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गुरुवार, 16 जुलाई 2026

भारत के ये 11 अजब गज़ब गाँव ........

भारत के ये 11 अजब गज़ब गाँव ........
   
1. एक गाँव जहां दूध दही मुफ्त मिलता है .......

यहां के लोग कभी दूध या उससे बनने वाली चीज़ो को बेचते नही हैं बल्कि उन लोगों को मुफ्त में दे देते हैं जिनके पास गएँ ये भैंसे नहीं हैं धोकड़ा गुजरात के कक्ष में बसा ऐसा ही अनोखा गाँव है। श्वेत क्रांति के लिए प्रसिद्ध ये गाँव दूध दही ऐसे ही बाँट देता है।

2. इस गाँव में आज भी राम राज्य है👇🏻

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के नेवासा तालुके में शनि शिन्ग्नापुर भारत का एक ऐसा गाँव है जहाँ लोगों के घर में एक भी दरवाजा नही है यहाँ तक की लोगों की दुकानों में भी दरवाजे नही हैं, यहाँ पर कोई भी अपनी बहुमूल्य चीजों को ताले – चाबी में बंद करके नहीं रखता फिर भी गाँव में आज – तक कभी कोई चोरी नही हुई |

3. एक अनोखा गाँव जहाँ हर कोई संस्कृत बोलता हैं👇🏻

 कर्नाटक के शिमोगा शहर के कुछ ही दूरी पर एक गाँव ऐसा बसा हैं जहाँ ग्रामवासी केवल संस्कृत में ही बात करते हैं। शिमोगा शहर से लगभग दस किलोमीटर दूर मुत्तुरु अपनी विशिष्ठ पहचान को लेकर चर्चा में हैं। तुंग नदी के किनारे बसे इस गांव में संस्कृत प्राचीन काल से ही बोली जाती है।

करीब पांच सौ परिवारों वाले इस गांव में प्रवेश करते ही “भवत: नाम किम्?” (आपका नाम क्या है?) पूछा जाता है “हैलो” के स्थान पर “हरि ओम्” और “कैसे हो” के स्थान पर “कथा अस्ति?” आदि के द्वारा ही वार्तालाप होता हैं। बच्चे, बूढ़े, युवा और महिलाएं- सभी बहुत ही सहज रूप से संस्कृत में बात करते हैं। भाषा पर किसी धर्म और समाज का अधिकार नहीं होता तभी तो गांव में रहने वाले मुस्लिम परिवार के लोग भी संस्कृत सहजता से बोलते हैं ।

4. एक गांव जो हर साल कमाता है 1 अरब रुपए👇🏻

यूपी का एक गांव अपनी एक खासियत की वजह से पूरे देश में पहचाना जाता है। आप शायद अभी तक इस गांव की पहचान से दूर रहे हों, लेकिन देश के कोने-कोने में इस गांव ने अपने झंडे गाड़ दिए हैं।

अमरोहा जनपद के जोया विकास खंड क्षेत्र का ये छोटा सा गांव है सलारपुर खालसा। 3500 की आबादी वाले इस गांव का नाम पूरे देश में छाया है और इसका कारण है टमाटर। गांव में टमाटर की खेती बड़े पैमाने पर होती है और 17 साल में टमाटर आसपास के गांवों जमापुर, सूदनपुर, अंबेडकरनगर में भी छा गया है।कारोबार की बात करें, तो पांच माह में यहां 60 करोड़ का कारोबार होता है।

5. ये है जुड़वों का गाँव, रहते है 350 से ज्यादा जुड़वाँ

केरल के मलप्पुरम जिले में स्तिथ कोडिन्ही गाँव (Kodihni Village)  को जुड़वों के गाँव (Twins Village) के नाम से जाना जाता है। यहाँ पर वर्तमान में करीब 350 जुड़वा जोड़े रहते है जिनमे नवजात शिशु से लेकर 65 साल के बुजुर्ग तक शामिल है। विश्व स्तर पर हर 1000 बच्चो पर 4 जुड़वाँ पैदा होते है, एशिया में तो यह औसत 4  से भी कम है। लेकिन कोडिन्ही में हर 1000 बच्चों पर 45 बच्चे जुड़वा पैदा होते है। हालांकि यह औसत पुरे विश्व में दूसरे नंबर पर, लेकिन एशिया में पहले नंबर पर आता है। विश्व में पहला नंबर नाइज़ीरिआ के इग्बो-ओरा को प्राप्त है जहाँ यह औसत 145 है। कोडिन्ही गाँव एक मुस्लिम बहुल गाँव है जिसकी आबादी करीब 2000 है। इस गाँव में घर, स्कूल, बाज़ार हर जगह हमशक्ल नज़र आते है।

