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रविवार, 15 फ़रवरी 2026

शिवलिंग पर पैर लगाते एक व्यक्ति की तस्वीर सोशल मिडिया पर क्यों वायरल हो रही है?

 

शिवलिंग पर पैर लगाते एक व्यक्ति की तस्वीर सोशल मिडिया पर क्यों वायरल हो रही है?

जैसे ही खबर आई कि कोर्ट के आदेश पर बनी एक कमेटी की जांच में ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने में एक बड़ा शिवलिंग मिला है, सोशल मीड़िया पर तमाम तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कई नेताओं ने भी शिवलिंग का मजाक उड़ाया, एक प्रोफेसर ने भी ऐसा ही किया, पुलिस ने भी कई लोगों को इस मामले में जेल भेज दिया।

लेकिन एक ऐसी तस्वीर कई लोगों ने शिवलिंग की शेयर की, जो देखने में बेहद आपत्तिजनक लगती है। जिस भी शिव भक्त ने उसे देखा उसे गुस्सा आ रहा है, लेकिन चूंकि वो तस्वीर एडिट करके नहीं बनाई गई है, बल्कि मूर्ति रूप की भी तस्वीर है, सो लोग समझ नहीं पा रहे कि आखिर वो कौन होगा जिसने ये मूर्ति बनाई होगी। कोई ऐसा कैसे कर सकता है कि शिवलिंग पर पैर लगाते हुए व्यक्ति की मूर्ति बना सके?

सोशल मीडिया खासतौर पर ट्विटर व फेसबुक पर बहुत से लोगों ने इस तस्वीर को शेयर किया है, किसी में इसी मुद्रा में बनी मूर्तियों की फोटो है, तो कहीं किसी चित्रकार ने पेंटिंग की तरह बनाया है। इससे ये तो पता चलता है कि कई जगह कनप्पा की शिव लिंग को पैर लगाते हुए मूर्तियां भी हैं, अगर वाकई में ऐसा है तो आज तक कोई हंगामा क्यों नहीं हुआ? कोई नाराज क्यों नहीं होता? भगवा दल वाले क्यों इस पर ऐतराज नहीं करते?

इसका मतलब साफ है कि उनको पता है कि इसमें कुछ भी विवादित नहीं है।

संत कनप्पा उन 63 नयनार संतों में गिने जाते हैं, जो शिव के उपासक थे, व तीसरी से आठवीं शताब्दी के बीच हुए थे। जबकि अलवार संत विष्णु के उपासक थे। कनप्पा पेशे से शिकारी थे, जो बाद में संत बन गए। उनके भक्त मानते हैं कि वो पिछले जन्म में पांडवों में से एक अर्जुन थे। कनप्पा नयनार के कई नाम चलन में हैं, जैसे थिनप्पन, थिन्नन, धीरा, कन्यन, कन्नन आदि। माता पिता ने उनका नाम थिन्ना रखा था। आंध्र प्रदेश के राजमपेट इलाके में उनका जन्म हुआ था।

उनके पिता बड़े शिकारी थे और शिवभक्त थे, शिव के पुत्र कार्तिकेय को पूजते थे। कनप्पा श्रीकलहस्तीश्वरा मंदिर में वायु लिंग की पूजा करते थे, शिकार के दौरान उन्हें ये मंदिर मिला था। पांचवी सदी में बना इस मंदिर का बाहरी हिस्सा 11वीं सदी में राजेन्द्र चोल ने बनवाया था, बाद में विजय नगर साम्राज्य के राजाओं ने उसका जीर्णोद्धार करवाया।

लेकिन थिन्ना को पता नहीं था कि शिव भक्ति और पूजा के विधि विधान क्या है। किन नियमों का पालन करना है, लेकिन उनकी श्रद्धा अगाध थी। कहा ये तक जाता है कि वह पास की स्वर्णमुखी नदी से मुंह में पानी भरकर लाते थे और उससे शिवलिंग का जलाभिषेक करते थे, चूंकि शिकारी थे, सो जो भी उन्हें मिलता था, एक हिस्सा शिव को अर्पित कर देते थे, यहां तक कि एक बार सुअर का मांस भी।

लेकिन शिव अपने इस भक्त की आस्था को देखकर खुश थे, उनको पता था कि इसे पूजा करनी नहीं आती है, ना मंत्र पता हैं ना किसी तरह के विधि विधान। सैकड़ों सालों से ये कथा कनप्पा के भक्तों में प्रचलित है कि एक दिन महादेव ने उनकी परीक्षा लेने की ठानी और उन्होंने उस मंदिर में उस वक्त भूकंप के झटके दिए, जब मंदिर में बाकी साथियों, भक्तों और पुजारियों के साथ कनप्पा भी मौजूद थे।

जैसे ही भूकंप के झटके आए, लगा कि मानो मंदिर की छत गिरने वाली है, तो डर के मारे सभी भाग गए, भागे नहीं तो बस कनप्पा। उन्होंने ये किया कि अपने शरीर से शिव लिंग को पूरी तरह से ढक लिया ताकि कोई पत्थर अगर गिरे तो शिवलिंग के ऊपर ना गिरे बल्कि उनके ऊपर गिरे। इससे वह पूरी तरह सुरक्षित रहा।

शिवलिंग पर तीन आंखें बनी हुई थीं। जैसे ही भूकम्प के झटके थोड़ा थमे, कनप्पा ने देखा कि शिवलिंग पर बनी एक आंख से रक्त और आंसू एक साथ निकल रहे थे। उनकी समझ में आ गया कि किसी पत्थर से शिवजी की एक आंख घायल हो गई है। आव देखा ना ताव, कनप्पा ने फौरन अपनी एक आंख अपने एक वाण से निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी और उसे निकालकर शिवलिंग की आंख पर लगा दिया, जिससे उसमें से खून निकलना बंद हो गया। लेकिन थोड़ी देर बाद ही शिवलिंग की दूसरी आंख से रक्त और आंसुओं का निकलना शुरू हो गया।

तब कनप्पा ने जैसे ही दूसरी आंख निकालने की प्रक्रिया शुरू की, उनके दिमाग में आया कि जब मैं अपनी दूसरी आंख भी निकाल लूंगा तो बिलकुल अंधा हो जा जाऊंगा, ऐसे में मुझे कैसे दिखेगा कि उस आंख को शिवलिंग में कैसे लगाना है।

ऐसे में उन्हें एक उपाय सूझा, उन्होंने फौरन अपना एक पैर उठाया और पैर का अंगूठा ठीक उस आंख के पास लगा दिया, ताकि अंधा होने के बावजूद वो शिवजी की दूसरी आंख की जगह अपनी आंख लगा सके। उसी वक्त भगवान शिव प्रकट हुए और उससे खुश होकर उसकी आंखें एकदम ठीक कर दीं। यही वो घटना थी, जिसके चलते थिन्ना को नया नाम कनप्पा मिला था। इसी मौके की वो तस्वीर या मूर्तियां हैं, कि कैसे वह एक हाथ में वाण से आंख निकालेंगे, दूसरे हाथ से उसे पकड़ेंगे तो जहां से आंख निकालनी है, उस जगह को कैसे चिन्हित करेंगे, तो पैर का अंगूठा उस मासूम भक्त ने शिवलिंग पर रखा, इस काम के लिए था। लेकिन जितने भी लोग शेयर करे रहे हैं, चाहे वो देवदत्त पटनायक ही क्यों ना हो, किसी को ये नहीं बता रहे कि शिव भगवान ने उनकी भक्ति की परीक्षा ली थी और ये बस एक पल का वाकया था, ना कि रोज कनप्पा ऐसा किया करते थे। लेकिन इससे सच्चाई बाहर आ जाती और उनमें से बहुत से लोग ये चाहते भी नहीं।

"राष्ट्रहित सर्वोपरि" 💪💪

जय श्री राम 🙏

हर हर महादेव 🔱🙏🚩

पढ़िये सेंधा नमक की हकीकत...

 

सेंधा नमक के साथ कैसे गायब कर दिया गया...

आप सोच रहे होंगे की ये सेंधा नमक बनता कैसे है ??

आइये आज हम आपको बताते है कि नमक मुख्यत: कितने प्रकार का होता है। एक होता है समुद्री नमक, दूसरा होता है सेंधा नमक "rock salt" सेंधा नमक बनता नहीं है पहले से ही बना बनाया है।

पूरे उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप में खनिज पत्थर के नमक को 'सेंधा नमक' या 'सैन्धव नमक', लाहोरी नमक आदि आदि नाम से जाना जाता है जिसका मतलब है 'सिंध या सिन्धु के इलाक़े से आया हुआ'। वहाँ नमक के बड़े बड़े पहाड़ है सुरंगे है । वहाँ से ये नमक आता है। मोटे मोटे टुकड़ो मे होता है आजकल पीसा हुआ भी आने लगा है यह ह्रदय के लिये उत्तम, दीपन और पाचन मे मदद रूप, त्रिदोष शामक, शीतवीर्य अर्थात ठंडी तासीर वाला, पचने मे हल्का है ।

इससे पाचक रस बढ़ते हैं। अतः आप ये समुद्री नमक के चक्कर से बाहर निकले। काला नमक ,सेंधा नमक प्रयोग करे, क्यूंकि ये प्रकृति का बनाया है,

सेंधा नमक के फ़ायदे:-

सेंधा नमक के उपयोग से रक्तचाप और बहुत ही गंभीर बीमारियों पर नियन्त्रण रहता है क्योंकि ये अम्लीय नहीं ये क्षारीय है (alkaline) क्षारीय चीज जब अमल मे मिलती है तो वो न्यूटल हो जाता है और रक्त अमलता खत्म होते ही शरीर के 48 रोग ठीक हो जाते हैं, ये नमक शरीर मे पूरी तरह से घुलनशील है ।

और सेंधा नमक की शुद्धता के कारण आप एक और बात से पहचान सकते हैं कि उपवास ,व्रत में सब सेंधा नमक ही खाते है। तो आप सोचिए जो समुद्री नमक आपके उपवास को अपवित्र कर सकता है वो आपके शरीर के लिए कैसे लाभकारी हो सकता है ??

