मंगलवार, 27 अक्तूबर 2015

शरद पूर्णिमा का अध्यात्मिक महत्व

 शरद-पूर्णिमा की खीर
भगवान ने भी कहा है,'पुष्णामि चौषधीः सर्वाः सोमो भूत्वा रसात्मकः।।'
'रसस्वरूप अर्थात् अमृतमय चन्द्रमा होकर सम्पूर्ण औषधियों को अर्थात् वनस्पतियों को पुष्ट करता हूं।' (गीताः15.13)
  हमारे शास्त्रों में अनेक मान्यताएं है जिनके अनुरूप शरद पूर्णिमा की खीर का विशेष महत्व है ।
शरद पूर्णिमा का अध्यात्मिक महत्व :-
      हिंदू संस्कृति में आश्रि्वन मास की पूर्णिमा का अपना विशेष महत्व है। इसे शरद पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। शरद पूर्णिमा को आनंद व उल्लास का पर्व माना जाता है। इस पर्व का धार्मिक व वैज्ञानिक महत्व भी है।
ऐसा माना जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात्रि में भगवान शकर एवं माँ पार्वती कैलाश पर्वत पर रमण करते हैं, तथा संपूर्ण कैलाश पर्वत पर चंद्रमा जगमगा जाता है। भगवान कृष्ण ने भी शरद पूर्णिमा को रास-लीला की थी, तथा मथुरा-वृंदावन सहित अनेक स्थानों पर इस रात को रास-लीलाओं का आयोजन किया जाता है। लोग शरद पूर्णिमा को व्रत भी रखते हैं, तथा शास्त्रों में इसे कौमुदी व्रत भी कहा गया है।
लंकाधिपति रावण शरद पूर्णिमा की रात किरणों को दर्पण के माध्यम से अपनी नाभि पर ग्रहण करता था। इस प्रक्रिया से उसे पुनर्योवन शक्ति प्राप्त होती थी। चांदनी रात में 10 से मध्यरात्रि 12 बजे के बीच कम वस्त्रों में घूमने वाले व्यक्ति को ऊर्जा प्राप्त होती है। सोमचक्र, नक्षत्रीय चक्र और आश्विन के त्रिकोण के कारण शरद ऋतु से ऊर्जा का संग्रह होता है और बसंत में निग्रह होता है।
मान्यताएं एवं वैज्ञानिक कारण :-
पूर्णिमा को चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है
जिससे चंद्रमा के प्रकाश की किरणें पृथ्वी पर स्वास्थ्य की बौछारे करती हैं। इस दिन चंद्रमा की किरणों में विशेष प्रकार के लवण व विटामिन होते हैं। कहा जाता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों से नाग का विष भी अमृत बन जाता है। ऐसी भी मान्यता है कि प्रकृति इस दिन धरती पर अमृत वर्षा करती है।
अध्ययन के अनुसार दुग्ध में लैक्टिक अम्ल और अमृत तत्व होता है। यह तत्व किरणों से अधिक मात्रा में शक्ति का शोषण करता है। चावल में स्टार्च होने के कारण यह प्रक्रिया और आसान हो जाती है। इसी कारण ऋषि-मुनियों ने शरद पूर्णिमा की रात्रि में खीर खुले आसमान में रखने का विधान किया है। यह परंपरा विज्ञान पर आधारित है।
शोध के अनुसार खीर को चांदी के पात्र में बनाना चाहिए। चांदी में प्रतिरोधकता अधिक होती है। इससे विषाणु दूर रहते हैं। चांदी पात्र की अनुपस्थिति में मिट्टी की हांड़ी में खीर बनाना चाहिए । इस खीर में हल्दी का उपयोग निषिद्ध है। प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम 30 मिनट तक शरद पूर्णिमा का स्नान करना चाहिए। रात्रि 10 से 12 बजे तक का समय उपयुक्त रहता है।
चेहरे पर काति आती है :-
शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा का पूजन कर भोग लगाया जाता है, जिससे आयु बढ़ती है व चेहरे पर  कान्ति आती है ,  एवं शरीर स्वस्थ रहता है। शरद पूर्णिमा की मनमोहक सुनहरी रात में वैद्यों द्वारा जड़ी बूटियों से औषधि का निर्माण किया जाता है। माना जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात को तैयार की गई औषधि अचूक रामबाण होती है। चंद्रमा की रात में खुले मुंह के बर्तन में खीर पकाई जाती है जिसमें चंद्र किरणों का समावेश होने से अमृत रूपी यह खीर अनेक रोगों के लिए दवा का काम करती है। विशेषकर श्वास व दमा के रोगियों को पीपल वृक्ष की छाल दूध में मिलाकर इसे धीमी आग पर किरणों के प्रकाश में तैयार कर खीर खिलाई जाती है जिससे दमा रोगी लाभांवित होते हे।
चंद्र किरणों में तैयार स्वास्थ्य खीर :-
√ इसी प्रकार वैद्य लोग विभिन्न प्रकार के रोगियों के लिए इस रात चंद्र किरणों में खीर तैयार करते है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ धीमी आच पर चंद्र किरणों में खीर पकानी रखकर विविध प्रकार के खेल खेलते है एवं बौद्धिक के द्वारा ज्ञान बढ़ाते है व रात को बारह बजे के पश्चात खीर के रूप में प्रसाद ग्रहण करते हैं। व्रत रखने वाले लोग चंद्र किरणों में पकाई गई खीर को अगले रोज प्रसाद के रूप में ग्रहण कर अपना व्रत खोलते है।
सौंदर्य व छटा मन हर्षित करने वाली शरद पूर्णिमा की रात को नौका विहार करना, नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है। शरद पूर्णिमा की रात प्रकृति का सौंदर्य व छटा मन को हर्षित करने वाली होती है। नाना प्रकार के पुष्पों की सुगंध इस रात में बढ़ जाती है, जो मन को लुभाती है वहीं तन को भी मुग्ध करती है। यह पर्व स्वास्थ्य, सौंदर्य व उल्लास बढ़ाने वाला माना गया है।
