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सोमवार, 30 मार्च 2026
पञ्चाङ्ग की उपयोगिता 🍁* *(अति महत्वपूर्ण जानकारी)*
चश्मे को कहें अलविदा... इस देसी कंपनी ने बना ली है आई ड्रॉप, चींटी जैसे शब्द भी दिखेंगे हाथी!
भारत की दवा नियामक संस्था ने प्रेसबायोपिया के इलाज के लिए नई उपचार पद्धति को मंजूरी दी है। मुंबई की एंटोड फार्मास्यूटिकल्स ने प्रेसवू आई ड्रॉप बनाई है। यह आई ड्रॉप 40 से ज्यादा उम्र के लोगों को चश्मे की आवश्यकता को कम करने में मदद करेगी। आई ड्रॉप अक्टूबर के पहले सप्ताह से उपलब्ध होगी।
नई दिल्ली: मुंबई की दवा कंपनी ने एक नई आई ड्रॉप बनाई है। इससे चश्मे की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। एंटोड फार्मास्यूटिकल्स का कहना है कि उनकी PresVu आई ड्रॉप प्रेसबायोपिया का इलाज कर सकती है। प्रेसबायोपिया उम्र के साथ होने वाली आंखों की समस्या है। इसमें पास की चीजें धुंधली दिखाई देती हैं। यह समस्या आमतौर पर 40 साल की उम्र के बाद शुरू होती है। भारत में लगभग 1.09 अरब से 1.80 अरब लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। दुनियाभर में भी यह एक आम समस्या है।
PresVu आई ड्रॉप को भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने मंजूरी दे दी है। इससे पहले केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की विशेषज्ञ समिति ने इसकी सिफारिश की थी। कंपनी का दावा है कि यह भारत में अपनी तरह की पहली आई ड्रॉप है जो प्रेसबायोपिया के इलाज के लिए बनाई गई है। यह 40 साल से ज्यादा उम्र के उन लोगों के लिए है जो चश्मा लगाना नहीं चाहते हैं।
आई ड्रॉप की सबसे खास बात
PresVu आई ड्रॉप की सबसे खास बात यह है कि इसमें एडवांस्ड डायनामिक बफर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। इससे यह आई ड्रॉप आंखों के पीएच लेवल के हिसाब से खुद को ढाल लेती है। लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर भी यह सुरक्षित रहती है। एंटोड फार्मास्यूटिकल्स के सीईओ निखिल के मसुरकर का कहना है कि PresVu केवल एक प्रोडक्ट नहीं है, यह एक समाधान है जो लाखों लोगों को बेहतर दृष्टि प्रदान करके उनके जीवन को बेहतर बना सकती है
डॉक्टर आदित्य सेठी का कहना है कि PresVu आई ड्रॉप के इस्तेमाल से सिर्फ 15 मिनट में पास की नजर बेहतर होने लगती है। यह उन लोगों के लिए एक बेहतर विकल्प है जो प्रेसबायोपिया की समस्या से जूझ रहे हैं। यह आई ड्रॉप अक्टूबर के पहले हफ्ते से बाजार में उपलब्ध होगी। 40 से 55 साल की उम्र के लोग जिनको प्रेसबायोपिया की शिकायत है, वे डॉक्टर की सलाह पर इस आई ड्रॉप का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसकी कीमत 350 रुपये रखी गई है।
शनिवार, 28 मार्च 2026
क्या सचमुच 84 लाख योनियों में भटकना होता है ?
क्या सचमुच 84 लाख योनियों में भटकना होता है ?
हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार जीवात्मा 84 लाख योनियों में भटकने के बाद मनुष्य जन्म पाता है। अब सवाल कई उठते हैं। पहला यह कि ये योनियां क्या होती हैं? दूसरा यह कि जैसे कोई बीज आम का है तो वह मरने के बाद भी तो आम का ही बीज बनता है तो फिर मनुष्य को भी मरने के बाद मनुष्य ही बनना चाहिए। पशु को मरने के बाद पशु ही बनना चाहिए। क्या मनुष्यात्माएं पाशविक योनियों में जन्म नहीं लेतीं? या कहीं ऐसा तो नहीं कि 84 लाख की धारणा महज एक मिथक-भर है? तीसरा सवाल यह कि क्या सचमुच ही एक आत्मा या जीवात्मा को 84 लाख योनियों में भटकने के बाद ही मनुष्य जन्म मिलता है? आओ इनके उत्तर जानें...
क्या हैं योनियां
जैसा कि सभी को पता है कि मादा के जिस अंग से जीवात्मा का जन्म होता है, उसे हम योनि कहते हैं। इस तरह पशु योनि, पक्षी योनि, कीट योनि, सर्प योनि, मनुष्य योनि आदि। उक्त योनियों में कई प्रकार के उप-प्रकार भी होते हैं। योनियां जरूरी नहीं कि 84 लाख ही हों। वक्त से साथ अन्य तरह के जीव-जंतु भी उत्पन्न हुए हैं। आधुनिक विज्ञान के अनुसार अमीबा से लेकर मानव तक की यात्रा में लगभग 1 करोड़ 04 लाख योनियां मानी गई हैं। ब्रिटिश वैज्ञानिक राबर्ट एम मे के अनुसार दुनिया में 87 लाख प्रजातियां हैं। उनका अनुमान है कि कीट-पतंगे, पशु-पक्षी, पौधा-पादप, जलचर-थलचर सब मिलाकर जीव की 87 लाख प्रजातियां हैं। गिनती का थोड़ा-बहुत अंतर है। लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि आज से हजारों वर्ष पूर्व ऋषि-मुनियों ने बगैर किसी साधन और आधुनिक तकनीक के यह जान लिया था कि योनियां 84 लाख के लगभग हैं।
क्रम विकास का सिद्धांत :
गर्भविज्ञान के अनुसार क्रम विकास को देखने पर मनुष्य जीव सबसे पहले एक बिंदु रूप होता है, जैसे कि समुद्र के एककोशीय जीव। वही एककोशीय जीव बाद में बहुकोशीय जीवों में परिवर्तित होकर क्रम विकास के तहत मनुष्य शरीर धारण करते हैं। स्त्री के गर्भावस्था का अध्ययन करने वालों के अनुसार जंतुरूप जीव ही स्वेदज, जरायुज, अंडज और उद्भीज जीवों में परिवर्तित होकर मनुष्य रूप धारण करते हैं। मनुष्य योनि में सामान्यत: जीव 9 माह और 9 दिनों के विकास के बाद जन्म लेने वाला बालक गर्भावस्था में उन सभी शरीर के आकार को धारण करता है, जो इस सृष्टि में पाए जाते हैं।
गर्भ में बालक बिंदु रूप से शुरू होकर अंत में मनुष्य का बालक बन जाता है अर्थात वह 83 प्रकार से खुद को बदलता है। बच्चा जब जन्म लेता है, तो पहले वह पीठ के बल पड़ा रहता है अर्थात किसी पृष्ठवंशीय जंतु की तरह। बाद में वह छाती के बल सोता है, फिर वह अपनी गर्दन वैसे ही ऊपर उठाता है, जैसे कोई सर्प या सरीसृप जीव उठाता है। तब वह धीरे-धीरे रेंगना शुरू करता है, फिर चौपायों की तरह घुटने के बल चलने लगता है। अंत में वह संतुलन बनाते हुए मनुष्य की तरह चलता है। भय, आक्रामकता, चिल्लाना, अपने नाखूनों से खरोंचना, ईर्ष्या, क्रोध, रोना, चीखना आदि क्रियाएं सभी पशुओं की हैं, जो मनुष्य में स्वत: ही विद्यमान रहती हैं। यह सब उसे क्रम विकास में प्राप्त होता है।
हिन्दू धर्मानुसार सृष्टि में जीवन का विकास क्रमिक रूप से हुआ है।
श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार..