6. एक गाँव जिसे कहते है भगवान का अपना बगीचा👇🏻

जहाँ एक और सफाई के मामले में हमारे अधिकांश गाँवो, कस्बों और शहरों की हालत बहुत खराब है वही यह एक सुखद आश्चर्य की बात है की एशिया का सबसे साफ़ सुथरा गाँव भी हमारे देश भारत है। यह है मेघालय का मावल्यान्नॉंग गांव जिसे की भगवान का अपना बगीचा (God’s Own Garden) के नाम से भी जाना जाता है। सफाई के साथ साथ यह गाँव शिक्षा में भी अवल्ल है।  यहाँ की साक्षरता दर 100 फीसदी है, यानी यहां के सभी लोग पढ़े-लिखे हैं। खासी हिल्स डिस्ट्रिक्ट का यह गांव मेघालय के शिलॉंन्ग और भारत-बांग्लादेश बॉर्डर से 90 किलोमीटर दूर है। साल 2014 की गणना के अनुसार, यहां 95 परिवार रहते हैं। यहां सुपारी की खेती आजीविका का मुख्य साधन है। 

7. एक श्राप के कारण 170 सालों से हैं वीरान – रात को रहता है भूत प्रेतों का डेरा👇🏻

हमारे देश भारत के कई शहर अपने दामन में कई रहस्यमयी घटनाओ को समेटे हुए है ऐसी ही एक घटना हैं राजस्थान के जैसलमेर जिले के कुलधरा गाँव कि, यह गांव पिछले 170 सालों से वीरान पड़ा हैं।कुलधरा गाँव के हज़ारों लोग एक ही रात मे इस गांव को खाली कर के चले गए थे  और जाते जाते श्राप दे गए थे कि यहाँ फिर कभी कोई नहीं बस पायेगा। तब से गाँव वीरान पड़ा हैं।

8. इस गांव में कुछ भी छुआ तो लगता है 1000 रुपए का जुर्माना👇🏻

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के अति दुर्गम इलाके में स्तिथ है मलाणा गाँव। इसे आप भारत का सबसे रहस्यमयी गाँव कह सकते है। यहाँ के निवासी खुद को सिकंदर के सैनिकों का वंशज मानते है। यहाँ की अपनी संसद है जो सारे फैसले करती है। मलाणा भारत का इकलौता गांव है जहाँ मुग़ल सम्राट अकबर की पूजा की जाती है।
हिमाचल के मलाणा गांव में लगे नोटिस बोर्ड।
कुल्लू के मलाणा गांव में यदि किसी बाहरी व्यक्ति ने किसी चीज़ को छुआ तो जुर्माना देना पड़ता है। जुर्माने की रकम 1000 रुपए से 2500 रुपए तक कुछ भी हो सकती है।
अपनी विचित्र परंपराओं लोकतांत्रिक व्यवस्था के कारण पहचाने जाने वाले इस गांव में हर साल हजारों की संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। इनके रुकने की व्यवस्था इस गांव में नहीं है। पर्यटक गांव के बाहर टेंट में रहते हैं। अगर इस गांव में किसी ने मकान-दुकान या यहां के किसी निवासी को छू (टच) लिया तो यहां के लोग उस व्यक्ति से एक हजार रुपए वसूलते हैं।

ऐसा नहीं हैं कि यहां के निवासी यहां आने वाले लोगों से जबरिया वसूली करते हों। मलाणा के लोगों ने यहां हर जगह नोटिस बोर्ड लगा रखे हैं। इन नोटिस बोर्ड पर साफ-साफ चेतावनी लिखी गई है। गांव के लोग बाहरी लोगों पर हर पल निगाह रखते हैं, जरा सी लापरवाही भी यहां आने वालों पर भारी पड़ जाती है।

