शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2011

सकल पदारथ है जग माहीं,करमहीन नर पावत नाहीं

सकल पदारथ एहि जग मांही, कर्महीन नर पावत नाही।

 

विधाता से विधान,विधान से विधि
तुलसीदास जी ने कहा है कि "सकल पदारथ है जग माहीं,करमहीन नर पावत नाहीं",लेकिन कर्म को करवाने के लिये जो शक्ति साथ चलती है उसके बारे में भी कहा है,-"बिनु पग चलै सुनै बिनु काना,कर बिनु करम करै विधि नाना",जब सभी कर्म वह शक्ति करवाती है तो शक्ति को समझने के लिये भी लिखा है,-"उमा दारु ज्योतिष की नाईं,सबहि नचावत राम गुसांई".

कर्म प्रधान विश्व रचि राखा, जो जस करहिं सो तस फल चाखा।

 

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