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मंगलवार, 10 फ़रवरी 2026

साँवरिया" (Sanwariya) – मानवता की सेवा में समर्पितएक संकल्प, एक आंदोलन, एक नई सोच

🌟 "साँवरिया" (Sanwariya) – मानवता की सेवा में समर्पित
एक संकल्प, एक आंदोलन, एक नई सोच

हम सभी “साँवरिया सेठ” के बारे में जानते हैं।
साँवरिया सेठ प्रभु श्रीकृष्ण का ही एक दिव्य रूप हैं, जिन्होंने भक्तों के लिए अनेक रूप धारण करके समय-समय पर भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण कीं।
कभी सुदामा को तीन लोक दान देकर,
कभी नानीबाई का मायरा भरकर,
कभी कर्माबाई का खीचड़ा स्वीकार करके,
कभी राम बनकर तो कभी श्याम बनकर—
प्रभु ने हमेशा यह सिद्ध किया कि भक्ति और सेवा का मार्ग ही सर्वोच्च है।
और हम सब मनुष्य तो केवल निमित्त मात्र हैं।
भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है—
"मैं सभी के लिए समान हूँ"
फिर भी संसार में कई प्रकार की असमानताएँ दिखाई देती हैं।
कोई टाटा-बिरला जैसे उच्च परिवार में जन्म लेता है,
तो कोई अत्यंत गरीब और वंचित परिवार में।
कोई जन्म से स्वस्थ, सुंदर और समृद्ध होता है,
तो कोई जन्म से ही संघर्ष और अभावों में जीवन जीने को मजबूर।
पर क्या यह भगवान का भेदभाव है?
नहीं।
जैसे एक न्यायाधीश अपराध के अनुसार अलग-अलग दंड देता है,
वैसे ही मनुष्य का जीवन, परिस्थितियाँ और भाग्य भी कर्मों पर आधारित होते हैं।
कलियुग में पाप स्वतः हो जाते हैं,
पर पुण्य करने के लिए प्रयास करना पड़ता है।

✍️ "अपने लिए तो सभी करते हैं, दूसरों के लिए कर के देखो"

— Kailash Chandra Ladha


इसी विचार और प्रेरणा के साथ एक साधारण व्यक्ति ने, समाज में फैली पीड़ा को देखकर, एक संकल्प लिया—

कि इस संसार में जो लोग भूखे सोते हैं,
जिनके पास कपड़े नहीं हैं,
जिनके पास पढ़ने को किताबें नहीं हैं,
जिनके पास इलाज के लिए साधन नहीं हैं,
जो मजबूरी में भीख माँगने को विवश हैं,
उनके लिए कुछ किया जाए।
बहुत लोग यह सब देखते हैं, पर बहुत कम लोग इसे अपना उद्देश्य बनाते हैं।

🌱 Sanwariya की स्थापना और उद्देश्य

Sanwariya संस्था की स्थापना का उद्देश्य केवल सेवा है।

यह संस्था उन लोगों से संपर्क रखने के लिए बनाई गई है जो समाज में बदलाव चाहते हैं और मानवता की सेवा में योगदान देना चाहते हैं।

Sanwariya का लक्ष्य है कि कोई भी व्यक्ति अभाव में न रहे और समाज में सहयोग की भावना जागृत हो।

इस संकल्प के साथ दिनांक 31-07-2005 से सावन माह में भगवान का नाम लेकर यह सेवा अभियान प्रारंभ किया गया, और आज यह एक मजबूत सामाजिक आंदोलन के रूप में विकसित हो रहा है।

आज Sanwariya की पहचान है:
✅ सेवा
✅ सहयोग
✅ संवेदना
✅ समाज निर्माण
✅ राष्ट्र निर्माण
फेसबुक पेज https://www.facebook.com/sanwariyaclub

🎯 Sanwariya का मुख्य उद्देश्य
Sanwariya का उद्देश्य है एक ऐसा भारत बनाना—
❌ जहाँ गरीबी न हो
❌ जहाँ निरक्षरता न हो
❌ जहाँ भुखमरी न हो
❌ जहाँ असमानता न हो
❌ जहाँ भ्रष्टाचार न हो
❌ जहाँ कोई मजबूर न हो
और हर व्यक्ति सामाजिक व आर्थिक रूप से सक्षम हो।

🤝 Sanwariya किस प्रकार सेवा करता है?

Sanwariya संस्था समाज से अपील करती है कि लोग अपने घर की अनुपयोगी वस्तुएँ फेंकने के बजाय, जरूरतमंदों तक पहुँचाएँ।

Sanwariya के माध्यम से एकत्र की जाने वाली सामग्री:
कपड़े
किताबें
स्कूल सामग्री
जूते-चप्पल
स्वेटर, कंबल, रजाई
चादर, बिस्तर
मेडिकल उपकरण
दवाइयाँ
पुराने कंप्यूटर
चश्मे
खिलौने
साइकिल
बैग
इन वस्तुओं को जरूरतमंदों में वितरित कर बिना पैसे के पुण्य कमाया जा सकता है।

🍲 भोजन बचाओ – भूख मिटाओ अभियान
भारत में बड़े-बड़े जन्मदिन, शादी समारोह और धार्मिक आयोजनों में भारी मात्रा में भोजन और पानी की बर्बादी होती है।
यदि वही भोजन उसी क्षेत्र में भूखे सोने वालों को बांट दिया जाए तो—

✅ भूखमरी कम होगी
✅ चोरी, लूट, अपराध कम होंगे
✅ समाज में भाईचारा बढ़ेगा
✅ देश में शांति और सद्भाव बढ़ेगा

🐄 गौ सेवा अभियान
Sanwariya समाज को प्रेरित करता है कि—
रोटी
सब्जी
फल के छिलके
इन्हें अलग रखकर गौ माता के लिए गौशाला तक पहुँचाया जाए।
या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को रोजगार देकर यह सेवा नियमित कराई जाए।


📚 शिक्षा सहयोग अभियान
Sanwariya का उद्देश्य केवल दान नहीं बल्कि स्थायी बदलाव है।
विद्यालयों में Parent Meeting के दौरान “सहयोग बैंक” बनाकर—
पुराने ड्रेस
किताबें
कॉपी
बैग
पेन-पेंसिल
साइकिल
अन्य स्कूल सामग्री
एकत्र करके जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जा सकती है।
इससे शिक्षा सस्ती होगी और गरीब बच्चों का भविष्य बनेगा।


🌍 अब Sanwariya का नया अध्याय
🔧 "Public Property Repair & Reuse Mission"
(सार्वजनिक संपत्ति मरम्मत एवं पुनः उपयोग अभियान)
आज देश में एक नई और बहुत गंभीर समस्या सामने आ रही है—
सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों में
खराब पड़े उपकरणों को
मरम्मत करवाने की बजाय
सीधे कबाड़ में डाल दिया जाता है।
फिर नया बजट आने पर नया सामान आ जाता है।
और जब तक बजट नहीं आता, तब तक जनता परेशानी झेलती है।
दूसरी तरफ समाज में—
बेरोजगार मैकेनिक
पेंटर
इलेक्ट्रिशियन
कारपेंटर
प्लंबर
कंप्यूटर टेक्नीशियन
खाली बैठे रहते हैं।
💡 समाधान: Repair करके उपयोग में लाओ
Sanwariya अब इस दिशा में एक बहुत बड़ा सामाजिक अभियान शुरू करने जा रहा है—
“घर की चीजें जैसे हम ठीक करवाते हैं,
वैसे ही सार्वजनिक चीजें भी जन सहयोग से ठीक करवाएँगे।”
यह अभियान सरकार के खिलाफ नहीं,
बल्कि सरकार और जनता दोनों के सहयोग से
जनहित में काम करेगा।

✅ वास्तविक उदाहरण
एक सरकारी हॉस्पिटल में  50 व्हील चेयर कबाड़ में पड़ी थीं।
जब एक साइकिल मैकेनिक को कहा गया कि—
"खराब पड़ी व्हील चेयर के पार्ट्स इधर उधर लगाकर जितनी सही हो सकती हैं, उतनी सही कर दो।"
तो उसने केवल ₹50 प्रति व्हील चेयर मजदूरी में—
✅ 50 में से 35 व्हील चेयर ठीक कर दीं
बाकी 15 के लिए नए पार्ट्स की जरूरत थी।
इस एक प्रयास से—
💰 हजारों-लाखों रुपये की बचत
👨‍🦽 मरीजों को राहत
👨‍🔧 मैकेनिक को रोजगार
♻️ Waste कम
यह एक छोटी घटना नहीं,
यह एक नया मॉडल है।

