जय श्री कृष्णा, ब्लॉग में आपका स्वागत है यह ब्लॉग मैंने अपनी रूची के अनुसार बनाया है इसमें जो भी सामग्री दी जा रही है कहीं न कहीं से ली गई है। अगर किसी के कॉपी राइट का उल्लघन होता है तो मुझे क्षमा करें। मैं हर इंसान के लिए ज्ञान के प्रसार के बारे में सोच कर इस ब्लॉग को बनाए रख रहा हूँ। धन्यवाद, "साँवरिया " #organic #sanwariya #latest #india www.sanwariya.org/
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रविवार, 10 मई 2026
आने वाले 30 वर्षों में दुनिया से जेलें समाप्त हो जाएँगी।”
शनिवार, 9 मई 2026
पैकिंग आटा में कीड़े क्यों नही पड़ते ?? आंखें खोल देने वाला सच --
पैकिंग आटा में कीड़े क्यों नही पड़ते ??
आंखें खोल देने वाला सच --
एक प्रयोग करके देखें गेहूं का आटा पिसवा कर उसे 2 महीने स्टोर करने का प्रयास करें।
आटे में कीड़े पड़ जाना स्वाभाविक हैं, *आप आटा स्टोर नहीं कर पाएंगे।*
फिर ये बड़े बड़े ब्रांड आटा
कैसे स्टोर कर पा रहे हैं?
यह सोचने... वाली बात है।
एक केमिकल है- बेंजोयलपर ऑक्साइड, जिसे ' फ्लौर इम्प्रूवर ' भी कहा जाता है।* इसकी पेरमिसीबल लिमिट 4 मिलीग्राम है,लेकिन आटा बनाने वाली फर्में 400 मिलीग्राम तक ठोक देती हैं।कारण क्या है? आटा खराब होने से लम्बे समय तक बचा रहे।*बेशक़ उपभोक्ता की किडनी का बैंड बज जाए।
... कोशिश कीजिये खुद सीधे गेहूं खरीदकर अपना आटा पिसवाकर खाएं।
नियमानुसार आटे का समय..
ठंडके दिनों में 30 दिन
गरमी के दिनों में 20 दिन
बारिस के दिनों में 15 दिन का
बताया गया है।
ताजा आटा खाइये,
स्वस्थ रहिये...समझदार बनें,
अपने लिए पुरुषार्थी बन सभी
गेंहू पिसवा कर काम ले।
न कि रेडीमेड थैली का........
केवल 3 बदलाव कर के देखे
1.) नमक सेंधा प्रयोग करे,
2.) आटा चक्की से पिसवा कर लाये,
3.) पानी मटके का पिये,
सुबह गर्म पानी पिये...
आधी बीमारियों से छुटकारा पाएंगे ........!!
बीजेपी के जीतते ही इस अवैध टोल बूथ को बंद कर दिया गया
ट्रक ड्राइवर विश्वास ही नहीं कर रहे हैं कि जिन सड़कों पर पिछले 32 साल से उन्हें गैर कानूनी तरीके से ₹500 देना पड़ रहा था
हर हाईवे पर गैर कानूनी वसूली केंद्र बना था जिसका पैसा अभिषेक बनर्जी को जाता था
आज बिना किसी पैसे के उनका ट्रक गुजर रहा है
यह देखिए ट्रक ड्राइवर के आंखों में आंसू आ गए बोल रहा है 32 साल में पहली बार मेरा ट्रक बगैर पैसे के निकला
अब अगर कोई बोले बंगाल में SIR से हारे तो उसको जूता जुटा मारीयेगा
जिनके द्वारा कैश में वसूली होती थी और 5% रखकर बाकी कैश आगे बढ़ा दिया जाता था और उसके बाद अंत तक यह पैसा अभिषेक बनर्जी को जाता था
इन अवैध टोल बूथ में सबसे बड़ा टोल बूथ सिलीगुड़ी हाईवे पर था जहां बाइक से ₹50 कार से ₹200 ट्रक से ₹2000 और मल्टी एक्सल ट्रक से ₹3000 लिए जाते थे इसके अलावा डीजल पेट्रोल भरी हुई टैंकर और कोयला वाले ट्रक से ₹2000 एक्स्ट्रा लिए जाते थे
इस टोल बूथ का नाम फुलवारी टोल बूथ था और इसकी प्रतिदिन की कमाई 80 लाख से लेकर 1 करोड रुपए थी
और यहां पर दूसरे राज्य के नंबर वाले गाड़ियों से दोगुना वसूला जाता था
...और यहां से प्रतिदिन कमीशन खर्च सब कुछ काट के करीब 30 से 50 लाख रुपए अभिषेक बनर्जी को जाते थे
बीजेपी के जीतते ही इस अवैध टोल बूथ को बंद कर दिया गया
जिस नेता पर हजारों केस चल रहे हों.. वो नेता पुलिस डिपार्टमेंट का चीफ यानि कि गृह मंत्री बन सकता है.
यह पोस्ट देश के कोने कोने में पहुंचना चाहिए
Very Very IMPORTANT..
