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रविवार, 28 अप्रैल 2024

मोदी के तेवर बदल गयें हैं और भाषण भी, क्या मोदी भटक गए हैं ? या भटक गए थे?

 

मोदी के तेवर बदल गयें हैं और भाषण भी, क्या मोदी भटक गए हैं ? या भटक गए थे?

लोकसभा चुनाव के पहले दौर के मतदान के तुरंत बाद मोदी की भाषा और शैली अचानक बदल गई और उन्होंने कांग्रेस के घोषणापत्र से मुस्लिम तुष्टीकरण से संबंधित कई तथ्यों पर जनता के सामने खुलकर अपनी बातें रखी. जब उन्होंने कहा कि कांग्रेस पिछड़े और दलितों का आरक्षण छीन कर मुसलमानों को देना चाहती है, तो खलबली मच गई. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस आर्थिक सर्वेक्षण करवाकर सम्पन्न लोगों का धन घुसपैठियों में बांटना चाहती है तो सहसा लोगों को विश्वास नहीं हुआ. उसके बाद राहुल गाँधी के सलाहकार सैम पित्रोदा, जो उनके पिता राजीव गाँधी के मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक थे, ने विरासत टैक्स का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अमेरिका में जब कोई व्यक्ति मरता हैं तो उसकी संपत्ति का 55% हिस्सा सरकार ले लेती है. भारत में ऐसा टैक्स नहीं है, जिसके लिए योजना बनाई जा सकती है. पूरा देश सन्न रह गया. राहुल गाँधी ने हाल ही में तेलंगाना की एक सभा में भाषण देते हुए कहा था वह केवल जातिगत जनगणना नहीं करायेगे, वह आर्थिक और संस्थागत सर्वेक्षण भी करवाएंगे जो देश का एक्स रे होगा, जिससे पता चल सकेगा किसके पास कितनी संपत्ति है, किसकी कितनी हिस्सेदारी है. इसके बाद वह क्रांतिकारी कदम उठाएंगे. प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस के घोषणापत्र, राहुल गाँधी के भाषण और सैम पित्रोदा के बयान की कड़ियां जोड़ते हुए मुस्लिम तुष्टीकरण, दलितों और पिछड़ों का आरक्षण छीन कर मुस्लिमों को देने और सम्पन्न लोगों द्वारा मेहनत से कमाई गई संपत्ति को घुसपैठियों में बांटने का मुद्दा जोर शोर से उठाया. इसके बाद तो चुनावी मैदान का पूरा परिदृश्य बदल गया.

जहाँ विपक्ष इसे ध्रुवीकरण करने की कोशिश बता रहा था, वही मोदी भक्त गदगद थे और सोशल मीडिया पर चर्चा कर रहे थे कि असली मोदी वापस आ गए हैं. यह सही है कि मोदी जिन वादों और इरादों के साथ पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आए थे, उन्हें धीरे धीरे भूलने लगे थे. सबका साथ, सबका विकास तक तो ठीक रहा लेकिन जब से यह “सबका साथ, सबका विकास, सब का विश्वास और सब का प्रयास” बन गया, लोग हैरान भी थे और परेशान भी, जो धीरे धीरे उदासीनता में बदल रही थी. पहले चरण के कम मतदान से यह स्पष्ट रूप से दिखाई भी पड़ा. कहना मुश्किल है कि प्रधानमंत्री मोदी के अचानक इस बदले व्यवहार का कारण क्या है, क्योंकि अब तक मोदी सिर्फ और सिर्फ विकास की बात करते रहे हैं और भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की बात करते रहे हैं. इसलिए इस पर सियासत तो होगी. सामान्यतः सभी राजनैतिक दल मुस्लिमों के विरुद्ध कोई भी बयान देने से बचते हैं, चाहे मामला देश के लिए कितना ही महत्वपूर्ण क्यों न हो. अनेक अवसरों पर राजनीतिक स्वार्थ के लिए तुष्टिकरण की पराकाष्ठा पार करते हुए राष्ट्रीय हितों की बलि चढ़ाने में भी कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों ने संकोच नहीं किया. इसका परिणाम ये हुआ कि बहुसंख्यक हिंदू अपने ही देश में दोयम दर्जे का नागरिक बन गए हैं. क्या कोई कांग्रेस द्वारा बनाए गए पूजा स्थल कानून, वक्फ बोर्ड कानून, और अल्पसंख्यक आयोग कानून को भूल सकता है. गनीमत इतनी रही कि कांग्रेस अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में सांप्रदायिक हिंसा कानून पारित नहीं करवा सकी अन्यथा हिंदुओं की स्थिति कितनी बदतर हो चुकी होगी उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती.

प्रधानमंत्री मोदी का यह आरोप बहुत गंभीर हैं कि कांग्रेस पिछड़ों और दलितों का आरक्षण छीन कर मुस्लिमों को देना चाहती है. राजनीति की विडंबना देखिए कि पिछड़ों की राजनीति करने वाले और जातिगत जनगणना की जोरशोर से मांग करने वाले क्षेत्रीय दल इस मामले पर पूरी तरह चुप हैं लेकिन दलितों और पिछड़ों में बेचैनी स्पष्ट देखी जा सकती है. नेहरू गाँधी का मुस्लिम प्रेम किसी से छिपा नहीं है. यद्यपि नेहरु ने मुसलमानों को धार्मिक आधार पर आरक्षण देने का समर्थन नहीं किया था लेकिन कांग्रेस इस मोहपाश से कभी बाहर नहीं आ सकी और 1960 से ही इस दिशा में प्रयासरत हैं. इसका पहला प्रयोग अविभाजित आंध्र प्रदेश में किया गया जब 1994 में कांग्रेसी मुख्यमंत्री विजय भास्कर रेड्डी ने बड़ी चालाकी से बिना कोटा निर्धारित किए मुसलमानों की कुछ जातियों को सरकारी आदेश से ओबीसी में शामिल कर दिया. इससे हिन्दू ओबीसी वर्ग का लाभ अपने आप कम हो गया. 2004 में कांग्रेसी मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी ने मुसलमानों को 5% कोटा निर्धारित करते हुए ओबीसी वर्ग में आरक्षण दे दिया, जिसे उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया क्योंकि इससे आरक्षण की सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित 50% की सीमा पार हो गयी थी. 2005 में आंध्र प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने फिर एक बार विधानसभा में अधिनियम पारित करके शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में मुसलमानों के लिए ओबीसी के अंतर्गत 5% का कोटा निर्धारित कर दिया. इसे आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के पांच न्यायाधीशों की खंडपीठ ने रद्द कर दिया.

इसके बाद भी कांग्रेस नहीं रुकी और 2007 में मुसलमानों की 14 श्रेणियों को ओबीसी की मान्यता देते हुए 4% कोटा निर्धारित कर दिया और इसके लिए अध्यादेश जारी कर दिया लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर रोक लगाते हुए सरकार की गंभीर आलोचना की. 2014 में तेलंगाना के गठन के बाद टीआरएस के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने मुसलमानों के लिए आरक्षण का कोटा बढ़ाते हुए 12% करने का प्रस्ताव विधानसभा में पारित किया और इसे केंद्र सरकार की अनुमति के लिए भेजा जिसे भाजपा सरकार से अनुमति नहीं मिल सकी. इसके बाद कांग्रेस की कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश की सरकारों ने समय समय पर मुसलमानों की अनेक जातियों को बिना कोटा निर्धारित किए ओबीसी वर्ग में शामिल कर दिया, जिसके अंतर्गत उन्हें आज भी आरक्षण प्राप्त हो रहा है. इससे हिंदू समुदाय के ओबीसी वर्ग का आरक्षण अपने आप कम हो गया, और उन्हें खासा नुकशान हुआ. हाल ही में बिहार की बहु प्रचारित जातिगत सर्वे में समूचे मुस्लिम समुदाय को पिछड़े वर्ग में शामिल किया गया था जिसके आधार पर भविष्य में इन्हें ओबीसी श्रेणी के अंतर्गत बिना कोटा निर्धारित किए आरक्षण देने की मंशा रही होगी.

