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बुधवार, 29 मई 2019

२८ मई वीर सावरकर जन्म तिथि

२८ मई वीर सावरकर जन्म तिथि

ये 25 बातें पढ़कर आपका सीना गर्व से चौड़ा हो उठेगा,
इसको पढ़े बिना आजादी का ज्ञान अधूरा है !

आइए जानते है एक ऐसे महान क्रांतिकारी के बारें में जिनका नाम इतिहास के पन्नों से मिटा दिया गया। जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के द्वारा इतनी यातनाएं झेली की उसके बारें में कल्पना करके ही इस देश के करोड़ो भारत माँ के कायर पुत्रों में सिहरन पैदा हो जायेगी।

जिनका नाम लेने मात्र से आज भी हमारे देश के राजनेता भयभीत होते हैं क्योंकि उन्होंर माँ भारती की निस्वार्थ सेवा की थी। वो थे हमारे परम पूज्य वीर सावरकर।

1. वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी देशभक्त थे जिन्होंने
1901 में ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया की मृत्यु पर नासिक में शोक सभा का विरोध किया और कहा कि वो हमारे शत्रु देश की रानी थी, हम शोक क्यूँ करें?

क्या किसी भारतीय महापुरुष के निधन पर ब्रिटेन में शोक सभा हुई है.?

2. वीर सावरकर पहले देशभक्त थे जिन्होंने एडवर्ड सप्तम के राज्याभिषेक समारोह का उत्सव मनाने वालों को त्र्यम्बकेश्वर में बड़े बड़े पोस्टर लगाकर कहा था कि गुलामी का उत्सव मत मनाओ !

3. विदेशी वस्त्रों की पहली होली पूना में 7 अक्तूबर 1905 को वीर सावरकर ने जलाई थी…।

4. वीर सावरकर पहले ऐसे क्रांतिकारी थे जिन्होंने विदेशी वस्त्रों का दहन किया, तब बाल गंगाधर तिलक ने अपने पत्र केसरी में उनको शिवाजी के समान बताकर उनकी प्रशंसा की थी जबकि इस घटना की दक्षिण अफ्रीका के अपने पत्र ‘इन्डियन ओपीनियन’ में गाँधी ने निंदा की थी…।

5. सावरकर द्वारा विदेशी वस्त्र दहन की इस प्रथम घटना के 16 वर्ष बाद गाँधी उनके मार्ग पर चले और 11 जुलाई 1921 को मुंबई के परेल में विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार किया…।

6. सावरकर पहले भारतीय थे जिनको 1905 में विदेशी वस्त्र दहन के कारण पुणे के फर्म्युसन कॉलेज से निकाल दिया गया और दस रूपये जुरमाना किया… इसके विरोध में हड़ताल हुई… स्वयं तिलक जी ने ‘केसरी’ पत्र में सावरकर के पक्ष में सम्पादकीय लिखा…।

7. वीर सावरकर ऐसे पहले बैरिस्टर थे जिन्होंने 1909 में ब्रिटेन में ग्रेज-इन परीक्षा पास करने के बाद ब्रिटेन के राजा के प्रति वफादार होने की शपथ नही ली… इस कारण उन्हें बैरिस्टर होने की उपाधि का पत्र कभी नही दिया गया…।

8. वीर सावरकर पहले ऐसे लेखक थे जिन्होंने अंग्रेजों द्वारा ग़दर कहे जाने वाले संघर्ष को ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ नामक ग्रन्थ लिखकर सिद्ध कर दिया…।

9. सावरकर पहले ऐसे क्रांतिकारी लेखक थे जिनके लिखे ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ पुस्तक पर ब्रिटिश संसद ने प्रकाशित होने से पहले प्रतिबन्ध लगाया था…।

10. ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ विदेशों में छापा गया और भारत में भगत सिंह ने इसे छपवाया था जिसकी एक एक प्रति तीन-तीन सौ रूपये में बिकी थी… भारतीय क्रांतिकारियों के लिए यह पवित्र गीता थी… पुलिस छापों में देशभक्तों के घरों में यही पुस्तक मिलती थी…।

11. वीर सावरकर पहले क्रान्तिकारी थे जो समुद्री जहाज में बंदी बनाकर ब्रिटेन से भारत लाते समय आठ जुलाई 1910 को समुद्र में कूद पड़े थे और तैरकर फ्रांस पहुँच गए थे…।

12. सावरकर पहले क्रान्तिकारी थे जिनका मुकद्दमा
अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय हेग में चला, मगर ब्रिटेन और फ्रांस की मिलीभगत के कारण उनको न्याय नही मिला और बंदी बनाकर भारत लाया गया…।

13. वीर सावरकर विश्व के पहले क्रांतिकारी और भारत के पहले राष्ट्रभक्त थे जिन्हें अंग्रेजी सरकार ने दो आजन्म कारावास की सजा सुनाई थी…।

14. सावरकर पहले ऐसे देशभक्त थे जो दो जन्म कारावास की सजा सुनते ही हंसकर बोले-“चलो, ईसाई सत्ता ने हिन्दू धर्म के पुनर्जन्म सिद्धांत को मान लिया.”…..।

15. वीर सावरकर पहले राजनैतिक बंदी थे जिन्होंने काला
पानी की सजा के समय 10 साल से भी अधिक समय तक आजादी के लिए कोल्हू चलाकर 30 पोंड तेल प्रतिदिन निकाला…।

16. वीर सावरकर काला पानी में पहले ऐसे कैदी थे जिन्होंने काल कोठरी की दीवारों पर कंकर कोयले से कवितायें लिखी और 6000 पंक्तियाँ याद रखी..।

17. वीर सावरकर पहले देशभक्त लेखक थे, जिनकी लिखी हुई पुस्तकों पर आजादी के बाद कई वर्षों तक प्रतिबन्ध लगा रहा…।

18. वीर सावरकर पहले विद्वान लेखक थे जिन्होंने हिन्दू को परिभाषित करते हुए लिखा कि

‘आसिन्धु सिन्धुपर्यन्ता यस्य भारत भूमिका,
पितृभू: पुण्यभूश्चैव स वै हिन्दुरितीस्मृतः.’

अर्थात समुद्र से हिमालय तक भारत भूमि जिसकी पितृभू है, जिसके पूर्वज यहीं पैदा हुए हैं व यही पुण्य भू है, जिसके तीर्थ भारत भूमि में ही हैं, वही हिन्दू है..।

19. वीर सावरकर प्रथम राष्ट्रभक्त थे जिन्हें अंग्रेजी सत्ता ने 30 वर्षों तक जेलों में रखा तथा आजादी के बाद 1948 में नेहरु सरकार ने गाँधी हत्या की आड़ में लाल किले में बंद रखा पर न्यायालय द्वारा आरोप झूठे पाए जाने के बाद ससम्मान रिहा कर दिया… देशी-विदेशी दोनों सरकारों को उनके राष्ट्रवादी विचारों से डर लगता था…।

20. वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी थे जब उनका 26 फरवरी 1966 को उनका स्वर्गारोहण हुआ तब भारतीय संसद में कुछ सांसदों ने शोक प्रस्ताव रखा तो यह कहकर रोक दिया गया कि वे संसद सदस्य नही थे जबकि चर्चिल की मौत पर शोक मनाया गया था…।

21. वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी राष्ट्रभक्त स्वातंत्र्य वीर थे जिनके मरणोपरांत 26 फरवरी 2003 को उसी संसद में मूर्ति लगी जिसमे कभी उनके निधन पर शोक प्रस्ताव भी रोका गया था…।

22. वीर सावरकर ऐसे पहले राष्ट्रवादी विचारक थे जिनके चित्र को संसद भवन में लगाने से रोकने के लिए कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा लेकिन राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम ने सुझाव पत्र नकार दिया और वीर सावरकर के चित्र अनावरण राष्ट्रपति ने अपने कर-कमलों से किया…।

23. वीर सावरकर पहले ऐसे राष्ट्रभक्त हुए जिनके शिलालेख को अंडमान द्वीप की सेल्युलर जेल के कीर्ति स्तम्भ से UPA सरकार के मंत्री मणिशंकर अय्यर ने हटवा दिया था और उसकी जगह गांधी का शिलालेख लगवा दिया..।

24. वीर सावरकर ने दस साल आजादी के लिए काला पानी में कोल्हू चलाया था जबकि गाँधी ने काला पानी की उस जेल में कभी दस मिनट चरखा नही चलाया..?

