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सोमवार, 19 अप्रैल 2021
श्री शिवाय नमस्तुभ्यं एक मंत्र महामृत्युंजय मंत्र के बराबर है - #Pujya_Pandit_Pradeep_Ji_Mishra
श्री शिवाय नमस्तुभ्यं एक मंत्र महामृत्युंजय मंत्र के बराबर है - #Pujya_Pandit_Pradeep_Ji_Mishra
भगवान शंकर के पंचाक्षरी नाम के प्रताप से बड़े बड़े ऋषि महात्मा के साथ
साथ आसुरी प्रवृत्ति ने अपनी मुक्ति के मार्ग को प्रश्स्त किया है। भगवान
शिव भाव के भूखे हैं। घर के शुद्ध जल से भरे लोटे को ले जाकर शिवलिंग पर
जलधार चढ़ायें तथा एक बिल्व पत्र अर्पण करें अपने जीवन का कल्याण करना हो
तो भक्ति भाव से श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र का जाप करें। भगवान भोलेनाथ
मनोकामना पूर्ण करेंगे। इस सिद्ध मंत्र की महिमा का वर्णन करते हुए
कहा कि भगवान शिव के पास आडम्बर नहीं है वे मुर्दो की भस्म धारण इसलिए
करते है कि मनुष्य मरने के बाद जलने के पूर्व उपस्थित अपने जन से राम नाम
सत्य है बुलवाता है। जिसके कारण प्रभु राम के नाम का उच्चारण होता है, वो
शव तो राम मय हो जाता है। उसकी भस्म में राम समाहित हो जाता है यही कारण है
कि शिव अपने शरीर पर उनकी भस्म को धारण करते हैं।
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