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शुक्रवार, 14 मार्च 2014

होली के रंग : हर रंग कुछ कहता है...-----होली विशेष

 
होली के रंग : हर रंग कुछ कहता है...-----होली विशेष
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होली आ गई है। धरती से सुनहरी आभा आ रही है। आकाश में नीले, लाल बादल अठखेलियां कर रहे हैं, सूरज के साथ लुका-छिपी खेल रहे हैं। पेड़ों पर नन्‍हीं कोंपले आ रही हैं और पीले-लाल फूल अपनी खुशबू बिखेर रहे हैं। हर तरफ इंद्रधनुषी रंगों की छटा है और रंगों के इस कोलाज को देखकर मन मोहक हो जाता है।

रंग का पर्याय ऊर्जा से है, उत्‍साह से है और उमंग से है। रंगो का त्‍योहार होली का ख्‍याल आते ही मस्‍ती सूझने लगती है। होली आती भी है, नए जोश और जज्‍बे का संदेश लेकर। इस संदेश में अलग-अलग रंग आपको भरपूर मजा लेकर खुलकर जीने का आमंत्रण देते हैं और बताते हैं कि उनकी तरह ही सबमें एक विशेषता है।
लाल :
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होली के मौके पर सबसे ज्‍यादा चाव से जिस रंग का प्रयोग किया जाता है, वह है लाल रंग। लाल रंग उल्‍लास और शुद्धता का प्रतीक है। लाल रंग का प्रयोग हर शुभ अवसर पर किया जाता है। दरअसल लाल रंग अग्नि का द्योतक है और ऊर्जा, गर्मी और जोश का प्रतिनिधित्‍व करता है, इस लिहाज से होली के दौरान होलिका दहन, मौसम में गर्मी का आगमन, त्‍योहार मनाने में जोश का संचार तो होता ही है, साथ ही त्‍योहार के साथ हर वर्ग के लोगों में ऊर्जा का प्रवाह होता है, जो उन्‍हें पूरे वर्ष काम करने के लिए उत्‍साहित करता है।
पीला :
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पीला रंग पवित्रता का प्रतीक है। होली के दौरान वातावरण में पीले रंग की अधिकता होती है। यह रंग सुनहले रंग के समीप होता है। मिट्टी का रंग भी पीला होता है और इस मौसम में खिलने वाले फूल भी अमूमन पीले होते हैं। यह रंग समृद्धि और यश को इंगित करता है।
हरा :
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हरा रंग जीवन का द्योतक है। इसके साथ ही यह प्रकृति का सबसे प्‍यारा रंग है। होली के दौरान वातावरण में चहुंओर हरे रंग की आभा आने वाली होती है, जो नए जीवन के शुरुआत का संकेत देती है और इस बात की प्रेरणा देती है कि बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुध लेहि। यानी होली का हरा रंग हर व्‍यक्ति को एक बार फिर अपने में नए जीवन के संचार की प्रेरणा देता है।
नीला :
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नीला रंग शांति, गंभीर और स्‍थिरता का संकेतक है। हालांकि होली में नीला रंग कम प्रयोग में आता है। लेकिन कभी-कभी नीले गुलाल और अबीर देखे जाते हैं। जल और वायु का रंग नीला माना गया है, इस लिहाज से यह रंग प्राण और प्रकृति से संबंधित है। नीला रंग पूर्णता को इंगित करता है।
काला :
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कुछ लोगों को होली में काला रंग लगाने में सबसे ज्‍यादा मजा आता है। काला रंग अंतरिक्ष का प्रतीक है। यह रंग प्रभुत्‍व का भी प्रतीक है क्‍योंकि सभी रंग अपना अस्‍तित्‍व खोकर इसमें समाहित हो जाते हैं।
सफेद :
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सफेद रंग बच्‍चों का पसंदीदा रंग है। यह सभी रंगों का जनक माना जाता है। प्रकृति के सभी रंगों को एक समान मिलने पर सफेद रंग बनता है। इसलिए इसमें सभी रंगों के गुण मौजूद होते हैं।

8 मार्च से होलाष्टक शुरु - इन आठ दिनों में कोई भी शुभ काम करना अशुभ होगा


इन आठ दिनों में कोई भी शुभ काम करना अशुभ होगा
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8 मार्च से होलाष्टक शुरु
होली के महज एक हफ्ते ही बचे हैं। और इन एक हफ्तों में कोई भी शुभ काम नहीं होंगे। क्योंकि 8 मार्च से होलाष्टक शुरु हो रहा है।

शास्त्रों में कहा गया है कि फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर होलिका दहन तक का समय अशुद्घ होता है, यह होलाष्टक कहलाता है।

