शुक्रवार, 29 दिसंबर 2017

29 दिसम्बर 2017 दिन शुक्रवार पर विशेष पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

हर सदगृहस्थ को एकादशी का व्रत जरुर रखना चाहिए।

पुत्रदा एकादशी व्रत

जय श्री हरि

29 दिसम्बर 2017 दिन शुक्रवार
पर विशेष

पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

महाराज युधिष्ठिर ने पूछा- हे भगवान! आपने सफला एकादशी का माहात्म्य बताकर बड़ी कृपा की। अब कृपा करके यह बतलाइए कि पौष शुक्ल एकादशी का क्या नाम है उसकी विधि क्या है और उसमें कौन-से देवता का पूजन किया जाता है।

भक्तवत्सल भगवान श्रीकृष्ण बोले- हे राजन! इस एकादशी का नाम पुत्रदा एकादशी है। इसमें भी नारायण भगवान की पूजा की जाती है। इस चर और अचर संसार में पुत्रदा एकादशी के व्रत के समान दूसरा कोई व्रत नहीं है। इसके पुण्य से मनुष्य तपस्वी, विद्वान और लक्ष्मीवान होता है। इसकी मैं एक कथा कहता हूँ सो तुम ध्यानपूर्वक सुनो।

भद्रावती नामक नगरी में सुकेतुमान नाम का एक राजा राज्य करता था। उसके कोई पुत्र नहीं था। उसकी स्त्री का नाम शैव्या था। वह निपुत्री होने के कारण सदैव चिंतित रहा करती थी। राजा के पितर भी रो-रोकर पिंड लिया करते थे और सोचा करते थे कि इसके बाद हमको कौन पिंड देगा। राजा को भाई, बाँधव, धन, हाथी, घोड़े, राज्य और मंत्री इन सबमें से किसी से भी संतोष नहीं होता था।

वह सदैव यही विचार करता था कि मेरे मरने के बाद मुझको कौन पिंडदान करेगा। बिना पुत्र के पितरों और देवताओं का ऋण मैं कैसे चुका सकूँगा। जिस घर में पुत्र न हो उस घर में सदैव अँधेरा ही रहता है। इसलिए पुत्र उत्पत्ति के लिए प्रयत्न करना चाहिए।

जिस मनुष्य ने पुत्र का मुख देखा है, वह धन्य है। उसको इस लोक में यश और परलोक में शांति मिलती है अर्थात उनके दोनों लोक सुधर जाते हैं। पूर्व जन्म के कर्म से ही इस जन्म में पुत्र, धन आदि प्राप्त होते हैं। राजा इसी प्रकार रात-दिन चिंता में लगा रहता था।

एक समय तो राजा ने अपने शरीर को त्याग देने का निश्चय किया परंतु आत्मघात को महान पाप समझकर उसने ऐसा नहीं किया। एक दिन राजा ऐसा ही विचार करता हुआ अपने घोड़े पर चढ़कर वन को चल दिया तथा पक्षियों और वृक्षों को देखने लगा। उसने देखा कि वन में मृग, व्याघ्र, सूअर, सिंह, बंदर, सर्प आदि सब भ्रमण कर रहे हैं। हाथी अपने बच्चों और हथिनियों के बीच घूम रहा है।

इस वन में कहीं तो गीदड़ अपने कर्कश स्वर में बोल रहे हैं, कहीं उल्लू ध्वनि कर रहे हैं। वन के दृश्यों को देखकर राजा सोच-विचार में लग गया। इसी प्रकार आधा दिन बीत गया। वह सोचने लगा कि मैंने कई यज्ञ किए, ब्राह्मणों को स्वादिष्ट भोजन से तृप्त किया फिर भी मुझको दु:ख प्राप्त हुआ, क्यों?

राजा प्यास के मारे अत्यंत दु:खी हो गया और पानी की तलाश में इधर-उधर फिरने लगा। थोड़ी दूरी पर राजा ने एक सरोवर देखा। उस सरोवर में कमल खिले थे तथा सारस, हंस, मगरमच्छ आदि विहार कर रहे थे। उस सरोवर के चारों तरफ मुनियों के आश्रम बने हुए थे। उसी समय राजा के दाहिने अंग फड़कने लगे। राजा शुभ शकुन समझकर घोड़े से उतरकर मुनियों को दंडवत प्रणाम करके बैठ गया।

राजा को देखकर मुनियों ने कहा- हे राजन! हम तुमसे अत्यंत प्रसन्न हैं। तुम्हारी क्या इच्छा है, सो कहो। राजा ने पूछा- महाराज आप कौन हैं, और किसलिए यहाँ आए हैं। कृपा करके बताइए। मुनि कहने लगे कि हे राजन! आज संतान देने वाली पुत्रदा एकादशी है, हम लोग विश्वदेव हैं और इस सरोवर में स्नान करने के लिए आए हैं।

यह सुनकर राजा कहने लगा कि महाराज मेरे भी कोई संतान नहीं है, यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो एक पुत्र का वरदान दीजिए। मुनि बोले- हे राजन! आज पुत्रदा एकादशी है। आप अवश्य ही इसका व्रत करें, भगवान की कृपा से अवश्य ही आपके घर में पुत्र होगा।

मुनि के वचनों को सुनकर राजा ने उसी दिन एकादशी का ‍व्रत किया और द्वादशी को उसका पारण किया। इसके पश्चात मुनियों को प्रणाम करके महल में वापस आ गया। कुछ समय बीतने के बाद रानी ने गर्भ धारण किया और नौ महीने के पश्चात उनके एक पुत्र हुआ। वह राजकुमार अत्यंत शूरवीर, यशस्वी और प्रजापालक हुआ।

श्रीकृष्ण बोले- हे राजन! पुत्र की प्राप्ति के लिए पुत्रदा एकादशी का व्रत करना चाहिए। जो मनुष्य इस माहात्म्य को पढ़ता या सुनता है उसे अंत में स्वर्ग की प्राप्ति होती
है।

जय श्री हरि
🌹🌹राधे राधे🌹🌹
👏👏👏👏👏👏👏👏

मंगलवार, 26 दिसंबर 2017

अमीर आयुर्वेद व गरीब ऐलोपैथ  में अंतर

काफी लंबी पोस्ट है..लेकिन जोरदार है👌

【एक डॉक्टर की कलम से】

एलोपैथ का चिकित्सक हूँ किन्तु इस विकृति पर लिखूंगा जरूर......

