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गुरुवार, 3 अप्रैल 2025

अब वक़्फ़ संपत्तियों का सही इस्तेमाल होगा, और मुस्लिम समाज को इसका वास्तविक लाभ मिलेगा।

वक़्फ़ से मुस्लिम भी वाक़िफ़ नहीं हैं!

भारत में मुस्लिम समाज की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर हमेशा चर्चा होती है। यह कहा जाता है कि "मुस्लिम गरीब और मजलूम हैं," लेकिन क्या कभी किसी ने यह सोचा कि वक़्फ़ बोर्ड, जो अरबों-खरबों की संपत्ति का मालिक है, उसने अब तक मुस्लिम समाज के उत्थान के लिए क्या किया?

आज लोकसभा में वक़्फ़ संशोधन बिल पेश किया गया, और इस पर चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि खुद मुस्लिम समाज के लोग भी वक़्फ़ की असलियत से अंजान हैं।

क्या है वक़्फ़ बोर्ड?

वक़्फ़ की संपत्ति वह होती है, जिसे किसी मुस्लिम व्यक्ति द्वारा दान किया जाता है ताकि जरूरतमंदों और गरीबों की भलाई हो सके। लेकिन वक़्फ़ बोर्ड, जो कि इन संपत्तियों की देखरेख के लिए बना था, क्या उसने इस दान का सही इस्तेमाल किया?

आज भारत में वक़्फ़ बोर्ड अरबों की संपत्तियों का मालिक है, लेकिन आम मुस्लिम के जीवन में इसका कोई सकारात्मक प्रभाव क्यों नहीं दिखता?

क्या वक़्फ़ बोर्ड ने मुस्लिम समाज के लिए कुछ किया?

क्या वक़्फ़ बोर्ड ने गरीब मुस्लिम बच्चों के लिए उच्च स्तरीय स्कूल और कॉलेज बनाए?
क्या वक़्फ़ बोर्ड ने मुस्लिम महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कोई ठोस कदम उठाया?
क्या गरीब मुस्लिमों को मुफ्त इलाज के लिए वक़्फ़ बोर्ड ने अस्पताल बनाए?
जब मुस्लिम समुदाय के लोग किसी आपराधिक मामले में फंसते हैं, तो क्या वक़्फ़ बोर्ड उनकी मदद करता है?
क्या वक़्फ़ बोर्ड ने ट्रिपल तलाक़ से पीड़ित महिलाओं को कोई सहायता दी?

अगर इन सभी सवालों का जवाब "नहीं" है, तो फिर यह अरबों की संपत्ति आखिर जाती कहाँ है?

वक़्फ़ संपत्तियों की असली हकीकत!

❌ वक़्फ़ बोर्ड की अधिकांश संपत्तियों पर होटल, रिसॉर्ट और आलीशान इमारतें खड़ी कर दी गईं
❌ वक़्फ़ संपत्तियों से होने वाली आमदनी का कोई रिकॉर्ड नहीं और न ही इसका लाभ आम मुस्लिमों तक पहुंचता है
❌ वक़्फ़ बोर्ड ने गैर-मुस्लिमों को तो छोड़िए, खुद मुस्लिम समुदाय की भी कोई ठोस मदद नहीं की
❌ जब मुस्लिम समुदाय को किसी कानूनी सहायता की जरूरत होती है, तो वक़्फ़ बोर्ड चुप रहता है, लेकिन जमीयत उलेमा-ए-हिंद वकील मुहैया कराता है


#WaqfBoardAmendmentBill से क्या बदलेगा?

अब सरकार इस भ्रष्ट व्यवस्था पर लगाम लगाने जा रही है।

अब कोई सरकारी संपत्ति वक़्फ़ घोषित नहीं की जा सकेगी
अब कोई भी संपत्ति तभी वक़्फ़ मानी जाएगी, जब दान करने वाला कम से कम 5 साल से मुस्लिम हो
संपत्तियों का पंजीकरण अनिवार्य होगा और कलेक्टर उसकी देखरेख करेगा
वक़्फ़ बोर्ड के फैसलों को अब कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी
अब वक़्फ़ बोर्ड की संपत्तियों पर पारदर्शिता बढ़ेगी और उनका सही इस्तेमाल हो सकेगा

विपक्ष को इस बिल से इतनी दिक्कत क्यों हो रही है?