इससे रोगी को सांस और कफ दोष के कारण होने वाली तकलीफों में काफी लाभ मिलता है I रात्रि जागरण के महत्व के कारण ही इसे जागृति पूर्णिमा भी कहा जाता है , इसका एक कारण रात्रि में स्वाभाविक कफ के प्रकोप को जागरण से कम करना हैI इस खीर को मधुमेह से पीड़ित रोगी भी ले सकते हैं, बस इसमें मिश्री की जगह प्राकृतिक स्वीटनर स्टीविया की पत्तियों को मिला दें I
खीर खाओ मलेरिया भगाओ :-
हमारी हर प्राचीन परंपरा में वैज्ञानिकता का दर्शन होता हैं । अज्ञानता का नहीं......
हम सब जानते है की मच्छर काटने से मलेरिया होता है वर्ष मे कम से कम 700-800 बार तो मच्छर काटते ही होंगे अर्थात 70 वर्ष की आयु तक पहुंचते-पहुंचते लाख बार मच्छर काट लेते होंगे । लेकिन अधिकांश लोगो को जीवनभर में एक दो बार ही मलेरिया होता है । सारांश यह है की मच्छर के काटने से मलेरिया होता है, यह 1% ही सही है ।
⛅वर्षा ऋतु के बाद जब शरद ऋतु आती है तो आसमान में बादल व धूल के न होने से कडक धूप पड़ती है। जिससे शरीर में पित्त कुपित होता है । इस समय गड्ढो आदि मे जमा पानी के कारण बहुत बड़ी मात्रा मे मच्छर पैदा होते है इससे मलेरिया होने का खतरा सबसे अधिक होता है ।
आप जानते होंगे की शरद ऋतु के प्रारम्भ में दिन थोड़े गर्म और रातें शीतल हो जाया करती हैं I आयुर्वेद अनुसार यह पित्त दोष के प्रकोप का काल माना जाता है और मधुर तिक्त कषाय रस पित्त दोष का शमन करते हैं।
मलेरिया के लिए औषधीय खीर :-
मलेरिया का असर पित्त के बढ़ने पर अधिक होता है । शरद पूर्णिमा को देसी गाय के दूध में दशमूल क्वाथ, सौंठ,काली मिर्च, वासा, अर्जुन की छाल चूर्ण, तालिश पत्र चूर्ण, वंशलोचन, बड़ी इलायची, पिप्पली इन सबको आवश्यक मात्रा में मिश्री मिलाकर पकायें और खीर बना लें I खीर में ऊपर से शहद और तुलसी पत्र मिला दें ,अब इस खीर को ताम्बे के साफ़ बर्तन में रातभर पूर्णिमा की चांदनी रात में खुले आसमान के नीचे ऊपर से जालीनुमा ढक्कन से ढक कर छोड़ दें और अपने घर की छत पर बैठ कर चंद्रमा को अर्घ देकर,अब इस खीर को रात्रि जागरण कर रहे दमे के रोगी को प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त (4-6 बजे प्रातः) सेवन कराएं I
लेकिन यहाँ ऐसे विज्ञापनो की कमी नहीं है, जो कहते है की एक भी मच्छर ‘डेंजरस’ है, हिट लाओगे तो एक भी मच्छर नहीं बचेगा। अब ऐसे विज्ञापनो के बहकावे मे आकर करोड़ो लोग इस मच्छर बाजार मे अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हो जाते है । सभी जानते है बैक्टीरिया बिना उपयुक्त वातावरण के नहीं पनप सकते । जैसे दूध मे दही डालने मात्र से दही नहीं बनाता, दूध हल्का गरम होना चाहिए। उसे ढककर गरम वातावरण मे रखना होता है । बार बार हिलाने से भी दही नहीं जमता । ऐसे ही मलेरिया के बैक्टीरिया को जब पित्त का वातावरण मिलता है, तभी वह 4 दिन में पूरे शरीर में फैलता है, नहीं तो थोड़े समय में समाप्त हो जाता है । इतने सारे प्रयासो के बाद भी मच्छर और रोगवाहक सूक्ष्म कीट नहीं काटेंगे यह हमारे हाथ में नहीं । लेकिन पित्त को नियंत्रित रखना तो हमारे हाथ में है। अब हमारी परम्पराओं का चमत्कार देखिये जिन्हे अल्पज्ञानी, दक़ियानूसी, और पिछड़ेपन की सोच करके षड्यंत्र फैलाया जाता है।
खीर खाने से पित्त का शमन होता है । शरद में ही पितृ पक्ष (श्राद्ध) आता है पितरों का मुख्य भोजन है खीर । इस दौरान 5-7 बार खीर खाना हो जाता है । इसके बाद शरद पुर्णिमा को रातभर चाँदनी के नीचे चाँदी के पात्र में रखी खीर सुबह खाई जाती है (चाँदी का पात्र न हो तो चाँदी का चम्मच खीर मे डाल दे, लेकिन बर्तन मिट्टी, काँसा या पीतल का हो। क्योंकि स्टील जहर और एल्यूमिनियम, प्लास्टिक, चीनी मिट्टी महा-जहर है)
यह खीर विशेष ठंडक पहुंचाती है । गाय के दूध की हो तो अति उत्तम, विशेष गुणकारी (आयुर्वेद मे घी से अर्थात गौ घी और दूध गौ का) इससे मलेरिया होने की संभावना नहीं के बराबर हो जाती है ।
ध्यान रहे : इस ऋतु में बनाई खीर में केसर और में वों का प्रयोग न करे । ये गर्म प्रवृत्ति के होने से पित्त बढ़ा सकते है। सिर्फ इलायची डाले ।
शरद पूर्णिमा पर व्रत कथा :-
शरद पूर्णिमा से संबंधित व्रत कथा इस प्रकार है। एक साहूकार था। उसके दो पुत्रिया थीं, उनमें से एक शरद पूर्णिमा का व्रत रखती थीं व दूसरी व्रत को अधूरा छोड़ देती थीं। परिणामस्वरूप दूसरी के जो संतान होती थी वह मर जाया करती थी। इससे दुखी होकर उसने पंडितों से इसका कारण जानना चाहा तो मालूम हुआ कि व्रत पूरा न करने की वजह से ऐसा होता है। इसके बाद वह पूरा व्रत करने लगी किंतु फिर भी लड़का होने के बाद वह मर गया तो वह अपनी बहन को बुला लाई। उसकी साड़ी को छूते ही मृतक पुन: जीवित हो गया। इससे उसके मन में व्रत के प्रति स्नेह हुआ व आस्था बढ़ी। इसके बाद शरद पूर्णिमा के व्रत का महत्व बढ़ गया ओर इसी कारण से इस व्रत को संतान सुख देने वाला भी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात को जो औरत गर्भ धारण करती है, वह निश्चित रूप से प्रतिभाशाली, स्वस्थ चंद्र जैसी काति वाले पुत्र को जन्म देती

