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शनिवार, 8 अप्रैल 2023

क्या आप जानते हैं कि पौधों के लिए कौन सा फर्टिलाइजर सबसे बेस्ट होता है?


क्या आप जानते हैं कि पौधों के लिए कौन सा फर्टिलाइजर सबसे बेस्ट होता है? क्या कभी आपने सोचने की कोशिश की है कि नर्सरी में तो पौधा बहुत ही ज्यादा अच्छा दिखता है, उसमें बहुत ही ज्यादा फूल होते हैं, लेकिन जब हम उसे घर पर लेकर आते हैं तो उसमें फूल खिलना बंद क्यों हो जाते हैं? आपने भी शायद कई बार नर्सरी वालों से पूछा होगा कि आखिर ऐसा क्यों होता है, लेकिन क्या कभी जवाब मिला? कई ऐसे फर्टिलाइजर होते हैं जिन्हें नर्सरी वाले अपने पौधों में डालने की कोशिश करते हैं।


तो चलिए आज आपको ऐसे ही फर्टिलाइजर्स के बारे में बताते हैं जिन्हें अधिकतर नर्सरी वाले लोग अपने पौधों में डालते हैं।
1. डीएपी खाद

इसमें बराबर मात्रा में यूरिया और फास्फोरस होता है। कई बार ये बाज़ार से ही मिला हुआ मिल जाता है और कई बार इसे अलग से खरीदकर मिलाना भी होता है।



कैसे इस्तेमाल करते हैं ये खाद?

इसका 1 चम्मच 1 लीटर पानी में घोलकर पौधों में छिड़काव किया जा सकता है और उसके साथ ही पौधे में गुढ़ाई करके 1/4 चम्मच इस खाद को मिट्टी में छिड़का जा सकता है।

ये तरीका आपके उन सभी पौधों के लिए अच्छा साबित हो सकता है जिन्हें फास्फोरस की जरूरत होती है।


2. सिंगल सुपर फॉस्फेट

जिन लोगों के पास ज्यादा समय नहीं है उनके लिए फॉस्फेट से भरपूर ये खाद काफी जरूरी हो सकती है। ये खाद पत्तियों को चमकदार बनाती है और फूल और फलों को बड़ा बनाती है।



कैसे इस्तेमाल करते हैं ये खाद?

इसका 1 चम्मच 1 लीटर पानी में घोलकर पौधों में छिड़काव किया जा सकता है और उसके साथ ही पौधे में गुढ़ाई करके 1/2 चम्मच इस खाद को पत्तियों में छिड़का जा सकता है। इससे फंगस नहीं लगती है और परेशानी ज्यादा नहीं होती है। हालांकि, कई पौधों को ये सूट नहीं करती है इसलिए आपको पहले अपने पौधे के बारे में जानकारी ले लेनी चाहिए।
3. पोटाश खाद

ये ऑरेंज रंग की खाद होती है जो अधिकतर खेती में भी इस्तेमाल की जाती है। पोटाश ग्रोथ को आगे बढ़ाता है और अगर पौधा किसी कारण से मर रहा है या फिर उसमें किसी तरह से ग्रोथ नहीं हो रही तो इसे यूज करना चाहिए।


कैसे इस्तेमाल करते हैं ये खाद?

इसे भी इस्तेमाल करने का तरीका बिल्कुल वैसा ही है, लेकिन अगर आप इसे बड़े गमले में इस्तेमाल कर रहे हैं तो 1 चम्मच खाद डालें।

अगर इसका लिक्विड फर्टिलाइजर बना रहे हैं तो आप इसे रात भर पानी में डूबा रहने दें और फिर सुबह छिड़काव करें।

4. नीम खली

ये सबसे आसानी से मिलने वाला फर्टिलाइजर है और इससे मिट्टी में लगने वाली फंगस भी खत्म होती है। नीम खली को कई बार मिट्टी में पौधा लगाते समय भी मिलाया जाता है जिससे पौधों की ग्रोथ बिना किसी फंगस या रोग के हो सके।
कैसे इस्तेमाल करते हैं ये खाद?