25. वीर सावरकर माँ भारती के पहले सपूत थे जिन्हें जीते जी और मरने के बाद भी आगे बढ़ने से रोका गया… पर आश्चर्य की बात यह है कि इन सभी विरोधियों के घोर अँधेरे को चीरकर आज वीर सावरकर सभी मे लोकप्रिय और युवाओं के आदर्श बन रहे है।

वन्दे मातरम्।

केरल की हालत देखते हुए यही लगता है की वहां का साक्षरता प्रतिशत 100 फीसदी से बढ़कर अब 786 हो गया है ।

मोहम्मद इस्माइल मुस्लिम लीग के मद्रास प्रांत के बड़े नेता थे। 1946 के चुनाव में प्रांत अध्यक्ष रहते उन्होंन जिन्ना को मद्रास की सभी मुस्लिम रिजर्व 28 सीटें जिताकर दी थी ताकि जिन्ना अलग इस्लामिक देश पाकिस्तान बना सके। 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान बन गया लेकिन आपने आज तक एक भी मद्रासी मूल का पाकिस्तानी नहीं देखा होगा।

क्योंकि जिन मोहम्मद इस्माइल ने 1946 में जिन्ना को मद्रास में विजय दिलाई वो ना तो खुद पाकिस्तान गए ना उनके कहने पर जिन्ना को वोट देने वाला उनका कोई समर्थक।

तो अब सवाल ये है कि पाकिस्तान बनवाने के बाद मोहम्मद इस्माइल ने भारत में रह कर क्या किया। मोहम्मद इस्माइल ने 1948 में एक नई पार्टी बनाई और उसका नाम रखा ऑल इंडिया मुस्लिम लीग और भारत को ही पाकिस्तान बनाने के काम में जुट गए।

और जिस कांग्रेस के खिलाफ 1940 के दशक में वो जिन्ना के नेतृत्व में लड़ रहे थे आज उसी कांग्रेस के साथ मिलकर केरल में चुनाव लड़ते हैं। साल 1996 में जिन्ना के साथ मिलकर पाकिस्तान बनवाने वाले मोहम्मद इस्माइल के सम्मान में भारत सरकार डाक टिकट जारी किया। देश को विभाजित करने वालों का ऐसा सम्मान विश्व के किसी और देश ने नहीं किया होगा।

कल जो पार्टी जिन्ना को जीताकर पाकिस्तान बनाना चाहती थी आज वो ही पार्टी राहुल गांधी को वायनाड से जीताकर पीएम बनाना चाहती है।

और हमें क्या बताया गया

केरल सबसे पढ़ा लिखा राज्य है इसलिए लोग इतने समझदार हैं कि आज तक सांप्रदायिक पार्टी बीजेपी एक भी सीट नहीं जीत पाई।

ये किसी ने नहीं बताया कि पढ़-लिख कर लिबरल बनने का शौक एक ही कम्युनिटी को है दूसरे तो आज भी लीग बनाकर बैठे है किसी जिन्ना के इंतजार में...

केरल की हालत देखते हुए यही लगता है की वहां का साक्षरता प्रतिशत 100 फीसदी से बढ़कर अब 786 हो गया है ।

डाक्टर मोहम्मद सियाब्दीन ने उन हज़ारों बच्चों की हत्या कर दी,जो पैदा होने वाले थे... परिवारों की पीढ़ियां की पीढ़ियां खत्म कर दीं इस डाक्टर ने !

#अकल्पनीय...

जहां रहेगा... दुनिया को खत्म करेगा..

श्रीलंका में एक स्थान है करुनेगला ! यहीं पर एक काफी पुराना और प्रतिष्ठित अस्पताल है .. करुनेगला टेक्निकल हॉस्पिटल ! पूरे शहर में एक ही अस्पताल है तो काफी भीड़ रहती है... चूंकि सिंहली और तमिल हिन्दू बहुल शहर है तो आम मरीज़ भी इन्ही समुदायों के होते हैं... कुछ परिवार मुस्लिम भी हैं... चूंकि अस्पताल प्रतिष्ठित है, स्पेशलिस्ट डाक्टर भी खूब हैं तो दूर-दूर से मरीज़ आते हैं !... इसी अस्पताल के स्त्री रोग विभाग के अध्यक्ष अस्वाभाविक रूप से डाक्टर मोहम्मद सीगु सियाब्दीन हैं जो गाइनकॉलजिस्ट हैं... 5 वक्त के नमाज़ी मुसलमान हैं...

यह नोटिस किया जा रहा था कि डॉक्टर मोहम्मद सियाब्दीन मुस्लिम स्त्रियों का नसबंदी ऑपरेशन नहीं करते थे औऱ उन्हें नसबंदी के नुकसान गिनाते थे ! अपनी चेष्ठा में वह सफल भी रहते थे... अस्वाभाविक रूप से डाक्टर साहब के पास कोलंबों और करुनेगला जैसी जगहों पर 17 प्रॉपर्टी थीं,जिसकी कीमत रु 400 करोड़ हैं... खबर यह है कि यह धन उसे सऊदी अरब से प्राप्त होता था... श्रीलंका को मोमिन बहुल बनाने के प्रयासों हेतु... प्रयास क्या थे ?👇

उन्ही के अस्पताल में एक सिंहली गर्भवती नर्स को प्रसव का दर्द हुआ तो डॉक्टर मोहम्मद सियाब्दीन के पास पहुची... डाक्टर ने ऑपरेशन की सलाह दी... नर्स को तुरन्त एनस्थीसिया दिया गया ,ऑपरेशन किया गया... जब होश आया तो पता चला कि भ्रूण जीवित नहीं पाया गया... कुछ दिन बाद नर्स रिलीव होकर घर आयी तो उसे अपने शरीर मे कुछ अजीब समस्याओं से दो-चार होना पड़ा ! अल्ट्रासाउंड हुआ तो पता चला कि नर्स का यूटेरस (बच्चेदानी) निकाली जा चुकी है... डाक्टर मोहम्मद सियाब्दीन से पुलिस ने पूंछतांछ की तो पता चला कि बच्चेदानी..डाक्टर सियाब्दीन ने बगैर किसी को संज्ञान में लिए चुपके से निकाल दी है ... आप खुद समझ सकते हैं कि गर्भस्थ भ्रूण का क्या किया होगा ...

अब चीजें खुल कर आ रही हैं... डाक्टर मोहम्मद सीगु सियाब्दीन साफी... आतंकी संगठन 'तौहीद जमात' से जुड़ा है... यह इस्लामिक संगठन....ISIS से सीधे जुड़ा है और श्रीलंका में अभी चर्चो और होटल में हुए बम विस्फोटों में 400 लोगों की हत्या के लिए ज़िम्मेदार है ! पिछले 20 वर्षों में हज़ारों सिंहली और हिन्दू औरतों को नसबंदी और यूटेरस निकाल कर बांझ बनाना...आज तक का सबसे घिनौना अपराध इसलिए भी है क्योंकि डाक्टर मोहम्मद सियाब्दीन ने उन हज़ारों बच्चों की हत्या कर दी,जो पैदा होने वाले थे... परिवारों की पीढ़ियां की पीढ़ियां खत्म कर दीं इस डाक्टर ने ! जिसका प्रभाव अनंतकाल तक चलता रहेगा ! यह जिहाद अमेरिका में WTC पर हमला कर 3000 लोगों को मारने से भी हज़ार गुना बड़ा है ! फ्रांस में एक जेहादी द्वारा ट्रक से कुचल कर 90 लोगों को मार देने जैसा अपराध... तो इसके सामने कुछ भी नहीं ...

