WHITE DISHCHARGE
♦️श्वेत प्रदर (सफ़ेद पानी)♦️
ल्यूकोरिया या प्रदर रोग महिलाओं में होने वाला एक गंभीर रोग है. इस रोग में महिला की योनी से सफ़ेद रंग का स्राव निकलता रहता है जो महिला को शारीरिक एवं मानसिक रूप से कमजोर बना देता है..
सफ़ेद पानी की समस्या से पीड़ित महिला गर्भ धारण करने में सक्षम नहीं हो पाती एवं साथ ही उसके शरीर से धातुओं का क्षय होता रहता है जो उसे शारीरिक रूप से बेहद कमजोर बना देतें है..
♦️आयुर्वेदानुसार श्वेत प्रदर ♦️
संहिताओं में इसका वर्णन श्लेष्मिक प्रदर या श्लेष्मजा योनी नाम से मिलता है. सामान्य अवस्था में महिला के प्रजनन अंगो एवं भग प्रदेश आदि से प्राय: सफ़ेद रंग का एवं गंधहिन पानी जैसा स्राव निकलता रहता है, जो उस भाग को गीला बनाये रखता है.. इस स्राव की मात्रा उतनी ही होती है जितने में वह अंग गीला रहे | मानसिक विकार जैसे काम, क्रोध एवं वासना आदि के कारण यह मात्रा बढ़ भी जाती जो एक समय पश्चात सामान्य हो जाती है.. कभी कभार दुर्बलता, कुपोषण, आहार विहार एवं व्याधियों के कारण यह मात्रा अधिक हो जाती है जो लम्बे समय तक परेशान करती है | इसी अवस्था को श्वेत प्रदर कहते है..
आयुर्वेद चिकत्सानुसार महिलाओं में सफ़ेद पानी की समस्या को 5 प्रकार की माना है..
भगज श्वेत प्रदर
योनिज
ग्रीवीय एवं
ग्रभास्यज श्वेत प्रदर
श्वेत प्रदर (सफ़ेद पानी) के कारण
पांडू रोग / खून की कमी
मानसिक विकार जैसे क्रोध, भय एवं चिंता आदि
अधिक सम्भोग
अपच एवं अजीर्ण
कब्ज
मूत्राशय में सुजन
अतृप्त कामवासन
भावनात्मक कष्ट आदि
श्वेत प्रदर की पहचान या लक्षण
योनिमार्ग से सफ़ेद जलीय चिपचिपे पदार्थ का बाहर निकलना.
योनी में खुजली एवं जलन.
जांघों में भारीपन
शारीरिक दुर्बलता
आलस्य
भोजन का ठीक प्रकार से पाचन न होना
कब्ज हो जाना
सिर दर्द
चक्कर आना
भोजन में अरुचि होना आदि लक्षण सफ़ेद पानी की समस्या होने पर दिखाई देते है
♦️श्वेत प्रदर के कारगर घरेलु इलाज.♦️
श्वेत प्रदर नाशक त्रिफला योग
♦️सामग्री ♦️
आंवले का बक्कल, हरड का बक्कल, एवं बहेड़ा इन तीनो को 1 -1 तोला(10 ग्राम) एवं जल आधा kg
♦️विधि ♦️
सबसे पहले इन तीनो द्रव्यों को कूटपीस कर दरदरा कर लें | अब रात्रि के समय इन्हें एक मिट्टी के बर्तन में रखकर ऊपर से पानी डाल दें..रात्रि भर अच्छी तरह भीगने के बाद सुबह इसे आंच पर चढ़ा कर काढ़ा तैयार कर लें यह योग सभी प्रकार के प्रदर रोग में उपयोगी है..
इसके उपयोग से पुराने से पुराना प्रदर रोग ठीक हो जाता है | साथ ही वेदना आदि में भी आराम मिलता है..
♦️उपयोग की विधि ♦️
इस काढ़े का उपयोग योनी में एनिमा देने के लिए किया जाता है | योनी में ड्यूस एवं पिच्चु को धारण करना चाहिए एवं साथ ही योनिमार्ग को इस काढ़े से धोना चाहिए | लगातार कुछ दिनों के प्रयोग से शीघ्र ही श्वेत प्रदर की समस्या नष्ट हो जाती है |
आयुर्वेद में त्रिफला क्वाथ से योनी प्रक्षालन को उपयुक्त चिकित्सा माना गया है..
गुलर योग
सामग्री
गुलर के पक्के फल का 50 ग्राम चूर्ण और 100 ग्राम मिश्री |
♦️विधि ♦️
गुलर के फलों को को टुकड़े टुकड़े करके सुखा लें | जब एक दम सुख जाए तब कूट पीसकर कर कपड़छन चूर्ण कर लें | इस चूर्ण में मिश्री मिलाकर अच्छी तरह ढक कर रखें |
♦️उपयोग एवं गुण ♦️
10 ग्राम तक की मात्रा में इस चूर्ण को खाकर ऊपर से गाय या बकरी का दूध ग्रहण करना चाहिए | अगर रक्त प्रदर की समस्या हो तो अशोकारिष्ट के साथ सेवन करना चाहिए | हमेशा ठन्डे जल के साथ ही इसका सेवन करना चाहिए | दिन में दो बार सुबह एवं शाम लिया जा सकता है | इसके उपयोग से सभी प्रकार के प्रदर रोग ठीक हो जाता है |
♦️श्वेत प्रदर (सफ़ेद पानी) के घरेलु नुस्खें..♦️
मुलहठी एवं चीनी 10 ग्राम एवं 20 ग्राम प्रत्येक को दोनों को पीसकर चूर्ण बना लें | आधा चम्मच चूर्ण सुबह और आधा चम्मच शाम को दूध के साथ सेवन करें.
सूखे हुए चमेली के पते 4 ग्राम और सफ़ेद फिटकरी 2 ग्राम दोनों को खूब महीन पिसलें | इसमें से 2 ग्राम चूर्ण शक्कर में मिलाकर रात के समय फांककर ऊपर से दूध पी लें | इसके प्रयोग से श्वेत प्रदर ठीक हो जाता है |
पके हुए केले के अन्दर फिटकरी का चूर्ण भरकर इसे दोपहर के समय खूब चबा चबा कर खाएं | इसके सेवन से सफ़ेद पानी की समस्या से राहत मिलती है |
पेट पर ठन्डे पानी का कपडा रोज 10 मिनट रखना चाहिए |
अशोक के पेड़ की छाल को 50 ग्राम की मात्रा में लें | इसे 1 किलो पानी में पकाएं जब पानी आधा रहे तब इसे आंच से निचे उतार कर छान कर दूध में मिलाकर सेवन करना श्वेत प्रदर के रोग में फायदेमंद रहता है |
अनार के छिलकों को ठन्डे पानी के साथ सेवन करने से फायदा मिलता है |
मूली का सेवन भी फायदेमंद रहता है | मूली के पतों का रस निकाल कर सेवन करने से भी लाभ मिलता है |
गुलाब के फुल की पत्तियों को मिश्री के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है |
जय श्री कृष्णा, ब्लॉग में आपका स्वागत है यह ब्लॉग मैंने अपनी रूची के अनुसार बनाया है इसमें जो भी सामग्री दी जा रही है कहीं न कहीं से ली गई है। अगर किसी के कॉपी राइट का उल्लघन होता है तो मुझे क्षमा करें। मैं हर इंसान के लिए ज्ञान के प्रसार के बारे में सोच कर इस ब्लॉग को बनाए रख रहा हूँ। धन्यवाद, "साँवरिया " #organic #sanwariya #latest #india www.sanwariya.org/
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मंगलवार, 27 जनवरी 2026
WHITE DISHCHARGE ♦️श्वेत प्रदर (सफ़ेद पानी)♦️
Cassia sop Q एक प्रभावशाली होम्योपैथिक मदर टिंचर है,
Cassia sop Q एक प्रभावशाली होम्योपैथिक मदर टिंचर है,
जो Cassia sophera पौधे की प्राकृतिक पत्तियों से तैयार की जाती है। यह दवा विशेष रूप से खांसी, दमा, ब्रोंकाइटिस और सांस की तकलीफ में उपयोगी मानी जाती है। जिन लोगों को बार-बार सीने में जकड़न, सांस फूलना या एलर्जी के कारण श्वसन समस्या रहती है, उनके लिए Cassia sop Q सहायक हो सकती है। यह फेफड़ों को मजबूत करने और श्वसन तंत्र के संतुलन में मदद करती है। प्राकृतिक और हर्बल गुणों से भरपूर यह औषधि होम्योपैथी में विश्वसनीय स्थान रखती है। दवा का प्रयोग हमेशा योग्य चिकित्सक की सलाह से करना चाहिए।
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सुहागा वो खनिज जो हर घर में दवा बनकर छिपा है!
