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सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

Physostigma Venenosum 30 (जिसे 'Calabar Bean' भी कहा जाता है) होम्योपैथी में मुख्य रूप से आँखों की रोशनी, तंत्रिका तंत्र (Nervous System) और मांसपेशियों की कमजोरी के लिए एक अत्यंत प्रभावी औषधि है।

Physostigma Venenosum 30 (जिसे 'Calabar Bean' भी कहा जाता है) होम्योपैथी में मुख्य रूप से आँखों की रोशनी, तंत्रिका तंत्र (Nervous System) और मांसपेशियों की कमजोरी के लिए एक अत्यंत प्रभावी औषधि है।
यहाँ इसके उपयोग, लक्षण और खुराक की विस्तृत जानकारी दी गई है:

Physostigma 30 के मुख्य उपयोग (Key Benefits)
1. आँखों के लिए (Eye Symptoms - प्रमुख उपयोग)
Physostigma को अक्सर "आँखों की दवा" माना जाता है। यह निम्नलिखित स्थितियों में काम आती है:
 * Myopia (निकट दृष्टि दोष): यदि पास की चीजें देखने में दिक्कत हो और चश्मे का नंबर तेजी से बढ़ रहा हो।
 * आँखों में तनाव (Eye Strain): ज्यादा पढ़ने, सिलाई करने या कंप्यूटर/मोबाइल के उपयोग से आँखों में होने वाला दर्द।
 * Glaucoma (काला मोतिया): आँखों के अंदर बढ़े हुए दबाव को कम करने में सहायक।
 * Night Blindness: रात में कम दिखाई देना या धुंधलापन।
2. तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियां (Muscles & Nerves)
 * मांसपेशियों में फड़कन (Twitching): चेहरे की मांसपेशियों या पलकों का बार-बार फड़कना।
 * कमजोरी: शरीर में भारीपन और लकवा जैसी कमजोरी महसूस होना।
3. अन्य लक्षण
 * तेज सिरदर्द जो आँखों के तनाव से जुड़ा हो।
 * रीढ़ की हड्डी (Spine) में संवेदनशीलता और दर्द।
खुराक (Dosage)
Physostigma 30 की सामान्य खुराक इस प्रकार है:
 * तरल (Liquid): 2 से 3 बूंदें सीधे जीभ पर या एक चम्मच पानी में मिलाकर दिन में 3 बार लें।
 * गोलियां (Globules): 4 गोलियां दिन में 3 बार चूसें।
> ⚠️ नोट: बेहतर परिणाम के लिए दवा लेने से 15-20 मिनट पहले और बाद में कुछ न खाएं।
सोशल मीडिया पोस्ट कंटेंट (Professional Layout)
शीर्षक: क्या कंप्यूटर और मोबाइल के इस्तेमाल से आपकी आँखें थक जाती हैं? 👀💻
कंटेंट: आज के डिजिटल युग में 'Eye Strain' एक आम समस्या है। Physostigma 30 होम्योपैथी की एक ऐसी औषधि है जो न केवल आँखों की थकान को दूर करती है, बल्कि कमजोर होती दृष्टि (Weak Eyesight) और आँखों की मांसपेशियों की फड़कन में भी राहत देती है। अपनी आँखों को दें कुदरती सुरक्षा।

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फुर्सा साँप (Saw-scaled Viper) Member of BIG-4 venomous snakes found in India...!

🐍 फुर्सा साँप (Saw-scaled Viper) Member of BIG-4 venomous snakes found in India...!
वैज्ञानिक नाम: Echis carinatus
🔹 पहचान (Identification)
फुर्सा भारत के सबसे छोटे लेकिन अत्यंत खतरनाक विषैले साँपों में गिना जाता है। लंबाई: लगभग 30–60 सेमी, शरीर मोटा और छोटा, रंग हल्का भूरा, रेतीला या स्लेटी, शरीर पर ज़िग-ज़ैग या चेन जैसी सफ़ेद आकृतियाँ, आँखें बड़ी, पुतली लंबवत, शरीर की शल्क (scales) आरी के दाँत जैसे खुरदरे होते हैं।

