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शुक्रवार, 9 जुलाई 2021

10 जुलाई को है शनि अमावस्या, शनिदेव की पूजा का जाने समय, साढ़ेसाती और ढैय्या से मिलेगी राहत।



Shani Amavasya July 2021: शनि देव की पूजा के लिए 10 जुलाई 2021 शनिवार का दिन बहुत ही उत्तम है. इस दिन आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है. इस अमावस्या की तिथि को शनि अमावस्या या शनिश्चरी अमावस्या भी कहा जाता है.

शनि की साढ़ेसाती और शनि की ढैय्या जिन लोगों पर बनी हुई है, उनके लिए शनि अमावस्या की तिथि बहुत ही महत्वपूर्ण है. वर्तमान समय में मिथुन राशि, तुला राशि, धनु राशि, मकर राशि और कुंभ राशि पर शनि की विशेष दृष्टि है.

मिथुन और तुला राशि पर शनि की ढैय्या और धनु,मकर और कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है.

शनि देव का फल (Mahima Shani Dev Ki)
ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को नवग्रहों में न्याय करने वाला देवता माना गया है. इसके साथ ही शनि को मेहनत यानि परिश्रक का कारक भी माना गया है. शनि एक राशि में लगभग ढाई वर्ष तक रहते हैं, शनि की चाल बहुत ही धीमी बताई गई है. यही कारण है कि शनि देव एक राशि से दूसरी राशि में जाने पर लगभग ढाई साल का समय लेते हैं. शनि व्यक्ति को कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं. इसलिए जिन लोगों पर साढ़ेसाती, ढैय्या या फिर शनि की महादशा, अंर्तदशा चल रही है उन्हें गलत कार्य और आदतों से दूर रहना चाहिए.

शनि अमावस्या शुभ मुहूर्त
10 जुलाई को शनिवार के दिन अमावस्या की तिथि प्रात: 06 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगी. शनि देव की पूजा अमावस्या की तिथि के समापन से पूर्व करना उत्तम है. इस दिन शनि चालीसा और शनि मंत्र के साथ शनि आरती का पाठ करें. ऐसा करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं. पूजा के बाद शनि से जुड़ी चीजों का दान अवश्य करें. एबीपी

शब्दों का अपना एक संसार होता है


*-शब्दों का संसार-*

शब्द *रचे* जाते हैं,
शब्द *गढ़े* जाते हैं,
शब्द *मढ़े* जाते हैं,
शब्द *लिखे* जाते हैं,
शब्द *पढ़े* जाते हैं,
शब्द *बोले* जाते हैं,
शब्द *तौले* जाते हैं,
शब्द *टटोले* जाते हैं,
शब्द *खंगाले* जाते हैं,

*#अंततः*

शब्द *बनते* हैं,
शब्द *संवरते* हैं,
शब्द *सुधरते* हैं,
शब्द *निखरते* हैं,
शब्द *हंसाते* हैं,
शब्द *मनाते* हैं,
शब्द *रूलाते* हैं,
शब्द *मुस्कुराते* हैं,
शब्द *खिलखिलाते* हैं,
शब्द *गुदगुदाते* हैं, 
शब्द *मुखर* हो जाते हैं,
शब्द *प्रखर* हो जाते हैं,
शब्द *मधुर* हो जाते हैं,

*#फिर भी-*

शब्द *चुभते* हैं,
शब्द *बिकते* हैं,
शब्द *रूठते* हैं,
शब्द *घाव* देते हैं,
शब्द *ताव* देते हैं,
शब्द *लड़ते* हैं,
शब्द *झगड़ते* हैं,
शब्द *बिगड़ते* हैं,
शब्द *बिखरते* हैं
शब्द *सिहरते* हैं,

*#किंतु-*

शब्द *मरते* नहीं,
शब्द *थकते* नहीं,
शब्द *रुकते* नहीं,
शब्द *चुकते* नहीं,

*#अतएव-*

शब्दों से *खेले* नहीं,
बिन सोचे *बोले* नहीं,
शब्दों को *मान* दें,
शब्दों को *सम्मान* दें,
शब्दों पर *ध्यान* दें,
शब्दों को *पहचान* दें,
ऊँची लंबी *उड़ान* दे,
शब्दों को *आत्मसात* करें...
*उनसे उनकी* बात करें,
शब्दों का *अविष्कार* करें...
ध्यान से *सुने* .....
गहन *सार्थक विचार* करें.....
व *ध्यान से समझें*, फिर *उत्तर दें*
*#क्योंकि-*

*शब्द* *अनमोल* हैं...
ज़ुबाँ से निकले *बोल* हैं,
शब्दों में *धार* होती है,
शब्दों की *महिमा अपार* होती,
शब्दों का *विशाल भंडार* होता है,

*और सच तो यह है कि-*
*शब्दों का अपना एक संसार होता है*
💐💐💐💐💐🙏🙏🙏🙏🙏

गुरुवार, 8 जुलाई 2021

अर्ध नग्न महिलाओं को देख कर 90℅ कौन मजे लेता है?