सुहागा वो खनिज जो हर घर में दवा बनकर छिपा है! 🌸
कभी सोचा है जो “सुहागा” आपकी रसोई में रखा है — वो सिर्फ खाना पकाने के काम नहीं आता, बल्कि एक बहुमूल्य आयुर्वेदिक औषधि भी है! 🤔
हाँ, वही सुहागा जिसे संस्कृत में “टनक” कहा गया है — और जो तिब्बत व फारस की झीलों से निकलकर हमारे शरीर को भीतर से शुद्ध करता है। 🌊💎
आयुर्वेद में इसे बोरेक्स या टंकण भस्म कहा गया है — और यह शरीर, त्वचा, बाल, हृदय, यहाँ तक कि महिला स्वास्थ्य के लिए भी अमृत समान माना गया है! 💫
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🌿 सुहागा के मुख्य लाभ (Amazing Benefits)
🦵 1. जोड़ों के दर्द का रामबाण इलाज
सुहागा में मौजूद सूजनरोधी गुण (Anti-inflammatory properties) शरीर की सूजन, दर्द और जकड़न को कम करते हैं।
👉 गठिया या पुराने दर्द में इसे लेने से आराम मिलता है।
❄️ 2. बुखार में Cooling Effect
सुहागा शरीर को ठंडक देता है और बुखार में राहत पहुंचाता है।
💧 इसे पानी या दूध के साथ 5 मिनट उबालकर पीने से तेज बुखार में भी जल्दी आराम मिलता है।
❤️ 3. दिल की सेहत का रक्षक
सुहागा रक्त में कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और हृदय को स्वस्थ बनाए रखता है।
यह एंटीऑक्सीडेंट्स को बढ़ाता है, जिससे हृदय रोगों का खतरा कम होता है।
🍽️ 4. पाचन को बनाए दुरुस्त
आयुर्वेद में इसे उष्ण प्रकृति वाला माना गया है।
यह पाचन अग्नि को बढ़ाकर गैस, अपच और पेट फूलना जैसी समस्याओं से छुटकारा दिलाता है।
💆♀️ 5. त्वचा और बालों के लिए अद्भुत औषधि
👉 नारियल तेल में मिलाकर सिर पर लगाने से डैंड्रफ और बाल झड़ने की समस्या में राहत।
👉 त्वचा पर लगाने से मुंहासे, फुंसियाँ और संक्रमण दूर होते हैं।
👩🦰 6. महिलाओं के लिए वरदान (PCOS में लाभकारी)
सुहागा एक प्राकृतिक मूत्रवर्धक (diuretic) है।
यह PCOS में ओव्यूलेशन और मासिक धर्म को नियमित करता है तथा UTI संक्रमण से भी रक्षा करता है।
🤧 7. खांसी और बलगम के लिए असरदार दवा
सुहागा के कफनिस्सारक गुण फेफड़ों में जमा बलगम को पिघलाते हैं और बाहर निकालते हैं।
👉 ब्रोंकाइटिस और पुरानी खांसी में “टंकण भस्म + शीतोपलादि चूर्ण” बहुत उपयोगी है।
💢 8. मासिक धर्म दर्द (Dysmenorrhea)
टंकण भस्म के ऐंठनरोधी गुण मासिक धर्म के दर्द और भारी थक्कों को कम करते हैं।
👉 प्रवाल पिष्टी, अशोक चूर्ण और चंद्रप्रभा वटी के साथ लेने पर यह और प्रभावी होता है।
🧴 9. रूसी (Dandruff) की समस्या में उपाय
सरसों या नारियल तेल में सुहागा मिलाकर सिर पर लगाने से रूसी और खुजली खत्म हो जाती है। ✨
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⚠️ सुहागा के दुष्प्रभाव (Precautions)
आयुर्वेद में कहा गया है — “अति सर्वत्र वर्जयेत्” यानी किसी भी चीज़ की अधिकता हानिकारक होती है।
❌ अत्यधिक सेवन से
उल्टी, मिचली, या पेट दर्द हो सकता है।
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को नहीं लेना चाहिए।
पुरुषों को 2 महीने से अधिक लगातार सेवन नहीं करना चाहिए (शुक्राणु गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है)।
अधिक उपयोग से हड्डियों की मजबूती घट सकती है।
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🌼 सेवन विधि (Usage Method)
👉 सामान्यतः “टंकण भस्म” के रूप में 125mg – 250mg तक की मात्रा पर्याप्त मानी जाती है।
👉 इसे शहद, घी या गर्म पानी के साथ मिलाकर लिया जाता है।
(कृपया सेवन से पहले किसी आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह जरूर लें।)
🌿 निष्कर्ष (Conclusion)
सुहागा केवल एक खनिज नहीं — बल्कि यह प्रकृति का ऐसा उपहार है जो पाचन, त्वचा, जोड़ों और सांस की समस्याओं का एक साथ समाधान है।
बस सही मात्रा और समय पर इसका सेवन करें, और पाएँ स्वास्थ्य का खज़ाना! 💎 #fblifestyle
🌿 “प्रकृति में ही है असली चिकित्सा।”
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पेट के अल्सर को जड़ से मिटाने वाली होम्योपैथिक औषधि — Robinia Pseudacacia (रोबिनिया सूडोअकैसिया)
“पेट के अल्सर को जड़ से मिटाने वाली होम्योपैथिक औषधि – प्राकृतिक राहत, बिना साइड इफ़ेक्ट!”
⚕️ पेट का अल्सर (Stomach Ulcer) क्या है?
पेट के अंदर बनने वाला घाव या जलन अल्सर कहलाता है।
यह ज़्यादातर एसिडिटी, गैस, तनाव, या ग़लत खानपान से होता है।
तेज़ जलन, भूख न लगना, पेट दर्द, और मुँह में कड़वाहट इसके मुख्य लक्षण हैं।
💊 सर्वश्रेष्ठ होम्योपैथिक दवा — Robinia Pseudacacia (रोबिनिया सूडोअकैसिया)
👉 लाभ:
पेट में जलन, एसिडिटी और अल्सर के लिए सबसे प्रभावी दवा मानी जाती है।
रात में बढ़ने वाली जलन और खट्टी डकारें होने पर यह बहुत असरदार है।
पेट की दीवार को सुरक्षित रखती है और घाव को भरने में मदद करती है।
भूख और पाचन शक्ति को सामान्य करती है।
👉 कैसे लें:
30C शक्ति में, दिन में 2 बार 4 बूंदें या 4 गोलियाँ।
15 दिन तक लगातार सेवन करें और सुधार दिखने पर खुराक घटाएँ।
🌼 सहायक प्राकृतिक सुझाव:
✅ मसालेदार, तला हुआ भोजन और चाय-कॉफी से परहेज़ करें।
✅ ठंडा दूध, नारियल पानी और केले का सेवन करें।
✅ तनाव कम करने के लिए ध्यान और योग करें।
✅ खाने के तुरंत बाद न सोएँ।
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चाहे चश्मा कितने भी नंबर का हो वो भी उतरेगा |
आंखों(Eyes) की रोशनी कम होने की वजह है भोजन में विटामिन ए की कमी, जिस वजह से छोटी उम्र से ही आंखें कमजोर होने लगती है।
दूसरी वजह घंटों कंप्यूटर पर बैठकर काम करना या टेलीविजन देखना।
तीसरी वजह आंखों की पर ध्यान न देना।
ये कुछ वजह हैं जो आंखों की रोशनी को कम करती हैं और आपको चश्मा लगाने के लिए विवश करती है कुछ और वजह भी है जैसे की आधुनिक दौर में आनुवंशिकता, काम का दबाव, तनाव, पोषण की कमी, अधिक पढाई जैसे कारकों के कारण लोगों के चश्मे के नंबर बढ़ते जा रहे हैं। आँखों को धूल और इन्फेक्शन से बचाने के अलावा यहाँ कुछ ऐसे तरीके बताये जा रहे हैं जो आपकी आँखों की दृष्टि बढ़ा सकते हैं। घरेलू उपचार द्वारा आँखों की रोशनी किस तरह बढ़ाई जा सकती है आइये जानते हैं।
पहला प्रयोगः छः से आठ माह तक नियमित जलनेति करने से एवं पाँव के तलवों तथा कनपटी पर गाय का घी घिसने से लाभ होता है।