सेंधा नमक शरीर में 97 पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है ! इन पोषक तत्वों की कमी ना पूरी होने के कारण ही लकवे (paralysis) का अटैक आने का सबसे बडा जोखिम होता है सेंधा नमक के बारे में आयुर्वेद में बोला गया है कि यह आपको इसलिये खाना चाहिए क्योंकि सेंधा नमक वात, पित्त और कफ को दूर करता है।

यह पाचन में सहायक होता है और साथ ही इसमें पोटैशियम और मैग्नीशियम पाया जाता है जो हृदय के लिए लाभकारी होता है। यही नहीं आयुर्वेदिक औषधियों में जैसे लवण भास्कर, पाचन चूर्ण आदि में भी प्रयोग किया जाता है।

समुद्री नमक के भयंकर नुकसान :-

ये जो समुद्री नमक है आयुर्वेद के अनुसार ये तो अपने आप में ही बहुत खतरनाक है! क्योंकि कंपनियाँ इसमें अतिरिक्त आयोडीन डाल रही है। अब आयोडीन भी दो तरह का होता है एक तो भगवान का बनाया हुआ जो पहले से नमक में होता है ।

दूसरा होता है "industrial iodine" ये बहुत ही खतरनाक है। तो समुद्री नमक जो पहले से ही खतरनाक है उसमे कंपनिया अतिरिक्त industrial iodine डाल को पूरे देश को बेच रही है। जिससे बहुत सी गंभीर बीमरियां हम लोगों को आ रही है । ये नमक मानव द्वारा फ़ैक्टरियों में निर्मित है।

आम तौर से उपयोग मे लाये जाने वाले समुद्री नमक से उच्च रक्तचाप (high BP ) ,डाइबिटीज़, आदि गंभीर बीमारियो का भी कारण बनता है । इसका एक कारण ये है कि ये नमक अम्लीय (acidic) होता है । जिससे रक्त अम्लता बढ़ती है और रक्त अमलता बढ्ने से ये सब 48 रोग आते है । ये नमक पानी कभी पूरी तरह नहीं घुलता हीरे (diamond ) की तरह चमकता रहता है इसी प्रकार शरीर के अंदर जाकर भी नहीं घुलता और अंत इसी प्रकार किडनी से भी नहीं निकल पाता और पथरी का भी कारण बनता है ।

रिफाइण्ड नमक में 98% सोडियम क्लोराइड ही है शरीर इसे विजातीय पदार्थ के रुप में रखता है। यह शरीर में घुलता नही है। इस नमक में आयोडीन को बनाये रखने के लिए Tricalcium Phosphate, Magnesium Carbonate, Sodium Alumino Silicate जैसे रसायन मिलाये जाते हैं जो सीमेंट बनाने में भी इस्तेमाल होते है।

विज्ञान के अनुसार यह रसायन शरीर में रक्त वाहिनियों को कड़ा बनाते हैं, जिससे ब्लाक्स बनने की संभावना और आक्सीजन जाने में परेशानी होती है। जोड़ो का दर्द और गठिया, प्रोस्टेट आदि होती है। आयोडीन नमक से पानी की जरुरत ज्यादा होती है, एक ग्राम नमक अपने से 23 गुना अधिक पानी खींचता है। यह पानी कोशिकाओं के पानी को कम करता है, इसी कारण हमें प्यास ज्यादा लगती है।

आप इस अतिरिक्त आयोडीन युक्त समुद्री नमक खाना छोड़िए और उसकी जगह सेंधा नमक खाइये !! सिर्फ आयोडीन के चक्कर में समुद्री नमक खाना समझदारी नहीं है, क्योंकि जैसा हमने ऊपर बताया आयोडीन हर नमक में होता है सेंधा नमक में भी आयोडीन होता है बस फर्क इतना है इस सेंधा नमक में प्रकृति के द्वारा बनाया आयोडीन होता है इसके इलावा आयोडीन हमें आलू, अरवी के साथ-साथ हरी सब्जियों से भी मिल जाता है।

तिल के तेल के चमत्कारी अद्भुत गुण...

 तिल के तेल के बारे में आपने बहुत कम सुना होगा। पता है क्यों...??



तिल के तेल का प्रचार कंपनियाँ इसलिए नहीं करती क्योंकि इसके गुण जान लेने के बाद आप उनके द्वारा बेचा जाने वाला तरल चिकना पदार्थ जिसे वह तेल कहते हैं, आप एकदम लेना बंद कर देंगे और उनकी दुकान बंद हो जायेगी।

जानिये तिल के तेल के चमत्कारी अद्भुत गुण...

(1). तिल के तेल में इतनी ताकत होती है कि यह पत्थर को भी चीर देता है!

प्रयोग करके देखें....
आप पर्वत का पत्थर लीजिए और उसमे कटोरी के जैसा खडडा बना लिजिए, उसमे पानी, दूध, घी या तेजाब संसार में कोई सा भी कैमिकल, एसिड डाल दीजिए, पत्थर वैसा का वैसा ही रहेगा, कही नहीं जायेगा...

लेकिन अगर आप ने उस कटोरी नुमा पत्थर में तिल का तेल डाल दिया तो...

उस खड्डे में भर दीजिये..
2 दिन बाद आप देखेंगे कि तिल का तेल पत्थर के अन्दर भी प्रवेश करके, पत्थर के नीचे आ जायेगा।
यह होती है तिल के तेल की ताकत.!

इस तेल की मालिश करने से, ये हड्डियों में प्रवेश करता हुआ, हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है।

तिल के तेल के अन्दर फास्फोरस होता है जो कि हड्डियों की मजबूती का अहम भूमिका अदा करता है।

तिल का तेल ऐसी वस्तु है जो अगर कोई भी भारतीय चाहे तो थोड़ी सी मेहनत के बाद आसानी से प्राप्त कर सकता है।

तेल शब्द की व्युत्पत्ति तिल शब्द से ही हुई है।
जो तिल से निकलता वह है तैल अर्थात तेल का असली अर्थ ही है "तिल का तेल"

तिल के तेल का सबसे बड़ा गुण यह है कि यह शरीर के लिए औषधि का काम करता है..

चाहे आपको कोई भी रोग हो यह उससे लड़ने की क्षमता शरीर में विकसित करना आरंभ कर देता है।
यह गुण इस पृथ्वी के अन्य किसी खाद्य पदार्थ में नहीं पाया जाता।

सौ ग्राम सफेद तिल से 1000 मिलीग्राम कैल्शियम प्राप्त होता हैं।

बादाम की अपेक्षा तिल में छः गुना से भी अधिक कैल्शियम है।

काले और लाल तिल में लौह तत्वों की भरपूर मात्रा होती है जो रक्तअल्पता के इलाज़ में कारगर साबित होती है।

तिल में उपस्थित लेसिथिन नामक रसायन कोलेस्ट्रोल के बहाव को रक्त नलिकाओं में बनाए रखने में मददगार होता है।

तिल के तेल में प्राकृतिक रूप में उपस्थित सिस्मोल एक ऐसा एंटी-ऑक्सीडेंट है जो इसे ऊँचे तापमान पर भी बहुत जल्दी खराब नहीं होने देता।

आयुर्वेद चरक संहिता में इसे पकाने के लिए सबसे अच्छा तेल माना गया है।

तिल में विटामिन-सी छोड़कर वे सभी आवश्यक पौष्टिक पदार्थ होते हैं जो अच्छे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं।
तिल विटामिन-बी और आवश्यक फैटी एसिड्स से भरपूर है।

इसमें मीथोनाइन और ट्रायप्टोफन नामक दो बहुत महत्त्वपूर्ण एमिनो एसिड्स होते हैं जो चना, मूँगफली, राजमा जैसे अधिकांश शाकाहारी खाद्य पदार्थों में नहीं होते।

ट्रायोप्टोफन को शांति प्रदान करने वाला तत्व भी कहा जाता है जो गहरी नींद लाने में सक्षम है।

यही त्वचा और बालों को भी स्वस्थ रखता है।

मीथोनाइन लीवर को दुरुस्त रखता है और कॉलेस्ट्रोल को भी नियंत्रित रखता है।

तिल का बीज स्वास्थ्यवर्द्धक वसा का बड़ा स्त्रोत है जो चयापचय को बढ़ाता है।

यह कब्ज भी नहीं होने देता।

तिल के बीजों में उपस्थित पौष्टिक तत्व, जैसे कैल्शियम और आयरन त्वचा को कांतिमय बनाए रखते हैं।

तिल में न्यूनतम सैचुरेटेड फैट होते हैं इसलिए इससे बने खाद्य पदार्थ उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद कर सकता है।

सीधा अर्थ यह है की यदि आप नियमित रूप से शुद्ध तिल के तेल का सेवन करते हैं तो आप के बीमार होने की संभावना ही ना के बराबर रह जाएगी।

जब शरीर बीमार ही नही होगा तो उपचार की भी आवश्यकता नही होगी।
यही तो आयुर्वेद है..

आयुर्वेद का मूल सिद्धांत यही है कि उचित आहार विहार से ही शरीर को स्वस्थ रखिए ताकि शरीर को औषधि की आवश्यकता ही ना पड़े।

तिल में मोनो-सैचुरेटेड फैटी एसिड होता है जो शरीर से बैड कोलेस्ट्रोल को कम करके गुड कोलेस्ट्रोल यानि एच.डी.एल. (HDL) को बढ़ाने में मदद करता है।

यह हृदय रोग, दिल का दौरा और धमनी कलाकाठिन्य या एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) के संभावना को कम करता है।






कैंसर से सुरक्षा प्रदान करता है...
तिल में सेसमीन (Sesamin) नाम का एन्टीऑक्सिडेंट (Anti Oxidant) होता है जो कैंसर के कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ है और उसके जीवित रहने वाले रसायन के उत्पादन को भी रोकने में मदद करता है।

यह फेफड़ों का कैंसर, पेट के कैंसर, ल्यूकेमिया, प्रोस्टेट कैंसर, स्तन कैंसर और अग्नाशय के कैंसर के प्रभाव को कम करने में बहुत मदद करता है।

तनाव को कम करता है...
इसमें नियासिन (Niacin) नाम का विटामिन होता है जो तनाव और अवसाद को कम करने में मदद करता है।

हृदय के मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में मदद करता है-
तिल में ज़रूरी मिनरल जैसे कैल्सियम, आयरन, मैग्नेशियम, जिन्क, और सेलेनियम होता है जो हृदय के मांसपेशियों को सुचारू रूप से काम करने में मदद करता है और हृदय को नियमित अंतराल में धड़कने में मदद करता है।

शिशु के हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है-
तिल में डायटरी प्रोटीन और एमिनो एसिड होता है जो बच्चों के हड्डियों के विकसित होने में और मजबूती प्रदान करने में मदद करता है।

उदाहरणस्वरूप 100 ग्राम तिल में लगभग 18 ग्राम प्रोटीन होता है, जो बच्चों के विकास के लिए बहुत ज़रूरी होता है।

गर्भवती महिला और भ्रूण (Foetus) को स्वस्थ रखने में मदद करता है-
तिल में फोलिक एसिड होता है जो गर्भवती महिला और भ्रूण के विकास और स्वस्थ रखने में मदद करता है।

आयुर्वेद के अनुसार इस तेल से मालिश करने पर शिशु आराम से सोते हैं।

अस्थि-सुषिरता या ओस्टीयोपोरोसिस (Osteoporosis) से लड़ने में मदद करता है-

तिल में जिन्क और कैल्शियम होता है जो अस्थि-सुषिरता से संभावना को कम करने में मदद करता है।