👉 इन्हीं खुरदरे शल्कों को रगड़कर यह “सर्र-सर्र” जैसी चेतावनी ध्वनि निकालता है।

🔹 वितरण एवं आवास (Distribution & Habitat)
फुर्सा मुख्यतः भारत (विशेषकर शुष्क व अर्ध-शुष्क क्षेत्र) में पाया जाता है। वैसे यह पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, मध्य पूर्व व अफ्रीका के कुछ भागो में भी पाया जाता है। यह अधिकतर रेगिस्तानी क्षेत्र, पथरीली भूमि, खेत, झाड़ियाँ, मानव बस्तियों के आसपास पाया जाता है। 

👉 यह अक्सर रात में सक्रिय रहता है (Nocturnal)

🔹 स्वभाव (Behaviour)
यह अत्यंत चिड़चिड़ा और रक्षात्मक होता है। बिना चेतावनी भी हमला कर सकता है। अक्सर ज़मीन पर कुंडली मारे रहता है। खतरा महसूस होने पर S-आकार में कुंडली बनाकर आवाज़ करता है।

🔹 विष (Venom)
फुर्सा का विष हेमोटॉक्सिक होता है। यह विष रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया को बिगाड़ देता है। आंतरिक रक्तस्राव कराता है। ऊतकों (tissues) को नुकसान पहुँचाता है।

⚠️ फुर्सा भारत में सर्पदंश से होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण है।

लक्षण: तेज़ दर्द व सूजन, रक्तस्राव (नाक, मसूड़े, घाव से)उल्टी, चक्कर
और गंभीर मामलों में किडनी फेल होना।

🔹 आहार (Diet)
छोटे कृंतक (चूहे)
छिपकलियाँ
मेंढक
छोटे पक्षी

👉 यह पारिस्थितिकी तंत्र में चूहों की संख्या नियंत्रित करने में सहायक है।

🔹 प्रजनन (Reproduction)
मादा फुर्सा जीवित बच्चे जनती है (Viviparous), एक बार में लगभग 5–15 बच्चे हो सकते है। नवजात शिशु भी जन्म से ही विषैले होते हैं।

🔹 रोचक तथ्य: यह आकार में छोटा, लेकिन इसका विष अत्यंत शक्तिशाली होता है । इसकी “सर्र-सर्र” आवाज़ ही इसका सबसे बड़ा पहचान चिन्ह है। कई बार लोग इसे छोटा समझकर जोखिम उठा लेते हैं। उन्हें ऐसा करने से बचना चाहिए। 
Tags: #snake #viviparous #Echiscarinatus
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मंगलवार, 27 जनवरी 2026

WHITE DISHCHARGE ♦️श्वेत प्रदर (सफ़ेद पानी)♦️

 WHITE DISHCHARGE 

♦️श्वेत प्रदर (सफ़ेद पानी)♦️

ल्यूकोरिया या प्रदर रोग महिलाओं में होने वाला एक गंभीर रोग है. इस रोग में महिला की योनी से सफ़ेद रंग का स्राव निकलता रहता है जो महिला को शारीरिक एवं मानसिक रूप से कमजोर बना देता है..

सफ़ेद पानी की समस्या से पीड़ित महिला गर्भ धारण करने में सक्षम नहीं हो पाती एवं साथ ही उसके शरीर से धातुओं का क्षय होता रहता है जो उसे शारीरिक रूप से बेहद कमजोर बना देतें है..

♦️आयुर्वेदानुसार श्वेत प्रदर ♦️

संहिताओं में इसका वर्णन श्लेष्मिक प्रदर या श्लेष्मजा योनी नाम से मिलता है. सामान्य अवस्था में महिला के प्रजनन अंगो एवं भग प्रदेश आदि से प्राय: सफ़ेद रंग का एवं गंधहिन पानी जैसा स्राव निकलता रहता है, जो उस भाग को गीला बनाये रखता है.. इस स्राव की मात्रा उतनी ही होती है जितने में वह अंग गीला रहे | मानसिक विकार जैसे काम, क्रोध एवं वासना आदि के कारण यह मात्रा बढ़ भी जाती जो एक समय पश्चात सामान्य हो जाती है.. कभी  कभार दुर्बलता, कुपोषण, आहार विहार एवं व्याधियों के कारण यह मात्रा अधिक हो जाती है जो लम्बे समय तक परेशान करती है | इसी अवस्था को श्वेत प्रदर कहते है..

