गुरुवार, 28 फ़रवरी 2019

#शास्त्रों* में मिलावट या दूषण क्रिया

*#शास्त्रों* में मिलावट या दूषण क्रिया।
यह निश्चित है कि यदि संस्कृत का अध्ययन और व्याकरण का अभ्यास नहीं किया गया तो वेद-पुराण-शास्त्र आदि का मूल रूप लुप्त हो जायेगा और म्लेच्छ लोग कुतर्कों से श्रद्धावान जन को मानसिक तथा शारीरिक रूप से सर्वथा पतन के गर्भ में झोंक देगें।
यद्यपि मैंने पहले भी यह बात बतायी है. और विविध अवसरों पर इनका उल्लेख भी किया है. मैं पुनः एक उदाहरण वायुपुराण से दे रहा हूँ. वायुपुराण के द्वितीय अध्याय "द्वादशवार्षिकसत्र निरूपण" में बताया गया है कि ---
*#उर्वशी चकमे यं च देवहूतिप्रणोदिता।*
आजहार च तत्सत्रं स्व *#र्वेश्यासहसंगतः।---16.*
इस श्लोक में उर्वशी को स्पष्ट शब्दों में *#वैश्या* कहा गया है. यही नहीं माता देवहूति ने प्रेरित कर उसका विवाह भी राजा पुरुरवा से करवा दिया। यह सर्व विदित है कि उर्वशी, रम्भा, मेनका, तिलोत्तमा आदि स्वर्ग की अप्शरायें थीं. तथा विविध दैवी कार्यक्रमों में अपना शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत कर स्वरबोध कराती थीं. उन्होंने सदा अपने गर्भ से विभूतियों को ही जन्म दिया है. मेनका-दुष्यंत के पुत्र भरत इसका बहुप्रचलित उदाहरण है. उर्वशी ने विदम्भ, रम्भा ने कृतिवर्ह और तिलोत्तमा ने अजवाह नामक देवअंशी ऋषियों को अपने गर्भ से जन्म दिया। और उसे वैश्या कहा गया है. यही नहीं विवाह की प्रेरणा भी देवहूति द्वारा दी गयी.
क्या कोई एक ऐसा उदाहरण है जिसमें यह बताया गया हो कि कोई भी अप्सरा स्वयं या कामपीड़ित होकर किसी राजा का वरण किया हो?
जब भी इनका सम्बन्ध किसी सांसारिक मनुष्य से हुआ है तो इसके पीछे उस सांसारिक मनुष्य का ही हाथ, भय या दण्ड रहा है. किसी अप्सरा का नहीं। फिर किस आधार पर इन्हें वैश्या शब्द से सम्बोधित किया गया है?
यही नहीं, इसके आगे वाला श्लोक देखें-         
*#तस्मिन्नरपतौ* सत्रं नैमिषेयाः प्रचक्रिरे।
यं गर्भे सुषुवे गङ्गा पावकाद्दीप्ततेजसम।----17
अर्थात सर्वप्रथम तो यह कि देवमाता ने जानबूझकर उर्वसी से व्यभिचार करवाया। क्योंकि वेश्या से व्यभिचार ही अपेक्षित है. उसके बाद देवमाता की यही आकांक्षा थी कि नैमिष ऋषियों का द्वादश वर्षीय सत्र भङ्ग हो जाय. सोचने की बात है, ऋषिपत्नी देवहूति ने अत्यंत पवित्र कार्य द्वादश वर्षीय सत्र को भङ्ग करना चाहा, सहारा किसका लिया--एक वेश्या (????) का, दूषित किसे किया- एक नृपति को.
इसके बाद श्लोक की अगली पंक्ति देखें। उसमें बताया गया है कि पावक अर्थात अग्नि के उद्दीप्त तेज से गङ्गा ने गर्भ धारण किया। और गर्भ के उस भ्रूण-उल्व को पर्वत पर रख दिया गया जो स्वर्ण बन गया.
---तदुल्वं पर्वते न्यस्तँ हिरण्यं प्रत्यपद्यत।
हिरण्मयं ततश्चक्रे यज्ञवाटं महात्मनाम।     
स्वयं देखें, इस श्लोक का इसके आगे या पीछे के श्लोक या प्रसङ्ग से कोई सम्बन्ध नहीं है. क्योंकि पहले कहा गया है कि देवहूति ने पुरुरवा का व्याह वेश्या उर्वसी के साथ हुआ. चलिये यह तो प्रसङ्ग चल ही रहा है. फिर यह गङ्गा के गर्भ धारण, तथा उसके उल्व को पर्वत पर रख देने का क्या तात्पर्य? इसका इस कथन से या प्रसङ्ग से क्या लेना लेना देना? क्योंकि आगे की कथा पुनः पुरुरवा और उर्वसी के सम्बन्ध से उत्पन्न संतान पर आ जाती है. और इनकी यही संतान नहुष के महात्मा पिता के रूप में प्रसिद्ध हुई.
ध्यान दें, यहां पर भी संतान महात्मा हुई. फिर भी उर्वसी को वेश्या सम्बोधन मिला है.
