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मंगलवार, 30 दिसंबर 2025

कितना अजीब है ना, *दिसंबर और जनवरी का रिश्ता?*जैसे पुरानी यादों और नए वादों का किस्सा...


कितना अजीब है ना, 
*दिसंबर और जनवरी का रिश्ता?*
जैसे पुरानी यादों और नए वादों का किस्सा...

दोनों काफ़ी नाज़ुक हैं
दोनो में गहराई है,
दोनों वक़्त के राही हैं, 
दोनों ने ठोकर खायी है...

यूँ तो दोनों का है
वही चेहरा-वही रंग,
उतनी ही तारीखें और 
उतनी ही ठंड...
पर पहचान अलग है दोनों की
अलग है अंदाज़ और 
अलग हैं ढंग...
 
एक अन्त है, 
एक शुरुआत
जैसे रात से सुबह,
और सुबह से रात...

एक में याद है
दूसरे में आस,
एक को है तजुर्बा, 
दूसरे को विश्वास...

दोनों जुड़े हुए हैं ऐसे
धागे के दो छोर के जैसे,
पर देखो दूर रहकर भी 
साथ निभाते हैं कैसे...

जो दिसंबर छोड़ के जाता है
उसे जनवरी अपनाता है,
और जो जनवरी के वादे हैं
उन्हें दिसम्बर निभाता है...

कैसे जनवरी से 
दिसम्बर के सफर में
११ महीने लग जाते हैं...
लेकिन दिसम्बर से जनवरी बस
१ पल में पहुंच जाते हैं!!

जब ये दूर जाते हैं 
तो हाल बदल देते हैं,
और जब पास आते हैं 
तो साल बदल देते हैं...

देखने में ये साल के महज़ 
दो महीने ही तो लगते हैं,
लेकिन... 
सब कुछ बिखेरने और समेटने
का वो कायदा भी रखते हैं...

दोनों ने मिलकर ही तो 
बाकी महीनों को बांध रखा है,
.
अपनी जुदाई को 
दुनिया के लिए 
एक त्यौहार बना रखा है..!

विंडोज़ XP का मशहूर वॉलपेपर “Bliss” दरअसल कोई डिज़ाइन या डिजिटल आर्ट नहीं था, बल्कि एक बिल्कुल असली दृश्य था, जैसा उस दिन प्रकृति ने खुद रचा था।

क्या आप जानते हैं कि दुनिया की सबसे ज़्यादा देखी गई तस्वीर किसी स्टूडियो में नहीं, बल्कि सड़क के किनारे एक पल की रुकावट में खींची गई थी। विंडोज़ XP का मशहूर वॉलपेपर “Bliss” दरअसल कोई डिज़ाइन या डिजिटल आर्ट नहीं था, बल्कि एक बिल्कुल असली दृश्य था, जैसा उस दिन प्रकृति ने खुद रचा था।
1996 की बात है। फोटोग्राफर चार्ल्स ओ’रेयर कैलिफ़ोर्निया के सोनोमा काउंटी की वाइन रीजन से होकर गाड़ी चला रहे थे। यह इलाका Napa और Sonoma के बीच Highway 121 के आसपास पड़ता है। रास्ते में उनकी नज़र एक हरे भरे टीले और उसके ऊपर फैले गहरे नीले आसमान पर पड़ी। उन्होंने बिना ज़्यादा सोचे गाड़ी रोकी, नीचे उतरे और कैमरा निकाल लिया।

उस समय ओ’रेयर के पास Mamiya RZ67 कैमरा था और उसमें Fujifilm Velvia स्लाइड फ़िल्म लगी हुई थी, जो रंगों को बेहद जीवंत दिखाने के लिए जानी जाती है। हाल ही में हुई बारिश की वजह से घास असाधारण रूप से हरी थी और आसमान में बादल बेहद नरम और साफ़ दिख रहे थे। उसी पल उन्होंने कुछ शॉट्स लिए, जिनमें से एक आगे चलकर इतिहास बन गया।

इस तस्वीर में किसी तरह की डिजिटल एडिटिंग नहीं की गई थी। न घास का रंग बदला गया, न आसमान को गहरा किया गया। जो कुछ दिखता है, वही उस दिन मौजूद था। बाद में जब लोग इस फोटो को देखकर कहते थे कि यह “बहुत ज़्यादा परफ़ेक्ट” लगती है, तो ओ’रेयर अक्सर बताते थे कि इसमें कैमरे और मौसम की भूमिका थी, किसी कंप्यूटर की नहीं।

