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गुरुवार, 23 अप्रैल 2026

भगवान करे आपके माता-पिता कभी उस हालत में न आएं।

एक जेरियाट्रिशियन (वृद्धावस्था विशेषज्ञ) के दिल से निकले शब्द:


बुढ़ापे में, अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक बिस्तर पर पड़ा रहता है और उसके बच्चे सिर्फ यह कहते हैं, “आराम से करो” (Take it slow), तो अक्सर यही सबसे खतरनाक स्थिति की शुरुआत होती है।

“एक बुज़ुर्ग के लिए लेटना आसान है, लेकिन उठना बहुत मुश्किल। कई बार बीमारी नहीं मारती, बल्कि बिस्तर मार देता है।”

27 साल के अनुभव वाले एक जेरियाट्रिक्स विभाग के निदेशक की सच्ची कहानी:

मेरा नाम सोंग युआनमिंग है, मेरी उम्र 54 साल है।

मैंने प्रांतीय राजधानी के एक शीर्ष अस्पताल में 27 वर्षों तक जेरियाट्रिक्स विभाग में काम किया है।

मैंने 16,000 से अधिक मरीजों का इलाज किया है और 2,400 से अधिक गंभीर स्थिति के नोटिस लिखे हैं।

आज मैं कोई मेडिकल भाषा नहीं इस्तेमाल करूंगा, सिर्फ तीन सच्ची कहानियाँ बताऊंगा, जो मैंने खुद देखी हैं।

हर एक कहानी आपके माता-पिता के लिए बहुत मायने रखती है।


पहली कहानी (2019 की शरद ऋतु)

मरीज: 81 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक, श्रीमान सन
उन्हें जांघ की हड्डी (फेमोरल नेक) में फ्रैक्चर था।

सर्जरी सफल रही। तीसरे दिन डॉक्टर ने कहा कि उन्हें वॉकर के सहारे चलने की कोशिश करनी चाहिए।

लेकिन उनके बेटे ने मना कर दिया:

“पापा इतने बूढ़े हैं, अभी सर्जरी हुई है। अगर फिर गिर गए तो? आराम से करो, उन्हें आराम करने दो।”

मैंने यह “आराम से करो” कम से कम 500 बार सुना है।

हर बार यह सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

क्योंकि 80 साल से ऊपर के लोगों के लिए ये तीन शब्द अक्सर एक खाई की ओर इशारा करते हैं।

श्रीमान सन ने बेटे की बात मानी और आराम करने लगे।

  • 7वें दिन: खांसी शुरू
  • 12वें दिन: 38.7°C बुखार, CT में फेफड़ों में हाइपोस्टैटिक निमोनिया
  • 18वें दिन: ICU में भर्ती
  • 23वें दिन: मृत्यु

मौत का कारण न फ्रैक्चर था, न सर्जरी की जटिलता—

बल्कि बिस्तर पर पड़े रहने से हुआ निमोनिया।

हड्डी ठीक हो गई थी, लेकिन फेफड़े बिस्तर ने खराब कर दिए।


दूसरी कहानी (जनवरी 2021)

मरीज: 78 वर्षीय स्ट्रोक (लकवा) के मरीज, श्रीमान ली

10 दिन बाद हालत स्थिर हो गई।

मैंने उनकी बेटी से कहा:

“सबसे जरूरी है—रीहैबिलिटेशन। जितनी जल्दी शुरू करें उतना अच्छा।
उन्हें दिन में कम से कम दो बार बैठाना है, हर बार 30 मिनट।
अगर हो सके तो खड़ा करें, चलाएं।”

बेटी बहुत सेवा भाव वाली थी। उसने 24 घंटे की देखभाल के लिए केयरटेकर रख लिया।

सब कुछ परफेक्ट था—खाना, नहलाना, डायपर बदलना…

लेकिन एक चीज नहीं हुई—उन्हें हिलाया नहीं गया।

उसे डर था—थक जाएंगे, दर्द होगा, गिर जाएंगे।

हर बार जब केयरटेकर बैठाने की कोशिश करता, वह कहती:

“जबरदस्ती मत करो, आराम करने दो।”

तीन महीने बाद—

उनका दूसरा पैर भी बेकार हो गया।

यह दूसरा स्ट्रोक नहीं था—

यह मसल एट्रॉफी (मांसपेशियों का गलना) था।

  • लंबे समय तक लेटे रहने से हर हफ्ते 1.5%–3% मांसपेशियां खत्म होती हैं
  • 3 महीने में लगभग 40% मांसपेशियां खत्म

नतीजा:

आधा लकवा → पूरा लकवा

“अभी भी खड़े हो सकते हैं” → “अब कभी नहीं खड़े हो पाएंगे”

वे 14 महीने और जीवित रहे।

इस दौरान उन्हें 3 बेडसोर (घाव) हुए।

सबसे बड़ा घाव इतना गहरा था कि हड्डी दिख रही थी।

ड्रेसिंग करते समय वे तौलिया काटते थे, और आंखों से आंसू बहते थे।

हर बार बेटी रोती और कहती—

“पापा, आराम से करो।”

यह “आराम से करो”—

सबसे नरम लेकिन सबसे क्रूर व्यवहार है।


तीसरी कहानी (2023)

मरीज: 83 वर्षीय श्रीमान झाओ (हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी)

उनका बेटा इंजीनियर था—तार्किक सोच वाला।

सर्जरी के अगले दिन वह मेरे पास नोटबुक लेकर आया:

“डॉक्टर, कृपया रोज का रीहैब प्लान बना दीजिए।”

मैंने 7 दिन का प्लान बनाया:

  • दिन 1: एंकल एक्सरसाइज, हर घंटे 20 बार
  • दिन 2: पैर उठाना, 10 बार × 4 सेट
  • दिन 3: वॉकर के साथ खड़ा होना (2 मिनट × 3 बार)
  • दिन 5: 10 कदम चलना (4 बार)
  • दिन 7: 8 मीटर चलना

क्या उन्हें दर्द हुआ?

हाँ।

तीसरे दिन जब वह खड़े हुए, उनके माथे पर पसीना और होंठ सफेद थे।

बेटे ने न कहा “आराम करो”, न कहा “रुक जाओ।”

उसने कहा:

“पापा, सिर्फ 30 सेकंड खड़े रहो। मैं टाइम कर रहा हूँ।”

30 सेकंड।

उन्होंने दांत भींचकर पूरा किया।

वही 30 सेकंड सबसे असरदार दवा थे।

14वें दिन—

वह खुद चलकर वार्ड से बाहर आए।

धीरे-धीरे, लेकिन अपने पैरों पर।

वह उस साल के 184 मरीजों में सबसे बेहतर रिकवर हुए।


27 साल का अनुभव — 5 सच्चाई

  1. 2 हफ्ते से ज्यादा बिस्तर = तेज मांसपेशी नुकसान
    लेटना आराम नहीं, विनाश है।

  2. पहले 72 घंटे = गोल्डन पीरियड
    इस समय में चलना शुरू हुआ या नहीं—यही तय करता है भविष्य।

  3. तीन खतरनाक चीजें:

    • निमोनिया
    • ब्लड क्लॉट
    • बेडसोर
      ये बीमारी से ज्यादा जान लेते हैं।
  4. गलत सेवा भाव (Filial piety)
    सब कुछ खुद करना = उन्हें अपाहिज बनाना।

  5. सच्ची सेवा = उन्हें खड़ा करना
    चाहे “कठोर” क्यों न बनना पड़े।


अंतिम संदेश

मुझसे पूछा गया—आपको सबसे ज्यादा किस बात का डर लगता है?