👉 239 विपक्षी सांसदों में सिर्फ 24 मुस्लिम हैं, लेकिन 215 हिंदू सांसद इस बिल का विरोध कर रहे हैं!
👉 1000 चर्च इस बिल का समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि वक़्फ़ बोर्ड से ईसाई समुदाय भी परेशान था
👉 अब वक़्फ़ बोर्ड में 2 मुस्लिम महिलाओं और 2 गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति होगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी
👉 विपक्ष और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस बदलाव से इसलिए घबरा रहे हैं, क्योंकि अब वक़्फ़ बोर्ड की संपत्तियों पर उनकी मनमानी नहीं चल पाएगी

अब समय है जागने का!

मुस्लिम समाज को अब यह सोचना चाहिए कि क्या वक़्फ़ बोर्ड वास्तव में उनके कल्याण के लिए काम कर रहा था, या फिर यह सिर्फ राजनीति का एक हिस्सा था?

अब वक़्फ़ संपत्तियों का सही इस्तेमाल होगा, और मुस्लिम समाज को इसका वास्तविक लाभ मिलेगा।





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बुधवार, 2 अप्रैल 2025

राजस्थान का ऐतिहासिक घुड़ला पर्व: सत्य जो अनजान है!

राजस्थान का ऐतिहासिक घुड़ला पर्व: सत्य जो अनजान है!
राजस्थान की भूमि वीरता, परंपरा और सांस्कृतिक धरोहरों से समृद्ध है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मारवाड़ में मनाया जाने वाला घुड़ला पर्व वास्तव में किस ऐतिहासिक घटना से जुड़ा है? यह सिर्फ एक पारंपरिक लोक उत्सव नहीं, बल्कि एक बलिदान और साहस की गाथा भी समेटे हुए है।

घुड़ला पर्व का पारंपरिक स्वरूप

हर साल होली के बाद, राजस्थान में कुंवारी कन्याएँ सिर पर मटका रखकर उसके अंदर दीप जलाकर गांव-गांव घूमती हैं और पारंपरिक गीत गाती हैं। यह पर्व विशेष रूप से गणगौर पूजा से जुड़ा हुआ माना जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि "घुड़ला" नाम कैसे पड़ा?

घुड़ला पर्व से जुड़ी ऐतिहासिक घटना

इतिहास के पन्नों में दबी एक कहानी यह बताती है कि "घुड़ला" वास्तव में कोई पर्व नहीं, बल्कि एक क्रूर मुगल सरदार घुड़ला खान से जुड़ा है। यह घटना जोधपुर के पीपाड़ क्षेत्र के पास बसे कोसाणा गांव की है।

गांव की 200 से अधिक कुंवारी कन्याएँ गणगौर पूजा करने तालाब पर गई थीं। तभी वहां से मुगल सरदार घुड़ला खान अपनी सेना के साथ गुजरा। उसकी गंदी नज़र उन कन्याओं पर पड़ी और उसने बलपूर्वक उनका अपहरण कर लिया। जिसने भी विरोध किया, उसे मौत के घाट उतार दिया।

जब यह खबर राव सातल सिंह राठौड़ को मिली, तो उन्होंने तुरंत अपनी सेना के साथ घुड़ला खान का पीछा किया और उसका सामना किया। युद्ध में राजपूतों की तलवारों ने मुगलों को पराजित कर दिया, और अंततः राव सातल सिंह ने घुड़ला खान का सिर धड़ से अलग कर दिया। लेकिन इस संघर्ष में वीर राव सातल सिंह भी वीरगति को प्राप्त हुए।

घुड़ला पर्व का वास्तविक अर्थ

गांव वालों ने कन्याओं को घुड़ला खान का सिर सौंप दिया। उन्होंने उस सिर को एक घड़े (मटके) में रखा और उसमें उतने छेद किए, जितने घाव घुड़ला खान के शरीर पर थे। फिर पूरे गांव में इसे घुमाया गया और प्रत्येक घर में दीप जलाकर न्याय और विजय का संदेश दिया गया। यही परंपरा धीरे-धीरे घुड़ला पर्व के रूप में स्थापित हो गई।

इतिहास से सबक लें!

