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बुधवार, 13 मई 2026

लढ़ा कॉलोनी में नए पावर पंप ट्यूबवेल का लोकार्पण: गर्मियों में राहत की नई उम्मीद 💧

 

लढ़ा कॉलोनी में नए पावर पंप ट्यूबवेल का लोकार्पण: गर्मियों में राहत की नई उम्मीद 💧


जोधपुर शहर के वार्ड नंबर 55 स्थित लढ़ा कॉलोनी में आज एक ऐतिहासिक और जनहितकारी कार्य का शुभारंभ हुआ। वर्षों से पेयजल संकट से जूझ रहे क्षेत्रवासियों के लिए यह दिन किसी राहत से कम नहीं रहा। पावर पंप ट्यूबवेल का उद्घाटन जोधपुर शहर विधायक अतुल भंसाली द्वारा किया गया।

इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल, पार्षद प्रत्याशी एवं मंडल अध्यक्ष नगेंद्र सिंह शेखावत सहित कई गणमान्य जन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन नरेंद्र सिंह इंदा (शक्ति प्रमुख) ने किया।


पारंपरिक स्वागत में दिखी संस्कृति और सम्मान की झलक 🌸






कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय संस्कृति की सुंदर परंपरा के साथ हुई। सर्वप्रथम लढ़ा कॉलोनी की भगवती देवी जाजू द्वारा अतिथियों का कुमकुम तिलक कर आत्मीय स्वागत किया गया।

इसके पश्चात लढ़ा कॉलोनी युवा विकास समिति के सदस्यों—
रामलाल जांगिड़, गजेंद्र वैष्णव, सुनील शर्मा, अमृत बोहरा, कैलाश चंद्र लढ़ा एवं चंपाल लाल जाजू—ने अतिथियों को साफा पहनाकर एवं मालाएं अर्पित कर सम्मानित किया। यह दृश्य सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे का प्रतीक बना।



महिला शक्ति के साथ हुआ लोकार्पण: एक प्रेरणादायक पहल 👩‍🦰

कार्यक्रम का सबसे खास क्षण वह रहा जब महिला शक्ति की भागीदारी से ट्यूबवेल का उद्घाटन किया गया। महिलाओं द्वारा स्वास्तिक चिन्ह बनवाया गया और उसके बाद विधायक अतुल भंसाली ने बटन दबाकर ट्यूबवेल का विधिवत लोकार्पण किया।

यह पहल न केवल एक सुविधा का शुभारंभ थी, बल्कि यह समाज में महिलाओं के सम्मान और उनकी सक्रिय भूमिका का सशक्त संदेश भी देती है।




अब नहीं सताएगी पानी की कमी 💧

गर्मियों में पानी की समस्या से जूझ रहे लढ़ा कॉलोनी के निवासियों के लिए यह ट्यूबवेल किसी वरदान से कम नहीं है। लंबे समय से चली आ रही जल संकट की समस्या के समाधान की दिशा में यह एक ठोस कदम है।

क्षेत्रवासियों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी। लोगों ने जनप्रतिनिधियों और समिति के सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहल से आने वाले समय में बड़ी राहत मिलेगी।


एकजुटता से विकास का संदेश 🤝

इस कार्यक्रम में भाजपा नेता लक्ष्मण सिंह भाटी, प्रदेश सहसंयोजक महेंद्र सिंह शेखावत, लढ़ा कॉलोनी युवा विकास समिति के सदस्य, महिला मोर्चा की प्रतिनिधियां एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि जब जनप्रतिनिधि और समाज एक साथ मिलकर कार्य करते हैं, तो विकास की गति तेज होती है और समस्याओं का समाधान संभव हो पाता है।


निष्कर्ष: विकास की ओर बढ़ता एक और कदम 🚀

लढ़ा कॉलोनी में पावर पंप ट्यूबवेल का यह लोकार्पण केवल एक उद्घाटन नहीं, बल्कि क्षेत्र के उज्जवल भविष्य की ओर बढ़ता हुआ एक मजबूत कदम है। यह पहल न सिर्फ वर्तमान की समस्या का समाधान है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक बेहतर जीवन की नींव रखती है।

 








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जानिए भारत के बढ़ते आयात, विदेशी निर्भरता और आर्थिक दबाव की पूरी कहानी

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भारत का पैसा आखिर जा कहाँ रहा है?

जानिए भारत के बढ़ते आयात, विदेशी निर्भरता और आर्थिक दबाव की पूरी कहानी

भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, लेकिन एक बड़ा सच यह भी है कि हम जितना कमाते हैं, उससे कहीं ज्यादा विदेशी वस्तुओं और सेवाओं पर खर्च कर देते हैं।

📌 भारत का स्वदेशी Gold Production सालाना 2 टन भी नहीं है, जबकि भारत हर साल लगभग 750–800 टन सोना आयात करता है।
यानी हम दुनिया के सबसे बड़े Gold Importers में शामिल हैं।


📊 भारत का Export vs Import Balance

✅ भारत का कुल वार्षिक निर्यात (Exports):
लगभग 366 Billion Dollar

❌ भारत का कुल वार्षिक आयात (Imports):
लगभग 775 Billion Dollar

⚠️ यानी भारत हर साल भारी Trade Deficit झेल रहा है।
सरल भाषा में कहें तो —
भारत से जितना पैसा आता है, उससे कहीं ज्यादा पैसा विदेश चला जाता है।