*अर्ध नग्न महिलाओं को देख कर  90℅ कौन मजे लेता है??⁉*  
*नारी स्वतंत्रता पर सच्चाई जाने, समझें???* एक लेख
👇👇👇👇👇👇👇

एक दिन मोहल्ले में किसी ख़ास अवसर पर महिला सभा का आयोजन किया गया, सभा स्थल पर महिलाओं की संख्या अधिक और पुरुषों की कम थी..!!
मंच पर तकरीबन  *पच्चीस वर्षीय खुबसूरत युवती, आधुनिक वस्त्रों से* *सुसज्जित, माइक थामें कोस रही थी पुरुष समाज को..!!*

वही पुराना आलाप.... कम और छोटे कपड़ों को जायज, और कुछ भी पहनने की स्वतंत्रता का बचाव करते हुए, पुरुषों की गन्दी सोच और खोटी नीयत का दोष बतला रही थी.!!

तभी अचानक सभा स्थल से... तीस बत्तीस वर्षीय सभ्य, शालीन और आकर्षक से दिखते नवयुवक ने खड़े होकर अपने विचार व्यक्त करने की अनुमति मांगी..!!

अनुमति स्वीकार कर माइक उसके हाथों मे सौप दिया गया .... हाथों में माइक आते ही उसने बोलना शुरु किया..!!

"माताओं, बहनों और भाइयों, मैं आप सबको नही जानता और आप सभी मुझे नहीं जानते कि, आखिर मैं कैसा इंसान हूं..?? 

लेकिन पहनावे और शक्ल सूरत से मैं आपको कैसा लगता हूँ बदमाश या शरीफ..??

सभास्थल से कई आवाजें गूंज उठीं... पहनावे और बातचीत से तो आप शरीफ लग रहे हो... शरीफ लग रहे हो... शरीफ लग रहे हो....

बस यही सुनकर, अचानक ही उसने अजीबोगरीब हरकत कर डाली... सिर्फ हाफ पैंट टाइप की अपनी  अंडरवियर छोड़ कर के बाक़ी सारे कपड़े मंच पर ही उतार दिये..!!

ये देख कर .... पूरा सभा स्थल आक्रोश से गूंज उठा, मारो-मारो गुंडा है, बदमाश है, बेशर्म है, शर्म नाम की चीज नहीं है इसमें.... मां बहन का लिहाज नहीं है इसको, नीच इंसान है, ये छोड़ना मत इसको....

ये आक्रोशित शोर सुनकर... अचानक वो माइक पर गरज उठा... 

"रुको... पहले मेरी बात सुन लो, फिर मार भी लेना , चाहे तो जिंदा जला भी देना मुझको..!!

अभी अभी तो....ये बहन जी कम कपड़े , तंग और बदन नुमाया छोटे-छोटे कपड़ों की पक्ष के साथ साथ स्वतंत्रता की दुहाई देकर गुहार लगाकर..."नीयत और सोच में खोट" बतला रही थी...!!

तब तो आप सभी तालियां बजा-बजाकर सहमति जतला रहे थे..फिर मैंने क्या किया है..?? 

सिर्फ कपड़ों की स्वतंत्रता ही तो दिखलायी है..!!

"नीयत और सोच" की खोट तो नहीं ना और फिर मैने तो, आप लोगों को... मां बहन और भाई भी कहकर ही संबोधित किया था..फिर मेरे अर्द्ध नग्न होते ही.... आप में से किसी को भी मुझमें "भाई और बेटा" क्यों नहीं नजर आया..?? 

मेरी नीयत में आप लोगों को खोट कैसे नजर आ गया..??

