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रविवार, 8 फ़रवरी 2026

यह रहा Kalmegh Q (Andrographis paniculata) का उपयोग, मात्रा और फायदे – हिंदी में 🌿👇

यह रहा Kalmegh Q (Andrographis paniculata) का उपयोग, मात्रा और फायदे – हिंदी में 🌿👇

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Kalmegh Q – उपयोग (Uses)

🟡 लिवर रोग (मुख्य दवा)

पीलिया (Jaundice)

फैटी लिवर

लिवर एन्ज़ाइम बढ़े हुए (SGOT / SGPT)

लिवर में सूजन (Hepatomegaly)

🤢 पाचन तंत्र

भूख न लगना

मतली, उल्टी

कड़वा स्वाद मुंह में

गैस, अपच

🔥 बुखार (विशेषकर वायरल)

वायरल फीवर

मलेरिया, डेंगू में सहायक

शरीर टूटना, कमजोरी

🛡️ इम्युनिटी बूस्टर

बार-बार संक्रमण

कमजोर प्रतिरोधक क्षमता

रिकवरी फेज में उपयोगी

🩸 त्वचा व रक्त शुद्धि

खून की गर्मी

फोड़े-फुंसी

एलर्जिक स्किन प्रॉब्लम

🧠 अन्य लाभ

सूजन कम करता है

एंटी-वायरल, एंटी-बैक्टीरियल गुण

शरीर को डिटॉक्स करता है

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Kalmegh Q – मात्रा (Dose)

💧 मदर टिंचर (Q)

10–20 बूंद

आधे कप पानी में

दिन में 2–3 बार

⏳ अवधि

तीव्र रोग: 7–10 दिन

पुराना लिवर रोग: 4–6 हफ्ते (डॉक्टर की सलाह से)

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कब सबसे ज्यादा असरदार? (Keynote)

👉 कड़वा स्वाद + लिवर खराब + भूख नहीं लगती
👉 बुखार के बाद कमजोरी
👉 पीलिया में आंखें पीली

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सावधानियां

⚠️ बहुत ज्यादा कमजोरी या लो BP में सावधानी
⚠️ गर्भवती महिलाएं बिना सलाह न लें
⚠️ अत्यधिक मात्रा से मतली बढ़ सकती है

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होम्योपैथिक दवा एड्रेनालिनम और इसकी विभिन्न पोटेंसी और इसके उपयोग

🌿🌿होम्योपैथिक दवा एड्रेनालिनम और इसकी विभिन्न पोटेंसी  और इसके उपयोग
                                              हम उस दवा की बात करेंगे जो शॉक, अस्थमा, लो ब्लड प्रेशर, हृदय की कमजोरी, एलर्जी रिएक्शन, हेमोरेज, हाय फीवर, यूटिकेरिया, ग्रेव्स और एडिसन डिजीज, तथा हार्मोनल इम्बैलेंस से होने वाली कमजोरी (adrenal insufficiency या chronic stress से थकान, वीकनेस) में सबसे तेज़ और सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है। यह है एड्रेनालिनम (Adrenalinum). यह दवा सुप्रारेनल ग्रंथि के सेक्रेशन (एपिनेफ्रिन/एड्रेनालिन) से बनती है। होम्योपैथी में इसे “शॉक, अस्थमा, लो बीपी और एड्रेनल कमजोरी का सबसे अच्छा टॉनिक” कहा जाता है। जब मरीज कहे “डॉक्टर साहब, शॉक लग गया है, सांस फूल रही है, बीपी बहुत कम है, थकान बहुत है, हार्मोनल असंतुलन से कमजोरी महसूस हो रही है” – तो यह दवा 7-15 दिन में चमत्कार कर देती है।

🌿🌿🌿🌿Adrenalinum क्या है?  
Adrenalinum एक होम्योपैथिक सरकोड दवा है जो एड्रेनल ग्रंथि (suprarenal glands) के मेडुला से निकाले गए एपिनेफ्रिन से बनाई जाती है।  
मुख्य कंपाउंड: एड्रेनालिन – वासोकॉन्स्ट्रिक्शन (रक्त वाहिकाओं का संकुचन) करता है, ब्लड प्रेशर बढ़ाता है, सिम्पैथेटिक सिस्टम को स्टिमुलेट करता है, एड्रेनल फंक्शन को बैलेंस करता है।

 उपयोग और फायदे
एड्रेनालिनम मुख्य रूप से शॉक, रेस्पिरेटरी, कार्डियोवैस्कुलर, एलर्जी और हार्मोनल इम्बैलेंस में इस्तेमाल होती है।

1. शॉक / सर्कुलेटरी कोलैप्स – पेलर, लो बीपी, कोल्ड स्वेट, एनेस्थीसिया के दौरान शॉक  
2. अस्थमा / एक्यूट लंग कंजेशन – ब्रोंकियल अस्थमा, डिफिकल्ट ब्रीदिंग, थोरैसिक कंस्ट्रिक्शन  
3. लो ब्लड प्रेशर / हार्ट फेलियर – कमजोर पल्स, हार्ट फेलियर  
4. एंजाइना पेक्टोरिस / एरिटेरियोस्क्लेरोसिस – एंजाइना, क्रॉनिक एओर्टाइटिस  
5. हाय फीवर / एलर्जी – हाय फीवर, सीरम रैशेज, एक्यूट यूटिकेरिया  
6. हेमोरेज / ब्लीडिंग – कैपिलरी ब्लीडिंग रोकना  
7. हार्मोनल इम्बैलेंस से कमजोरी – एड्रेनल इंसफिशिएंसी (Addison’s disease), क्रॉनिक स्ट्रेस/बर्नआउट से थकान, वीकनेस, एंडोक्राइन डिसऑर्डर (Grave’s disease), एड्रेनल एग्जॉर्शन से जनरल डेबिलिटी  