इस अपराध के आगे मुझे सारे अपराध बौने लगे ... क्योंकि मरीज़...डाक्टर को भगवान मानता है... वही डाक्टर उसकी संतानों और आगे आने वाली पीढ़ियों की प्रत्याशा खत्म कर दे... सिर्फ इसलिए कि काफिर को जीने का हक नहीं... इसलिए भ्रूण बनने की संभावना को नसबंदी और बच्चेदानी निकाल कर समाप्त कर दिया जाये... जानकारियां और आ रही हैं... मगर इस विषय पर लिखने में कलम अपना हौसला तोड़ रही है....

संघ कुछ नही करता, सिर्फ शाखा लगाता है और स्वयंसेवक के साथ राष्ट्र निर्माण करता है

*संघ और सियासत*

कल दोपहर को एक भाई साहब मिले।
मुझे रोकते हुए बोलते हैं कि *आजकल संघ वालों की जमकर चांदी है। हर जगह CM संघ का, PM संघ का, मंत्री संघ के है।*

खैर, मेने मुस्कुराते हुए सुनकर भी उनकी बात को टाल दिया। लेकिन सोचने वाली बात है। हर्ष हमे भी होता है जब एक स्वयंसेवक देश की कोई जिम्मेदारी का निर्वहन करता है। उसका दायित्व सम्हालता है।

लेकिन हम सामान्य लोगों का एक सामान्य स्वभाव है। कि *हम किसी भी व्यक्ति की सफलता देखते हैं। और उसके संघर्षों को अनदेखा कर देते हैं।*

आज सबको मोदी व योगी का युवाओं में क्रेज दिखता है। लेकिन उनकी तपस्या, उनका त्याग, उनका समर्पण भी देखना चाहिए।

मनोहर पर्रिकर, देवेंद्र फड़नवीस, रघुवरदास, त्रिवेंद्र सिंह रावत, मनोहर खट्टर की सादगी भी देखनी चाहिए। किस तरह पर्रिकर देश के सबसे ज्यादा शो ऑफ करने वाले VVIP लोगों के पसंदीदा राज्य के मुखिया होकर भी सादगी और गरिमा पूर्ण ढंग से रहते हैं।

दूसरी और आज हम देखते हैं कुछ छुट भैया नेताओं को अगर वो किसी शहर के पार्षद भी बन जाएं तो 4 पहिया वाहन के बिना नहीं चलते हैं।

यह अंतर है, इन नामों और हम सामान्य लोगों में,

आप को मोदी की सफलता दिखती है। लेकिन दूसरा पहलू भी तो देखिये। आज उनके समकक्ष जो विरोधी राजनेता हैं, युवराज, और दिल्ली के CM जितनी इन दोनों की आयु है, उससे ज्यादा समय से मोदी इस देश, समाज के लिए काम कर रहे हैं।

जब हमारे बच्चे 12th के बाद किस कॉलेज में प्रवेश लें इस कशमकश में फंसे होते हैं, उस आयु में इन लोगों ने देश और समाज के लिए अपना घर-परिवार छोड़ने का निर्णय ले लिया था।

हम इन जैसे बनना चाहते हैं। लेकिन क्या उनके रास्ते पर चलना चाहते हैं ?

मुझे याद है,
आज से 4-5 साल पहले अगर आप कुर्ता पहन लें तो आपके दोस्त मजाक उड़ाते थे। क्योकि इसे बूढ़ों का पहनावा कहा जाता था। लेकिन आज युवा इसे गर्व से पहनते हैं।

कल तक आप गले में माला पहनकर स्कूल, कालेज नही जा पाते थे। क्योकि आपको बैकवर्ड सोच का कह दिया जाता था, लेकिन आज जब देश के मुखिया *रुद्राक्ष की माला* गले में धारण करते है, तो उनको देखकर लाखों युवा माला पहनते हैं।

मुझे याद है,
अभी कुछ समय पूर्व तक आप अगर युवा हे तो गले में गमछा डालने में शरमाते थे। लेकिन जब देश के प्रधान गले में भगवा गमछा डालते है, तो आज उनका अनुसरण करते हुए करोड़ों युवा भगवा गमछा गले में डालते हैं।

आज आप नजदीकी बाजार चले जाइए, इस वर्ष भगवा गमछों की भरमार है और आपको एक विशेष बात बताता चलु कि *जहाँ सामान्य लोगों की सोचने  समझने की सीमा समाप्त होती है, वहां से एक स्वयंसेवक सोचना प्रारम्भ करता है।*

आज आप जो सादा जीवन जीने वाले CM देख रहे हैं न, वह भविष्य की तैयारी है।
आप दुनिया में संचार क्रांति देख चुके हैं, आप दुनिया में सत्ता परिवर्तन की क्रांति देख चुके हैं, आप योग क्रांति देख चुके हैं

लेकिन अब *चरित्र क्रांति* आने वाली है और संसार के सभी विशेषज्ञ इसे स्वीकार रहे हैं।

और मुझे और हर भारतीय को उस दिन गर्व होगा, जब योग क्रांति की ही तरह *चरित्र क्रांति* की अगुवाई भी भारत ही करेगा।

कल तक जिस राजनीति को हम कीचड़ समझते थे, आज वह साफ़ और निर्मल होने जा रही है। और यह हमारा सौभाग्य है कि हमारी पीढ़ी उन क्षणों की  साक्षी बनेगी।

बात रही संघ की,
तो संघ के विषय में में भी इतना ही देखा और समझा हूँ,
*संघ कुछ नही करता, सिर्फ शाखा लगाता है,,,*
*और स्वयंसेवक के साथ राष्ट्र निर्माण करता है।*

संघे शक्ति युगे युगे
*नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि….*

रविवार, 26 मई 2019

समाजवाद खत्म है। पूंजीवाद के नामो निशान नहीं। मोदी ने एक नई विधा राष्ट्रवाद को जन्म दिया है।

कन्हैया कुमार की पीठ थपथपाना। उसे नायक बनाना। उसके जैसे तमाम हार्दिक पटेलों को हीरो बनाना। पुलवामा और उरी के बाद हुई सर्जिकल स्ट्राइक्स पर सवाल करना। ऊपर से मोदी को ही इस पर राजनीति न करने की सलाह देना। अवार्ड वापसी करने की बेवजह मुहिम चलाना। मुस्लिम नागरिकों को डर लगता है कहकर डराना। असहिष्णुता शब्द को उछालना। अब यह देश रहने लायक नहीं रहा बोलना। नोट बंदी का मजाक बनाना और भ्रम फैलाना जैसे न जाने क्या हो गया? बुआ बबुआ की जोड़ी सिर्फ एक सिंबल है। इन 5 सालों में मोदी को हटाने के लिए अक्सर ऐसी जोड़ियां बनीं। मणि शंकर जैसों का पाकिस्तान जाकर अपने ही PM को हटाने की गुहार लगाना। सबसे अधिक दुख तब होता था जब मोदी के मंदिर जाने पर या उनकी आराधना करने पर मजाक बनाते थे। हिन्दू हिन्दू कहकर ऐसे मजाक बनाया गया है की जैसे देश अन्य धर्मों का है सिर्फ। व्यापारी को चोर बना डाला। गाय की चर्चा की इन्होंने? गाय जिसे हम सदियों से पूजते आ रहे हैं उसको काट कर दिखाया इन्होंने केरल में। गौ मूत्र जिसका उलेख आयुर्वेद में है का मजाक बनाया इन्होंने? गोबर जिस पर सैकड़ों अनुसंधान हो रहे का भी मजाक बनाया? यह नहीं जानते इनकी उपयोगिता? पढ़ लिख कर बड़ी बिंदी लगा/खादी का लंम्बा कुर्ता पहन, बाल बढ़ा PhD कर हम गोबर और गौ मूत्र की उपयोगिता पर सवाल उठा खुद को बहुत बड़ा विद्वान समझे पर हैं है वो महा धूर्त।

