शनिवार, 27 जुलाई 2019

पीपल, बेल, वट, आंवला व अशोक ये पांचो वृक्ष पंचवटी कहे गये हैं।

पंचवटी वाटिका
पीपल, बेल, वट, आंवला व अशोक ये पांचो वृक्ष पंचवटी कहे गये हैं। इनकी स्थापना पांच दिशाऒं में करनी चाहिए। पीपल पूर्व दिशा में, बेल उत्तर दिशा में, वट (बरगद) पश्चिम दिशा में, आंवला दक्षिण दिशा , आग्नये कोण में अशोक की तपस्या के लिए स्थापना करनी चाहिए । पांच वर्षों के पश्चात चार हाथ की सुन्दर वेदी की स्थापना बीच मॆं करनी चाहिए । यह अनन्त फलों कॊ देने वाली व तपस्या का फल देने प्रदान करने वाली है।

पंचवटी का महत्व

1 औषधीय महत्व
इन पांच वृक्षों में अद्वितीय औषधीय गुण है । आंवला विटामिन "c" का सबसे समृद्ध स्त्रोत ह एवं शरीर को रोग प्रतिरोधी बनाने की महौषधि है। बरगद का दूध बहुत बलदायी होता है। इसके प्रतिदिन प्रयोग से शरीर का कायाकल्प हो जाता है। पीपल रक्त विकार दूर करने वाला वेदनाशामक एवं शोथहर होता है। बेल पेट सम्बन्धी बीमारियों का अचूक औषधि है तो अशोक स्त्री विकारों को दूर करने वाला औषधीय वृक्ष है।
इस वृक्ष समुह में फलों के पकने का समय इस प्रकार निर्धारित है कि किसी न किसी वृक्ष पर वर्ष भर फल विधमान रहता है। जो मौसमी रोगों के निदान हेतु सरलता से उपलब्ध होता है। गर्मी में जब पाचन सम्बन्धी विकारों की प्रबलता होती है तो बेल है। वर्षाकाल में चर्म रोगों की अधिकता एवं रक्त विकारों में अशॊक परिपक्व होता है। शीत ऋतु में शरीर के ताप एवं उर्जा की आवश्यकता को आंवला पूरा करता है

2 पर्यावरणीय महत्व
बरगद शीतल छाया प्र्दान करने वाला एक विशाल वृक्ष है। गर्मी के दिनों में अपरान्ह में जब सुर्य की प्रचन्ड किरणें असह्य गर्मी प्रदान करत हैं एवं तेज लू चलता है तो पचवटी में पश्चिम के तरफ़ स्थित वट वृक्ष सघन छाया उत्पन्न कर पंचवटी को ठ्न्डा करत है।
पीपल प्रदुषण शोषण करने वाला एवं प्राण वायु उत्पन्न करन वाला सर्वोतम वृक्ष है
अशोक सदाबहार वृक्ष है यह कभी पर्ण रहित नहीं रहता एवं सदॆव छाया प्रदान करत है।
बेल की पत्तियों, काष्ठ एवं फल में तेल ग्रन्थियां होती है जो वातावरण को सुगन्धित रखती हैं।
पछुआ एवं पुरुवा दोनों की तेज हवाऒं से वातावरण में धूल की मात्रा बढती है जिसकॊ पुरब व पश्चिम में स्थित पीपल व बरगद के विशाल पेड अवशोशित कर वातावरण को शुद्ध रखते हैं।

3 धार्मिक महत्व
बेल पर भगवान शंकर का निवास माना गया है तो पीपल पर विष्णु एवं वट वृक्ष पर ब्रह्मा का। इस प्रकार प्रमुख त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश का पंचवटी में निवास है एवं एक ही स्थल पर तीनो के पूजन का लाभ मेलता है।

4 जैव विविधता संरक्षण
पंचवटी में निरन्तर फल उपलब्ध होने से पक्षियों एवं अन्य जीव जन्तुऒं के लिए सदैव भोजन उपलब्ध रहता है एवं वे इस पर स्थाई निवास करते हैं। पीपल व बरगद कोमल काष्टीय वृक्ष है जो पक्षियॊं के घोसला बनाने के उपयुक्त है ।

#Kisan #IamFarmerToo #jaiKisan #KisanoKiAwaz #Respect #Farmer #Farmers #India #indian #agriculture

शुक्रवार, 26 जुलाई 2019

अब कोई रीति या परंपरा बची है?

संभलने की जरूरत है !!

*1. चोटियां छोड़ी ,*
*2. टोपी, पगड़ी छोड़ी ,*
*3. तिलक, चंदन छोड़ा*
*4. कुर्ता छोड़ा ,धोती छोड़ी ,*
*5. यज्ञोपवीत छोड़ा ,*
*6. संध्या वंदन छोड़ा ।*
*7. रामायण पाठ, गीता पाठ छोड़ा ,*
*8. महिलाओं, लड़कियों ने साड़ी छोड़ी, बिछिया छोड़े, चूड़ी छोड़ी , दुपट्टा, चुनरी छोड़ी, मांग बिन्दी छोड़ी।*
*9. पैसे के लिये, बच्चे छोड़े (आया पालती है)*
*10. संस्कृत छोड़ी, हिन्दी छोड़ी,*
*11. श्लोक छोड़े, लोरी छोड़ी ।*
*12. बच्चों के सारे संस्कार (बचपन के) छोड़े ,*
*13. सुबह शाम मिलने पर राम राम छोड़ी ,*
*14. पांव लागूं, चरण स्पर्श, पैर छूना छोड़े ,*
*15. घर परिवार छोड़े (अकेले सुख की चाह में संयुक्त परिवार)।*
*अब कोई रीति या परंपरा बची है? ऊपर से नीचे तक गौर करो, तुम कहां पर हिन्दू हो, भारतीय हो, सनातनी हो, ब्राह्मण हो, क्षत्रिय हो, वैश्य हो*या कुछ और हो
*कहीं पर भी उंगली रखकर बता दो कि हमारी परंपरा को मैंने ऐसे जीवित रखा है।*
जिस तरह से हम धीरे धीरे बदल रहे हैं- जल्द ही समाप्त भी हो जाएंगे।

बौद्धों ने कभी सर मुंड़ाना नहीं छोड़ा!
सिक्खों ने भी सदैव पगड़ी का पालन किया!
मुसलमानों ने न दाढ़ी छोड़ी और न ही 5 बार नमाज पढ़ना!
ईसाई भी संडे को चर्च जरूर जाता है!
फिर हिन्दू अपनी पहचान-संस्कारों से क्यों दूर हुआ?
कहाँ लुप्त हो गयी- गुरुकुल की शिखा, यज्ञ, शस्त्र-शास्त्र, नित्य मंदिर जाने का संस्कार ?
हम अपने संस्कारों से विमुख हुए, इसी कारण हम विलुप्त हो रहे हैं।

अपनी पहचान बनाओ!
अपने मूल-संस्कारों को अपनाओ!!!

