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मंगलवार, 19 जून 2018

यदि ऐसा व्यक्ति हमारे देश का प्रधानमंत्री है तो हमें गर्व क्यों ना हो..

It's true story...
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बात 1990 की गर्मियों की है।

इंडियन रेलवेज (ट्रैफिक) सर्विसेज में चयनित दो प्रोबेशनर युवतियां (लीना सरमा व उनकी एक साथी) दिल्ली में अपनी ट्रेनिंग में शामिल होने के लिए लखनऊ से दिल्ली तक का रेल सफर कर रहीं थीं।

उनके डिब्बे में 2 सांसद भी सफर कर रहे थे।

उन सांसदों के साथ उनके दर्जन भर चमचे भी थे जिनके पास टिकट भी नहीं थे।

वो जबरदस्ती डिब्बे में घुस गए थे।

उन चमचों / गुर्गों ने उन दोनों युवतियों पर भद्दे अराजक अश्लील व्यंग्य करते हुए उन्हें उनकी रिजर्व सीट छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया था।

दोनों युवतियों ने जमीन पर रखे अपने सामान पर बैठकर दिल्ली तक की अपनी यात्रा दोनों सांसदों के उन चमचों/गुर्गों के हुड़दंग के बीच भयाक्रांत होकर पूरी की थी।

इस पूरी यात्रा के दौरान TTE गायब रहा था।

दिल्ली पहुंचकर दोनों युवतियों ने राहत की सांस ली थी।

दिल्ली में ट्रेनिंग का प्रथम चरण पूर्ण कर उनको अपनी ट्रेनिंग के अगले चरण के लिए अहमदाबाद जाना था।

किन्तु लीना सरमा की साथी युवती ने लखनऊ से दिल्ली तक की यात्रा के भयानक अनुभव के कारण अहमदाबाद की यात्रा करने से मना कर दिया।

परिणामस्वरूप लीना सरमा अपनी एक अन्य बैचमेट उत्पलपर्णा हजारिका के साथ दिल्ली से अहमदाबाद के लिए रवाना हुईं थीं।

किन्तु प्रथम श्रेणी का उनका वेटिंग लिस्ट का टिकट कन्फर्म नहीं हुआ था।

TTE से बात करने पर उसने पूरी सीटें फुल होने की बात कहकर दोनों युवतियों को यह कहकर एक कूपे में बैठा दिया था कि यदि कोई सीट खाली मिली तो आपको दूंगा।

उस कूपे में खादी का कुर्ता पायजामा पहने लगभग 45 और 40 वर्ष के नेतानुमा दो युवक पहले से बैठे हुए थे।

TTE ने दोनों युवतियों को आश्वस्त किया कि दोनों युवक नियमित आते जाते रहते हैं।

दोनों सज्जन व्यक्ति हैं।

मैं दोनों को जानता हूं इसलिए आप लोग चिंतित मत होइएगा।

यात्रा के दौरान दोनों युवकों से बातचीत हुई तो हिन्दू महासभा मुस्लिम लीग से होते हुए श्यामाप्रसाद मुखर्जी तक पहुंची।

लीना सरमा की साथी युवती उत्पलपर्णा चूंकि इतिहास की छात्रा रहीं थीं इसलिए बातचीत लम्बी खिंची।

दोनों युवतियों की बातचीत से प्रभावित उन दोनों युवकों में से आयु में छोटे दिख रहे युवक ने धीरे से कहा था कि इनको तो बहुत अच्छी जानकारी है।

इसपर बड़े दिख रहे युवक ने कहा कि आप गुजरात में हमारी पार्टी ज्वाइन कर लीजिए।

इसपर दोनों युवतियों ने हंसते हुए कहा था कि हम गुजरात के नहीं बल्कि असम के रहने वाले हैं।

इसपर छोटी आयु वाले युवक ने तपाक से कहा था कि कोई फर्क नहीं हम अपने राज्य में प्रतिभा का स्वागत करते हैं, फिर चाहे वो जहां से भी हो।

इतने में खाने की 4 थाली आ गयी थी।

चारों ने भोजन किया और पैसे उस छोटी आयु वाले युवक ने ही दिए।

इतने में TTE ने आकर दोनों युवतियों को बताया कि पूरी सीटें फुल हैं, आपको सीट नहीं दे पाऊंगा।

यह सुनते ही छोटे युवक ने कहा कोई परेशानी की बात नहीं हमलोग एडजस्ट कर लेंगे।

इतना कहकर दोनों युवकों ने अपना बिस्तर जमीन पर बिछाकर अपनी दोनों सीटें लीना सरमा व उनकी साथी युवती को दे दीं।

सवेरे उठने पर बड़े युवक ने दोनों युवतियों से कहा कि यदि रहने की कोई समस्या हो तो आप दोनों मेरे घर में रह सकती हैं।

इसपर छोटे युवक ने कहा कि मैं तो बंजारा जीवनशैली का व्यक्ति हूं।

मेरा घर इस लायक नहीं है लेकिन इनके घर में आप आराम से रुक सकती हैं।

यदि कोई समस्या हो तो हमारी मदद ले सकती हैं।

इसपर दोनों युवतियों ने दोनों युवकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि नहीं अहमदाबाद में हमारे रुकने की कोई समस्या नहीं है।

तब तक अहमदाबाद स्टेशन करीब आ चुका था।

अतः लीना सरमा ने अपनी डायरी निकालकर दोनों युवकों से अपना नाम पता लिखने का अनुरोध किया था।

लीना सरमा के अनुरोध पर उनकी डायरी में छोटी आयु वाले युवक ने अपने पते के साथ अपना नाम लिखा था *नरेन्द्र मोदी* और बड़ी आयु वाले युवक ने अपने पते के साथ अपना नाम लिखा था *शंकर सिंह वाघेला*।

लीना सरमा ने अपना यह अनुभव 1995 में असम के एक समाचारपत्र में लिखा था कि किसतरह गुजरात के दो अनजान राजनेताओं ने असम की दो युवतियों की मदद बहन समझकर की।

1995 में अखबार में अपना अनुभव लिखते समय तक लीना सरमा जी ने यह कल्पना भी नहीं की थी कि दोनों व्यक्ति अगले कुछ वर्षों में गुजरात के मुख्यमंत्री बनने वाले हैं।

लेकिन शंकर सिंह वाघेला और नरेन्द्र मोदी के मुख्यमंत्री बनने के बाद लीना सरमा गर्वानुभूति से सराबोर हो गईं थीं।

असम के एक अन्य अखबार ने 1995 में प्रकाशित उनके उस अनुभव को पुनः प्रकाशित किया था।

लेकिन मई 2014 में जब नरेन्द्र मोदी ने देश के प्रधानमंत्री का पद सम्भाला तो लीना सरमा जी उस समय General Manager of the Centre for Railway Information System, Indian Railways, New Delhi. के पद पर कार्यरत थीं।

और उस अविस्मरणीय यात्रा में उनकी सहयात्री रहीं उनकी साथी उत्पलपर्णा हजारिका Railway Board में Executive Director के पद पर कार्यरत थीं।

नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद लीना सरमा अपने उस अनुभव को पूरे देश के सामने प्रस्तुत करने से स्वयं को रोक नहीं सकी थीं।

अतः  1 जून 2014 को अंग्रेज़ी अखबार The Hindu में उन्होंने अपने उस अविस्मरणीय अनुभव को ज्यों का त्यों प्रस्तुत कर दिया था।

आज हमारे देश के प्रधानमंत्री वही नरेन्द्र मोदी हैं, जिनका जिक्र लीना सरमा ने किया है।

अतः यदि ऐसा व्यक्ति हमारे देश का प्रधानमंत्री है तो हमें गर्व क्यों ना हो...!!!