मोदी सिर्फ प्रचंड जीत के ही नायक नहीं। इन्होंने ऐसे तमाम लोगों के चेहरे से नकाब उतार डाला है। चुनाव तो कोई भी जीत जाता है। पर इस तरह विचारधारा से लोहा लेना सबके बस की बात नहीं। जब विरोधी सभी एक होकर हमला कर रहे थे ऐसे में यदि मोदी परास्त हो जाते तो क्या होता? यह नोंच नोंच कर खा जाते हमे।

मोदी की हर बात में फिकरा कसा इन लोगों ने। मोदी विदेश यात्रा पर फिजूल खर्च करता है। यह तो हवाई मोदी है। अम्बानी अडानी का गुलाम है। माल्या नीरव को भगाने वाला है। मुसलमानों का दुश्मन है, संविधान को खत्म कर देगा और न जाने क्या क्या। मोदी ने डट कर सबका सामना किया। क्या विपक्ष, क्या मीडिया, क्या अवार्ड वापसी गैंग और क्या टुकड़े टुकड़े गैंग।

आज मोदी फिर नायक हैं। सबके चेहरे बेनकाब हो चुके हैं। अब इन्हें फिर से कोई नया शब्द ढूंढना होगा।

इन कम्युनिस्ट विचार वालों की लुटिया डूब चुकी। समाजवाद खत्म है। पूंजीवाद के नामो निशान नहीं। मोदी ने एक नई विधा राष्ट्रवाद को जन्म दिया है। राष्ट्र रहेगा तभी सब रहेंगे।

मोदी को अगले 5 वर्षों के लिए शुभकामनाएं। और मेरे जैसे उन तमाम लोगों को धन्यवाद जिन्होंने गाहे बगाहे कुंठित लोगों को हर मोड़ पर जवाब दिया जिससे उनके द्वारा महामारी फैलाई न जा सकी। आज उन सब बेनकाबों को भी समझ आ गया की बात में सच्चाई न हो तो वह जीत नहीं सकती।

🇮🇳 जय हिंद 🇮🇳

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21 बच्चे हमेशा के लिए सो गए फिर भी हम नहीं जागेंगे, हैं ना...


एक ज़रूरी पोस्ट....

सूरत में हुए हादसे के बहाने जानिए सीरत अपनी
21 बच्चे हमेशा के लिए सो गए फिर भी हम नहीं जागेंगे, हैं ना...

"कुछ विषय ऐसे होते हैं जिनपर लिखना खुद की आत्मा पर कुफ्र तोड़ने जैसा है, सूरत की बिल्डिंग में आग...21 बच्चों की मौत...आग और घुटन से घबराए बच्चों को इससे भयावह वीडियो आज तक नहीं देखा....इससे ज्यादा छलनी मन और आत्मा आज तक नहीं हुई....फिर भी लिखूंगी...क्योंकि हम सब गलत हैं, सारे कुएं में भांग पड़ी हुई है। हमने किताबी ज्ञान में ठूंस दिया बच्चों को नहीं सिखा पाए लाइफ स्किल। नहीं सिखा पाए डर पर काबू रख शांत मन से काम करना।"

मम्मा डर लग रहा है...एग्जाम के लिए सब याद किया था लेकिन एग्जाम हॉल में जाकर भूल गया...कुछ याद ही नहीं आ रहा था। पांव नम थे...हाथों में पसीना था...आप दो मिनिट उसे दुलारते हैं...बहलाने की नाकाम कोशिश करते हैं फिर पढ़ लो- पढ़ लो- पढ़ लो की रट लगाते हैं। सुबह 8 घंटे स्कूल में पढ़कर आए बच्चे को फिर 4-5 घंटे की कोचिंग भेज देते हैं। जिंदगी की दौड़ का घोड़ा बनाने के लिए, असलियत में हम उन्हें चूहादौड़ का एक चूहा बना रहे हैं। नहीं सिखा पा रहे जीने का तरीका- खुश रहने का मंत्र...साथ ही नहीं सिखा पा रहे लाइफ स्किल। विपरीत परिस्थितियों में धैर्य और शांतचित्त होकर जीवन जीने की कला नहीं सिखा पा रहे हैं ना और इसके लिए सिर्फ और सिर्फ हम पालक और हमारा समाज जिम्मेदार है। आयुष को पांच साल की उम्र में मैं न्यूजीलैंड ले गई थी...9 साल की उम्र में वापस इंडिया ले आई थी...वहां उसे नर्सरी क्लास से फस्टटेड से लेकर आग लगने पर कैसे खुद का बचाव करें...फीलिंग सेफ फीलिंग स्पेशल ( चाइल्ड एब्यूसमेंट), पानी में डूब रहे हो तो कैसे खुद को ज्यादा से ज्यादा देर तक जीवित और डूबने से बचाया जा सके.... जैसे विषय हर साल पढ़ाए जाते थे। फायरफाइटिंग से जुड़े कर्मचारी और अधिकारी हर माह स्कूल आते थे। बच्चों को सिखाया जाता था विपरीत परिस्थितियों में डर पर काबू रखते हुए कैसे एक्ट किया जाए। ह्यूमन चेन बनाकर कैसे एक-दूसरे की मदद की जाए.....हेल्पिंग हेंड से लेकर खुद पर काबू रखना ताकि मदद पहुंचने तक आप खुद को बचाए रखें....

हम नहीं सिखा पा रहे यह सब....नहीं दे पा रहे बच्चों को लाइफ स्किल का गिफ्ट...विपरीत परिस्थितियों से बचना....कल की ही घटना देखिए...हमारे बच्चे नहीं जानते थे कि भीषण आग लगने पर वे कैसे अपनी और अपने दोस्तों की जान बचाएं....नहीं सीखा हमारे बच्चों ने थ्री-G का रूल ( गेट डाउन, गेट क्राउल, गेट आऊट ) जो 3 साल की उम्र से न्यूजीलैंड में बच्चों को सिखाया जाता है, आग लगे तो सबसे पहले झुक जाएं...आग हमेशा ऊपर की ओर फैलती है। गेट क्राउल...घुटनों के बल चले...गेट आऊट...वो विंडों या दरवाजा दिमाग में खोजे जिससे बाहर जा सकते हैं, उसी तरफ आगे बढ़े, जैसा कुछ बच्चों ने किया, खिड़की देख कर कूद लगा दी... भले ही वे अभी हास्पिटल में हो  लेकिन जिंदा जलने से बच गए। लेकिन यहां भी वे नहीं समझ पा रहे थे कि वे जो जींस पहने हैं...वह दुनिया के सबसे मजबूत कपड़ों में गिनी जाती है...कुछ जींस को आपस में जोड़कर रस्सी बनाई जा सकती है। नहीं सिखा पाए हम उन्हें कि उनके हाथ में स्कूटर-बाइक की जो चाबी है उसके रिंग की मदद से वे दो जींस को एक रस्सी में बदल सकते हैं...काफी सारी नॉट्स हैं जिन्हें बांधकर पर्वतारोही हिमालय पार कर जाते हैं फिर चोटी से उतरते भी हैं...वही कुछ नाट्स तो हमें स्कूलों में घरों में अपने बच्चों को सिखानी चाहिए। सूरत हादसे में बच्चे घबराकर कूद रहे थे...शायद थोड़े शांत मन से कूदते तो इंज्युरी कम होती। एक-एक कर वे बारी-बारी जंप कर सकते थे। उससे नीचे की भीड़ को भी बच्चों को कैच करने में आसानी होती। मल्टीपल इंज्युरी कम होती, हमारे अपने बच्चों को। आज आपको मेरी बातों से लगेगा...ज्ञान बांट रही हूं...लेकिन कल के हादसे के वीडियो को बार-बार देखेंगे तो समझ में आएगा एक शांतचित्त व्यक्ति ने बच्चों को बचाने की कोशिश की। वो दो बच्चों को बचा पाया लेकिन घबराई हुई लड़की खुद को संयत ना रख पाई और .... अच्छे से याद है, पापाजी कहते थे मोना कभी आग में फंस जाओ तो सबसे पहले अपने ऊपर के कपड़े उतार कर फेंक देना, मत सोचना कोई क्या कहेगा क्योंकि ऊपर के कपड़ों में आग जल्दी पकड़ती है। जलने के बाद वह जिस्म से चिपक कर भीषण तकलीफ देते हैं...वैसे ही यदि पानी में डूब रही हो तो खुद को संयत करना...सांस रोकना...फिर कमर से नीचे के कपड़े उतार देना क्योंकि ये पानी के साथ मिलकर भारी हो जाते हैं, तुम्हें सिंक (डुबाना) करेंगे। जब जान पर बन आए तो लोग क्या कहेंगे कि चिंता मत करना...तुम क्या कर सकती हो सिर्फ यह सोचना।

