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मंगलवार, 27 जनवरी 2026

WHITE DISHCHARGE ♦️श्वेत प्रदर (सफ़ेद पानी)♦️

 WHITE DISHCHARGE 

♦️श्वेत प्रदर (सफ़ेद पानी)♦️

ल्यूकोरिया या प्रदर रोग महिलाओं में होने वाला एक गंभीर रोग है. इस रोग में महिला की योनी से सफ़ेद रंग का स्राव निकलता रहता है जो महिला को शारीरिक एवं मानसिक रूप से कमजोर बना देता है..

सफ़ेद पानी की समस्या से पीड़ित महिला गर्भ धारण करने में सक्षम नहीं हो पाती एवं साथ ही उसके शरीर से धातुओं का क्षय होता रहता है जो उसे शारीरिक रूप से बेहद कमजोर बना देतें है..

♦️आयुर्वेदानुसार श्वेत प्रदर ♦️

संहिताओं में इसका वर्णन श्लेष्मिक प्रदर या श्लेष्मजा योनी नाम से मिलता है. सामान्य अवस्था में महिला के प्रजनन अंगो एवं भग प्रदेश आदि से प्राय: सफ़ेद रंग का एवं गंधहिन पानी जैसा स्राव निकलता रहता है, जो उस भाग को गीला बनाये रखता है.. इस स्राव की मात्रा उतनी ही होती है जितने में वह अंग गीला रहे | मानसिक विकार जैसे काम, क्रोध एवं वासना आदि के कारण यह मात्रा बढ़ भी जाती जो एक समय पश्चात सामान्य हो जाती है.. कभी  कभार दुर्बलता, कुपोषण, आहार विहार एवं व्याधियों के कारण यह मात्रा अधिक हो जाती है जो लम्बे समय तक परेशान करती है | इसी अवस्था को श्वेत प्रदर कहते है..

आयुर्वेद चिकत्सानुसार महिलाओं में सफ़ेद पानी की समस्या को 5 प्रकार की माना है..

भगज श्वेत प्रदर
योनिज
ग्रीवीय एवं
ग्रभास्यज श्वेत प्रदर

श्वेत प्रदर (सफ़ेद पानी) के कारण

पांडू रोग / खून की कमी

मानसिक विकार जैसे क्रोध, भय एवं चिंता आदि 

अधिक सम्भोग

अपच एवं अजीर्ण 

कब्ज

मूत्राशय में सुजन

अतृप्त कामवासन

भावनात्मक कष्ट आदि

श्वेत प्रदर की पहचान या लक्षण 
 
योनिमार्ग से सफ़ेद जलीय चिपचिपे पदार्थ का बाहर निकलना.

योनी में खुजली एवं जलन.
जांघों में भारीपन 
शारीरिक दुर्बलता 
आलस्य 
भोजन का ठीक प्रकार से पाचन न होना 
कब्ज हो जाना 
सिर दर्द 
चक्कर आना 
भोजन में अरुचि होना आदि लक्षण सफ़ेद पानी की समस्या होने पर दिखाई देते है 

♦️श्वेत प्रदर के कारगर घरेलु इलाज.♦️

श्वेत प्रदर नाशक त्रिफला योग
 
♦️सामग्री ♦️

आंवले का बक्कल, हरड का बक्कल, एवं बहेड़ा इन तीनो को 1  -1 तोला(10 ग्राम) एवं जल आधा kg

♦️विधि ♦️

सबसे पहले इन तीनो द्रव्यों को कूटपीस कर दरदरा कर लें | अब रात्रि के समय इन्हें एक मिट्टी के बर्तन में रखकर ऊपर से पानी डाल दें..रात्रि भर अच्छी तरह भीगने के बाद सुबह इसे आंच पर चढ़ा कर काढ़ा तैयार कर लें यह योग सभी प्रकार के प्रदर रोग में उपयोगी है..

इसके उपयोग से पुराने से पुराना प्रदर रोग ठीक हो जाता है | साथ ही वेदना आदि में भी आराम मिलता है..

♦️उपयोग की विधि ♦️

इस काढ़े का उपयोग योनी में एनिमा देने के लिए किया जाता है | योनी में ड्यूस एवं पिच्चु को धारण करना चाहिए एवं साथ ही योनिमार्ग को इस काढ़े से धोना चाहिए | लगातार कुछ दिनों के प्रयोग से शीघ्र ही श्वेत प्रदर की समस्या नष्ट हो जाती है |

आयुर्वेद में त्रिफला क्वाथ से योनी प्रक्षालन को उपयुक्त चिकित्सा माना गया है..


गुलर योग

सामग्री 
गुलर के पक्के फल का 50 ग्राम चूर्ण और 100 ग्राम मिश्री |

♦️विधि ♦️

गुलर के फलों को को टुकड़े  टुकड़े करके सुखा लें | जब एक दम सुख जाए तब कूट पीसकर कर कपड़छन चूर्ण कर लें | इस चूर्ण में मिश्री मिलाकर अच्छी तरह ढक कर रखें |

♦️उपयोग एवं गुण ♦️

10 ग्राम तक की मात्रा में इस चूर्ण को खाकर ऊपर से गाय या बकरी का दूध ग्रहण करना चाहिए | अगर रक्त प्रदर की समस्या हो तो अशोकारिष्ट के साथ सेवन करना चाहिए | हमेशा ठन्डे जल के साथ ही इसका सेवन करना चाहिए | दिन में दो बार सुबह एवं शाम लिया जा सकता है | इसके उपयोग से सभी प्रकार के प्रदर रोग ठीक हो जाता है |

♦️श्वेत प्रदर (सफ़ेद पानी) के घरेलु नुस्खें..♦️

मुलहठी एवं चीनी 10 ग्राम एवं 20 ग्राम प्रत्येक को दोनों को पीसकर चूर्ण बना लें | आधा चम्मच चूर्ण सुबह और आधा चम्मच शाम को दूध के साथ सेवन करें.

सूखे हुए चमेली के पते 4 ग्राम और सफ़ेद फिटकरी 2 ग्राम दोनों को खूब महीन पिसलें | इसमें से 2 ग्राम चूर्ण शक्कर में मिलाकर रात के समय फांककर ऊपर से दूध पी लें | इसके प्रयोग से श्वेत प्रदर ठीक हो जाता है |

पके हुए केले के अन्दर फिटकरी का चूर्ण भरकर इसे दोपहर के समय खूब चबा चबा कर खाएं | इसके सेवन से सफ़ेद पानी की समस्या से राहत मिलती है |

पेट पर ठन्डे पानी का कपडा रोज 10 मिनट रखना चाहिए |

अशोक के पेड़ की छाल को 50 ग्राम की मात्रा में लें | इसे 1 किलो पानी में पकाएं जब पानी आधा रहे तब इसे आंच से निचे उतार कर छान कर दूध में मिलाकर सेवन करना श्वेत प्रदर के रोग में फायदेमंद रहता है |

अनार के छिलकों को ठन्डे पानी के साथ सेवन करने से फायदा मिलता है |

मूली का सेवन भी फायदेमंद रहता है | मूली के पतों का रस निकाल कर सेवन करने से भी लाभ मिलता है |

गुलाब के फुल की पत्तियों को मिश्री के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है |



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