मधुमेह के दवाईयों को प्रभावकारी बनाता है-
डिपार्टमेंट ऑफ बायोथेक्सनॉलॉजी विनायक मिशन यूनवर्सिटी, तमिलनाडु के अध्ययन के अनुसार यह उच्च रक्तचाप को कम करने के साथ साथ इसका एन्टी ग्लिसेमिक प्रभाव रक्त में ग्लूकोज़ के स्तर को 36%कम करने में मदद करता है।
जब यह मधुमेह विरोधी दवा ग्लिबेक्लेमाइड (Glibenclamide) से मिलकर काम करता है।
इसलिए टाइप-2 मधुमेह (Type 2 diabetic) रोगी के लिए यह मददगार साबित होता है।

दूध के तुलना में तिल में तीन गुना कैल्शियम रहता है।
इसमें कैल्शियम, विटामिन-बी और ई, आयरन और ज़िंक, प्रोटीन की भरपूर मात्रा रहती है और कोलेस्टरोल बिल्कुल नहीं रहता है।

तिल का तेल ऐसा तेल है, जो सालों तक खराब नहीं होता है, यहाँ तक कि गर्मी के दिनों में भी वैसा का वैसा ही रहता है।

तिल का तेल कोई साधारण तेल नहीं है।
इसकी मालिश से शरीर काफी आराम मिलता है।



यहां तक कि लकवा जैसे रोगों तक को ठीक करने की क्षमता रखता है।

विभिन्न रोगों के लक्षणों के आधार पर नक्स वोमिका औषधि का उपयोग-

 नक्स वोमिका Nux Vomica

परिचय-
जो लोग गलत लोगों के हाथों में पड़कर अपने स्वास्थ्य को बर्बाद कर लेते है उनके लिए नक्स वोमिका औषधि बहुत ही उपयोगी साबित होती है। इसके अलावा ऐसे लोग जो जरा-जरा सी बातों में गुस्से होने लगते है, दूसरे लोगों से जलने लगते हैं आदि इस तरह के मानसिक रोगों में भी औषधि लाभकारी सिद्ध होती है। विभिन्न रोगों के लक्षणों के आधार पर नक्स वोमिका औषधि का उपयोग-

मन से सम्बंधित लक्षण- रोगी का बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा हो जाना, किसी से ढंग से बात न करना, रोशनी में आते ही डरने लग जाना, किसी के जरा सा भी छूने से डरने लगना, रोगी का समय बीत न पाना, दूसरों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करना, हर समय दूसरों की बुराई करते रहना आदि मानसिक रोगों के लक्षणों में रोगी को नक्सवोमिका औषधि देने से लाभ होता है।

सिर से सम्बंधित लक्षण- सिर के पीछे के हिस्से में दर्द होना, आंखों के ऊपर दर्द महसूस होना, सिर के घूमने के कारण चक्कर आना, हर समय बेहोशी सी छाई हुए रहना, सुबह के समय, दिमागी काम करने से, नशीले पदार्थों का सेवन करने से, कॉफी पीने से, खुली हवा में सिर का दर्द तेज हो जाना, कपाल के ऊपर के भाग में इस तरह का दर्द होना जैसे कि कोई कील घुसेड़ रहा हो, सिर में खून जमा होने के कारण दर्द होना, बहुत तेज धूप में निकलते ही सिर में दर्द होना, भोजन करने के बाद सिर में दर्द सा महसूस होना जैसे लक्षणों के आधार पर नक्सवोमिका औषधि काफी उपयोगी साबित होती है।


आंखों से सम्बंधित लक्षणं- रोगी के रोशनी में आते ही आंखों का बंद हो जाना, आंखों के अन्दर के कोणों में चीस सी मारती हुई महसूस होना, आंखों से हर समय पानी सा निकलते रहना, निम्न अक्षिगहर का स्नायुशूल, नशीले पदार्थो का सेवन करने से अक्षिस्नायु का शोष, आंखों की पेशियों का आंशिक पक्षाघात, नेत्रकोटकों में फड़कन जो सिर के पीछे के हिस्से में फैल जाता है, अक्षितन्त्रिकाशोथ आदि आंखों के रोगों के लक्षणों में रोगी को नक्सवोमिका औषधि का सेवन कराना लाभदायक रहता है।


कान से सम्बंधित लक्षण- कम्बुकर्णीनली से होकर कान में होने वाली खुजली, कान की नली का सूखना और नाजुक होना, कान में दर्द जो सोने से और तेज हो जाता है, कान की तन्त्रिकाओं की अतिसंवेदिता, ज्यादा शोर-शराबे के कारण कान में दर्द सा हो जाना आदि लक्षणों में रोगी को नक्स वोमिका औषधि का उपयोग करना काफी उपयोगी साबित होता है।


नाक से सम्बंधित लक्षण- रात को सोते समय रोगी की नाक का बंद हो जाना, ज्यादा ठण्डी हवा लगने के कारण नाक बंद हो जाना और दम सा घुटता हुआ महसूस होना, किसी तरह की गंध महसूस होने से बेहोशी छा जाना, सर्दी-जुकाम होने के कारण नाक से पानी आते रहना, सुबह के समय नाक से खून का निकलते रहना, नाक के बंद होने के साथ तीखा सा स्राव होना आदि लक्षणों में रोगी को नक्स वोमिका औषधि का सेवन कराना लाभदायक रहता है।


सांस से सम्बंधित लक्षण- रोगी को सूखी स्नायविक उदासी लाने वाली खांसी, बिस्तर पर लेटने के बाद शरीर के गर्म हो जाने पर खांसी शुरू हो जाना, बाहर से एकदम गर्मी से आने पर नहाने से, ज्यादा ठण्डी हवा में रहने से खांसी होने लगती है, भोजन करने के बाद या कुछ पीने के बाद खांसी शुरू हो जाना, स्त्री को गर्भाकाल के दौरान खांसी होना, आदि लक्षणों में रोगी को नक्स वोमिका औषधि का प्रयोग कराने से आराम मिलता है।


मुंह से सम्बंधित लक्षण- जबड़ों का सिकुड़ जाना, मुंह के छोटे-छोटे से छाले हो जाना, लार के साथ खून का आना, जीभ के सामने का भाग बिल्कुल साफ नज़र आना लेकिन पीछे के भाग में गाढ़ा सा लेप छाए हुए रहना, दांतों में दर्द सा होना जो पदार्थों को पीने से ज्यादा दर्द होता है, मसूढ़ों का सूज जाना आदि मुंह के रोगों के लक्षणों में रोगी को नक्स वोमिका औषधि देने से आराम मिलता है।


गले से सम्बंधित लक्षण- सुबह के समय जागने पर गले में सुरसुराहट होना, गला के अन्दर ऐसा महसूस होना जैसे कि किसी ने गले को खुरेंच दिया हो, भोजन करने की नली का सिकुड़ जाना, गले के अन्दर की टांसिल का सूज जाना, कानों में किसी चीज के चुभने जैसा दर्द होना आदि लक्षणों के आधार पर रोगी को नक्स वोमिका औषधि का प्रयोग कराना लाभदायक रहता है।


आमाशय से सम्बंधित लक्षण- मुंह का स्वाद खट्टा सा होना, सुबह के समय भोजन करने के बाद जी का मिचलाना, आमाशय का भारी सा लगने के साथ दर्द होना, पेट का फूल जाना, मुंह के अन्दर पानी का ज्यादा बनना, खट्टी और कड़वी डकारें आना, जी मिचलाने और उल्टी होने के साथ बहुत ज्यादा उबकाइयां आना, बहुत तेज भूख लगना, उत्तेजक पदार्थों का सेवन करने का मन करना, तेज कॉफी पीने के कारण बदहजमी का रोग हो जाना, रोगी को ऐसा लगता है जैसे उसे उल्टी हो रही हो लेकिन उसे उल्टी नहीं आती। इस तरह के लक्षणों में रोगी को नक्स वोमिका औषधि का प्रयोग कराना उपयोगी रहता है।


पुरुष रोगों से सम्बंधित लक्षण- अचानक यौन उत्तेजना का तेज होना, स्त्रियों के साथ ज्यादा संभोगक्रिया करने के कारण वीर्य की कमी हो जाना, ज्यादा संभोगक्रिया करने के कारण रोग होना, अण्डकोषों में सिकुड़न के साथ दर्द होना, अण्डकोष में सूजन आना, स्वप्नदोष होना, पीठ में दर्द होना, रीढ़ की हड्डी में जलन होना, रोगी को कमजोरी और चिड़चिड़ापन आना आदि लक्षणों के आधार पर रोगी को नक्स वोमिका औषधि देने से लाभ मिलता है।


स्त्री रोगों से सम्बंधित लक्षण- स्त्रियों का मासिकस्राव समय से पहले आ जाना और काफी समय तक आते रहना, गर्भाशय का छिल जाना, मासिकधर्म का कष्ट के साथ आना, त्रिकास्थि में दर्द और मलक्रिया की इच्छा होना, बार-बार पेशाब का आना, यौन उत्तेजना का बहुत तेज होना, खूनी प्रदर (योनि में से पानी आना) होने के साथ ही मलत्याग होने जैसा महसूस होना, निष्फल प्रसव वेदना जो मलान्त्र तक फैल जाती है आदि स्त्री रोगों के लक्षणों में रोगी को नक्स वोमिका औषधि का सेवन कराने से लाभ होता है।


पीठ से सम्बंधित लक्षण- कमर में बहुत तेजी से दर्द का होना, रीढ़ की हड्डी में जलन सी महसूस होना जो रात को 3 बजे से 4 बजे तक ज्यादा होता है, ग्रीवाप्रगण्ड प्रदेशीय स्नायुशूल जो छूने से ज्यादा होता है, सोते समय करवट बदलने के लिए उठकर बैठना पड़ता है, स्कंधफलकों के नीचे कुचल जाने जैसा दर्द होना, बैठने पर दर्द होना जैसे लक्षणों में रोगी को नक्स वोमिका औषधि का प्रयोग कराना लाभकारी रहता है।


शरीर के बाहरी अंगों से सम्बंधित लक्षण- रोगी के हाथ और बाजू सो जाते हैं, बांहों का आंशिक पक्षाघात के साथ झटके लगना, टांगों के सुन्न हो जाने के कारण रोगी को ऐसा लगता है जैसे कि उसे लकवा मार गया हो, पिण्डलियों और तलुवों में जलन होना, चलते समय घुटनों में कड़कड़ाहट होना और पैरों को घसीटकर चलना, सुबह के समय पैरों और बांहों में अचानक कमजोरी आ जाना महसूस होना आदि लक्षणों में रोगी को नक्स वोमिका औषधि देना बहुत उपयोगी होता है।


नींद से सम्बंधित लक्षण- रोगी को रात के 3 बजे से सुबह तक नींद का न आना, सुबह के समय जागने पर रोगी खुद को बहुत दुखी मानता है, सोने के बाद दौड़-धूप और व्यस्तताओं के सपने आना, थोड़ी देर सोने के बाद, न जगाने पर आराम आदि लक्षणों के आधार पर रोगी को नक्स वोमिका औषधि देने से लाभ मिलता है।


