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शुक्रवार, 22 अप्रैल 2022

महाभारत एक पूर्ण न्यायशास्त्र है, और चीर-हरण उसका केन्द्रबिन्दु! इस प्रसङ्ग के बाद की पूरी कथा इस घिनौने अपराध के अपराधियों को मिले दण्ड की कथा है।

मुझे लगता है महाभारत एक पूर्ण न्यायशास्त्र है, और चीर-हरण उसका केन्द्रबिन्दु!


इस प्रसङ्ग के बाद की पूरी कथा इस घिनौने अपराध के अपराधियों को मिले दण्ड की कथा है। वह दण्ड, जिसे निर्धारित किया भगवान श्रीकृष्ण ने और किसी को नहीं छोड़ा... किसी को भी नहीं।
    दुर्योधन ने उस अबला स्त्री को दिखा कर अपनी जंघा ठोकी थी, तो उसकी जंघा तोड़ी गयी। दुशासन ने छाती ठोकी तो उसकी छाती फाड़ दी गयी। महारथी कर्ण ने एक असहाय स्त्री के अपमान का समर्थन किया, तो श्रीकृष्ण ने असहाय दशा में ही उसका वध कराया।
     भीष्म ने यदि प्रतिज्ञा में बंध कर एक स्त्री के अपमान को देखने और सहन करने का पाप किया, तो असँख्य तीरों में बिंध कर अपने पूरे कुल को एक-एक कर मरते हुए भी देखे... भारत का कोई बुजुर्ग अपने सामने अपने बच्चों को मरते देखना नहीं चाहता, पर भीष्म अपने सामने चार पीढ़ियों को मरते देखते रहे। जबतक सब देख नहीं लिया, तबतक मर भी न सके... यही उनका दण्ड था।  
     धृतराष्ट्र का दोष था पुत्रमोह, तो सौ पुत्रों के शव को कंधा देने का दण्ड मिला उन्हें। सौ हाथियों के बराबर बल वाला धृतराष्ट्र सिवाय रोने के और कुछ नहीं कर सका।
     दण्ड केवल कौरव दल को ही नहीं मिला था। दण्ड पांडवों को भी मिला। द्रौपदी ने वरमाला अर्जुन के गले में डाली थी, सो उनकी रक्षा का दायित्व सबसे अधिक अर्जुन पर था। अर्जुन यदि चुपचाप उनका अपमान देखते रहे, तो सबसे कठोर दण्ड भी उन्ही को मिला। अर्जुन पितामह भीष्म को सबसे अधिक प्रेम करते थे, तो कृष्ण ने उन्ही के हाथों पितामह को निर्मम मृत्यु दिलाई। अर्जुन रोते रहे, पर तीर चलाते रहे... क्या लगता है, अपने ही हाथों अपने अभिभावकों, भाइयों की हत्या करने की ग्लानि से अर्जुन कभी मुक्त हुए होंगे क्या? नहीं... वे जीवन भर तड़पे होंगे। यही उनका दण्ड था।
    युधिष्ठिर ने स्त्री को दाव पर लगाया, तो उन्हें भी दण्ड मिला। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म का साथ नहीं छोड़ने वाले युधिष्ठिर ने युद्धभूमि में झूठ बोला, और उसी झूठ के कारण उनके गुरु की हत्या हुई। यह एक झूठ उनके सारे सत्यों पर भारी रहा... धर्मराज के लिए इससे बड़ा दण्ड क्या होगा?
     दुर्योधन को गदायुद्ध सिखाया था स्वयं बलराम ने। एक अधर्मी को गदायुद्ध की शिक्षा देने का दण्ड बलराम को भी मिला। उनके सामने उनके प्रिय दुर्योधन का वध हुआ और वे चाह कर भी कुछ न कर सके... 
     उस युग में दो योद्धा ऐसे थे जो अकेले सबको दण्ड दे सकते थे, कृष्ण और बर्बरीक। पर कृष्ण ने ऐसे कुकर्मियों के विरुद्ध शस्त्र उठाने तक से इनकार कर दिया, और बर्बरीक को युद्ध मे उतरने से ही रोक दिया। लोग पूछते हैं कि बर्बरीक का वध क्यों हुआ? यदि बर्बरीक का बध नहीं हुआ होता तो द्रौपदी के अपराधियों को यथोचित दण्ड नहीं मिल पाता। कृष्ण युद्धभूमि में विजय और पराजय तय करने के लिए नहीं उतरे थे, कृष्ण कृष्णा के अपराधियों को दण्ड दिलाने उतरे थे।
     कुछ लोगों ने कर्ण का बड़ा महिमामण्डन किया है। पर सुनिए! कर्ण कितना भी बड़ा योद्धा क्यों न रहा हो, कितना भी बड़ा दानी क्यों न रहा हो, एक स्त्री के वस्त्र-हरण में सहयोग का पाप इतना बड़ा है कि उसके समक्ष सारे पुण्य छोटे पड़ जाएंगे। द्रौपदी के अपमान में किये गए सहयोग ने यह सिद्ध कर दिया कि वह महानीच व्यक्ति था, और उसका वध ही धर्म था।
     स्त्री कोई वस्तु नहीं कि उसे दाव पर लगाया जाय। कृष्ण के युग में दो स्त्रियों को बाल से पकड़ कर घसीटा गया। देवकी का बाल पकड़ा कंस ने, और द्रौपदी का बाल पकड़ा दुशासन ने। श्रीकृष्ण ने स्वयं दोनों के अपराधियों का समूल नाश किया। किसी स्त्री के अपमान का दण्ड  अपराधी के समूल नाश से ही पूरा होता है, भले वह अपराधी विश्व का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति ही क्यों न हो... यही न्याय है, यही धर्म है। और इस धर्म को स्थापित करने वाला भारत है, सनातन है...

