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सोमवार, 23 जनवरी 2023

बागेश्वर धाम मोबाइल नंबर ? bageshwar dham contact number mp

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बागेश्वर धाम मोबाइल नंबर ?


दोस्तों आज हम बागेश्वर धाम का मोबाइल नंबर से सम्बंधित सभी सवालों के जबाब देने वाले हैं, लोगों बागेश्वर धाम कांटेक्ट नंबर पाने के लिए बागेश्वर धाम का मोबाइल नंबर, bageshwar dham toll free number, bageshwar dham contact number mp, बागेश्वर धाम का मोबाइल नंबर क्या है, बागेश्वर धाम के गुरु जी का मोबाइल नंबर, bageshwar dham phone number, bageshwar dham mobile number, बागेश्वर धाम का मोबाइल नंबर दीजिए, बागेश्वर धाम सन्यासी बाबा का मोबाइल नंबर, bageshwar dham number इन्टरनेट पर सर्च कर रहे हैं आइये bageshwar dham contact number जानते हैं।

दोस्तों बागेश्वर धाम का मोबाइल नंबर पर आपको बहुत से आर्टिकल मिल जाएगे जिसमे आपको जो bageshwar dham contact number दिया जाता हैं , वह या तो बिजी रहता हैं, या नंबर बंद रहता हैं, आज हम आपको bageshwar dham contact number mp देगे जो कॉल भी लगेगा और बागेश्वर धाम समिति से बात भी होगी।

बागेश्वर धाम चमत्कारी मंत्र एक बार जरुर पढ़े – // ॐ बागेश्वराय नमः //

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बागेश्वर धाम का मोबाइल नंबर क्या हैं, या बागेश्वर धाम के गुरु जी का मोबाइल नंबर दोस्तों जैसा की आपको पता होगा की बागेश्वर धाम सरकार ने कुछ बागेश्वर धाम मोबाइल नंबर जारी किये हैं जिससे आप बागेश्वर धाम के बारे में जानकारी ले सकते हैं, और टोकन कब मिलेगे के बारे में भी पता कर सकते हैं, धाम के मोबाइल नंबर बागेश्वर धाम समिति के सदस्य उठाते हैं , ना की महाराज के दुवारा बागेश्वर धाम के गुरु जी का मोबाइल नंबर सभी के लिए नहीं हैं , और ना महाराज किसी से बात करते हैं, अगर किसी भक्त से बात करनी होती हैं, तो फेसबुक या Youtube लाइव के दौरान करते हैं।

बागेश्वर धाम का मोबाइल नंबर8982862921 और 8120592371

दोस्तों bageshwar dham sarkar contact number या बागेश्वर धाम मोबाइल नंबर पर केवल जानकारी दी जाती हैं, धाम के विषय में ना की टोकन दिए जाते हैं और ना आर्गी लगाई जाती हैं, इसलिए bageshwar dham contact number mp पर अगर कोई आपसे पैसा मागें टोकन के लिए या आर्गी के नाम पर तो मत दो वो आपको ठग रहा हैं।

बागेश्वर धाम का मोबाइल नंबर दीजिए

बागेश्वर धाम का मोबाइल नंबर 8982862921 और 8120592371 हैं , bageshwar dham mobile number पर कॉल करने का सही समय सुबह और शाम को हैं जिससे आपका कॉल जल्दी लग जाए, बहुत से लोग bageshwar dham contact number मिलने के बाद भी धाम पर कॉल नहीं लगता हैं, इसका सीधा कारण हैं एक ही समय पर बहुत से लोगों दुवारा फ़ोन का लगाया जाना हैं।

bageshwar dham toll free number

दोस्तों बहुत से लोग बागेश्वर धाम का टोल फ्री नंबर ( bageshwar dham toll free number ) चाहते हैं, जिससे बागेश्वर धाम पर महाराज से बात कर सके, क्योंकि बागेश्वर धाम मोबाइल नंबर हमेशा बिजी रहता हैं और बागेश्वर धाम के भक्त परेशान रहते हैं, तो दोस्तों में आपको बतादू अभी बागेश्वर धाम का कोई भी टोल फ्री नंबर नहीं हैं, केवल bageshwar dham contact number दिया गया हैं, जो इस प्रकार हैं।

बागेश्वर धाम मोबाइल नंबर – 8982862921 और 8120592371







Bageshwar Dham whatsapp Number

जो लोग भारत से बाहर है, जैसे United State of America या और भी बहुत से देशों के लोंग जो बागेश्वर धाम से कांटेक्ट करना चाहते हैं, उन्हें Bageshwar Dham whatsapp Number या बागेश्वर धाम कांटेक्ट नंबर दिया गया हैं, जो 8120592371 हैं, दोस्तों bageshwar dham contact number पर मैसेज करने के बाद धर्ये बनाए रखे, Reply मिलने में देरी हो सकती हैं।

बागेश्वर धाम मोबाइल नंबर से जुड़े कुछ फर्जी कॉल

धाम के मोबाइल नंबर से जुड़े कुछ फर्जी कॉल से बचे दोस्तों बागेश्वर धाम के नाम पर बहुत से लोंग धाम के श्रध्लुओ को ठगने का प्रयास करते हैं, और बागेश्वर धाम टोकन या बागेश्वर धाम अर्जी लगने का लालच दे सकते हैं, महाराज श्री धीरेन्द्र कृष्ण के अनुसार बागेश्वर धाम पुरतः नि: शुक्ल हैं और जीवन भर रहेगा, अगर कोई धाम के नाम पर पैसा मागें तो मत दो चाहे वह बागेश्वर धाम समिति का सदस्य ही क्यों न हो।

Bageshwar Dham Right information

अगर आप बागेश्वर धाम के बारे में सही जानकारी चाहते हैं, तो बागेश्वर धाम ऑफिसियल सोशल मीडिया एकाउंट्स से प्राप्त करे जैसे बागेश्वर धाम Facebook और Youtube एकाउंट्स से ले और आप हमारी वेबसाइट Bageshwardham.net से भी सही जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, बागेश्वर धाम के नाम पर बहुत से Youtube चैनल और वेबसाइट हैं, उन पर आंख बंद कर भरोसा मत करे।

बागेश्वर धाम सरकार कार्यालय का नंबर क्या हैं ?

