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मंगलवार, 21 फ़रवरी 2012

भगवान शिव ने पार्वति के इच्छा करने पर भी पार्वती को लंका नहीं दी | क्यों ?


भगवान शिव ने पार्वति के इच्छा करने पर भी पार्वती को लंका नहीं दी | क्यों ?
माँ पार्वती ने भव्य स्वर्ण महल में रहने के लिए महादेव से कहा | महादेव ने मना कर दिया तो पार्वती जिद पर आ गयी | महादेव ने पार्वती को सत प्रेमज्ञान देने के लिए स्वर्ण लंका बनाई तथा नए घर का पूजन कर्मकंडी ब्राहमण रावन से करवाया | रावन ने दक्षिणा में लंका को ही मांग लिया शिव ने लंका अपने भक्त और ब्राह्मन देव को पूजन की दक्षिणा में लंका दे दि | शिव के पास जाकर शिव(कल्याण/सनातन) को मांगने के बजाय लंका(पतन/आधुतन) को मांग  बैठा | रावन उस स्वर्णिम लंका को पाकर अभिमानी और घमंडी  होता गया | आत्म ज्ञान को ढक अज्ञान का धुवा छाने लगा | अपने मान के घमंड(अहम) में अपनी बहन सूर्पनखा की बात का सत्य बिना जाने अन्याय युक्त हो अज्ञानता वश शिव के आराद्य श्री राम की भार्या सीता का हरण कर बैठा | वो माँ महा माया (लक्ष्मी) उसके पुरे आधुतन(विदेशी-राक्षस संस्कृति और उस अधर्म) सहित कुल अहम् के नाश का कारण बनी और पार्वती शिव सनातन बने रह गए | पार्वती (काली/महा शक्ति) को लंका में सीता (सतधर्म) की सेवा(रक्षi) करने का मोका मिला | 
रावन का प्रेम वेलन की तरह टाइन व्यक्तित्व से हट कर भोतिक पदार्थ में चला गया, जो उनके कुल प्रेम के नाश का कारण बना | अत: वो प्रेम न रह कर पतन कारक मोह, मद, घमंड बन गया |
माँ पार्वती को शिव ने स्वयं (आत्म- परमात्म) प्रेम में रखा | यदि लंका पार्वती को देते तो पार्वती और शिव में घमंड आ जाता तथा पार्वती भी रावन की तरह शिव-पति धर्म से विमुख हो भोतिक मोह, इर्ष्या, मद, अज्ञान को प्राप्त हो परमात्मीय और सत गुण खो देती | प्रेम का व्यक्ति भाव न रह कर वास्तु-पद भाव हो जाता | जो उनके सत प्रेम का नाश कर असत उत्पन करता | अत: परम शक्ति भटके तो शिव(कल्याण) धर्म सनातन जाग्रत कर सत(श्रेष्ठता) को दिलाते है और पार्वती सदा शिव को सनातन शक्ति प्रदान कर शव से शिव बनाती है | इसलिए हम भी अपने राम-शिव की तरह इस वेलनटाइन (राक्षसधर्म/अधर्म/विदेशी संस्कृति/भौतिक अर्थात झूठेप्रेम ) को पसंद नहीं करते | बल्कि सनातन धर्म ज्ञान(अमर कथा) देकर शिव ने पार्वति को अमर कर दिया , सभी की  अजर-अमर माता बना दिया 

नोट : इस ब्लॉग पर प्रस्तुत लेख या चित्र आदि में से कई संकलित किये हुए हैं यदि किसी लेख या चित्र में किसी को आपत्ति है तो कृपया मुझे अवगत करावे इस ब्लॉग से वह चित्र या लेख हटा दिया जायेगा. इस ब्लॉग का उद्देश्य सिर्फ सुचना एवं ज्ञान का प्रसार करना है

विनम्र अपील.............