*लीना सरमा जी के लेख का लिंक*👇🏼

http://www.thehindu.com/opinion/open-page/a-train-journey-and-two-names-to-remember/article6070562.ece

🍃😊🍂

सोमवार, 18 जून 2018

#पोर्न_industry

#पोर्न_industry
ये victorians ने शुरू किया था.... हां वो ही राजपरिवार वाले... बाद में पूरी दुनिया को brothels + strip club दे दिये. - - - भारत में अंग्रेजो ने ही sonagachi - Bengal (Asia's second largest red light) बसाया था.
... दुनिया का 85% Internet porn Chatsworth, callifornia से आता है... ये Illuminati के weaponless war के मुख्य हथियारों में से है.... समाज को Free porn उपलब्ध करा कर एक तीर से कई शिकार हो रहे हैं. आखिर ये Free कयो है? और attractive कैसे बनाया गया है?, दरअसल, system को यौन-चकाचौंध से भरा गया है.. ये Industry जितनी मजेदार लगती है उतनी है नही. दूर के ढोल सुहावने होते हैं. यकीन करने के लिए pink cross foundation की chief " Shelly lubben" से पूछ लें....
... किसी भी देश को तोडने के लिये उसको बस नग्नता दे दो. फिर वहां का youth अपने बाप की भी नही सुनेगा... बाकी का काम मैकाले ब्रांड सिस्टम ने कर ही दिया है... अब गांजा + Marijuana + alcohol से youth बोर हो गया तो धंधा बैठ जायेगा. फिर क्या, drugs + free porn = non curable addiction वाला principle अपनाया... Hollywood के बाद bollywood सबसे बडा अड्डा है porn industry का. सबसे ज्यादा "drug-usage" porn industry मे होती है. सब interconnected हैं. Drug dealing = human trafficking, या ये कहें कि कि दोनो एक दूसरे के पूरक. बिना नशे के porn movie बनती नही. American companies के condom को बिकवाने में बॉलिवुड का बहुत बड़ा योगदान है... दरअसल, Bollywood में Theory of relativity of time लग गया. मतलब कि जिस bollywood को 50-60s में घर घर जाकर भी कोई अभिनेत्री नही मिलती थी और 70-80s में kiss scene पर बवाल मच गया था, क्योंकि तब अभिनेत्रियों को बाजारू बोला जाता था, वो ही bollywood आज संभोग के scene बिना रोकटोक दिखाता है... मुंबई में Line लगी है मैकाले ब्रांड लडकियों की. Casting couch धडाधड होते हैं. जो जितना "compromise" करेगी उतनी बढिया movie-serial मिलेगा. लग गयी ना time-relativity Theory? समय समय की बात है.
ईलू बाबा के Main principles में ये hypnotism type atmosphere भी है. जिससे- - -
1- भारत में नग्नता + rape % बढेगा. (जैसा ईलू ने misconception फैलाया था अफ्रीका में कि sex with virgins = aids curable.
2- drugs जो दिल्ली-मुंबई के अमीरजादे नोट जलाकर सूंघते हैं, वो हर नुक्कड़ पर बिकेगा.
3- भयंकर सामाजिक पतन होगा.
4- ईलू का बनाया हुआ HIV-AIDS का graph बहुत ऊपर जायेगा.
5- Aids की सालों से बन रही महंगी दवाइयों का यहां use होगा और viagra तो normal बिकेगी kit Kat की तरह.
6- जैसा कि पहले मैने बहुत बार कहा है war (weapons) + virus (medicine) = illuminati's economy.
8- मलेच्छों के झुंड में honey Singh और Sunny Leon का नाम बहुत ऊपर है.
9- बालीवुडिया वेश्याओं की लौटरी लग गयी है ईलू बाबा की किरपा से.
10- सस्ते मोबाइल + Free porn = conspiracy है बहुत बडी.
मोदी ने झाडू तो उठा लिया लेकिन कुछ प्रतिशत ही साफ किए . साफ करना है तो देश से porn industry + slaughter house को साफ करो, वह भी पूरी तरह से l
ये सडकें साफ करने से क्या देश चलेगा?.. लेकिन ये सफाई इनके "आका" नही होने देंगे.... दो साल पहले हमारे देश की चूतिया पब्लिक sex education के support में थी. जिसमें "आका" का शासन नही है जैसे North Korea में, वहां punishment "मौत" है porn देखने का, बनाना तो दूर की बात है. यहां भी कुछ चूतियो को Democracy चाहिये.
याद रखना,
Maclauy educational system + illuminati porn industry = biggest threat है भारत के भविष्य के लिए.

वंदेमातरम।

शुक्रवार, 15 जून 2018

तो आज ये दिन ना देखना पड़ता।

विचारणीय

एक बार मेरे कमरे में 5-6 सांप घुस गए। मैं परेशान हो गया, उसकी वजह से मैं कश्मीरी हिंदुओं की तरह अपने ही घर से बेघर होकर बाहर निकल गया। इसी बीच बाकी लोग जमा हो गए। मैंने पुलिस और सेना को बुला लिया।

अब मैं खुश था कि थोड़ी देर में सेना इनको मार देगी
तभी कुछ पशु प्रेमी और मानवतावादी आ गये, बोले की नहीं आप गोली नहीं चला सकते, हम पेटा के तहत केस कर देंगे।

सेना वाले उसको ढेला मारने लगे, सांप भी उधर से मुंह ऊँचा करके जहर फेंकने लगे।
एक दो सांप ने तो एक दो सैनिक को काट भी लिया पर भागे नहीं।

फिर इतने में कुछ पडोसी मुझे ही बोलने लगे,
क्या भाई तुम भी बेचारे सांप पर पड़े हो, रहने दो , क्यों भगा रहे हो ?

उधर प्रशासन ने खबर भिजवा दिया, सांप के मुंह में जहर नहीं होना चाहिए, उसके मुंह में दूध दे दो
तो वो मुंह से जहर की जगह दूध फेंकेगा।

..... मैं हैरान परेशान...

