रविवार, 23 अगस्त 2015

रक्षा बंधन का त्यौहार 29 अगस्त 2015 को मनाया जाएगा.

रक्षाबंधन 2015, 29 अगस्त
Rakshabandhan 2015, 29 August

इस वर्ष 2015 में रक्षा बंधन का त्यौहार 29 अगस्त, को मनाया जाएगा. पूर्णिमा तिथि का आरम्भ 10 अगस्त 2015 को 13:50 से 20:58 पर मनाया जाएगा. प्रात: काल से भद्रा व्याप्ति रहेगी. इसलिए शास्त्रानुसार यह त्यौहार 13:50 के बाद संपन्न किया जाए तो अच्छा रहेगा. परंतु परिस्थितिवश यदि भद्रा काल में यह कार्य करना हो तो भद्रा मुख को त्यागकर भद्रा पुच्छ काल में इसे करना चाहिए. इस कारण से अत्यंत आवश्यक होने पर 29 अगस्त को प्रात: 10:15 से 11:16 तक भद्रा पुच्छ काल में यह कार्य किया जा सकता है.

जब भी कोई कार्य शुभ समय में किया जाता है, तो उस कार्य की शुभता में वृ्द्धि होती है. भाई- बहन के रिश्ते को अटूट बनाने के लिये इस राखी बांधने का कार्य शुभ मुहूर्त समय में करना चाहिए.

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
Auspicious Muhurta for Rakshabandhan

इस वर्ष 2015 में रक्षा बंधन का त्यौहार 29 अगस्त, को मनाया जाएगा. पूर्णिमा तिथि का आरम्भ 29 अगस्त 2015 को हो जाएगा. परन्तु सुबह दोपहर 13:50 तक भद्रा व्याप्ति रहेगी. इसलिए शास्त्रानुसार यह त्यौहार 13:50 के बाद संपन्न किया जाए तो अच्छा रहेगा. परंतु परिस्थितिवश यदि भद्रा काल में यह कार्य करना हो तो भद्रा मुख को त्यागकर भद्रा पुच्छ काल में इसे करना चाहिए. इस कारण से अत्यंत आवश्यक होने पर 10 अगस्त को प्रात: 10:15 से 11:16 तक भद्रा पुच्छ काल में यह कार्य किया जा सकता है

सामान्यत: उतरी भारत जिसमें पंजाब, दिल्ली, हरियाणा आदि में प्रात: काल में ही राखी बांधने का शुभ कार्य किया जाता है. परम्परा वश अगर किसी व्यक्ति को परिस्थितिवश भद्रा-काल में ही रक्षा बंधन का कार्य करना हों, तो भद्रा मुख को छोड्कर भद्रा-पुच्छ काल में रक्षा - बंधन का कार्य करना शुभ रहता है. शास्त्रों के अनुसार में भद्रा के पुच्छ काल में कार्य करने से कार्यसिद्धि और विजय प्राप्त होती है. परन्तु भद्रा के पुच्छ काल समय का प्रयोग शुभ कार्यों के के लिये विशेष परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए.

बहन के प्रति भाईयों के दायित्वों का बोध कराने का पर्व
Festival of Auspicious Realationship of Sister and Brother

वेद शास्त्रों के अनुसार रक्षिका को आज के आधुनिक समय में राखी के नाम से जाना जाता है. रक्षा सूत्र को सामान्य बोलचाल की भाषा में राखी कहा जाता है. इसका अर्थ रक्षा करना, रक्षा को तत्पर रहना या रक्षा करने का वचन देने से है.

श्रावण मास की पूर्णिमा का महत्व इस बात से और बढ़ जाता है कि इस दिन पाप पर पुण्य, कुकर्म पर सत्कर्म और कष्टों के उपर सज्जनों का विजय हासिल करने के प्रयासों का आरंभ हो जाता है। जो व्यक्ति अपने शत्रुओं या प्रतियोगियों को परास्त करना चाहता है उसे इस दिन वरूण देव की पूजा करनी चाहिए.

दक्षिण भारत में इस दिन न केवल हिन्दू वरन् मुसलमान, सिक्ख और ईसाई सभी समुद्र तट पर नारियल और पुष्प चढ़ाना शुभ समझा जाता है नारियल को भगवान शिव का रुप माना गया है, नारियल में तीन आंखे होती है. तथा भगवान शिव की भी तीन आंखे है.