मुझमें आपको सिर्फ "मर्द" ही क्यों नजर आया? भाई, बेटा, दोस्त क्यों नहीं नजर आया? आप में से तो किसी की "सोच और नीयत" भी खोटी नहीं थी... फिर ऐसा क्यों?? "

सच तो यही है कि..... झूठ बोलते हैं लोग कि... 
"वेशभूषा" और "पहनावे" से कोई फर्क नहीं पड़ता

हकीकत तो यही है कि मानवीय स्वभाव है कि किसी को सरेआम बिना "आवरण" के देख लें तो कामुकता जागती है मन में...
रूप, रस, शब्द, गन्ध, स्पर्श ये बहुत प्रभावशाली कारक हैं  इनके प्रभाव से “विस्वामित्र” जैसे मुनि के मस्तिष्क में विकार पैदा हो गया था..जबकि उन्होंने सिर्फ रूप कारक के दर्शन किये..आम मनुष्यों की विसात कहाँ..??
दुर्गा शप्तशती के देव्या कवच में श्लोक 38 में भगवती से इन्हीं कारकों से रक्षा करने की प्रार्थना की गई है..

“रसे_रुपे_च_गन्धे_च_शब्दे_स्पर्शे_च_योगिनी।
सत्त्वं_रजस्तमश्चैव_रक्षेन्नारायणी_सदा।।”

रस रूप गंध शब्द स्पर्श इन विषयों का अनुभव करते समय योगिनी देवी रक्षा करें तथा सत्वगुण, रजोगुण, तमोगुण की रक्षा नारायणी देवी करें.!!

अब बताइए, हम भारतीय हिन्दु महिलाओं को "हिन्दु संस्कार" में रहने को समझाएं तो स्त्रियों की कौन-सी "स्वतंत्रता" छीन रहे हैं..??

*सोशल मीडिया पर अर्ध-नग्न होकर नाचती 90% कन्याएँ-महिलाएँ..हिंदू हैं..और मज़े लेने वाले 90% कौन है⁉.ये बताने की भी ज़रूरत है क्या..‼?*
*आँखे खोलिए…संभालिए अपने आप को और अपने समाज को, क्योंकि भारतीय समाज और संस्कृति का आधार नारीशक्ति है और धर्म विरोधी, अधर्मी, चांडाल (बॉलीवुड, वामपंथी,मिशनरी) ये हमारे समाज के आधार को तोड़ने का षड्यंत्र कर रहे हैं..!!*

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कोरोना की वजह से नौकरियां चली गई मुझसे संपर्क करिए


*जय महेश*
आदरणीय समाज बंधुवर आज के समय में बहुत सारे व्यक्ति बीमारी व बेरोजगारी से ग्रस्त है और बहुत सारे समाज बंधु जो की नौकरी करते हैं उनमें से बहुत सारे व्यक्तियों की कोरोना की वजह से नौकरियां चली गई है और वह बेरोजगार हैं अथवा उनके पास अच्छी इन्कम नहीं है तथा हर परिवार में कोई न कोई व्यक्ति बीमारी के कारण दवाई गोलियां खा रहा है तो यदि आप इन दोनों समस्याओं से छुटकारा चाहते हैं तो हमारे पास ऐसी अपॉर्चुनिटी व प्लेटफार्म है जिसमें आपको बीमारी और बेरोजगारी दोनों का हल मिल सकता है। यदि आपके परिवार में या कोई जान पहचान वाला व्यक्ति इन समस्याओं से जूझ रहा है तो आप उनकी मदद करिए और मुझसे संपर्क करिए ताकि उनको हम अच्छी हेल्थ व अच्छी वेल्थ ( इन्कम) करवाने में मदद कर सकें और  उनको सिखाएंगे कि किस तरीके से वह यह कर सकते हैं । मेरा उद्देश्य है कि समाज बंधु आगे बढ़े , वे चाहे देश के किसी भी कोने में रहते हो । 

ज्यादा जानकारी के लिए मैसेज करिए -
https://wa.me/message/MGAXBXAZ7MHOG1
 कैलाश चंद्र लढ़ा
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कान्वेंट शब्द पर गर्व न करें...सच समझें।


*कान्वेंट शब्द पर गर्व न करें...*
*सच समझें।*

*" काँन्वेंट "*
*सब से पहले तो यह जानना आवश्यक है कि, ये शब्द आखिर आया कहाँ से है।*
*तो आइये प्रकाश डालते हैं।*

*ब्रिटेन में एक कानून था।*
*" लिव इन रिलेशनशिप "*

*बिना किसी वैवाहिक संबंध के एक लड़का और एक लड़की का साथ में रहना।*
 *तो इस प्रक्रिया के अनुसार संतान भी पैदा हो जाती थी।*
*तो उन संतानों को किसी चर्च में छोड़  दिया जाता था।*

*अब ब्रिटेन की सरकार के सामने यह गम्भीर समस्या हुई कि इन बच्चों का क्या किया जाए।*

