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मंगलवार, 21 फ़रवरी 2012

विनम्र अपील.............

आप सभी दोस्तों से मेरी विनम्र अपील............. आप अपने, अपने बच्चो या अपने रिश्तेदारों के जन्म दिवस को काफी उत्साह से मनाते होंगे, बहुत सारे दोस्तों को खाने पर भी बुलाते होंगे, और सब खाने के बाद घर जाकर हो सकता है, कि कमोबेशी की शिकायत भी करते होंगे, जबकि सच तो ये है कि कम से कम हम अपने बच्चो के जन्मदिवस पर उसकी लम्बी जिंदगी की कामना तो जरुर करते है और लोगो से भी यही इक्छा रखते है अगर हम ये प्रण करे की उस दिन पाँच गरीबों या भूखो को खाना खिलाएं तो वो हर वर्ष उस दिन का इंतजार करेगा, की आप आयें और उसे तृप्त करें और हम यही तो चाहते है फिर देर किस बात की? आज अभी इसी वक्त से ये अभियान शुरू आपका ये कदम आपको सुख पहुचायेगा



नोट : इस ब्लॉग पर प्रस्तुत लेख या चित्र आदि में से कई संकलित किये हुए हैं यदि किसी लेख या चित्र में किसी को आपत्ति है तो कृपया मुझे अवगत करावे इस ब्लॉग से वह चित्र या लेख हटा दिया जायेगा. इस ब्लॉग का उद्देश्य सिर्फ सुचना एवं ज्ञान का प्रसार करना है

जागो भारत जागो -:- मातृ देवो भव, पितृ देवो भव की संस्कृति वाले देश भारत में भी अब पश्चिमी समाज (अमेरिका , इंग्लैंड) की तरह ओल्ड एज होम ??- युधवीर सिंह लाम्बा भारतीय

जागो भारत जागो -:- मातृ देवो भव, पितृ देवो भव की संस्कृति वाले देश भारत में भी अब पश्चिमी समाज (अमेरिका , इंग्लैंड) की तरह ओल्ड एज होम ????????
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जागो भारत जागो -:- मातृ देवो भव, पितृ देवो भव की संस्कृति वाले देश भारत में भी अब पश्चिमी समाज (अमेरिका , इंग्लैंड) की तरह ओल्ड एज होम ????????
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भारत में बुजुर्गों के लिए नित नये आश्रम बन रहे हैं। उनके लिए घर में जगह नहीं है। अंग्रेजी शिक्षित परिवारों, सुसज्जित आधुनिक घरों और स्वार्थी लोगों में चुके हुए पुराने जमाने के मां-बाप फिट नहीं बैठते। उनकी धन-सम्पलि और जमीन-जायदाद काम की होती है। बुजुर्गों के प्रति ऐसा रवैया मानसिक रूप से बीमार समाज का परिचायक है। यह स्थिति सचमुच दुःखद, दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है।

जिस जिगर के टुकड़े को पालने में मां-बाप ने अपना पूरा जीवन लगा दिया, मां खुद गीले में सोई और अपने लाल को सूखे में सुलाया, लेकिन मां-बाप को जब बुढ़ापा आया तो इन जिगर के टुकड़ों को मां-बाप अखरने लगे। उनकी अनदेखी होने लगी। ऐसे मामले में भी लगातार सामने आ रहे हैं जब ये लाड़ले ही अपने मां-बाप को घर से निकाल कर ओल्ड एज होम में छोड़ आए। कई ऐसे मामले भी हैं जब इन्हीं बच्चों ने मां-बाप को घर में कैद कर लिया या फिर खुले आसमान के नीचे उन्हें अपने हाल पर आंसू बहाने के लिए छोड़ दिया।

********************************************************हमें ओल्ड एज होम की कतई भी आवश्यकता नहीं है यदि ये बढ़ रहे है तो यह हमारे मानव समाज के मुंह पर एक जोरदार तमाचा है । जो माता पिता हमें ऊँगली पकर कर चलना सिखाते है उनके बुढ़ापे में हम उन्हें सम्मान के साथ रख नहीं सकते धिक्कार है हमें!