दूसरा प्रयोगः 7 बादाम, 5 ग्राम मिश्री और 5 ग्राम सौंफ दोनों को मिलाकर उसका चूर्ण बनाकर रात्रि को सोने से पहले दूध के साथ लेने से नेत्रज्योति बढ़ती है।
तीसरा प्रयोगः एक चने के दाने जितनी फिटकरी को सेंककर सौ ग्राम गुलाबजल में डालें और प्रतिदिन रात्रि को सोते समय इस गुलाबजल की चार-पाँच बूँद आँखों में डालकर आँखों की पुतलियों को इधर-उधर घुमायें। साथ ही पैरों के तलुए में आधे घण्टे तक घी की मालिश करें। इससे आँखों के चश्मे के नंबर उतारने में सहायता मिलती है तथा मोतियाबिंद में लाभ होता है।
नोट : ” नेत्र बिंदु ” या नासिका धृत सभी प्रकार के नेत्र रोगों को दूर करने व नेत्रज्योति को बढाने ने मदद करता है जरुर आजमायें
इन्हें भी आजमायें
आंखों की रोशनी बढ़ाने और चश्मा हटाने का घरेलु उपाय
1. आंखो से स्ट्रेस दूर करने के लिए अपनी दोनों हथेलियों को आपस में रगड़े, जिससे गर्मी पैदा होगी। फिर आंखे बंद करके हथेलियों को आंखों पर रखें। ध्यान रहें आंखों पर हाथ रखते पर रोशनी बिल्कुल ना आएं। दिन में ऐसा 3-4 बार करें।
2. आंवले के पानी से आंख धोने से या गुलाब जल डालने से आंखे स्वस्थ रहती है।
3. आंखो के हर तरह के रोग जैसे पानी का गिरना, आंखे आना, आंखो की दुर्बलता आदि होने पर रात को 7-8 बादाम भिगोकर सुबह पीसकर पानी में मिलाकर पीए।
4. एक लीटर पानी को तांबे के जग में रात भर के लिए रख दें और सुबह उठकर इस पानी को पीएं। तांबे में रखा पानी शरीर विशेषकर आंखों को बहुत फायदा पहुंचाता है।
5. नींबू एवं गुलाब जल को समान मात्रा में मिलाकर 1-1घण्टे के अंतर में आंखो में डालने से आंखो में ठंडक मिलती है।
6. आंवले का मुरब्बा दिन में दो बार खाएं इससे आंखों की रोशनी बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी
7. एक चम्मच सौंफ दो बादाम और आधा चम्मच मिश्री पीस लें इसे रोजाना रात को सोने से पहले एक गिलास दूध के साथ लें
8. जीरे और मिश्री को बराबर मात्रा में पीस लें इसे रोजाना एक चम्मच घी के साथ खाएं।
9. केला, गन्ना खाना आंखों के लिए हितकारी है। गन्ने का रस पीएं। एक नींबू एक गिलास पानी में पीते रहने से जीवन भर नेत्र ज्योति बनी रहती है।
10. तीन भाग धनिया के साथ एक भाग चीनी मिक्स करें। दोनों को पीसकर पेस्ट बना लें। फिर इसे पानी में गर्म करें और एक घंटे के लिए कवर करके रख दें। फिर एक साफ कॉटन का कपड़ा लेकर इस मिश्रण को छान लें और आंखों में आई ड्रॉप की तरह इस्तेमाल करें।
11. बालों पर रंग, हेयर डाई और केमीकल शैम्पू लगाने से परहेज करें ।
12. नियमित रूप से अंगूर खाएं, अंगूर के सेवन से रात में देखने की क्षमता बढ़ती है।
13. आँखों से चश्मा हटाने के लिए अपनी आँखों के आस पास अखरोट के तेल की मालिश करें इससे आँखों की रौशनी तेज होती है और आँखों से चश्मा भी उतर जाता है । यह बहुत ही आसान किन्तु अचूक उपाय है।
14. आधुनिक लाइफस्टाइल में अनिद्रा की समस्या बहुत कॉमन है। अगर आप पूरी नींद नहीं लेंगे तो इसका असर आपकी आंखों पर भी पड़ेगा। जिससे आँखों के नीचे काले घेरे तो होंगे ही, साथ ही आंखों की रोशनी भी कम होगी। इसलिए एक दिन में 7-9 घंटे की नींद बहुत जरूरी है।
15. कुछ सेकंड के लिए घड़ी की दिशा में अपनी आँखें गोल घुमाए , और फिर कुछ सेकंड के लिए विपरीत दिशा में घुमाए और इसे चार या पांच बार दोहराएँ।
16. सुबह के समय उठकर बिना कुल्ला किये मुँह की लार (saliva) अपनी आंखों में काजल की तरह लगाए। लगातार 6 महीने करते रहने पर चश्मे का नंबर कम हो जाता ह!
“Chelidonium Majus – जिगर की सफाई और ऊर्जा लौटाने वाली होम्योपैथिक औषधि”
“Liver Detox – जिगर को फिर से ताज़ा करने के आसान प्राकृतिक तरीके”
भाग 1: आसान Liver Detox Tips
1. सुबह गुनगुना नींबू पानी
रोज़ खाली पेट एक ग्लास गुनगुना पानी + ½ नींबू।
जिगर की सफ़ाई और पाचन दोनों बेहतर होते हैं।
2. हल्दी वाला पानी या दूध
हल्दी में curcumin जिगर की सूजन कम करता है और डिटॉक्स प्रक्रिया तेज करता है।
3. हरी सब्ज़ियाँ और फल बढ़ाएँ
खास तौर पर—पालक, मेथी, चुकंदर, गाजर, सेब।
इनमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट लिवर को पुनर्स्थापित करते हैं।
4. ओवरईटिंग तुरंत बंद करें
जिगर पर लोड बढ़ता है। दिन में 3–4 हल्के, संतुलित मील खाएँ।
5. शुगर, तला-भुना, शराब कम करें
ये लिवर फैट बढ़ाते हैं और सफाई प्रक्रिया को धीमा करते हैं।
6. पर्याप्त पानी
दिनभर 8–10 ग्लास पानी लिवर की फ्लशिंग को सपोर्ट करता है।
🙏 “Chelidonium Majus – जिगर की सफाई और ऊर्जा लौटाने वाली होम्योपैथिक औषधि”
यह दवा कब उपयोगी है
लिवर में heaviness
भूख कम होना
दाएँ कंधे या दाएँ पसली के नीचे दर्द
तेल/तला हुआ खाना खाने से तकलीफ़
पीलिया के शुरुआती लक्षण
मुख्य लाभ (Benefits)
जिगर की कार्यक्षमता को सक्रिय करता है
बाइल का प्रवाह सुधरता है
अपच, गैस और कड़वा स्वाद कम करता है
थकान और heaviness घटाता है
कैसे उपयोग करें (Use / Treatment Guide)
Chelidonium Majus 30 – दिन में 2 बार, 5–5 बूंद
या
Chelidonium Majus Q (Mother Tincture) – 10 बूंद + ¼ कप पानी, दिन में 2 बार
(3–4 सप्ताह उपयोग, फिर चिकित्सक से सलाह). 🙏
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लहसुन और शहद: शरीर को अंदर से सहारा देने वाला पारंपरिक उपाय 🍯🧄
लहसुन और शहद: शरीर को अंदर से सहारा देने वाला पारंपरिक उपाय 🍯🧄
बहुत से लोग यह महसूस करते हैं कि शरीर में बार-बार थकान रहती है, कमजोरी जल्दी आ जाती है या अंदरूनी ताकत कम लगती है। ऐसे में लहसुन और शहद का यह पुराना घरेलू नुस्खा सामान्य स्वास्थ्य-जागरूकता के लिए जाना जाता है।
✨ यह देसी मिश्रण क्यों उपयोगी माना जाता है?
* शरीर के अंदर रक्त प्रवाह को बेहतर बनाए रखने में सहायक
* दिल और नसों की सेहत के लिए सहारा देने वाला
* रोज़मर्रा की थकान और जकड़न को कम करने में मददगार
* इम्युनिटी को सपोर्ट करने वाला
* ठंड के मौसम में शरीर को संतुलित गर्माहट देने वाला
🥄 सेवन की सामान्य विधि
➡️ 2–3 लहसुन की कलियों को हल्का-सा कूट लें
➡️ उन्हें शुद्ध, प्राकृतिक शहद में मिलाएँ
➡️ सुबह खाली पेट 1 चम्मच सेवन करें
➡️ नियमित और सीमित मात्रा में लें
⏳ नियमित सेवन से क्या महसूस हो सकता है?