समझ लीजिये हम जानते सब कुछ है पर जब तक मरीज चप्पले न घिस ले हमे चैन कहाँ?

अमीर आयुर्वेद व गरीब ऐलोपैथ  में अंतर!!

(विषय को समझाने के लिए लेख थोड़ा लम्बा हो गया है, लेकिन जनहित में यह निश्चित रूप से कारगर है, अवश्य पढ़ें व अधिक से अधिक लोगों में प्रसारित करें!)

यह हैडिंग पढ़कर कई लोग सोच रहें होंगे यह क्या बात लिख दी गई है!! लेकिन वर्तमान समय की यही सबसे बड़ी सच्चाई है कि औषध चिकित्सा के मामले में ऐलोपैथ बिल्कुल असहाय, निरीह व गरीब सा नज़र आ रहा है, वहीँ आयुर्वेद अपने प्राकृतिक सिद्धांतो के कारण प्रभावकारी, समृद्ध व अमीर सा नज़र आता है। 

इस उदाहरण से आयुर्वेद की अमीरता को और अच्छे से समझते हैं: 

एक 40 वर्षीय पुरुष रोगी ऐलोपैथ डॉक्टर के पास: सर मुझे कमर में कई दिनों से असहनीय दर्द हो रहा है, कई बार यह दर्द पैरो की तरफ जाता है जिससे चलने में परेशानी होती है, इसके अलावा गर्दन में भी दर्द रहता है जो कन्धों की ओर बढ़ता हुआ आ रहा है, हाथ-पैरों में जकड़न रहती है, थकान-कमजोरी भी रहती है। मेरा कार्य ऑफिस में कंप्यूटर पर बैठने का है, वजन लगभग 85 किलो है।

ऐलोपैथ डॉक्टर: रोगी का बी. पी. चेक करने के बाद, आपका बी.पी. 130/90 आया है, वैसे  तो यह लगभग नार्मल है, आप एक काम करिये अभी दर्द के लिए एक दवा लिख दी है आप एक-दो दिन इसे खा लीजिये, साथ में कुछ बहुत जरुरी टेस्ट लिखे हैं इनको करवा के मुझसे मिलिए। 

टेस्ट का नाम: CBC, RBS, Uric Acid, Lipid profile, Vitamin- D3, Urine- R/M, X-Ray Cervical Spine and C.T. Scan-Lumbar Spine

 

रोगी: ठीक है सर, टेस्ट काफी सारे लिखे हैं।

ऐलोपैथ डॉक्टर: हाँ, आपकी दिक्कत को सही से समझने के लिए सभी जरुरी हैं।

रोगी: सुबह खाली पेट, बड़ी सी लैब के बाहर लाइन लगाकर खड़ा होकर अपनी बारी का इंतज़ार करने लगा, वहाँ पहुंचने पर उसे यह पता चला जो टेस्ट उसे लिखे गए हैं उनकी जो कुल कीमत है उसमें सिर्फ 500 रूपए ज्यादा देने पर उसके लगभग 40 तरह की जांचों को भी पैकेज में कर दिया जायेगा। 

रोगी को लगा चलो अच्छा ऑफर है, इसे भी करवा लेते हैं शायद उसमे कुछ और पता लग जाये।

टेस्ट रिपोर्ट आने के बाद: Vitamin- D3 थोड़ा कम आया, कोलेस्ट्रॉल बॉर्डर लाइन से थोड़ा बढ़ा हुआ आया, बाकी की रिपोर्ट्स नार्मल थीं, X - Ray Cervical Spine and C.T. Scan-Lumbar Spine में Degenerative Changes मिले (जो कि प्रत्येक व्यक्ति में उम्र के हिसाब से स्वाभाविक हैं)

रोगी सभी टेस्ट रिपोर्ट्स को इक्कठा करके अपने ऐलोपैथ डॉक्टर साहब के यहाँ अपनी ऑफिस से छुट्टी लेकर बड़ी टेंशन में पहुंचा। टेंशन के चलते घबराहट बहुत थी, डॉक्टर साहब ने बी.पी. चेक की तो 160/100 निकली।

डॉक्टर साहब ने कहा: जैसा मैंने सोचा था लगभग वैसा ही निकला आपका Vitamin-D3 कम है और कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है, बी.पी. भी बढ़ी हुई है, साथ में X - Ray, C.T. Scan में Arthritis के लक्षण हैं, आप हमारे यहाँ अपनी ECG और करवा लीजिये फिर मैं देखता हूँ क्या करना है।

 

मरीज़ भगवान को याद करते हुए अपना ECG करवाता है, ECG करवाने के बाद, ECG करने वाले से पूछता भाई कुछ दिक्कत तो नहीं है इसमें, ECG करने वाला कहता है की सर यह तो डॉक्टर साहब ही बताएँगे, आप यह ECG की रिपोर्ट लीजिये और डॉक्टर साहब के रूम के बाहर बैठकर अपने नंबर का इंतज़ार करिये।

मरीज़ अपने नंबर का इंतज़ार करते व बढ़ते हुए सस्पेंस के साथ आखिरकार दोबारा डॉक्टर साहब के कमरे में पहुँचता है।   

ऐलोपैथ डॉक्टर: ECG देखते हुए, आपकी ECG से कुछ बेहतर समझ नहीं आ रहा, आपके परिवार में किसी को बी.पी. की शिकायत तो नहीं?

 

मरीज़: हाँ सर मेरे मम्मी-पापा दोनों को ही बी.पी. की शिकायत हैं। 

ऐलोपैथ डॉक्टर: ठीक है, जितना जल्दी हो सके ECHO की जांच करवा लेना बाकी आपको बी.पी., कोलेस्ट्रॉल, Vitamin D3, ताकत व दर्द की कुछ दवाइयां लिख रहा हूँ इनको लीजिये, दर्द वाली जगह के लिए एक Ointment भी लिखा है इसकी मालिश करिये, ठंडी चीज़ों का परहेज करिये, थोड़ा exercise करना शुरू करिये, गर्दन के दर्द के लिए एक cervical pillow ले लीजिये,  बाहर हमारी Dietitian बैठी हुई है उससे अपना Diet Chart बनवा लीजिये, ECHO करवा के मुझसे दोबारा मिलिए, तब तक यह दवाएं खाइये। मरीज़ डॉक्टर से, सर कोई घबराने की बात तो नहीं है?

