sight, sound, or touch may trigger a tetanic spasm. Dysuria and urinary retention result from bladder sphincter spasm; forced defecation may occur. Fever, occasionally as high as 40°C (104°F), is common and is caused by the substantial metabolic energy consumed by spastic muscles. Notable autonomic effects include tachycardia, dysrhythmias, labile hypertension, diaphoresis, and cutaneous vasoconstriction. The tetanic paralysis usually becomes more severe in the 1st wk after onset, stabilizes in the 2nd wk, and ameliorates gradually over the ensuing 1-4 wk. Neonatal tetanus , the infantile form of generalized tetanus, typically manifests within 3-12 days of birth. It presents as progressive difficulty in feeding (sucking and swallowing), associated hunger, and crying. Paralysis or diminished movement, stiffness and rigidity to the touch, and spasms, with or without opisthotonos, are characteristic. The umbilical stump, which is typically the portal of entry for the microorganism, may retain remnants of dirt, dung, clotted blood, or serum, or it may appear relatively benign. Localized tetanus results in painful spasms of the muscles adjacent to the wound site and may precede generalized tetanus

3.

Disease factsheet about tetanus
Tetanus is an often fatal disease, which is present worldwide. It is a consequence of a toxin produced by the bacterium Clostridium tetani. The main reservoirs of the bacterium are herbivores, which harbour the bacteria in their bowels (with no consequences for them) and disseminate the “spore form” of the bacteria in the environment with their faeces.

24 दिसंबर के दिन हुई थी एक भूतपूर्व प्रधानमंत्री की 'बे अदबी'

24 दिसंबर के दिन हुई थी एक भूतपूर्व प्रधानमंत्री की 'बे अदबी'

राकेश गुहा की पोस्ट
23 दिसम्बर 2004 को करीब 11 बजे पीवी नरसिम्हा राव ने एम्स में अंतिम सांस ली। करीब 2.30 बजे उनके पार्थिव शरीर को 9 मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित उनके आवास लाया गया। जहाँ चर्चित आधात्मिक गुरु चंद्रास्वामी, राव के 8 पुत्र-पुत्रियां, भतीजे व परिवार के अन्य सदस्य घर पर मौजूद थे।

राव का शव एम्स से घर पहुँचने के उपरांत असली राजनीति शुरू हुई।

तत्कालीन गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने राव के छोटे पुत्र प्रभाकरण को सुझाव दिया, राव का अंतिम संस्कार हैदराबाद में किया जाए। उन्होंने वजह दी राव प्रधानमंत्री बनने से पहले आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री भी थे। किन्तु परिवार दिल्ली में ही अंतिम संस्कार के लिए अड़ा रहा।
***
कुछ देर बाद कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी के करीबी नेता रहे गुलाम नबी आजाद 9 मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित राव के आवास पहुंचे। उन्होनें भी राव के परिवार से हैदराबाद में अंतिम संस्कार करने की अपील की। वे परिवार को समझा ही रहे थे, कि इसी बीच राव के पुत्र प्रभाकरण का फ़ोन घनघना उठा। दूसरी और से आवाज आंध्रप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी की थी।

रेड्डी ने संवेदनाएं व्यक्त की औऱ कहा:- मैं दिल्ली पहुंच रहा हूँ। हम राव का शव हैदराबाद लायेंगे व पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार करेंगे।

करीब शाम 6.30 बजे सोनिया गांधी 9 मोतीलाल नेहरू मार्ग में दाखिल हुई। उनके साथ तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व कद्दावर नेता प्रणव मुखर्जी भी थे। कुछ देर मौन के बाद मनमोहन ने राव परिवार से पूछा:- ये लोग कह रहे हैं, आप राव का अंतिम संस्कार हैदराबाद में करेंगे। आपने क्या निर्णय लिया।