सृष्ट्वा पुराणि विविधान्यजयात्मशक्तया वृक्षान् सरीसृपपशून् खगदंशमत्स्यान्।
तैस्तैर अतुष्टहृदय: पुरुषं विधाय ब्रह्मावलोकधिषणं मुदमाप देव:॥ (11 -9 -28 श्रीमद्भागवतपुराण)
अर्थात विश्व की मूलभूत शक्ति सृष्टि के रूप में अभिव्यक्त हुई और इस क्रम में वृक्ष, सरीसृप, पशु-पक्षी, कीड़े-मकोड़े, मत्स्य आदि अनेक रूपों में सृजन हुआ, परंतु उससे उस चेतना की पूर्ण अभिव्यक्ति नहीं हुई अत: मनुष्य का निर्माण हुआ, जो उस मूल तत्व ब्रह्म का साक्षात्कार कर सकता था।
योग के 84 आसन : योग के 84 आसन भी इसी क्रम विकास से ही प्रेरित हैं। एक बच्चा वह सभी आसन करता रहता है, जो कि योग में बताए जाते हैं। उक्त आसन करने रहने से किसी भी प्रकार का रोग और शोक नहीं होता। वृक्षासन से लेकर वृश्चिक आसन तक कई पशुवत आसन हैं। मत्स्यासन, सर्पासन, बकासन, कुर्मासन, वृश्चिक, वृक्षासन, ताड़ासन आदि अधिकतर पशुवत आसन ही है।
जैसे कोई बीज आम का है तो वह मरने के बाद भी तो आम का ही बीज बनता है तो फिर मनुष्य को भी मरने के बाद मनुष्य ही बनना चाहिए। पशु को मरने के बाद पशु ही बनना चाहिए। क्या मनुष्यात्माएं पाशविक योनियों में जन्म नहीं लेतीं?
प्रश्न : मनुष्य मरने के बाद मनुष्य और पशु मरने के बाद पशु ही बनता है?
उत्तर : क्रम विकास के हिन्दू और वैज्ञानिक सिद्धांत से हमें बहुत-कुछ सीखने को मिलता है, लेकिन हिन्दू धर्मानुसार जीवन एक चक्र है। इस चक्र से निकलने को ही 'मोक्ष' कहते हैं। माना जाता है कि जो ऊपर उठता है, एक दिन उसे नीचे भी गिरना है, लेकिन यह तय करना है उक्त आत्मा की योग्यता और उसके जीवट संघर्ष पर।
यदि यह मान लिया जाए कि कोई पशु आत्मा पशु ही बनती है और मनुष्य आत्मा मनुष्य तो फिर तो कोई पशु आत्मा कभी मनुष्य बन ही नहीं सकती। किसी कीड़े की आत्मा कभी पशु बन ही नहीं सकती। ऐसा मानने से बुद्ध की जातक कथाएं अर्थात उनके पिछले जन्म की कहानियों को फिर झूठ मान लिया जाएगा। इसी तरह ऐसे कई ऋषि-मुनि हुए हैं जिन्होंने अपने कई जन्मों पूर्व हाथी-घोड़े या हंस के होने का वृत्तांत सुनाया। ...तो यदि यह कोई कहता है कि मनुष्यात्माएं मनुष्य और पशु-पक्षी की आत्माएं पशु या पक्षी ही बनती हैं, वे सैद्धांतिक रूप से गलत हैं। हो सकता है कि उन्हें धर्म की ज्यादा जानकारी न हो।
दरअसल, उक्त प्रश्न के उत्तर को समझने के लिए हमें कर्म-भाव, सुख-दुख और विचारों पर आधारित गतियों को समझना होगा। सामान्य तौर पर 3 तरह की गतियां होती हैं- 1. उर्ध्व गति, 2. स्थिर गति और 3. अधो गति। प्रत्येक जीव की ये 3 तरह की गतियां होती हैं। यदि कोई मनुष्यात्मा मरकर उर्ध्व गति को प्राप्त होती है तो वह देवलोक को गमन करती है। स्थिर गति का अर्थ है कि वह फिर से मनुष्य बनकर वह सब कार्य फिर से करेगा, जो कि वह कर चुका है। अधोगति का अर्थ है कि अब वह संभवत: मनुष्य योनि से नीचे गिरकर किसी पशु योनि में जाएगा या यदि उसकी गिरावट और भी अधिक है तो वह उससे भी नीचे की योनि में जा सकता है अर्थात नीचे गिरने के बाद कहां जाकर वह अटकेगा, कुछ कह नहीं सकते। 'आसमान से गिरे और लटके खजूर पर आकर' ऐसा भी उसके साथ हो सकता है। ...इसीलिए कहते हैं कि मनुष्य योनि बड़ी दुर्लभ है और इसे जरा संभालकर ही रखें। कम से कम स्थिर गति में रहें।
84 लाख योनियों के प्रकार जानिए...
84 लाख योनियां अलग-अलग पुराणों में अलग-अलग बताई गई हैं, लेकिन हैं सभी एक ही। अनेक आचार्यों ने इन 84 लाख योनियों को 2 भागों में बांटा है। पहला योनिज तथा दूसरा आयोनिज अर्थात 2 जीवों के संयोग से उत्पन्न प्राणी योनिज कहे गए और जो अपने आप ही अमीबा की तरह विकसित होते हैं उन्हें आयोनिज कहा गया। इसके अतिरिक्त स्थूल रूप से प्राणियों को 3 भागों में बांटा गया है-
1. जलचर : जल में रहने वाले सभी प्राणी।
2. थलचर : पृथ्वी पर विचरण करने वाले सभी प्राणी।
3. नभचर : आकाश में विहार करने वाले सभी प्राणी।
उक्त 3 प्रमुख प्रकारों के अंतर्गत मुख्य प्रकार होते हैं अर्थात 84 लाख योनियों में प्रारंभ में निम्न 4 वर्गों में बांटा जा सकता है।
1. जरायुज : माता के गर्भ से जन्म लेने वाले मनुष्य, पशु जरायुज कहलाते हैं।
2. अंडज : अंडों से उत्पन्न होने वाले प्राणी अंडज कहलाते हैं।
3. स्वदेज : मल-मूत्र, पसीने आदि से उत्पन्न क्षुद्र जंतु स्वेदज कहलाते हैं।
4. उदि्भज : पृथ्वी से उत्पन्न प्राणी उदि्भज कहलाते हैं।
पदम् पुराण के एक श्लोकानुसार...
जलज नव लक्षाणी, स्थावर लक्ष विम्शति, कृमयो रूद्र संख्यक:।
पक्षिणाम दश लक्षणं, त्रिन्शल लक्षानी पशव:, चतुर लक्षाणी मानव:।। -(78:5 पद्मपुराण)
अर्थात जलचर 9 लाख, स्थावर अर्थात पेड़-पौधे 20 लाख, सरीसृप, कृमि अर्थात कीड़े-मकौड़े 11 लाख, पक्षी/नभचर 10 लाख, स्थलीय/थलचर 30 लाख और शेष 4 लाख मानवीय नस्ल के। कुल 84 लाख।
आप इसे इस तरह समझें
* पानी के जीव-जंतु- 9 लाख
* पेड़-पौधे- 20 लाख
* कीड़े-मकौड़े- 11 लाख
* पक्षी- 10 लाख
* पशु- 30 लाख
* देवता-मनुष्य आदि- 4 लाख
कुल योनियां- 84 लाख।
'प्राचीन भारत में विज्ञान और शिल्प' ग्रंथ में शरीर रचना के आधार पर प्राणियों का वर्गीकरण किया गया है जिसके अनुसार 1. एक शफ (एक खुर वाले पशु)- खर (गधा), अश्व (घोड़ा), अश्वतर (खच्चर), गौर (एक प्रकार की भैंस), हिरण इत्यादि। 2. द्विशफ (दो खुर वाले पशु)- गाय, बकरी, भैंस, कृष्ण मृग आदि। 3. पंच अंगुल (पांच अंगुली) नखों (पंजों) वाले पशु- सिंह, व्याघ्र, गज, भालू, श्वान (कुत्ता), श्रृंगाल आदि।
प्रश्न : क्या सचमुच 84 लाख योनियों में भटकना होता है?