मातृ देवो भव, पितृ देवो भव की संस्कृति वाले देश भारत में भी अब पश्चिमी समाज की तरह बुजुर्ग पीढ़ी में अकेलेपन की भावना तेजी से बढ़ रही है।

********************************************************ये वही भारत देश है जहाँ राम ने अपने वृद्ध पिता का आदेश मान कर 14 बरस वन का वास किया था, ये वही देश है जहाँ श्रवण कुमार अपने अंधे माता पिता को कांवर में बैठा कर तीर्थ यात्रा के लिए ले जाता है ।

जय हिन्द, जय भारत ! वन्दे मातरम !!
भारत में बुजुर्गों के लिए नित नये आश्रम बन रहे हैं। उनके लिए घर में जगह नहीं है। अंग्रेजी शिक्षित परिवारों, सुसज्जित आधुनिक घरों और स्वार्थी लोगों में चुके हुए पुराने जमाने के मां-बाप फिट नहीं बैठते। उनकी धन-सम्पलि और जमीन-जायदाद काम की होती है। बुजुर्गों के प्रति ऐसा रवैया मानसिक रूप से बीमार समाज का परिचायक है। यह स्थिति सचमुच दुःखद, दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है।

जिस जिगर के टुकड़े को पालने में मां-बाप ने अपना पूरा जीवन लगा दिया, मां खुद गीले में सोई और अपने लाल को सूखे में सुलाया, लेकिन मां-बाप को जब बुढ़ापा आया तो इन जिगर के टुकड़ों को मां-बाप अखरने लगे। उनकी अनदेखी होने लगी। ऐसे मामले में भी लगातार सामने आ रहे हैं जब ये लाड़ले ही अपने मां-बाप को घर से निकाल कर ओल्ड एज होम में छोड़ आए। कई ऐसे मामले भी हैं जब इन्हीं बच्चों ने मां-बाप को घर में कैद कर लिया या फिर खुले आसमान के नीचे उन्हें अपने हाल पर आंसू बहाने के लिए छोड़ दिया।

********************************************************हमें ओल्ड एज होम की कतई भी आवश्यकता नहीं है यदि ये बढ़ रहे है तो यह हमारे मानव समाज के मुंह पर एक जोरदार तमाचा है । जो माता पिता हमें ऊँगली पकर कर चलना सिखाते है उनके बुढ़ापे में हम उन्हें सम्मान के साथ रख नहीं सकते धिक्कार है हमें!

मातृ देवो भव, पितृ देवो भव की संस्कृति वाले देश भारत में भी अब पश्चिमी समाज की तरह बुजुर्ग पीढ़ी में अकेलेपन की भावना तेजी से बढ़ रही है।

********************************************************ये वही भारत देश है जहाँ राम ने अपने वृद्ध पिता का आदेश मान कर 14 बरस वन का वास किया था, ये वही देश है जहाँ श्रवण कुमार अपने अंधे माता पिता को कांवर में बैठा कर तीर्थ यात्रा के लिए ले जाता है ।

जय हिन्द, जय भारत ! वन्दे मातरम !!
by 
 
 










युधवीर सिंह लाम्बा भारतीय

भारत में प्रतिदिन 24 फीसदी बच्चे रह जाते हैं भूखे


भारत एक आर्थिक महाशक्ति भले ही बनने जा रहा हो, लेकिन एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) 'सेव द चिल्ड्रन' के एक सर्वेक्षण के मुताबिक यहां छह वर्ष तक के करीब एक चौथाइ बच्चे रोज भूखे रह जाते हैं। एनजीओ के मंगलवार को जारी सर्वेक्षण के मुताबिक देश के करीब 30 फीसदी परिवारों को बढ़ती महंगाई के कारण अपने भोजन में कटौती करनी पड़ रही है, जबकि करीब 25 फीसदी बच्चे रोज भूखे रह जाते हैं।

'सेव द चिल्ड्रन' नामक संस्था ने खाद्य महंगाई और खान-पान की आदतों पर इसके असर पर पांच देशों में सर्वेक्षण किया।