प्रभाकरण ने दो टूक जवाब दिया:- दिल्ली पिता की कर्मभूमि थी, अतः हम दिल्ली में ही अंतिम संस्कार करेंगे। आप कृपया अपने केबिनेट सहयोगियो को अंतिम संस्कार हेतु मनाइए।

नजदीक खड़ी सोनिया कुछ बुदबुदाई। तभी आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री रेड्डी भी वहाँ पहुँच चुके थे। उन्होंने राव परिवार को मनाना शुरू कर दिया। उन्होंने विश्वास दिलाया राव का अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ किया जाएगा तथा हैदराबाद में राव का भव्य पर मेमोरियल भी मनेगा।

राव की बेटी एस वाणी का कहना था कि, वह रेड्डी ही थे जिन्होने परिवार को मनाया। अन्ततः परिवार नरम पड़ा और हैदराबाद में अंतिम संस्कार हेतु तैयार हो गया। परिवार ने दिल्ली में भी राव मेमोरियल बनाने की इक्छा प्रकट की। जिस पर वहाँ मौजूद कांग्रेस नेताओं ने हामी भर दी।

किन्तु पिछले कुछ वर्षों से राव के साथ पार्टी का जैसा व्यवहार था, उसे लेकर परिवार की चिंता लाजिमी थी। वे रात 9.30 बजे शिवराज पाटिल के घर पहुंचे, दिल्ली में मेमोरियल की बात दोहराई। पाटिल ने मनमोहन तक पहुंचाई। मनमोहन ने हामी भर दी।
***
अगले दिन 24 दिसम्बर को तिरंगे में लपेटा राव का पार्थिव शरीर एयरपोर्ट जाने हेतु तोप गाड़ी में रखा गया। एयरपोर्ट के रास्ते में वो पता भी पड़ता था, जो कभी राव के सियासत का केंद्र बिंदु हुआ करता था। 24 अकबर रोड़, कांग्रेस का मुख्यालय।

सोनिया के घर से सटे कांग्रेस मुख्यालय 24 अकबर रोड के सामने तोप गाड़ी की रफ़्तार थोड़ी धीमी हुई। मुख्यालय का मुख्य गेट बन्द था। तमाम कांग्रेसी नेता गेट के पास खड़े थे, किन्तु सब के सब चुप्पी साधे थे। कुछ समय उपरांत सोनिया कुछ नेताओं संग राव को अंतिम विदाई देने हेतु बाहर आई। वे फूल चढ़ाकर भीतर चली गई।

चुँकि पार्टी परम्परानुसार निधन उपरांत किसी भी नेता का शव आम जनता के दर्शन हेतु पार्टी मुख्यालय में रखने का रिवाज था। अतः परिवार चाहता था कुछ समय के लिए राव का शव पार्टी मुख्यालय पर रखा जाए। किन्तु परिजन ने कभी उम्मीद भी नही की होगी उनके साथ ऐसा भी हो सकता हैं।

करीब आधा घण्टे तक "पूर्व प्रधानमंत्री के शव" को ले जा रही तोप गाड़ी, मुख्यालय के गेट पर खड़ी रही। लेकिन गेट नही खुला। निराश होकर परिवार एयरपोर्ट की तरफ रवाना हो गया।

विनय सीतापति अपनी किताब "द हाफ लायन" में लिखते है....,

राव के एक दोस्त ने कांग्रेस के नेताओं से गेट खोलने के लिए आग्रह भी किया था, लेकिन उन्होंने "गेट नही खुलता" कहकर मना कर दिया। वबाल बढ़ने पर मनमोहनसिंह को कहना पड़ा उन्हें इसकी कोई जानकारी नही थी।
अन्ततः परिवार एयरपोर्ट से A-32 विमान में राव का शव लेकर हैदराबाद रवाना हो गया। वही उनका अंतिम संस्कार किया गया।

विनय सीतापति अपनी किताब में लिखते हैं.....,
राव के बेटे प्रभाकरण ने उनसे कहा था:- हमे महसूस हुआ कि सोनिया जी नही चाहती थी, कि राव का अंतिम संस्कार दिल्ली में हो और उनका मेमोरियल यहाँ बने।