शनिवार, 17 अक्तूबर 2015

धन तेरस, सोमवार, कार्तिक कृ्ष्ण पक्ष 9 नवम्बर, 2015

धन तेरस, सोमवार, कार्तिक कृ्ष्ण पक्ष 9 नवम्बर, 2015

उत्तरी भारत में कार्तिक कृ्ष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन धनतेरस का पर्व पूरी श्रद्धा व विश्वास से मनाया जाता है. देव धनवन्तरी के अलावा इस दिन, देवी लक्ष्मी जी और धन के देवता कुबेर के पूजन की परम्परा है. इस दिन कुबेर के अलावा यमदेव को भी दीपदान किया जाता है. इस दिन यमदेव की पूजा करने के विषय में एक मान्यता है कि इस दिन यमदेव की पूजा करने से घर में असमय मृ्त्यु का भय नहीं रहता है. धन त्रयोदशी के दिन यमदेव की पूजा करने के बाद घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख वाला दीपक पूरी रात्रि जलाना चाहिए. इस दीपक में कुछ पैसा व कौडी भी डाली जाती है.

धनतेरस का महत्व

साथ ही इस दिन नये उपहार, सिक्का, बर्तन व गहनों की खरीदारी करना शुभ रहता है. शुभ मुहूर्त समय में पूजन करने के साथ सात धान्यों की पूजा की जाती है. सात धान्य गेंहूं, उडद, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर है. सात धान्यों के साथ ही पूजन सामग्री में विशेष रुप से स्वर्णपुष्पा के पुष्प से भगवती का पूजन करना लाभकारी रहता है. इस दिन पूजा में भोग लगाने के लिये नैवेद्ध के रुप में श्वेत मिष्ठान्न का प्रयोग किया जाता है. साथ ही इस दिन स्थिर लक्ष्मी का पूजन करने का विशेष महत्व है.

धन त्रयोदशी के दिन देव धनवंतरी देव का जन्म हुआ था. धनवंतरी देव, देवताओं के चिकित्सकों के देव है. यही कारण है कि इस दिन चिकित्सा जगत में बडी-बडी योजनाएं प्रारम्भ की जाती है. धनतेरस के दिन चांदी खरीदना शुभ रहता है.

धन तेरस पूजा मुहूर्त


1. प्रदोष काल:-

सूर्यास्त के बाद के 2 घण्टे 24 की अवधि को प्रदोषकाल के नाम से जाना जाता है. प्रदोषकाल में दीपदान व लक्ष्मी पूजन करना शुभ रहता है.

दिल्ली में 9 नवम्बर 2015 सूर्यास्त समय सायं 17:28 तक रहेगा. इस समय अवधि में स्थिर लग्न 17:51 से लेकर 19.47 के मध्य वृषभ काल रहेगा. मुहुर्त समय में होने के कारण घर-परिवार में स्थायी लक्ष्मी की प्राप्ति होती है.

2. चौघाडिया मुहूर्त:-

9 नवंबर 2015, सोमवार
अमृ्त काल मुहूर्त 04:30 से 18:00 तक
चर काल 18:00 से लेकर 19:30 तक
लाभ काल 22:30 से 24:00 तक

उपरोक्त में लाभ समय में पूजन करना लाभों में वृ्द्धि करता है. शुभ काल मुहूर्त की शुभता से धन, स्वास्थय व आयु में शुभता आती है. सबसे अधिक शुभ अमृ्त काल में पूजा करने का होता है.

सांय काल में शुभ महूर्त

17:24 से 20:07 तक का समय धन तेरस की पूजा के लिये विशेष शुभ रहेगा.

धनतेरस में क्या खरीदें

लक्ष्मी जी व गणेश जी की चांदी की प्रतिमाओं को इस दिन घर लाना, घर- कार्यालय,. व्यापारिक संस्थाओं में धन, सफलता व उन्नति को बढाता है.

इस दिन भगवान धनवन्तरी समुद्र से कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिये इस दिन खास तौर से बर्तनों की खरीदारी की जाती है. इस दिन बर्तन, चांदी खरीदने से इनमें 13 गुणा वृ्द्धि होने की संभावना होती है. इसके साथ ही इस दिन सूखे धनिया के बीज खरीद कर घर में रखना भी परिवार की धन संपदा में वृ्द्धि करता है. दीपावली के दिन इन बीजों को बाग/ खेतों में लागाया जाता है ये बीज व्यक्ति की उन्नति व धन वृ्द्धि के प्रतीक होते है.

धन तेरस पूजन
धन तेरस पूजन
-------------------
धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरि की मूर्ति या चित्र साफ स्थान पर स्थापित करें और पूर्व की ओर मुखकर बैठ जाएं। उसके बाद भगवान धनवंतरि का आह्वान निम्न मंत्र से करें-

सत्यं च येन निरतं रोगं विधूतं,अन्वेषित च सविधिं आरोग्यमस्य।
गूढं निगूढं औषध्यरूपं, धनवंतरिं च सततं प्रणमामि नित्यं।।

इसके बाद पूजन स्थल पर चावल चढ़ाएं और आचमन के लिए जल छोड़े। भगवान धनवंतरि के चित्र पर गंध, अबीर, गुलाल पुष्प, रोली, आदि चढ़ाएं। चांदी के पात्र में खीर का नैवेद्य लगाएं। अब दोबारा आचमन के लिए जल छोड़ें। मुख शुद्धि के लिए पान, लौंग, सुपारी चढ़ाएं। धनवंतरि को वस्त्र (मौली) अर्पण करें। शंखपुष्पी, तुलसी, ब्राह्मी आदि पूजनीय औषधियां भी अर्पित करें।

रोगनाश की कामना के लिए इस मंत्र का जाप करें-
ऊँ रं रूद्र रोगनाशाय धन्वन्तर्ये फट्।।

अब भगवान धनवंतरि को श्री फल व दक्षिणा चढ़ाएं। पूजन के अंत में कर्पूर आरती करें।

कुबेर की पूजा:
----------------
धनतेरस पर आप धन के देवता कुबेर को प्रसन्न करके अपनी दरिद्रता दूर कर धनवान बन सकते हैं। धन के देवता कुबेर को प्रसन्न करने का यह सबसे अच्छा मौका है। यदि कुबेर आप पर प्रसन्न हो गए तो आप के जीवन में धन-वैभव की कोई कमी नहीं रहेगी। कुबेर को प्रसन्न करना बेहद आसान है। धन-सम्पति की प्राप्ति हेतु घर के पूजास्थल में एक दीया जलाएं। मंत्रो‘चार के द्वारा आप कुबेर को प्रसन्न कर सकते हैं। इसके लिए पारद कुबेर यंत्र के सामने मंत्रो‘चार करें। यह उपासना धनतेरस से लेकर दीवाली तक की जाती है। ऐसा करने से जीवन में किसी भी प्रकार का अभाव नहीं रहता, दरिद्रता का नाश होता है और व्यापार में वृद्धि होती है।
कुबेर का मंत्र:
ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्यादिपतये।
धनधान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा।।