जो बच्चे बच ना पाए, उनके माँ बाप का सोच कर दिल बैठा जा रहा है। मेरे एक सीनियर साथी ने बहुत पहले कहा था...बच्चा साइकिल लेकर स्कूल जाने लगा है, जब तक वह घर वापस नहीं लौट आता...मन घबराता है। उस समय मैं उनकी बात समझ नहीं पाई थी...जब आयुष हुए तब समझ आया आप दुनिया फतह करने का माद्दा रखते हो अपने बच्चे की खरोच भी आपको असहनीय तकलीफ देती है...इस लेख का मतलब सिर्फ इतना ही है कि हम सब याद करे हिंदी पाठ्यपुस्तक की एक कहानी...

जिसमें एक पंडित पोथियां लेकर नाव में चढ़ा था...वह नाविक को समझा रहा था 'अक्षर ज्ञान- ब्रह्म ज्ञान' ना होने के कारण वह भवसागर से तर नहीं सकता...उसके बाद जब बीच मझधार में उनकी नाव डूबने लगती है तो पंडित की पोथियां उन्हें बचा नहीं पाती। गरीब नाविक उन्हें डूबने से बचाता है, किनारे लगाता है। हम भी अपने बच्चों को सिर्फ पंडित बनाने में लगे हैं....उन्हें पंडित के साथ नाविक भी बनाइए जो अपनी नाव और खुद  का बचाव स्वयं कर सकें। सरकार से उम्मीद लगाना छोड़िए ... चार जांच बैठाकर, कुछ मुआवजे बांटकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। कुकुरमुत्ते की तरह उग आए कोचिंग संस्थान ना बदलेंगे। इस तरह के हादसे होते रहे हैं...आगे भी हो सकते हैं....बचाव एक ही है हमें अपने बच्चों को जो लाइफ स्किल सिखानी है। आज रात ही बैठिए अपने बच्चों के साथ...उनके कैरियर को गूगल करते हैं ना...लाइफ स्किल को गूगल कीजिए। उनके साथ खुद भी समझिए विपरीत परिस्थितियों में धैर्य के साथ क्या-क्या किया जाए याद रखिए जान है तो जहान है।

( गणपति सिराने ( गणपति विसर्जन)  समय की एक घटना मुझे याद है। हमारी ही कॉलोनी के एक भईया डूब रहे थे...दूसरे ने उन्हें बाल से खींचकर बचा लिया...वे जो दूसरे थे ना उन्हें लाइफ स्किल आती थी....उन्होंने अपना किस्सा बताते हुए कहा था...कि डूबते हुए इंसान को बचाने में बचानेवाला भी डूब जाता है...क्योंकि उसे तैरना आता है बचाना नहीं...मुझे मेरे स्विमिंग टीचर ने सिखाया है कि कोई डूब राह हो तो उसे खुद पर लदने ना दो...उसके बाल पकड़ों और घसीटकर बाहर लाने की कोशिश करो....यही तो छोटी-छोटी लाइफ स्किल हैं।
एक निवेदन
कैलाश चंद्र लड्ढा
सांवरिया
www.sanwariya.org

https://sanwariyaa.blogspot.com

शनिवार, 25 मई 2019

तिल का तेल पृथ्वी का अमृत -तिल के तेल में इतनी ताकत होती है कि यह पत्थर को भी चीर देता है.


तिल का तेल पृथ्वी का अमृत

तिल के तेल में इतनी ताकत होती है कि यह पत्थर को भी चीर देता है. प्रयोग करके देखें.

आप पर्वत का पत्थर लिजिए और उसमे कटोरी के जैसा खडडा बना लिजिए, उसमे पानी, दुध, धी या तेजाब संसार में कोई सा भी कैमिकल, ऐसिड डाल दीजिए, पत्थर में वैसा की वैसा ही रहेगा, कही नहीं जायेगा...

लेकिन अगर आप ने उस कटोरी नुमा पत्थर में तिल का तेल डाल दीजिए, उस खड्डे में भर दिजिये 2 दिन बाद आप देखेंगे कि, तिल का तेल पत्थर के अन्दर भी प्रवेश करके पत्थर के नीचे आ जायेगा. यह होती है तेल की ताकत  इस तेल की मालिश करने से हड्डियों को पार करता हुआ, हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है.

यदि इस पृथ्वी पर उपलब्ध सर्वोत्तम खाद्य पदार्थों की बात की जाए तो तिल के तेल का नाम अवश्य आएगा और यही सर्वोत्तम पदार्थ बाजार में उपलब्ध नहीं है. और ना ही आने वाली पीढ़ियों को इसके गुण पता हैं.

 क्योंकि नई पीढ़ी तो टी वी के इश्तिहार देख कर ही सारा सामान ख़रीदती है.
और तिल के तेल का प्रचार कंपनियाँ इसलिए नहीं करती क्योंकि इसके गुण जान लेने के बाद आप उन द्वारा बेचा जाने वाला तरल चिकना पदार्थ जिसे वह तेल कहते हैं लेना बंद कर देंगे.

तिल के तेल के अन्दर फास्फोरस होता है जो कि हड्डियों की मजबूती का अहम भूमिका अदा करता है.और तिल का तेल ऐसी वस्तु है जो अगर कोई भी भारतीय चाहे तो थोड़ी सी मेहनत के बाद आसानी से प्राप्त कर सकता है. तब उसे किसी भी कंपनी का तेल खरीदने की आवश्यकता ही नही होगी.

तिल खरीद लीजिए और किसी भी तेल निकालने वाले से उनका तेल निकलवा लीजिए. लेकिन सावधान तिल का तेल सिर्फ कच्ची घाणी (लकडी की बनी हुई) का ही प्रयोग करना चाहिए.

तैल शब्द की व्युत्पत्ति तिल शब्द से ही हुई है। जो तिल से निकलता वह है तैल। अर्थात तेल का असली अर्थ ही है "तिल का तेल".

तिल के तेल का सबसे बड़ा गुण यह है की यह शरीर के लिए आयुषधि का काम करता है.. चाहे आपको कोई भी रोग हो यह उससे लड़ने की क्षमता शरीर में विकसित करना आरंभ कर देता है. यह गुण इस पृथ्वी के अन्य किसी खाद्य पदार्थ में नहीं पाया जाता.