पुनः यहां गङ्गा को भी अपमानजनक स्थिति के द्वारा प्रदर्शित किया गया है. वह भी बिना किसी प्रयोजन के. जिसका इस कथा से कोई सम्बन्ध नहीं बनता है. इस प्रकार विविध प्रक्षिप्त कथन इन पवित्र कथाओं को दूषित और हेय बनाते हैं.
अल्पज्ञता, स्वार्थपरता या पापपूर्ण लोभ और छद्मपांडित्य के कारण पुराणों को न समझ सकने से ये विद्वान विद्वान के रूप में स्वयं को प्रस्तुत करने वाले विश्लेषक, व्याख्याकार आदि ने इन पुराणों का बहुत अपमान किया है.
उदाहरण---
कोई भी व्यक्ति अपनी संतान को लक्ष्मी सदृश गुणों के कारण उसका नाम लक्ष्मी रख देता है. वैसे तो आजकल प्रत्येक व्यक्ति कुछ और ही कर रहा है. जैसे अपनी काणी या भैंगी लड़की का नाम *#सुलोचना* रख दे रहा है. या अपने कुबड़े या काले कलूटे पुत्र का नाम भी #रुपेश रख दे रहा है. किन्तु पुराणकालीन नाम ऐसे नहीं होते थे. जैसा गुण होता था वैसा ही नाम रखा जाता था. जैसे--
*#विश्व भरण पोषण कर जोई.*
ताकर नाम भरत अस होई.
जेहि सुमिरत हो शत्रु विनाशा।
नाम शत्रुहन वेद प्रकाशा।----रामचरितमानस
अर्थात जो विश्व के भरण पोषण की शक्ति एवं इच्छा से भरा हो ऐसे इस बालक का नाम भरत विख्यात होगा। जिसके नाम स्मरण मात्र से शत्रुओं का विनाश हो जाय, ऐसे इस बालक का नाम शत्रुघ्न प्रसिद्ध होगा।
अब सम्बंधित प्रसङ्ग पर आते हैं. उर्वसी को उपर्युक्त कथा में वेश्या कहा गया है. जबकि इसका नामकरण वैदिक ऋचाओं के आधार पर है--
*#त्वमग्ने प्रथमं आयुं आयवे देवाः अकृण्वन।---ऋग्वेद 1/31/11*
अर्थात हे अग्नि पहले तुमने आयु को बनाया और उसके बाद अन्य देवताओं को.
ऊपर के वायुपुराण के कथन में यह बताया गया है कि नहुष के पिता एवं पुरुरवा-उर्वसी से उत्पन्न संतान का नाम आयु था. अर्थात नहुष पुरुरवा के पौत्र थे.
उर्वसी--और्वं सह ईक्षते (तत्प्रत्ययान्ते पदकृतं ईकारान्त) अर्थात सूर्य
पुरुरवा- पुरो वहति उत्सर्जति वा. अर्थात सूर्य के आगे आगे जो प्रवाहित होती है--किरण-रश्मि।
इन गुणों से संपन्न होने के कारण इस स्वर्ग की अप्सरा को उर्वसी जो सूर्य के सदृश थी, तथा पुरुरवा जो रश्मि की भाँती थे, नामकरण हुआ.
इसके उपरान्त भी पुरुरवा को व्यभिचारी-विलासी एवं परदारारत तथा उर्वसी को वैश्या बताया गया है.
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अतः आज उपलब्ध पुराण-शास्त्र आदि अपना मूल रूप खो चुके हैं.  
वेदव्यास द्वारा सम्पादित पुराण की कथाओं का प्रचार तात्कालिक सूतों द्वारा हुआ. सूत एक जाति या सम्प्रदाय था. जो वंश परम्परा के अनुसार घूम घूम कर कथाओं के द्वारा समाज का संशोधन एवं मनोरंजन करता था. विभिन्न सूतों के मुख से उद्गीर्ण पौराणिक कथाओं में कालक्रमानुसार पाठान्तर एवं प्रक्षेप का होना स्वतः सिद्ध है. कालान्तर में स्वार्थ निरत व्यासों और सूतों ने अपनी अपनी मान्यता का समावेश किया। धीरे धीरे पुराण तिल के ताड़ बनाये गये. उनकी शाखायें-प्रशाखायें उत्पन्न हुईं। साम्प्रदायिक घृणा और द्वेष की प्रवृत्तियाँ समाविष्ट हुईं। पाठान्तर और प्रेक्षप निरंतर बढ़ते गये. फिर भी अभ्यासी, चैतन्य, अध्येता एवं वेदपाठी कुशल आचार्यों ने इसकी मौलिकता बनाये रखी. जिससे यह नष्ट तो न हो पाया है और न होगा। किन्तु इसे वही जान सकता है जो भाषा विज्ञान, छंद, लय, यति तथा शब्द संहिता आदि का ज्ञान रखता हो. अन्यथा दुसरे लोग तो दूषित, अशुद्ध एवं भ्रामक पुराण आदि ही पढ़ेगें और उनका अनुकरण करेगें। जैसा आजकल लोग कर रहे हैं. आजकल तो *#नेटपुराण और #नेटकर्मकाण्ड* का बोलबाला है.
मातारानी रक्षा करें।

सोमवार, 25 फ़रवरी 2019

भारत में रविवार की छुट्टी किस व्यक्ति ने दिलाई?