यम की पूजा:
--------------
माना जाता है कि धनतेरस की शाम जो व्यक्ति यम के नाम पर दक्षिण दिशा में दीया जलाकर रखता है उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती है। इस मान्यता के अनुसार धनतेरस की शाम लोग आंगन में यम देवता के नाम पर दीप जलाकर रखते हैं और उनकी पूजा करके प्रार्थना करते हैं कि वह घर में प्रवेश नहीं करें और किसी को कष्ट नहीं पहुंचाएं। इस दिन लोग यम देवता के नाम पर व्रत भी रखते हैं।

दीपदान करते समय यह मंत्र पढ़ें -
मृत्युना पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यज: प्रीयतामिति।। ओम यमाय नम:।।

लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए...
-------------------------------
लक्ष्मी जी की कृपा पाने के लिए अष्टदल कमल बनाकर कुबेर, लक्ष्मी एवं गणेश जी की स्थापना कर उपासना की जाती है। इस अनुष्ठान में पांच घी के दीपक जलाकर और कमल, गुलाब आदि पुष्पों से उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजन करना लाभप्रद होता है। इसके अलावा ओम् श्रीं श्रीयै नम: का जाप करना चाहिए।

जिन जातकों को धन का अभाव हो, वे इस दिन चांदी के गणेश, लक्ष्मी या सिक्का अवश्य खरीदें तथा दीपावली के दिन उनकी पूजा करें, तो वर्ष भर धन दौलत से परिपूर्ण होता है। कुबेर यंत्र और श्री यंत्र की पूजा करना भी शुभ है। धनतेरस के दिन घर में नई चीज, खासकर चांदी बर्तन और सोना-चांदी खरीदकर लाने की पारंपरिक रिवाज है। इस दिन धन का अपव्यय नहीं किया जाता है।

इस दिन लोग व्यापार में भी उधार के लेन-देन से बचते हैं। सायंकाल महाप्रदोषकाल में यमराज की प्रसन्नता के लिए 111 दिये का दान करना श्रेष्ठ होता है। यह दीपदान वैसे तो बहते पानी में किया जाता है, लेकिन आजकल जलाभाव के कारण चारदीवारी या खाली स्थान या चबूतरे में रखकर भी दीपदान किया जा सकता है। इस दिन धन्वंतरि जयंती पर विशेष रूप से बनाए गए आसव, अर्क, शक्तिवर्धक चूर्ण, चरणामृत, च्यवनप्राश आदि इष्ट-मित्रों को प्रसाद रूप में बांटे जाते हैं।


धनतेरस की कथा

एक किवदन्ती के अनुसार एक राज्य में एक राजा था, कई वर्षों तक प्रतिक्षा करने के बाद, उसके यहां पुत्र संतान कि प्राप्ति हुई. राजा के पुत्र के बारे में किसी ज्योतिषी ने यह कहा कि, बालक का विवाह जिस दिन भी होगा, उसके चार दिन बाद ही इसकी मृ्त्यु हो जायेगी.

ज्योतिषी की यह बात सुनकर राजा को बेहद दु:ख हुआ, ओर ऎसी घटना से बचने के लिये उसने राजकुमार को ऎसी जगह पर भेज दिया, जहां आस-पास कोई स्त्री न रहती हो, एक दिन वहां से एक राजकुमारी गुजरी, राजकुमार और राजकुमारी दोनों ने एक दूसरे को देखा, दोनों एक दूसरे को देख कर मोहित हो गये, और उन्होने आपस में विवाह कर लिया.

ज्योतिषी की भविष्यवाणी के अनुसार ठीक चार दिन बाद यमदूत राजकुमार के प्राण लेने आ पहुंचें. यमदूत को देख कर राजकुमार की पत्नी विलाप करने लगी. यह देख यमदूत ने यमराज से विनती की और कहा की इसके प्राण बचाने का कोई उपाय बताईयें. इस पर यमराज ने कहा की जो प्राणी कार्तिक कृ्ष्ण पक्ष की त्रयोदशी की रात में जो प्राणी मेरा पूजन करके दीप माला से दक्षिण दिशा की ओर मुंह वाला दीपक जलायेगा, उसे कभी अकाल मृ्त्यु का भय नहीं रहेगा. तभी से इस दिन घर से बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीप जलाये जाते है.
Jai Shree Krishna

Thanks,

Regards,

कैलाश चन्द्र  लढा(भीलवाड़ा)www.sanwariya.org
sanwariyaa.blogspot.com 
Page: https://www.facebook.com/mastermindkailash

दीपावली 11 नवम्बर, 2015 दिपावली पूजन मुहूर्त

दीपावली पर ऐसे करे माँ लक्ष्मी के स्वागत की तैयारी–--------
11 नवम्बर, 2015 दिपावली पूजन मुहूर्त


दीपावली का पर्व 11 नवम्बर, 2015 काे है वैसे ताे दीपावली का पूरा दिन ही एक शुभ मुहूर्त हाेता है श्री महालक्ष्मी पूजन व दीपावली का महापर्व कार्तिक कृ्ष्ण पक्ष की अमावस्या में प्रदोष काल, स्थिर लग्न समय में मनाया जाता है. धन की देवी श्री महा लक्ष्मी जी का आशिर्वाद पाने के लिये इस दिन लक्ष्मी पूजन करना विशेष रुप से शुभ रहता है.
 वर्ष 2015 में दिपावली, 11 नवंबर, बुधवार के दिन की रहेगी. इस दिन स्वाती-विशाखा नक्षत्र है, इस दिन सौभाग्य योग तथा चन्दमा तुला राशि में संचार करेगा. दीपावली में अमावस्या तिथि, प्रदोष काल, शुभ लग्न व चौघाडिया मुहूर्त विशेष महत्व रखते है. दिपावली व्यापारियों, क्रय-विक्रय करने वालों के लिये विशेष रुप से शुभ मानी जाती है.

. प्रदोष काल मुहूर्त कब
11 नवंबर 2015, बुधवार के दिन दिल्ली तथा आसपास के इलाकों में सूर्यास्त 17:28 पर होगा. इसलिए 17:28 से 20:10 तक प्रदोष काल रहेगा. इसे प्रदोष काल का समय कहा जाता है. प्रदोष काल समय को दिपावली पूजन के लिये शुभ मुहूर्त के रुप में प्रयोग किया जाता है. प्रदोष काल में भी स्थिर लग्न समय सबसे उतम रहता है. इस दिन प्रदोष काल व स्थिर लग्न दोनों तथा इसके साथ शुभ चौघडिया भी रहने से मुहुर्त की शुभता में वृद्धि हो रही है.