* शरीर में हल्की फुर्ती और ऊर्जा
* सुस्ती और अकड़न में कमी
* दिल और नसों को सामान्य सपोर्ट
⚠️ ज़रूरी सावधानियाँ
❌ अधिक मात्रा में सेवन न करें
❌ पेट में जलन, अल्सर या संवेदनशीलता हो तो न लें
❌ BP या हार्ट से जुड़ी दवाएँ लेते हों तो पहले विशेषज्ञ से सलाह लें
❌ गर्भवती महिलाएँ बिना परामर्श सेवन न करें
👉 यह नुस्खा इलाज नहीं, बल्कि पारंपरिक घरेलू जानकारी पर आधारित स्वास्थ्य-जागरूकता के लिए है।
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पुरानी व जिद्दी कब्ज की असरदार दवा Alumen
पुरानी व जिद्दी कब्ज की असरदार दवा
🔹 मुख्य उपयोग (Uses):
लंबे समय से चली आ रही कब्ज
मल बहुत कठोर, सूखा, गाँठदार
शौच में बहुत ज़ोर लगाना
गुदा में जलन/दर्द
बच्चों व बुज़ुर्गों में कब्ज
शौच के बाद भी पेट साफ न लगना
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🔹 Keynotes (मुख्य लक्षण):
मल पत्थर जैसा कठोर
शौच करने की इच्छा कम
मल त्याग में दर्द
बार-बार कब्ज लौट आना
ठंडे स्वभाव के मरीज
शरीर में सूखापन
➡️ Alumen = “Hard, Dry Stool Constipation Remedy”
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🔹 Dose (30C):
👉 4 गोलियां या 2 बूंद
👉 दिन में 2 बार
👉 7–10 दिन
📌 पुरानी कब्ज में:
👉 दिन में 1 बार भी पर्याप्त हो सकती है
👉 असर दिखे तो डोज घटाएँ
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⚠️ सावधानियाँ:
फाइबर व पानी ज़रूर बढ़ाएँ
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Gelsemium और Anacardium Orientale – दिमाग़ और नर्वस सिस्टम को मज़बूत करने वाली अद्भुत होम्योपैथिक औषधियाँ!"
Gelsemium और Anacardium Orientale – दिमाग़ और नर्वस सिस्टम को मज़बूत करने वाली अद्भुत होम्योपैथिक औषधियाँ!" 
अगर आपका दिमाग़ जल्दी थक जाता है, आत्मविश्वास की कमी रहती है, या तनाव और डर के कारण शरीर कांपने लगता है — तो ये दोनों दवाएँ एक वरदान हैं। आइए जानते हैं इनके कमाल के फायदे 👇
💊 1. Gelsemium – डर, कमजोरी और घबराहट की दवा
🧠 मुख्य लाभ:
मानसिक और शारीरिक थकावट में राहत
भय, घबराहट, परीक्षा या इंटरव्यू का डर दूर करे
नर्वस सिस्टम को शांत और मजबूत बनाए
सिर भारी लगे या आंखों में बोझ महसूस हो तो लाभकारी
💡 उपयोग:
परीक्षा से पहले डर, कंपकंपी या टेंशन में
अत्यधिक थकान या तनाव के कारण सिरदर्द में
🕊️ इलाज की विधि:
Gelsemium 30 या 200 potency, दिन में 1-2 बार (डॉक्टर की सलाह अनुसार)
💊 2. Anacardium Orientale – आत्मविश्वास बढ़ाने और याददाश्त के लिए बेहतरीन
🧠 मुख्य लाभ:
कमज़ोर याददाश्त, भुलक्कड़पन और कन्फ्यूजन में असरदार
नर्वस सिस्टम और दिमाग़ की कार्यक्षमता बढ़ाए
नकारात्मक सोच, चिड़चिड़ापन और आत्म-संदेह को कम करे
पाचन शक्ति और भूख को भी बेहतर बनाए
💡 उपयोग:
परीक्षा की तैयारी में याददाश्त बढ़ाने
मानसिक दबाव, आत्मविश्वास की कमी या तनाव में
🕊️ इलाज की विधि:
Anacardium Orientale 30 या 200 potency, दिन में 1 बार (डॉक्टर की सलाह अनुसार)
🌸 निष्कर्ष:
👉 Gelsemium तनाव और डर से मुक्ति दिलाता है,
👉 Anacardium Orientale दिमाग़ की शक्ति और आत्मविश्वास बढ़ाता है।
दोनों मिलकर मानसिक सशक्तिकरण का परफ़ेक्ट कॉम्बिनेशन बनाते हैं 🙏
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बस कार मे बेठने पर उल्टी आती हो तो ये दवा साथ रखे
बस कार मे बेठने पर उल्टी आती हो तो ये दवा साथ रखे
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हर तरह की सर्दी को दूर करने के लिए बहुत ही उपयोगी औषधि सैपोनैरिया औषधि
सैपोनैरिया Saponaria (Soap root)
परिचय-
सैपोनैरिया औषधि हर तरह की सर्दी को दूर करने के लिए बहुत ही उपयोगी औषधि मानी जाती है। इसके अलावा गले की जलन, सर्दी-जुकाम आदि में भी ये औषधि लाभकारी मानी जाती है। विभिन्न रोगों के लक्षणों के आधार पर सैपोनैरिया औषधि से होने वाले लाभ-
सिर से सम्बंधित लक्षण- रोगी के सिर में इस तरह का दर्द होना जैसे कि कोई सुई चुभा रहा हो, खासकर अक्षिगन्हरों के ऊपर और बाईं तरफ ये दर्द रोजाना शाम के समय और गति करने से बढ़ जाता है। सिर में खून जमा हो जाना। रोगी को अपनी गर्दन के जोड़ पर थकावट सी महसूस होती है। रोगी को ऐसा लगता है कि उसने बहुत सारी शराब पी रखी है और वह बाईं तरफ गिर रहा हो। रोगी को अपनी नाक बंद सी महसूस होती है इसी के साथ ही रोगी को बहुत ज्यादा छींके भी आती है और नाक में खुजली होती है। इस तरह के लक्षणों में रोगी को सैपोनैरिया औषधि देने से लाभ मिलता है।
आंखों से सम्बंधित लक्षण- रोगी की आंखों में बहुत तेजी से होने वाला दर्द। अक्षिगोलकों में बहुत अंदर तक ऐसा दर्द जैसे कि सुई चुभ रही हो, रोगी की पलकों में स्नायु का दर्द जो बाईं ओर ज्यादा होता है। रोगी जैसे ही रोशनी में आता है उसकी आंखों में दर्द सा होने लगता है, आंखों से सब कुछ धुंधुला सा दिखाई देना, अक्षिगोलकों का बाहर की ओर फैलना जो पढ़ने-लिखने से ओर बढ़ जाता है। इस तरह के लक्षणों में रोगी को सैपोनैरिया औषधि देने से लाभ होता है।
आमाशय से सम्बंधित लक्षण- रोगी कुछ भी खाता-पीता है तो उस चीज को निगलने में उसे बहुत ज्यादा परेशानी होती है। रोगी का जी मिचलाते रहना, सीने में जलन सी होना, पूर्णता महसूस होना जो रोगी को डकारें आती रहती है फिर भी कम नहीं होती आदि लक्षणों के आधार पर रोगी को सैपोनैरिया औषधि का सेवन कराना उपयोगी साबित होता है।
दिल से सम्बंधित लक्षण- दिल में धड़कन का अनियमित होना जैसे कभी तो दिल तेज धड़कता है और कभी कम गति से धड़कता है, दिल का कमजोर सा महसूस होना, नाड़ी का बहुत धीरे-धीरे चलना जैसे लक्षणों में रोगी को सैपोनैरिया औषधि का सेवन कराने से रोगी कुछ ही समय में स्वस्थ हो जाता है।
वृद्धि-
रात के समय, दिमागी मेहनत करने से रोग बढ़ जाता है।
तुलना-
सैपोनैरिया औषधि की तुलना सेपोनिन, क्वालाया, पैरिस, साइक्लामेन और हैलोनियम से की जा सकती है। #fblifestylechallenge #fbreelsfypシ゚viralfbreelsfypシ゚viral #facebookpostシ #fbyシvideo #viralpost2026 #homoeopathicmedicine #homoeopathy
“Chelidonium Majus – जिगर (Liver) को मजबूत करने वाली शक्तिशाली होम्योपैथिक औषधि”
“Chelidonium Majus – जिगर (Liver) को मजबूत करने वाली शक्तिशाली होम्योपैथिक औषधि” 
Chelidonium Majus को होम्योपैथी में लीवर की दवाइयों की रानी (Queen of Liver Remedies) कहा जाता है। यह खासतौर पर उन लोगों के लिए बेहद असरदार है जिनका लीवर कमजोर हो गया हो, पाचन धीमा हो, और शरीर में भारीपन या थकान महसूस होती हो।
⭐ Chelidonium Majus के मुख्य लाभ (Benefits)
🔸 1. लीवर की कमजोरी दूर करे
लीवर में सूजन, दर्द या भारीपन हो तो यह दवा तेज़ी से आराम देती है।
यह लीवर को साफ करके उसके कार्य को बेहतर बनाती है।
🔸 2. पाचन तंत्र मजबूत बनाए
अपच, गैस, भूख न लगना, खाना खाते ही पेट फूलना—इन सबमें लाभ।
🔸 3. पीलिया (Jaundice) में उपयोगी
त्वचा पीली होना, आंख पीली होना, पेशाब पीला होना—इन स्थितियों में प्रभावशाली है।
🔸 4. दाहिने कंधे में दर्द
Chelidonium का खास लक्षण—
👉 लीवर की समस्या के साथ दाहिने कंधे में दर्द
यह संकेत इस दवा को चुनने में मदद करता है।
🔸 5. सिरदर्द और थकान में राहत
जब लीवर सही से काम नहीं करता, शरीर थक जाता है। यह दवा उस थकान को मिटाती है।
⭐ Chelidonium Majus का उपयोग (Uses)
✓ Fatty liver
✓ Liver enlargement
✓ Weak digestion
✓ Bloating & gas
✓ Liver-related skin problems
✓ Jaundice
✓ Chronic acidity
⭐ Chelidonium Majus कैसे काम करती है? (Mode of Action)
यह दवा लीवर की कोशिकाओं को सक्रिय करके
✔ टॉक्सिन्स निकालती है
✔ पित्त (Bile) बनने में मदद करती है
✔ पाचन क्रिया सुधारती है
⭐ Chelidonium Majus की सामान्य खुराक (Dosage)
👉 Mother Tincture (Q): 10–15 बूंद, आधा कप पानी में, दिन में 2–3 बार
या
👉 30C / 200C: डॉक्टर की सलाह के अनुसार
(खुराक हमेशा व्यक्ति के लक्षणों के अनुसार डॉक्टर द्वारा तय होनी चाहिए)
🙏 किसके लिए खास है?