आयुर्वेद चिकत्सानुसार महिलाओं में सफ़ेद पानी की समस्या को 5 प्रकार की माना है..

भगज श्वेत प्रदर
योनिज
ग्रीवीय एवं
ग्रभास्यज श्वेत प्रदर

श्वेत प्रदर (सफ़ेद पानी) के कारण

पांडू रोग / खून की कमी

मानसिक विकार जैसे क्रोध, भय एवं चिंता आदि 

अधिक सम्भोग

अपच एवं अजीर्ण 

कब्ज

मूत्राशय में सुजन

अतृप्त कामवासन

भावनात्मक कष्ट आदि

श्वेत प्रदर की पहचान या लक्षण 
 
योनिमार्ग से सफ़ेद जलीय चिपचिपे पदार्थ का बाहर निकलना.

योनी में खुजली एवं जलन.
जांघों में भारीपन 
शारीरिक दुर्बलता 
आलस्य 
भोजन का ठीक प्रकार से पाचन न होना 
कब्ज हो जाना 
सिर दर्द 
चक्कर आना 
भोजन में अरुचि होना आदि लक्षण सफ़ेद पानी की समस्या होने पर दिखाई देते है 

♦️श्वेत प्रदर के कारगर घरेलु इलाज.♦️

श्वेत प्रदर नाशक त्रिफला योग
 
♦️सामग्री ♦️

आंवले का बक्कल, हरड का बक्कल, एवं बहेड़ा इन तीनो को 1  -1 तोला(10 ग्राम) एवं जल आधा kg

♦️विधि ♦️

सबसे पहले इन तीनो द्रव्यों को कूटपीस कर दरदरा कर लें | अब रात्रि के समय इन्हें एक मिट्टी के बर्तन में रखकर ऊपर से पानी डाल दें..रात्रि भर अच्छी तरह भीगने के बाद सुबह इसे आंच पर चढ़ा कर काढ़ा तैयार कर लें यह योग सभी प्रकार के प्रदर रोग में उपयोगी है..

इसके उपयोग से पुराने से पुराना प्रदर रोग ठीक हो जाता है | साथ ही वेदना आदि में भी आराम मिलता है..

♦️उपयोग की विधि ♦️

इस काढ़े का उपयोग योनी में एनिमा देने के लिए किया जाता है | योनी में ड्यूस एवं पिच्चु को धारण करना चाहिए एवं साथ ही योनिमार्ग को इस काढ़े से धोना चाहिए | लगातार कुछ दिनों के प्रयोग से शीघ्र ही श्वेत प्रदर की समस्या नष्ट हो जाती है |

आयुर्वेद में त्रिफला क्वाथ से योनी प्रक्षालन को उपयुक्त चिकित्सा माना गया है..


गुलर योग

सामग्री 
गुलर के पक्के फल का 50 ग्राम चूर्ण और 100 ग्राम मिश्री |

♦️विधि ♦️

गुलर के फलों को को टुकड़े  टुकड़े करके सुखा लें | जब एक दम सुख जाए तब कूट पीसकर कर कपड़छन चूर्ण कर लें | इस चूर्ण में मिश्री मिलाकर अच्छी तरह ढक कर रखें |

♦️उपयोग एवं गुण ♦️

10 ग्राम तक की मात्रा में इस चूर्ण को खाकर ऊपर से गाय या बकरी का दूध ग्रहण करना चाहिए | अगर रक्त प्रदर की समस्या हो तो अशोकारिष्ट के साथ सेवन करना चाहिए | हमेशा ठन्डे जल के साथ ही इसका सेवन करना चाहिए | दिन में दो बार सुबह एवं शाम लिया जा सकता है | इसके उपयोग से सभी प्रकार के प्रदर रोग ठीक हो जाता है |

♦️श्वेत प्रदर (सफ़ेद पानी) के घरेलु नुस्खें..♦️

मुलहठी एवं चीनी 10 ग्राम एवं 20 ग्राम प्रत्येक को दोनों को पीसकर चूर्ण बना लें | आधा चम्मच चूर्ण सुबह और आधा चम्मच शाम को दूध के साथ सेवन करें.

