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रविवार, 11 अक्तूबर 2020

चाइनीज़ फेंगशुई की जहरीली और अंधविश्वास को बढ़ावा देती चीजें का जाल फैला हुआ है।


यह सच्ची घटना एक परिचित के साथ घटी थी, जो
उन्होंने बाद में सुनाया था। जब गृह प्रवेश के वक्त मित्रों ने नए घर की ख़ुशी में उपहार भेंट किए थे। अगली सुबह जब उन्हेंने उपहारों को खोलना शुरू किया तो उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं था!

  एक दो उपहारों को छोड़कर बाकी सभी में लाफिंग-बुद्धा, फेंगशुई-पिरामिड, चाइनीज़-ड्रेगन, कछुआ, फेंगसुई-सिक्के, तीन टांगों वाला मेंढक और हाथ हिलाती हुई बिल्ली जैसी अटपटी वस्तुएं दी गई थी।
 जिज्ञासावश उन्होंने इन उपहारों के साथ आए कागजों को पढ़ना शुरू किया जिसमें इन चाइनीज़ फेंगशुई के मॉडलों का मुख्य काम और उसे रखने की दिशा के बारे में बताया गया था। जैसे लाफिंग बुद्धा का काम घर में धन, दौलत, अनाज और प्रसन्नता लाना था और उसे दरवाजे की ओर मुख करके रखना पड़ता था। कछुआ पानी में डूबा कर रखने से कर्ज से मुक्ति, सिक्के वाला तीन टांगों वाला मेंढक रखने से धन का प्रभाव, चाइनीज ड्रैगन को कमरे में रखने से रोगों से मुक्ति, विंडचाइम लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह, प्लास्टिक के पिरामिड लगाने से वास्तुदोषों से मुक्ति, चाइनीज सिक्के बटुए में रखने से सौभाग्य में वृद्धि होगी ऐसा लिखा था।
यह सब पढ़ कर वह हैरान हो गया क्योंकि यह उपहार उन दोस्तों ने दिए थे जो पेशे से इंजीनियर, डॉक्टर और वकील जैसे पदों पर काम कर रहे थे। हद तो तब हो गई जब डॉक्टर मित्र ने रोग भगाने वाला और आयु बढ़ाने वाला चाइनीज ड्रैगन गिफ्ट किया! जिसमें लिखा था “आपके और आपके परिवार के सुखद स्वास्थ्य का अचूक उपाय”! 
    इन फेंगशुई उपहारों में एक प्लास्टिक की सुनहरी बिल्ली भी थी जिसमें बैटरी लगाने के बाद, उसका एक हाथ किसी को बुलाने की मुद्रा में आगे पीछे हिलता रहता था। कमाल तो यह था कि उसके साथ आए कागज में लिखा था “ मुबारक हो, सुनहरी बिल्ली के माध्यम से अपनी रूठी किस्मत को वापस बुलाने के लिए इसे अपने घर, कार्यालय अथवा दुकान के उत्तर-पूर्व में रखिए!”
उन्होंने इंटरनेट खोलकर फेंगशुई के बारे में और पता लगाया तो कई रोचक बातें सामने आई। ओह! जब गौर किया तो 'चीनीआकमण का यह गम्भीर पहलू समझ में आया।
   दुनिया के अनेक देशों में कहीं न कहीं फेंगशुई का जाल फैला हुआ है। इसकी मार्केटिंग का तंत्र इंटरनेट पर मौजूद हजारों वेबसाइट के अलावा, TV कार्यक्रमों, न्यूज़ पेपर्स, और पत्रिकाओं तक के माध्यम से चलता है। मजहबी बनावट के कारण अमूमन मुस्लिम उसके शिकार नही होते। यानी इस हथियार का असल शिकार कौन है? आप समझ सकते हैं। चीनी इस फेंगसुई का इस्तेमाल किसी बाजार में प्रारंम्भिक घुसपैठ के लिए करते हैं।

अनुमानत: भारत में ही केवल इस का कारोबार लगभग 200 करोड रुपए से अधिक का है। उसी के सहारे धीरे-धीरे भारत के उत्पाद मार्केट पर चीनी उत्पादों ने पचास प्रतिशत तक कब्ज़ा लिया है। किसी छोटे शहर की गिफ्ट शॉप से लेकर सुपर माल्स तक चीनी प्रोडक्ट्स आपको हर जगह मिल जाएंगे....वह छा गये है। उन्होंने स्थानीय उत्पादों को लगभग समाप्त कर दिया है। चाइनीज उत्पादों का आक्रामक माल, भारत सहित दुनिया के अलग-अलग देशों में इस कदर बेचा जाता है कि दूसरों की मौलिक अर्थ-व्यवस्था तबाह हो जाती है। सस्ता और बड़ी मात्रा में होना उसका पैंतरा है यानी रणनीति।
 यहां मैं भारत-चीन सीमा संघर्ष, हमसे शत्रुता, उसके इतिहास, तिब्बत को हड़पना, पाकपरस्ती और आतंक को समर्थन, उसकी मिसाइल पालिसी, मक्कारिया आदि नही लिखूंगा जो समझदार है वे खुद समझ जाएंगे।

  अब आते हैं उसके जादुई हथियार पर जो जेहन का शिकार करती है !!!
    चीन में फेंग का अर्थ होता है ‘वायु’ और शुई का अर्थ है ‘जल’ अर्थात फेंगशुई का कोई मतलब है जलवायु। इसका आपके सौभाग्य, स्वास्थ्य और मुकदमे में हार जीत से क्या संबंध है? आप खुद ही समझ सकते हैं. 

  सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परिपेक्ष्य से भी देखा जाए तो कौन सा भारतीय अपने घर में आग उगलने वाली चाइनीज छिपकली यानी dragon को देख कर प्रसन्नता महसूस कर सकता है? किसी जमाने में जिस बिल्ली को अशुभ मानकर रास्ते पर लोग रुक जाया करते थे; उसी बिल्ली के सुनहरे पुतले को घर में सजाकर सौभाग्य की मिन्नतें करना महामूर्खता नहीं तो और क्या है?

अब जरा सर्वाधिक लोकप्रिय फेंगशुई उपहार लाफिंगबुद्धा की बात करें- धन की टोकरी उठाए, मोटे पेट वाला गोल मटोल सुनहरे रंग का पुतला- क्या सच में महात्माबुद्ध है? किसी तरह वह बुध्द सा सौम्य,शांत और सुडौल दीखता है??

 क्या बुद्ध ने अपने किसी प्रवचन में कहीं यह बताया था कि मेरी इस प्रकार की मूर्ति को अपने घर में रखो और मैं तुम्हें सौभाग्य और धन दूंगा? उन्होंने तो सत्य की खोज के लिए स्वयं अपना धन और राजपाट त्याग दिया था।
एक बेजान चाइनीज पुतले ( लाफिंगबुद्धा) को हमने तुलसी के बिरवे से ज्यादा बढ़कर मान लिया और तुलसी जैसी रोग मिटाने वाली सदा प्राणवायु देने वाली और हमारी संस्कृति की याद दिलाने वाली प्रकृति के सुंदर देन को अपने घरों से निकालकर, हमने लाफिंग बुद्धा को स्थापित कर दिया और अब उससे सकारात्मकता और सौभाग्य की उम्मीद कर रहे हैं? क्या यही हमारी तरक्की है?