🛢️ 1. Crude Oil & Mineral Oil Import

भारत के कुल आयात का लगभग 28% हिस्सा सिर्फ Crude Oil और Mineral Oil का है।

💰 अनुमानित खर्च:
लगभग 217 Billion Dollar सालाना

कारण:

  • पेट्रोल-डीजल की अत्यधिक खपत
  • निजी वाहनों का बढ़ता उपयोग
  • सार्वजनिक परिवहन का कम उपयोग
  • ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर धीमी प्रगति

📌 यदि:

  • Car Pooling बढ़े
  • Public Transport मजबूत हो
  • Electric Vehicles और Renewable Energy बढ़े

तो अरबों डॉलर बचाए जा सकते हैं।


💎 2. Gold, Silver, Diamonds & Gems Import

भारत के कुल आयात का लगभग 24.8% हिस्सा
सोना, चांदी, हीरे और रत्नों का है।

💰 अनुमानित खर्च:
लगभग 192 Billion Dollar सालाना

भारत में:

  • शादियों में Gold दिखावा
  • Investment के नाम पर Gold खरीद
  • Imported Diamond Jewellery का craze
  • Luxury Lifestyle की बढ़ती होड़

इन सबने Import Bill को बहुत बढ़ा दिया है।

📌 यदि:

  • लोग अत्यधिक Gold Buying कम करें
  • Local Handmade Jewellery को बढ़ावा दें
  • Recycled Gold और Indian Craftsmanship अपनाएँ

तो देश का विदेशी मुद्रा दबाव काफी कम हो सकता है।


💻 3. Electronics & Technology Import

मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर, चिप्स, इलेक्ट्रॉनिक मशीनरी आदि पर भारत सालाना लगभग:

💰 170 Billion Dollar खर्च करता है।
जो कुल आयात का लगभग 24.3% है।

📱 सबसे बड़ी निर्भरता:

  • Apple iPhone
  • Samsung
  • Chinese Electronics
  • Taiwanese Chips
  • Imported Computer Hardware

⚠️ भारत assembling तो करता है, लेकिन core technology, chips और high-end manufacturing में अभी भी विदेशी निर्भरता बहुत ज्यादा है।

📌 समाधान:

  • Made in India Electronics
  • Semiconductor Manufacturing
  • Indigenous Technology Development
  • भारतीय Brands को समर्थन

🧪 4. Chemical & Plastic Import

भारत सालाना लगभग:

💰 49 Billion Dollar
Chemical और Plastic वस्तुओं पर खर्च करता है।

कारण:

  • Imported Industrial Chemicals
  • Plastic Raw Material
  • Pharma Base Chemicals

📌 यदि भारत Chemical Manufacturing में आत्मनिर्भर बने, तो Import Bill में बड़ी कमी संभव है।


✈️ 5. Foreign Tourism & Destination Weddings

भारतीय हर साल:

💰 20+ Billion Dollar
विदेश यात्राओं, Holiday Packages और Destination Weddings पर खर्च करते हैं।

आज:

  • Thailand Weddings
  • Dubai Tourism
  • Europe Honeymoon
  • Maldives Luxury Trips

एक बड़ा Status Symbol बन चुके हैं।

📌 जबकि भारत स्वयं:

  • Tourism Diversity
  • Heritage
  • Spiritual Tourism
  • Luxury Destinations
    में दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में है।

🎓 6. विदेशों में पढ़ाई पर भारतीयों का भारी खर्च

यह सबसे कम चर्चा वाला लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।

🇺🇸 🇨🇦 🇬🇧
भारतीय छात्र हर साल सिर्फ:

  • America
  • Canada
  • UK

में पढ़ाई के लिए लगभग:

💰 70 Billion Dollar तक खर्च करते हैं।

🇪🇺 European Union देशों में अतिरिक्त:

💰 लगभग 3.85 Billion Dollar

खर्च होते हैं।

⚠️ इसमें:

  • Tuition Fees
  • Hostel
  • Living Expenses
  • Foreign Currency Outflow

सब शामिल है।

📌 सवाल: क्या भारत में विश्वस्तरीय शिक्षा व्यवस्था और Research Infrastructure विकसित नहीं किया जाना चाहिए?


🇮🇳 असली मुद्दा क्या है?

समस्या सिर्फ Gold Import नहीं है।
समस्या है:

❌ अत्यधिक विदेशी निर्भरता
❌ दिखावे की Lifestyle
❌ Imported Brand Obsession
❌ Domestic Manufacturing की कमजोरी
❌ Consumption आधारित Economy


✅ समाधान क्या हो सकते हैं?