🛠️ Sanwariya के अंतर्गत Repair किए जाने वाले कार्यों की सूची

🏥 अस्पतालों में (Hospital Repair Works)
व्हील चेयर रिपेयर
स्ट्रेचर रिपेयर
मेडिकल बेड रिपेयर
ट्रॉली रिपेयर
वार्ड फर्नीचर
वाटर कूलर/RO
पंखे, लाइट, वायरिंग
CCTV कैमरे
पानी की टंकी
छोटे मेडिकल उपकरण
ऑक्सीजन स्टैंड
व्हील चेयर पार्ट्स बदलना
🏫 सरकारी स्कूलों में (Govt School Repair Works)
डेस्क-बेंच, कुर्सी, टेबल
ब्लैकबोर्ड/व्हाइटबोर्ड
कंप्यूटर रिपेयर
प्रोजेक्टर रिपेयर
प्रिंटर/स्कैनर
CCTV कैमरा
पंखे, ट्यूबलाइट, वायरिंग
दरवाजे, खिड़की, ताले
स्कूल लाइब्रेरी की किताबों की बाइंडिंग
वाटर कूलर, RO
टॉयलेट मरम्मत
स्कूल भवन में पेंटिंग
🛕 मंदिरों में (Temple Repair Works)
लाइटिंग सिस्टम
माइक सेट, स्पीकर
CCTV कैमरे
वाटर कूलर / RO
पानी की टंकी
मूर्तियों का रंग-रोगन
दरवाजे-गेट की मरम्मत
पंखे, वायरिंग
शेड/टीन शेड
मंदिर परिसर की सफाई व्यवस्था
👮 पुलिस थानों में (Police Station Repair Works)
CCTV कैमरा सेट
वायरिंग व लाइट
कंप्यूटर, प्रिंटर
फर्नीचर
वाटर कूलर
दरवाजे-खिड़की
टंकी, प्लंबिंग कार्य
🌳 पार्क व सामुदायिक भवन (Park & Community Hall Repair Works)
झूले, खेल उपकरण
पार्क बेंच
स्ट्रीट लाइट
गेट/रेलिंग
पेंटिंग व सफाई
पानी की टंकी
सामुदायिक भवन में फर्नीचर मरम्मत
टॉयलेट और पाइपलाइन सुधार
🧰 Sanwariya की कार्यप्रणाली (Working System)
Sanwariya इस अभियान को पूरी योजना के साथ चलाएगा।
चरण 1: पहचान (Survey)
टीम द्वारा स्कूल/अस्पताल/मंदिर/पार्क में जाकर
खराब उपकरणों की सूची तैयार की जाएगी।
चरण 2: रिपोर्ट और अनुमति
संबंधित संस्था प्रमुख/प्रशासन से चर्चा कर
Repair योग्य वस्तुओं की अनुमति ली जाएगी।
चरण 3: विशेषज्ञ टीम तैयार
Sanwariya अपने क्षेत्र में एक “Repair Team Network” बनाएगा:
Mechanic Team
Electrician Team
Carpenter Team
Painter Team
Plumber Team
Computer Technician Team
CCTV Technician Team
चरण 4: कम लागत में Repair
लोकल वर्कशॉप और विशेषज्ञों से कम खर्च में Repair कराना
पार्ट्स की व्यवस्था
जरूरत पड़ने पर जनसहयोग से फंडिंग
चरण 5: पुनः उपयोग (Reuse)
Repair के बाद सामान को तुरंत वापस उपयोग में लाना
ताकि जनता को राहत मिले
चरण 6: निगरानी (Monitoring)
हर Repair का रिकॉर्ड
फोटो/वीडियो अपडेट
पारदर्शिता
🌱 यह अभियान क्यों जरूरी है?
क्योंकि यह—
✅ सरकारी धन बचाएगा
✅ जनता की सुविधा बढ़ाएगा
✅ रोजगार उत्पन्न करेगा
✅ भ्रष्टाचार की संभावना घटाएगा
✅ कबाड़ को कम करेगा
✅ Waste Management को मजबूत करेगा
✅ देश में “जिम्मेदार नागरिक” संस्कृति बनाएगा
👥 Sanwariya से कौन जुड़ सकता है?
Sanwariya इस अभियान में सभी को जोड़ना चाहता है:
🔧 मैकेनिक
⚡ इलेक्ट्रिशियन
🪚 कारपेंटर
🎨 पेंटर
🚰 प्लंबर
💻 कंप्यूटर टेक्नीशियन
📹 CCTV टेक्नीशियन
🧱 मिस्त्री
🧑‍🤝‍🧑 समाजसेवी
🏢 व्यापारी वर्ग
👨‍🎓 विद्यार्थी
👨‍👩‍👧‍👦 हर जागरूक नागरिक
🌟 Sanwariya का कार्यक्षेत्र (Work Areas)
Sanwariya संस्था निम्न क्षेत्रों में कार्यरत है:
1) गरीबों की सहायता
2) वस्त्र, भोजन और जरूरत की सामग्री वितरण
3) शिक्षा सहयोग
4) चिकित्सा सहायता व मेडिकल उपकरण सहयोग
5) गौ सेवा
6) सामाजिक जागरूकता
7) Waste Management
8) अब नया अभियान: Public Property Repair & Reuse
📢 Sanwariya की अपील
यदि आप इस अभियान का हिस्सा बनना चाहते हैं तो—
✅ अपने क्षेत्र के सरकारी स्कूल/अस्पताल/मंदिर में पड़े खराब सामान की जानकारी दें
✅ Repair करने वाले लोगों को जोड़ें
✅ सोशल मीडिया पर इस अभियान को फैलाएँ
✅ अपने क्षेत्र में “Sanwariya Repair Counter” बनाकर सहयोग करें
✅ तन-मन-धन से अपनी श्रद्धानुसार साथ दें

🇮🇳 Sanwariya का सपना
"साँवरिया" का लक्ष्य ऐसे भारत का सपना साकार करना है जहाँ—
न गरीबी हो, न निरक्षरता, न असमानता, न भूखमरी और न भ्रष्टाचार।
जहाँ हर व्यक्ति सक्षम हो,
हर संस्था सुचारू हो,
और भारत फिर से विश्वगुरु बने।

🙏 सर्वे भवन्तु सुखिनः
हो गई है पीर पर्वत-सी अब पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए…
यह केवल कविता नहीं,

यह समाज परिवर्तन का संकल्प है।

📌 जय महेश 🙏
मानवता की सेवा में समर्पित – "साँवरिया"
🌐 www.sanwariya.org�
✍️ Founder: Kailash Chandra Ladha


#sanwariya #kailashchandraladha #repairmission #publicproperty #wastemanagement #reuse #saveindia #helpinghands #digitalindia #jodhpur #rajasthan #ngo #temple #hospital #govtschool #wheelchair #employment #bharat #servetbhavantusukhinah

साँवरिया" (Sanwariya) – मानवता की सेवा में समर्पितएक संकल्प, एक आंदोलन, एक नई सोच

🌟 "साँवरिया" (Sanwariya) – मानवता की सेवा में समर्पित
एक संकल्प, एक आंदोलन, एक नई सोच

हम सभी “साँवरिया सेठ” के बारे में जानते हैं।
साँवरिया सेठ प्रभु श्रीकृष्ण का ही एक दिव्य रूप हैं, जिन्होंने भक्तों के लिए अनेक रूप धारण करके समय-समय पर भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण कीं।
कभी सुदामा को तीन लोक दान देकर,
कभी नानीबाई का मायरा भरकर,
कभी कर्माबाई का खीचड़ा स्वीकार करके,
कभी राम बनकर तो कभी श्याम बनकर—
प्रभु ने हमेशा यह सिद्ध किया कि भक्ति और सेवा का मार्ग ही सर्वोच्च है।
और हम सब मनुष्य तो केवल निमित्त मात्र हैं।
भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है—
"मैं सभी के लिए समान हूँ"
फिर भी संसार में कई प्रकार की असमानताएँ दिखाई देती हैं।
कोई टाटा-बिरला जैसे उच्च परिवार में जन्म लेता है,
तो कोई अत्यंत गरीब और वंचित परिवार में।
कोई जन्म से स्वस्थ, सुंदर और समृद्ध होता है,
तो कोई जन्म से ही संघर्ष और अभावों में जीवन जीने को मजबूर।
पर क्या यह भगवान का भेदभाव है?
नहीं।
जैसे एक न्यायाधीश अपराध के अनुसार अलग-अलग दंड देता है,
वैसे ही मनुष्य का जीवन, परिस्थितियाँ और भाग्य भी कर्मों पर आधारित होते हैं।
कलियुग में पाप स्वतः हो जाते हैं,
पर पुण्य करने के लिए प्रयास करना पड़ता है।