बुखार से सम्बंधित लक्षण- बुखार के लक्षणों में रोगी को सबसे पहले ठण्ड लगनी लगती है, बहुत ज्यादा ठण्ड लगने के साथ ही रोगी के नाखून भी नीले पड़ जाते है, पूरा बदन टूटा-टूटा सा लगना, बुखार आने पर कभी तो रोगी को इतनी ठण्ड लगती है कि वह चाहता है कि उस पर बहुत सारे कपड़े डाल दिये जाए और कभी इतनी गर्मी लगती है कि वह अपने शरीर के सारे कपड़े हटा देता है, शरीर के एक ओर खट्टा पसीना आता है आदि लक्षणों के आधार पर रोगी को नक्स वोमिका औषधि का सेवन कराने से लाभ होता है।


चर्म (त्वचा) से सम्बंधित लक्षण- चर्मरोगों के लक्षणों में रोगी को अपना शरीर जलता हुआ सा महसूस होता है खासकर से चेहरा फिर भी वह बिना कपड़ों के नहीं रह सकता, चेहरे के मुहांसे, त्वचा पर छोटे-छोटे से लाल-लाल दाने निकलना, पेट के खराब होने के कारण निकलने वाली छपाकी। इन लक्षणों के रोगी में नज़र आने पर अगर उसे नक्स वोमिका औषधि दी जाए तो काफी लाभ होता है।

वृद्धि- 
दिमागी मेहनत करने से, सुबह के समय, भोजन करने के बाद या ज्यादा भोजन करने से, किसी तरह की हरकत करने से, जरा सा छूने से, खुली हवा में, खुश्क मौसम में, ज्यादा शोर-शराबे से, गुस्सा करने से, ज्यादा तेज मसालों से, नशा करने से, ठण्डी हवा से रोग बढ़ जाता है।

शमन-
शाम के वक्त, स्थिर रहने से, लेटने से और भीगे मौसम में रोग कम हो जाता है।

पूरक-
सल्फर, सीपि।

प्रतिकूल-
जिंक।

तुलना-
नक्स वोमिका औषधि की तुलना स्ट्रिकूनिया, काली-कार्बो, हाइड्रै, ब्रायो, लाइको, ग्रैफाइ से की जा सकती है।

प्रतिविष-
काफि, इग्ने, काक्कूल औषधियों का उपयोग नक्स वोमिका औषधि के हानिकारक प्रभाव को नष्ट करने के लिए किया जाता है।

मात्रा-
नक्स वोमिका औषधि रोगी को उसके रोग के लक्षणों के अनुसार पहली से तीसवीं शक्ति तक और उससे ऊंची शक्ति तक देने से लाभ होता है।

जानकारी-
अगर नक्स वोमिका औषधि रोगी को शाम के समय दी जाए तो उसका असर सबसे अच्छा होता है। 

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“बलगम का दुश्मन” - ग्रिंडेलिया रोबस्टा क्यू (Grindelia Robusta Q)

 होम्योपैथिक दवा(Grindelia Robusta Q) ग्रिंडेलिया रोबस्टा क्यू  और इसकी पोटेंसी। 
                                                

ठंड का मौसम, इस मौसम में बलगम चिपचिपा, सांस रुकना, घरघराहट ब्रोंकाइटिस और दमा लोगों को बहुत परेशान करती है। इसलिए आज हम बलगम घोलने की रामबाण दवा ग्रिंडेलिया रोबस्टा क्यू (Grindelia Robusta Q) के बारे में संक्षिप्त लेकिन विस्तृत उपयोग-फायदे के साथ बात करेंगे। इसे गमवीड (Gumweed) भी कहते हैं। यह दवा अमेरिका के सूखे मैदानों में उगने वाले ग्रिंडेलिया पौधे की ताजी पत्तियों और फूलों से बनती है। होम्योपैथी में इसे “बलगम का दुश्मन” कहा जाता है। ध्यान रहे दवा इस्तेमाल से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

Grindelia Q क्या है?
एक होम्योपैथिक मदर टिंक्चर, Grindelia robusta के ताजे फूल और पत्ते से। मुख्य कंपाउंड: ग्रिंडेलिक एसिड, रेजिन, टैनिन – (बलगम घोलते हैं)।

उत्पत्ति और इतिहास-
अमेरिकी इंडियंस इसे अस्थमा और खांसी में धुआं करते थे। होम्योपैथी में डॉ. हेल ने प्रूविंग्स किए। बोरिक मेटेरिया मेडिका: “बलगम चिपकना, सांस रुकना”।

कैसे बनती है?
ताजे पौधे को 70% अल्कोहल में 1:10 में 14 दिन भिगोए रखने से Q तैयार होता है। फिर 3X, 6C, 30C।

उपयोग और फायदे 
बलगम चिपचिपा (Tenacious Mucus): ब्रोंकाइटिस, सांस में रैटलिंग।
Q: 10 बूंदें दिन में 3 बार → 75% मरीजों में बलगम निकला (Homeopathy Journal 2022)।

अस्थमा (Wheezing): सोते समय सांस रुकना।
6C: हर 30 मिनट अटैक में → 70% घरघराहट बंद।

क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस: बुजुर्गों में सांस चढ़ना।
30C: दिन में 2 बार → ऑक्सीजन लेवल सुधरा।

स्लीप एप्निया जैसा: सोते ही दम घुटना।
Q: 15 बूंदें रात को → नींद में सांस खुली।

हूपिंग कफ: बच्चों में जोरदार खांसी।
6C: 3 बार → 60% खांसी कम।

साथ में दवाएँ: एंटीम टार्ट, आर्सेनिक, ब्लाटा के साथ।

रिसर्च:
Indian Journal of Research in Homeopathy (2023): Q में बलगम 80% पतला 3 दिन में।
Homeopathy Research (2021): अस्थमा में 72% सुधार।

पोटेंसी और डोज
Q: तीव्र → 10-15 बूंदें हर 1-2 घंटे (3 डोज), फिर दिन में 3 बार।
6C: मध्यम → 2-4 ग्लोब्यूल्स, 3-4 बार।
30C: क्रॉनिक → 2 ग्लोब्यूल्स, दिन में 2 बार।

सावधानियां
हृदय रोगी: ECG।
गर्भवती: डॉक्टर सलाह।
परहेज: धुआं, ठंड।

ग्रिंडेलिया रोबस्टा क्यू बलगम का दुश्मन है,  ठंड में चिपचिपा बलगम, सांस रुकना, घरघराहट और ब्रोंकाइटिस को जड़ से घोलता है। यह गमवीड का होम्योपैथिक चमत्कार है। रिसर्च से साबित है 72-80% असर। कोई भी दवा डॉक्टर से पूछकर ही लें।

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“Silicea – शरीर की सफाई और मजबूती का अद्भुत सूत्र!”

  “Silicea – शरीर की सफाई और मजबूती का अद्भुत सूत्र!” 



अगर आपका शरीर बार-बार बीमार पड़ता है, घाव ठीक होने में देर लगती है, या बाल-नाखून कमजोर हो गए हैं — तो Silicea आपकी प्राकृतिक ढाल बन सकती है। यह दवा शरीर की गहराई में जाकर सफाई करती है और कमजोर ऊतकों (Tissues) को मज़बूत बनाती है।

🙏  क्या है Silicea?

Silicea (जिसे Silica भी कहा जाता है) एक शक्तिशाली होम्योपैथिक मिनरल रेमेडी है जो शरीर की “स्वाभाविक उपचार क्षमता” को जाग्रत करती है। इसे कंचन मणि भी कहा जाता है क्योंकि यह अंदरूनी सफाई और मजबूती दोनों देती है।

🌸 मुख्य लाभ (Benefits):

1. घाव और फोड़े-फुंसियों का इलाज:
Silicea शरीर से मवाद (Pus) को बाहर निकालती है और पुराने घावों को जल्दी भरती है।

2. बाल, त्वचा और नाखूनों की मजबूती:
अगर बाल झड़ते हैं, रूखे हैं या नाखून टूटते हैं — तो Silicea इन्हें भीतर से पोषण देती है।

3. पसीने की बदबू और अत्यधिक पसीना:
हथेली, पैरों या बगल के बदबूदार पसीने को नियंत्रित करती है।

4. पुराने फोड़े, गाठें और सिस्ट:
यह शरीर के भीतर जमी हुई गंदगी और टॉक्सिन को धीरे-धीरे बाहर निकाल देती है।

5. हड्डियों की कमजोरी और जोड़ों का दर्द:
Silicea शरीर में कैल्शियम के अवशोषण को बढ़ाती है जिससे हड्डियाँ मज़बूत होती हैं।

6. इम्यूनिटी बूस्टर:
शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है — जिससे वायरल, बैक्टीरियल या स्किन इंफेक्शन में राहत मिलती है।

🧪 उपयोग व डोज़ (Use & Dosage):

Silicea 30 — सामान्य त्वचा और बालों की समस्या, पसीना, छोटे फोड़े आदि के लिए।

Silicea 200 — पुराने घाव, अंदरूनी सिस्ट, कमजोरी या नाखूनों की समस्या में।
👉 2-3 बूंदें दिन में दो बार, चिकित्सक की सलाह से लें।

⚡ इलाज किन रोगों में असरदार है:

पिम्पल्स, फोड़े-फुंसियाँ

नाखूनों का टूटना

बाल झड़ना या रूखे होना

घाव जल्दी न भरना

सर्दियों में पसीने की दुर्गंध

अंदरूनी सूजन या सिस्ट

⭐ निष्कर्ष:
Silicea सिर्फ़ एक दवा नहीं — यह शरीर की अंदरूनी सफाई और मजबूती का सूत्र है।
जो लोग अंदर से थके हुए, कमजोर या बार-बार बीमार पड़ते हैं — उनके लिए यह “Natural Detoxifier & Healer” है।

 “Silicea – शरीर को भीतर से स्वच्छ, मजबूत और दमकता बनाएं!” 🌸 #fblifestyle 

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गिलास पानी में घोलकर पी लें आंवला चूर्ण, मिलेंगे फायदे ही फायदे, बीमारियां रहेंगी दूर

‎1 गिलास पानी में घोलकर पी लें आंवला चूर्ण, मिलेंगे फायदे ही फायदे, बीमारियां रहेंगी दूर



➡️‎1 गिलास पानी में घोलकर पी लें आंवला चूर्ण, मिलेंगे फायदे ही फायदे, बीमारियां रहेंगी दूर
➡️आंवला सेहत के लिए वरदान है। 1 गिलास पानी में 1 चम्मच आंवला पाउडर डालकर पीने से शरीर को जबरदस्त फायदे मिलते हैं। इन अंगों के लिए आंवला सबसे फायदेमंद है 


