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बुधवार, 31 जनवरी 2024

अजवायन खाने के फायदे और नुकसान


अजवायन खाने के फायदे और नुकसान ....


1 अजवायन का परिचय.....

 अजवाइन खाने से सीने की जलन में लाभ

 अजवाइन के सेवन से पाचनतंत्र विकार से राहत 

अजवाइन के इस्तेमाल से हाजमा होता है बेहतर 

एसिडिटी की परेशानी में अजवाइन का इस्तेमाल 

 अजवाइन के उपयोग से उल्टी-दस्त पर रोक 

अजवाइन के प्रयोग से पेट दर्द से राहत 

मासिक धर्म की रुकावट में अजवाइन से फायदा 

सर्दी-जुकाम में अजवाइन का उपयोग लाभदायक 

खांसी और बुखार में अजवाइन से फायदा 

पेट में कीड़े होने पर अजवाइन का उपयोग

 अजवाइन के इस्तेमाल से शिशुओं को पेट दर्द से मिले राहत 

बच्चे बिस्तर पर पेशाब करते हैं तो करें अजवाइन का प्रयोग

 बच्चों के पेट में कीड़े हैं तो कराएं अजवाइन का सेवन 

 कान दर्द से राहत के लिए 
अजवाइन का उपयोग

 प्रसव (डिलिवरी) के बाद अजवाइन के उपयोग से फायदा 

डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए अजवाइन का प्रयोग 

शरीर के दर्द में अजवाइन के लेप से मिले राहत 

नपुंसकता, शीघ्रपतन और शुक्राणु की कमी में अजवाइन से लाभ 

दाद, फुन्सी, खुजली आदि चर्म-रोगों में अजवाइन से लाभ 

पित्ती उछलने (त्वचा पर लाल रंग के दाने वाला रोग) पर अजवाइन का इस्तेमाल 

 पेशाब संबंधी परेशानियों में अजवाइन से लाभ 

बुखार उतारने के लिए अजवाइन का उपयोग 

मलेरिया बुखार में अजवाइन के इस्तेमाल से लाभ 

 शराब पीने की आदत छुड़ाने में अजवाइन मददगार 

अजवाइन के सेवन से हैजा से मिले राहत 

चोट लगने पर करें अजवाइन का इस्तेमाल 

पैरों में कांटा चुभने पर अजवाइन का प्रयोग 

बवासीर में फायदेमंद अजवाइन

 किडनी (गुर्दे) की दर्द की समस्या में अजवाइन का सेवन

कीटों के काटने पर अजवाइन का प्रयोग फायदेमंद 

जूं (लीख) निकालने में अजवाइन का प्रयोग फायदेमंद 

अजवायन का परिचय ....

आप अजवाइन के उपयोग के बारे में जरूर जानते होंगे, क्योंकि हर घर में रोज अजवाइन इस्तेमाल में लाई जाती है। आमतौर पर लोग अजवाइन को केवल खाना पकाते समय मसाले के रुप में ही उपयोग में लाते हैं, क्योंकि लोगों को यह नहीं पता कि अजवाइन एक बहुत ही उपयोगी औषधि भी है। कहने का मतलब यह है कि अजवाइन खाने के फायदे एक नहीं, बल्कि कई सारे हैं।

अजवाइन के बारे में एक आम कहावत है कि अकेली अजवाइन ही सैकड़ों प्रकार के अन्न को हजम करने में सहायता करती है। इसके साथ-साथ अजवाइन खाने के फायदे के रुप में यह भी बताया गया है, कि इससे कई बीमारियां भी ठीक की जा सकती हैं। 

अधिकांश लोगों को अजवाइन से होने वाले फायदे की जानकारी ही नहीं होती। इसलिए वे अजवाइन का भरपूर लाभ नहीं ले पाते हैं। आइए आपको बताते हैं कि अजवाइन कितनी गुणकारी होती है।

अजवायन क्या है?...

अजवाइन मुख्यतः तीन प्रकार की होती है:-

अजवाइन

जंगली अजवाइन

खुरासानी अजवाइन।

यह एक बीज है, जो मसाला एवं औषधि के रूप में इस्तेमाल की जाती है। कई तरह की बीमारियों को ठीक करने में अजवाइन बहुत फायदेमंद साबित होती है। हमारे देश में हजारों सालों से अजवाइन का प्रयोग मसाले के साथ-साथ एक औषधि के रुप में किया जा रहा है। मसाला, चूर्ण, काढ़ा और रस के रूप में भी अजवाइन खाने के फायदे मिल जाते हैं।

अन्य भाषाओं में अजवायन के नाम ....

अजवाइन देश के अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न नाम से जानी जाती है। अजवाइन को हिंदी में अजवाइन, अजवाइन, अजमायन, अजवाइन, जबायन, या अजवां, या फिर अजोवां के नाम से भी जानते हैंं। इसी तरह अन्य भाषाओं में अजवाइन को इन नामों से बुलाते हैंः-

अजवायन के फायदे ...

अजवाइन किस-किस बीमारी को ठीक करने में मदद पहुुंचाती है, यह जानने, और इसका पूरा लाभ लेने के लिए आपको अजवाइन के इस्तेमाल और अजवाइन की खुराक के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए, जो ये हैंः-

अजवाइन खाने से सीने की जलन में लाभ.... 