अब तो दुकानदार भी अपनी दुकान का शटर खोलकर सबसे पहले लाफिंग बुद्धा को नमस्कार करते हैं और कभी-कभी तो अगरबत्ती भी लगाते हैं!
फेंगसुई की दुनिया का एक और लोकप्रिय मॉडल है चीनी देवता फुक, लुक और साऊ। फुक को समृद्धि, लुक को यश-मान-प्रतिष्ठा और साउ को दीर्घायु का देवता कहा जाता है। फेंगशुई ने बताया और हम अंधभक्तों ने अपने घरों में इन मूर्तियों को लगाना शुरु कर दिया। मैंने देखा कि इंटरनेट पर मिलने वाली इन मूर्तियों की कीमत भारत में ₹200 से लेकर ₹15000 तक है, मसलन  जैसी जेब- वैसी मूर्ति और उसी हिसाब से सौभाग्य का भी हिसाब-किताब सेट है।

 क्या आप अपनी लोककथाओं और कहानियों में इन तीनों देवताओं का कोई उल्लेख पाते हैं?  क्या भारत में फैले 33 कोटि देवी देवताओं से हमारा मन भर गया कि अब इन चाइनीज देवताओं को भी घर में स्थापित किया जा रहा है? 
 जरा सोचिए कि किसी कम्युनिस्ट चीन के बूढ़े देवता की मूर्ति घर में रखने से हमारी आयु कैसे ज्यादा हो सकती है?  क्या इतना सरल तरीका विश्व के बड़े-बड़े वैज्ञानिकों को अब तक समझ में नहीं आया था?

इसी तरह का एक और फेंगशुई प्रोडक्ट है तीन चाइनीज सिक्के जो लाल रिबन से बंधे होते हैं, फेंगशुई के मुताबिक रिबिन का लाल रंग इन सिक्कों की ऊर्जा को सक्रिय कर देता है और इन सिक्कों से निकली यांग(Yang) ऊर्जा आप के भाग्य को सक्रिय कर देती है। दुकानदारों का कहना है कि इन सिक्कों पर धन के चाइनीज मंत्र भी खुदे होते हैं लेकिन जब मैंने उनसे इन चाइनीज अक्षरों को पढ़ने के लिए कहा तो ना वे इन्हें पढ़ सके और नहीं इनका अर्थ समझा सके?
 मेरा पूछना है कि क्या चीन में गरीब लोग नहीं रहते? क्यों चीनी क्म्यूनिष्ट खुद हर नागरिक के बटुवे में यह सिक्के रखवा कर अपनी गरीबी दूर नहीं कर लेती? हमारे देश के रुपयों से हम इन बेकार के चाइनीससिक्के खरीद कर न सिर्फ अपना और अपने देश का पैसा हमारे शत्रु मुल्क को भेज रहे हैं बल्कि अपने कमजोर और गिरे हुए आत्मविश्वास का भी परिचय दे रहे हैं।
   फेंगशुई के बाजार में एक और गजब का प्रोडक्ट है  तीनटांगोंवालामेंढक जिसके मुंह में एक चीनी सिक्का होता है। फेंगशुई के मुताबिक उसे अपने घर में धन को आकर्षित करने के लिए रखना अत्यंत शुभ होता है। जब मैंने इस मेंढक को पहली बार देखा तो सोचा कि जो देखने में इतना भद्दा लग रहा है वह मेरे घर में सौभाग्य कैसे लाएगा?

मेंढक का चौथा पैर काट कर उसे तीन टांग वाला बनाकर शुभ मानना किस सिरफिरे की कल्पना है?
क्या किसी मेंढक के मुंह में सिक्का रखकर घर में धन की बारिश हो सकती है? 
संसार के किसी भी जीव विज्ञान के शास्त्र में ऐसे तीन टांग वाले ओर सिक्का खाने वाले मेंढक का उल्लेख क्यों नहीं है?

   कम्युनिष्ट चाइना ने इसी तरह के आक्रामक रणनीति के सहारे धीरे-धीरे भारतीय अर्थ-व्यवस्था पर लगभग कब्ज़ा लिया है। उनके इस हथियार से देश के हजारों छोटे कारीगर, लघु उद्यमी, स्थानीय व्यापार, छोटे-कल कारखाने नष्ट हो चुके है। सब वस्तुएं China से बनकर आ रही हैं।

वह वस्तुएं भी जिन्हें बनाने में हजारों सालो से हमारे कारीगर निपुण थे। केवल कुम्हार, बढ़ई, लुहार, कर्मकार आदि 2 करोड़ से अधिक जनसँख्या वाली जातियां थे। वे बेकारी के शिकार हो रहे हैं। आप लिस्टिंग करें। ऐसे हजारों काम-व्यापार दिखेगा जिसे चीन ने अपने छोटे-सस्ते उत्पादों को पाट कर नष्ट करके कब्ज़ा लिया।

हम केवल एक बिचौलिए विक्रेता की भूमिका में ही रह गये हैं।
 बहुत दिमाग लगाकर समझिये अब युद्द के हथियार वह नही होते हैं जो पारपंरिक थे। अब पूरी योजना से शत्रु  के पास जाकर उसके दिमाग को ग्रिप में लेना पड़ता है। यह फेंग-शुई भी उसी दिमागी खेल का हिस्सा है, जो हमारे हजारों साल के अध्यात्मिक ज्ञान को कमजोर करने के लिए भेजा गया है। कम्युनिष्टों ने उसे गोरिल्ला रणनीति की तरह अपनाया है।

  अपनी वैज्ञानिक सोच को जागृत करना और इनसे पीछा छुड़ाना अत्यंत आवश्यक है। आप भी अपने आसपास गौर कीजिए आपको कहीं ना कहीं इस फेंगशुई की जहरीली और अंधविश्वास को बढ़ावा देती चीजें अवश्य ही मिल जाएगी। अब जरा इस पर गौर फरमाएं!!  आपने किसी प्रगतिशीलतावादी क्म्युनिष्ट को इनकी बुराई करते देखा है??

दिन भर टीवी पर हिन्दू विश्वासों का "मखौल उड़ाने वालो सो-काल्ड को आपने कभी इस चाइनीजकम्यूनिष्ट अंध-विश्वास के खिलाफ बोलते सुना है???
समय रहते स्वयं को अपने परिवार को और अपने मित्रों को इस अंधेकुएं से निकालकर अपने देश की मूल्यवान मुद्रा को कम्युनिष्ट चाइना के फैलाए षड्यंत्र की बलि चढ़ने से बचाइए।
मस्तिष्क का इस्तेमाल बढाइये....हथियार पहचानिए......!
ऐसी बेहूदा वस्तुओं को आज ही अपने घर से बाहर फेंकिए

ॐ नमो: नारायण!
🙏जय हिंद जय भारत 🙏🇮🇳

मोदी जो कर रहा है इस तेजी से किसी देश का प्रधानमंत्री नही कर सकता। Pushp...



पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने इस वीडियो के माध्यम से यह भारत की युवाओं को संदेश देते हुए अपने विचारों को भारत की समस्त युवाओं के साथ शेयर किया है। पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ के विचारों के बारे में आप क्या सोचते हैं अपने विचार नीचे कमेंट के माध्यम से हमारे साथ शेयर कर सकते हैं और इस वीडियो को अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया के माध्यम से शेयर कर सकते हैं और हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करके हमारा मनोबल बढ़ा सकते हैं। इस वीडियो को लाइक शेयर करना ना भूले
#Pushpendra_Kulshrestha #Prakrit_bharat

जनरल जीडी बख्शी: हिन्दुस्तान का सबसे बड़ा प्रोपोगेंडा का हुआ खुलासा - Gen...