कुछ साल बाद यह फोटो माइक्रोसॉफ्ट तक पहुँची। 2000 के आसपास माइक्रोसॉफ्ट ने इसे Corbis नाम की कंपनी से खरीदा, जो उस समय बिल गेट्स की इमेज लाइसेंसिंग कंपनी थी। 2001 में जब Windows XP लॉन्च हुआ, तो इसी तस्वीर को उसका डिफ़ॉल्ट वॉलपेपर बना दिया गया। यह तस्वीर XP की पहचान बन गई।

इस फोटो की कीमत आज तक सार्वजनिक नहीं की गई है, क्योंकि इस पर गोपनीयता का समझौता था। फिर भी रिपोर्ट्स में कहा जाता है कि यह रकम छह अंकों में थी और उस दौर में एक सिंगल तस्वीर के लिए यह असाधारण मानी जाती थी। कीमत इतनी ज़्यादा थी कि इसकी ओरिजिनल फ़िल्म को सामान्य कूरियर से भेजना संभव नहीं था। माइक्रोसॉफ्ट ने ओ’रेयर को प्लेन टिकट भेजा और वे खुद फिल्म को हाथों हाथ सिएटल ले गए।

Windows XP की एक अरब से भी ज़्यादा कॉपियाँ इंस्टॉल हुईं, और हर बार कंप्यूटर ऑन होते ही यही तस्वीर स्क्रीन पर आती थी। इसी वजह से “Bliss” को दुनिया की सबसे ज़्यादा देखी गई तस्वीरों में गिना जाता है। अनगिनत लोगों के लिए यह सुबह कंप्यूटर खोलते समय दिखने वाला पहला दृश्य था, जो किसी तरह की शांति और खुली दुनिया का एहसास देता था।
समय के साथ उस जगह की शक्ल बदल गई। जिस पहाड़ी पर घास थी, वह आज फिर से अंगूर के बागों से ढकी हुई है।
 1990 के दशक में phylloxera नाम की बीमारी ने वहाँ के पुराने vineyards नष्ट कर दिए थे, जिस कारण कुछ समय के लिए घास उग आई थी। Bliss उसी दुर्लभ दौर की तस्वीर है, जब वह इलाका बिल्कुल अलग दिखता था।

चार्ल्स ओ’रेयर ने बाद में कहा कि उन्होंने National Geographic के लिए दशकों तक काम किया, दुनिया भर की तस्वीरें लीं, लेकिन लोग उन्हें सबसे ज़्यादा इसी एक फोटो के लिए पहचानते हैं। यह उनके करियर का सबसे अनजाना लेकिन सबसे अमर पल बन गया।

आज भी “Bliss” सिर्फ़ एक वॉलपेपर नहीं, बल्कि 2000 के शुरुआती टेक्नोलॉजी दौर की याद बन चुकी है। एक साधारण सड़क किनारे लिया गया फैसला, कुछ मिनट की रुकावट, और एक कैमरे का क्लिक, जिसने इतिहास में अपनी जगह बना ली।

भारत का मेडिकल माफिया: अनावश्यक सर्जरी, बीमा घोटाले और फार्मा कमीशन की भयावह सच्चाई

भारत का मेडिकल सिस्टम खतरे में है ⚠️
क्या आप जानते हैं: ❌ भारत में 44% सर्जरी अनावश्यक होती हैं
❌ 55% हार्ट सर्जरी, 48% घुटना व गर्भाशय ऑपरेशन फर्जी पाए गए
❌ डॉक्टरों को मरीज भेजने पर लाखों का कमीशन
❌ बीमा लेने के बाद भी क्लेम रिजेक्ट
❌ दवाइयाँ ₹2,000 में अस्पताल को, मरीज से ₹18,000
👉 सवाल पूछिए
👉 दूसरी राय लीजिए
👉 हर ऑपरेशन से पहले सोचिए
हर बीमारी का इलाज ऑपरेशन नहीं होता।
जागरूक बनें – सुरक्षित रहें।
🙏 इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएँ



*भारत का चिकित्सीय क्षेत्र* *(Medical Sector) बहुत जल्द पतन की कगार पर है। भारतीय संसदीय समिति ने इसे स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है।*