कांग्रेस ने 2004 के अपने घोषणापत्र में लिखा था कि उसने कर्नाटक और केरल में मुसलमानों को शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में इस आधार पर आरक्षण दिया है कि वे सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं. कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर भी मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में इस तरह की सुविधा प्रदान करने के लिए कृत संकल्पित है. 2009 के कांग्रेस के चुनाव घोषणापत्र में भी इस वायदे को दोहराया गया है. 2014 के घोषणापत्र में भी कांग्रेस ने लिखा था कि कांग्रेस के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार ने सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े अल्पसंख्यकों को शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के मामले में कई कदम उठाए हैं. सरकार न्यायालय में लंबित इस मामले की प्रभावी ढंग से पैरवी करेगी और सुनिश्चित करेगी कि उचित कानून बनाकर इन नीति को राष्टीय स्तर पर लागू किया जाए. इससे बिलकुल स्पष्ट है कि मुसलमानों को आरक्षण देना कांग्रेस की सोंची समझी नीति है, जिस पर दशकों से काम किया जा रहा है.

जहाँ तक लोगों की संपत्ति छीनकर बांटने का प्रश्न है, कांग्रेस का अतीत इस मामले में भी बहुत दागदार है. 1953 में जवाहर लाल नेहरू ने सम्पदा शुल्क अधिनियम लागू किया था जिसमें जिसमें विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत अधिकतम 85% तक शुल्क वसूला जाता था. यानी मालिक की मृत्यु के बाद संपत्ति का 85% भाग सरकार हड़प लेती थी. यह कानून तीन दशक तक चलता रहा और राजीव गाँधी ने इसे तब समाप्त किया जब उन्हें इंदिरा गाँधी की परिसंपत्तियां मिलनी थी. राहुल गाँधी ने अपने कई भाषणों में इस ओर संकेत किया था और जिस एक्स रे की बात राहुल गाँधी कर रहे थे उसका खुलासा उनके सलाहकार सैम पित्रोदा ने कर दिया. यद्यपि कांग्रेस ने उनका निजी विचार बताते हुए मामले को दबाने की कोशिश की लेकिन लोग चिंतित हैं और सियासत गर्म हो गयी है.

बहुत कम लोगों को याद होगा कि प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी जो वित्त मंत्री भी थीं ने आयकर का बोझ इतना बढ़ा दिया था कि वह सरचार्ज सहित 97.75% पहुँच गया. पत्रकार वार्ता में जब उनसे पूछा गया कि आयकर का इतना बोझ लोग और कंपनियां कैसे सह पाएंगी तो उनके वित्त सचिव ने जवाब दिया था कि अभी भी 2.25% आय तो बच रही हैं. यहीं से कालेधन की अर्थव्यवस्था की शुरुआत हुई जिसने देश की प्रगतिशील और ईमानदार अर्थव्यवस्था का गला घोंट दिया और देश को कई दशक पीछे धकेल दिया. इसके बाद इंदिरा जी ने वामपंथियों के दबाव में उद्योगों का अंधाधुंध राष्ट्रीयकरण किया जिसने देश की अर्थव्यवस्था की जड़ें हिला दी. कपड़ा मिलों के अधिग्रहण और उन्हें मिलाकर राष्ट्रीय कपड़ा निगम बनाने की सनक ने देश में औद्योगिक वातावरण चौपट कर दिया. सरकार को अरबों रुपए का निवेश इन बीमार मिलों में करना पड़ा, जो नहीं चल सकी और अंत में कौड़ियों के मोल बेचनी पड़ी जिससे देश का अरबों रुपया स्वाहा हो गया.

अगर दोपहर का भूला शाम को वापस आ गया है तो उससे नाराज नहीं होना चाहिए बल्कि उसे इतना संबल देने की आवश्यकता है कि वह फिर भटकने न पाये. इसी में आपका भला और सबकी भलाई है.

आज आवश्यकता इस बात की है के सभी मतदान करना सुनिश्चित करें क्योंकि आपका एक वोट आपका ही नहीं आपके राष्ट्र का भविष्य तय करेगा. महंगाई बेरोजगारी, जाति पांति और मुफ्तखोरी से ऊपर उठकर वोट करें. सोच समझकर वोट करें, और देश के लिए वोट करें. देश बचेगा तो ही आप बच सकेंगे और सनातन संस्कृति भी बच सकेगी.

ममता बनर्जी - मोदी जी.ऐक बात शे बाहुत तौकलीफ हुआ.आप G20 का डिनौर में केजरीवाल शाहब को नौई बुलाया.औच्छा नहीं लगा बिल्कुल.

 

ममता बनर्जी - मोदी जी.ऐक बात शे बाहुत तौकलीफ हुआ.आप G20 का डिनौर में केजरीवाल शाहब को नौई बुलाया.औच्छा नहीं लगा बिल्कुल.

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मोदी - अरे दीदी. मैं बुलाना चाहता था. बहुत मन था पर इसकी हरकतें ऐसी हैँ कि क्या करूँ.    पिछली बार ऑल पार्टी मीट के बाद डिनर पर बुलाया था. वहाँ इसने सबका जीना हराम कर दिया.शिकायत पे शिकायत.

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बटर पनीर में बटर नहीं दिख रा..अडानी के रिफाइंड आयल में बनाया है शायद.

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दाल मखनी बहुत गाढ़ी है. खाने में मेहनत करनी पड़ री है.

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दाल में नमक कम है. (( इसे नमक दिया, इसने खुद नमक अपनी दाल में डाला. फिर थू थू करके बोला दाल में नमक ज्यादा है.मैं नी खा रा.))

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चुर-चुर नान में से चुर चुर की आवाज नी आरी.तंदूर वाला कोयले में कमीशन खा गया.

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गाजर के हलुवे में से किसमिस गायब हैँ.मोद्दी जी ने सारे अडानी अम्बानी को खिला दिए.

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मुझे जो दही भल्ले दिए उनमें भल्ले दही में आधे ही डूबे हुए थे.जबकि हर पूर्ण राज्य के मुख्यमंत्री का भल्ला पूरा दही में डूबा था. दिल्ली से इतनी नफरत क्यों मोद्दी जी??

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हर 15 में से एक गोलगप्पा फूटा हुआ है.पूरे 7% कमीशन खाई गई है इसमें.

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खुद चिकन चिली उठाकर खाया और फिर चिल्लाया... मोद्दी जी ने मेरा धरम भ्रष्ट कर दिया. चिली पनीर की जगह चिली चिकन खिला दिया. हर जगह धांधली है.

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प्लेट बहुत भारी हैँ. खड़े खड़े खाने से हाथ थक रे हैँ.

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मुझको चम्मच छोटा वाला दिया मोद्दी जी ने ताकि मैं ठीक से ना खा सकूं (( जबकि चम्मच इसने खुद ली थी क्रॉकरी टेबल से.))

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वेटर सबको बांटते हुए जाता है. मेरे पास आते ही बोलता है कि ख़त्म हो गया.दोबारा लेकर आता हूँ.मैं भी चीफ मिनिस्टर हूँ.((फिर जब वेटर दोबारा लेकर आया तो ये वहाँ से गायब हो गया.))

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आलू गोभी की सब्जी में आलू ज्यादा हैँ.आलू गोभी से ज्यादा गले हैँ. भेदभाव की तो आदत है ही मोद्दी जी की.

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फिंगर बाउल में हाथ डुबाते ही चिल्लाया.... आआआआ !!!! उबलता हुआ पानी दे दिया मोद्दी जी ने ताकि मेरे हाथ जल जाएँ.

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वेट टिश्यू में मॉइस्चर लेवल कम है. सूखे सूखे से लग रे हैँ.भ्रष्टाचार हुआ है इसमें.

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सौंफ के साथ मिश्री नहीं है.ये कैसा मुखवाश हुआ.

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सुनीता और बच्चों के लिए खाना पैक करने को बोला तो प्लास्टिक की थैलियों में डाल के दे दिया.मैं क्या भिखारी हूँ??