*तब वहाँ की सरकार ने काँन्वेंट खोले।*
*अर्थात् जो बच्चे अनाथ होने के साथ साथ नाजायज हैं।*
*उनके लिए ये काँन्वेंट बने।*

*उन अनाथ और नाजायज बच्चों को रिश्तों का एहसास कराने के लिए उन्होंने अनाथालयो में एक फादर, एक मदर, एक सिस्टर की नियुक्ति कर दी।* 
*क्योंकि ना तो उन बच्चों का कोई जायज बाप है ना ही माँ है।*

*तो काँन्वेन्ट बना नाजायज बच्चों के लिए जायज।* 

*इंग्लैंड में पहला काँन्वेंट स्कूल सन् 1609 के आसपास एक चर्च में खोला गया था।*
*जिसके ऐतिहासिक तथ्य भी मौजूद हैं।*
*और भारत में पहला काँन्वेंट स्कूल कलकत्ता में सन् 1842 में खोला गया था।*

*परंतु तब हम गुलाम थे।*
*और आज तो लाखों की संख्या में काँन्वेंट स्कूल चल रहे हैं।*

*जब कलकत्ता में पहला कॉन्वेंट स्कूल खोला गया, उस समय इसे*
*" फ्री स्कूल "* 
*कहा जाता था।*
*इसी कानून के तहत भारत में कलकत्ता यूनिवर्सिटी बनाई गयी, बम्बई यूनिवर्सिटी बनाई गयी, मद्रास यूनिवर्सिटी बनाई गयी।*
*और ये तीनों गुलामी के ज़माने की यूनिवर्सिटी आज भी इस देश में हैं।*

*मैकाले ने अपने पिता को एक चिट्ठी लिखी थी।*
*बहुत मशहूर चिट्ठी है।*

*उसमें वो लिखता है कि*
*“ इन कॉन्वेंट स्कूलों से ऐसे बच्चे निकलेंगे जो देखने में तो भारतीय होंगे*
*लेकिन, दिमाग से अंग्रेज होंगे।*

*इन्हें अपने देश के बारे में कुछ पता नहीं होगा।*

*इनको अपने संस्कृति के बारे में कुछ पता नहीं होगा।*

*इनको अपनी परम्पराओं के बारे में भी कुछ पता नहीं होगा।*

*इनको अपने मुहावरे भी नहीं मालूम होंगे।*
*जब ऐसे बच्चे होंगे इस देश में तो* 
*" अंग्रेज भले ही चले जाएँ इस देश से, अंग्रेजियत नहीं जाएगी। ”*

*उस समय लिखी चिट्ठी की सच्चाई इस देश में अब साफ़ - साफ़ दिखाई दे रही है। और उस एक्ट की महिमा देखिये कि हमें अपनी भाषा बोलने में शर्म आती है।*

*अंग्रेजी में बोलते हैं कि दूसरों पर रुवाब पड़ेगा।* 
 
*लोगों का तर्क है कि*
*“अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है ”।*

*दुनिया में 204 देश हैं और अंग्रेजी सिर्फ 11 देशों में ही बोली, पढ़ी और समझी जाती है, फिर ये कैसे अंतर्राष्ट्रीय भाषा है ?*

*इन अंग्रेजों की जो बाइबिल है*
*वो भी अंग्रेजी में नहीं थी*
*और ईसा मसीह भी अंग्रेजी नहीं बोलते थे।*

*ईसा मसीह की भाषा और बाइबिल की भाषा अरमेक थी।*

*अरमेक भाषा की लिपि जो थी वो हमारे बंगला भाषा से मिलती जुलती थी।*

*समय के कालचक्र में वो भाषा विलुप्त हो गयी।*

*दुर्भाग्य की बात यह है कि, जिन चीजों का हमने त्याग किया अंग्रेजो ने वो सभी चीज़ों को पोषित और संचित किया, फिर भी हम सबने उनकी त्यागी हुई गुलामी की सोच को आत्मसात कर गर्वित होने का दुस्साहस किया।*

*आइए आगे से जब भी हमसे कोई आश्रय कॉन्वैंट स्कूल की बात कहेगा या करेगा तो उसे उपरोक्त तथ्यों से परिचित अवश्य कराएंगे।
जय श्री राम
धन्यवाद 💐🙏

बुधवार, 7 जुलाई 2021

हिन्दु (सनातन) धर्म को बदनाम करने के लिए समय समय पर हिन्दु धर्म के वेद पुराणों में मिलावट की गई है


वेदों में " माँसाहार " और " बली " निषेध है
अक्सर ऐसी तस्वीरें और कुछ श्लौक दिखा कर 

हिन्दु ( सनातन ) धर्म  को बदनाम करने की कोशिश की जाती है जानें सत्य....