समय के साथ इस घटना का वास्तविक अर्थ धुंधला होता गया और लोग अनजाने में इस पर्व को एक साधारण परंपरा के रूप में मनाने लगे। यह आवश्यक है कि हम अपने इतिहास को समझें और अपने वीरों को याद रखें। राव सातल सिंह जी का बलिदान भुलाया नहीं जाना चाहिए।

हमारी जिम्मेदारी

हमें अपने इतिहास को जानना और दूसरों तक पहुँचाना चाहिए ताकि कोई भी झूठी कथा हमारे वीरों के बलिदान को ढक न सके। आइए, इस बार घुड़ला पर्व पर इसके वास्तविक नायक को याद करें और दूसरों को भी इस ऐतिहासिक सत्य से अवगत कराएं।

#घुड़ला_पर्व #राजस्थान_का_इतिहास #वीर_राजपूत #राव_सातल_सिंह #मारवाड़ #सच्चा_इतिहास #HinduCulture #ProudToBeIndian

सोमवार, 31 मार्च 2025

देश बड़ा या धर्म?

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देश बड़ा या धर्म?

अगर मुझसे ये सवाल आज से 2 साल पहले पूछा गया होता तो देश बोलने में एक सेकेण्ड नहीं लगाता पर आज मैं 'धर्म' बोलने में देर नहीं करूँगा*।

*देश......*… *क्या है देश???*

जब तक आप इस देश में है *जब तक आप इस देश में सुरक्षित हैं* तभी तक तो है ये आपका देश।

देश तो ये तब भी कहलायेगा जब कोई इस देश पर कब्जा कर ले *और आपको भगा दे*… *लेकिन तब ये देश उस आक्रमणकारी का होगा* आपका नहीं।

मतलब साफ है जब तक देश में आपका राज है *तभी तक देश आपका है*।

देश बचता है धर्म से *......*…

जिस मजहब के लोगों के पास *एक भी देश नहीं था उसने सिर्फ धर्म पर अडिग रहकर 56 देश बना लिए* सवाल ये नहीं कि उनका मजहब खराब था या अच्छा।

जिसने धर्म से ज्यादा राष्ट्रीयता को महत्व दिया *उसके हाथ से देश निकल गया* हमारे हाथों से पाकिस्तान के रूप में, अफगानिस्तान के रूप में *देश का बड़ा भाग क्यों निकला???*

क्योंकि हम धार्मिक कम सेक्युलर ज्यादा हो गए *अगर हिंदू कट्टरवादी होते* अड़ जाते *लड़ जाते कि जान जायेगी* लेकिन दूसरे धर्म के लोगों को नहीं देंगे *अपनी जगह तब पाकिस्तान नहीं बनता*।

कैराना, कांधला, अलीगढ़, आसाम, कश्मीर आदि क्यों हिंदुओं के हाथ से निकला *क्योंकि उनके लिए देश पहले था धर्म नहीं* नतीजा धर्म भी गया और देश (स्थान) भी गया।

*अब दो सवाल है ......*…

*1- क्या पाकिस्तान में हिंदू धर्म है?*

*2- क्या पाकिस्तान हमारा देश रहा?*

यानिकि देश भी गया और धर्म भी गया *क्यों गया??*

क्योंकि भारत की तरफ से मोहनदास गांधी जवाहरलाल नेहरू जैसे एक जमात ने धर्म छोड़कर सेकुलरिज्म अपनाया।

*जबकि जिन्ना ने सिर्फ अपने धर्म की बात कहा* देश भी माँगा और वो भी धर्म के आधार पर माँगा *खून किया सब धर्म के लिए* नतीजा उसका सिर्फ धर्म ही नहीं बचा बल्कि और बढ़ा *साथ में देश भी पाया*।

हिंदू उल्टा करते हैं *देश के नाम पर धर्म छोड़ देते हैं* धर्म छोड़ते ही कमजोर हो जाते हैं *और इनके हाथ से धर्म तो जाता ही है* देश भी निकल जाता है।

मेरा पक्ष यही है *इस सवाल पर* आपका सहमत होना न होना आवश्यक नहीं है *बस सोच और दूरदृष्टि जरुरी है* अथवा पिछले 800 साल की *गुलामी की दास्तान.........🤔

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