मलाणा गांव में कुछ दुकानें भी हैं। इन पर गांव के लोग तो आसानी से सामान खरीद सकते हैं, पर बाहरी लोग दुकान में न जा सकते हैं न दुकान छू सकते हैं। बाहरी ग्राहकों के दुकान के बाहर से ही खड़े होकर सामान मांगना पड़ता है। दुकानदार पहले सामान की कीमत बताते हैं। रुपए दुकान के बाहर रखवाने के बाद सामन भी बाहर रख देते हैं।

9. यह गाँव कहलाता है ‘मिनी लंदन’👇🏻

झारखंड की राजधानी रांची से उत्तर-पश्चिम में करीब 65 किलोमीटर दूर स्थित एक कस्बा गांव है मैक्लुस्कीगंज। एंग्लो इंडियन समुदाय के लिए बसाई गई दुनिया की इस बस्ती को मिनी लंदन भी कहा जाता है।

घनघोर जंगलों और आदिवासी गांवों के बीच सन् 1933 में कोलोनाइजेशन सोसायटी ऑफ इंडिया ने मैकलुस्कीगंज को बसाया था। 1930 के दशक में रातू महाराज से ली गई लीज की 10 हजार एकड़ जमीन पर अर्नेस्ट टिमोथी मैकलुस्की नामक एक एंग्लो इंडियन व्यवसायी ने इसकी नींव रखी थी। चामा, रामदागादो, केदल, दुली, कोनका, मायापुर, महुलिया, हेसाल और लपरा जैसे गांवों वाला यह इलाका 365 बंगलों के साथ पहचान पाता है जिसमें कभी एंग्लो-इंडियन लोग आबाद थे। पश्चिमी संस्कृति के रंग-ढंग और गोरे लोगों की उपस्थिति इसे लंदन का सा रूप देती तो इसे लोग मिनी लंदन कहने लगे।

10. एक गाँव जहाँ छत पर रखी पानी की टंकियों से होती है घरो की पहचान👇🏻

यह कहानी है पंजाब के जालंधर शहर के एक गांव उप्पलां की। इस गाँव में अब लोगों की पहचान उनके घरों पर बनी पानी की टंकियों से होती है। अब आप सोच रहे होंगे की पानी की टंकियों में ऐसी क्या विशेषता है तो हम आपको बता दे की यहाँ के मकानो की छतो पर आम वाटर टैंक नहीं है, बल्कि यहाँ पर शिप, हवाईजहाज़, घोडा, गुलाब, कार, बस आदि अनेकों आकर की टंकिया है।

इस गांव के अधिकतर लोग पैसा कमाने लिए विदेशों में रहते है। गांव में खास तौर पर एनआरआईज की कोठियां में छत पर इस तरह की टंकिया रखी है। अब कोठी पर रखी जाने वाली टंकियो से उसकी पहचानी जा रही हैं। नामी परिवार अपने घरों पर तरह तरह की टंकियां बनवा रहे हैं।

11. इसे कहते है मंदिरों का गाँव और गुप्त काशी👇🏻

झारखंड के दुमका जिले में शिकारीपाड़ा के पास बसे एक छोटे से गांव ” मलूटी” में आप जिधर नज़र दौड़ाएंगे आपको प्राचीन मंदिर नज़र आएंगे। मंदिरों की बड़ी संख्या होने के कारण इस क्षेत्र को गुप्त काशी और मंदिरों का गाँव भी कहा जाता है। इस गांव का राजा कभी एक किसान हुआ करते था। उसके वंशजों ने यहां 108 भव्य मंदिरों का निर्माण करवाया।

ये मंदिर बाज बसंत राजवंशों के काल में बनाए गए थे।  शुरूआत में कुल 108 मंदिर थे, लेकिन संरक्षण के आभाव में अब सिर्फ 72 मंदिर ही रह गए हैं। इन मंदिरों का निर्माण 1720 से लेकर 1840 के मध्य हुआ था। इन मंदिरों का निर्माण सुप्रसिद्व चाला रीति से की गयी है। ये छोटे-छोटे लाल सुर्ख ईटों से निर्मित हैं और इनकी ऊंचाई 15 फीट से लेकर 60 फीट तक हैं। इन मंदिरों की दीवारों पर रामायण-महाभारत के दृश्यों का चित्रण भी बेहद खूबसूरती से किया गया है।

#साभार ✒ सोशल मीडिया (चित्र प्रतिकात्मक)

गुरुवार, 9 जुलाई 2026

जेड (Jade) क्या है? इतिहास, महत्व, प्रकार और पहचान की पूरी जानकारी

 