 विभिन्न पोटेंसी जो विभिन्न बीमारियों में काम आती हैं
 2X-6X: एक्यूट शॉक, अस्थमा, लो बीपी, हार्मोनल कमजोरी – दिन में 2-4 बार (सबसे ज्यादा इस्तेमाल, बोएरिक के अनुसार)  
 30C : एलर्जी, हाय फीवर, एंजाइना – दिन में 2-3 बार  
 200C : क्रॉनिक अस्थमा, एड्रेनल कमजोरी, हार्मोनल इम्बैलेंस – हफ्ते में 1 डोज  
 1M : बहुत पुरानी कार्डियक या एंडोक्राइन समस्या – महीने में 1 डोज  

 सावधानियां
- अधिक डोज से कार्डियक या आर्टेरियल समस्या हो सकती है  
- सॉल्यूशन को एयर और लाइट से बचाएं  
- गर्भवती महिलाएँ डॉक्टर की सलाह से  
- 3 महीने कोर्स के बाद 15 दिन गैप जरूरी  

एड्रेनालिनम शॉक, अस्थमा, लो ब्लड प्रेशर और हार्मोनल इम्बैलेंस से कमजोरी की नंबर-1 होम्योपैथिक दवा है।  
जब मरीज कहे “डॉक्टर साहब, शॉक लग गया, सांस नहीं आ रही, थकान बहुत है, हार्मोनल कमजोरी महसूस हो रही है” – तो यह दवा 7-15 दिन में नई ताकत देती है। हजारों मरीजों ने अस्थमा, एलर्जी, शॉक और एड्रेनल कमजोरी ठीक की है। यह एड्रेनल का होम्योपैथिक चमत्कार है। कोई भी होम्योपैथिक दवा होम्योपैथिक डॉक्टर की सलाह से ही लें।
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भगवान ने उस दिन सिद्ध कर दिया कि वे सोने-चांदी से नहीं, केवल सच्चे भाव से खरीदे जा सकते हैं। भक्त का प्रेम इतना भारी था कि भगवान उसके वश में होकर, उस छोटी सी नथ के मोल "बिक" गए।

गुजरात की पावन धरती पर, डाकोर और द्वारका के बीच की दूरी सैकड़ों किलोमीटर की है, लेकिन एक भक्त की पुकार ने इस दूरी को मिटा दिया। यह कहानी है विजयसिंह बोडाणा की, जिनके प्रेम ने द्वारकाधीश को अपना सिंहासन छोड़ने पर विवश कर दिया।
विजयसिंह बोडाणा, एक क्षत्रिय राजपूत, जिनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य था—द्वारकाधीश के दर्शन। जवानी से लेकर बुढ़ापे तक, हर छह महीने में, वे अपने हाथों में तुलसी का पौधा लेकर डाकोर से द्वारका तक की लंबी यात्रा पैदल तय करते थे।

वर्षों बीतते गए, मौसम बदलते रहे, लेकिन बोडाणा का नियम नहीं टूटा। 72 वर्ष की आयु तक वे निरंतर चलते रहे। लेकिन अब शरीर थकने लगा था। हड्डियाँ जवाब दे रही थीं और पैरों के छाले अब नासूर बन चुके थे।

अपनी अंतिम यात्रा के दौरान, जब वे द्वारका पहुँचे, तो उनकी आँखों में आंसू थे। उन्होंने गर्भ गृह में खड़े होकर कांपती आवाज़ में कहा:

 "हे प्रभु! मेरा मन तो आपके चरणों में ही रहना चाहता है, लेकिन अब यह शरीर साथ नहीं देता। शायद यह मेरे जीवन का अंतिम दर्शन हो। मुझे क्षमा करना, अब मैं और नहीं आ सकूँगा।"

भक्त की यह पीड़ा भगवान से देखी नहीं गई। उसी रात, द्वारकाधीश बोडाणा के सपने में आए। भगवान की आवाज़ में एक सखा जैसा अपनापन था--

"बोडाणा! तुझे उदास होने की आवश्यकता नहीं है। यदि तू मेरे पास नहीं आ सकता, तो क्या हुआ? मैं स्वयं तेरे पास आऊँगा। अगली बार जब तू आए, तो पैदल मत आना, एक बैलगाड़ी लेकर आना। मैं तेरे साथ डाकोर चलूँगा।"

बोडाणा की खुशी का ठिकाना न रहा। वे वापस डाकोर गए और जैसे-तैसे एक टूटी-फूटी बैलगाड़ी का इंतजाम किया।

जब बोडाणा अपनी जर्जर बैलगाड़ी लेकर द्वारका पहुँचे, तो वहाँ के पुजारियों (गुगलियों) ने उनका मज़ाक उड़ाया— "अरे बोडाणा! इस टूटी गाड़ी में किसे ले जाओगे?" बोडाणा केवल मुस्कुरा दिए।

रात के गहरे सन्नाटे में, जब पूरी द्वारका नगरी सो रही थी, त्रिभुवन के स्वामी भगवान श्री रणछोड़राय चुपके से मंदिर से निकले और बोडाणा की बैलगाड़ी में विराजमान हो गए।

कहते हैं कि उस रात एक चमत्कार हुआ। जिस रास्ते को तय करने में बैलों को हफ़्तों लगते थे, वह सैकड़ों किलोमीटर का रास्ता भगवान की कृपा से पलक झपकते ही एक ही रात में तय हो गया। सुबह की पहली किरण के साथ, द्वारकाधीश डाकोर में थे।

सुबह जब द्वारका के मंदिर के पट खुले, तो वहाँ हाहाकार मच गया—मूर्ति गायब थी! पुजारियों को तुरंत समझ आ गया कि यह काम बोडाणा का ही है। क्रोध और लोभ में अंधे होकर, वे घोड़ों पर सवार होकर डाकोर की ओर दौड़े।

डाकोर पहुँचकर उन्होंने बोडाणा को घेर लिया। भगवान को वहाँ के गोमती तालाब में छिपा दिया गया था, लेकिन पुजारियों ने उन्हें ढूँढ निकाला। वे मूर्ति वापस ले जाने पर अड़ गए। बोडाणा गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन पुजारियों की नज़र केवल चढ़ावे और धन पर थी।
अंत में, पुजारियों ने एक असंभव शर्त रखी:
 "अगर तुम मूर्ति के वजन के बराबर सोना हमें दे दो, तो हम भगवान को यहीं छोड़ देंगे, वरना हम उन्हें ले जा रहे हैं।"