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मोदी -अब बताओ दीदी मैं क्या करूँ??

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ममता - बोकाचो** है शाला...

भगवान मोदी को सद्बुद्धि दें जो 75 साल की आयु में यह सोचते हैं कि ट्रिपल तलाक कानून बनने से मोमिनाएं और सरकारी सहायता मिलने से पसमांदा मोमिन भाजपा को वोट देने लगेंगे ।वोट दे भी दें तब भी देश विरोधी मानसिकता तो नहीं बदलने वाली है ।

 

जब भी चुनाव होते हैं तो पत्रकार वोट दे कर निकले आम मुस्लिमों से पूछते हैं कि किस मुद्दे पर वोट दिया , किसको दिया ।

जो उत्तर मिलते हैं उनसे इनकी देश के प्रति मानसिकता साफ हो जाती है । इनमें से सभी मोदी , भाजपा से दिल से नफरत करते हैं लेकिन उसको सीधे बयान करने की जगह घुमा फिरा कर कहते हैं कि वोट राहुल गांधी या तेजस्वी यादव या अखिलेश यादव को दिया है क्योंकि मंहगाई बढ़ रही है , रोजगार नहीं मिलता है , वह मुस्लिमों की सुरक्षा करेगी, दस साल हो गए हैं बदलाव होना चाहिए आदि ।

जबकि भाजपा ने ही इनके लिए फ्री राशन, फ्री गैस, फ्री मकान और अल्पसंख्यक कल्याण योजनाएं देश भर में चला रखी हैं जिसका तीन लाख करोड़ हर साल इनके हिस्से में आता है और फिर भी इनकी गरीबी दूर नहीं होती है ।

गरीबी दूर क्यों नहीं होती , क्योंकि हर महिला के आज भी पांच छह बच्चों से कम नहीं होते हैं और इसका कारण वह अल्लाह की देन मानते हैं लेकिन गरीबी बेरोजगारी का कारण मोदी को । पाकिस्तान , बांग्लादेश इसी आबादी के बढ़ने से अपनी जनता को खाना नहीं खिला पा रहे हैं लेकिन भारत में तीस करोड़ मुस्लिम मुफ्त सरकारी सहायता का जबरदस्त फायदा ले कर अपनी तादाद लगातार बढ़ा कर गजवाए हिंद की ओर बढ़ रहे हैं ।


इनकी जेहादी सोच पूरी दुनियां में ही ऐसी ही है । यह पाकिस्तान के मिनिस्टर का बयान पढ़िए आबादी पर ।

पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री अब्दुल कादिर ने ऐसा बेतुका बयान दिया है कि जिससे सरकार की सोच का स्तर पता चलता है और यह भी कि मंत्रियों की उस सोच पर कट्टरपंथी कितने हावी हैं। कादिर ने आबादी बढ़ाने का ऐसा ‘सुझाव’ दिया है कि उस पर बहस छिड़ गई है।

अपने यहां आबादी पर काबू करने के लिए पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री की वह सलाह है कि ‘जिन देशों में मुसलमान कम हैं वहां जाकर बच्चे पैदा किए जाएं’। स्वास्थ्य मंत्री अब्दुल कादिर पटेल ने आबादी बढ़ाने को लेकर ऐसा सुझाव दिया है, जिस पर विवाद पैदा हो गया है। उन्होंने कहा है कि अगर लोग ज्यादा बच्चे पैदा करना चाहते हैं तो उन देशों में चले जाएं जहां मुसलमान कम हैं। इससे उन देशों में मुस्लिम आबादी बढ़ेगी। यानी परोक्ष रूप से कादिर ‘सुझाव’ दे रहे हैं कि पाकिस्तान के मुसलमान ‘गैर मुस्लिम’ देशों में जाकर वहां मुसलमानों की तादाद बढ़ाएं और वहां ‘पाकिस्तान’ बसा दें।

उन्होंने आगे कहा कि ‘पाकिस्तान की आबादी साल 2030 तक 28.5 करोड़ हो जाएगी, जो उनके लिए खतरे की घंटी है। हम मुसलमान कम नहीं करना चाह रहे। उन्हें बेहतर बनाना चाह रहे हैं। हम मुसलमान को तालीमयाफ्ता, सेहतमंद बनाना चाहते हैं। कुछ लोग हमारी इस बात का विरोध करते हैं कि अल्लाह दे रहा है और हम बढ़ा रहे हैं। तो मेरा कहना है कि आप किसी ऐसे मुल्क में जाकर इतने बच्चे पैदा करो जहां मुसलमान अल्पसंख्यक हों’।

पाकिस्तान में इस वक्त आबादी 2.5 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। पाकिस्तान अपनी इस बढ़ती आबादी और उसकी तुलना में सिकुड़ते संसाधनों को लेकर संकट में है। वहां की सरकार कट्टरपंथियों की धमक के चलते जनसंख्या नियंत्रण का कोई ​कदम उठाने में हिचकती रही है। इसलिए इस तरफ उसे कोई कारगर तरीका नहीं सूझ रहा है। लेकिन कादिर ने अपना उक्त सुझाव देकर संभवत: अपने जिहादी सोच वाले आकाओं को भी खुश किया है।

यह कोई छुपा तथ्य नहीं है कि जहां भी मुस्लिम आबादी बढ़ी है वहां अराजकता और जिहादी सोच का विस्तार हुआ है। यूरोप के कई देश इस समस्या से जूझ रहे हैं। फ्रांस सहित कुछ देशों ने तो जहरीली सोच फैलाने वाले कट्टर इस्लाम को काबू करने के कड़े कदम उठाने शुरू भी कर दिए हैं। लेकिन कनाडा, स्वीडन जैसे देशों में मुस्लिमों ने अपनी तादाद इतनी बढ़ा ली है कि वे वहां की सरकार के फैसलों पर प्रभाव डालने की स्थिति में आ चुके हैं।

मुस्लिमों की बढ़ती तादाद से परेशान पश्चिमी देशों में आज इस्लामी कायदे लागू करने की मांगें उठाई जा रही हैं। दुनिया के किसी भी कोने में मुस्लिमों को चुभने वाला कोई भी मुद्दा उठता है तो सात समंदर पार तक की सरकारों और नागरिकों की नाक में दम कर दिया जाता है। सभ्य समाज अब इस हरकत को नासूर मानने लगा है और मुस्लिमों से नजदीकी बढ़ाने से बचता दिख रहा है।


इस वीडियो में 26 साल की मोमिना के छह बच्चे हैं , उसकी मां के दस बच्चे थे जिसमें आठ के ऐसे ही बच्चे हैं । इनको एनआरसी के बारे में पता है । और इनकी उम्मीद तेजस्वी यादव , अखिलेश यादव और राहुल गांधी से है जो इनको अपने एजेंडे को बढ़ाने में और मदद करेंगे तो वोट इनको ही मिलेगा ।

भगवान मोदी को सद्बुद्धि दें जो 75 साल की आयु में यह सोचते हैं कि ट्रिपल तलाक कानून बनने से मोमिनाएं और सरकारी सहायता मिलने से पसमांदा मोमिन भाजपा को वोट देने लगेंगे ।वोट दे भी दें तब भी देश विरोधी मानसिकता तो नहीं बदलने वाली है ।

वह इस वीडियो को जरूर देखें । शायद देख भी लिया हो क्योंकि यह पहले चरण का वीडियो है इसीलिए उन्होंने चुनाव में अपना भाषण इन पर केंद्रित किया है ।

इस देश में सबसे पहले जनसंख्या कानून ला कर दो बच्चों से अधिक होने पर सभी सरकारी सब्सिडी समाप्त करने की जरूरत है और वोट का अधिकार निलंबित करने की जरूरत भी है ।

सामान्य तौर पर एकादशी के दिन चावल नहीं खाई जाती है परंतु…… जगन्नाथ पुरी में एकादशी को लेकर यह नियम मान्य क्यों नहीं…….