भारतमाता के लिए मर मिटना मंजूर है मुझे
अखंड हिन्द बनाने का जूनून है मुझे

जनरल जीडी बख्शी द्वारा हिन्दुस्तान का सबसे बड़ा प्रोपोगेंडा का हुआ खुलासा - General GD Bakshi Latest Speech - पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ | Pushpendra Kulshrestha Latest Speech

General GD Bakshi जी ने इस वीडियो में कई असामाजिक तत्वों के बारे में बात की है जो हमारे सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों को इफेक्ट करती है। इसके अलावा General GD Bakshi जी ने कई अन्य मुद्दों पर भी बात की है जिसे आज के सभी युवा को जानने तथा समझने की अत्यंत आवश्यकता है। आप इस वीडियो के बारे में क्या सोचते हैं अपने विचार नीचे कमेंट के माध्यम से हमारे साथ शेयर कर सकते हैं और अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करने के लिए आप इस वीडियो को अपने परिवार तथा सभी दोस्तों के साथ शेयर करें एवंम आप अपने सभी सोशल मीडिया पर भी इस वीडियो को सांझा कर सकते हैं।




NOTE: All copyrights go to their respective owners.

इस वीडियो का पूरा श्रेय श्री पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ जी पूर्व रॉ अधिकारी ले कर्नल आर एस एन सिंह जी मेजर जनरल जी डी बक्शी जी श्री सुशील पंडित जी श्री तुफैल चतुर्वेदी जी श्री ललित अंबरदार जी श्री गौरव आर्य जी श्री ओम नरेश यादव जी और उनके साथ उनकी पूरी टीम को जाता है जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किए हुए अनवरत कार्यरत हैं।

पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ जी और उनकी टीम का एकमात्र ऑफिसियल चैनल "PUBLIC 24x7" है जिसपर आप उनके सभी फुल लेंथ स्पीच सुन सकते हैं।

SOURCE and CREDIT of these videos:-
CREDIT GOES to following channel and foundation
"PUBLIC 24x7"
https://www.youtube.com/channel/UC1hH...

शुक्रवार, 9 अक्तूबर 2020

राजस्थान की नई RTOलिस्ट

*राजस्थान की नई RTOलिस्ट*
RJ-01 अजमेर 
RJ-02 अलवर 
RJ-03 बांसवाडा 
RJ-04 बाडमेर 
RJ-05 भरतपुर 
RJ-06 भीलबाडा 
*RJ-07 बीकानेर*
RJ-08 बूंदी 
RJ-09 चित्तौड़गढ़ 
RJ-10 चूरू 
RJ-11 धौलपुर 
RJ-12 डूंगरपुर 
RJ-13 श्रीगंगानगर 
RJ-14 जयपुर 
RJ-15 जैसलमेर 
RJ-16 जालौर
RJ-17 झालाबाड 
RJ-18 झुन्झुनूं 
RJ-19 जोधपुर 
RJ-20 कोटा 
RJ-21 नागौर 
RJ-22 पाली 
RJ-23 सीकर 
RJ-24 सिरोही 
RJ-25 सवाईमाधोपुर 
RJ-26 टोंक 
RJ-27 उदयपुर 
RJ-28 बारा 
RJ-29 दौसा 
RJ-30 राजसंमद 
RJ-31 हनुमानगढ 
RJ-32 कोटपुतली (जयपुर)
RJ-33 रामगंज मण्डी( कोटा )
RJ- 34 करौली 
RJ-35 प्रतापगढ
RJ-36 व्याबर (अजमेर)
RJ-37 डीडवाना (नागौर)
RJ-38 आबूरोड(सिरोही)
RJ-39 बालोतरा( बाडमेर)
RJ-40 भिवाडी (अलवर)
RJ-41 चौमू (जयपुर)
RJ-42 किशनगढ़( अजमेर)
RJ-43 फलौदी (जोधपुर)
RJ-44 सुजानगढ (चूरू)
RJ-45 जयपुर उत्तर 
RJ-46 भीनमाल (जालौर) 
RJ-4 7दूदू (जयपुर)
RJ-48 केकडी (अजमेर)
RJ-49 नोहर (हनुमानगढ)
RJ-50 नोखा (बीकानेर)
RJ-51 शाहपुरा( भीलबाडा )
RJ-52 शाहपुरा (जयपुर)
RJ-53 पीपाड़ (जोधपुर)

      _✍✍✍✍✍

ज़रा होशपूर्वक जिएं !ऐसा बदहवास न जिएं !ऐसा भागमभाग न जिएं !स्वभाव में जिएं.. दूसरे को दिखाने के लिए न जिएं !

*उम्र पचास कि खल्लास !*
------------------------
ज्यादातर भारतीय,  50 की आयु आते-आते अपना स्वास्थ्य खो बैठते हैं !
वे अपने शरीर की गाड़ी को इतना रफ़ चलाते हैं  कि आधे रास्ते में ही उनके रिंग, पिस्टन, प्लग, वॉल्व  सब घिस जाते हैं !
..क्योंकि इस गाड़ी का ड्राइवर महत्वाकांक्षा की शराब में धुत्त होता है !
उसका एक पैर नुमाइश के क्लच पर होता है,  और दूसरा,  प्रतिस्पर्धा के एक्सीलेटर पर  !!
..और दोनों एकसाथ दबे रहते हैं !
फिर वह एक ही गेयर पर  पूरी गाड़ी को  घसीटे रहता है !
बहुधा यह गेयर,  धन कमाने  या सामाजिक हैसियत प्राप्त करने का होता है !

स्वाभाविक है.. ऐसा चालक बहुत जल्दी गाड़ी को ख़राब कर देगा !
यही होता भी है !
*सौ में नब्बे भारतीय, पचास  की आयु* आते-आते बीमारियों का पैकेज़ लिए घूमते हैं !
और यह प्रक्रिया 35 से ही शुरू हो जाती है !

मुझे हैरानी होती है कि जब 30-35 ,उम्र के विवाहित युगल भी, ज्योतिष परामर्श के दौरान यह बताते हैँ कि अब लव लाईफ में कोई एक्साइटमेंट नही रहा !

90 फीसदी बॉयज कुंठित हैं कि 'वे' तैयार ही नही हो पाते.. अथवा चुटकियों में फ़ारिग हो जाते हैं !
कारण साफ है...भागमभाग की प्रतिस्पर्धी जीवन शैली.. शरीर से अपना शुल्क वसूल रही है !
बहुत कम उम्र में बी.पी. ,  शुगर,  मोटापा,  हार्ट डिज़ीज़  कॉमन बातें हो गई हैं !
इसके इतर,  ज्वाइंट्स पेन ,  थॉयरॉइड,  सर्वाइकल, टेंशन हेडेक,  हाइपर एसिडिटी,  अल्सर,  स्टमक अपसेट,  पाईल्स आदि  तो इतनी सामान्य बातें हो गई हैं.. कि इनकी तो गिनती ही रोग में नही की जाती !
...फिर body ache, स्टिफनेस,  मोटा चश्मा  तो श्वास-प्रश्वास की तरह सहज स्वीकार्य हैं  !

