*जी लो जी भर के*
72 वर्ष की उम्र में अकेला जीवन जी रहे एक बुज़ुर्ग डिप्रेशन में चले गए, इसलिए उन्हें मनोचिकित्सक डॉक्टर के पास ले जाया गया…
डॉक्टर: आपके बेटे-बेटियाँ क्या करते हैं?
बुज़ुर्ग: मैंने उनकी शादी कर दी है, वे सभी सुखी हैं।
पत्नी का देहांत हो चुका है।
ज़िंदगी में अब कोई जश्न नहीं बचा है…
डॉक्टर: क्या आपकी कोई ऐसी इच्छा है जो अब तक पूरी नहीं हुई?
बुज़ुर्ग: हाँ…
एक इच्छा थी कि ज़िंदगी में एक बार किसी फाइव-स्टार होटल में रुकूँ।
डॉक्टर: आपके पास कितनी संपत्ति है?
बुज़ुर्ग: जिस फ्लैट में अभी रहता हूँ वह है,
और एक 1000 मीटर का खाली प्लॉट है,
जिसकी क़ीमत लगभग 8 करोड़ रुपये होगी।
डॉक्टर: क्या आपको नहीं लगता कि अपनी संपत्ति बेचकर आप ऐश-ओ-आराम की ज़िंदगी जी सकते हैं?
मेरी मानिए तो वह प्लॉट बेच दीजिए।
जो 8 करोड़ रुपये मिलें,
उनमें से 4 करोड़ की एक और प्रॉपर्टी ले लीजिए
और
बाकी 4 करोड़ रुपये ख़र्च करना शुरू कीजिए।
एक फाइव-स्टार होटल में रहिए,
जहाँ रोज़ का किराया 10 हज़ार रुपये हो।
वहाँ आपको स्विमिंग पूल, जिम,
मनपसंद तरह-तरह का खाना
और नए-नए लोगों से मिलने का मौका मिलेगा।
हर तीन महीने में शहर बदलते रहिए 🌹
ज़िंदगी से दोबारा प्यार हो जाएगा
और आपका डिप्रेशन हमेशा के लिए दूर हो जाएगा 🌹
बुज़ुर्ग 10 हज़ार रुपये रोज़ वाले फाइव-स्टार होटल में रहने चले गए 🌹
ठाठ-बाट और मौज-मस्ती में दिन बीतने लगे 🌹
82 वर्ष की उम्र में जब उनका निधन हुआ,
तो 4 करोड़ में से 1.5 करोड़ रुपये अभी भी बचे थे
और 4 करोड़ में खरीदी गई प्रॉपर्टी की क़ीमत 8 करोड़ हो चुकी थी।
कहने की ज़रूरत नहीं कि
डिप्रेशन पूरी तरह ख़त्म हो चुका था
और जीने के कई बहाने उन्हें मिलते रहे थे।
*बोध (सीख):*
मृत्यु के बाद की पूँजी को, मृत्यु से पहले ही ख़र्च कर लेना चाहिए
और ज़िंदगी के आख़िरी दिन मौज-मस्ती से जीने चाहिए।
शुभेच्छुक
*सीनियर सिटीजन एसोसिएशन*
हरा-भरा जी लो,
अभी सेहत साथ में है,
कल कमर झुक जाएगी
और हाथ में छड़ी होगी।
देख लो, देख लो,
अभी नज़र साथ दे रही है,
कल मोतियाबिंद आएगा
और आँखों पर काला चश्मा होगा।
दोस्तों के साथ निकल पड़ो घूमने,
मौज-मस्ती करने,
कल सब लोग
तुम्हें बीमार बिस्तर पर मिलने आएँगे।
आज आमने-सामने मिलने का
पूरा-पूरा मौका है,
कल सामने बैठे होंगे
डॉक्टर, हाथ में स्टेथोस्कोप लेकर।
आज ही जश्न मना लो,
दो लीटर पानी पी लो,
क्या पता कल मुँह में
थर्मामीटर लगा हो।
आओ सब साथ मिलें,
छोड़ो
व्हाट्सऐप,
इंस्टाग्राम
और
ट्विटर,
कोई नहीं जानता…
कब पूरे हो जाएँगे
दिल के ये किलोमीटर…!!!
ज़िंदगी डॉक्टर की गोलियों के साथ नहीं,
बल्कि दोस्तों की टोली के साथ जीने की होती है!!! 🙏