प्रदोष काल का प्रयोग कैसे करें

प्रदोष काल में मंदिर में दीपदान, रंगोली और पूजा से जुडी अन्य तैयारी इस समय पर कर लेनी चाहिए तथा मिठाई वितरण का कार्य भी इसी समय पर संपन्न करना शुभ माना जाता है.

इसके अतिरिक्त द्वार पर स्वास्तिक और शुभ लाभ लिखने का कार्य इस मुहूर्त समय पर किया जा सकता है. इसके अतिरिक्त इस समय पर अपने मित्रों व परिवार के बडे सदस्यों को उपहार देकर आशिर्वाद लेना व्यक्ति के जीवन की शुभता में वृ्द्धि करता है. मुहूर्त समय में धर्मस्थलो पर दानादि करना कल्याणकारी होगा.

 निशिथ काल

निशिथ काल में स्थानीय प्रदेश समय के अनुसार इस समय में कुछ मिनट का अन्तर हो सकता है. 11 नवम्बर को 20:10 से 22:52 तक निशिथ काल रहेगा. निशिथ काल में लाभ की चौघडिया भी रहेगी, ऎसे में व्यापारियों वर्ग के लिये लक्ष्मी पूजन के लिये इस समय की विशेष शुभता रहेगी.

दिपावली पूजन में निशिथ काल का प्रयोग कैसे करें
धन लक्ष्मी का आहवाहन एवं पूजन, गल्ले की पूजा तथा हवन इत्यादि कार्य सम्पूर्ण कर लेना चाहिए. इसके अतिरिक्त समय का प्रयोग श्री महालक्ष्मी पूजन, महाकाली पूजन, लेखनी, कुबेर पूजन, अन्य मंन्त्रों का जपानुष्ठान करना चाहिए.

महानिशीथ काल

धन लक्ष्मी का आहवाहन एवं पूजन, गल्ले की पूजा तथा हवन इत्यादि कार्य सम्पूर्ण कर लेना चाहिए. इसके अतिरिक्त समय का प्रयोग श्री महालक्ष्मी पूजन, महाकाली पूजन, लेखनी, कुबेर पूजन, अन्य मंन्त्रों का जपानुष्ठान करना चाहिए.

11 नवम्बर, बुधवार 2015 के रात्रि में 22:52 से 25:34 मिनट तक महानिशीथ काल रहेगा. महानिशीथ काल में पूजा समय स्थिर लग्न या चर लग्न में कर्क लग्न भी हों, तो विशेष शुभ माना जाता है. महानिशीथ काल में सिंह लग्न एक साथ होने के कारण यह समय अधिक शुभ हो गया है. जो जन शास्त्रों के अनुसार दिपावली पूजन करना चाहते हो, उन्हें इस समयावधि को पूजा के लिये प्रयोग करना चाहिए.

महानिशीथ काल का दिपावली पूजन में प्रयोग कैसे करें

महानिशीथकाल में मुख्यतः तांत्रिक कार्य, ज्योतिषविद, वेद् आरम्भ, कर्मकाण्ड, अघोरी,यंत्र-मंत्र-तंत्र कार्य व विभिन्न शक्तियों का पूजन करते हैं एवं शक्तियों का आवाहन करना शुभ रहता है. अवधि में दीपावली पूजन के पश्चात गृह में एक चौमुखा दीपक रात भर जलता रहना चाहिए. यह दीपक लक्ष्मी एवं सौभाग्य में वृद्धि का प्रतीक माना जाता है.


 घर में कुछ ऐसी तैयारियां हैं जो दीपावली से पूर्व की जाती हैं जिससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। आप भी शुभ दीवाली मनाना चाहते हैं तो यूं करें मां लक्ष्मी के स्वागत की तैयारी -

- दीपावली की साफ-सफाई करते समय जल को व्यर्थ न बहाएं क्योंकि जल लक्ष्मी का रूप हाेता है इसलिए पानी काे गंदा करना या बेमतलब बहाना इसका सीधा अर्थ लक्ष्मी काे ठाेकर मारना है इसलिए जहां भी पानी टपकता देखें उसे यथासंभव बंद करवाएं आपकाे धन लाभ हाेगा।

- दीपावली से कुछ दिन पूर्व घर की दहलीज में चांदी की तार अवश्य डलवाएं। यह आपकाे सफलता की आेर अग्रसर करेगी।

- वास्तु सिद्धांत के अनुसार दीपावली पर अपने घर की 27 चीजाें का स्थान परिवर्तन अवश्य करें। इसका उद्देश्य आपके जीवन में आई हुई रूकावटाें काे दूर करना है आैर कमाल की बात है कि हमारे नक्षत्राें की गिनती भी 27 ही हाेती है। यदि आप घर के बर्तन काे उठाकर दूसरी जगह पर रखते हैे ताे उसे भी स्थान परिवर्तन ही माना जाता है। इस तरह 27 वस्तुआें का स्थानातरण करके अपने रूके हुए जीवन काे प्रगतिशील बनाया जा सकता है।

- वास्तु के हिसाब से घर में कम से कम 3 दिन की सफाई जरूरी है एक दिन दीपावली से पहले, दीपावली के दिन तथा काली चाैदस यानि दीपावली के दूसरे दिन। सफाई करते समय सेंधा नमक पानी में डाल कर पोछा लगाएं तथा घर के प्रत्येक काेने में नमक मिले पानी से साफ-सफाई करें ताकि घर में आने वाली नकारात्मक ऊर्जा काे खत्म किया जा सकें।

- घर के मुुख्य प्रवेश द्वार पर लाल रंग के सिंदूर से स्वास्तिक का चिन्ह आगे व पीछे दाेनाें तरफ बनाएं ताकि आने आैर जाने वाले दाेनाें काे गणेश भगवान जी का आशीर्वाद मिले। सुख एवं समृद्धि का प्रवेश हाे एवं दुख आैर दरिद्रता घर से बाहर प्रस्थान करें।

- रंग-बिरंगी रंगाेली से घर को सजाने के लिए पहले ही रंग बना कर रख लें और उन्हें अच्छी धूप दिखाएं। रंगोली से मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए उनके चरणाें का स्वरूप इस तरह बनाएं कि वाे घर में आ रहे हाें।