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भारतीय न्याय व्यवस्था के ऊपर इससे अच्छा सम सामयिक लेख नही मिलेगा।

बहुत ध्यान से पढ़िएगा।
भारतीय न्याय व्यवस्था के ऊपर इससे अच्छा सम सामयिक लेख नही मिलेगा।
सुप्रीम कोर्ट के जज मतलब राष्ट्रपति के बराबर का दर्जा।
सुप्रिप कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील याने दो दो कौड़ी के आतंकियों के लिए उनके आकाओं के निर्देश पर में रात भर भागदौड़ करने वाले कठपुतलियां।
फिर भी कहते है न कि ....
"दबी बिल्ली चूहें से....GAAAA& ????"
अब पढ़िए पूरा लेख।
कुछ महीने पहले एक टीवी चैनल पर कार्यक्रम था उस कार्यक्रम में भारत के पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई जो उस वक्त राज्यसभा सांसद बन चुके थे साथ में तृणमूल कांग्रेस के सांसद महुआ मोइत्रा और कई लोग थे।
एंकर ने जब पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई से भारत की न्याय व्यवस्था के बारे में सवाल पूछा तब पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि मैं चाह कर भी भारत की न्यायपालिका को सुधार नहीं सकता क्योंकि हमारा अदालती सिस्टम कुछ बड़े फिक्सरों (दलालो)  के कब्जे में है और यह बड़े फिक्सर जब चाहे जो चाहे जैसा चाहे उस तरह से हमारी न्याय व्यवस्था को चला देते हैं।
 इस कार्यक्रम में आगे जस्टिस रंजन गोगोई ने न्यायपालिका पर और भी बड़े सवाल उठाए जैसे कि यदि भारत को 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनना है तो जब तक भारत अपने न्याय व्यवस्था को नही बदलेगा तब तक वह 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था नहीं बन सकता क्योकि भारत की न्याय व्यवस्था इतनी बर्बाद हो  गई है और वह घुन की तरह न सिर्फ इस देश को बल्कि इस देश की अर्थव्यवस्था और इस देश के ताने-बाने को छेद छेद कर कमजोर कर रही है।
उन्होंने आगे कहा कि एक मध्यम वर्ग जाए गरीब को भारत की न्याय व्यवस्था कभी भी न्याय नहीं दे सकती और यह एक कड़वा सच है यदि आप बहुत बड़े पैसे वाले हैं अरबपति हैं तब आप को न्याय मिलेगा और आपके वकील लोग ही हमारे जज लोगों को यह बताएंगे कि आपको क्या फैसला देना है और यह चंद बड़े वकील ही आज सुप्रीम कोर्ट के सबसे बड़े फिक्सर बन चुके हैं।
जस्टिस रंजन गोगोई के इस कथन पर सुप्रीम कोर्ट ने चाह कर भी कुछ नहीं किया क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के हर एक जज को पता है कि वह बड़े-बड़े फिक्सरो (दलालो) जैसे दुष्यंत दवे कपिल सिब्बल अभिषेक मनु सिंघवी प्रशांत भूषण के चंगुल में फंसे हुए हैं और यह लोग जब चाहे जैसा चाहे उस तरह से भारत के सुप्रीम कोर्ट को चलाते हैं।