राव व सोनिया के मनमुटाव, कड़वाहट के किस्से आम थे। किंतु इसकी परिणीति इस हद तक जाएगी शायद ही किसी ने सोचा होगा।

भारतीय राजनीति में एक प्रधानमंत्री के शव के साथ स्वयं उनकी पार्टी द्वारा ऐसी दुर्दशा, घोर अपमान का मामला सम्भवतः एकमात्र होगा।

पीवी नरसिम्हा राव को अपने कार्यो के लिए जितना सम्मान मिलना चाहिए था, उन्हें कभी नही मिला। वे 'राजनीति' का आसान शिकार हो गए।

आर्थिक सुधारों के जनक कहे जाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि 💐💐.💐

बुधवार, 29 दिसंबर 2021

छत्तीसगढ़ में संत कालीचरण महाराज के विरुद्द केस दर्ज

‘गाँधी ने एक लाठी भी खाई? छत्रपती शिवाजी - राणा प्रताप - चाणक्य को बनाओ राष्ट्रपिता’: FIR पर बोले कालीचरण महाराज – फाँसी दे दो, माफ़ी नहीं माँगूँगा
28 December, 2021
ऑपइंडिया स्टाफ़




कालीपुत्र कालीचरण महाराज,
गाँधी पर बयान को लेकर कालीपुत्र कालीचरण महाराज न जारी किया स्पष्टीकरण (फाइल फोटो)
272
कालीपुत्र कालीचरण महाराज ने रायपुर धर्म संसद में महात्मा गाँधी के खिलाफ बयान देने पर स्पष्टीकरण जारी किया है। अपने YouTube चैनल पर जारी किए गए वीडियो में ‘ॐ काली’ के साथ अपनी बात शुरू करते हुए उन्होंने कहा है कि महात्मा गाँधी के लिए कहे गए अपशब्दों का उन्हें कोई पश्चाताप नहीं है। उन्होंने पूछा कि महात्मा गाँधी ने हिन्दुओं के लिए किया ही क्या है? उन्होंने बताया कि किस तरह 14 वोट प्रधानमंत्री पद के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल को मिले, लेकिन शून्य वोट वाले जवाहरलाल नेहरू को पीएम बना कर उन्होंने वंशवाद फैलाया।

उन्होंने कहा कि अगर सरदार पटेल के हाथों में भारत की सत्ता गई होती तो हमारा देश आज जगद्गुरु होता और अमेरिका से भी आगे होता, लेकिन जनता के साथ विश्वासघात हुआ। उन्होंने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे प्रतिभावान लोगों को कॉन्ग्रेस में इसी कारण काम करने का अवसर नहीं मिला। उन्होंने कहा कि ‘साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल, दे दी आज़ादी हमें बिना खडग बिना ढाल’ गाना लिखने वाले को जूती मारने चाहिए। उन्होंने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को याद करते हुए पूछा कि क्या इन्होंने देश के लिए कुछ नहीं किया?

उन्होंने बताया कि किस तरह जिन क्रांतिकारियों को फाँसी दी गई, उनमें 80% सिख थे, ये गाना लिखने वालों ने उन्हें श्रेय क्यों नहीं दिया। उन्होंने पूछा कि क्या कभी महात्मा गाँधी ने एक लाठी भी खाई? उन्होंने कहा कि गाँधी चाहते तो भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की फाँसी रुकवा सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। कालीपुत्र कालीचरण महाराज ने गाँधी का तिरस्कार करने की बात करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने अपनी लाश पर भारत का बँटवारा होने की बात कही थी, लेकिन पाकिस्तान और बांग्लादेश बन गया।