- आम के पत्ताें का बंधन बना कर मुख्य द्वार पर लगाएं।

- घर के उत्तर तथा पूर्व की दिशा काे गंगा जल डालकर शुद्ध करें। गणेश जीे का श्री स्वरूप माता लक्ष्मी के दाहिनें तरफ रखें। दाेनाें स्वरूप बैठने की मुद्रा में हाेने चाहिए।

- विद्युतीय प्रकाश (electronics lights) के स्थान पर प्राकृतिक राेशनी उपयाेग करें। यह वातावरण काे भी स्वच्छ रखेगी तथा कम खर्चे में आपके घर की शाेभा भी बढ़ाएगी। शास्त्रों में दीवाली के शुभ अवसर पर घी के दीए जलाने का वर्णन किया गया है। यदि आपकी सामर्थ्य न हो तो तेल के दीए जलाना भी लाभकारी एवं शुभ होता है। घर के बाहर तथा घर के भीतर चार काेनाें वाला दीया अवश्य जगाएं। राेशनी की ये चार लाै माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, कुबेर देवता एवं इन्द्र देवता का प्रतीक मानी गई है।

- दीपावली के दिन पीपल का पेड़़ (घर काे छाेड़ कर कहीं आेर) लगाने से साै गाय दान करने के बराबर का पुण्य प्राप्त होता है तथा इससे वातावरण भी स्वच्छ हाेता है।

उपर्युक्त लिखे वास्तु ज्याेतिष आधारित तरीकाें से दीपावली के इस पावन पर्व का स्वागत कीजिए तथा बड़े प्रेम एवं श्रद्धा भाव से इस पर्व काे सबके साथ मिल-बांट कर मनाएं। पुराने गिले-शिकवाें काे भूले आैर कुछ समय भगवान की पूजा-अर्चना एवं ध्यान में गुजारें। फिर देखिएगा कैसे आपका जीवन नई उमंगाें एवं खुशियाें से भर जाएगा आैर हाे जाएगा आपका सच्चा भाग्य-परिवर्तन।
यह आपको कैसा लगा अबश्य बताएं और अपने परिचित बंधुओं ,मित्रों को शेयर करे



Jai Shree Krishna

Thanks,

Regards,


कैलाश चन्द्र  लढा(भीलवाड़ा)www.sanwariya.org
sanwariyaa.blogspot.com 
Page: https://www.facebook.com/mastermindkailash

रविवार, 4 अक्तूबर 2015

नीरजा भनोट के बलिदान

नीरजा भनोट के बलिदान दिवस पर उनको कोटि कोटि नमन

एक थी नीरजा
5 सितम्बर 1986 को आधुनिक भारत की एक विरांगना जिसने इस्लामिक आतंकियों से लगभग 400 यात्रियों को जान बचाते हुए अपना जीवन बलिदान कर दिया। भारत के कितने नवयुवक और नवयुवतियां उसका नाम जानते है।
कैटरिना कैफ, करीना कपूर, प्रियंका चैपड़ा, दीपिका पादुकोड़, विद्याबालन और अब तो सनी लियोन जैसा बनने की होड़ लगाने वाली युवती क्या नीरजा भनोत का नाम जानती है। नहीं सुना न ये नाम। मैं बताता हूँ इस महान विरांगना के बारे में। 7 सितम्बर 1964 को चंड़ीगढ़ के हरीश भनोत जी के यहाँ जब एक
बच्ची का जन्म हुआ था तो किसी ने भी नहीं सोचा था कि भारत का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान इस बच्ची को मिलेगा। बचपन से ही इस बच्ची को वायुयान में बैठने और आकाश में उड़ने की प्रबल इच्छा थी।
नीरजा ने अपनी वो इच्छा एयर लाइन्स पैन एम ज्वाइन करके पूरी की। 16 जनवरी 1986 को नीरजा को आकाश छूने वाली इच्छा को वास्तव में पंख लग गये थे। नीरजा पैन एम एयरलाईन में बतौर एयर होस्टेज का काम करने लगी। 5 सितम्बर 1986 की वो घड़ी आ गयी थी जहाँ नीरजा के जीवन की असली परीक्षा की बारी थी। पैन एम 73 विमान करांची, पाकिस्तान के एयरपोर्ट पर अपने पायलेट का इंतजार कर रहा था। विमान में लगभग 400 यात्री बैठे हुये थे। अचानक 4 आतंकवादियों ने पूरे विमान को गन प्वांइट पर ले लिया। उन्होंने पाकिस्तानी सरकार पर दबाव बनाया कि वो जल्द में जल्द विमान में पायलट को भेजे। किन्तु पाकिस्तानी सरकार ने मना कर दिया। तब आतंकियांे ने नीरजा और उसकी सहयोगियों को बुलाया कि वो सभी यात्रियों के पासपोर्ट एकत्रित करे ताकि वो किसी अमेरिकन नागरिक को मारकर पाकिस्तान पर दबाव बना सके। नीरजा ने सभी यात्रियों के पासपोर्ट एकत्रित किये और विमान में बैठे 5 अमेरिकी यात्रियों के पासपोर्ट छुपाकर बाकी सभी आतंकियों को सौंप दिये। उसके बाद आतंकियों ने एक ब्रिटिश को विमान के गेट पर लाकर पाकिस्तानी सरकार को धमकी दी कि यदि पायलट नहीं भेजे तो वह उसको मार देगे। किन्तु नीरजा ने उस आतंकी से बात करके उस ब्रिटिश नागरिक को भी बचा लिया। धीरे-धीरे 16 घंटे बीत गये। पाकिस्तान सरकार और आतंकियों के बीच बात का कोई नतीजा नहीं निकला। अचानक नीरजा को ध्यान आया कि प्लेन में फ्यूल किसी भी समय समाप्त हो सकता है और उसके बाद अंधेरा हो जायेगा। जल्दी उसने अपनी सहपरिचायिकाओं को यात्रियों को खाना बांटने के लिए कहा और साथ ही विमान के आपातकालीन द्वारों के बारे में समझाने वाला कार्ड भी देने को कहा। नीरजा को पता लग चुका था कि आतंकवादी सभी यात्रियों को मारने की सोच चुके हैं।
उसने सर्वप्रथम खाने के पैकेट आतंकियों को ही दिये क्योंकि उसका सोचना था कि भूख से पेट भरने के बाद शायद वो शांत दिमाग से बात करे। इसी बीच सभी यात्रियों ने आपातकालीन द्वारों की पहचान कर ली। नीरजा ने जैसा सोचा था वही हुआ। प्लेन का फ्यूल समाप्त हो गया और चारो ओर अंधेरा छा गया। नीरजा तो इसी समय का इंतजार कर रही थी। तुरन्त उसने विमान के सारे आपातकालीन द्वार खोल दिये। योजना के अनुरूप ही यात्री तुरन्त उन द्वारों के नीचे कूदने लगे। वहीं आतंकियों ने भी अंधेरे में फायरिंग शुरू कर दी। किन्तु नीरजा ने अपने साहस से लगभग सभी यात्रियों को बचा लिया था। कुछ घायल अवश्य हो गये थे किन्तु ठीक थे अब विमान से भागने की बारी नीरजा की थी किन्तु तभी उसे बच्चों के रोने की आवाज सुनाई दी। दूसरी ओर पाकिस्तानी सेना के कमांडो भी विमान में आ चुके थे। उन्होंने तीन आतंकियों को मार गिराया। इधर नीरजा उन तीन बच्चों को खोज चुकी थी और उन्हें लेकर विमान के आपातकालीन द्वार की ओर बढ़ने लगी। कि अचानक बचा हुआ चैथा आतंकवादी उसके सामने आ खड़ा हुआ। नीरजा ने बच्चों को आपातकालीन द्वार की ओर धकेल दिया और स्वयं उस आतंकी से भिड़ गई। कहाँ वो दुर्दांत आतंकवादी और कहाँ वो 23 वर्ष की पतली-दुबली लड़की। आतंकी ने कई गोलियां उसके सीने में उतार डाली। नीरजा ने अपना बलिदान दे दिया। उस चैथे आतंकी को भी पाकिस्तानी कमांडों ने मार गिराया किन्तु वो नीरजा को न बचा सके। नीरजा भी अगर चाहती तो वो आपातकालीन द्वार से सबसे पहले भाग सकती थी। किन्तु वो भारत माता की सच्ची बेटी थी। उसने सबसे पहले सारा विमान खाली कराया और स्वयं को उन दुर्दांत राक्षसों के हाथों सौंप दिया। नीरजा के बलिदान के बाद भारत सरकार ने नीरजा को सर्वोच्च नागरिक सम्मान अशोक चक्र प्रदान किया तो वहीं पाकिस्तान की सरकार ने भी नीरजा को तमगा-ए-इन्सानियत प्रदान किया। नीरजा वास्तव में स्वतंत्र भारत की महानतम विरांगना है। ऐसी विरागना को मैं कोटि-कोटि नमन करता हूँ। (2004 में नीरजा भनोत पर टिकट भी जारी हो चुका है।
कृपया इस मेसेज को अपने मित्रों में बांटें। ये आवश्यक है कि हम निस्वार्थ वीरता को पहचानें, वीरों का नमन करें, उनसे प्रेरणा लें और भारतीय होने पर गर्व महसूस करें।