एनजीओ के सीईओ जैसमिन ह्विटब्रेड ने आईएएनएस से कहा, "यह अचम्भित करने वाला है कि अभिभावक कह रहे हैं कि ऊंची कीमत के कारण वह बच्चों के लिए भोज्य पदार्थ नहीं खरीद पाते हैं। यह बच्चे के लिए खतरनाक है। क्योंकि कुपोषण बच्चे के लिए जानलेवा है।"

सर्वेक्षण दिसम्बर और जनवरी में नाइजीरिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश, पेरू और भारत में किया गया। इसमें गांव और शहरों के 1000 से अधिक लोगों से बात की गई।

उन्होंने कहा, "इन पांच देशों को चुनने का कारण यह है कि यहां दुनिया के आधे से अधिक कुपोषित बच्चे रहते हैं।"

भारतीय लोगों में 66 फीसदी ने कहा कि 2011 में खाद्य पदार्थो की मूल्य वृद्धि एक बड़ी चिंता रही, जबकि 17 फीसदी ने कहा कि उनके बच्चे स्कूल छोड़ कर काम पर गए, ताकि भोज्य पदार्थो की कीमत का भुगतान हो सके।


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रविवार, 19 फ़रवरी 2012

भोले की भक्ति का पर्व : महाशिवरात्रि

भोले की भक्ति का पर्व : महाशिवरात्रि

भारत पर्वों का देश है यह तो हम सब जानते हैं और यह पर्व ज्यादातर हमारी भक्ति और ईश्वर की स्तुति पर निर्भर होते हैं. मार्च माह शुरु हो चुका है और इस माह कई ऐसे त्यौहार आने को हैं जिनका हमें बेसब्री से इंतजार रहता है. महाशिवरात्रि भी इनमें से एक है. भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के उपलक्ष्य में मनाया जाने वाला यह त्यौहार हमारी संस्कृति का एक अहम अंग है.

महाशिवरात्री की कथा : फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को शिवरात्रि पर्व मनाया जाता है. माना जाता है कि सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि भगवान शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था. प्रलय की वेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं. इसीलिए इसे महाशिवरात्रि अथवा कालरात्रि कहा गया. तीनों भुवनों की अपार सुंदरी तथा शीलवती गौरा को अर्धांगिनी बनाने वाले शिव प्रेतों व पिशाचों से घिरे रहते हैं. उनका रूप बड़ा अजीब है. शरीर पर मसानों की भस्म, गले में सर्पों का हार, कंठ में विष, जटाओं में जगत-तारिणी पावन गंगा तथा माथे में प्रलयंकर ज्वाला है.

भोला है शिव: शिव को जहां एक ओर प्रलय का कारक माना जाता है वहीं शिव को भोला भी कहा जाता है. मात्र बेल और भांग के प्रसाद से प्रसन्न होने वाले भगवान शिव की आज के दिन पूजा अर्चना करने का विशेष महत्व और विधान है. प्राचीन कथा के अनुसार आज के दिन ही शिव और पार्वती का विवाह हुआ था. नर, मुनि और असुरों के साथ बारात लेकर शिव माता पार्वती से विवाह के लिए गए थे. शिव की नजर में अच्छे और बुरे दोनों ही तरह के लोगों का समान स्थान है. वह उनसे भी प्रेम करते हैं जिन्हें यह समाज ठुकरा देता है. शिवरात्रि को भगवान शिव पर जो बेल और भांग चढ़ाई जाती है यह शिव की एकसम भावना को ही प्रदर्शित करती है. शिव का यह संदेश है कि मैं उनके साथ भी हूं जो सभ्य समाजों द्वारा त्याग दिए जाते हैं. जो मुझे समर्पित हो जाता है, मैं उसका हो जाता हूं.