क्या भारत का सिस्टम
आम जनता को धोखा देता है ?
आप खुद देखिये....
1- नेता चाहे तो दो सीट से एक साथ चुनाव
लड़ सकता है ! लेकिन....
आप दो जगहों पर वोट नहीं डाल सकते,
2-आप जेल में बंद हो तो वोट नहीं डाल
सकते..लेकिन
नेता जेल में रहते हुए चुनाव लड़ सकता है.
3-आप कभी जेल गये थे, तो
अब आपको जिंदगी भर
कोई सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी,
लेकिन……
नेता चाहे जितनी बार भी हत्या या बलात्कार के मामले में जेल गया हो, फिर भी वो प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति जो चाहे बन सकता है,
4-बैंक में मामूली नौकरी पाने के लिये
आपका ग्रेजुएट होना जरूरी है..
लेकिन,
नेता अंगूठा छाप हो तो भी भारत का फायनेन्स मिनिस्टर बन सकता है।
5-आपको सेना में एक मामूली
सिपाही की नौकरी पाने के लिये डिग्री के साथ 10 किलोमीटर दौड़ कर भी दिखाना होगा,
लेकिन....
नेता यदि अनपढ़-गंवार और लूला-लंगड़ा है
तो भी वह आर्मी, नेवी और एयर फोर्स का चीफ यानि डिफेन्स मिनिस्टर बन सकता है
और
जिसके पूरे खानदान में आज तक कोई स्कूल नहीं गया.. वो नेता देश का शिक्षामंत्री बन सकता है
और
जिस नेता पर हजारों केस चल रहे हों..
वो नेता पुलिस डिपार्टमेंट का चीफ यानि कि गृह मंत्री बन सकता है.
यदि
आपको लगता है कि इस सिस्टम को बदल देना चाहिये..
नेता और जनता, दोनों के लिये एक ही कानून होना चाहिये..
तो
इस संदेश को फॉरवर्ड करके देश में जागरुकता लाने में अपना सहयोग दें..
अगर फॉरवर्ड नहीं किया तो आप किसी भी नेता को दोषी मत कहना ....,
नहीं किया तो नुकसान का जिम्मेदार आप खुद होगें।
सरकारी कर्मचारी 30 से 35 वर्ष की संतोषजनक सेवा करने के उपरांत भी पेंशन का हकदार नहीं ? जब कि मात्र 5 वर्ष के लिए विधायक / सांसद को पेंशन यह कहाँ का न्याय है...?
🏤 🎓
इस मुहिम को आगे बढायें।
DON'T DELETE,
WE ACTUALLY NEED TO CHANGE THIS SYSTEM.
शपथ ग्रहण से पहले ही बंगाल की हवा बदल चुकी थी। लोगों की आँखों में आँसू थे… चेहरों पर गुस्सा था… और दिलों में वर्षों से दबा हुआ दर्द।
लोग कह रहे हैं — “वाजपेयी जी की दशकों पुरानी भविष्यवाणी अब सच हो रही है!” आखिर ऐसा क्या हुआ कि हर गली, हर गांव, हर मोहल्ले में सिर्फ एक ही आवाज गूंजने लगी — “जय श्री राम”?पश्चिम बंगाल…
एक ऐसा राज्य जहाँ चुनाव सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं रहे, बल्कि भावनाओं, पहचान और अस्तित्व की जंग बन चुके थे।
लेकिन इस बार जो हुआ… उसने सबको चौंका दिया।
शपथ ग्रहण से पहले ही बंगाल की हवा बदल चुकी थी।
लोगों की आँखों में आँसू थे… चेहरों पर गुस्सा था… और दिलों में वर्षों से दबा हुआ दर्द।
सबसे हैरान करने वाली बात क्या थी जानते हैं?
इस बार लोग भाजपा के झंडे लेकर नहीं निकले।
नहीं…
हर हाथ में भगवा ध्वज था।
हर गली में “जय श्री राम” की गूंज थी।
और सबसे बड़ा सवाल यही बन गया—
आखिर बंगाल में अचानक ऐसा क्या बदल गया?
जब सोशल मीडिया पर वीडियो आने शुरू हुए, तो पूरे देश की नजरें बंगाल पर टिक गईं।
कहीं बुजुर्ग महिलाएं रोते हुए “जय श्री राम” बोल रही थीं…
कहीं छोटे बच्चे कविता गा रहे थे…
कहीं गांव की महिलाएं नाचते हुए कह रही थीं —
“ममता तेरे जाल में हिंदू अब नहीं फंसेगा…”
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
इसी बीच लोगों को याद आया संसद का वो पुराना भाषण…
अटल बिहारी वाजपेयी जी का वो बयान…
जिसे आज लोग “भविष्यवाणी” नहीं, बल्कि “श्राप” कह रहे हैं।
वाजपेयी जी ने संसद में कहा था—
“बीजेपी से लड़ना है तो लड़िए… मगर राम से मत लड़िए…”
उस वक्त शायद किसी ने इन शब्दों की गहराई नहीं समझी।
लेकिन आज… दशकों बाद… बंगाल की सड़कों पर वही शब्द सच होते दिखाई दे रहे थे।
क्योंकि लोगों का आरोप था कि वर्षों तक “जय श्री राम” बोलने वालों को रोका गया…
कई जगहों पर हिरासत में लिया गया…
दुर्गा विसर्जन तक पर सवाल उठे…
और धीरे-धीरे आम हिंदुओं के भीतर एक भावना जन्म लेने लगी—
“क्या अपनी आस्था जाहिर करना भी अपराध है?”