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गुरुवार, 25 जुलाई 2019

आर्थिक मंदी में आगे कैसे बढ़े

*आर्थिक मंदी में आगे कैसे बढ़े :*

*Government के आंकडे चाहे कुछ भी कहे, ये सच है की भारत मे आर्थिक मंदी शुरू हो चुकी हैं और ये सबसे बड़ी और सबसे लंबी चलने वाली मंदी हो सकती हैं .*
*इससे बाहर निकलने के लिये  हमे कड़े संघर्ष की ज़रूरत पड़नी ही है .*

*कुछ ज़रूरी बातें और कदम जिससे मंदी की मार कम की जा सकती हैं .*

*1) अपने खर्चे पर लगाम लगाये. चाहे व्यापार मे हो या व्यक्तिगत जीवन मे,  फ़िज़ूल खर्च से बचे. बिना कारण यात्रा, trip  या व्यापार के अनआवश्यक खर्च टाले .*

*2) किसी भी customer या client के बड़े order को double check करे. क्या वो भुगतान मे सक्षम है, इस समय आप सिर्फ़ वही order ले जो firm रह सकते हैं.  outstanding आपका  Budget बिगाड़ सकते हैं .*

*3) अपनी क्षमता के अनुसार ही काम या booking ले .*

*4) अपने stock का निरंतर जायज़ा ले और क्षमता और order के हिसाब से ही stock करे*

*5) व्यापार पर कडी और दैनिक नज़र रखे*

*6) After Sales Service पे ज़्यादा ध्यान दे, Regular Customer इस समय की सबसे बड़ी ताक़त रहेगी*

*7) भुगतान के लिए प्यार से और निरंतर call करते रहे*

*8) बेवजह की कानूनी झंझटो से खुद को दूर रखे. ये समय और पैसे की सबसे बड़ी बर्बादी हैं*

*9) अपने व्यापार के नियम और सिद्धांतो पे कायम रहे .*

*10) अपने परिवार के लिए कमाये और बचत करे .*

*11) शादियो और सामाजिक कार्यक्रमों पे कम खर्च करे.  आगे और मौके आयेंगे,  तब हम अपनी शान और मान दिखा सकते हैं, अभी टिक के खेलने का समय हैं .*

*12) सबसे मधुर सम्बन्ध बनाये रखें.  कौन जाने आपके अच्छे व्यव्हार से आप को कौन Reference दे जाए .*

*13) अपने Products, व्यापार, Services, Market की Expertise निरंतर बढाते रहे.*

*14) Positive लोगों मे रहे. Negative लोगों से बचे.  हमेशा मन को शान्त और संतुलित रखने पर ज़ोर दे .*

*15)अपने शरीर और मन को भरपूर समय दे. Exercise करे, अच्छा भोजन ग्रहण करे, अच्छी दिनचर्या follow करे. Medical के bills कम से कम करते जाये. ये बचत आप के बहोत काम आयेगी. अपनी Family के साथ Quality Time बिताये. आखिर इन्ही के लिये तो सब कुछ कर रहे हैं.*

मंगलवार, 23 जुलाई 2019

दोस्तों आपको इंश्योरेंस और RTO के नाम पर जमकर लूटा जाता है

Received on whatapp:-

*इंश्योरेंस के नाम पर वाहन डीलरों की खुली लूट, नई गाडी लेते समय आखिर क्यूँ थमा दी जाती है प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनी की पॉलिसी?*

दोस्तों यदि आप कोई भी दुपहिया या चौपहिया वाहन खरीदने कि सोच रहे है या खरीदने जा रहे है तो ये जानकारी केवल आपके लिए है। आज मैं आपके साथ जो जानकारी साझा करने जा रहा हूँ उससे आप आसानी से अच्छा खासा अमाउंट वाहन खरीदारी के समय बचा सकते है और यहाँ तक कि अगर आप EMI पर भी लेने जा रहे है तो एक से दो EMI जितना पैसा या उससे भी ज्यादा आप आसानी से बचा सकते है, आपकी थोड़ी-सी जानकारी और सतर्कता आपकी जेब कटने से बचा सकती है। यहाँ मैं किसी ब्रांड या मॉडल के बारे में नहीं बताने वाला हूँ क्यूंकि वो सब आप लोग अपने बजट और आवश्यकतानुसार चुनते है। यहां जो जानकारी मैं आपसे साँझा करने जा रहा हूँ वो सभी के लिए कॉमन है जो हर ब्रांड और मॉडल पर लागू होती है, तो जानकारी को आखिर तक ध्यान से पढ़िए और अच्छी लगे तो अपने परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिये।

*1. दोस्तों कभी भी Dealer point से Insurance न ले, इसके बारे में विस्तार से बताने वाला हूँ, क्यूंकि सबसे ज्यादा आपका पैसा यही बचने वाला है।*

2. Car Accessories like सीट कवर्स, Mattress वगैरा भी अगर हो सके तो डीलर के यहाँ से न ले, क्यों न ले इस बारे में भी थोड़ा-सा संक्षेप में बताऊंगा और 

3. Teflon Coating, Under Body Coating आदि पर व्यर्थ पैसा खर्च न करे मैं ऐसा क्यों कह रहा हूँ इसके लिए पूरी जानकारी ध्यान से पढ़िए। एक-एक करके समझाने की कोशिश करता हूँ।

1. दोस्तों, 31 अगस्त 2017 को IRDAI ने मोटर बीमा उत्पादों के वितरण और सर्विसिंग में ऑटोमोबाइल डीलरों की भूमिका को पहचानने और विनियमित करने के लिए "मोटर बीमा सेवा प्रदाताओं पर दिशानिर्देश" (MISP दिशानिर्देश) को अधिसूचित किया जो कि 01 नवंबर 2017 से लागू हुए। MISP के तहत मोटर डीलर सभी औपचारिकताओं को पूरी करने के बाद इंश्योरेंस कंपनी से MoU sign करता है और उसके बाद सम्बंधित कंपनी की मोटर पॉलिसी वो डीलर पोर्टल से वितरित कर सकता है। IRDA ने  MISP के तहत कमीशन कि अधिकतम सीमा तय कि हुई है जो Four wheeler के लिए 19.5 % और Two wheeler के लिए 22.5 % है, और *कोई भी इंश्योरेंस कंपनी इन नए नियमों के अनुसार इस से अधिक Remuneration डीलर को नहीं दे सकती है।*

*दोस्तों हम जब भी कोई नया वाहन खरीदते है तो Dealer अमूमन Insurance का price जोड़कर व्हीकल की कीमत का कोटेशन देता है और वो भी किसी प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनी का*, वो ऐसा क्यों करते है आप थोड़ा-सा ध्यान से पढ़ेंगे और समझने की कोशिश करेंगे तो आपको सारा खेल समझ आ जायेगा। क्या आपने कभी सोचा है कि ये Dealer लोग अमूमन या ये कहूँ शत प्रतिशत मामलों में आपको वाहन खरीदते समय किसी Private Company कि ही पॉलिसी क्यों देते है, किसी सरकारी बीमा कंपनी कि क्यों नहीं? तो चलिए आज आपको बता देता हूँ- *क्यूंकि Private Insurance Companies से इनको कमीशन तो मिलता ही है साथ ही साथ Cash Back, महंगे-महंगे Gifts और target पूरा करने के हिसाब से विदेश यात्रा/Domestic trips के रूप में बहुत कुछ मिलता है।* और ये सब पैसा निकाला जाता है हमारी जेब से। इंश्योरेंस के नाम पर आपसे ज्यादा धन राशि चार्ज की जाती है, क्यूंकि जितनी ज्यादा प्रीमियम राशि उतना ज्यादा कमीशन और उतनी जल्दी इनकी घरेलू या विदेश यात्रा। हमारे पैसे से कोई और सैर-सपाटा करके आता है, हम भी तो पैसा बचाकर अपना Holiday प्लान कर सकते है।