मैंने कहा—

मुझे गंभीर बीमारी से डर नहीं लगता।

मुझे डर लगता है जब कोई कहता है—

आराम से करो।”

क्योंकि इसका मतलब होता है—उन्होंने कोशिश छोड़ दी है।


*मैंने अपने परिवार से कह दिया है:

अगर मैं कभी बिस्तर पर पड़ा रहूं—
मुझे ‘आराम से करो’ मत कहना।”

“मुझे उठाओ, चलाओ, टाइमर लगाओ—
और कहो: पापा, बस 30 सेकंड और!”


आप सबके लिए

भगवान करे आपके माता-पिता कभी उस हालत में न आएं।

लेकिन अगर आएं—

तो याद रखना:

❌ “आराम से करो” मत कहना
✅ “मैं आपको खड़ा होने में मदद करूंगा” कहना

वो 30 सेकंड—

उनकी पूरी जिंदगी बदल सकते हैं।

क्योंकि खुद चलकर टॉयलेट जाना—

बुढ़ापे की सबसे कीमती आज़ादी है।

इसे बचाइए। अभी से।

सोमवार, 20 अप्रैल 2026

लेंसकार्ट कवर-अप: हिंदू घृणा की कॉर्पोरेट कहानी

लेंसकार्ट कवर-अप: हिंदू घृणा की कॉर्पोरेट कहानी
कभी-कभी किसी बड़ी कंपनी की असली कहानी प्रेस रिलीज़ या विज्ञापनों में नहीं, बल्कि उन छोटे-छोटे दस्तावेज़ों में छिपी होती है जिन्हें आम तौर पर कोई पढ़ता भी नहीं. Lenskart — एक $5.6 बिलियन की कंपनी, IPO की दहलीज पर खड़ी — ऐसी ही एक कहानी के केंद्र में आ गई, जब उसका एक “स्टाइल गाइड” 15 अप्रैल को सार्वजनिक हो गया.

पहली नज़र में यह एक सामान्य कॉर्पोरेट गाइडलाइन लग सकती थी — कर्मचारियों के पहनावे और प्रस्तुति से जुड़ी बातें. लेकिन जैसे-जैसे लोग इसे पढ़ते गए, सवाल उठने लगे. गाइडलाइन में साफ लिखा था कि बिंदी, तिलक और कलावा जैसे धार्मिक प्रतीकों की अनुमति नहीं है. सिंदूर की बात भी थी, लेकिन सीमित और माथे पर नहीं. इसके उलट, हिजाब को न सिर्फ अनुमति दी गई थी, बल्कि उसके रंगों तक के निर्देश और ट्रेनिंग वीडियो देने की बात कही गई थी.

यह अंतर ही पूरे विवाद का केंद्र बन गया..

जब यह दस्तावेज़ वायरल हुआ, तो Peyush Bansal ने इसे “गलत” और “भ्रामक” बताया. लेकिन यह सफाई ज्यादा देर टिक नहीं पाई. सामने आया कि दस्तावेज़ कंपनी का ही था, फरवरी 2026 का, और आधिकारिक रूप से इस्तेमाल में था. इसके बाद बयान बदला गया — इसे “पुराना ट्रेनिंग डॉक्यूमेंट” कहा गया, जिसमें एक “गलत लाइन” थी, जिसे 17 फरवरी को हटा दिया गया था.

अगर कहानी यहीं खत्म हो जाती, तो शायद यह एक साधारण कॉर्पोरेट गलती मान ली जाती, लेकिन असली कहानी यहीं से शुरू होती है..

पुणे के एक स्टोर मैनेजर, आकाश फालके, ने महीनों पहले ही इस पॉलिसी पर सवाल उठाए थे. नवंबर 2025 में उन्होंने HR को लिखा, दिसंबर में फिर याद दिलाया...जनवरी और फरवरी 2026 में, स्टोर ऑडिट के दौरान कर्मचारियों के वेतन में कटौती तक की जा रही थी — सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने बिंदी या तिलक पहना था. साफ था कि यह सिर्फ एक दस्तावेज़ नहीं था; यह ज़मीन पर लागू की जा रही नीति थी...

जब अंदर से कोई सुनवाई नहीं हुई, तो फालके ने मामला आगे बढ़ाया. 20 फरवरी को उन्होंने महाराष्ट्र सरकार के grievance portal पर शिकायत दर्ज की...उसी दिन उनकी नौकरी चली गई.

यह घटना अपने आप में बहुत कुछ कहती है, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती.

सूरत के ज़ील सोगासिया को नौकरी का ऑफर मिला और ट्रेनिंग के लिए नवी मुंबई बुलाया गया...पहले ही दिन उन्हें कहा गया कि अपनी शिखा कटवानी होगी, तिलक हटाना होगा, और धार्मिक टैटू भी हटाने होंगे — वरना नौकरी नहीं मिलेगी. उन्होंने इनकार किया,  अगले ही दिन उन्हें निकाल दिया गया.

यह अप्रैल 2026 की बात है, यानी उस दावे के लगभग दो महीने बाद, जिसमें कहा गया था कि ऐसी पॉलिसी पहले ही हटा दी गई है.

इन घटनाओं को जोड़कर देखें, तो एक पैटर्न उभरता है. पांच महीनों तक दो कर्मचारियों ने अंदर से इस मुद्दे को उठाया. दोनों को नजरअंदाज किया गया. एक को शिकायत करने पर निकाल दिया गया, दूसरे को अपनी पहचान न बदलने पर. दूसरी तरफ, कंपनी का आधिकारिक पक्ष बार-बार बदलता रहा — हर बार, जब नया तथ्य सामने आया.

यही वह जगह है जहां यह कहानी सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं रहती. यह उस तरीके को दिखाती है, जिससे आज के कॉर्पोरेट सिस्टम में भेदभाव काम करता है. यह खुले तौर पर नहीं आता, न ही बड़े-बड़े बयानों में दिखता है. यह आता है गाइडलाइनों में, ऑडिट रिपोर्ट्स में, और उन चुपचाप लिए गए फैसलों में, जिनका असर सीधे लोगों की रोज़ी-रोटी पर पड़ता है.

सब कुछ इतना व्यवस्थित और “नॉर्मल” बना दिया जाता है कि सवाल उठाना ही असामान्य लगने लगता है.

शायद यही कारण है कि यह सब इतने समय तक बिना शोर के चलता रहा, और शायद यही कारण है कि एक लीक हुआ PDF इतना बड़ा असर डाल गया.

क्योंकि कभी-कभी, एक दस्तावेज़ ही पूरी कहानी बदल देता है.

भुलक्कड़ हिन्दू ईद मनाएगा, मत्स्य जयंती भूल जाएगा।

भुलक्कड़ हिन्दू ईद मनाएगा, मत्स्य जयंती भूल जाएगा।
आज का दिन साधारण नहीं है।
आज वह दिन है जब सृष्टि को बचाया गया था…
आज मत्स्य जयंती है।

लेकिन विडंबना देखिए —
न टीवी पर चर्चा,
न सोशल मीडिया पर उत्साह,
न ही हमारे जीवन में उसका स्थान।

क्या हम सच में अपने धर्म से इतने दूर हो चुके हैं?