✍️ "अपने लिए तो सभी करते हैं, दूसरों के लिए कर के देखो"

— Kailash Chandra Ladha


इसी विचार और प्रेरणा के साथ एक साधारण व्यक्ति ने, समाज में फैली पीड़ा को देखकर, एक संकल्प लिया—

कि इस संसार में जो लोग भूखे सोते हैं,
जिनके पास कपड़े नहीं हैं,
जिनके पास पढ़ने को किताबें नहीं हैं,
जिनके पास इलाज के लिए साधन नहीं हैं,
जो मजबूरी में भीख माँगने को विवश हैं,
उनके लिए कुछ किया जाए।
बहुत लोग यह सब देखते हैं, पर बहुत कम लोग इसे अपना उद्देश्य बनाते हैं।

🌱 Sanwariya की स्थापना और उद्देश्य

Sanwariya संस्था की स्थापना का उद्देश्य केवल सेवा है।

यह संस्था उन लोगों से संपर्क रखने के लिए बनाई गई है जो समाज में बदलाव चाहते हैं और मानवता की सेवा में योगदान देना चाहते हैं।

Sanwariya का लक्ष्य है कि कोई भी व्यक्ति अभाव में न रहे और समाज में सहयोग की भावना जागृत हो।

इस संकल्प के साथ दिनांक 31-07-2005 से सावन माह में भगवान का नाम लेकर यह सेवा अभियान प्रारंभ किया गया, और आज यह एक मजबूत सामाजिक आंदोलन के रूप में विकसित हो रहा है।

आज Sanwariya की पहचान है:
✅ सेवा
✅ सहयोग
✅ संवेदना
✅ समाज निर्माण
✅ राष्ट्र निर्माण
फेसबुक पेज https://www.facebook.com/sanwariyaclub

🎯 Sanwariya का मुख्य उद्देश्य
Sanwariya का उद्देश्य है एक ऐसा भारत बनाना—
❌ जहाँ गरीबी न हो
❌ जहाँ निरक्षरता न हो
❌ जहाँ भुखमरी न हो
❌ जहाँ असमानता न हो
❌ जहाँ भ्रष्टाचार न हो
❌ जहाँ कोई मजबूर न हो
और हर व्यक्ति सामाजिक व आर्थिक रूप से सक्षम हो।

🤝 Sanwariya किस प्रकार सेवा करता है?

Sanwariya संस्था समाज से अपील करती है कि लोग अपने घर की अनुपयोगी वस्तुएँ फेंकने के बजाय, जरूरतमंदों तक पहुँचाएँ।

Sanwariya के माध्यम से एकत्र की जाने वाली सामग्री:
कपड़े
किताबें
स्कूल सामग्री
जूते-चप्पल
स्वेटर, कंबल, रजाई
चादर, बिस्तर
मेडिकल उपकरण
दवाइयाँ
पुराने कंप्यूटर
चश्मे
खिलौने
साइकिल
बैग
इन वस्तुओं को जरूरतमंदों में वितरित कर बिना पैसे के पुण्य कमाया जा सकता है।

🍲 भोजन बचाओ – भूख मिटाओ अभियान
भारत में बड़े-बड़े जन्मदिन, शादी समारोह और धार्मिक आयोजनों में भारी मात्रा में भोजन और पानी की बर्बादी होती है।
यदि वही भोजन उसी क्षेत्र में भूखे सोने वालों को बांट दिया जाए तो—

✅ भूखमरी कम होगी
✅ चोरी, लूट, अपराध कम होंगे
✅ समाज में भाईचारा बढ़ेगा
✅ देश में शांति और सद्भाव बढ़ेगा

🐄 गौ सेवा अभियान
Sanwariya समाज को प्रेरित करता है कि—
रोटी
सब्जी
फल के छिलके
इन्हें अलग रखकर गौ माता के लिए गौशाला तक पहुँचाया जाए।
या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को रोजगार देकर यह सेवा नियमित कराई जाए।


📚 शिक्षा सहयोग अभियान
Sanwariya का उद्देश्य केवल दान नहीं बल्कि स्थायी बदलाव है।
विद्यालयों में Parent Meeting के दौरान “सहयोग बैंक” बनाकर—
पुराने ड्रेस
किताबें
कॉपी
बैग
पेन-पेंसिल
साइकिल
अन्य स्कूल सामग्री
एकत्र करके जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जा सकती है।
इससे शिक्षा सस्ती होगी और गरीब बच्चों का भविष्य बनेगा।


🌍 अब Sanwariya का नया अध्याय
🔧 "Public Property Repair & Reuse Mission"
(सार्वजनिक संपत्ति मरम्मत एवं पुनः उपयोग अभियान)
आज देश में एक नई और बहुत गंभीर समस्या सामने आ रही है—
सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों में
खराब पड़े उपकरणों को
मरम्मत करवाने की बजाय
सीधे कबाड़ में डाल दिया जाता है।
फिर नया बजट आने पर नया सामान आ जाता है।
और जब तक बजट नहीं आता, तब तक जनता परेशानी झेलती है।
दूसरी तरफ समाज में—
बेरोजगार मैकेनिक
पेंटर
इलेक्ट्रिशियन
कारपेंटर
प्लंबर
कंप्यूटर टेक्नीशियन
खाली बैठे रहते हैं।
💡 समाधान: Repair करके उपयोग में लाओ
Sanwariya अब इस दिशा में एक बहुत बड़ा सामाजिक अभियान शुरू करने जा रहा है—
“घर की चीजें जैसे हम ठीक करवाते हैं,
वैसे ही सार्वजनिक चीजें भी जन सहयोग से ठीक करवाएँगे।”
यह अभियान सरकार के खिलाफ नहीं,
बल्कि सरकार और जनता दोनों के सहयोग से
जनहित में काम करेगा।

✅ वास्तविक उदाहरण
एक सरकारी हॉस्पिटल में  50 व्हील चेयर कबाड़ में पड़ी थीं।
जब एक साइकिल मैकेनिक को कहा गया कि—
"खराब पड़ी व्हील चेयर के पार्ट्स इधर उधर लगाकर जितनी सही हो सकती हैं, उतनी सही कर दो।"
तो उसने केवल ₹50 प्रति व्हील चेयर मजदूरी में—
✅ 50 में से 35 व्हील चेयर ठीक कर दीं
बाकी 15 के लिए नए पार्ट्स की जरूरत थी।
इस एक प्रयास से—
💰 हजारों-लाखों रुपये की बचत
👨‍🦽 मरीजों को राहत
👨‍🔧 मैकेनिक को रोजगार
♻️ Waste कम
यह एक छोटी घटना नहीं,
यह एक नया मॉडल है।