_दोस्तों अभी हालफिलहाल का एक उदाहरण देता हूँ आपको अच्छे से समझ आएगा, हमारे एक मित्र को अभी कुछ दिन पहले एक कार लेनी थी जिसकी Ex-Showroom कीमत 5,30,000/- के करीब थी, उसके लिए डीलर ने शुरू में Insurance price 42,000/- के लगभग क्वोट किया, बाद में 30,000/- पर आया और जब उसको बताया कि सरकारी बीमा कंपनी से 20,000 में मिल रहा है तो उसके बाद 20,000/- पर भी सहमत हो गया ।_ [यहाँ मैं 1 Year Own Damage प्लस 3 year Third Party की बात कर रहा हूँ।] बाद में इस बात पर भी सहमत हो गया की आप बेसक खुद से इंश्योरेंस करवा लेना लेकिन आप हमारे यहाँ से गाडी खरीद लो। दोस्तों सिर्फ इंश्योरेंस प्रीमियम में ही 22,000/- का अंतर कोई मामूली अंतर नहीं है, ये बहुत ज्यादा है । जो लोग EMI में लेते है 22,000/- से उनका लगभग 2 महीने का EMI भरा जा सकता है। इससे और महंगी गाड़ियों में तो ये अंतर 45,000 से 50,000/- के करीब होता है। अभी लगभग सभी कार कम्पनियाँ, कार के अलग-अलग मॉडल में डिस्काउंट दे रही है उसके साथ कंफ्यूज होने की जरुरत नहीं है। *अगर आप समझदारी से बीमा कंपनी चुनते है तो अच्छा-खासा अमाउंट आप इंश्योरेंस में ही बचा सकते है।*

दोस्तों हम गाडी के ब्रांड/मॉडल आदि की खूबियों/कमियों पर तो खूब रिसर्च कर लेते है लेकिन इंश्योरेंस जैसी चीजों को भू

ल जाते है। एक आम व्यक्ति को इंश्योरेंस के मामले में अधिक जानकारी नहीं होती है और न कोई सही और सटीक जानकारी देने वाला मिलता है । कुछ लोगो को तो यह भी मालूम नहीं होगा की General Insurance Sector में कितनी Private और सरकारी कम्पनियाँ है। मेरी आपको सलाह है कि कभी भी नया वाहन लेते समय Insurance प्रीमियम पर भी रिसर्च कीजिये। आँखें बंद करके डीलर की सब बातों पर कभी भी विश्वास न करे, सरकारी बीमा कंपनी से पता कीजिये कि Insurance प्रीमियम कितना पड़ेगा क्यूंकि *सरकारी बीमा कम्पनिया सीधे कस्टमर को प्रीमियम राशि में अच्छा खासा डिस्काउंट देती है।* डीलर को सरकारी बीमा कंपनी से कमीशन के अलावा ज्यादा कुछ मिलता नहीं है इसलिए ये लोग आपको इनकी पॉलिसी देते भी नहीं है, यहाँ तक की बताते भी नहीं है। आप इस विषय में ज्यादा पूछते नहीं है तो वो समझ जाते है कि ये भोंदूराम है, लूट लो। पूछेंगे तो गुमराह करेंगे इनकी सर्विस अच्छी नहीं है जी। अब ये थोडे बोलेगा कि मुझे कमीशन के अलावा कुछ नही मिलेगा। दोस्तों चोर लुटेरे तो चाकू छुरी कि नोंक पे लूटते है यहां मीठा बोलकर आपकी जेब काटी जाती है और आप खुशी-खुशी जेब कटवाकर आ भी जाते है । माना गाडी़ लेना आपकी जरुरत है लेकिन गाडी़ बेचना इनकी मजबूरी भी है इसलिए Negotiation कीजिए। *दोस्तों आप डीलर पॉइंट से इंश्योरेंस न लेकर खुद ही सीधे अपनी मनपसंद इंश्योरेंस कंपनी से बीमा ले सकते है इसके लिए सिर्फ आपको व्हीकल का Engine No./ Chasis No., Make & Model और Price, Colour आदि जरुरी जानकारी देनी होती है। और ऐसा करने से आपको कोई भी रोक नही सकता है।*

दोस्तों यहां पे आपको झांसे दिए जायेंगे कि हम जिस इंश्योरेंस कंपनी का बीमा देंगे उसमें क्लेम आया तो Cash-less कि व्यवस्था हो जाएगी जबकि पता  इनको भी है साला शुरू के 2-4 साल तो क्लेम नहीं आने वाला है बंदा सुबह-शाम 2 बार गाडी को धोएगा, कपडा मारेगा, कवर से ढक कर रखेगा। क्यूंकि हम नई गाडी को बहुत सावधानी और सुरक्षित रूप से चलाते है अगर होता भी है तो बहुत छोटा मोटा क्लेम होता है, कही स्क्रैच आ गए या बम्पर डैमेज हो गया, क्यूंकि नए व्हीकल में बड़े क्लेम आने की सम्भावना बहुत ही कम होती है। दोस्तों डीलर लोग सरकारी बीमा कंपनियों से Cash-less का टाई-अप इसलिये ही नहीं रखते कि इनकी लूट-खसोट कि दुकानें बंद हो जाएँगी। दूसरा आपको बताया जायेगा की हमारी पॉलिसी में Consumables (Engine Oil, Oil Filter, Fuel Filter, Break Oil) भी कवर है। दोस्तों ये सब चीजें तभी कवर है जब आपके व्हीकल का कोई बड़ा एक्सीडेंट हुआ है और इन सब पार्ट्स को चेंज करना पड़े। Engine & Gearbox Protection कवर लगभग सभी कम्पनियाँ देती है आप Add-on कवर के रूप में ले सकते है, भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है। तीसरा ये भी बोलेंगे की अनलिमिटेड क्लेम कर सकते है अरे भाई! किसी भी पॉलिसी में जितनी बार क्लेम आएगा वो मिलता ही है। सरकारी कंपनी दे देगी प्राइवेट में क्या कंडीशन डाला होगा आपको बताएंगे भी नहीं, क्लेम के समय पता चलता है ये भी एक कंडीशन थी, क्यूंकि शुरू में आपको एक पेज की पॉलिसी थमा दी जाती है, इसलिए आपको ज्यादा जानकारी नहीं होती है। मेरी आपसे गुजारिश है पूरी पॉलिसी पढ़िए जो सामन्यता 8-10 पेज की होती है। जो पॉलिसी आपकी बीमा कंपनी ने IRDAI से बेचने की अनुमति ली है (under file & use)। डीलर या बीमा कंपनी के भ्रामक प्रचार में ना आये। क्योंकि सबसे ज्यादा शिकायतें इन प्राइवेट कंपनियों के ही खिलाफ है, जो पॉलिसी देते समय पॉलिसी के नियम और शर्तों की सही-सही जानकारी कस्टमर को नहीं देती है। अगर वाहन लेते समय आपको प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनी की पॉलिसी थमा दी गयी है तो आप रिन्यूअल के समय सरकारी कंपनी से प्रीमियम राशि पता कर पॉलिसी रीन्यू करवा सकते है।