✔️ Swadeshi को बढ़ावा
✔️ भारतीय उद्योगों का समर्थन
✔️ Public Transport उपयोग
✔️ Domestic Tourism को प्रोत्साहन
✔️ भारतीय शिक्षा एवं Research में निवेश
✔️ Technology Manufacturing में आत्मनिर्भरता
✔️ Luxury दिखावे की मानसिकता में बदलाव


🇮🇳 याद रखिए

जब तक:

  • हम विदेशी वस्तुओं को Status Symbol मानते रहेंगे,
  • तब तक Dollar बाहर जाता रहेगा,
  • और Rupee पर दबाव बढ़ता रहेगा।

भारत को सिर्फ “Consumer Market” नहीं,
बल्कि “Global Producer” बनना होगा।


🚩 स्वदेशी अपनाइए — भारत को आर्थिक रूप से मजबूत बनाइए।

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रविवार, 10 मई 2026

आने वाले 30 वर्षों में दुनिया से जेलें समाप्त हो जाएँगी।”

*दीवार के उस पार*
   (लघु ~ कथा)
*हॉल खचाखच भरा हुआ था*।
देश–विदेश से आए युवा उद्यमी, शिक्षक, प्रबंधक और विद्यार्थी अपनी नोटबुक लिए बैठे थे।
मंच पर प्रसिद्ध लेखक और मोटिवेशनल वक्ता *David J. Schwartz* खड़े थे।

विषय था —
*रचनात्मक तरीके से कैसे सोचें*?”

कुछ देर तक वे सामान्य बातें करते रहे।
फिर अचानक उन्होंने श्रोताओं की ओर देखते हुए कहा —
“आने वाले 30 वर्षों में दुनिया से जेलें समाप्त हो जाएँगी।”
पूरा हॉल जैसे ठहर गया।
लोगों को लगा शायद उन्होंने गलत सुना है।
एक साथ कई आवाज़ें उठीं —
“सर… ज़रा फिर से कहिए?”
डेविड मुस्कुराए और बोले —
“मैंने कहा…
*एक दिन दुनिया से जेलें समाप्त हो जाएँगी*।”
अब हॉल में हलचल बढ़ गई।
किसी ने धीमे स्वर में कहा —
“यह असंभव है…”
दूसरा बोला —
“जब तक इंसान हैं, अपराध रहेंगे…”
तीसरा हँसते हुए बोला —
“फिर तो दुनिया में अराजकता फैल जाएगी…”
डेविड सब सुनते रहे।
फिर उन्होंने मंच से नीचे उतरते हुए कहा —
“ठीक है…
अब कल्पना कीजिए कि सरकार ने सचमुच यह निर्णय ले लिया है कि जेलें समाप्त करनी हैं।”
“अब आप बताइए —
ऐसी स्थिति में क्या किया जा सकता है?”

*कुछ क्षणों तक सन्नाटा रहा*।
*फिर पीछे बैठे एक युवक ने हाथ उठाया* —
“गरीबी कम करनी होगी…
क्योंकि अपराध की जड़ अक्सर अभाव होता है।”
दूसरा बोला —
“युवाओं के लिए कौशल और रोजगार केंद्र खोलने होंगे।”
तीसरा बोला —
“मानसिक स्वास्थ्य और हिंसक प्रवृत्तियों पर शोध बढ़ाना होगा।”
एक महिला ने कहा —
“पुलिस व्यवस्था को अधिक संवेदनशील और प्रशिक्षित बनाना होगा।”
अब जैसे पूरा हॉल बदल चुका था।
जो लोग कुछ देर पहले इस विचार पर हँस रहे थे,
वे अब तेजी से समाधान गिना रहे थे।
कोई तकनीक की बात कर रहा था…
कोई शिक्षा सुधार की…
कोई पारिवारिक संस्कारों की…
कुछ ही देर में बोर्ड पर 78 सुझाव लिखे जा चुके थे।
डेविड ने मुस्कुराकर सबकी ओर देखा।
फिर शांत स्वर में बोले —

“यही इस प्रयोग का उद्देश्य था।”
“जब आप मान लेते हैं कि कोई काम असंभव है…
तो आपका दिमाग़ उसके खिलाफ तर्क ढूँढ़ने लगता है।”
“लेकिन जैसे ही आप विश्वास करते हैं कि समाधान संभव है…
वही दिमाग़ रास्ते खोजने लगता है।”
पूरा हॉल शांत था।
उन्होंने आगे कहा —
*दिमाग़ को उपजाऊ ज़मीन बनाइए*।
*उसके सामने समस्या रखिए*…
और फिर उस पर विश्वास कीजिए।”
*हर समस्या अपने साथ समाधान का बीज लेकर आती है*।”
शायद यही कारण है कि दुनिया बदलती रहती है।

कभी इलेक्ट्रिक कारें मज़ाक लगती थीं…फिर Tesla ने उन्हें क्रांति बना दिया।
कभी लोग सोच भी नहीं सकते थे कि कोई अनजान व्यक्ति अपने घर में यात्रियों को ठहराएगा…
फिर Airbnb ने दुनिया की सोच बदल दी।
कभी टैक्सी केवल शहरों तक सीमित थी…
फिर Uber ने यात्रा की परिभाषा बदल दी।
ये चमत्कार आसमान से नहीं उतरे थे।
ये केवल उन लोगों की देन थे,
जिन्होंने वहाँ भी रास्ता खोजा…
जहाँ बाकी लोग दीवार देख रहे थे।

याद रखिए —
कोई भी बीज बर्फ पर नहीं उगता।
यदि आप अपने दिमाग़ पर परंपराओं, डर और असफलताओं की बर्फ जमने देंगे,
तो नए विचार जन्म ही नहीं ले पाएँगे।

