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मंगलवार, 30 दिसंबर 2025

कितना अजीब है ना, *दिसंबर और जनवरी का रिश्ता?*जैसे पुरानी यादों और नए वादों का किस्सा...


कितना अजीब है ना, 
*दिसंबर और जनवरी का रिश्ता?*
जैसे पुरानी यादों और नए वादों का किस्सा...

दोनों काफ़ी नाज़ुक हैं
दोनो में गहराई है,
दोनों वक़्त के राही हैं, 
दोनों ने ठोकर खायी है...

यूँ तो दोनों का है
वही चेहरा-वही रंग,
उतनी ही तारीखें और 
उतनी ही ठंड...
पर पहचान अलग है दोनों की
अलग है अंदाज़ और 
अलग हैं ढंग...
 
एक अन्त है, 
एक शुरुआत
जैसे रात से सुबह,
और सुबह से रात...

एक में याद है
दूसरे में आस,
एक को है तजुर्बा, 
दूसरे को विश्वास...

दोनों जुड़े हुए हैं ऐसे
धागे के दो छोर के जैसे,
पर देखो दूर रहकर भी 
साथ निभाते हैं कैसे...

जो दिसंबर छोड़ के जाता है
उसे जनवरी अपनाता है,
और जो जनवरी के वादे हैं
उन्हें दिसम्बर निभाता है...

कैसे जनवरी से 
दिसम्बर के सफर में
११ महीने लग जाते हैं...
लेकिन दिसम्बर से जनवरी बस
१ पल में पहुंच जाते हैं!!

जब ये दूर जाते हैं 
तो हाल बदल देते हैं,
और जब पास आते हैं 
तो साल बदल देते हैं...

देखने में ये साल के महज़ 
दो महीने ही तो लगते हैं,
लेकिन... 
सब कुछ बिखेरने और समेटने
का वो कायदा भी रखते हैं...

दोनों ने मिलकर ही तो 
बाकी महीनों को बांध रखा है,
.
अपनी जुदाई को 
दुनिया के लिए 
एक त्यौहार बना रखा है..!

विंडोज़ XP का मशहूर वॉलपेपर “Bliss” दरअसल कोई डिज़ाइन या डिजिटल आर्ट नहीं था, बल्कि एक बिल्कुल असली दृश्य था, जैसा उस दिन प्रकृति ने खुद रचा था।

क्या आप जानते हैं कि दुनिया की सबसे ज़्यादा देखी गई तस्वीर किसी स्टूडियो में नहीं, बल्कि सड़क के किनारे एक पल की रुकावट में खींची गई थी। विंडोज़ XP का मशहूर वॉलपेपर “Bliss” दरअसल कोई डिज़ाइन या डिजिटल आर्ट नहीं था, बल्कि एक बिल्कुल असली दृश्य था, जैसा उस दिन प्रकृति ने खुद रचा था।
1996 की बात है। फोटोग्राफर चार्ल्स ओ’रेयर कैलिफ़ोर्निया के सोनोमा काउंटी की वाइन रीजन से होकर गाड़ी चला रहे थे। यह इलाका Napa और Sonoma के बीच Highway 121 के आसपास पड़ता है। रास्ते में उनकी नज़र एक हरे भरे टीले और उसके ऊपर फैले गहरे नीले आसमान पर पड़ी। उन्होंने बिना ज़्यादा सोचे गाड़ी रोकी, नीचे उतरे और कैमरा निकाल लिया।

उस समय ओ’रेयर के पास Mamiya RZ67 कैमरा था और उसमें Fujifilm Velvia स्लाइड फ़िल्म लगी हुई थी, जो रंगों को बेहद जीवंत दिखाने के लिए जानी जाती है। हाल ही में हुई बारिश की वजह से घास असाधारण रूप से हरी थी और आसमान में बादल बेहद नरम और साफ़ दिख रहे थे। उसी पल उन्होंने कुछ शॉट्स लिए, जिनमें से एक आगे चलकर इतिहास बन गया।

इस तस्वीर में किसी तरह की डिजिटल एडिटिंग नहीं की गई थी। न घास का रंग बदला गया, न आसमान को गहरा किया गया। जो कुछ दिखता है, वही उस दिन मौजूद था। बाद में जब लोग इस फोटो को देखकर कहते थे कि यह “बहुत ज़्यादा परफ़ेक्ट” लगती है, तो ओ’रेयर अक्सर बताते थे कि इसमें कैमरे और मौसम की भूमिका थी, किसी कंप्यूटर की नहीं।

कुछ साल बाद यह फोटो माइक्रोसॉफ्ट तक पहुँची। 2000 के आसपास माइक्रोसॉफ्ट ने इसे Corbis नाम की कंपनी से खरीदा, जो उस समय बिल गेट्स की इमेज लाइसेंसिंग कंपनी थी। 2001 में जब Windows XP लॉन्च हुआ, तो इसी तस्वीर को उसका डिफ़ॉल्ट वॉलपेपर बना दिया गया। यह तस्वीर XP की पहचान बन गई।

इस फोटो की कीमत आज तक सार्वजनिक नहीं की गई है, क्योंकि इस पर गोपनीयता का समझौता था। फिर भी रिपोर्ट्स में कहा जाता है कि यह रकम छह अंकों में थी और उस दौर में एक सिंगल तस्वीर के लिए यह असाधारण मानी जाती थी। कीमत इतनी ज़्यादा थी कि इसकी ओरिजिनल फ़िल्म को सामान्य कूरियर से भेजना संभव नहीं था। माइक्रोसॉफ्ट ने ओ’रेयर को प्लेन टिकट भेजा और वे खुद फिल्म को हाथों हाथ सिएटल ले गए।

Windows XP की एक अरब से भी ज़्यादा कॉपियाँ इंस्टॉल हुईं, और हर बार कंप्यूटर ऑन होते ही यही तस्वीर स्क्रीन पर आती थी। इसी वजह से “Bliss” को दुनिया की सबसे ज़्यादा देखी गई तस्वीरों में गिना जाता है। अनगिनत लोगों के लिए यह सुबह कंप्यूटर खोलते समय दिखने वाला पहला दृश्य था, जो किसी तरह की शांति और खुली दुनिया का एहसास देता था।
समय के साथ उस जगह की शक्ल बदल गई। जिस पहाड़ी पर घास थी, वह आज फिर से अंगूर के बागों से ढकी हुई है।
 1990 के दशक में phylloxera नाम की बीमारी ने वहाँ के पुराने vineyards नष्ट कर दिए थे, जिस कारण कुछ समय के लिए घास उग आई थी। Bliss उसी दुर्लभ दौर की तस्वीर है, जब वह इलाका बिल्कुल अलग दिखता था।

चार्ल्स ओ’रेयर ने बाद में कहा कि उन्होंने National Geographic के लिए दशकों तक काम किया, दुनिया भर की तस्वीरें लीं, लेकिन लोग उन्हें सबसे ज़्यादा इसी एक फोटो के लिए पहचानते हैं। यह उनके करियर का सबसे अनजाना लेकिन सबसे अमर पल बन गया।