दोस्तों कितने गलत तरीके से आपको फंसाते है इसके लिए यहाँ मैं एक जानकारी और आपको शेयर कर दूँ मारुती व्हीकल बेचने के अलावा इंश्योरेंस भी बेचती है, मारुती इंश्योरेंस ब्रोकर एजेंट के द्वारा। जिनको एजेंट और ब्रोकर एजेंट में फर्क नहीं पता उनको संक्षेप में बता दूँ एजेंट सिर्फ एक बीमा कंपनी से लाइसेंस ले सकता है जबकि ब्रोकर एजेंट सभी बीमा कंपनियों से लाइसेंस ले सकता है और अपनी सुविधानुसार या ये कहुँ फ़ायदेनुसार किसी भी बीमा कंपनी की पॉलिसी दे सकता है। जब जुलाई 2017 से GST लागू हुआ तब मारुती ने अपने सभी डीलरों को आदेश दिया था की अगर कोई Non-Maruti Insurance ब्रोकर वाली गाडी रिपेयर के लिए आती है तो आप बिल उसकी इंश्योरेंस कंपनी के नाम से मत दो, कस्टमर के नाम से दो ताकि कस्टमर को क्लेम में GST का अमाउंट नहीं मिलेगा (क्यूंकि बिल उसकी इंश्योरेंस कंपनी के नाम से नहीं रहेगा तो वो GST amount क्लेम नहीं कर पायेगी) और मजबूरन Customer अगली बार हमारे ब्रोकर कोड से पॉलिसी लेंगे वो भी प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनी की और महंगे दाम में। क

्या कहुँ इसे ये एक इनकी बहुत ही अनैतिक बिज़नेस प्रैक्टिस थी। क्यूंकि उस समय मेरी गाडी का क्लेम था तो मुझे इन लोगो से बहुत जदो-जहद करनी पड़ी थी। मुझे ये लोग बेवकूफ नहीं बना पाये थे, और मैंने बोल दिया था आप लिखित में दीजिये की मेरी बीमा कंपनी के नाम से बिल नहीं देंगे, IRDAI में शिकायत करके तुम्हारा ब्रोकर लाइसेंस ही कैंसिल करवाता हूँ। दोस्तों *क्या आपको पता है- आपका Car Manufacturer भी आपको किसी विशेष बीमा कंपनी या अपने ब्रोकर चैनल से पॉलिसी लेने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है* डीलर तो दूर की बात है। MISP का उद्देश्य ही यही था की कस्टमर को फायदा हो। लेकिन अपने फायदे के लिए ये लोग आपको बेवकूफ बनाते आ रहे है। क्या आपको पता है मारुती इंश्योरेंस ब्रोकर ने 2018-19 फाइनेंसियल ईयर में लगभग 8889 करोड़ की प्रीमियम धनराशि बुक की है, इस पर कमीशन कितना बनता है आप खुद गणना कर लीजिये। दोस्तों जागरूक बनिए, समझदार बनिए ।

2. दोस्तों अगर आपको Car Accessories जैसे सीट कवर या मैट्रेस्स लगवानी ही है तो बाहर से लगवाइये क्यूंकि बाहर से ये आपको बहुत सस्ते में पड़ जाएँगी। मैंने बाहर से मात्र 3000 में लगवाई थी जो अमूमन डीलर के यहाँ आपको 12-15 हजार में पड़ती है। आप नया व्हीकल लेते है तो अमूमन बोला जाता होगा आप इतने रूपये तक का कोई भी आइटम लगवा सकते है लेकिन मेरी सिटी में इतने हरामखोर है सीट कवर नहीं लगाते है, बोलते है- सर इसी में तो हमारा प्रॉफिट मार्जिन है।

3. दोस्तों आप अपना नया व्हीकल लेते है तो आपको एक अलग चाव होता है, यहाँ आपकी Psychology के साथ खेला जाता है सर टेफ़लोन कोटिंग करवा लो पेंट प्रोटेक्शन होगा, स्क्रैच नहीं दिखेगा but my dear friends its useless हफ्ता दस दिन चमक रहती है उसके बाद सब वैसे का वैसा, इस से आपके व्हीकल की ओरिजिनल shine भी चली जाती है। दूसरा बोला जाता होगा की अंडर बॉडी रस्ट कोटिंग करवा लो, तो दोस्तों अगर आप ड्राई एरिया में है तो इसकी कोई जरुरत नहीं है और आपके कार निर्माता द्वारा केमिकल प्रोसेस से कार बॉडी को ट्रीट किया जाता है तो मुझे नहीं लगता इस सब की कोई जरुरत है ।

दोस्तों आपको इंश्योरेंस और RTO के नाम पर जमकर लूटा जाता है अगर आप नया वाहन ले रहे है या पॉलिसी रीन्यू करवाना चाहते है तो सरकारी बीमा कंपनी *_(New India Assurance, United India Insurance, National Insurance, Oriental Insurance)_* से इंश्योरेंस प्रीमियम की राशि जरूर पता कर लीजिये, इसके लिए आप इनके कार्यालय जा सकते है या इनके किसी बीमा एजेंट की मदद ले सकते है। इनके कार्यालयों की जानकारी आपको इनकी वेबसाइट पर ऑफिस लोकेटर सेक्शन के अंतर्गत मिल जाएगी। RTO में भी आपको एक एकमुश्त राशि बता दी जाती है उसमे अपने डीलर से पूछिए Road Tax कितना है, रजिस्ट्रेशन फीस कितनी है, स्मार्ट कार्ड की फीस कितनी है, Hypothecation Charges कितना है, HSPR (High Security) No. Plate का चार्ज कितना है, Local Municipality Tax कितना है, बाकी बचा वो उनका सुविधा शुल्क है। 

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दोस्तों, ये सब जानकारी आपको किसी वेबसाइट पर नहीं मिलेगी और न ही कोई बताने समझाने वाला मिलेगा तो अपने परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिये ताकि अगली बार कोई आपको बेवकूफ ना बना पाये।

अंत मे यही कहना चाहूँगा- *Money is Yours, Choice is Yours!*
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सोमवार, 22 जुलाई 2019

दही में नमक डाल कर न खाऐं

दही में नमक डाल कर न खाऐं |

डॉ.के.पी.सिंह (कैंसर विशेषज्ञ)
9213981415
कभी भी आप दही को नमक के साथ मत खाईये. दही को अगर खाना ही है, तो हमेशा दही को मीठी चीज़ों के साथ खाना चाहिए, जैसे कि चीनी के साथ, गुड के साथ, बूरे के साथ आदि.