बहुत से लोग बागेश्वर धाम कार्यालय न नंबर इन्टरनेट पर खोज रहे हैं, दोस्तों बागेश्वर धाम कार्यालय का नंबर बागेश्वर धाम कांटेक्ट नंबर ही हैं, धाम पर कार्यालय से संपर्क करने के लिए 8982862921 और 8120592371 नंबर पर कॉल कर सकते हैं, धाम के बारे में छोटी जानकारी के लिए कॉल न करे , ताकि सभी लोग कॉल कर सके और बागेश्वर धाम पर अपनी समस्या का समाधान प्राप्त कर सके।

बागेश्वर धाम कांटेक्ट नंबर बिजी क्यों रहता हैं ?

आप में से बहुत से लोग बागेश्वर धाम का मोबाइल नंबर ना लगने की बजह से परेशान होंगे, दोस्तों bageshwar dham contact number पर एक ही समय पर देश के कोने कोने से कॉल किये जाते हैं , जिससे बागेश्वर धाम का मोबाइल नंबर हमेशा बिजी बताता हैं , कभी कभी यह नंबर बंद भी अ सकता हैं, इसके लिए अगले दिन कॉल करे आपका कॉल जरुर लगेगा।

बागेश्वर धाम महाराज सीधी बातचीत

बागेश्वर धाम के महाराज श्री धीरेन्द्र कृष्णा शास्त्री जी से सीधी बातचीत करने के लिए महाराज कभी कभी फेसबुक या Youtube लाइव के दौरान लाइव बातचीत करते हैं, जिसके लिए नंबर लाइव के दौरान ही दिया जाता है, सीधी बातचीत करने के लिए बागेश्वर धाम सोशल मीडिया एकाउंट्स को फॉलो करो सीधी बातचीत के लिए सुचना जारी की जाती हैं।

निष्कर्ष – अगर आपने हमारी इस पोस्ट को पूरा पढ़ा होगा तो उम्मीद हैं, बागेश्वर धाम का मोबाइल नंबर आपको मिल गया होगा और आप बागेश्वर धाम कांटेक्ट नंबर पर कॉल कर सभी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, धाम के दो मोबाइल नंबर हैं जो मैंने आप लोगों के साथ शेयर किये हैं।

बागेश्वर धाम का रहस्य क्या हैं ? जानकर आपके होश उड़ जायेगे

बागेश्वर धाम का रहस्य क्या हैं ? जानकर आपके होश उड़ जायेगे

बागेश्वर धाम का रहस्य क्या हैं ? बागेश्वर धाम की सच्चाई क्या हैं ? दोस्तों आपने बागेश्वर धाम के बारे में यूट्यूब और टेलीविज़न के माध्यम से देखा और सुना होगा जहा लोग बागेश्वर धाम के सामने अपनी अर्जी लगाते हैं , वे अपने सवाल पूज्य श्री धीरेन्द्र कृष्णा शास्त्री से पूछते हैं , और उसका निवारण उन्हें तत्काल ही उन्हें मिल जाता हैं ,लेकिन क्या दोस्तों आपने बागेश्वर धाम के पीछे के रहस्यों को सुना हैं , क्या आप बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र कृष्णा शास्त्री के बारे में जानते हैं कैसे इतनी जल्दी फेमस हो गए, आइये जानते हैं.

बागेश्वर धाम एक ऐसा धाम जो बहुत ही कम समय में देश और दुनिया के कोने कोने में सनातन धर्म का डंका बजा रहा हैं , एक ऐसा दिव्य धाम जिस देखकर और सुनकर वैज्ञानिक भी हैरान है, जिससे लोग बागेश्वर धाम के रहस्यों को जानना चाहते हैं , बागेश्वर धाम की सच्चाई क्या हैं.

बागेश्वर धाम का रहस्य क्या हैं ?

बागेश्वर धाम का निर्माण बहुत समय पहले हुआ था , जब इन्टरनेट इतना विकसित नहीं हुआ था, बागेश्वर धाम बहुत पुराना चमत्कारिक मंदिर हैं , यहाँ पीडी दर पीडी प्रसिद्ध संत हुए जो दिव्य दरबार लगाते रहे हैं, परन्तु इन्टरनेट की सुबिधा ना हो पाने के कारण धाम पर प्रचार प्रसार नहीं हो पाया और लोकल क्षेत्र के लोग बस आया करते थे.

बागेश्वर धाम मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह हैं की जो भी श्रधालु सच्चे मन से जो भी मनोकामनाओ को लेकर जाते हैं , बागेश्वर बालाजी सरकार और सन्यासी बाबा की कृपा से सब सिद्ध हो जाता है, धाम पर पहले बागेश्वर महाराज के दादा दरबार लगाया करते थे इसके बाद श्री धीरेन्द्र कृष्णा शास्त्री ने अपना बचपन पूज्य दादा जी की शरण में विताया और पूजा पाठ करने लगे , समय वित्ताता गया और धीरे धीरे दरबार लगाने लगे जनकल्याण के लिए इस तरह बागेश्वर धाम महाराज को सिद्धि प्राप्त हुई.

बागेश्वर धाम महाराज का शुरुआती जीवन बहुत ही कष्टदायक रहा, जिसके चलते वह अपनी पूरी पढ़ाई नहीं कर पाए और बागेश्वर बालाजी, सन्यासी बाबा की सेवा में लग गए और जन कल्याण के लिए दरबार लगाने लगे धीरे-धीरे बागेश्वर धाम इंटरनेट के माध्यम से देश के कोने कोने में जाना जाने लगा.