भारत में रविवार की छुट्टी किस व्यक्ति ने  दिलाई?
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रविवार की छुट्टी के पीछे उस महान व्यक्ति का क्या मकसद था? जानिए क्या है इसका इतिहास।

साथियों, जिस व्यक्ति की वजह से हमें ये छुट्टी हासिल हुयी है, उस महापुरुष का नाम है "नारायण मेघाजी लोखंडे". नारायण मेघाजी लोखंडे ये जोतीराव फुलेजी के सत्यशोधक आन्दोलन के कार्यकर्ता थे। और कामगार नेता भी थे। अंग्रेजो के समय में हफ्ते के सातो दिन मजदूरो को काम करना पड़ता था। लेकिन नारायण मेघाजी लोखंडे जी का ये मानना था की, हफ्ते में सात दिन हम अपने परिवार के लिए काम करते है। लेकिन जिस समाज की बदौलत हमें नौकरिया मिली है, उस समाज की समस्या छुड़ाने के लिए हमें एक दिन छुट्टी मिलनी चाहिए। उसके लिए उन्होंने अंग्रेजो के सामने 1881 में प्रस्ताव रखा। लेकिन अंग्रेज ये प्रस्ताव मानने के लिए तयार नहीं थे। इसलिए आख़िरकार नारायण मेघाजी लोखंडे जी को इस sunday की छुट्टी के लिए 1881 में आन्दोलन करना पड़ा। ये आन्दोलन दिन-ब-दिन बढ़ते गया। लगभग 8 साल ये आन्दोलन चला। आखिरकार 1889 में अंग्रेजो को sunday की छुट्टी का ऐलान करना पड़ा। ये है इतिहास।
क्या हम इसके बारे में जानते है?
अनपढ़ लोग छोड़ो लेकिन क्या पढ़े लिखे लोग भी इस बात को जानते है?
जहा तक हमारी जानकारी है, पढ़े लिखे लोग भी इस बात को नहीं जानते। अगर जानकारी होती तो sunday के दिन enjoy नहीं करते....समाज का काम करते....और अगर समाज का काम ईमानदारी से करते तो समाज में भुखमरी, बेरोजगारी, बलात्कार, गरीबी, लाचारी ये समस्या नहीं होती।
साथियों, इस sunday की छुट्टीपर हमारा हक़ नहीं है, इसपर "समाज" का हक़ है। कोई बात नहीं, आज तक हमें ये मालूम नहीं था लेकिन अगर आज हमें मालूम हुआ है तो आज से ही sunday का ये दिन सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित करें.!!
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शनिवार, 23 फ़रवरी 2019