आप सभी दोस्तों से मेरी विनम्र अपील............. आप अपने, अपने बच्चो या अपने रिश्तेदारों के जन्म दिवस को काफी उत्साह से मनाते होंगे, बहुत सारे दोस्तों को खाने पर भी बुलाते होंगे, और सब खाने के बाद घर जाकर हो सकता है, कि कमोबेशी की शिकायत भी करते होंगे, जबकि सच तो ये है कि कम से कम हम अपने बच्चो के जन्मदिवस पर उसकी लम्बी जिंदगी की कामना तो जरुर करते है और लोगो से भी यही इक्छा रखते है अगर हम ये प्रण करे की उस दिन पाँच गरीबों या भूखो को खाना खिलाएं तो वो हर वर्ष उस दिन का इंतजार करेगा, की आप आयें और उसे तृप्त करें और हम यही तो चाहते है फिर देर किस बात की? आज अभी इसी वक्त से ये अभियान शुरू आपका ये कदम आपको सुख पहुचायेगा



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जागो भारत जागो -:- मातृ देवो भव, पितृ देवो भव की संस्कृति वाले देश भारत में भी अब पश्चिमी समाज (अमेरिका , इंग्लैंड) की तरह ओल्ड एज होम ??- युधवीर सिंह लाम्बा भारतीय

जागो भारत जागो -:- मातृ देवो भव, पितृ देवो भव की संस्कृति वाले देश भारत में भी अब पश्चिमी समाज (अमेरिका , इंग्लैंड) की तरह ओल्ड एज होम ????????
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जागो भारत जागो -:- मातृ देवो भव, पितृ देवो भव की संस्कृति वाले देश भारत में भी अब पश्चिमी समाज (अमेरिका , इंग्लैंड) की तरह ओल्ड एज होम ????????
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भारत में बुजुर्गों के लिए नित नये आश्रम बन रहे हैं। उनके लिए घर में जगह नहीं है। अंग्रेजी शिक्षित परिवारों, सुसज्जित आधुनिक घरों और स्वार्थी लोगों में चुके हुए पुराने जमाने के मां-बाप फिट नहीं बैठते। उनकी धन-सम्पलि और जमीन-जायदाद काम की होती है। बुजुर्गों के प्रति ऐसा रवैया मानसिक रूप से बीमार समाज का परिचायक है। यह स्थिति सचमुच दुःखद, दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है।

जिस जिगर के टुकड़े को पालने में मां-बाप ने अपना पूरा जीवन लगा दिया, मां खुद गीले में सोई और अपने लाल को सूखे में सुलाया, लेकिन मां-बाप को जब बुढ़ापा आया तो इन जिगर के टुकड़ों को मां-बाप अखरने लगे। उनकी अनदेखी होने लगी। ऐसे मामले में भी लगातार सामने आ रहे हैं जब ये लाड़ले ही अपने मां-बाप को घर से निकाल कर ओल्ड एज होम में छोड़ आए। कई ऐसे मामले भी हैं जब इन्हीं बच्चों ने मां-बाप को घर में कैद कर लिया या फिर खुले आसमान के नीचे उन्हें अपने हाल पर आंसू बहाने के लिए छोड़ दिया।

********************************************************हमें ओल्ड एज होम की कतई भी आवश्यकता नहीं है यदि ये बढ़ रहे है तो यह हमारे मानव समाज के मुंह पर एक जोरदार तमाचा है । जो माता पिता हमें ऊँगली पकर कर चलना सिखाते है उनके बुढ़ापे में हम उन्हें सम्मान के साथ रख नहीं सकते धिक्कार है हमें!

मातृ देवो भव, पितृ देवो भव की संस्कृति वाले देश भारत में भी अब पश्चिमी समाज की तरह बुजुर्ग पीढ़ी में अकेलेपन की भावना तेजी से बढ़ रही है।

********************************************************ये वही भारत देश है जहाँ राम ने अपने वृद्ध पिता का आदेश मान कर 14 बरस वन का वास किया था, ये वही देश है जहाँ श्रवण कुमार अपने अंधे माता पिता को कांवर में बैठा कर तीर्थ यात्रा के लिए ले जाता है ।

जय हिन्द, जय भारत ! वन्दे मातरम !!
भारत में बुजुर्गों के लिए नित नये आश्रम बन रहे हैं। उनके लिए घर में जगह नहीं है। अंग्रेजी शिक्षित परिवारों, सुसज्जित आधुनिक घरों और स्वार्थी लोगों में चुके हुए पुराने जमाने के मां-बाप फिट नहीं बैठते। उनकी धन-सम्पलि और जमीन-जायदाद काम की होती है। बुजुर्गों के प्रति ऐसा रवैया मानसिक रूप से बीमार समाज का परिचायक है। यह स्थिति सचमुच दुःखद, दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है।