 

क्या हमें एकादशी के दिन अन्न नहीं ग्रहण करना चाहिए ?

सामान्य तौर पर एकादशी के दिन चावल नहीं खाई जाती है परंतु……

जगन्नाथ पुरी में एकादशी को लेकर यह नियम मान्य क्यों नहीं…….

और क्या एकादशी के दिन चावल खाने का पाप जगन्नाथ पुरी के लोगों को नहीं लगता तो बता दें कि सिर्फ एकादशी के दिन चावल खाना ही नहीं बल्कि व्रत में चावल खाना भी यहां मान्य है….

इसके पीछे एक पौराणिक कथा जिसके अनुसार, एक बार ब्रह्म देव स्वयं जगन्नाथ पुरी भगवान जगन्नाथ का महा प्रसाद खाने की इच्छा से पहुंचे लेकिन तब तक महाप्रसाद समाप्त हो चुका था। मात्र एक पत्तल में थोड़े से चावल के दाने थे जिसे एक कुत्ता चाट-चाटकर खा रहा था…

ब्रह्मदेव

भक्ति भाव में इतने डूब गए थे कि जगन्नाथ भगवान का महाप्रसाद खाने की लालसा में उन्होंने उस कुत्ते के साथ बैठकर ही चावल के बचे-कुचे चावलों को खाना शुरू कर दिया। जिस दिन यह घटना घटित हुई उस दिन संयोग से एकादशी थी।

ब्रह्म देव का भक्ति भाव देख जगन्नाथ भगवान स्वयं प्रकट हुए और ब्रह्म देव को इस तरह बिना किसी ऊंच-नीच के कुत्ते के साथ उनके महाप्रसाद का चावल खाते देख बोले कि आज से मेरे महाप्रसाद में एकादशी का नियम लागू नहीं होगा….

बस उसी दिन से जगन्नाथ पुरी में एकादशी हो या कोई अन्य तिथि भगवान जगन्नाथ के महाप्रसाद पर किसी भी व्रत या तिथि का प्रभाव नहीं पड़ता है….

यह मैंने स्वयं देखा अपनी आंखों से वृंदावन में एकादशी के दिन भगवान को महाप्रसाद लगता है फल और अन्न का

तो क्या उसे दिन भगवान का प्रसाद फल अन्नन्के रूप में खाना भी वर्जित है???? कैसी लगी कहानी ???

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केरल के ईसाई तो "जाग गए", यानी कुछ समय पहले खुलकर "लव जेहाद" के विरोध में उतर आए हैं... लेकिन "तथाकथित प्रगतिशील हिन्दू" (यानी शतुरमुर्ग) अभी भी रेती में अपना सिर घुसाए, तूफ़ान की तरफ अपना पिछवाड़ा करके खड़े हैं।

 

केरला स्टोरी वाली घटना यानी लव जिहाद में या दूसरे तरीकों से किशोरावस्था में हिंदू लड़के और लड़कियों का ब्रेनवाश करके उन्हें अपने इस्लाम के जाल में फंसा कर उन्हें या तो बच्चा पैदा करने वाली फैक्ट्री बना देना या फिर आतंकी बना देना यह सब कुछ सिर्फ केरल में नहीं हुआ इन लोगों ने यह प्रयोग श्रीलंका में भी किया था।

आप लोगों को 2018 में कोलंबो और उसके आसपास हुए सीरियल ब्लास्ट वाली घटना याद होगी जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे।

इस घटना को लव जिहाद में फंसकर हिंदू से मुसलमान बनी एक लड़की ने अंजाम दिया था।

इस घटना के बाद श्रीलंका सरकार ने जब जांच के आदेश दिए जब श्रीलंका में ऐसी कुल 100 से ज्यादा लड़कियों का पता चला जो या तो बौद्ध थी या सिंघली थी या तमिल हिंदू थी जिन्हें एक संगठित गिरोह ने लव जिहाद में फंसा कर मुसलमान बना दिया था।

श्रीलंका के मुस्लिम मौलवी उसकी ट्रेनिंग लेने केरल के उसी बदनाम कन्वर्जन सेंटर में आए थे जिसे लव जिहाद की फैक्ट्री कहा जाता है।

इसके बाद श्रीलंका सरकार ने इस पर बहुत कड़ा एक्शन लिया था और श्रीलंका में चल रहे ऐसे तमाम सेंटर को नष्ट कर दिया और 20 से ज्यादा लोगों को कड़ी धाराएं लगाकर आजीवन जेल में डाल दिया जो यह कन्वर्जन रैकेट चला रहे थे।

इतना ही नहीं श्रीलंका सरकार ने अपने देश में सभी बौद्ध धर्म गुरुओं सिंघली धर्मगुरुओं और हिंदू धर्म गुरुओं से अपील किया कि वह अपने अपने समुदाय की लड़कियों को संस्कारी बनाने और उन्हें इस बात की ट्रेनिंग दे कि वह लव जिहाद में ना फंसे और यदि कोई उनके साथ ऐसी कोशिश करता है तब उसकी जानकारी अपने माता-पिता या पुलिस को दें।

इस इस जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद ही श्रीलंका में बौद्ध और मुस्लिम दंगे भड़क गए थे जिसमें मुसलमानों पर बौद्धों ने भीषण हमले किये।

आप मित्रों ने जोम्बी फ़िल्में देखी होंगी... जिसमें खून पीने वाले जोम्बी जिस मनुष्य को काट लेते हैं, वह साधारण मनुष्य भी जोम्बी बन जाता है... और दूसरों का खून पीने लगता है... इस प्रकार यह "चेन सिस्टम" चलता जाता है।

चित्र में दिखाई गई सुन्दर कन्या का नाम है, "पुलस्तिनी राजेन्द्रन", एक तमिल हिन्दू लड़की... यह लड़की फँसी एक जोम्बी के चक्कर में... यानी लव जेहाद में... फिर क्या था!!! ये भी चली दूसरों का खून पीने... जी हाँ... पुलस्तिनी राजेन्द्रन निकाह के बाद बनी "साराह"... और यह जोम्बी हाल ही के श्रीलंका के आत्मघाती बम विस्फोटों में शामिल दर्जनों जोम्बियों में से एक थी।

केरल के ईसाई तो "जाग गए", यानी कुछ समय पहले खुलकर "लव जेहाद" के विरोध में उतर आए हैं... लेकिन "तथाकथित प्रगतिशील हिन्दू" (यानी शतुरमुर्ग) अभी भी रेती में अपना सिर घुसाए, तूफ़ान की तरफ अपना पिछवाड़ा करके खड़े हैं।

निष्कर्ष :- "खून पीने वाले जोम्बियों" से खुद भी यथासंभव दूर रहें... और अपने परिजनों को भी दूर रखें।

मित्रों आपके इलाके में यदि कोई मुस्लिम आईएएस आईपीएस है तो आपका, स्थानीय पत्रकारों का और मीडिया का सबका कर्तव्य है कि आप लोग उस पर नजर रखें

 

अभी देखा 51 शांतिदूत IAS, IPS बने है

उत्तर प्रदेश में एक सीनियर आईएएस ऑफिसर थे जिनका नाम इफ्तिखारुद्दीन था

वह बड़े पैमाने पर धर्मांतरण रैकेट चलाते थे अखिलेश यादव सरकार के दौरान वह बड़े-बड़े अहम पदों पर रहे

जब मायावती जी मुख्यमंत्री थी सब इंटेलीजेंस यूनिट ने सरकार को रिपोर्ट दिया था कि इफ्तिखारुद्दीन जिहादी प्रवृत्तियों में लिप्त है और वह हर काम में मुसलमानों का फेवर कर रहे हैं हिंदुओं की धर्मांतरण करते हैं तब मायावती जी के समय में उन्हें हमेशा साइड पोस्टिंग दिया गया हालांकि उनके ऊपर तब भी कार्रवाई नहीं हुई

