रविवार, 26 मई 2019

समाजवाद खत्म है। पूंजीवाद के नामो निशान नहीं। मोदी ने एक नई विधा राष्ट्रवाद को जन्म दिया है।

कन्हैया कुमार की पीठ थपथपाना। उसे नायक बनाना। उसके जैसे तमाम हार्दिक पटेलों को हीरो बनाना। पुलवामा और उरी के बाद हुई सर्जिकल स्ट्राइक्स पर सवाल करना। ऊपर से मोदी को ही इस पर राजनीति न करने की सलाह देना। अवार्ड वापसी करने की बेवजह मुहिम चलाना। मुस्लिम नागरिकों को डर लगता है कहकर डराना। असहिष्णुता शब्द को उछालना। अब यह देश रहने लायक नहीं रहा बोलना। नोट बंदी का मजाक बनाना और भ्रम फैलाना जैसे न जाने क्या हो गया? बुआ बबुआ की जोड़ी सिर्फ एक सिंबल है। इन 5 सालों में मोदी को हटाने के लिए अक्सर ऐसी जोड़ियां बनीं। मणि शंकर जैसों का पाकिस्तान जाकर अपने ही PM को हटाने की गुहार लगाना। सबसे अधिक दुख तब होता था जब मोदी के मंदिर जाने पर या उनकी आराधना करने पर मजाक बनाते थे। हिन्दू हिन्दू कहकर ऐसे मजाक बनाया गया है की जैसे देश अन्य धर्मों का है सिर्फ। व्यापारी को चोर बना डाला। गाय की चर्चा की इन्होंने? गाय जिसे हम सदियों से पूजते आ रहे हैं उसको काट कर दिखाया इन्होंने केरल में। गौ मूत्र जिसका उलेख आयुर्वेद में है का मजाक बनाया इन्होंने? गोबर जिस पर सैकड़ों अनुसंधान हो रहे का भी मजाक बनाया? यह नहीं जानते इनकी उपयोगिता? पढ़ लिख कर बड़ी बिंदी लगा/खादी का लंम्बा कुर्ता पहन, बाल बढ़ा PhD कर हम गोबर और गौ मूत्र की उपयोगिता पर सवाल उठा खुद को बहुत बड़ा विद्वान समझे पर हैं है वो महा धूर्त।

मोदी सिर्फ प्रचंड जीत के ही नायक नहीं। इन्होंने ऐसे तमाम लोगों के चेहरे से नकाब उतार डाला है। चुनाव तो कोई भी जीत जाता है। पर इस तरह विचारधारा से लोहा लेना सबके बस की बात नहीं। जब विरोधी सभी एक होकर हमला कर रहे थे ऐसे में यदि मोदी परास्त हो जाते तो क्या होता? यह नोंच नोंच कर खा जाते हमे।

मोदी की हर बात में फिकरा कसा इन लोगों ने। मोदी विदेश यात्रा पर फिजूल खर्च करता है। यह तो हवाई मोदी है। अम्बानी अडानी का गुलाम है। माल्या नीरव को भगाने वाला है। मुसलमानों का दुश्मन है, संविधान को खत्म कर देगा और न जाने क्या क्या। मोदी ने डट कर सबका सामना किया। क्या विपक्ष, क्या मीडिया, क्या अवार्ड वापसी गैंग और क्या टुकड़े टुकड़े गैंग।

आज मोदी फिर नायक हैं। सबके चेहरे बेनकाब हो चुके हैं। अब इन्हें फिर से कोई नया शब्द ढूंढना होगा।

इन कम्युनिस्ट विचार वालों की लुटिया डूब चुकी। समाजवाद खत्म है। पूंजीवाद के नामो निशान नहीं। मोदी ने एक नई विधा राष्ट्रवाद को जन्म दिया है। राष्ट्र रहेगा तभी सब रहेंगे।

मोदी को अगले 5 वर्षों के लिए शुभकामनाएं। और मेरे जैसे उन तमाम लोगों को धन्यवाद जिन्होंने गाहे बगाहे कुंठित लोगों को हर मोड़ पर जवाब दिया जिससे उनके द्वारा महामारी फैलाई न जा सकी। आज उन सब बेनकाबों को भी समझ आ गया की बात में सच्चाई न हो तो वह जीत नहीं सकती।

🇮🇳 जय हिंद 🇮🇳

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