सूखे हुए चमेली के पते 4 ग्राम और सफ़ेद फिटकरी 2 ग्राम दोनों को खूब महीन पिसलें | इसमें से 2 ग्राम चूर्ण शक्कर में मिलाकर रात के समय फांककर ऊपर से दूध पी लें | इसके प्रयोग से श्वेत प्रदर ठीक हो जाता है |

पके हुए केले के अन्दर फिटकरी का चूर्ण भरकर इसे दोपहर के समय खूब चबा चबा कर खाएं | इसके सेवन से सफ़ेद पानी की समस्या से राहत मिलती है |

पेट पर ठन्डे पानी का कपडा रोज 10 मिनट रखना चाहिए |

अशोक के पेड़ की छाल को 50 ग्राम की मात्रा में लें | इसे 1 किलो पानी में पकाएं जब पानी आधा रहे तब इसे आंच से निचे उतार कर छान कर दूध में मिलाकर सेवन करना श्वेत प्रदर के रोग में फायदेमंद रहता है |

अनार के छिलकों को ठन्डे पानी के साथ सेवन करने से फायदा मिलता है |

मूली का सेवन भी फायदेमंद रहता है | मूली के पतों का रस निकाल कर सेवन करने से भी लाभ मिलता है |

गुलाब के फुल की पत्तियों को मिश्री के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है |



Cassia sop Q एक प्रभावशाली होम्योपैथिक मदर टिंचर है,

 Cassia sop Q एक प्रभावशाली होम्योपैथिक मदर टिंचर है, 



जो Cassia sophera पौधे की प्राकृतिक पत्तियों से तैयार की जाती है। यह दवा विशेष रूप से खांसी, दमा, ब्रोंकाइटिस और सांस की तकलीफ में उपयोगी मानी जाती है। जिन लोगों को बार-बार सीने में जकड़न, सांस फूलना या एलर्जी के कारण श्वसन समस्या रहती है, उनके लिए Cassia sop Q सहायक हो सकती है। यह फेफड़ों को मजबूत करने और श्वसन तंत्र के संतुलन में मदद करती है। प्राकृतिक और हर्बल गुणों से भरपूर यह औषधि होम्योपैथी में विश्वसनीय स्थान रखती है। दवा का प्रयोग हमेशा योग्य चिकित्सक की सलाह से करना चाहिए।
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सुहागा वो खनिज जो हर घर में दवा बनकर छिपा है!

 सुहागा वो खनिज जो हर घर में दवा बनकर छिपा है! 🌸

कभी सोचा है जो “सुहागा” आपकी रसोई में रखा है — वो सिर्फ खाना पकाने के काम नहीं आता, बल्कि एक बहुमूल्य आयुर्वेदिक औषधि भी है! 🤔
हाँ, वही सुहागा जिसे संस्कृत में “टनक” कहा गया है — और जो तिब्बत व फारस की झीलों से निकलकर हमारे शरीर को भीतर से शुद्ध करता है। 🌊💎

आयुर्वेद में इसे बोरेक्स या टंकण भस्म कहा गया है — और यह शरीर, त्वचा, बाल, हृदय, यहाँ तक कि महिला स्वास्थ्य के लिए भी अमृत समान माना गया है! 💫

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🌿 सुहागा के मुख्य लाभ (Amazing Benefits)

🦵 1. जोड़ों के दर्द का रामबाण इलाज

सुहागा में मौजूद सूजनरोधी गुण (Anti-inflammatory properties) शरीर की सूजन, दर्द और जकड़न को कम करते हैं।
👉 गठिया या पुराने दर्द में इसे लेने से आराम मिलता है।

❄️ 2. बुखार में Cooling Effect

सुहागा शरीर को ठंडक देता है और बुखार में राहत पहुंचाता है।
💧 इसे पानी या दूध के साथ 5 मिनट उबालकर पीने से तेज बुखार में भी जल्दी आराम मिलता है।

❤️ 3. दिल की सेहत का रक्षक

सुहागा रक्त में कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और हृदय को स्वस्थ बनाए रखता है।
यह एंटीऑक्सीडेंट्स को बढ़ाता है, जिससे हृदय रोगों का खतरा कम होता है।

🍽️ 4. पाचन को बनाए दुरुस्त

आयुर्वेद में इसे उष्ण प्रकृति वाला माना गया है।
यह पाचन अग्नि को बढ़ाकर गैस, अपच और पेट फूलना जैसी समस्याओं से छुटकारा दिलाता है।