फालतू में बात का बतंगड़ हो चुका था। न्यूज़ भी चलने लगे थे।

एनडीटीवी के रविश ने कह दिया कि सबको जहर नजर आता है सांप नजर नहीं आता, उसकी भी जिंदगी है।

बरखा दत्त चीख़ कर कहने लगी की ये तो भटके हुए संपोले हुए हैं, मकान मालिक इनको बेवजह परेशान कर रहा है,
मकान मालिक को चाहिए की वो इनको अपने घर में सुरक्षित स्थान पर इनको बिल बनाकर रहने दे और इनके खाने पिने का भरपूर ध्यान रखे।

इसी बीच एक सैनिक ने पेलेट गन चला दिया और एक सांप अंधा हो गया,

मुझे आशा जगी, सेना ही कुछ कर सकती है,

तभी भाँड मीडिया ने कहा, पेलेट गन क्यों चलाया, सांप को कष्ट हो रहा है,

अभी कोई कुछ सोचता उससे पहले ही हाइकोर्ट का भी फैसला जाने कहाँ से आ गया कि सांप पर पेलेट गन नहीं चला सकते इस गन से उसकी आँखे और चेहरा ख़राब हो सकता है।

उधर आम आदमी पार्टी ने कह दिया कि वहाँ जनमत संग्रह हो कि उस घर में सांप रहेगा या आदमी।

कुल मिलकर सांप को जीने का हक़ है इस पर सब एकमत हो गए थे।

इतने में जो मेरा पडोसी मेरा घर कब्ज़ा करना चाहता था वो सांप के लिए दूध, छिपकली और मेढक लेकर आ गया, उसको खिलाने लगा,

उसकी मदद बुद्धिजीवियों, मानवातावादियो और पत्रकारों ने कर दी और पडोसी को शाबाशी दी।

मैं निराश होकर अब दूर से सिर्फ देखता था।

काश

मैंने खुद लाठी लेकर शुरू में ही इन सांपो को ठिकाने लगा दिया होता तो आज ये दिन ना देखना पड़ता।

    साभार एक मित्र से

सिर्फ 7 दिन में सफ़ेद दाग (श्वेत कुष्ठ) का सफाया,

सिर्फ 7 दिन में सफ़ेद दाग (श्वेत कुष्ठ) का सफाया,
इस उपाय से 146 रोगियों में से 142 पूर्णतः ठीक हुए, ये महत्त्वपूर्ण पोस्ट शेयर करना ना भूले



सिर्फ 7 दिन में सफ़ेद दाग (श्वेत कुष्ठ) खत्म होगी : दिवान हकीम परमानन्द जी के द्वारा अनभूत प्रयोग

आवश्यक सामग्री :

25 ग्राम देशी कीकर (बबूल) के सूखे पते
25 ग्राम पान की सुपारी (बड़े आकार की)
25 ग्राम काबली हरड का छिलका

बनाने की विधि :

उपरोक्त तीन वस्तुएँ लेकर दवा बनाये। कही से देशी कीकर (काटे वाला पेड़ जिसमे पीले फुल लगते है ) के ताजे पत्ते (डंठल रहित ) लाकर छाया में सुखाले कुछ घंटो में पत्ते सुख जायेगे बबूल के इन सूखे पत्तो को काम में ले पान वाली सुपारी बढिया ले इसका पावडर बना ले कबाली हरड को भी जौ कुट कर ले और इन सभी चीजो को यानि बबूल , सुपारी , काबली हरड का छिलका (बड़ी हरड) सभी को 25-25 ग्राम की अनुपात में ले कुल योग 75 ग्राम और 500 मिली पानी में उबाले पानी जब 125 मिली बचे तब उतर कर ठंडा होने दे और छान कर पी ले ये दवा एक दिन छोड़ कर दुसरे दिन पीनी है अर्थात मान लीजिये आज आप ने दवा ली तो कल नहीं लेनी है और इस काढ़े में 2 चमच खांड या मिश्री मिला ले (10 ग्राम) और ये निहार मुह सुबह –सुबह पी ले और 2 घंटे तक कुछ भी खाना नहीं है दवा के प्रभाव से शरीर शुद्धि हो और उलटी या दस्त आने लगे परन्तु दवा बन्द नहीं करे 14 दीन में सिर्फ 7 दिन लेनी है और फीर दवा बन्द कर दे कुछ महीने में घिरे –घिरे त्वचा काली होने लगेगी हकीम साहब का दावा है की ये साल भर में सिर्फ एक बार ही लेने से रोग निर्मूल (ख़त्म) हो जाता है अगर कुछ रह जाये तो दुसरे साल ये प्रयोग एक बार और कर ले नहीं तो दुबारा इसकी जरूरत नहीं पडती।

पूरक उपचार

एक निम्बू, एक अनार और एक सेब तीनो का अलग – अलग ताजा रस निकालने के बाद अच्छी तरह परस्पर मिलाकर रोजाना सुबह शाम या दिन में किसी भी समय एक बार नियम पूर्वक ले। यह फलो का ताजा रस कम से कम दवा सेवन के प्रयोग आगे 2-3 महीने तक जारी रख सके तो अधिक लाभदायक रहेगा।

औषधियों की प्रयोग विधि :

दवा के सेवन काल के 14 दिनों में मक्खन घी दूध अधिक लेना हितकर है क्योकि दवा खुश्क है।
चौदह दिन दवा लेने के बाद कोई बिशेस परहेज पालन की जरुरत नहीं है श्वेत कुष्ठ के दुसरे इलाजो में कठीन परहेज पालन होती है परन्तु इस ईलाज में नातो सफेद चीजो का परहेज है और ना खटाई आदि का फीर भी आप मछली मांस अंडा नशीले पदार्थ शराब तम्बाकू आदि और अधिक मिर्च मसले तेल खटाई आदि का परहेज पालन कर सके तो अच्छा रहेगा।
दवा सेवन के 14 दिनों में कभी –कभी उलटी या दस्त आदि हो सकता है इससे घबराना नहीं चाहिए बल्कि उसे शारीरिक शुध्धी के द्वारा आरोग्य प्राप्त होनेका संकेत समझना चाहिए।
रोग दूर होने के संकेत हकीम साहब के अनुसार दवा के सेवन के लगभग 3 महीने बाद सफेद दागो के बीच तील की तरह काले भूरे या गुलाबी धब्धे ( तील की तरह धब्बे ) के रूप में चमड़ी में रंग परिवर्तन दिखाई देगा और साल भर में धीरे –धीरे सफेद दाग या निसान नष्ट हो कर त्वचा पहले जयसी अपने स्वभाविक रंग में आ जाएगी फीर भी यदि कुछ कसर रह जाये तो एक साल बीत जाने के बाद दवा की सात खुराके इसी तरह दुबारा ले सकते है।
दिवान हकीम साहब का दावा है की उतर्युक्त ईलाज से उनके 146 श्वेत कुष्ठ के रोगियों में से 142 रोगी पूर्णत : ठीक अथवा लाभान्वित हुये है कुछ सम्पूर्ण शरीर में सफेद रोगी भी ठीक हुये है निर्लोभी परोपकारी दीवान हकीम परमानन्द जी की अनुमति से बिस्तार से यह अनमोल योग मानव सेवा भावना के साथ जनजन तक पहुचा रहा हु इस आशा और उदात भावना के साथ की पाठक निश्वार्थ भावना से तथा बिना किसी लोभ के जनजन तक जरुर पहुचाये।

स्रोत : स्वदेशी चिकित्सा के चमत्कार लेख दीवान हकीम परमानन्द नई दिल्ली द्वारा अनभूत प्रयोग। अपने नजदीकी कुशल वैद्य या चिकित्सक की सलाह अवश्य ले तथा उनकी देख रेख में कोई कदम उठाएं।

