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जय श्री कृष्णा, ब्लॉग में आपका स्वागत है यह ब्लॉग मैंने अपनी रूची के अनुसार बनाया है इसमें जो भी सामग्री दी जा रही है कहीं न कहीं से ली गई है। अगर किसी के कॉपी राइट का उल्लघन होता है तो मुझे क्षमा करें। मैं हर इंसान के लिए ज्ञान के प्रसार के बारे में सोच कर इस ब्लॉग को बनाए रख रहा हूँ। धन्यवाद, "साँवरिया " #organic #sanwariya #latest #india www.sanwariya.org/
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शनिवार, 18 फ़रवरी 2012
yadain bachpan ki ......................
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Eye Opener
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">गुरुवार, 16 फ़रवरी 2012
सोच मे कितना अंतर ?
स्वामी विवेकानंद/प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह: दोनो की सोच मे कितना अंतर ?
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स्वामी विवेकानंद ने 11 सितंबर 1893 में शिकागो (अमेरिका) में विश्व धर्म सम्मेलन में अपने भाषण दिया था और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 8 जुलाई 2005 को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से मानद डॉक्टरेट की उपाधि ग्रहण करने पर व्याख्यान दिया था ।
स्वामी विवेकानंद ने 11 सितंबर 1893 में शिकागो (अमेरिका) में विश्व धर्म सम्मेलन में अपने भाषण दिया था । भारतीय नवजागरण का अग्रदूत यदि स्वामी विवेकानेद को कहा जाय, तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। उन्होंने सदियों की गुलामी में जकड़े भारतवासी को मुक्ति का रास्ता सुझाया। जन-जन के मन में भारतीय होने के गर्व का बोध कराया।
स्वामी विवेकानंद ने मानव समाज को अन्याय, शोषण और कुरीतियों के खिलाफ उठ खड़े होने का साहस प्रदान किया और पाश्चात्य संस्कृति की चकाचौंध में दिशाभ्रमित भारतीय नौजवानों के मन-मस्तिष्क में स्वदेश-प्रेम एवं हिन्दुत्व-जीवन दर्शन के प्रति अगाध विश्वास पैदा किया। अपनी विद्वतापूर्ण एवं तर्क आधारित भाषण से दुनिया भर के बुध्दिजीवियों के बीच भारत के प्रति एक जिज्ञासा पैदा की।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 8 जुलाई 2005 को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से मानद डॉक्टरेट की उपाधि ग्रहण करने पर व्याख्यान देते हुए उन्होंने कहा था कि अंग्रेजों ने हमें सभ्यता सिखाई। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में अंग्रेजों के पक्ष में दिए गए बयान की भारत में कड़े शब्दों में चौतरफा निंदा हुई थी।
हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कहते हैं कि अंग्रेजों ने हमें सभ्यता सिखाई। क्या अंग्रेजों के यहां आने से पहले हम असभ्य थे?
स्वामी विवेकानंद में जीवन के उच्च आदर्शों के उदाहरण मिलते हैं जबकि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का अंग्रेजों के पक्ष में दिए गए व्याख्यान/बयान छोटी सोच को दर्शाता है । वैसे, देखा जाए तो यह पूरा मामला सोच के अंतर को ही दिखाता है।
भारतीय नवजागरण का अग्रदूत और भारत के युवाओ के पथ प्रदर्शक, महान दार्शनिक व चिंतक स्वामी विवेकानंद जी को शत्-शत् नमन जय हिन्द, जय भारत ! वन्दे मातरम !!
स्वामी विवेकानंद ने 11 सितंबर 1893 में शिकागो (अमेरिका) में विश्व धर्म सम्मेलन में अपने भाषण दिया था और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 8 जुलाई 2005 को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से मानद डॉक्टरेट की उपाधि ग्रहण करने पर व्याख्यान दिया था ।
स्वामी विवेकानंद ने 11 सितंबर 1893 में शिकागो (अमेरिका) में विश्व धर्म सम्मेलन में अपने भाषण दिया था । भारतीय नवजागरण का अग्रदूत यदि स्वामी विवेकानेद को कहा जाय, तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। उन्होंने सदियों की गुलामी में जकड़े भारतवासी को मुक्ति का रास्ता सुझाया। जन-जन के मन में भारतीय होने के गर्व का बोध कराया।
स्वामी विवेकानंद ने मानव समाज को अन्याय, शोषण और कुरीतियों के खिलाफ उठ खड़े होने का साहस प्रदान किया और पाश्चात्य संस्कृति की चकाचौंध में दिशाभ्रमित भारतीय नौजवानों के मन-मस्तिष्क में स्वदेश-प्रेम एवं हिन्दुत्व-जीवन दर्शन के प्रति अगाध विश्वास पैदा किया। अपनी विद्वतापूर्ण एवं तर्क आधारित भाषण से दुनिया भर के बुध्दिजीवियों के बीच भारत के प्रति एक जिज्ञासा पैदा की।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 8 जुलाई 2005 को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से मानद डॉक्टरेट की उपाधि ग्रहण करने पर व्याख्यान देते हुए उन्होंने कहा था कि अंग्रेजों ने हमें सभ्यता सिखाई। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में अंग्रेजों के पक्ष में दिए गए बयान की भारत में कड़े शब्दों में चौतरफा निंदा हुई थी।
हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कहते हैं कि अंग्रेजों ने हमें सभ्यता सिखाई। क्या अंग्रेजों के यहां आने से पहले हम असभ्य थे?