अब आप कुछ उदाहरण समझिए कि जस्टिस रंजन गोगोई ने कितनी कड़वी बात कही थी काश वह कुछ उदाहरण भी और कुछ नाम भी देते तो बहुत अच्छा होता।

दो मामले हैं  दोनो बिल्कुल एक जैसे हैं।

बीजेपी नेता किरीट सोमैया पर महाराष्ट्र सरकार ने यह आरोप लगाया कि उन्होंने आई एन एस विराट को बचाने के लिए लोगों से चंदा लिया और उस चंदे का कोई हिसाब सरकार को नहीं दिया और उनके खिलाफ गिरफ्तारी के वारंट जारी कर दिए गए किरीट सोमैया निचली अदालत और फिर मुंबई हाई कोर्ट में सेशन कोर्ट में यानी तीन अदालतों में अग्रिम जमानत के लिए गए लेकिन उन्हें तीनों अदालत ने अग्रिम जमानत नहीं दिया।
अब आप दूसरा उदाहरण देखिए गुजरात दंगों पर अपनी रोटी सेकने वाली तीस्ता जावेद सीतलवाड़ ने खाड़ी के देशों अमेरिका ब्रिटेन सहित कई जगहों से लगभग 100 करोड़ रुपए डोनेशन लिया जांच में पता चला कि उसकी तमाम खरीदारी का बिल उसके ट्रस्ट के खाते से किया गया है यहां तक कि दुबई एयरपोर्ट पर सोने के गहने खरीदने का बिल या ब्रिटेन के एयरपोर्ट पर ड्यूटी फ्री लिकर यानी शराब खरीदने का बिल भी उसने ट्रस्ट के पैसे से किया था फिर उसी के ट्रस्ट सबरंग के एक दूसरे ट्रस्टी ने ही पुलिस में केस दर्ज करवाया।
पुलिस ने पहले 6 महीने जांच किया सारे सुबूत इकट्ठा किए उसके बाद तीस्ता जावेद को गिरफ्तार करने मुंबई गई।
तीस्ता जावेद ने अपने घर का दरवाजा नहीं खोला 10 मिनट में इलाके के एक पुलिस स्टेशन में सुप्रीम कोर्ट का फैसला मेल से  जाता है कि तीस्ता को गिरफ्तारी से रोक का आदेश दे दिया गया है।
 पता चला कि कपिल सिब्बल ने फोन पर सुप्रीम कोर्ट के एक जज को यह आदेश पारित करवा दिया मतलब भारत के इतिहास में यह पहली मौका है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने टेलीफोन पर सुनवाई किया था और सिर्फ 3 मिनट की टेलीफोनिक सुनवाई में आदेश दे दिया।
ठीक इसी तरह का काम राना अय्यूब ने किया उन्होंने भी गुजरात दंगों के नाम पर जो डोनेशन इकट्ठा किया उसका ऑडिट नहीं करवाया और उसमें से 5 करोड़ रुपये  अपने पिताजी के नाम फिक्स डिपाजिट कर दिए उनके खिलाफ भी सारे सबूत हैं वह जब विदेश जा रही थी और उन्हें विदेश जाने से रोका गया तब मुंबई हाईकोर्ट ने कहा कि 5 करोड़ की रकम कोई इतनी बड़ी रकम नहीं है कि इसे बड़ा फ्रॉड माना जाए। 
मुझे याद है एक बस कंडक्टर को 20 पैसे गबन करने के आरोप में 40 साल तक मुकदमा लड़ना पड़ा था तब हमारी अदालती सिस्टम ने यह नहीं कहा कि 20 पैसा कोई बड़ी रकम नहीं है।
अब कल जहांगीरपुरी का उदाहरण 
देखिए....
10:30 बजे जैसे ही बुलडोजर जहांगीरपुरी पहुंचे 10:31 पर जमाते उलेमा के वकील कपिल सिब्बल दुष्यंत दवे और प्रशांत भूषण सीधे सुप्रीम कोर्ट में गए आनन-फानन में सुनवाई हुई और ठीक 10 बज कर 45 मिनट पर सुप्रीम कोर्ट अपना स्टे ऑर्डर दे दिया मैं तो आश्चर्यचकित हो गया कि ऐसे मामले मैं इतनी जल्दी सुनवाई और इतना जल्दी आदेश कैसे हो गया जबकि भारत की न्याय व्यवस्था का हायरकी यानी निचली अदालत में फिर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का भी ध्यान नहीं रखा गया।
यानी जस्टिस रंजन गोगोई ने बिल्कुल ठीक कहा था भारत का न्याय व्यवस्था भारत का हर एक अदालत कोर्ट फिक्सरो यानी दलालों के चंगुल में है।
साभार:-