अखिलेश यादव के समय में जब कानपुर मेट्रो और लखनऊ में मेट्रो का निर्माण चल रहा था तब कानपुर के मंडल आयुक्त रहने के दौरान इफ्तिखारउद्दीन भोले वाले दलितों को कहते थे कि तुम्हारा मकान और दुकान मेट्रो प्रोजेक्ट में जा रहा है कितना मुआवजा देना है वह मेरे हाथ में है यदि तुम इस्लाम कबूल कर लो तो मैं तुम्हारा मुआवजा बढ़कर 10 गुना कर दूंगा और मुआवजा बढ़ाने का लालच देकर इफ्तिखार उद्दीन ने 20 से ज्यादा दलितों का धर्मांतरण करवाया था

फिर 40 से ज्यादा दलित हिंदू सरकारी जमीन पर रह रहे थे तब उनसे इसने कहा कि तुम्हारी जमीन सरकारी है तुम्हें कोई मुआवजा नहीं मिलेगा लेकिन यदि तुम इस्लाम कुबूल करो तो मैं तुम्हें वक्फ बोर्ड से जमीन और पैसा दोनों दिलवा दूंगा जिस पर तुम मकान बना कर रह सकते हो

और इसने उन सभी दलितों का धर्मांतरण करवा कर मुस्लिम बना दिया

इसने एक किताब भी लिखी जिसका नाम हिंदुओं को धोखा देने के लिए शुद्ध भक्ति रखा है और इस किताब में इसने हिंदू देवी देवताओं का अपमान किया और एक पूरा मैन्युअल तैयार किया कि किस तरह से हिंदुओं का धर्मांतरण किया जा सके

इसके सरकारी निवास पर हमेशा बीच से ज्यादा कट्टर मौलाना रहते थे जो इसे आदेश लेकर जेहादी प्रवृत्ति करते रहते थे

वीडियो तब का है जब इफ्तिखारुद्दीन उत्तर प्रदेश परिवहन निगम का एमडी था वह लखनऊ स्थित अपने सरकारी निवास पर तबलीगी जमात के मौलानाओ को संबोधित करते हुए कह रहा है कि तुम कैसे ज्यादा से ज्यादा संख्या में हिंदुओं को मुसलमान बन सकते हो और यदि तुम हिंदुओं को मुसलमान बनाओगे तो तुम्हें क्या-क्या फायदे मिलेंगे

रमजान के समय इसके ऑफिस और इसके निवास पर ड्यूटी कर रहे हिंदू कर्मचारियों को भी पानी पीने और नाश्ता करने की इजाजत नहीं होती थी जबरन अपने मातहत हिंदू कर्मचारियों से भी रोजा रखवाता था

योगी सरकार के आने के बाद इसको पहले सस्पेंड करके बाद में जबरन रिटायर किया गया

तो मित्रों आपके इलाके में यदि कोई मुस्लिम आईएएस आईपीएस है तो आपका, स्थानीय पत्रकारों का और मीडिया का सबका कर्तव्य है कि आप लोग उस पर नजर रखें

क्योंकि डॉक्टर अंबेडकर ने जो इनके बारे में कहा है वह एकदम सच है इनके लिए संविधान कोई अहमियत नहीं रखती आप उनके क्रियाकलापों पर नजर रखिए उसका वीडियो बनाया सोशल मीडिया पर वायरल करिए

जब भगवान शंकराचार्य ने एक चांडाल को अपना गुरु बनाया

 

जब भगवान शंकराचार्य ने एक चांडाल को अपना गुरु बनाया

दैत्यगुरु शुक्राचार्य ने अवतार लेकर कलियुग में भारत मे आसुरी धर्म की स्थापना कर दी थी । शुक्राचार्य की माया को काटने के लिए आदि शंकराचार्य ( शंकर के अंशावतार ) को धरती पर जन्म लेना पड़ा ।।

आसुरी मत के प्रचलन के कारण उस समय छुवाछुत ने भारत मे घोर प्रभाव जमा लिया ।। अब आदिशंकराचार्य पर जिम्मेदारी थी, की वह इस छुवाछुत को खत्म करें ।

आदि शंकराचार्य से जुड़ा एक किस्सा प्रचलित है--

ये किस्सा भारत भ्रमण के दौरान का है.

इसके मुताबिक़ उन्होंने काशी प्रवास के दौरान शमशान के चंडाल को अपना गुरु बनाया था ।। उस वक्त के समाज में चांडाल अस्पृश्य माने जाते थे, कहते हैं कि आदि शंकराचार्य काशी में एक शमशान से गुजर रहे थे जहां उनका सामना चांडाल से हो गया ।।

आदि ने उन्हें सामने से हटने को कहा. जवाब में चांडाल ने हाथजोड़ कर बोला क्या हटाऊं,

शरीर या आत्मा

आकार या निराकार??

यह जवाब सुनकर आदि शंकराचार्य चकित रह गए ...और उसी चांडाल को अपना गुरु स्वीकार किया । वह चांडाल भी कोई और नही, स्वयं महादेव थे ।

शंकराचार्य के विषय में कहा गया है-

अष्टवर्षेचतुर्वेदी, द्वादशेसर्वशास्त्रवित् षोडशेकृतवान्भाष्यम्द्वात्रिंशेमुनिरभ्यगात्

अर्थात् आठ वर्ष की आयु में चारों वेदों में निष्णात हो गए, बारह वर्ष की आयु में सभी शास्त्रों में पारंगत, सोलह वर्ष की आयु में शांकरभाष्यतथा बत्तीस वर्ष की आयु में शरीर त्याग दिया। ब्रह्मसूत्र के ऊपर शांकरभाष्यकी रचना कर विश्व को एक सूत्र में बांधने का प्रयास भी शंकराचार्य के द्वारा किया गया है, जो कि सामान्य मानव से सम्भव नहीं है। शंकराचार्य के दर्शन में सगुण ब्रह्म तथा निर्गुण ब्रह्म दोनों का हम दर्शन, कर सकते हैं। निर्गुण ब्रह्म उनका निराकार ईश्वर है तथा सगुण ब्रह्म साकार ईश्वर है। जीव अज्ञान व्यष्टि की उपाधि से युक्त है।

तत्त्‍‌वमसि तुम ही ब्रह्म हो; अहं ब्रह्मास्मि मैं ही ब्रह्म हूं; 'अयामात्मा ब्रह्म' यह आत्मा ही ब्रह्म है; इन बृहदारण्यकोपनिषद् तथा छान्दोग्योपनिषद वाक्यों के द्वारा इस जीवात्मा को निराकार ब्रह्म से अभिन्न स्थापित करने का प्रयत्‍‌न शंकराचार्य जी ने किया है ।।

" बोलो शंकर भगवान की जय "

यह संकल्प अवश्य लें : -

अपने जन्मदिवस पर हवन अवश्य ही करवाये।

अपनी विवाह की वर्षगाँठ पर सत्यनारायण कथा या सुंदरकांड का पाठ अवश्य ही करवाये।

विवाह शादी के लावा फेरे व अन्य पूजन दिन में ही करवाये, विधि विधान से करवाये, रात में पूजन करवाने से बचे।

सड़क व ट्रैफिक रोककर, गली में, नाली के किनारो पर किसी भी प्रकार की पूजा-सत्संग-कीर्तन-भंडारा इत्यादि न करें।

संस्कृत(हिन्दी) भाषा का अधिकाधिक प्रयोग करें।

ब्राह्मण, राजा, सन्यासी और बच्चों के संपर्क में बने रहें। जय सिया राम 🚩

स्टीकर जिहाद –असल जीवन में भाजपा से कोई लेना देना नहीं है।। आँखें खोलो –

 

स्टीकर जिहाद –

वदोदरा शहर के कारेलीबाग इलाके की यह घटना है, एक साइकिल रिक्शा चालक अपना 5000 रुपये का मासिक वेतन लेकर घर लौट रहा था,...