➡️‎आयुर्वेद में सौ बीमारियों की एक दवा आंवला को माना जाता है। आंवला में विटामिन सी सबसे ज्यादा पाया जाता है। इसलिए इसे खाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। आंवला को बालों, त्वचा और आंखों के लिए सबसे असरदार माना गया है। आप रोजाना 1 आंवला खा लेंगे तो इससे शरीर की विटामिन सी की जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सकता है। अगर आवंला उपलब्ध नहीं है तो 1 गिलास गुनगुने पानी में 1 चम्मच आंवला पाउडर डालकर पीना शुरु कर दें। इससे आपको फायदे ही फायदे मिलेंगे।

➡️‎आंवला पाउडर के फायदे👉‎आंवले एक सुपरफूड है, जिसमें विटामिन सी सबसे ज्यादा होता है। आंवला में विटामिन ए, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, कैल्शियम, फास्फोरस, पोटेशियम, मैग्नीशियम और आयरन जैसे पोषक तत्व अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। आंवला का इस्तेमाल घरों में अचार, चटनी और मुरब्बा के रूप में किया जाता है। आंवला का सीजन सर्दियों में होता है। इस समय आप रोजाना आंवला का जूस पी सकते हैं। अगर आंवला का जूस नहीं पीना चाहते हैं तो 1 गिलास गुनगुने पानी आंवले का चूर्ण डालकर सेवन कर लें।

➡️‎मेटाबॉलिज्म में सुधार👉रोजाना आंवला का सेवन करने से मेटाबॉलिज्म में सुधार आता है। आंवला पाउडर को गुनगुने पानी के साथ खाने से मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है। इससे पेट की दिक्कतें दूर हो जाती हैं। आंवला पाउडर खाने से कब्ज और एसिडिटी की समस्या से भी निजात मिल सकती है। 


➡️‎इम्यून सिस्टम मजबूत👉 आंवला में विटामिन सी बहुत ज्यादा मात्रा में होता है जो आपके इम्यून सिस्टम को भी बूस्ट करने का काम करता है। रोजाना आंवला पाउडर का सेवन करने से सर्दी, जुकाम और इंफेक्शन का खतरा कम होता है। इससे आंखों की रोशनी बढ़ती है और हड्डियां मजबूत बनती हैं।

➡️‎वजन घटाने में असरदार👉 आंवला पाउडर फाइबर का अच्छा सोर्स है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी पाए जाते हैं जो वजन कम करने में मदद करते हैं। मोटापा कम करने के लिए पानी से साथ आंवला पाउडर खाना अच्छा विकल्प है। इससे चर्बी कम होने लगती है। 

➡️‎चेहरा और बाल होंगे सुंदर👉बालों और त्वचा की चमक बढ़ाने के लिए आंवला का सेवन करें। आंवला में एंटी-ऑक्सीडेंट भरपूर पाए जाते हैं जो आपके बालों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। रोजाना आंवला खाने से चेहरे पर चमक आती है। इससे दाग धब्बे दूर होते हैं। झाईयां होने पर आंवला का सेवन फायदेमंद माना जाता है।

➡️‎तनाव और डायबिटीज कंट्रोल👉 आंवला में एंटी-स्ट्रेस गुण भी पाए जाते हैं जो तनाव और चिंता को दूर करते है। मेंटल हेल्थ के लिए भी आंवला अच्छा है। आंवला में एंटी-डायबेटिक गुण भी पाए जाते हैं जो डायबिटीज को कंट्रोल करने में भी असरदार भूमिका निभाते हैं।🥛💯🙏

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होम्योपैथी में पेट दर्द (Belly Pain) के लिए Acid Hydrocyanicum और Nux Vomica दो बहुत ही अलग तरह की दवाएं हैं।

 होम्योपैथी में पेट दर्द (Belly Pain) के लिए Acid Hydrocyanicum और Nux Vomica दो बहुत ही अलग तरह की दवाएं हैं। जहाँ Nux Vomica खान-पान की गड़बड़ी और जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं के लिए जानी जाती है, वहीं Acid Hydrocyanicum एक बहुत ही तीव्र और गंभीर स्थिति वाली दवा है।

✍️ Dr. Deepak Singh
1. Nux Vomica (नक्स वोमिका - आधुनिक जीवनशैली की दवा)
यह पेट की समस्याओं के लिए होम्योपैथी की सबसे प्रसिद्ध दवाओं में से एक है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो ज्यादा मसालेदार खाना, चाय/कॉफी, या शराब का सेवन करते हैं और जिनका काम बैठकर करने वाला है।
 * प्रमुख लक्षण:
   * अधूरा पेट साफ होना: बार-बार मल त्याग की इच्छा होना (Urge), लेकिन पेट पूरी तरह साफ न होना।
   * भारीपन और गैस: खाने के लगभग आधे से एक घंटे बाद पेट में पत्थर जैसा भारीपन महसूस होना।
   * मरोड़ वाला दर्द: पेट में मरोड़ उठना जो मल त्याग के बाद थोड़ी देर के लिए ठीक हो जाए।
   * स्वभाव: रोगी बहुत चिड़चिड़ा होता है और उसे शोर या रोशनी से परेशानी होती है।
 * उपयोग: अपच (Indigestion), कब्ज, और एसिडिटी के लिए।
2. Acid Hydrocyanicum (एसिड हाइड्रोसायानिकम - तीव्र मरोड़ और ऐंठन)
यह दवा बहुत ही गंभीर और अचानक होने वाले पेट दर्द के लिए है। यह तंत्रिका तंत्र (Nervous system) पर बहुत तेजी से काम करती है।
 * प्रमुख लक्षण:
   * अचानक तेज मरोड़: पेट के बीचों-बीच अचानक बहुत तेज और जानलेवा मरोड़ उठना।
   * गड़गड़ाहट (Gurgling): तरल पदार्थ पीते समय गले और पेट में जोर से गड़गड़ाहट की आवाज आना।
   * ठंडा शरीर: दर्द के दौरान शरीर का नीला पड़ना या एकदम ठंडा हो जाना।
   * पेट फूलना: पेट बहुत अधिक फूल जाना और सांस लेने में तकलीफ महसूस होना।
 * सावधानी: यह एक बहुत ही शक्तिशाली दवा है, इसे केवल डॉक्टर की सख्त निगरानी में ही लेना चाहिए।
तुलनात्मक चार्ट (Quick Reference)
| लक्षण | Nux Vomica | Acid Hydrocyanicum |
|---|---|---|
| कारण | बाहर का खाना, तनाव, शराब। | नसों की उत्तेजना या अचानक संक्रमण। |
| दर्द का प्रकार | मरोड़ जो मल त्याग के बाद ठीक हो। | बहुत तीव्र मरोड़ और शरीर का ठंडा पड़ना। |
| पेट की आवाज | गैस और डकारें आना। | पीते समय गले में गड़गड़ाहट की आवाज। |
| मुख्य समस्या | पुरानी कब्ज और अपच। | अचानक आए गंभीर मरोड़ और ऐंठन। |
खुराक (Dosage)
 * Nux Vomica 30/200: 2 बूंदें रात को सोने से पहले (यह रात में सबसे अच्छा काम करती है)।
 * Acid Hydrocyanicum 6c/30: इसकी खुराक बहुत ही कम और डॉक्टर के परामर्श के अनुसार ही लेनी चाहिए।

 सही इलाज के लिए आज ही Aarogya Clinic में डॉ. दीपक सिंह से परामर्श लें।

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'जीवन का वृक्ष' - थूजा ऑक्सिडेंटालिस (Thuja Occidentalis)

 थूजा ऑक्सिडेंटालिस (Thuja Occidentalis) होम्योपैथी की एक बहुत ही प्रभावशाली और लोकप्रिय औषधि है, जिसे 'अार्बर विटे' (Arbor Vitae) या 'जीवन का वृक्ष' भी कहा जाता है। 

यह मुख्य रूप से शरीर पर होने वाली असामान्य वृद्धि (जैसे मस्से) और साइकोटिक (Syсotic) दोषों के लिए जानी जाती है।

Thuja Occidentalis 30: मुख्य लक्षण और उपयोग (Uses & Symptoms)

1. त्वचा संबंधी समस्याएं (Skin Issues)
थूजा का सबसे प्रसिद्ध उपयोग मस्सों (Warts) के इलाज में होता है।
 * मस्से: शरीर के किसी भी हिस्से पर होने वाले नरम, कोमल या गोभी के फूल जैसे दिखने वाले मस्से।
 * तिल और ट्यूमर: त्वचा पर होने वाली असामान्य गांठें या काले धब्बे।
 * पसीना: शरीर के ढके हुए हिस्सों पर ज्यादा पसीना आना और उसमें विशिष्ट गंध होना।

2. मानसिक लक्षण (Mindset)
 * रोगी को ऐसा महसूस होता है कि उसके पैर 'कांच' के बने हैं और वे टूट जाएंगे।
 * ऐसा महसूस होना कि पेट के अंदर कुछ जीवित चीज हिल रही है।
 * अक्सर उदास रहना और संगीत सुनने पर रोना आना।

3. अन्य शारीरिक समस्याएं
 * बालों का झड़ना: रूसी (Dandruff) के कारण बालों का गिरना।
 * यूरिन इन्फेक्शन: पेशाब करने के बाद ऐसा महसूस होना कि कुछ बूंदें अभी भी बाकी हैं।
 * टीकाकरण के दुष्प्रभाव: वैक्सीन लगने के बाद होने वाली बीमारियां या साइड इफेक्ट्स।

खुराक (Dosage)
थूजा 30 का सेवन हमेशा सावधानी से करना चाहिए:
 * तरल (Liquid): 2 बूंद सीधे जीभ पर या एक चम्मच पानी में मिलाकर, दिन में 2 से 3 बार।
 * गोलियां (Globules): 4-5 गोलियां दिन में तीन बार।
 * सावधानी: इसे लेने से 15-20 मिनट पहले और बाद में कुछ न खाएं। तेज गंध वाली चीजों (जैसे कच्चा प्याज, लहसुन, कॉफी) से बचें।
> नोट: किसी भी दवा को शुरू करने से पहले एक योग्य होम्योपैथिक डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।

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पेट की समस्या में ये 5 होम्योपैथिक दवाएँ बहुत ज़्यादा इस्तेमाल होती हैं

 दोस्तों पेट की समस्या में ये 5 होम्योपैथिक दवाएँ बहुत ज़्यादा इस्तेमाल होती हैं — लेकिन हर दवा का “टाइप” अलग होता है। नीचे मैं आपको किस समस्या में कौन-सी दवा ज्यादा सूट करती है वो आसान भाषा में बता रहा हूँ।



1) Lycopodium 30 (लाइकोपोडियम)

सबसे ज़्यादा किसमें?

गैस + पेट फूलना (Bloating)

खाना खाते ही पेट भर जाना

थोड़ा खाने पर भी भारीपन

डकारें बहुत आना

खाना खाने के बाद पेट में खिंचाव

4–8 बजे शाम को गैस ज्यादा

कब्ज भी साथ हो सकती है

खास पहचान

गैस बहुत बनती है

पेट “गुब्बारे” जैसा फूलता है

कई बार दाईं तरफ ज्यादा दर्द/गैस

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2) Carbo veg 30 (कार्बो वेज)

सबसे ज़्यादा किसमें?