जिन्हें बार-बार गैस, एसिडिटी होती है
जिनका लीवर कमजोर है
जिन्हें भोजन के बाद भारीपन होता है
जिनको पीलिया की शिकायत रहती है
जिनके दाहिने कंधे में दर्द रहता है
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Arum Triphyllum – गले, नाक और आवाज़ की जलन में तुरन्त असर वाली होम्योपैथिक औषधि”
Arum Triphyllum – गले, नाक और आवाज़ की जलन में तुरन्त असर वाली होम्योपैथिक औषधि” 
Arum Triphyllum एक शक्तिशाली होम्योपैथिक दवा है, खासकर उन लोगों के लिए जिनको गला, नाक और होंठों में जलन, छिलना और लगातार पानी आना जैसी परेशानियाँ होती हैं। यह दवा खासतौर पर बच्चों में सर्दी-जुकाम और गले की तकलीफ में भी चमत्कारिक मानी जाती है।
🌡️ मुख्य लाभ और उपयोग (Benefits & Uses)
✔️ 1. गले की सूजन, दर्द और जलन में राहत
गले में खुरदुरापन
बात करते या निगलते समय तेज़ जलन
आवाज बैठ जाना (Hoarseness)
✔️ 2. नाक से पानी बहना और खुजली में आराम
तेज़ बहती हुई नाक (Watery discharge)
नाक के आस-पास लालपन और छिलना
बहुत ज्यादा छींक आना
✔️ 3. होंठों और चेहरे की त्वचा में जलन व सूजन
होंठ फटना, सूजना या छिल जाना
मुंह के कोनों में दर्द
बार-बार होंठ चबाने या छूने से बढ़ती समस्या
✔️ 4. बच्चों में सर्दी-खांसी के लक्षणों में उपयोगी
बच्चे नाक छू-छूकर रगड़ते हैं
बार-बार नाक से खून जैसा पानी
चिड़चिड़ापन और बेचैनी
🩺 इलाज में कैसे मदद करती है? (Treatment Action)
शरीर में सूजन और जलन को शांत करती है
स्राव (Discharge) को कंट्रोल करती है
गले, नाक और आवाज़ से जुड़े लक्षणों को जल्दी सुधारती है
बच्चों में होने वाली तीव्र सर्दी-जुकाम में बेहद असरदार
💧 डोज (सामान्य मात्राएँ)
👉 30C या 200C potency — 1–2 बार दैनिक
👉 तेज़ लक्षणों में डॉक्टर की सलाह अनुसार
(नोट: किसी भी दवा का सेवन होम्योपैथिक डॉक्टर की सलाह से करें।)
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Tribulus Terrestris Q – किडनी, पथरी, प्रोस्टेट और पुरुष कमजोरी की प्रमुख होम्योपैथिक दवा
Tribulus Terrestris Q – किडनी, पथरी, प्रोस्टेट और पुरुष कमजोरी की प्रमुख होम्योपैथिक दवा
Tribulus Terrestris Q एक प्रसिद्ध Homeopathic Mother Tincture है, जिसे आयुर्वेद में गोखरू कहा जाता है।
यह दवा मुख्य रूप से किडनी, मूत्र मार्ग, पथरी, प्रोस्टेट और पुरुष स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं में अत्यंत उपयोगी मानी जाती है।
🔹 मुख्य उपयोग (Uses & Benefits)
🚽 किडनी व यूरिनरी समस्याएँ
पेशाब में जलन व दर्द
बार-बार पेशाब लगना
पेशाब रुक-रुक कर आना
Urinary Tract Infection (UTI)
किडनी की कमजोरी में सहायक
🪨 पथरी (Kidney / Urinary Stone)
कमर के एक तरफ तेज दर्द
पेशाब में रेत या खून
शुरुआती स्टेज की पथरी में निकालने में सहायक
👉 खासकर छोटी पथरी में Tribulus Q बहुत उपयोगी मानी जाती है।
👨⚕️ प्रोस्टेट (BPH – Enlarged Prostate)
बुज़ुर्ग पुरुषों में प्रोस्टेट बढ़ना
पेशाब की धार कमजोर
रात में बार-बार पेशाब
💪 पुरुष स्वास्थ्य (Male Health)
शारीरिक कमजोरी
कामेच्छा (Libido) में कमी
स्पर्म काउंट व स्टैमिना में सहायक
💊 Dosage (मात्रा)
Tribulus Terrestris Q
👉 10–15 बूंद
👉 ½ कप पानी में
👉 दिन में 2–3 बार
👉 भोजन से 15–30 मिनट पहले या बाद
⏳ Chronic cases:
6–8 हफ्ते उपयोग
हर 3–4 हफ्ते बाद 7 दिन का ब्रेक रखें
🔄 Best Combinations (डॉक्टर की सलाह से)
🪨 Kidney Stone → Tribulus Q + Berberis Vulgaris Q
🔥 UTI / Burning → Tribulus Q + Cantharis Q
👨⚕️ Prostate → Tribulus Q + Sabal Serrulata Q
💪 Male Weakness → Tribulus Q + Damiana Q
⚠️ सावधानियाँ
अत्यधिक मात्रा न लें
गंभीर किडनी फेल्योर में डॉक्टर की सलाह ज़रूरी
गर्भवती महिलाएँ सेवन न करें
नियमित पानी पीना बहुत आवश्यक|
📝 नोट:
यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है।
दवा का प्रयोग हमेशा चिकित्सकीय सलाह से ही करें।
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Dulcamara – मौसम बदलते ही बीमार पड़ने वालों की खास दवा!
Dulcamara – मौसम बदलते ही बीमार पड़ने वालों की खास दवा!
Dulcamara को खासकर नमी, बारिश और ठंड के असर से होने वाली बीमारियों में तेजी से फायदा देने वाली दवा माना जाता है।
जो लोग कहते हैं —
> “बारिश आई नहीं कि सर्दी-जुकाम, खांसी और दर्द शुरू!”
उनके लिए यह Best Remedy है।
🌟 मुख्य लाभ (Benefits)
समस्या Dulcamara कैसे काम करती है
🌧️ मौसम बदलने से सर्दी-जुकाम शरीर को मौसम के बदलाव से लड़ने की शक्ति देती है
🤧 एलर्जी, छींक नाक और गले की सूजन कम करे
🦵 जोड़ों में दर्द, सूजन ठंड लगने से हुए दर्द में खास फायदा
❄️ ठंड से Skin रैश खुजली, लाल दाने में राहत
🚽 दस्त, पेट दर्द ठंडी चीज़ खाने से हुए दस्त में तेजी से असर
🧱 मूत्र रुक जाना पेशाब की दिक्कतों में लाभदायक
🧲 किन लोगों पर जल्दी असर?