यही वजह थी कि इस चुनाव के नतीजे आते ही बंगाल में सिर्फ राजनीतिक जश्न नहीं मनाया गया…
बल्कि लोग इसे “अपनी पहचान की वापसी” कहने लगे।
सबसे चौंकाने वाला दृश्य भवानीपुर से सामने आया।
रात का समय…
सड़कें लोगों से भरी हुई…
और ममता बनर्जी के घर के बाहर हजारों गले एक साथ गूंज उठे—
“जय श्री राम!”
लोगों के चेहरों पर अजीब सा भाव था।
जैसे उन्हें खुद विश्वास नहीं हो रहा था कि वे खुलकर यह नारा लगा पा रहे हैं।
कुछ लोग रो रहे थे…
कुछ हाथ जोड़कर खड़े थे…
और कुछ बस आसमान की तरफ देखकर मुस्कुरा रहे थे।
फिर एक और वीडियो वायरल हुआ।
अभिषेक बनर्जी के घर के बाहर बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग खड़े थे।
कोई पत्थर नहीं…
कोई हिंसा नहीं…
बस एक स्वर—
“जय श्री राम…”
पूरा मोहल्ला गूंज रहा था।
उसके बाद सोशल मीडिया पर एक युवती का वीडियो सामने आया।
उसकी आँखों में आँसू थे।
आवाज कांप रही थी।
वो कह रही थी—
“केवल सनातनी ही समझ सकते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में हमने क्या सहा है…”
और आखिर में उसने हाथ जोड़कर कहा—
“जय श्री राम…”
उस एक वीडियो ने लाखों लोगों को भावुक कर दिया।
फिर गांवों से तस्वीरें आने लगीं।
ग्रामीण महिलाएं ढोल पर नाच रही थीं…
बुजुर्ग महिलाएं युवकों को आशीर्वाद दे रही थीं…
बच्चे कविता गा रहे थे—
“हिंदू नहीं फंसा ममता के जाल में…
कमल खिल गया पूरे पश्चिम बंगाल में…”
लेकिन इसी बीच एक ऐसा वीडियो सामने आया जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया।
कुछ लोग “जय श्री राम” के नारे लगाते हुए जश्न मना रहे थे।
तभी सामने से एक मुस्लिम जनाज़ा गुजरता दिखाई दिया।
और अचानक…
पूरा जुलूस रुक गया।
एक व्यक्ति ने हाथ उठाकर कहा—
“रास्ता दो… पहले इन्हें जाने दो… किसी को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए…”
कुछ सेकंड के लिए पूरा माहौल शांत हो गया।
जनाज़ा आराम से निकल गया।
फिर उसके बाद दोबारा नारे शुरू हुए।
यह वीडियो वायरल होते ही लोगों ने कहना शुरू कर दिया—
“क्या यही असली बंगाल है… जिसे वर्षों तक दबाकर रखा गया?”
लेकिन कहानी अभी और भी गहरी होने वाली थी।
क्योंकि इसके बाद सामने आए कुछ ऐसे दावे…
कुछ ऐसी घटनाएं…
जिन्होंने पूरे माहौल को और विस्फोटक बना दिया।
कहीं दावा हुआ कि वर्षों से बंद मंदिर दोबारा खोले जा रहे हैं…
कहीं कहा गया कि जिन दुकानदारों को डराकर चुप कराया गया था, वे अब खुलकर सामने आ रहे हैं…
और कहीं लोग खुलेआम कहने लगे—
“अब बंगाल बदल चुका है…”
धीरे-धीरे यह सिर्फ चुनाव की कहानी नहीं रही।
यह भावनाओं का विस्फोट बन गई।
और सबसे ज्यादा चर्चा उस सवाल की होने लगी—
क्या सच में वाजपेयी जी ने जो कहा था… वही आज बंगाल में हो रहा है?
क्या “जय श्री राम” सिर्फ नारा नहीं, बल्कि वर्षों के दबे गुस्से और आस्था का प्रतीक बन चुका है?
या फिर इसके पीछे कोई और बड़ी सच्चाई छिपी है…?