भाजपा के चुनावी चिन्ह "कमल" का स्टीकर लगी बिना नंबर प्लेट की स्कूटी पर दो लड़के आते हैं और गरीब साइकल रिक्शा चालक के 5000 रुपये छीन कर चंपत हो जाते हैं,

साइकिल रिक्शा चालक को काले रंग की स्कूटी और उसपर बना भाजपा का निशान याद रह जाता है।

गरीब व्यक्ति पुलिस स्टेशन जाकर इंस्पेक्टर साहब को पूरा किस्सा सुनाता है और इंस्पेक्टर साहब बिना देरी करे सर्विलेंस एक्टिव करवा के भाजपा के निशान वाली काली बिना नंबर वाली स्कूटी ढूँढ़ने का आदेश देते हैं,

पुलिस को कुछ घंटो में ही कामयाबी मिलती है और दो बदमाश पकड़े जाते हैं,

बदमाशों का पहले से ही अपराधिक रिकॉर्ड होता है, नाम पूछने पर पता लगता है की एक का नाम फैजल अय्यूब घांची और दूसरे का फिरोज हुसैन है,...

ज्यादा पूछताछ पर पता लगता है की भाजपा का स्टीकर मात्र दिखाने के लिए लगाया था – असल जीवन में भाजपा से कोई लेना देना नहीं है।।

आँखें खोलो –

यह सबक है जो हिंदू लड़की कहती है मेरा अब्दुल ऐसा नहीं है

 

आज की चौकाने वाली घटना

मुंबई में एक शादीशुदा हिंदू महिला हर्षदा अपने पति और 6 साल की बेटी के साथ रहती थी

पबजी गेम पर उसे उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के रहने वाले फ़ुजैल ने लव जिहाद में फसाया और उसे फुसलाकर मुंबई से अपने पति और बेटी को छोड़कर यूपी के मुरादाबाद लाया

एक मस्जिद में हर्षदा इस्लाम कबूल कर जीनत फातिमा बन गई और फ़ुजैल की पत्नी बन गई

एक हफ्ते के बाद ही फ़ुजैल के घर वाले हर्षदा उर्फ जीनत पर बेइंता जुल्म करने लगे

फिर हर्षदा की मम्मी को मुरादाबाद के एक अस्पताल से फोन आया की बेटी मरणासन्न अवस्था में अस्पताल में भर्ती है

हर्षदा दो दिन से वेंटिलेटर पर है उसे बहुत अंदरूनी चोट आई है उसके बाल नोच लिए गए हैं उसकी गर्दन की हड्डी डैमेज हुई है और दो पसलियां टूट गई है पुलिस ने कई धाराओं में केस दर्ज करके फ़ुजैल के पूरे परिवार को गिरफ्तार कर लिया है

यह सबक है जो हिंदू लड़की कहती है मेरा अब्दुल ऐसा नहीं है

आयुर्वेद के अनुसार देसी गाय का "गौ मूत्र" एक संजीवनी है| गौ-मूत्र एक अमृत के सामान है जो दीर्घ जीवन प्रदान करता है, पुनर्जीवन देता है, रोगों को भगा देता है, रोग प्रतिकारक शक्ति एवं शरीर की मांस-पेशियों को मज़बूत करता है|

गोमुत्र के अद्भुत लाभ.....
आयुर्वेद के अनुसार देसी गाय का "गौ मूत्र" एक संजीवनी है| गौ-मूत्र एक अमृत के सामान है जो दीर्घ जीवन प्रदान करता है, पुनर्जीवन देता है, रोगों को भगा देता है, रोग प्रतिकारक शक्ति एवं शरीर की मांस-पेशियों को मज़बूत करता है|

आयुर्वेद के अनुसार यह शरीर में तीनों दोषों का संतुलन भी बनाता है और कीटनाशक की तरह भी काम करता है| 

गौ-मूत्र का कहाँ-कहाँ प्रयोग किया जा सकता ह....

संसाधित किया हुआ गौ मूत्र अधिक प्रभावकारी प्रतिजैविक, रोगाणु रोधक (antiseptic), ज्वरनाशी (antipyretic), कवकरोधी (antifungal) और प्रतिजीवाणु (antibacterial) बन जाता है|

ये एक जैविक टोनिक के सामान है| यह शरीर-प्रणाली में औषधि के सामान काम करता है और अन्य औषधि की क्षमताओं को भी बढ़ाता है|

ये अन्य औषधियों के साथ, उनके प्रभाव को बढ़ाने के लिए भी ग्रहण किया जा सकता है|

गौ-मूत्र कैंसर के उपचार के लिए भी एक बहुत अच्छी औषधि है | यह शरीर में सेल डिवीज़न इन्हिबिटोरी एक्टिविटी को बढ़ाता है और कैंसर के मरीज़ों के लिए बहुत लाभदायक है| 

आयुर्वेद ग्रंथों के अनुसार गौ-मूत्र विभिन्न जड़ी-बूटियों से परिपूर्ण है| यह आयुर्वेदिक औषधि गुर्दे, श्वसन और ह्रदय सम्बन्धी रोग, संक्रामक रोग (infections) और संधिशोथ (Arthritis), इत्यादि कई व्याधियों से मुक्ति दिलाता है|

गौ-मूत्र के लाभों को विस्तार से जाने.....

देसी गाय के गौ मूत्र में कई उपयोगी तत्व पाए गए हैं, इसीलिए गौमूत्र के कई सारे फायदे है|गौमूत्र अर्क (गौमूत्र चिकित्सा) इन उपयोगी तत्वों के कारण इतनी प्रसिद्ध है|देसी गाय गौ मूत्र में जो मुख्य तत्व है उनमें से कुछ का विवरण जानिए.....

1. यूरिया  ....यूरिया मूत्र में पाया जाने वाला प्रधान तत्व है और प्रोटीन रस-प्रक्रिया का अंतिम उत्पाद है| ये शक्तिशाली प्रति जीवाणु कर्मक है|

2. यूरिक एसिड ..... ये यूरिया जैसा ही है और इस में शक्तिशाली प्रति जीवाणु गुण हैं| इस के अतिरिक्त ये केंसर कर्ता तत्वों का नियंत्रण करने में मदद करते हैं|

3. खनिज ....... खाद्य पदार्थों से व्युत्पद धातु की तुलना मूत्र से धातु बड़ी सरलता से पुनः अवशोषित किये जा सकते हैं| संभवतः मूत्र में खाद्य पदार्थों से व्युत्पद अधिक विभिन्न प्रकार की धातुएं उपस्थित हैं| यदि उसे ऐसे ही छोड़ दिया जाए तो मूत्र पंकिल हो जाता है| यह इसलिये है क्योंकि जो एंजाइम मूत्र में होता है वह घुल कर अमोनिया में परिवर्तित हो जाता है, फिर मूत्र का स्वरुप काफी क्षार में होने के कारण उसमे बड़े खनिज घुलते नहीं है | इसलिये बासा मूत्र पंकिल जैसा दिखाई देता है | इसका यह अर्थ नहीं है कि मूत्र नष्ट हो गया | मूत्र जिसमे अमोनिकल विकार अधिक हो जब त्वचा पर लगाया जाये तो उसे सुन्दर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है |

4. उरोकिनेज ......9यह जमे हुये रक्त को घोल देता है,ह्रदय विकार में सहायक है और रक्त संचालन में सुधार करता है |

5. एपिथिल्यम विकास तत्व क्षतिग्रस्त कोशिकाओं और ऊतक में यह सुधर लाता है और उन्हें पुनर्जीवित करता है|

6. समूह प्रेरित तत्व यह कोशिकाओं के विभाजन और उनके गुणन में प्रभावकारी होता है |

7. हार्मोन विकास यह विप्रभाव भिन्न जैवकृत्य जैसे प्रोटीन उत्पादन में बढ़ावा, उपास्थि विकास,वसा का घटक होना|

8. एरीथ्रोपोटिन रक्ताणु कोशिकाओं के उत्पादन में बढ़ावा |

9. गोनाडोट्रोपिन मासिक धर्म के चक्र को सामान्य करने में बढ़ावा और शुक्राणु उत्पादन |