औसत लोग अक्सर प्रगति से डरते हैं।
क्योंकि नया विचार पहले असुविधा पैदा करता है…
फिर सवाल…
और अंत में बदलाव।

लेकिन सच यह है —
एक अच्छा काम कई तरीकों से किया जा सकता है।
जितने इंसान… उतने रास्ते।
और अंत में डेविड ने जो कहा,
वह शायद उस पूरी कार्यशाला का सबसे बड़ा सत्य था —

*दुनिया को बदलने वाले लोग सबसे बुद्धिमान नहीं होते*…”
*वे केवल इतने अलग होते हैं कि*
*जहाँ बाकी लोग दीवार देखते हैं*…
*वहाँ वे दरवाज़ा खोजने लगते हैं*।”
क्योंकि वास्तव में —
हर असंभवता के पीछे,
एक अनखोजा रास्ता छुपा होता है।


*रामानंद काबरा*
 9414070142

शनिवार, 9 मई 2026

पैकिंग आटा में कीड़े क्यों नही पड़ते ?? आंखें खोल देने वाला सच --

 

पैकिंग आटा में कीड़े क्यों नही पड़ते ??

आंखें खोल देने वाला सच --

एक प्रयोग करके देखें गेहूं का आटा पिसवा कर उसे 2 महीने स्टोर करने का प्रयास करें।

आटे में कीड़े पड़ जाना स्वाभाविक हैं, *आप आटा स्टोर नहीं कर पाएंगे।*

फिर ये बड़े बड़े ब्रांड आटा

कैसे स्टोर कर पा रहे हैं?

यह सोचने... वाली बात है।

एक केमिकल है- बेंजोयलपर ऑक्साइड, जिसे ' फ्लौर इम्प्रूवर ' भी कहा जाता है।* इसकी पेरमिसीबल लिमिट 4 मिलीग्राम है,लेकिन आटा बनाने वाली फर्में 400 मिलीग्राम तक ठोक देती हैं।कारण क्या है? आटा खराब होने से लम्बे समय तक बचा रहे।*बेशक़ उपभोक्ता की किडनी का बैंड बज जाए।

... कोशिश कीजिये खुद सीधे गेहूं खरीदकर अपना आटा पिसवाकर खाएं।

नियमानुसार आटे का समय..

ठंडके दिनों में 30 दिन

गरमी के दिनों में 20 दिन

बारिस के दिनों में 15 दिन का

बताया गया है।

ताजा आटा खाइये,

स्वस्थ रहिये...समझदार बनें,

अपने लिए पुरुषार्थी बन सभी

गेंहू पिसवा कर काम ले।

न कि रेडीमेड थैली का........

केवल 3 बदलाव कर के देखे

1.) नमक सेंधा प्रयोग करे,

2.) आटा चक्की से पिसवा कर लाये,

3.) पानी मटके का पिये,

सुबह गर्म पानी पिये...

आधी बीमारियों से छुटकारा पाएंगे ........!!


बीजेपी के जीतते ही इस अवैध टोल बूथ को बंद कर दिया गया

 ट्रक ड्राइवर विश्वास ही नहीं कर रहे हैं कि जिन सड़कों पर पिछले 32 साल से उन्हें गैर कानूनी तरीके से ₹500 देना पड़ रहा था

हर हाईवे पर गैर कानूनी वसूली केंद्र बना था जिसका पैसा अभिषेक बनर्जी को जाता था

 आज बिना किसी पैसे के उनका ट्रक गुजर रहा है 

यह देखिए ट्रक ड्राइवर के आंखों में आंसू आ गए बोल रहा है 32 साल में पहली बार मेरा ट्रक बगैर पैसे के निकला 

अब अगर कोई बोले बंगाल में SIR  से हारे तो उसको जूता जुटा  मारीयेगा

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने छोटे-बड़े कुल 1800 से ज्यादा अवैध टोल बूथ हाईवे और सड़कों पर बना रखे थे

 जिनके द्वारा कैश में वसूली होती थी और 5% रखकर  बाकी कैश  आगे बढ़ा दिया जाता था और उसके बाद अंत तक यह पैसा अभिषेक बनर्जी को जाता था 

इन अवैध टोल बूथ में सबसे बड़ा टोल बूथ सिलीगुड़ी हाईवे पर था जहां बाइक से ₹50 कार से ₹200 ट्रक से ₹2000 और मल्टी एक्सल ट्रक से ₹3000 लिए जाते थे इसके अलावा डीजल पेट्रोल भरी हुई टैंकर और कोयला वाले ट्रक से ₹2000 एक्स्ट्रा लिए जाते थे

 इस टोल बूथ का नाम फुलवारी टोल बूथ था  और इसकी प्रतिदिन की कमाई 80 लाख से लेकर 1 करोड रुपए थी 

और यहां पर दूसरे राज्य के नंबर वाले गाड़ियों से दोगुना वसूला जाता था 

...और यहां से प्रतिदिन कमीशन खर्च सब कुछ काट के करीब 30 से 50 लाख  रुपए अभिषेक बनर्जी को जाते थे

 बीजेपी के जीतते ही इस अवैध टोल बूथ को बंद कर दिया गया

जिस नेता पर हजारों केस चल रहे हों.. वो नेता पुलिस डिपार्टमेंट का चीफ यानि कि गृह मंत्री बन सकता है.


