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रविवार, 8 फ़रवरी 2026
यह रहा Kalmegh Q (Andrographis paniculata) का उपयोग, मात्रा और फायदे – हिंदी में 🌿👇
होम्योपैथिक दवा एड्रेनालिनम और इसकी विभिन्न पोटेंसी और इसके उपयोग
भगवान ने उस दिन सिद्ध कर दिया कि वे सोने-चांदी से नहीं, केवल सच्चे भाव से खरीदे जा सकते हैं। भक्त का प्रेम इतना भारी था कि भगवान उसके वश में होकर, उस छोटी सी नथ के मोल "बिक" गए।
शनिवार, 7 फ़रवरी 2026
काशी में मणिकर्णिका घाट पर चिता जब शांत हो जाती है तब मुखाग्नि देने वाला व्यक्ति चिता भस्म पर 94 लिखता है।*
बुधवार, 4 फ़रवरी 2026
आरक्षण का आधार पिछड़ा वर्ग या समूह के बजाय जाति किये जाने से इन 77 सालों में कोई लाभ नहीं हुआ है।*
सोमवार, 2 फ़रवरी 2026
Physostigma Venenosum 30 (जिसे 'Calabar Bean' भी कहा जाता है) होम्योपैथी में मुख्य रूप से आँखों की रोशनी, तंत्रिका तंत्र (Nervous System) और मांसपेशियों की कमजोरी के लिए एक अत्यंत प्रभावी औषधि है।
फुर्सा साँप (Saw-scaled Viper) Member of BIG-4 venomous snakes found in India...!
मंगलवार, 27 जनवरी 2026
WHITE DISHCHARGE ♦️श्वेत प्रदर (सफ़ेद पानी)♦️
WHITE DISHCHARGE
♦️श्वेत प्रदर (सफ़ेद पानी)♦️
ल्यूकोरिया या प्रदर रोग महिलाओं में होने वाला एक गंभीर रोग है. इस रोग में महिला की योनी से सफ़ेद रंग का स्राव निकलता रहता है जो महिला को शारीरिक एवं मानसिक रूप से कमजोर बना देता है..
सफ़ेद पानी की समस्या से पीड़ित महिला गर्भ धारण करने में सक्षम नहीं हो पाती एवं साथ ही उसके शरीर से धातुओं का क्षय होता रहता है जो उसे शारीरिक रूप से बेहद कमजोर बना देतें है..
♦️आयुर्वेदानुसार श्वेत प्रदर ♦️
संहिताओं में इसका वर्णन श्लेष्मिक प्रदर या श्लेष्मजा योनी नाम से मिलता है. सामान्य अवस्था में महिला के प्रजनन अंगो एवं भग प्रदेश आदि से प्राय: सफ़ेद रंग का एवं गंधहिन पानी जैसा स्राव निकलता रहता है, जो उस भाग को गीला बनाये रखता है.. इस स्राव की मात्रा उतनी ही होती है जितने में वह अंग गीला रहे | मानसिक विकार जैसे काम, क्रोध एवं वासना आदि के कारण यह मात्रा बढ़ भी जाती जो एक समय पश्चात सामान्य हो जाती है.. कभी कभार दुर्बलता, कुपोषण, आहार विहार एवं व्याधियों के कारण यह मात्रा अधिक हो जाती है जो लम्बे समय तक परेशान करती है | इसी अवस्था को श्वेत प्रदर कहते है..
आयुर्वेद चिकत्सानुसार महिलाओं में सफ़ेद पानी की समस्या को 5 प्रकार की माना है..
भगज श्वेत प्रदर
योनिज
ग्रीवीय एवं
ग्रभास्यज श्वेत प्रदर
श्वेत प्रदर (सफ़ेद पानी) के कारण
पांडू रोग / खून की कमी
मानसिक विकार जैसे क्रोध, भय एवं चिंता आदि
अधिक सम्भोग
अपच एवं अजीर्ण
कब्ज
मूत्राशय में सुजन
अतृप्त कामवासन
भावनात्मक कष्ट आदि
श्वेत प्रदर की पहचान या लक्षण
योनिमार्ग से सफ़ेद जलीय चिपचिपे पदार्थ का बाहर निकलना.
योनी में खुजली एवं जलन.
जांघों में भारीपन
शारीरिक दुर्बलता
आलस्य
भोजन का ठीक प्रकार से पाचन न होना
कब्ज हो जाना
सिर दर्द
चक्कर आना
भोजन में अरुचि होना आदि लक्षण सफ़ेद पानी की समस्या होने पर दिखाई देते है
♦️श्वेत प्रदर के कारगर घरेलु इलाज.♦️
श्वेत प्रदर नाशक त्रिफला योग
♦️सामग्री ♦️
आंवले का बक्कल, हरड का बक्कल, एवं बहेड़ा इन तीनो को 1 -1 तोला(10 ग्राम) एवं जल आधा kg
♦️विधि ♦️
सबसे पहले इन तीनो द्रव्यों को कूटपीस कर दरदरा कर लें | अब रात्रि के समय इन्हें एक मिट्टी के बर्तन में रखकर ऊपर से पानी डाल दें..रात्रि भर अच्छी तरह भीगने के बाद सुबह इसे आंच पर चढ़ा कर काढ़ा तैयार कर लें यह योग सभी प्रकार के प्रदर रोग में उपयोगी है..