सदियों से दादी-नानी के घरेलू नुस्ख़ों में एसिडिटी, पेट में जलन आदि समस्याओं के लिए अजवाइन का प्रयोग किया जाता रहा है।

अधिक तीखा भोजन करने के बाद छाती में जलन की परेशानी हो जाती है। ऐसे में 1 ग्राम अजवाइन, और बादाम की 1 गिरी को खूब चबा-चबा कर, या पीस कर खाएं। इससे फायदा होता है।

अगर कोई पेट संबंधी रोगों से परेशान रहता है, तो उसे 1 भाग अजवाइन, आधा भाग काली मिर्च, और सेंधा नमक को मिलाकर पीस लेना है। इसे गुनगुने जल के साथ, 1-2 ग्राम की मात्रा में लेना है। सुबह-शाम सेवन करने से पेट संबंधी रोग ठीक होते हैं।

अजवाइन के सेवन से पाचनतंत्र विकार से राहत....

अगर किसी को पाचन शक्ति को बेहतर बनाना है तो अजवाइन के औषधीय गुणों से लाभ उठाने की ज़रूरत है।

अगर किसी व्यक्ति का पाचनतंत्र सही नहीं रहता हो, तो उसे 80 ग्राम अजवाइन, 40 ग्राम सेंधा नमक, 40 ग्राम काली मिर्च, 40 ग्राम काला नमक, 500 मिग्रा यवक्षार लेना चाहिए। इन्हें 10 मिली कच्चे पपीते के दूध (पापेन) में महीन पीस लेना है। इसे कांच के बर्तन में भर लें, और 1 ली नींबू का रस इसमें डालकर धूप में रख दें। इसे बीच-बीच में हिलाते रहें। 1 महीने बाद जब यह बिल्कुल सूख जाए, तो सूखे चूर्ण को 2 से 4 ग्राम की मात्रा में जल के साथ सेवन करें। इससे पाचन-शक्ति स्वस्थ होती है, तथा अपच, अमाशय संबंधी रोग, और बार-बार दस्त होने की बीमारी में लाभ होता है। अजवाइन के गुण सिर्फ पाचन में ही नहीं दूसरे बीमारियों में भी फायदेमंद होता है।

1 ग्राम अजवाइन को इन्द्रायण के फलों में भरकर रख दें, जब यह सूख जाए तब बारीक पीस लें। इसमें अपनी इच्छानुसार काला नमक मिलाकर रख लें। इसे गर्म जल से सेवन करें। इसके प्रयोग से पेट संबंधित सभी विकारों से आराम मिलता है।

1.5 लीटर जल को आग पर रखें। जब पानी पूरी तरह उबलकर 1.25 लीटर रह जाय, तब नीचे उतार लें। इसमें आधा किलोग्राम पिसी हुई अजवाइन डालकर ढक्कन बंद कर दें। जब यह ठंडा हो जाय तो छानकर बोतल में भर कर रख लें। इसे 50-50 मिली दिन में 3 बार सेवन करें। इसके प्रयोग से पेट के पाचन-तंत्र संबंधी विकार ठीक होते हैं।

1 किलोग्राम अजवाइन में, 1 लीटर नींबू का रस और पांचों नमक 50-50 ग्राम लें। इन्हें कांच के बरतन में भरकर रख दें। इसे दिन में धूप में रख दिया करें। जब रस पूरी तरह सूख जाय तब दिन में दो बार 1-4 ग्राम की मात्रा में सेवन करें। इससे पेट सम्बन्धी बीमारियां ठीक होती हैं।

अजवाइन के इस्तेमाल से हाजमा होता है बेहतर...


अजवाइन के गुण हजम शक्ति बढ़ाने में बहुत मदद करती है। बस इसको सेवन करने का सही मात्रा और तरीका पता होना ज़रूरी होता है।

जिस भी व्यक्ति को दूध ठीक से ना पचता हो, उसे दूध पीने के बाद थोड़ी अजवाइन खा लेनी चाहिए।

यदि गेहूं का आटा, मिठाई आदि ना पचता हो तो उसमें अजवाइन के चूर्ण को मिलाकर खाने से फायदा होता है।

पाचन-क्रिया खराब हो गई हो, तो 25 मिली अजवाइन के काढ़ा को दिन में 3 बार पिलाने से लाभ होता है।

एसिडिटी की परेशानी में अजवाइन का इस्तेमाल 
एसिडिटी के परेशानी से राहत पाने के लिए अजवाइन के फायदे का सही तरह से उपयोग करना ज़रूरी होता है।

अक्सर बाहर का कुछ उल्टा-सीधा खा लेने पर खट्टी डकारें, और पेट में गुड़गुड़ाहट जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इसके लिए आप 250 ग्राम अजवाइन को 1 लीटर गौमूत्र में भिगोकर रख लें। इसे 7 दिन तक छाया में सुखा लें। इसे 1-2 ग्राम की मात्रा में सेवन करें। इससे जलोदर, खट्टी डकारें आना, पेट दर्द, पेट में गुड़गुड़ाहट आदि रोगों में लाभ होता है।