पहले मुगलों और फिर अंग्रेजों ने मैक्समूलर के द्वारा फिर भीमराव अंबेडकर ने वेद पुराणों का गलत अर्थ बताकर और ई.वी.पेरियार ने ट्रु रामायण नाम की पुस्तक लिखकर जिसका हिन्दी में सच्ची रामायण नाम से अनुवाद हुआ है ऐसे बहुत से नाम हैं ....

हिन्दु (सनातन) धर्म को बदनाम करने के लिए समय समय पर 
हिन्दु धर्म के वेद पुराणों में मिलावट की गई है और अाज भी मुस्लिम संगठन और ईसाई ,नवबौद्ध लगातार इंटरनैट पर ब्लौग लिखकर बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन नकल के लिऐ भी अक्ल की जरूरत होती है एक ही धर्मग्रंथ में दो विपरीत श्लौक नहीं होते इतनी इन्हें अक्ल नहीं थी
और ऐसी तस्वीरें ज्यादातर जहाँ पर बौद्धों की जनसंख्या ज्यादा है वहाँ की हैं क्योंकि बौद्धों में तांत्रिक प्रक्रिया का प्रचलन है वहीं पर ऐसा किया जाता है हिन्दु धर्म ऐसा नहीं किया जाता है....

वेदों में मांसाहार निषेध

वेद में माँस भक्षण का स्पष्ट विरोध

ऋग्वेद ८.१०१.१५ – मैं समझदार मनुष्य को कहे देता हूँ की तू बेचारी बेकसूर गाय की हत्या मत कर, वह अदिति हैं अर्थात काटने- चीरने योग्य नहीं हैं.

ऋग्वेद ८.१०१.१६ – मनुष्य अल्पबुद्धि होकर गाय को मारे कांटे नहीं.

अथर्ववेद १०.१.२९ –तू हमारे गाय, घोरे और पुरुष को मत मार.

अथर्ववेद १२.४.३८ -जो(वृद्ध) गाय को घर में पकाता हैं उसके पुत्र मर जाते हैं.

अथर्ववेद ४.११.३- जो बैलो को नहीं खाता वह कष्ट में नहीं पड़ता हैं

ऋग्वेद ६.२८.४ –गोए वधालय में न जाये

अथर्ववेद ८.३.२४ –जो गोहत्या करके गाय के दूध से लोगो को वंचित करे , तलवार से उसका सर काट दो

यजुर्वेद १३.४३ –गाय का वध मत कर , जो अखंडनिय हैं

अथर्ववेद ७.५.५ –वे लोग मूढ़ हैं जो कुत्ते से या गाय के अंगों से यज्ञ करते हैं

यजुर्वेद ३०.१८-गोहत्यारे को प्राण दंड दो

मनुस्मृती में मांसाहार निषेध

स्वामी दयानंद के अनुसार मनु स्मृति में वही ग्रहण करने योग्य हैं जो वेदानुकुल हैं और वह त्याग करने योग्य हैं जो की वेद विरुद्ध हैं।

महाभारत में मनु स्मृति के प्रक्षिप्त होने की बात का समर्थन इस प्रकार किया हैं:-

महात्मा मनु ने सब कर्मों में अहिंसा बतलाई हैं, लोग अपनी इच्छा के वशीभूत होकर वेदी पर शास्त्र विरुद्ध हिंसा करते हैं। शराब, माँस,द्विजातियों का बली, ये बातें धूर्तों ने फैलाई हैं, वेद में यह नहीं कहा गया हैं। . शांति पर्व मोक्ष धर्म अध्याय २६६

मनुस्मृती में मांसाहार निषेध

माँस खाने के विरुद्ध मनु स्मृति की साक्षी 

जिसकी सम्मति से मारते हो और जो अंगों को काट काट कर अलग करता हैं। मारने वाला तथा क्रय करने वाला,विक्रय करनेवाला,पकानेवाला, परोसने वाला तथा खाने वाला ये ८ सब घातक हैं। जो दूसरों के माँस से अपना माँस बढ़ाने की इच्छा रखता हैं, पितरों,देवताओं और विद्वानों की माँस भक्षण निषेधाज्ञा का भंग रूप अनादर करता हैं उससे बढ़कर कोई भी पाप करने वाला नहीं हैं।