इस क्रिया को और बेहतर से समझने के लिए आपको बाज़ार जाकर किसी भी साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट की दूकान पर जाना है, और वहां से आपको एक लेंस खरीदना है, अब अगर आप दही में इस लेंस से देखेंगे तो आपको छोटे-छोटे हजारों बैक्टीरिया नज़र आएंगे |

ये बैक्टीरिया जीवित अवस्था में आपको इधर-उधर चलते फिरते नजर आएंगे. ये बैक्टीरिया जीवित अवस्था में ही हमारे शरीर में जाने चाहिए, क्योंकि जब हम दही खाते हैं तो हमारे अंदर एंजाइम प्रोसेस अच्छे से चलता है |

हम दही केवल बैक्टीरिया के लिए खाते हैं |

दही को आयुर्वेद की भाषा में जीवाणुओं का घर माना जाता है, अगर एक कप दही में आप जीवाणुओं की गिनती करेंगे तो करोड़ों जीवाणु नजर आएंगे |

अगर आप मीठा दही खायेंगे तो ये बैक्टीरिया आपके लिए काफ़ी फायदेमंद साबित होंगे |

वहीं अगर आप दही में एक चुटकी नमक भी मिला लें तो एक मिनट में सारे बैक्टीरिया मर जायेंगे | और उनकी लाश ही हमारे अंदर जाएगी जो कि किसी काम नहीं आएगी |

अगर आप 100 किलो दही में एक चुटकी नामक डालेंगे तो दही के सारे बैक्टीरियल गुण खत्म हो जायेंगे क्योंकि नमक में जो केमिकल्स है वह जीवाणुओं के दुश्मन है |

आयुर्वेद में कहा गया है कि दही में ऐसी चीज़ मिलाएं, जो कि जीवाणुओं को बढाये ना कि उन्हें मारे या खत्म करे |

दही को गुड़ के साथ खाईये, गुड़ डालते ही जीवाणुओं की संख्या मल्टीप्लाई हो जाती है और वह एक करोड़ से दो करोड़ हो जाते हैं थोड़ी देर गुड मिला कर रख दीजिए |

बूरा डालकर भी दही में जीवाणुओं की ग्रोथ कई गुना ज्यादा हो जाती है |

मिश्री को अगर दही में डाला जाये तो ये सोने पर सुहागे का काम करेगी |

भगवान कृष्ण भी दही को मिश्री के साथ ही खाते थे |

पुराने समय के लोग अक्सर दही में गुड़ डाल कर दिया करते थे।
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अपेंडिक्स के लक्षण, कारण, बचाव तथा अपेंडिक्स में क्या खाएं

अपेंडिक्स के लक्षण, कारण, बचाव
तथा अपेंडिक्स में क्या खाएं


छोटी आंत (Appendix) अर्थात एक मुंह वाली आंत-10 से 15 सेंटीमीटर तक लम्बी होती है। यह बड़ी आंत के साथ मिली होती है। इसमें सूजन हो जाती है। जब अपेंडिक्स में पुराना संक्रमण हो तो यह रोग और भी गंभीर रूप धारण कर लेता है। ऐसी स्थिति में थोड़े समय में ही आंत में छेद हो सकता है और इसका विषैला तरल पेट की भीतरी झिल्ली (पेरीटोनियम) में पहुंचकर वहां सूजन पैदा कर सकता है। प्रायः युवावस्था और मध्य आयु में यह रोग अधिकता से होता है।

छोटी आंत (SMALL INTESTINE) और बड़ी आंत (COLON) के जोड़ (CAECUM) के निचले भाग में हम लोगों की आंत की पूंछ (अपेंडिक्स ) इसका एक मुंह, एक पतली छोटी थैली के समान है। यह लम्बाई में लगभग 3 या साढ़े तीन इंच होती है, परंतु इसकी लम्बाई कभी-कभी 9 इंच तक हो जाती है। यह केवल एक-चौथाई इंच मोटी होती है। इसी आंत की पूंछ में जो सूजन होती है उसे ही अपेंडिसाइटिस कहते हैं। बहुत-सी अवस्थाओं में अपेंडिक्स में ही सूजन होती है, जो दवाई के उपचार द्वारा आसानी से ठीक हो जाती है, किंतु कभी-कभी आंत के तमाम तंतुओं में ही सूजन फैल जाती है। ऐसे हालात में सर्जरी ही एकमात्र उपचार है, वरना यह फट सकती है और जानलेवा साबित हो सकती है। क्या होती है अपेंडिक्स ?- पहले डॉक्टर्स का मानना था कि अपेंडिक्स शरीर में फालतू अंग होता है और इसका कोई उपयोग नहीं है। लेकिन बाद में हुई रिसर्च में पाया गया कि एक स्वस्थ शरीर के लिए अपेंडिक्स भी जरूरी अंग होता है। इसमें भोजन पचाने के लिए गुड बैक्टीरिया जमा होते हैं जो पाचन में मदद करते हैं। जब शरीर में किसी लंबी बीमारी के कारण बैक्टीरिया की कमी हो जाती है तो अपेंडिक्स का काम पाचन तन्त्र को ठीक रखना होता है।

अपेंडिक्स के लक्षण

अपेंडिक्स के प्रमुख लक्षणों में शामिल है – बुखार होना, जी मिचलना, उलटी, पीठ में दर्द, अत्यधिक मात्रा में गैस बनना, भूख कम लगना, पेशाब करते समय दर्द, गंभीर संक्रमण जैसे अपेंडिक्स के लक्षण हो सकते हैं। इसमें पेट में अधिक मात्रा में गैस तो बनती ही है, लेकिन उसे बाहर निकालने में समस्या आती है। इसके अलावा कब्ज़ और डायरिया के लक्षण भी दिखाई देते हैं।

अपेंडिक्स की बीमारी में पहले पेट में नाभि के नीचे और आस-पास बहुत तेज दर्द होता है, जिसके कारण रोगी तड़पने लगता है। यह दर्द अपना स्थान बदलता रहता है और अंत में नाभि के दाईं ओर कुछ नीचे दक्षिण में दर्द आकर ठहर जाता है।

इस रोग में पेट के इंफैक्शन वजह से जीभ पर सफेद परत सी जम जाती है |

इस रोग में रोगी को तेज़ दर्द के साथ मितली और उलटी भी आती है तथा कम्पन होकर 101 से 102 फॉरेनहाइट तक बुखार भी हो जाता है।

रोगी की नाड़ी की गति 120 बार प्रति मिनट तक पहुंच जाती है। रोगी अपनी दाईं टांग खींचकर रखता है क्योंकि ऐसा करने से उसे दर्द से कुछ राहत महसूस होती है। पेट को दबाने पर उस स्थान पर दर्द अधिक होता है और सूजन के कारण उभार-सा दिखाई देने लगता है।

अपेंडिक्स के मरीज को उठने-बैठने पर या दाईं टांग सिकोड़ने और फैलाने में बहुत तकलीफ का अनुभव होता है। इसी कारण प्रायः रोगी हिलता-डुलता तक नहीं है।

दाएं तरफ का पेट और पेट की पेशी अकड़कर सख्त हो जाती है। इसके अतिरिक्त रोगी को कब्ज की शिकायत हो सकती है और कई रोगियों को दस्त भी होते हैं।