चूंकि बी.पी.,  शुगर,  हार्ट का पेशेंट सेक्सुअली काबिल नही रह जाता.. लिहाजा,  सेक्स लाईफ बिगड़ने से उसमें मानसिक अस्वास्थ्य के अन्य लक्षण  भी प्रकट होने लगते हैं.. मसलन - चिड़चिड़ापन,  आकस्मिक क्रोध,  बात बात पर हाइपर हो जाना ,  शंकालुपन,  दोषदर्शी होना..,  देश.., समाज हर  बात के प्रति नकार से भर उठना और इनफीरिआरिटी कॉम्प्लेक्स,  जिसका बाय प्रोडक्ट है.. सुपीरियरिटी कॉम्प्लेक्स !
फिज़िकल डिसऐबेलिटी,  उसके हर रस को मानसिक कर देती है !
लिहाजा उसका रस प्रेम से अधिक पैसे में हो जाता है,  रोमांस से अधिक संस्थान.  में,  और सेक्स से अधिक टेक्स में !
...क्योंकि उसे पता है कि  उसका मोटा पेट,  डबल चिन, पसरा चेहरा और बुझा शरीर.. किसी स्त्री के दिल में,  उसके लिये रोमांटिक प्रेमी का ख्वाब नही पैदा करने वाला !
..जिस स्त्री को पाने के लिए वह जवानी में पैसा या सामाजिक हैसियत जुटा रहा था....वह उसकी हैसियत से आकर्षित हो भी गई.. तो अब असली मैदान में उसका फीता ढीला पड़ने ही वाला है.. क्योंकि इस जुगत में वह  अपना शरीर गवा बैठा है !
यानि लक्ष्य सिद्ध होने तक  उद्देश्य  ही ढह जाता है  !
..फिर ऐसे पुरुष के साथ रहते रहते, भारतीय स्त्री तो  और  भी जल्दी, लगभग 40 आते -आते खत्म हो जाती है ! क्योंकि उसकी भी वही गत हो जाती है.. जो पुरुष की है.. यानि मोटापा और बहुत सी शारीरिक व्याधियों का पैकेज़ !
.. फिर उसके बाद का जीवन सिर्फ कटता ही है , जिया नही जाता !

फिर एक बात और है, जो 50 में रोगग्रस्त है.. वह एकाएक नही होता !
35-40 से ही उसके स्वास्थ्य में गिरावट प्रारम्भ हो जाती है !
देखा जाए तो भारतीय स्त्री /पुरुष , ठीक ठाक स्वास्थ्य में बहुत कम ही जी पाते हैं !
क्योंकि ठीक ठाक स्वास्थ्य,  महज़ शारीरिक मामला ही नही है ! 
स्वस्थ होने के लिए प्राण भी स्वस्थ होना ज़रूरी है, 
मानसिक स्वास्थ्य भी ज़रूरी है, 
भावनात्मक और सोशली स्वस्थ होना भी ज़रूरी है, 
अध्यात्मिक स्वास्थ्य तो बहुत दूर की बात है !

50 वह उम्र नही,  कि जहाँ तक आते आते शरीर को ख़राब कर लिया जाए !
उम्र का आना स्वाभाविक है,  रोग का आना स्वाभाविक नही है !

रोग हमारी वासना से पैदा होता है ! हमारी कमअक्ली, हमारी असजगता और जीवन के प्रति गलत दृष्टिकोण से पैदा होता है !!
और इसकी वजहें,  हमारे पूर्वाग्रह ग्रसित मानस और अहंजनित सामाजिक ताने बाने में छिपी हैं !

हमने जीवन की समस्त धाराओं को एकमुखी कर दिया है !
और वह है - धन या सामाजिक हैसियत की प्राप्ति !
हम प्रत्येक व्यक्ति का मूल्यांकन इन्हीं दो बिंदुओं के आधार पर करते हैं !
और हमें पता होता है कि हमारा मूल्यांकन भी इन्हीं दो बिंदुओं के आधार पर होने वाला है,  लिहाजा.., 
हम जीवन की सारी ऊर्जा और शक्ति इन्हीं की  प्राप्ति में झोंक देते हैं !
हम धन और हैसियत से इतर जीवन कभी देख ही नही पाते !

हम प्रेम नही कर पाते,  
क्योंकि हमें ख़तरा होता है कि जब तक हम प्रेम करेंगे.. दूसरा हमसे आगे निकल जाएगा !
फिर प्रेम आता भी है जीवन में,  तो उससे भी हम वस्तु संग्रहण की तरह बर्ताव करते हैं ! 
हम शीघ्र ही शादी कर उसे अपने शो केस में सजा लेते हैं... और किसी मैराथन धावक की तरह दो घूंट पानी गटक कर पुनः दौड़ में लग जाते हैं !
..और प्रेम वहीं छूट जाता है !

फिर ..यही बर्ताव हम कलात्मक संवेग या अज्ञात का  निमंत्रण आने पर भी करते हैं !
..हम उसे जीने के बजाए, उसे किसी भौतिक वस्तु की तरह संगृहीत कर लेना चाहते हैं !
और दिव्यता का वह क्षण हमारे हाथ से फिसल जाता है !

हम सारा क़ीमती गवाए जाते हैं और सारा मूल्यहीन जुटाए चले जाते हैं !
क्योंकि .. हम प्रदर्शनप्रिय लोग हैं और  हम जानते हैं कि प्रदर्शन सिर्फ भौतिक का किया जा सकता है.. अभौतिक का नही !!
..लिहाजा, हम अपनी 90 फीसदी ऊर्जा भौतिक के संग्रहण में झोंके रहते हैं !
..फिर इच्छाओं की यह ओवर लोडेड गाड़ी, 
पचास की उम्र आते आते,  किसी टर्निंग पर पलट ही जाती है !
अनेकों का तो इंजन ही सीज़ हो जाता है.. और वे पचास आते-आते खेत रहते हैं !

फिर कुछ ऐसे भी हैं, जो स्वास्थ्य के लिए भी थोड़ा वक़्त निकाल लेते हैं ! 
किंतु वह भी स्वास्थ्य के लिए कम,  स्वास्थ्य की नुमाइश के लिए अधिक होता है !
.. वे सुबह गार्डन चले जाते हैं  या शाम को जिम !
हेल्थी डायट  भी शुरू कर देते हैं 
किंतु,  कोई उपाय काम नही कर पाता !
हज़ार रख रखाव के बाद भी,  वे रोग की चपेट में आ ही जाते हैं !

कारण क्या है?? 
कारण है.. समग्र स्वास्थ्य पे दृष्टि न होना !
हमारे स्वास्थ्य के अनेक तल हैं !
प्रत्येक तल की एक -दूसरे पर अन्तःक्रिया है ! 
सभी तल अन्योनाश्रित हैं !
सच्चा स्वास्थ्य..,  
शरीर,  मन,  प्राण,  बुद्धि और शुद्ध चेतना का संतुलित संयोजन है !
.. एकांगी उपाय काम नही करता !

अच्छे स्वास्थ्य को,  अच्छे मनोभावों की दरकार है !
हमारे मस्तिष्क की प्रत्येक गतिविधि और हृदय की भावना,  हमारे प्राण को आंदोलित करती है !
क्रोध में प्राण,  सिकुड़ जाता  है,  प्रेम में प्राण  फैल जाता है !
तनाव में,  चिंता में,  ईर्ष्या,  द्वेष,  डाह  में  प्राण उत्तेजित हो जाता है,  श्वास  उथली हो जाती है !
लिहाजा  प्राण जल जाता है.. क्षय हो जाता है !
किंतु, 
सुकून में, निश्चिंतता में,  भरोसे में,  गहन विश्रांति में   प्राण  संग्रहित होता है.. विस्तारित होता है !

ख्याल रखें..
रनिंग, जिमिंग, और योगा सेशन से भी जो प्राण मिलता है... उसे हमारी  चिंतित, भयभीत और कुंठित  मनोदशा.. चुटकियों में चट  कर जाती है !

प्रेमपूर्ण मनोदशा,  चौबीस घंटे का प्राणायाम है !

हमारा स्वास्थ्य,  हमारे रूटीन और खानपान पर कम,  किंतु  हमारी  मनोदशा पर अधिक निर्भर है !
क्षमा करें, ये लेख बड़ा हुआ जा रहा है... चलिए इसे जल्दी समेट देता हूं !
कुल मिलाकर यह है कि, 
ज़रा होशपूर्वक जिएं !
ऐसा बदहवास न जिएं !
ऐसा भागमभाग न जिएं !
स्वभाव में जिएं.. दूसरे को दिखाने के लिए न जिएं !
आज जो लोग दिखाई दे रहे हैँ.. वे सभी एक दिन मर जाएंगे !
किसको दिखा के क्या कर लीजिएगा !
..नही चेत रहे थे.. तो ##कोरोना  ने और चेता दिया है !
जितना ग़लत खेलेंगे.. उतनी जल्दी आउट होंगे !
अगर पचास आते आते आप अपना स्वास्थ्य खो दिए.. तो  जानिए आप बहुत कम स्कोर पर बहुत अधिक विकेट गवा दिए !