10. काल्लीकरीन काल्लीडीन को निकलना, बाह्य नसों में फैलाव रक्तचाप में कमी |

11. ट्रिप्सिन निरोधक मांसपेशियों के अर्बुद की रोकथाम और उसे स्वस्थ करना |

12. अलानटोइन घाव और अर्बुद को स्वस्थ करना |

13. कर्क रोग विरोधी तत्व निओप्लासटन विरोधी, एच -11 आयोडोल - एसेटिक अम्ल, डीरेकटिन, 3 मेथोक्सी इत्यादि किमोथेरेपीक औषधियों से अलग होते हैं जो सभी प्रकार के कोशिकाओं को हानि और नष्ट करते हैं | यह कर्क रोग के कोशिकाओं के गुणन को प्रभावकारी रूप से रोकता है और उन्हें सामान्य बना देता है |

14. नाइट्रोजन... यह मूत्रवर्धक होता है और गुर्दे को स्वाभाविक रूप से उत्तेजित करता है |

15. सल्फर..  यह आंत कि गति को बढाता है और रक्त को शुद्ध करता है |

16. अमोनिया ...यह शरीर की कोशिकाओं और रक्त को सुस्वस्थ रखता है |

17. तांबा ...यह अत्यधिक वसा को जमने में रोकधाम करता है |

18. लोहा ...यह आरबीसी संख्या को बरकरार रखता है और ताकत को स्थिर करता है |

19. फोस्फेट ....इसका लिथोट्रिपटिक कृत्य होता है |

20. सोडियम ... यह रक्त को शुद्ध करता है और अत्यधिक अम्ल के बनने में रोकथाम करता है |

21. पोटाशियम ...यह भूख बढाता है और मांसपेशियों में खिझाव को दूर करता है |

22. मैंगनीज .... यह जीवाणु विरोधी होता है और गैस और गैंगरीन में रहत देता है |

23. कार्बोलिक अम्ल .... यह जीवाणु विरोधी होता है |

24. कैल्सियम ...यह रक्त को शुद्ध करता है और हड्डियों को पोषण देता है , रक्त के जमाव में सहायक|

25. नमक ....यह जीवाणु विरोधी है और कोमा केटोएसीडोसिस की रोकथाम |

26. विटामिन ए बी सी डी और ई (Vitamin A, B, C, D & E).. अत्यधिक प्यास की रोकथाम और शक्ति और ताकत प्रदान करता है |

27. लेक्टोस शुगर ....ह्रदय को मजबूत करना, अत्यधिक प्यास और चक्कर की रोकथाम |

28. एंजाइम्स ...प्रतिरक्षा में सुधार, पाचक रसों के स्रावन में बढ़ावा |

29. पानी ....शरीर के तापमान को नियंत्रित करना| और रक्त के द्रव को बरक़रार रखना |

30. हिप्पुरिक अम्ल ...यह मूत्र के द्वारा दूषित पदार्थो का निष्कासन करता है |

31. क्रीयटीनीन ...जीवाणु विरोधी|

32.स्वमाक्षर ....जीवाणु विरोधी, प्रतिरक्षा में सुधार, विषहर के जैसा कृत्य |

वौदिक ग्रंथों में गाय की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की गई है गाय से मिलने वाले फायदे क्या हैं और आप कैसे अपने जीवन को स्वस्थ रख सकते हैं। यह अब वैज्ञानिक तौर पर भी सिद्ध किया जा चुका है की गाय का मूत्र कीटाणुनाशक है जो शरीर में विभ्भिन बीमारियों को दूर करने में सहायक है। गोमूत्र में कार्बोलिक एसिड, यूरिया, फाॅस्फेट, यूरिक एसिड, पोटैशियम और सोडियम होता है । जब गाय का दूध देने वाला महिना होता है तब उस के मूत्र में लेक्टोजन रहता है, जो ह्दय और मस्तिष्क के विकारों के लिए फायदेमंद होता है। गाय के मूत्र का उपयोग विभिन्न रोगों में कैसे किया जा सकता है आपको बताते हैं |

 एक बात का विशेष ध्यान रखे की गौमूत्र भी उसी गाय का लाभकारी है जिसे शुद्ध प्राकृतिक भोजन दिया जाता है तथा जिसे दूध बढाने के लिए जहरीले इंजेक्शन नहीं दिए जाते)

 
गोमूत्र के लाभ.....

1. गौमूत्र में वात और कफ के सभी रोगों को पूरी तरह खत्म करने की शक्ति है। पित्त के रोगों को भी गौमूत्र खत्म करता है लेकिन कुछ औषधियों के साथ ।

2. वात, पित्त और कफ के कुल 148 रोग हैं। भारत में इन 148 रोगों को अकेले खत्म करने की क्षमता यदि किसी वस्तु में है तो वो है देशी गाय का गौमूत्र । गोमूत्र वात, पित्त, कफ तीनों की सम अवस्था में लाने के लिए सबसे ज्यादा मदद करता है ।

3. आधा कप गोमूत्र सुबह खाना खाने के एक घंटे पहले बवासीर/बादी और खूनी, फिस्टुला, भगन्दर, अर्थराइटिस, जोड़ों का दर्द, उक्त रक्त दबाव, हृदयघात, कैंसर आदि ठीक करने के लिए लें ।

4. गौमूत्र में वही 18 सूक्ष्म पोषक तत्व हैं जो कि मिट्टी में होते हैं। ऐसा वैज्ञानिकों का परीक्षण कहता है। भारत में cDRI लखनऊ, वैज्ञानिकों की दवाओं पर काम करने वाली सबसे बड़ी संस्था है। शरीर की बीमारियों को ठीक करने के लिए शरीर को जितने घटक चाहिए तो सब गौमूत्र में उपलब्ध हैं जैसे-सल्फर की कमी से शरीर में त्वचा के रोग होते हैं।


5. गौमूत्र पीने से त्वचा के सभी रोग ठीक होते हैं, जैसे-सोराइसिस, एक्जिमा, खुजली, खाज, दाल जैसे सब तरह के त्वचा रोग ठीक होते हैं। गौमूत्र से हड्डियों के रोग भी ठीक होते हैं। गौमूत्र से खाँसी, सर्दी, जुकाम, दमा, टी.वी., अस्थमा जैसी सब बीमारियाँ ठीक होती हैं। गोमूत्र से ठीक हुई टी.वी. दुबारा उस शरीर में नहीं आती है। गोमूत्र से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति इतनी अधिक बढ़ जाती है कि इससे बीमारियाँ शरीर में प्रवेश नहीं कर पाती हैं।


6. टी.वी. की बीमारी में डाट्स की गोलियों का असर गौमूत्र के साथ 20 गुना बढ़ जाती है अर्थातृ सिर्फ गौमूत्र पीने से टी.वी. 3 से 6 महीने में ठीक होती है, सिर्फ डाट्स की गोलिशाँ खाने से टी.वी. 9 महीने में ठीक होती है और डाट्स की गोलियाँ और गौमूत्र साथ-साथ देने पर टी.वी. 2 से 3 महीने में ठीक हो जाती है।

7. गौमूत्र का असर गले के कैंसर पर आहार नली के कैंसर पर पेट के कैंसर पर बहुत ही अच्छा है। गौमूत्र के असर को कैंसर के केस में अध्ययन/प्रयोग के लिए बलसाड (गुजरात) में एक बहुत बड़ा अस्पताल बन रहा है। जिसे कुछ जैन समाज के लोगों ने बनवाया है।

8. शरीर में जब करक्यूमिन नाम के तत्व की कमी होती है। तभी शरीर में कैंसर का रोग आता है। गौमूत्र में यही करक्यूमिन भरपूर मात्रा में है और पीने के तुरन्त बाद पचने वाला है। जिससे कि तुरंत असरकारक हो जाता है।
 
दवा के प्रति अच्छी भावना नहीं होने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता उस दवा को पचाने में कम हो जाती है इसलिए दवाओं को हमेशा सकारात्मक भाव से ही ग्रहण करना चाहिए।

9. हरड़े पानी में घिस कर देने पर कम लाभ करती है और गौमूत्र में घिस कर देने पर अधिक लाभ करती है।