बोडाणा अत्यंत निर्धन थे। सोने के नाम पर उनके पास कुछ न था। पुजारियों को लगा कि वे जीत गए हैं। लेकिन बोडाणा ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी पत्नी गंगाबाई की ओर देखा। पत्नी ने बिना एक पल गँवाए, अपनी नाक की छोटी सी स्वर्ण नथ (नाक की बाली) उतारकर बोडाणा के हाथ में रख दी।

गाँव के बीचों-बीच तराजू सजाया गया।

  एक पलड़े में ब्रह्मांड के स्वामी, भारी-भरकम पत्थर की मूर्ति।
 दूसरे पलड़े में भक्त के प्रेम से भीगी हुई, रत्ती भर की सोने की नथ।

पुजारी हँस रहे थे, लेकिन तभी वह हुआ जो इतिहास बन गया।

जैसे ही नथ तराजू पर रखी गई, मूर्ति वाला पलड़ा हवा में उठ गया और नथ वाला पलड़ा भारी हो गया! पुजारियों की आँखें फटी की फटी रह गईं। 

भगवान ने उस दिन सिद्ध कर दिया कि वे सोने-चांदी से नहीं, केवल सच्चे भाव से खरीदे जा सकते हैं। भक्त का प्रेम इतना भारी था कि भगवान उसके वश में होकर, उस छोटी सी नथ के मोल "बिक" गए।

पुजारियों को अपनी गलती का अहसास हुआ। वे खाली हाथ और ग्लानि के साथ द्वारका लौट गए (जहाँ बाद में नई मूर्ति स्थापित की गई),लेकिन डाकोर के भव्य मंदिर में आज भी वही मूल मूर्ति विराजमान है, जिसे बोडाणा अपनी बैलगाड़ी में लाए थे।

आज भी जब भक्त 'रणछोड़राय' के दर्शन करते हैं, तो उन्हें याद आता है कि ईश्वर धनवानों का नहीं, बल्कि सच्चे प्रेम करने वालों का है।

जय श्री राधे कृष्णा 🙏🏻🙏🏻

शनिवार, 7 फ़रवरी 2026

काशी में मणिकर्णिका घाट पर चिता जब शांत हो जाती है तब मुखाग्नि देने वाला व्यक्ति चिता भस्म पर 94 लिखता है।*

*शायद ही कुछ गिने चुने हिंदुओं को पता होगा....*

*काशी में मणिकर्णिका घाट पर चिता जब शांत हो जाती है तब मुखाग्नि देने वाला व्यक्ति चिता भस्म पर 94 लिखता है।*

*यह सभी को नहीं मालूम है।*

*खांटी बनारसी लोग या अगल बगल के लोग ही इस परम्परा को जानते हैं। बाहर से आये शवदाहक जन इस बात को नहीं जानते।*

*जीवन के शतपथ होते हैं।*

*100 शुभ कर्मों को करने वाला व्यक्ति मरने के बाद उसी के आधार पर अगला जीवन शुभ या अशुभ प्राप्त करता है।*

*94 कर्म मनुष्य के अधीन हैं। वह इन्हें करने में समर्थ है पर 6 कर्म का परिणाम ब्रह्मा जी के अधीन होता है।*

*हानि-लाभ, जीवन-मरण, यश- अपयश ये 6 कर्म विधि के नियंत्रण में होते हैं।*

*अतः आज चिता के साथ ही तुम्हारे 94 कर्म भस्म हो गये।*

*आगे के 6 कर्म अब तुम्हारे लिए नया जीवन सृजित करेंगे।*

*अतः 100 - 6 = 94 लिखा जाता है।*

*गीता में भी प्रतिपादित है कि मृत्यु के बाद मन अपने साथ 5 ज्ञानेन्द्रियों को लेकर जाता है।*

*यह संख्या 6 होती है। मन और पांच ज्ञान इन्द्रियाँ।*

*अगला जन्म किस देश में कहाँ और किन लोगों के बीच होगा यह प्रकृति के अतिरिक्त किसी को ज्ञात नहीं होता है।*

*अतः 94 कर्म भस्म हुए 6 साथ जा रहे हैं।*

*विदा यात्री।*

*तुम्हारे 6 कर्म तुम्हारे साथ हैं।*

*आपके लिए इन 100 शुभ कर्मों का विस्तृत विवरण दिया जा रहा है जो जीवन को धर्म और सत्कर्म की ओर ले जाते हैं एवं यह सूची आपके जीवन को सत्कर्म करने की प्रेरणा देगी......*

*100 शुभ कर्मों की गणना धर्म और नैतिकता के कर्म-*

1.सत्य बोलना

2.अहिंसा का पालन

3.चोरी न करना

4.लोभ से बचना

5.क्रोध पर नियंत्रण

6.क्षमा करना

7.दया भाव रखना

8.दूसरों की सहायता करना

9.दान देना (अन्न, वस्त्र, धन)

10.गुरु की सेवा

11.माता-पिता का सम्मान

12.अतिथि सत्कार

13.धर्मग्रंथों का अध्ययन

14.वेदों और शास्त्रों का पाठ

15.तीर्थ यात्रा करना

16.यज्ञ और हवन करना

17.मंदिर में पूजा-अर्चना

18.पवित्र नदियों में स्नान

19.संयम और ब्रह्मचर्य 9का पालन

20.नियमित ध्यान और योग सामाजिक और पारिवारिक कर्म

21.परिवार का पालन-पोषण

22.बच्चों को अच्छी शिक्षा देना

23.गरीबों को भोजन देना

24.रोगियों की सेवा

25.अनाथों की सहायता

26.वृद्धों का सम्मान

27.समाज में शांति स्थापना

28.झूठे वाद-विवाद से बचना

29.दूसरों की निंदा न करना

30.सत्य और न्याय का समर्थन

31.परोपकार करना

32.सामाजिक कार्यों में भाग लेना

33.पर्यावरण की रक्षा

34.वृक्षारोपण करना

35.जल संरक्षण

36.पशु-पक्षियों की रक्षा

37.सामाजिक एकता को बढ़ावा देना

38.दूसरों को प्रेरित करना

39.समाज में कमजोर वर्गों का उत्थान

40.धर्म के प्रचार में सहयोग आध्यात्मिक और व्यक्तिगत कर्म

41.नियमित जप करना

42.भगवान का स्मरण

43.प्राणायाम करना

44.आत्मचिंतन

45.मन की शुद्धि

46.इंद्रियों पर नियंत्रण

47.लालच से मुक्ति

48.मोह-माया से दूरी

49.सादा जीवन जीना

50.स्वाध्याय (आत्म-अध्ययन)