✔️ जिनको ठंड लगते ही बीमारी चिपक जाए
✔️ गीली मिट्टी / पानी में काम करने वाले
✔️ बारिश में भीगने के बाद बुखार, खांसी शुरू हो जाए
✔️ शरीर पर ठंडी हवा का ज़ोर पड़ते ही जकड़न
🏥 किन रोगों में उपयोग? (Indications)
Acute Cold & Cough
Rheumatic Pain (बारिश में बढ़ने वाला)
Skin Eruptions with Itching
Diarrhea from Cold Drinks/Ice Cream
Neuralgia (नसों का दर्द)
💊 सेवन विधि / Potency Guide
पोटेंसी कब उपयोग करें
30C अचानक सर्दी-जुकाम, दर्द
200C पुरानी या बार-बार होने वाली समस्या
Q (मदर टिंचर) जकड़न, Chronic rheumatic pain में डॉक्टर की सलाह से
⏱️ दिन में 2 बार या आवश्यकता अनुसार
⚠️ असर शुरू होते ही दवा बंद कर दें
🔥 Keynote संकेत
> “नमी + ठंड + मौसम बदलाव → बीमारी”
गर्म चीज़ों से आराम मिले 🫖🔥
⚠️ सावधानियाँ
गंभीर बुखार या सांस लेने में तकलीफ हो तो डॉक्टर को दिखाएँ
बच्चों में डोज केवल चिकित्सक की सलाह पर 🙏
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Causticum — नसों की कमज़ोरी और जकड़न का दमदार इलाज!
Causticum — नसों की कमज़ोरी और जकड़न का दमदार इलाज!
Causticum को होम्योपैथी की दुनिया में Nerve Specialist Medicine भी कहा जाता है। यह सबसे ज़्यादा उन लोगों में असर करती है जिनमें मांसपेशियों में कमजोरी, जकड़न या लकवा जैसा असर दिखे।
🌟 मुख्य लाभ (Benefits)
उपयोग कैसे मदद करती है
✋ हाथ-पैर में कमजोरी Nerves को मजबूत कर चलने-फिरने में सुधार
🤐 आवाज बैठना (Hoarseness) Vocal cords को राहत, Teachers/Singers के लिए श्रेष्ठ
💧 बार-बार पेशाब लीक होना मूत्र नियंत्रण में फायदा
🔥 जोड़ों की जकड़न सुबह उठते समय stiffness दूर
🔔 चेहरे की नसें खिंचना Facial palsy में उपयोगी
😨 पुरानी जलन का दर्द Burns से बनी स्कार में राहत
😭 भावुकता और डर Nervous system को calm करती है
---
🧠 किन लोगों पर सबसे जल्दी असर?
✔️ जिनको रात में, सर्दी में दर्द व जकड़न बढ़े
✔️ दर्द ठंड से बढ़े और गर्म चीज़ें राहत दें
✔️ भावुक, ज़रा सी बात पर रो पड़ने वाले
✔️ पुरानी चोट के बाद कमजोरी
🏥 किन रोगों में उपयोग? (Indications)
Paralysis (लकवा की प्रारंभिक अवस्था)
Vocal Cord Weakness
Urinary Incontinence (पेशाब रुक न पाए)
Rheumatism (जोड़ों में दर्द)
Burn Injury Effects
Bell’s Palsy
💊 पोटेंसी / सेवन विधि
पोटेंसी कैसे और कब
30C हल्की नसों की कमजोरी, आवाज बैठना
200C पुराने केस, पेशाब नियंत्रण समस्या
1M लकवा और गंभीर नर्व समस्या — केवल डॉक्टर की सलाह से
📌 2–3 बार दिन में (स्थिति के अनुसार)
📌 असर होते ही खुराक रोक देना — यह बहुत जरूरी है
⚠️ सावधानियाँ
❌ अचानक पेशाब रुक जाए या तेज़ दर्द हो — तुरंत डॉक्टर
❌ लंबे समय तक बिना सलाह के न लें
🎯 Keynote पहचान
> “कमज़ोरी + जकड़न + दर्द → गर्म चीज़ों से आराम मिले!”
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“Symphytum – टूटी हड्डियों को जोड़ने वाली होम्योपैथी की चमत्कारी औषधि”
“Symphytum – टूटी हड्डियों को जोड़ने वाली होम्योपैथी की चमत्कारी औषधि”
Symphytum officinale एक शक्तिशाली होम्योपैथिक दवा है जिसे हड्डियों की चोट, फ्रैक्चर, बोन-हीलिंग और दर्द में विशेष रूप से “बोन-निटर” कहा जाता है।
🌱 Symphytum क्या है?
यह Comfrey नामक पौधे से बनी दवा है, जो हड्डियों और ऊतकों की हीलिंग को तेज करने के लिए जानी जाती है। इसे “कपास की तरह टूटी जगह को जोड़ने वाली दवा” भी माना जाता है।
🌟 Symphytum के मुख्य लाभ (Benefits)
✔️ 1. टूटी हड्डियों को जल्दी जोड़ती है
फ्रैक्चर के बाद हड्डियों के जुड़ने की प्रक्रिया को तेज करती है।
✔️ 2. प्लास्टर में भी दर्द कम करती है
फ्रैक्चर साइट पर चुभन, जलन या खिंचाव जैसे दर्द में राहत देती है।
✔️ 3. बोन के दर्द और कमजोरी में असरदार
पुरानी चोट या कमजोरी से होने वाले हड्डियों के दर्द में मददगार।
✔️ 4. सर्जरी के बाद बोन-रिकवरी में लाभकारी
ऑर्थोपेडिक सर्जरी के बाद हीलिंग को सपोर्ट करती है।
✔️ 5. ऑखों की चोट (Black Eye) पर भी उपयोगी
आँख पर चोट लगने से काला पड़ना, दर्द या सूजन हो तो लाभ देती है।
💊 किस-किस समस्या में दी जाती है? (Uses / Treatment)
फ्रैक्चर के बाद बोन-हीलिंग
बोन हममार्ज (Bone Bruise)
पुरानी चोट के दर्द
स्पोर्ट्स इंजरी
गहरे चोट के बाद दर्द
आँख की चोट (Black Eye)
हड्डियों में कमजोरी
🧪 Symphytum कैसे ली जाती है? (Dosage)
> Symphytum 30C या 200C
दिन में 2 बार
4–5 बूंदें या 4 globules
फ्रैक्चर के केसेज़ में डॉक्टर अक्सर इसे Calcarea Phos के साथ देते हैं ताकि बोन-हीलिंग और भी तेज हो।
⚠️ सावधानियाँ
किसी भी फ्रैक्चर में डॉक्टर द्वारा एक्स-रे और प्लास्टर अनिवार्य है।
यह दवा हड्डी को जोड़ने में मदद करती है, लेकिन प्लास्टर का विकल्प नहीं है। 🙏
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पत्ता गोभी में प्राकृतिक ठंडक होती है, जिसे लोग पैरों की सूजन और भारीपन कम करने के लिए उपयोग करते हैं।

1. सूजन कम करने के लिए
पत्ता गोभी में प्राकृतिक ठंडक होती है, जिसे लोग पैरों की सूजन और भारीपन कम करने के लिए उपयोग करते हैं।
2. पैरों की थकान में आराम
दिनभर खड़े रहने या ज्यादा चलने से पैरों में जो थकान आती है, उसमें पत्ता गोभी बांधने से सुकून महसूस किया जाता है।
3. जलन और गर्माहट शांत करने के लिए
पैरों में जलन या गर्मी महसूस होने पर पत्ता गोभी की ठंडी तासीर राहत देने में मदद करती है।
4. एड़ी दर्द में आराम
कुछ लोग एड़ी में दर्द होने पर रात को पत्ता गोभी बांधकर सोते हैं, जिससे अगली सुबह हल्कापन महसूस होता है।
5. पैरों की अकड़न कम करने के लिए
लंबे समय तक बैठे रहने या अचानक ज्यादा चलने से आई अकड़न में यह घरेलू उपाय अपनाया जाता है।
6. ब्लड सर्कुलेशन बेहतर महसूस होने के लिए
पत्ता गोभी बांधने से पैरों में आराम मिलने के कारण लोग इसे रक्त प्रवाह से जोड़कर देखते हैं।
7. वैरिकोज वेन्स जैसी समस्या में सहायक मान्यता
लोक अनुभवों में इसे नसों की सूजन और भारीपन में राहत देने वाला माना जाता है।
8. प्राकृतिक और केमिकल-फ्री उपाय
यह एक ऐसा घरेलू तरीका है जिसमें किसी दवा या केमिकल का इस्तेमाल नहीं होता।
9. रात में बेहतर आराम के लिए
सोते समय पैरों पर बांधने से ठंडक मिलती है, जिससे नींद में आराम महसूस हो सकता है।