वहीं, अगर आप सही तरह से जिएं.. तो जीवन का सही मज़ा 40 के बाद शुरू होता है.. क्योंकि तब तक आप अनेक अनुभवों से गुज़र कर रिफाइंड हो चुके होते हैं !

*संकलन*

दुनिया का सबसे ताकतवर पोषण पूरक आहार है- सहजन

दुनिया का सबसे ताकतवर पोषण पूरक आहार है- सहजन (मुनगा)। इसकी जड़ से लेकर फूल, पत्ती, फल्ली, तना, गोंद हर चीज उपयोगी होती है। 
           आयुर्वेद में सहजन से तीन सौ रोगों का उपचार संभव है। सहजन के पौष्टिक गुणों की तुलना :- विटामिन सी- संतरे से सात गुना अधिक। विटामिन ए- गाजर से चार गुना अधिक। कैलशियम- दूध से चार गुना अधिक। पोटेशियम- केले से तीन गुना अधिक। प्रोटीन- दही की तुलना में तीन गुना अधिक। 
            स्वास्थ्य के हिसाब से इसकी फली, हरी और सूखी पत्तियों में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन-ए, सी और बी-काम्प्लेक्स प्रचुर मात्रा में पाई जाते हैं। इनका सेवन कर कई बीमारियों को बढ़ने से रोका जा सकता है, इसका बॉटेनिकल नाम ' मोरिगा ओलिफेरा ' है। हिंदी में इसे सहजना, सुजना, सेंजन और मुनगा नाम से भी जानते हैं, जो लोग इसके बारे में जानते हैं, वे इसका सेवन जरूर करते हैं। 

सहजन जिसे मोरिंगा नाम से जाना जाता है। यह सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। इसमें भरपूर मात्रा में मिनरल्स पाए जाते हैं। इसीलिए सप्ताह में कम से कम 2 बार सहजन के पराठे का सेवन जरूर करते हैं। जानिए आखिर *सहजन खाने के क्या-क्या है लाभ-*

*सहजन में पोषक तत्वों जैसे- प्रोटीन, ऑयरन, बीटा कैरोटीन, अमीनो एसिड, कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम, विटीमिन ए, सी और बी, एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल जैसे गुण पाए जाते हैं। वहीं इसकी पत्तियां भी काफी फायदेमंद होती है। सहजन की पत्तियों में संतरे और नींबू की तुलना में 6 गुना अधिक विटामिन-सी होता है। इसके साथ ही दूध में 4 गुना अधिक कैल्शियम,  गाजर की तुलना में 4 गुना अधिक विटामिन ए,  केले की तुलना में 3 गुना अधिक पोटेशियम पाया जाता है। इतना ही नहीं सहजन की पत्तियां भी पानी में आर्सेनिक छोड़ती हैं।* 


*सहजन खाने के मिलने वाले स्वास्थ्य लाभ*

*हाई ब्लड प्रेशर करे कम*
सहजन में भरपूर मात्रा में पोटैशियम, विटामिन्स पाए जाते हैं। जो ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद करता है। 

*वजन कम करने में करे मदद*
शरीर में बढ़ी हुई चर्बी को कम करने में सहजन काफी कारगर साबित हो सकता है। इसमें अधिक मात्रा में फास्फोरस पाया जाता है। जो वसा कम करने में मदद करता है। इसलिए आप मोरिंगा की पत्तियों का रस का सेवन करे। इससे आपको लाभ मिलेगा।

*डायबिटीज को कंट्रोल*
अगर आप डायबिटीज की समस्या से पीड़ित हैं तो सहजन का सेवन करें। इससे आपका ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहेगा। दरअसल सहजन में राइबोफ्लेविन अधिक मात्रा में पाया जाता है, जिसके चलते यह ब्‍लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। लेकिन इसका ज्यादा सेवन करने से बचे। 

*इम्यूनिटी करें मजबूत*
सहजन में भरपूर मात्रा में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो आपकी इम्यूनिटी को बूस्ट करने में मदद करते हैं। जिससे किसी भी तरह की संक्रामक बीमारी आपसे कोसों दूर रहती हैं। इसके साथ ही आपकी हड्डियां भी मजबूत होती है। 

*सिर दर्द से दिलाए निजात*
सहजन के पत्तों के रस को काली मिर्च के साथ पीस लें। इसके बाद इस पेस्ट को सिर माथे पर लगा लें। इससे आपको लाभ मिलेगा। 

*स्किन को रखें जवां*
सहजन में भरपूर मात्रा में एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीवायरल गुण पाए जाते हैं जो आपको स्किन संबंधी हर समस्या से छुटकारा दिला देता है। इसके साथ ही इसमें विटामिन  पाया जाता है। जो आप आपकी स्किन को जवां रखने में मदद करता है। 

*एनीमिया से दिलाए निजात*
शरीर में खून की कमी के कारण एनीमिया की शिकायत हो जाती है। ऐसे में सहजन काफी कारगर साबित हो सकता है।  सहजन की पत्तियों के एथनोलिक एक्सट्रैक्ट में एंटी-एनीमिया गुण मौजूद होते हैं। जिसका सेवन करने से शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ जाती हैं।

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          सहजन का फूल पेट और कफ रोगों में, इसकी फली वात व उदरशूल में, पत्ती नेत्ररोग, मोच, साइटिका, गठिया आदि में उपयोगी है। इसकी छाल का सेवन साइटिका, गठिया, लीवर में लाभकारी होता है। सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वात और कफ रोग खत्म हो जाते हैं। 
          सहजन की पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया, साइटिका, पक्षाघात, वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है। साइटिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखाता है। मोच इत्यादि आने पर सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं और मोच के स्थान पर लगाने से जल्दी ही लाभ मिलने लगता है।
            सहजन के फली की सब्जी खाने से पुराने गठिया, जोड़ों के दर्द, वायु संचय, वात रोगों में लाभ होता है। इसके ताजे पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है साथ ही इसकी सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है। इसकी जड़ की छाल का काढ़ा सेंधा नमक और हींग डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है। 
          सहजन के पत्तों का रस बच्चों के पेट के कीड़े निकालता है और उल्टी-दस्त भी रोकता है। ब्लड प्रेशर और मोटापा कम करने में भी कारगर सहजन का रस सुबह-शाम पीने से हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है। इसकी पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे-धीरे कम होने लगता है। इसकी छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़े नष्ट होते हैं और दर्द में आराम मिलता है। 
            सहजन के कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होता है, इसके अलावा इसकी जड़ के काढ़े को सेंधा नमक और हींग के साथ पीने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है। इसकी पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सूजन ठीक होते हैं। 
          सहजन के बीज से पानी को काफी हद तक शुद्ध करके पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसके बीज को चूर्ण के रूप में पीसकर पानी में मिलाया जाता है। पानी में घुल कर यह एक प्रभावी नेचुरल क्लोरीफिकेशन एजेंट बन जाता है। यह न सिर्फ पानी को बैक्टीरिया रहित बनाता है, बल्कि यह पानी की सांद्रता को भी बढ़ाता है।
            कैंसर तथा शरीर के किसी हिस्से में बनी गांठ, फोड़ा आदि में सहजन की जड़ का अजवाइन, हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने का प्रचलन है। यह काढ़ा साइटिका (पैरों में दर्द), जोड़ों में दर्द, लकवा, दमा, सूजन, पथरी आदि में भी लाभकारी है |
            सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द तथा दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है। आज भी ग्रामीणों की ऐसी मान्यता है कि सहजन के प्रयोग से वायरस से होने वाले रोग, जैसे चेचक आदि के होने का खतरा टल जाता है। 
           सहजन में अधिक मात्रा में ओलिक एसिड होता है, जो कि एक प्रकार का मोनोसैच्युरेटेड फैट है और यह शरीर के लिए अति आवश्यक है। सहजन में विटामिन-सी की मात्रा बहुत होती है। यह शरीर के कई रोगों से लड़ता है। यदि सर्दी की वजह से नाक-कान बंद हो चुके हैं तो, सहजन को पानी में उबालकर उस पानी का भाप लें। इससे जकड़न कम होती है। सहजन में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है, जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं। इसका जूस गर्भवती को देने की सलाह दी जाती है, इससे डिलवरी में होने वाली समस्या से राहत मिलती है और डिलवरी के बाद भी मां को तकलीफ कम होती है, गर्भवती महिला को इसकी पत्तियों का रस देने से डिलीवरी में आसानी होती है।
           सहजन के फली की हरी सब्जी को खाने से बुढ़ापा दूर रहता है इससे आंखों की रोशनी भी अच्छी होती है। सहजन को सूप के रूप में भी पी सकते हैं,  इससे शरीर का खून साफ होता है। 
            सहजन का सूप पीना सबसे अधिक फायदेमंद होता है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है। विटामिन सी के अलावा यह बीटा कैरोटीन, प्रोटीन और कई प्रकार के लवणों से भरपूर होता है, यह मैगनीज, मैग्नीशियम, पोटैशियम और फाइबर से भरपूर होते हैं। यह सभी तत्व शरीर के पूर्ण विकास के लिए बहुत जरूरी हैं। 