🛠️ Sanwariya के अंतर्गत Repair किए जाने वाले कार्यों की सूची

🏥 अस्पतालों में (Hospital Repair Works)
व्हील चेयर रिपेयर
स्ट्रेचर रिपेयर
मेडिकल बेड रिपेयर
ट्रॉली रिपेयर
वार्ड फर्नीचर
वाटर कूलर/RO
पंखे, लाइट, वायरिंग
CCTV कैमरे
पानी की टंकी
छोटे मेडिकल उपकरण
ऑक्सीजन स्टैंड
व्हील चेयर पार्ट्स बदलना
🏫 सरकारी स्कूलों में (Govt School Repair Works)
डेस्क-बेंच, कुर्सी, टेबल
ब्लैकबोर्ड/व्हाइटबोर्ड
कंप्यूटर रिपेयर
प्रोजेक्टर रिपेयर
प्रिंटर/स्कैनर
CCTV कैमरा
पंखे, ट्यूबलाइट, वायरिंग
दरवाजे, खिड़की, ताले
स्कूल लाइब्रेरी की किताबों की बाइंडिंग
वाटर कूलर, RO
टॉयलेट मरम्मत
स्कूल भवन में पेंटिंग
🛕 मंदिरों में (Temple Repair Works)
लाइटिंग सिस्टम
माइक सेट, स्पीकर
CCTV कैमरे
वाटर कूलर / RO
पानी की टंकी
मूर्तियों का रंग-रोगन
दरवाजे-गेट की मरम्मत
पंखे, वायरिंग
शेड/टीन शेड
मंदिर परिसर की सफाई व्यवस्था
👮 पुलिस थानों में (Police Station Repair Works)
CCTV कैमरा सेट
वायरिंग व लाइट
कंप्यूटर, प्रिंटर
फर्नीचर
वाटर कूलर
दरवाजे-खिड़की
टंकी, प्लंबिंग कार्य
🌳 पार्क व सामुदायिक भवन (Park & Community Hall Repair Works)
झूले, खेल उपकरण
पार्क बेंच
स्ट्रीट लाइट
गेट/रेलिंग
पेंटिंग व सफाई
पानी की टंकी
सामुदायिक भवन में फर्नीचर मरम्मत
टॉयलेट और पाइपलाइन सुधार
🧰 Sanwariya की कार्यप्रणाली (Working System)
Sanwariya इस अभियान को पूरी योजना के साथ चलाएगा।
चरण 1: पहचान (Survey)
टीम द्वारा स्कूल/अस्पताल/मंदिर/पार्क में जाकर
खराब उपकरणों की सूची तैयार की जाएगी।
चरण 2: रिपोर्ट और अनुमति
संबंधित संस्था प्रमुख/प्रशासन से चर्चा कर
Repair योग्य वस्तुओं की अनुमति ली जाएगी।
चरण 3: विशेषज्ञ टीम तैयार
Sanwariya अपने क्षेत्र में एक “Repair Team Network” बनाएगा:
Mechanic Team
Electrician Team
Carpenter Team
Painter Team
Plumber Team
Computer Technician Team
CCTV Technician Team
चरण 4: कम लागत में Repair
लोकल वर्कशॉप और विशेषज्ञों से कम खर्च में Repair कराना
पार्ट्स की व्यवस्था
जरूरत पड़ने पर जनसहयोग से फंडिंग
चरण 5: पुनः उपयोग (Reuse)
Repair के बाद सामान को तुरंत वापस उपयोग में लाना
ताकि जनता को राहत मिले
चरण 6: निगरानी (Monitoring)
हर Repair का रिकॉर्ड
फोटो/वीडियो अपडेट
पारदर्शिता
🌱 यह अभियान क्यों जरूरी है?
क्योंकि यह—
✅ सरकारी धन बचाएगा
✅ जनता की सुविधा बढ़ाएगा
✅ रोजगार उत्पन्न करेगा
✅ भ्रष्टाचार की संभावना घटाएगा
✅ कबाड़ को कम करेगा
✅ Waste Management को मजबूत करेगा
✅ देश में “जिम्मेदार नागरिक” संस्कृति बनाएगा
👥 Sanwariya से कौन जुड़ सकता है?
Sanwariya इस अभियान में सभी को जोड़ना चाहता है:
🔧 मैकेनिक
⚡ इलेक्ट्रिशियन
🪚 कारपेंटर
🎨 पेंटर
🚰 प्लंबर
💻 कंप्यूटर टेक्नीशियन
📹 CCTV टेक्नीशियन
🧱 मिस्त्री
🧑‍🤝‍🧑 समाजसेवी
🏢 व्यापारी वर्ग
👨‍🎓 विद्यार्थी
👨‍👩‍👧‍👦 हर जागरूक नागरिक
🌟 Sanwariya का कार्यक्षेत्र (Work Areas)
Sanwariya संस्था निम्न क्षेत्रों में कार्यरत है:
1) गरीबों की सहायता
2) वस्त्र, भोजन और जरूरत की सामग्री वितरण
3) शिक्षा सहयोग
4) चिकित्सा सहायता व मेडिकल उपकरण सहयोग
5) गौ सेवा
6) सामाजिक जागरूकता
7) Waste Management
8) अब नया अभियान: Public Property Repair & Reuse
📢 Sanwariya की अपील
यदि आप इस अभियान का हिस्सा बनना चाहते हैं तो—
✅ अपने क्षेत्र के सरकारी स्कूल/अस्पताल/मंदिर में पड़े खराब सामान की जानकारी दें
✅ Repair करने वाले लोगों को जोड़ें
✅ सोशल मीडिया पर इस अभियान को फैलाएँ
✅ अपने क्षेत्र में “Sanwariya Repair Counter” बनाकर सहयोग करें
✅ तन-मन-धन से अपनी श्रद्धानुसार साथ दें

🇮🇳 Sanwariya का सपना
"साँवरिया" का लक्ष्य ऐसे भारत का सपना साकार करना है जहाँ—
न गरीबी हो, न निरक्षरता, न असमानता, न भूखमरी और न भ्रष्टाचार।
जहाँ हर व्यक्ति सक्षम हो,
हर संस्था सुचारू हो,
और भारत फिर से विश्वगुरु बने।

🙏 सर्वे भवन्तु सुखिनः
हो गई है पीर पर्वत-सी अब पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए…
यह केवल कविता नहीं,

यह समाज परिवर्तन का संकल्प है।

📌 जय महेश 🙏
मानवता की सेवा में समर्पित – "साँवरिया"
🌐 www.sanwariya.org�
✍️ Founder: Kailash Chandra Ladha


#sanwariya #kailashchandraladha #repairmission #publicproperty #wastemanagement #reuse #saveindia #helpinghands #digitalindia #jodhpur #rajasthan #ngo #temple #hospital #govtschool #wheelchair #employment #bharat #servetbhavantusukhinah

जोधपुर में थाईलैंड की प्रिंसेस सिरीवन्नावरी का शाही आगमन: उम्मेद भवन से मेहरानगढ़ तक हाई-सिक्योरिटी विज़िट

Princess Sirivannavari Royal Visit :

 जोधपुर शहर इन दिनों अंतरराष्ट्रीय मेहमान के स्वागत को लेकर सुर्खियों में है. थाईलैंड की राजकुमारी प्रिंसेस सिरीवन्नावरी विशेष विमान से जोधपुर पहुंचीं, जहां शाही अंदाज़ में उनका स्वागत किया गया. निजी यात्रा होने के बावजूद सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं और उनका कार्यक्रम पूरी तरह गोपनीय रखा गया है, जिससे शहर में उत्सुकता का माहौल बना हुआ है.

थाईलैंड की राजकुमारी सिरीवन्नावरी जोधपुर में निजी दौरे पर पहुंचीं


जोधपुर : राजस्थान के जोधपुर शहर में शुक्रवार को उस समय खास हलचल देखने को मिली जब थाईलैंड की राजकुमारी प्रिंसेस सिरीवन्नावरी अपने निजी दौरे पर विशेष विमान के जरिए वायुसेना स्टेशन जोधपुर पहुंचीं. उनके आगमन को लेकर पहले से ही प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर थीं. वायुसेना स्टेशन पर निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत उनका औपचारिक स्वागत किया गया, जिसके बाद वे सीधे उम्मेद भवन पैलेस के लिए रवाना हुईं.

रविवार, 8 फ़रवरी 2026

यह रहा Kalmegh Q (Andrographis paniculata) का उपयोग, मात्रा और फायदे – हिंदी में 🌿👇

यह रहा Kalmegh Q (Andrographis paniculata) का उपयोग, मात्रा और फायदे – हिंदी में 🌿👇

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Kalmegh Q – उपयोग (Uses)

🟡 लिवर रोग (मुख्य दवा)

पीलिया (Jaundice)

फैटी लिवर

लिवर एन्ज़ाइम बढ़े हुए (SGOT / SGPT)

लिवर में सूजन (Hepatomegaly)

🤢 पाचन तंत्र

भूख न लगना

मतली, उल्टी

कड़वा स्वाद मुंह में

गैस, अपच

🔥 बुखार (विशेषकर वायरल)

वायरल फीवर

मलेरिया, डेंगू में सहायक

शरीर टूटना, कमजोरी

🛡️ इम्युनिटी बूस्टर

बार-बार संक्रमण

कमजोर प्रतिरोधक क्षमता

रिकवरी फेज में उपयोगी

🩸 त्वचा व रक्त शुद्धि

खून की गर्मी

फोड़े-फुंसी

एलर्जिक स्किन प्रॉब्लम

🧠 अन्य लाभ

सूजन कम करता है

एंटी-वायरल, एंटी-बैक्टीरियल गुण

शरीर को डिटॉक्स करता है

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Kalmegh Q – मात्रा (Dose)