उत्तर : ऊपर हमने एक प्रश्न कि मनुष्य मरने के बाद मनुष्य और पशु मरने के बाद पशु ही बनता है? का उत्तर दिया था। उसके उत्तर में ही उपरोक्त प्रश्न का आधा जवाब मिल ही गया होगा। इससे पूर्व क्रम विकास में भी इसका जवाब छिपा है। दरअसल, पहले गतियों को अच्छे से समझें फिर समझ में आएगा कि हमारे कर्म, भाव और विचार को क्यों उत्तम और सकारात्मक रखना चाहिए।
क्रम विकास 2 तरह का होता है- एक चेतना (आत्मा) का विकास, दूसरा भौतिक जीव का विकास। दूसरे को पहले समझें। यह जगत आकार-प्रकार का है। अमीबा से विकसित होकर मनुष्य तक का सफर ही भौतिक जीव विकास है। इस भौतिक शरीर में जो आत्मा निवास करती है।
प्रत्येक जीव की मरने के बाद कुछ गतियां होती हैं, जो कि उसके घटना, कर्म, भाव और विचार पर आधारित होती हैं। मरने के बाद आत्मा की 3 तरह की गतियां होती हैं- 1. उर्ध्व गति, 2. स्थिर गति और 3. अधो गति। इसे ही अगति और गति में विभाजित किया गया है। वेदों, उपनिषदों और गीता के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा की 8 तरह की गतियां मानी गई हैं। ये गतियां ही आत्मा की दशा या दिशा तय करती हैं। इन 8 तरह की गतियों को मूलत: 2 भागों में बांटा गया है- 1. अगति, 2. गति। अधो गति में गिरना अर्थात फिर से कोई पशु या पक्षी की योनि में चला जाना, जो कि एक चक्र में फंसने जैसा है।
1. अधोगति : अगति में व्यक्ति को मोक्ष नहीं मिलता है और उसे फिर से जन्म लेना पड़ता है।
2. गति : गति में जीव को किसी लोक में जाना पड़ता है।
3.अधोगति के प्रकार : अगति के 4 प्रकार हैं- 1. क्षिणोदर्क, 2. भूमोदर्क, 3. अगति और 4. दुर्गति।
1. क्षिणोदर्क : क्षिणोदर्क अगति में जीव पुन: पुण्यात्मा के रूप में मृत्युलोक में आता है और संतों-सा जीवन जीता है।
2. भूमोदर्क : भूमोदर्क में वह सुखी और ऐश्वर्यशाली जीवन पाता है।
3. अगति : अगति में नीच या पशु जीवन में चला जाता है।
4. दुर्गति : गति में वह कीट-कीड़ों जैसा जीवन पाता है।
गति के प्रकार : गति के अंतर्गत 4 लोक दिए गए हैं: 1. ब्रह्मलोक, 2. देवलोक, 3. पितृलोक और 4. नर्कलोक। जीव अपने कर्मों के अनुसार उक्त लोकों में जाता है।
पुराणों के अनुसार आत्मा 3 मार्गों के द्वारा उर्ध्व या अधोलोक की यात्रा करती है। ये 3 मार्ग हैं- 1. अर्चि मार्ग, 2. धूम मार्ग और 3. उत्पत्ति-विनाश मार्ग।
1. अर्चि मार्ग ब्रह्मलोक : अर्चि मार्ग ब्रह्मलोक और देवलोक की यात्रा के लिए है।
2. धूममार्ग पितृलोक : धूममार्ग पितृलोक की यात्रा के लिए है। सूर्य की किरणों में एक 'अमा' नाम की किरण होती है जिसके माध्यम से पितृगण पितृ पक्ष में आते-जाते हैं।
3. उत्पत्ति-विनाश मार्ग : उत्पत्ति-विनाश मार्ग नर्क की यात्रा के लिए है। यह यात्रा बुरे सपनों की तरह होती है।
जब भी कोई मनुष्य मरता है और आत्मा शरीर को त्यागकर उत्तर कार्यों के बाद यात्रा प्रारंभ करती है तो उसे उपरोक्त 3 मार्ग मिलते हैं। उसके कर्मों के अनुसार उसे कोई एक मार्ग यात्रा के लिए प्राप्त हो जाता है।
शुक्ल कृष्णे गती ह्येते जगत: शाश्वते मते।
एकया यात्यनावृत्ति मन्ययावर्तते पुन:।। -गीता
भावार्थ : क्योंकि जगत के ये 2 प्रकार के शुक्ल और कृष्ण अर्थात देवयान और पितृयान मार्ग सनातन माने गए हैं। इनमें एक द्वारा गया हुआ (अर्थात इसी अध्याय के श्लोक 24 के अनुसार अर्चिमार्ग से गया हुआ योगी।) जिससे वापस नहीं लौटना पड़ता, उस परम गति को प्राप्त होता है और दूसरे के द्वारा गया हुआ (अर्थात इसी अध्याय के श्लोक 25 के अनुसार धूममार्ग से गया हुआ सकाम कर्मयोगी) फिर वापस आता है अर्थात जन्म-मृत्यु को प्राप्त होता है।।26।।
कठोपनिषद अध्याय 2 वल्ली 2 के 7वें मंत्र में यमराजजी कहते हैं कि अपने-अपने शुभ-अशुभ कर्मों के अनुसार शास्त्र, गुरु, संग, शिक्षा, व्यवसाय आदि के द्वारा सुने हुए भावों के अनुसार मरने के पश्चात कितने ही जीवात्मा दूसरा शरीर धारण करने के लिए वीर्य के साथ माता की योनि में प्रवेश कर जाते हैं। जिनके पुण्य-पाप समान होते हैं, वे मनुष्य का और जिनके पुण्य कम तथा पाप अधिक होते हैं, वे पशु-पक्षी का शरीर धारण कर उत्पन्न होते हैं और कितने ही जिनके पाप अत्यधिक होते हैं, स्थावर भाव को प्राप्त होते हैं अर्थात वृक्ष, लता, तृण आदि जड़ शरीर में उत्पन्न होते हैं।
अंतिम इच्छाओं के अनुसार परिवर्तित जीन्स जिस जीव के जीन्स से मिल जाते हैं, उसी ओर ये आकर्षित होकर वही योनि धारण कर लेते हैं। 84 लाख योनियों में भटकने के बाद वह फिर मनुष्य शरीर में आता है।
'पूर्व योनि तहस्त्राणि दृष्ट्वा चैव ततो मया।
आहारा विविधा मुक्ता: पीता नानाविधा:। स्तना...।
स्मरति जन्म मरणानि न च कर्म शुभाशुभं विन्दति।।' गर्भोपनिषद्
अर्थात उस समय गर्भस्थ प्राणी सोचता है कि अपने हजारों पहले जन्मों को देखा और उनमें विभिन्न प्रकार के भोजन किए, विभिन्न योनियों के स्तनपान किए तथा अब जब गर्भ से बाहर निकलूंगा, तब ईश्वर का आश्रय लूंगा। इस प्रकार विचार करता हुआ प्राणी बड़े कष्ट से जन्म लेता है, पर माया का स्पर्श होते ही वह गर्भज्ञान भूल जाता है। शुभ-अशुभ कर्म लोप हो जाते हैं। मनुष्य फिर मनमानी करने लगता है और इस सुरदुर्लभ शरीर के सौभाग्य को गंवा देता है।
विकासवाद के सिद्धांत के समर्थकों में प्रसिद्ध वैज्ञानिक हीकल्स के सिद्धांत 'आंटोजेनी रिपीट्स फायलोजेनी' के अनुसार चेतना गर्भ में एक बीज कोष में आने से लेकर पूरा बालक बनने तक सृष्टि में या विकासवाद के अंतर्गत जितनी योनियां आती हैं, उन सबकी पुनरावृत्ति होती है। प्रति 3 सेकंड से कुछ कम के बाद भ्रूण की आकृति बदल जाती है। स्त्री के प्रजनन कोष में प्रविष्ट होने के बाद पुरुष का बीज कोष 1 से 2, 2 से 4, 4 से 8, 8 से 16, 16 से 32, 32 से 34 कोषों में विभाजित होकर शरीर बनता है।
क्या आपको पता है कि हम भारतीय एक खतरनाक साजिश का शिकार हो चुके हैं और वह साजिश है हमारे संयुक्त परिवारों को तोड़कर उन्हें उपभोक्ता बनाने की..???