 

डॉक्टर साहब: नहीं ऐसा तो कुछ विशेष नहीं है, ECHO जब हो जाये तो उसे भी दिखाना, बी.पी. की दवा कभी बंद नहीं होगी, बाकी की दवाओं का देखेंगे की आगे क्या करना है।

रोगी डॉक्टर साहब के कमरे से निकलकर dietitian के पास पहुँचता है, वह छोटे-मोटे परहेज़ बताती है, रोगी धीरे से Dietitian से पूंछता है, कभी-कभी Alcohol व Non-Veg ले लेता हूँ, इनको ले सकता हूँ, Dietitian मुस्कुराते हुए, Alcohol कम लेना सर, और Non-veg में Red meat नहीं लेना बाकी थोड़ा-बहुत ले सकते हैं (रोगी मन ही मन सोचते हुए की चलो कम से कम यह बंद करने को नहीं कहा)  

रोगी ने ट्रीटमेंट शुरू कर दिया, समय निकालकर ECHO भी करवा लिया, वह नार्मल आया, डॉक्टर साहब से मिलकर थोड़ा निश्चिंत भी हो गया, दवाएं खाते हुए 1 महीना हो गया, चीज़ों में थोड़ा आराम मिला, बी. पी. नार्मल, कोलेस्ट्रॉल नार्मल, Vitamin D3 थोड़ा बढ़ गया, वजन भी इस बीच में 3 किलो और बढ़ गया, डॉक्टर साहब ने सभी दवाएं continue खाने को कहीं, दर्द की दवा को जरुरत होने पर खाने को कहा, रोगी फिर से दवाएं 1 महीने खाता है, लेकिन जब भी दर्द की दवा या ताकत की दवा नहीं लेता तो दर्द और कमजोरी फिर वैसी ही हो जाती है, फिर से डॉक्टर साहब को अपनी परेशानी बताता है, इसके साथ-साथ रोगी को अब एक और नई परेशानी हो जाती है कि अब उसे कब्ज भी रहने लगती है और कभी-कभी एसिडिटी भी बहुत बढ़ जाती है, घुटनो में भी अब दर्द होने लगा है।

 

ऐलोपैथ डॉक्टर: मैं आपकी दर्द की दवा में बदलाव कर रहा हूँ यह थोड़ा कम नुकसान करेगी इसे आप रेगुलर खा सकते हैं, साथ में पेट साफ़ के लिए एक दवा और लिख दी है इसे रात में सोते समय आप खाना, और सुबह खाली पेट की एक छोटी सी दवा और है इससे आपको एसिडिटी बिल्कुल नहीं होगी,

दर्द असहनीय होने पर डॉक्टर साहब से मिला तो उन्होंने फिजियोथेरेपी करवाने की सलाह दी, कुछ दिन लगातार इसे भी करवाया लेकिन कोई विशेष लाभ नहीं मिला, ऐसा ही अगले 3-4 महीने चलता है रोगी जब दवा खाता है तो आराम, नहीं खाता तो फिर से वही परेशानी, अपने ऐलोपैथ डॉक्टर के पास जाकर रोगी यह परेशानी बताता है, डॉक्टर साहब कहते हैं कि चलने दीजिये, यह दवाएं तो आपको खानी होंगी, थोड़ा वजन कम करिये तो अच्छा फायदा हो सकता है।

आखिरकार रोगी को लगता है कि इस बड़े से सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के बड़े से सुपर स्पेशिलिस्ट डॉक्टर साहब के अलावा के विकल्पों को तलाशा जाये, अपने जानने वालों, अपनी ओर से नेट आदि पर सर्च करने के बाद उसे लगता है कि आयुर्वेद में ट्रीटमेंट कराया जाये।

रोगी आयुर्वेद डॉक्टर के पास जाता है: शुरू से अंत तक अपनी जानकारी आयुर्वेद डॉक्टर को देता है, डॉक्टर साहब से पूछता है कि सर मेरी दिक्कत सही क्यों नहीं हो रही टेस्ट में जो आ रहा है वह कुछ दिनों की दवाओं को खाने के बाद ठीक तो होता है लेकिन जैसे ही दवाएं बंद करता हूँ तो स्थिति फिर से वैसी हो जाती है।

आयुर्वेद डॉक्टर: आप जिस ऑफिस में रहते हैं वहां A.C. है, चाय कितना पीते हैं? 

मरीज़ बड़े उत्साह से: हाँ सर मेरे ऑफिस और घर दोनों जगह A.C. है, चाय ऑफिस में रहने की वजह से 3-4 या कभी-कभी इससे भी ज्यादा हो जाती हैं, डॉक्टर साहब मेरी दिक्कत क्या है? क्या आप इसे बता सकते हैं? क्या आप इसे सही कर सकते हैं? 

आयुर्वेद डॉक्टर: थोड़ा सा मुस्कुराते हुए, जी मैं आपको सबसे पहले आपकी दिक्कत को समझाता हूँ, आप समझ सकेंगे कि दिक्कत क्या है और इस दिक्कत का उपचार हमारे पास न होकर आपके पास ही है।

आयुर्वेद डॉक्टर की यह बात सुनकर मरीज़ थोड़ा चकराता है और अपनी समस्या का उपचार खुद से ही समझने के लिए और उत्सुक हो जाता है।

आयुर्वेद डॉक्टर: आपकी समस्या से जुडी दिक्कत के विषय में आपको समझाता हूँ, आप सबसे पहले हमारे शरीर के कार्य करने के तरीके को समझिये, हमारे शरीर में Blood एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमता है, हम कुछ खाते हैं तो हम उसे गले तक तो पहुंचा देते हैं लेकिन वह अपने आप फिर पेट में जाता है, आंतो में जाता है, हमारे शरीर से मल बनकर शरीर के बाहर भी आता है, कहने का मतलब यह है कि हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से एक वायु मौजूद रहती है जो हमारे शरीर के अंदर की प्रत्येक गति को नियंत्रित करती है, इसी तरह हम सांस लेते हैं वह भी एक तरह की वायु है, आयुर्वेद में हम इसे “वात” कहते हैं।