इसके उपयोग से पुराने से पुराना प्रदर रोग ठीक हो जाता है | साथ ही वेदना आदि में भी आराम मिलता है..
♦️उपयोग की विधि ♦️
इस काढ़े का उपयोग योनी में एनिमा देने के लिए किया जाता है | योनी में ड्यूस एवं पिच्चु को धारण करना चाहिए एवं साथ ही योनिमार्ग को इस काढ़े से धोना चाहिए | लगातार कुछ दिनों के प्रयोग से शीघ्र ही श्वेत प्रदर की समस्या नष्ट हो जाती है |
आयुर्वेद में त्रिफला क्वाथ से योनी प्रक्षालन को उपयुक्त चिकित्सा माना गया है..
गुलर योग
सामग्री
गुलर के पक्के फल का 50 ग्राम चूर्ण और 100 ग्राम मिश्री |
♦️विधि ♦️
गुलर के फलों को को टुकड़े टुकड़े करके सुखा लें | जब एक दम सुख जाए तब कूट पीसकर कर कपड़छन चूर्ण कर लें | इस चूर्ण में मिश्री मिलाकर अच्छी तरह ढक कर रखें |
♦️उपयोग एवं गुण ♦️
10 ग्राम तक की मात्रा में इस चूर्ण को खाकर ऊपर से गाय या बकरी का दूध ग्रहण करना चाहिए | अगर रक्त प्रदर की समस्या हो तो अशोकारिष्ट के साथ सेवन करना चाहिए | हमेशा ठन्डे जल के साथ ही इसका सेवन करना चाहिए | दिन में दो बार सुबह एवं शाम लिया जा सकता है | इसके उपयोग से सभी प्रकार के प्रदर रोग ठीक हो जाता है |
♦️श्वेत प्रदर (सफ़ेद पानी) के घरेलु नुस्खें..♦️
मुलहठी एवं चीनी 10 ग्राम एवं 20 ग्राम प्रत्येक को दोनों को पीसकर चूर्ण बना लें | आधा चम्मच चूर्ण सुबह और आधा चम्मच शाम को दूध के साथ सेवन करें.
सूखे हुए चमेली के पते 4 ग्राम और सफ़ेद फिटकरी 2 ग्राम दोनों को खूब महीन पिसलें | इसमें से 2 ग्राम चूर्ण शक्कर में मिलाकर रात के समय फांककर ऊपर से दूध पी लें | इसके प्रयोग से श्वेत प्रदर ठीक हो जाता है |
पके हुए केले के अन्दर फिटकरी का चूर्ण भरकर इसे दोपहर के समय खूब चबा चबा कर खाएं | इसके सेवन से सफ़ेद पानी की समस्या से राहत मिलती है |
पेट पर ठन्डे पानी का कपडा रोज 10 मिनट रखना चाहिए |
अशोक के पेड़ की छाल को 50 ग्राम की मात्रा में लें | इसे 1 किलो पानी में पकाएं जब पानी आधा रहे तब इसे आंच से निचे उतार कर छान कर दूध में मिलाकर सेवन करना श्वेत प्रदर के रोग में फायदेमंद रहता है |
अनार के छिलकों को ठन्डे पानी के साथ सेवन करने से फायदा मिलता है |
मूली का सेवन भी फायदेमंद रहता है | मूली के पतों का रस निकाल कर सेवन करने से भी लाभ मिलता है |
गुलाब के फुल की पत्तियों को मिश्री के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है |
Cassia sop Q एक प्रभावशाली होम्योपैथिक मदर टिंचर है,
Cassia sop Q एक प्रभावशाली होम्योपैथिक मदर टिंचर है,
जो Cassia sophera पौधे की प्राकृतिक पत्तियों से तैयार की जाती है। यह दवा विशेष रूप से खांसी, दमा, ब्रोंकाइटिस और सांस की तकलीफ में उपयोगी मानी जाती है। जिन लोगों को बार-बार सीने में जकड़न, सांस फूलना या एलर्जी के कारण श्वसन समस्या रहती है, उनके लिए Cassia sop Q सहायक हो सकती है। यह फेफड़ों को मजबूत करने और श्वसन तंत्र के संतुलन में मदद करती है। प्राकृतिक और हर्बल गुणों से भरपूर यह औषधि होम्योपैथी में विश्वसनीय स्थान रखती है। दवा का प्रयोग हमेशा योग्य चिकित्सक की सलाह से करना चाहिए।
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सुहागा वो खनिज जो हर घर में दवा बनकर छिपा है!