हफ्ते में एक बार कम से कम एक चम्मच इसे मिट्टी की गुढ़ाई करके डालें। इससे मिट्टी में फंगस की समस्या बिल्कुल ही खत्म हो सकती है।

ये आपके घरेलू पौधों के लिए बहुत ही जरूरी खाद है जिसका इस्तेमाल हमेशा करते रहना चाहिए।


5. सरसों खली

नीम खली की तरह ही सरसों खली भी पौधों के लिए बहुत जरूरी खाद साबित हो सकती है हालांकि, ये उनकी ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए है।

इसमें कई तरह के न्यूट्रिएंट्स होते हैं जो इसे हर पौधे के लिए सही माना जा सकता है। वैसे गुलाब के पौधों के लिए भी ये काफी जरूरी होती है।
कैसे इस्तेमाल करते हैं ये खाद?

आप 5 लीटर पानी में 250 ग्राम खली मिलाएं और इसे 1 हफ्ते के लिए ऐसा ही छोड़ दें। इसमें पानी मिलाते रहें पर बहुत ज्यादा लिक्विड नहीं करना है। इसे लकड़ी की मदद से चलाते रहें ताकि लंप्स ना बनें और फिर इसे पौधों में इस्तेमाल किया जा सके। क्योंकि ये ज्यादातर सॉलिड फॉर्म में होती है इसलिए इसे लिक्विड बनाना जरूरी है।


ये सभी फर्टिलाइजर्स नर्सरी में रेगुलर यूज किए जाते हैं और ऐसे में आपके लिए ये यूजफुल साबित हो सकते हैं।

क्या करोगे इतनी संपत्ति कमाकर ? आज भी आधे से ज्यादा समाज को तो ये भी समझ नहीं कि उस पर क्या संकट आने वाला है ??



 क्या करोगे इतनी संपत्ति कमाकर ?
एक दिन पूरे काबुल (अफगानिस्तान) का व्यापार सिक्खों का था, आज उस पर तालिबानों का कब्ज़ा है | 

 -सत्तर साल पहले पूरा सिंध सिंधियों का था, आज उनकी पूरी धन संपत्ति पर पाकिस्तानियों का कब्ज़ा है |

-एक दिन पूरा कश्मीर धन धान्य और एश्वर्य से पूर्ण पण्डितों का था,  उन महलों और झीलों पर अब आतंक का कब्ज़ा हो गया और तुम्हें मिला दिल्ली में दस बाई दस का टेंट..|

-एक दिन वो था जब ढाका का हिंदू बंगाली पूरी दुनियाँ में जूट का सबसे बड़ा कारोबारी था | आज उसके पास सुतली बम भी नहीं बचा |
-ननकाना साहब, लवकुश का लाहौर, दाहिर का सिंध, चाणक्य का तक्षशिला, ढाकेश्वरी माता का मंदिर देखते ही देखते सब पराये हो गए |
पाँच नदियों से बने पंजाब में अब केवल दो ही नदियाँ बची |

-यह सब किसलिए हुआ.? केवल और केवल असंगठित होने के कारण। इस देश के  समाज की सारी समस्याओं की जड़ ही संगठन का अभाव है |