अपेंडिक्स से पीड़ित रोगी के रक्त के श्वेत कण (B.C.) बढ़ जाते हैं।

अपेंडिक्स भोजन करने अथवा न करने से संबंध नहीं रखता और हर समय दर्द होता रहता है। यह दर्द व्यायाम और परिश्रम करने पर बढ़ जाता है।

एक्स-रे कराने अथवा बेरियम के एनिमा से इस रोग से पीड़ित 80% रोगियों में इस रोग की जाँच द्वारा पता लगाया जा सकता है।

गर्भावस्था में अपेंडिसाइटिस के लक्षण

गर्भावस्था में इस बीमारी की पहचान देर से हो पाती है, क्योंकि अपेंडिक्स इस समय गर्भाशय से ढंका रहता है। अपेंडिक्स का दर्द पेट के दाई भाग में नीचे की ओर या पेट के बीच में होता है, साथ में बुखार और उल्टियाँ हो सकती हैं। यदि जल्दी ही इसका ऑपरेशन नहीं किया जाए तो अपेंडिक्स के फटने का डर गर्भावस्था में अधिक रहता है। अपेंडिसाइटिस की पहचान होते ही उसका ऑपरेशन जल्दी ही करवा लेना सही कदम होता है। पहचान के लिए कभी-कभी एम.आर.आई. की जरूरत भी पड़ सकती है। गर्भ के पहले छह महीने में अपेंडिक्स का ऑपरेशन लैप्रोस्कॉपी द्वारा किया जा सकता है; पर इसके बाद पेट खोलकर ऑपरेशन करने की जरूरत होती है। साथ में एंटीबायोटिक्स देना जरूरी है, ताकि संक्रमण फैल न सके। अपेंडिसाइटिस के कारण गर्भपात एवं समय पहले बच्चा होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे हालात में नवजात का वजन भी कम होता है।

अपेंडिक्स के कारण

जो लोग मांसाहारी नहीं हैं, उनमें यह रोग बहुत ही कम देखा जाता है।

इस रोग का प्रमुख कारण कब्ज होता है।

अपेंडिक्स आंत में रुकावट आने से |

हालाँकि, आधुनिक चिकित्सा पद्धति के मतानुसार जिन जीवाणुओं को अपेंडिक्स का कारण कहा जाता है, वे सभी स्वस्थ व्यक्तियों की आंतों के भीतर दिखाई पड़ते हैं। इसके साथ ही हम यह भी बता दें कि कब्जियत होने से ही यह रोग हो जाता है, ऐसी भी बात नहीं है, बल्कि जिनका शरीर पहले से विजातीय द्रव्यों से भरा होता है, केवल उन्हीं को यह रोग होता है।

अपेंडिक्स की बीमारी से बचाव

अपेंडिक्स जैसी अंदरूनी बिमारियों से बचाव का सबसे प्रभावकारी उपाय नियमित स्वस्थ्य जाँच और स्वस्थ जीवन शैली को अपनाना होता है इस विषय पर हमने कई आर्टिकल लिखे है | यह पढ़ें – जानिए क्यों जरुरी है फुल बॉडी चेकअप तथा Full Body Checkup List

अपेंडिक्स की बीमारी से बचने के लिए जरूरी है कि ज्यादा से ज्यादा फाइबर्स वाले भोजन, ग्रीन वेजिटेबल्स, सलाद वगैरह खाएं। पानी भरपूर पिएं। जंक फूड, स्मोकिंग ड्रिंकिंग का सेवन ना करें।

अपेंडिक्स के रोगी को राहत देने वाले कुछ कदम

गर्म पानी की बोतल से दर्द के स्थान पर सिंकाई करें।

रोगी को तकिए के सहारे बैठा देने से रोगी को दर्द थोडा कम होता है।

रिलैक्सिल ऑयंटमेंट (RELAXYL) निर्माता—फ्रेंको इंडियन : इस मरहम की पीड़ित स्थान पर दिन में 2-3 बार हल्के हाथ से मालिश करें। सावधानी—इस मरहम के लगाने के बाद पट्टी न करें।

मेडीक्रीम (MEDI CREAM) निर्माता रैलीज : इस क्रीम को भी लगाने से मरीज को कुछ राहत मिलती है ।

अपेंडिक्स के मरीज यदि ऊपरी इलाज यानि दवाइयों द्वारा उपचार करवा चुके है और फिर भी आराम न मिले तो किसी अच्छे से हॉस्पिटल में ऑपरेशन कराना ही एकमात्र सफल चिकित्सा है। ऑपरेशन न कराने पर और सूजन दूर हो जाने पर भी यह रोग दोबारा हो सकता है या यह फोड़ा बनकर फट जाता है और पूरे पेट में पीप (Pus) फैलकर संक्रमण (इंफेक्शन) फैला सकता है तथा रोग और भी खतरनाक स्टेज में पहुँच सकता है।

लेप्रोस्कोपी (दूरबीन द्वारा) भी इसका उपचार उपलब्ध है इस तरीके मे 3-5 मिलीमीटर तक के छेद किये जाते है और शरीर के भीतर एक दूरबीन के जरिये देखा जाता है यह लगभग दर्द रहित इलाज की प्रक्रिया है |

अपेंडिक्स के इलाज हेतु कुछ घरेलू आयुर्वेदिक उपाय

सोए के हरे पत्तों का रस आग पर पकाएं। रस फट जाने पर उसको छानकर 100 मि. ली. में शर्बत दीनार 50 मि. ली. मिलाकर दिन में 2 बार (प्रातः व सायं) पिलाएं।

अपेंडिक्स के दर्द और सूजन से राहत के लिए रोजाना 2 बार अदरक की चाय पियें |

काला नमक आग पर गर्म करके अर्क गुलाब में बुझाएं और 60 मि. ग्रा. हींग के साथ (मिलाकर) रोगी को पिलाएं।

बकरी के दूध में उड़द का आटा 250 ग्राम की मात्रा में लेकर और गंधकर उसमें सोंठ, हींग, नमक और सोए के बीज (प्रत्येक 5-5 ग्राम मिलाकर) तवे पर इसकी एक मोटी रोटी एक तरफ से पकाकर और दूसरी तरफ से कच्ची ही रखकर उस पर एरण्ड का तेल (केस्टर ऑयल) चुपड़कर गर्म-गर्म दर्द के स्थान पर बांध दें |

अपेंडिक्स में क्या खाएं

अपेंडिक्स के मरीज को दर्द के समय उपवास कराना ठीक रहता है। रोगी को प्यास लगने पर थोड़ा-थोड़ा पानी पिलाएं। दर्द दूर हो जाने पर कुछ दिन तक संतरे, माल्टे का रस, दूध, सोडा, ग्लूकोज और तरल पेय पदार्थ ही दें और ठोस भोजन रोगी को बिलकुल न दें।

बीमारी दूर हो जाने के बाद भी रोगी के खाने-पीने के संबंध में सावधानी रखी जानी आवश्यक है। रोगी को चाहिए कि मांस आदि कब्ज पैदा करने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन हमेशा के लिए छोड़ दें । इस आर्टिकल को पढ़ें इसमें कब्ज से बचाव के लिए खानपान की जानकारी दी गई है

मरीज को हल्का खाना खाना चाहिए |

अधिक मिर्च मसाले या घी तेल में बने चटपटे पकवानों से परहेज रखना चाहिए और कठिनाई व देर से पचने वाले खाद्य पदार्थों तथा जल्दबाजी से खाने की आदत को भी सदैव के लिए त्याग देना चाहिए, क्योंकि खान-पान की गड़बड़ी से यह बीमारी फिर से उभर सकती है। रोगी को प्रतिदिन मौसम के उपलब्ध व रुचिकर ताजा फल, सलाद और उबली हुई सब्जी खानी चाहिए।

अपेंडिक्स का ऑपरेशन - Appendectomy

अपेंडिक्स का ऑपरेशन क्या होता है? - Appendectomy kya hai in hindi?