आज भी “Bliss” सिर्फ़ एक वॉलपेपर नहीं, बल्कि 2000 के शुरुआती टेक्नोलॉजी दौर की याद बन चुकी है। एक साधारण सड़क किनारे लिया गया फैसला, कुछ मिनट की रुकावट, और एक कैमरे का क्लिक, जिसने इतिहास में अपनी जगह बना ली।

भारत का मेडिकल माफिया: अनावश्यक सर्जरी, बीमा घोटाले और फार्मा कमीशन की भयावह सच्चाई

भारत का मेडिकल सिस्टम खतरे में है ⚠️
क्या आप जानते हैं: ❌ भारत में 44% सर्जरी अनावश्यक होती हैं
❌ 55% हार्ट सर्जरी, 48% घुटना व गर्भाशय ऑपरेशन फर्जी पाए गए
❌ डॉक्टरों को मरीज भेजने पर लाखों का कमीशन
❌ बीमा लेने के बाद भी क्लेम रिजेक्ट
❌ दवाइयाँ ₹2,000 में अस्पताल को, मरीज से ₹18,000
👉 सवाल पूछिए
👉 दूसरी राय लीजिए
👉 हर ऑपरेशन से पहले सोचिए
हर बीमारी का इलाज ऑपरेशन नहीं होता।
जागरूक बनें – सुरक्षित रहें।
🙏 इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएँ



*भारत का चिकित्सीय क्षेत्र* *(Medical Sector) बहुत जल्द पतन की कगार पर है। भारतीय संसदीय समिति ने इसे स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है।*

*जी न्यूज (Zee News) में हाल ही में प्रकाशित एक शोध रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 44% मानव सर्जरी नकली (Bogus), गलत (Fake) या अनावश्यक होती हैं*।
*इसका मतलब है कि अस्पतालों में होने वाली लगभग आधी सर्जरियाँ सिर्फ मरीजों या सरकार से पैसे लूटने के लिए की जाती हैं।*
*रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि भारत में होने वाली*
55% हृदय सर्जरी नकली या बनावटी,
48% गर्भाशय हटाने की सर्जरी (Hysterectomy),
47% कैंसर सर्जरी,
48% घुटने का प्रत्यारोपण (Knee Replacement),
45% सीज़ेरियन डिलीवरी,
कंधे का प्रत्यारोपण (Shoulder Replacement),
रीढ़ की हड्डी की सर्जरी (Spine Surgery) आदि भी नकली पाई गई हैं।
महाराष्ट्र की कई प्रसिद्ध अस्पतालों के सर्वे में यह पाया गया है कि बड़े अस्पतालों में वरिष्ठ डॉक्टरों की मासिक सैलरी एक करोड़ रुपये तक होती है।
इसका कारण यह है कि जो डॉक्टर अधिक से अधिक अनावश्यक जांच, इलाज, भर्ती और सर्जरी कराते हैं — उन्हें अधिक वेतन दिया जाता है। (स्रोत: BMJ Global Health)

टाइम्स ऑफ इंडिया (Times of India) ने एक रिपोर्ट में बताया कि मृत मरीजों को जीवित बताकर इलाज करने के कई मामले सामने आए हैं — जो बहुत ही घृणित अपराध है।
एक प्रसिद्ध अस्पताल में 14 वर्षीय मृत युवक को जीवित बताकर लगभग एक महीने तक वेंटिलेटर पर रखा गया, इलाज के नाम पर पैसे लिए गए, और बाद में उसे मृत घोषित कर दिया गया। शिकायत के बाद अस्पताल दोषी पाया गया। परिवार को ₹5 लाख का मुआवज़ा दिया गया, लेकिन एक महीने की मानसिक प्रताड़ना का क्या?
कई बार मृत मरीजों पर भी तत्काल सर्जरी करने का नाटक किया जाता है — परिवार से तुरंत पैसे भरने को कहा जाता है, और फिर कहा जाता है कि “सर्जरी के दौरान मौत हो गई।”
बीमा (Mediclaim Insurance) का घोटाला भी उतना ही भयावह है।
भारत में लगभग 68% लोगों ने मेडिक्लेम बीमा लिया है, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर कंपनियाँ तरह-तरह के बहाने बनाकर क्लेम को अस्वीकार कर देती हैं या आंशिक राशि ही देती हैं। बाकी खर्च परिवार को स्वयं उठाना पड़ता है।
करीब 3000 से अधिक अस्पतालों को बीमा कंपनियों ने ब्लैकलिस्ट किया है क्योंकि वे झूठे क्लेम कर रही थीं।
कोरोना काल में कई अस्पतालों ने नकली कोविड मरीज दिखाकर बीमा कंपनियों से करोड़ों रुपये वसूले।
मानव अंगों की तस्करी (Organ Trafficking) का धंधा भी बड़े पैमाने पर चलता है।
इंडियन एक्सप्रेस (Indian Express) ने 2019 में एक हृदयविदारक घटना उजागर की थी 
कानपुर की एक महिला, संगीता कश्यप, को दिल्ली में नौकरी का लालच देकर बुलाया गया और फोर्टिस अस्पताल (Fortis Hospital) में स्वास्थ्य जांच के लिए भेजा गया।
वहां भर्ती करने के बाद उसे ‘डोनर’ शब्द सुनकर शक हुआ और वह भाग निकली।
बाद में पुलिस जांच में एक अंतरराष्ट्रीय गैंग का पर्दाफाश हुआ — जिसमें पुलिस, डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ सभी शामिल थे।

‘हॉस्पिटल रेफरल स्कैम’ (Hospital Referral Scam) तो आम बात हो गई है।
कई डॉक्टर मरीज को गंभीर बीमारी बताकर बड़े अस्पतालों — जैसे अपोलो (Apollo), फोर्टिस (Fortis), एपेक्स (Apex) — में भेजते हैं।
इन अस्पतालों के पास रेफरल प्रोग्राम होते हैं, जिनमें डॉक्टरों को मरीज भेजने पर कमीशन मिलता है।
उदाहरण के लिए, मुंबई की कोकिलाबेन अस्पताल (Kokilaben Hospital) ने लिखा था 
40 मरीज भेजने पर ₹1 लाख,
50 मरीजों पर ₹1.5 लाख,
75 मरीजों पर ₹2.5 लाख दिए जाएंगे।

‘डायग्नोसिस स्कैम’ (Diagnosis Scam) भी करोड़ों की लूट का तरीका है।
बेंगलुरु की कुछ प्रसिद्ध पैथोलॉजी लैब्स पर आयकर विभाग के छापों में ₹100 करोड़ नकद और 3.5 किलो सोना मिला।
यह रकम डॉक्टरों को कमीशन देने के लिए रखी गई थी।