कैसे बनाएं सहजन का सूप?
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 सहजन की फली को कई छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लेते हैं। दो कप पानी लेकर इसे धीमी आंच पर उबलने के लिए रख देते हैं, जब पानी उबलने लगे तो इसमें कटे हुए सहजन की फली के टुकड़े डाल देते हैं, इसमें सहजन की पत्त‍ियां भी मिलाई जा सकती हैं, जब पानी आधा बचे तो सहजन की फलियों के बीच का गूदा निकालकर ऊपरी हिस्सा अलग कर लेते हैं, इसमें थोड़ा सा नमक और काली मिर्च मिलाकर पीना चाहिए। 

           १. सहजन के सूप के नियमित सेवन से सेक्सुअल हेल्थ बेहतर होती है. सहजन महिला और पुरुष दोनों के लिए समान रूप से फायदेमंद है। 

           २. सहजन में एंटी-बैक्टीरियल गुण पाया जाता है जो कई तरह के संक्रमण से सुरक्षित रखने में मददगार है. इसके अलावा इसमें मौजूद विटामिन सी इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने का काम करता है। 

          ३. सहजन का सूप पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाने का काम करता है, इसमें मौजूद फाइबर्स कब्ज की समस्या नहीं होने देते हैं। 

          ४. अस्थमा की शिकायत होने पर भी सहजन का सूप पीना फायदेमंद होता है. सर्दी-खांसी और बलगम से छुटकारा पाने के लिए इसका इस्तेमाल घरेलू औषधि के रूप में किया जाता है। 

          ५. सहजन का सूप खून की सफाई करने में भी मददगार है, खून साफ होने की वजह से चेहरे पर भी निखार आता है। 

          ६. डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए भी सहजन के सेवन की सलाह दी जाती है।


 

गुरुवार, 8 अक्तूबर 2020

घबराकर शेर शाह सूरी ने कहा था "मुट्टी भर बाजरे (मारवाड़) की खातिर हिन्दुस्तान की सल्लनत खो बैठता


 सन् 1840 में काबुल में युद्ध में 8000 पठान मिलकर भी
1200 राजपूतो का मुकाबला 1 घंटे भी नही कर पाये।
वही इतिहासकारो का कहना था की चित्तोड
की तीसरी लड़ाई जो 8000 राजपूतो और 60000
मुगलो के मध्य हुयी थी वहा अगर राजपूत 15000
राजपूत होते तो अकबर भी जिंदा बचकर नहीं जाता।
इस युद्ध में 48000 सैनिक मारे गए थे जिसमे 8000
राजपूत और 40000 मुग़ल थे वही 10000 के करीब
घायल थे।
और दूसरी तरफ गिररी सुमेल की लड़ाई में 15000
राजपूत 80000 तुर्को से लडे थे, इस पर घबराकर शेर
शाह सूरी ने कहा था "मुट्टी भर बाजरे (मारवाड़)
की खातिर हिन्दुस्तान की सल्लनत खो बैठता"


उस युद्ध से पहले जोधपुर महाराजा मालदेव जी नहीं गए
होते तो शेर शाह ये बोलने के लिए जीवित भी नही
रहता।
इस देश के इतिहासकारो ने और स्कूल कॉलेजो की
किताबो मे आजतक सिर्फ वो ही लडाई पढाई
जाती है जिसमे हम कमजोर रहे,
वरना बप्पा रावल और राणा सांगा जैसे योद्धाओ का नाम तक सुनकर मुगल की औरतो के गर्भ गिर जाया करते थे, रावत रत्न सिंह चुंडावत की रानी हाडा का त्यागपढाया नही गया जिसने अपना सिर काटकर दे दिया था।
पाली के आउवा के ठाकुर खुशहाल सिंह
को नही पढाया जाता, जिन्होंने एक अंग्रेज के अफसर का सिर काटकर किले पर लटका दिया था।
जिसकी याद मे आज भी वहां पर मेला लगता है। दिलीप सिंह जूदेव का नही पढ़ाया जाता जिन्होंने एक लाख आदिवासियों को फिर से हिन्दू बनाया था।
महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर
महाराणा प्रतापसिंह
महाराजा रामशाह सिंह तोमर
वीर राजे शिवाजी
राजा विक्रमाद्तिया
वीर पृथ्वीराजसिंह चौहान
हमीर देव चौहान
भंजिदल जडेजा
राव चंद्रसेन
वीरमदेव मेड़ता
बाप्पा रावल
नागभट प्रतिहार(पढियार)
मिहिरभोज प्रतिहार(पढियार)
राणा सांगा
राणा कुम्भा
रानी दुर्गावती
रानी पद्मनी
रानी कर्मावती
भक्तिमति मीरा मेड़तनी
वीर जयमल मेड़तिया
कुँवर शालिवाहन सिंह तोमर
वीर छत्रशाल बुंदेला
दुर्गादास राठौड
कुँवर बलभद्र सिंह तोमर
मालदेव राठौड




महाराणा राजसिंह
विरमदेव सोनिगरा
राजा भोज
राजा हर्षवर्धन बैस
बन्दा सिंह बहादुर
इन जैसे महान योद्धाओं को नही पढ़ाया/बताया जाता है, जिनके नाम के स्मरण मात्र से ही शत्रुओं के शरीर में आज भी कंपकंपी शुरू हो जाती है।🚩💐🙏🏻

बच्चों का कोडिंग टैलेंट देख दुनिया हैरान है

कभी यह कहा जाता था कि कोडिंग यानी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज लिखना बच्चों का खेल नहीं, पर आज छोटी उम्र के अन्विता विजय, तन्मय बख्शी आदि जैसे बच्चों का कोडिंग टैलेंट देख दुनिया हैरान है। आप भी चाहें, तो घर बैठे ऑनलाइन कोडिंग सीखकर अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।


कोडिंग एक प्रकार की भाषा है. जिससे हम कंप्यूटर से बातचीत कर सकते हैं, इंस्ट्रक्शन दे सकते हैं. याने कंप्यूटर जो भाषा समझता है. उसे हम कोडिंग कहते हैं. कोडिंग के मदद से हम मोबाइल एप्स, सॉफ्टवेयर तथा वेबसाइट बना सकते हैं.