उन्होंने कहा, “जब बँटवारा हुआ, तब गाँधी ज़िंदा थे। बँटवारे के दंगे में लाखों हिन्दुओं-सिखों को काट डाला गया। 27 लाख हिन्दुओं का नरसंहार हुआ ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ के दिन जिन्ना द्वारा। पाकिस्तान की ट्रेनों से बोर के बोर भर कर हिन्दुओं की लाशें और महिलाओं के सामूहिक बलात्कार के बाद स्तन काट कर भेजे जा रहे थे। गाँधी अनशन कर रहे थे कि पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपए दो। जब दंगा पीड़ित सिखों ने ठंड में मस्जिदों का आसरा लिया, तब उन्हें बाहर निकाल कर मुस्लिमों को मस्जिदें सौंपने के लिए गाँधी ने अनशन किया। इसीलिए, मैं नफरत करता हूँ गाँधी से।”

उन्होंने कहा कि ‘गजवा-ए-हिन्द’ के तहत भारत के इस्लामीकरण के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश को जोड़ने वाले हजारों वर्ग किलोमीटर का कॉरिडोर मुस्लिमों ने माँगा और उसे देने के लिए भी गाँधी अनशन करने वाले थे। उन्होंने बताया कि जब स्वातंत्र्य वीर सावरकर ने हिन्दू वर्ण व्यवस्था को तोड़ कर एक होने की बात कही तो गाँधी ने नकार दिया। उन्होंने कहा कि बाबासाहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने संस्कृत को राष्ट्रभाषा घोषित करने की बात कही, तब गाँधी ने इसके लिए अनशन नहीं किया।

कालीपुत्र कालीचरण महाराज ने पूछा कि जो राष्ट्र करोड़ों वर्षों से है, उसका राष्ट्रपिता कोई कुछ वर्ष पहले आया व्यक्ति कैसे हो सकता है? उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्र का पिता बनाना अनिवार्य ही है तो छत्रपति शिवाजी, गुरु गोविंद सिंह, आचार्य चाणक्य या महाराणा प्रताप को बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभी के महापुरुषों को बनाना है तो राष्ट्र को एक करने वाले सरदार पटेल को बनाया जाना चाहिए, जिन्होंने छोटे-छोटे रियासतों को एक कर के टुकड़ों में बँटे देश को एक किया।

कालीपुत्र कालीचरण महाराज ने कहा, “अगर पाकिस्तान-बांग्लादेश को भारत में कॉरिडोर मिल जाता तो हिंदुस्तान कब का मुस्लिम देश बन गया होता। महात्मा नाथूराम गोडसे को कोटि-कोटि धन्यवाद है। उनके चरणों में साष्टांग प्रणाम है। उन्होंने अपना बलिदान देकर हिंदुस्तान को मुस्लिम देश बनने से बचा लिया। ‘गजवा-ए-हिन्द’ फेल कर दिया। सच बोलने की सज़ा मृत्यु है तो स्वीकार है। वीरों ने कुल के लिए बलिदान दे दिया तो मेरे जैसे करोड़ों कालीचरण धर्म के लिए मर सकते हैं। हम हिंदुत्व के लिए मृत्युदंड पाने के लिए भी तैयार हैं।”

बता दें कि छत्तीसगढ़ में संत कालीचरण महाराज के विरुद्द केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि उन्होंने महात्मा गाँधी को लेकर एक धर्म संसद में अपमानजनक बातें कहीं। ये धर्म संसद 26 दिसंबर 2021 को रायपुर के रावण भाटा मैदान में आयोजित की गई थी। उन्होंने मोहनदास करमचंद गाँधी का नाम लेकर उनकी हत्या को जायज ठहराया था। साथ ही गोडसे को नमन किया था। उन्होंने मंच से कॉन्ग्रेस नेताओं की आलोचना करते हुए हिंदू नेता चुनने की बात भी श्रोताओं से कही थी। इसके अलावा उन्होंने इस्लाम को लेकर कहा कि इस्लाम का मकसद राजनीति के जरिए देश पर कब्जा करने का था।




राजनीति में बहुत कम लोग बचे हैं जो .....इत्र नहीं लगाते। वर्ना आज के दौर में महकने का शौक किसे नहीं हैं..