सुहागा वो खनिज जो हर घर में दवा बनकर छिपा है! 🌸
कभी सोचा है जो “सुहागा” आपकी रसोई में रखा है — वो सिर्फ खाना पकाने के काम नहीं आता, बल्कि एक बहुमूल्य आयुर्वेदिक औषधि भी है! 🤔
हाँ, वही सुहागा जिसे संस्कृत में “टनक” कहा गया है — और जो तिब्बत व फारस की झीलों से निकलकर हमारे शरीर को भीतर से शुद्ध करता है। 🌊💎
आयुर्वेद में इसे बोरेक्स या टंकण भस्म कहा गया है — और यह शरीर, त्वचा, बाल, हृदय, यहाँ तक कि महिला स्वास्थ्य के लिए भी अमृत समान माना गया है! 💫
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🌿 सुहागा के मुख्य लाभ (Amazing Benefits)
🦵 1. जोड़ों के दर्द का रामबाण इलाज
सुहागा में मौजूद सूजनरोधी गुण (Anti-inflammatory properties) शरीर की सूजन, दर्द और जकड़न को कम करते हैं।
👉 गठिया या पुराने दर्द में इसे लेने से आराम मिलता है।
❄️ 2. बुखार में Cooling Effect
सुहागा शरीर को ठंडक देता है और बुखार में राहत पहुंचाता है।
💧 इसे पानी या दूध के साथ 5 मिनट उबालकर पीने से तेज बुखार में भी जल्दी आराम मिलता है।
❤️ 3. दिल की सेहत का रक्षक
सुहागा रक्त में कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और हृदय को स्वस्थ बनाए रखता है।
यह एंटीऑक्सीडेंट्स को बढ़ाता है, जिससे हृदय रोगों का खतरा कम होता है।
🍽️ 4. पाचन को बनाए दुरुस्त
आयुर्वेद में इसे उष्ण प्रकृति वाला माना गया है।
यह पाचन अग्नि को बढ़ाकर गैस, अपच और पेट फूलना जैसी समस्याओं से छुटकारा दिलाता है।
💆♀️ 5. त्वचा और बालों के लिए अद्भुत औषधि
👉 नारियल तेल में मिलाकर सिर पर लगाने से डैंड्रफ और बाल झड़ने की समस्या में राहत।
👉 त्वचा पर लगाने से मुंहासे, फुंसियाँ और संक्रमण दूर होते हैं।
👩🦰 6. महिलाओं के लिए वरदान (PCOS में लाभकारी)
सुहागा एक प्राकृतिक मूत्रवर्धक (diuretic) है।
यह PCOS में ओव्यूलेशन और मासिक धर्म को नियमित करता है तथा UTI संक्रमण से भी रक्षा करता है।
🤧 7. खांसी और बलगम के लिए असरदार दवा
सुहागा के कफनिस्सारक गुण फेफड़ों में जमा बलगम को पिघलाते हैं और बाहर निकालते हैं।
👉 ब्रोंकाइटिस और पुरानी खांसी में “टंकण भस्म + शीतोपलादि चूर्ण” बहुत उपयोगी है।
💢 8. मासिक धर्म दर्द (Dysmenorrhea)
टंकण भस्म के ऐंठनरोधी गुण मासिक धर्म के दर्द और भारी थक्कों को कम करते हैं।
👉 प्रवाल पिष्टी, अशोक चूर्ण और चंद्रप्रभा वटी के साथ लेने पर यह और प्रभावी होता है।
🧴 9. रूसी (Dandruff) की समस्या में उपाय
सरसों या नारियल तेल में सुहागा मिलाकर सिर पर लगाने से रूसी और खुजली खत्म हो जाती है। ✨
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⚠️ सुहागा के दुष्प्रभाव (Precautions)
आयुर्वेद में कहा गया है — “अति सर्वत्र वर्जयेत्” यानी किसी भी चीज़ की अधिकता हानिकारक होती है।
❌ अत्यधिक सेवन से
उल्टी, मिचली, या पेट दर्द हो सकता है।
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को नहीं लेना चाहिए।
पुरुषों को 2 महीने से अधिक लगातार सेवन नहीं करना चाहिए (शुक्राणु गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है)।
अधिक उपयोग से हड्डियों की मजबूती घट सकती है।
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🌼 सेवन विधि (Usage Method)
👉 सामान्यतः “टंकण भस्म” के रूप में 125mg – 250mg तक की मात्रा पर्याप्त मानी जाती है।
👉 इसे शहद, घी या गर्म पानी के साथ मिलाकर लिया जाता है।
(कृपया सेवन से पहले किसी आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह जरूर लें।)
🌿 निष्कर्ष (Conclusion)
सुहागा केवल एक खनिज नहीं — बल्कि यह प्रकृति का ऐसा उपहार है जो पाचन, त्वचा, जोड़ों और सांस की समस्याओं का एक साथ समाधान है।
बस सही मात्रा और समय पर इसका सेवन करें, और पाएँ स्वास्थ्य का खज़ाना! 💎 #fblifestyle
🌿 “प्रकृति में ही है असली चिकित्सा।”
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