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गुरुवार, 29 मार्च 2012

मारवाड़ी महासभा :"बेटी बढाओ अभियान" - महेश राठी

1 टिप्पणी:

  1. आप सही कह रहे हैं महेश राठी जी आज तक जितनी सरकारे ,पार्टिया ,नेता , धर्मिर्पेक्षता वादी,समाज सुधारक,समाज विचारक ,दलित ,पिछडो के हिमायती,किसान नेता ,आदिवासियों के शुभचिंतक ,इन सबने एक सुर मे सुबह शाम : महिलाओ, गरीबों ,किसानो के विकास के लिए कई कागजी विभाग ,जैसे महिला एवं बाल विकास महिला सशक्तिकरण योजना, लक्ष्मी योजना, कृषि बैंक,किसान क्रेडिट कार्ड,कृषि उपकरणों पार छुट, कृषि आय पार छुट,मे सरकारी पैसो के बंदरबांट,के अलावा बैंको के द्वारा सस्ते ऋण ,अनुदान, के बाद उठते बैठते महिलाओं, बच्चो, गरीबों, किसानो के विकास की बाते करते करते कब गरीब किसानो को आत्महत्या के लिए विवश होना पड़ा| इसी तरह आदिवासियों के लिए भी कई योजनाये, छुट ,आरक्षण ,के आलावा उनके बारे मे २४ घंटे सोचते हुए भी उन्हें आज भी नक्सली या ईसाई प्रलोभन मे फसे हुए है या आदवासी कहलाने को मजबूर है इसी तरह अल्संख्यक या मुस्लिम वर्ग को उनके बारे मे तमाम योजनायो ,अनुदान,के आलावा उनकी वारे मे चिल्ला चिल्ला का उनके हिमायती होने का दावा करती पार्टिया और नेता खुद आज भी उन्हें ये बताते है की उनका विकास नहीं हुआ या उनका शोषण किया जा रहा है
    कुल मिलाकर सभी बाते बड़ी बड़ी करते हैं असामान्य सपने दिखा कर राजनीती और मीडिया में वाहवाही बटोरने और विकास के नाम पर आम जनता का पैसा अपनी जेब में भरने के अलावा कुछ करते नहीं |
    आपने जो ये देश को सुधारने का बीड़ा उठाया है ये बड़े गर्व की बात है और इसमें सभी वर्गों को आगे आना चाहिए ताकि सही मायने में देश का भला हो सकेगा | देश के इसे नेताओं को आपसे प्रेरणा मिलेगी और सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी इस दिशा में सोचना चाहिए ताकि समाज का उत्थान हो | महेश्वरी समाज के वरिष्ठ नेताओ से मेरा अनुरोध है की फालतू के कामो में समय और धन की बर्बादी के बजाय इस तरह के कार्य करने की ओर ध्यान लगाये और सभी समाज की अपनी UNIVERSITY बन चुकी है पता नहीं महेश्वरी समाज के मान्धताओ की आँख कब खुलेगी

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