💧 मदर टिंचर (Q)

10–20 बूंद

आधे कप पानी में

दिन में 2–3 बार

⏳ अवधि

तीव्र रोग: 7–10 दिन

पुराना लिवर रोग: 4–6 हफ्ते (डॉक्टर की सलाह से)

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कब सबसे ज्यादा असरदार? (Keynote)

👉 कड़वा स्वाद + लिवर खराब + भूख नहीं लगती
👉 बुखार के बाद कमजोरी
👉 पीलिया में आंखें पीली

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सावधानियां

⚠️ बहुत ज्यादा कमजोरी या लो BP में सावधानी
⚠️ गर्भवती महिलाएं बिना सलाह न लें
⚠️ अत्यधिक मात्रा से मतली बढ़ सकती है

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होम्योपैथिक दवा एड्रेनालिनम और इसकी विभिन्न पोटेंसी और इसके उपयोग

🌿🌿होम्योपैथिक दवा एड्रेनालिनम और इसकी विभिन्न पोटेंसी  और इसके उपयोग
                                              हम उस दवा की बात करेंगे जो शॉक, अस्थमा, लो ब्लड प्रेशर, हृदय की कमजोरी, एलर्जी रिएक्शन, हेमोरेज, हाय फीवर, यूटिकेरिया, ग्रेव्स और एडिसन डिजीज, तथा हार्मोनल इम्बैलेंस से होने वाली कमजोरी (adrenal insufficiency या chronic stress से थकान, वीकनेस) में सबसे तेज़ और सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है। यह है एड्रेनालिनम (Adrenalinum). यह दवा सुप्रारेनल ग्रंथि के सेक्रेशन (एपिनेफ्रिन/एड्रेनालिन) से बनती है। होम्योपैथी में इसे “शॉक, अस्थमा, लो बीपी और एड्रेनल कमजोरी का सबसे अच्छा टॉनिक” कहा जाता है। जब मरीज कहे “डॉक्टर साहब, शॉक लग गया है, सांस फूल रही है, बीपी बहुत कम है, थकान बहुत है, हार्मोनल असंतुलन से कमजोरी महसूस हो रही है” – तो यह दवा 7-15 दिन में चमत्कार कर देती है।

🌿🌿🌿🌿Adrenalinum क्या है?  
Adrenalinum एक होम्योपैथिक सरकोड दवा है जो एड्रेनल ग्रंथि (suprarenal glands) के मेडुला से निकाले गए एपिनेफ्रिन से बनाई जाती है।  
मुख्य कंपाउंड: एड्रेनालिन – वासोकॉन्स्ट्रिक्शन (रक्त वाहिकाओं का संकुचन) करता है, ब्लड प्रेशर बढ़ाता है, सिम्पैथेटिक सिस्टम को स्टिमुलेट करता है, एड्रेनल फंक्शन को बैलेंस करता है।

 उपयोग और फायदे
एड्रेनालिनम मुख्य रूप से शॉक, रेस्पिरेटरी, कार्डियोवैस्कुलर, एलर्जी और हार्मोनल इम्बैलेंस में इस्तेमाल होती है।

1. शॉक / सर्कुलेटरी कोलैप्स – पेलर, लो बीपी, कोल्ड स्वेट, एनेस्थीसिया के दौरान शॉक  
2. अस्थमा / एक्यूट लंग कंजेशन – ब्रोंकियल अस्थमा, डिफिकल्ट ब्रीदिंग, थोरैसिक कंस्ट्रिक्शन  
3. लो ब्लड प्रेशर / हार्ट फेलियर – कमजोर पल्स, हार्ट फेलियर  
4. एंजाइना पेक्टोरिस / एरिटेरियोस्क्लेरोसिस – एंजाइना, क्रॉनिक एओर्टाइटिस  
5. हाय फीवर / एलर्जी – हाय फीवर, सीरम रैशेज, एक्यूट यूटिकेरिया  
6. हेमोरेज / ब्लीडिंग – कैपिलरी ब्लीडिंग रोकना  
7. हार्मोनल इम्बैलेंस से कमजोरी – एड्रेनल इंसफिशिएंसी (Addison’s disease), क्रॉनिक स्ट्रेस/बर्नआउट से थकान, वीकनेस, एंडोक्राइन डिसऑर्डर (Grave’s disease), एड्रेनल एग्जॉर्शन से जनरल डेबिलिटी  

 विभिन्न पोटेंसी जो विभिन्न बीमारियों में काम आती हैं
 2X-6X: एक्यूट शॉक, अस्थमा, लो बीपी, हार्मोनल कमजोरी – दिन में 2-4 बार (सबसे ज्यादा इस्तेमाल, बोएरिक के अनुसार)  
 30C : एलर्जी, हाय फीवर, एंजाइना – दिन में 2-3 बार  
 200C : क्रॉनिक अस्थमा, एड्रेनल कमजोरी, हार्मोनल इम्बैलेंस – हफ्ते में 1 डोज  
 1M : बहुत पुरानी कार्डियक या एंडोक्राइन समस्या – महीने में 1 डोज  

 सावधानियां
- अधिक डोज से कार्डियक या आर्टेरियल समस्या हो सकती है  
- सॉल्यूशन को एयर और लाइट से बचाएं  
- गर्भवती महिलाएँ डॉक्टर की सलाह से  
- 3 महीने कोर्स के बाद 15 दिन गैप जरूरी  

एड्रेनालिनम शॉक, अस्थमा, लो ब्लड प्रेशर और हार्मोनल इम्बैलेंस से कमजोरी की नंबर-1 होम्योपैथिक दवा है।  
जब मरीज कहे “डॉक्टर साहब, शॉक लग गया, सांस नहीं आ रही, थकान बहुत है, हार्मोनल कमजोरी महसूस हो रही है” – तो यह दवा 7-15 दिन में नई ताकत देती है। हजारों मरीजों ने अस्थमा, एलर्जी, शॉक और एड्रेनल कमजोरी ठीक की है। यह एड्रेनल का होम्योपैथिक चमत्कार है। कोई भी होम्योपैथिक दवा होम्योपैथिक डॉक्टर की सलाह से ही लें।
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भगवान ने उस दिन सिद्ध कर दिया कि वे सोने-चांदी से नहीं, केवल सच्चे भाव से खरीदे जा सकते हैं। भक्त का प्रेम इतना भारी था कि भगवान उसके वश में होकर, उस छोटी सी नथ के मोल "बिक" गए।

गुजरात की पावन धरती पर, डाकोर और द्वारका के बीच की दूरी सैकड़ों किलोमीटर की है, लेकिन एक भक्त की पुकार ने इस दूरी को मिटा दिया। यह कहानी है विजयसिंह बोडाणा की, जिनके प्रेम ने द्वारकाधीश को अपना सिंहासन छोड़ने पर विवश कर दिया।
विजयसिंह बोडाणा, एक क्षत्रिय राजपूत, जिनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य था—द्वारकाधीश के दर्शन। जवानी से लेकर बुढ़ापे तक, हर छह महीने में, वे अपने हाथों में तुलसी का पौधा लेकर डाकोर से द्वारका तक की लंबी यात्रा पैदल तय करते थे।

वर्षों बीतते गए, मौसम बदलते रहे, लेकिन बोडाणा का नियम नहीं टूटा। 72 वर्ष की आयु तक वे निरंतर चलते रहे। लेकिन अब शरीर थकने लगा था। हड्डियाँ जवाब दे रही थीं और पैरों के छाले अब नासूर बन चुके थे।

अपनी अंतिम यात्रा के दौरान, जब वे द्वारका पहुँचे, तो उनकी आँखों में आंसू थे। उन्होंने गर्भ गृह में खड़े होकर कांपती आवाज़ में कहा:

 "हे प्रभु! मेरा मन तो आपके चरणों में ही रहना चाहता है, लेकिन अब यह शरीर साथ नहीं देता। शायद यह मेरे जीवन का अंतिम दर्शन हो। मुझे क्षमा करना, अब मैं और नहीं आ सकूँगा।"

भक्त की यह पीड़ा भगवान से देखी नहीं गई। उसी रात, द्वारकाधीश बोडाणा के सपने में आए। भगवान की आवाज़ में एक सखा जैसा अपनापन था--