💆‍♀️ 5. त्वचा और बालों के लिए अद्भुत औषधि

👉 नारियल तेल में मिलाकर सिर पर लगाने से डैंड्रफ और बाल झड़ने की समस्या में राहत।
👉 त्वचा पर लगाने से मुंहासे, फुंसियाँ और संक्रमण दूर होते हैं।

👩‍🦰 6. महिलाओं के लिए वरदान (PCOS में लाभकारी)

सुहागा एक प्राकृतिक मूत्रवर्धक (diuretic) है।
यह PCOS में ओव्यूलेशन और मासिक धर्म को नियमित करता है तथा UTI संक्रमण से भी रक्षा करता है।

🤧 7. खांसी और बलगम के लिए असरदार दवा

सुहागा के कफनिस्सारक गुण फेफड़ों में जमा बलगम को पिघलाते हैं और बाहर निकालते हैं।
👉 ब्रोंकाइटिस और पुरानी खांसी में “टंकण भस्म + शीतोपलादि चूर्ण” बहुत उपयोगी है।

💢 8. मासिक धर्म दर्द (Dysmenorrhea)

टंकण भस्म के ऐंठनरोधी गुण मासिक धर्म के दर्द और भारी थक्कों को कम करते हैं।
👉 प्रवाल पिष्टी, अशोक चूर्ण और चंद्रप्रभा वटी के साथ लेने पर यह और प्रभावी होता है।

🧴 9. रूसी (Dandruff) की समस्या में उपाय

सरसों या नारियल तेल में सुहागा मिलाकर सिर पर लगाने से रूसी और खुजली खत्म हो जाती है। ✨

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⚠️ सुहागा के दुष्प्रभाव (Precautions)

आयुर्वेद में कहा गया है — “अति सर्वत्र वर्जयेत्” यानी किसी भी चीज़ की अधिकता हानिकारक होती है।

❌ अत्यधिक सेवन से

उल्टी, मिचली, या पेट दर्द हो सकता है।

गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को नहीं लेना चाहिए।

पुरुषों को 2 महीने से अधिक लगातार सेवन नहीं करना चाहिए (शुक्राणु गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है)।

अधिक उपयोग से हड्डियों की मजबूती घट सकती है।

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🌼 सेवन विधि (Usage Method)

👉 सामान्यतः “टंकण भस्म” के रूप में 125mg – 250mg तक की मात्रा पर्याप्त मानी जाती है।
👉 इसे शहद, घी या गर्म पानी के साथ मिलाकर लिया जाता है।
(कृपया सेवन से पहले किसी आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह जरूर लें।)

🌿 निष्कर्ष (Conclusion)

सुहागा केवल एक खनिज नहीं — बल्कि यह प्रकृति का ऐसा उपहार है जो पाचन, त्वचा, जोड़ों और सांस की समस्याओं का एक साथ समाधान है।
बस सही मात्रा और समय पर इसका सेवन करें, और पाएँ स्वास्थ्य का खज़ाना! 💎 #fblifestyle 

🌿 “प्रकृति में ही है असली चिकित्सा।” 

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पेट के अल्सर को जड़ से मिटाने वाली होम्योपैथिक औषधि — Robinia Pseudacacia (रोबिनिया सूडोअकैसिया)

 “पेट के अल्सर को जड़ से मिटाने वाली होम्योपैथिक औषधि – प्राकृतिक राहत, बिना साइड इफ़ेक्ट!” 



⚕️ पेट का अल्सर (Stomach Ulcer) क्या है?

पेट के अंदर बनने वाला घाव या जलन अल्सर कहलाता है।
यह ज़्यादातर एसिडिटी, गैस, तनाव, या ग़लत खानपान से होता है।
तेज़ जलन, भूख न लगना, पेट दर्द, और मुँह में कड़वाहट इसके मुख्य लक्षण हैं।

💊 सर्वश्रेष्ठ होम्योपैथिक दवा — Robinia Pseudacacia (रोबिनिया सूडोअकैसिया)

👉 लाभ:

पेट में जलन, एसिडिटी और अल्सर के लिए सबसे प्रभावी दवा मानी जाती है।

रात में बढ़ने वाली जलन और खट्टी डकारें होने पर यह बहुत असरदार है।

पेट की दीवार को सुरक्षित रखती है और घाव को भरने में मदद करती है।

भूख और पाचन शक्ति को सामान्य करती है।

👉 कैसे लें:

30C शक्ति में, दिन में 2 बार 4 बूंदें या 4 गोलियाँ।

15 दिन तक लगातार सेवन करें और सुधार दिखने पर खुराक घटाएँ।

🌼 सहायक प्राकृतिक सुझाव:

✅ मसालेदार, तला हुआ भोजन और चाय-कॉफी से परहेज़ करें।
✅ ठंडा दूध, नारियल पानी और केले का सेवन करें।
✅ तनाव कम करने के लिए ध्यान और योग करें।
✅ खाने के तुरंत बाद न सोएँ।

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चाहे चश्मा कितने भी नंबर का हो वो भी उतरेगा |

 

आंखों(Eyes) की रोशनी कम होने की वजह है भोजन में विटामिन ए की कमी, जिस वजह से छोटी उम्र से ही आंखें कमजोर होने लगती है।

दूसरी वजह घंटों कंप्यूटर पर बैठकर काम करना या टेलीविजन देखना।

तीसरी वजह आंखों की पर ध्यान न देना।

ये कुछ वजह हैं जो आंखों की रोशनी को कम करती हैं और आपको चश्मा लगाने के लिए विवश करती है कुछ और वजह भी है जैसे की आधुनिक दौर में आनुवंशिकता, काम का दबाव, तनाव, पोषण की कमी, अधिक पढाई जैसे कारकों के कारण लोगों के चश्मे के नंबर बढ़ते जा रहे हैं। आँखों को धूल और इन्फेक्शन से बचाने के अलावा यहाँ कुछ ऐसे तरीके बताये जा रहे हैं जो आपकी आँखों की दृष्टि बढ़ा सकते हैं। घरेलू उपचार द्वारा आँखों की रोशनी किस तरह बढ़ाई जा सकती है आइये जानते हैं।

पहला प्रयोगः छः से आठ माह तक नियमित जलनेति करने से एवं पाँव के तलवों तथा कनपटी पर गाय का घी घिसने से लाभ होता है।

दूसरा प्रयोगः 7 बादाम, 5 ग्राम मिश्री और 5 ग्राम सौंफ दोनों को मिलाकर उसका चूर्ण बनाकर रात्रि को सोने से पहले दूध के साथ लेने से नेत्रज्योति बढ़ती है।

तीसरा प्रयोगः एक चने के दाने जितनी फिटकरी को सेंककर सौ ग्राम गुलाबजल में डालें और प्रतिदिन रात्रि को सोते समय इस गुलाबजल की चार-पाँच बूँद आँखों में डालकर आँखों की पुतलियों को इधर-उधर घुमायें। साथ ही पैरों के तलुए में आधे घण्टे तक घी की मालिश करें। इससे आँखों के चश्मे के नंबर उतारने में सहायता मिलती है तथा मोतियाबिंद में लाभ होता है।

नोट : ” नेत्र बिंदु ” या नासिका धृत सभी प्रकार के नेत्र रोगों को दूर करने व नेत्रज्योति को बढाने ने मदद करता है जरुर आजमायें

इन्हें भी आजमायें

आंखों की रोशनी बढ़ाने और चश्मा हटाने का घरेलु उपाय

1. आंखो से स्ट्रेस दूर करने के लिए अपनी दोनों हथेलियों को आपस में रगड़े, जिससे गर्मी पैदा होगी। फिर आंखे बंद करके हथेलियों को आंखों पर रखें। ध्यान रहें आंखों पर हाथ रखते पर रोशनी बिल्कुल ना आएं। दिन में ऐसा 3-4 बार करें।

2. आंवले के पानी से आंख धोने से या गुलाब जल डालने से आंखे स्वस्थ रहती है।

3. आंखो के हर तरह के रोग जैसे पानी का गिरना, आंखे आना, आंखो की दुर्बलता आदि होने पर रात को 7-8 बादाम भिगोकर सुबह पीसकर पानी में मिलाकर पीए।

4. एक लीटर पानी को तांबे के जग में रात भर के लिए रख दें और सुबह उठकर इस पानी को पीएं। तांबे में रखा पानी शरीर विशेषकर आंखों को बहुत फायदा पहुंचाता है।