एसिडिटी -लक्षण - उपचार

•एसिडिटी -
लक्षण - एसिडिटी, बदहजमी, पेट भरा-भरा मालूम होना, खट्टी डकारें आना, सीने में जलन, सर दर्द, पेट दर्द.
•इसका उपचार निम्नानुसार है -
1.HSL कम्पनी की होम्योकाम्ब नं. 55 की दो गोली दिन में चार बार लें
2.HSL कम्पनी की DROX 13 की 20 बूँद आधा कप पानी से दिन में चार बार लें.
3.बायो काम्ब नं. 25 की छः गोली दिन में चार बार चूसें.
4.अगर कब्ज रहता हो, तो होम्योलेक्स की एक या आधी गोली रोज रात 9 बजे लें.
5.मैथी दाना 250 ग्राम, अजबाइन 100 ग्राम और काली जीरी 50 ग्राम को पीस कर इस चूर्ण को सादे या कुनकुने पानी से रात्रि 9.30 बजे एक चम्मच लें.
•शरीर की ओवरहालिंग और रिचार्जिंग -
इसके साथ ही शरीर की ओवरहालिंग और रिचार्जिंग करने और हमेशा स्वस्थ रहने के लिए अगर कोई व्यक्ति निम्न उपचार नियमित रूप से लेता रहता है और खान-पान और एक्सरसाइज निम्नलिखित अनुसार करेगा, तो उसे कभी भी कैंसर, डायबटीज, ह्रदय रोग, लिवर रोग, किडनी फेल्यर, टी.बी., फेफड़े के रोग, चर्म रोग आदि किसी भी तरह की गंभीर बीमारी नहीं होगी और वे आजीवन सपरिवार स्वस्थ, प्रसन्न और खुशहाल रह सकेंगे -
1.आप सल्फर 200 को सुबह 7 बजे, दोपहर को आर्निका 200 और रात्रि को आठ बजे Nux Vom 200 की पांच-पांच बूँद आधा कप पानी से एक हफ्ते तक ले, फिर हर तीन से छह माह में तीन दिन तक लें. साथ ही हर 15 दिन में सोरिनम 200 का मात्र एक-एक डोज चार बार तक ले, ताकि आपके शरीर के अंदर जमा दवाई और दूसरे अन्य  केमिकल और पेस्टीसाइड के विकार दूर हो सकें और आपके शरीर के सभी ह्रदय, फेफड़े, लीवर, किडनी आदि मुख्य अंग सुचारू रूप से कार्य कर सकेंगे. बच्चों और ज्यादा वृद्धों में ये दवा 30 पावर में दें.
2.अगर संभव हो तो आप सुबह दो गिलास कुनकुना पानी पीकर 5 मिनिट तक कौआ चाल (योग क्रिया) करें.
3.फिर संभव हो तो पांच या अधिक से अधिक दस बार तक सूर्य नमस्कार करें. साथ ही 200 से 500 बार तक कपाल-भांति करें.
4.सुबह और शाम को अगर संभव हो, तो एक घंटा अवश्य घूमें.
5.फिर एक घंटे बाद नारियल पानी लें.
6.उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव के मिलाकर बने चुम्बकित जल को लगभग 50 मिलीलीटर की मात्रा में रोज दिन में 3 बार उपयोग करें.
7.रोज सुबह चुम्बकों को हथेलियों पर 15 मिनिट से आधे घंटे के लिए लगायें और शाम के समय चुम्बकों को पैर के तलुवों पर 15 मिनिट से आधे घंटे के लिए लगाये.
8.गेंहू, जौ, देसी चना और सोयाबीन को सम भाग मिलाकर पिसवा ले और उसकी रोटी सादे मसाले की रेशेदार सब्जी से खाएं. दाल का प्रयोग कम कर दें.
9.तत्काल जमे दही की छाछ भी ले सकते हैं.
10.खाने के चार घंटे बाद एक नेपकिन को सामान्य ठन्डे पानी से गीली करके पेट पर रखें और हर दो मिनिट में पलटते रहें. 15 मिनिट से 20 मिनिट तक इसे करें और रात को सोने से पहले भी करें.
11.रात्रि को खाना और जमीकंद खाना, शराब पीना व धूम्रपान अगर करते हों या तम्बाखू खाते हों, तो इन्हें बंद करें. शाकाहारी भोजन ही लें.
12.अपने शरीर की सालाना ओवरहालिंग के लिए साल में एक बार अपने आसपास के किसी भी प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में जाकर वहां का दस दिन का कोर्स करें.
13.अपने घर के बुजुर्ग लोगों की रोज एक घंटे के लिये सेवा और मदद करें.
14.अपने आसपास की झोपड़पट्टी में रहने वाले किसी गरीब व्यक्ति की हर हफ्ते जाकर मदद करें.
15.अध्यात्मिक कैप्सूल के रूप में मेरी पुस्तक मुक्तियाँ की एक-एक मुक्ति तीन माह तक रोज पढ़ें. इससे आपकी नेगेटिव एनर्जी कम होगी और पॉजिटिव एनर्जी बहुत तेजी से बढेगी. इस पुस्तक को निशुल्क मंगवाने के लिये अपना पूरा नाम, पता, शहर, राज्य और पिन कोड के साथ  मेरे फेसबुक के मेसेज बाक्स में ही लिखे, क्योकि कई बार किसी अन्य जगह या ग्रुप में पता लिखने पर मुझे मालूम नहीं पड़ता है और मैं भेज नहीं पाता हूँ.
16.होम्योकाम्ब और बायोकाम्ब नम्बर से मिलती हैं. इनके नम्बर ध्यान से लिखें. साथ ही होम्योकाम्ब और बायोकाम्ब में कन्फ्यूज न हों. इन्हें साफ़-साफ़ लिखें.
17.किसी को अगर दवा न मिले, तो दवाई के Composition को 6 या 30 की पावर में मिलवा कर ले सकते हैं.
18.किसी भी गंभीर मरीज को किसी विशेषज्ञ डॉक्टर को तत्काल दिखायें.
19.सावधानी – होम्योपैथी की दवाइयों को मुंह साफ़ करके कुल्ला करके लेना चाहिए. इनको लेते समय किसी भी तरह की सुगन्धित चीजों और प्याज, लहसुन, काफी, हींग और मांसाहार आदि से बचे और दवा लेने के आधा घंटा पहले और बाद में कुछ न लें.
20.हमें भी चाहिये कि हम मात्र एलोपथिक दवाइयों पर ही निर्भर न रहकर योगासन, सूर्य किरण भोजन, अमृत-जल या सूर्य किरण जल चिकित्सा, एक्यूप्रेशर, बायोकेमिक दवाइयाँ आदि निर्दोष प्रणालियों को अपना कर खुद और अपने परिवार को सुरक्षित करें, क्योकि हर दिन नई एलोपथिक दवाइयां बन रही हैं और अधिकांश पुरानी दवाइयों के घातक और खतरनाक परिणामों के कारण इन्हें कुछ ही वर्षों में भारत को छोड़ कर विश्व के कई देशों में बेन भी किया जा रहा है.
21.इस तरह दवा मुक्त विश्व का निर्माण करना ही हमारा एकमात्र उद्देश्य है और इसके लिए आप सभी का सहयोग चाहिये, जो आप मेरे इन सन्देशों को दूर-दूर तक फैला कर मुझे दे सकते हैं.
www.sanwariyaa.blogspot.in

