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शुक्रवार, 20 जुलाई 2012

जन-कल्याण की भावना मन में लेकर डाली गयी आहुति हमेशा ही हितकारी रहेगी ..

एक बार एक बूढी औरत कहीं से आ रही थी कि तभी उसने तीन मजदूरों को कोई ईमारत बनाते देखा . उसने पहले मजदूर से पूछा ,” तुम क्या कर रहे हो ?”, “ देखती नहीं मैं ईंटे ढो रहा हूँ .” उसने जवाब दिया .

फिर वो दुसरे मजदूर के पास गयी और उससे भी वही प्रश्न किया ,” तुम क्या कर रहे हो ?” ,” मैं अपने परिवार का पेट पालने के लिए मेहनत – मजदूरी कर रहा हूँ ?’ उत्तर आया .

फिर वह तीसरे मजदूर के पास गयी और पुनः वही प्रश्न किया ,” तुम क्या कर रहे हो ?,

उस व्यक्ति ने उत्साह के साथ उत्तर दिया , “ मैं इस शहर का सबसे भव्य मंदिर बना रहा हूँ ”

आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इन तीनों में से कौन सबसे अधिक खुश होगा!
मोरल :- यह जीवन एक यज्ञ के सामान है इसमें हर एक को अपनी क्षमता के अनुसार आहुति डालनी है ..., तो फिर जन-कल्याण की भावना मन में लेकर डाली गयी आहुति हमेशा ही हितकारी रहेगी ...कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता है ..., समाज का कार्य भी मेरा ही कार्य है यह उद्देश्य होना चाहिए ...

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