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शनिवार, 11 मई 2024

कैसे पड़ा रिलायंस का नाम ?

 

बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि रिलायंस से पहले उनकी कंपनी का नाम तीन बार बदला गया. कंपनी की नींव रखने वाले रिलायंस के फाउंडर धीरूभाई अंबानी ने तीन बार बदलने के बाद कंपनी का नाम रिलायंस रखा, लेकिन इसके पीछे की वजह आप जानते हैं? रिलायंस नाम के पीछे का किस्सा बहुत ही दिलचस्प है.

कैसे पड़ा रिलायंस का नाम ?

धीरूभाई अंबानी ने साल 1958 में रिलायंस ग्रुप की नींव रखी. अपने चचेरे भाई चंपकलाल दमानी के साथ मिलकर उन्होंने कंपनी की शुरुआत की. इससे पहले 1950 के दशक में धीरूभाई अंबानी ने यमन में मसाले और पॉलिएस्टर यार्न लाने के लिए एक बिजनेस शुरु किया, जिसका नाम माजिन रखा. यहीं से रिलायंस की शुरुआत हुई. यही कंपनी आगे चलकर रिलायंस इंजस्ट्रीज बनी. कुछ साल वहां काम करने के बाद साल 1960 के दशक में धीरूभाई अंबानी और उनके भाई चंपकलाल दमानी भारत लौटे. उन्होंने भारत आकर रिलायंस कमर्शियल कॉर्पोरेशन नाम से नए बिजनेस की शुरुआत की.

छोटे से बिजनेस को बनाया बड़ा कारोबार

धीरूभाई अंबानी ने एक छोटे व्यापारी के तौर पर अपना कारोबार शुरू किया. अपने मेहनत के दम पर उन्होंने कुछ ही सालों में बड़ा साम्राज्य खड़ा कर दिया. लेकिन कारोबार बढ़ने के बाद दोनों पार्टनर के बीच मतभेद भी शुरू हुआ, जिसके बाद साल 1965 में अंबानी और दमानी का बिजनेस बंट गया. बिजनेस पार्टनरशिप टूट गई. बंटवारे के बाद धीरूभाई अंबानी ने कपड़ा कारोबार पर फोकस किया. बंटवारे के बाद साल 1966 में धीरूभाई अंबानी के कंपनी का नाम रिलायंस कमर्शियल कॉपोरेशन से बदलकर रिलायंस टेक्सटाइल्ट कर दिया.

फिर पड़ा रिलायंस इंडस्ट्रीज का नाम

कपड़ा कारोबार में छा जाने के बाद धीरूभाई अंबानी ने अलग-अलग सेक्टर्स में अपना कारोबार फैलाना शुरू किया. उन्होंने अब कंपनी का नाम रिलायंस कमर्शियल कॉपोरेशन से बदलकर रिलायंस इंजस्ट्रीज लिमिटेड रखा. रिलायंस इंडस्ट्रीज तक पहुंचने में कंपनी का नाम तीन

बार बदल गया. पिता के निधन के बाद कंपनी को मुकेस अंबानी और अनिल अंबानी के बीच बांट दिया गया.

'रिलायंस' नाम ही क्‍यों ?

धीरूभाई अंबानी ने कंपनी का नाम 'रिलायंस' ही चुना. इस नाम के पीछे उनकी सोच थी कि यह कंपनी उत्पादों और असाधारण सेवा के लिए भरोसे का प्रतीक बनेगी. वो कंपनी के नाम पर भरोसे और आत्मनिर्भरता को बनाए रखना चाहते थे. इन नाम के पीछे उनका मकसद आत्मविश्वास पैदा करना और हाई क्‍वालिटी प्रोडक्‍ट बनाने की मिसाल पैदा करना था. Reliance का मतलब ही आश्वस्त या भरोसेमंद निर्भरता है, इसलिए उन्होंने अपनी कंपनी का नाम तीन बार बदलने के बाद भी रिलायंस शब्द को जारी रखा .

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