100 जानकारी जिसका ज्ञान सबको होना चाहिए

योग की 100 जानकारी जिसका ज्ञान सबको होना चाहिए

1.योग,भोग और रोग ये तीन अवस्थाएं है।
  
2. *लकवा* - सोडियम की कमी के कारण होता है ।

3. *हाई वी पी में* -  स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे ।

4. *लो बी पी* - सेंधा नमक डालकर पानी पीयें ।

5. *कूबड़ निकलना*- फास्फोरस की कमी ।

6. *कफ* - फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है , फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है । गुड व शहद खाएं ।

7. *दमा, अस्थमा* - सल्फर की कमी ।

8. *सिजेरियन आपरेशन* - आयरन , कैल्शियम की कमी ।

9. *सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें* ।

10. *अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें* ।

11. *जम्भाई*- शरीर में आक्सीजन की कमी ।

12. *जुकाम* - जो प्रातः काल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें ।

13. *ताम्बे का पानी* - प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें ।

14.  *किडनी* - भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये ।

15. *गिलास* एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेसटेन्स अधिक होता है । गिलास अंग्रेजो ( पुर्तगाल) की सभ्यता से आयी है अतः लोटे का पानी पियें,  लोटे का कम  सर्फेसटेन्स होता है ।

16. *अस्थमा , मधुमेह , कैसर* से गहरे रंग की वनस्पतियाँ बचाती हैं ।

17. *वास्तु* के अनुसार जिस घर में जितना खुला स्थान होगा उस घर के लोगों का दिमाग व हृदय भी उतना ही खुला होगा ।

18. *परम्परायें* वहीँ विकसित होगीं जहाँ जलवायु के अनुसार व्यवस्थायें विकसित होगीं ।
19. *पथरी* - अर्जुन की छाल से पथरी की समस्यायें ना के बराबर है ।

20. *RO* का पानी कभी ना पियें यह गुणवत्ता को स्थिर नहीं रखता । कुएँ का पानी पियें । बारिस का पानी सबसे अच्छा , पानी की सफाई के लिए *सहिजन* की फली सबसे बेहतर है ।

21. *सोकर उठते समय* हमेशा दायीं करवट से उठें या जिधर का *स्वर* चल रहा हो उधर करवट लेकर उठें ।

22. *पेट के बल सोने से* हर्निया, प्रोस्टेट, एपेंडिक्स की समस्या आती है ।

23.  *भोजन* के लिए पूर्व दिशा , *पढाई* के लिए उत्तर दिशा बेहतर है ।

24.  *HDL* बढ़ने से मोटापा कम होगा LDL व VLDL कम होगा ।

25. *गैस की समस्या* होने पर भोजन में अजवाइन मिलाना शुरू कर दें ।

26.  *चीनी* के अन्दर सल्फर होता जो कि पटाखों में प्रयोग होता है , यह शरीर में जाने के बाद बाहर नहीं निकलता है। चीनी खाने से *पित्त* बढ़ता है ।

27.  *शुक्रोज* हजम नहीं होता है *फ्रेक्टोज* हजम होता है और भगवान् की हर मीठी चीज में फ्रेक्टोज है ।

28. *वात* के असर में नींद कम आती है ।

29.  *कफ* के प्रभाव में व्यक्ति प्रेम अधिक करता है ।

30. *कफ* के असर में पढाई कम होती है ।

31. *पित्त* के असर में पढाई अधिक होती है ।

33.  *आँखों के रोग* - कैट्रेक्टस, मोतियाविन्द, ग्लूकोमा , आँखों का लाल होना आदि ज्यादातर रोग कफ के कारण होता है ।

34. *शाम को वात*-नाशक चीजें खानी चाहिए ।

35.  *प्रातः 4 बजे जाग जाना चाहिए* ।

36. *सोते समय* रक्त दवाव सामान्य या सामान्य से कम होता है ।

37. *व्यायाम* - *वात रोगियों* के लिए मालिश के बाद व्यायाम , *पित्त वालों* को व्यायाम के बाद मालिश करनी चाहिए । *कफ के लोगों* को स्नान के बाद मालिश करनी चाहिए ।