धागे से जुडे अन्य संस्कार
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हिन्दू धर्म में प्रत्येक पूजा कार्य में हाथ में कलावा ( धागा ) बांधने का विधान है. यह धागा व्यक्ति के उपनयन संस्कार से लेकर उसके अन्तिम संस्कार तक सभी संस्करों में बांधा जाता है. राखी का धागा भावनात्मक एकता का प्रतीक है. स्नेह व विश्वास की डोर है. धागे से संपादित होने वाले संस्कारों में उपनयन संस्कार, विवाह और रक्षा बंधन प्रमुख है।

पुरातन काल से वृक्षों को रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा है। बरगद के वृक्ष को स्त्रियां धागा लपेटकर रोली, अक्षत, चंदन, धूप और दीप दिखाकर पूजा कर अपने पति के दीर्घायु होने की कामना करती है। आंवले के पेड़ पर धागा लपेटने के पीछे मान्यता है कि इससे उनका परिवार धन धान्य से परिपूर्ण होगा।

वह भाइयों को इतनी शक्ति देता है कि वह अपनी बहन की रक्षा करने में समर्थ हो सके। श्रवण का प्रतीक राखी का यह त्यौहार धीरे-धीरे राजस्थान के अलावा अन्य कई प्रदेशों में भी प्रचलित हुआ और सोन, सोना अथवा सरमन नाम से जाना गया.

रक्षा बंधन पर इस वर्ष भद्रा का साया दोपहर 1:50 बजे से

भद्रा का साया दोपहर 1:50 बजे से बंधेगी राखी
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रक्षा बंधन पर इस वर्ष बहन को भाई की कलाई पर स्नेह की डोर बांधने के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। एक बार फिर भद्रा का साया रक्षा बंधन के पर्व पर पड़ा है। इसके चलते राखी बांधने के लिए शुभ समय दोपहर 1.50 बजे बाद होगा। श्रावणी पूर्णिमा पर इस बार श्रावण नक्षत्र भी नहीं रहेगा।
रक्षा बंधन का पर्व इस वर्ष 29 अगस्त शनिवार को मनाया जाएगा।
🚫भद्राकाल में राखी बांधना शास्त्रों में निषेध बताया गया है,
🍬राखी बांधने का शुभ समय : राखी बांधने के लिए मंगलकारी समय दोपहर 1.50 के बाद राखी बांधी जाएगी, राखी बांधने का श्रेष्ठ समय है।
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शुक्ल यजुर्वेद वाले ब्राह्मण दोपहर 01:50 के बाद जनेउ बदले.
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रक्षाबंधन यानी भाई -बहनके पवित्र रिश्तेका पवॅ, युं तो सभी रंग अच्छे है कींतु अगर राशि के अनुसार रंगकी राखी बांधी जाए तो वह विशेष लाभदायी होता है,
आईए जाने कोनसी राशि वाले को कोनसे रंगकी राखी बांधे .
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यदि आपके भाईकी मेष ( अ.ल.ई) राशि है तो उन्हें लाल
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रंग की राखी बांधे, यह व्यक्ति को उर्जा देगी.
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यदि आपके भाईकी राशि वृषभ (ब.व.उ) है तो उन्हें सफेद

रंगकी राखी बांधे , यह मानसिक शांति देगी.
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यदि आपके भाईकी राशि मिथुन (क.छ.घ) है तो उन्हें हरे

रंग की राखी बांधे, यह उनकी विचार शक्ति बढाएगी.
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यदि आपके भाईकी राशि ककॅ (ड.ह) है तो उन्हें चमकीले सफेद रंगकी

राखी बांधे, यह भावनात्मक रीश्ते को मजबुत बनाएगी.
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यदि आपके भाई की राशि सिंह (म.ट) है तो उन्हें गोल्डन पीले रंग
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या गुलाबी रंग की
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राखी बांधे, यह नेतृत्व प्रदान करेगी.
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यदि आपके भाई की राशि कन्या (प.ठ.ण) है तो उन्हें हरे रंगकी ❇ राखी बांधे, यह अच्छे परिणाम लाएगी.
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यदी आपके भाईकी राशि तुला (र.त) है तो उन्हें सफेद रंग

