यह ब्लॉग खोजें

सोमवार, 27 अप्रैल 2026

रेगिस्तान का मेवा पीलू फल - राजस्थान की गर्मी का असली टॉनिक

रेगिस्तान का मेवा पीलू फल, दुर्लभ होने के साथ औषधीय गुणों से भरपूर, कई बीमारियों का रामबाण इलाज 


जाल या पीलू का पेड़ भारत में बिहार, राजस्थान, कर्नाटक, सिंध आदि शुष्क प्रदेशों में पाया जाता है। राजस्थान का थार मरुस्थल, जहाँ पर सुदूर रेतीले धोरों में वनस्पति बहुत कम मात्रा में पायी जाती हैं वहां पर भी जाल का पेड़ खूब फलता-फूलता है | यह रेगिस्तानी और मैदानी भागों से लेकर 500 मीटर की ऊँचाई वाले इलाकों तक भी  पाया जाता है। जाळ का वृक्ष घना और छायादार होता है, और लगभग 4 से 5 मीटर ऊंचाई तक बढ़ जाता है | इसकी टहनियां पोली और कमजोर होती हैं |


पीलू या जाळ का पेड़ (salvadora olcoides)

राजस्थान की गर्मी का असली टॉनिक 

गांव में बुजुर्ग कहते हैं - "पिलू खाया, लू नहीं सताया"

 पिलू / जाल का फल - रेगिस्तान का मेवा 

1. क्या है पिलू? 

पेड़: जाल या पीलू का पेड़, Salvadora persica - 

फल: छोटे-छोटे अंगूर जैसे गुच्छे में लगते हैं - 

सूखने के बाद: कोकड़ कहते हैं - 

इलाका: जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर - थार का रेगिस्तान 

 

2. ताकत और फायदे - 

ठंडा तासीर: गर्मी में शरीर को अंदर से ठंडा रखता है। लू नहीं लगने देता। - 

पेट के लिए रामबाण: कब्ज, एसिडिटी, गर्मी के दस्त में फायदा। - 

ताकतवर: आयरन, कैल्शियम, मिनरल से भरपूर। कमजोरी दूर करता है। - 

दांतों के लिए: जाल की दातून तो दुनिया भर में मशहूर है - Miswak 

 

3. खाने का तरीका - ✅ मई-जून में मिलता है - गर्मी चरम पर हो तब 

✅ 10-20 दाने एक साथ खाओ - एक-एक से मुंह में छाले पड़ जाते हैं 

✅ बीज बाहर थूकना पड़ता है - बीज कड़वा होता है, सिर्फ गूदा खाओ 

✅ बहुत मुश्किल से मिलता है - अब जाल के पेड़ कम हो गए


 


लू के प्रभाव को कम करने के लिए पीलू फल एक रामबाण औषधि मानी जाती है. इसे खाने से शरीर में न केवल पानी की कमी पूरी हो जाती है बल्कि लू भी नहीं लगती है

पश्चिमी रेगिस्तान की भूमि भले ही बंजर हो, लेकिन प्रकृति ने इस क्षेत्र बहुत अनमोल सौगातें प्रदान की हैं. गर्मियों की शुरुआत होते ही रेगिस्तान में विषम हालात पैदा हो जाते है. इस बार अब तक तापमान 45 डिग्री पार चला गया है. जिसका असर सामान्य जनजीवन पर हो रहा है साथ ही वनस्पतियों को भी नुकसान हो रहा है. लेकिन ऐसी कठिन परिस्थिती में भी इंसान और जीव जंतुओं के ज़िंदा रहने के लिए प्रकृति ने इस क्षेत्र को कई प्रकार की बेशकीमती चीजें प्रदान की हैं. गर्मी की तीव्रता बढ़ने के साथ ही यहां जाल (जाळ) नामक पौधे के पीलू लगने लग जाते हैं, जो स्वादिष्ट होने के साथ साथ अत्यधिक गर्मी से शरीर की रक्षा भी करता है.
भारत के सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण पश्चिमी राजस्थान के इस रेगिस्तानी इलाक़े जैसलमेर के आस पास के गांवों पर प्रकृति की भी मेहरबानियां हैं. यहां पाए जाने वाले एक पेड़ को स्थानीय भाषा में जाल ( जाळ) के नाम से जाना जाता है. इसी जाल के पेड़ पर छोटे छोटे रसीले पीलू के फल लगते हैं. यह फल मई व जून में लगते है. इसकी विशेषता यह है कि रेगिस्तान में जितनी अधिक गर्मी और तेज़ लू चलेगी पीलू उतने ही रसीले व मीठे होंगे. लू के प्रभाव को कम करने के लिए यह एक रामबाण औषधि मानी जाती है. इसे खाने से शरीर में न केवल पानी की कमी पूरी हो जाती है बल्कि लू भी नहीं लगती है.
अत्यधिक मीठे और रस भरे इस फल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे अकेला खाते ही जीभ छिल जाती है, ऐसे में एक साथ आठ-दस दाने मुंह में डालने पड़ते हैं. रेगिस्तान के इस फल को मारवाड़ का मेवा भी कहा जाता है.