*जी न्यूज (Zee News) में हाल ही में प्रकाशित एक शोध रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 44% मानव सर्जरी नकली (Bogus), गलत (Fake) या अनावश्यक होती हैं*।
*इसका मतलब है कि अस्पतालों में होने वाली लगभग आधी सर्जरियाँ सिर्फ मरीजों या सरकार से पैसे लूटने के लिए की जाती हैं।*
*रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि भारत में होने वाली*
55% हृदय सर्जरी नकली या बनावटी,
48% गर्भाशय हटाने की सर्जरी (Hysterectomy),
47% कैंसर सर्जरी,
48% घुटने का प्रत्यारोपण (Knee Replacement),
45% सीज़ेरियन डिलीवरी,
कंधे का प्रत्यारोपण (Shoulder Replacement),
रीढ़ की हड्डी की सर्जरी (Spine Surgery) आदि भी नकली पाई गई हैं।
महाराष्ट्र की कई प्रसिद्ध अस्पतालों के सर्वे में यह पाया गया है कि बड़े अस्पतालों में वरिष्ठ डॉक्टरों की मासिक सैलरी एक करोड़ रुपये तक होती है।
इसका कारण यह है कि जो डॉक्टर अधिक से अधिक अनावश्यक जांच, इलाज, भर्ती और सर्जरी कराते हैं — उन्हें अधिक वेतन दिया जाता है। (स्रोत: BMJ Global Health)

टाइम्स ऑफ इंडिया (Times of India) ने एक रिपोर्ट में बताया कि मृत मरीजों को जीवित बताकर इलाज करने के कई मामले सामने आए हैं — जो बहुत ही घृणित अपराध है।
एक प्रसिद्ध अस्पताल में 14 वर्षीय मृत युवक को जीवित बताकर लगभग एक महीने तक वेंटिलेटर पर रखा गया, इलाज के नाम पर पैसे लिए गए, और बाद में उसे मृत घोषित कर दिया गया। शिकायत के बाद अस्पताल दोषी पाया गया। परिवार को ₹5 लाख का मुआवज़ा दिया गया, लेकिन एक महीने की मानसिक प्रताड़ना का क्या?
कई बार मृत मरीजों पर भी तत्काल सर्जरी करने का नाटक किया जाता है — परिवार से तुरंत पैसे भरने को कहा जाता है, और फिर कहा जाता है कि “सर्जरी के दौरान मौत हो गई।”
बीमा (Mediclaim Insurance) का घोटाला भी उतना ही भयावह है।
भारत में लगभग 68% लोगों ने मेडिक्लेम बीमा लिया है, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर कंपनियाँ तरह-तरह के बहाने बनाकर क्लेम को अस्वीकार कर देती हैं या आंशिक राशि ही देती हैं। बाकी खर्च परिवार को स्वयं उठाना पड़ता है।
करीब 3000 से अधिक अस्पतालों को बीमा कंपनियों ने ब्लैकलिस्ट किया है क्योंकि वे झूठे क्लेम कर रही थीं।
कोरोना काल में कई अस्पतालों ने नकली कोविड मरीज दिखाकर बीमा कंपनियों से करोड़ों रुपये वसूले।
मानव अंगों की तस्करी (Organ Trafficking) का धंधा भी बड़े पैमाने पर चलता है।
इंडियन एक्सप्रेस (Indian Express) ने 2019 में एक हृदयविदारक घटना उजागर की थी 
कानपुर की एक महिला, संगीता कश्यप, को दिल्ली में नौकरी का लालच देकर बुलाया गया और फोर्टिस अस्पताल (Fortis Hospital) में स्वास्थ्य जांच के लिए भेजा गया।
वहां भर्ती करने के बाद उसे ‘डोनर’ शब्द सुनकर शक हुआ और वह भाग निकली।
बाद में पुलिस जांच में एक अंतरराष्ट्रीय गैंग का पर्दाफाश हुआ — जिसमें पुलिस, डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ सभी शामिल थे।

‘हॉस्पिटल रेफरल स्कैम’ (Hospital Referral Scam) तो आम बात हो गई है।
कई डॉक्टर मरीज को गंभीर बीमारी बताकर बड़े अस्पतालों — जैसे अपोलो (Apollo), फोर्टिस (Fortis), एपेक्स (Apex) — में भेजते हैं।
इन अस्पतालों के पास रेफरल प्रोग्राम होते हैं, जिनमें डॉक्टरों को मरीज भेजने पर कमीशन मिलता है।
उदाहरण के लिए, मुंबई की कोकिलाबेन अस्पताल (Kokilaben Hospital) ने लिखा था 
40 मरीज भेजने पर ₹1 लाख,
50 मरीजों पर ₹1.5 लाख,
75 मरीजों पर ₹2.5 लाख दिए जाएंगे।