बागेश्वर धाम की सच्चाई क्या हैं ?

बागेश्वर धाम की सच्चाई को जानने के लिए आय दिन बहुत से न्यूज़ चैनल और पत्रकार आते रहते हैं लेकिन किसी को कुछ नहीं मिलता , सब हैरान हैं की आखिर कैसे बिना बताये लोगों के मन की बात जान लेते हैं और उसका निवारण भी बता देते हैं , हम आपको बता दे बागेश्वर धाम महाराज के अनुसार वह यह सब बागेश्वर बालाजी महाराज और सन्यासी बाबा की कृपा से कर पाते हैं, दोस्तों श्री धीरेन्द्र कृष्णा शास्त्री जिन्हें दुनिया बागेश्वर धाम के नाम से जानती हैं, उन्हें भगवान श्री राम के अनन्य भक्त श्री हनुमान ( बालाजी सरकार ) की कृपा प्राप्त है, जिससे वह अपने पर्चे पर जो भी लिख देते हैं,वही होता है.

वैज्ञानिक भी हैरान बागेश्वर धाम के इस रहस्य सेजानकर आपके भी होश उड़ जाएगे

दोस्तों वैज्ञानिक भी हैरान हैं बागेश्वर धाम के इस रहस्य से टेक्नोलोजी इतनी विकसित हो गई हैं जिससे हम किसी से भी बात कर सकते है मोबाइल फ़ोन के जारी , और लोकेशन का पता लगा सकते हैं, लेकिन किसी के मन की बात नहीं जान सकते हैं , यह केवल दिव्य चमत्कारी शक्तिओ से हो सकता हैं , भारत हमेशा से आस्था और श्रद्धा का देश रहा है, भारत के लोग ईश्वर को मानते हैं ,जिसका जीता जागता उदाहरण है बागेश्वर धाम की ईश्वर हैं और सभी का कल्याण करता हैं.

रानी दुर्गावती ने वीरमरण स्वीकार किया वेद धर्म के लिए


 रानी दुर्गावती ने वीरमरण स्वीकार किया वेद धर्म के लिए


शत्-शत् नमन 5 अक्टूबर/जन्मदिवस, ज्वालारूपी रानी दुर्गावती जिनका हत्यारा था वो अकबर जिसे साजिशन बनाया गया महान*

अकबर की महानता के गुण गाने वालों को आज पता भी नहीं होगा की आज किसका जन्म दिवस है। उन्हें भी नहीं पता होगा जिन्होंने आज़ादी , शौर्य , वीरता और बलिदान को केवल दो या चार परिवारों के आस पास इर्द गिर्द घुमा कर रख दिया है.. इस भारत भूमि ने आजादी और धर्म की रक्षा के लिए बहुत से बलिदान लिए हैं। उनमे से एक हैं महान रानी दुर्गावती जी जिनका सौभाग्य से आज जन्म दिवस है,..

महान रानी दुर्गावती जी का जन्म 5 अक्टूबर सन 1524 को महोबा में हुआ था। दुर्गावती के पिता महोबा के राजा थे। रानी दुर्गावती सुन्दर, सुशील, विनम्र, योग्य एवं साहसी लड़की थी। बचपन में ही उसे वीरतापूर्ण एवं साहस भरी कहानियां सुनना व पढ़ना अच्छा लगता था। पढाई के साथ-साथ दुर्गावती ने घोड़े पर चढ़ना, तीर तलवार चलाना, अच्छी तरह सीख लिया था शिकार खेलना उसका शौक था। वे अपने पिता के साथ शिकार खेलने जाया करती थी। पिता के साथ वे शासन का कार्य भी देखती थी।

विवाह योग्य अवस्था प्राप्त करने पर उनके पिता मालवा नरेश ने राजपूताने के राजकुमारों में से योग्य वर की तलाश की। परन्तु दुर्गावती गोडवाना के राजा दलपतिशाह की वीरता पर मुग्ध थी। इस प्रकार दुर्गावती और दलपति शाह का विवाह हुआ। रानी दुर्गावती जी अपने पति के साथ गढ़मंडल में सुखपूर्वक रहने लगी। इसी बीच दुर्गावती के पिता की मृत्यु हो गई और महोबा तथा कालिंजर पर मुग़ल सम्राट अकबर का अधिकार हो गया।

विवाह के एक वर्ष पश्चात् दुर्गावती का एक पुत्र हुआ। जिसका नाम वीर नारायण रखा गया। जिस समय वीरनारायण केवल तीन वर्ष का था उसके पिता दलपति शाह की मृत्यु हो गई। दुर्गावती के ऊपर तो मानो दुखो का पहाड़ ही टूट पड़ा। परन्तु उसने बड़े धैर्य और साहस के साथ इस दुःख को सहन किया। दलपति शाह की मृत्यु के बाद उनका पुत्र वीर नारायण गद्दी पर बैठा। रानी दुर्गावती उसकी संरक्षिका बनी और राज–काज स्वयं देखने लगी। वे सदैव प्रजा के दुःख–सुख का ध्यान रखती थी। चतुर और बुद्धिमान मंत्री आधार सिंह की सलाह और सहायता से रानी दुर्गावती ने अपने राज्य की सीमा बढ़ा ली।राज्य के साथ–साथ उसने सुसज्जित स्थायी सेना भी बनाई और अपनी वीरता, उदारता, चतुराई से राजनैतिक एकता स्थापित की। गोंडवाना राज्य शक्तिशाली और संपन्न राज्यों में गिना जाने लगा।