संसार की एक बेहतरीन एंटी-ऑक्सीडेंट , एंटी- बैक्टीरियल, एंटी- वायरल , एंटी- फ्लू, एंटी- बायोटिक , एंटी-इफ्लेमेन्ट्री व एंटी - डिजीज है - तुलसी

तुलसी पीएं, निरोग जीएं" 

(पांच तरह के तुलसी का अर्क)
 तुलसी मुख्य रूप से पांच प्रकार के पायी जाती है !
श्याम तुलसी,
राम तुलसी,
श्वेत/विश्नू तुलसी,
वन तुलसी,
और नींबू तुलसी I
इन पांच प्रकार की तुलसी विधि द्वारा अर्क निकाल कर तुलसी का निर्माण किया गया है, यह संसार की एक बेहतरीन एंटी-ऑक्सीडेंट , एंटी- बैक्टीरियल, एंटी- वायरल , एंटी- फ्लू, एंटी- बायोटिक , एंटी-इफ्लेमेन्ट्री व एंटी - डिजीज है I

 1)  तुलसी अर्क के एक बून्द एक ग्लास पानी में या दो बून्द एक लीटर पानी में डाल कर पांच मिनट के बाद उस जल को पीना चाहिए। इससे पेयजल विष् और रोगाणुओं से मुक्त होकर स्वास्थवर्धक पेय हो जाता है I
2) तुलसी अर्क २०० से अधिक रोगो में लाभदायक है I जैसे के फ्लू , स्वाइन फ्लू, डेंगू , जुखाम , खासी , प्लेग, मलेरिया , जोड़ो का दर्द, मोटापा, ब्लड प्रेशर , शुगर, एलर्जी , पेट के कीड़ो , हेपेटाइटिस , जलन, मूत्र सम्बन्धी रोग, गठिया , दम, मरोड़, बवासीर , अतिसार, आँख का दर्द , दाद खाज खुजली, सर दर्द, पायरिया नकसीर, फेफड़ो सूजन, अल्सर , वीर्य की कमी, हार्ट ब्लोकेज आदि I
3) तुलसी एक बेहतरीन विष नाशक तथा शरीर हटा के विष (toxins ) को बाहर निकलती है I
4) तुलसी स्मरण शक्ति को बढ़ाता है I
5) तुलसी शरीर के लाल रक्त सेल्स (Haemoglobin) को बढ़ने में अत्यंत सहायक है I
 6) तुलसी भोजन के बाद एक बूँद सेवन करने से पेट सम्बन्धी बीमारिया बहोत काम लगाती है. 7) तुलसी के 4 - 5 बूँदे पीने से महिलाओ को गर्भावस्था में बार बार होने वाली उलटी के शिकायत ठीक हो जाती है I
 आग के जलने व किसी जहरीले कीड़े के कांटने से  तुलसी को लगाने से विशेष रहत मिलती है I 9) दमा व खाँसी में तुलसी के दो बुँदे थोड़े से अदरक के रास तथा शहद के साथ मिलकर सुबह - दोपहर - शाम सेवन करे I
10) यदि मुँह में से किसी प्रकार की दुर्गन्ध आती हो तो तुलसी के एक बूँद मुँह में डाल ले दुर्गन्ध तुरंत दूर हो जाएगी I
11) दांत का दर्द, दांत में कीड़ा लगना , मसूड़ों में खून आना  तुलसी के 4 - 5 बूँदे पानी में डालकर कुल्ला करना चाहिए I 12) कान का दर्द, कण का बहना, तुलसी हल्का गरम करके एक -एक बूंद कान में टपकाए I 13) नाक में पिनूस रोग हट जाता है, इसके अतिरिक्त फोड़े - फुंसिया भी निकल आती है, दोनों रोगो में बहुत तकलीफ होती है I तुलसी को हल्का सा गरम करके एक - एक बूंद नाक में टपकाएं I 13) गले में दर्द, गले व मुँह में छाले , आवाज़ बैठ जाना :  तुलसी के 4 - 5 बूँदे गरम पानी में डालकर कुल्ला करना चाहिए I 14) सर दर्द, बाल क्हाड्णा, बाल सफ़ेद होना व सिकरी तुलसी की 8 - 10 मि.ली। हर्बल हेयर आयल के साथ मिलाकर सर, माथे तथा कनपटियो पर लगाये I 15)  तुलसी के 8 - 10 बूँदे मिलकर शरीर में मलकर रात्रि में सोये , मच्छर नहीं काटेंगे I
16) कूलर के पानी में  तुलसी के 8 - 10 बूँदे डालने से सारा घर विषाणु और रोगाणु से मुक्त हो जाता है, तथा मक्खी - मच्छर भी घर से भाग जाते है I
17) जूएं व लिखे तुलसी और नीबू का रस समान मात्रा में मिलाकर सर के बालो में अच्छे तरह से लगाये I 3 - 4 घंटे तक लगा रहने दे। और फिर धोये अथवा रात्रि को लगाकर सुबह सर धोए।। जुएं व लिखे मर जाएगी I
 18) त्वचा की समस्या में निम्बू रास के साथ तुलसी के 4 - 5 बूँदे डालकर प्रयोग करे I
 19) तुलसी में सुन्दर और निरोग बनाने की शक्ति है। यह त्वचा का कायाकल्प कर देती है I यह शरीर के खून को साफ करके शरीर को चमकीला बनती है I
 20) तुलसी की दो बूँदे एलो जैल क्रीम में मिलाकर चेहरे पर सुबह व रात को सोते समय लगाने पर त्वचा सुन्दर व कोमल हो जाती है तथा चेहरे से प्रत्येक प्रकार के काले धेरे, छाइयां , कील मुँहासे व झुरिया नष्ट हो जाती है I
21) सफ़ेद दाग : 10 मि.लि. तेल व नारियल के तेल में 20 बूँदें तुलसी डालकर सुबह व रात सोने से पहले अच्छी तरह से मले I 22)  तुलसी के नियमित उपयोग से कोलेस्ट्रोल का स्तर कम होने लगता है, रक्त के थक्के जमने कम हो जाते है, व हार्ट अटैक और कोलैस्ट्रोल की रोकथाम हो जाती है I
 23)  तुलसी को किसी भी अच्छी क्रीम में मिलाकर लगाने से प्रसव के बाद पेट पर बनने वाले लाइने ( स्ट्रेच मार्क्स ) दूर हो जाते है I🍁

2019 General Election

2019 General Election

BJP
Vs
Congress + Left + BSP + SP + TDP + RJD + Shiv Sena + TMC + DMK + AAP + JDU + NDTV + ABP NEWS + Scroll + The Wire + Award Wapsi Gang + JNU + Terrorists + Pakistan + China
✍🚩

जब आप फुर्सत मे हों तब पढ़ लीजियेगा, किंतु पढ़ना धैर्य और शांति से, फिर निष्कर्ष निकलना !

मोदी जी को हिंदू और मुसलमान दोनों हटाना चाहते हैं, किंतु दोनों के बीच अंतर देखिये :

हिन्दू पेट्रोल का दाम देख रहा है और मुसलमान रोहिंग्या मुसलमान को !