क्या आपको पता है कि हम भारतीय एक खतरनाक साजिश का शिकार हो चुके हैं और वह साजिश है हमारे संयुक्त परिवारों को तोड़कर उन्हें उपभोक्ता बनाने की..???
जब परिवार टूटते हैं, तभी बाजार फलते फूलते हैं— ये सिर्फ विचार नहीं, पूरी रणनीति है ....
भारत की सबसे मजबूत चीज क्या थी..???
भारत पर मुगल आए, अंग्रेज़ आए, और कई हमलावर आए लेकिन एक चीज कभी नहीं टूटी, वो थी एकता....??
3 पीढ़ियाँ एक छत के नीचे रहती थी बुज़ुर्गों का अनुभव बच्चों में संस्कार खर्च में सामूहिकता और त्यौहारों में गर्माहट हुआ करती थी...
यह हमारी असली “Social Security” थी। कोई पेंशन की ज़रूरत नहीं थी, कोई अकेलापन नहीं, कोई Mental Health Crisis नहीं।
पश्चिमी देशों को यह चीज खटकने लगी और उन्होंने परिवारों को तोड़ने के लिए प्रयास करना शुरू कर दिया..???
क्योंकि पश्चिमी देश हमेशा से ही उपनिवेशवादी रहे हैं — उनके लिए बाज़ार सबसे बड़ा धर्म है??
लेकिन भारत जैसा देश, जहाँ लोग साझा करते हैं, कम खर्च करते हैं, और सामूहिक सोच रखते हैं — वहां वे अपने उत्पाद बेच ही नहीं पा रहे थे।
इसलिए एक शातिर रणनीति बनाई गई...???
इनके परिवार ही तोड़ दो, हर कोई अकेला हो जाएगा,और हर कोई ग्राहक बन जाएगा।
कैसे हुआ ये हमला..???
1.मीडिया का सहारा लेकर संयुक्त परिवारों को तोड़ने की शुरुआत...
संयुक्त परिवार को “झगड़ों का अड्डा”, “बोझ” और “रुकावट” के रूप में दिखाया गया।
न्यूक्लियर परिवार को “फ्रीडम”, “मॉर्डन”, “Self-made” बताकर ग्लैमराइज किया गया।
याद कीजिए: टीवी पर आज भी कितने ही शो हैं जहां पूरे दिन बहू-सास की लड़ाई, नन्द भाभी की लड़ाई, देवरानी जिठानी की लड़ाई पूरे दिन दिखाई जाती है, और हमारे/आपके परिवार की घरेलू औरतें पूरे दिन यही धारावाहिकों को देखती है और इनका निष्कर्ष/सॉल्यूशन निकलता है – “अलग हो जाओ!”
2. उपभोक्तावाद के ज़रिए...
जब हर जोड़ा अलग रहने लगा...
पश्चिमी देशों अपनी चाल में कामयाब हुए और हमारे परिवार विखर का उनका बाजार बन गए
पहले 1 परिवार में चार भाई रहते थे, अब एक परिवार सिर्फ चार लोग (पति-पत्नी, और 2 बच्चे)
पहले 4 भाईयों के बीच 1 टीवी, अब 4 भाईयों के बीच 4 टीवी
पहले 4 भाईयों के बीच 1 रसोई, अब 4 भाईयों के बीच 4 किचन सेट
पहले 4 भाईयों के बीच 1 कार और 1 मोटरसाइकिल, अब 4 भाईयों के बीच 4 कार, 4स्कूटी और 4 मोटरसाइकिल।
बाजार में बूम आ गया – और समाज में टूटन।
भारत में क्या हुआ इस “सोचलेवा हमले” के बाद?
सामाजिक पतन...???
बुज़ुर्ग अब बोझ हैं
बच्चे अकेले हैं (और स्क्रीन में गुम)
रिश्तेदार “उपलब्ध नहीं” हैं
संस्कारों की जगह “Influencers” ने ले ली
मानसिक स्वास्थ्य संकट...???
पहले जो बात नानी-दादी से होती थी, अब काउंसलर से होती है...
अकेलापन अब इलाज़ मांगता है, पहले प्यार से दूर होता था
बाजार का फायदे...????
हर समस्या का एक उत्पाद
हर भावना का एक ऐप
हर उत्सव का एक“ *ऑनलाइन ऑर्डर”
“संस्कार की जगह सब्सक्रिप्शन ने ले ली है”
आज का सवाल — हम क्या बनते जा रहे हैं?
हमने “आधुनिकता” की दौड़ में...???
संयुक्तता को “Old culture” कहा...
माता-पिता को “Obstacles” कहा...
परिवार को “फालतू भावना” कहा...
रिश्तों को “Unfollow” कर दिया...
लेकिन क्या आपने सोचा..???
Amazon का फायदा तभी है जब आप Diwali पर अकेले हों — और Shopping करें, परिवार के साथ न बैठें।
Zomato तभी कमाता है जब कोई माँ का खाना नहीं खा रहा।
Netflix तभी देखेगा जब कोई दादी की कहानी नहीं सुन रहा।
समाधान: हम अभी भी वापसी कर सकते हैं???