नीब करौली बाबा - कैंची धाम मंदिर

नीब करौली बाबा बनने से पहले वो लक्ष्मी नारायण शर्मा हुआ करते थे. नीब करौली बाबा का जन्म यू.पी.के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में एक ब्राह्मण जमींदार घराने में हुआ था साल 1964 की बात है जब आगरा के पास फिरोजाबाद के गांव अकबरपुर में जन्मे लक्ष्मी नारायण शर्मा नीब करौली गांव में तपस्या करने पहुंचे थे.

यहीं पर उन्होंने कैंची धाम मंदिर की स्थापना की. आज भी हर साल 15 जून यानि स्थापना के अवसर पर मेला आयोजित किया जाता है. मेले में लाखों की संख्या में भक्त पहुंचते हैं.

नैनीताल में कैंचीधाम आश्रम के अलावा देश भर में नीब करौली बाबा के करीब 48 मंदिर बनवाए गए हैं. नैनीताल, ऋषिकेश, गुजरात, वृन्दावन, लखनऊ, शिमला और दिल्ली में भी बाबा का मंदिर है.

ये तो हुई देश की बात अब जरा विदेश के बारे में जान लीजिए. अमेरिका और जर्मनी समेत कई जगह बाबा के मंदिर बनवाए गए हैं.

नीब करौली बाबा का नाम सुना है आपने. जिन्होंने इनका नाम नहीं सुना वो ये सुनकर जरूर हैरान होंगे कि नीब करौली बाबा ने दुनिया को बेहतरीन आई फोन देने वाली कंपनी एपल के स्टीव जॉब्स और फेसबुक बनाने वाले मार्क जुकरबर्ग को आशीर्वाद दिया था. दावा ये है कि नीब करौली बाबा के आशीर्वाद से दोनों की दुनिया बदल गई थी. और इस बात का जिक्र जुकरबर्ग ने खुद पीएम मोदी जी से किया था.

उत्तराखंड के नैनीताल से करीब 18 किलोमीटर दूर है बाबा नीब करौली का आश्रम. देव भूमि कहा जाने वाला उत्तराखंड मंदिरों और आश्रमों से भरा पड़ा है लेकिन नीब करौली बाबा का आश्रम कुछ ऐसी कहानियों की वजह से चर्चा में आ गया है जो शायद पहले नहीं सुनी गई थीं. ऐसी ही एक कहानी स्टीव जॉब्स की है.

48 लाख करोड़ की दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी एपल के फाउंडर स्टीव जॉब्स नीब करौली बाबा से आशीर्वाद लेने उनके आश्रम कैंचीधाम आए थे. और स्टीव जॉब्स की सलाह पर दुनिया को फेसबुक से जोड़ने वाले मार्क जुकरबर्ग ने भी यहां माथा टेका था. मार्क जुकबर्ग जब अमेरिका से करीब साढ़े आठ हजार किमी का सफर करके उत्तराखंड के कैंचीधाम पहुंचे थे तब उनका फेसबुक 17.44 लाख करोड़ का नहीं था और जुकरबर्ग संघर्ष के दौर से गुजर रहे थे. ये बात दुनिया के सामने तब आई जब प्रधानमंत्री मोदी फेसबुक के दफ्तर पहुंचे थे और मार्क ने खुद ये बात मोदी को बताई थी.

जुकरबर्ग ने अपनी बातचीत में मंदिर का नाम नहीं बताया था लेकिन ये नैनीताल के पास कैंचीधाम का आश्रम था जहां स्टीव के कहने पर जुकरबर्ग पहुंचे थे और इस आश्रम में दो दिन बिताए थे.

स्टीव जॉब्स साल 1974 में इस आश्रम में आए थे चौंकाने वाली बात ये है कि स्टीव जॉब्स की नीब करौली बाबा से मुलाकात नहीं हो पाई थी क्योंकि 11 सितंबर 1973 को ही उनकी मौत हो गई थी. लेकिन दावा है कि इस आश्रम से लौटन के बाद स्टीव जॉब्स की दुनिया बदल गई थी.