हिन्दू जीएसटी से रूठे हैं और कांग्रेस को लाना चाहते हैं और मुसलमान भारत को इस्लामी राष्ट्र बनाना चाहते हैं, इसलिए कांग्रेस को लाना चाहते हैं ! कारण जो भी हो उद्देश्य सबका एक ही है !

भारत में बहुत से लोग हैं, जो भ्रष्ट नेताओं की बातों में आकर नरेन्द्र मोदी का विरोध करते हैं ! अच्छा है, लोकतंत्र है विरोध करें या समर्थन ये तो आपका अपना हक है, पर मोदी का विरोध करके आप समर्थन किसका कर रहे हैं, ये बडा गंभीर सवाल है, इसलिए निर्णय भी गंभीरता पूर्वक ही होना चाहिये !

क्या मुलायम, लालू, मायावती, सोनिया, राहुल, केजरीवाल, ममता बनर्जी, वामपंथी ये सब नरेन्द्र मोदी से बेहतर हैं या इनका रिकॉर्ड बेहतर है ?

क्या नरेन्द्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्रीकाल की तुलना मे ममता बनर्जी, अखिलेश आदि का कार्यकाल बेहतर नजर आता है ? तुलना करनी है तो गुजरात के किसी छोटे शहर मे जाकर एक नजर मार लीजिये और फिर इन अन्य राज्यों की राजधानी का भ्रमण कीजिये !

राजनीति मे प्रवेश के समय लालू और मुलायम, दोनों के घर की स्थिति ऎसी थी कि इनके पास साइकिल और लालटेन खरीदने तक के पैसे नहीं थे, जाति के नाम पर चलने वाले ये नेता आज अरबपति हैं, रामगोपाल चार्टर्ड प्लेन में घूमता है, तो शिवपाल ऑडी मे, कहां से आया इतना अकूत धन, क्या ये लोग नरेन्द्र मोदी से बेहतर हैं ?

सोनिया जी के बेटा-बेटी और दामाद आज सभी अरबपति है, क्या ये नरेन्द्र मोदी से बेहतर हैं ?

क्या 35 साल बंगाल में राज करने वाले वामपंथी, नरेन्द्र मोदी से बेहतर हैं ?

पांच साल केजरीवाल ने विज्ञापन चलाकर दिल्ली के लोगों को चूना लगाया, WIFI, CCTV, 150 कॉलेज, 500 स्कूल, क्या ये कुकुरमुत्ता नरेंद्र मोदी से बेहतर है ?

जब मायावती राजनीती करने निकली थी और काशीराम की साथी थी, तब उसके घर में दिया जलाने का धन नहीं था, साईकल से प्रचार करती थी, आज उसका सैंडल भी प्लेन से आता है, उसके भाई के पास 497 कंपनियां हैं, क्या ये नरेंद्र मोदी से बेहतर है ?

मोदी का विरोध करने वालों, विरोध करो, पर समर्थन किसका करना है ये तो तय करो कोई बेहतर विकल्प हो तो बताना, थोड़ा देश का भी सोचो, कितना बर्बाद करवाना है, कितना लूटवाना है ? बाहर निकलो जातियो के बंधनों से इसे उबारकर ये लूटेरे हमे ही लूटते हैं !

● मुझे नहीं मालूम कि मैं मोदी को क्यों पसंद करता हूं, लेकिन मेरे पास कांग्रेस, सपा, बसपा, आप को नापसंद करने के बहुत कारण हैं !

● मुझे नहीं मालूम कि अच्छे दिन आयेंगे या नहीं, पर मोदी जी के अतिरिक्त और कोई राजनेता दूर दूर तक दिखाई नहीं देता जो भारत के अच्छे दिनों के लिए तन और मन से प्रयत्न करता हो !

● मुझे ये भी नहीं मालूम कि मोदी जी भारत को हिन्दू राष्ट्र बना पायेंगे या नहीं, लेकिन ये पूरा यकीन हैं कि वो पूरी संजीदगी और गंभीरता से भारत माता को पुनः विश्वगुरु का दर्जा दिलवाने हेतु प्रयासरत हैं !

● मुझे फर्क नहीं पड़ता कि मोदी जी के पास इतिहास की जानकारी है या नही, पर मुझे पक्का यकीन है कि उनके पास भविष्य की पूरी तैयारी है !

मान लो कि यह पोस्ट बनाने वाला मोदी भक्त है और इसे शेयर करने वाला मै भी, लेकिन ऊपर वाले ने बुद्धि तो आपको भी दी है, इसलिये पूरी ईमानदारी से सोचिये, केवल अपने लिये नही बल्कि अपने देश के लिये, यदि आप मेरी बात से सहमत हैं, देशहित में इसे फारवर्ड अवश्य करें !
जयहिंद

भारतवर्ष का गौरवशाली इतिहास जम्बूदीप


क्या आप जानते हैं कि हमारे प्राचीन महादेश का नाम “भारतवर्ष” कैसे पड़ा....?????


साथ ही क्या आप जानते हैं कि हमारे प्राचीन हमारे महादेश का नाम ..."जम्बूदीप" था..?????

परन्तु क्या आप सच में जानते हैं जानते हैं कि हमारे  महादेश को ""जम्बूदीप"" क्यों कहा जाता है  और, इसका मतलब क्या होता है .??

दरअसल. हमारे लिए यह जानना बहुत ही आवश्यक है कि भारतवर्ष का नाम भारतवर्ष कैसे पड़ा ????

क्योंकि एक सामान्य जनधारणा है कि महाभारत एक कुरूवंश में राजा दुष्यंत और उनकी पत्नी शकुंतला के प्रतापी पुत्र भरत के नाम पर इस देश का नाम "भारतवर्ष" पड परन्तु इसका साक्ष्य उपलब्ध नहीं है...!

लेकिन वहीँ हमारे पुराण इससे अलग कुछ अलग बात पूरे साक्ष्य के साथ प्रस्तुत करता है।

आश्चर्यजनक रूप से इस ओर कभी हमारा ध्यान नही गया जबकि पुराणों में इतिहास ढूंढ़कर अपने इतिहास के साथ और अपने आगत के साथ न्याय करना हमारे लिए बहुत ही आवश्यक था।

परन्तु , क्या आपने कभी इस बात को सोचा है कि जब आज के वैज्ञानिक भी इस बात को मानते हैं कि प्राचीन काल में साथ भूभागों में अर्थात महाद्वीपों में भूमण्डल को बांटा गया था।

लेकिन ये सात महाद्वीप किसने और क्यों तथा कब बनाए गये इस पर कभी, किसी ने कुछ भी नहीं कहा ।

अथवा दूसरे शब्दों में कह सकता हूँ कि जान बूझकर इस से सम्बंधित अनुसंधान की दिशा मोड़ दी गयी।

परन्तु हमारा "जम्बूदीप नाम " खुद में ही सारी कहानी कह जाता है जिसका अर्थ होता है - समग्र द्वीप .