सौ ग्राम सफेद तिल 1000 मिलीग्राम कैल्शियम प्राप्त होता हैं। बादाम की अपेक्षा तिल में छः गुना से भी अधिक कैल्शियम है।
काले और लाल तिल में लौह तत्वों की भरपूर मात्रा होती है जो रक्तअल्पता के इलाज़ में कारगर साबित होती है।

तिल में उपस्थित लेसिथिन नामक रसायन कोलेस्ट्रोल के बहाव को रक्त नलिकाओं में बनाए रखने में मददगार होता है।
तिल के तेल में प्राकृतिक रूप में उपस्थित सिस्मोल एक ऐसा एंटी-ऑक्सीडेंट है जो इसे ऊँचे तापमान पर भी बहुत जल्दी खराब नहीं होने देता। आयुर्वेद चरक संहित में इसे पकाने के लिए सबसे अच्छा तेल माना गया है।

तिल में विटामिन सी छोड़कर वे सभी आवश्यक पौष्टिक पदार्थ होते हैं जो अच्छे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं। तिल विटामिन बी और आवश्यक फैटी एसिड्स से भरपूर है।

इसमें मीथोनाइन और ट्रायप्टोफन नामक दो बहुत महत्त्वपूर्ण एमिनो एसिड्स होते हैं जो चना, मूँगफली, राजमा, चौला और सोयाबीन जैसे अधिकांश शाकाहारी खाद्य पदार्थों में नहीं होते।

ट्रायोप्टोफन को शांति प्रदान करने वाला तत्व भी कहा जाता है जो गहरी नींद लाने में सक्षम है। यही त्वचा और बालों को भी स्वस्थ रखता है। मीथोनाइन लीवर को दुरुस्त रखता है और कॉलेस्ट्रोल को भी नियंत्रित रखता है।

तिलबीज स्वास्थ्यवर्द्धक वसा का बड़ा स्त्रोत है जो चयापचय को बढ़ाता है।
यह कब्ज भी नहीं होने देता।
तिलबीजों में उपस्थित पौष्टिक तत्व,जैसे-कैल्शियम और आयरन त्वचा को कांतिमय बनाए रखते हैं।

तिल में न्यूनतम सैचुरेटेड फैट होते हैं इसलिए इससे बने खाद्य पदार्थ उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद कर सकता है।
सीधा अर्थ यह है की यदि आप नियमित रूप से स्वयं द्वारा निकलवाए हुए शुद्ध तिल के तेल का सेवन करते हैं तो आप के बीमार होने की संभावना ही ना के बराबर रह जाएगी.

 यह फेफड़ों का कैंसर, पेट के कैंसर, ल्यूकेमिया, प्रोस्टेट कैंसर, स्तन कैंसर और अग्नाशय के कैंसर के प्रभाव को कम करने में बहुत मदद करता है।
तनाव को कम करता है-

इसमें नियासिन (niacin) नाम का विटामिन होता है जो तनाव और अवसाद को कम करने में मदद करता है।
हृदय के मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में मदद करता है-

तिल में ज़रूरी मिनरल जैसे कैल्सियम, आयरन, मैग्नेशियम, जिन्क, और सेलेनियम होता है जो हृदय के मांसपेशियों को सुचारू रूप से काम करने में मदद करता है और हृदय को नियमित अंतराल में धड़कने में मदद करता है।

 जब शरीर बीमार ही नही होगा तो उपचार की भी आवश्यकता नही होगी. यही तो आयुर्वेद है.. आयुर्वेद का मूल सीधांत यही है की उचित आहार विहार से ही शरीर को स्वस्थ रखिए ताकि शरीर को आयुषधि की आवश्यकता ही ना पड़े.

एक बात का ध्यान अवश्य रखिएगा की बाजार में कुछ लोग तिल के तेल के नाम पर अन्य कोई तेल बेच रहे हैं.. जिसकी पहचान करना मुश्किल होगा. ऐसे में अपने सामने निकाले हुए तेल का ही भरोसा करें. यह काम थोड़ा सा मुश्किल ज़रूर है किंतु पहली बार की मेहनत के प्रयास स्वरूप यह शुद्ध तेल आपकी पहुँच में हो जाएगा. जब चाहें जाएँ और तेल निकलवा कर ले आएँ.

तिल में मोनो-सैचुरेटेड फैटी एसिड (mono-unsaturated fatty acid) होता है जो शरीर से बैड कोलेस्ट्रोल को कम करके गुड कोलेस्ट्रोल यानि एच.डी.एल. (HDL) को बढ़ाने में मदद करता है। यह हृदय रोग, दिल का दौरा और धमनीकलाकाठिन्य (atherosclerosis) के संभावना को कम करता है।
कैंसर से सुरक्षा प्रदान करता है-

तिल में सेसमीन (sesamin) नाम का एन्टीऑक्सिडेंट (antioxidant) होता है जो कैंसर के कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ है और उसके जीवित रहने वाले रसायन के उत्पादन को भी रोकने में मदद करता है।

शिशु के हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है-
तिल में डायटरी प्रोटीन और एमिनो एसिड होता है जो बच्चों के हड्डियों के विकसित होने में और मजबूती प्रदान करने में मदद करता है।

उदाहरणस्वरूप 100ग्राम तिल में लगभग 18 ग्राम प्रोटीन होता है, जो बच्चों के विकास के लिए बहुत ज़रूरी होता है।
गर्भवती महिला और भ्रूण (foetus) को स्वस्थ रखने में मदद करता है-

तिल में फोलिक एसिड होता है जो गर्भवती महिला और भ्रूण के विकास और स्वस्थ रखने में मदद करता है।

शिशुओं के लिए तेल मालिश के रूप में काम करता है-

अध्ययन के अनुसार तिल के तेल से शिशुओं को मालिश करने पर उनकी मांसपेशियाँ सख्त होती है साथ ही उनका अच्छा विकास होता है।

आयुर्वेद के अनुसार इस तेल से मालिश करने पर शिशु आराम से सोते हैं।
अस्थि-सुषिरता (osteoporosis) से लड़ने में मदद करता है-

तिल में जिन्क और कैल्सियम होता है जो अस्थि-सुषिरता से संभावना को कम करने में मदद करता है।

दूध के तुलना में तिल में तीन गुना कैल्शियम रहता है। इसमें कैल्शियम, विटामिन बी और ई, आयरन और ज़िंक, प्रोटीन की भरपूर मात्रा रहती है और कोलेस्टरोल बिल्कुल नहीं रहता है।

तिल का तेल ऐसा तेल है, जो सालों तक खराब नहीं होता है, यहाँ तक कि गर्मी के दिनों में भी वैसा की वैसा ही रहता है.
तिल का तेल कोई साधारण तेल नहीं है। इसकी मालिश से शरीर काफी आराम मिलता है। यहां तक कि लकवा जैसे रोगों तक को ठीक करने की क्षमता रखता है।

इससे अगर महिलाएं अपने स्तन के नीचे से ऊपर की ओर मालिश करें, तो स्तन पुष्ट होते हैं। सर्दी के मौसम में इस तेल से शरीर की मालिश करें, तो ठंड का एहसास नहीं होता।
 इससे चेहरे की मालिश भी कर सकते हैं। चेहरे की सुंदरता एवं कोमलता बनाये रखेगा। यह सूखी त्वचा के लिए उपयोगी है।

तिल का तेल- तिल विटामिन ए व ई से भरपूर होता है। इस कारण इसका तेल भी इतना ही महत्व रखता है। इसे हल्का गरम कर त्वचा पर मालिश करने से निखार आता है। अगर बालों में लगाते हैं, तो बालों में निखार आता है, लंबे होते हैं।

जोड़ों का दर्द हो, तो तिल के तेल में थोड़ी सी सोंठ पावडर, एक चुटकी हींग पावडर डाल कर गर्म कर मालिश करें। तिल का तेल खाने में भी उतना ही पौष्टिक है विशेषकर पुरुषों के लिए।इससे मर्दानगी की ताकत मिलती है!