डॉक्टर मरीजों को अनावश्यक जांच के लिए भेजते हैं और 40–50% तक कमीशन लेते हैं। अधिकांश रिपोर्टें फर्जी होती हैं — केवल 1–2 टेस्ट असली होते हैं।
देश में लगभग 2 लाख से अधिक लैब्स हैं, लेकिन सिर्फ़ 1000 से थोड़ी अधिक ही प्रमाणित (Certified) हैं।
फार्मा कंपनियाँ (Pharma Companies) भी बड़े घोटाले करती हैं।
भारत की 20–25 बड़ी दवा कंपनियाँ हर साल डॉक्टरों पर लगभग 1000 करोड़ रुपये खर्च करती हैं ताकि वे उनकी दवाएँ लिखें।
कोविड काल में Dolo गोली बेचने वाली कंपनी ने डॉक्टरों को ₹1000 करोड़ देने का मामला उजागर हुआ था।
डॉक्टरों को नकद, विदेश यात्रा, 5-Star होटल में ठहरने की सुविधाएँ दी जाती हैं।
जैसे USV Ltd. कंपनी हर डॉक्टर को ₹3 लाख नकद और ऑस्ट्रेलिया/अमेरिका यात्रा देती है।
कुछ फार्मा कंपनियाँ अस्पतालों को दवाएँ बहुत कम दाम पर देती हैं लेकिन MRP कई गुना ज्यादा रखती हैं।
इंडिया टुडे (India Today) की रिपोर्ट के अनुसार, EMCURE कंपनी अपनी कैंसर दवा Temikure अस्पताल को ₹1950 में देती है, जबकि अस्पताल मरीज से ₹18645 वसूलता है।
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) — जो डॉक्टरों और अस्पतालों की सर्वोच्च नियामक संस्था है — उस पर भी लापरवाही के आरोप हैं।
2016 में केंद्र सरकार की जांच समिति ने पाया कि MCI नई मेडिकल कॉलेजों को मंज़ूरी देने में तो सक्रिय है, लेकिन डॉक्टरों व अस्पतालों पर नियंत्रण में जानबूझकर ढिलाई बरतती है। MCI के कुछ मुख्य नियम प्रतिदिन तोड़े जाते हैं ।

1. डॉक्टर को किसी कंपनी की ब्रांडेड दवा नहीं, बल्कि उसका Generic Name लिखना चाहिए।
2. इलाज से पहले डॉक्टर को पूरी फीस बतानी चाहिए।
3. जांच/इलाज से पहले मरीज की लिखित सहमति लेनी चाहिए।
4. हर मरीज का मेडिकल रिकॉर्ड 3 साल तक सुरक्षित रखना चाहिए।
5. भ्रष्ट या अनैतिक डॉक्टरों को बिना डर समाज के सामने लाना चाहिए।

सरकारी योजनाओं में भी घोटाले हो रहे हैं।
उदाहरण के लिए, कोई पूर्व सैनिक मामूली सर्दी लेकर सरकारी अस्पताल जाता है — उसे भर्ती कर लिया जाता है।
उसके कार्ड पर उसकी जानकारी के बिना सरकारी योजना में फर्जी बिलिंग की जाती है।
7–8 दिन बाद छुट्टी दे दी जाती है, लेकिन तब तक डॉक्टरों और भ्रष्ट अधिकारियों के खातों में लाखों रुपये जमा हो जाते हैं।
*यह संदेश हर नागरिक तक पहुँचना चाहिए, ताकि हम और हमारा परिवार इन धोखों से बच सकें।*
    भारतीय चिकित्सा जिस भावना को लेकर अपने व्याख्यान देता था,वह स्वयं सिद्ध हो रहा है,भारतीय चिकित्सा अभियान,सुने, अब कैसे,बचे अंग्रेजी चिकित्सा से,भारतीय  चिकित्सा अभियान ने सभी विकल्प अनुभव के साथ उपलब्ध करा दिए,बच्चे दानी, बाई पास,प्रोस्टेट,ब्रेन,लिवर, किडनी,सभी के ऑपरेशन न हो ।


अगर यह जानकारी आपके लिए उपयोगी है,
तो इसे अपने परिवार, मित्रों और बुज़ुर्गों तक अवश्य पहुँचाएँ।
एक सही जानकारी किसी की जान और जीवन भर की कमाई बचा सकती है।

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बुधवार, 17 दिसंबर 2025

जोधपुर में इतिहास रचने जा रहा है माहेश्वरी महाकुंभ 2026

पावणों के आतिथ्य में जुटा माहेश्वरी समाज


🌍 जोधपुर में इतिहास रचने जा रहा है माहेश्वरी महाकुंभ 2026

मारवाड़ की पावन धरती जोधपुर एक बार फिर यह सिद्ध करने जा रही है कि
अतिथि देवो भवः केवल शास्त्रों का वाक्य नहीं, बल्कि यहाँ की संस्कृति, संस्कार और जीवनशैली है।

9 से 11 जनवरी 2026 तक आयोजित होने वाला
अखिल भारतीय माहेश्वरी महाकुंभ एवं ग्लोबल एक्सपो–2026

माहेश्वरी समाज के इतिहास का अब तक का सबसे विशाल, संगठित और ऐतिहासिक आयोजन बनने जा रहा है।

इस महाकुंभ में देश–विदेश से 50,000 से अधिक माहेश्वरी समाजबंधुओं का आगमन होगा। यह आयोजन केवल संख्या का नहीं, बल्कि संगठन, सेवा और समर्पण की शक्ति का परिचायक है।


🕉️ मारवाड़ की मिट्टी में बसता अपनत्व

जोधपुर सदैव से अपनी
➡️ मेहमाननवाज़ी
➡️ संस्कृति
➡️ सादगी
➡️ और अपनत्व
के लिए जाना जाता रहा है।

माहेश्वरी महाकुंभ 2026 के माध्यम से यह नगर एक बार फिर यह संदेश देगा कि
👉 यहाँ मेहमान केवल ठहरते नहीं,
👉 बल्कि परिवार का हिस्सा बन जाते हैं।

यही कारण है कि यह आयोजन इमारतों का नहीं, दिलों का महाकुंभ कहा जा रहा है।


🇮🇳 10 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की गरिमामयी उपस्थिति

इस महाआयोजन की गरिमा को और ऊँचाई देते हुए
10 जनवरी 2026 को देश के केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी
माहेश्वरी महाकुंभ में सहभागिता करेंगे।

उनकी उपस्थिति
✔️ माहेश्वरी समाज के लिए गौरव
✔️ आयोजन के लिए राष्ट्रीय पहचान
✔️ और समाज की संगठन शक्ति का प्रमाण
होगी।


🏠 50,000 अतिथियों के लिए अभूतपूर्व आवास व्यवस्था

इतने विशाल स्तर पर आने वाले अतिथियों के ठहराव की व्यवस्था अपने आप में प्रबंधन की अद्भुत मिसाल है।

🔹 तीन स्तरीय सुव्यवस्थित आवास मॉडल

1️⃣ समाज भवन, धर्मशालाएँ एवं धार्मिक संस्थान

✔️ विभिन्न समाज भवन
✔️ धर्मशालाएँ एवं धार्मिक संस्थान
✔️ लगभग 6,500 से अधिक कमरे एवं डॉरमेट्री
✔️ करीब 70 से अधिक समाज भवन एवं धर्मशालाएँ आरक्षित


2️⃣ होटल, होम-स्टे एवं अतिथि गृह

✔️ नगर के 2 से 5 सितारा होटल
✔️ 180 से अधिक होटल आरक्षित
✔️ लगभग 9,000 से अधिक समाजबंधुओं के लिए सुविधा