51.संतों का सान्निध्य

52.सत्संग में भाग लेना

53.भक्ति में लीन होना

54.कर्मफल भगवान को समर्पित करना

55.तृष्णा का त्याग

56.ईर्ष्या से बचना

57.शांति का प्रसार

58.आत्मविश्वास बनाए रखना

59.दूसरों के प्रति उदारता

60.सकारात्मक सोच रखना सेवा और दान के कर्म

61.भूखों को भोजन देना

62.नग्न को वस्त्र देना

63.बेघर को आश्रय देना

64.शिक्षा के लिए दान

65.चिकित्सा के लिए सहायता

66.धार्मिक स्थानों का निर्माण

67.गौ सेवा

68.पशुओं को चारा देना

69.जलाशयों की सफाई

70.रास्तों का निर्माण

71.यात्री निवास बनवाना

72.स्कूलों को सहायता

73.पुस्तकालय स्थापना

74.धार्मिक उत्सवों में सहयोग

75.गरीबों के लिए निःशुल्क भोजन

76.वस्त्र दान

77.औषधि दान

78.विद्या दान

79.कन्या दान

80.भूमि दान, नैतिक और मानवीय कर्म

81.विश्वासघात न करना

82.वचन का पालन

83.कर्तव्यनिष्ठा

84.समय की प्रतिबद्धता

85.धैर्य रखना

86.दूसरों की भावनाओं का सम्मान

87.सत्य के लिए संघर्ष

88.अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना

89.दुखियों के आँसू पोंछना

90.बच्चों को नैतिक शिक्षा

91.प्रकृति के प्रति कृतज्ञता

92.दूसरों को प्रोत्साहन

93.मन, वचन, कर्म से शुद्धता

94.जीवन में संतुलन बनाए रखना

*विधि के अधीन 6 कर्म*

95.हानि

96.लाभ

97.जीवन

98.मरण

99.यश

100.अपयश

*🙏🙏 हिंदू हो तो हिंदुओं को बताओ।*

*चाहे पार्टी के हो या विपक्षी, मरना सभी को है।*
 सनातन धर्म की जय 🚩

बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

आरक्षण का आधार पिछड़ा वर्ग या समूह के बजाय जाति किये जाने से इन 77 सालों में कोई लाभ नहीं हुआ है।*

सेवा में ,
        माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी, 
              प्रधानमंत्री ,
              भारत सरकार ,
                         नई दिल्ली 

विषय- भारत में आरक्षण को   समाप्त किये जाने एवं पदोन्नति में आरक्षण हेतु 117वें संबिधान संशोधन बिल को निरस्त किये जाने विषयक |

  माननीय महोदय , 
      सौभाग्य की बात है कि बहुत समय बाद भारत में आपके कुशल नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की केन्द्रीय सरकार विद्यमान है। 
आपके मेक इन इंडिया , स्वच्छता अभियान व नोट बंदी जैसी कई योजनाओं का हम ह्रदय से पूर्ण समर्थन करते हैं ।

 *माननीय महोदय* ,

जैसा कि आप जानते हैं कि समाज के पिछडे वर्गों के लिये संविधान में मात्र *दस वर्षों के लिये आरक्षण* की व्यवस्था की गयी थी, किन्तु जातिवादी व निहित कारणों से जाति आधारित आरक्षण की अवधि व क्रीमीलेयर की सीमा को बारंबार बिना समीचीन समीक्षा के बढाया जाता रहा है , 
जिसे कि 10--  10 वर्ष करते करते आज 77 वर्ष पूरे हो गए हैं ।
 *आज तक ऐसे आरक्षण प्राप्त डॉक्टर, इंजीनियर , प्रोफेसर , शिक्षक, कर्मचारी किसी ने नहीं कहा कि अब वह दलित या पिछड़ा नहीं रहा व अब उसे जातिगत आरक्षण की जरुरत नहीं है।*
  *इससे सिद्ध होता है कि आरक्षण का आधार पिछड़ा वर्ग या समूह के बजाय जाति किये जाने से इन 77 सालों में कोई लाभ नहीं हुआ है।*
महोदय , 
*इस जाति आरक्षण का लाभ जहां कुछ खास लोग परिवार समेत पीढी दर पीढी लेते जा रहें हैं वहीं वे इसे निम्नतम स्तर वाले अपने ही जरूरतमंदों लोगों तक भी नहीं पहुंचने दे रहे हैं। अन्यथा इन 77 वर्षों में हर आरक्षित वर्ग के व्यक्ति तक इसका लाभ पहुँच चुका होता।*
*ऐसे तबके को वे केवल अपने बार बार लाभ हेतु संख्या या गिनती तक ही सीमित कर दे रहे हैं।*
महोदय,
*गरीबी जाती देखकर नहीं आती*
*आरक्षण का आधार जाति किये जाने से जहाँ सामान्य वर्ग के तमाम निर्धन व जरूरतमंद युवा बेरोजगार व हतोत्साहित हैं , कर्मचारी कुंठित व उत्साहहीन हो रहे हैं,*
*वहीं समाज में जातिवाद का जहर बड़ी तेज़ी से बढ़ता जा रहा है।* 
  अत: आपसे निवेदन है कि राष्ट्र के समुत्थान व विकास के लिये संविधान में संशोधन करते हुये आरक्षण को समाप्त करने का कष्ट करेंगे ।
 किसी भी जाति - धर्म के असल जरूरतमंद निर्धन व्यक्ति को *आरक्षण नहीं बल्कि संरक्षण* देना सरकार को   सुनिश्चित करना चाहिए ।