पंचांग कहता है कुछ और…

हम आधुनिक कैलेंडर देखते हैं —
लेकिन हिंदू पंचांग कुछ और ही बताता है।

आज शुक्ल पक्ष की तृतीया है,
और यही वह पावन तिथि है
जिसे शास्त्रों में मत्स्य जयंती कहा गया है।

👉 और सबसे महत्वपूर्ण बात:
इसी के बाद आरंभ होता है हिंदू नव वर्ष (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा)

यानी आज केवल एक पर्व नहीं —
यह नए युग की दहलीज है।

जब सृष्टि डूब रही थी…

प्राचीन ग्रंथों में वर्णन मिलता है कि एक समय
पूरी सृष्टि प्रलय (महाविनाश) में डूबने वाली थी।

तभी एक छोटी सी मछली प्रकट हुई…
जिसने राजा मनु से कहा:

“मुझे बचाओ, मैं तुम्हें बचाऊँगा।”

यह कोई साधारण मछली नहीं थी —
यह स्वयं भगवान विष्णु का अवतार था।

शास्त्रों में प्रमाण

यह कथा केवल कहानी नहीं है,
बल्कि कई ग्रंथों में स्पष्ट रूप से वर्णित है:
 • श्रीमद्भागवत महापुराण (स्कंध 😎
 • मत्स्य पुराण
 • महाभारत (शांति पर्व)

इन ग्रंथों में बताया गया है कि:

👉 भगवान ने मत्स्य रूप धारण किया
👉 मनु को एक नौका बनाने को कहा
👉 सप्तऋषियों, बीजों और वेदों को उस नौका में सुरक्षित रखा

जब प्रलय आया,
तो वही मत्स्य रूप भगवान उस नौका को
अपनी सींग से बांधकर सुरक्षित ले गए।

इसका गहरा अर्थ

यह केवल “बचाने” की कहानी नहीं है।

👉 यह प्रतीक है:
 • ज्ञान (वेद) को बचाने का
 • धर्म को जीवित रखने का
 • सृष्टि के पुनर्निर्माण का

जब सब कुछ समाप्त हो रहा था,
तब भी धर्म नहीं मिटा।

लेकिन आज क्या हो रहा है?

आज हम:
 • विदेशी त्योहार याद रखते हैं

विदेशी अक्रताओं का त्योहारों को गले लगाते हैं 

 • लेकिन अपने शास्त्रीय पर्व भूल जाते हैं
 • हम “नया साल” 1 जनवरी को मनाते हैं
 • लेकिन असली नव संवत्सर भूल जाते हैं

👉 क्या यह केवल भूल है?
या हमारी जड़ों से दूर जाने का संकेत?


सच्चाई जो चुभती है

आज अगर आप 100 लोगों से पूछें:

“आज क्या है?”

तो शायद ही कोई कहेगा —
 ————— “आज मत्स्य जयंती है”

यह केवल अज्ञान नहीं,
यह हमारी संस्कृति की चुपचाप हो रही क्षति है।


नव वर्ष का संकेत (Hindu New Year) 

मत्स्य जयंती केवल एक स्मृति नहीं —
यह एक शुरुआत का संकेत है।

 —- इसके बाद आता है:
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा — हिंदू नव वर्ष

यानी:
 • नया समय
 • नई ऊर्जा
 • नया धर्मचक्र

    —— इसलिए यह दिन कहता है:

“पुराने अज्ञान को छोड़ो,
और नए ज्ञान के साथ आगे बढ़ो।”


    हमें क्या करना चाहिए? (What Needs To Be Done) 

आज के दिन:
 • भगवान विष्णु की पूजा करें
 • मत्स्य अवतार की कथा पढ़ें
 • अपने बच्चों को यह ज्ञान दें
 • और सबसे जरूरी —
     इस दिन को याद रखें

जब पूरी दुनिया डूब रही थी,
तब एक “मछली” ने सृष्टि को बचाया…

लेकिन आज,
जब हमारी संस्कृति डूब रही है,
तो क्या हम उसे बचाने के लिए तैयार हैं?

“जिस दिन भगवान ने सृष्टि को बचाया,
उसी दिन हम उसे भूल बैठे…
शायद यही कलियुग की सबसे बड़ी विडंबना है।”
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026

पड़ोसी विहीन हो रहे हैं। आप वीरान हो रहे हैं।आज गांव सूने हो चुके हैं शहर कराह रहे हैं |