3️⃣ जोधपुरवासियों के घर – परंपरागत मेहमाननवाज़ी

✔️ समाजजनों ने अपने घरों के द्वार खोले
✔️ अपने अतिरिक्त कमरों में अतिथियों को ठहराने का संकल्प
✔️ 10,000 से अधिक अतिथि समाजजनों के घरों में ठहरेंगे

यह व्यवस्था संस्कार, अपनत्व और संस्कृति की सजीव मिसाल है।


👥 300 युवाओं की टीम एवं 200+ स्वयंसेवक

✔️ 300 समर्पित युवा कार्यकर्ता
✔️ 200 से अधिक स्वयंसेवक
✔️ महीनों से सतत योजना, निरीक्षण एवं क्रियान्वयन

यह आयोजन यह दर्शाता है कि
जब युवा सेवा में उतरते हैं, तो समाज नई ऊँचाइयाँ छूता है।


🚍 आवागमन की संपूर्ण व्यवस्था

एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन एवं बस स्टैंड से
अतिथियों के आवास व कार्यक्रम स्थल तक
पूर्णतः सुनियोजित परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

📱 इसके लिए आयोजन समिति द्वारा
एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया गया है।


🌸 सामाजिक इतिहास में स्वर्णिम अध्याय

माहेश्वरी महाकुंभ 2026
✔️ संगठन
✔️ सेवा
✔️ अनुशासन
✔️ और सामाजिक एकता
का ऐसा उदाहरण बनेगा, जिसे आने वाली पीढ़ियाँ गर्व से स्मरण करेंगी।


📍 आयोजन विवरण

📌 स्थान: जोधपुर, राजस्थान
📅 तिथि: 9 से 11 जनवरी 2026
विशेष अतिथि: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (10 जनवरी)

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#अमित_शाह_जोधपुर 

धुरंधर आज नहीं सदियों पहले से आगाज ले चुका है. ... वर्ष 1942। रंगून (वर्तमान म्यांमार)।

 साथियों
धुरंधर आज नहीं सदियों पहले से आगाज ले चुका है. ...
वर्ष 1942। रंगून (वर्तमान म्यांमार)।

शहर के सबसे समृद्ध इलाकों में एक भारतीय परिवार रहता था। पिता एक स्वर्ण-खदान के मालिक थे। जन्म से ही उस लड़की ने अपार वैभव के सिवा कुछ नहीं देखा था—महँगी कारें, रेशमी परिधान, हीरे-जवाहरात। वही उसका बचपन था। उसका नाम था सरस्वती राजमणि। उसकी आयु मात्र पंद्रह-सोलह वर्ष थी।

परंतु भाग्य ने उसके लिए राजमहल नहीं—जंगलों की राह और बारूद की गंध लिखी थी।

उसी दिन भारत की स्वतंत्रता की अंतिम आशा—नेताजी सुभाषचंद्र बोस—रंगून पहुँचे। हज़ारों की भीड़ के सामने उन्होंने गर्जना की—
“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा।”

भीड़ में खड़ी युवा राजमणि का रक्त जैसे दहक उठा। उसी क्षण उसने अपना हार, कंगन, झुमके—सब कुछ उतारकर आजाद हिंद फ़ौज के कोष में अर्पित कर दिया।

अगली सुबह उस भव्य हवेली के सामने एक सेना की जीप आकर रुकी। स्वयं नेताजी उतरे। वे आभूषण लौटाने आए थे। उन्हें लगा कि इतनी कम उम्र की लड़की ने आवेग में आकर इतने बहुमूल्य गहने दे दिए होंगे—इतना बड़ा त्याग करने के लिए वह अभी बहुत छोटी है।
परंतु राजमणि ने उनकी आँखों में सीधे देखते हुए जो उत्तर दिया, वह इतिहास बन गया—
“नेताजी, मैंने यह दान भूल से नहीं दिया। यह मेरे देश को अर्पण है। और जो मैं दे चुकी हूँ, उसे वापस नहीं लेती।”

नेताजी विस्मय से उसे देखते रह गए। उसकी आँखों में भय नहीं—केवल इस्पात-सी दृढ़ता थी। वे मुस्कराए। उन्होंने उसे एक नया नाम दिया—“सरस्वती”—और कहा—
“मुझे तुम्हें अपनी टीम में चाहिए। बंदूक के साथ नहीं। तुम्हारा काम उससे भी कठिन होगा।”

यहीं से नेताजी के आदेश पर एक नया अध्याय शुरू हुआ। लड़कियों के लंबे बाल काट दिए गए। ढीली कमीज़-पैंट पहनाई गई। सरस्वती राजमणि बन गई “मणि”। उसकी साथी थी एक और साहसी लड़की—दुर्गा। उनका मिशन था—जासूसी।

कल्पना कीजिए—
जो सोलह वर्ष की लड़की रेशमी गद्दों पर सोई थी, वही अब ब्रिटिश सैन्य मेस में एक “लड़के” के वेश में काम कर रही थी। अधिकारियों के जूते पॉलिश करना, कमरे साफ़ करना, चाय परोसना—यही उनकी दिनचर्या थी। अंग्रेज़ जनरलों को लगता था कि ये स्थानीय लड़के हैं जिन्हें अंग्रेज़ी नहीं आती। इसलिए वे उन्हीं के सामने गुप्त युद्ध-बैठकें करते—मानचित्रों पर चिन्ह लगाते कि आईएनए पर कहाँ बम गिराने हैं, कौन-से मार्गों से रसद जाएगी।

कमरे के एक कोने में जूते पॉलिश करती मणि के कान सतर्क रहते। उसका मस्तिष्क हर तारीख़, हर संकेत दर्ज कर लेता। काम पूरा होने पर वह शौचालय जाती, काग़ज़ के छोटे-छोटे टुकड़ों पर सब लिखती, उन्हें रोटी या जूतों में छिपाती और सूचना नेताजी के शिविर तक पहुँचा देती।
दिन-प्रतिदिन मृत्यु के साथ यह प्राणघातक लुकाछिपी चलती रही।

अँधेरी रात: निर्भीक साहस की कथा

पर जासूस का जीवन हर पल पकड़े जाने के भय में जीना होता है। एक दिन वह दुःस्वप्न सच हो गया। राजमणि की साथी दुर्गा अंग्रेज़ों के हाथ लग गई। समाचार मिला कि उसे सैन्य कारागार में बंद कर दिया गया है और शीघ्र ही उससे सूचना उगलवाने के लिए यातनाएँ दी जाएँगी।

आईएनए का नियम कठोर था—
पकड़े जाने पर स्वयं अंत कर लो, पर जीवित पकड़े मत जाओ।

सबने राजमणि से कहा—“भाग जाओ। वहाँ गईं तो तुम भी मारी जाओगी।”
पर राजमणि बोली—
“मेरी मित्र पकड़ी गई है और मैं भाग जाऊँ? यह मुझसे नहीं होगा।”

रात के अँधेरे में, लड़के का भेष धरकर, वह भारी सुरक्षा वाले उस ब्रिटिश क़िले में घुस गई। उसे पहरेदारों की कमज़ोरी मालूम थी। उसने उनके भोजन और चाय में तीव्र अफ़ीम मिला दी। पहरेदार गहरी नींद में ढेर हो गए। वह चाबियाँ चुरा लाई और दुर्गा की कोठरी खोल दी।