मेलबर्न की रहने वाली भारतीय मूल की अन्विता विजय केवल 9 साल की हैं लेकिन ऐप्स डेवलपर्स के बीच एक जाना- पहचाना नाम हैं। अन्विता अब तक दो ऐप्स 'स्मार्टकिंस एनिमल" और 'स्मार्टकिंस रेनबो कलर्स" डेवलप कर चुकी हैं। इसी तरह कनाडा में रहने वाले 12 वर्षीय तन्मय बख्शी की भी इन दिनों खूब चर्चा है। उन्होंने 5 साल की उम्र से ही कम्प्यूटर प्रोग्राम्स बनाने शुरू कर दिए थे। आज वे जाने-पहचाने डेवलपर के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। तन्मय के नए एल्गोरिदम को दुनिया के पहले एनएलक्यूए (नैचुरल लैंग्वेज क्वेश्चंस आंसरिंग) सिस्टम के रूप में देखा जा रहा है। अगर कोडिंग सीखने का आपका भी मन कर रहा है, तो यहां दिए जा रहे कुछ खास प्लेटफॉर्म्स आपकी मदद कर सकते हैं

कोडकेडमी

कोडिंग सीखनी है, तो यह काफी लोकप्रिय वेबसाइट है। इसकी मदद से करीब 2.5 करोड़ लोग कोडिंग सीख चुके हैं। इस साइट के साथ अच्छी बात यह है कि इसका इंटरफेस काफी सिंपल है और कोर्स को अच्छे से डिजाइन किया गया है। यहां कोडिंग सीखने के लिए केवल साइनअप करना होगा। आप अपने गूगल या फिर फेसबुक अकाउंट से भी साइनअप कर सकते हैं। यहां पर आप एचटीएमएल, सीएसएस, जावा स्क्रिप्ट, पीएचपी जैसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के बारे में सीख सकते हैं। कोड के बारे में विस्तार से बताने के साथ-साथ यहां इंस्ट्रक्शन भी दिए गए हैं। अगर कोड लिखने के दौरान कुछ गलत हो जाता है, तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। आपको हिंट्स मिलते रहेंगे। यहां पर आप कोडिंग सीख चुके लोगों की सक्सेस स्टोरी भी पढ़ सकते हैं।

कोडएवेंजर्स

आपके लिए कोडएवेंजर्स भी एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। यहां पर भी प्रोग्रामिंग कोर्स को अच्छी तरह से डिजाइन किया गया है। इसकी मदद से आप वेबसाइट, ऐप्स और गेम बनाना सीख सकते हैं। कोर्स को बिगिनर्स को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। शुरुआत में केवल उन्हीं चीजों के बारे में बताया जाता है, जिनकी जरूरत कोड सीखने के लिए होती है। इस दौरान इंस्ट्रक्शंस भी मिलेंगे, जिससे आपके लिए कोडिंग करना आसान हो जाता है। यहां आप कोड के साथ खेलकर देख सकते हैं कि उसका तुरंत प्रभाव किस तरह का होता है। इस साइट पर अभी एचटीएमएल, सीएसएस, जावा स्क्रिप्ट, पाइथन, जेक्वैरी, रूबी जैसे प्रोग्रामिंग लैंग्वेज कोर्स उपलब्ध हैं।

कोडस्कूल

अगर आपको कोडिंग की इन-डेप्थ नॉलेज चाहिए, तो इस साइट पर साइनअप कर सकते हैं। यहां एचटीएमएल, सीएसएस, जावा स्क्रिप्ट, रूबी, पाइथन, आईओस, जीआईटी, डाटाबेस, इलेक्टिव्स आदि के बारे में सीख सकते हैं। कोर्स मटेरियल के साथ स्टेप-बाय-स्टेप इंस्ट्रक्शंस और वीडियो लेसंस भी मिल जाएंगे। यहां उपलब्‍ध अध‍िकांश कोर्स फ्री हैं

ट्रीहाउस

यहां पर लैंग्वेज ओरिएंटेड कोर्स के बजाय प्रोजेक्ट ओरिएंटेड कोर्स ज्यादा हैं। आप वेबसाइट बनाने या फिर एप्लिकेशन डेवलप करने के लिए कोडिंग सीख सकते हैं। वेबसाइट के लिए बेसिक चीजें, जैसे टेक्स्ट एडिटर्स, एचटीएमएल टैग्स आदि के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। यहां कोडिंग से संबद्ध 1,000 से अध‍िक एक्सपर्ट्स द्वारा तैयार वीडियोज हैं। हालांकि यहां पर उपस्थित अध‍िकतर कोर्स पेड हैं

ऐप्स से भी सीखें

स्विफ्टी-लर्न हाऊ टू कोड प्रोग्रामिंग लैंग्वेज से जुड़ी बेसिक चीजों को सीखने के लिए आईट्यून से 'स्विफ्टी-लर्न हाऊ टू कोड" ऐप डाउनलोड कर सकते हैं। इसमें प्रोग्रामिंग से जुड़े इंट्रोडक्शन के अलावा, हैंड्स-ऑन ट्यूटोरियल्स भी दिए गए हैं। साथ ही, इसमें कोडिंग से संबद्ध अलग-अलग चैप्टर्स हैं।

स्क्रैच बाय एमआईटी मीडिया लैब

विजुअल बेसिक प्रोग्रामिंग सीखने के लिए यह एक उपयोगी वेब एप्लिकेशन है। इसका यूजर इंटरफेस भी काफी सरल है, जिससे कोई भी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सीख सकता है। इस एप्लिकेशन के जरिये छोटे बच्चे भी आसानी से कोडिंग सीख सकते हैं। इसमें प्रोग्रामिंग कॉन्सेप्ट के लिए वैरिएबल्स, कंडीशनल्स और लूप्स जैसे ऑप्शंस दिए गए हैं। इसके लिए लेटेस्ट ब्राउजर के साथ एडोब फ्लैश प्लेयर 10.2 या उससे ऊपर के वर्जन की जरूरत होगी।

हॉप्सकोच

यह ऐप्स आईओएस डिवाइस के लिए फ्री में उपलब्‍ध है। इसकी मदद से बेसिक प्रोग्रामिंग सीखना काफी आसान हो जाता है। इसमें प्री-बिल्ट ब्लॉक्स हैं, जिनके जरिये छोटे-छोटे प्रोग्राम्स बना सकते हैं। इसकी मदद से यूजर एंग्री बर्ड्स जैसे गेम भी क्रिएट कर सकते हैं

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Ankur kumar


मेने राजस्थान पत्रिका में चीन के बच्चो के बारे में एक खबर पड़ी थी।। वो लोग कितने आगे की सोच रहे है।और हम अभी भी नजर दोष, बच्चो को लांघने से छोटे होने जैसे बेबुनियादी मामलो में उलझे हुए है।। इनसे कुछ भी नही होता है ।लंबाई तो डीएनए ओर जीन ,तथा वातावरण और खानपान के ऊपर निर्भर करती है ।। बाकी ओर कोई चीज इसे प्रभावित नही कर सकती है।

इसमे लोग वहाँ के बच्चो को टयूशन में कोडिंग सिखाने भेजते है। अब वो लोग कितने आगे की सोच रहे है ।।और हम भारतीय है कि अभी तक भी अंधविश्वास में उलझे हुए है।।

आप निशिन्त रहिये ऐसा कुछ नही होने वाला।।

बस अच्छा खानपान और बीमारियों से बचाव रखिये ।।आपका बच्चा आप लोगो से भी लंबा ही होगा ।।


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बच्चों को कंप्यूटर कोडिंग सीखनी चाहिए क्योंकि

आखिर आप और हम जैसे आम लोग भी कोडिंग क्यों नहीं सीख सकते?