किसी दिन सुबह उठकर एक बार इसका जायज़ा लीजियेगा कि कितने घरों में अगली पीढ़ी के बच्चे रह रहे हैं ? कितने बाहर निकलकर नोएडा, गुड़गांव, पूना, बेंगलुरु, चंडीगढ़,बॉम्बे, कलकत्ता, मद्रास, हैदराबाद, बड़ौदा जैसे बड़े शहरों में जाकर बस गये हैं? 
 कल आप एक बार उन गली मोहल्लों से पैदल निकलिएगा जहां से आप बचपन में स्कूल जाते समय या दोस्तों के संग मस्ती करते हुए निकलते थे।
 तिरछी नज़रों से झांकिए.. हर घर की ओर आपको एक चुपचाप सी सुनसानियत मिलेगी, न कोई आवाज़, न बच्चों का शोर, बस किसी किसी घर के बाहर या खिड़की में आते जाते लोगों को ताकते बूढ़े जरूर मिल जायेंगे।
आखिर इन सूने होते घरों और खाली होते मुहल्लों के कारण क्या  हैं ?
भौतिकवादी युग में हर व्यक्ति चाहता है कि उसके एक बच्चा और ज्यादा से ज्यादा दो बच्चे हों और बेहतर से बेहतर पढ़ें लिखें। 
उनको लगता है या फिर दूसरे लोग उसको ऐसा महसूस कराने लगते हैं कि छोटे शहर या कस्बे में पढ़ने से उनके बच्चे का कैरियर खराब हो जायेगा या फिर बच्चा बिगड़ जायेगा। बस यहीं से बच्चे निकल जाते हैं बड़े शहरों के होस्टलों में। 
अब भले ही दिल्ली और उस छोटे शहर में उसी क्लास का सिलेबस और किताबें वही हों मगर मानसिक दबाव सा आ जाता है   बड़े शहर में पढ़ने भेजने का।
 हालांकि इतना बाहर भेजने पर भी मुश्किल से 1% बच्चे IIT, PMT या CLAT वगैरह में निकाल पाते हैं...। फिर वही मां बाप बाकी बच्चों का पेमेंट सीट पर इंजीनियरिंग, मेडिकल या फिर बिज़नेस मैनेजमेंट में दाखिला कराते हैं। 
4 साल बाहर पढ़ते पढ़ते बच्चे बड़े शहरों के माहौल में रच बस जाते हैं। फिर वहीं नौकरी ढूंढ लेते हैं । सहपाठियों से शादी भी कर लेते हैं।आपको तो शादी के लिए हां करना ही है ,अपनी इज्जत बचानी है तो, अन्यथा शादी वह करेंगे ही अपने इच्छित साथी से।
अब त्यौहारों पर घर आते हैं माँ बाप के पास सिर्फ रस्म अदायगी हेतु।
माँ बाप भी सभी को अपने बच्चों के बारे में गर्व से बताते हैं ।  दो तीन साल तक उनके पैकेज के बारे में बताते हैं। एक साल, दो साल, कुछ साल बीत गये । मां बाप बूढ़े हो रहे हैं । बच्चों ने लोन लेकर बड़े शहरों में फ्लैट ले लिये हैं। 
अब अपना फ्लैट है तो त्योहारों पर भी जाना बंद।
अब तो कोई जरूरी शादी ब्याह में ही आते जाते हैं। अब शादी ब्याह तो बेंकट हाल में होते हैं तो मुहल्ले में और घर जाने की भी ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती है। होटल में ही रह लेते हैं।
 हाँ शादी ब्याह में कोई मुहल्ले वाला पूछ भी ले कि भाई अब कम आते जाते हो तो छोटे शहर,  छोटे माहौल और बच्चों की पढ़ाई का उलाहना देकर बोल देते हैं कि अब यहां रखा ही क्या है?
 खैर, बेटे बहुओं के साथ फ्लैट में शहर में रहने लगे हैं । अब फ्लैट में तो इतनी जगह होती नहीं कि बूढ़े खांसते बीमार माँ बाप को साथ में रखा जाये। बेचारे पड़े रहते हैं अपने बनाये या पैतृक मकानों में। 
कोई बच्चा बागवान पिक्चर की तरह मां बाप को आधा - आधा रखने को भी तैयार नहीं।
अब साहब, घर खाली खाली, मकान खाली खाली और धीरे धीरे मुहल्ला खाली हो रहा है। अब ऐसे में छोटे शहरों में कुकुरमुत्तों की तरह उग आये "प्रॉपर्टी डीलरों" की गिद्ध जैसी निगाह इन खाली होते मकानों पर पड़ती है । वो इन बच्चों को घुमा फिरा कर उनके मकान के रेट समझाने शुरू करते हैं । उनको गणित समझाते हैं कि कैसे घर बेचकर फ्लैट का लोन खत्म किया जा सकता है । एक प्लाट भी लिया जा सकता है। 
साथ ही ये किसी बड़े लाला को इन खाली होते मकानों में मार्केट और गोदामों का सुनहरा भविष्य दिखाने लगते हैं। 
बाबू जी और अम्मा जी को भी बेटे बहू के साथ बड़े शहर में रहकर आराम से मज़ा लेने के सपने दिखाकर मकान बेचने को तैयार कर लेते हैं। 
आप स्वयं खुद अपने ऐसे पड़ोसी के मकान पर नज़र रखते हैं । खरीद कर डाल देते हैं कि कब मार्केट बनाएंगे या गोदाम, जबकि आपका खुद का बेटा छोड़कर पूना की IT कंपनी में काम कर रहा है इसलिए आप खुद भी इसमें नहीं बस पायेंगे।
हर दूसरा घर, हर तीसरा परिवार सभी के बच्चे बाहर निकल गये हैं।
 वही बड़े शहर में मकान ले लिया है, बच्चे पढ़ रहे हैं,अब वो वापस नहीं आयेंगे। छोटे शहर में रखा ही क्या है । इंग्लिश मीडियम स्कूल नहीं है, हॉबी क्लासेज नहीं है, IIT/PMT की कोचिंग नहीं है, मॉल नहीं है, माहौल नहीं है, कुछ नहीं है साहब, आखिर इनके बिना जीवन कैसे चलेगा?
पर कभी UPSC ,CIVIL SERVICES का रिजल्ट उठा कर देखियेगा, सबसे ज्यादा लोग ऐसे छोटे शहरों से ही मिलेंगे। बस मन का वहम है।
मेरे जैसे लोगों के मन के किसी कोने में होता है कि भले ही बेटा कहीं फ्लैट खरीद ले, मगर रहे अपने उसी छोटे शहर या गांव में अपने लोगों के बीच में । पर जैसे ही मन की बात रखते हैं, बुद्धिजीवी अभिजात्य पड़ोसी समझाने आ जाते है कि "अरे पागल हो गये हो, यहाँ बसोगे, यहां क्या रखा है?” 
वो भी गिद्ध की तरह मकान बिकने का इंतज़ार करते हैं, बस सीधे कह नहीं सकते।
अब ये मॉल, ये बड़े स्कूल, ये बड़े टॉवर वाले मकान सिर्फ इनसे तो ज़िन्दगी नहीं चलती। एक वक्त बुढ़ापा ऐसा आता है जब आपको अपनों की ज़रूरत होती है।
 ये अपने आपको छोटे शहरों या गांवों में मिल सकते हैं, फ्लैटों की रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन में नहीं।
 कोलकाता, दिल्ली, मुंबई,पुणे,चंडीगढ़,नौएडा, गुड़गांव, बेंगलुरु में देखा है कि वहां शव यात्रा चार कंधों पर नहीं बल्कि एक खुली गाड़ी में पीछे शीशे की केबिन में जाती है, सीधे शमशान, एक दो रिश्तेदार बस और सब खत्म।
भाईसाब ये खाली होते मकान, ये सूने होते मुहल्ले, इन्हें सिर्फ प्रोपेर्टी की नज़र से मत देखिए, बल्कि जीवन की खोती जीवंतता की नज़र से देखिए। आप पड़ोसी विहीन हो रहे हैं। आप वीरान हो रहे हैं।
आज गांव सूने हो चुके हैं 
शहर कराह रहे हैं |
सूने घर आज भी राह देखते हैं.. बंद दरवाजे बुलाते हैं पर कोई नहीं आता |
 *भूपेन हजारिका का यह गीत याद आता है--* 
गली के मोड़ पे.. सूना सा कोई दरवाजा
तरसती आंखों से रस्ता किसी का देखेगा
निगाह दूर तलक..  जा के लौट आयेगी
करोगे याद तो हर बात याद आयेगी ||
समझाइए, बसाइए लोगों को छोटे शहरों और जन्मस्थानों के प्रति मोह जगाइए, प्रेम जगाइए।

🙏🙏🙏🙏

सोमवार, 13 अप्रैल 2026

CCTV Security Risk in India: क्या आपके घर का कैमरा बन सकता है “दुश्मन की आंख”?

भारत में CCTV कैमरों से जुड़ा बड़ा खतरा! जानिए कैसे आपका CCTV कैमरा हैक होकर आपकी प्राइवेसी और सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है और कैसे करें बचाव।

 


सावधान! आपके घर का CCTV बन सकता है “दुश्मन की आंख”

📌 डिजिटल युग की नई सच्चाई

आज हर घर, दुकान और ऑफिस में CCTV कैमरा लगाना आम हो गया है।
हम इसे सुरक्षा का सबसे मजबूत साधन मानते हैं…

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है —
👉 यही कैमरा आपकी जासूसी का माध्यम भी बन सकता है?

 

🔍 असली खतरा क्या है?

आजकल ज्यादातर CCTV कैमरे:

  • इंटरनेट से जुड़े होते हैं (IP Camera)
  • मोबाइल से लाइव देखे जा सकते हैं
  • क्लाउड पर डेटा स्टोर करते हैं

👉 यही सुविधा उन्हें हैकिंग के लिए आसान लक्ष्य बना देती है।


⚠️ कैसे होता है CCTV का दुरुपयोग?

1. 🔓 Unauthorized Access

  • डिफॉल्ट पासवर्ड रहने पर
  • कोई भी व्यक्ति आपका कैमरा एक्सेस कर सकता है

2. ☁️ Data Leak

  • वीडियो क्लाउड सर्वर पर जाता है
  • कमजोर सुरक्षा होने पर डेटा चोरी हो सकता है

3. 🔄 Malware Attack

  • नकली अपडेट के जरिए कैमरा कंट्रोल हो सकता है

    🏠 क्या आपका घर सुरक्षित है?