एक ज़माना था जब Oyo rooms नहीं हुआ करते थे। 
उन दिनों हमारे एक परिचित को इश्क हुआ। इश्क परवान चढ़ा तो प्रेमिका से हर रोज़ मिलने की इच्छा भी हिलोरें मारने लगी। 
बन्धु कभी प्रेमिका से पार्क में मिलता। कभी किसी फ़ास्ट फूड रेस्तरां में मुलाकात होती। 

परंतु पार्क हो या रेस्तरां.....एक चीज़ की कमी खलती थी। 

निजता नहीं थी। 

Privacy नहीं थी। 

बन्धु ने दिमाग के घोड़े दौड़ाये। 
बहुत सोच विचार के पश्चात उसका ध्यान हमारे एक सहपाठी पर गया जो अपने माँ बाप की इकलौती सन्तान था और जिसके माता पिता गवर्मेंट जॉब में थे। 

यानि ठीक 8:30 बजे माता पिता घर से ऑफिस की ओर प्रस्थान कर जाते थे। 

बन्धु ने सहपाठी से आग्रह किया के माता पिता के जाने के पश्चात वह कुछ क्षणों के लिये उसे और प्रेमिका को घर में मिलने की इजाज़त दे दे। 

सहपाठी भोला भाला बालक था। वह बन्धु की चिकनी चुपड़ी बातों में आ गया। 

थोड़ी सी ना - नुकुर के पश्चात सहपाठी ने बन्धु का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। 

प्रेमी प्रेमिका सहपाठी के घर मिलने लगे। 
एकांत यानि privacy के क्षण भी मिले। 

इन्ही क्षणों में बैकग्राउंड में "रूप तेरा मस्ताना ....प्यार मेरा दीवाना" गीत बजता रहा और जो अपेक्षित था ...वह हो गया। 

कांड हो गया। 

अब हो गया सो हो गया। 

आदरणीय मुलायम सिंह जी ने ही कहा है के लौंडों से जवानी में गलती हो जाती है।

बात बढ़ गयी। परिवारों तक पहुंच गई। 

परिवारों के बीच पंचायत हुई जिसमें सर झुकाये प्रेमी प्रेमिका मौजूद थे। 
सहपाठी महोदय को भी समन भेजे गये क्योंकि मौका ऐ वारदात पर प्रेमी प्रेमिका के अलावा हर वक्त मौजूद रहने वाले सहपाठी महोदय ही थे। 

दोनों पक्षों में गर्मा गर्मी हुई। फिर प्रेमी के पक्ष से एक उम्र दराज़ आदमी ने सहपाठी महोदय से पूछा के जब सारा कांड हो रहा था तो वह कहां था। 

सहपाठी ने बड़े ही भोले स्वभाव से कहा के ....."अंकिल मुझे क्या पता दोनों गड़बड़ कर रहे थे। मुझे तो लगा ....बातचीत कर रहे थे" 

अंकिल उठे और उन्ने सहपाठी के कान पर पहले तो 2-3 कड़ाकेदार थप्पड़ रसीद किये। 

फिर उन्ने उसे पेट में एक ज़बरदस्त घूंसा रसीद किया। पेट पर मुक्का पड़ते ही जैसे ही वह झुका उसकी पीठ पर एक ज़बरदस्त चमाट रसीद कर दी।

बमुश्किल उसे अंकिल के कहर से छुड़वाया। गुस्से से लबरेज़ अंकिल कहते रहे के साले हमें *** समझता है। बंद कमरे में सब गड़बड़ होती रही और तू अब हैरान होकर कह रहा है के तुझे लगा के प्रेमी प्रेमिका बातचीत कर रहे थे। 

ऐसा बेहूदा हैरानी भरा चेहरा बना रहा है जैसे कुछ पता ही ना हो। 

..............................