रानी दुर्गावती की योग्यता एवं वीरता की प्रशंसा अकबर ने सुनी.. क्रूर अकबर जिसे कईयों ने महानता का झूठा खिताब दे रखा है उसने आसफ खां नामक सरदार को गोंडवाना की गढ़मंडल पर चढ़ाई करने का आदेश दे दिया ये सोच कर कि एक औरत कितनी देर लड़ पाएगी.. उसका हत्यारा सरदार आसफ खां ने भी समझा कि दुर्गावती महिला है, अकबर के प्रताप से भयभीत होकर आत्मसमर्पण कर देगी। परन्तु रानी दुर्गावती को अपनी योग्यता, साधन और सैन्य शक्ति पर इतना विश्वास था कि उसे अकबर की सेना के प्रति भी कोई भय नहीं था। रानी दुर्गावती के मंत्री ने आसफ खान की सेना और सज्जा को देखकर युद्ध न करने की सलाह दी।

*परन्तु रानी ने कहा, " कलंकित जीवन जीने की अपेक्षा शान से मर जाना अच्छा है। आसफ खान जैसे साधारण सूबेदार के सामने झुकना लज्जा की बात है। रानी सैनिक के वेश में घोड़े पर सवार होकर निकल पड़ी। रानी को सैनिक के वेश में देखकर आसफ खान के होश उड़ गये। रणक्षेत्र में रानी के सैनिक उत्साहित होकर शत्रुओ को काटने लगे। रानी भी शत्रुओ पर टूट पड़ी. देखते ही देखते दुश्मनो की सेना मैदान छोड़कर भाग निकली। आसफ खान बड़ी कठिनाई से अपने प्राण बचाने में सफल हुआ। आसफ खान की बुरी तरह हार सुनकर अकबर बहुत क्रोधित हुआ और अपनी क्रूरता की हदें लांघता हुआ डेढ़ वर्ष बाद उसने पुनः आसफ खान को गढ़मंडल पर आक्रमण करने भेजा। रानी तथा आसफ खान के बीच घमासान युद्ध हुआ। तोपों का वार होने पर भी रानी ने हिम्मत नहीं हारी। रानी हाथी पर सवार सेना का संचालन कर रही थी। उन्होंने मुग़ल तोपचियों का सिर काट डाला। यह देखकर आसफ खान की सेना फिर भाग खड़ी हुई। दो बार हारकर वो कामुक, जल्लाद अकबर और भी अधिक क्रोध, लज्जा और ग्लानी से भर गया.*

रानी दुर्गावती अपने राजधानी में विजयोत्स्व मना रही थी। उसी गढ़मंडल के एक सरदार ने रानी को धोखा दे दिया। उसने गढ़मंडल का सारा भेद अकबर के सरदार आसफ खान को बता दिया। आसफ खान ने अपने हार का बदला लेने के लिए तीसरी बार गढ़मंडल पर आक्रमण किया। रानी ने अपने पुत्र के नेतृत्व में सेना भेजकर स्वयं एक टुकड़ी का नेतृत्व संभाला। दुश्मनों के छक्के छूटने लगे. उसी बीच रानी ने देखा कि उसका 15 का वर्ष का पुत्र घायल होकर घोड़े से गिर गया है। रानी विचलित न हुई उसी सेना के कई वीर पुरुषो ने वीर नारायण को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया और रानी से प्रार्थना की कि वे अपने पुत्र का अंतिम दर्शन कर ले। रानी ने उत्तर दिया- यह समय पुत्र से मिलने का नहीं है। मुझे ख़ुशी है कि मेरे वीर पुत्र ने युद्ध भूमि में वीर गति पाई है। अतः मैं उससे देवलोक में ही मिलू।

वीर पुत्र की स्थिति देखकर रानी दो गुने उत्साह से तलवार चलाने लगी. दुश्मनों के सिर कट–कट कर जमीन पर गिरने लगे. तभी दुश्मनों का एक बाण रानी की आँख में जा लगा और दूसरा तीर रानी की गर्दन में लगा। रानी समझ गई की अब मृत्यु निश्चित है। यह सोचकर कि जीते जी दुश्मनों की पकड़ में न आऊँ उन्होंने अपनी ही तलवार अपनी छाती में भोंक ली और अपने प्राणों की बलि दे दी। इनकी मृत्यु 24 जून सन 1564 को हुई. रानी दुर्गावती ने लगभग 16 वर्षो तक संरक्षिका के रूप में शासन किया।

कोटी कोटी नमन महान् वीरांंगना को

Bageshwar Dham Chhatarpur कैसे जाएं पूरी जानकारी – बागेश्वर धाम सरकार


 Bageshwar Dham Chhatarpur कैसे जाएं पूरी जानकारी – बागेश्वर धाम सरकार

दोस्तो अगर आप Bageshwar Dham Chhatarpur जाना चाहते हैं, जो मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के गढ़ा में स्थित है, बागेश्वर धाम बहुत की काम समय में लोकप्रियता पाने वाला स्थान हैं, यहां पर भगवान श्री बालाजी की कृपा से सभी की मनो कामनाये पूरी की जाती हैं, तो अगर आप भी Bageshwar Dham Sarkar Chhatarpur जानें की सोच रहे हैं, तो आज हम इसी के बारे में पूरी जानकारी देने वाले हैं।

Table of Contents

Bageshwar Dham Chhatarpur के बारे में

बागेश्वर धाम सरकार छतरपुर का एक बहुत ही लोकप्रिय पवित्र धार्मिक स्थल है, यहां पर बड़ी संख्या में लोग रोजाना अपनी मनो कामनाएं पूरी करने के उद्देश से आते हैं, और उनकी मनो कामनाएं भगवान बालाजी के द्वारा की जाती हैं, यह भगवान के अस्तित्व का जीता जागता उदाहरण है, और बागेश्वर धाम पर दिव्य दरबार लगाया जाता हैं, जिसमे लोगो के मन की बात एक कोरे कागज पर लिख पर उसका निवारण भी बताया जाता हैं।