    👉 एक अनुमान के अनुसार:

  • 70% से ज्यादा CCTV यूजर्स बेसिक सिक्योरिटी नहीं अपनाते
  • ज्यादातर लोग:
    • पासवर्ड नहीं बदलते
    • अपडेट नहीं करते

📌 इसका मतलब:
आपका घर, परिवार और प्राइवेसी खतरे में हो सकते हैं


🌍 राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर

यह केवल घर तक सीमित नहीं है:

  • रेलवे स्टेशन
  • ट्रैफिक सिस्टम
  • सरकारी कार्यालय

👉 अगर ये कैमरे असुरक्षित हैं, तो
देश की रणनीतिक जानकारी लीक हो सकती है


📜 सरकार के कदम

भारत सरकार:

  • CCTV सुरक्षा ऑडिट की तैयारी में है
  • कुछ विदेशी उपकरणों पर नियंत्रण कर रही है
  • डेटा सिक्योरिटी को लेकर नियम बना रही है

🛡️ कैसे करें बचाव? (MOST IMPORTANT)

✅ जरूरी सुरक्षा उपाय

✔ मजबूत पासवर्ड रखें
✔ नियमित Software Update करें
✔ Trusted Brand ही खरीदें
✔ Camera को Secure Network से जोड़ें
✔ Local Storage (DVR/NVR) का उपयोग करें


❌ ये गलती कभी न करें

❌ Default Password न रखें
❌ सस्ते unknown brand से बचें
❌ Public WiFi पर कैमरा एक्सेस न करें

 

🕉️ SANWARIYAA संदेश

“सुरक्षा केवल उपकरण से नहीं, जागरूकता से आती है।”

हमारा उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं,
👉 समाज को जागरूक बनाना है


✍️ निष्कर्ष

CCTV कैमरा आपकी सुरक्षा का साधन है,
लेकिन यदि सही तरीके से उपयोग न किया जाए तो यह
👉 “दुश्मन की आंख” भी बन सकता है




🕉️ SANWARIYAA संदेश

“सुरक्षा केवल उपकरण से नहीं, जागरूकता से आती है।”

हमारा उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं,
👉 समाज को जागरूक बनाना है


✍️ निष्कर्ष

CCTV कैमरा आपकी सुरक्षा का साधन है,
लेकिन यदि सही तरीके से उपयोग न किया जाए तो यह
👉 “दुश्मन की आंख” भी बन सकता है


📢 

👉 इस जानकारी को अपने परिवार और मित्रों के साथ शेयर करें

👉 डिजिटल सुरक्षा को गंभीरता से लें

 


शनिवार, 11 अप्रैल 2026

11 छोटे धंधे जो बिना पैसा के शुरू होते हैं,और महीने का लाखों का खेल

 

मैं वही आदमी हूँ जो सीधी बात करता है

न घुमाता है, न चमकाता है

आज फिर वही सच बताऊंगा जो लोग अंदर सोचते हैं, पर बोलते नहीं

काम हर गली में पड़ा है

बस देखने वाली नजर चाहिए और थोड़ा सा हिम्मत

आज 11 तरीके हैं

कुछ बिना पैसे, कुछ 10-15 हजार में, और कुछ 20-50 हजार में

लेकिन कमाई हर एक में है अगर आप सच में करने वाले इंसान हो

पहला काम थोड़ा अलग है

लोगों के घर खाली पड़े हैं, पर किराएदार से डरते हैं

आप “भरोसे वाला किरायेदार” ढूंढने का काम शुरू करो

डॉक्यूमेंट चेक करो, सही आदमी दिलाओ

एक डील में 2000 से 5000 आराम से

दूसरा काम बिना पैसे का है

OLX और फेसबुक पर लोग सस्ता बेचते हैं जल्दी में

आप वही सामान पकड़ो, फोटो अच्छा डालो, और महंगे में बेचो

बस समझदारी चाहिए, पैसा नहीं

तीसरा काम छोटा है लेकिन चलता खूब है

मोबाइल कवर, चार्जर, ईयरफोन

एक बैग में लेकर निकल जाओ

लेकिन खेल यह है कि घर तक पहुंचाने का वादा करो

लोग सुविधा के लिए ज्यादा पैसे देंगे

चौथा काम दिल वाला है

लोगों के पुराने फोटो, वीडियो, कैसेट धूल खा रहे हैं

आप उन्हें मोबाइल में बदल दो

यादों के लिए लोग पैसा देते हैं बिना बहस के

पाँचवा काम दिमाग वाला है

ऑफिस जाने वालों को घर का खाना चाहिए

आप खुद मत बनाओ

2-3 घरों से जुड़ जाओ

आप सिर्फ डिलीवरी संभालो

हर टिफिन पर थोड़ा सा भी बचा तो महीने में अच्छी रकम बन जाएगी

छठा काम मजेदार है

शादी, पार्टी में लोग भटकते रहते हैं किसे बुलाएं

आप 4-5 डेकोरेटर से जुड़ जाओ

आप काम दिलाओ, कमीशन खाओ

सीधा खेल

सातवां काम थोड़ा मेहनत वाला है

पुराना फर्नीचर खरीदो

थोड़ा ठीक कराओ

फिर बेच दो

एक सामान में ही हजारों बच जाते हैं

आठवां काम लोग मजाक समझते हैं

गाड़ी साफ करने का

सुबह का 2-3 घंटे काम

अगर 10 गाड़ी पकड़ ली तो महीने की कमाई खुद समझ जाओ

नौवां काम आज के टाइम का है

हर दुकान गूगल पर दिखना चाहती है

आप उनका प्रोफाइल संभालो

फोटो डालो, रिव्यू दिलाओ

हर दुकान से महीने के पैसे

दसवां काम थोड़ा बड़ा है

छोटे दुकानदारों के पास सामान रखने की जगह नहीं होती

आप एक कमरा लो

उनका सामान रखो

हर महीने किराया लो

धीरे धीरे बड़ा गेम बन सकता है

ग्यारहवां काम असली चालाक लोगों का है

आपको जो भी थोड़ा आता है

सीवी बनाना, एक्सेल, सोशल मीडिया

आप ग्राहक पकड़ो

काम किसी और से सस्ते में करवाओ

बीच का पैसा आपका

अब एक बात दिल में बैठा लो

गरीब इसलिए नहीं रहता कि उसके पास मौका नहीं होता

गरीब इसलिए रहता है क्योंकि वह हर मौके में कमी ढूंढता है

और अमीर

वह हर कमी में मौका ढूंढ लेता है

अब फैसला आपका है

आप पढ़कर खुश हो जाओगे

या एक काम पकड़कर जिंदगी बदल दोगे

सोमवार, 6 अप्रैल 2026

सर्व शक्तिशाली पंचमुखी हनुमान कवच स्तोत्र हनुमान जी को समर्पित है।

 

पंचमुखी हनुमान कवच स्तोत्र

सर्व शक्तिशाली पंचमुखी हनुमान कवच स्तोत्र हनुमान जी को समर्पित है।


पंचमुखी हनुमान कवच बहुत ही शुभ फलदायी है।

पंचमुखी हनुमान कवच का जाप करने से जातक के आसपास एक सुरक्षा आवरण बन जाता है, जो जातक को सभी संकटों से बचाता है। उसके सभी शत्रु से उसे मुक्ति देता हैं।

पंचमुखी हनुमान कवच पाठ की सरल विधि।

पंचमुखी हनुमान कवच स्तोत्र का जाप करने से पहले स्नान कर खुद को पवित्र कर लें।

स्नान के बाद पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर को किसी लाल आसन पर स्थापित करें।

पंचमुखी हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाएं।

इसके बाद पंचमुखी हनुमान कवच स्तोत्र का पाठ करें।

पाठ करने के बाद हनुमान जी को प्रणाम करते हुए अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगें।