जेड (Jade) क्या है? इतिहास, महत्व, प्रकार और पहचान की पूरी जानकारी

जेड (Jade) दुनिया के सबसे प्राचीन और मूल्यवान रत्नों में से एक है। यह केवल एक सुंदर पत्थर नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक आस्था का प्रतीक है। विशेष रूप से चीन में जेड को "स्वर्ग का पत्थर" कहा जाता है और इसे सौभाग्य, समृद्धि, स्वास्थ्य, सुरक्षा और दीर्घायु का प्रतीक माना जाता है।


📷 फोटो सुझाव 1 (मुख्य बैनर)

चित्र: चमकदार हरे रंग का जेड पेंडेंट या जेड की चूड़ी।
कैप्शन: जेड – सौभाग्य, समृद्धि और पवित्रता का प्रतीक।


जेड का इतिहास

जेड का उपयोग लगभग 7,000 वर्ष से भी अधिक समय से किया जा रहा है। प्राचीन चीन में इससे आभूषण, धार्मिक वस्तुएँ, मूर्तियाँ और शाही प्रतीक बनाए जाते थे। उस समय जेड का मूल्य सोने से भी अधिक माना जाता था।

महान दार्शनिक कन्फ्यूशियस ने जेड को मानव के श्रेष्ठ गुणों—सत्य, ईमानदारी, न्याय, पवित्रता और बुद्धिमत्ता—का प्रतीक बताया था। इसलिए जेड केवल आभूषण नहीं, बल्कि सम्मान और चरित्र का भी प्रतीक बन गया।


📷 फोटो सुझाव 2

चित्र: प्राचीन चीनी जेड की नक्काशी या ड्रैगन की आकृति।
कैप्शन: प्राचीन चीन में जेड का उपयोग धार्मिक और शाही प्रतीकों में किया जाता था।


जेड के प्रकार

जेड मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है।

1. नेफ्राइट (Nephrite)

  • सबसे पुराना जेड।

  • मजबूत और टिकाऊ।

  • सफेद, हरा, भूरा और क्रीम रंगों में मिलता है।

  • चीन में हजारों वर्षों से उपयोग किया जा रहा है।

2. जेडाइट (Jadeite)

  • अधिक दुर्लभ और महंगा।

  • म्यांमार इसका सबसे बड़ा स्रोत है।

  • इम्पीरियल ग्रीन जेडाइट दुनिया का सबसे मूल्यवान जेड माना जाता है।

  • हरा, लैवेंडर, पीला, काला, नीला और अन्य रंगों में उपलब्ध।


📷 फोटो सुझाव 3

चित्र: नेफ्राइट और जेडाइट को साथ में दिखाने वाली तुलना।
कैप्शन: नेफ्राइट और जेडाइट—दिखने में समान, लेकिन गुणों और कीमत में अलग।


चीन में जेड का महत्व

चीन में जेड उद्योग करोड़ों डॉलर का व्यापार करता है और लाखों लोगों को रोजगार देता है। जेड पहनना शुभ माना जाता है। जन्मदिन, विवाह, बच्चों के जन्म और अन्य शुभ अवसरों पर जेड उपहार में देना एक पुरानी परंपरा है।

जेड को पहनने से लोग मानते हैं कि यह सौभाग्य, सकारात्मक ऊर्जा और सुरक्षा का प्रतीक बनकर जीवन में शुभता लाता है।


📷 फोटो सुझाव 4

चित्र: जेड की चूड़ियाँ, पेंडेंट और अंगूठियाँ।
कैप्शन: चीन में जेड के आभूषण आज भी बेहद लोकप्रिय हैं।


जेड पर बनने वाले शुभ प्रतीक

जेड पर कई प्रकार की सुंदर नक्काशी की जाती है, जिनका अपना विशेष अर्थ होता है।

  • ड्रैगन – शक्ति और सफलता

  • फीनिक्स – प्रेम और वैवाहिक सुख

  • कछुआ – लंबी आयु

  • आड़ू – अमरता और स्वास्थ्य

  • सुनहरी मछली – धन और समृद्धि

  • पिक्सियू – धन आकर्षित करने का प्रतीक

  • गुआनयिन – करुणा और सुरक्षा


📷 फोटो सुझाव 5

चित्र: ड्रैगन और फीनिक्स वाली जेड नक्काशी।
कैप्शन: जेड पर बने शुभ प्रतीकों का अपना विशेष सांस्कृतिक महत्व है।


असली जेड की पहचान कैसे करें?