कानपुर के "समाजवादी इत्र व्यापारी" के घर 100-200 करोड़ पकड़े जाने पर कुछ ऐसी प्रतिक्रिया आ रही हैं जैसे कुछ अजीबोगरीब हो गया हो। 

इसमें हैरानी की क्या बात है? 

हर नेता के पास एक "इत्र व्यापारी" है।

हैरान तो लोग ऐसे हो रहे हैं जैसे पॉलिटिक्स और ब्लैक मनी के प्रेम का ज्ञान ही ना हो। 

बताओ इसमें हैरानी की क्या बात है?  

 नेता और भ्रष्टाचार ....प्रेमी और प्रेमिका हैं। दोनों कमरे में बंद हैं। 
कांड हो जाता है और फलस्वरूप 100-200 करोड़ रुपये गर्भ में ठहर जाते हैं। 

बताओ इसमें हैरानी की क्या बात है?

यह तो प्राकृतिक है....नैचुरल है। 

जाते जाते एक और बात कह दूं......इसलिये कह दूं के सक्रिय राजनीति को मैंने बहुत करीब से देखा है। 

सक्रिय राजनीति में बहुत कम लोग बचे हैं जो .....इत्र नहीं लगाते। 

वर्ना आज के दौर में महकने का शौक किसे नहीं हैं.....😊....!

 चाहें कोई कितना भी इत्र लगा ले....!!

2022 में आएंगे तो योगी ही.......😎😎

【रचित】

हमेशा परिवार के पीछे रहता है, शायद इसीलिए क्योकि वो *पिता* है ।

*तुम और मैं पति पत्नी थे, तुम माँ बन गईं मैं पिता रह गया।*
तुमने घर सम्भाला, मैंने कमाई,
लेकिन तुम "माँ के हाथ का खाना" बन गई,
मैं कमाने वाला पिता रह गया।
बच्चों को चोट लगी और तुमने गले लगाया,
मैंने समझाया,
तुम ममतामयी बन गई
मैं पिता रह गया।
बच्चों ने गलतियां कीं,
तुम पक्ष ले कर "understanding Mom" बन गईं 
और मैं "पापा नहीं समझते" वाला पिता रह गया।
"पापा नाराज होंगे" कह कर
तुम बच्चों की बेस्ट फ्रेंड बन गईं,
और मैं गुस्सा करने वाला पिता रह गया।
तुम्हारे आंसू में मां का प्यार 
और मेरे छुपे हुए आंसुओं मे, मैं निष्ठुर पिता रह गया।
तुम चंद्रमा की तरह शीतल बनतीं गईं,
और पता नहीं कब
मैं सूर्य की अग्नि सा पिता रह गया।
तुम धरती माँ, भारत मां और मदर नेचर बनतीं गईं,
और मैं जीवन को प्रारंभ करने का दायित्व लिए
सिर्फ एक पिता रह गया...

*फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है*

माँ, नौ महीने पालती है 
पिता, 25 साल् पालता है 
*फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है*

माँ, बिना तानख्वाह घर का सारा काम करती है 
पिता, पूरी कमाई घर पे लुटा देता है 
*फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है* 

माँ ! जो चाहते हो वो बनाती है 
पिता ! जो चाहते हो वो ला के देता है 
*फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है*

माँ ! को याद करते हो जब चोट लगती है 
पिता ! को याद करते हो जब ज़रुरत पड़ती है 
*फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है*

माँ की ओर बच्चो की अलमारी नये कपड़े से भरी है 
पिता, कई सालो तक पुराने कपड़े चलाता है 
*फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है*

पिता, अपनी ज़रुरते टाल कर सबकी ज़रुरते समय से पूरी करता है
किसी को उनकी ज़रुरते टालने को नहीं कहता 
*फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है*

जीवनभर दूसरों से आगे रहने की कोशिश करता है मगर हमेशा परिवार के पीछे रहता है, शायद इसीलिए क्योकि वो *पिता* है । 
 समर्पित।

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