हमारा सौभाग्य है कि भारत के हर नागरिक के पास भारत को सुधारने के ऐक नहीं अनेक रेडीमेड नुस्खे हैं। दुर्भाग्य यह है कि वह नुस्खे दूसरों को बता देते हैं परन्तु ना तो स्वयं उन्हें अपनाते हैं ना ही दूसरे उन्हें स्वीकार करते हैं। इस लिये कोल्हू के बैल की तरह हम वहीं के वहीं चकर लगा रहै हैं।
अधिकतर सुझाव सरकार को ही लागू करने होते हैं , लेकिन सरकार हमारी मरजी पर नहीं चलती। हमें जब अपनी मरजी पर चलने वाली सरकार बनाने को मौका मिलता है तो हम या तो वोट ही नहीं डालते या फिर जो सामने आता है उसे ही डाल कर अपना वोट गंवा देते हैं। नतीजा फिर हम पिछले चौंसठ वर्षों से वहीं के वहीं खडे हैं और हमारी हालत प्रति दिन असुरक्षित होती जा रही है।
अगर हम सरकार का काम सरकार को ही करने दें तो कुछ हो सकता है। लेकिन उस के लिये जरूरी है हम अपनी मरजी की सरकार चुने । 2014 में या इस से पहले भी वह सुनहरी मौका आ सकता है उस वक्त यह काम जरूर करे – भारत में ऐक बार हिन्दू समर्थक सरकार बनने से आधे सा ज्यादा काम आसान हो जायेंगे।
तब तक हम भारत के ऐक नागरिक को ऐक ऐक काम हर हफ्ते या ऐक महीने में कर के सुधार सकते हैं । वह नागरिक आप स्वयं है और काम इस तरह के हैं जिन में आप को किसी से आज्ञा सहायता और सहयोग कुछ नहीं चाहिये। आप को अपने आप ही सहयोगियों और विरोधियों की पहचान भी हो जायेगी जिस का प्रभाव आप को चोंका देगा।
1. हिन्दी को अपनायें और उसे अपने दैनिक कामों में इस्तेमाल कर के राष्ट्रभाषा बनाने में अपना योग्दान करें। आरम्भ फेसबुक से ही कर लें। कोई दूसरा नहीं करता तो भी कोई बात नहीं आप सिर्फ अपने आप को सुधार रहै है और देश की सेवा कर रहै हैं। आप की देखादेखी दूसरे भी अंग्रेजी की मानसिक गुलामी से बाहर आ जायें गे।
2. अपनी पहचान धर्म निर्पेक्ष की नहीं बल्कि साकारात्मिक और क्रियात्मिक हिन्दू की बनाये जो आप के पूर्वजों की पहचान है और उन से जोडती है।
यह दोनो काम हम अपने आप कर सकते हैं। इस समय की यही सब से बडी देश सेवा है।
-Sharad Harikisanji Panpaliya
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