यह पोस्ट देश के कोने कोने में पहुंचना चाहिए


    Very Very  IMPORTANT..
             क्या भारत का सिस्टम
        आम जनता को धोखा देता है ?


 आप खुद देखिये....
    
1- नेता चाहे तो दो सीट से एक साथ चुनाव   
     लड़ सकता है ! लेकिन....
     आप दो जगहों पर वोट नहीं डाल सकते,


2-आप जेल में बंद हो तो वोट नहीं डाल  
     सकते..लेकिन
     नेता जेल में रहते हुए चुनाव लड़ सकता है.


3-आप कभी जेल गये थे, तो
    अब आपको जिंदगी भर 
     कोई सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी,

लेकिन……
नेता चाहे जितनी बार भी हत्या या बलात्कार के मामले में  जेल गया हो, फिर भी वो प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति जो चाहे बन सकता है,


4-बैंक में मामूली नौकरी पाने के लिये
आपका ग्रेजुएट होना जरूरी है..

लेकिन,
नेता अंगूठा छाप हो तो भी भारत का फायनेन्स मिनिस्टर बन सकता है।


5-आपको सेना में एक मामूली
सिपाही की नौकरी पाने के लिये डिग्री के साथ 10 किलोमीटर दौड़ कर भी दिखाना होगा,

लेकिन....
नेता यदि अनपढ़-गंवार और लूला-लंगड़ा है 
तो भी वह आर्मी, नेवी और एयर फोर्स का चीफ यानि डिफेन्स मिनिस्टर बन सकता है

और
जिसके पूरे खानदान में आज तक कोई स्कूल नहीं गया.. वो नेता देश का शिक्षामंत्री बन सकता है

और
जिस नेता पर हजारों केस चल रहे हों.. 
वो नेता पुलिस डिपार्टमेंट का चीफ यानि कि गृह मंत्री बन सकता है.


यदि
आपको लगता है कि इस सिस्टम को बदल देना चाहिये..
नेता और जनता, दोनों के लिये एक ही कानून होना चाहिये.. 
तो
इस संदेश को फॉरवर्ड करके देश में जागरुकता लाने में अपना सहयोग दें..


अगर फॉरवर्ड नहीं किया तो आप किसी भी नेता को दोषी मत कहना ....,
नहीं किया तो नुकसान का जिम्मेदार आप खुद होगें।

सरकारी कर्मचारी 30 से 35 वर्ष की संतोषजनक सेवा करने के उपरांत भी पेंशन का हकदार नहीं ? जब कि मात्र 5 वर्ष के लिए विधायक / सांसद को पेंशन यह कहाँ का न्याय है...?

🏤 🎓
 इस मुहिम को आगे बढायें।
DON'T DELETE,
WE ACTUALLY NEED TO CHANGE THIS SYSTEM.

शपथ ग्रहण से पहले ही बंगाल की हवा बदल चुकी थी। लोगों की आँखों में आँसू थे… चेहरों पर गुस्सा था… और दिलों में वर्षों से दबा हुआ दर्द।

शपथ से पहले ही बंगाल की सड़कों पर कुछ ऐसा होने लगा, जिसने पूरे देश को हिला दिया…
 लोग कह रहे हैं — “वाजपेयी जी की दशकों पुरानी भविष्यवाणी अब सच हो रही है!” आखिर ऐसा क्या हुआ कि हर गली, हर गांव, हर मोहल्ले में सिर्फ एक ही आवाज गूंजने लगी — “जय श्री राम”?


पश्चिम बंगाल…
एक ऐसा राज्य जहाँ चुनाव सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं रहे, बल्कि भावनाओं, पहचान और अस्तित्व की जंग बन चुके थे।
लेकिन इस बार जो हुआ… उसने सबको चौंका दिया।

शपथ ग्रहण से पहले ही बंगाल की हवा बदल चुकी थी।
लोगों की आँखों में आँसू थे… चेहरों पर गुस्सा था… और दिलों में वर्षों से दबा हुआ दर्द।

सबसे हैरान करने वाली बात क्या थी जानते हैं?

इस बार लोग भाजपा के झंडे लेकर नहीं निकले।
नहीं…
हर हाथ में भगवा ध्वज था।
हर गली में “जय श्री राम” की गूंज थी।
और सबसे बड़ा सवाल यही बन गया—

आखिर बंगाल में अचानक ऐसा क्या बदल गया?

जब सोशल मीडिया पर वीडियो आने शुरू हुए, तो पूरे देश की नजरें बंगाल पर टिक गईं।
कहीं बुजुर्ग महिलाएं रोते हुए “जय श्री राम” बोल रही थीं…
कहीं छोटे बच्चे कविता गा रहे थे…
कहीं गांव की महिलाएं नाचते हुए कह रही थीं —
“ममता तेरे जाल में हिंदू अब नहीं फंसेगा…”

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।

इसी बीच लोगों को याद आया संसद का वो पुराना भाषण…
अटल बिहारी वाजपेयी जी का वो बयान…
जिसे आज लोग “भविष्यवाणी” नहीं, बल्कि “श्राप” कह रहे हैं।

वाजपेयी जी ने संसद में कहा था—

“बीजेपी से लड़ना है तो लड़िए… मगर राम से मत लड़िए…”

उस वक्त शायद किसी ने इन शब्दों की गहराई नहीं समझी।
लेकिन आज… दशकों बाद… बंगाल की सड़कों पर वही शब्द सच होते दिखाई दे रहे थे।

क्योंकि लोगों का आरोप था कि वर्षों तक “जय श्री राम” बोलने वालों को रोका गया…
कई जगहों पर हिरासत में लिया गया…
दुर्गा विसर्जन तक पर सवाल उठे…
और धीरे-धीरे आम हिंदुओं के भीतर एक भावना जन्म लेने लगी—
“क्या अपनी आस्था जाहिर करना भी अपराध है?”