जैसे ही दोनों जेल की दीवार चढ़ रही थीं, सायरन बज उठा। सर्चलाइटें घूमने लगीं, गोलियाँ अंधाधुंध चलने लगीं। अँधेरे में दौड़ते हुए अचानक मणि की दाहिनी टाँग में आग-सा धधक उठा—एक गोली मांस चीरती हुई निकल गई। रक्त धरती को भिगोने लगा। पीड़ा से शरीर मरोड़ खा गया।
पर वह रुकी नहीं।
रुकना—दोनों की मृत्यु का अर्थ था।

लहूलुहान अवस्था में वे घने जंगल में जा छिपीं। अंग्रेज़ सैनिक कुत्तों के साथ खोज में जुट गए। बचने के लिए राजमणि और दुर्गा एक विशाल वृक्ष पर चढ़ गईं।
विश्वास करना कठिन है—
वे तीन दिन (72 घंटे) उसी वृक्ष पर रहीं। टाँग में गोली, शरीर में तेज़ ज्वर, न पानी, न भोजन। नीचे ब्रिटिश गश्त। एक भी आहट—और सब समाप्त।

तीन दिन बाद, जब अंग्रेज़ खोज छोड़ गए, दोनों नीचे उतरीं और लँगड़ाती हुई आजाद हिंद फ़ौज के शिविर पहुँचीं।

नेताजी का सलाम

शिविर पहुँची तो वह पीड़ा से लगभग अचेत थी। नेताजी स्वयं उसे देखने आए।

जब डॉक्टर उसकी टाँग से गोली निकाल रहे थे, नेताजी ने उस सोलह वर्ष की योद्धा को सलाम किया और कहा—
“मुझे पता न था कि हमारी सेना के भीतर इतने शक्तिशाली विस्फोटक छिपे हैं।
तुम भारत की पहली महिला जासूस हो।
तुम मेरी रानी झाँसी हो।”

नेताजी उसे जापान के सम्राट द्वारा प्रदत्त अपनी पिस्तौल भेंट करना चाहते थे। पर राजमणि ने केवल एक ही वस्तु चाही—भारत की स्वतंत्रता।

विस्मृति में खोई एक नायिका

1947 में भारत स्वतंत्र हुआ।
पर जिसने अपने देश के लिए अपनी जवानी, अपना रक्त और अपने पिता की समूची संपदा अर्पित कर दी—क्या देश ने उसे याद रखा?

नहीं।
किस type का ...त्ते जैसा देश पैदा किया था महात्मा और चाचा ने?

इतिहास की पुस्तकों में उसका नाम स्थान न पा सका। जो कभी स्वर्णिम शैयाओं पर सोई थी, उसने अपने अंतिम दशक चेन्नै के रॉयपेट्टा में एक जर्जर, एक-कमरे के किराए के मकान में घोर दरिद्रता में बिताए। सरकार ने उसकी स्वतंत्रता सेनानी पेंशन देने में भी विलंब किया।
फिर भी उसने कभी शिकायत नहीं की।

2004 की सुनामी में, जब सब सहायता की गुहार लगा रहे थे, तब इस वृद्धा ने—जिसके पास अपनी दवाइयों तक के पैसे नहीं थे—अपनी संचित पेंशन राहत कोष में दान कर दी।
पत्रकारों ने पूछा—“आपने क्यों दिया? आपके पास तो अपना कुछ भी नहीं।”
वह मुस्कराई और बोली—
“देना मेरे रक्त में है। बचपन में मैंने देश की आज़ादी के लिए सब दे दिया। आज मैंने देश के लोगों के लिए दिया।”

2018 में, 91 वर्ष की आयु में, भारत की यह अग्निधारा-सी पुत्री हृदयाघात से शांतिपूर्वक चल बसी। न राष्ट्रीय शोक, न टीवी पर बड़ी ख़बर।

पर आज, जब हम स्वतंत्र भारत के आकाश की ओर देखते हैं, तो याद रखना चाहिए—
यह आज़ादी एक पंद्रह वर्ष की लड़की ने अपने पैरों के रक्त और पूरे जीवन के बलिदान से चुकाई थी।

उसका नाम था सरस्वती राजमणि।
उसे स्मरण रखें—क्योंकि चाहे इतिहास उसे भूल गया हो, हम कभी उसके ऋण से मुक्त नहीं हो सकते।
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मंगलवार, 2 दिसंबर 2025

SIR फॉर्म: तीन अक्षरों ने पूरे देश की वंशावली हिला दी!”या “SIR… जिसने रिश्तों की धूल झाड़कर सच दिखा दिया”

📍 *SIR की दिलचस्प बातें:* *एक समाजशास्त्रीय की कलम से!* 🤓

SIR फॉर्म क्या आया— पूरा समाज पानी पूरी वाली लाइन की तरह खड़ा हो गया। तीन अक्षरों का फॉर्म, लेकिन इतना गहरा कि अच्छे-अच्छे पढ़े-लिखे लोगों का “हम तो सब जानते हैं” वाला भ्रम फट से टूट गया।

1️⃣ रिश्तों का रियलिटी चेक

SIR ने साफ बता दिया- मां-बाप, दादा-दादी ही असली रिश्ते हैं, बाकी सब “जान-पहचान सूची” में आते हैं।
और मज़ेदार बात ये कि— बेटियाँ शादी के बाद कितनी भी दूर चली जाएँ, रिश्ता मायके से ही साबित होता है— कागजों में, समाज में, और दिल में।

2️⃣ टूटे हुए रिश्तों में नेटवर्क सिग्नल वापस

सालों से बात न करने वाले लोग अब फॉर्म भरवाने के नाम पर बीवी के मायके जा रहे हैं, बेटियाँ गाँव लौट रही हैं, लोग दस्तावेज़ ढूँढते-ढूँढते वंश-वृक्ष खोज रहे हैं। SIR ने वो रिश्ते जोड़ दिए जो व्हाट्सऐप भी नहीं जोड़ पाया। 

3️⃣ धर्म का भ्रम… SIR के आगे फ़ेल

हिन्दू, मुसलमान, सिख, ईसाई— सब एक ही काउंटर पर लाइन में खड़े, एक ही पेन से फॉर्म भरते हुए। SIR ने वो कर दिया जो नेताओं की रैलियाँ नहीं कर पाई सबको एक ही नाव में सवार कर दिया। 

4️⃣ पुरानी यादें Rewind Mode में

लोग आज फिर वही जगह ढूँढ रहे जहाँ— माँ-बाप रहा करते थे, दादा-दादी की छाया थी, और बचपन की धूल थी। किराएदार अपने मां-बाप का नाम उसी मकान मालिक से पूछ रहे हैं
जिसे कभी किराया देना पड़ता था। इतिहास अब फेसबुक पोस्ट नहीं— घर-घर की खोज बन गया है। 

5️⃣ शिक्षा की असली औकात सामने

SIR ने बता दिया— यह दुनिया पैसा नहीं, दस्तावेज़ माँगती है।
शिक्षा सिर्फ नौकरी नहीं, अपना वंश और पहचान जानने की योग्यता भी है।