बागेश्वर धाम की लोकप्रियता बहुत की काम समय में लोगो की समस्याओं का निवारण करने से हुई हैं, बागेश्वर धाम बुंदेलखंड के छतरपुर में हैं, बागेश्वर धाम के महाराज पंडित श्री धीरेंद्र कृष्ण जी हैं,

बागेश्वर धाम के बारे में महत्पूर्ण जानकारियाँ

स्थान नाम वागेश्वर धाम सरकार
स्थान पता ग्राम गढ़ा जिला छतरपुर, मध्यप्रदेश – 471105
बागेश्वर धाम महाराज पंडित श्री धीरेन्द्र कृष्ण महाराज
बागेश्वर धाम फ़ोन नंबर 8120592371
बागेश्वर धाम किस जिले में हैं मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में
बागेश्वर धाम वेबसाइट यहाँ क्लिक करे


बागेश्वर धाम सरकार से सम्बंधित कुछ महत्पूर्ण जानकारियां

Bageshwar Dham कैसे जाए ?

दोस्तो अगर आप दुनिया के किसी भी कोने से बागेश्वर धाम पर आना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको बागेश्वर धाम का पता होना बहुत ही जरूरी हैं। उसके बाद आप बहुत ही आसानी से बागेश्वर धाम पर आ सकते है, यहां पर आप सड़क मार्ग, रेल्वे मार्ग और हवाई मार्ग से भी आ सकते हैं।

Bageshwar Dham Chhatarpur Address ( बागेश्वर धाम का पता क्या हैं )

बागेश्वर धाम मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड के छतरपुर जिले में स्थित है, छतरपुर से पन्ना छतरपुर NH 39 मार्ग से 30 किलोमीटर दूर गंज से आपको 4 से 5 किलोमीटर दूर गाढ़ा ग्राम मिलेगा, जहां पर बालाजी का मंदिर हैं, और यहां पर आपको बालाजी के दर्शन होते हैं।

Bus से बागेश्वर धाम कैसे जाए ?

बस से बागेश्वर धाम स्थान पर जाने के लिए सबसे पहले आपको मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले आना होगा, उसके बाद आपको पन्ना छतरपुर NH 39 मार्ग पर 30 किलोमीटर दूर गंज पर उतरना होगा और वहां से आपको टैक्सी लेकर 4 किलोमीटर दूर ग्राम गाढ़ा में बागेश्वर धाम का मंदिर हैं

बागेश्वर धाम ट्रेन से कैसे जाए ?

दोस्तों अगर आप दुनिया के किसी भी कोने से ट्रेन के माध्यम से बागेश्वर धाम आना चाहते हैं, तो उसके लिए सबसे पहले आपको ट्रेन के माध्यम से छतरपुर आना होगा उसके बाद आप छतरपुर से पन्ना छतरपुर सड़क मार्ग से 30 किलोमीटर दूर गंज नामक स्थान पर उतरकर 4 किलोमीटर अंदर बागेश्वर धाम का स्थान है

Aeroplane से बागेश्वर धाम। कैसे जाए ?

दोस्तों अगर आप हवाई मार्ग से बागेश्वर धाम सरकार मंदिर जाना चाहते हैं तो उसके लिए सबसे पहले आपको हवाई मार्ग से खजुराहो आना होगा उसके बाद आप खजुराहो से बमिठा होते हुए गंज नामक से 3 किलोमीटर अंदर बागेश्वर धाम स्थान है।

तो दोस्तों इन सभी मार्गों से आप बागेश्वर धाम सरकर छतरपुर आ सकते हैं, बागेश्वर धाम से जुड़ी जानकारी पाने के लिए bageshwardham.net को विजिट करते रहिए।

कृष्ण का नाम लड्डू गोपाल कैसे पड़ा ?

 कृष्ण का नाम लड्डू गोपाल कैसे पड़ा ?



भगवान श्रीकृष्ण के कई नाम हैं, श्याम, मोहन, बंसीधर, कान्हा और न जाने कितने, लेकिन इनमें से एक प्रसिद्ध नाम है लड्डू गोपाल।

क्या आपको पता है भगवान कृष्ण का नाम लड्डू गोपाल क्यों पड़ा।

ब्रज भूमि में बहुत समय पहले श्रीकृष्ण के परम भक्त रहते थे.. कुम्भनदास जी ।
उनका एक पुत्र था रघुनंदन ।

कुंम्भनदास जी के पास बाँसुरी बजाते हुए श्रीकृष्ण जी का एक विग्रह था, वे हर समय प्रभु भक्ति में लीन रहते और पूरे नियम से श्रीकृष्ण की सेवा करते।

वे उन्हें छोड़ कर कहीं नहीं जाते थे, जिससे उनकी सेवा में कोई विघ्न ना हो।

एक दिन वृन्दावन से उनके लिए भागवत कथा करने का न्योता आया।

पहले तो उन्होंने मना किया, परन्तु लोगों के ज़ोर देने पर वे जाने के लिए तैयार हो गए कि भगवान की सेवा की तैयारी करके वे कथा करके रोज वापिस लौट आया करेंगे व भगवान का सेवा नियम भी नहीं छूटेगा।

अपने पुत्र को उन्होंने समझा दिया कि भोग मैंने बना दिया है, तुम ठाकुर जी को समय पर भोग लगा देना और वे चले गए।

रघुनंदन ने भोजन की थाली ठाकुर जी के सामने रखी और सरल मन से आग्रह किया कि ठाकुर जी आओ भोग लगाओ ।

उसके बाल मन में यह छवि थी कि वे आकर अपने हाथों से भोजन करेगें जैसे हम खाते हैं।

उसने बार-बार आग्रह किया, लेकिन भोजन तो वैसे ही रखा था.. अब उदास हो गया और रोते हुए पुकारा की ठाकुरजी आओ भोग लगाओ।