पोखरण के जंगलो में ये फल सिर्फ 1 महीने के लिए होते है और ज्यादा आंधी और बारिश से ये फल झड़ जाते हैं. इनका बाजार में मिलना दुर्लभ होता है, इसलिए इनकी कीमत 300-500 रुपये प्रति किलो तक होती है.

 जाल के पत्तों और फल के आकार के अनुसार ये दो प्रकार के होते है, जिन्हें खारी जाल और मीठी जाल के नाम से जाना जाता हैं 

खारी जाल के पत्ते लगभग एक इंच लम्बे और आधा इंच चौड़े होते हैं, और फल छोटे और गहरे चमकदार रंग के होते है, वहीँ मीठी जाल के पत्ते एक से डेढ़ इंच लम्बे और 5 से 10 मिमी चौड़े होते हैं और फल खारी जाल के फल की अपेक्षाकृत थोड़े बड़े और भूरे मटमैले और हलके पीले रंग के होते हैं | 

          मीठी जाल के पत्ते और फल              

                        खारी  जाल के पत्ते और फल 


जाल के फलों को पीलू कहा जाता है | भीषण गर्मी के मौसम में जब थार के तपते धोरे लू के थपेड़ो से आम जन को त्रस्त कर रहे होते है, तब उस भीषण गर्मी में जाल के ये स्वादिष्ट फल शीतलता प्रदान करते हैं |जाल के ये पीलू अंगूर की तरह रसभरे होते है, जिनके गुदा के बीच में एक बीज होता हैं | इनके फलों या पीलू के सुखा कर भी स्टोर किया जाता है, जो बहुत ही स्वादिष्ट होते हैं | 


रसभरे पीलू 

जाल का विभिन्न भाषाई नाम 

  • Hindi – पीलू, छोटा पीलू, खरजाल
  • English – मेसवाक (Meswak), साल्ट बुश ट्री (Salt bush tree), मस्टर्ड ट्री (Mustard tree), Tooth brush tree (टूथ ब्रश ट्री)
  • Sanskrit – पीलू , पीलू, गुडफल्, स्रीं, शीतफल, गौली, शीत, सहस्राक्षी, शीतसह, श्याम, करभवल्लभ, पीलूक
  • Oriya – कोटुङ्गो (Kotungo), टोबोटो (Toboto)
  • Urdu – पीलू (Pilu)
  • Kannada – गोनी मारा (Goni mara), गोनी (Goni)
  • Gujarati – पीलू (Pilu), खरि जाल (Khari jal)
  • Tamil – पेरुन्गोलि (Perungoli), कलावी (Kalavi)
  • Telugu – गोगु (Gogu), गुनिया (Gunia)
  • Bengali – पीलूगाछ (Pilugach), पीलू (Pilu)
  • Nepali – पिलु (Pilu)
  • Punjabi – पीलू (Pilu), झाल (Jhal)
  • Marathi – पीलू (Pilu), खाकिन (Khakin)
  • Malayalam – उका (Uka)
  • Arabic – अराक (Arak), मिसवाक (Miswaq)
  • Persian – दरख्ते मिसवाक (Darkhate miswak)

पीलू के औषधीय उपयोग 

आयुर्वेदिक जानकार ये बताते हैं कि पीलू एक बहुत ही गुणी औषधि है और पीलू का प्रयोग कर कई रोगों को ठीक किया जा सकता है. पेट के रोग, पथरी, बवासीर और तिल्ली विकार में पीलू का उपयोग कर लाभ पाया जा सकता है. इसी तरह वात्त, पित्त और कफ दोष तथा सिर दर्द आदि में भी पीलू का प्रयोग लाभदायक होता है.


(नोट : औषधीय उपयोग मे लेने से पहले विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह जरूर लें |)

  •  निशोथ, पीलू, अजवायन, कांजी आदि अम्ल द्रव्य तथा चित्रकादि पाचन द्रव्यों को मिलाकर सेवन करें। इससे पेट दर्द और आंतों के रोग में लाभ होता है।
  •  पीलू के पेस्ट से पकाए हुए घी का सेवन करने से पेट के फूलने की समस्या में लाभ (peelu ke fayde) होता है।
  • भुने हुए पीलू फल (pilu fruit) को सेंधा नमक के साथ खाएं और साथ में गोमूत्र, दूध या अंगूर का रस पीने से पेट की बीमारी जैसे – पैट की गैस की समस्या (Meswak tree benefits) ठीक होती है।
  • रोज सुबह 7 दिन से एक माह तक पीलू को अकेले या छाछ के साथ सेवन करें। इससे बवासीर, पेट की गैस, पाचन विकार, गुदा विकार आदि में लाभ (peelu ke fayde) मिलता है।
  • सहिजन बीज, जड़ी बीज, कनेर पत्ते, पीलू वृक्ष की जड़, बेलगिरी तथा हींग को थूहर के दूध के साथ पीस लें। इसे बवासीर के मस्सों पर लेप करने से लाभ होता है।
  • पीलू के तेल में बत्ती भिगोकर गुदा में रखने से बवासीर में लाभ होता है।



function disabled

Old Post from Sanwariya