अजवाइन को बारीक पीसकर, उसमें थोड़ी मात्रा में हींग मिला लें। इसका लेप बना लें। इसे पेट पर लगाने से पेट के फूलने, और पेट की गैस आदि परेशानियों में तुरंत लाभ होता है।

वचा, सोंठ, काली मिर्च तथा पिप्पली से काढ़ा बना लें। इस चूर्ण को खाने से पेट की गैस की समस्या ठीक होती है।

समान मात्रा में अजवाइन, सेंधा नमक, सौवर्चल नमक, यवक्षार, हींग, और सूखे आंवला लें। इनका चूर्ण बनाकर रख लें। इस चूर्ण को 2-3 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम शहद के साथ सेवन करें। इससे डकार की परेशानी ठीक होती है।

अजवाइन के उपयोग से उल्टी-दस्त पर रोक....

उल्टी और दस्त से परेशान हैं, तो दिव्यधारा की 3-4 बूंदे, बतासे या गुनगुने जल में डालकर लें। अगर एक बार में फायदा ना हो, तो थोड़ी-थोड़ी देर में 2-3 बार दे सकते हैं।

3 ग्राम अजवाइन, और 500 मिग्रा नमक को ताजे पानी के साथ सेवन करें। इससे दस्त में तुरन्त लाभ होता है। अगर एक बार में आराम ना हो, तो अजवाइन के इस पानी को 15-15 मिनट के अन्तर पर 2-3 बार लें।

अजवाइन के प्रयोग से पेट दर्द से राहत ...



अजवाइन, सेंधा नमक, हरड़. और सोंठ के चूर्ण को बराबर-बराबर मात्रा में मिला लें। इस चूर्ण को 1 से 2 ग्राम की मात्रा में गुनगुने पानी के साथ सेवन करें। इससे पेट का दर्द ठीक होता है।

पेट में मरोड़े या दर्द की स्थिति में, 3-4 बूंद दिव्यधारा को बतासे में डालकर देने से तुरन्त लाभ होता है।

मासिक धर्म की रुकावट में .....

अजवाइन से फायदा 
अजवाइन, मासिक धर्म रुकावट जैसी परेशानी में भी असरदार होता है। आप 10 ग्राम अजवाइन, और 50 ग्राम पुराने गुड़ को 400 मिली जल में पका लें। इसे सुबह-शाम सेवन करें। इससे गर्भाशय की गंदगी साफ होती है, और मासिक धर्म संबंधी विकार भी ठीक होते हैं।
इसी तरह 3 ग्राम अजवाइन के चूर्ण को गर्म दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करें। इससे भी मासिक धर्म में लाभ होता है।

सर्दी-जुकाम में अजवाइन का उपयोग लाभदायक ....

सर्दी-जुकाम को ठीक करने के लिए 200 से 250 ग्राम अजवाइन को मलमल के कपड़े में बांध लें। इसे पोटली बनाकर तवे पर गर्म कर लें। इसे सूंघें। इससे सर्दी-जुकाम में आराम मिलता है।

केवल अजवाइन का काढ़ा बनाकर पीने से सर्दी-जुकाम में लाभ होता है।

2-3 ग्राम अजवाइन के चूर्ण को गुनगुने पानी या दूध के साथ पिएं। इसे दिन में दो-तीन बार सेवन करना है। इससे जुकाम, खांसी तथा सिर दर्द में लाभ होता है।

इसके अलावा आप 1 ग्राम अजवाइन, 1 ग्राम सोंठ, तथा 2 नग लौंग को 200 मिली पानी में पकाएं। जब पानी एक चौथाई (¼) बच जाए तो पानी को छानकर पिएं। इससे जुकाम व सर्दी में लाभ होता है।

कफ वाली खांसी हो, और कफ अधिक निकलता हो, या फिर बार-बार खांसी आती हो तो, 125 मिग्रा अजवाइन के रस में 2 ग्राम घी, और 5 ग्राम शहद मिला लें। इसे दिन में 3 बार खाएं। इससे कफ वाली खांसी में लाभ होता है।

इसी तरह 2 ग्राम मुलेठी और 1 ग्राम चित्रक-जड़ का काढ़ा बना लें। इसमें 1 ग्राम अजवाइन मिलाकर रात में सेवन करें। इससे खांसी में लाभ होता है।

5 ग्राम अजवाइन को 250 मिली पानी में पकाएं। जब पानी आधा हो जाए, तो इसे छानकर नमक मिला लें। इसे रात को सोते समय पिएं। इससे खांसी में लाभ मिलता है।

खांसी और बुखार में अजवाइन से फायदा...


