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सोमवार, 5 दिसंबर 2011
लड़कियों की तरह लड़कों को भी छिवानाना चाहिए कान... by Aditya Mandowara
शास्त्रों के अनुसार कई संस्कार बताए गए हैं जिनका निर्वहन करना धर्म और
स्वास्थ्य के दृष्टिकोण बहुत फायदेमंद रहता है। इन सभी संस्कारों को धर्म
से जोड़ा गया है ताकि व्यक्ति धर्म के नाम इनका पालन करता रहे। इन्हीं
महत्वपूर्ण संस्कारों में से एक है कर्णछेदन संस्कार।
सामान्यत:
केवल लड़कियों के कान छिदवाने की परंपरा है लेकिन प्राचीन काल में लड़कों
के भी कान छिदवाए जाते थे। आजकल काफी हद तक लड़कों के कान छिदवाने की
परंपरा लगभग बंद ही हो गई है लेकिन कुछ लड़के फैशन के नाम पर जरूर कान
छिदवाते हैं। पुराने समय में लड़कियों की तरह लड़कों के भी कान छिदवाते थे
और उनके कानों में कुंडल भी पहनाए जाते थे।
इस परंपरा के पीछे स्वास्थ्य संबंधी कारण हैं। कान छिदवाने और कानों में
बाली पहनने से मस्तिष्क के दोनों भागों के लिए एक्यूप्रेशर और एक्यूपंचर का
काम होता है। दिमाग के कार्य करने की क्षमता बढ़ जाती है। साथ ही कानों
में बाली पहनने से कई रोगों से लडऩे की शक्ति भी बढ़ती है।
इन
स्वास्थ्य संबंधी कारणों के अतिरिक्त इसके धार्मिक महत्व भी है। मनुष्य
जीवन के प्रमुख 16 संस्कारों में कणछेदन संस्कार भी शामिल है। अत: प्राचीन
काल में इसका निर्वहन अवश्य किया जाता था।
by Aditya Mandowara
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