*आरक्षण को पूर्ण रूप से समाप्त करने से पहले अगर वंचित वर्ग तक इसका ईमानदारी से वास्तव में सरकार लाभ पहुँचाना चाहती है तो इस आरक्षण को एक परिवार से एक ही व्यक्ति , केवल बिना विशेष योग्यता / कार्यकुशलता वाली समूह ग व घ की नौकरियों में मूल नियुक्ति के समय ही दिया जा सकता है।*

 *आयकर की सीमा में आने वाले व्यक्ति के परिवार को आरक्षण से वंचित किया जाना चाहिये ताकि राष्ट्र के बहुमूल्य संसाधनों का सदुपयोग सुनिश्चित हो सके।*

 *पदोन्नति में आरक्षण तो पूर्णत: बंद कराया ही जाना चाहिये जिससे कि योग्यता, कार्यकुशलता व वरिष्ठता का निरादर न हो।*

माननीय महोदय,
सविनय निवेदन है कि आपके कुशल नेतृत्व में भारत 'मेक इन इंडिया' और 'डिजिटल इंडिया' जैसे अभियानों के माध्यम से विश्व पटल पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। राष्ट्रहित में लिए गए आपके साहसी निर्णयों का हम पूर्ण समर्थन करते हैं। इसी क्रम में, राष्ट्र के समुत्थान हेतु आरक्षण नीति पर निम्नलिखित बिंदुओं की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ:

1. आर्थिक आधार पर संरक्षण: आरक्षण का आधार जाति के बजाय व्यक्ति की आर्थिक स्थिति होनी चाहिए। जो वास्तव में निर्धन हैं, उन्हें सरकार द्वारा विशेष 'संरक्षण' दिया जाना चाहिए, न कि केवल जातिगत लाभ।
2. एक परिवार, एक लाभ: आरक्षण का लाभ एक परिवार में केवल एक बार या एक पीढ़ी तक सीमित किया जाए, ताकि इसका लाभ उसी वर्ग के अन्य जरूरतमंदों तक पहुँच सके।
3. पदोन्नति में आरक्षण का विरोध: पदोन्नति में आरक्षण योग्यता और वरिष्ठता का अनादर करता है। इसे पूर्णतः समाप्त किया जाना चाहिए ताकि कार्यकुशलता बनी रहे।
4. क्रीमी लेयर और समीक्षा: 77 वर्षों के बाद भी आरक्षण की निरंतरता और क्रीमी लेयर की सीमाओं की निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है।
5. आयकर सीमा: आयकर के दायरे में आने वाले परिवारों को आरक्षण लाभ से मुक्त किया जाए ताकि संसाधनों का सही उपयोग हो सके।

महोदय, जातिवाद के जहर को समाप्त करने और राष्ट्र की प्रतिभाओं को कुंठा से बचाने के लिए इन सुधारों पर विचार करना समय की मांग है। आशा है कि आप राष्ट्रहित में इन सुझावों पर उचित कार्यवाही करेंगे।
भवदीय,

कैलाश चंद्र लढ़ा 
जोधपुर

   आशा है कि महोदय राष्ट्र व आमजन के हित में इन सुझावों पर ध्यान देते हुये समुचित कार्यवाही करने व इस हेतु जन जागरण अभियान प्रारंभ कर मुहिम को अंजाम तक पहुंचाने  का कष्ट करेंगे |




🙏 *विशेष निवेदन /आग्रह*🙏
*जन जागृति* के लिए आपको सिर्फ 10 लोगो को ये मेसेज फॉरवर्ड करना है और वो 10 लोग भी दूसरे 10 लोगों को ये मेसेज करें ।
इस प्रकार
1 = 10 लोग 
यह 10 लोग अन्य 10 लोगों को मेसेज करेंगे 
इस प्रकार :-
10 x10 = 100
100x10=1000
1000x10=10000
10000x10=100000
100000x10=1000000
1000000x10=10000000
10000000x10=100000000
100000000x10=1000000000
                            (100 करोड़ )
बस आपको तो एक कड़ी जोड़नी है देखते ही देखते सिर्फ आठ steps में पूरा देश जुड़ जायेगा।

Regards🙏

कैलाश चंद्र लढ़ा 
जोधपुर

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सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

Physostigma Venenosum 30 (जिसे 'Calabar Bean' भी कहा जाता है) होम्योपैथी में मुख्य रूप से आँखों की रोशनी, तंत्रिका तंत्र (Nervous System) और मांसपेशियों की कमजोरी के लिए एक अत्यंत प्रभावी औषधि है।

Physostigma Venenosum 30 (जिसे 'Calabar Bean' भी कहा जाता है) होम्योपैथी में मुख्य रूप से आँखों की रोशनी, तंत्रिका तंत्र (Nervous System) और मांसपेशियों की कमजोरी के लिए एक अत्यंत प्रभावी औषधि है।
यहाँ इसके उपयोग, लक्षण और खुराक की विस्तृत जानकारी दी गई है:

Physostigma 30 के मुख्य उपयोग (Key Benefits)
1. आँखों के लिए (Eye Symptoms - प्रमुख उपयोग)
Physostigma को अक्सर "आँखों की दवा" माना जाता है। यह निम्नलिखित स्थितियों में काम आती है:
 * Myopia (निकट दृष्टि दोष): यदि पास की चीजें देखने में दिक्कत हो और चश्मे का नंबर तेजी से बढ़ रहा हो।
 * आँखों में तनाव (Eye Strain): ज्यादा पढ़ने, सिलाई करने या कंप्यूटर/मोबाइल के उपयोग से आँखों में होने वाला दर्द।
 * Glaucoma (काला मोतिया): आँखों के अंदर बढ़े हुए दबाव को कम करने में सहायक।
 * Night Blindness: रात में कम दिखाई देना या धुंधलापन।
2. तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियां (Muscles & Nerves)
 * मांसपेशियों में फड़कन (Twitching): चेहरे की मांसपेशियों या पलकों का बार-बार फड़कना।
 * कमजोरी: शरीर में भारीपन और लकवा जैसी कमजोरी महसूस होना।
3. अन्य लक्षण
 * तेज सिरदर्द जो आँखों के तनाव से जुड़ा हो।
 * रीढ़ की हड्डी (Spine) में संवेदनशीलता और दर्द।
खुराक (Dosage)
Physostigma 30 की सामान्य खुराक इस प्रकार है:
 * तरल (Liquid): 2 से 3 बूंदें सीधे जीभ पर या एक चम्मच पानी में मिलाकर दिन में 3 बार लें।
 * गोलियां (Globules): 4 गोलियां दिन में 3 बार चूसें।
> ⚠️ नोट: बेहतर परिणाम के लिए दवा लेने से 15-20 मिनट पहले और बाद में कुछ न खाएं।
सोशल मीडिया पोस्ट कंटेंट (Professional Layout)
शीर्षक: क्या कंप्यूटर और मोबाइल के इस्तेमाल से आपकी आँखें थक जाती हैं? 👀💻
कंटेंट: आज के डिजिटल युग में 'Eye Strain' एक आम समस्या है। Physostigma 30 होम्योपैथी की एक ऐसी औषधि है जो न केवल आँखों की थकान को दूर करती है, बल्कि कमजोर होती दृष्टि (Weak Eyesight) और आँखों की मांसपेशियों की फड़कन में भी राहत देती है। अपनी आँखों को दें कुदरती सुरक्षा।

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फुर्सा साँप (Saw-scaled Viper) Member of BIG-4 venomous snakes found in India...!

🐍 फुर्सा साँप (Saw-scaled Viper) Member of BIG-4 venomous snakes found in India...!
वैज्ञानिक नाम: Echis carinatus
🔹 पहचान (Identification)
फुर्सा भारत के सबसे छोटे लेकिन अत्यंत खतरनाक विषैले साँपों में गिना जाता है। लंबाई: लगभग 30–60 सेमी, शरीर मोटा और छोटा, रंग हल्का भूरा, रेतीला या स्लेटी, शरीर पर ज़िग-ज़ैग या चेन जैसी सफ़ेद आकृतियाँ, आँखें बड़ी, पुतली लंबवत, शरीर की शल्क (scales) आरी के दाँत जैसे खुरदरे होते हैं।

👉 इन्हीं खुरदरे शल्कों को रगड़कर यह “सर्र-सर्र” जैसी चेतावनी ध्वनि निकालता है।

🔹 वितरण एवं आवास (Distribution & Habitat)
फुर्सा मुख्यतः भारत (विशेषकर शुष्क व अर्ध-शुष्क क्षेत्र) में पाया जाता है। वैसे यह पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, मध्य पूर्व व अफ्रीका के कुछ भागो में भी पाया जाता है। यह अधिकतर रेगिस्तानी क्षेत्र, पथरीली भूमि, खेत, झाड़ियाँ, मानव बस्तियों के आसपास पाया जाता है। 

👉 यह अक्सर रात में सक्रिय रहता है (Nocturnal)

🔹 स्वभाव (Behaviour)
यह अत्यंत चिड़चिड़ा और रक्षात्मक होता है। बिना चेतावनी भी हमला कर सकता है। अक्सर ज़मीन पर कुंडली मारे रहता है। खतरा महसूस होने पर S-आकार में कुंडली बनाकर आवाज़ करता है।

🔹 विष (Venom)
फुर्सा का विष हेमोटॉक्सिक होता है। यह विष रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया को बिगाड़ देता है। आंतरिक रक्तस्राव कराता है। ऊतकों (tissues) को नुकसान पहुँचाता है।

⚠️ फुर्सा भारत में सर्पदंश से होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण है।

लक्षण: तेज़ दर्द व सूजन, रक्तस्राव (नाक, मसूड़े, घाव से)उल्टी, चक्कर
और गंभीर मामलों में किडनी फेल होना।

🔹 आहार (Diet)
छोटे कृंतक (चूहे)
छिपकलियाँ
मेंढक
छोटे पक्षी

👉 यह पारिस्थितिकी तंत्र में चूहों की संख्या नियंत्रित करने में सहायक है।

🔹 प्रजनन (Reproduction)
मादा फुर्सा जीवित बच्चे जनती है (Viviparous), एक बार में लगभग 5–15 बच्चे हो सकते है। नवजात शिशु भी जन्म से ही विषैले होते हैं।

🔹 रोचक तथ्य: यह आकार में छोटा, लेकिन इसका विष अत्यंत शक्तिशाली होता है । इसकी “सर्र-सर्र” आवाज़ ही इसका सबसे बड़ा पहचान चिन्ह है। कई बार लोग इसे छोटा समझकर जोखिम उठा लेते हैं। उन्हें ऐसा करने से बचना चाहिए। 
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मंगलवार, 27 जनवरी 2026

WHITE DISHCHARGE ♦️श्वेत प्रदर (सफ़ेद पानी)♦️

 WHITE DISHCHARGE 

♦️श्वेत प्रदर (सफ़ेद पानी)♦️

ल्यूकोरिया या प्रदर रोग महिलाओं में होने वाला एक गंभीर रोग है. इस रोग में महिला की योनी से सफ़ेद रंग का स्राव निकलता रहता है जो महिला को शारीरिक एवं मानसिक रूप से कमजोर बना देता है..

सफ़ेद पानी की समस्या से पीड़ित महिला गर्भ धारण करने में सक्षम नहीं हो पाती एवं साथ ही उसके शरीर से धातुओं का क्षय होता रहता है जो उसे शारीरिक रूप से बेहद कमजोर बना देतें है..