6️⃣ पुरखे सिर्फ फोटो नहीं—साक्ष्य हैं

SIR ने साबित कर दिया— मां-बाप मरकर भी काम आते हैं, वे कागज़ों में, यादों में, और वंश में ज़िंदा रहते हैं।
इसलिए:
उन्हें याद करो, सम्मान दो, और अपनी जड़ें बच्चों को भी बताओ। 

7️⃣ सबसे चुभता सच

जब किसी से पूछा— “तुम्हारे दादा-दादी, नाना-नानी का नाम?” तो आधे लोग नेटवर्क खोजते हैं, बाकी आधे गूगल नहीं, मम्मी को कॉल करते हैं। ये सिर्फ जानकारी नहीं— कटी हुई जड़ों की निशानी है।

📌 निष्कर्ष
SIR अभी शुरू हुआ है…
आगे कितने किस्से, कितनी कहानियाँ और कितने राज खुलेंगे— बस इंतज़ार करिए, देश भर में वंशावली का महाकाव्य लिखने वाला है। 🙏🏻


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🪔

शनिवार, 29 नवंबर 2025

युवाओं के रोजगार की सच्चाई और समाधान"सुख-समृद्ध-स्वस्थ-स्वतंत्र जिंदगी" के लिए आया नया अनुसंधान

युवाओं के रोजगार की सच्चाई और समाधान"
25 साल की पढ़ाई में 25 लाख रुपये खर्च करने के बाद युवाओं के सामने 3 ही संभावनाएँ बचती हैं :

🔸 नौकरी नहीं।
🔸 कम वेतन की नौकरी।
🔸 ज्यादा वेतन - कमरतोड़ काम।

आज AI और Robots के कारण शुरू हो चुका है Zero Worker Factories का जमाना…

📌 78% नौकरियाँ ऐसी, जिनकी सैलरी 15000/- महीने से भी कम!
📌 India tops in Workplace Burnout!

नौकरी का तो है एक ही उसूल :

भूखा तुमको सोने नहीं देंगे
और
सुखी-समृद्ध तुमको होने नहीं देंगे।


नौकरी या मजदूरी ?
(Job or Skilled Labour ?)

नौकरी जिंदगी के लिए या जिंदगी ही नौकरी के लिए ??

एक समय था जब देश में हर परिवार के पास काम और मकान था

जबकि

आज, शहर में 1 नौकरी और 1 फ्लैट ही बन गया है जिंदगी का लक्ष्य।

नौकरी यानि गुलामी ???

"Livelihood with Real Freedom" के लिए आज भी हैं इतने तरीके, जितने सिर पर बाल।

"Job Ready Graduate" के साथ "Life Ready Graduate" नहीं बनाता दुनिया का कोई भी स्कूल-कॉलेज।

"सुख-समृद्ध-स्वस्थ-स्वतंत्र जिंदगी" के लिए आया नया अनुसंधान

🌟 लेकिन अब समाधान है – वास्तविक Financial Freedom का रास्ता!

Your Financial Doctor (Your FD) प्रस्तुत करता है – युवाओं के लिए Smart Financial Freedom Plan

इस प्लान में शामिल है:

✅ Insurance Planning
✅ Mutual Funds SIP & Wealth Creation
✅ Credit Cards Smart Management
✅ AIF / High-End Investment Mix
✅ Retirement Corpus Building
✅ Emergency Fund Strategy
✅ Family Protection + Long Term Growth

यह सिर्फ earning नहीं… असली financial freedom का रास्ता है।


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✨ युवा साथियों — अब समय है Skill + Side Income + Smart Financial Planning अपनाने का।

केवल नौकरी पर निर्भर मत रहिए…
अपनी जिंदगी को financial freedom के रास्ते पर ले जाइए!

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📞 आज ही संपर्क करें – अपना Financial Freedom Plan शुरू करने के लिए

Kailash Chandra Ladha
👤 कैलाश चंद्र लढा
🩺 Your Financial Doctor (Your FD)
🌐 www.sanwariyaa.blogspot.com
Founder – Sanwariya
📢 अधिक जानकारी चाहिए?
💬 DM करें या अभी कॉल करें –
📞 9352174466



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“किस्मत के धनी बनें – Divine Timing का चमत्कार”

*किस्मत के धनी बनें*
*एक बार विन्स्टन चर्चिल ने अपना गिलास उठाकर कहा:*
*“मैं किसी को स्वास्थ्य या धन की शुभकामना नहीं देना चाहता* — *बल्कि सिर्फ़ किस्मत के धनी बने, इसकी शुभकामनाएं देना चाहता हूँ*
*क्योंकि टाइटैनिक जहाज़ पर ज़्यादातर लोग स्वस्थ भी थे और अमीर भी।*
*लेकिन उनमें से बहुत कम ही भाग्यशाली थे।”*

यह सुनकर सोचने पर मजबूर होना पड़ता है।

क्या आप जानते हैं कि 9/11 हमले में एक वरिष्ठ अधिकारी सिर्फ़ इसलिए बच गए क्योंकि उस दिन वे अपने बेटे को उसके पहले स्कूल (किंडरगार्टन) छोड़ने गए थे?

एक और आदमी बच गया क्योंकि उस दिन उसके लिए डोनट्स लाने की बारी थी।

एक महिला बच गई क्योंकि उसकी अलार्म घड़ी नहीं बजी थी।

कोई और बच गया क्योंकि न्यू जर्सी के ट्रैफ़िक जाम ने उसे देर कर दी।

कोई बस छूट जाने से बच गया।
किसी के कपड़ों पर कॉफी गिर गई, इसलिए उसे घर जाकर कपड़े बदलने पड़े।

किसी की कार स्टार्ट नहीं हुई।

किसी को फ़ोन कॉल का जवाब देने के लिए वापस घर जाना पड़ा।

किसी माँ या पिता को अपने बच्चे के ज़्यादा देर लगाने की वजह से देर हुई।

एक आदमी टैक्सी पकड़ ही नहीं पाया।

लेकिन जो कहानी सबसे गहराई से छू गई, वह यह है:

एक व्यक्ति ने उस दिन नए जूते पहने थे। रास्ते में उसके पैर में दर्द हुआ, तो वह पास की फ़ार्मेसी पर रुका और बैंड-एड खरीदे।
और वही छोटी-सी देरी उसकी जान बचा गई।

*जब से मैंने यह सुना है, मेरी सोच बदल गई है।*

अब जब मैं ट्रैफ़िक में फँस जाता हूँ…

जब मैं लिफ़्ट मिस कर देता हूँ…

जब मैं कुछ भूल जाता हूँ और वापस लौटना पड़ता है…

जब मेरी सुबह जैसी योजना थी वैसी नहीं गुजरती…

तो मैं रुककर यह सोचने की कोशिश करता हूँ:

शायद यह देरी कोई बाधा नहीं है।
शायद — यह ईश्वरीय समय है।
शायद मैं ठीक उसी जगह हूँ जहाँ मुझे होना चाहिए।

*तो अगली बार जब आपकी सुबह बिखर जाए…*

बच्चे देर करें, चाबियाँ खो जाएँ, हर सिग्नल लाल मिले —

तो तनाव मत लीजिए। ग़ुस्सा मत कीजिए।

*हो सकता है… यह छुपा हुआ सौभाग्य हो!!*

बहुत ही सुंदर व्याख्या की है, जिसने भी यह लिखा है, बहुत ही बेहतरीन सोच का व्यक्तित्व है 

नकारात्मकता और तनाव से बचने का इससे अच्छा उदाहरण नहीं हो सकता .......       
                   