संयुक्त परिवार को पुनः “संपत्ति” मानें, बोझ नहीं।
बच्चों को उपभोक्ता नहीं, संस्कारी इंसान बनाएं।
बुज़ुर्गों को घर से बाहर न करें — उनके अनुभव हर Google Search से ऊपर हैं।
त्यौहार मनाएं, सामान नहीं।
अकेलापन कम करने के लिए App नहीं, अपनापन बढ़ाइए।
निष्कर्ष :--
“पश्चिम ने व्यापार के लिए परिवार तोड़े,और हम ‘आधुनिक’ बनने के लिए अपना वजूद बेच आए।”
अब समय है रुकने का, सोचने का, और अपने संस्कारों को फिर से अपनाने का — नहीं तो अगली पीढ़ी को ‘संयुक्त परिवार’ शब्द का अर्थ बताने के लिए भी शायद Google की जरूरत पड़ेगी l
क्या आपको नहीं लगता कि हम ज़िन्दगी की सुख सुविधाओं के लिए अपने परिवारिक माहौल के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं हम अपनी असल जिंदगी खोते जा रहे हैं,हम स्वार्थी हो रहे हैं एक बार अपना 30 बर्ष पुराना जीवन याद करके देख लो, जहां सिर्फ भाईचारा था इमोशन था कोई सोसाइड नहीं करता था, सहयोग की भावना थी, संस्कार ऐसे कि गांव के हर आदमी को पिता जितना सम्मान दिया जाता था किन्तु आज तो पिता ही "यार पापा" हो गए , और आज यही संस्कार हमारी आधुनिकता को दर्शाती है और हमें घिन आती है ऐसी आधुनिकता पर, कृपया एक बार विचार अवश्य करें।
जय श्री कृष्णा 🙏
शुक्रवार, 27 मार्च 2026
'धुरंधर 2' प्रोपेगेंडा नहीं है, यह फिल्म उन लोगों की 'बौद्धिक नसबंदी' है जो आतंकवाद को 'भटके हुए नौजवानों का गुस्सा' बताते थे।"
#अतीक और #अतीफ का तो मुद्दा ही नहीं है। उसे बंद करिए। कंट्रोवर्सी गई तेल लेने। हां ये है कि अगर आप उन लोगों में से हैं जिन्हें धमाकों की गूँज से ज्यादा आतंकियों के 'मानवाधिकार' की चिंता सताती है, तो 'धुरंधर 2' आपके लिए सिनेमा नहीं, 'कच्चा सुलगता कोयला' है। निर्देशक ने उन लोगों की बखिया उधेड़ दी है जो दिल्ली से लेकर मुंबई तक लाशों के ढेर पर अपनी राजनीति की रोटियाँ सेंकते थे।
फिल्म का सबसे 'जहरीला' (उनके लिए जो इसे पचा नहीं पाएंगे) प्रहार उस 0.5 फ्रंट पर है। यह वह फ्रंट है जो सीमा पर बंदूक नहीं चलाता, बल्कि स्टूडियो और ड्राइंग रूम में बैठकर आतंकियों के लिए 'ग्राउंड' तैयार करता है।
"फिल्म में उन बुद्धिजीवियों की धज्जियां उड़ाई गई हैं जो आतंकियों के एनकाउंटर पर आधी रात को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं, पर फटे हुए चिथड़ों में अपनों को ढूंढते आम आदमी के लिए उनके पास सिर्फ 'शांति' का ज्ञान होता है।"
रणवीर सिंह ने इस फिल्म में 'पुलिस' का किरदार नहीं निभाया, बल्कि उन करोड़ों भारतीयों के 'गुस्से' को परदे पर उतारा है। जब वे 2008 के सूरत में उन 26 बमों को डिफ्यूज करते हैं, तो वह केवल बारूद नहीं, बल्कि उस 'प्रशासनिक सुस्ती' को भी डिफ्यूज करते हैं जिसने देश को नरक बना दिया था।
फिल्म साफ कहती है कि "शांति की अपील" से बम नहीं रुकते, बम रुकते हैं उस 'इरादे' से जो दुश्मन के घर में घुसकर उसका हिसाब चुकता करना जानता हो।
2005-2013 का वो खूनी दौर दिखा है जब वाराणसी की आरती हो या दिल्ली की दिवाली, अहमदाबाद की सड़कें हों या मुंबई की ट्रेनें—फिल्म ने एक-एक कर उन 24 जख्मों को कुरेदा है।
अतीफ अहमदजैसे गुर्गों और उनके विदेशी आकाओं के बीच के उस 'पवित्र' गठबंधन की ऐसी-तैसी कर दी गई है, जिसे सालों तक 'भाईचारा' कहकर पाला गया।
फिल्म का वो हिस्सा जहाँ 'टेरर-कैश' को कागज का टुकड़ा बनते दिखाया गया है, वह उन लोगों के गाल पर लाल निशान छोड़ जाएगा जो आज भी उस फैसले पर छाती पीटते हैं
'धुरंधर 2' प्रोपेगेंडा नहीं है, यह उन लोगों के लिए 'कड़वा सच' है जिनकी दुकान 'अस्थिर भारत' से चलती थी। यह फिल्म उन गिरगिटों की पहचान कराती है जो तिरंगे की आड़ में पड़ोस के झंडे को सलाम करते हैं।
'धुरंधर 2' केवल एक फिल्म नहीं है, यह उन 24 हमलों की याद दिलाती एक 'चेतावनी' है। यह फिल्म उन लोगों के गाल पर करारा तमाचा है जो पाकिस्तान के 'समर्थन' और भारत के 'विरोध' की महीन लकीर पर सर्कस करते हैं।
"अगर इस फिल्म को देखकर आपको दर्द हो रहा है, तो समझ लीजिए कि फिल्म का निशाना बिल्कुल सटीक लगा है। यह फिल्म उन लोगों की 'बौद्धिक नसबंदी' है जो आतंकवाद को 'भटके हुए नौजवानों का गुस्सा' बताते थे।"
"अगर आप 'लिबरल' चश्मा उतारकर देखेंगे, तो आपको इसमें देश का दर्द दिखेगा। और अगर चश्मा लगा रहा, तो यकीनन आपको यह प्रोपेगेंडा ही लगेगा।"
#Dhurandhar2 #ExposingTheTraitors #0Point5Front #RanveerSingh #IndiaFightsBack #JusticeServed
मंगलवार, 24 मार्च 2026
धुरंधर 2 का धमाका! पहले ही दिन 236 करोड़ पार, ‘जवान’ का रिकॉर्ड टूटा, बॉक्स ऑफिस पर तूफान
आदित्य धर की स्पाई एक्शन सीक्वल फिल्म 'धुरंधर 2' ने ओपनिंग डे पर रिकॉर्डतोड़ कमाई की है। प्रीमियर डे पर देश में 43 करोड़ का नेट कलेक्शन करने वाली इस फिल्म ने 19 मार्च को रिलीज डे पर इतिहास रच दिया है। रणवीर सिंह स्टारर इस फिल्म ने गुरुवार को देश में 100+ करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया है। यही नहीं, वर्ल्डवाइड ग्रॉस कमाई भी 236 करोड़ के पार चली गई है। सिनेमाघरों में सभी 21,728 शोज में दर्शकों का जबरदस्त क्रेज देखने को मिला है। गुड़ी पड़वा की छुट्टी के कारण महाराष्ट्र में अलग धूम रही है। जबकि आगे ईद के कारण अब वीकेंड पर यह फिल्म और बंपर कमाई करने वाली है। 'धुरंधर 2' पहले दिन देश में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली चौथी फिल्म बन गई है। जबकि इसने ओपनिंग डे पर सबसे अधिक कमाई करने वाली बॉलीवुड फिल्म का कीर्तिमान भी बना लिया है। यही नहीं, A रेटिंग के मामले में यह 'सलार' को पछाड़कर पहले दिन सबसे बड़ी ओपनिंग का रिकॉर्ड भी बना चुकी है।
बॉलीवुड को वर्ल्ड लेवल का पहचान दिलाने वाली ये फिल्म अब सिनेमाघरों में एक नया इतिहास रचने जा रही है। बीते साल दिसंबर में रिलीज 'धुरंधर पार्ट 1' ने देश में 1005 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया था। लेकिन रणवीर सिंह की 'धुरंधर: द रिवेंज' जिस रफ्तार से बढ़ रही है, यह दोगुनी-तीन गुनी कमाई कर सकती है। फिल्म में भी उनका किरदार हमज़ा अली मजारी, उस घायल शेर की तरह है जो अपने शिकार पर घाट लगाकर उसे दबोचने के लिए इस बार पूरी तरह से तैयार है। 3 घंटे 49 मिनट और 6 सेकंड की रनटाइम और महंगी टिकटों के बाद भी फिल्म का क्रेज देखने लायक है। आइए जानते हैं फिल्म ने गुरुवार को पहले दिन कितनी कमाई की है।