38. *भारत की जलवायु* वात प्रकृति की है , दौड़ की बजाय सूर्य नमस्कार करना चाहिए ।

39. *जो माताएं* घरेलू कार्य करती हैं उनके लिए व्यायाम जरुरी नहीं ।

40. *निद्रा* से *पित्त* शांत होता है , मालिश से *वायु* शांति होती है , उल्टी से *कफ* शांत होता है तथा *उपवास* ( लंघन ) से बुखार शांत होता है ।

41.  *भारी वस्तुयें* शरीर का रक्तदाब बढाती है , क्योंकि उनका गुरुत्व अधिक होता है ।

42. *दुनियां के महान* वैज्ञानिक का स्कूली शिक्षा का सफ़र अच्छा नहीं रहा, चाहे वह 8 वीं फेल न्यूटन हों या 9 वीं फेल आइस्टीन हों ,

43. *माँस खाने वालों* के शरीर से अम्ल-स्राव करने वाली ग्रंथियाँ प्रभावित होती हैं ।

44. *तेल हमेशा* गाढ़ा खाना चाहिएं सिर्फ लकडी वाली घाणी का , दूध हमेशा पतला पीना चाहिए ।

45. *छिलके वाली दाल-सब्जियों से कोलेस्ट्रोल हमेशा घटता है ।*

46. *कोलेस्ट्रोल की बढ़ी* हुई स्थिति में इन्सुलिन खून में नहीं जा पाता है । ब्लड शुगर का सम्बन्ध ग्लूकोस के साथ नहीं अपितु कोलेस्ट्रोल के साथ है ।

47. *मिर्गी दौरे* में अमोनिया या चूने की गंध सूँघानी चाहिए ।

48. *सिरदर्द* में एक चुटकी नौसादर व अदरक का रस रोगी को सुंघायें ।

49. *भोजन के पहले* मीठा खाने से बाद में खट्टा खाने से शुगर नहीं होता है ।

50. *भोजन* के आधे घंटे पहले सलाद खाएं उसके बाद भोजन करें ।

51. *अवसाद* में आयरन , कैल्शियम , फास्फोरस की कमी हो जाती है । फास्फोरस गुड और अमरुद में अधिक है ।

52.  *पीले केले* में आयरन कम और कैल्शियम अधिक होता है । हरे केले में कैल्शियम थोडा कम लेकिन फास्फोरस ज्यादा होता है तथा लाल केले में कैल्शियम कम आयरन ज्यादा होता है । हर हरी चीज में भरपूर फास्फोरस होती है, वही हरी चीज पकने के बाद पीली हो जाती है जिसमे कैल्शियम अधिक होता है ।

53.  *छोटे केले* में बड़े केले से ज्यादा कैल्शियम होता है ।

54. *रसौली* की गलाने वाली सारी दवाएँ चूने से बनती हैं ।

55.  हेपेटाइट्स A से E तक के लिए चूना बेहतर है ।

56. *एंटी टिटनेस* के लिए हाईपेरियम 200 की दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दे ।

57. *ऐसी चोट* जिसमे खून जम गया हो उसके लिए नैट्रमसल्फ दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दें । बच्चो को एक बूंद पानी में डालकर दें ।

58. *मोटे लोगों में कैल्शियम* की कमी होती है अतः त्रिफला दें । त्रिकूट ( सोंठ+कालीमिर्च+ मघा पीपली ) भी दे सकते हैं ।

59. *अस्थमा में नारियल दें ।* नारियल फल होते हुए भी क्षारीय है ।दालचीनी + गुड + नारियल दें ।

60. *चूना* बालों को मजबूत करता है तथा आँखों की रोशनी बढाता है ।

61.  *दूध* का सर्फेसटेंसेज कम होने से त्वचा का कचरा बाहर निकाल देता है ।

62.  *गाय की घी सबसे अधिक पित्तनाशक फिर कफ व वायुनाशक है ।*

63.  *जिस भोजन* में सूर्य का प्रकाश व हवा का स्पर्श ना हो उसे नहीं खाना चाहिए ।

64.  *गौ-मूत्र अर्क आँखों में ना डालें ।*

65.  *गाय के दूध* में घी मिलाकर देने से कफ की संभावना कम होती है लेकिन चीनी मिलाकर देने से कफ बढ़ता है ।

66.  *मासिक के दौरान* वायु बढ़ जाता है , 3-4 दिन स्त्रियों को उल्टा सोना चाहिए इससे  गर्भाशय फैलने का खतरा नहीं रहता है । दर्द की स्थति में गर्म पानी में देशी घी दो चम्मच डालकर पियें ।