इसीलिए हमारे प्राचीनतम धर्म ग्रंथों तथा विभिन्न अवतारों में सिर्फ "जम्बूद्वीप" का ही उल्लेख है क्योंकि उस समय सिर्फ एक ही द्वीप था
साथ ही हमारा वायु पुराण इस से सम्बंधित पूरी बात एवं उसका साक्ष्य हमारे सामने पेश करता है।

वायु पुराण के अनुसार त्रेता युग के प्रारंभ में स्वयम्भुव मनु के पौत्र और प्रियव्रत के पुत्र ने इस भरत खंड को बसाया था।

चूँकि महाराज प्रियव्रत को अपना कोई पुत्र नही था इसलिए , उन्होंने अपनी पुत्री के पुत्र अग्नीन्ध्र को गोद ले लिया था जिसका लड़का नाभि था.....!

नाभि की एक पत्नी मेरू देवी से जो पुत्र पैदा हुआ उसका नाम ऋषभ था और, इसी ऋषभ के पुत्र भरत थे तथा इन्ही भरत के नाम पर इस देश का नाम "भारतवर्ष" पड़ा।

उस समय के राजा प्रियव्रत ने अपनी कन्या के दस पुत्रों में से सात पुत्रों को संपूर्ण पृथ्वी के सातों महाद्वीपों के अलग-अलग राजा नियुक्त किया था।
राजा का अर्थ उस समय धर्म, और न्यायशील राज्य के संस्थापक से लिया जाता था।

इस तरह राजा प्रियव्रत ने जम्बू द्वीप का शासक अग्नीन्ध्र को बनाया था।
इसके बाद राजा भरत ने जो अपना राज्य अपने पुत्र को दिया और, वही " भारतवर्ष" कहलाया।

ध्यान रखें कि भारतवर्ष का अर्थ है राजा भरत का क्षेत्र और इन्ही राजा भरत के पुत्र का नाम सुमति था।

इस विषय में हमारा वायु पुराण कहता है—

सप्तद्वीपपरिक्रान्तं जम्बूदीपं निबोधत।
अग्नीध्रं ज्येष्ठदायादं कन्यापुत्रं महाबलम।।
प्रियव्रतोअभ्यषिञ्चतं जम्बूद्वीपेश्वरं नृपम्।।
तस्य पुत्रा बभूवुर्हि प्रजापतिसमौजस:।
ज्येष्ठो नाभिरिति ख्यातस्तस्य किम्पुरूषोअनुज:।।
नाभेर्हि सर्गं वक्ष्यामि हिमाह्व तन्निबोधत। (वायु 31-37, 38)

मैं अपनी बात को प्रमाणित करने के लिए रोजमर्रा के कामों की ओर आपका ध्यान दिलाना चाहूँगा कि

हम अपने घरों में अब भी कोई याज्ञिक कार्य कराते हैं  तो, उसमें सबसे पहले पंडित जी संकल्प करवाते हैं।

हालाँकि हम सभी उस संकल्प मंत्र को बहुत हल्के में लेते हैं और, उसे पंडित जी की एक धार्मिक अनुष्ठान की एक क्रिया मात्र मानकर छोड़ देते हैं।

परन्तु यदि आप संकल्प के उस मंत्र को ध्यान से सुनेंगे तो उस संकल्प मंत्र में हमें वायु पुराण की इस साक्षी के समर्थन में बहुत कुछ मिल जाता है।

संकल्प मंत्र में यह स्पष्ट उल्लेख आता है कि -जम्बू द्वीपे भारतखंडे आर्याव्रत देशांतर्गते।

संकल्प के ये शब्द ध्यान देने योग्य हैं क्योंकि, इनमें जम्बूद्वीप आज के यूरेशिया के लिए प्रयुक्त किया गया है।

इस जम्बू द्वीप में भारत खण्ड अर्थात भरत का क्षेत्र अर्थात ‘भारतवर्ष’ स्थित है जो कि आर्याव्रत कहलाता है।

इस संकल्प के छोटे से मंत्र के द्वारा हम अपने गौरवमयी अतीत के गौरवमयी इतिहास का व्याख्यान कर डालते हैं।

परन्तु अब एक बड़ा प्रश्न आता है कि जब सच्चाई ऐसी है तो फिर शकुंतला और दुष्यंत के पुत्र भरत से इस देश का नाम क्यों जोड़ा जाता है?

इस सम्बन्ध में ज्यादा कुछ कहने के स्थान पर सिर्फ इतना ही कहना उचित होगा कि शकुंतला, दुष्यंत के पुत्र भरत से इस देश के नाम की उत्पत्ति का प्रकरण जोडऩा शायद नामों के समानता का परिणाम हो सकता है अथवा , हम हिन्दुओं में अपने धार्मिक ग्रंथों के प्रति उदासीनता के कारण ऐसा हो गया होगा ।

परन्तु जब हमारे पास वायु पुराण और मन्त्रों के रूप में लाखों साल पुराने साक्ष्य मौजूद है और, आज का आधुनिक विज्ञान भी यह मान रहा है कि धरती पर मनुष्य का आगमन करोड़ों साल पूर्व हो चुका था, तो हम पांच हजार साल पुरानी किसी कहानी पर क्यों विश्वास करें ??

सिर्फ इतना ही नहीं हमारे संकल्प मंत्र में पंडित जी हमें सृष्टि सम्वत के विषय में भी बताते हैं कि अभी एक अरब 96 करोड़ आठ लाख तिरेपन हजार एक सौ तेरहवां वर्ष चल रहा है।

फिर यह बात तो खुद में ही हास्यास्पद है कि एक तरफ तो हम बात एक अरब 96 करोड़ आठ लाख तिरेपन हजार एक सौ तेरह पुरानी करते हैं परन्तु, अपना इतिहास पश्चिम के लेखकों की कलम से केवल पांच हजार साल पुराना पढ़ते और मानते हैं!

आप खुद ही सोचें कि यह आत्मप्रवंचना के अतिरिक्त और क्या है ?????

इसीलिए जब इतिहास के लिए हमारे पास एक से एक बढ़कर साक्षी हो और प्रमाण पूर्ण तर्क के साथ उपलब्ध हों तो फिर , उन साक्षियों, प्रमाणों और तर्कों केआधार पर अपना अतीत अपने आप खंगालना हमारी जिम्मेदारी बनती है।

हमारे देश के बारे में वायु पुराण का ये श्लोक उल्लेखित है—-हिमालयं दक्षिणं वर्षं भरताय न्यवेदयत्।तस्मात्तद्भारतं वर्ष तस्य नाम्ना बिदुर्बुधा:।।

यहाँ हमारा वायु पुराण साफ साफ कह रहा है कि हिमालय पर्वत से दक्षिण का वर्ष अर्थात क्षेत्र भारतवर्ष है।

इसीलिए हमें यह कहने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए कि हमने शकुंतला और दुष्यंत पुत्र भरत के साथ अपने देश के नाम की उत्पत्ति को जोड़कर अपने इतिहास को पश्चिमी इतिहासकारों की दृष्टि से पांच हजार साल के अंतराल में समेटने का प्रयास किया है।

ऐसा इसीलिए होता है कि आज भी हम गुलामी भरी मानसिकता से आजादी नहीं पा सके हैं और, यदि किसी पश्चिमी इतिहास कार को हम अपने बोलने में या लिखने में उद्घ्रत कर दें तो यह हमारे लिये शान की बात समझी जाती है परन्तु, यदि हम अपने विषय में अपने ही किसी लेखक कवि या प्राचीन ग्रंथ का संदर्भ दें तो, रूढि़वादिता का प्रमाण माना जाता है ।

और यह सोच सिरे से ही गलत है।

इसे आप ठीक से ऐसे समझें कि राजस्थान के इतिहास के लिए सबसे प्रमाणित ग्रंथ कर्नल टाड का इतिहास माना जाता है।

परन्तु आश्चर्य जनक रूप से हमने यह नही सोचा कि एक विदेशी व्यक्ति इतने पुराने समय में भारत में आकर साल, डेढ़ साल रहे और यहां का इतिहास तैयार कर दे, यह कैसे संभव है?