दरअसल हर व्यक्ति कोड करना जानता ही नहीं हैं, एवं आज भी ये ज्ञान केवल इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों तक ही सीमित है। हमें इस सवाल पर विचार करना चाहिए की आखिर आप और हम जैसे आम लोग भी कोडिंग क्यों नहीं सीख सकते?

मुझे लगता है की अभी तो हर व्यक्ति को कोडिंग आना ही चाहिए एवं छोटे बच्चों को ये शिक्षा प्रारंभिक तौर पर विद्यालयों में ही दी जानी चाहिए।

आप शायद सोच रहे होंगे की ऐसा क्यों?

दरअसल, कोडिंग सही मायने में लाभदायक तब होती है जब उसकी मदद से आप आदमी अपने कामों को आसानी से कर सके| ऐसा कर पाने के लिए कंप्यूटर को सटीक तरीके से ये बताना होता है की हम उससे क्या चाहते हैं| जो भी व्यक्ति ये काम अच्छे से कर सके, हम लोग उसे एक अच्छा कोडर मानते हैं। परन्तु जो व्यक्ति कोडिंग में अच्छा हो, ज़रूरी नहीं की वो बाकी विषयों में भी जानकार हो।

उदहारण के तौर पर, यदि किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट को उसके ऑफिस में एक नया सॉफ्टवेयर लगवाना हो, तो उसे एक कोडिंग एक्सपर्ट को अपनी ज़रूरतें समझानी होंगी। लेकिन उस कोडिंग वाले व्यक्ति को ये ज़रूरतें समझने के लिए एकाउंटिंग का ज्ञान होना चाहिए। तब जाकर ये वार्तालाप अच्छे से हो सकेगा। अब समझिये की इस पूरी व्यवस्था में, न सिर्फ उसे कोडिंग आना चाहिए, बल्कि नए नए विषय भी समझ में आना चाहिए, तभी वह व्यक्ति सही तरीके से कंप्यूटर को ज़रूरतें समझा सकेगा। क्या आपको नहीं लगता की ये एक चुनौती भरा कार्य है?

उसकी बजाय, यदि हर व्यक्ति थोड़ी थोड़ी कोडिंग कर सके, तो वह अपनी ज़रूरतों को और भी सटीक तरीके से कंप्यूटर को बता सकेगा, एवं ऐसा करने से उसका कार्य सरल हो जायेगा |

इसको कुछ यूँ समझिये -

आज के ज़माने में मोबाइल फ़ोन कई तरह की सुविधाएं देतें हैं। परन्तु हर व्यक्ति मोबाइल चलाना नहीं जानता। अगर हर व्यक्ति अच्छे से मोबाइल चलना सीख जाये तो वो अपनी ज़िन्दगी के कई कार्य सरल कर सकता है। उसे बार बार किसी मोबाइल चलाने वाले व्यक्ति के पास जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। साधारण कोडिंग करना भी मोबाइल चलाने जैसा ही है।

 
कंप्यूटर जिस भाषा को समझता है उसे कोडिंग कहते है।ऐसे में हम जो भी काम करते है कंप्यूटर पर वो कोडिंग के माध्यम से ही होता है जहां तक बच्चो की बात है तो आई सी एस ई बोर्ड में कक्षा 5 से ही कोडिंग की पढ़ाई शुरू हो जाती है इंजीनियरिंग में तीसरे सेमेस्टर में

बच्चों को कंप्यूटर कोडिंग सीखनी चाहिए क्योंकि...

  1. प्रोग्रामिंग बच्चों को समस्या-समाधान करने में मदद करता है.
  2. कंप्यूटर प्रोग्रामिंग बच्चों को एक चुनौती देता है और उन्हें लचीलापन विकसित करने में मदद करता है.
  3. कोडिंग बच्चों को सोचना सिखाती है.
  4. एक बच्चा अपनी रचनात्मकता का विस्तार करता है जब वे सीखते हैं कि कैसे कोड करना है.
  5. कोडिंग से बच्चों को गणित के साथ मज़े लेने में मदद मिलती है.
  6. कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भविष्य है.
  7. सॉफ्टवेयर उद्योग में कौशल की कमी है.
  8. मस्ती करते हुए कोडिंग सीख रहे हैं.

आजकल तो बच्चे भी कोडिंग सिख रहे है और ऐप्प बना रहे है | बच्चो को कोडिंग सिखाना चाहते है चाहे वो क्लास 1 में हो या क्लास 10 में या +2 में आप सिखा सकते है whitehat.jr जूनियर वेबसाइट पर | यहाँ पर कोडिंग के लिए free ट्रायल मिल जायेगा | यहाँ कोडिंग सिखाया जाता है  ये एक इंडियन वेबसाइट है | यहाँ पर कोडिंग कोर्स कर सकते है |

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मुझे अपने 12 साल के बच्चे को किस coding language की सलाह देनी चाहिए जो प्रोग्रामिंग में रूचि रखता हैं?


प्रोग्रामिंग बहुत विस्तारित क्षेत्र है। 6-12 साल की उम्र में प्रोग्रामिंग के मूलभूत व सामान्य नियम / सिद्धांत सीखना उपयुक्त है। इसका मुख्य कारण यह है कि किसी भी छोटे से लेकर बड़े प्रोग्राम तक में भी मूलभूत नियम में गलती, सम्पूर्ण प्रोग्राम को त्रुटिमय बना देती है फलस्वरूप प्रोग्राम कम्पाइल नही हो पाता। साथ ही अन्य उच्च स्तरीय प्रोग्राम भी इन्ही सिद्धांतों से शुरू किए जाते है।

शुरुआत में सी ++ एवं एचटीएमएल (C++ and HTML) सीखने की सलाह दी जाती है क्योंकि C++ से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के प्रोग्राम बनाये जाते है जबकि HTML से वेब डवलपमेंट के प्रयोग बनाये जाते है। दोनो ही अपने क्षेत्र में मूलभूत आधार तैयार करने के लिए उत्तम है।

बाद में यदि कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में विस्तारपूर्वक एवं गहराई से अध्ययन करना हो तो Python, Rubi, Java, C#, SQL इत्यादि का अध्ययन किया जा सकता है। तथा यदि वेब डवलपमेंट में विस्तारपूर्वक एवं गहराई से अध्ययन करना हो तो PHP, CSS, JavaScript, Advance Java इत्यादि का अध्ययन किया जा सकता है।

आप उसे एंड्रॉयड प्रोग्रामिंग सीखा सकते हैं।
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Ankur kumar

मेरी बात मानो, उसे Android Studio सिखाओ।

इसके दो फायदे हैं।

पहला, इसकी मदद से Android के apps बनते हैं। WhatsApp, Hotstar, Evernote, ShareIT आदि जैसे अनेक apps Android Studio पर ही बने हैं। इससे एक बात तो साफ है - C++ या HTML का जिस तरह scope खत्म हो रहा है, भविष्य में Android Studio का scope खत्म नहीं होगा।

और दूसरा, इसमे काम करने के दो तरीके हैं — कोड लिखना…

…और मेरा मनपसंद, सीधा बटन, textbox आदि उठा उठाकर स्क्रीन पर डाल देना!

तो ये आसान भी है। इसलिए ही तो सब इसका इस्तमाल करते हैं।

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