ठाकुरजी ने बालक का रूप धारण किया और भोजन करने बैठ गए और रघुनंदन भी प्रसन्न हो गया।

रात को कुंम्भनदास जी ने लौट कर पूछा कि भोग लगाया था बेटा, तो रघुनंदन ने कहा हाँ। उन्होंने प्रसाद मांगा तो पुत्र ने कहा कि ठाकुरजी ने सारा भोजन खा लिया।

उन्होंने सोचा बच्चे को भूख लगी होगी तो उसने ही खुद खा लिया होगा। अब तो ये रोज का नियम हो गया कि कुंम्भनदास जी भोजन की थाली लगाकर जाते और रघुनंदन ठाकुरजी को भोग लगाते।

जब प्रसाद मांगते तो एक ही जवाब मिलता कि सारा भोजन उन्होंने खा लिया।
कुंम्भनदास जी को अब लगने लगा कि पुत्र झूठ बोलने लगा है,

लेकिन क्यों.. ?? उन्होंने उस दिन लड्डू बनाकर थाली में सजा दिये और छुप कर देखने लगे कि बच्चा क्या करता है।

रघुनंदन ने रोज की तरह ही ठाकुरजी को पुकारा तो ठाकुरजी बालक के रूप में प्रकट हो कर लड्डू खाने लगे।

यह देख कर कुंम्भनदास जी दौड़ते हुए आये और प्रभु के चरणों में गिरकर विनती करने लगे।

उस समय ठाकुरजी के एक हाथ मे लड्डू और दूसरे हाथ का लड्डू मुख में जाने को ही था कि वे जड़ हो गये ।

उसके बाद से उनकी इसी रूप में पूजा की जाती है और वे ‘लड्डू गोपाल’ कहलाये जाने लगे..!!
  जय हो लड्डू गोपाल जी की

बागेश्वर धाम और धीरेंद्र शास्त्री...

बागेश्वर धाम और धीरेंद्र शास्त्री...




बागेश्वर धाम बुंदेलखंड का एक typical गांव जो मुख्य सड़क से लगभग 6 से 7km अंदर है...
आज से चार पांच साल पहले तक, खुद उस गांव (गड़ा) के लोगों और उनके रिश्तेदारों के अलावा उस गांव और उस हनुमान मंदिर को कोई नहीं जानता था...

फिर उसी ठेठ गांव का एक इक्कीस बाइस साल का ठेठ बुंदेलखंडी नौजवान जो श्री श्री रामभद्राचार्य महाराज का शिष्य है और कलयुग में सर्वाधिक पूजे जाने वाले भगवान श्री हनुमान जी का अनन्य भक्त है अपनी शास्त्री की शिक्षा दीक्षा पूरी करके अपने गांव लौटता है...

ठेठ गांव का ठेठ लड़का जिस गांव को कोई नहीं जानता था उसने पिछले चार पांच साल में अपने Aura, वाकपटुता, धर्म ज्ञान, कथा करने का रोचक अंदाज, और भगवान हनुमान के आशीर्वाद से लोगों के मन में भगवान, हिंदू धर्म, सनातन और राष्ट्रवाद की एक ऐसी अलख जगानी शुरू की जिसमें न कोई अगड़ा था न कोई पिछड़ा, न कोई ऊंचा था न कोई नीचा, उसकी कथाओं में सिर्फ और सिर्फ धर्म था, सनातन था, हिंदू था, राष्ट्रवाद था...

आदिवासियों के लिए जंगल में जाकर उनके बीच बैठकर रामकथा करना हो या सैकड़ों लड़कियों की हर साल शादी कराने का महायज्ञ, बुंदेलखंड जैसे पिछड़े इलाके में कैंसर हॉस्पिटल शुरू करने की वकालत हो उसने न सिर्फ इसका सपना दिखाया बल्कि उसे करके भी दिखाया और सबसे बड़ी बात ये सब कुछ निःशुल्क, स्वेच्छा से जो देना है दे दो नही तो कोई बात नही...

उसने बिना किसी ऊंच नीच की परवाह किए, सभी को एक पंडाल के नीचे इकट्ठा कर दिया, साथ ही साथ वो गरीब लोग जो किसी लालचवश या मजबूरी में किसी और धर्म मेंं जाने को मजबूर हो गए थे उन्हें भी पुनः वापिस लाने का काम किया... 

बस.......यही गलती हो गई उस छब्बीस साल के लड़के से...

सभी जाति को एक साथ एक पंडाल में बैठाकर रामकथा,  ये नही चलेगा बाबू

आदिवासियों के लिए जंगल में जाकर उनके बीच में रामकथा करना और उनको अहसास दिलाना की आप प्रभु राम के वंशज हो... राम राम इतना बड़ा घोर पाप...... ये कतई नहीं चलेगा लड़के...

धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों को वापिस लाने का जघन्य पाप...... आप अपराधी है बाबा...
जात पात, अंगड़ा पिछड़ा को छोड़कर सिर्फ सनातन की बात करना और लोगों को उस पर चलने को प्रेरित करना...... 

पगला गए हो का धीरेंद्र शास्त्री...

खैर, छब्बीस साल की उम्र में यदि इस अत्यंत पिछड़े हुए इलाके के बेहद ठेठ गांव से निकला यह लड़का जिसने खुद की प्रतिभा से अपना लोहा पूरे देश विदेश में मनवाया है तो यह निश्चित है की इसके ऊपर अत्यंत ईश्वरीय कृपा है और जिस पथ पर यह आगे निकला है तो ऐसे आरोप और कीचड़ उछलना तो महज एक शुरुआत है, अभी आरोपों की तीव्रता और स्तर बहुत नीचे जाने वाला है...