 हमारे धर्म में भी तिल के बिना कोई कार्य सिद्ध नहीं होता है, जन्म, मरण, परण, यज्ञ, जप, तप, पित्र, पूजन आदि में तिल और तिल का तेल के बिना संभव नहीं है अतः इस पृथ्वी के अमृत को अपनावे और जीवन निरोग बनाय  ।

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समाज में होते जबरदस्त बदलाव कि बानगी देखिए.... जिसको लेकर मुस्लिम समाज भी अचंभित और सदमे में है.

समाज में होते जबरदस्त बदलाव कि बानगी  देखिए.... जिसको लेकर मुस्लिम समाज भी अचंभित और सदमे में है......

1- भारत मे जितनी भी दरगाहें है वहां का 80%  खर्चा हिन्दुओं से चलता हैfacebook और WhatsApp की वजह से हिंदुओं मे  एकता औऱ जागरुकता आने लगी है  ?
जिसकी वजह से अजमेर दरगाह पर जाने वाले हिंदुओं की संख्या 30% तक कम हो गया है। इस बात  को लेकर वहां के खादिम लोग बहुत परेशान हैं........*सोर्सेज टॉप फाइव इंडिया लीडिंग ट्रेवल एजेंसीज* ।।

2. अब हिंदू भाई बहन लोग इतने जागरुक हो गए हैं कि कोई भी सामान सिर्फ हिंदू भाई की ही दुकान से खरीद रहे हैं, क्योंकि उन्हें यह एहसास हो गया है कि उनके द्वारा शांति दूतों के दुकान से की गई खरीदारी  कहीं ना कहीं उनके अपनों के पलायन का कारण बनेगी। इस बात को लेकर सभी बड़े मस्जिदों में मंथन का दौर चल रहा है।

3. अभी तक किसी भी उपद्रव होने पर शांत रहने वाले हिंदू भाई पलट कर मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं , इसको लेकर भी शांति दूतों की फटी पड़ी है।।

4. सभी इलाकों से मिली जानकारी के अनुसार इस बार ईद पर जबरदस्त तरीके से मुसलमानों के घरों का सेवइयों का बाँयकाट किया गया है । मस्जिदों में नमाज के बाद ज्यादा से ज्यादा हिंदुओं से दोस्ती करने को औऱ उनको अपने में घर बुलाकर खाना खिलाने का जोर दिया जा रहा है।।

5. मुस्लिम एक्टर्स और देश विरोधी बयान देने वाली हीरोइनों कि फिल्मों  के इनकम में भी जबरदस्त डाउन फाल आया है,

6. यह पॉइंट तो जबर्दस्त है और बिलकुल शत प्रतिशत सही है कि2014 तक मुस्लिम बनने की होड़  2019 तक हिन्दू बनने की होड़ में तब्दील हो गई
पांच सालों में कितना बदल गया मेरा भारत
मोदी है तो यह मुमकिन हुआ है कि कोई भी सेकुलर नेता जालीदार टोपी नही पहिना पूरे चुनाव में
सोशल मीडिया से जबरदस्त फायदा  हुआ है ।हिन्दू समाज को
मोबाइल नहीं यह महासमर का यंत्र सुत्र है
यह सब तेजी से फेलाना चाहिए कि
आप सबके मिलकर काम करने का नतीजा है कि पूरे चुनाव में हर पार्टी के नेता सिर्फ मंदिर की चौखट पर माथा रगड़ा है , दिग्विजय सिंह जैसा मादरजात धर्म विरोधी नेता भी हिन्दू धर्म के विरुद्ध हिम्मत नहीं जुटा पाया, इसी तरह आप की एकता बनीं रही तो बो दिन दूर नहीं रहेगा जब हर राजनैतिक पार्टी आप से पूंछ कर टिकट तय करेंगी।

ये सही लिखा किसी ने .....

जिस नरेंद्र मोदी ने
कांग्रेस-सीपीआई एक कर दी।
यूपी मे बसपा-सपाई एक कर दी।
पाकिस्तान की तबियत से धुलाई एक कर दी।
भिन्न-भिन्न टैक्स की भराई GST एक कर दी।
मुस्लिम और ईसाई की दुहाई एक कर दी।
अब्दुल की चार थी, लुगाई एक कर दी।

उस मोदी जी को Divider in Chief कह रहे हो ??
यह बदलाव अच्छा है , बदलते भारत की बदलती तस्वीर

काँग्रेस होती तो यह सब होने नहीं देती सामाजिक सद्भावना रूपी जहर के नाम पर

रामजी करें कि बस एक बात और हो जाये। आत्मरक्षा के लिए भी सब जल्दी से जल्दी आत्मनिर्भर हो जाएं।

हिन्दुओं एकता और बढ़ाओ, सन्डे वाले दिन एक निश्चित समय पर मन्दिर जाना शुरू कीजिये, रेजिडेंट्स वैलफेयर सोसायटी इसमें अहम रोल निभा सकती हैं।

आज से ही शुरू कीजिये.... Because tomorrow never comes...

सहमत हैं तो शेयर कीजिये

क्या आप शाकाहारी हैं ? तो ये सच आपको चौंका सकता है

क्या आप शाकाहारी हैं ? तो ये सच आपको चौंका सकता है...??

😣भारत में कुल 3600 बड़े कत्लखाने हैं जिनके पास पशुओं को काटने का लाईसेंस है ! जो सरकार ने दे रखा है !!

😢 इसके इलावा 35000 से अधिक छोटे मोटे कत्लखाने हैं जो गैर कानूनी ढंग से चल रहे हैं ! कोई कुछ पूछने वाला नहीं है जहाँ हर साल 4 करोड़ पशुओं का कत्ल किया जाता है !

👺जिसमें गाय ,भैंस , सूअर, बकरा ,बकरी , ऊंट,आदि शामिल हैं ! मुर्गीयाँ  कितनी काटी जाती है इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है !

😡 भारत के 20% लोग मांसाहारी है जो रोज मांस खाते हैं और सब तरह का मांस खाते है |

😖 मांस के इलावा दूसरी जो चीज कतल से प्राप्त की जाती है वो है तेल ! उसे Tellow कहते हैं

😞 जैसे गाय के मांस से जो तेल निकलता है उसे Beef Tellow और सूअर की मांस से जो तेल निकलता है उसे Pork Tellow कहते है |

😱 इस तेल का सबसे ज़्यादा उपयोग चेहरे में लगाने वाली क्रीम बनाने में होता है जैसे Fair & Lovely , Ponds , Emami इत्यादि |

💧ये तेल क्रीम बनाने वाली कंपनियों द्वारा खरीदा जाता है और जैसा कि आप जानते हैं मद्रास High Court में श्री राजीव दीक्षित ने विदेशी कंपनी Fair and Lovely के खिलाफ Case जीता था

😁जिसमे कंपनी ने खुद माना था कि हम इस Fair and Lovely में सूअर की चर्बी का तेल मिलाते हैं !

😐 तो कत्लखानों मे मांस और तेल के बाद जानवरों का खून निकाला जाता है ! कसाई गाय और दूसरे पशुओं को पहले उल्टा रस्सी से टांग देते हैं....

😗 फिर तेज धार वाले चाकू से उनकी गर्दन पर वार किया जाता है और एक दम खून बहने लगता है नीचे उन्होंने एक ड्रम रखा होता है जिसमें खून इकठा किया जाता है

👿 तो खून का सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है अँग्रेजी दवा (एलोपैथिक) बनाने में । पशुओं के शरीर से निकला हुआ खून से एक दवा बनाई जाती है उसका नाम है Dexorange !