क्योंकि अभी जो सामने आना बाकी था…
वो बंगाल की राजनीति को हमेशा के लिए बदल सकता था…
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मंगलवार, 5 मई 2026
मधुरै। मीनाक्षी मंदिर का प्रवेश द्वार।
पेरियासामी। उम्र 60। हर सुबह 6 बजे, वह मंदिर के प्रवेश द्वार के पास बैठते थे। उनके सामने एक छोटा सा कपड़ा फैला होता था जिसमें पेन, पेंसिल, इरेज़र और कंपास होते थे। एक छोटी सी पेवमेंट शॉप।
लेकिन मुश्किल से ही कोई व्यवसाय होता था।
पेरियासामी का एक नियम था। जब भी कोई पेन मांगता, तो वह पहले पूछते: "बेटा, यह परीक्षा के लिए है?"
"हाँ, दादा। मेरा गणित की परीक्षा है आज। मैं अपना पेन भूल गया।"
फौरन, पेरियासामी एक अच्छा पेन निकालते और देते। "लो, यह लो। यह एक भाग्यशाली पेन है। जाओ, 100 अंक लाओ।"
"कितना दूं, दादा?"
"पैसा बाद में। पहले परीक्षा लिखो। आकर मुझे अपने अंक बताओ। फिर देना।"
बच्चे मुस्कराते और भाग जाते। ज्यादातर वापस नहीं आते। पेरियासामी कभी पूछते भी नहीं। उनकी पत्नी थंगम उन्हें डांटती। "तुम पागल हो? एक पेन की कीमत 10 रुपये है। अगर तुम ऐसे ही बांटते रहे, तो हम खाएंगे क्या? किराया कौन देगा?"
पेरियासामी एक पुरानी डायरी निकालते। उसमें तारीखवार लिखा होता:
"12.03.2010 - रamesh - गणित परीक्षा - पेन - पेंडिंग"
"05.06.2011 - सुमति - हिंदी परीक्षा - पेन - पेंडिंग"
"18.09.2013 - मुरुगन - 10वीं सार्वजनिक परीक्षा - पेन - पेंडिंग"
सारी डायरी "पेंडिंग" से भरी हुई थी। अगर जोड़ते, तो 3,000 से ज्यादा पेन होते। लगभग ₹30,000।
"देखो, थंगम," वह कहते, "यह कर्ज नहीं है। यह निवेश है। एक दिन यह वापस आएगा।"
थंगम सिर हिलाती। "तुमारा निवेश बर्बाद हो रहा है। तुम बूढ़े हो रहे हो। अब कौन वापस आएगा?"
बीस साल बीत गए। पेरियासामी अब 80 साल के थे। उनकी आंखों की रोशनी कम हो गई थी। सुनने की शक्ति भी कमजोर हो गई थी। फिर भी हर दिन वह उसी मंदिर के प्रवेश द्वार पर बैठते। वही कपड़ा। वही पेन। लेकिन अब मुश्किल से ही कोई व्यवसाय होता था। बच्चे जेल पेन, स्केच पेन, ऑनलाइन टूल्स इस्तेमाल करते थे...
एक सुबह, एक कार मंदिर के प्रवेश द्वार पर रुकी। एक आदमी, लगभग 35 साल का, कोट और सूट में, एक फूलों का गुच्छा लेकर बाहर आया। वह सीधे पेरियासामी के पास गया और उनके पैरों पर गिर गया। "दादा, मुझे पहचानते हो?"
पेरियासामी ने आंखें मली। "बेटा, मैं बूढ़ा हो गया हूँ। मुझे ठीक से दिखाई नहीं देता।"
"दादा, अठारह साल पहले, मेरी 10वीं सार्वजनिक गणित परीक्षा के दिन, मैं रोते हुए यहाँ आया था। मेरा पेन टूट गया था। घर में पैसे नहीं थे। आपने ही मुझे पेन दिया और कहा, 'यह भाग्यशाली पेन है। जाओ, 100 अंक लाओ।' आपने पैसे नहीं मांगे।"
पेरियासामी को धीरे-धीरे याद आया। "बेटा... तुम हो..."