हिंदू_राष्ट्र_अधिनियम (योगी सरकार की पहल) अब साकार होगा हिंदू राष्ट्र का सपना

🛑
*#हिंदू_राष्ट्र_अधिनियम*
        (योगी सरकार की पहल)
   अब साकार होगा हिंदू राष्ट्र का सपना
   *दिल्ली आएं-*
   *तिथि जल्द घोषित की जाएगी*
   *मुख्य मांगें-*
   01. हिन्दुस्तान अब हिन्दू राष्ट्र कहलायेगा। शासन का मुख्य धर्म सनातन हिंदू धर्म होगा और इसकी उप शाखाएं जैन, बौद्ध, सिख होंगी।
   02. ऐसे राज्य में जहां हिंदू और उनके घटक आबादी के 50% से कम हैं, उन्हें सभी अल्पसंख्यक लाभ मिलेंगे। लेकिन हिंदुओं की आबादी कम नहीं होनी चाहिए
   03. देश के प्रमुख संवैधानिक पद जैसे पीएम, राष्ट्रपति, चुनाव आयुक्त, मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, गृह, रक्षा मंत्री, अध्यक्ष, तीनों सेना प्रमुख, मेयर, कलेक्टर, मुख्य सचिव, कैबिनेट सचिव, आरबीआई। गुरबनेर एट अल। अब मुख्य पदों पर सिर्फ हिंदू और इसकी उपशाखाओं के लोग ही बैठेंगे।
   04. देश और राज्य में सरकारी नौकरियों, शिक्षा, निर्वाचन क्षेत्रों पर हिंदुओं और उसके घटकों की अधिकतम सीमा 90% से अधिक होगी।
   05. स्वदेशी-विदेशी परिवारों, व्यक्तियों, समूहों, जिन्होंने विभिन्न कारणों से धर्म परिवर्तन किया है, को हिंदू वर्ग में उनके घर लौटने पर शिक्षा, नौकरियों में 5% आरक्षण दिया जाना चाहिए।
   06. अल्पसंख्यक आयोग और अन्य लाभ हिंदू राष्ट्र बनने के बाद ही मिलने चाहिए।
   07. अब 70% से अधिक आबादी वाले हिंदू जिलों में, हिंदुओं और घटकों की आबादी में दूसरों के लिए संपत्ति की खरीद और व्यापार बंद कर दिया जाना चाहिए।
   08. एससी-एसटी का धर्मांतरण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
   09. जबरन हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन, छल कपट, लालच, आजीवन कारावास, 50 लाख जुर्माना।
   10. जो कोई भी हिंदू लड़के या लड़की से शादी करता है उसे अनिवार्य हिंदू धर्म अपनाना होता है।
   11. एक शादी, 2 बच्चे अनिवार्य जनसंख्या नीति को जनसंख्या नियंत्रण में लाया जाए या हिंदुओं की भी 4 शादियां हों, 40 बच्चे हों, शादी की उम्र 18 साल होनी चाहिए।
   12. दूसरों को हिंदुओं की संपत्ति खरीदने से पहले 1 साल पहले जिला कलेक्टर को सूचित करना होगा।
   13. यदि हिंदू और उनके घटक अन्य धर्म अपनाते हैं, तो उन्हें इसकी सूचना 1 वर्ष पहले जिला कलेक्टर को देनी होगी।
   14. हिंदुओं और उसके घटकों के मंदिरों, मठों, तीर्थस्थलों, ट्रस्टों, शिवालयों, गुरुदारों पर कोई कर नहीं लगाया जाएगा।
   15. प्रत्येक जिले में एक केंद्रीय संस्कृत महा विद्यालय और 5 उच्चतर माध्यमिक आधुनिक संस्कृत विद्यालय होंगे।
   16. पहली से स्नातक तक संस्कृत अनिवार्य विषय होगी।
   17. प्रत्येक जिले में 1-1 उन्नत गौशाला और नंदीशाला होगी।
   18. बाघ के साथ-साथ गाय को भी अब राष्ट्रीय गाय का दर्जा मिलना चाहिए।
   19. गोमांस की बिक्री पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध रहेगा।
   20. गोहत्या, तस्करी, आजीवन कारावास या सामूहिक बिक्री के लिए फांसी