यदि आप जेड खरीदना चाहते हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें—

  • असली जेड अपेक्षाकृत भारी होता है।

  • छूने पर लंबे समय तक ठंडा महसूस होता है।

  • उसकी सतह पर प्राकृतिक बनावट दिखाई देती है।

  • विश्वसनीय और प्रमाणित विक्रेता से ही खरीदें।

  • यदि संभव हो तो प्रमाणपत्र (Certificate) अवश्य लें।


Jade Stone Price को कौन-कौन से कारक प्रभावित करते हैं?

जेड की कीमत निम्न बातों पर निर्भर करती है:

  • रंग (Color)
  • पारदर्शिता (Transparency)
  • बनावट (Texture)
  • कटिंग (Cut)
  • आकार (Size)
  • स्रोत (Origin)
  • प्रमाणिकता (Authenticity)

उच्च गुणवत्ता वाला Imperial Green Jade सबसे महंगा माना जाता है।

निष्कर्ष

Jade Stone केवल एक खूबसूरत रत्न नहीं बल्कि हजारों वर्षों की संस्कृति, परंपरा और सौभाग्य का प्रतीक है। इसकी प्राकृतिक सुंदरता, मजबूती और आध्यात्मिक महत्व ने इसे दुनिया के सबसे लोकप्रिय रत्नों में शामिल किया है।

यदि आप Jade Jewellery खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो हमेशा प्रमाणित और विश्वसनीय विक्रेता से ही खरीदें। सही गुणवत्ता वाला जेड न केवल एक शानदार आभूषण है बल्कि पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने योग्य मूल्यवान निवेश भी माना जाता है।

Gems & Art Plaza, Jodhpur में आपको उच्च गुणवत्ता वाली Jade Jewellery, Jade Pendants, Jade Beads, Jade Carvings और अन्य कीमती रत्नों की उत्कृष्ट श्रृंखला उपलब्ध है।


शुक्रवार, 3 जुलाई 2026

ABSLI Anmol Akshaya – Child Education Planning

🎓 ABSLI Anmol Akshaya – Child Education Planning
 (हिंदी में सरल विश्लेषण)

यह उदाहरण उन माता-पिता के लिए है जो अपने बच्चे की Graduation और Post Graduation की फीस की पहले से व्यवस्था करना चाहते हैं।
📌 उदाहरण
मान लीजिए:
👨 पिता की उम्र: 35–40 वर्ष
💰 वार्षिक प्रीमियम: ₹5,00,000
📅 प्रीमियम भुगतान अवधि: 10 वर्ष
👉 कुल निवेश = ₹50,00,000
🎯 बच्चे की उच्च शिक्षा के लिए आय
जब बच्चा कॉलेज जाने की उम्र में पहुंचेगा, तब यह प्लान हर साल फीस के लिए आय देगा

18वें वर्ष में. 🎓 ₹18,30,116

19वें वर्ष में 🎓 ₹18,30,116

20वें वर्ष में. 🎓 ₹18,30,116
21वें वर्ष में 🎓 ₹18,30,116
22वें वर्ष में🎓 ₹18,30,116

कुल Education Income
💰 ₹91,50,580

🎁 इसके बाद भी फायदा खत्म नहीं
22वें वर्ष के बाद भी आपको Maturity Benefit मिलता है।
अनुमानित Maturity Value (8% पर)
💰 ₹43,00,000
कुल संभावित प्राप्ति
आपने जमा किया
₹50,00,000
संभावित प्राप्ति
💰 Education Income = ₹91,50,580
💰 Maturity Benefit = ₹43,00,000
कुल
🎯 ₹1,34,50,580

🛡️ सबसे बड़ी खासियत
अगर दुर्भाग्यवश पॉलिसीधारक की मृत्यु हो जाए:
✅ Nominee को Death Benefit मिलेगा
✅ आगे के Premium माफ हो सकते हैं (Policy Continuance Benefit लागू होने पर)
✅ बच्चे की पढ़ाई के लिए मिलने वाली Income जारी रह सकती है
✅ Maturity Benefit भी मिलता है

👑 कैलाश चंद्र लढा "सांवऱिया"
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📱 9352174466
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सभी वरिष्ठ नागरिक (55 से ऊपर की उम्र के) कृपया अवश्य पढ़ें, हो सकता है आपके लिए फायदेमंद हो ..