-आज भी बेकारण आया संकट देखकर बहुतेरा समाज गर्राया हुआ है |
कोई व्यापारी असम के चाय के बागान अपने समझ रहा है,
कोई आंध्रा की खदानें अपनी मान रहा है |
तो कोई सूरत का व्यापारी सोच रहा है ये हीरे का व्यापार सदा सर्वदा उसी का रहेगा |
-कभी कश्मीर की केसर की क्यारियों के बारे में भी हिंदू यही सोचा करता था |
-उसे केवल अपने घर का ध्यान रहा और पूर्वांचल का लगभग पचहत्तर प्रतिशत जनजाति समाज विधर्मी हो गया |
बहुत कमाया बस्तर के जंगलों से... आज वहाँ घुस भी नहीं सकते |
आज भी आधे से ज्यादा समाज को तो ये भी समझ नहीं कि उस पर क्या संकट आने वाला है ??
बचे हुए समाज में से बहुत से अपने आप को SICKular मानते हैं |
कुछ समाज लाल गुलामों का मानसिक गुलाम बनकर अपने ही समाज के खिलाफ कहीं बम बंदूकें, कहीं तलवार तो कहीं कलम लेकर विधर्मियों से ज्यादा हानि पहुंचाने में जुटा है |
ऐसे में पाँच से लेकर दस प्रतिशत ही बचता है जो अपने धर्म और राष्ट्र के प्रति संवेदनशील है,
धूर्त SICKulars ने उसे असहिष्णु और साम्प्रदायिक करार दे दिया|
इसलिए आजादी के बाद एक बार फिर हिंदू समाज दोराहे पर खड़ा है |

एक रास्ता है शुतुरमुर्ग की तरह आसन्न संकट को अनदेखा कर रेत में गर्दन गाड़ लेना ,
और दूसरा तमाम संकटों को भांपकर , सारे मतभेद भुलाकर , संगठित हो कर व संघर्ष कर अपनी धरती और संस्कृति बचाना |

  अगर आप पहला रास्ता अपनाते हैं तो आपकी चुप्पी और तटस्थता समय के इतिहास में एक अपराध के तौर पर दर्ज होगी।
 अगर आप दूसरे रास्ते पर चलते हैं तो आपके secular मित्र -संबंधी आपको कट्टर, संघी या अंधभक्त कहकर अपने आपको बड़का वाला चमचा सिद्ध करने की कोशिश जरूर करेंगे  लेकिन आप अपनी मातृभूमि और अपने सनातन धर्म के प्रति अपनी निष्ठा और कर्त्तव्य का परिचय देते हुए इस राष्ट्र की मूल संस्कृति को बचाने के लिए प्राणपण से डटे रहिए।
सोच आपकी, निर्णय आपका !

जय श्री राम
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आज से शुरू करें..खिचड़ी - सभी पोषक तत्वों का भंडार है।