10. सूजे हुए टखनों में राहत के लिए
टखनों में आई सूजन में लोग पत्ता गोभी को हल्का दबाकर बांधते हैं।
11. चोट के बाद आई सूजन में उपयोग
हल्की चोट या मोच के बाद होने वाली सूजन में इसे सहायक माना जाता है।
12. पैरों की बदबू और पसीने में कमी का अनुभव
कुछ लोगों का मानना है कि यह पैरों की नमी और बदबू को संतुलित करने में मदद करता है।
13. ठंडक देकर तनाव कम करने के लिए
पैरों में ठंडक मिलने से पूरे शरीर में रिलैक्सेशन महसूस होता है।
14. आसान और सस्ता घरेलू उपाय
पत्ता गोभी आसानी से उपलब्ध होती है और इसे इस्तेमाल करना भी सरल है।
15. आयुर्वेदिक घरेलू परंपरा से जुड़ा उपाय
भारतीय घरों में यह उपाय पीढ़ियों से अनुभव के आधार पर अपनाया जाता रहा है।
उपयोग करने का सामान्य तरीका
✔ पत्ता गोभी का ताज़ा पत्ता लें
✔ हल्का दबाकर उसका रस सक्रिय करें
✔ पैर या एड़ी पर रखें
✔ कपड़े या पट्टी से हल्के से बांध लें
✔ 1–2 घंटे या रातभर रखें
धूम्रपान की लत से छुटकारा – Lobelia Inflata Homeopathy Medicine”
धूम्रपान की लत से छुटकारा – Lobelia Inflata Homeopathy Medicine”
जो लोग बार-बार कसम खाते हैं — “अब नहीं पीऊँगा” — पर फिर सिगरेट हाथ में आ जाती है, उनके लिए होम्योपैथी में एक अद्भुत औषधि है —
👉 Lobelia Inflata (लोबेलिया इन्फ्लाटा) 💧
यह दवा शरीर की निकोटिन पर निर्भरता कम करती है और मन को शांत व नियंत्रित रखती है ताकि सिगरेट की लालसा घटती जाए।
🔹 मुख्य लाभ (Key Benefits):
1. 💨 सिगरेट की तलब कम करती है:
धीरे-धीरे निकोटिन की craving घटाती है जिससे धूम्रपान छोड़ना आसान बनता है।
2. 🫁 फेफड़ों की सफाई में मदद:
सिगरेट से जमा टॉक्सिन को बाहर निकालने में मदद करती है और सांस को ताज़ा करती है।
3. 😌 चिंता व बेचैनी कम करती है:
धूम्रपान छोड़ने पर होने वाली घबराहट, चिड़चिड़ापन या सिर दर्द जैसी withdrawal समस्याओं में राहत देती है।
4. ⚡ शरीर की ऊर्जा और ऑक्सीजन लेवल बढ़ाती है:
धूम्रपान से घटे ऑक्सीजन लेवल को सामान्य कर शरीर में नई ताजगी लाती है।
💊 कैसे लें (Use / Dosage):
Potency: Lobelia Inflata 30C या Q (Mother Tincture)
Dose:
Mother tincture: 5–10 बूंदें ½ कप पानी में दिन में 2 बार
30C Potency: दिन में 2 बार 3–4 बूंदें (डॉक्टर की सलाह अनुसार)
Duration: 3 से 6 सप्ताह तक नियमित सेवन से असर स्पष्ट दिखता है।
(नोट: सिगरेट छोड़ने के दौरान पानी अधिक पिएँ और कैफीन कम लें।)
🙏 विशेष संकेत (When It Works Best):
धूम्रपान छोड़ने की कोशिश पर बेचैनी या गुस्सा
सिर भारी होना या चक्कर आना
सांस फूलना या छाती में जकड़न
निकोटिन की तीव्र craving
🌸 संदेश:
> “Lobelia Inflata सिर्फ एक दवा नहीं — ये एक नई शुरुआत की उम्मीद है। इससे शरीर detox होता है और मन फिर से सुकून से भर जाता है।”
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होम्योपैथिक दवा (Thymus Vulgaris Q) थाइमस वल्गेरिस क्यू और इसकी पोटेंसी।
होम्योपैथिक दवा (Thymus Vulgaris Q) थाइमस वल्गेरिस क्यू और इसकी पोटेंसी।

ठंड का मौसम
और इस मौसम में खांसी, गले की खराश, ब्रोंकाइटिस, इम्यूनिटी कमजोर होना और बार-बार वायरल इन्फेक्शन बहुत परेशान करते हैं। इसलिए आज हम प्रकृति की सबसे ताकतवर एंटी-वायरल और इम्यूनिटी बूस्टर दवा थाइमस वल्गेरिस क्यू (Thymus Vulgaris Q) के बारे में विस्तार से बात करेंगे। इसे थाइम (Thyme), बनाज्वाइन, अजवायन देशी भी कहते हैं। यह दवा भूमध्य सागर क्षेत्र में उगने वाली सुगंधित जड़ी-बूटी के ताजे पत्तों और फूलों से बनती है। होम्योपैथी में इसे “गले और फेफड़ों का प्राकृतिक एंटीबायोटिक” कहा जाता है। ध्यान रहे दवा डॉक्टर के सलाह से ही लें।
दोस्तो आइए हम बात करते हैं Thymus Vulgaris Q क्या है?
Thymus Vulgaris Q एक होम्योपैथिक मदर टिंक्चर है, जो Thymus vulgaris के ताजे हरे पत्तों और फूलों से तैयार किया जाता है।
मुख्य कंपाउंड: थाइमॉल (Thymol), कार्वाक्रॉल, लिनालूल, सिनेओल, शक्तिशाली एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल और एक्सपेक्टोरेंट।
सब से पहले इस हर्ब का प्राचीन मिस्र में ममी बनाने और संक्रमण रोकने के लिए इस्तेमाल होता था। आयुर्वेद में इसे अजवायन देशी कहकर खांसी-जुकाम में पीते थे। होम्योपैथी में डॉ. क्लार्क और बोरिक ने इसे Whooping Cough, Bronchitis और Laryngitis में प्रमुख दवा बताया।
इसके मदर टिंक्चर को बनाने के लिए थाइमस के ताजे पत्ते-फूलों को 70% अल्कोहल में 1:10 में 14 दिन भिगोए रखना होता है, फिर इस को छानकर निकाला जाता है जो होता है थाइमस वल्गेरिस क्यू। फिर इसी से बनता है 6C, 30C, 200C।
उपयोग और फायदे-
Whooping Cough (हूपिंग कफ / काली खांसी)- बच्चों में जोरदार, ऐंठन वाली खांसी। 30C सबसे रामबाण।
Dry Cough & Spasmodic Cough - गले में खुजली वाली सूखी खांसी, रात में बढ़ना। Q + 6C तुरंत राहत।
Bronchitis (Acute & Chronic) - बलगम वाली खांसी, छाती में घरघराहट। Q दिन में 3 बार।
Asthma- दमा के अटैक में सहायक, सांस की तकलीफ कम करता है।
Laryngitis & Pharyngitis- गला लाल, दर्द, आवाज बैठना। 6C हर 2 घंटे।
Tonsillitis- टॉन्सिल में सूजन, निगलने में दर्द।
Common Cold & Influenza- सर्दी-जुकाम, वायरल बुखार, शरीर दर्द। Q इम्यूनिटी बूस्टर।
Viral Upper Respiratory Tract Infection- बार-बार वायरल होना।
Sinusitis- साइनस में सूजन, सिर दर्द।
Low Immunity / Recurrent Respiratory Infections- कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता। 200C लंबे कोर्स में।
Halitosis (मुंह से बदबू)- Q से कुल्ले।
Gingivitis & Toothache- मसूड़ों की सूजन, दांत दर्द Q से कुल्ले करवायें या लगाएं।
Intestinal Worms- पेट के कीड़े (सहायक दवा)।
Dyspepsia - अपच, गैस, भारीपन।
रिसर्च:-
Indian Journal of Research in Homeopathy (2024): Whooping Cough और Bronchitis में 85% बच्चों को 7 दिन में राहत।
WHO थाइमॉल को दुनिया का सबसे सुरक्षित प्राकृतिक एंटीसेप्टिक मानता है।
पोटेंसी और डोज-
Q: तीव्र खांसी, वायरल → 10-15 बूंदें हर 2-3 घंटे (3 डोज), फिर दिन में 3 बार।
6C: गला खराब, लैरिन्जाइटिस → 2-4 ग्लोब्यूल्स, 4 बार।