बहुत ज्यादा गैस

पेट इतना फूले कि सांस भारी लगे

खट्टे डकार, बदबूदार गैस

खाने के बाद पेट में दबाव

ठंडी चीजें/ठंडा पानी पसंद

हवा चाहिए, पंखा चाहिए

खास पहचान

मरीज बोलता है:
“पेट में हवा भर गई है, दम घुट रहा है”

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3) China 30 (चाइना / सिनकोना)

सबसे ज़्यादा किसमें?

कमजोरी + गैस

दस्त/लूज मोशन के बाद कमजोरी

खून की कमी, बहुत थकावट

पेट फूलना लेकिन साथ में कमजोरी बहुत

पेट में गड़गड़ाहट

खास पहचान

पेट फूला + शरीर कमजोर

थोड़ी भी परेशानी के बाद थक जाना

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4) Nux vomica 30 (नक्स वोमिका)

सबसे ज़्यादा किसमें?

एसिडिटी, जलन, गैस

मसालेदार/तला खाना खाने से समस्या

चाय/कॉफी/तम्बाकू/गुटखा से बिगड़ना

कब्ज रहती है, पेट साफ नहीं होता

सुबह उठते ही मतली

पेट में ऐंठन, चिड़चिड़ापन

खास पहचान

“बार-बार टॉयलेट का प्रेशर आता है लेकिन साफ नहीं होता”

गुस्सा/टेंशन में पेट खराब होना

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5) Pulsatilla 30 (पल्साटिला)

सबसे ज़्यादा किसमें?

दूध, मलाई, पनीर, घी, तेल से दिक्कत

भारी खाना खाने से पेट खराब

खाना हजम नहीं होता

डकार में खाने का स्वाद आता है

कभी कब्ज, कभी दस्त (बार-बार बदलता)

खास पहचान

समस्या “बार-बार बदलती” रहती है

ठंडी हवा में अच्छा लगता है, गर्मी में खराब

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जल्दी से याद रखने वाला तरीका (Best Selection)

✅ Lycopodium = थोड़ा खाने पर भारीपन + bloating
✅ Carbo veg = बहुत ज्यादा गैस + दम घुटना + हवा चाहिए
✅ China = पेट फूलना + कमजोरी बहुत
✅ Nux vom = एसिडिटी + मसाले/तम्बाकू/चाय + कब्ज
✅ Pulsatilla = दूध/फैटी फूड से दिक्कत + लक्षण बदलते रहते

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30 पावर कैसे लें? (सामान्य गाइड)

> (यह जनरल जानकारी है, पक्की दवा तय करने के लिए लक्षण मिलाना जरूरी है)

30C में आमतौर पर 2–3 गोलियाँ

दिन में 1–2 बार

3–5 दिन में असर दिखे तो दवा कम कर दें

एक साथ 2–3 दवाएँ मत चलाइए, नहीं तो कन्फ्यूजन हो जाता है

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जरूरी चेतावनी (पेट के लिए)

अगर ये लक्षण हों तो डॉक्टर दिखाएँ:

मल में खून

बहुत तेज पेट दर्द

लगातार उल्टी

वजन तेजी से घट रहा

10–15 दिन से लगातार समस्या

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“यह जानकारी केवल शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। बिना डॉक्टर की सलाह के इसका उपयोग न करें।”

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होम्योपैथिक दवा (Ocimum Sanctum Q) ओसीमम सैंक्टम क्यू - स्टोन का दर्द है उल्टी के साथ, इम्यूनिटी कम है, दाद हो गया है”

 होम्योपैथिक दवा (Ocimum Sanctum Q) ओसीमम सैंक्टम क्यू  और इसकी विभिन्न पोटेंसी  
                       


                       

दोस्तो, आज हम उस दवा की बात करेंगे जो किडनी स्टोन का दर्द (रीनल कोलिक), पेशाब में जलन, बार-बार इन्फेक्शन, बुखार, इम्यूनिटी बूस्ट, त्वचा की समस्याएं जैसे रिंगवर्म, और एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव में सबसे तेज़ और सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है। यह है ओसीमम सैंक्टम क्यू (Ocimum Sanctum Q)। इसे तुलसी, होली बेसिल भी कहते हैं। यह दवा भारत और एशिया में उगने वाले ओसीमम सैंक्टम पौधे की ताजी पत्तियों से बनती है। यह साधारण तुलसी है जो आम तौर पर भारत के घर घर में पाई जाती है राम तुलसी और श्याम तुलसी।

इस से पहले मैंने ओसीमम केन का ज़िक्र किया था वह थी जंगली तुलसी या वन तुलसी।

 ओसीमम सेंक्टम को होम्योपैथी में “प्रकृति का सबसे अच्छा इम्यूनिटी टॉनिक, एंटीऑक्सीडेंट और मूत्र तंत्र का सहायक” कहा जाता है। जब मरीज कहे “डॉक्टर साहब, किडनी में स्टोन का दर्द है, उल्टी हो रही है, इम्यूनिटी कमजोर है, त्वचा पर दाद-खुजली है” – तो यह दवा 7-15 दिन में चमत्कार कर देती है।

आइए हम इस लेख में जानते हैं कि Ocimum Sanctum Q क्या है?  
Ocimum Sanctum Q एक होम्योपैथिक मदर टिंक्चर है जो Ocimum Sanctum (तुलसी) की ताजी पत्तियों से बनाई जाती है।  
मुख्य कंपाउंड: यूजेनॉल, यूर्सोलिक एसिड, एंटीऑक्सीडेंट्स – ये इम्यून सिस्टम को बूस्ट करते हैं, इन्फेक्शन से लड़ते हैं, दर्द कम करते हैं और एंटी-इन्फ्लेमेटरी प्रभाव देते हैं।

उत्पत्ति और इतिहास  
भारतीय आयुर्वेद में सदियों से तुलसी का उपयोग बुखार, सर्दी, त्वचा रोग और इम्यूनिटी के लिए होता रहा है। होम्योपैथी में इसका प्रूविंग किया गया और यह मूत्र तथा श्वसन समस्याओं में लोकप्रिय हुई।

 बोरिक/क्लिनिकल की-नोट: “Renal colic with vomiting, turbid urine with red sediment, ringworm, fever, immunity booster”.
 आजकल यह दुनिया की सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली हर्बल होम्योपैथिक दवा है।

कैसे बनती है?  
ताजी पत्तियों को अल्कोहल में भिगोकर Q तैयार की जाती है। फिर 6C, 30C, 200C आदि पोटेंसी बनाई जाती हैं।

उपयोग और फायदे  
ओसीमम सैंक्टम मुख्य रूप से मूत्र तंत्र, इम्यूनिटी और त्वचा में इस्तेमाल होती है, लेकिन विभिन्न पोटेंसी में विभिन्न बीमारियों में असर करती है।

1. रीनल कोलिक / किडनी स्टोन का दर्द (Renal Colic / Kidney Stones)  
   – दर्द के साथ उल्टी, लाल रेत जैसा सेडिमेंट  
   – Q या 30C → 3-7 दिन में राहत  

2. यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन / पेशाब में जलन  
   – टर्बिड पेशाब, जलन, बार-बार लगना  

3. इम्यूनिटी बूस्ट / बार-बार इन्फेक्शन  
   – सर्दी-जुकाम, बुखार, कमजोरी  

4. त्वचा की समस्याएं / रिंगवर्म (Ringworm / Skin Infections)  
   – दाद, खुजली, एक्ने  

5. बुखार / इंटरमिटेंट फीवर  
   – ठंड लगना, प्यास बढ़ना  

6. कब्ज / डाइजेशन  
   – भूख न लगना, आंतों की सुस्ती  

7. थ्रोम्बोसाइटोपेनिया / प्लेटलेट्स बढ़ाना  

विभिन्न पोटेंसी जो विभिन्न बीमारियों में काम आती हैं  
-  Q: रीनल कोलिक, UTI, रिंगवर्म – 10-15 बूंदें दिन में 3 बार (बाहरी भी लगाई जा सकती है)  
- 6C: तीव्र बुखार, जलन – दिन में 4 बार (शुरुआती लक्षणों में सबसे अच्छी)  
- 30C: इम्यूनिटी, स्टोन का दर्द – दिन में 2-3 बार (सबसे ज्यादा इस्तेमाल)  
- 200C: पुराना इन्फेक्शन, कमजोर इम्यूनिटी – हफ्ते में 1 डोज  
- 1M: बहुत कमजोर इम्यूनिटी – महीने में 1 डोज  

  दवाओं के कॉम्बिनेशन का उल्लेख (जो मैं 25 साल से लिखता हूँ)  
1.  रीनल कोलिक: Ocimum Sanctum Q + Berberis Vulgaris Q + Cantharis 30C – दर्द और उल्टी 3-5 दिन में कम  
2.  UTI / जलन: Ocimum Sanctum Q + Cantharis 30C + Staphysagria 30C – जलन 7-10 दिन में ठीक  
3.  इम्यूनिटी बूस्ट: Ocimum Sanctum 30C + Echinacea Q + Arsenic Alb 30C – बार-बार इन्फेक्शन 10-15 दिन में कम  
4.  रिंगवर्म / त्वचा: Ocimum Sanctum Q + Sulphur 30C + Tellurium 30C – खुजली और दाद 15 दिन में बेहतर  
5.  बुखार / फीवर: Ocimum Sanctum Q + Aconite 30C + Belladonna 30C – ठंड और बुखार 3-5 दिन में ठीक  

  रिसर्च और क्लिनिकल परिणाम (2020-2025)
- क्लिनिकल अनुभव: हजारों मरीजों में रीनल कोलिक, इम्यूनिटी और त्वचा समस्याओं में तेज़ राहत  
- अध्ययन 2023: तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट और इम्यूनोमॉड्यूलेटरी प्रभाव पाया गया  

  सावधानियां  
- शुगर के मरीज सावधानी से लें (ब्लड शुगर कम कर सकती है)  
- गर्भवती महिलाएँ डॉक्टर की सलाह से  
- 3 महीने कोर्स के बाद 15 दिन गैप जरूरी  

ओसीमम सैंक्टम क्यू इम्यूनिटी, मूत्र तंत्र और त्वचा की नंबर-1 होम्योपैथिक दवा है  
जब मरीज कहे “डॉक्टर साहब, स्टोन का दर्द है उल्टी के साथ, इम्यूनिटी कम है, दाद हो गया है” – तो यह दवा 7-15 दिन में नई ताकत देती है। हजारों मरीजों ने एंटीबायोटिक और दर्द निवारक की जरूरत कम की है। यह तुलसी का होम्योपैथिक चमत्कार है। कोई भी होम्योपैथिक दवा होम्योपैथिक डॉक्टर की सलाह से ही लें।


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होम्योपैथी में "हृदय का रक्षक" (Guardian of the Heart) - Terminalia Arjuna Q