यही वजह थी कि इस चुनाव के नतीजे आते ही बंगाल में सिर्फ राजनीतिक जश्न नहीं मनाया गया…
बल्कि लोग इसे “अपनी पहचान की वापसी” कहने लगे।

सबसे चौंकाने वाला दृश्य भवानीपुर से सामने आया।

रात का समय…
सड़कें लोगों से भरी हुई…
और ममता बनर्जी के घर के बाहर हजारों गले एक साथ गूंज उठे—

“जय श्री राम!”

लोगों के चेहरों पर अजीब सा भाव था।
जैसे उन्हें खुद विश्वास नहीं हो रहा था कि वे खुलकर यह नारा लगा पा रहे हैं।

कुछ लोग रो रहे थे…
कुछ हाथ जोड़कर खड़े थे…
और कुछ बस आसमान की तरफ देखकर मुस्कुरा रहे थे।

फिर एक और वीडियो वायरल हुआ।

अभिषेक बनर्जी के घर के बाहर बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग खड़े थे।
कोई पत्थर नहीं…
कोई हिंसा नहीं…
बस एक स्वर—

“जय श्री राम…”

पूरा मोहल्ला गूंज रहा था।

उसके बाद सोशल मीडिया पर एक युवती का वीडियो सामने आया।
उसकी आँखों में आँसू थे।
आवाज कांप रही थी।
वो कह रही थी—

“केवल सनातनी ही समझ सकते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में हमने क्या सहा है…”

और आखिर में उसने हाथ जोड़कर कहा—

“जय श्री राम…”

उस एक वीडियो ने लाखों लोगों को भावुक कर दिया।

फिर गांवों से तस्वीरें आने लगीं।

ग्रामीण महिलाएं ढोल पर नाच रही थीं…
बुजुर्ग महिलाएं युवकों को आशीर्वाद दे रही थीं…
बच्चे कविता गा रहे थे—

“हिंदू नहीं फंसा ममता के जाल में…
कमल खिल गया पूरे पश्चिम बंगाल में…”

लेकिन इसी बीच एक ऐसा वीडियो सामने आया जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया।

कुछ लोग “जय श्री राम” के नारे लगाते हुए जश्न मना रहे थे।
तभी सामने से एक मुस्लिम जनाज़ा गुजरता दिखाई दिया।

और अचानक…

पूरा जुलूस रुक गया।

एक व्यक्ति ने हाथ उठाकर कहा—

“रास्ता दो… पहले इन्हें जाने दो… किसी को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए…”

कुछ सेकंड के लिए पूरा माहौल शांत हो गया।
जनाज़ा आराम से निकल गया।
फिर उसके बाद दोबारा नारे शुरू हुए।

यह वीडियो वायरल होते ही लोगों ने कहना शुरू कर दिया—

“क्या यही असली बंगाल है… जिसे वर्षों तक दबाकर रखा गया?”

लेकिन कहानी अभी और भी गहरी होने वाली थी।

क्योंकि इसके बाद सामने आए कुछ ऐसे दावे…
कुछ ऐसी घटनाएं…
जिन्होंने पूरे माहौल को और विस्फोटक बना दिया।

कहीं दावा हुआ कि वर्षों से बंद मंदिर दोबारा खोले जा रहे हैं…
कहीं कहा गया कि जिन दुकानदारों को डराकर चुप कराया गया था, वे अब खुलकर सामने आ रहे हैं…
और कहीं लोग खुलेआम कहने लगे—

“अब बंगाल बदल चुका है…”

धीरे-धीरे यह सिर्फ चुनाव की कहानी नहीं रही।
यह भावनाओं का विस्फोट बन गई।

और सबसे ज्यादा चर्चा उस सवाल की होने लगी—

क्या सच में वाजपेयी जी ने जो कहा था… वही आज बंगाल में हो रहा है?

क्या “जय श्री राम” सिर्फ नारा नहीं, बल्कि वर्षों के दबे गुस्से और आस्था का प्रतीक बन चुका है?

या फिर इसके पीछे कोई और बड़ी सच्चाई छिपी है…?

क्योंकि अभी जो सामने आना बाकी था…
वो बंगाल की राजनीति को हमेशा के लिए बदल सकता था…
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मंगलवार, 5 मई 2026



 मधुरै। मीनाक्षी मंदिर का प्रवेश द्वार।

 पेरियासामी। उम्र 60। हर सुबह 6 बजे, वह मंदिर के प्रवेश द्वार के पास बैठते थे। उनके सामने एक छोटा सा कपड़ा फैला होता था जिसमें पेन, पेंसिल, इरेज़र और कंपास होते थे। एक छोटी सी पेवमेंट शॉप। 


लेकिन मुश्किल से ही कोई व्यवसाय होता था। 

पेरियासामी का एक नियम था। जब भी कोई पेन मांगता, तो वह पहले पूछते: "बेटा, यह परीक्षा के लिए है?"