10. गौमूत्र हमेशा सुबह को ही लेना चाहिए। बहुत बीमार व्यक्ति को 100 ग्राम पीना चाहिए। इसे आधा-आधा करके भी ले सकते हैं। खाली पेट यानी सुबह-सुबह, कुछ भी खाने से 1 घंटे पहले जो बीमार हैं वह दिन में दो बार भी ले सकते हैं और स्वस्थ लोगों को सिर्फ सुबह ही लेना चाहिए। स्वस्थ लोगों को 50 ग्राम से ज्यादा नहीं पीना चाहिए। बँधी हुई गाय का मूत्र उतना उपयोगी नहीं है। जर्सी गाय के मूत्र में सिर्फ तीन पोषक तत्व होते हैं।

11. आँख के सभी रोग कफ के हैं और आँख के कोई रोग जैसे मोतियाबिंद (कैटरेक्टर), ग्लुकोमा, रैटिनल डिटैचमेन्ट (इसका दुनिया में कोई इलाज नहीं है यहाँ तक कि ऑपरेशन भी नहीं है) । इसके साथ ऑखों की सभी छोटी-छोटी बीमारियाँ जैसे आँखों का लाल होना, आँखों से पानी निकलना, आँखों में जलन होना, ये सभी छोटी-बड़ी बीमारियाँ गौमूत्र से ठीक होती हैं।

मतलब पूरी तरह से ठीक होती हैं। गौमूत्र(केवल ताजा अर्क नहीं)  सूती कपड़े के आठ परत से छानकर 1-1 बूंद आँखों में डालना है। आँखों के चश्मे 6 महीने में उतर जायेंगे। 

ग्लुकोमा बिना ऑपरेशन ठीक होता है-4 सवा चार महीने में, कैटरक्त-6 सा 6 महीने में ठीक हो जाता है। रेटिनल डिटैचमेन्ट को एक साल लगता है।

12. 1-1 बूंद रोज सुबह-सुबह डालना है और 3 से 4 दिनों में बीमारी ठीक हो जायेगी। बच्चे जिनकी पसलियाँ कफ की वजह से परेशान कतरी हैं, एक चम्मच गौमूत्र पीला दें तुरंत आराम मिलना शुरू हो जायेगा। ऐसा बड़े लोग भी कर सकते हैं मात्रा आधा कप बढ़ाकर ।

13. मूत्र पिण्ड के सभी रोग जैसे किडनी फेल होने के और किडनी के दूसरी तकलीफों के लिए गौमूत्र 1/2 कप रोज सुबह खाली पेट लें।

14. पेशाब से संबंधित किसी भी रोग (लगभग 22 से 28 रोग) में गौमूत्र 1/2 कप रोज सुबह खाली पेट लें।

15. कब्जीयत की बीमारी में 1/2 कप गौमूत्र 3 से 4 दिन सुबह-सुबह खाली पेट पियें, बिल्कुल ठीक हो जायेगी।

16. पित्त के सभी रोगों के लिए गौमूत्र जब भी पियें, उन समयों में घी (देशी गाय का) का सेवन खाने में अधिक करें। पित्त के रोगी गौमूत्र का इस्तेमाल पानी बराबर मात्रा में मिलाकर करें जैसे एसिडिटी, हाईपर एसिडिटी, अल्सर, पेप्टिक अल्सर, पेट में घाव हो गया आदि के लिए।

17. गौमूत्र की मालिश करने से त्वचा के सफेद धब्बे सब चले जायेंगे। खाज, खुजली एग्जिमा थोड़ा गौमूत्र रोज मालिश करें सब ठीक हो जायेगा।

18. आँखों के नीचे काले धब्बे हैं। गौमूत्र रोज सुबह-सुबह लगाएं, काले धब्बे चले जायेंगे। गौमूत्र नहीं मिले तो गौमूत्र का अर्क ले सकते हैं। अर्क 1 चम्मच से अधिक नहीं लेना चाहिए। अर्क को ऑख में डालने के लिए प्रयोग न करें।

19. कैंसर ठीक करने वाला तत्व करक्युमिन हल्दी के साथ-साथ गौमूत्र में भी भरपूर मात्रा में होता है। गौमूत्र ताजा पीना चाहिए, 48 मिनट के अन्दर गौमूत्र बोतल में भरकर 4-5 दिन तक रख सकते हैं। बोतल काँच का होना चाहिए।

20. गाय जो साफ-सुथरे वातावरण में रहती हो, अच्छा चारा खाती हो और नियमितन रूप से घुमने के लिए जाती है, उसका मूत्र जरूर पियें वो सबसे ज्यादा लाभकारी होगा। यदि ऐसी गाय का अभाव हो तो बिना संकोच के किसी भी देशी गाय का गौमूत्र ले लें। ऐसा मूत्र नुकसान नहीं करेगा जब भी कुछ करेगा फायदा ही करेगा।

अब तक के सारे शोध यही बताते हैं कि देशी गाय के गौमूत्र का कोई साइड इफेक्ट नहीं है। गौमूत्र अधिक पी लेने पर पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाता है। अर्थात् किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुँचता है। इसमें सिर्फ इतनी बात ध्यान में रखनी है कि गाय देशी हो और गाय गर्भवती न हो, गाय बीमार न हो ।

21. गौमूत्र में गेंदे के फूल की चटनी बनाकर उबालकर थोड़ा हल्दी डालकर कैंसर के केस में बहुत ही तेजी से लाभ मिलता है।

22. हैपेटाइटिस परिवार (A, B, c, D, E, F) की बीमारियाँ जिसे ज्चाइन्डिस के नाम से या पीलिया के नाम से हम जानते हैं, ये सारी बीमारियाँ गौमूत्र से ठीक होती हैं।

 
23. वात और कफ के रोगी बिना कुछ मिलाये गौमूत्र का सेवन कर सकते हैं जैसे दमा, अस्थमा, सर्दी, खांसी आदि।

24. 18 वर्ष से अधिक की स्थिति में गौमूत्र की मात्रा 1/2 कप (50 ग्राम) और 18 वर्ष से कम की स्थिति में 25 ग्राम। गौमूत्र पीने का सर्वोत्तम समय सुबह-सुबह निराआहार अर्थात् खाली पेट, कुछ भी खाने के 1 घंटे पहले । जो बीमारी जितने समय में आती है, उतने समय में ही जाती है। अतः लंबी और गंभीर बीमारियों की स्थिति में गौमूत्र कम से कम 3 महीना लेना चाहिए और छोटी बीमारियों की स्थिति में 2 हफ्ते से 1 महीने तक गौमूत्र लेना चाहिए।

25. सर्दी, खाँसी, जुकाम, डायरिया डिसेन्ट्री, कान्स्टीपेशन जैसी बीमारियाँ 2-3 दिन में मिट जाती हैं। 8 महीने से अधिक लेने की स्थिति में हर 8 महीने के बाद 15 दिन से 20 दिन का अन्तर रखना आवश्यक है। ऐसा इसलिए करना चाहिए कि भविष्य में इसकी आदत न लगे ।

26. गोबर और गौमूत्र का उपयोग दोनों तरह से अच्छा होता है, आन्तरिक और बाहरी । बाहरी स्थिति में दाद, खाज, खुजली, दाग, धब्बे आदि की स्थिति में, गौमूत्र लगाने के बाद 10 से 15 मिनट सूर्य की रोशनी में छोड़ने के बाद धो देना चाहिए।

27. गाय का मूत्र जीवराशि रहित है इसलिए जैन लोग भी इसका सेवन कर सकते हैं। जैने लोग गौमूत्र के स्थान पर गौ अर्क का उपभोग कर सकते हैं। जैन लोग गोबर का इस्तेमाल न करें। गौमूत्र अर्क का सेवन 1 चम्मच से 2 चम्मच करें। चाहें तो 1/2 कप गुनगने पानी में मिलाकर भी ले सकते हैं। गौमूत्र यदि 2-3 दिन पुराना है तो उसमें जरूर पानी मिलायें।


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