खिचड़ी खाओ😋



कुछ साल पहले मुझे प्राचीन भारत की विरासत में दिलचस्पी हुई। प्रकृति को बहुत करीब से देखने और समझने लगे। दुनिया में जंक फूड और फास्ट फूड का बढ़ता प्रचलन और इससे होने वाले नुकसान दिल तोड़ने वाले हैं। भारतीय खाद्य संस्कृति का अध्ययन किया। खिचड़ी एक ऐसी डिश है जो कई मायनों में अनोखी है। मैं जब छोटा था तब खिचड़ी खाता था, लेकिन खिचड़ी में इतनी ताकत होती है, इसका अंदाजा नहीं था। जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर गोलकिया साहब के साथ मिलकर खिचड़ी के बारे में शोध किया। वडोदरा एम.एस. यूनिवर्सिटी में रहते हुए खिचड़ी पर रिसर्च की।
हज़ारों साल पहले थी खिचड़ी। आयुर्वेद, ऋषियों ने भी खिचड़ी की वकालत की थी। मूंग और चावल दोनों ही बहुत पवित्र और शक्तिशाली अनाज हैं। खिचड़ी एक शुभ आहार है। खिचड़ी दूध के समान पवित्र है। खिचड़ी देवी-देवताओं को भी प्रिय है। इसमें अपार और अतुलनीय गुण हैं। यह सिर्फ चार घंटे में पच जाता है। खिचड़ी खाने से दिमाग भी शांत होता है। हमारी एक कहावत है कि जैसा अन्न वैसा मन।मूंग-चावल की खिचड़ी में गाय का घी डालने से तन और मन को बहुत लाभ मिलता है।
कहा जाता है कि अगर भारत में जंक फूड की जगह खिचड़ी को लोकप्रिय बनाया जाए तो भारत की कई समस्याएं दूर हो जाएंगी। रोग कम होता है। लोगों का तन और मन स्वस्थ रहे। आत्महत्याएं कम होंगी। ब्रह्मा खिचड़ी में तरह-तरह की सब्जियां होती हैं जो खाने वाले को खाने से तृप्ति का एहसास कराती हैं और कई बीमारियों को दूर करती है। डूंगरी नी खिचड़ी ने वयस्कों और बच्चों को खिचड़ी के प्रति आकर्षित करने के लिए पनीर खिचड़ी पर शोध किया। * हमारे कई व्यंजन हैं खास -देशी हांडवा 500 साल पुराना है। कई चटनी 100-150 साल पुरानी हैं। यह सभी पोषक तत्वों का भंडार है। उनके अनुसार खिचड़ी में 16 प्रकार के पोषक तत्व होते हैं। इसमें ऊर्जा (280 कैलोरी), प्रोटीन (7.44 ग्राम), कार्बोहाइड्रेट (32 ग्राम), कुल वसा (12.64 ग्राम), आहार फाइबर (8 ग्राम), विटामिन ए (994.4 आईयू), विटामिन बी6 (0.24 मिलीग्राम), विटामिन सी शामिल हैं। (46.32 मिलीग्राम), विटामिन ई (0.32 आईयू), कैल्शियम (70.32 मिलीग्राम), एरियन (2.76 मिलीग्राम), सोडियम (1015.4 मिलीग्रामजी), पोटेशियम (753.64 मिलीग्राम), मैग्नीशियम (71.12 मिलीग्राम), फास्फोरस (138.32 मिलीग्राम) और जस्ता (1.12 मिलीग्राम)।



कहा जाता है कि मिट्टी के बर्तन में खिचड़ी बनाने से उसकी गुणवत्ता और स्वाद बढ़ जाता है। प्राचीन काल में लोग मिट्टी के बर्तनों में खिचड़ी बनाते थे। तैत्रिय उपनिषद के एक श्लोक के अनुसार, अन्न ब्रह्म है क्योंकि प्रत्येक जीव की उत्पत्ति अन्न से होती है। जन्म लेने के बाद वह केवल भोजन पर ही जीवित रहता है और अंत में मृत्यु भी भोजन में ही प्रवेश कर जाती है। * भगवदभगवान कृष्ण* ने गीता में कहा है कि, मैं मानव शरीर में जठराग्नि के रूप में वसु हूँ। उन्होंने यह भी कहा है कि, जो जीवन, बल, स्वास्थ्य, सुख और प्रेम को बढ़ाता है, जिसका क्षय नहीं होता और स्थिर रहता है, हृदय को कौन नहीं गिराता, रसीले, चिपचिपे पदार्थ सात्विक लोगों को प्रिय होते हैं। ये सभी गुण हमारी खिचड़ी में शामिल हैं। वह समय जल्द ही आएगा जब लोगों को शाश्वत सत्य का एहसास होगा कि भोजन ब्रह्म है और भारतीय भोजन वापस आ जाएगा। इसमें खिचड़ी सबसे अच्छी है, तो लोग खिचड़ी का उपयोग ज़रूर बढ़ायेंगे, उस समय लोगों के स्वास्थ्य में सुधार होगा। भले ही अब हम खिचड़ी को भूल गए हों, लेकिन हमारी खिचड़ी देश-विदेश के अनेक व्यंजनों से हजारों गुना श्रेष्ठ है। करोड़ों युवा एक तरफ रोज फास्ट फूड खाकर अपनी सेहत बर्बाद कर रहे हैं और दूसरी तरफ खिचड़ी जैसे सर्वोच्च भोजन से दूर रहकर भारी नुकसान भी उठा रहे हैं...!!
आज से शुरू करें..खिचड़ी

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