अपेंडिक्स का ऑपरेशन (अपेन्डेक्टमी/ एपेन्डेक्टमी; Appendectomy) एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसके ज़रिये संक्रमित अपेंडिक्स (Appendix) को हटाया जाता है। इस स्थिति को अपेंडिसाइटिस (Appendicitis) कहा जाता है। अपेन्डेक्टमी, जिसे अपेंडिसेक्टोमी (Appendisectomy or Appendicectomy) भी कहा जाता है, एक आम आपातकालीन सर्जरी है।
अपेंडिक्स बड़ी आंत से जुड़ा एक छोटा पाउच है। यह पेट की निचिले हिस्से में दाँई ओर होता है। अगर आपको अपेंडिसाइटिस है तो आपके अपेंडिक्स को तुरंत निकालने के ज़रूरत होती है। अगर इसका उपचार न किया जाये तो अपेंडिक्स फट सकता है। यह एक मेडिकल एमर्जेन्सी (Emergency; आपातकालीन स्थिति) है। 

अपेंडिक्स का ऑपरेशन क्यों किया जाता है? - Appendectomy kab kiya jata hai?

अपेंडिसाइटिस का निदान होने पर आपको इस सर्जरी की आवश्यकता होती है। इस स्थिति में आपका अपेंडिक्स पीड़ादायक, सूजा हुआ और संक्रमित हो जाता है। आगरा आपको अपेंडिसाइटिस है तो, अपेंडिक्स के फटने का गंभीर जोखिम रहता है और ये लक्षण दिखने के 48 से 72 घंटों में हो सकता है। इस स्थिति में आपके पेट में पेरिटोनाइटिस नामक एक गंभीर जानलेवा संक्रमण हो सकता है।
अपेंडिसाइटिस के लक्षण पाए जाने पर तुरंत अपने चिकत्सक को बताएं और मेडिकल सहायता प्राप्त करें:

नाभी के पास अचानक दर्द शुरू होना जो पेट के दाहिने निचले हिस्से तक हो

पेट में सूजन

पेट की मांसपेशियों में अनम्यता (Rigid Abdominal Muscles)

दस्त

मतली (Nausea)

उलटी

भूख कम लगना

लो-ग्रेड बुखार (Low Grade Fever- 98.6° F से ज़्यादा लेकिन 100.4° F से कम)

हालांकि अपेंडिसाइटिस का दर्द पेट के दाहिने निचले भाग में होता है लेकिन क्योंकि गर्भावस्था में अपेंडिक्स ऊपर हो जाता है इसलिए गर्भवती महिलाओं में इस स्थिति में दर्द पेट के दाहिने ऊपरी भाग में होता है।

अपेंडिक्स का ऑपरेशन होने से पहले की तैयारी - Appendectomy ki taiyari

सर्जरी की तैयारी के लिए आपको निम्न कुछ बातों का ध्यान रखना होगा और जैसा आपका डॉक्टर कहे उन सभी सलाहों का पालन करना होगा:

सर्जरी से पहले किये जाने वाले टेस्ट्स/ जांच (Tests Before Surgery)

सर्जरी से पहले एनेस्थीसिया की जांच (Anesthesia Testing Before Surgery)

सर्जरी की योजना (Surgery Planning)

सर्जरी से पहले निर्धारित की गयी दवाइयाँ (Medication Before Surgery)

सर्जरी से पहले फास्टिंग खाली पेट रहना (Fasting Before Surgery)

सर्जरी का दिन (Day Of Surgery)

सामान्य सलाह (General Advice Before Surgery)

इन सभी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर जाएँ - सर्जरी से पहले की तैयारी

अपेंडिक्स का ऑपरेशन कैसे होता है? - Appendectomy kaise hota hai?

अपेंडिक्स को हटाने की सर्जरी को करने के दो तरीके हैं:

ओपन अपेन्डेक्टमी (Open Appendectomy) - यह इस सर्जरी को करने का मानक तरीका है

लैप्रोस्कोपिक अपेन्डेक्टमी (Laparoscopic Appendectomy) - यह कम काटकर या चीरकर की जाने वाली प्रक्रिया है

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के दौरान, सर्जन ओपन सर्जरी करने का निर्णय ले सकते हैं। अगर मरीज़ का अपेंडिक्स फट गया है, तो ऐसे में ओपन सर्जरी की ज़रुरत होती है।
हाल में, अध्ययनों में कहा जा रहा है कि इंट्रावेनस (नसों में) एंटीबायोटिक्स दिए जाने से भी इस समस्या से निजात पाया जा सकता है। हालांकि यह अभी भी विवादास्पद है और अपेन्डेक्टमी को अभी भी उपचार की मानक प्रक्रिया माना जाता है।

ओपन अपेन्डेक्टमी (Open Appendectomy)

पेट के निचले भाग में दांयी तरफ एक चीरा काटा जायेगा, जिसकी लम्बाई दो से चार इंच तक होगी।

पेट की मांसपेशियों को हटाया जायेगा और फिर सर्जिकल धागों से बांधकर अपेंडिक्स को निकाला जायेगा।

अगर रोगी का अपेंडिक्स फट गया है तो आपके उदर को सेलाइन से धोया जायेगा।

फिर पेट की लाइनिंग और मांसपेशियों को सिला जायेगा और घाव को पट्टियों से ढका जायेगा। चीरे के अंदर द्रव निकालने के लिए एक छोटी ट्यूब लगाई जा सकती है।

लैप्रोस्कोपिक अपेन्डेक्टमी (Laparoscopic Appendectomy)

इस प्रक्रिया में ओपन सर्जरी की तुलना में छोटे चीरे किये जाते हैं। हालांकि चीरों की संख्या ज़्यादा होती है। इस प्रक्रिया में एक से तीन तक चीरे काटे जा सकते हैं।

एक चीरे से लैप्रोस्कोप (Laparascope), एक लम्बी पतली ट्यूब, डाला जाता है जिससे एक छोटा वीडियो कैमरा और अन्य सर्जिकल उपकरण जुड़े होते हैं। कैमरा की मदद से सर्जन को पेट के अंदरूनी हिस्सों को देखने और उपकरणों का प्रयोग करने में मदद मिलेगी।

पेट में कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon Dioxide) डालकर पेट को फुलाया जाता है ताकि अंदरूनी हिस्से आसानी से देखे जा सकें।