ज्योतिष के ग्रंथों में ‘होलाष्टक’ के आठ दिन समस्त मांगलिक कार्यों में निषिद्ध कहे गए हैं। माना जाता है इस दौरान शुभ कार्य करने पर अपशकुन होता है।
कामदेव के इस काम से होलाष्टक अशुभ
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इस मान्यता के पीछे यह कारण है कि, भगवान शिव की तपस्या भंग करने का प्रयास करने पर कामदेव को शिव जी ने फाल्गुन शुक्ल अष्टमी तिथि को भष्म कर दिया था।

कामदेव प्रेम के देवता माने जाते हैं, इनके भष्म होने पर संसार में शोक की लहर फैल गयी। कामदेव की पत्नी रति द्वारा शिव से क्षमा याचना करने पर शिव जी ने कामदेव को पुनर्जीवन प्रदान करने का आश्वासन दिया। इसके बाद लोगों ने खुशी मनायी।
होलाष्टक पर ग्रह नक्षत्रों का प्रभाव
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होलाष्टक के दौरान शुभ कार्य वर्जित रहने के पीछे धार्मिक मान्यता के अलावा ज्योतिषीय मान्यता भी है। ज्योतिष के अनुसार अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल तथा पूर्णिमा को राहु उग्र रुप लिए हुए रहते हैं।

इससे पूर्णिमा से आठ दिन पूर्व मनुष्य का मस्तिष्क अनेक सुखद व दुःखद आशंकाओं से ग्रसित हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को अष्ट ग्रहों की नकारात्मक शक्ति के क्षीण होने पर सहज मनोभावों की अभिव्यक्ति रंग, गुलाल आदि द्वारा प्रदर्शित की जाती है।
होलाष्टक में भगवान श्री कृष्ण की होली
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सामान्य रुप से देखा जाए तो होली एक दिन का पर्व न होकर पूरे आठ दिन का त्योहार है। भगवान श्रीकृष्ण आठ दिनों तक गोपियों के संग होली खेले।

दुलहंडी के दिन अर्थात होली के दिन रंगों में सने कपड़ों को अग्नि के हवाले कर दिए, तब से आठ दिनों तक यह पर्व मनाया जाने लगा।
होलाष्टक पूजन की विधि
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होलिका पूजन करने के लिए होली से आठ दिन पहले होलिका दहन वाले स्थान को गंगाजल से शुद्ध कर उसमें सूखे उपले, सूखी लकड़ी, सूखी घास व होली का डंडा स्थापित कर दिया जाता है।

जिस दिन यह कार्य किया जाता है, उस दिन को होलाष्टक प्रारंभ का दिन भी कहा जाता है। जिस गांव, क्षेत्र या मौहल्ले के चौराहे पर होली का डंडा स्थापित किया जाता है वहां होलिका दहन होने तक कोई शुभ कार्य संपन्न नहीं किया जाता है।

होली की रात आजमाएं काली हल्दी के टोटके


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होली विशेष : अभिमंत्रित काली हल्दी को करें अपने घर निमंत्रित

होली का दिन तांत्रिक क्रियाओं के लिए बहुत ही लाभकारी होता है। इस दिन अभिमंत्रित और आमंत्रित कर जड़ी-बूटी घर लाई जाती है। कई प्रकार के मंत्रों की सिद्धियां भी की जाती हैं। होली के लिए प्रस्तुत है विशेष रूप से काली हल्दी के टोटके-
काली हल्दी
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काली हल्दी दिखने में अंदर से हल्के काले रंग की होती है व उसका पौधा केली के समान होता है। काली हल्दी में बहुत ही गुणकारी प्रभाव होता है। इसमें वशीकरण की अद्‍भुत क्षमता होती है।

काली हल्दी को लाने के लिए क्या करें
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काली हल्दी के पौधे को कंकू, पीले चावल से आमंत्रित कर होली वाले दिन लाया जाता है।

आमंत्रित करने का तरीका
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एक थाली में कंकू, चावल, अगरबती, एक कलश में शुद्ध जल रख, पवित्र कोरे वस्त्र पहन कर जाएं। फिर पौधे को शुद्ध जल से धोकर कंकू चढ़ाएं व पीले चावल चढ़ाकर 5 अगरबत्ती लगाकर कहें- मैं आपके पास अपनी मनोकामना पूर्ति हेतु आया हूं कल आपको मेरे साथ मेरी मनोकामना की पूर्ति हेतु चलना है।

फिर होली की रात को जाकर एक लोटा जल चढ़ाकर कहें कि मैं आपके पास आया हूं, आप चलिए मेरी मनोकामना की पूर्ति हेतु। इस प्रकार काली हल्दी (यह जड़ होती है) खोदकर ले आएं। बस यही आपके काम की है।