"हाँ, दादा। मेरा गणित की परीक्षा है आज। मैं अपना पेन भूल गया।"

फौरन, पेरियासामी एक अच्छा पेन निकालते और देते। "लो, यह लो। यह एक भाग्यशाली पेन है। जाओ, 100 अंक लाओ।"


"कितना दूं, दादा?"

"पैसा बाद में। पहले परीक्षा लिखो। आकर मुझे अपने अंक बताओ। फिर देना।"

बच्चे मुस्कराते और भाग जाते। ज्यादातर वापस नहीं आते। पेरियासामी कभी पूछते भी नहीं। उनकी पत्नी थंगम उन्हें डांटती। "तुम पागल हो? एक पेन की कीमत 10 रुपये है। अगर तुम ऐसे ही बांटते रहे, तो हम खाएंगे क्या? किराया कौन देगा?"

पेरियासामी एक पुरानी डायरी निकालते। उसमें तारीखवार लिखा होता:

"12.03.2010 - रamesh - गणित परीक्षा - पेन - पेंडिंग"
"05.06.2011 - सुमति - हिंदी परीक्षा - पेन - पेंडिंग"
"18.09.2013 - मुरुगन - 10वीं सार्वजनिक परीक्षा - पेन - पेंडिंग"

सारी डायरी "पेंडिंग" से भरी हुई थी। अगर जोड़ते, तो 3,000 से ज्यादा पेन होते। लगभग ₹30,000।

"देखो, थंगम," वह कहते, "यह कर्ज नहीं है। यह निवेश है। एक दिन यह वापस आएगा।"

थंगम सिर हिलाती। "तुमारा निवेश बर्बाद हो रहा है। तुम बूढ़े हो रहे हो। अब कौन वापस आएगा?"

बीस साल बीत गए। पेरियासामी अब 80 साल के थे। उनकी आंखों की रोशनी कम हो गई थी। सुनने की शक्ति भी कमजोर हो गई थी। फिर भी हर दिन वह उसी मंदिर के प्रवेश द्वार पर बैठते। वही कपड़ा। वही पेन। लेकिन अब मुश्किल से ही कोई व्यवसाय होता था। बच्चे जेल पेन, स्केच पेन, ऑनलाइन टूल्स इस्तेमाल करते थे...

एक सुबह, एक कार मंदिर के प्रवेश द्वार पर रुकी। एक आदमी, लगभग 35 साल का, कोट और सूट में, एक फूलों का गुच्छा लेकर बाहर आया। वह सीधे पेरियासामी के पास गया और उनके पैरों पर गिर गया। "दादा, मुझे पहचानते हो?"


पेरियासामी ने आंखें मली। "बेटा, मैं बूढ़ा हो गया हूँ। मुझे ठीक से दिखाई नहीं देता।"

"दादा, अठारह साल पहले, मेरी 10वीं सार्वजनिक गणित परीक्षा के दिन, मैं रोते हुए यहाँ आया था। मेरा पेन टूट गया था। घर में पैसे नहीं थे। आपने ही मुझे पेन दिया और कहा, 'यह भाग्यशाली पेन है। जाओ, 100 अंक लाओ।' आपने पैसे नहीं मांगे।"

पेरियासामी को धीरे-धीरे याद आया। "बेटा... तुम हो..."

"मैं मुरुगन हूँ, दादा। मैंने उस पेन से गणित की परीक्षा लिखी। 98 अंक लाया। पास हुआ। कॉलेज गया। आज मैं 'पेन टेक्नोलॉजीज' नामक सॉफ्टवेयर कंपनी का मालिक हूँ। मेरी जिंदगी आपकी पेन से शुरू हुई।"


बूढ़ी थंगम दरवाजे पर खड़ी होकर मुँह पर हाथ रखकर रोने लगी। मुरुगन ने अपने वॉलेट से एक एनवलप निकाला। "दादा, उस दिन मैं आपको 10 रुपये उधार था। आज मैं उसे ब्याज के साथ लौटा रहा हूँ।"


उसमें ₹10 लाख का चेक था। पेरियासामी के हाथ कांपने लगे। "बेटा, मुझे पैसे नहीं चाहिए। तुम्हें सफल देखना ही मेरे लिए काफी है।"


"नहीं, दादा। यह पैसे नहीं हैं। यह आपका निवेश है जो माफ़त के साथ वापस आया है। अब आपको इस पेवमेंट पर नहीं बैठना होगा। अब मैं आपकी और दादी की देखभाल करूंगा।"


अगले दिन अखबारों में खबर छपी: "सॉफ्टवेयर उद्यमी ने पेवमेंट दादा को गुरुदक्षिणा दी - ₹10 लाख का उपहार।"

खबर पढ़कर अगले दिन एक और कार आई। "दादा, मैं सुमति हूँ। मैंने आपके से हिंदी परीक्षा के लिए पेन लिया था। आज मैं हिंदी टीचर हूँ।"