67. *रात* में आलू खाने से वजन बढ़ता है ।

68. *भोजन के* बाद बज्रासन में बैठने से *वात* नियंत्रित होता है ।

69. *भोजन* के बाद कंघी करें कंघी करते समय आपके बालों में कंघी के दांत चुभने चाहिए । बाल जल्द सफ़ेद नहीं होगा ।

70. *अजवाईन* अपान वायु को बढ़ा देता है जिससे पेट की समस्यायें कम होती है ।

71. *अगर पेट* में मल बंध गया है तो अदरक का रस या सोंठ का प्रयोग करें ।

72. *कब्ज* होने की अवस्था में सुबह पानी पीकर कुछ देर एडियों के बल चलना चाहिए ।

73. *रास्ता चलने*, श्रम कार्य के बाद थकने पर या धातु गर्म होने पर दायीं करवट लेटना चाहिए ।
74. *जो दिन मे दायीं करवट लेता है तथा रात्रि में बायीं करवट लेता है उसे थकान व शारीरिक पीड़ा कम होती है ।*

75.  *बिना कैल्शियम* की उपस्थिति के कोई भी विटामिन व पोषक तत्व पूर्ण कार्य नहीं करते है ।

76. *स्वस्थ्य व्यक्ति* सिर्फ 5 मिनट शौच में लगाता है ।

77. *भोजन* करते समय डकार आपके भोजन को पूर्ण और हाजमे को संतुष्टि का संकेत है ।

78. *सुबह के नाश्ते* में फल , *दोपहर को दही* व *रात्रि को दूध* का सेवन करना चाहिए ।
79. *रात्रि* को कभी भी अधिक प्रोटीन वाली वस्तुयें नहीं खानी चाहिए । जैसे - दाल , पनीर , राजमा , लोबिया आदि ।

80.  *शौच और भोजन* के समय मुंह बंद रखें , भोजन के समय टी वी ना देखें ।

81. *मासिक चक्र* के दौरान स्त्री को ठंडे पानी से स्नान , व आग से दूर रहना चाहिए ।

82. *जो बीमारी जितनी देर से आती है , वह उतनी देर से जाती भी है ।*

83. *जो बीमारी अंदर से आती है , उसका समाधान भी अंदर से ही होना चाहिए ।*

84. *एलोपैथी* ने एक ही चीज दी है , दर्द से राहत । आज एलोपैथी की दवाओं के कारण ही लोगों की किडनी , लीवर , आतें , हृदय ख़राब हो रहे हैं । एलोपैथी एक बिमारी खत्म करती है तो दस बिमारी देकर भी जाती है ।

85. *खाने* की वस्तु में कभी भी ऊपर से नमक नहीं डालना चाहिए , ब्लड-प्रेशर बढ़ता है ।

86 .  *रंगों द्वारा* चिकित्सा करने के लिए इंद्रधनुष को समझ लें , पहले जामुनी , फिर नीला ..... अंत में लाल रंग ।

87 . *छोटे* बच्चों को सबसे अधिक सोना चाहिए , क्योंकि उनमें वह कफ प्रवृति होती है , स्त्री को भी पुरुष से अधिक विश्राम करना चाहिए ।

88. *जो सूर्य निकलने* के बाद उठते हैं , उन्हें पेट की भयंकर बीमारियां होती है , क्योंकि बड़ी आँत मल को चूसने लगती है ।

89.  *बिना शरीर की गंदगी* निकाले स्वास्थ्य शरीर की कल्पना निरर्थक है , मल-मूत्र से 5% , कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ने से 22 %, तथा पसीना निकलने लगभग 70 % शरीर से विजातीय तत्व निकलते हैं ।

90. *चिंता , क्रोध , ईष्या करने से गलत हार्मोन्स का निर्माण होता है जिससे कब्ज , बबासीर , अजीर्ण , अपच , रक्तचाप , थायरायड की समस्या उतपन्न होती है ।*

91.  *गर्मियों में बेल , गुलकंद , तरबूजा , खरबूजा व सर्दियों में सफ़ेद मूसली , सोंठ का प्रयोग करें ।*

92. *प्रसव* के बाद माँ का पीला दूध बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को 10 गुना बढ़ा देता है । बच्चो को टीके लगाने की आवश्यकता नहीं होती  है ।

93. *रात को सोते समय* सर्दियों में देशी मधु लगाकर सोयें त्वचा में निखार आएगा ।

94. *दुनिया में कोई चीज व्यर्थ नहीं , हमें उपयोग करना आना चाहिए*।

95. *जो अपने दुखों* को दूर करके दूसरों के भी दुःखों को दूर करता है , वही मोक्ष का अधिकारी है ।

96. *सोने से* आधे घंटे पूर्व जल का सेवन करने से वायु नियंत्रित होती है , लकवा , हार्ट-अटैक का खतरा कम होता है ।

97. *स्नान से पूर्व और भोजन के बाद पेशाब जाने से रक्तचाप नियंत्रित होता है*।

98 . *तेज धूप* में चलने के बाद , शारीरिक श्रम करने के बाद , शौच से आने के तुरंत बाद जल का सेवन निषिद्ध है ।

99. *त्रिफला अमृत है* जिससे *वात, पित्त , कफ* तीनो शांत होते हैं । इसके अतिरिक्त भोजन के बाद पान व चूना ।  देशी गाय का घी , गौ-मूत्र भी त्रिदोष नाश है ।

100. इस विश्व की सबसे मँहगी *दवा। लार* है , जो प्रकृति ने तुम्हें अनमोल दी है ,इसे ना थूके

शनिवार को करें ये उपाय, शनिदेव देतें है धन लाभ और वैभव

शनिवार को करें ये उपाय, शनिदेव देतें है धन लाभ और वैभव..