ठीक ऐसे ही हमारे सभी के शरीर में टॉक्सिन्स (दूषित चीज़ें) बनते हैं जैसे पसीना-यूरिन-मल लेकिन कई बार हम अपने खाने-पीने या रहने की आदतों में बदलाव कर लेते हैं जिससे यह मल शरीर से सही से बाहर नहीं आ पाते, जैसे आप ज्यादा समय A.C. में रहते हैं जिससे आपको पसीना नहीं आता, Non-veg खाते हैं, Alcohol पीते हैं, अधिक चाय पीते हैं, देर से पचने वाले खान-पान या तली-भुनी चीज़ों को अधिक खाते हैं, लगातार काम में बिजी रहने की वजह से Physical Activity कम करते हैं, शाम को खाना अधिक खाते है और उसके तुरंत बाद सो जाते हैं, इन सभी कारणों से  शरीर में दूषित चीज़ें बढ़ जाती हैं, जो शरीर में रहने वाली वायु की वजह से एक जगह से दूसरी जगह पहुँच जाती हैं, जिससे शरीर में दर्द रहना-जकड़न रहना सूजन रहना आदि दिक्कत हो जाती है, आयुर्वेद में हम इसे "आम" कहते हैं। 

ऐसे ही हमारी पृथ्वी पर Gravity (गरूत्वाकर्षण) मौजूद है, जिसकी वजह से कोई भी चीज़ ऊपर से नीचे की ओर आती है, शरीर में भी यह सिद्धांत लागू होता है, आयुर्वेद में भी वात की गति को ऊपर से नीचे की ओर माना गया है, इसे आयुर्वेद की भाषा में “वात की अनुलोम गति” कहते हैं, लेकिन जब शरीर में रूखी चीज़े और गरिष्ठ चीज़ें लगातार पहुँचती हैं तो शरीर में भी रुखापन बढ़ जाता है, जिससे वात की गति नीचे न जाकर ऊपर को हो जाती है इसे आयुर्वेद में “वात की प्रतिलोम गति” माना गया है जो बीमारियों को बढाती है, आप खान-पान तो गलत कर ही रहें हैं साथ में केमिकल वाली दवाओं के लेते रहने से यह रूखापन और बढ़ गया है को इसलिए ही आपको कब्ज और एसिडिटी बढ़ी है।

अब आपको करना यह है की आपको अपने खाने-पीने में बदलाव करना है, अपनी दिनचर्या में बदलाव करना है आयुर्वेद में हम इसे "निदान परिवर्जन" कहते हैं, अनावश्यक तनाव से बचना है, साथ में आयुर्वेद की कुछ वात को अनुलोम करने वाली दवायें, टॉक्सिन्स (आम) को निकलने व शमन करने वाली दवाओं का सेवन करने से आप स्वस्थ हो सकते हैं, इसलिए आरम्भ में मैंने आपसे कहा था कि इस समस्या का उपचार आपके हाथ में है। 

आयुर्वेद चिकित्सक के द्वारा समझाई गई इस प्राकृतिक थ्योरी रोगी को समझ में भी आयी और उसने आयुर्वेद डॉक्टर के बताये अनुसार निदान परिवर्जन व आयुर्वेद चिकित्सा आरम्भ की सिर्फ 2 माह में लाभ हुआ और कुछ माह दवाओं और परहेज के बाद आयुर्वेद दवायें भी बंद कर सके।

(यह स्टोरी किसी व्यक्ति विशेष, किसी चिकित्सा पद्धति आदि को नीचा दिखने के उद्देश्य से नहीं बताई है, इसका उद्देश्य वर्तमान समय में ऐलोपैथ जगत के चिकित्सा करने के तरीके, चलन  और आयुर्वेद के प्राकृतिक सिद्धांत के द्वारा मिल रहे हज़ारों रोगियों के लाभ पर आधारित अनुभवों पर लिखी है, जिसका मकसद सही जागरूकता प्रसारित करना व यह बताना है कि जब तक शरीर में होने वाली समस्याओं का प्राकृतिक तरीके से समाधान नहीं किया जायेगा तब तक रोग में लाभ नहीं मिलता। प्रकृति के नियमों के विपरीत चिकित्सा करने से कुछ स्थितियों में अल्पकालिक लाभ तो मिल सकता है लेकिन स्थाई समाधान कभी नहीं, इसलिए प्रकृति की ओर मुड़ें व अधिक से अधिक लोगों को इस विषय पर जागरूक करें, क्योंकि स्वस्थ व्यक्ति ही बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकता है। प्राकृतिक संसाधनों व सिद्धांतो से विहीन चिकित्सा को गरीब कहना हितकर है। आयुर्वेद के चिकित्सकों के पास यह अवसर है की वे आयुर्वेद के जीवन शास्त्र को समाज में सही तरह से प्र

सही जागरूकता के लिए अधिक से अधिक लोगों तक इस पोस्ट को प्रसारित करें!!