जिस जिगर के टुकड़े को पालने में मां-बाप ने अपना पूरा जीवन लगा दिया, मां खुद गीले में सोई और अपने लाल को सूखे में सुलाया, लेकिन मां-बाप को जब बुढ़ापा आया तो इन जिगर के टुकड़ों को मां-बाप अखरने लगे। उनकी अनदेखी होने लगी। ऐसे मामले में भी लगातार सामने आ रहे हैं जब ये लाड़ले ही अपने मां-बाप को घर से निकाल कर ओल्ड एज होम में छोड़ आए। कई ऐसे मामले भी हैं जब इन्हीं बच्चों ने मां-बाप को घर में कैद कर लिया या फिर खुले आसमान के नीचे उन्हें अपने हाल पर आंसू बहाने के लिए छोड़ दिया।

********************************************************हमें ओल्ड एज होम की कतई भी आवश्यकता नहीं है यदि ये बढ़ रहे है तो यह हमारे मानव समाज के मुंह पर एक जोरदार तमाचा है । जो माता पिता हमें ऊँगली पकर कर चलना सिखाते है उनके बुढ़ापे में हम उन्हें सम्मान के साथ रख नहीं सकते धिक्कार है हमें!

मातृ देवो भव, पितृ देवो भव की संस्कृति वाले देश भारत में भी अब पश्चिमी समाज की तरह बुजुर्ग पीढ़ी में अकेलेपन की भावना तेजी से बढ़ रही है।

********************************************************ये वही भारत देश है जहाँ राम ने अपने वृद्ध पिता का आदेश मान कर 14 बरस वन का वास किया था, ये वही देश है जहाँ श्रवण कुमार अपने अंधे माता पिता को कांवर में बैठा कर तीर्थ यात्रा के लिए ले जाता है ।

जय हिन्द, जय भारत ! वन्दे मातरम !!
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युधवीर सिंह लाम्बा भारतीय

भारत में प्रतिदिन 24 फीसदी बच्चे रह जाते हैं भूखे


भारत एक आर्थिक महाशक्ति भले ही बनने जा रहा हो, लेकिन एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) 'सेव द चिल्ड्रन' के एक सर्वेक्षण के मुताबिक यहां छह वर्ष तक के करीब एक चौथाइ बच्चे रोज भूखे रह जाते हैं। एनजीओ के मंगलवार को जारी सर्वेक्षण के मुताबिक देश के करीब 30 फीसदी परिवारों को बढ़ती महंगाई के कारण अपने भोजन में कटौती करनी पड़ रही है, जबकि करीब 25 फीसदी बच्चे रोज भूखे रह जाते हैं।

'सेव द चिल्ड्रन' नामक संस्था ने खाद्य महंगाई और खान-पान की आदतों पर इसके असर पर पांच देशों में सर्वेक्षण किया।

एनजीओ के सीईओ जैसमिन ह्विटब्रेड ने आईएएनएस से कहा, "यह अचम्भित करने वाला है कि अभिभावक कह रहे हैं कि ऊंची कीमत के कारण वह बच्चों के लिए भोज्य पदार्थ नहीं खरीद पाते हैं। यह बच्चे के लिए खतरनाक है। क्योंकि कुपोषण बच्चे के लिए जानलेवा है।"

सर्वेक्षण दिसम्बर और जनवरी में नाइजीरिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश, पेरू और भारत में किया गया। इसमें गांव और शहरों के 1000 से अधिक लोगों से बात की गई।

उन्होंने कहा, "इन पांच देशों को चुनने का कारण यह है कि यहां दुनिया के आधे से अधिक कुपोषित बच्चे रहते हैं।"

भारतीय लोगों में 66 फीसदी ने कहा कि 2011 में खाद्य पदार्थो की मूल्य वृद्धि एक बड़ी चिंता रही, जबकि 17 फीसदी ने कहा कि उनके बच्चे स्कूल छोड़ कर काम पर गए, ताकि भोज्य पदार्थो की कीमत का भुगतान हो सके।


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