अगर आप खांसी और बुखार से पीड़ित हैं, तो इन रोगों को ठीक करने के लिए अजवाइन का उपयोग 
कर सकते हैं। इसके लिए आपको ये तरीका आजमाना हैः-

2 ग्राम अजवाइन तथा आधा ग्राम छोटी पिप्पली का काढ़ा बना लें। इसे 5 से 10 मिली मात्रा में सेवन करें। इससे खांसी-बुखार ठीक होते हैं।

अगर खांसी पुरानी हो गई हो, और पीला (दुर्गन्धमय) कफ निकल रहा हो। इसके साथ ही पाचन-क्रिया मन्द पड़ गई हो, तो 25 मिली अजवाइन का काढ़ा बना लें। इसे दिन में 3 बार लेने से लाभ होता है।

पुदीना का रस या 10 ग्राम पुदीना के फूल के साथ 10 ग्राम अजवाइन का रस लें। इसे 10 ग्राम देसी कपूर के साथ एक साफ शीशी में डालकर अच्छे से बंद कर लें। इसे धूप में रखें। कुछ देर बाद तीनों चीजें मिलकर एक दवा का रूप ले लेगी। यह दवा अनेक बीमारियों में काम आती है। यह सर्दी-जुकाम, कफ, सिर दर्द आदि रोगों में बहुत फायदेमंद होता है। इसी औषधि में थोड़ा बदलाव किया जाता है, तो यह दिव्यधारा नाम की औषधि बन जाती है।

सर्दी-जुकाम होने पर 3-4 बूंद दिव्यधारा, रुमाल में डालकर सूंघें। इसके अलावा, आप दिव्यधारा की 4-5 बूंद को गर्म पानी में डालकर भांप के रूप में भी ले सकते हैं। इससे लाभ होता है।

पेट में कीड़े होने पर अजवाइन का उपयोग...

अजवाइन के 3 ग्राम महीन चूर्ण को दिन में दो बार छाछ के साथ सेवन करें। इससे आंत के हानिकारक कीड़े खत्म हो जाते हैं।
अजवाइन के 2 ग्राम चूर्ण को काला नमक के साथ सुबह-सुबह सेवन करें। इससे अपच, गठिया, पेट के कीड़ों के कारण होने वाली पेट की बीमारियां जैसे- पेट फूलना, तथा पेट दर्द, पाचन-तंत्र की कमजोरी, एसिडिटी आदि ठीक होती हैं।

अजवाइन के इस्तेमाल से शिशुओं को पेट दर्द से मिले राहत ...

कई बार छोटे बच्चों को पेट में दर्द जैसी परेशानी हो जाती है। इस परेशानी में बारीक साफ कपड़े के अन्दर अजवाइन को रख लें। इसे शिशु के मुंह में चटाएं। इससे शिशु के पेट का दर्द तुरन्त ठीक हो जाता है।

बच्चे बिस्तर पर पेशाब करते हैं तो करें अजवाइन का प्रयोग....

जो बच्चे बिस्तर गीला कर देते हैं, उन्हें रात में 500 मिग्रा अजवाइन खिलाएं। इससे फायदा हो सकता है।

बच्चों के पेट में कीड़े हैं तो कराएं अजवाइन का सेवन...

अक्सर ऐसा देखा जाता है कि छोटे बच्चों के पेट में कीड़े हो जाते हैं। इसके कारण बच्चों को पेट संबंधी कई तरह की परेशानियों हो जाती हैं। इस बीमारी में अजवाइन के 500 मिग्रा चूर्ण लें, और इतना ही काला नमक मिला लें। इसे रात के समय गुनगुने जल के साथ सेवन कराएं। इससे आराम मिलता है।

कान दर्द से राहत के लिए..

अजवाइन का उपयोग
अगर कोई कान के दर्द से परेशान रहता है, तो उसे 10 ग्राम अजवाइन को 50 मिली तिल के तेल में पका लेना है। इसे छानकर रख लेना है। इस तेल को गुनगुना कर, 2-2 बूंद कान में डालें। इससे कान का दर्द ठीक होता है। इसका इस्तेमाल करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह जरूर लें।

प्रसव (डिलिवरी) के बाद अजवाइन के उपयोग से फायदा....

प्रसव के बाद प्रायः महिलाओं को शरीर में दर्द की शिकायत होती है। इस स्थिति में महिलाओं को भूख भी कम लगती है। ऐसे में महिलाओं को हल्का भोजन करने को कहा जाता है, ताकि अन्न का पाचन सही से हो पाए। प्रसव के बाद बहुत सालों से, अजवाइन को दवा के रूप में महिलाएं प्रयोग करती आ रही हैं। महिलाओं को अजवाइन का सेवन करने से ना सिर्फ गर्भाशय संबंधी विकारों से राहत मिलती है, बल्कि प्रसव के बाद की पीड़ा से भी आराम मिलता है।

महिलाओं को अजवाइन का लड्डू, या लड्डू जैसा चूर्ण बना लेना है। भोजन के बाद 2 ग्राम इस चूर्ण का सेवन करना है। इससे आंतों के हानिकारक कीड़े खत्म होते हैं, और रोगों से बचाव होता है।

डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए अजवाइन का प्रयोग ...

अजवाइन के इस्तेमाल से अनेक लाभ होते हैं, इन्हीं में से एक है मधुमेह (डायबिटीज) को नियंत्रित करने में मदद करना। इसके लिए 3 ग्राम अजवाइन को 10 मिली तिल के तेल के साथ दिन में सेवन करें। आपको दिन में तीन बार सेवन करना है।

शरीर के दर्द में अजवाइन के लेप से मिले राहत....…

शरीर में दर्द है तो अजवाइन को पानी में पीसकर, लेप के रूप में लगाएं। दर्द वाले अंग को धीरे-धीरे सेक लें।। इससे लाभ होगा।

अजवाइन को आग पर डाल कर, उसके धुएं से सेकाई करने पर भी शरीर का दर्द दूर होता है।

नपुंसकता, शीघ्रपतन और शुक्राणु की कमी में अजवाइन से लाभ ....