"मैं मुरुगन हूँ, दादा। मैंने उस पेन से गणित की परीक्षा लिखी। 98 अंक लाया। पास हुआ। कॉलेज गया। आज मैं 'पेन टेक्नोलॉजीज' नामक सॉफ्टवेयर कंपनी का मालिक हूँ। मेरी जिंदगी आपकी पेन से शुरू हुई।"
बूढ़ी थंगम दरवाजे पर खड़ी होकर मुँह पर हाथ रखकर रोने लगी। मुरुगन ने अपने वॉलेट से एक एनवलप निकाला। "दादा, उस दिन मैं आपको 10 रुपये उधार था। आज मैं उसे ब्याज के साथ लौटा रहा हूँ।"
उसमें ₹10 लाख का चेक था। पेरियासामी के हाथ कांपने लगे। "बेटा, मुझे पैसे नहीं चाहिए। तुम्हें सफल देखना ही मेरे लिए काफी है।"
"नहीं, दादा। यह पैसे नहीं हैं। यह आपका निवेश है जो माफ़त के साथ वापस आया है। अब आपको इस पेवमेंट पर नहीं बैठना होगा। अब मैं आपकी और दादी की देखभाल करूंगा।"
अगले दिन अखबारों में खबर छपी: "सॉफ्टवेयर उद्यमी ने पेवमेंट दादा को गुरुदक्षिणा दी - ₹10 लाख का उपहार।"
खबर पढ़कर अगले दिन एक और कार आई। "दादा, मैं सुमति हूँ। मैंने आपके से हिंदी परीक्षा के लिए पेन लिया था। आज मैं हिंदी टीचर हूँ।"
फिर रamesh आया। "दादा, मैं अब ऑडिटर हूँ। आपकी पेन ने मेरा पहला बैलेंस शीट लिखा था।"
एक हफ्ते में मंदिर का प्रवेश द्वार शादी के घर जैसा हो गया। डॉक्टर, इंजीनियर, कलेक्टर, पुलिस अधिकारी - सभी पेरियासामी के पैरों में बिठाकर फूल, फल और एनवलप लेकर खड़े थे।
थंगम ने फिर से पुरानी डायरी निकाली। तीन हजार नाम। ₹30,000 की पेंडिंग ड्यूज़। लेकिन अब जो वापस आया था, वह ₹3 करोड़ का था।
आंखों में आंसू लेकर पेरियासामी ने कहा: "थंगम, मैंने कहा था ना? यह कर्ज नहीं था। ये बीज थे। मैंने बोए थे। आज ये जंगल बन गए हैं।"
आज, मीनाक्षी मंदिर के प्रवेश द्वार के पास एक बड़ा शॉप है "पेरियासामी पेन स्टोर्स।" कोई किराया नहीं। मुरुगन ने इसे उनके लिए खरीदा है। शॉप पर एक बोर्ड है: "यहाँ परीक्षा देने वाले बच्चों के लिए पेन फ्री हैं। बस आकर हमें अपने अंक बताओ। पैसे बाद में देना।"
और नीचे छोटे लेटर्स में: "एक दस रुपये का पेन किसी की जिंदगी बदल सकता है। विश्वास करो।"
क्या आपको पता है अब शॉप कौन चलाता है? मुरुगन - सॉफ्टवेयर कंपनी का मालिक। हफ्ते में दो दिन वह अपना कोट और सूट उतारकर शॉप में बैठता है और बच्चों को पेन देता है। "बेटा, यह भाग्यशाली पेन है। जाओ, 100 अंक लाओ।"
आप जो देते हैं, वह सिर्फ पेन नहीं है। वह आशा है। और एक दिन, वह आशा वापस आकर आपके पैरों में गिरेगी। तब आपको पता चलेगा - आप कभी गरीब नहीं थे। आप सबसे अमीर थे। — श्री वत्सन रघुनाथन का पोस्ट
यह कहानी पढ़कर मेरा दिल गदगद हो गया। धन्यवाद लेखक को। 😊
भारत के इतिहास की कुछ खास तसवीरें जो शायद ही किसी ने पहले देखी हो -
भारत के इतिहास की कुछ खास तसवीरें जो शायद ही किसी ने पहले देखी हो -
- महात्मा गांधी जी की आखिरी तस्वीर
2. नाथूराम गोडसे जिन्होंने गांधी जी पर गोली चलाई थी
3. अन्ना हज़ारे जी - एक ऑर्मी अफ़सर
4. नेताजी सुभाष चन्द्र बोस
5. युवा सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली
6. रतन जी टाटा के बचपन की तस्वीर
7. पूर्व राष्ट्रपति - महान अब्दुल क़लाम जी
8. सर् सी.वी. रमन
9. सुभाष चन्द्र बोस और हिटलर की मुलाक़ात
10. स्वामी विवेकानंद जी
(इमेज सॉर्स - फ़ेसबुक)
आशा है कि ऊपर की तस्वीरों में से कुछ तस्वीरें आपने भी पहली बार ही देखी होगी। अगर ऐसा हो तो share करने मे हिचकिचियेगा मत।
शनिवार, 2 मई 2026
भारतीय जनगणना में अपनी भागीदारी से स्वयं अपना डाटा फीड करे ।
सोमवार, 27 अप्रैल 2026
रेगिस्तान का मेवा पीलू फल - राजस्थान की गर्मी का असली टॉनिक
जाल या पीलू का पेड़ भारत में बिहार, राजस्थान, कर्नाटक, सिंध आदि शुष्क प्रदेशों में पाया जाता है। राजस्थान का थार मरुस्थल, जहाँ पर सुदूर रेतीले धोरों में वनस्पति बहुत कम मात्रा में पायी जाती हैं वहां पर भी जाल का पेड़ खूब फलता-फूलता है | यह रेगिस्तानी और मैदानी भागों से लेकर 500 मीटर की ऊँचाई वाले इलाकों तक भी पाया जाता है। जाळ का वृक्ष घना और छायादार होता है, और लगभग 4 से 5 मीटर ऊंचाई तक बढ़ जाता है | इसकी टहनियां पोली और कमजोर होती हैं |
पीलू या जाळ का पेड़ (salvadora olcoides)
राजस्थान की गर्मी का असली टॉनिक
गांव में बुजुर्ग कहते हैं - "पिलू खाया, लू नहीं सताया"
पिलू / जाल का फल - रेगिस्तान का मेवा
1. क्या है पिलू?