5. नींबू एवं गुलाब जल को समान मात्रा में मिलाकर 1-1घण्टे के अंतर में आंखो में डालने से आंखो में ठंडक मिलती है।

6. आंवले का मुरब्बा दिन में दो बार खाएं इससे आंखों की रोशनी बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी

7. एक चम्मच सौंफ दो बादाम और आधा चम्मच मिश्री पीस लें इसे रोजाना रात को सोने से पहले एक गिलास दूध के साथ लें

8. जीरे और मिश्री को बराबर मात्रा में पीस लें इसे रोजाना एक चम्मच घी के साथ खाएं।

9. केला, गन्ना खाना आंखों के लिए हितकारी है। गन्ने का रस पीएं। एक नींबू एक गिलास पानी में पीते रहने से जीवन भर नेत्र ज्योति बनी रहती है।

10. तीन भाग धनिया के साथ एक भाग चीनी मिक्स करें। दोनों को पीसकर पेस्ट बना लें। फिर इसे पानी में गर्म करें और एक घंटे के लिए कवर करके रख दें। फिर एक साफ कॉटन का कपड़ा लेकर इस मिश्रण को छान लें और आंखों में आई ड्रॉप की तरह इस्तेमाल करें।

11. बालों पर रंग, हेयर डाई और केमीकल शैम्पू लगाने से परहेज करें ।

12. नियमित रूप से अंगूर खाएं, अंगूर के सेवन से रात में देखने की क्षमता बढ़ती है।

13. आँखों से चश्मा हटाने के लिए अपनी आँखों के आस पास अखरोट के तेल की मालिश करें इससे आँखों की रौशनी तेज होती है और आँखों से चश्मा भी उतर जाता है । यह बहुत ही आसान किन्तु अचूक उपाय है।

14. आधुनिक लाइफस्टाइल में अनिद्रा की समस्या बहुत कॉमन है। अगर आप पूरी नींद नहीं लेंगे तो इसका असर आपकी आंखों पर भी पड़ेगा। जिससे आँखों के नीचे काले घेरे तो होंगे ही, साथ ही आंखों की रोशनी भी कम होगी। इसलिए एक दिन में 7-9 घंटे की नींद बहुत जरूरी है।

15. कुछ सेकंड के लिए घड़ी की दिशा में अपनी आँखें गोल घुमाए , और फिर कुछ सेकंड के लिए विपरीत दिशा में घुमाए और इसे चार या पांच बार दोहराएँ।

16. सुबह के समय उठकर बिना कुल्ला किये मुँह की लार (saliva) अपनी आंखों में काजल की तरह लगाए। लगातार 6 महीने करते रहने पर चश्मे का नंबर कम हो जाता ह!

“Chelidonium Majus – जिगर की सफाई और ऊर्जा लौटाने वाली होम्योपैथिक औषधि”

 “Liver Detox – जिगर को फिर से ताज़ा करने के आसान प्राकृतिक तरीके” 


भाग 1: आसान Liver Detox Tips

1. सुबह गुनगुना नींबू पानी
रोज़ खाली पेट एक ग्लास गुनगुना पानी + ½ नींबू।
जिगर की सफ़ाई और पाचन दोनों बेहतर होते हैं।

2. हल्दी वाला पानी या दूध
हल्दी में curcumin जिगर की सूजन कम करता है और डिटॉक्स प्रक्रिया तेज करता है।

3. हरी सब्ज़ियाँ और फल बढ़ाएँ
खास तौर पर—पालक, मेथी, चुकंदर, गाजर, सेब।
इनमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट लिवर को पुनर्स्थापित करते हैं।

4. ओवरईटिंग तुरंत बंद करें
जिगर पर लोड बढ़ता है। दिन में 3–4 हल्के, संतुलित मील खाएँ।

5. शुगर, तला-भुना, शराब कम करें
ये लिवर फैट बढ़ाते हैं और सफाई प्रक्रिया को धीमा करते हैं।

6. पर्याप्त पानी
दिनभर 8–10 ग्लास पानी लिवर की फ्लशिंग को सपोर्ट करता है।

🙏  “Chelidonium Majus – जिगर की सफाई और ऊर्जा लौटाने वाली होम्योपैथिक औषधि” 