'धुरंधर 2' की ओपनिंग डे पर बंपर कमाई, प्रीमियर से 138.5% ज्यादा
sacnilk की रिपोर्ट के मुताबिक, जहां बुधवार को पेड प्रिव्यू के 12,292 शोज दिखाए गए थे और उनसे 43.00 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन हुआ था, वहीं ओपनिंग डे पर शोज की संख्या 21,728 रही। फिल्म की कमाई में ऐसा भूचाल नजर आया कि कलेक्शन में 138.5% की बढ़ोतरी हुई। ओपनिंग डे, गुरुवार को इस फिल्म ने ₹102.55 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन कर डाला है। इस तरह, कुल मिलाकर प्रीमियर और ओपनिंग डे से ₹145.55 करोड़ का नेट कलेक्शन हो चुका है। वहीं, ग्रॉस कलेक्शन की बात की जाए तो इसने पेड प्रिव्यू के साथ ओपनिंग डे पर ₹172.63 करोड़ रुपये की कमाई कर डाली है।
सबसे अधिक हिंदी में हुई कमाई
'धुरंधर 2' देशभर में 5 भाषाओं में रिलीज हुई है। ओपनिंग डे पर इसने सबसे अधिक 99.10 करोड़ रुपये कमाई हिंदी वर्जन से की है। जबकि पवन कल्याण की 'उस्ताद भगत सिंह' के साथ टक्कर के बाद भी तेलुगू वर्जन से 2.12 करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ है। हालांकि, प्रीमियर के बाद ओपनिंग डे पर भी तमिल-तेलुगू के कई शोज कैंसिल होने की खबर है। तकनीकी कारणों से शोज नहीं चले, इस कारण पैसे रिफंड भी किए गए हैं।
'धुरंधर 2' की वर्ल्डवाइड कमाई कितनी
वहीं, अगर 'धुरंधर 2' के वर्ल्डवाइड कलेक्शन की बात करें तो बताया जा रहा है कि इसने विदेशों में करीब 64 करोड़ रुपये की कमाई की है। इसी के साथ फिल्म ने दुनिया भर में 236 करोड़ रुपये के करीब कमाई कर डाली है।
'जवान', 'सलार' और 'पठान' जैसी फिल्मों को पहले ही दिन दे दी पछाड़
इसी के साथ 'धुरंधर 2' पहले दिन सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्मों 'बाहुबली 2' ( 121.00), 'RRR' (133.00Cr), 'केजीएफ: चैप्टर 2' (₹116.00Cr) से ये फिल्म भले पीछे हो लेकिन ये 'जवान' (₹75.00 करोड़), 'पठान' (₹57.00Cr) जैसी कई फिल्मों से आगे निकल गई है। वहीं इसने 'सालार' (नेट कलेक्शन ₹90.70 Cr) को भी पछाड़ दिया है।
रोंगटे खड़े कर देने वाले सीक्वेंस
रणवीर सिंह से लेकर राकेश बेदी और सारा अर्जुन हर किसी ने एक्टिंग में वो महारत दिखा दी है कि अब इसके आगे उन्हें सब कम लगेगा। हाई ऑक्टेन एक्शन, हिंसा और रोंगटे खड़े कर देने वाले सीक्वेंसेज़ के साथ दिमाग हिला देने वाले ट्विस्ट के आगे आपकी सारी कल्पनाएं फेल साबित होंगी। पाकिस्तान के गैंगवॉर से लेकर भारत के भीतर हुए बड़े फैसलों, नोटबंदी और विवादित ढांचे के सच को फिल्म की कहानी में बुनते हुए इस कदर दर्शकों को बहा ले जाते हैं आदित्य धर कि अंत तक आप इससे बाहर नहीं निकल पाते। वहीं फिल्म में सीटीमार डायलॉग्स की भी कोई कमी नहीं है। हालांकि, पहली फिल्म की तुलना में म्यूजिक इस बार थोड़ा मात खाती दिख रही, लेकिन कहानी और इन धुरंधर एक्टर्स के साथ सब चल जाएगा।
'धुरंधर 2' में हमजा बना मौत का तूफान, कराची की सड़कों पर दहशत! रोंगटे खड़े कर देगा ‘धुरंधर 2’
‘धुरंधर 2’ के लिए थिएटर में घुसने के साथ ही आपको कहानी के सारे किरदार, प्लॉट ट्विस्ट, डायलॉग, गाने याद आने लगेंगे. आदित्य धर की फिल्ममेकिंग ने ‘धुरंधर’ से ऐसा असर छोड़ा था कि हमज़ा की कहानी पूरी देखने के लिए पिछले तीन महीने से दिमाग कुलबुलाकर रह गया है. आदित्य ये कुलबुलाहट जानते हैं, वो अपने दर्शक को जानते हैं और भरोसा करते हैं. ‘धुरंधर 2’ शुरू होते ही आप उसी कहानी में वापस पहुंच जाते हैं जिसने दिसंबर में साढ़े तीन घंटे के लिए जनता को सीटों से चिपका कर रख दिया था. और ‘धुरंधर 2’ का माल-मसाला कैसा निकला, चलिए बताते हैं.
रणवीर सिंह ने मचाया बवाल
धुरंधर 2’ ने सबसे पहले उन लोगों की शिकायत दूर की है जो पहली फिल्म में रणवीर सिंह के तगड़े धनाके का वेट कर रहे थे. लेकिन उन्हें वो धमाका सिर्फ एंड में दिखा. कहानी जसकीरत सिंह रांगी से शुरू होती है. उसकी लाइफ में ऐसा क्या था जिसने उसे किलिंग मशीन बना दिया, इसकी कहानी देखने के लिए कालेज थोड़ा मजबूत रखना होगा. जसकीरत की कहानी का सबसे बड़ा इमोशन बदला है. इस सीक्वेंस में रणवीर की एनर्जी देखकर पता चलता है कि उनकी कितनी मेहनत लगी है. हिंसा के लिए लगने वाली ताकत के साथ जो इमोशन खर्च होता है, उसे उतारने में भी रणवीर खरे साबित हुए हैं.
जसकीरत का बैकग्राउंड दिखाने के बाद फिल्म उसी ल्यारी में लौटती है, जहां आज वो हमज़ा बनकर राज करने निकला है. ये पोर्शन हमज़ा की टैक्टिकल प्लानिंग, उसके पॉलिटिकल दिमाग और जासूसी स्किल्स को चमकाता है. जमील जमाल, एसपी चौधरी, मेजर इकबाल और उजैर बलोच से हमज़ा कैसे खेल रहा है. वो फर्स्ट हाफ की हाईलाइट है. मगर इंटरवल से ठीक पहले कहानी में एक ट्विस्ट है. हमज़ा और जसकीरत के बीच का पर्दा हटाने वाला एक किरदार आ चुका है. माहौल सेट है, ‘धुरंधर 2’ उसी फॉर्म में है जो ‘धुरंधर’ का कमाल थी. सेकंड हाफ में फिल्म खुलते ही, माहौल बदलेगा.
पंजाब में ड्रग्स की समस्या, अलगाववादी आंदोलनों को मिलती फंडिंग, नेपाल-यूपी के रास्ते देश में घुसती नकली करंसी... ये सब 'धुरंधर 2' के नैरेटिव को एंगेजिंग बनाती हैं. ये वो खबरें हैं जो आप अखबारों में पढ़ते आए हैं, लेकिन फिल्म इन्हें जिस तरह पाकिस्तान की जमीन पर उगे आतंकवाद से जोड़ती है, वो स्क्रीन पर सॉलिड कहानी बनता है. स्क्रीनप्ले आपको एक ऐसी कहानी देता है जिसके घटने की कल्पना आपने रियल घटनाओं को देखकर कभी की होगी, या सुनी होगी. मगर उस फिक्शन को 'धुरंधर 2' मजबूत विजुअल्स देती है.
कराची में हमज़ा का कहर
सेकंड हाफ में हमज़ा उर्फ जसकीरत को अजय सान्याल (आर माधवन) ने खुली छूट दे दी है कि अब वो सारी बेड़ियां तोड़ कर कराची में खुला कहर मचाए. पर असल में बेड़ियां तोड़ी हैं ‘धुरंधर 2’ ने सेकंड हाफ में ये फ़िल्म एक अलग ही चीज है.