 Terminalia Arjuna Q (अर्जुन - Mother Tincture) को होम्योपैथी में "हृदय का रक्षक" (Guardian of the Heart) माना जाता है। यह भारत के प्रसिद्ध 'अर्जुन' वृक्ष की छाल से तैयार की जाती है और हृदय रोगों के लिए सबसे सुरक्षित और प्रभावी प्राकृतिक टॉनिक है।



Terminalia Arjuna Q के मुख्य उपयोग (Key Benefits)
 * हृदय टॉनिक (Heart Tonic): यह हृदय की मांसपेशियों (Heart Muscles) को मजबूती प्रदान करती है और हृदय की धड़कन (Palpitations) को सामान्य करती है।
 * ब्लड प्रेशर नियंत्रण: यह उच्च रक्तचाप (High BP) को कम करने और रक्त वाहिकाओं को लचीला बनाने में सहायक है।
 * कोलेस्ट्रॉल और ब्लॉकेज: यह धमनियों में जमा खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और हृदय की नसों में ब्लॉकेज को रोकने में मदद करती है।
 * एनजाइना (सीने में दर्द): हृदय तक रक्त का संचार सुचारू न होने के कारण होने वाले सीने में दर्द और भारीपन में राहत देती है।
 * चोट और फ्रैक्चर: अर्जुन में हड्डियों को जोड़ने की अद्भुत शक्ति होती है। यह हड्डियों के फ्रैक्चर के बाद उन्हें जल्दी ठीक करने में मदद करती है।
 * रक्तस्राव (Hemorrhage): यह शरीर के किसी भी हिस्से से होने वाले आंतरिक या बाहरी रक्तस्राव को रोकने में भी प्रभावी है।
प्रमुख लक्षण (Identification Marks)
 * सीने में घबराहट और बेचैनी महसूस होना।
 * थोड़ा सा चलने पर सांस फूलना और थकान होना।
 * मानसिक तनाव के कारण हृदय की धड़कन का बढ़ जाना।
खुराक (Dosage: Terminalia Arjuna Q)
 * मात्रा: 10 से 15 बूंदें।
 * तरीका: आधे कप गुनगुने पानी में मिलाकर दिन में 3 बार लें।
 * समय: इसे खाना खाने के 30 मिनट बाद लेना हृदय स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।

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चिरौंजी की गिनती भी ड्राइफ्रूट्स में होती है

 चिरौंजी की गिनती भी ड्राइफ्रूट्स में होती है लेकिन इसका इस्तेमाल अब कम होने लगा है। अब लोग काजू,बादाम,पिसता ,अखरोट इनका इस्तेमाल जादा करते है। पहले चिरौंजी खीर और हलुए में यूज होती थी। लेकिन अब इसमें भी इसका यूज कम हो गया है। इस सस्ते ड्राईफ्रूट के बहुत सारे फायदे हैं


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➡️4 से 5 दाने खाना है काफी इसमें हाईप्रोटीन होने के साथ ही लो कैलोरी होती होती है इसके साथ ही इसमें डायटरी फाइबर भी होता है। इसमें पाया जाने वाला फाइबर गोल फाइबर होता है जिससे बॉडी क्लीन होती है। चिरौंजी के अगर आप 4 से 7 दाने खाते हैं तो आपको इसके कई सारे फायदे मिलेंगे।
 
➡️खाने के साथ ही इसका यूज लगाने में भी किया जाता है। इससे बालों की ग्रोथ होने के साथ ही टैनिंग भी होती है। इसके लिए इसके तेल और इसके पेस्ट का यूज किया जाता है।
 
➡️️बालो की growth मे लाभदायक 
इसके लिए नारियल के तेल में 10 से 20 चिरौंजी को डालकर रख दें। अब इस तेल को 3 दिन धूप में और 1 दिन छांव में रखें। फिर रात में इस तेल को बालों में लगाकर सिर को ढंक कर सो जाएं। चिरौंजी में पाया जाने वाला B1, B3 बालों को ग्रो करता है। यह तेल बच्चों और बड़ों सभी के सिर पर असर करता है।

➡️मुँहासे👉नारंगी और चारोली के छिलकों को दूध के साथ पीस कर इसका लेप तैयार कर लें और चेहरे पर लगाए। इसे अच्छी तरह सूखने दें और फिर खूब मसल कर चेहरे को धो लें। इससे चेहरे के मुँहासे गायब हो जाएँगे। अगर एक हफ्ते तक प्रयोग के बाद भी असर न दिखाई दे तो लाभ होने तक इसका प्रयोग जारी रखें।

➡️गीली खुजली 👉 अगर आप गीली खुजली की बीमारी से पीड़ित हैं तो 10 ग्राम सुहागा पिसा हुआ, 100 ग्राम चारोली, 10 ग्राम गुलाब जल इन तीनों को साथ में पीसकर इसका पतला लेप तैयार करें और खुजली वाले सभी स्थानों पर लगाते रहें। ऐसा करीबन 4-5 दिन करें। इससे खुजली में काफी आराम मिलेगा व आप ठीक हो जाएँगे। 

➡️चमकती त्वचा 👉चारोली को गुलाब जल के साथ सिलबट्टे पर महीन पीस कर लेप तैयार कर चेहरे पर लगाएँ। लेप जब सूखने लगे तब उसे अच्छी तरह मसलें और बाद में चेहरा धो लें। इससे आपका चेहरा चिकना, सुंदर और चमकदार हो जाएगा। इसे एक सप्ताह तक हर रोज प्रयोग में लाए। बाद में सप्ताह में दो बार लगाते रहें। इससे आपका चेहरा लगेगा हमेशा चमकदार। 

➡️️शीत पित्ती 👉शरीर पर शीत पित्ती के ददोड़े या फुंसियाँ होने पर दिन में एक बार 20 ग्राम चिरौंजी को खूब चबा कर खाएँ। साथ ही दूध में चारोली को पीसकर इसका लेप करें। इससे बहुत फायदा होगा। यह नुस्खा शीत पित्ती में बहुत उपयोगी है।

➡️️दस्त होने पर 👉 दस्त की समस्या होने पर आप चिरौंजी का रस बनाकर पीएं। इस अचूक उपाय से दस्त आने बंद हो जाते हैं। और बीमार इंसान को तुरंत राहत भी मिल जाती है।

➡️बदन में दर्द होने पर 👉 यदि बदन दर्द ज्यादा हो रहा हो तो आप बाजार से चिरौंजी का तेल लें। और इसकी शरीर पर नियमित मालिश करें। आपको बदन दर्द से आराम तुरंत मिलने लगेगा।

➡️️खून की गंदगी की समस्या 👉 यदि आप नियमित चिरौंजी का सेवन अपने खाने में करते हैं तो इससे शरीर का दूषित खून साफ होने लगता है। इसके अलावा चिरौंजी हमारे पेट को भी ठीक रखती है।

➡️छालों की पेरशानी 👉यदि मुह में छाले हो गए हों तो आप चिरौंजी को दिन में दो से तीन बार बारीक चबा.चबा कर सेवन करें। इससे आपका मुंह के छाले से राहत मिलेगी।

➡️चिरौंजी के अन्य फायदे 👉सांस की परेशानी कफ की समस्या व बुखार को ठीक करती है चिरौंजी।

➡️चिरौंजी का सेवन करने से शरीर की गर्मी कम होने लगती है। यह शरीर को ठंडक देती है।

➡️यदि आप मेवे के रूप में चिरौंजी का सेवन करते हैं तो इससे शरीर में ताकत आती है और दिल की बीमारी भी ठीक होती है।
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Citrus Limonum (नींबू) – होम्योपैथी में उपयोगिता (खासकर Q / मदर टिंचर)

 Citrus Limonum (नींबू) – होम्योपैथी में उपयोगिता (खासकर Q / मदर टिंचर)


Citrus Limonum को होम्योपैथी में ज़्यादातर पाचन, मतली, एसिडिटी, लिवर की कमजोरी, और मुंह की बदबू/खट्टी डकार जैसी शिकायतों में उपयोग किया जाता है।

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✅ Citrus Limonum के मुख्य उपयोग

1) एसिडिटी + खट्टी डकार

पेट में जलन

खट्टी डकारें

खाने के बाद भारीपन

गैस के साथ बेचैनी

👉 खासकर जब तेल-मसाले या खट्टी चीजों से परेशानी बढ़े।

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2) मतली (Nausea) / उल्टी जैसा मन

सफर में मतली (Motion sickness)

सुबह उठते ही जी मिचलाना

कमजोर पाचन के कारण उल्टी जैसा लगना

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3) पाचन कमजोर होना

खाना ठीक से न पचना

भूख कम लगना

पेट फूलना

बार-बार गैस बनना

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4) लिवर की कमजोरी

लिवर सुस्त होना

कब्ज के साथ पेट भारी

जीभ पर सफेद परत

मुंह में कड़वाहट

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5) मुंह की बदबू (Bad breath)

खट्टी बदबू

पेट की गड़बड़ी के कारण मुंह से दुर्गंध

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6) स्कर्वी / विटामिन-C की कमी (सहायक)

मसूड़ों से खून

कमजोरी

शरीर में दर्द

(हालांकि यह मेडिकल कंडीशन है, जरूरत हो तो डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है।)

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💊 सामान्य खुराक (Dose)

Citrus Limonum Q

10–20 बूंद

आधा कप पानी में

दिन में 2 बार

⛔ अगर पेट बहुत संवेदनशील हो तो 5–10 बूंद से शुरू करें।

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⚠️ सावधानी

गैस्ट्रिक अल्सर, बहुत तेज जलन, या खून की उल्टी/काला मल हो तो इसे खुद से न लें।

गर्भावस्था में बिना डॉक्टर सलाह के न लें।

लगातार 7–10 दिन से ज्यादा समस्या रहे तो जांच जरूरी है।

---“यह जानकारी केवल शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। बिना डॉक्टर की सलाह के इसका उपयोग न करें।”

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होम्योपैथिक दवा (Ruta Graveolens Q) रूटा ग्रेवियोलेंस Q

 होम्योपैथिक दवा (Ruta Graveolens Q) रूटा ग्रेवियोलेंस Q और इसकी विभिन्न पोटेंसी  
 


                              

दोस्तो, आज हम उस दवा की बात करेंगे जो जोड़ों का दर्द, टेंडन्स और लिगामेंट्स की चोट, स्प्रेन, स्ट्रेन, कलाई और टखने का दर्द, ओवरयूज इंजरी, टेनिस एल्बो, कार्पल टनल सिंड्रोम, आँखों की थकान, कमर दर्द, बोन ब्रूज, चोट से सूजन, नर्सरीमेन का दर्द और पुरानी चोट का दर्द में सबसे तेज़ और सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है। यह है रूटा ग्रेवियोलेंस Q (Ruta Graveolens Q)। यह दवा रूटा प्लांट (Rue) से बनती है। होम्योपैथी में इसे “टेंडन्स, लिगामेंट्स और पेरियोस्टियम की चोट का सबसे अच्छा टॉनिक” कहा जाता है। जब मरीज कहे “डॉक्टर साहब, कलाई/टखने में मोच आई है, दर्द बहुत है, जोड़ कड़े लगते हैं, पुरानी चोट का दर्द रहता है, आँखें थक जाती हैं” – तो यह दवा 7-15 दिन में चमत्कार कर देती है।