‘डायग्नोसिस स्कैम’ (Diagnosis Scam) भी करोड़ों की लूट का तरीका है।
बेंगलुरु की कुछ प्रसिद्ध पैथोलॉजी लैब्स पर आयकर विभाग के छापों में ₹100 करोड़ नकद और 3.5 किलो सोना मिला।
यह रकम डॉक्टरों को कमीशन देने के लिए रखी गई थी।

डॉक्टर मरीजों को अनावश्यक जांच के लिए भेजते हैं और 40–50% तक कमीशन लेते हैं। अधिकांश रिपोर्टें फर्जी होती हैं — केवल 1–2 टेस्ट असली होते हैं।
देश में लगभग 2 लाख से अधिक लैब्स हैं, लेकिन सिर्फ़ 1000 से थोड़ी अधिक ही प्रमाणित (Certified) हैं।
फार्मा कंपनियाँ (Pharma Companies) भी बड़े घोटाले करती हैं।
भारत की 20–25 बड़ी दवा कंपनियाँ हर साल डॉक्टरों पर लगभग 1000 करोड़ रुपये खर्च करती हैं ताकि वे उनकी दवाएँ लिखें।
कोविड काल में Dolo गोली बेचने वाली कंपनी ने डॉक्टरों को ₹1000 करोड़ देने का मामला उजागर हुआ था।
डॉक्टरों को नकद, विदेश यात्रा, 5-Star होटल में ठहरने की सुविधाएँ दी जाती हैं।
जैसे USV Ltd. कंपनी हर डॉक्टर को ₹3 लाख नकद और ऑस्ट्रेलिया/अमेरिका यात्रा देती है।
कुछ फार्मा कंपनियाँ अस्पतालों को दवाएँ बहुत कम दाम पर देती हैं लेकिन MRP कई गुना ज्यादा रखती हैं।
इंडिया टुडे (India Today) की रिपोर्ट के अनुसार, EMCURE कंपनी अपनी कैंसर दवा Temikure अस्पताल को ₹1950 में देती है, जबकि अस्पताल मरीज से ₹18645 वसूलता है।
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) — जो डॉक्टरों और अस्पतालों की सर्वोच्च नियामक संस्था है — उस पर भी लापरवाही के आरोप हैं।
2016 में केंद्र सरकार की जांच समिति ने पाया कि MCI नई मेडिकल कॉलेजों को मंज़ूरी देने में तो सक्रिय है, लेकिन डॉक्टरों व अस्पतालों पर नियंत्रण में जानबूझकर ढिलाई बरतती है। MCI के कुछ मुख्य नियम प्रतिदिन तोड़े जाते हैं ।

1. डॉक्टर को किसी कंपनी की ब्रांडेड दवा नहीं, बल्कि उसका Generic Name लिखना चाहिए।
2. इलाज से पहले डॉक्टर को पूरी फीस बतानी चाहिए।
3. जांच/इलाज से पहले मरीज की लिखित सहमति लेनी चाहिए।
4. हर मरीज का मेडिकल रिकॉर्ड 3 साल तक सुरक्षित रखना चाहिए।
5. भ्रष्ट या अनैतिक डॉक्टरों को बिना डर समाज के सामने लाना चाहिए।

सरकारी योजनाओं में भी घोटाले हो रहे हैं।
उदाहरण के लिए, कोई पूर्व सैनिक मामूली सर्दी लेकर सरकारी अस्पताल जाता है — उसे भर्ती कर लिया जाता है।
उसके कार्ड पर उसकी जानकारी के बिना सरकारी योजना में फर्जी बिलिंग की जाती है।
7–8 दिन बाद छुट्टी दे दी जाती है, लेकिन तब तक डॉक्टरों और भ्रष्ट अधिकारियों के खातों में लाखों रुपये जमा हो जाते हैं।
*यह संदेश हर नागरिक तक पहुँचना चाहिए, ताकि हम और हमारा परिवार इन धोखों से बच सकें।*
    भारतीय चिकित्सा जिस भावना को लेकर अपने व्याख्यान देता था,वह स्वयं सिद्ध हो रहा है,भारतीय चिकित्सा अभियान,सुने, अब कैसे,बचे अंग्रेजी चिकित्सा से,भारतीय  चिकित्सा अभियान ने सभी विकल्प अनुभव के साथ उपलब्ध करा दिए,बच्चे दानी, बाई पास,प्रोस्टेट,ब्रेन,लिवर, किडनी,सभी के ऑपरेशन न हो ।


अगर यह जानकारी आपके लिए उपयोगी है,
तो इसे अपने परिवार, मित्रों और बुज़ुर्गों तक अवश्य पहुँचाएँ।
एक सही जानकारी किसी की जान और जीवन भर की कमाई बचा सकती है।

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