शुक्रवार, 7 दिसंबर 2012

एक पत्र माता पिता का अपनी संतान के लिए

मेरे बच्चे जब तुम हमें एक दिन बूढा और कमज़ोर देखोगे,
तब संयम रखना और हमें समझने की कोशिश करना।


 
 ___अगर हम से खाना खाते वक्त कपड़े गंदे हो जाएं,
अगर हम खुद कपड़े न पहन सकें तो जरा याद करना,
जब बचपन में तुम हमारे हाथ से खाते और कपड़े पहनते थे।

___अगर हम तुमसे बात करते वक्त एक ही बात बार बार दोहराएं तो गुस्सा खाकर हमें मत टोकना,
धैर्य से हमें सुनना, याद करना, कैसे बचपन में कोई कहानी या लोरी तब तक तुम्हे सुनाते थे जब तक तुम सो नहीं जाते थे।

___अगर कभी किसी कारण वश हम न नहाना चाहें तो हमें गंदगी या आलस का हवाला देते हुए मत झिड़कना,
क्योंकि यह उम्र का तकाजा होगा।
याद करना बचपन में तु्म नहाने से बचने के लिए कितने बहाने बनाते थे और हमें तुम्हारे पीछे भागते रहना पड़ता था।

___अगर आज हमें कंप्यूटर या आधुनिक उपकरण चलाने नहीं आते .. तो हम पर झल्लाना नहीं नाहीं शर्मिंदा होना,
समझना कि इन नयी चीजों से हम वाकिफ नहीं हैं और याद करना कि तुम्हे कैसे एक-एक अक्षर हाथ पकड-पकड कर सिखाया था।

___अगर हम कोई बात करते करते कुछ भूल जाएं तो हमें याद करने के लिए मौका देना, हम याद न कर पाएं तो खीझना मत।
हमारे लिए बात से ज़्यादा अहम है बस तुम्हारे साथ होना और ये अहसास कि तुम हमें सुन रहे हो समझ रहे हो।

___अगर हम कभी कुछ न खाना चाहें तो जबरदस्ती मत करना, हम जानते हैं कि हमें कब खाना है और कब नहीं खाना।

___अगर चलते हुए हमारी टांगे थक जाएं और लाठी के बिना हम चल न सकें तो अपना हाथ आगे बढ़ाना,
ठीक वैसे ही जब तुम पहली बार चलना सीखते वक्त लड़खड़ाए थे और हमने तुम्हे थामा था।___
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एक दिन तुम महसूस करोगे कि हमने अपनी गलतियों के बावजूद तुम्हारे लिए सदा सर्वेश्रेष्ठ ही सोचा,
उसे मुमकिन बनाने की हर संभव कोशिश की।
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हमारे पास आने पर क्रोध, शर्म या दुख की भावना मन में कभी मत लाना, हमे समझने और वैसे ही मदद करने की कोशिश करना जैसे कि तुम्हारे बचपन में हम किया करते थे।
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हमे अपनी बाकी की ज़िंदगी प्यार और गरिमा से जीने के लिए तुम्हारे साथ की जरूरत है।
हमारा साथ दो, हम भी तुम्हे मुस्कुराहट और असीम प्यार से जवाब देंगे,
जो हमारे दिल में तुम्हारे लिए हमेशा से रहा है।
बच्चे, हम तुमसे प्यार करते हैं।
~~~~~~~~~ पापा-मम्मी ~~~~~~~~~

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