*🙏 भाग्यशाली हों - किस्मत के धनी बनें 🙏*

🙏🙏जय श्रीराम🙏🙏

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सोमवार, 24 नवंबर 2025

"मोरिंगा: वो सुपरफूड जो आपकी पूरी बॉडी को बदल सकता है!"

संतरे से 7 गुना, दूध से 17 गुना, केले से 15 गुना और पालक से 25 गुना ज़्यादा ताकतवर हैं सहजन की पत्तियां, बस जान लें खाने का सही तरीका
सहजन का नाम सुना है? हाँ, वही, जिसकी लंबी-लंबी

 फलियाँ होती हैं! इसे हम मोरिंगा (Moringa) भी कहते

 हैं. आयुर्वेद में तो इसे 'चमत्कारी पेड़' का दर्जा मिला

 हुआ है. हम में से ज़्यादातर लोग इसकी फलियाँ तो खा

 लेते हैं, पर इसकी पत्तियाँ... अरे भाई, यही तो असली सुपरफ़ूड हैं!

आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में जब हमें ठीक से

 पोषण नहीं मिल पाता, तब ये मोरिंगा की पत्तियाँ किसी

 वरदान से कम नहीं हैं. ये तो हमें पता चल गया कि ये

 बहुत फ़ायदेमंद हैं, पर सबसे बड़ी बात ये है कि इन्हें

 खाने का सबसे सही टाइम और तरीका क्या है, ताकि

 शरीर को इसका पूरा-पूरा फ़ायदा मिल सके.

जानते हैं, इन छोटी-छोटी पत्तियों में कितनी ताकत है?

इसमें संतरे से 7 गुना ज़्यादा विटामिन C है.

दूध से 17 गुना ज़्यादा कैल्शियम है, मतलब हड्डियों के
 लिए कमाल की चीज़!

केले से 15 गुना ज़्यादा पोटेशियम है.

और तो और, पालक से 25 गुना ज़्यादा आयरन है!

समझ लीजिए, यह प्रोटीन, एंटीऑक्सीडेंट्स और सारे

 ज़रूरी मिनरल्स का एक चलता-फिरता पावर हाउस है.

मोरिंगा सिर्फ इम्यूनिटी नहीं बढ़ाता, यह आपके शरीर को अंदर से मज़बूत बनाता है:

1. इसमें ढेर सारा विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स होते

 हैं, जो आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को

 इतना तगड़ा कर देते हैं कि सर्दी-ज़ुकाम और छोटे-मोटे इन्फेक्शन पास भी नहीं फटकते.

2.अगर आपको शुगर की समस्या है, तो ये पत्तियां

 कमाल कर सकती हैं. ये इंसुलिन को बैलेंस करने में

 मदद करती हैं, जिससे ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है.

3.शरीर के अंदर जो पुरानी सूजन या दर्द होता है (जो

 दिल की बीमारी या गठिया की वजह बन सकता है),

 मोरिंगा के एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व उसे कम करने में मदद
 करते हैं.

4.कैल्शियम और फॉस्फोरस की मात्रा बहुत ज़्यादा होने

 के कारण, ये पत्तियां आपकी हड्डियों को टूटने से बचाती हैं और उन्हें मज़बूती देती हैं.

5 . इसमें क्लोरोजेनिक एसिड होता है, जो फैट को

 जल्दी जलाने में मदद करता है. साथ ही, फाइबर होने के

 कारण पेट देर तक भरा रहता है, और आपको बार-बार भूख नहीं लगती.

6. विटामिन A और E से भरपूर होने के कारण, मोरिंगा

 आपकी त्वचा को बेदाग और चमकदार बनाता है, और

 बालों का झड़ना रोककर उनकी ग्रोथ बढ़ाता है.

7. इसमें अच्छा-खासा फाइबर होता है, जो कब्ज़ को दूर

 भगाता है और पेट की अंदरूनी सफ़ाई करके आपके

 पाचन तंत्र (Digestion) को एकदम दुरुस्त रखता है.

8. अगर आपको या घर में किसी को खून की कमी

 (आयरन की कमी) है, तो मोरिंगा पालक से भी तेज़

 काम करता है. यह शरीर में आयरन की मात्रा तेज़ी से बढ़ाता है.

9. ये खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने में मदद

 करता है और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखता है, जिससे
 आपका दिल सुरक्षित रहता है.

विटामिन और मिनरल का ऐसा मिक्सचर मिलता है कि

 दिनभर की थकान दूर हो जाती है. आप ऊर्जावान
 (Energetic) महसूस करते हैं.

इसे कब खाएं :-

1.सुबह उठकर, फ्रेश होने के बाद, सबसे पहले मोरिंगा

 पाउडर या इसका जूस गुनगुने पानी के साथ लें. जब पेट

 खाली होता है, तो शरीर सारे पोषक तत्वों को फटाफट

 सोख लेता है और आपको पूरे दिन के लिए एनर्जी मिल
 जाती है.

2. अगर सुबह भूल गए, तो दोपहर का खाना खाने के

 30-45 मिनट बाद भी ले सकते हैं. इससे आपका

 हाजमा अच्छा रहता है और शुगर भी कंट्रोल में रहती है.

3.कोशिश करें कि शाम या रात में इसे ज़्यादा न लें. यह

 बहुत एनर्जी देता है, जिससे आपकी नींद डिस्टर्ब हो सकती है.

मात्रा: 1 से 2 छोटे चम्मच (टीस्पून) ही काफ़ी हैं.

उपयोग: इसे दही, छाछ, या अपनी सुबह की स्मूदी में

 मिलाकर पी लें. सबसे आसान है, गुनगुने पानी में
 घोलकर पी जाना.

ताज़ी पत्तियां:

आप एक मुट्ठी पत्तियां लेकर इसकी सब्ज़ी बना सकते हैं.

इसे दाल या सांभर में पालक की तरह मिलाकर भी पका
 सकते हैं.

चाय के रूप में:

आधा चम्मच पाउडर को गर्म पानी में मिलाकर उबालें

 और शहद डालकर मोरिंगा चाय की तरह पीएँ.

किन लोगों को मोरिंगा नहीं खाना चाहिए

मोरिंगा ज़्यादातर लोगों के लिए सेफ है, पर कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है:

गर्भवती महिलाएं: डॉक्टर की सलाह के बिना इसकी

 ज़्यादा मात्रा न लें. कुछ शोधों के अनुसार, यह गर्भाशय पर असर डाल सकता है.