"बोडाणा! तुझे उदास होने की आवश्यकता नहीं है। यदि तू मेरे पास नहीं आ सकता, तो क्या हुआ? मैं स्वयं तेरे पास आऊँगा। अगली बार जब तू आए, तो पैदल मत आना, एक बैलगाड़ी लेकर आना। मैं तेरे साथ डाकोर चलूँगा।"

बोडाणा की खुशी का ठिकाना न रहा। वे वापस डाकोर गए और जैसे-तैसे एक टूटी-फूटी बैलगाड़ी का इंतजाम किया।

जब बोडाणा अपनी जर्जर बैलगाड़ी लेकर द्वारका पहुँचे, तो वहाँ के पुजारियों (गुगलियों) ने उनका मज़ाक उड़ाया— "अरे बोडाणा! इस टूटी गाड़ी में किसे ले जाओगे?" बोडाणा केवल मुस्कुरा दिए।

रात के गहरे सन्नाटे में, जब पूरी द्वारका नगरी सो रही थी, त्रिभुवन के स्वामी भगवान श्री रणछोड़राय चुपके से मंदिर से निकले और बोडाणा की बैलगाड़ी में विराजमान हो गए।

कहते हैं कि उस रात एक चमत्कार हुआ। जिस रास्ते को तय करने में बैलों को हफ़्तों लगते थे, वह सैकड़ों किलोमीटर का रास्ता भगवान की कृपा से पलक झपकते ही एक ही रात में तय हो गया। सुबह की पहली किरण के साथ, द्वारकाधीश डाकोर में थे।

सुबह जब द्वारका के मंदिर के पट खुले, तो वहाँ हाहाकार मच गया—मूर्ति गायब थी! पुजारियों को तुरंत समझ आ गया कि यह काम बोडाणा का ही है। क्रोध और लोभ में अंधे होकर, वे घोड़ों पर सवार होकर डाकोर की ओर दौड़े।

डाकोर पहुँचकर उन्होंने बोडाणा को घेर लिया। भगवान को वहाँ के गोमती तालाब में छिपा दिया गया था, लेकिन पुजारियों ने उन्हें ढूँढ निकाला। वे मूर्ति वापस ले जाने पर अड़ गए। बोडाणा गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन पुजारियों की नज़र केवल चढ़ावे और धन पर थी।
अंत में, पुजारियों ने एक असंभव शर्त रखी:
 "अगर तुम मूर्ति के वजन के बराबर सोना हमें दे दो, तो हम भगवान को यहीं छोड़ देंगे, वरना हम उन्हें ले जा रहे हैं।"

बोडाणा अत्यंत निर्धन थे। सोने के नाम पर उनके पास कुछ न था। पुजारियों को लगा कि वे जीत गए हैं। लेकिन बोडाणा ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी पत्नी गंगाबाई की ओर देखा। पत्नी ने बिना एक पल गँवाए, अपनी नाक की छोटी सी स्वर्ण नथ (नाक की बाली) उतारकर बोडाणा के हाथ में रख दी।

गाँव के बीचों-बीच तराजू सजाया गया।

  एक पलड़े में ब्रह्मांड के स्वामी, भारी-भरकम पत्थर की मूर्ति।
 दूसरे पलड़े में भक्त के प्रेम से भीगी हुई, रत्ती भर की सोने की नथ।

पुजारी हँस रहे थे, लेकिन तभी वह हुआ जो इतिहास बन गया।

जैसे ही नथ तराजू पर रखी गई, मूर्ति वाला पलड़ा हवा में उठ गया और नथ वाला पलड़ा भारी हो गया! पुजारियों की आँखें फटी की फटी रह गईं। 

भगवान ने उस दिन सिद्ध कर दिया कि वे सोने-चांदी से नहीं, केवल सच्चे भाव से खरीदे जा सकते हैं। भक्त का प्रेम इतना भारी था कि भगवान उसके वश में होकर, उस छोटी सी नथ के मोल "बिक" गए।

पुजारियों को अपनी गलती का अहसास हुआ। वे खाली हाथ और ग्लानि के साथ द्वारका लौट गए (जहाँ बाद में नई मूर्ति स्थापित की गई),लेकिन डाकोर के भव्य मंदिर में आज भी वही मूल मूर्ति विराजमान है, जिसे बोडाणा अपनी बैलगाड़ी में लाए थे।

आज भी जब भक्त 'रणछोड़राय' के दर्शन करते हैं, तो उन्हें याद आता है कि ईश्वर धनवानों का नहीं, बल्कि सच्चे प्रेम करने वालों का है।

जय श्री राधे कृष्णा 🙏🏻🙏🏻

शनिवार, 7 फ़रवरी 2026

काशी में मणिकर्णिका घाट पर चिता जब शांत हो जाती है तब मुखाग्नि देने वाला व्यक्ति चिता भस्म पर 94 लिखता है।*

*शायद ही कुछ गिने चुने हिंदुओं को पता होगा....*

*काशी में मणिकर्णिका घाट पर चिता जब शांत हो जाती है तब मुखाग्नि देने वाला व्यक्ति चिता भस्म पर 94 लिखता है।*

*यह सभी को नहीं मालूम है।*

*खांटी बनारसी लोग या अगल बगल के लोग ही इस परम्परा को जानते हैं। बाहर से आये शवदाहक जन इस बात को नहीं जानते।*

*जीवन के शतपथ होते हैं।*

*100 शुभ कर्मों को करने वाला व्यक्ति मरने के बाद उसी के आधार पर अगला जीवन शुभ या अशुभ प्राप्त करता है।*

*94 कर्म मनुष्य के अधीन हैं। वह इन्हें करने में समर्थ है पर 6 कर्म का परिणाम ब्रह्मा जी के अधीन होता है।*

*हानि-लाभ, जीवन-मरण, यश- अपयश ये 6 कर्म विधि के नियंत्रण में होते हैं।*

*अतः आज चिता के साथ ही तुम्हारे 94 कर्म भस्म हो गये।*

*आगे के 6 कर्म अब तुम्हारे लिए नया जीवन सृजित करेंगे।*

*अतः 100 - 6 = 94 लिखा जाता है।*

*गीता में भी प्रतिपादित है कि मृत्यु के बाद मन अपने साथ 5 ज्ञानेन्द्रियों को लेकर जाता है।*

*यह संख्या 6 होती है। मन और पांच ज्ञान इन्द्रियाँ।*

*अगला जन्म किस देश में कहाँ और किन लोगों के बीच होगा यह प्रकृति के अतिरिक्त किसी को ज्ञात नहीं होता है।*

*अतः 94 कर्म भस्म हुए 6 साथ जा रहे हैं।*

*विदा यात्री।*

*तुम्हारे 6 कर्म तुम्हारे साथ हैं।*

*आपके लिए इन 100 शुभ कर्मों का विस्तृत विवरण दिया जा रहा है जो जीवन को धर्म और सत्कर्म की ओर ले जाते हैं एवं यह सूची आपके जीवन को सत्कर्म करने की प्रेरणा देगी......*

*100 शुभ कर्मों की गणना धर्म और नैतिकता के कर्म-*

1.सत्य बोलना

2.अहिंसा का पालन

3.चोरी न करना

4.लोभ से बचना

5.क्रोध पर नियंत्रण

6.क्षमा करना

7.दया भाव रखना

8.दूसरों की सहायता करना

9.दान देना (अन्न, वस्त्र, धन)

10.गुरु की सेवा

11.माता-पिता का सम्मान

12.अतिथि सत्कार

13.धर्मग्रंथों का अध्ययन

14.वेदों और शास्त्रों का पाठ

15.तीर्थ यात्रा करना

16.यज्ञ और हवन करना

17.मंदिर में पूजा-अर्चना

18.पवित्र नदियों में स्नान

19.संयम और ब्रह्मचर्य 9का पालन

20.नियमित ध्यान और योग सामाजिक और पारिवारिक कर्म

21.परिवार का पालन-पोषण

22.बच्चों को अच्छी शिक्षा देना

23.गरीबों को भोजन देना

24.रोगियों की सेवा

25.अनाथों की सहायता

26.वृद्धों का सम्मान

27.समाज में शांति स्थापना

28.झूठे वाद-विवाद से बचना

29.दूसरों की निंदा न करना

30.सत्य और न्याय का समर्थन

31.परोपकार करना

32.सामाजिक कार्यों में भाग लेना

33.पर्यावरण की रक्षा

34.वृक्षारोपण करना

35.जल संरक्षण

36.पशु-पक्षियों की रक्षा

37.सामाजिक एकता को बढ़ावा देना

38.दूसरों को प्रेरित करना

39.समाज में कमजोर वर्गों का उत्थान

40.धर्म के प्रचार में सहयोग आध्यात्मिक और व्यक्तिगत कर्म

41.नियमित जप करना

42.भगवान का स्मरण

43.प्राणायाम करना

44.आत्मचिंतन

45.मन की शुद्धि

46.इंद्रियों पर नियंत्रण

47.लालच से मुक्ति

48.मोह-माया से दूरी

49.सादा जीवन जीना

50.स्वाध्याय (आत्म-अध्ययन)