मैं धीरेंद्र शास्त्री से व्यक्तिगत तौर पर कभी नहीं मिला और न ही मिलने की कोई तीव्र इच्छा है, उनके चमत्कार सही होते हैं या गलत इस पर भी में कुछ नही कहना चाहता, में तो इतना कहना चाहता हूं की एक गांव से निकले इस नौजवान ने सनातन को उठाने, बढ़ाने और देश को सशक्त बनाने का जो काम शुरू किया है वो विरले लोग ही करते हैं...

दुराचार, बलात्कार, मोलेस्टेशन, हत्या, रंगदारी के आरोप लाइन में हैं तैयार रहिए...

लेकिन...

जब तक वो धर्म के रास्ते पर है में उनके साथ हूं...
जब तक वो धर्म को धंधा नहीं बनाते में उनके साथ हूं...
जब तक वो सनातन की बात करेंगे में उनके साथ हूं...
जब तक गरीब उत्थान का काम करते रहेंगे में उनके साथ हूं...
जब तक उन्हे साजिश के तहत टारगेट किया जाता रहेगा, तब तक में उनके साथ हूं...

धर्म की जय हो,
अधर्म का नाश हो,
प्राणियों में सद्भाव हो,
विश्व का कल्याण हो...

जय श्री राम

अधिकार का सदुपयोग

*“🔥अधिकार का सदुपयोग”🔥*



एक हाथी था| वह मर गया तो धर्मराज के यहाँ पहुँचा| धर्मराज ने उससे पूछा- ‘अरे! तुझे इतना बड़ा शरीर दिया, फिर भी तू मनुष्य के वश में हो गया! तेरे एक पैर जितना था मनुष्य, उसके वश में तू हो गया!’ वह हाथी बोला-‘महाराज! यह मनुष्य ऐसा ही है|

बड़े-बड़े इसके वश में हो जाते हैं!’ धर्मराज ने कहा-‘हमारे यहाँ तो अनगिनत आदमी आते हैं!’ हाथी ने जवाब दिया-‘आपके यहाँ मुर्दे आते हैं, जो जीवित आदमी आये तो पता लगे! धर्मराज ने दूतो से कहा-‘अरे! एक जीवित आदमी ले आओ|’ दूतों ने कहा-‘ठीक है’|

दूत घूमते ही रहते थे| गर्मी के दिनों में उन्होंने देखा कि छत के ऊपर एक आदमी सोया हुआ है| दूतों ने उसकी खाट उठा ली और ले चले| उस आदमीं की नींद खुली तो देखा कि क्या बात है! वह कायस्थ था| ग्रन्थ लिखा करता था| ग्रंथो में धर्मराज के दूतों के लक्षण आते हैं| उसने जेब से कागज और कलम निकली| कागज पर कुछ लिखा और जेब में रख लिया| उसने सोचा कि हम कुछ चीं-चपड़ करेंगे तो गिर जायेंगें, हड्डियाँ बिखर जायँगी! वह बेचारा खाट पर पड़ा रहा कि जो होगा, देखा जायगा|

सुबह होते ही दूत पहुँच गये| धर्मराज की सभा लगी हुई थी| दूतों ने खाट नीचे रखी| उस कायस्थ ने तुरन्त जेब से कागज निकाला और दूतों को दे दिया कि धर्मराज को दे दो| उस पर विष्णु भगवान् का नाम लिखा था| दूतों ने यह कागज धर्मराज को दे दिया| धर्मराज ने पत्र पढ़ा| उसमें लिखा था- ‘धर्मराज जी से नारायण की यथायोग्य| यह हमारा मुनीम आपके पास आता है| इसके द्वारा ही सब काम कराना|  दस्तखत-

नारायण, वैकुण्ठपुरी|

पत्र पढ़कर धर्मराज ने अपनी गद्दी छोड़ दी और बोले- ‘आइये महाराज! गद्दी पर बैठो|’ धर्मराज ने कायस्थ को गद्दी पर बैठा दिया कि भगवान् का हुक्म है|

अब दूत दूसरे आदमी को लाये| कायस्थ बोला-‘यह कौन है?’ दूत-महाराज! यह डाका डालने वाला है| बहुतों को लूट लिया, बहुतों को मार दिया| इसको क्या दण्ड दिया जाय?’ कायस्थ-‘इसको वैकुण्ठ में भेजो|’

‘यह कौन है?’

‘महाराज! यह दूध बेचने वाली है| इसने पानी मिलाकर दूध बेचा जिससे बच्चों के पेट बढ़ गये, वे बीमार हो गये| इसका क्या करें?’

‘इसको भी वैकुण्ठ में भेजो|’ ‘यह कौन है?

‘इसने झूठी गवाही देकर बेचारे लोगों को फँसा दिया| इसका क्या किया जाय?’

‘अरे, पूछते क्या हो? वैकुण्ठ में भेजो|’

अब व्यभिचारी आये, पापी आये, हिंसा करनेवाला आये, कोई भी आये, उसके लिए एक ही आज्ञा कि ‘वैकुण्ठ में भेजो|’ अब धर्मराज क्या करें? गद्दी पर बैठा मालिक जो कह रहा है, वही ठीक! वहाँ वैकुण्ठ में जाने वालों की कतार लग गयी| भगवान् ने देखा कि अरे! इतने लोग यहाँ कैसे आ रहे हैं? कहीं मृत्युलोक में कोई महात्मा प्रकट हो गये? बात क्या है, जो सभी को बैकुण्ठ में भेज रहे हैं? कहाँ से आ रहे हैं? देखा कि ये तो धर्मराज के यहाँ से आ रहे हैं|

भगवान् धर्मराज के यहाँ पहुँचे|  भगवान् को देखकर सब खड़े हो गये| धर्मराज भी खड़े हो गये| वह कायस्थ भी खड़ा हो गया| भगवान् ने पूछा-‘धर्मराज! आपने सबको वैकुण्ठ भेज दिया, बात क्या है? क्या इतने लोग भक्त हो गये?’