अपेंडिक्स को सर्जिकल धागों से बाँध कर बाहर निकाला जाएगा।

सर्जरी के समाप्त होने पर लैप्रोस्कोप और अन्य उपकरणों को निकला जायेगा और कार्बन डाइऑक्साइड को चीरों से बहार निकलने दिया जायेगा। द्रव निकालने के लिए चीरे के अंदर एक ट्यूब लगायी जा सकती है।

अंत में चीरे को सिल दिया जायेगा और घाव को पट्टियों से ढक दिया जायेगा।

अपेंडिक्स का ऑपरेशन होने के बाद देखभाल - Appendectomy hone ke baad dekhbhal

अस्पताल में देखभाल (Hospital Care)

सर्जरी के बाद मरीज़ को रिकवरी रूम में ले जाया जायेगा। चिकत्सकों और नर्सों द्वारा मरीज़ की ह्रदय गति, श्वास, रक्त चाप, नब्ज आदि की जांच की जाएगी और स्थिति नियंत्रण में आते ही मरीज़ को अस्पताल के कमरे में शिफ्ट किया जायेगा।

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी आउट-पेशेंट (Out Patient; जिसमें मरीज़ को सर्जरी के बाद अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती) आधार पर भी की जा सकती है।

रिकवरी में कितना समय लगेगा यह इस पर निर्भर करता है की सर्जरी किस प्रक्रिया से की गयी है और प्रक्रिया के दौरान एनेस्थीसिया का कौनसा प्रकार दिया गया था।

सर्जरी के अंत में चीरे के अंदर लगायी गयी ट्यूब को तब निकाला जायेगा जब आँतों की कार्यवाही सामान्य हो जाएगी। जब तक उस ट्यूब को निकाल नहीं दिया जाता तब तक मरीज़ कुछ खा या पी नहीं पाएंगे।

आपको आपकी स्थिति के अनुसार दर्द निवारक दवाएं दी जा सकती हैं।

घर में देखभाल (Recovery At Home)

जब आपको अस्पताल से छुट्टी मिल जाये तो ध्यान रखें कि आप घाव को साफ़ और सूखा रखते हैं। आपको किस प्रकार नहाना है इसके निर्देश डॉक्टर द्वारा दिए जायेंगे। डॉक्टर द्वारा कुछ समय में टाँके खोल दिए जायेंगे।

घर आने के बाद भी नियमित रूप से डॉक्टर से चेक-अप करवाते रहें।

ज़्यादा देर तक खड़े रहने पर चीरे की जगह और पेट की मांसपेशियों में दर्द हो सकता है। डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाओं का नियमित रूप से सेवन करें।

अगर आपका उपचार लैप्रोस्कोपिक प्रक्रिया से हुआ है तो आपको यह लग सकता है कि कार्बन डाइऑक्साइड अभी भी आपके पेट में है। यह समस्या कुछ दिनों में ठीक हो जाएगी।

सर्जरी के बाद हर वक़्त बिस्तर पर न रहकर, इधर उधर टहलना रोगी के लिए अच्छा होगा। लेकिन थकाने वाले कार्य न करें। डॉक्टर से पूछें कि आप कबसे काम पर वापिस जा सकते हैं।

निम्न परेशानियां होने पर अपने चिकित्सक को सूचित करें:

बुखार या ठंड लगना (और पढ़ें – बुखार के घरेलू उपचार)

चीरे की जगह पर सूजन, रक्तस्त्राव, लाल होना या अन्य किसी प्रकाव का स्त्राव

चीरे की जगह पर दर्द

उलटी

भूख कम लगना

लगातार खांसी होना, सांस लेने में तकलीफ या सांस फूलना

पेट में दर्द, अकड़न या सूजन

दो दिन या उससे ज़्यादा समय तक मलत्याग न होना

तीन दिन से ज़्यादा समय से पानी वाले दस्त होना

अपेंडिक्स के ऑपरेशन की जटिलताएं - Appendectomy me jatiltaye

दोनों प्रक्रियाओं में जटिलताएं और जोखिम कम हैं। लैप्रोस्कोपिक प्रक्रिया में अस्पताल में कम समय तक रहने की आवश्यकता होती है, रिकवरी में कम समय लगता है और संक्रमण का जोखिम भी कम होता है।
अपेन्डेक्टमी से होने वाले कुछ जोखिम निम्न हैं:

रक्तस्त्राव

घाव पर संक्रमण

पेट में सूजन, संक्रमण या पेट का लाल होना (अगर अपेंडिक्स सर्जरी के दौरान फट जाए तो)

आँतों का अवरुद्ध हो जाना

आसपास के अंगों में चोट लग जाना

किसी भी तरह की परेशानी होने पर (उपर्लिखित या कोई अन्य समस्या भी) अपने चिकित्सक से परामर्श ज़रूर

हल्दी का पानी अमृत.

हल्दी का पानी अमृत........

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पानी में हल्दी मिलाकर पीने से होते है यह 7 फायदें.....
🙏👏🌹 इन्हें नोट करके अपने पास रखें! आवश्यकता पङने पर काम आएंगे।

1. गुनगुना हल्दी वाला पानी पीने से दिमाग तेज होता है. सुबह के समय हल्दी का गुनगुना पानी पीने से दिमाग तेज और उर्जावान बनता है.

2. रोज यदि आप हल्दी का पानी पीते हैं तो इससे खून में होने वाली गंदगी साफ होती है और खून जमता भी नहीं है. यह खून साफ करता है और दिल को बीमारियों से भी बचाता है.
🙏👏🌹
3. लीवर की समस्या से परेशान लोगों के लिए हल्दी का पानी किसी औषधि से कम नही है. हल्दी के पानी में टाॅक्सिस लीवर के सेल्स को फिर से ठीक करता है. हल्दी और पानी के मिले हुए गुण लीवर को संक्रमण से भी बचाते हैं.
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4. हार्ट की समस्या से परेशान लोगों को हल्दी वाला पानी पीना चाहिए. हल्दी खून को गाढ़ा होने से बचाती है. जिससे हार्ट अटैक की संभावना कम हो जाती है.
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5. जब हल्दी के पानी में शहद और नींबू मिलाया जाता है तब यह शरीर के अंदर जमे हुए विषैले पदार्थों को निकाल देता है जिसे पीने से शरीर पर बढ़ती हुई उम्र का असर नहीं पड़ता है. हल्दी में फ्री रेडिकल्स होते हैं जो सेहत और सौंदर्य को बढ़ाते हैं.
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6. शरीर में किसी भी तरह की सजून हो और वह किसी दवाई से ना ठीक हो रही हो तो आप हल्दी वाला पानी का सेवन करें. हल्दी में करक्यूमिन तत्व होता है जो सूजन और जोड़ों में होने वाले असाहय दर्द को ठीक कर देता है. सूजन की अचूक दवा है हल्दी का पानी.
🙏👏🌹
7. कैंसर खत्म करती है हल्दी. हल्दी कैंसर से लड़ती है और उसे बढ़ने से भी रोक देती है. हल्दी एंटीकैंसर युक्त होती है. यदि आप सप्ताह में तीन दिन हल्दी वाला पानी पीयेंगे तो आप भविष्य में कैंसर से हमेशा बचे रहेगें.👏

निवेदन है कि इस संदेश को अधिकतम गुरुप में पोस्ट करने का कष्ट करें ।

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