   21. रामायण, गीता, गुरु ग्रंथ साहिब, जैन और बौद्ध ग्रंथों को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किया जाएगा।
   22. 90% सरकारी नौकरियां हिंदुओं और उसके घटकों के लिए आरक्षित होंगी। अन्य की पद सीमा पद के 10% से अधिक नहीं होनी चाहिए।
   23. संसद, विधान सभा, परिषदों में 90% सीटें हिंदुओं और उसके घटकों के लिए आरक्षित होंगी।
   24. हिंदू पूजा स्थलों का नामकरण, सभी हिंदुओं और उनके घटक क्षेत्रों का अतिक्रमण, नींव का पत्थर
   25. इतिहास को फिर से लिखना
   26. दूसरों के पूजा स्थलों की एक निश्चित सीमा होनी चाहिए।
   27. अल्पसंख्यक आयोग का विघटन।
   28. तुष्टीकरण और वोट बैंक के नाम पर वक्फ बोर्ड, मदरसा शिक्षा, इस्लामिक अध्ययन, कट्टरता, वामपंथी आदि पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए।
   29. बीपीएल, विकलांग, अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति, महिलाओं के धर्म परिवर्तन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए।
   30. अब प्रत्येक नागरिक को अंगूठे से सत्यापन के बाद ही मतदान करना चाहिए।
   31. धर्म और जाति के आधार पर बनी रेजीमेंटों को भंग करने के बाद अब हिन्दुस्तान आर्मी रेजीमेंट होनी चाहिए।
   32. चुनाव जाति का उल्लेख किए बिना केवल उम्मीदवारों के नाम पर होना चाहिए।
   34. हिंदू धर्म, देवी-देवताओं, सभ्यता और उसके घटकों, संस्कृति, रीति-रिवाजों, इतिहास आदि, फिल्म, लेख, वेब श्रृंखला, लघु फिल्म, नाटक के नाम पर निंदा।
   विज्ञापनों के माध्यम से झूठे प्रचार, झूठे तथ्य आदि पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए और अवज्ञा के लिए कड़ी सजा होनी चाहिए।
   35. यह संविधान की नई प्रस्तावना है।
   "पूर्ण संप्रभु हिंदुत्व लोकतांत्रिक गणराज्य हिंदुस्तान"
   36. हिंदुत्व मंत्रालय जो उनके हित में काम करेगा।
   37. 2023 के बाद वोट का अधिकार, सरकारी लाभ, सरकारी नौकरी, चुनाव लड़ना, दो से अधिक यानी तीसरे बच्चे और एक से अधिक विवाह करने वाले मुसलमानों को संवेदनशील पद न देने के प्रावधान के साथ *कि मुसलमान को जल्द ही उसका परिवार मिल जाएगा . क्योंकि उसका चौथा बच्चा है। उन्हें देश से रिहा कर दिया जाएगा.. फिर उन्हें भारत वापस नहीं ले जाया जाएगा.. *
   38. धर्म की परिभाषा को स्वीकार किया जाएगा। पाखंड की परिभाषा तय होगी।
   जो धर्म की परिभाषा पर खरे नहीं उतरते। वह धर्म सिद्ध होता है।

   मेरे देशभक्त मित्रों, इसे सोशल मीडिया के माध्यम से फैलाएं ताकि देश के कोने-कोने से आवाज उठे और जनप्रतिनिधियों को इसे राज्य विधानमंडल और संसद में पारित करके कानून बनाना चाहिए।
   दोस्तों हर फेसबुक पेज और हर व्हाट्सएप ग्रुप पर शेयर करें और हर शहर से ज्ञापन दें और प्राप्त करें।

   आपको यह संदेश कम से कम 3 लोगों को भेजना होगा।
   *(मैं अपने सभी दोस्तों को भेजूंगा)*

   *इस तरह 3 लोग 3 मैसेज करेंगे..*
   *आपको बस एक लिंक जोड़ना है और,*
   *आप देखेंगे कि पूरे देश के हिंदू आपके साथ खड़े होंगे।* 2
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