काली हल्दी के प्रयोग
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* परिवार में कोई व्यक्ति हमेशा अस्वस्थ रहता है तो प्रथम गुरुवार को आटे के 2 पेड़े बनाएं। उसमें गीली चने की दाल के साथ गुड़ और थोड़ी-सी पिसी काली हल्दी को दबाएं। रोगी के ऊपर से 7 बार उतारकर गाय को खिला दें। यह उपाय लगातार 3 गुरुवार करने से आश्चर्यजनक लाभ मिलेगा।

* यदि किसी व्यक्ति या बच्चे को नजर लग जाए तो काले कपड़े में हल्दी को बांधकर 7 बार ऊपर से उतारकर बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें।
पिछला|अगला
* यदि पत्रिका में गुरु और शनि पापाक्रांत हैं, तो यह उपाय करें - शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार से नियमित रूप से काली हल्दी पीसकर तिलक लगाने से यह दोनों ग्रह शुभ फल देने लगते हैं।
* यदि किसी के पास पैसा आता तो बहुत है किंतु रुकता नहीं है, तो उन्हें इन उपायों को अवश्य आजमाना चाहिए। शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार को चांदी की डिब्बी में काली हल्दी, नागकेसर व सिन्दूर को साथ में रखकर मां लक्ष्मी के चरणों से स्पर्श करवाकर रुपया-पैसा रखने के स्थान पर रख दें। इस उपाय से धन रुकने लगेगा।
* यदि आपका व्यवसाय मशीनरी से संबंधित है और आए दिन कोई न कोई मशीन खराब होती है तो आप काली हल्दी को पीसकर केसर व गंगा जल मिलाकर प्रथम बुधवार को उस मशीन पर स्वस्तिक बना दें। इस उपाय से मशीन जल्दी -जल्दी खराब नहीं होगी।
* यदि कोई व्यक्ति मिर्गी या अपस्मार (पागलपन) से पीड़ित हो तो किसी अच्छे मूहूर्त (सर्वार्थसिद्धि योग) में काली हल्दी को कटोरी में रखकर लोबान की धूप दिखाकर शुद्ध करें। तत्पश्चात एक टुकड़े में छेद कर धागे की मदद से उसके गले में पहना दें और नियमित रूप से कटोरी की थोड़ी-सी हल्दी का चूर्ण ताजे पानी से सेवन कराते रहें, अवश्य लाभ मिलेगा।

* काली हल्दी के 108 दाने बनाएं। उन्हें धागे में पिरोकर धूप, गूगल और लोबान से धूनी देने के बाद पहन लें। जो भी व्यक्ति इस माला को पहनता है, वह ग्रहों के दुष्प्रभावों व नजरादि टोने-टोटके से सुरक्षित रहता है।

* गुरु पुष्य नक्षत्र में काली हल्दी को सिन्दूर में रखकर धूप देने के बाद लाल कपड़े में लपेटकर 1-2 सिक्कों के साथ उसे बक्से में रख दें। इसके प्रभाव से धन की वृद्धि होने लगती है।

* काली हल्दी का चूर्ण दूध में डालकर चेहरे और शरीर पर लेप करने से त्वचा में निखार आ जाता है।
काली हल्दी वशीकरण प्रयोग-
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काली हल्दी में वशीकरण की अद्‍भुत क्षमता होती है। यदि आप किसी भी नवीन कार्य के लिए जा रहे हैं या महत्वपूर्ण कार्य हो तो काली हल्दी का टीका लगाकर जाएं। यह टीका वशीकरण का कार्य करता है।

शनिवार, 8 मार्च 2014

श्री हनुमान व शनि दोनों में ही एक समानता है


श्री हनुमान व शनि दोनों में ही एक समानता है और वह है- शिव तत्व से जुड़ाव। शिव तत्व का संबंध कल्याण भाव से है। कल्याणकारी देवता शिव यानी रुद्र के ही अवतार माने जाते हैं श्री हनुमान, वहीं शनि परम शिव भक्त होने के साथ ही शिव कृपा से ही जगत के हर प्राणी की कर्म गति नियत करने वाले न्यायाधीश बने।
इसी तरह हनुमान व शनि के संबंध में एक पौराणिक मान्यता यह भी है कि जब श्री हनुमान ने लंका में शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया तो शनिदेव ने प्रसन्न होकर यह वचन दिया था कि आस्था, भक्ति व पावनता के साथ श्री हनुमान की भक्ति करने वाले मेरी क्रूर दृष्टि से पीड़ा नहीं उठाएगा।

आप इन दोनों मन्त्र का नियमित जाप करें आपको कष्टों से मुक्ति मिलेगी , बोलिये "जय शनि देव" !

ऊँ रुद्रवीर्य समुद्भवाय नम:

ऊँ आयुष्कारणाय नम:
( द्रोणाचार्य )

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