शिव की महिमा: शिव सबसे क्रोधी होने के साथ सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाले भी हैं. इसीलिए युवतियां अपने अच्छे पति के लिए शिवजी का सोलह सोमवार का व्रत रखती हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार शिव जी की चाह में माता पार्वती ने भी शिव का ही ध्यान रखकर व्रत रखा था और उन्हें शिव वर के रुप में प्राप्त हुए थे. इसी के आधार पर आज भी स्त्रियां अच्छे पति की चाह में शिव का व्रत रखती है और शिवरात्रि को तो व्रत रखने का और भी महत्व और प्रभाव होता है.

शिव की आराधना करने वाले उन्हें प्रसन्न करने के लिए भांग और धतूरा चढ़ाते हैं. इस दिन मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर, ऊपर से बेलपत्र, आक धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर ‘शिवलिंग’ पर चढ़ाया जाता है. अगर पास में शिवालय न हो, तो शुद्ध गीली मिट्टी से ही शिवलिंग बनाकर उसे पूजने का विधान है. इसके साथ ही रात्रि के समय शिव पुराण सुनना चाहिए.

जैसा कि हमेशा ही कहा जाता है शिव भोले हैं और साथ ही प्रलयकारी भी तो अगर आप भी अपने सामर्थ्य के अनुसार ही शिव का व्रत रखते हैं तो आपकी छोटी सी कोशिश से ही भगवान शिव अतिप्रसन्न हो सकते हैं.

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शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

dwadash jyotirling




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Maha Shivaratri महाशिवरात्रि Mon, 20 Feb 2012

 महाशिवरात्रि व्रत कथा
(Mahashivratri Vrat Katha):


महाशिवरात्रि का व्रत फाल्गुन महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को रखा जाता है ( Falgun Krishna Paksha Chaturdashi tithi Mahashivratri)। शिवरात्रि न केवल व्रत है, बल्कि त्यहार और उत्सव भी है. इस दिन भगवान भोलेनाथ का कालेश्वर रूप प्रकट हुआ था. महाकालेश्वर शिव की वह शक्ति हैं जो सृष्टि के अंत के समय प्रदोष काल में अपनी तीसरी नेत्र की ज्वाला से सृष्टि का अंत करता हैं। महादेव चिता की भष्म लगाते हैं, गले में रूद्राक्ष धारण करते हैं और नंदी बैल की सवारी करते हैं. भूत, प्रेत, पिशाच शिव के अनुचर हैं. ऐसा अमंगल रूप धारण करने पर भी महादेव अत्यंत भोले और कृपालु हैं जिन्हें भक्ति सहित एक बार पुकारा जाय तो वह भक्त की हर संकट को दूर कर देते हैं. महाशिवरात्रि की कथा में शिव के इसी दयालु और कृपालु स्वभाव का परिचय मिलता है.

एक शिकारी था. शिकारी शिकार करके अपना तथा अपने परिवार का भरण पोषण करता था.एक दिन की बात है शिकारी पूरे दिन भूखा प्यासा शिकार की तलाश में भटकता रहा परंतु कोई शिकार हाथ न लगा. शाम होने को आई तो वह एक बेल के पेड़ पर चढ़ कर बैठ गया. वह जिस पेड़ पर बैठा था उस वृक्ष के नीचे एक शिवलिंग था. रात्रि में व्याधा अपना धनुष वाण लिए शिकार की तलाश में बैठा था और उसे शिकार भी मिला परंतु निरीह जीव की बातें सुनकर वह उन्हें जाने देता. चिंतित अवस्था में वह बेल की पत्तियां तोड़ तोड़ कर नीचे फेंकता जाता. जब सुबह होने को आई तभी शिव जी माता पार्वती के साथ उस शिवलिंग से प्रकट होकर शिकारी से बोले आज शिवरात्रि का व्रत था और तुमने पूरी रात जागकर विल्वपत्र अर्पण करते हुए व्रत का पालन किया है इसलिए आज तक तुमने जो भी शिकार किए हैं और निर्दोष जीवों की हत्या की है मैं उन पापों से तुम्हें मुक्त करता हूं और शिवलोक में तुम्हें स्थान देता हूं. इस तरह भगवान भोले नाथ की कृपा से उस व्याधा का परिवार सहित उद्धार हो गया.