51.संतों का सान्निध्य

52.सत्संग में भाग लेना

53.भक्ति में लीन होना

54.कर्मफल भगवान को समर्पित करना

55.तृष्णा का त्याग

56.ईर्ष्या से बचना

57.शांति का प्रसार

58.आत्मविश्वास बनाए रखना

59.दूसरों के प्रति उदारता

60.सकारात्मक सोच रखना सेवा और दान के कर्म

61.भूखों को भोजन देना

62.नग्न को वस्त्र देना

63.बेघर को आश्रय देना

64.शिक्षा के लिए दान

65.चिकित्सा के लिए सहायता

66.धार्मिक स्थानों का निर्माण

67.गौ सेवा

68.पशुओं को चारा देना

69.जलाशयों की सफाई

70.रास्तों का निर्माण

71.यात्री निवास बनवाना

72.स्कूलों को सहायता

73.पुस्तकालय स्थापना

74.धार्मिक उत्सवों में सहयोग

75.गरीबों के लिए निःशुल्क भोजन

76.वस्त्र दान

77.औषधि दान

78.विद्या दान

79.कन्या दान

80.भूमि दान, नैतिक और मानवीय कर्म

81.विश्वासघात न करना

82.वचन का पालन

83.कर्तव्यनिष्ठा

84.समय की प्रतिबद्धता

85.धैर्य रखना

86.दूसरों की भावनाओं का सम्मान

87.सत्य के लिए संघर्ष

88.अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना

89.दुखियों के आँसू पोंछना

90.बच्चों को नैतिक शिक्षा

91.प्रकृति के प्रति कृतज्ञता

92.दूसरों को प्रोत्साहन

93.मन, वचन, कर्म से शुद्धता

94.जीवन में संतुलन बनाए रखना

*विधि के अधीन 6 कर्म*

95.हानि

96.लाभ

97.जीवन

98.मरण

99.यश

100.अपयश

*🙏🙏 हिंदू हो तो हिंदुओं को बताओ।*

*चाहे पार्टी के हो या विपक्षी, मरना सभी को है।*
 सनातन धर्म की जय 🚩

बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

आरक्षण का आधार पिछड़ा वर्ग या समूह के बजाय जाति किये जाने से इन 77 सालों में कोई लाभ नहीं हुआ है।*

सेवा में ,
        माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी, 
              प्रधानमंत्री ,
              भारत सरकार ,
                         नई दिल्ली 

विषय- भारत में आरक्षण को   समाप्त किये जाने एवं पदोन्नति में आरक्षण हेतु 117वें संबिधान संशोधन बिल को निरस्त किये जाने विषयक |

  माननीय महोदय , 
      सौभाग्य की बात है कि बहुत समय बाद भारत में आपके कुशल नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की केन्द्रीय सरकार विद्यमान है। 
आपके मेक इन इंडिया , स्वच्छता अभियान व नोट बंदी जैसी कई योजनाओं का हम ह्रदय से पूर्ण समर्थन करते हैं ।

 *माननीय महोदय* ,

जैसा कि आप जानते हैं कि समाज के पिछडे वर्गों के लिये संविधान में मात्र *दस वर्षों के लिये आरक्षण* की व्यवस्था की गयी थी, किन्तु जातिवादी व निहित कारणों से जाति आधारित आरक्षण की अवधि व क्रीमीलेयर की सीमा को बारंबार बिना समीचीन समीक्षा के बढाया जाता रहा है , 
जिसे कि 10--  10 वर्ष करते करते आज 77 वर्ष पूरे हो गए हैं ।
 *आज तक ऐसे आरक्षण प्राप्त डॉक्टर, इंजीनियर , प्रोफेसर , शिक्षक, कर्मचारी किसी ने नहीं कहा कि अब वह दलित या पिछड़ा नहीं रहा व अब उसे जातिगत आरक्षण की जरुरत नहीं है।*
  *इससे सिद्ध होता है कि आरक्षण का आधार पिछड़ा वर्ग या समूह के बजाय जाति किये जाने से इन 77 सालों में कोई लाभ नहीं हुआ है।*
महोदय , 
*इस जाति आरक्षण का लाभ जहां कुछ खास लोग परिवार समेत पीढी दर पीढी लेते जा रहें हैं वहीं वे इसे निम्नतम स्तर वाले अपने ही जरूरतमंदों लोगों तक भी नहीं पहुंचने दे रहे हैं। अन्यथा इन 77 वर्षों में हर आरक्षित वर्ग के व्यक्ति तक इसका लाभ पहुँच चुका होता।*
*ऐसे तबके को वे केवल अपने बार बार लाभ हेतु संख्या या गिनती तक ही सीमित कर दे रहे हैं।*
महोदय,
*गरीबी जाती देखकर नहीं आती*
*आरक्षण का आधार जाति किये जाने से जहाँ सामान्य वर्ग के तमाम निर्धन व जरूरतमंद युवा बेरोजगार व हतोत्साहित हैं , कर्मचारी कुंठित व उत्साहहीन हो रहे हैं,*
*वहीं समाज में जातिवाद का जहर बड़ी तेज़ी से बढ़ता जा रहा है।* 
  अत: आपसे निवेदन है कि राष्ट्र के समुत्थान व विकास के लिये संविधान में संशोधन करते हुये आरक्षण को समाप्त करने का कष्ट करेंगे ।
 किसी भी जाति - धर्म के असल जरूरतमंद निर्धन व्यक्ति को *आरक्षण नहीं बल्कि संरक्षण* देना सरकार को   सुनिश्चित करना चाहिए ।

*आरक्षण को पूर्ण रूप से समाप्त करने से पहले अगर वंचित वर्ग तक इसका ईमानदारी से वास्तव में सरकार लाभ पहुँचाना चाहती है तो इस आरक्षण को एक परिवार से एक ही व्यक्ति , केवल बिना विशेष योग्यता / कार्यकुशलता वाली समूह ग व घ की नौकरियों में मूल नियुक्ति के समय ही दिया जा सकता है।*

 *आयकर की सीमा में आने वाले व्यक्ति के परिवार को आरक्षण से वंचित किया जाना चाहिये ताकि राष्ट्र के बहुमूल्य संसाधनों का सदुपयोग सुनिश्चित हो सके।*

 *पदोन्नति में आरक्षण तो पूर्णत: बंद कराया ही जाना चाहिये जिससे कि योग्यता, कार्यकुशलता व वरिष्ठता का निरादर न हो।*

माननीय महोदय,
सविनय निवेदन है कि आपके कुशल नेतृत्व में भारत 'मेक इन इंडिया' और 'डिजिटल इंडिया' जैसे अभियानों के माध्यम से विश्व पटल पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। राष्ट्रहित में लिए गए आपके साहसी निर्णयों का हम पूर्ण समर्थन करते हैं। इसी क्रम में, राष्ट्र के समुत्थान हेतु आरक्षण नीति पर निम्नलिखित बिंदुओं की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ:

1. आर्थिक आधार पर संरक्षण: आरक्षण का आधार जाति के बजाय व्यक्ति की आर्थिक स्थिति होनी चाहिए। जो वास्तव में निर्धन हैं, उन्हें सरकार द्वारा विशेष 'संरक्षण' दिया जाना चाहिए, न कि केवल जातिगत लाभ।
2. एक परिवार, एक लाभ: आरक्षण का लाभ एक परिवार में केवल एक बार या एक पीढ़ी तक सीमित किया जाए, ताकि इसका लाभ उसी वर्ग के अन्य जरूरतमंदों तक पहुँच सके।
3. पदोन्नति में आरक्षण का विरोध: पदोन्नति में आरक्षण योग्यता और वरिष्ठता का अनादर करता है। इसे पूर्णतः समाप्त किया जाना चाहिए ताकि कार्यकुशलता बनी रहे।
4. क्रीमी लेयर और समीक्षा: 77 वर्षों के बाद भी आरक्षण की निरंतरता और क्रीमी लेयर की सीमाओं की निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है।
5. आयकर सीमा: आयकर के दायरे में आने वाले परिवारों को आरक्षण लाभ से मुक्त किया जाए ताकि संसाधनों का सही उपयोग हो सके।