मनु स्मृति ५/५१,५२

मद्य, माँस आदि यक्ष,राक्षस और पिशाचों का भोजन हैं। देवताओं की हवि खाने वाले ब्राह्मणों को इसे कदापि न खाना चाहिए।

मनु स्मृति ११/७५ 

जिस द्विज ने मोह वश मदिरा पी लिया हो उसे चाहिए की आग के समान गर्म की हुई मदिरा पीवे ताकि उससे उसका शरीर जले और वह मद्यपान के पाप से बचे। मनुस्मृति ११/९०

इसी अध्याय में मनु जी ने श्लोक ७१ से ७४ तक मद्य पान के प्रायश्चित बताये हैं। 

जय जय श्रीराम

जीवन में कुछ व्यवहार करते समय नफा नुकसान नहीं देखना चाहिए।


#खुश_कैसे_रहें_?
•••••••••••••••••••••
बहुत दिनो से pleasure scooty का उपयोग नही होने से, वह पड़ी पड़ी खराब होने जैसी स्थिति में पहुंच रही थी। 
विचार आया olx पे बेच दें।
Ad डाली... कीमत Rs. 30000/-

बहुत आफर आये 15 से 28 हजार तक। 
मुझे लगा यदि 28 मिल रहे तो, कोई 29-30 हजार भी देगा।
एक का 29000/- का प्रस्ताव आया। 
उसे भी waiting में रखा।
एक सुबह काल आया, उसने कहा -
साहब नमस्कार, आपकी स्कूटी का Ad देखा। पसंद भी आयी है। परंतु  30 हजार कमाने का बहुत प्रयत्न किया, 24 हजार ही इकठ्ठा कर पाया हूँ। बेटा इंजिनियरिंग के अंतिम वर्ष में है। बहुत मेहनत किया है उसने। कभी पैदल, कभी सायकल, कभी बस, कभी किसी के साथ। सोचा अंतिम वर्ष तो वह अपनी स्कूटी से ही जाये। आप कृपया  pleasure मुझे ही दिजीएगा। नयी स्कूटी दुगनी कीमत से भी ज्यादा है। मेरी हैसियत से बहुत ज्यादा है। थोड़ा समय दीजीए। मै पैसो का इंतजाम करता हूँ। मोबाइल बेच कर कुछ रुपये मिलेंगें। परंतु हाथ जोड़कर कर  निवेदन है साहब, pleasure मुझे ही दिजीएगा।

मैने औपचारिकता में मात्र ok बोलकर फोन रख दिया। 

कुछ विचार मन में आये। 
वापस काल बैक किया और कहा आप अपना मोबाइल मत बेचिए, कल सुबह केवल 24 हजार  लेकर आईए, गाड़ी आप  ही ले जाईए,  वह भी मात्र 24 हज़ार में ही।

मेरे पास 29 हज़ार का प्रस्ताव होने पर भी 24 हजार में किसी अपरिचित व्यक्ति को मैं pleasure स्कूटी देने जा रहा था। 

सोचा.. उस परिवार में आज कितने pleasure यानि आनंद का निर्माण हुआ होगा। कल उनके घर pleasure जाएगी और मुझे ज्यादा नुकसान भी नहीं हो रहा था। ईश्वर ने बहुत दिया है और सबसे बड़ा धन शायद किसी जरूरतमंद की जरूरत पूरी हो जाये। परमात्मा इन्हें खुश रखे।

अगली सुबह उसने कम से कम 6-7 बार फोन किया । साहब कितने बजे आऊँ, आपका समय तो नही खराब होगा। पक्का लेने आऊं, बेटे को लेकर या अकेले आऊँ। पर साहब pleasure गाड़ी किसी और को नही दिजीएगा। 

वह 2000, 500, 200, 100, 50 के नोटों का संग्रह लेकर आया, साथ में बेटा भी था। ऐसा लगा, पता नही कहां कहां से निकाल कर या मांग कर या इकठ्ठा कर यह पैसे लाया है।  

बेटा एकदम आतुरता और कृतज्ञता से स्कूटी pleasure को देख रहा था। मैने उसे दोनो चाबियां दी, कागज दिये। बेटा गाड़ी पर विनम्रतापूर्वक हाथ फेर रहा था। रुमाल निकाल कर पोछ रहा था। 

उसनें पैसे गिनने को कहा, मैने कहा आप गिनकर ही लाये हैं, कोई दिक्कत नहीं।

जब जाने लगे, तो मैने उन्हे 500 का एक नोट वापस करते हुए कहा, घर जाते समय मिठाई लेते जाइएगा। सोच यह थी कि कहीं तेल के पैसे है या नही। और यदि है तो मिठाई और तेल दोनो इसमें आ जायेंगें। 