♦️आयुर्वेदानुसार श्वेत प्रदर ♦️

संहिताओं में इसका वर्णन श्लेष्मिक प्रदर या श्लेष्मजा योनी नाम से मिलता है. सामान्य अवस्था में महिला के प्रजनन अंगो एवं भग प्रदेश आदि से प्राय: सफ़ेद रंग का एवं गंधहिन पानी जैसा स्राव निकलता रहता है, जो उस भाग को गीला बनाये रखता है.. इस स्राव की मात्रा उतनी ही होती है जितने में वह अंग गीला रहे | मानसिक विकार जैसे काम, क्रोध एवं वासना आदि के कारण यह मात्रा बढ़ भी जाती जो एक समय पश्चात सामान्य हो जाती है.. कभी  कभार दुर्बलता, कुपोषण, आहार विहार एवं व्याधियों के कारण यह मात्रा अधिक हो जाती है जो लम्बे समय तक परेशान करती है | इसी अवस्था को श्वेत प्रदर कहते है..

आयुर्वेद चिकत्सानुसार महिलाओं में सफ़ेद पानी की समस्या को 5 प्रकार की माना है..

भगज श्वेत प्रदर
योनिज
ग्रीवीय एवं
ग्रभास्यज श्वेत प्रदर

श्वेत प्रदर (सफ़ेद पानी) के कारण

पांडू रोग / खून की कमी

मानसिक विकार जैसे क्रोध, भय एवं चिंता आदि 

अधिक सम्भोग

अपच एवं अजीर्ण 

कब्ज

मूत्राशय में सुजन

अतृप्त कामवासन

भावनात्मक कष्ट आदि

श्वेत प्रदर की पहचान या लक्षण 
 
योनिमार्ग से सफ़ेद जलीय चिपचिपे पदार्थ का बाहर निकलना.

योनी में खुजली एवं जलन.
जांघों में भारीपन 
शारीरिक दुर्बलता 
आलस्य 
भोजन का ठीक प्रकार से पाचन न होना 
कब्ज हो जाना 
सिर दर्द 
चक्कर आना 
भोजन में अरुचि होना आदि लक्षण सफ़ेद पानी की समस्या होने पर दिखाई देते है 

♦️श्वेत प्रदर के कारगर घरेलु इलाज.♦️

श्वेत प्रदर नाशक त्रिफला योग
 
♦️सामग्री ♦️

आंवले का बक्कल, हरड का बक्कल, एवं बहेड़ा इन तीनो को 1  -1 तोला(10 ग्राम) एवं जल आधा kg

♦️विधि ♦️

सबसे पहले इन तीनो द्रव्यों को कूटपीस कर दरदरा कर लें | अब रात्रि के समय इन्हें एक मिट्टी के बर्तन में रखकर ऊपर से पानी डाल दें..रात्रि भर अच्छी तरह भीगने के बाद सुबह इसे आंच पर चढ़ा कर काढ़ा तैयार कर लें यह योग सभी प्रकार के प्रदर रोग में उपयोगी है..

इसके उपयोग से पुराने से पुराना प्रदर रोग ठीक हो जाता है | साथ ही वेदना आदि में भी आराम मिलता है..

♦️उपयोग की विधि ♦️

इस काढ़े का उपयोग योनी में एनिमा देने के लिए किया जाता है | योनी में ड्यूस एवं पिच्चु को धारण करना चाहिए एवं साथ ही योनिमार्ग को इस काढ़े से धोना चाहिए | लगातार कुछ दिनों के प्रयोग से शीघ्र ही श्वेत प्रदर की समस्या नष्ट हो जाती है |

आयुर्वेद में त्रिफला क्वाथ से योनी प्रक्षालन को उपयुक्त चिकित्सा माना गया है..


गुलर योग

सामग्री 
गुलर के पक्के फल का 50 ग्राम चूर्ण और 100 ग्राम मिश्री |

♦️विधि ♦️

गुलर के फलों को को टुकड़े  टुकड़े करके सुखा लें | जब एक दम सुख जाए तब कूट पीसकर कर कपड़छन चूर्ण कर लें | इस चूर्ण में मिश्री मिलाकर अच्छी तरह ढक कर रखें |

♦️उपयोग एवं गुण ♦️

10 ग्राम तक की मात्रा में इस चूर्ण को खाकर ऊपर से गाय या बकरी का दूध ग्रहण करना चाहिए | अगर रक्त प्रदर की समस्या हो तो अशोकारिष्ट के साथ सेवन करना चाहिए | हमेशा ठन्डे जल के साथ ही इसका सेवन करना चाहिए | दिन में दो बार सुबह एवं शाम लिया जा सकता है | इसके उपयोग से सभी प्रकार के प्रदर रोग ठीक हो जाता है |

♦️श्वेत प्रदर (सफ़ेद पानी) के घरेलु नुस्खें..♦️

मुलहठी एवं चीनी 10 ग्राम एवं 20 ग्राम प्रत्येक को दोनों को पीसकर चूर्ण बना लें | आधा चम्मच चूर्ण सुबह और आधा चम्मच शाम को दूध के साथ सेवन करें.

सूखे हुए चमेली के पते 4 ग्राम और सफ़ेद फिटकरी 2 ग्राम दोनों को खूब महीन पिसलें | इसमें से 2 ग्राम चूर्ण शक्कर में मिलाकर रात के समय फांककर ऊपर से दूध पी लें | इसके प्रयोग से श्वेत प्रदर ठीक हो जाता है |

पके हुए केले के अन्दर फिटकरी का चूर्ण भरकर इसे दोपहर के समय खूब चबा चबा कर खाएं | इसके सेवन से सफ़ेद पानी की समस्या से राहत मिलती है |

पेट पर ठन्डे पानी का कपडा रोज 10 मिनट रखना चाहिए |

अशोक के पेड़ की छाल को 50 ग्राम की मात्रा में लें | इसे 1 किलो पानी में पकाएं जब पानी आधा रहे तब इसे आंच से निचे उतार कर छान कर दूध में मिलाकर सेवन करना श्वेत प्रदर के रोग में फायदेमंद रहता है |

अनार के छिलकों को ठन्डे पानी के साथ सेवन करने से फायदा मिलता है |

मूली का सेवन भी फायदेमंद रहता है | मूली के पतों का रस निकाल कर सेवन करने से भी लाभ मिलता है |

गुलाब के फुल की पत्तियों को मिश्री के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है |