धर्मराज-‘प्रभो! मेरा काम नहीं है| आपने जो मुनीम भेजा है, उसका काम है|’

भगवान् ने कायस्थ से पूछा-‘तुम्हे किसने भेजा?’

कायस्थ-‘आपने महाराज!’

‘हमने कैसे भेजा?’

‘क्या मेरे बाप के हाथ की बात है, जो यहाँ आता? आपने ही तो भेजा है| आपकी मर्जी के बिना कोई काम होता है क्या? क्या यह मेरे बल से हुआ है?’

‘ठीक है, तूने यह क्या किया?’

‘मैंने क्या किया महाराज?’

‘तूने सबको वैकुण्ठ में भेज दिया!’

‘यदि वैकुण्ठ में भेजना खराब काम है तो जितने संत-महात्मा हैं, उनको दण्ड दिया जाय! यदि यह खराब काम नहीं है तो उलाहना किस बात की? इस पर भी आपको यह पसंद न हो तो सब को वापस भेज दो| परन्तु भगवद्गीता में लिखा यह श्लोक आपको निकालना पड़ेगा-‘यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परम मम’ ‘मेरे धाम में जाकर पीछे लौटकर कोई नहीं आता|

‘बात तो ठीक है| कितना ही बड़ा पापी हो, यदि वह वैकुण्ठ में चला जाय तो पीछे लौटकर थोड़े ही आयेगा! उसके पाप तो सब नष्ट हो गये| पर यह काम तूने क्यों किया?’

‘मैंने क्या किया महाराज? मेरे हाथ में जब बात आयेगी तो मै यही करूँगा, सबको वैकुण्ठ भेजूँगा| मैं किसी को दण्ड क्यों दूँ? मै जानता हूँ कि थोड़ी देर देने के लिए गद्दी मिली है, तो फिर अच्छा काम क्यों न करूँ? लोगों का उद्धार करना खराब काम है क्या?’

भगवान् ने धर्मराज से पूछा-‘धर्मराज! तुमने इसको गद्दी कैसे दे दी?

धर्मराज बोले-‘महाराज! देखिये, आपका कागज आया है| नीचे साफ-साफ आपके दस्तखत हैं|’

भगवान् ने कायस्थ से पूछा-‘क्यों रे, ये कागज मैंने कब दिया तेरे को?’

कायस्थ बोला-‘आपने गीता में कहा है-‘सर्वस्य चाहं हृदि सन्निविष्टः’ ‘ मै सबके हृदय में रहता हूँ’; अतः हृदय से आज्ञा आयी कि कागज लिख दे तो मैंने लिख दिया| हुक्म तो आपका ही हुआ! यदि आप इसको मेरा मानते हैं तो गीता में से उपर्युक्त बात निकाल दीजिये!’

भगवान् ने कहा-‘ठीक|’ धर्मराज से पूछा-‘अरे धर्मराज! बात क्या है? यह कैसे आया?’

धर्मराज बोले-‘महाराज! कैसे क्या आया, आपका पुत्र ले आया!’ दूतों से पूछा-‘यह बात कैसे हुई?’

दूत बोले-‘महाराज! आपने ही तो एक दिन कहा था कि एक जीवित आदमी लाना|’

धर्मराज-‘तो वह यही है क्या? अरे, परिचय तो कराते!’

दूत-‘हम क्या परिचय कराते महाराज! आपने तो कागज लिया और इसको गद्दी पर बैठा दिया| हमने सोचा कि परिचय होगा, फिर हमारी हिम्मत कैसे होती बोलने की?’
हाथी वहाँ खड़ा सब देख रहा था, बोला-‘जै रामजी की! आपने कहा था  कि तू कैसे आदमी के वश में हो गया? मैं क्या वश में हो गया, वश में तो धर्मराज हो गये और भगवान् हो गये! यह काले माथेवाला आदमी बड़ा विचित्र है महाराज! यह चाहे तो बड़ी उथल-पुथल कर दे! यह तो खुद ही संसार में फँस गया!’
भगवान् ने कहा-‘अच्छा, जो हुआ सो हुआ, अब तो नीचे चला जा|’

कायस्थ बोला-‘गीता में आपने कहा है- ‘मामुपेत्य तु कौन्तेय पुनर्जन्म न विद्यते’ ‘मेरे को प्राप्त होकर पुनः जन्म नहीं लेता’ तो बतायें, मैं आपको प्राप्त हुआ कि नहीं?

भगवान्-‘अछ भाई, तू चल मेरे साथ|’

कायस्थ-‘महाराज! केवल मैं ही चलूँ? हाथी पीछे रहेगा बेचारा? इसकी कृपा से ही तो मैं यहाँ आया| इसको भी तो लो साथ में!’

हाथी बोला-‘मेरे बहुत-से भाई यहीं नरकों में बैठे हैं, सबको साथ ले लो|’

भगवान् बोले-‘चलो भाई, सबको ले लो!’ भगवान् के आने से हाथी का भी कल्याण हो गया, कायस्थ का भी कल्याण हो गया और अन्य जीवों का भी कल्याण हो गया!

यह कहानी तो कल्पित है, पर इसका सिद्धांत पक्का है कि अपने हाथ में कोई अधिकार आये तो सबका भला करो| जितना कर सको, उतना भला करो| अपनी तरफ से किसी का बुरा मत करो, किसी को दुःख मत दो| गीता का सिद्धांत है-‘सर्वभूतहिते रताः’ ‘प्राणिमात्र के हित में प्रीति हो’| अधिकार हो, पद हो, थोड़े ही दिन रहने वाला है| सदा रहने वाला नहीं है| इसलिये सबके साथ अच्छे-से-अच्छा बर्ताव करो|
   

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