😷 यह बहुत ही Popular दवा है और डाक्टर इसको खून की कमी के लिए महिलाओं को लिखते हैं खासकर जब वो गर्भावस्था मे होती है

😭 क्यूंकि तब महिलाओं में खून की कमी आ जाती है और डाक्टर उनको जानवरों के खून से बनी दवा लिखते हैं क्यूंकि उनको दवा कंपनियों से बहुत भारी कमीशन मिलता है !

😝 इसके इलावा इस रक्त का प्रयोग बहुत बड़े पैमाने पर Lipstick बनाने में होता है ! इसके बाद रक्त एक और प्रयोग चाय बनाने में बहुत सी कंपनिया करती है !

❓अब चाय तो पोधे से प्राप्त होती है ! और चाय के पोधे का Size उतना ही होता है जितना गेहूँ  के पोधे का होता है !

❓उसमें पत्तियाँ होती हैं और पत्तियों के नीचे का जो टूट कर गिरता है जिसे डंठल कहते हैं आखिरी हिस्सा ! लेकिन ये चाय नहीं है !

👉 तो फिर क्या करते हैं, इसको चाय जैसा बनाया जाता है ! अगर उस निचले हिस्से को सुखा कर पानी में डालें तो चाय जैसा रंग नहीं आता !

❓तो ये विदेशी कंपनियाँ Brookbond, Lipton,आदि क्या करती हैं जानवरों के खून को इसमें मिलकर सूखा कर डिब्बे मे बंद कर बेचती हैं !

👉 तकनीकी भाषा में इसे Tea Dust कहते हैं ! तो इसके इलवा कुछ कंपनियाँ  Nail Polish बनाने ने प्रयोग करती हैं !!

🐚 मांस, तेल ,खून के बाद कत्लखानों मे पशुओं की हड्डियाँ  निकलती हैं । इसका प्रयोग Tooth Paste बनाने वाली कंपनियाँ करती हैं

😳 Colgate, Close Up, Pepsodent, Cibaca, आदि आदि ! Shaving Cream बनाने वाली काफी कंपनियाँ  भी इसका प्रयोग करती हैं !

😭 और आजकल इन हड्डियों का प्रयोग जो होने लगा है टैल्कम Powder बनाने में !  क्यूंकि ये थोड़ा सस्ता पड़ता है,

🍁वैसे टैल्कम Powder पत्थर से बनता है ! और 60 से 70 रुपए किलो मिलता है और पशुओं की हड्डियों का Powder 25 से 30 रुपए किलो मिल जाता है !!

😞 इसके बाद गाय ऊपर की जो चमड़ी है उसका सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है Cricket  Ball बनाने में ! आज कल सफ़ेद रंग की आती है !

👉 जो गाय की चमड़ी से बनाई जाती है ! गाय के बछड़े की चमड़ी का प्रयोग ज्यादा होता है Ball बनाने में ! पर Foot Ball बड़ी होती है इसमें ज्यादा प्रयोग होता है गाय के चमड़े का !!

👞आजकल और एक उद्योग में इस चमड़े का बहुत उपयोग हो रहा है ! जूते चप्पल बनाने में ! अगर जूता चप्पल बहुत ही Soft है तो वो 100 % गाय के बछड़े के चमड़े का बना है !

👉 और अगर Hard है तो ऊंट और घोड़े के चमड़े का ! इसके इलावा चमड़े का उपयोग पर्स ,बैल्ट व सजावट के सामान में किया जाता है !!
इसके अलावा...

1⃣ गाय के शरीर के अंदर के कुछ भाग है ! उनका भी बहुत प्रयोग होता है ! जैसे गाय में बडी़ आंत , इसको पीस कर Gelatin बनाई जाती है !

👉जिसका बहुत ज्यादा उपयोग आइसक्रीम, चाकलेट, Maggi , Pizza , Burger , Hotdog , Chawmin के Base Material बनाने में होता है |

👉और एक Jelly आती Red Orange Color की उसमें Gelatin का बहुत प्रयोग होता है ! Chewgum तो Gelatin के बिना बन ही नहीं सकती !!

😁आजकल जिलेटिन का उपयोग साबूदाना में होने लगा है | जो हम उपवास में खाते हैं
अत: जो अपने आप को  शाकाहारी कहते हैं और कहीं न कहीं इस मांस का प्रयोग कर रहे हैं और अपना धर्म भ्रष्ट कर रहे हैं !

🐚🐚🐚🐚

🙏 अब आपको क्या करना है यह आप स्वयं तय करें.....

Govt. school V/s PRIVATE SCHOOL

Govt. school V/0 PRIVATE SCHOOL

सरकारी विद्यालयों की तुलना में निजी विद्यालयों की बहुत तारीफ सुनी है निजी विद्यालयों के अध्यापक बहुत योग्य होते हैं ऐसा लोगो का मानना है। पर बहुत सारे प्रश्न ऐसे हैं जिनका उत्तर आप स्वयं नही दे पाएंगे

1) निजी विद्यालय में कमजोर छात्रों का प्रवेश नही लेते है अगर अध्यापक योग्य है तो ऐसे छात्रों को योग्य क्यों नहींबना देते?🤷🏼‍♀

2 )निजी विद्यालयों का होम वर्क अभिभावक या होम ट्यूटर को क्यों कराना होता है अगर विद्यालय के अध्यापक योग्य है तो बच्चे को अपना होमवर्क कर लेना चाहिये।🤷🏼‍♂

3) कक्षा 9 या 10 के बाद निजी विद्यालय के छात्र प्रतियोगी परीक्षा के लिए कोचिंग क्यों करते हैं क्या 10 साल में कई लाख फीस चुकाने के बाद योग्य अध्यापक उसको प्रतियोगी परीक्षा लायक नही बना सके।👍🏼

4 )क्या कारण है कि बच्चों के asignment और प्रोजेक्ट ,बच्चों के माता पिता की मदद और गूगल की मदद से ही पूरे हो पाते हैं जबकि प्रोजेक्ट में मार्गदर्शक के रूप में योग्य अध्यापक का नाम अंकित होता है।जबकि सरकारी स्कूल के बच्चे खुद से प्रोजेक्ट पूरा कर के लाते है वहाँ पे शिक्षक इनका सहपाठी होता है।🤝🏼

5 )हकीकत यह है कि समृद्ध व्यक्ति अपने छात्रों को विद्यालय से अधिक घर पर पढ़ाता है और अच्छे रिजल्ट का श्रेय विद्यालय लेते है।✋🏽

इसी कारण से ये विद्यालय गरीबों के कमजोर बच्चों को अपने यहां नही रखते है क्योंकि उनकी ट्यूशन प्रोजेक्ट और होमवर्क उनके माता पिता नही करा पाएंगे और बच्चे फेल हो जायेगे इससे स्कूल की रेपुटेशन खराब होगी। 🤪😝😜

अगर निजी स्कुल वास्तव में योग्य है तो उस छात्र को पढ़ाये जिसके पास कॉपी खरीदने को पैसे नही है जिसको वर्ष में 2 महीने अपने पिता के साथ मजदूरी करना जरूरी है अन्यथा भूख प्राण ले सकती है और अगर निजी स्कुल उसको पढ़ाकर बिना कोचिंग डॉक्टर या इंजीनियर बना देंगे तो हम मान लेंगे कि निजी  विद्यालय ही सबसे योग्य है

अतः आप सरकारी अध्यापक हैं तो गर्व करें और यदि नहीं है तो सरकारी अध्यापक का उचित सम्मान करें‌ |

निजी school से मोह हटाओ और अपने लाडलो को गुणवत्ता युक्त education दिलाओ

सरकारी स्कूलों में प्रवेश उत्सव मनाया जा रहा है आप अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें, और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें
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