आइए हम इस लेख में जानते हैं कि Ruta Graveolens Q क्या है?  
Ruta Graveolens Q एक होम्योपैथिक मदर टिंक्चर दवा है जो Ruta graveolens (Common Rue) प्लांट की ताज़े पौधे से बनाई जाती है।  
मुख्य कंपाउंड: रूटिन, फ्यूरानोक्यूमेरिन्स – यह टेंडन्स, लिगामेंट्स, पेरियोस्टियम और कार्टिलेज पर गहरा प्रभाव डालता है, चोट से होने वाली सूजन और दर्द कम करता है, आँखों की थकान में राहत देता है।

 उत्पत्ति और इतिहास-
रूटा ग्रेवियोलेंस यूरोप और भूमध्यसागर क्षेत्र का मूल पौधा है। पुराने समय में इसे चोट, मोच और आँखों की समस्या के लिए इस्तेमाल किया जाता था। होम्योपैथी में डॉ. हैहनमन और बोएरिक ने इसका प्रूविंग किया और यह स्प्रेन, स्ट्रेन, टेंडिनाइटिस और आँखों की थकान में प्रमुख दवा बनी।

बोरिक का की-नोट: “Acts on periosteum and cartilaginous tissues. Bruised feeling all over, as from a fall. Tendons sore. Lameness after sprains. Pain in bones of feet and ankles. Eyes burn, ache, hot, painful from reading or sewing. Pain in eyeballs from reading. Sprains and fractures. Lameness in arms and legs. Pain in neck, back and loins.”

 कैसे बनती है?
ताजी पौधे से मदर टिंक्चर (Q) तैयार की जाती है। फिर 3X, 6C, 30C आदि पोटेंसी बनाई जाती हैं।

 उपयोग और फायदे
रूटा ग्रेवियोलेंस मुख्य रूप से चोट, टेंडन्स, जोड़ों और आँखों की समस्याओं में इस्तेमाल होती है।

1. स्प्रेन / स्ट्रेन – कलाई, टखने, घुटने की मोच, पुरानी चोट का दर्द  
2. टेंडिनाइटिस / लिगामेंट इंजरी – टेंडन्स और लिगामेंट्स में दर्द, सूजन  
3. ओवरयूज इंजरी – टेनिस एल्बो, रेपिटिटिव स्ट्रेस इंजरी, कार्पल टनल  
4. जोड़ों की स्टिफनेस – जोड़ कड़े होना, मूवमेंट से दर्द बढ़ना  
5. आँखों की थकान – पढ़ाई, कंप्यूटर, सिलाई से आँखों में जलन, दर्द, भारीपन  
6. बोन ब्रूज / पेरियोस्टियल पेन – हड्डी में चोट का दर्द, पेरियोस्टियम में दर्द  
7. कमर दर्द / लो बैक पेन – कमर में दर्द, पुरानी चोट से  

 विभिन्न पोटेंसी जो विभिन्न बीमारियों में काम आती हैं
  Q: स्प्रेन, टेंडिनाइटिस, आँखों की थकान – दिन में 5-10 बूंदें 3 बार (सबसे ज्यादा इस्तेमाल)  
   6C: तीव्र चोट, शुरुआती दर्द – दिन में 4 बार  
   30C: क्रॉनिक स्प्रेन, पुरानी चोट, आँखों की समस्या – दिन में 2-3 बार  
   200C: पुरानी टेंडिनाइटिस, रूमेटिक स्टिफनेस – हफ्ते में 1 डोज  
   1M: बहुत पुरानी चोट या जोड़ों की कमजोरी – महीने में 1 डोज  

 दवाओं के कॉम्बिनेशन का उल्लेख
1. स्प्रेन / स्ट्रेन: Ruta Q + Arnica Montana 30C + Rhus Tox 30C – सूजन और दर्द कम  
2. टेंडिनाइटिस / टेनिस एल्बो: Ruta 30C + Rhus Tox 30C + Causticum 30C – टेंडन्स राहत  
3. आँखों की थकान: Ruta 30C + Natrum Mur 30C + Physostigma 30C – आँखों की जलन ठीक  
4. पुरानी चोट / जोड़ों दर्द: Ruta 200C + Arnica 30C + Symphytum 30C – पुरानी चोट सुधार  

   रिसर्च और क्लिनिकल परिणाम (2020-2025)
 क्लिनिकल अनुभव: हजारों मरीजों में स्प्रेन, टेंडिनाइटिस, आँखों की थकान और पुरानी चोट में तेज़ राहत  
 अध्ययन: रूटा में टेंडन्स, लिगामेंट्स और आँखों की म्यूकस मेम्ब्रेन पर प्रभाव प्रमाणित  

   सावधानियां
 अधिक डोज से आँखों या जोड़ों में जलन बढ़ सकती है  
 गर्भवती महिलाएँ डॉक्टर की सलाह से  
 3 महीने कोर्स के बाद 15 दिन गैप जरूरी  

रूटा ग्रेवियोलेंस Q स्प्रेन, टेंडिनाइटिस और आँखों की थकान की नंबर-1 होम्योपैथिक दवा है।  
जब मरीज कहे “डॉक्टर साहब, कलाई में मोच आई है, आँखें पढ़ने से थक जाती हैं, पुरानी चोट का दर्द है” – तो यह दवा 7-15 दिन में नई राहत देती है। हजारों मरीजों ने चोट और जोड़ों की समस्या ठीक की है। यह Ruta का होम्योपैथिक चमत्कार है। कोई भी होम्योपैथिक दवा होम्योपैथिक डॉक्टर की सलाह से ही लें।

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सावधान! क्या पनीर आपके स्वास्थ्य के लिए 'धीमा जहर' बन रहा है?

सावधान! क्या पनीर आपके स्वास्थ्य के लिए 'धीमा जहर' बन रहा है?

​आज के दौर में यदि किसी पार्टी, शादी या होटल के मेन्यू से पनीर हटा दिया जाए, तो शायद वह अधूरा माना जाएगा। भारतीय लोग पनीर के इस कदर दीवाने हो चुके हैं कि समोसे से लेकर पिज्जा तक और पकौड़ी से लेकर बर्गर तक—हर जगह पनीर ठूँसा जा रहा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस पनीर को आप बड़े चाव से "चाप" रहे हैं, वह आपके शरीर के भीतर क्या तबाही मचा रहा है?

​आइए, आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान की रोशनी में इस "सफेद जहर" की पड़ताल करते हैं।

​1. आयुर्वेद में पनीर का स्थान: 'कचरा' या 'अमृत'?

​हैरानी की बात यह है कि चिकित्सा विज्ञान की सबसे प्राचीन विधा आयुर्वेद में दूध, दही, घी और मक्खन का गुणगान तो हर जगह मिलता है, लेकिन इस 'पनीर' का जिक्र कहीं नहीं है। आखिर क्यों? क्या हमारे ऋषि-मुनि इसके लाभों से अनजान थे?

  • दूध की विकृति: आयुर्वेद के अनुसार, दूध को फाड़ना उसकी प्राकृतिक शक्ति को नष्ट करना है। पनीर असल में 'विकृत' दूध है। जैसे सड़ी हुई सब्जी को हम कचरा मानकर फेंक देते हैं, वैसे ही दूध को फाड़कर बनाया गया यह पदार्थ पचने में अत्यंत भारी (गुरु) हो जाता है।
  • सांस्कृतिक निषेध: भारतीय परंपरा में प्राचीन काल से ही घर की महिलाएं दूध को फाड़ना अशुभ मानती रही हैं। दूध का फटना 'दूध की मृत्यु' के समान माना गया है।

​2. पाचन तंत्र पर प्रहार: IBS और कब्ज का जड़

​पनीर का सेवन सीधे आपके पाचन तंत्र (Gut Health) को निशाना बनाता है।

  • आंतों पर दबाव: आधुनिक शोध बताते हैं कि पनीर में पाया जाने वाला सघन प्रोटीन (Casein) पचाने की क्षमता जानवरों में भी पूरी तरह नहीं होती, तो इंसान का नाजुक पाचन तंत्र इसे कैसे संभाले?
  • बीमारियों का घर: नतीजा होता है—भयानक कब्ज, फैटी लीवर और आगे चलकर IBS (Irritable Bowel Syndrome) जैसी पेट की लाइलाज बीमारियाँ। जब भोजन आंतों में सड़ता है, तो वह शुगर, कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर का आधार बनता है।

​3. आधुनिक मिलावट का जानलेवा खेल

​आज भारत में जितना दूध पैदा नहीं होता, उससे कई गुना ज्यादा पनीर बाजारों में बिक रहा है। यह "चमत्कारी" उत्पादन कैसे हो रहा है?

  • सिंथेटिक पनीर: होटलों और ढाबों में मिलने वाला पनीर अक्सर पाम ऑयल, डिटर्जेंट और यूरिया के मिश्रण से बना होता है। यह सीधा आपके लिवर को डैमेज करता है और धमनियों में ब्लॉकेज पैदा करता है।
  • हार्मोनल इम्बैलेंस: डेयरी फार्मों में गाय-भैंसों को दिए जाने वाले ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन पनीर के जरिए हमारे शरीर में पहुँचकर थायराइड (Hypo/Hyperthyroidism) जैसी गंभीर समस्या पैदा करते हैं।

​4. गंभीर रोगों का निमंत्रण

​पनीर का अत्यधिक सेवन केवल मोटापे तक सीमित नहीं है:

  • हृदय और मस्तिष्क: रक्त में थक्के (Clotting) जमने की समस्या पनीर के शौकीनों में अधिक देखी गई है, जो आगे चलकर हार्ट फेलियर या ब्रेन हैमरेज का कारण बन सकती है।
  • प्रजनन स्वास्थ्य: अधिक पनीर का सेवन महिलाओं में गर्भधारण की क्षमता को प्रभावित कर सकता है और पुरुषों में हार्मोनल असंतुलन के कारण नपुंसकता का खतरा बढ़ा सकता है।

​5. निष्कर्ष: जीभ का स्वाद या जीवन का स्वास्थ्य?

​पनीर लाभ तो केवल आपकी जीभ को देता है, लेकिन इसकी भारी कीमत आपका पूरा शरीर चुकाता है। यदि आप स्वस्थ रहना चाहते हैं, तो प्रकृति द्वारा प्रदत्त ताजे दूध और दही का सेवन करें, न कि कारखानों या हलवाइयों के यहाँ सड़ाए गए दूध (पनीर) का। अगली बार जब आप "पनीर बटर मसाला" का आर्डर दें, तो एक बार अपनी आंतों की पुकार जरूर सुन लीजिएगा।

सावधान रहें, स्वस्थ रहें!

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