पंचमुखी हनुमान कवच स्तोत्र से लाभ।

पंचमुखी हनुमान की आराधना से जातक के भय, रोग-दोष का नाश होता है।

पंचमुखी हनुमान की आराधना करने वाले जातक के जीवन में सुख शांति आता है।

श्री हनुमान कवच से बुराइयों पर जीत मिलती है।

इस कवच स्तोत्र के पाठ से भूत, प्रेत, चांडाल, और बुरी आत्माओं से मुक्ति मिलती है। शत्रु का नाश होता है।

अथ श्री पंचमुखहनुमत्कवचम् स्तोत्र

श्री गणेशाय नमः।

ॐ अस्य श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचमन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषि:।

गायत्री छंद:। पञ्चमुख-विराट् हनुमान् देवता। ह्रीं बीजम्।

श्रीं शक्ति:। क्रौं कीलकं। क्रूं कवचं।

क्रैं अस्त्राय फट्। इति दिग्बन्ध:।

अर्थ:

इस पंचमुख हनुमत कवच स्तोत्र के ऋषि ब्रह्मा हैं, छंद गायत्री है, देवता पंचमुख विराट हनुमान जी हैं, ह्रीं बीज मंत्र है, श्रीं शक्ति है, क्रौं कीलक है, क्रूं कवच है और ‘क्रैं अस्त्राय फट्’ मंत्र दिग्बन्ध हैं।

श्री गरुड़ उवाच

अथ ध्यानं प्रवक्ष्यामि शृणु सर्वांगसुंदर,

यत्कृतं देवदेवेन ध्यानं हनुमतः प्रियम्॥

अर्थ:

गरुड़जी ने उद्घोष किया हे सर्वांगसुंदर, देवाधिदेव के द्वारा, उन्हें प्रिय रहने वाला जो हनुमानजी का ध्यान लगाया, मैं उनके नाम का सुमिरण करता हूं। मैं उन मां का ध्यान करता हूं, जिनसे आपकी उत्पत्ति हुई है।

पञ्चवक्त्रं महाभीमं त्रिपञ्चनयनैर्युतम्,

बाहुभिर्दशभिर्युक्तं सर्वकामार्थसिद्धिदम्।।

अर्थ:

श्री हनुमान जी पांच मुख वाले, अत्यंत विशालकाय, पंद्रह नेत्र (त्रि-पञ्च-नयन) धारी हैं, श्री हनुमान जी दस हाथों वाले हैं, वे सकल काम एवं अर्थ इन पुरुषार्थों की सिद्धि करने वाले देव हैं। भाव है की श्री हनुमान जी पांच मुख वाले, पंद्रह नेत्र धारी और दस हाथों वाले हैं जो सभी कार्यों को सिद्ध करते हैं।

पूर्वं तु वानरं वक्त्रं कोटिसूर्यसमप्रभ,

दंष्ट्रा कराल वदनं भ्रुकुटिकुटिलेक्षणम्॥

अर्थ:

श्री हनुमान जी का मुख सदा ही पर्व दिशा की और रहता है, पूर्व मुखी हैं। श्री हनुमान जी जो वानर मुखी हैं, उनका तेज करोड़ों सूर्य के तुल्य है। श्री हनुमान जी के मुख पर विशाल दाढ़ी है और इनकी भ्रकुटी टेढ़ी हैं। ऐसे दांत वाले श्री हनुमान जी हैं।

अस्यैव दक्षिणं वक्त्रं नारसिंहं महाद्भुतम्,

अत्युग्र तेज वपुष् भीषणं भय नाशनम्॥

अर्थ:

श्री हनुमान जी बदन दक्षिण दिशा में देखने वाला है और इनका मुख सिंह मुखी है जो अत्यंत ही दिव्य और अद्भुत है। श्री हनुमान जी का मुख भय को समाप्त करने वाला है। श्री हनुमान जी का मुख शत्रुओं के लिए भय पैदा करने वाला है।

पश्चिमं गारुडं वक्त्रं वक्रतुण्डं महाबलम्,

सर्व नाग प्रशमनं विषभूतादिकृन्तनम्॥

अर्थ:

श्री हनुमान जी का जो मुख पश्चिम दिशा में देखने वाला है वह गरुद्मुख है और वह मुख अत्यंत ही बलवान और सामर्थ्यशाली है। विष और भूत को (समस्त बाधाओं को दूर करने वाला) दूर करने वाला गरुडानन है। साँपों और भूतों को दूर करने वाले हैं।

उत्तरं सौकरं वक्त्रं कृष्णं दीप्तं नभोपमम्।

पातालसिंहवेतालज्वररोगादिकृन्तनम्॥

अर्थ:

श्री हनुमान जी का उत्तर दिशा में देखने वाला मुख वराह मुख (आगे की और मुख निकला हुआ ) है। वराह मुख श्री हनुमान जी कृष्ण वर्ण के हैं और उनकी तुलना आकाश से की जा सकती है। श्री हनुमान जी पाताल वासियों के प्रमुख बेताल और भूगोल के कष्ट हरने वाले हैं। बीमारियों और ज्वर को समूल नष्ट करने वाले ऐसे वराह मुख हनुमान जी हैं।

ऊर्ध्वं हयाननं घोरं दानवान्तकरं परम्।

येन वक्त्रेण विप्रेन्द्र तारकाख्यं महासुरम् ॥

जघान शरणं तत् स्यात् सर्व शत्रु हरं परम्।

ध्यात्वा पञ्चमुखं रुद्रं हनुमन्तं दयानिधिम् ॥

अर्थ:

ऊर्ध्व दिशा मुखी हनुमान जी हैं जो दानवों का नाश करने वाले हैं। हे हनुमान जी (वीसपेंद्र) जी आप गायत्री के उपासक हैं और आप असुरों का नाश करने वाले हैं। हमें ऐसे पंचमुखी हनुमान जी की शरण में रहना चाहिए। श्री हनुमान जी रूद्र और दयानिधि हैं इनकी शरण में हमें रहना चाहिए। श्री हनुमान जी भक्तों के लिए दयालु और शत्रुओं का नाश करने वाले हैं।

खड़्गं त्रिशूलं खट्वाङ्गं पाशमङ्कुशपर्वतम्।

मुष्टिं कौमोदकीं वृक्षं धारयन्तं कमण्डलुं॥

भिन्दिपालं ज्ञानमुद्रां दशभिर्मुनिपुङ्गवम्।

एतान्यायुधजालानि धारयन्तं भजाम्यहम्॥

अर्थ:

श्री पंचमुख हनुमान जी हाथों में तलवार, त्रिशूल और खड्ग धारी हैं। श्री हनुमान जी के हाथों में तलवार, त्रिशूल, खट्वाङ्ग नाम का आयुध, पाश, अंकुश, पर्वत है और मुष्टि नाम का आयुध, कौमोदकी गदा, वृक्ष और कमंडलु पंचमुख हनुमानजी ने धारण कर रखे हैं। श्री हनुमान जी ने भिन्दिपाल (लोहे धातु से बना अस्त्र) अस्त्र को धारण कर रखा है। श्री हनुमान जी का दसवां शस्त्र ज्ञान मुद्रा है।

प्रेतासनोपविष्टं तं सर्वाभरणभूषितम्।

दिव्य माल्याम्बरधरं दिव्यगन्धानुलेपनम्॥

अर्थ:

श्री हनुमान जी प्रेतासन पर बैठे हैं और उन्होंने समस्त आभूषण धारण कर रखे हैं, श्री हनुमान जी ने दिव्य मालाएं ग्रहण कर रखी हैं जो आकाश के समान हैं और यह दिव्य गंध का लेप समस्त बाधाओं को दूर करने वाला है।

सर्वाश्‍चर्यमयं देवं हनुमद्विश्‍वतो मुखम्,

पञ्चास्यमच्युतमनेकविचित्रवर्णवक्त्रं,

शशाङ्कशिखरं कपिराजवर्यम्।

पीताम्बरादिमुकुटैरुपशोभिताङ्गं,

पिङ्गाक्षमाद्यमनिशं मनसा स्मरामि॥

अर्थ:

श्री हनुमान जी समस्त आश्चर्यों से भरे हुए हैं और श्री हनुमान जी जिन्होंने विश्व में सर्वत्र जिन्होंने मुख किया है, ऐसे ये पंचमुख-हनुमानजी हैं और ये पांच मुख रहने वाले (पञ्चास्य), अच्युत और अनेक अद्भुत वर्णयुक्त (रंगयुक्त) मुख रहने वाले हैं। श्री हनुमान जी ने चन्द्रमा को अपने शीश पर धारण कर रखा है और सभी कपियों में सर्वश्रेष्ठ रहने वाले ऐसे ये हनुमानजी हैं। श्री हनुमान जी पीतांबर, मुकुट आदि से सुशोभित हैं। श्री हनुमान जी पिङ्गाक्ष, आद्यम् और अनिशं हैं। ऐसे इन पंचमुख-हनुमानजी का हम मनःपूर्वक स्मरण करते हैं।

मर्कटेशं महोत्साहं सर्व शत्रु हरं परं।

शत्रुं संहर मां रक्ष श्रीमन्नापदमुद्धर॥

अर्थ:

श्री हनुमान जी वानरों में श्रेष्ठ हैं, प्रचंड हैं और बहुत उत्साही भी हैं। श्री हनुमान जी शत्रुओं का नाश करने वाले हैं और में रक्षा कीजिए मेरा उद्धार कीजिये वानर श्रेष्ठ, प्रचंड उत्साही हनुमान जी सारे शत्रुओं का नि:पात करते हैं।हे श्रीमन् पंचमुख-हनुमानजी, मेरे शत्रुओं का संहार कीजिए। संकट में से मेरा उद्धार कीजिए।

ॐ हरिमर्कट मर्कट मंत्र मिदं परि लिख्यति लिख्यति वामतले।

यदि नश्यति नश्यति शत्रुकुलं यदि मुञ्चति मुञ्चति वामलता॥

ॐ हरि मर्कटाय स्वाहा॥

अर्थ:

महाप्राण हनुमान जी के बाये पैर के तलवे के नीचे ‘ॐ हरि मर्कटाय स्वाहा’ लिखने से उसके केवल शत्रु का ही नहीं बल्कि शत्रु कुल का नाश हो जायेगा। श्री हनुमान जी वामलता को यानी दुरितता को, तिमिर प्रवृत्ति को हनुमानजी समूल नष्ट कर देते हैं और ऐसे एक बदन को स्वाहा कहकर नमस्कार किया है।

॥ ॐ नमो भगवते पंचवदनाय पूर्वकपिमुखाय सकलशत्रुसंहारकाय स्वाहा॥

अर्थ:

सकल शत्रुओं का संहार करने वाले पूर्व मुख को, कपिमुख को, भगवान श्री पंचमुख-हनुमानजी को मेरा नमन है।

॥ॐ नमो भगवते पञ्चवदनाय दक्षिणमुखाय करालवदनाय नरसिंहाय सकलभूतप्रमथनाय स्वाहा॥

अर्थ:

दुष्प्रवृत्तियों के प्रति भयानक मुख रहने वाले (करालवदनाय), सारे भूतों का उच्छेद करने वाले, दक्षिण मुख को, नरसिंह मुख को, भगवान श्री पंचमुख-हनुमानजी को मेरा नमस्कार है।

॥ॐ नमो भगवते पंचवदनाय पश्चिममुखाय गरुडाननाय सकलविषहराय स्वाहा॥

अर्थ:

हर प्रकार के विष का हरण करने वाले पश्चिममुखी को, गरुड़ मुख को, भगवान श्री पंचमुख-हनुमानजी को मेरा नमस्कार है।

॥ॐ नमो भगवते पंचवदनाय उत्तरमुखाय आदिवराहाय सकलसंपत्कराय स्वाहा॥

अर्थ:

सकल संपदाएं प्रदान करने वाले उत्तरमुख को, आदिवराहमुख को, भगवान श्री पंचमुख-हनुमान जी को मेरा नमस्कार है।

॥ॐ नमो भगवते पंचवदनाय ऊर्ध्वमुखाय हयग्रीवाय सकलजनवशकराय स्वाहा॥

अर्थ:

सकल जनों को वश में करने वाले, ऊर्ध्वमुख को, अश्वमुख को, भगवान श्री पंचमुख-हनुमानजी को मेरा नमस्कार है।

॥ॐ श्री पंचमुख हनुमंताय आंजनेयाय नमो नमः॥

अर्थ:

अंजनी पुत्र श्री पञ्चमुख-हनुमान जी को पुन: मेरा नमस्कार है।

आप सबके बार बार पूछने पर ये पंचमुखी हनुमान कवच स्तोत्र भेजा है।

आज समझते है कि मंत्र की ऊर्जा और उसकी प्रक्रिया क्या होती है।

 

आज समझते है कि मंत्र की ऊर्जा और उसकी प्रक्रिया क्या होती है।

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मंत्रों का प्रयोग मानव ने अपने कल्याण के साथ-साथ दैनिक जीवन की संपूर्ण समस्याओं के समाधान हेतु यथासमय किया है और उसमें सफलता भी पाई है, परंतु आज के भौतिकवादी युग में यह विधा मात्र कुछ ही व्यक्तियों के प्रयोग की वस्तु बनकर रह गई है।

मंत्रों में छुपी अलौकिक शक्ति का प्रयोग कर जीवन को सफल एवं सार्थक बनाया जा सकता है। सबसे पहले प्रश्न यह उठता है कि 'मंत्र' क्या है, इसे कैसे परिभाषित किया जा सकता है। इस संदर्भ में यह कहना उचित होगा कि मंत्र का वास्तविक अर्थ असीमित है। किसी देवी-देवता को प्रसन्न करने के लिए प्रयुक्त शब्द समूह मंत्र कहलाता है। जो शब्द जिस देवता या शक्ति को प्रकट करता है उसे उस देवता या शक्ति का मंत्र कहते हैं। मंत्र एक ऐसी गुप्त ऊर्जा है, जिसे हम जागृत कर इस अखिल ब्रह्मांड में पहले से ही उपस्थित इसी प्रकार की ऊर्जा से एकात्म कर उस ऊर्जा के लिए देवता (शक्ति) से सीधा साक्षात्कार कर सकते हैं।

ऊर्जा अविनाशिता के नियमानुसार ऊर्जा कभी भी नष्ट नहीं होती है, वरन्‌ एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित होती रहती है। अतः जब हम मंत्रों का उच्चारण करते हैं तो उससे उत्पन्न ध्वनि एक ऊर्जा के रूप में ब्रह्मांड में प्रेषित होकर जब उसी प्रकार की ऊर्जा से संयोग करती है तब हमें उस ऊर्जा में छुपी शक्ति का आभास होने लगता है। ज्योतिषीय संदर्भ में यह निर्विवाद सत्य है कि इस धरा पर रहने वाले सभी प्राणियों पर ग्रहों का अवश्य प्रभाव पड़ता है।