शुगर या बीपी की दवा लेने वाले: चूंकि मोरिंगा शुगर और

 बीपी को कम करता है, इसलिए अगर आप पहले से

 इनकी दवाइयाँ ले रहे हैं, तो डॉक्टर से ज़रूर पूछ लें. हो

 सकता है आपकी दवाओं की डोज़ कम करनी पड़े.

थायरॉइड की समस्या: अगर आप थायरॉइड की दवा ले

 रहे हैं, तो इसे शुरू करने से पहले एक बार डॉक्टर से
 बात करना सही रहेगा.

अपनी सेहत के लिए करें यह छोटा सा काम

मोरिंगा की पत्तियां वाकई प्रकृति का एक अनमोल

 तोहफा हैं. इसे अपनी डाइट में शामिल करना कोई

 मुश्किल काम नहीं है. बस इसे सुबह खाली पेट या दिन

 में सही मात्रा में लें और फिर देखिए, आप प्राकृतिक रूप

 से कितने स्वस्थ और ऊर्जावान बने रहते हैं!

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सोमवार, 17 नवंबर 2025

SIR 2026: Enumeration Form ऑनलाइन सबमिट करें*


🚨 **SIR 2026: Enumeration Form ऑनलाइन सबमिट करें*🚨

नमस्ते! चुनाव आयोग की  *Special Intensive Revision*

 *(SIR) 2026 में* *Enumeration Form* भरना सुनिश्चित करें ।

यह फॉर्म सबमिट करना अनिवार्य है ताकि आपका नाम ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल में शामिल हो। घर से ही 4-5 मिनट में पूरा करें।

**जरूरी दस्तावेज/डिटेल्स (Mandatory Requirements):**

1. **वर्तमान EPIC नंबर (2025 वोटर कार्ड नंबर)** - कार्ड या फोटो से लें।
 
2. **आधार नंबर** - ई-साइन के लिए, 
 
3. **आधार से लिंक्ड मोबाइल नंबर** - OTP वेरीफिकेशन के लिए 
 
4. **हाल की फोटो** - फोन से क्लिक करें, साइज 2 MB से कम (JPG/PNG फॉर्मेट)।
 
6. **Last SIR 2002 का वोटर कार्ड डिटेल्स (स्वयं या माता-पिता/दादा-दादी )जिससे निम्न जानकारी प्राप्त की जा सके आपका स्वयं या माता-पिता/दादा-दादी का 2002 की सूची के अनुसार 
 
   - निर्वाचन क्षेत्र (Constituency) नाम।
   - भाग संख्या (Part No.)।
   - क्रमांक (Serial No.)।
 
   (वोटर्स पोर्टल पर "Search Your Name in Last SIR" से 2002 PDF डाउनलोड कर सर्च करें। अगर डिटेल्स न मिलें, तीसरा ऑप्शन चुनें।)
 
 
7. ** आधार और वोटर कार्ड में नाम मैच न हो तो:** BLO (Booth Level Officer) से ऑफलाइन फॉर्म भरें।
 
*चरणबद्ध प्रक्रिया (Detailed Step-by-Step Enumeration Form Submission):**
 
1. **वेबसाइट खोलें:** https://voters.eci.gov.in/ पर जाएं। (डेस्कटॉप: राइट साइड में; मोबाइल: नीचे स्क्रॉल कर "Services" में "Fill Enumeration Form" चुनें।)
 
2. **साइन अप/लॉगिन:** पहली बार? "Sign Up" पर क्लिक, मोबाइल नंबर + कैप्चा भरें, OTP से रजिस्टर। फिर लॉगिन करें। (EPIC/मोबाइल से भी लॉगिन संभव।)
 
4. लॉगिन बाद "Fill Enumeration Form" पर क्लिक।
 
5. **राज्य और EPIC डालें:** अपना राज्य चुनें (जैसे Rajasthan आदि), 2025 Voter Card नंबर एंटर करें, "Search" क्लिक। प्री-फिल्ड डिटेल्स दिखेंगी।
 
6. **OTP वेरीफाई:** मोबाइल पर OTP आएगा, डालें और कन्फर्म।
अगर मोबाइल Voter Card से लिंक्ड नहीं, पोर्टल Form 8 पर ले जाएगा। "Link Mobile Number" चुनें, नंबर डालें, OTP वेरीफाई करें|
 
7. **कैटेगरी चुनें:** 
   - ऑप्शन 1: मेरा नाम Last SIR (2002) में है - अपना Part No., Serial No., Constituency डिटेल्स भरें।
 
   - ऑप्शन 2: माता-पिता/दादा-दादी का नाम Last SIR में है - उनका Part No., Serial No., Constituency डालें।
 
   - ऑप्शन 3: न नाम है, न रिश्तेदार का - बेसिक डिटेल्स (नाम, DOB, एड्रेस) भरें।
 
  (Last SIR 2002 डिटेल्स न पता? 
Voters.eci.gov.in साइट पर "Search Your Name in Last SIR" चुनें: राज्य, जिला, विधानसभा, वर्ष 2002, बूथ नाम डालें। PDF डाउनलोड होकर नाम/Part/Serial मिलेगा।) 

Is Pdf मैं अपना या अपने मातापिता अथवा दादा दादी के नाम से क्रमांक संख्या, विधानसभा नंबर और पार्ट नंबर नोट कर लें 

8. **फॉर्म प्रीव्यू:** सभी डिटेल्स चेक करें - नाम, एड्रेस, फोटो अपलोड (अगर जरूरी), रिश्तेदार डिटेल्स।

9. **ई-साइन:** आधार नंबर डालें, OTP से वेरीफाई। (नाम EPIC से मैच न हो तो ऑफलाइन BLO के पास जाएं।)
10. **डिक्लेरेशन और सबमिट:** "I Declare" चेकबॉक्स टिक करें, "Submit" क्लिक। मोबाइल पर मैसेज आएगा: "Enumeration Form submitted successfully for EPIC No: [Your Number]".

**समयसीमा और महत्व (Timeline & Importance):** SIR 2026  4 नवंबर 2025 से शुरू हो चुका है | 4 दिसंबर 2025 तक फॉर्म सबमिट करें ताकि ड्राफ्ट लिस्ट में नाम आए। आपका वोट लोकतंत्र का आधार है - अपडेट करें, परिवार/पड़ोस को बताएं! 

*आधिकारिक वेबसाइट:** https://voters.eci.gov.in/ (सभी फॉर्म, सर्च, स्टेटस चेक यहाँ। EPIC डाउनलोड भी।)

**मदद चाहिए? ये रिसोर्सेज देखें:**

- YouTube स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: https://www.youtube.com/watch?v=A2QWl8Ak-pY
 
- Facebook वीडियो ट्यूटोरियल: https://www.facebook.com/share/v/1BYTujjWU2/?mibextid=wwXIfr


- ⁠हेल्पडेस्क गूगल फॉर्म पार्ट और सीरियल नंबर  के लिए  https://forms.gle/iENtHkooFgrg2yzm8


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*नोट - मतदाता से भी ज्यादा-से ज़्यादा ऑनलाइन सबमिशन करावे*

🖊️ कैलाश चंद्र लढ़ा
👑 संस्थापक – सांवरिया
💼 Your Financial Doctor (Your FD)
📰 Police Public Press, जोधपुर
📞 9352174466

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