आँखों  में कृतज्ञता के आंसू लिये उन्होंने हमसे विदा ली और अपनी pleasure ले गए। जाते समय बहुत ही आतुरता और विनम्रता से झुककर अभिवादन किया। बार बार आभार व्यक्त किया।

परंतु आज pleasure बेचते समय ही पता चला कि वास्तव में  pleasure (आनन्द) होता क्या है। 

हम लोग सहज भाव में कहते हैं - it's my pleasure(ये मेरा आनन्द है)
जीवन में कुछ व्यवहार करते समय नफा नुकसान नहीं देखना चाहिए। 

अपने माध्यम से किसी को क्या सच में कुछ आनंद प्राप्त हुआ यह देखना भी होता है।
 
करबद्ध निवेदन है कि ईश्वर ने आपको कुछ देने लायक बनाया हो या नही,
किसी एक व्यक्ति को सुख देने या खुशी देने लायक तो बनाया ही है। 
आज किसी के साथ खुशी बांटकर देखिएगा, वही pleasure(आनन्द) न आये तो कहना।

हरि ॐ🙏🙏

सोमवार, 5 जुलाई 2021

बॉलीवुड फिल्मों के कुछ नो-लॉजिक सीन

यह दृश्य याद है?

इस सीन में चतुर

अपने Samsung Omnia SCH i910 स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हुए फरहान और राजू

को उस दिन की तारीख याद दिला रहे हैं

। इस फोन को नवंबर 2008 में लॉन्च किया गया था।

तो, यह बिल्कुल स्पष्ट है कि राजू और फरहान चतुर से 5 सितंबर, 2009 को मिले थे।

अब, कुछ गणित में आते हैं । ( क्षमा करें, पीयूष जी!)

ऊपर बताई गई तारीख उस कुख्यात ' चमत्कार

' घटना के ठीक 10 साल बाद

की थी।

तो, राजू , फरहान और रैंचो 1999 के आसपास कॉलेज में थे।

इस फिल्म के क्लाइमेक्स में कटौती करें।

रैंचो ने अपने दोस्तों की मदद से निर्देशक की बेटी की डिलीवरी खुद करने का फैसला किया।

तो, पिया ने रैंचो को ( एक वीडियो कॉल पर )

दिखाया

कि कैसे Youtube ट्यूटोरियल का उपयोग करके बच्चे को जन्म देना है

तथ्य यह है कि, Youtube का आविष्कार फरवरी, 2005 में हुआ था।

इसके अलावा ,

इस सीन में जहां फरहान ने अपना परिचय दिया, उन्होंने बताया कि उनका जन्म 1978 में हुआ था।

इंजीनियरिंग में स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश करने में 18 साल (काफी) लगते हैं।

फरहान ने लिया[गणित] १९९९-१९७८= २१[/गणित]वर्षों।
(
क्षमा करें, पीयूष जी )

फरहान 94% अंकों के साथ एक बहुत ही कमजोर छात्र था ( उसके पिता ने एक दृश्य में इसका उल्लेख किया जहां रैंचो फरहान के पिता से पहली बार मिलता है ) , जो तीन बार असफल रहा और अपने करियर के तीन साल बर्बाद कर दिया।

पढ़ने के लिए धन्यवाद

योगिनी एकादशी : 05 जुलाई


 🌹 योगिनी एकादशी : 05 जुलाई


🌹 युधिष्ठिर ने पूछा : वासुदेव ! आषाढ़ के कृष्णपक्ष में जो एकादशी होती है, उसका क्या नाम है? कृपया उसका वर्णन कीजिये ।
 
🌹 भगवान श्रीकृष्ण बोले : नृपश्रेष्ठ ! आषाढ़ (गुजरात महाराष्ट्र के अनुसार ज्येष्ठ ) के कृष्णपक्ष की एकादशी का नाम ‘योगिनी’ है। यह बड़े बडे पातकों का नाश करनेवाली है। संसारसागर में डूबे हुए प्राणियों के लिए यह सनातन नौका के समान है ।
 
🌹 अलकापुरी के राजाधिराज कुबेर सदा भगवान शिव की भक्ति में तत्पर रहनेवाले हैं । उनका ‘हेममाली’ नामक एक यक्ष सेवक था, जो पूजा के लिए फूल लाया करता था । हेममाली की पत्नी का नाम ‘विशालाक्षी’ था । वह यक्ष कामपाश में आबद्ध होकर सदा अपनी पत्नी में आसक्त रहता था । एक दिन हेममाली मानसरोवर से फूल लाकर अपने घर में ही ठहर गया और पत्नी के प्रेमपाश में खोया रह गया, अत: कुबेर के भवन में न जा सका । इधर कुबेर मन्दिर में बैठकर शिव का पूजन कर रहे थे । उन्होंने दोपहर तक फूल आने की प्रतीक्षा की । जब पूजा का समय व्यतीत हो गया तो यक्षराज ने कुपित होकर सेवकों से कहा : ‘यक्षों ! दुरात्मा हेममाली क्यों नहीं आ रहा है ?’
 