फिर रamesh आया। "दादा, मैं अब ऑडिटर हूँ। आपकी पेन ने मेरा पहला बैलेंस शीट लिखा था।"

एक हफ्ते में मंदिर का प्रवेश द्वार शादी के घर जैसा हो गया। डॉक्टर, इंजीनियर, कलेक्टर, पुलिस अधिकारी - सभी पेरियासामी के पैरों में बिठाकर फूल, फल और एनवलप लेकर खड़े थे।


थंगम ने फिर से पुरानी डायरी निकाली। तीन हजार नाम। ₹30,000 की पेंडिंग ड्यूज़। लेकिन अब जो वापस आया था, वह ₹3 करोड़ का था।


आंखों में आंसू लेकर पेरियासामी ने कहा: "थंगम, मैंने कहा था ना? यह कर्ज नहीं था। ये बीज थे। मैंने बोए थे। आज ये जंगल बन गए हैं।"


आज, मीनाक्षी मंदिर के प्रवेश द्वार के पास एक बड़ा शॉप है "पेरियासामी पेन स्टोर्स।" कोई किराया नहीं। मुरुगन ने इसे उनके लिए खरीदा है। शॉप पर एक बोर्ड है: "यहाँ परीक्षा देने वाले बच्चों के लिए पेन फ्री हैं। बस आकर हमें अपने अंक बताओ। पैसे बाद में देना।"


और नीचे छोटे लेटर्स में: "एक दस रुपये का पेन किसी की जिंदगी बदल सकता है। विश्वास करो।"


क्या आपको पता है अब शॉप कौन चलाता है? मुरुगन - सॉफ्टवेयर कंपनी का मालिक। हफ्ते में दो दिन वह अपना कोट और सूट उतारकर शॉप में बैठता है और बच्चों को पेन देता है। "बेटा, यह भाग्यशाली पेन है। जाओ, 100 अंक लाओ।"


आप जो देते हैं, वह सिर्फ पेन नहीं है। वह आशा है। और एक दिन, वह आशा वापस आकर आपके पैरों में गिरेगी। तब आपको पता चलेगा - आप कभी गरीब नहीं थे। आप सबसे अमीर थे। — श्री वत्सन रघुनाथन का पोस्ट


यह कहानी पढ़कर मेरा दिल गदगद हो गया। धन्यवाद लेखक को। 😊

भारत के इतिहास की कुछ खास तसवीरें जो शायद ही किसी ने पहले देखी हो -

 

भारत के इतिहास की कुछ खास तसवीरें जो शायद ही किसी ने पहले देखी हो -

  1. महात्मा गांधी जी की आखिरी तस्वीर

2. नाथूराम गोडसे जिन्होंने गांधी जी पर गोली चलाई थी

3. अन्ना हज़ारे जी - एक ऑर्मी अफ़सर

4. नेताजी सुभाष चन्द्र बोस

5. युवा सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली

6. रतन जी टाटा के बचपन की तस्वीर

7. पूर्व राष्ट्रपति - महान अब्दुल क़लाम जी

8. सर् सी.वी. रमन

9. सुभाष चन्द्र बोस और हिटलर की मुलाक़ात

10. स्वामी विवेकानंद जी


(इमेज सॉर्स - फ़ेसबुक)

आशा है कि ऊपर की तस्वीरों में से कुछ तस्वीरें आपने भी पहली बार ही देखी होगी। अगर ऐसा हो तो share करने मे हिचकिचियेगा मत।

शनिवार, 2 मई 2026

भारतीय जनगणना में अपनी भागीदारी से स्वयं अपना डाटा फीड करे ।

https://youtu.be/XxqR7XkUME8?si=S2rNaRHSNzD64Nyg

https://www.youtube.com/watch?v=XxqR7XkUME8&list=PLX3J_t553_VPrLP4z0Uk57c_Skujmx1O4&index=10


भारतीय जनगणना में अपनी भागीदारी से स्वयं अपना डाटा फीड करे । 


जनगणना 2027 के साथ भारत में डिजिटल बदलाव का एक नया अध्याय शुरू हो रहा है।

स्व-गणना (Self Enumeration) एक सुरक्षित, वेब-आधारित सुविधा है, जो 16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है। इसके माध्यम से लोग अपने विवरण अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन भर सकते हैं—प्रगणक के घर-घर आने से पहले।

प्रगणक पहले की तरह सभी निर्धारित क्षेत्रों में घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे, जबकि स्व-गणना एक अतिरिक्त सुविधा के रूप में लोगों की भागीदारी को और आसान बनाती है।

स्व-गणना में भाग लेने के लिए, लोग आधिकारिक पोर्टल se.census.gov.in पर अपने मोबाइल नंबर और आवश्यक विवरण के साथ लॉगिन कर सकते हैं। सफलतापूर्वक जानकारी जमा करने के बाद एक यूनिक Self-Enumeration ID (SE ID) जनरेट होती है, जिसे बाद में सत्यापन के लिए प्रगणक के साथ साझा करना होता है।

इस ऐतिहासिक पहल का हिस्सा बनें और भारत के डेटा-आधारित भविष्य के निर्माण में अपना योगदान दें।  

Kailash Chandra Ladha 
Police Public Press
Jodhpur
Www.Sanwariyaa.blogspot.com


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