पेड़: जाल या पीलू का पेड़, Salvadora persica -
फल: छोटे-छोटे अंगूर जैसे गुच्छे में लगते हैं -
सूखने के बाद: कोकड़ कहते हैं -
इलाका: जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर - थार का रेगिस्तान
2. ताकत और फायदे -
ठंडा तासीर: गर्मी में शरीर को अंदर से ठंडा रखता है। लू नहीं लगने देता। -
पेट के लिए रामबाण: कब्ज, एसिडिटी, गर्मी के दस्त में फायदा। -
ताकतवर: आयरन, कैल्शियम, मिनरल से भरपूर। कमजोरी दूर करता है। -
दांतों के लिए: जाल की दातून तो दुनिया भर में मशहूर है - Miswak
3. खाने का तरीका - ✅ मई-जून में मिलता है - गर्मी चरम पर हो तब
✅ 10-20 दाने एक साथ खाओ - एक-एक से मुंह में छाले पड़ जाते हैं
✅ बीज बाहर थूकना पड़ता है - बीज कड़वा होता है, सिर्फ गूदा खाओ
✅ बहुत मुश्किल से मिलता है - अब जाल के पेड़ कम हो गए
लू के प्रभाव को कम करने के लिए पीलू फल एक रामबाण औषधि मानी जाती है. इसे खाने से शरीर में न केवल पानी की कमी पूरी हो जाती है बल्कि लू भी नहीं लगती है
पोखरण के जंगलो में ये फल सिर्फ 1 महीने के लिए होते है और ज्यादा आंधी और बारिश से ये फल झड़ जाते हैं. इनका बाजार में मिलना दुर्लभ होता है, इसलिए इनकी कीमत 300-500 रुपये प्रति किलो तक होती है.
जाल के पत्तों और फल के आकार के अनुसार ये दो प्रकार के होते है, जिन्हें खारी जाल और मीठी जाल के नाम से जाना जाता हैं
खारी जाल के पत्ते लगभग एक इंच लम्बे और आधा इंच चौड़े होते हैं, और फल छोटे और गहरे चमकदार रंग के होते है, वहीँ मीठी जाल के पत्ते एक से डेढ़ इंच लम्बे और 5 से 10 मिमी चौड़े होते हैं और फल खारी जाल के फल की अपेक्षाकृत थोड़े बड़े और भूरे मटमैले और हलके पीले रंग के होते हैं | 
मीठी जाल के पत्ते और फल
खारी जाल के पत्ते और फल
जाल के फलों को पीलू कहा जाता है | भीषण गर्मी के मौसम में जब थार के तपते धोरे लू के थपेड़ो से आम जन को त्रस्त कर रहे होते है, तब उस भीषण गर्मी में जाल के ये स्वादिष्ट फल शीतलता प्रदान करते हैं |जाल के ये पीलू अंगूर की तरह रसभरे होते है, जिनके गुदा के बीच में एक बीज होता हैं | इनके फलों या पीलू के सुखा कर भी स्टोर किया जाता है, जो बहुत ही स्वादिष्ट होते हैं |
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| रसभरे पीलू जाल का विभिन्न भाषाई नाम |
- Hindi – पीलू, छोटा पीलू, खरजाल
- English – मेसवाक (Meswak), साल्ट बुश ट्री (Salt bush tree), मस्टर्ड ट्री (Mustard tree), Tooth brush tree (टूथ ब्रश ट्री)
- Sanskrit – पीलू , पीलू, गुडफल्, स्रीं, शीतफल, गौली, शीत, सहस्राक्षी, शीतसह, श्याम, करभवल्लभ, पीलूक
- Oriya – कोटुङ्गो (Kotungo), टोबोटो (Toboto)
- Urdu – पीलू (Pilu)
- Kannada – गोनी मारा (Goni mara), गोनी (Goni)
- Gujarati – पीलू (Pilu), खरि जाल (Khari jal)
- Tamil – पेरुन्गोलि (Perungoli), कलावी (Kalavi)
- Telugu – गोगु (Gogu), गुनिया (Gunia)
- Bengali – पीलूगाछ (Pilugach), पीलू (Pilu)
- Nepali – पिलु (Pilu)
- Punjabi – पीलू (Pilu), झाल (Jhal)
- Marathi – पीलू (Pilu), खाकिन (Khakin)
- Malayalam – उका (Uka)
- Arabic – अराक (Arak), मिसवाक (Miswaq)
- Persian – दरख्ते मिसवाक (Darkhate miswak)
आयुर्वेदिक जानकार ये बताते हैं कि पीलू एक बहुत ही गुणी औषधि है और पीलू का प्रयोग कर कई रोगों को ठीक किया जा सकता है. पेट के रोग, पथरी, बवासीर और तिल्ली विकार में पीलू का उपयोग कर लाभ पाया जा सकता है. इसी तरह वात्त, पित्त और कफ दोष तथा सिर दर्द आदि में भी पीलू का प्रयोग लाभदायक होता है.