शनिवार को शनि और हनुमानजी का पूजन विशेष रूप से किया जाता है। ज्योतिष के अनुसार शनिदेव की कृपा पाने के लिए शनिवार श्रेष्ठ दिन है। इस दिन किए गए उपायों से शनि के दोष शांत हो सकते हैं। मान्यता है कि हनुमानजी के भक्तों को शनि के अशुभ फलों से मुक्ति मिलती है। इसी वजह से कई लोग शनिवार को हनुमानजी की पूजा करते है। ये उपाय हर शनिवार करने से हमारी परेशानियां दूर हो सकती हैं।

इन उपाय से भाग्य से जुड़ी परेशानियां दूर हो सकती हैं। यहां जानिए शनिवार को किए जाने वाले छोटे-छोटे उपाय...

1.सूर्यास्त के किसी ऐसे पीपल के पास दीपक जलाएं जो सुनसान स्थान पर हो या किसी मंदिर में स्थित पीपल के पास भी दीपक जला सकते हैं। इस उपाय से शनि के कारण धन संबंधी परेशानियां दूर होती हैं।

2. शनिवार को हनुमान मंदिर में तेल अर्पित करें और पूजन करें। शिवजी को नीले पुष्प चढ़ाएं।

3. पीपल को जल चढ़ाएं, तेल का दीपक जलाएं और पांच परिक्रमा करें।

4. शनिवार की सुबह दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर तेल का दान करें। इसके लिए एक कटोरी में तेल लें और उसमें अपना चेहरा देखें, फिर तेल का दान किसी सुपात्र व्यक्ति को करें।

5. हनुमानजी को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं। फिर हनुमान चालीसा का पाठ करें।

6. शनिवार की रात में रक्त चंदन से अनार की कलम से ‘ॐ हृीं’  को भोजपत्र पर लिखकर नित्य पूजा करने से विद्या और बुद्धि की प्राप्ति होती है। यह टोटका पढ़ाई करने वाले बच्चों के लिए लाभदायक होता है।

7. शनिवार को काले कुत्ते, काली गाय को रोटी और काली चिड़िया को दाना डालने से जीवन की रुकावटें दूर होती हैं। यह भी मान्यता है कि शनिवार को तेल से बने पदार्थ गरीबों को खिलाने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं।

8. शनिवार को संध्या काल में अपनी लंबाई के बराबर लाल रेशमी धागा नाप लें। अब इसे जल से धोकर आम के पत्ते पर लपेट दे। इस पत्ते और लपेटे हुए रेशमी धागे को अपनी मनोकामना का ध्यान करते हुए बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। इस उपाय से मनोकामना पूर्ति होती है।

9. शनि की साढ़ेसाती और ढय्या या अन्य कोई शनि दोष हो तो शनिवार को किसी भी पीपल के पेड़ के नीचे दोनों हाथों से स्पर्श करें। स्पर्श करने के साथ पीपल के पेड़ की पांच परिक्रमा करें और
‘ॐ शं शनैश्चराय नम:’ मन्त्र का जप करें।

10. शनि देव को प्रसन्न करने के लिए हनुमान जी की पूजा करना भी अच्छा उपाय है। प्रत्येक शनिवार को हनुमान चालीसा का एक बैठक में पांच बार पाठ करें। ऐसा करने से आप विपरीत परिस्थिति से सहेजता से निकल आते हैं।

11. शनिवार की संध्या काल में पीपल के पेड़ के नीचे चौमुखा दीपक सरसों के तेल का जलाने से धन, वैभव और यश में वृद्धि होती है। नौकरी करने वाले व्यक्ति की ऑफिस में स्थिति अच्छी होती है। वहीं व्यापार वाले के व्यापार में भी वृद्धि होती है।

12. शनिवार के दिन किसी भी चीज के बुरे फल को दूर करने के लिए काली चीजों जैसे उड़द की दाल, काला कपड़ा, काले तिल और काले चने को किसी गरीब को दान देने से शनिदेव की कृपा बनी रहती है।

13. शनिवार के दिन कुत्तों को सरसों का तेल लगी हुई रोटी खिलौने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। शनिदेव के प्रसन्न होने से जीवन में खुशहाली बनी रहती है।

ज्योतिषाचार्य

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