सौजन्य- आरोग्य मंच

सादर नमस्कार

जय सियाराम जी की।।

रविवार, 24 दिसंबर 2017

सबसे शुभ शानदार शगुन वाल्मीकि समाज की महिला का ही माना जाता है

हमारे मारवाड़ क्षेत्र और शेष राजस्थान में बिन्द (दूल्हा) जब घोड़ी पे बैठ के ब्याहने जाता है .... तो घोड़ी के आगे वाल्मीकि समाज की महिला खड़े हो के दूल्हे और बारात को अपना शगुन देती है ....
घर से बाहर किसी भी मांगलिक कार्य से निकलो .... या परदेस कमाने जाओ .... सर्वप्रथम वाल्मीकि समाज की महिला का शगुन लिया जाता है ....
घर पे बच्चा पैदा हो तो सर्वप्रथम .... वाल्मीकि समाज की महिला को बच्चे गोद में दे के उसकी नज़र उतारी जाती है ....
सबसे शुभ शानदार शगुन वाल्मीकि समाज की महिला का ही माना जाता है .... हर मंगल कार्य में इनका शगुन लिया जाता है ....
बेशक वाल्मीकि समाज आज 21 वीं सदी में भी मेला ढोता हो .... लेकिन वाल्मीकि समाज की महिला जब सुबह घर आएगी तो उनको सम्मान पूर्वक .... राणी जी या राणी सा कह के पुकारा जाता है ....
हिंदुत्व का पुरोधा है हमारा वाल्मीकि हरिजन समाज ....
जय श्री राम का उद्घोष लगाना हो .... सबसे आगे हमारा वाल्मीकि समाज ....
कार सेवा से ले के .... धार्मिक तीर्थ यात्राओं एवं पैदल संघ यात्राओं में सबसे आगे हिंदुत्व का ध्वज वाहक हमारा वाल्मीकि समाज ....
गणेश विसर्जन .... दुर्गा विसर्जन .... अन्य विसर्जनों .... धार्मिक आयोजनों में सबसे आगे हमारा वाल्मीकि समाज ....
साम्प्रदायिक झडपों में हरावल दस्ते (अग्रिम पंक्ति) में खड़े हो के .... जय श्री राम के उद्घोष के साथ बाकी 35 हिन्दू कौम बिरादरी पे आने वाले खतरे को खुद पे झेलने वाला हमारा वाल्मीकि समाज ....
कृपया हमारे वाल्मीकि हरिजन समाज को #भीमटों की श्रेणी में ना रखें .... ना उनकी तुलना #उन_भीमटों से ना करें ......... आग्रह है ....
राह में मिलने पे .... राम राम सा ....
जय श्री राम के उद्घोष के साथ अभिवादन करता है हमारा वाल्मीकि समाज ....
सरकारों से कुछ नहीं चाहिए वाल्मीकि समाज को ....
सिर्फ नगरपालिका में अस्थायी लगे कर्मचारियों को स्थायी कर दो .... या नई सफाई कर्मचारियों की भर्ती निकले तो हमको प्राथमिकता दो .... सिर्फ इतनी सी सरकारों से इनकी मांग होती है .... भाजपा या कांग्रेस जो इनकी मांग मान के अपना वादा समय पे निभाये उसी के साथ जाता है वाल्मीकि समाज ........... वर्तमान राजस्थान में वाल्मीकि समाज भाजपा का सुदृढ वोट बैंक है ....
2014 लोकसभा चुनावों में मोदी मोदी का उद्घोष लगाने वाला हमारा वाल्मीकि समाज ....
आज पूरा वाल्मीकि समाज राजस्थान में अपने अपमान को ले के सड़कों पे उतर आया है ....
सलमान खान मुर्दाबाद .... वाल्मीकि एकता ज़िंदाबाद से आज सारा राजस्थान गुंजायमान है ....
बाकी 35 कौम बिरादरी को भी चाहिए कि .... कंधे से कंधा मिला के वाल्मीकि समाज का साथ दे ....
सलमान खान जैसे फ़िल्मी भांड जितना जल्दी हो समझ ले .... ये राजस्थान है .... पहले विश्नोईयों ने पटक के पेला था .... आज वाल्मीकियों ने रेला है .... दोगले खान अपनी हद में रहोगे तो फायदे में रहोगे .... वरना कायदे से गां^% कुटाई भी हो सकती है ....
अस्पृशय समाज ही असल भारत है .... सबको आगे बढ़कर इनके साथ समरसता लानी ही चाहिए ....
वाल्मीकि एकता जिंदाबाद !!!! ....
हिन्दू एकता ज़िंदाबाद !!!! ....
रितेश प्रज्ञांश भाई से साभार