👨‍🏫👩‍🏫 सभी वरिष्ठ नागरिक (55 से ऊपर की उम्र के) कृपया अवश्य पढ़ें, हो सकता है आपके लिए फायदेमंद हो ..

आप जानते हैं कि मन चाहे कितना ही जोशीला हो पर साठ की उम्र पार होने पर यदि आप अपनेआप को फुर्तीला और ताकतवर समझते हों तो यह गलत है। वास्तव में ढलती उम्र के साथ शरीर उतना ताकतवर और फुर्तीला नहीं रह जाता।

आपका शरीर ढलान पर होता है, जिससे ‘हड्डियां व जोड़ कमजोर होते हैं, पर कभी-कभी मन भ्रम बनाए रखता है कि ‘ये काम तो मैं चुटकी में कर लूँगा’। पर बहुत जल्दी सच्चाई सामने आ जाती है मगर एक नुकसान के साथ।

सीनियर सिटिजन होने पर जिन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए, ऐसी कुछ टिप्स दे रहा हूं।

-- धोखा तभी होता है जब मन सोचता है कि ‘कर लूंगा’ और शरीर करने से ‘चूक’ जाता है। परिणाम एक एक्सीडेंट और शारीरिक क्षति!

ये क्षति फ्रैक्चर से लेकर ‘हेड इंज्यूरी’ तक हो सकती है। यानी कभी-कभी जानलेवा भी हो जाती है।

-- इसलिए जिन्हें भी हमेशा हड़बड़ी में काम करने की आदत हो, बेहतर होगा कि वे अपनी आदतें बदल डालें।

भ्रम न पालें, सावधानी बरतें क्योंकि अब आप पहले की तरह फुर्तीले नहीं रहे।

छोटी सी चूक कभी बड़े नुक़सान का कारण बन जाती है।

-- सुबह नींद खुलते ही तुरंत बिस्तर छोड़ खड़े न हों, क्योंकि आँखें तो खुल जाती हैं मगर शरीर व नसों का रक्त प्रवाह पूर्ण चेतन्य अवस्था में नहीं हो पाता ।

अतः पहले बिस्तर पर कुछ मिनट बैठे रहें और पूरी तरह चैतन्य हो लें। कोशिश करें कि बैठे-बैठे ही स्लीपर/चप्पलें पैर में डाल लें और खड़े होने पर मेज या किसी सहारे को पकड़कर ही खड़े हों। अक्सर यही समय होता है डगमगाकर गिर जाने का।

-- गिरने की सबसे ज्यादा घटनाएं बाथरुम/वॉशरुम या टॉयलेट में ही होती हैं। आप चाहे अकेले हों, पति/पत्नी के साथ या संयुक्त परिवार में रहते हों लेकिन बाथरुम में अकेले ही होते हैं।

-- यदि आप घर में अकेले रहते हों, तो और अधिक सावधानी बरतें क्योंकि गिरने पर यदि उठ न सके तो दरवाजा तोड़कर ही आप तक सहायता पहुँच सकेगी, वह भी तब जब आप पड़ोसी तक समय से सूचना पहुँचाने में सफल हो सकेंगे।

याद रखें बाथरुम में भी मोबाइल साथ हो ताकि वक्त जरुरत काम आ सके।

-- देशी शौचालय के बजाय हमेशा यूरोपियन कमोड वाले शौचालय का ही इस्तेमाल करें। यदि न हो तो समय रहते बदलवा लें, इसकी तो जरुरत पड़नी ही है, अभी नहीं तो कुछ समय बाद।

संभव हो तो कमोड के पास एक हैंडिल लगवा लें। कमजोरी की स्थिति में इसे पकड़ कर उठने के लिए ये जरूरी हो जाता है।

बाजार में प्लास्टिक के वेक्यूम हैंडिल भी मिलते हैं, जो टॉइल जैसी चिकनी सतह पर चिपक जाते हैं, पर इन्हें हर बार इस्तेमाल से पहले खींचकर जरूर जांच-परख लें।