यह दवा कब उपयोगी है

लिवर में heaviness

भूख कम होना

दाएँ कंधे या दाएँ पसली के नीचे दर्द

तेल/तला हुआ खाना खाने से तकलीफ़

पीलिया के शुरुआती लक्षण

मुख्य लाभ (Benefits)

जिगर की कार्यक्षमता को सक्रिय करता है

बाइल का प्रवाह सुधरता है

अपच, गैस और कड़वा स्वाद कम करता है

थकान और heaviness घटाता है

कैसे उपयोग करें (Use / Treatment Guide)

Chelidonium Majus 30 – दिन में 2 बार, 5–5 बूंद
या

Chelidonium Majus Q (Mother Tincture) – 10 बूंद + ¼ कप पानी, दिन में 2 बार
(3–4 सप्ताह उपयोग, फिर चिकित्सक से सलाह). 🙏

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लहसुन और शहद: शरीर को अंदर से सहारा देने वाला पारंपरिक उपाय 🍯🧄

 लहसुन और शहद: शरीर को अंदर से सहारा देने वाला पारंपरिक उपाय 🍯🧄


बहुत से लोग यह महसूस करते हैं कि शरीर में बार-बार थकान रहती है, कमजोरी जल्दी आ जाती है या अंदरूनी ताकत कम लगती है। ऐसे में लहसुन और शहद का यह पुराना घरेलू नुस्खा सामान्य स्वास्थ्य-जागरूकता के लिए जाना जाता है।

✨ यह देसी मिश्रण क्यों उपयोगी माना जाता है?
* शरीर के अंदर रक्त प्रवाह को बेहतर बनाए रखने में सहायक
* दिल और नसों की सेहत के लिए सहारा देने वाला
* रोज़मर्रा की थकान और जकड़न को कम करने में मददगार
* इम्युनिटी को सपोर्ट करने वाला
* ठंड के मौसम में शरीर को संतुलित गर्माहट देने वाला

🥄 सेवन की सामान्य विधि
➡️ 2–3 लहसुन की कलियों को हल्का-सा कूट लें
➡️ उन्हें शुद्ध, प्राकृतिक शहद में मिलाएँ
➡️ सुबह खाली पेट 1 चम्मच सेवन करें
➡️ नियमित और सीमित मात्रा में लें

⏳ नियमित सेवन से क्या महसूस हो सकता है?
* शरीर में हल्की फुर्ती और ऊर्जा
* सुस्ती और अकड़न में कमी
* दिल और नसों को सामान्य सपोर्ट

⚠️ ज़रूरी सावधानियाँ
❌ अधिक मात्रा में सेवन न करें
❌ पेट में जलन, अल्सर या संवेदनशीलता हो तो न लें
❌ BP या हार्ट से जुड़ी दवाएँ लेते हों तो पहले विशेषज्ञ से सलाह लें
❌ गर्भवती महिलाएँ बिना परामर्श सेवन न करें

👉 यह नुस्खा इलाज नहीं, बल्कि पारंपरिक घरेलू जानकारी पर आधारित स्वास्थ्य-जागरूकता के लिए है।

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पुरानी व जिद्दी कब्ज की असरदार दवा Alumen

 पुरानी व जिद्दी कब्ज की असरदार दवा

🔹 मुख्य उपयोग (Uses):

लंबे समय से चली आ रही कब्ज

मल बहुत कठोर, सूखा, गाँठदार

शौच में बहुत ज़ोर लगाना

गुदा में जलन/दर्द

बच्चों व बुज़ुर्गों में कब्ज

शौच के बाद भी पेट साफ न लगना

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🔹 Keynotes (मुख्य लक्षण):

मल पत्थर जैसा कठोर

शौच करने की इच्छा कम

मल त्याग में दर्द

बार-बार कब्ज लौट आना

ठंडे स्वभाव के मरीज

शरीर में सूखापन

➡️ Alumen = “Hard, Dry Stool Constipation Remedy”

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🔹 Dose (30C):

👉 4 गोलियां या 2 बूंद
👉 दिन में 2 बार
👉 7–10 दिन

📌 पुरानी कब्ज में:
👉 दिन में 1 बार भी पर्याप्त हो सकती है
👉 असर दिखे तो डोज घटाएँ

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⚠️ सावधानियाँ:

फाइबर व पानी ज़रूर बढ़ाएँ

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