3 ग्राम अजवाइन में 10 मिली सफेद प्याज का रस, तथा 10 ग्राम शक्कर मिला लें। इसे दिन में तीन बार सेवन करें। 21 दिन में पूरा लाभ होता है। इस प्रयोग से नपुंसकता, शीघ्रपतन की समस्या, और शुक्राणु की कमी में लाभ होता है।

दाद, फुन्सी, खुजली आदि चर्म-रोगों में अजवाइन से लाभ ....

अजवाइन का गाढ़ा लेप करने से दाद, खुजली, संक्रमण वाले घाव में लाभ होता है। अजवाइन को उबलते हुए जल में डाल दें। इसके घुल जाने के बाद छान लें। इसे ठंडा करके घावों को धोएं। इससे दाद, फुन्सी, गीली खुजली आदि चर्म रोगों में लाभ होता है।

पित्ती उछलने (त्वचा पर लाल रंग के दाने वाला रोग) पर अजवाइन का इस्तेमाल ....

50 ग्राम अजवाइन को 50 ग्राम गुड़ के साथ अच्छी प्रकार कूट लें। इसकी 1-1 ग्राम की गोली बना लें। 1-1 गोली सुबह-शाम ताजे पानी के साथ लें। इससे एक सप्ताह में ही शरीर पर फैली हुई पित्ती (शीत पित्त) दूर हो जाएगी। इसके सेवन से बार-बार पेशाब आने की बीमारी में भी लाभ होता है।

पेशाब संबंधी परेशानियों में अजवाइन से लाभ.....

अगर किसी को पेशाब संबंधी समस्या रहती है, तो उसे 2 से 4 ग्राम अजवाइन को गर्म पानी के साथ लेना चाहिए। इससे पेशाब संबंधी परेशानी ठीक होती है।

बुखार उतारने के लिए अजवाइन का उपयोग...

जो कोई अपच की वजह से बुखार से पीड़ित है, तो उसे रात में 10 ग्राम अजवाइन को 125 मिली जल में भिगो देना है। इसको मसलने के बाद छानकर पीना है। सुबह-शाम पीने से बुखार उतर जाता है।
इंफ्लुएंजा (शीतज्वर) में 2 ग्राम अजवाइन सुबह-शाम खिलाएं। इससे फायदा होता है।
अगर बुखार में पसीना अधिक निकल रहा है, तो 100 से 200 ग्राम अजवाइन को भून लें। इसे महीन पीसकर शरीर पर लगाएं। इससे फायदा होता है।

मलेरिया बुखार में अजवाइन के इस्तेमाल से लाभ ....

मलेरिया बुखार हो तो रात में 10 ग्राम अजवाइन को, 100 मिली जल में भिगों दें। सुबह पानी (benefits of ajwain water) गुनगुना कर जरा-सा नमक डालकर, कुछ दिन तक सेवन करें।

शराब पीने की आदत छुड़ाने में अजवाइन मददगार.....

जब शराब पीने की इच्छा हो, और रोका ना जा सके, तो 10-10 ग्राम अजवाइन को दिन में 2-3 बार चबाएं। इससे शराब पीने की इच्छा में कमी आती है।
आधा किलो अजवाइन को 4 लीटर पानी में पकाएं। जब पानी आधा से भी कम रह जाए तो छानकर शीशी में भरकर रख लें। जो शराब छोड़ना चाहते हैं, वे लोग इस काढ़ा को भोजन से पहले 1 कप पिएं। यह बहुत ही अधिक फायदेमद होता है।


अजवाइन के सेवन से हैजा से मिले राहत....

हैजा में अमृतधारा की 4-5 बूंद विशेष रूप से गुणकारी मानी जाती है। दिव्यधारा को हैजे की शुरुआती अवस्था में देने से तुरन्त लाभ होता है। एक बार में आराम ना हो तो 15-15 मिनट के अन्तर से 2-3 बार दे सकते हैं।

चोट लगने पर करें अजवाइन का इस्तेमाल....

किसी भी प्रकार की चोट लगी हो तो कपड़े का दो तह बना लें। इसकी पोटली बना लें, और 50 ग्राम अजवाइन को इसमें रखकर गर्म कर लें। इसे चोट लगने वाले स्थान (1 घंटे तक) पर रखें। इससे आराम मिलता है। चोट को ठीक करने के लिए अजवाइन की सेकाई एक रामबाण औषदि है।

सुजाक में लाभप्रद अजवाइन का प्रयोग .....

अजवाइन के तेल की 3 बूंद को 5 ग्राम शक्कर में मिला लें। इसे सुबह और शाम सेवन करें। इससे सुजाक में लाभ होता है।

पैरों में कांटा चुभने पर अजवाइन का प्रयोग....

अगर पैर में कांटा चुभ गया है, तो पिघले हुए गुड़ में 10 ग्राम पिसी हुई अजवाइन मिला लें। इसे थोड़ा गर्म करके कांटा वाले स्थान पर बांध दें। इससे कांटा अपने आप निकल जाएगा।

बवासीर में फायदेमंद ....

