शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2011

सकल पदारथ है जग माहीं,करमहीन नर पावत नाहीं

सकल पदारथ है जग माहीं,करमहीन नर पावत नाहीं

 

विधाता से विधान,विधान से विधि
रामायण में कहा गया है कि "सकल पदारथ है जग माहीं,करमहीन नर पावत नाहीं",लेकिन कर्म को करवाने के लिये जो शक्ति साथ चलती है उसके बारे में भी कहा है,-"बिनु पग चलै सुनै बिनु काना,कर बिनु करम करै विधि नाना",जब सभी कर्म वह शक्ति करवाती है तो शक्ति को समझने के लिये भी लिखा है,-"उमा दारु ज्योतिष की नाईं,सबहि नचावत राम गुसांई".

 

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