भारतीय न्यायप्रणाली वकीलों का स्वर्ग है

12 अप्रैल 2012 की लूट की एक वारदात पढियेगा ....
वारदात मेरे घर से 2 गली आगे हुई .... मेरे ताई जी के घर .... ताई जी बुजुर्ग है और अपने पीहर किशनगढ़ (अजमेर) गए हुए थे .... घर की चाबियां हमारे पास रहती है ताकि सुबह शाम मंदिर में धूप बत्ती हो ....
12 अप्रैल 2012 को मेरे पापा जब सुबह 10 बजे वहां पूजा करने गए तो घर के ताले टूटे हुए थे .... पूरा घर अस्त व्यस्त था .... अलमारियां बिखरी पड़ी थी .... मैं भी वहां तुरंत पहुंचा .... ताई जी को कॉल किया .... स्थानीय पुलिस आई .... ताई जी बुजुर्ग है तो FIR मैंने अपने नाम से दर्ज करवाई .... चोरी की लिस्ट बनाई तो करीब 6 लाख की चोरी हुई थी ....
थाने का प्रभार उसी दिन नए CI (सर्कल इंस्पेक्टर) दर्ज़ा राम जी मेघवाल ने सम्हाला था .... मैंने डिप्टी साब अर्जुना राम जी जाट से CI साब दर्ज़ा राम जी को भी 1 सिफारशी कॉल करवा दिया था .... CI साब का ये नई पोस्टिंग पे पहला केस था उन्होंने इसे चुनोती के रूप में लिया .... फिंगर प्रिंट्स लिए फुट प्रिंट्स लिए .... इलाके के सब बदमाशों को तलब किया .... जानकारी में मालूम चला कि डीडवाना जेल से परसों दो पेशेवर चोर जमानत पर रिहा हुए है .... दोनों चोर बन-बावरिया आदिवासी जनजाति के थे जो शहरों से बाहर डेरा डाल के रहते .... दोनों को उठा के थाने में कायदे की तुड़ाई की गई .... दोनों चोरों ने वारदात को कबूल लिया .............. चोरों की निशानदेही पे उसी दिन लेट नाईट सीकर और झुंझनु में दो जगह दबिश दी गयी .... 2 और चोरों को और माल खरीदने वाले सुनार को धरा गया .... झुंझनु थाने में सबकी सामूहिक कम्बल कुटाई की गई और चोरी का सारा माल आना पाई समेत जब्ती किया गया ....
इस पूरी प्रक्रिया में 7 दिन लगे .... मैं 7 दिन थाने ही बैठा रहा रात को देरी से घर आता है सुबह जल्दी वापस थाने .... सैंकड़ों पेपर पे मेरे दस्तखत .... गवाहों जब्ती मौके के कागज़ों में मेरे और मेरे 4-5 दोस्तों के दस्तखत .... जब्ती माल न्यायालय के आदेश पर थाने में जमा और चोरों को न्यायिक अभिरक्षा में डीडवाना जेल भेजा गया ....
एक साल तक न्यायालय में फ़ाइल बन्द रही .... मामला दीपा शर्मा की अदालत में चला मेरे यहीं लाडनूं .... एक साल बाद फ़ाइल खुलने के बाद पेशियों का दौर शुरू हुआ .... सब दोस्तों को मैं पाँव पकड़ पकड़ के न्यायालय ले गया .... पब्लिक प्रोषिटयूटर से फ़ाइल निकलवा के सब गवाहों को बयान रटवाये .... मजिस्ट्रेट साहिबा और बचाव पक्ष के वकील के सामने बयान कलमबद्ध करवाये गवाहों के ........ महीनें में 2 पेशी आने लगी कभी तीन .... मुझे दिल्ली से गांव आना पड़ता तारीख पे .... 30 लाख के प्लाट के पेपर न्यायालय में जमा कर के हलफनामा दे के जब्ती का माल छुड़वाया .... सुबह 10 से 5 तक महीने में 2 या 3 पेशी पे दिल्ली से आ के कोर्ट जाओ .... लगातार 3 साल .... कभी विशेष अदालत का सत्र तो कभी दहेज अदालत का सत्र तो कभी मजिस्ट्रेट साहिबा छुट्टी पे ............ 3 साल में मेरी चप्पलें घिस गयी कोर्ट के चक्करों में ........... ऐसा लगने लगा जैसे हमने FIR कर के जीवन की सबसे बड़ी गलती कर दी .......... चोर तो मुफ्त की रोटियां जेल में तोड़ रहे थे ........... एक दिन पापा ने मुझसे कहा अपने को अपना माल मिल गया है .... अब केस विथड्रॉल करो कितना अपने समय पैसे का नुकसान करोगे ?? .... चोर भी 4 साल से जेल में है अब बस भी करो ............. मैं भी लगातार 3 साल कोर्ट के चक्कर काट के थक चुका था ............ चोरों के वकील ने मुझसे पेशकश की 50 हज़ार ले के केस उठा लो ........... मुझे भी सोने से महंगी घड़ाई पड़ रही थी .... नेकी और पूछ पूछ .... मैंने 50 हज़ार ले के वो केस उठा लिया .... चोर बरी हो गए ....
2015 अगस्त में दिल्ली मेरी फैक्ट्री में चोरी हुई थी .... 4 लाख का कपड़ा .... दोनों चोर मेरे स्टाफ .... मेरे ही गांव के लड़के जिनमें 1 अनाथ था मैं तरस खा के उसको दिल्ली ले गया .......... चोरी के बाद उन्होंने फैक्ट्री की CCTV भी उखाड़ दी .... लेकिन पड़ोसी की गली में लगी CCTV फुटेज से वो पकड़े गए .... कपड़ा सीलमपुर के एक मुसलमान को बेंचा था .... तीनों लोग तिहाड़ में रहे .... बाद में जमानत हो गयी .... कपड़ा खरीदने वाले ने मुझे 1 लाख का ऑफर दिया मैंने पैसे ले के उसका नाम निकलवा लिया .... बाकी 2 आरोपी चोरों से बात चल रही है .... वो 2 लाख देने को तैयार है मैं 3 लाख पे अड़ा हूँ ........... दो ढाई लाख ले के मैं ये केस भी विथड्रॉल कर रहा हूँ .......... क्योंकि मैंने 2012 से 1215 तक अनेक चक्कर काटें है कोर्ट के हश्र देखा है तारीखों का ........... मुझपे इतना समय नहीं कि कड़कड़डूमा कोर्ट के मैं चक्कर काटूं सालों तक .... मेरा 4 लाख का कपड़ा मुझे मिल चुका है .... 3 लाख एक्स्ट्रा मिल रहे है ....
................... अब 2g केस को समझिए ....
कपिल सिब्बल ने इसिपे ज़ीरो लॉस की थ्योरी दी थी .... तब हमने सिब्बल को पेला था ....
सिब्बल का परिचय सुनिए ........... चेहरे से गोरा किंतु चिंपाजी लगता है .... दिमाग से शातिर लोमड़ी है .... आंखों के ऑय ब्रो झाड़ू के तिनकों जैसे है .... कांग्रेस का वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री है .... देश का नामी वकील है .... सोशल मीडिया की 1 पोस्ट के अनुसार एशिया का सबसे बड़ा स्लॉट हाउस (बूचड़खाना) इसकी पत्नी का है ............ राम मंदिर निर्माण केस की पैरवी ये ही कर रहे हैं सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से .... इन्होंने अभी उस केस की सुनवाई भी आगे टलवाई है ....
2g केस को संक्षेप में समझिए .............
2g की बोली पहले आओ पहले पाओ की नीति पर की गई .... सुप्रीम कोर्ट ने ये आवंटन रद्द किए .... CAG की रिपोर्ट के अनुसार अगर ओपन बोली लगती तो देश को 1.76 करोड़ का लाभ होता .......... होता .... होता .... होता .... होता .... होता शब्द को याद रखिये ....
लेकिन गलत आवंटन नीति के कारण देश को इतनी (1.76 लाख करोड़ की) हानि हुई ....
होता .... होता .... होता .......... यानी होता लेकिन हुआ नहीं .... घोटाला या हानि सिर्फ होती ये एक आंकलन या अनुमान था ............. वास्तव में घोटाला हुआ ही नहीं था ....
सीबीआई के तत्कालीन डायरेक्टर थे रंजीत सिन्हा .... आरोपी (आवंटन कर्त्ता) की बैठकें सिन्हा से उनके निवास पे हुई .... सिन्हा ने उस वक़्त की अपने निवास की CCTV फुटेज ठिकाने लगा दी .... विजिटिंग रजिस्टर ठिकाने लगा दिया .... जिसमें उनसे मिलने आने जाने वालों के दस्तखत होते है .... 1 साल तक फ़ाइल दबा के रखी मामले की .... कमज़ोर चार्ज शीट पेश की ..............
कल न्यायलय ने आरोपियों को बरी कर दिया है ....
क्योंकि ....
बकौल न्यायालय .... ए. राजा और कनिमोझी कसूरवार नहीं है ............ क्योंकि 2g का आवंटन PMO ने किया था ............ यहां न्यायालय का बिंदु विचारणीय है .... सटीक है .... जब आवंटन PMO ने किया तो राजा कनिमोझी का क्या कसूर ?? ..............
अब केंद्र सरकार अपनी साख बचाने को ऊपरी न्यायालय जाएगी ....
वहां भी केंद्र सरकार के चित्त होने के पूरे आसार है ....
क्योंकि ....
क्योंकि घोटाला हुआ ही नहीं .... महज़ एक अनुमान या आंकलन था ............. सुप्रीम कोर्ट ने आवंटन इसलिए रद्द किए कि वो गलत तरीके से आवंटित हुए .... लेकिन जब घोटाला ही नहीं हुआ तो सुप्रीम कोर्ट सज़ा किसको देगा ?? ............. ना ही रिश्वतखोरी का आर्थिक लेनदेन हुआ ....
देश को जो हानि हो सकती थी गलत आवंटन से .... वो कांग्रेस की मिलीभगत या गलत नीति का परिणाम था ....
केस को कमज़ोर किया सीबीआई ने .... कांग्रेस की मिलीभगत से ....
मामले की चार्ज शीट कांग्रेस के समय कोर्ट में दाखिल हुई ....
गवाहों के बयान कॉंग्रेस के समय कोर्ट में कलमबद्ध हुए ....
.................. तो अब न्यायालय के फैसले से मोदी कैसे कसूरवार हुआ ?? ..............
हालांकि मैंने कल मोदी जी के प्रति आक्रोश व्यक्त किया ...... उसका मैं खेद व्यक्त करता हूँ ....
और भी अनेक मित्रों ने मोदी जी के प्रति आक्रोश व्यक्त किया ....
जो देशभक्त देशप्रेमी होगा उसका आक्रोशित होना स्वाभविक है ............. लेकिन कल हम सबसे त्रुटि हुई .... हमने कल गलत जगह अपना आक्रोश व्यक्त किया ....
अपने आक्रोश को 2019 तक सम्हाल के रखिये .... कांग्रेस के विरुद्ध .............. गलती कांग्रेस और सीबीआई की है तो आक्रोश भी इनके विरुद्ध व्यक्त होगा ............. 2019 के चुनावों में 44 से 4 पे ला के व्यक्त होगा ....
मोदी बेकसूर है ....
भारतीय न्यायप्रणाली वकीलों का स्वर्ग है ....
2018 में अभी बहुत कुछ मीठा कड़वा देखने सुनने को तैयार रहिएगा !!!! .....
भाई रितेश प्रज्ञांश का #विशेष लेख बड़ेभाई Vimal Bhati के लिये 