- निशोथ, पीलू, अजवायन, कांजी आदि अम्ल द्रव्य तथा चित्रकादि पाचन द्रव्यों को मिलाकर सेवन करें। इससे पेट दर्द और आंतों के रोग में लाभ होता है।
- पीलू के पेस्ट से पकाए हुए घी का सेवन करने से पेट के फूलने की समस्या में लाभ (peelu ke fayde) होता है।
- भुने हुए पीलू फल (pilu fruit) को सेंधा नमक के साथ खाएं और साथ में गोमूत्र, दूध या अंगूर का रस पीने से पेट की बीमारी जैसे – पैट की गैस की समस्या (Meswak tree benefits) ठीक होती है।
- रोज सुबह 7 दिन से एक माह तक पीलू को अकेले या छाछ के साथ सेवन करें। इससे बवासीर, पेट की गैस, पाचन विकार, गुदा विकार आदि में लाभ (peelu ke fayde) मिलता है।
- सहिजन बीज, जड़ी बीज, कनेर पत्ते, पीलू वृक्ष की जड़, बेलगिरी तथा हींग को थूहर के दूध के साथ पीस लें। इसे बवासीर के मस्सों पर लेप करने से लाभ होता है।
- पीलू के तेल में बत्ती भिगोकर गुदा में रखने से बवासीर में लाभ होता है।
गुरुवार, 23 अप्रैल 2026
भगवान करे आपके माता-पिता कभी उस हालत में न आएं।
एक जेरियाट्रिशियन (वृद्धावस्था विशेषज्ञ) के दिल से निकले शब्द:
बुढ़ापे में, अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक बिस्तर पर पड़ा रहता है और उसके बच्चे सिर्फ यह कहते हैं, “आराम से करो” (Take it slow), तो अक्सर यही सबसे खतरनाक स्थिति की शुरुआत होती है।
“एक बुज़ुर्ग के लिए लेटना आसान है, लेकिन उठना बहुत मुश्किल। कई बार बीमारी नहीं मारती, बल्कि बिस्तर मार देता है।”
27 साल के अनुभव वाले एक जेरियाट्रिक्स विभाग के निदेशक की सच्ची कहानी:
मेरा नाम सोंग युआनमिंग है, मेरी उम्र 54 साल है।
मैंने प्रांतीय राजधानी के एक शीर्ष अस्पताल में 27 वर्षों तक जेरियाट्रिक्स विभाग में काम किया है।
मैंने 16,000 से अधिक मरीजों का इलाज किया है और 2,400 से अधिक गंभीर स्थिति के नोटिस लिखे हैं।
आज मैं कोई मेडिकल भाषा नहीं इस्तेमाल करूंगा, सिर्फ तीन सच्ची कहानियाँ बताऊंगा, जो मैंने खुद देखी हैं।
हर एक कहानी आपके माता-पिता के लिए बहुत मायने रखती है।
पहली कहानी (2019 की शरद ऋतु)
मरीज: 81 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक, श्रीमान सन
उन्हें जांघ की हड्डी (फेमोरल नेक) में फ्रैक्चर था।
सर्जरी सफल रही। तीसरे दिन डॉक्टर ने कहा कि उन्हें वॉकर के सहारे चलने की कोशिश करनी चाहिए।
लेकिन उनके बेटे ने मना कर दिया:
“पापा इतने बूढ़े हैं, अभी सर्जरी हुई है। अगर फिर गिर गए तो? आराम से करो, उन्हें आराम करने दो।”
मैंने यह “आराम से करो” कम से कम 500 बार सुना है।
हर बार यह सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
क्योंकि 80 साल से ऊपर के लोगों के लिए ये तीन शब्द अक्सर एक खाई की ओर इशारा करते हैं।
श्रीमान सन ने बेटे की बात मानी और आराम करने लगे।
- 7वें दिन: खांसी शुरू
- 12वें दिन: 38.7°C बुखार, CT में फेफड़ों में हाइपोस्टैटिक निमोनिया
- 18वें दिन: ICU में भर्ती
- 23वें दिन: मृत्यु
मौत का कारण न फ्रैक्चर था, न सर्जरी की जटिलता—
बल्कि बिस्तर पर पड़े रहने से हुआ निमोनिया।
हड्डी ठीक हो गई थी, लेकिन फेफड़े बिस्तर ने खराब कर दिए।
दूसरी कहानी (जनवरी 2021)
मरीज: 78 वर्षीय स्ट्रोक (लकवा) के मरीज, श्रीमान ली
10 दिन बाद हालत स्थिर हो गई।
मैंने उनकी बेटी से कहा:
“सबसे जरूरी है—रीहैबिलिटेशन। जितनी जल्दी शुरू करें उतना अच्छा।
उन्हें दिन में कम से कम दो बार बैठाना है, हर बार 30 मिनट।