🌹 यक्षों ने कहा: राजन् ! वह तो पत्नी की कामना में आसक्त हो घर में ही रमण कर रहा है । यह सुनकर कुबेर क्रोध से भर गये और तुरन्त ही हेममाली को बुलवाया । वह आकर कुबेर के सामने खड़ा हो गया । उसे देखकर कुबेर बोले : ‘ओ पापी ! अरे दुष्ट ! ओ दुराचारी ! तूने भगवान की अवहेलना की है, अत: कोढ़ से युक्त और अपनी उस प्रियतमा से वियुक्त होकर इस स्थान से भ्रष्ट होकर अन्यत्र चला जा ।’
 
🌹 कुबेर के ऐसा कहने पर वह उस स्थान से नीचे गिर गया । कोढ़ से सारा शरीर पीड़ित था परन्तु शिव पूजा के प्रभाव से उसकी स्मरणशक्ति लुप्त नहीं हुई । तदनन्तर वह पर्वतों में श्रेष्ठ मेरुगिरि के शिखर पर गया । वहाँ पर मुनिवर मार्कण्डेयजी का उसे दर्शन हुआ । पापकर्मा यक्ष ने मुनि के चरणों में प्रणाम किया । मुनिवर मार्कण्डेय ने उसे भय से काँपते देख कहा : ‘तुझे कोढ़ के रोग ने कैसे दबा लिया ?’
 
🌹 यक्ष बोला : मुने ! मैं कुबेर का अनुचर हेममाली हूँ । मैं प्रतिदिन मानसरोवर से फूल लाकर शिव पूजा के समय कुबेर को दिया करता था । एक दिन पत्नी सहवास के सुख में फँस जाने के कारण मुझे समय का ज्ञान ही नहीं रहा, अत: राजाधिराज कुबेर ने कुपित होकर मुझे शाप दे दिया, जिससे मैं कोढ़ से आक्रान्त होकर अपनी प्रियतमा से बिछुड़ गया । मुनिश्रेष्ठ ! संतों का चित्त स्वभावत: परोपकार में लगा रहता है, यह जानकर मुझ अपराधी को कर्त्तव्य का उपदेश दीजिये ।
 
🌹 मार्कण्डेयजी ने कहा: तुमने यहाँ सच्ची बात कही है, इसलिए मैं तुम्हें कल्याणप्रद व्रत का उपदेश करता हूँ । तुम आषाढ़ मास के कृष्णपक्ष की ‘योगिनी एकादशी’ का व्रत करो । इस व्रत के पुण्य से तुम्हारा कोढ़ निश्चय ही दूर हो जायेगा ।
 
🌹 भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं: राजन् ! मार्कण्डेयजी के उपदेश से उसने ‘योगिनी एकादशी’ का व्रत किया, जिससे उसके शरीर को कोढ़ दूर हो गया । उस उत्तम व्रत का अनुष्ठान करने पर वह पूर्ण सुखी हो गया ।
 
🌹 नृपश्रेष्ठ ! यह ‘योगिनी’ का व्रत ऐसा पुण्यशाली है कि अठ्ठासी हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने से जो फल मिलता है, वही फल ‘योगिनी एकादशी’ का व्रत करनेवाले मनुष्य को मिलता है । ‘योगिनी’ महान पापों को शान्त करनेवाली और महान पुण्य फल देनेवाली है । इस माहात्म्य को पढ़ने और सुनने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है ।

🌹 व्रत खोलने की विधि :   द्वादशी को सेवापूजा की जगह पर बैठकर भुने हुए सात चनों के चौदह टुकड़े करके अपने सिर के पीछे फेंकना चाहिए । ‘मेरे सात जन्मों के शारीरिक, वाचिक और मानसिक पाप नष्ट हुए’ - यह भावना करके सात अंजलि जल पीना और चने के सात दाने खाकर व्रत खोलना चाहिए

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