चंद्रमा मन का कारक ग्रह है और यह पृथ्वी के सबसे नजदीक होने के कारण खगोल में अपनी स्थिति के अनुसार मानव मन को अत्यधिक प्रभावित करता है। अतः इसके अनुसार जो मन का त्राण (दुःख) हरे उसे मंत्र कहते हैं। मंत्रों में प्रयुक्त स्वर, व्यंजन, नाद व बिंदु देवताओं या शक्ति के विभिन्न रूप एवं गुणों को प्रदर्शित करते हैं। मंत्राक्षरों, नाद, बिंदुओं में दैवीय शक्ति छुपी रहती है।

मंत्र उच्चारण से ध्वनि उत्पन्न होती है, उत्पन्न ध्वनि का मंत्र के साथ विशेष प्रभाव होता है। जिस प्रकार किसी व्यक्ति, स्थान, वस्तु के ज्ञानर्थ कुछ संकेत प्रयुक्त किए जाते हैं, ठीक उसी प्रकार मंत्रों से संबंधित देवी-देवताओं को संकेत द्वारा संबंधित किया जाता है, इसे बीज कहते हैं। विभिन्न बीज मंत्र इस प्रकार हैं :

ॐ- परमपिता परमेश्वर की शक्ति का प्रतीक है।

ह्रीं- माया बीज,

श्रीं- लक्ष्मी बीज,

क्रीं- काली बीज,

ऐं- सरस्वती बीज,

क्लीं- कृष्ण बीज।

मंत्रों में देवी-देवताओं के नाम भी संकेत मात्र से दर्शाए जाते हैं, जैसे राम के लिए 'रां', हनुमानजी के लिए 'हं', गणेशजी के लिए 'गं', दुर्गाजी के लिए 'दुं' का प्रयोग किया जाता है। इन बीजाक्षरों में जो अनुस्वार (ं) या अनुनासिक (जं) संकेत लगाए जाते हैं, उन्हें 'नाद' कहते हैं। नाद द्वारा देवी-देवताओं की अप्रकट शक्ति को प्रकट किया जाता है।

लिंगों के अनुसार मंत्रों के तीन भेद होते हैं-

पुर्लिंग : जिन मंत्रों के अंत में हूं या फट लगा होता है।

स्त्रीलिंग : जिन मंत्रों के अंत में 'स्वाहा' का प्रयोग होता है।

नपुंसक लिंग : जिन मंत्रों के अंत में 'नमः' प्रयुक्त होता है ।

अतः आवश्यकतानुसार मंत्रों को चुनकर उनमें स्थित अक्षुण्ण ऊर्जा की तीव्र विस्फोटक एवं प्रभावकारी शक्ति को प्राप्त किया जा सकता है। मंत्र, साधक व ईश्वर को मिलाने में मध्यस्थ का कार्य करता है। मंत्र की साधना करने से पूर्व मंत्र पर पूर्ण श्रद्धा, भाव, विश्वास होना आवश्यक है तथा मंत्र का सही उच्चारण अति आवश्यक है। मंत्र लय, नादयोग के अंतर्गत आता है। मंत्रों के प्रयोग से आर्थिक, सामाजिक, दैहिक, दैनिक, भौतिक तापों से उत्पन्न व्याधियों से छुटकारा पाया जा सकता है। रोग निवारण में मंत्र का प्रयोग रामबाण औषधि का कार्य करता है। मानव शरीर में 108 जैविकीय केंद्र (साइकिक सेंटर) होते हैं जिसके कारण मस्तिष्क से 108 तरंग दैर्ध्य (वेवलेंथ) उत्सर्जित करता है।

शायद इसीलिए हमारे ऋषि-मुनियों ने मंत्रों की साधना के लिए 108 मनकों की माला तथा मंत्रों के जाप की आकृति निश्चित की है। मंत्रों के बीज मंत्र उच्चारण की 125 विधियाँ हैं। मंत्रोच्चारण से या जाप करने से शरीर के 6 प्रमुख जैविकीय ऊर्जा केंद्रों से 6250 की संख्या में विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा तरंगें उत्सर्जित होती हैं, जो इस प्रकार हैं :

मूलाधार 4 ×125=500

स्वधिष्ठान 6 ×125=750

मनिपुरं 10 ×125=1250

हृदयचक्र 13 ×125=1500

विध्रहिचक्र 16 ×125=2000

आज्ञाचक्र 2 ×125=250

कुल योग 6250 (विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा तरंगों की संख्या)

भारतीय कुंडलिनी विज्ञान के अनुसार मानव के स्थूल शरीर के साथ-साथ 6 अन्य सूक्ष्म शरीर भी होते हैं। विशेष पद्धति से सूक्ष्म शरीर के फोटोग्राफ लेने से वर्तमान तथा भविष्य में होने वाली बीमारियों या रोग के बारे में पता लगाया जा सकता है। सूक्ष्म शरीर के ज्ञान के बारे में जानकारी न होने पर मंत्र शास्त्र को जानना अत्यंत कठिन होगा।

मानव, जीव-जंतु, वनस्पतियों पर प्रयोगों द्वारा ध्वनि परिवर्तन (मंत्रों) से सूक्ष्म ऊर्जा तरंगों के उत्पन्न होने को प्रमाणित कर लिया गया है। मानव शरीर से 64 तरह की सूक्ष्म ऊर्जा तरंगें उत्सर्जित होती हैं जिन्हें 'धी' ऊर्जा कहते हैं। जब धी का क्षरण होता है तो शरीर में व्याधि एकत्र हो जाती है।

मंत्रों का प्रभाव वनस्पतियों पर भी पड़ता है। जैसा कि बताया गया है कि चारों वेदों में कुल मिलाकर 20 हजार 389 मंत्र हैं, प्रत्येक वेद का अधिष्ठाता देवता है। ऋग्वेद का अधिष्ठाता ग्रह गुरु है। यजुर्वेद का देवता ग्रह शुक्र, सामवेद का मंगल तथा अथर्ववेद का अधिपति ग्रह बुध है। मंत्रों का प्रयोग ज्योतिषीय संदर्भ में अशुभ ग्रहों द्वारा उत्पन्न अशुभ फलों के निवारणार्थ किया जाता है। ज्योतिष वेदों का अंग माना गया है। इसे वेदों का नेत्र कहा गया है। भूत ग्रहों से उत्पन्न अशुभ फलों के शमनार्थ वेदमंत्रों, स्तोत्रों का प्रयोग अत्यन्त प्रभावशाली माना गया है।

उदाहरणार्थ आदित्य हृदयस्तोत्र सूर्य के लिए, दुर्गास्तोत्र चंद्रमा के लिए, रामायण पाठ गुरु के लिए, ग्राम देवता स्तोत्र राहु के लिए, विष्णु सहस्रनाम, गायत्री मंत्रजाप, महामृत्युंजय जाप, क्रमशः बुध, शनि एवं केतु के लिए, लक्ष्मीस्तोत्र शुक्र के लिए और मंगलस्रोत मंगल के लिए। मंत्रों का चयन प्राचीन ऐतिहासिक ग्रंथों से किया गया है। वैज्ञानिक रूप से यह प्रमाणित हो चुका है कि ध्वनि उत्पन्न करने में नाड़ी संस्थान की 72 नसें आवश्यक रूप से क्रियाशील रहती हैं। अतः मंत्रों के उच्चारण से सभी नाड़ी संस्थान क्रियाशील रहते हैं।

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