बवासीर में लाभ लेने के लिए अजवाइन में सेंधा नमक मिलाकर सेवन करें। इससे पेट का फूलना, तथा बवासीर में लाभ होता है।

किडनी (गुर्दे) की दर्द की समस्या में अजवाइन का सेवन.....

जिस किसी व्यक्ति को किडनी में दर्द संबंधी परेशानी हो, उसे 3 ग्राम अजवाइन के चूर्ण को सुबह-शाम, गर्म दूध के साथ लेना है। इससे लाभ होता है।

कीटों के काटने पर अजवाइन का प्रयोग फायदेमंद .....

बिच्छू, ततैया, भंवरी, मधुमक्खी जैसे जहरीले कीटों के काटने पर भी दिव्यधारा को लगाने से आराम मिलता है। अजवाइन के पत्तों (a को पीसकर भी लगाने से लाभ होता है।

जूं (लीख) निकालने में अजवाइन का प्रयोग ....

अगर आप भी जुओं की समस्या से परेशान हैं तो अजवाइन के गुण से उसका उपचार कर सकते हैं। इसके लिए 10 ग्राम अजवाइन के चूर्ण में 5 ग्राम फिटकरी मिलाएं, और इसे दही या छाछ में मिलाकर बालों में लगाएं। इससे लीखें तथा जूं मर जाती हैं।


▪️अजवायन का सेवन कैसे करें?..

अगर आप बीमारी में लाभ पाने के लिए अजवाइन का औषधीय प्रयोग करना चाहते हैं, तो आयुर्वेदिक चिकित्सक से जानकारी जरूर लें।

अजवायन के नुकसान...

 अजवाइन के इतने फायदे हैं, तो कुछ स्थिति में अजवाइन के नुकसान होने की भी संभावना रहती है, जो ये हैंः-

हमेशा ताजी अजवाइन को ही उपयोग में लाना चाहिए, क्योंकि पुरानी हो जाने पर इसका तैलीय अंश खत्म हो जाता। तैलीय अंश के खत्म होने से इसका पूरा फायदा नहीं मिलता।

काढ़ा के स्थान पर, रस का प्रयोग करना बेहतर होता है।

अजवाइन का अधिक सेवन करने से सिद दर्द की शिकायत हो सकती है।

इसलिए अजवाइन के नुकसान या दुष्प्रभाव से बचने के लिए, सेवन से पहले किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

भारत में अजवाइन के पौधों की खेती मुख्यतः राजस्थान, पंजाब तथा गुजरात में की जाती है। यह मूलतः मिश्र, ईरान तथा अफगानिस्तान में प्राप्त होती है।

अर्जुन छाल हृदय रोग,कोलेस्ट्रोल एवं हाई ब्लड प्रेशर रामबाण अन्य रोगो मे भी क्या काम करती जाने

*अर्जुन छाल हृदय रोग,कोलेस्ट्रोल एवं हाई ब्लड प्रेशर रामबाण अन्य रोगो मे भी क्या काम करती जाने*

*अर्जुन छाल के औषधीय गुण धर्म* 
इसका रस कैशैला होता है।अर्जुन की तासीर ठंडी होती है अर्थात यह शीत वीर्य होती है। गुणों में लघू  होती है। यह हृदय विकारों में फायदेमंद एवं पित एवं कफ का शमन करने वाली होती है। रक्तविकार एवं प्रमेह में भी इसके औषधीय गुण लाभदायी होते है।

अर्जुन को सिर्फ हृदय के विकारों में ही लाभदायक नहीं माना जाता बल्कि अलग – अलग औषध योगों के साथ इसका उपयोग करने से बहुत से विकारों में फायदेमंद साबित होता है।

*जाने विभिन्न रोगों में अर्जुन छाल के फायदे*
 निम्न रोगों में अर्जुन का उपयोग किया जाता है।यहाँ हमने विभिन्न रोगों में अर्जुन छाल के उपयोग बताएं है।

*पितशमन एवं रक्तपित में अर्जुन छाल का उपयोग*

अर्जुन कफ एवं पितशामक होता है एवं अम्लपित में भी लाभप्रद होता है।
रक्तपित की समस्या में अर्जुन की छाल का काढ़ा बना कर सुबह के कप पिने से रक्तपित की समस्या में फायदा मिलता है। 
अम्लपित एवं पितशमन के लिए 1 ग्राम अर्जुन छाल चूर्ण में समान मात्रा में लाल चन्दन का चूर्ण मिलाकर इसमें शहद मिला लें।इस मिश्रण को चावल के मांड के साथ प्रयोग करने से जल्द ही बढे हुए पित का शमन हो जाता है एवं अम्लपित की समस्या भी जाती रहती है।

*हृदय रोगों में अर्जुन छाल का प्रयोग!*

हृदय विकारों में 30 ग्राम अर्जुन चूर्ण ले एवं इसके साथ 3 ग्राम जहरमोहरा और 30 ग्राम मिश्री मिलाकर इमामदस्ते में अच्छे से खरल करले। इस तैयार चूर्ण में से 1 ग्राम सुबह एवं शाम गुनगुने दूध के साथ सेवन करें।जल्द ही हृदय से सम्बंधित सभी विकार दूर हो जायेंगे । नित्य एक ग्राम की मात्रा में अर्जुन चूर्ण का इस्तेमाल दूध के साथ सुबह एवं शाम करने से हृदय विकार ठीक होने लगते है।