की राखी बांधे , यह न्याय करने की शक्ति प्रदान करेगी.
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यदि आपके भाई की राशि वृश्चिक (न.य) है तो उनके क्रोध को शांती एवम् रोगसे मुक्ति प्रदान करती है.
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यदि आपके भाईकी राशि धनु (भ.फ.ध) है तो उन्हें पीले रंग की
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राखी बांधे , यह उन्हें मानसिक शांति प्रदान करेगी.
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यदि आपके भाई की राशि मकर (ख.ज) है तो उन्हें नीले /ब्लु
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रंग की राखी बांधे, यह उन्हें कायॅमें सफलता प्रदान करेगी.
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यदि आपके भाई की राशि कुंभ ( ग.श.स) है तो उन्हें नीले / ब्लु रंग की
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राखी बांधे, यह उन्हें अच्छा व्यक्तित्व और मजबुत मनोबल प्रदान करेगी.
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यदि आपके भाई की राशि मीन (द.च) है तो उन्हें सुनहरे पीले रंग की
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राखी बांधे , यह उन्के मनको स्वस्थयता प्रदान करेगी.
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जीन भाईयोको अपनी बहन ना हो वह मित्रकी बहनसे या ब्राह्मणसे राखी बंधाए, और यदि कोई बहनको भाई ना हो तो वह श्री कृष्ण भगवानको राखी बांधे.

वैदिक रक्षाबंधन


वैदिक रक्षा-सूत्र ( रक्षाबंधन)

वैदिक रक्षाबंधन -
प्रतिवर्ष श्रावणी-पूर्णिमा को रक्षाबंधन का त्यौहार होता है, इस दिन बहनें अपने भाई को रक्षा-सूत्र बांधती हैं । यह रक्षा सूत्र यदि वैदिक रीति से बनाई जाए तो शास्त्रों में उसका बड़ा महत्व है ।

वैदिक रक्षा सूत्र बनाने की विधि :

इसके लिए ५ वस्तुओं की आवश्यकता होती है -
(१) दूर्वा (घास) (२) अक्षत (चावल) (३) केसर (४) चन्दन (५) सरसों के दाने ।

इन ५ वस्तुओं को रेशम के कपड़े में लेकर उसे बांध दें या सिलाई कर दें, फिर उसे कलावा में पिरो दें, इस प्रकार वैदिक राखी तैयार हो जाएगी ।

इन पांच वस्तुओं का महत्त्व -

(१) दूर्वा - जिस प्रकार दूर्वा का एक अंकुर बो देने पर तेज़ी से फैलता है और हज़ारों की संख्या में उग जाता है, उसी प्रकार मेरे भाई का वंश और उसमे सदगुणों का विकास तेज़ी से हो । सदाचार, मन की पवित्रता तीव्रता से बदता जाए । दूर्वा गणेश जी को प्रिय है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, उनके जीवन में विघ्नों का नाश हो जाए ।
(२) अक्षत - हमारी गुरुदेव के प्रति श्रद्धा कभी क्षत-विक्षत ना हो सदा अक्षत रहे ।
(३) केसर - केसर की प्रकृति तेज़ होती है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, वह तेजस्वी हो । उनके जीवन में आध्यात्मिकता का तेज, भक्ति का तेज कभी कम ना हो ।
(४) चन्दन - चन्दन की प्रकृति तेज होती है और यह सुगंध देता है । उसी प्रकार उनके जीवन में शीतलता बनी रहे, कभी मानसिक तनाव ना हो । साथ ही उनके जीवन में परोपकार, सदाचार और संयम की सुगंध फैलती रहे ।
(५) सरसों के दाने - सरसों की प्रकृति तीक्ष्ण होती है अर्थात इससे यह संकेत मिलता है कि समाज के दुर्गुणों को, कंटकों को समाप्त करने में हम तीक्ष्ण बनें ।

इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई एक राखी को सर्वप्रथम गुरुदेव के श्री-चित्र पर अर्पित करें । फिर बहनें अपने भाई को, माता अपने बच्चों को, दादी अपने पोते को शुभ संकल्प करके बांधे ।

महाभारत में यह रक्षा सूत्र माता कुंती ने अपने पोते अभिमन्यु को बाँधी थी । जब तक यह धागा अभिमन्यु के हाथ में था तब तक उसकी रक्षा हुई, धागा टूटने पर अभिमन्यु की मृत्यु हुई ।

इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई वैदिक राखी को शास्त्रोक्त नियमानुसार बांधते हैं हम पुत्र-पौत्र एवं बंधुजनों सहित वर्ष भर सूखी रहते हैं ।

रक्षा सूत्र बांधते समय ये श्लोक बोलें -

येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः ।
तेन त्वाम रक्ष बध्नामि, रक्षे माचल माचल: ।

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