‘धुरंधर 2’ का सेकंड हाफ इस बात की कोई परवाह नहीं करता कि आप इस फिल्म को पॉलिटिकल होने के लिए कितना जज करेंगे. और न्यूट्रल कहलाने वाली लकीर के किस तरफ देखेंगे. लेकिन ‘असाधारण रियल घटनाओं’ पर आधारित होने का दावा करती ये कहानी खुले तौर पर पॉलिटिकल रेफरेंस गिराती चलती है. चाहे सरहद के उस पर पाकिस्तान की बात हो, या इस पर भारत की.
पूर्व नेता पर न्यूज चैनलों के सामने चली गोली का सीन. नोटबन्दी को पाकिस्तानी आतंकियों की साजिश नाकाम करने वाला फैसला बताने के सीक्वेंस. भारत से कई सालों पहले गायब हुए एक खूंखार गैंगस्टर को पाकिस्तान में दिखाना. ‘धुरंधर 2’ एक बार के लिए उन सारी घटनाओं को सच की तरह ट्रीट करती है, जिन्हें अभी तक वाइल्ड कॉन्सपिरेसी थ्योरीज माना जाता रहा है. फ़िल्म में एक सीक्वेंस तो ऐसा आता है जब पाकिस्तान में भारत के खिलाफ आतंकवाद का चेहरा रहे बड़े आतंकी थोक में मारे जा रहे हैं. यहां फ़िल्म रियल घटनाओं को फिक्शन से जितना ज्यादा मैंक करने की कोशिश करती है, इंगेजमेंट उतना ही कम होता है. लेकिन ये तय है कि इस फ़िल्म में दिखाई गई एक-एक घटना का सोशल मीडिया-मीडिया में खूब एक्स-रे होने वाला है.
मगर ऐसा करते हुए ‘धुरंधर 2’ फर्स्ट हाफ से लंबा सेकंड हाफ आपके सामने रखती है. इस हिस्से की पेसिंग कुछेक जगहों पर ड्रॉप होती है. लेकिन आदित्य धर अपने बस्ते से क्या नया निकालने वाले हैं ये दिलचस्पी कभी खत्म नहीं होती. रणवीर सिंह सेकंड हाफ में वो सबकुछ कर रहे हैं, जिसकी उम्मीद पहले पार्ट का पहला टीजर देखते हुए आपने की होगी. उन्होंने धर के विजन के आगे खुद को पूरी तरह सरेंडर किया है.
संजय दत्त का एसपी चौधरी ‘धुरंधर 2’ में पहले से भी ज्यादा खतरनाक हो गया है. बल्कि संजय दत्त के लिए ‘धुरंधर 2’ वो फ़िल्म है, जो उनके लिए ‘KGF 2’ होती हुई लग रही थी. अर्जुन रामपाल का मेजर इकबाल इस बार वो विलेन बना है, जिसकी उम्मीद शायद लोगों को फर्स्ट पार्ट से थी. राकेश बेदी साहब का जमील जमाल ‘धुरंधर 2’ का असली हीरो है! फ़िल्म खत्म होने को आएगी तो आप उनके लिए तालियां-सीटियां निकाल सकते हैं.
‘धुरंधर 2’ पहली फ़िल्म की कहानी को उसी रास्ते ले जाती है, जहां जाने की उम्मीद इसे थी. मगर ऐसा करने में इसके स्टाइल, नैरेटिव या एक्शन से कोई समझौता नहीं किया गया है. एक्शन, वायलेंस और गालियां तो पहली फ़िल्म से दोगुनी हैं. और तीनों चीजें पहली फ़िल्म से ज्यादा करारी भी हैं. मगर लंबाई एक छोटा सा मुद्दा तो है ही. कैमियोज के लिए जितनी एक्साइटमेन्ट थी, उतने दमदार नहीं हैं. पोस्ट क्रेडिट सीन है, इसलिए अंत तक बैठें जरूर. हालांकि, उस सीन से आप कितने खुश होंगे ये बाद की बात है!
कुल मिलाकर ‘धुरंधर 2’ दमदार और सॉलिड सीक्वल है, जिसपर प्रोपेगेंडा होने या न होने के टेस्ट पहले से बि ज्यादा होंगे. सिर्फ एक फ़िल्म की तरह देखने वाले दर्शके के लिए ये थोड़ी लंबी जरूर है, मगर लगातार एक के बाद एक सिनेमैटिक मोमेंट्स डिलीवर करती है.
जर्मन शेपर्ड… - जानते है कि आदित्य धर ने धुरंधर की मार्केटिंग क्यों नहीं की?
जर्मन शेपर्ड…
आत्ममुग्धता! जो अपनी खूबसूरती या कमियों को नजरअंदाज कर खुद को सबसे बढ़िया समझता है। अंग्रेजी में इसे “self-obsessed” कहते हैं।
छेनू कुमार और जर्मन शेपर्ड इसी परिभाषा में आते है।
अर्थात् इन लोगों पालने की चीज़ें तो नहीं पाली है लेकिन जो पलानी नहीं चाहिए, वह अवश्य पाली है।
गलतफहमी, इन दोनों को लगता है कि सिस्टम सिर्फ इनसे लगता है। इनके कहे वाक्य अंतिम है।
खैर...
जानते है कि आदित्य धर ने धुरंधर की मार्केटिंग क्यों नहीं की?
दरअसल, आदित्य को अच्छे से मालूम था कि जर्मन शेपर्ड अपनी आत्ममुग्धता में धुरंधर का अच्छा प्रचार करेगा। क्योंकि उसे लगता है कि मेरे सिस्टम में धुरंधर बनी है और मुझे इसकी जानकारी नहीं है। स्पाई थ्रिलर में इतने बड़े ऑपरेशन हो गए लेकिन मुझे सूचना तक नहीं दी।
इसलिए ट्रेलर रिलीज़ के बाद से धुरंधर की सत्यता मापने बैठ गया था कल निकला है और अपने दर्शकों के सामने निवाला फेंक दिया।
इधर हम सभी राष्ट्रवादी लोग इस जर्मन शेपर्ड का हारमोनियम बजाने तैयार बैठे है।
जर्मन शेपर्ड ने आत्ममुग्धता का प्रशिक्षण मोहिनी थिएटर ऑफ़ ड्रामा कंपनी से लिया है इसके गुरु 108 मोहिनी चीफ है। आत्ममुग्धता का क्रिएशन उन्होंने ही किया है।
मोहिनी थिएटर्स ऑफ़ ड्रामा कंपनी का सबसे अच्छा एल्यूमनी है।
आदित्य धर को धुरंधर रिवेंज का प्रमोशन करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि अभी जर्मन शेपर्ड की खुजली खत्म नहीं होगी तो आगे भी प्रचार में होगा।
तीसरे रविवार में धुरंधर ने अवतार फायर एंड ऐश को लिटा दिया है और 30 करोड़ प्लस वसूला है। इसलिए जर्मन शेपर्ड अधिक भौंका है।
धुरंधर और धुरंधर 2 की इतनी जबरदस्त प्लानिंग कि चार महीने से हिन्दुस्तानी जहन में और कोई फिल्म घुस ही नहीं रही ।
मान गए भाई आदित्य धर ! धुरंधर और
धुरंधर 2 की इतनी जबरदस्त प्लानिंग कि
चार महीने से हिन्दुस्तानी जहन में और कोई
फिल्म घुस ही नहीं रही । सनी देओल की
बॉर्डर 2 आई और सिनेमाघरों से उतर भी
गई । अच्छी फिल्म थी , लेकिन खास बात
यह कि धुरंधर नेटफ्लिक्स पर घर घर देख
जाने के बावजूद सिनेमाघरों में आज भी
धड़ल्ले से चल रही है ।
इसी दौरान कश्मीरी पंडित आदित्य धर ने
धुरंधर 2 का टीजर जारी कर एक आग
जलाए रखी है । जाहिर है कि पूर्व घोषित
रिलीज तिथि 19 मार्च तक फिल्म के प्रति
क्रेज बनाए रखने के लिए सोशल मीडिया
का भारी इस्तेमाल किया जा रहा है । जैसा
कि कल ही बताया गया कि धुरंधर का लिंक
आदित्य धर की ही ब्लॉक बस्टर फिल्म उरी
से जोड़ते हुए धुरंधर में विकी कौशल को भी
लाया गया है । कहा जा रहा है कि दिसंबर में
आई फिल्म धुरंधर तो एक ट्रेलर थी , फिल्म
का असली मजा तो धुरंधर 2 में आएगा ?