*अगर हृदय की धड़कन तेज हो और साथ में पीड़ा या घबराहट हो तो!* 
अर्जुन छाल की खीर बना कर सेवन करें। इसकी खीर बनाने के लिए एक भाग अर्जुन छाल (10 ग्राम) , 8 गुना दूध (80 ग्राम) एवं 32 गुना जल (320 ग्राम) लेकर इनको मिलाकर उबालें।जब सारा पानी उड़ जाये एवं सिर्फ दूध बचे तब इसे छान कर रोगी को दिन में दो बार सेवन करवाएं ।ये सभी विकार जल्द ही दूर हो जायेंगे।

हृदय की कमजोरी में अर्जुन छाल के चूर्ण के साथ गाय का घी एवं मिश्री मिलाकर सेवन करवाएं। हृदय को बल मिलेगा।

*अन्य रोगों में अर्जुन छाल के स्वास्थ्य उपयोग या फायदे!*

थूक के साथ अगर खून आता हो तो अर्जुन चूर्ण को अडूसे के पतों के रस में सात बार अच्छे से घोट कर, इस चूर्ण के साथ शहद मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है।
दस्त के साथ खून आता हो तो छाल को बकरी के दूध में पीसकर थोडा शहद मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है।
रक्त अशुद्धि के कारण त्वचा विकारों में मंजिष्ठ के चूर्ण के साथ अर्जुन का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से रक्त की अशुद्धि मिटती है एवं त्वचा कांतिमय बनती है।
पेट के विकारों में अर्जुन छाल के चूर्ण के साथ बंगेरनमूल की छाल का चूर्ण मिलाकर सेवन करवाने से उदर विकार में लाभ मिलता है।
श्वेत प्रदर एवं रक्त प्रदर की समस्याओं में नित्य 2 ग्राम चूर्ण का गरम पानी के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है।
मुंह में छाले हो गए हो तो 5 ग्राम चूर्ण को तिल के तेल में मिलाकर मुख में रखने से मुंह के छालों में आराम मिलता है।
अर्जुन के पतों का रस निकाल कर कान में डालने से कर्णशूल (कान दर्द) में आराम मिलता है।
अर्जुन की छाल कोलेस्ट्रोल में उपयोगी।
बढे हुए कोलेस्ट्रोल एवं हाई ब्लड प्रेशर में अर्जुन के पेड़ की छाल बेहद फायदेमंद होती है। बढे हुए कोलेस्ट्रोल को कम करने के लिए नियमित इसकी छाल का काढ़ा बनाकर प्रयोग में लाने से जल्द ही कोलेस्ट्रोल कम होने लगता है। काढ़ा बनाने के लिए 5 ग्राम अर्जुन छाल को 1 गिलास पानी में उबालें एवं जब आधा पानी बचे तब इसे आंच से उतर कर ठंडा करले। इस काढ़े में मिश्री मिलाकर सेवन किया जा सकता है।

*अर्जुन की चाय एवं काढ़ा कैसे बनाये ?*

इसकी छाल की चाय बनाने के लिए अधिक जुगत की आवश्यकता नहीं होती है। चाय बनाने के लिए घर में बनती हुई चाय में 5 ग्राम की मात्रा में इसका चूर्ण डाल दें और अच्छे से उबाल लें ।बस अर्जुन छाल की चाय तैयार है। इस चाय के सेवन से भी हृदय की रूकावट खुलने लगती है।

काढ़ा बनाने के लिए एक गिलास पानी में 5 – 7 ग्राम अर्जुन छाल को यवकूट करके डालदें। इस पानी को आग पर तब तक उबालें जब तक पानी एक चौथाई न बचे। एक चौथाई पानी बचने पर इसे आग से उतार कर ठंडा करले एवं छान कर उपयोग करें।

*अर्जुन की छाल का प्रयोग कैसे करें *

*इसके चूर्ण का इस्तेमाल सुबह*  
शाम 2 से 3 ग्राम की मात्रा में किया जा सकता है। अगर चूर्ण का सेवन करने में परेशानी हो तो साथ में सामान मात्रा में मिश्री मिलकर सेवन किया जा सकता है ।
अर्जुन छाल के काढ़े का उपयोग विभिन्न रोगों में अलग – अलग मात्रा में किया जा सकता है।
सामान्यत: काढ़े का उपयोग 10 से 15 मिली. मिश्री के साथ किया जा सकता है।
अर्जुन छाल की चाय का सेवन एक कप तक की मात्रा में किया जा सकता है!