Cassia sop Q एक प्रभावशाली होम्योपैथिक मदर टिंचर है,

 Cassia sop Q एक प्रभावशाली होम्योपैथिक मदर टिंचर है, 



जो Cassia sophera पौधे की प्राकृतिक पत्तियों से तैयार की जाती है। यह दवा विशेष रूप से खांसी, दमा, ब्रोंकाइटिस और सांस की तकलीफ में उपयोगी मानी जाती है। जिन लोगों को बार-बार सीने में जकड़न, सांस फूलना या एलर्जी के कारण श्वसन समस्या रहती है, उनके लिए Cassia sop Q सहायक हो सकती है। यह फेफड़ों को मजबूत करने और श्वसन तंत्र के संतुलन में मदद करती है। प्राकृतिक और हर्बल गुणों से भरपूर यह औषधि होम्योपैथी में विश्वसनीय स्थान रखती है। दवा का प्रयोग हमेशा योग्य चिकित्सक की सलाह से करना चाहिए।
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सुहागा वो खनिज जो हर घर में दवा बनकर छिपा है!

 सुहागा वो खनिज जो हर घर में दवा बनकर छिपा है! 🌸

कभी सोचा है जो “सुहागा” आपकी रसोई में रखा है — वो सिर्फ खाना पकाने के काम नहीं आता, बल्कि एक बहुमूल्य आयुर्वेदिक औषधि भी है! 🤔
हाँ, वही सुहागा जिसे संस्कृत में “टनक” कहा गया है — और जो तिब्बत व फारस की झीलों से निकलकर हमारे शरीर को भीतर से शुद्ध करता है। 🌊💎

आयुर्वेद में इसे बोरेक्स या टंकण भस्म कहा गया है — और यह शरीर, त्वचा, बाल, हृदय, यहाँ तक कि महिला स्वास्थ्य के लिए भी अमृत समान माना गया है! 💫

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🌿 सुहागा के मुख्य लाभ (Amazing Benefits)

🦵 1. जोड़ों के दर्द का रामबाण इलाज

सुहागा में मौजूद सूजनरोधी गुण (Anti-inflammatory properties) शरीर की सूजन, दर्द और जकड़न को कम करते हैं।
👉 गठिया या पुराने दर्द में इसे लेने से आराम मिलता है।

❄️ 2. बुखार में Cooling Effect

सुहागा शरीर को ठंडक देता है और बुखार में राहत पहुंचाता है।
💧 इसे पानी या दूध के साथ 5 मिनट उबालकर पीने से तेज बुखार में भी जल्दी आराम मिलता है।

❤️ 3. दिल की सेहत का रक्षक

सुहागा रक्त में कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और हृदय को स्वस्थ बनाए रखता है।
यह एंटीऑक्सीडेंट्स को बढ़ाता है, जिससे हृदय रोगों का खतरा कम होता है।

🍽️ 4. पाचन को बनाए दुरुस्त

आयुर्वेद में इसे उष्ण प्रकृति वाला माना गया है।
यह पाचन अग्नि को बढ़ाकर गैस, अपच और पेट फूलना जैसी समस्याओं से छुटकारा दिलाता है।

💆‍♀️ 5. त्वचा और बालों के लिए अद्भुत औषधि

👉 नारियल तेल में मिलाकर सिर पर लगाने से डैंड्रफ और बाल झड़ने की समस्या में राहत।
👉 त्वचा पर लगाने से मुंहासे, फुंसियाँ और संक्रमण दूर होते हैं।

👩‍🦰 6. महिलाओं के लिए वरदान (PCOS में लाभकारी)

सुहागा एक प्राकृतिक मूत्रवर्धक (diuretic) है।
यह PCOS में ओव्यूलेशन और मासिक धर्म को नियमित करता है तथा UTI संक्रमण से भी रक्षा करता है।

🤧 7. खांसी और बलगम के लिए असरदार दवा

सुहागा के कफनिस्सारक गुण फेफड़ों में जमा बलगम को पिघलाते हैं और बाहर निकालते हैं।
👉 ब्रोंकाइटिस और पुरानी खांसी में “टंकण भस्म + शीतोपलादि चूर्ण” बहुत उपयोगी है।

💢 8. मासिक धर्म दर्द (Dysmenorrhea)

टंकण भस्म के ऐंठनरोधी गुण मासिक धर्म के दर्द और भारी थक्कों को कम करते हैं।
👉 प्रवाल पिष्टी, अशोक चूर्ण और चंद्रप्रभा वटी के साथ लेने पर यह और प्रभावी होता है।

🧴 9. रूसी (Dandruff) की समस्या में उपाय

सरसों या नारियल तेल में सुहागा मिलाकर सिर पर लगाने से रूसी और खुजली खत्म हो जाती है। ✨

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⚠️ सुहागा के दुष्प्रभाव (Precautions)

आयुर्वेद में कहा गया है — “अति सर्वत्र वर्जयेत्” यानी किसी भी चीज़ की अधिकता हानिकारक होती है।

❌ अत्यधिक सेवन से

उल्टी, मिचली, या पेट दर्द हो सकता है।

गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को नहीं लेना चाहिए।

पुरुषों को 2 महीने से अधिक लगातार सेवन नहीं करना चाहिए (शुक्राणु गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है)।

अधिक उपयोग से हड्डियों की मजबूती घट सकती है।

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🌼 सेवन विधि (Usage Method)

👉 सामान्यतः “टंकण भस्म” के रूप में 125mg – 250mg तक की मात्रा पर्याप्त मानी जाती है।
👉 इसे शहद, घी या गर्म पानी के साथ मिलाकर लिया जाता है।
(कृपया सेवन से पहले किसी आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह जरूर लें।)

🌿 निष्कर्ष (Conclusion)

सुहागा केवल एक खनिज नहीं — बल्कि यह प्रकृति का ऐसा उपहार है जो पाचन, त्वचा, जोड़ों और सांस की समस्याओं का एक साथ समाधान है।
बस सही मात्रा और समय पर इसका सेवन करें, और पाएँ स्वास्थ्य का खज़ाना! 💎 #fblifestyle 

🌿 “प्रकृति में ही है असली चिकित्सा।” 

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