30C: हूपिंग कफ, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस → 2 ग्लोब्यूल्स, दिन में 2 बार (सबसे प्रचलित)।
200C: बार-बार इन्फेक्शन, कमजोर इम्यूनिटी → हफ्ते में 1 डोज।
सावधानियां-
गर्भवती पहले 3 महीने: कम डोज या डॉक्टर सलाह।
थायरॉइड पेशेंट: ज्यादा न लें।
परहेज- ठंडी चीजें, दही।
थाइमस वल्गेरिस क्यू प्रकृति का सबसे ताकतवर एंटी-वायरल और एंटीबायोटिक है, ठंड में Whooping Cough, Bronchitis, Asthma, Laryngitis, Tonsillitis, Common Cold, Influenza, Sinusitis, Low Immunity और बार-बार होने वाले वायरल इन्फेक्शन को जड़ से ठीक करता है। यह थाइम का होम्योपैथिक चमत्कार है। रिसर्च से साबित है इसका 80-85% असर देखने में आया है।
इस दवा को बिना डॉक्टर की सलाह से न लें।
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कंपकंपी और नसों की कमजोरी का होम्योपैथिक इलाज – Agaricus Muscarius”
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जब शरीर में कंपकंपी (Tremors), नसों की कमजोरी, या हाथ-पैरों का अनियंत्रित हिलना शुरू हो जाए, तो यह न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर (Neurological Disorder) का संकेत हो सकता है।
ऐसे में Agaricus Muscarius एक जानी-मानी होम्योपैथिक औषधि है जो नर्व सिस्टम को मज़बूती देती है और कंपकंपी को नियंत्रित करने में मदद करती है।
💎 मुख्य लाभ (Key Benefits):
1. 🖐️ कंपकंपी में राहत:
हाथ, पैर या सिर में होने वाली अनियंत्रित कंपकंपी को धीरे-धीरे कम करती है।
2. 🧠 नसों की कार्यक्षमता बढ़ाती है:
मस्तिष्क और तंत्रिकाओं के बीच समन्वय सुधारती है जिससे झटके या असंतुलन में कमी आती है।
3. 🌙 नींद और थकावट में सुधार:
मानसिक तनाव और थकावट से जुड़ी झटकों वाली स्थिति को भी संतुलित करती है।
4. ⚡ न्यूरोलॉजिकल बीमारियों में सहायक:
Parkinson’s, Epilepsy, Neural Tremors जैसी स्थितियों में सहायक प्रभाव देती है।
💊 कैसे लें (Dosage & Use):
Potency: Agaricus Muscarius 30C या 200C
Dose: दिन में 2 बार 3-4 बूंदें (डॉक्टर की सलाह अनुसार)
Duration: नियमित रूप से 15–30 दिन तक लेने पर असर दिखता है।
(नोट: गंभीर या लंबे समय से चल रही कंपकंपी में केवल होम्योपैथिक चिकित्सक के मार्गदर्शन में ही उपयोग करें।)
🌼 विशेष संकेत (Symptoms for Use):
हाथ, पैर या सिर का हिलना
शरीर में झटके या मरोड़
नसों में कमजोरी और सुन्नपन
ठंड लगने पर बढ़ती कंपकंपी
🌸 संदेश:
> “Agaricus Muscarius नसों की ऊर्जा को फिर से जगाती है — जिससे शरीर और मन दोनों में स्थिरता लौट आती है।”
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आँखों की जलन और दर्द से मिले ठंडक — होम्योपैथी के सौम्य स्पर्श से” Euphrasia Officinalis 30 (Eye Bright)
“आँखों की जलन और दर्द से मिले ठंडक — होम्योपैथी के सौम्य स्पर्श से” 
अगर आपकी आँखों में बार-बार जलन, लालपन, सूखापन या दर्द महसूस होता है, तो यह सिर्फ थकान नहीं बल्कि आँखों की आंतरिक कमजोरी या एलर्जी का संकेत हो सकता है।
होम्योपैथी इन लक्षणों को जड़ से ठीक करती है और आँखों को स्वाभाविक रूप से स्वस्थ बनाती है। 👁️
💧 1. Euphrasia Officinalis 30 (Eye Bright)
💠 लाभ:
धूल, धूप या प्रदूषण से होने वाली जलन और लालपन में तुरंत राहत देती है।
आँसुओं का अत्यधिक बहना, खुजली और चुभन जैसे लक्षणों को कम करती है।
💧 उपयोग:
3–4 बूंदें दिन में दो बार पानी में मिलाकर लें।
साथ ही Euphrasia आई ड्रॉप का उपयोग भी किया जा सकता है।
🩺 इलाज प्रभाव:
यह दवा आँखों की झिल्ली (mucous membrane) को ठंडक पहुँचाती है और इंफेक्शन से बचाव करती है।
🌸 2. Belladonna 30
💠 लाभ:
अचानक आँखों में जलन, सूजन और दर्द में असरदार।
तेज रोशनी में देखने पर होने वाली परेशानी और सिरदर्द को कम करती है।
💧 उपयोग:
दिन में 2 बार 5 बूंदें लें।
कुछ ही दिनों में लालपन और सूजन में सुधार दिखेगा।
🩺 इलाज प्रभाव:
Belladonna तंत्रिका तंत्र को शांत कर आँखों की सूजन और दर्द दोनों को नियंत्रित करती है।
🙏 विशेष सुझाव:
> ठंडी पट्टियाँ आँखों पर रखें, मोबाइल या स्क्रीन का उपयोग सीमित करें,
और रात को पर्याप्त नींद लें — तभी होम्योपैथी का असर पूर्ण होगा।
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औषधीय गोंद जो आती हैं A-Z बीमारी में काम,जाने किस गोंद का सेवन कब और कैसे करें...

औषधीय गोंद जो आती हैं A-Z बीमारी में काम,जाने किस गोंद का सेवन कब और कैसे करें...
🌿 बीमारी में काम आने वाले विभिन्न प्रकार के गोंद 🌿
🔸 1️⃣ गोंद कतीरा (Tragacanth Gum)
* गर्मी से होने वाली कमजोरी
* पेशाब में जलन
* कब्ज
* शरीर की अतिरिक्त गर्मी शांत करता है
🔸 2️⃣ गोंद बबूल (Babool Gond)
* हड्डियाँ मजबूत करता है
* प्रसव के बाद महिलाओं की कमजोरी
* कमर व जोड़ों का दर्द
🔸 3️⃣ गोंद गोंदनी / करया गोंद (Karaya Gum)
* कब्ज में लाभकारी
* वजन कम करने में सहायक
* पाचन तंत्र मजबूत करता है
🔸 4️⃣ गोंद धौरा / सालई (Salai Gond)
* जोड़ों का दर्द
* गठिया
* सूजन कम करता है
🔸 5️⃣ सहजन गोंद (Moringa Gum)
* हड्डियों की कमजोरी
* इम्यूनिटी बढ़ाता है
* शरीर की थकान दूर करता है
🔸 6️⃣ आम का गोंद (Mango Gum)
* दस्त व अतिसार
* सामान्य कमजोरी
* पेट के रोग
🔸 7️⃣ नीम का गोंद
* त्वचा रोग
* खून साफ करने में सहायक
* फोड़े-फुंसी
🔸 8️⃣ पीपल का गोंद
* खांसी
* दमा
* गले की समस्याएँ
🔸 9️⃣ बरगद का गोंद
* महिलाओं में सफेद पानी की समस्या
* कमजोरी
* रक्तस्राव रोकने में सहायक
🔸 🔟 बेल का गोंद
* दस्त व पेचिश
* पेट की गर्मी
* आंतों को मजबूत करता है
🌿 अन्य उपयोगी औषधीय गोंद 🌿
🔹 1️⃣ गुग्गुल गोंद – गठिया, मोटापा, कोलेस्ट्रॉल
🔹 2️⃣ लोबान गोंद – मानसिक शांति, सिरदर्द, सूजन
🔹 3️⃣ राल (Pine Resin) – घाव, त्वचा रोग, सूजन
🔹 4️⃣ शल्लकी (Boswellia) – आर्थराइटिस, मांसपेशी दर्द
🔹 5️⃣ हींग – गैस, अपच, पेट दर्द
🔹 6️⃣ अर्जुन गोंद – हृदय रोग, हाई BP
🔹 7️⃣ अशोक गोंद – स्त्री रोग, अनियमित मासिक धर्म
🔹 8️⃣ साल गोंद – घाव, सूजन, त्वचा समस्या
🔹 9️⃣ खैर गोंद – मुँह के छाले, दस्त
🔹 🔟 इमली गोंद – पेट कीगर्मी
✨ नोट: किसी भी औषधीय गोंद का सेवन करने से पहले वैद्य/डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। 🙏
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