वैज्ञानिक नाम: Echis carinatus
🔹 पहचान (Identification)
फुर्सा भारत के सबसे छोटे लेकिन अत्यंत खतरनाक विषैले साँपों में गिना जाता है। लंबाई: लगभग 30–60 सेमी, शरीर मोटा और छोटा, रंग हल्का भूरा, रेतीला या स्लेटी, शरीर पर ज़िग-ज़ैग या चेन जैसी सफ़ेद आकृतियाँ, आँखें बड़ी, पुतली लंबवत, शरीर की शल्क (scales) आरी के दाँत जैसे खुरदरे होते हैं।
👉 इन्हीं खुरदरे शल्कों को रगड़कर यह “सर्र-सर्र” जैसी चेतावनी ध्वनि निकालता है।
🔹 वितरण एवं आवास (Distribution & Habitat)
फुर्सा मुख्यतः भारत (विशेषकर शुष्क व अर्ध-शुष्क क्षेत्र) में पाया जाता है। वैसे यह पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, मध्य पूर्व व अफ्रीका के कुछ भागो में भी पाया जाता है। यह अधिकतर रेगिस्तानी क्षेत्र, पथरीली भूमि, खेत, झाड़ियाँ, मानव बस्तियों के आसपास पाया जाता है।
👉 यह अक्सर रात में सक्रिय रहता है (Nocturnal)
🔹 स्वभाव (Behaviour)
यह अत्यंत चिड़चिड़ा और रक्षात्मक होता है। बिना चेतावनी भी हमला कर सकता है। अक्सर ज़मीन पर कुंडली मारे रहता है। खतरा महसूस होने पर S-आकार में कुंडली बनाकर आवाज़ करता है।
🔹 विष (Venom)
फुर्सा का विष हेमोटॉक्सिक होता है। यह विष रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया को बिगाड़ देता है। आंतरिक रक्तस्राव कराता है। ऊतकों (tissues) को नुकसान पहुँचाता है।
⚠️ फुर्सा भारत में सर्पदंश से होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण है।
लक्षण: तेज़ दर्द व सूजन, रक्तस्राव (नाक, मसूड़े, घाव से)उल्टी, चक्कर
और गंभीर मामलों में किडनी फेल होना।
🔹 आहार (Diet)
छोटे कृंतक (चूहे)
छिपकलियाँ
मेंढक
छोटे पक्षी
👉 यह पारिस्थितिकी तंत्र में चूहों की संख्या नियंत्रित करने में सहायक है।
🔹 प्रजनन (Reproduction)
मादा फुर्सा जीवित बच्चे जनती है (Viviparous), एक बार में लगभग 5–15 बच्चे हो सकते है। नवजात शिशु भी जन्म से ही विषैले होते हैं।
🔹 रोचक तथ्य: यह आकार में छोटा, लेकिन इसका विष अत्यंत शक्तिशाली होता है । इसकी “सर्र-सर्र” आवाज़ ही इसका सबसे बड़ा पहचान चिन्ह है। कई बार लोग इसे छोटा समझकर जोखिम उठा लेते हैं। उन्हें ऐसा करने से बचना चाहिए।
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