महाशिवरात्रि महात्मय एवं व्रत विधान (Mahashivratri mahatmya vrat vidhan):


शिवरात्रि (Shivratri) की बड़ी ही अनुपम महिमा है. जो शिवभक्त इस व्रत का पालन करते हैं उन्हें चाहिए कि फाल्गुन कष्ण पक्ष की चतुदर्शी (Falgun Krishna Chatrudashi) यानी शिवरात्रि के दिन प्रात: उठकर स्नान करें फिर माथे पर भष्म अथवा श्रीखंड चंदन का तिलक लगाएं. हाथ में अक्षत, फूल, मु्द्रा और जल लेकर शिवरात्रि व्रत (Shivratri Vrat) का संकल्प करें. गले में रूद्राक्ष धारण करके शिवलिंग के समीप ध्यान की मुद्रा में बैठकर भगवान शिव का ध्यान करें। शांतचित्त होकर भोलेनाथ का गंगा जल से जलाभिषेक करें. महादेव को दुग्ध स्नान बहुत ही पसंद है अत: दूध से अभिषेक करें. महादेव को फूल, अक्षत, दुर्वा, धतूरा, बेलपत्र अर्पण करें। शिव जी को उक्त पदार्थ अर्पित करने के बाद हाथ जोड़ कर प्रार्थना करें.

शिवरात्रि के दिन रूद्राष्टक (Rudrastak) और शिवपुराण (Shiv Purana) का पाठ सुनें और सुनाएं. रात्रि में जागरण करके नीलकंठ कैलशपति का भजन और गुणगान करना चाहिए. अगले दिन भोले शंकर की पूजा करने के बाद पारण कर अन्न जल ग्रहण करना चाहिए. इस प्रकार महाशिवरात्रि का व्रत करने से शिव सानिघ्य प्राप्त होता है.  

शिवरात्रिव्रतं ह्यतत्‌ करिष्येऽहं महाफलम्‌।
निर्विघ्नमस्तु मे चात्र त्वत्प्रसादाज्जगत्पते॥

महाशिवरात्रि के प्रथम प्रहर में संकल्प करके दूध से स्नान तथा `ओम हीं ईशानाय नम:’ का जाप करें। द्वितीय प्रहर में दधि स्नान करके `ओम हीं अधोराय नम:’ का जाप करें। तृतीय प्रहर में घृत स्नान एवं मंत्र `ओम हीं वामदेवाय नम:’ तथा चतुर्थ प्रहर में मधु स्नान एवं `ओम हीं सद्योजाताय नम:’ मंत्र का जाप करें।

महाशिवरात्रि मंत्र एवं समर्पण


सम्पूर्ण – महाशिवरात्रि पूजा विधि के दौरान ‘ओम नम: शिवाय’ एवं ‘शिवाय नम:’ मंत्र का जाप करना चाहि‌ए। ध्यान, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, पय: स्नान, दधि स्नान, घृत स्नान, गंधोदक स्नान, शर्करा स्नान, पंचामृत स्नान, गंधोदक स्नान, शुद्धोदक स्नान, अभिषेक, वस्त्र, यज्ञोपवीत, उवपसत्र, बिल्व पत्र, नाना परिमल दव्य, धूप दीप नैवेद्य करोद्वर्तन (चंदन का लेप) ऋतुफल, तांबूल-पुंगीफल, दक्षिणा उपर्युक्त उपचार कर ’समर्पयामि’ कहकर पूजा संपन्न करें। कपूर आदि से आरती पूर्ण कर प्रदक्षिणा, पुष्पांजलि, शाष्टांग प्रणाम कर महाशिवरात्रि पूजन कर्म शिवार्पण करें।

महाशिवरात्रि व्रत प्राप्त काल से चतुर्दशी तिथि रहते रात्रि पर्यन्त करना चाहि‌ए। रात्रि के चारों प्रहरों में भगवान शंकर की पूजा-अर्चना करने से जागरण, पूजा और उपवास तीनों पुण्य कर्मों का एक साथ पालन हो जाता है और भगवान शिव की विशेष अनुकम्पा और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।



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Marriage 11-05-2011


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