बेरोजगार युवा स्टीव जॉब्स अपने मित्र डैन कोटके के साथ बाबा नीब करोरी के दर्शन करने आए थे. नीब करौली बाबा को मानने वालों में मशहूर हॉलीवुड अभिनेत्री जुलिया रॉबर्ट्स का नाम भी शामिल है. जुलिया ना तो आश्रम आईं और ना ही बाबा से मिली वो तो बस एक फोटो देखकर उनकी भक्त हो गई थीं.

जुलिया रॉबर्ट्स की तरह ही एक नाम है अमेरिका के कृष्णा दास का जो कभी Jeffrey Kagel हुआ करते थे. 1970 में कृष्णा दास डिप्रेशन और ड्रग्स के शिकार हो चुके थे वो अपना रॉक बैंड छोड़कर न्यूयॉर्क से भारत आ गए. यहां उनकी मुलाकात नीब करौली बाबा से हुई और फिर दुनिया बदल गई. वो कीर्तन गाने वालों में बड़ा नाम बन चुके हैं ग्रैमी अवार्ड्स के लिए नॉमिनेट हुए थे. 1996 से लेकर अब तक उनके 8 एलबम रिलीज हो चुके हैं.

आखिर कौन हैं नीब करौली वाले बाबा जिनके आशीर्वाद और आश्रम के चर्चे सिर्फ भारत में नहीं बल्कि अमेरिका और जर्मनी तक फैले हुए हैं.

करीब 42 साल पहले नीब करौली बाबा ने दुनिया को अलविदा कह दिया था लेकिन उनके भक्तों की संख्या में कभी कमी नहीं हुई. नीब करौली बाबा को हनुमान जी का अवतार बताया जाता है. उनकी वेबसाइट कलर और ब्लैक एंड व्हाइट दोनों मिलाकर करीब 1300 तस्वीरें मौजूद हैं और लगभग हर तस्वीर नीब करौली बाबा कंबल ओढ़े हुए ही नजर आते हैं. कहा तो ये जाता है कि 17 साल की उम्र में ही बाबा को ज्ञान प्राप्त हो गया था.

कंबल के पीछे की क्या कहानी ये तो नहीं पता लेकिन भक्त आश्रम में बाबा को भेंट में कंबल ही चढ़ाते थे.


नीब करौली बाबा के वीडियो बहुत ज्यादा नहीं हैं लेकिन एक ये तस्वीर सामने आई जिसमें वो अपने शिष्य को थपथपाते हुए राम राम का उच्चारण करते हुए आशीर्वाद दे रहे हैं.

नीब करौली बाबा और नीब करौरी दोनों ही नाम से बाबा को जाना जाता है. कहा जाता है कि साल 1930 में बाबा नीब करौरी नाम के गांव में ठहरे हुए थे इसके बाद ही उन्हें नीब करौरी बाबा कहा जाने लगा था. उन्हें उनके भक्त महाराजा जी के नाम से भी बुलाते हैं. उत्तर भारत में नीब करौली बाबा चमत्कारी बाबा के नाम से भी मशहूर हैं.

और उनके एक नहीं चमत्कार के कई किस्से मौजूद हैं. जैसे एक ही वक्त पर दो जगह मौजूद होना. पानी से पूरे पहाड़ पर घी के दिए जलवा देना. चमत्कार के एक ऐसे ही किस्से का जिक्र वेबसाइट पर किया गया है.

बहुत साल पहले जब नीब करौली बाबा 20-22 साल के थे. वो साधु के भेष में एक ट्रेन में चढ़ गए. तब देश आजाद नहीं हुआ था. उन्होंने कई दिन से खाना नहीं खाया था. जब ट्रेन में टीटीई ने बाबा से टिकट मांगा तो पता चला कि बाबा बिना टिकट के फर्स्ट क्लास कोच में सफर कर रहे हैं. उन्हें ट्रेन से उतार दिया गया. ट्रेन नीब करौली गांव के पास ही रुकी जहां बाबा रहते थे. दावा कुछ ऐसा है कि बाबा को ट्रेन से उतारने के बाद लाख कोशिशों के बाद भी ट्रेन दोबारा नहीं चल पाई. तब तक जब तक नीब करौरी बाबा को खाना खिलाकर उन्हें वापस ट्रेन में नहीं बिठाया गया.

नीब करौली बाबा के चमत्कारों पर मिरैकिल ऑफ़ लाइफ, दा डिवाइन रिएलिटी, अनन्त कथामृत जैसी किताबें भी लिखी जा चुकी हैं. नीब करौली बाबा के चमत्कारों की कहानी अमेरिका के बाबा राम दास सुनाते हैं जो कभी Richard Alpert हुआ करते थे. रिचर्ड भारत आए और नीब करौली बाबा से मिले थे और करौली बाबा को अपना गुरु बना लिया. नीब करौली बाबा ने ही रिचर्ड को राम दास नाम दिया मतलब भगवान राम का सेवक.चौंकाने वाली बात ये है कि पहली मुलाकात में रिचर्ड नीब करौली बाबा के पैर नहीं छूना चाहते थे लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि उनकी सोच भी बदल गई औऱ नाम भी.
हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट भी बाबा के परम भक्तों में से एक हैं. जूलिया का कहना है की हिन्दू धर्म में ऐसा कुछ तो है जो में उसकी मुरीद भी होगी और आज हिन्दू धर्म का पालन भी कर रहीं हूँ। कैथलिक माँ और बैपटिष्ट पिता की संतान जूलिया रॉबर्ट कहती है की पुरे परिवार के साथ मंदिर जाती है ,मंत्र पढ़ती है ,प्रार्थान करती है।
बाबाके बड़ो भक्तों में देश के बड़े राजनयिकों जवाहरलाल नेहरूं + हिमाचल प्रदेश के पूर्व राजयपाल स्व, राजा भद्री + केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद + उत्तराखंड सरकार के सचिव मंजुल कुमार जोशी + गुरु रामदास के नाम से प्रसिद्द हुवे हार्वड विश्व विद्यालय के बोस्टन के डॉ रिचार्ड एल्पर्ट [ बी हियर नाउ के लेखक ] + योगी भगवान दास + संगीतकार जय उत्त्पल + कृष्णा दास + लामा सुर्यदास + मानवधिकारवादी डॉ लेरी ब्रिलिएंट + आदि बाबा के भक्त है।

आज भी नीब करौली बाबा के आश्रम में विदेशी सैलानियों का तांता लगा रहता है. हस साल अमेरिका, फ्रांस, लंदन जैसे देशों से भक्त यहां पहुंचते हैं.

copy disabled

function disabled