वाह रे कश्मीरी पंडित आदित्य धर ! तुम्हारी
क्रिएटिव खोपड़ी का भी जवाब नहीं । धुरंधर
से 1000 करोड़ और अब्रॉड जोड़कर कुल
1400 करोड़ कमा चुके धर धुरंधर 2 से
कितना कमाएंगे , कहना मुश्किल है । चूंकि
धुरंधर 2 की रिलीज डेट धुरंधर आने के
साथ ही घोषित कर दी गई थी अतः अनेक
बड़े निर्माता उसके आसपास अपनी फिल्म
रिलीज नहीं कर रहे हैं । धुरंधर ने दिखा
दिया कि देश क्या है , देशभक्ति क्या है और
राष्ट्रवाद क्या है ।
कुछ समय से जब से कश्मीर फाइल्स , उरी ,
केरला स्टोरीज , बंगाल फाइल्स , इमरजेंसी ,
आर्टिकल 370 जैसी फिल्में आई समझो
गदर ही मच गया । केंद्र में एक दशक पूर्व
नई सरकार बनने के बाद हिन्दुत्व और
राष्ट्रवाद ने जो ऊंची उड़ान भरी वह वाया
बॉर्डर 2 अब धुरंधर 2 पर जाकर ही थमने
वाली है । कमाल की बात है कि पाकिस्तान
में करांची के ल्यारी कस्बे से उड़ने वाली
दुश्मन विरोधी आग अक्षय खन्ना , रणवीर
सिंह , संजय दत्त , सारा अर्जुन , राकेश बेदी ,
अर्जुन रामपाल आदि के कंधों से फैलते हुए
गर्म हवा बनकर बर्फीले मौसम में भी छाई
हुई है ।
धुरंधर 2 आने का ख़ौफ़ इस कदर जिंदा है
कि धुरंधर से भौचक्का पाकिस्तान टकटकी
लगाए भारत की ओर देख रहा है । धुरंधर 2
की रिलीज डेट के पास अब कोई भी फिल्म
रिलीज नहीं होगी । एक फिल्म का इतना
ख़ौफ़ पहले कभी नहीं देखा । भारतीय
सिनेमा यदि हॉलीवुड को मात देती फिल्में
बना रहा है तो यह सुखद है । टीवी और
ओटीटी के जमाने में धुरंधर ने दर्शकों को
कतारबद्ध होकर सिनेमाघरों की ओर खींचा ,
दुनिया में सर्वाधिक फिल्में बनाने वाले भारत
के लिए यह गौरव का विषय है ।
जितने भी आतंकी हमले भारत पर हुए ..भारत ने ओपनली बदला जरूर लिया है फिर चाहे वो बालाकोट हो या ऑपरेशन सिंदूर,
जितने भी आतंकी हमले भारत पर हुए ..भारत ने ओपनली बदला जरूर लिया है फिर चाहे वो बालाकोट हो या ऑपरेशन सिंदूर,
लेकिन बात अगर इंटेलिजेंस की करें तो उनकी दुनिया में इसको बदला लेना नहीं कहते, बदला तो वो होता है जो चोरी छिपे लिया जाता है..
फ़रवरी २०२२ की घटना है,
कराची में ज़ाहिद अखुंड नाम का एक आदमी रहता था जिसकी उमर लगभग ५० साल के क़रीब होगी।
कराची के पूर्वी हिस्से के अख़्तर कॉलोनी में उसकी एक फर्नीचर की दुकान थी।
लेकिन रहता वो पाकिस्तान के पॉश इलाके क्लिफ़्टन में जहाँ आर्मी वाले रहते हैं।
एक दिन हसन रज़ा नाम का कोई बड़ा कस्टमर उससे मिलने वाला था, उसने कहीं बड़ा घर खरीदा था तो उसे फर्नीचर चाहिए था।
उस दिन ज़ाहिद को दुकान नहीं जाना था लेकिन कस्टमर बड़ा कैश लेकर आ रहा था तो जाना पड़ा..
अब जाहिद अपनी होंडा सिटी में बैठकर जैसे ही घर से निकला , दो लोग बाइक से उसका पीछा करने लगे और उसे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि कोई उसका पीछा कर रहा है।
इवन वे सिर्फ पीछा ही नहीं कर रहे थे बल्कि ये तक सुनिश्चित कर रहे थे कि ज़ाहिद उस रूट पर ही जाए।
जैसे ही वो दुकान के पास पहुँचा, बाइक उसके सामने आकर रुकी। दो लोग बाइक से उतरे, उन्होंने अपने मुँह पर कपड़ा बाँध रखा था,
ज़ाहिद को लगा कि शायद उन्हें रास्ता पूछना है, तो वो बोला, क्या है ?
बाइक चलाने वाले ने पूछा,
ज़हूर इब्राहिम मिस्त्री?
ज़ाहिद ने कहा, समझ नहीं आ रहा क्या कह रहे हो,
बाइक वाला फिर बोला,
ज़हूर इब्राहिम मिस्त्री ना ?
और बाइकमैन ने गन निकाली उसकी छाती पर पहला फायर कर दिया,
गोली चली, तो आवाज़ सुनकर आसपास के लोग भी आ गए,
तभी हमलावर ने दूसरी गोली मारी और बोला
ये वाली रुपिन कत्याल की तरफ़ से..
और इसके बाद दो और फायर किए और जिधर से आए उधर ही हवा की तरह चले गए..
बाद में वो कराची के चोर बाजार पहुंचे, वहाँ जाकर बाइक के पुर्जे पुर्जे अलग कर दिए कि लो अब ढूँढ लो बाइक और फिर गायब हो गए।
और ये वही जहूर मिस्त्री था जो १९९९ में IC-814 के प्लेन हाईजैकिंग में शामिल था, और ज़हूर ने ही प्लेन के यात्री रुपिन कात्याल की बेरहमी से गला काट कर हत्या कर दी थी..
और धुरंधर में कहता है कि
"हिंदू एक डरपोक कौम है, पड़ोस में ही रहते हैं हम, गूदेभर का ज़ोर लगा लो और बिगाड़ लो जो बिगाड़ सकते हो।
अपनी मौत को सामने देखकर समझ आ गया होगा कि हिंदू डरपोक कौम नहीं है और ज़्यादा ज़ोर लगाने की जरूरत नहीं है, दो बाइकमैन ही काम कर सकते हैं।
धुरंधर रिवेंज की यह स्टोरी सबसे इंटरेस्टिंग है
क्योंकि
२२,२३ साल बाद जब कोई अपनी जिंदगी में खुश है, इतना कुछ हो गया था, लेकिन अब उसके पास पॉश एरिया में ख़ुद अपार्टमेंट है, अपने देश में है..
और तो और उसके लिंक जैश-ए- जैसे आतंकी संगठन के साथ है,
उसके बाद भी कोई घर में घुसकर मार देगा ..ऐसा तो उसने सपने में भी नहीं सोचा होगा..
वैसे इस पूरी घटना को लेकर कभी कोई आधिकारिक बयान नहीं है,
लेकिन जिस तरीके से ये ऑपरेशन किया गया , ट्रैकिंग, पहचान कन्फर्म करना और फिर सटीक हमला
उसे देखकर इसे एक टारगेटेड किलिंग माना जाता है।
#dhurandhar #bollywood #ranveersingh
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