अगर हो सके तो खड़ा करें, चलाएं।”
बेटी बहुत सेवा भाव वाली थी। उसने 24 घंटे की देखभाल के लिए केयरटेकर रख लिया।
सब कुछ परफेक्ट था—खाना, नहलाना, डायपर बदलना…
लेकिन एक चीज नहीं हुई—उन्हें हिलाया नहीं गया।
उसे डर था—थक जाएंगे, दर्द होगा, गिर जाएंगे।
हर बार जब केयरटेकर बैठाने की कोशिश करता, वह कहती:
“जबरदस्ती मत करो, आराम करने दो।”
तीन महीने बाद—
उनका दूसरा पैर भी बेकार हो गया।
यह दूसरा स्ट्रोक नहीं था—
यह मसल एट्रॉफी (मांसपेशियों का गलना) था।
- लंबे समय तक लेटे रहने से हर हफ्ते 1.5%–3% मांसपेशियां खत्म होती हैं
- 3 महीने में लगभग 40% मांसपेशियां खत्म
नतीजा:
आधा लकवा → पूरा लकवा
“अभी भी खड़े हो सकते हैं” → “अब कभी नहीं खड़े हो पाएंगे”
वे 14 महीने और जीवित रहे।
इस दौरान उन्हें 3 बेडसोर (घाव) हुए।
सबसे बड़ा घाव इतना गहरा था कि हड्डी दिख रही थी।
ड्रेसिंग करते समय वे तौलिया काटते थे, और आंखों से आंसू बहते थे।
हर बार बेटी रोती और कहती—
“पापा, आराम से करो।”
यह “आराम से करो”—
सबसे नरम लेकिन सबसे क्रूर व्यवहार है।
तीसरी कहानी (2023)
मरीज: 83 वर्षीय श्रीमान झाओ (हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी)
उनका बेटा इंजीनियर था—तार्किक सोच वाला।
सर्जरी के अगले दिन वह मेरे पास नोटबुक लेकर आया:
“डॉक्टर, कृपया रोज का रीहैब प्लान बना दीजिए।”
मैंने 7 दिन का प्लान बनाया:
- दिन 1: एंकल एक्सरसाइज, हर घंटे 20 बार
- दिन 2: पैर उठाना, 10 बार × 4 सेट
- दिन 3: वॉकर के साथ खड़ा होना (2 मिनट × 3 बार)
- दिन 5: 10 कदम चलना (4 बार)
- दिन 7: 8 मीटर चलना
क्या उन्हें दर्द हुआ?
हाँ।
तीसरे दिन जब वह खड़े हुए, उनके माथे पर पसीना और होंठ सफेद थे।
बेटे ने न कहा “आराम करो”, न कहा “रुक जाओ।”
उसने कहा:
“पापा, सिर्फ 30 सेकंड खड़े रहो। मैं टाइम कर रहा हूँ।”
30 सेकंड।
उन्होंने दांत भींचकर पूरा किया।
वही 30 सेकंड सबसे असरदार दवा थे।
14वें दिन—
वह खुद चलकर वार्ड से बाहर आए।
धीरे-धीरे, लेकिन अपने पैरों पर।
वह उस साल के 184 मरीजों में सबसे बेहतर रिकवर हुए।
27 साल का अनुभव — 5 सच्चाई
-
2 हफ्ते से ज्यादा बिस्तर = तेज मांसपेशी नुकसान
लेटना आराम नहीं, विनाश है। -
पहले 72 घंटे = गोल्डन पीरियड
इस समय में चलना शुरू हुआ या नहीं—यही तय करता है भविष्य। -
तीन खतरनाक चीजें:
- निमोनिया
- ब्लड क्लॉट
- बेडसोर
ये बीमारी से ज्यादा जान लेते हैं।
-
गलत सेवा भाव (Filial piety)
सब कुछ खुद करना = उन्हें अपाहिज बनाना। -
सच्ची सेवा = उन्हें खड़ा करना
चाहे “कठोर” क्यों न बनना पड़े।
अंतिम संदेश
मुझसे पूछा गया—आपको सबसे ज्यादा किस बात का डर लगता है?
मैंने कहा—
मुझे गंभीर बीमारी से डर नहीं लगता।
मुझे डर लगता है जब कोई कहता है—
“आराम से करो।”
क्योंकि इसका मतलब होता है—उन्होंने कोशिश छोड़ दी है।
*मैंने अपने परिवार से कह दिया है:
“अगर मैं कभी बिस्तर पर पड़ा रहूं—
मुझे ‘आराम से करो’ मत कहना।”
“मुझे उठाओ, चलाओ, टाइमर लगाओ—
और कहो: पापा, बस 30 सेकंड और!”
आप सबके लिए
भगवान करे आपके माता-पिता कभी उस हालत में न आएं।
लेकिन अगर आएं—
तो याद रखना:
❌ “आराम से करो” मत कहना
✅ “मैं आपको खड़ा होने में मदद करूंगा” कहना
वो 30 सेकंड—
उनकी पूरी जिंदगी बदल सकते हैं।
क्योंकि खुद चलकर टॉयलेट जाना—
बुढ़ापे की सबसे कीमती आज़ादी है।
इसे बचाइए। अभी से।
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