विशेषत: तब जबकि उसके आने के समय यहां यातायात के अधिक साधन नही थे और , वह राजस्थानी भाषा से भी परिचित नही था।

फिर उसने ऐसी परिस्थिति में सिर्फ इतना काम किया कि जो विभिन्न रजवाड़ों के संबंध में इतिहास संबंधी पुस्तकें उपलब्ध थीं उन सबको संहिताबद्घ कर दिया।

इसके बाद राजकीय संरक्षण में करनल टाड की पुस्तक को प्रमाणिक माना जाने लगा और, यह धारणा बलवती हो गयीं कि राजस्थान के इतिहास पर कर्नल टाड का एकाधिकार है।

और ऐसी ही धारणाएं हमें अन्य क्षेत्रों में भी परेशान करती हैं इसीलिए अपने देश के इतिहास के बारे में व्याप्त भ्रांतियों का निवारण करना हमारा ध्येय होना चाहिए।

क्योंकि इतिहास मरे गिरे लोगों का लेखाजोखा नही है जैसा कि इसके विषय में माना जाता है बल्कि, इतिहास अतीत के गौरवमयी पृष्ठों और हमारे न्यायशील और धर्मशील राजाओं के कृत्यों का वर्णन करता है।

इसीलिए हिन्दुओं जागो और , अपने गौरवशाली इतिहास को पहचानो!

हम गौरवशाली हिन्दू सनातन धर्म का हिस्सा हैं और, हमें गर्व होना चाहिए कि  हम हिन्दू हैं!

97 % तक आँखों की रौशनी बढाएं

उतार कर फेंक दीजिये आँखों का चश्मा 97 % तक आँखों की रौशनी बढाएं इस आसान से घरेलु उपाय से

हमारी आखे हमारे शरीर का एक अनमोल हिस्सा है | दिन में होने वाली 90% क्रियाओं को हम अपनी आखों के जरिये सेन्स कर पाते है | बढती उम्र के साथ हमारी आखो की रौशनी धीमी होने लग जाती है , जो के एक आम बात है | लेकिन आखो की रौशनी कम होने के कई और कार्ण भी हो सकते है |
अगर आप चश्मे से परेशान है और अपनी आखो की रौशनी दोबारा पाना चाहते है तो आप बिलकुल सही जगह पर है | आज हम आपको बतायेगे कैसे आप पा सकते है आखों की तेज रौशनी और चश्मे तथा लेन्सेस से छुटकारा

सामग्री :-
केसर – 1 छोटी चुटकी
एक गिलास सादा पानी

बस इन दो चीजों के जरिये आप आखों की रौशनी को दुबारा पा सकते है सकते है | आपको सिर्फ केसर की चाये बनानी है | पनी को उबाल लेना है और उस में केसर डाल देना है अगर आप चाहे तो इसमें थोडा सा शहद भी डाल सकते है (मिठास के लिए)
रात को सोने से पहले इक गिलास केसर चाय का सेवन करने से आप जादुई नतीजे पायेगे |

केसर चाय के अन्य फायदे

गठिया
कोलेस्ट्रॉल का स्तर
खून की सफाई
रक्तसंचार

जो अक्सर गर्मी में बहुत पेरशान करती है शरीर को -घमोरियां


जो अक्सर गर्मी में बहुत पेरशान करती है शरीर को , कही कंपनी इसको ठीक करने का दावा भी करती है और इसके लिये करोड़ो रूपये tv ads , पेपर ads , पे खर्च करती है और अरबो रुपये का व्यापार सिर्फ घमोरियां के नाम ले जाती है शायद इस जानकारी से आप के तो बचत हो जायेगी मगर कई कंपनी के नुकसान हो सकता है अगर आप इस मैसेज को हर ग्रुप , मित्र, परिचित तक भेज दे तो यह हो सकता है