शनिवार, 23 दिसंबर 2017

शौच का इतिहास

शौच का इतिहास
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शौच का भी अपना अनूठा इतिहास है
पशुवत शौच की संस्कृति समूचे भारत की रग रग में समाई थी।
हालांकि तिकोनी लंगोटी की आड़ में शुरू ये सभ्यता
साल होते होते खुली नाली पर आ जाती है ।
तिकोनी लंगोटी में विकास होते ही
उसका इतिहास बदला और हगीज युग का
प्रचारमय  प्रारंभ हुआ।
ग्रामीण शौच का इतिहास बेहद
अनूठा रहा है नित्य ही सामूहिक शौच के आयोजन
सुबह शाम गांव की गलियों से खेतों की पगडंडियों तक होते रहे हैं
इन राहों पर गांवों की गोरियों की लोटा यात्रा में समाई उनकी हंसी की खनक
कभी कभी लोगगीतों की गूंज इस पूरे परिवेश को मनमोहक बना देती है
नदी किनारे बसे गांवों में शौचकाल में लोटे का प्रयोग निंदनीय रहा ।
विकास काल में रेल मंत्रालय ने शौच के इतिहास में क्रांति कर दी देश को सबसे बड़ा छतद्वार विमुक्त शौचालय उपलब्ध करा कर।
कालांतर में यही शौचालय रेल की पटरी के नाम से प्रसिद्ध हुआ
बड़े बड़े खेतों में सामूहिक शौच की परंपरा ने भारीचारे को मजबूती प्रदान की।
इतिहास साक्षी है इस खुली शौच परंपरा ने
क ई प्रेमी युगल को गन्ने और। अरहर के खेतों तक पहुंचाया है और उनके मिलन का साक्षी प्रेमिका के हाथों में सधा वो लोटा ही रहा है
खेतों की पगडंडी की तरफ
लोटे के साथ लंबे घूंघट में गमन करता
बहुओं का समूह। सासनिंदा की किलोल करता था
गोल घेरे में बैठ कर फारिग होना और
सास ननद का रोना रोना
सामूहिक शौच के उत्सवी हिस्से थे
एक बिगड़ैल सांड के खेत में
अचानक आ जाने से हमारे मित्र का लोटा
चारों खाने चित हो गया ।
हड़बड़ी में भागे मित्र
अपने किये पर ही  धर रहे
इतिहास के कुछ पन्नों में
नाड़े दार कच्छे और पाजामे भी दर्ज है ।
ऐसे पजामे जिनके नकचढ़े नाड़ों ने
ऐनमौके पर खुलने से इंकार कर
अपनी कुर्बानियां दी ।
खुले में शौच एक परंपरा है
एक संस्कार है
इसी परंपरा के चलते गांव के लटूरी दास की बेटी
लोटा लेकर खेत में गई और साल भर बाद
गोद में लल्ला लेकर लौटी ।
मुसद्दी पहलवान खेत में ही अपनी पुरानी दुश्मनी के चलते खेत रहे । लौटा लेकर जो बैठे तो दुश्मनों ने उठने का मौका भी न दिया ।
लौटे का पानी आंसुओं की तरह बह गया
खुले में शौच के हजार रोचक किस्से हैं
मसलन बारिश में हरी हरी घास जब खेतों में आपकी बैठक का विरोध करें और आप प्रतिकार में उस पर बोझ डाल कर लम्बी सांस छोड़ कर अलौकिक सुख का अनुभव करते हैं ।
अनुभव हीन शौचार्थी जब लौटे के साथ सुरक्षित कोना तलाश रहा होता है तब तक अनुभवी शौचार्थी फारिग हो कर विजयी मुस्कान के साथ अपना पंचा फेंटा बांध रहा होता है । संक्षेप में कहें तो जिस मनुष्य ने खुले में शौच का आनंद नही लिया उसका मानव योनि में जन्म लेना ही व्यर्थ है
,२०० आदमियों की बारात के बीच दस बारह लौटे बार बार खेत से जनवासे तक दौड़ कर कन्या दान के प्रति अपना दायित्व निभाते हैं। शौच की विकास गाथा में लौटे के कंधों के भार को प्लास्टिक की बोतलों ने भी बांटा है
गाड़ी ड्रायवरों और हाइवे के ढावा संचालकों की इन बोतलों ने बेहद सेवा की है
आपातकालीन खुल्लमखुल्ला शौच में अखबारी कागज पत्ते या पत्थरों का भी अविस्मरणीय योगदान है
इस संस्कारिक परंपरा को बंद कर इतिहास से छेड़छाड़ करने का हक संविधान में किसी को नही है
खुले में शौच मानव का संवैधानिक अधिकार है
अतः इस परंपरा को जारी रखे वरना आने वाली पीढ़ी इस अभूतपूर्व सुख से वंचित रहेगी और रेल की खिड़कियों से खेतों में मुंह ढककर उठती बैठती पृजातियो के दर्शन ही दुर्लभ हो जायेंगे ।