-- हमेशा आवश्यक ऊँचे स्टूल पर बैठकर ही नहायें।

बाथरुम के फर्श पर रबर की मैट जरूर बिछाकर रखें ताकि आप फिसलन से बच सकें।

-- गीले हाथों से टाइल्स लगी दीवार का सहारा कभी न लें, हाथ फिसलते ही आप ‘डिस-बैलेंस’ होकर गिर सकते हैं।

-- बाथरुम के ठीक बाहर सूती मैट भी रखें जो गीले तलवों से पानी सोख ले। कुछ सेकेण्ड उस पर खड़े रहें फिर फर्श पर पैर रखें वो भी सावधानी से।

-- अंडरगारमेंट हों या कपड़े, अपने चेंजरूम या बेडरूम में ही पहनें। अंडरवियर, पाजामा या पैंट खडे़-खडे़ कभी नहीं पहनें।

हमेशा दीवार का सहारा लेकर या बैठकर ही उनके पायचों में पैर डालें, फिर खड़े होकर पहनें, वर्ना दुर्घटना घट सकती है।

कभी-कभी स्मार्टनेस की बड़ी कीमत चुकानी पड़ जाती है।

-- अपनी दैनिक जरुरत की चीजों को नियत जगह पर ही रखने की आदत डाल लें, जिससे उन्हें आसानी से उठाया या तलाशा जा सके।

भूलने की आदत हो, तो आवश्यक चीजों की लिस्ट मेज या दीवार पर लगा लें, घर से निकलते समय एक निगाह उस पर डाल लें, आसानी रहेगी।

-- जो दवाएं रोजाना लेनी हों, उनको प्लास्टिक के प्लॉनर में रखें जिससे जुड़ी हुई डिब्बियों में हफ्ते भर की दवाएँ दिन-वार के साथ रखी जाती हैं।

अक्सर भ्रम हो जाता है कि दवाएं ले ली हैं या भूल गये।प्लॉनर में से दवा खाने में चूक नहीं होगी।

-- सीढ़ियों से चढ़ते उतरते समय, सक्षम होने पर भी, हमेशा रेलिंग का सहारा लें, खासकर ऑटोमैटिक सीढ़ियों पर। "Escalators"...

ध्यान रहे अब आपका शरीर आपके मन का ओबिडियेंट सरवेन्ट नहीं रहा।

— बढ़ती आयु में कोई भी ऐसा कार्य जो आप सदैव करते रहे हैं, उसको बन्द नहीं करना चाहिए।

कम से कम अपने से सम्बन्धित अपने कार्य स्वयं ही करें।

नित्य प्रातःकाल घर से बाहर निकलने, पार्क में जाने की आदत न छोड़ें, छोटी मोटी एक्सरसाइज भी करते रहें। नहीं तो आप योग व व्यायाम से दूर होते जाएंगे और शरीर के अंगों की सक्रियता और लचीला पन कम होता जाएगा। हर मौसम में कुछ योग-प्राणायाम अवश्य करते रहें।

घर में या बाहर हुकुम चलाने की आदत छोड़ दें। अपना पानी, भोजन, दवाई इत्यादि स्वयं लें जिससे शरीर में सक्रियता बनी रहे।

बहुत आवश्यक होने पर ही दूसरों की सहायता लेनी चाहिए।

घर में छोटे बच्चे हों तो उनके साथ अधिक समय बिताएं, लेकिन उनको अधिक टोका-टाकी न करें। उनको प्यार से सिखायें।

-- ध्यान रखें कि अब आपको सब के साथ एडजस्ट करना है न कि सब को आपसे।

-- इस एडजस्ट होने के लिए चाहे, बड़ा परिवार हो, छोटा परिवार हो या कि पत्नी/पति हो, मित्र हो, पड़ोसी या समाज।

एक मूल मंत्र सदैव उपयोग करें।

  1. नोन अर्थात नमक। भोजन के प्रति स्वाद पर नियंत्रण रखें।

  2. मौन कम से कम एवं आवश्यकता पर ही बोलें।

  3. कौन (मसलन कौन आया कौन गया, कौन कहां है, कौन क्या कर रहा है) अपनी दखलंदाजी कम कर दें।

नोन, मौन, कौन के मूल मंत्र को जीवन में उतारते ही वृद्धावस्था प्रभु का वरदान बन जाएगी जिसको बहुत कम लोग ही उपभोग कर पाते हैं।

कितने भाग्यशाली हैं आप, इसको समझें।

*🙏🏻धन्यवाद!🙏🏻*

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