◆◆घमौरियों से तुरंत आराम◆◆
गर्मियों में घमोरियां होना एक आम बात है एक तो भयंकर गर्मी और उस पर बहते पसीने में ये घमोरियां, पुरे तन बदन में आग लगा देती हैं। घमोरियां ज़्यादातर गले पेट और पीठ पर अधिक प्रकोप दिखाती हैं। गर्मियों में घमौरियों से बचने के लिए भोजन में तड़का (छोंक) लगते समय प्याज और लहसुन और गर्म मसालों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। कच्चा प्याज गर्मी से बचाता है तो छोंक लगा हुआ प्याज गर्मी करता है।
अगर घमोरियां हो गयी हों तो ऐसे में आप तुरंत आराम के लिए निम्नलिखित प्रयोग अपना कर घमौरियों के कष्ट से तुरंत आराम पा सकते हैं।
*बर्फ से घमौरियों का इलाज: घमौरियां होने पर शरीर पर बर्फ मलने से ठंडक मिलती है*
मुलतानी मिट्टी से घमौरियों का इलाज: शरीर पर मुलतानी मिट्टी का लेप करने से घमौरियां कुछ ही दिनों में मिट जाती हैं।
*नारियल से घमौरियों का इलाज: रोजाना सुबह और शाम नहाने के बाद नारियल के तेल में कपूर को मिलाकर पूरे शरीर पर मालिश करने से घमौरियां दूर हो जाती हैं।*
मेहंदी से घमौरियों का इलाज: शरीर में घमौरियां होने पर मेहंदी का लेप करने से घमौरियां कुछ ही समय में बिल्कुल खत्म हो जाती हैं।नहाते समय पानी में मेहंदी के पत्तों को पीसकर मिला लें। इस पानी से नहाने से घमौरियां ठीक हो जाती हैं और रोगी को राहत मिलती है।
*नीम से घमौरियों का इलाज: घमौरियां होने पर नीम की छाल को घिसकर चन्दन कीतरह शरीर पर लगाने से घमौरियां कुछ ही समय में ठीक हो जाती हैं। पानी में थोड़ी सी नीम की पत्तियां डालकर उबाल लें। इस पानी से नहाने से घमौरियां दूर हो जाती हैं।*
चंदन से घमौरियों का इलाज: सफेद चंदन को पानी के साथपीसकर शरीर पर लेप करने से घमौरियां ठीक हो जाती हैं।गुलाब जल में चंदन और कपूर को घिसकर घमौरियों पर लगाने से आराम आता है।
*खसखस से घमौरियों का इलाज:20 ग्राम खसखस को पीसकरपानी में मिलाकर घमौरियों पर लगाने से घमौरियों से राहत मिलती है। इसके अलावा 2 चम्मच खसखस के शर्बत को 1कप पानी में मिलाकर दिन में 2-3 बार पीने से भी घमौरियों में लाभ होता है।*
अनानास से घमौरियों का इलाज: घमौरियां होने पर अनान्नास का गूदा शरीर पर लगाने से रोगी को आराम होता है।
*बड़हल से घमौरियों का इलाज: बड़हल (बरहर) के पेड़ की छालकी फांट से त्वचा को धोने सेघमौरियां और फुन्सियां ठीक होजाती हैं।*
सरसों से घमौरियों का इलाज: पानी में बराबर मात्रा में सरसों का तेल मिलाकर सुबह और शाम मालिश करने से सिर्फ 3 दिनों में ही घमौरियां पूरी तरह से खत्म हो जाती है।
*नारंगी से घमौरियों का इलाज:नारंगी के छिलकों को सुखाकर उसका पाउडर बना लें। इसपाउडर को गुलाबजल में मिलाकर शरीर पर लेप करने से घमौरियों में लाभ होता है।*
घी से घमौरियों का इलाज : गाय या भैंस के असली घी की पूरे शरीर पर मालिश करने से घमौरियां मिट जाती हैं और दुबारा कभी होती भी नहीं हैं।
*तुलसी से घमौरियों का इलाज: तुलसी की लकड़ी को पीसकर चन्दन की तरह शरीर पर मलने से घमौरियां समाप्त हो जाती हैं।*
समुद्रफेन से घमौरियों का इलाज: समुद्रफेन के बारीक चूर्ण को गुलाब जल में मिलाकर शरीर पर लगाने से घमौरियों से राहत मिलती है।
*करेला से घमौरियों का इलाज: चौथाई कप करेले के रस में 1चम्मच खाने वाला मीठा सोडा मिलाकर दिन में 2 से 3 बार घमौरियों पर लेप करने से घमौरियां मिट जाती हैं।*
आम से घमौरियों का इलाज: कच्चे आम को धीमी आंच में भूनकर इसके गूदे का शरीर पर लेप करने से घमौरियों में आराम होता है।
*धनिया से घमौरियों का इलाज: बर्फ के पानी में 50 ग्राम धनिये के पानी को भिगो देना चाहिए। लगभग 5 घंटे बाद इस पानी को छानकर घमौरियों वाले स्थान पर लगाने से राहत मिलती है। यदि किसी छोटे तौलिये को इस पानी में भिगोकर घमौरियों पर रखा जाए तो रोगी को बहुत आराम मिलता है। इस प्रक्रिया को 2 दिन तक सुबह-शाम करने सेघमौरियां नष्ट हो जाती हैं। इसकेअतिरिक्त नींबू के रस में धनिया डालकर पीना भी घमौरियों में लाभकारी रहता है। ध्यान रहे कि घमौरियों के कारण शरीर में नमक की मात्रा कम होनेलगती है। इसलिए नमक का सेवन अवश्य ही करना चाहिए। यदि रोटी में नमक और अजवायन को मिला लिया जाएतो भी घमौरियों में बहुत आराम मिलता है।*
लहसुन से घमौरियों का इलाज: लहसुन की कलियों को पीसकर रस उसका रस निकाल लें। यह रस 3 दिन तक शरीर पर मलने से शरीर पर गर्मी से निकलने वाली घमौरियां मिट जाती हैं।
*स्वदेशी पेय से घमौरियों का इलाज। ऐसे में जौं या चने का सत्तू बहुत उपयोगी है। आर्टिफीसियल ड्रिंक्स की बजाये स्वदेशी ड्रिंक्स जैसे सत्तू, आम का पन्ना, निम्बू पानी, मट्ठा, छाछ आदि का सेवन करें।*

क्यों है जरूरी-टर्म इंश्योरेंस

टर्म इंश्योरेंस आखिर क्यों है जरूरी, 
 
इन दिनों टेलिवजन पर एक एड तेजी से पॉपुलर हो रहा है। इस एड में बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार यमराज बनकर टर्म इंश्योरेंस के फायदे गिनाते नजर आते हैं। आमतौर पर लोग सामान्य इंश्योरेंस को ही टर्म इंश्योरेंस मानने की गलती कर बैठते हैं, लेकिन इन दोनों में बुनियादी अंतर होता है। हम अपनी इस खबर के माध्यम से आपको विस्तार से जानकारी दे रहे हैं कि आखिर टर्म इंश्योरेंस होता क्या है और इसके फायदे क्या हैं।
सबसे पहले जानिए कि आखिर लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के कितने प्रकार होते हैं..
क्या होती है टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी?
जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि टर्म प्लान इंश्योरेंस पॉलिसी का सबसे विशुद्ध स्वरूप होता है। जीवन बीमा लेने का सबसे सरल तरीका टर्म इंश्योरेंस ही होता है। इसमें बीमा लेने वाला व्यक्ति एक निश्चित समय तक प्रीमियम का भुगतान करता रहता है। यदि निश्चित अवधि के दौरान बीमाधारक की मृत्यु हो जाती है तो सम एश्योर्ड या एक मुश्त राशि उसके परिवार या नॉमिनी को दे दी जाती है। टर्म प्लान में हर साल मामूली प्रीमियम देने के बाद आपको कुछ विशेष सालों के लिए कवर उपलब्ध करवाया जाता है। आमतौर पर टर्म पॉलिसी 10 साल,15 साल, 20 साल, 25 साल और 30 सालों के लिए ली जाती हैं।
उदाहरण से समझिए:
अगर आपने 15 साल की समय अवधि के लिए 55 लाख रुपए का टर्म इंश्योरेंस खरीदा है। इसके लिए आपको हर साल 4 हजार रुपए का प्रीमियम भुगतान बीमा कंपनी को करना है। वहीं अगर इस पॉलिसी की मैच्योरिटी के दौरान बीमाधारक मृत्यु हो जाती है तो आपके परिवार को यह 55 लाख रुपए की राशि दे दी जाएगी। लेकिन अगर 15 वर्षों तक आप स्वस्थ रहते हैं तो भुगतान किए गए प्रीमियम के बदले में आपको कुछ भी नहीं मिलेगा।
टर्म इंश्योरेंस प्लान के दो बड़े फायदे:
क्यों जरूरी होता है टर्म इंश्योरेंस?
टर्म इंश्योरेंस परिवार के मुखिया की मृत्यु हो जाने के बाद भी परिवार को वित्तीय संकट से सुरक्षित रखता है। घर का मुखिया परिवार में आय का मुख्य स्रोत होता है। उस व्यक्ति की मृत्यु या गंभीर बीमारी से उसके अक्षम हो जाने के बाद अक्सर परिवार में अन्य सदस्यों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अगर पर्याप्त राशि का टर्म इंश्योरेंस लिया गया है परिवार की आर्थिक सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता है। साथ ही उन्हें नियमित आय का सहारा रहता है। टर्म इंश्योरेंस के अंतर्गत गंभीर बीमारी, अकस्मात मृत्यु, स्थायी बीमारी जैसी चीजें आती हैं। कई कंपनियां परिवार के सदस्यों को टर्म इंश्योरेंस में नियमित आय का भी विकल्प देती हैं।
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