सोमवार, 18 दिसंबर 2017

बनिये की सोच सबसे अलग और आगे रहती है।

गुजरात  में एक बड़ी फैक्ट्री का निर्माण हो रहा था और उस प्लांट को बनाने के दौरान एक बड़ी समस्या थी.
वो *समस्या ये थी कि एक भारी भरकम मशीन को प्लांट में बने एक गहरे गढ्ढे के तल में बैठाना था लेकिन मशीन का भारी वजन एक चुनौती बन कर उभरा*.

*मशीन साईट पर आ तो गयी पर उसे 30 फीट गहरे गढ्ढे में कैसे उतारा जाये ये एक बड़ी समस्या थी* !! *अगर ठीक से नहीं बैठाया गया तो फाउंडेशन और मशीन दोनों को बहुत नुकसान उठाना पड़ता*.
आपको बता दे कि ये वो समय था जब *बहुत भारी वजन उठाने वाली क्रेनें हर जगह उपलब्ध नहीं थीं*. जो थीं वो अगर उठा भी लेतीं तो *गहरे गढ्ढे में उतारना उनके बस की बात नहीं थी*.

आखिरकार  हार मानकर इस समस्या का समाधान ढूढ़ने के लिए प्लांट बनाने वाली कम्पनी ने टेंडर निकाला और इस टेंडर का नतीज़ा ये हुआ कि बहुत से लोगो ने इस मशीन को गड्ढे में फिट करने के लिए अपने ऑफर भेजे *उन्होंने सोचा कि कहीं से बड़ी क्रेन मंगवा कर मशीन फिट करवा देंगे*. इस हिसाब से *उन्होंने 10 से 15 लाख रुपये काम पूरा करने के मांगे*. लेकिन उन लोगो के बीच एक *बनिया * था जिसने कंपनी से पूछा कि *अगर मशीन पानी से भीग जाये तो कोई समस्या होगी क्या* ?
इस पर कंपनी ने जबाव दिया कि *मशीन को पानी में भीग जाने पर कोई फर्क नहीं पड़ता*.
उसके बाद उसने भी टेंडर भर दिया ।

जब सारे ऑफर्स देखे गये तो *उस बनिये ने काम करने के सिर्फ 5 लाख मांगे थे*, जाहिर है मशीन बैठाने का काम उसे मिल गया.
लेकिन *अजीब बात ये थी कि उस बनिये ने ये बताने से मना कर दिया कि वो ये काम कैसे करेगा, बस इतना बोला कि ये काम करने का हुनर और सही टीम उसके पास है*.
उसने कहा – *कम्पनी बस उसे तारीख और समय बताये कि किस दिन ये काम करना है*.

आखिर वो दिन आ ही गया. हर कोई उत्सुक था ये जानने के लिए कि *ये बनिया काम कैसे करेगा* ? उसने तो *साईट पर कोई तैयारी भी नहीं की थी*. तय समय पर कई ट्रक उस साईट पर पहुँचने लगे. *उन सभी ट्रकों पर बर्फ लदी थी, जो उन्होंने गढ्ढे में भरना शुरू कर दिया*.

जब बर्फ से पूरा गढ्ढा भर गया तो उन्होंने *मशीन को खिसकाकर बर्फ की सिल्लियों के ऊपर लगा दिया*.
इसके बाद एक पोर्टेबल वाटर पंप चालू किया गया और गढ्ढे में पाइप डाल दिया जिससे कि पानी बाहर निकाला जा सके. *बर्फ पिघलती गयी, पानी बाहर निकाला जाता रहा, मशीन नीचे जाने लगी*.

4-5 घंटे में ही काम पूरा हो गया और *कुल खर्चा 1 लाख रुपये से भी कम आया*.
*मशीन एकदम अच्छे से फिट हो गयी* और उस *बनिये ने 4 लाख रुपये से अधिक मुनाफा भी कमा लिया*.

वास्तव में बिज़नेस बड़ा ही रोचक विषय है.
*ये एक कला है, जो व्यक्ति की सूझबूझ, चतुराई और व्यवहारिक समझ पर निर्भर करता है*.
*मुश्किल से मुश्किल समस्याओं का भी सरल समाधान खोजना ही एक अच्छे बिजनेसमैन की पहचान है* ,'और ये बनिया ने साबित कर दिया कि बनिये की सोच सबसे अलग और आगे रहती है।
🙏🙏

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