*क्या अर्जुन छाल के कोई साइड इफ्फेक्ट्स होते है* 

अगर सिमित एवं निर्देशित मात्रा में सेवन किया जाए तो अर्जुन छाल के कोई नुकसान सामने नहीं आते। 
गर्भवती एवं प्रसूता स्त्रियाँ भी इसका सेवन अपने चिकित्सक के निर्देशानुसार कर सकती है। 
इसके कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होते। 
किसी भी आयुर्वेदिक औषधि को उचित मात्रा में सेवन किया जाए तो ये किसी भी रूप में नुकसान दाई नहीं होती। 
अति करना हर जगह नुकसान दायक होता है। अत: हमेशां औषधि का उपयोग निर्देशित मात्रा में करना चाहिए। 

हर दिन दीपावली* (हां!संभव है!!)

*हर दिन दीपावली*
    (हां!संभव है!!)
  *युद्ध मे रत सैनिकों* को अगले पल का पता नही होता कि वो सुरक्षित क्षेत्र में है या दुश्मनों की घेराबंदी में आ गए है..युद्ध मे केवल सैन्य कौशल और वीरता से ही मैदान  में फतह हासिल नही की जासकती ..एक एक पल के रणनीतिक दांव पेंच भी बड़े निर्णायक होते है। पल पल का तनाव,खतरा,लम्बे समय तक पड़ाव,अपने परिवार के बारे में चिंता ..उन्हको कमजोर न कर दे कभी घबरा कर वो न्यूरोटिक ना हो जाये?ऐसे पलो में उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए अलग से मनोवैज्ञानिक डॉक्टर की टीम सलाह ओर क्रिया से उनको प्रोत्साहित ही नही रखा जाता अपितु जज्बा बुलन्द रहे ,उनको  *व्यस्त रखो की दवा* देते है।
इन न्यूरोटिक संभावित लोगो को हर मिनट किसी न किसी गतिविधि में लिप्त रखा जाता है।जिनमे आमतौर पर बाहरी गतिविधियां होती है। मछली पकड़ना, शिकार करना, गोल्फ/फुटबाल खेलना,तस्वीरे लेना,बागबानी करना,डांस करना इत्तियादी इत्तियादी.. 
इसे ऑक्यूपेशनल थेरेपी भी कहते है।ओर इन सब का परिणाम है,सेनाएं युद्ध लड़ती है और जीतती है।
हम अपने जीवन के आसपास के वातावरण को देखते है तो बुजर्गो या हमारी संस्कृति द्वारा जो जीवन मे हमे उत्सव/त्योंहार दिए गए है,वो सब एक ऐसी क्रिया है,जो हमे आंनद ओर उत्साह से सरोबार कर देती है। घर को रंगना, कलर से खेलना,रोशनी करना,मिलने जाना,गले मिलना, मिठाई बनाना,बांटना,नए कपड़े पहनना,बधाइयां देना, गरबा में नाचना..यह सब एक थेरपी है।जो हमे सजिन्दा रखती है।
लेकिन दिन प्रतिदिन हम आजकल इनमे ज्यादा उत्साह नही दिखाते,उदासीनता सी आगयी है,वो उत्साह नही रहता.. होली पर रंगों से खेलना, गेर में जाना,फाग गाना..या दीपावली पर रामा शामा पर एक एक घर मिलने जाना..बन्द हो गया है।लोग शिकायत करते है,आजकल दीपावली में एक किलो मिठाई नही खर्च होती?घर कोई आता ही नही?उनसे मेरा हमैशा यह छोटा सा सवाल रहता है,आप आने वाले का इंतजार ही क्यों करते हो?आप क्यों नही चले जाते।
यदि वैसे देखा जाए तो,उस जमाने से ज्यादा व्यक्तिक जिम्मेदारियों,परिणामो का तनाव, वातावरण से सामंजस्य की मांग अब पहले से ज्यादा है..ओर ऐसे में हमने अपने उत्साह के स्रोत,प्रसन्नता ओर खुशी के पल,अपनो से मिलने का आनंद खो दिया तो हम शीघ्र तनाव के शिकार हो जाएंगे।  इससे हमारी उत्पादकता,हमारा मोटिवेशन प्रभावित होगा। दूसरी तरफ तनाव शरीर रक्त में कुछ रसायन छोड़ कर प्रतिक्रिया देंगे।हम बेवजह अपने हाथों अपने लिए परेशानियों ओर तकलीफों के नए द्वार खोल लेंगे।
*इसलिए,आइये!हम बेसब्री से आने वाले त्योंहार ही नही,प्रसन्नता खुशी,उत्सव के किसी पल को जाया करने  के बजाय उसे अपनी उपस्थित से दो गुणित कर दे*।में तो कह रहा हु, हम त्योंहार का ही क्यों इंतजार करें.. आज से ही सेर पर जाए,प्रकति के साथ वक्त बिताए,किसी दूरस्थ मित्र को काल लगाए,बागबानी करे, अच्छी  पुस्तक पढ़े,संगीत का आनंद ले,कोई कॉमेडी मूवी देखे, सुगन्धित मोमबत्ती जलाए, चॉय या कॉफी अपने हाथों से बनाकर पिये- पिलाये,आज घर के किसी काम मे अपनी पत्नी की सहभागिता निभाये..कोई रिश्तेदार परिचित बीमार है,आज मिलकर आये..
*फिर देखिए!चमत्कार*!!
*आप खुद बोल पड़ेंगे,जिंदगी फिर मुस्कुरा उठी*।
*रामानंद काबरा*
9414070142

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