महोदय, जातिवाद के जहर को समाप्त करने और राष्ट्र की प्रतिभाओं को कुंठा से बचाने के लिए इन सुधारों पर विचार करना समय की मांग है। आशा है कि आप राष्ट्रहित में इन सुझावों पर उचित कार्यवाही करेंगे।
भवदीय,

कैलाश चंद्र लढ़ा 
जोधपुर

   आशा है कि महोदय राष्ट्र व आमजन के हित में इन सुझावों पर ध्यान देते हुये समुचित कार्यवाही करने व इस हेतु जन जागरण अभियान प्रारंभ कर मुहिम को अंजाम तक पहुंचाने  का कष्ट करेंगे |




🙏 *विशेष निवेदन /आग्रह*🙏
*जन जागृति* के लिए आपको सिर्फ 10 लोगो को ये मेसेज फॉरवर्ड करना है और वो 10 लोग भी दूसरे 10 लोगों को ये मेसेज करें ।
इस प्रकार
1 = 10 लोग 
यह 10 लोग अन्य 10 लोगों को मेसेज करेंगे 
इस प्रकार :-
10 x10 = 100
100x10=1000
1000x10=10000
10000x10=100000
100000x10=1000000
1000000x10=10000000
10000000x10=100000000
100000000x10=1000000000
                            (100 करोड़ )
बस आपको तो एक कड़ी जोड़नी है देखते ही देखते सिर्फ आठ steps में पूरा देश जुड़ जायेगा।

Regards🙏

कैलाश चंद्र लढ़ा 
जोधपुर

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सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

Physostigma Venenosum 30 (जिसे 'Calabar Bean' भी कहा जाता है) होम्योपैथी में मुख्य रूप से आँखों की रोशनी, तंत्रिका तंत्र (Nervous System) और मांसपेशियों की कमजोरी के लिए एक अत्यंत प्रभावी औषधि है।

Physostigma Venenosum 30 (जिसे 'Calabar Bean' भी कहा जाता है) होम्योपैथी में मुख्य रूप से आँखों की रोशनी, तंत्रिका तंत्र (Nervous System) और मांसपेशियों की कमजोरी के लिए एक अत्यंत प्रभावी औषधि है।
यहाँ इसके उपयोग, लक्षण और खुराक की विस्तृत जानकारी दी गई है:

Physostigma 30 के मुख्य उपयोग (Key Benefits)
1. आँखों के लिए (Eye Symptoms - प्रमुख उपयोग)
Physostigma को अक्सर "आँखों की दवा" माना जाता है। यह निम्नलिखित स्थितियों में काम आती है:
 * Myopia (निकट दृष्टि दोष): यदि पास की चीजें देखने में दिक्कत हो और चश्मे का नंबर तेजी से बढ़ रहा हो।
 * आँखों में तनाव (Eye Strain): ज्यादा पढ़ने, सिलाई करने या कंप्यूटर/मोबाइल के उपयोग से आँखों में होने वाला दर्द।
 * Glaucoma (काला मोतिया): आँखों के अंदर बढ़े हुए दबाव को कम करने में सहायक।
 * Night Blindness: रात में कम दिखाई देना या धुंधलापन।
2. तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियां (Muscles & Nerves)
 * मांसपेशियों में फड़कन (Twitching): चेहरे की मांसपेशियों या पलकों का बार-बार फड़कना।
 * कमजोरी: शरीर में भारीपन और लकवा जैसी कमजोरी महसूस होना।
3. अन्य लक्षण
 * तेज सिरदर्द जो आँखों के तनाव से जुड़ा हो।
 * रीढ़ की हड्डी (Spine) में संवेदनशीलता और दर्द।
खुराक (Dosage)
Physostigma 30 की सामान्य खुराक इस प्रकार है:
 * तरल (Liquid): 2 से 3 बूंदें सीधे जीभ पर या एक चम्मच पानी में मिलाकर दिन में 3 बार लें।
 * गोलियां (Globules): 4 गोलियां दिन में 3 बार चूसें।
> ⚠️ नोट: बेहतर परिणाम के लिए दवा लेने से 15-20 मिनट पहले और बाद में कुछ न खाएं।
सोशल मीडिया पोस्ट कंटेंट (Professional Layout)
शीर्षक: क्या कंप्यूटर और मोबाइल के इस्तेमाल से आपकी आँखें थक जाती हैं? 👀💻
कंटेंट: आज के डिजिटल युग में 'Eye Strain' एक आम समस्या है। Physostigma 30 होम्योपैथी की एक ऐसी औषधि है जो न केवल आँखों की थकान को दूर करती है, बल्कि कमजोर होती दृष्टि (Weak Eyesight) और आँखों की मांसपेशियों की फड़कन में भी राहत देती है। अपनी आँखों को दें कुदरती सुरक्षा।

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फुर्सा साँप (Saw-scaled Viper) Member of BIG-4 venomous snakes found in India...!

🐍 फुर्सा साँप (Saw-scaled Viper) Member of BIG-4 venomous snakes found in India...!
वैज्ञानिक नाम: Echis carinatus
🔹 पहचान (Identification)
फुर्सा भारत के सबसे छोटे लेकिन अत्यंत खतरनाक विषैले साँपों में गिना जाता है। लंबाई: लगभग 30–60 सेमी, शरीर मोटा और छोटा, रंग हल्का भूरा, रेतीला या स्लेटी, शरीर पर ज़िग-ज़ैग या चेन जैसी सफ़ेद आकृतियाँ, आँखें बड़ी, पुतली लंबवत, शरीर की शल्क (scales) आरी के दाँत जैसे खुरदरे होते हैं।

👉 इन्हीं खुरदरे शल्कों को रगड़कर यह “सर्र-सर्र” जैसी चेतावनी ध्वनि निकालता है।

🔹 वितरण एवं आवास (Distribution & Habitat)
फुर्सा मुख्यतः भारत (विशेषकर शुष्क व अर्ध-शुष्क क्षेत्र) में पाया जाता है। वैसे यह पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, मध्य पूर्व व अफ्रीका के कुछ भागो में भी पाया जाता है। यह अधिकतर रेगिस्तानी क्षेत्र, पथरीली भूमि, खेत, झाड़ियाँ, मानव बस्तियों के आसपास पाया जाता है। 

👉 यह अक्सर रात में सक्रिय रहता है (Nocturnal)

🔹 स्वभाव (Behaviour)
यह अत्यंत चिड़चिड़ा और रक्षात्मक होता है। बिना चेतावनी भी हमला कर सकता है। अक्सर ज़मीन पर कुंडली मारे रहता है। खतरा महसूस होने पर S-आकार में कुंडली बनाकर आवाज़ करता है।

🔹 विष (Venom)
फुर्सा का विष हेमोटॉक्सिक होता है। यह विष रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया को बिगाड़ देता है। आंतरिक रक्तस्राव कराता है। ऊतकों (tissues) को नुकसान पहुँचाता है।

⚠️ फुर्सा भारत में सर्पदंश से होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण है।

लक्षण: तेज़ दर्द व सूजन, रक्तस्राव (नाक, मसूड़े, घाव से)उल्टी, चक्कर
और गंभीर मामलों में किडनी फेल होना।

🔹 आहार (Diet)
छोटे कृंतक (चूहे)
छिपकलियाँ
मेंढक
छोटे पक्षी

👉 यह पारिस्थितिकी तंत्र में चूहों की संख्या नियंत्रित करने में सहायक है।

🔹 प्रजनन (Reproduction)
मादा फुर्सा जीवित बच्चे जनती है (Viviparous), एक बार में लगभग 5–15 बच्चे हो सकते है। नवजात शिशु भी जन्म से ही विषैले होते हैं।

🔹 रोचक तथ्य: यह आकार में छोटा, लेकिन इसका विष अत्यंत शक्तिशाली होता है । इसकी “सर्र-सर्र” आवाज़ ही इसका सबसे बड़ा पहचान चिन्ह है। कई बार लोग इसे छोटा समझकर जोखिम उठा लेते हैं। उन्हें ऐसा करने से बचना चाहिए। 
Tags: #snake #viviparous #Echiscarinatus
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