स्वामी विवेकानंद में जीवन के उच्च आदर्शों के उदाहरण मिलते हैं जबकि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का अंग्रेजों के पक्ष में दिए गए व्याख्यान/बयान छोटी सोच को दर्शाता है । वैसे, देखा जाए तो यह पूरा मामला सोच के अंतर को ही दिखाता है।
भारतीय नवजागरण का अग्रदूत और भारत के युवाओ के पथ प्रदर्शक, महान दार्शनिक व चिंतक स्वामी विवेकानंद जी को शत्-शत् नमन जय हिन्द, जय भारत ! वन्दे मातरम !!
नोट : इस ब्लॉग पर प्रस्तुत लेख या चित्र आदि में से कई संकलित किये हुए हैं यदि किसी लेख या चित्र में किसी को आपत्ति है तो कृपया मुझे अवगत करावे इस ब्लॉग से वह चित्र या लेख हटा दिया जायेगा. इस ब्लॉग का उद्देश्य सिर्फ सुचना एवं ज्ञान का प्रसार करना है
तो वो है माँ का प्यार
एक जवान बेटा अपनी बुढी माँ के पास बेठा था...!!
उसकी माँ ने एक पेड के ऊपर बैठे पक्षीकी तरफ इशारा करके पुछा: बेटा..! वो क्या है..?
बेटा: माँ वो कौवा है..
...
एक बार फिर माँ पुछा: बेटा वो क्या है...??
बेटा: माँ वो कौवा है कौवा..!
एक बार फिर माँ ने पुछा: बेटा वो क्या है...???
बेटा गुस्सा होकर: माँ तु बुढी हो गई हो...!
अब तुम्हारे दिमाग को जंग लग गया है..!
तुम पागल हो गई हो..
मैनेँ कितनी बार बोला की वो कौवा है..!!
फिर भी तुम पुछती जा रही हो..??
माँ की आँखो से आँसु निकल आये..!!!
फिर माँ ने आँसु पोछकर भारी आवाज मेँ
बोली: बेटा..! जब तु छोटा था ना तो,
तुने मुझे 30 बार पुछा कि माँ वो क्या है...?
तो मैनेँ तीस बार तेरा सर चुमकर कहा बेटा वो कौवा है
कौवा है..कौवा है...!!!
मित्रों, दुनिया मेँ सबसे मीठा कोई है तो वो है माँ का प्यार और सबसे कडवा माँ के आँसु इस बात का हमेशा ध्यान रखना....!!!
नोट : इस ब्लॉग पर प्रस्तुत लेख या चित्र आदि में से कई संकलित किये हुए हैं यदि किसी लेख या चित्र में किसी को आपत्ति है तो कृपया मुझे अवगत करावे इस ब्लॉग से वह चित्र या लेख हटा दिया जायेगा. इस ब्लॉग का उद्देश्य सिर्फ सुचना एवं ज्ञान का प्रसार करना है
मंगलवार, 14 फ़रवरी 2012
14 फ़रवरी 1931
14 फ़रवरी 1931 आज ही के दिन लाहौर में शहीदे आजम भगत सिहं,सुखदेव,राजगुरु को वहां अदालत में फाँसी सज़ा सुनाई गई ।और 37 दिन बाद 23 मार्च 1931 उनको फाँसी पर चढ़ा दिया गया ।
भारत माता के ये 3 पुत्र जो भरी जवानी भारत माता की रक्षा के लिये फाँसी चढ़ गए ।। उनकी शहादत को पुरे भारत की और से शत शत नमन ।।
मानसिक गुलाम और ईसाईयत की और खीचें जा रहे लोग । और लोगो को गुमराह करने वाला मीडिया ,ये बोलीवुड,और सरकारे आपको कभी मानसिक गुलामी से बाहर नहीं आने देगीं । आपका केवल शरीर ही भारतीय रह जाए और आत्मा पुरी अग्रेजो जैसी
हो जाए इसलिए वो आपको को ऐसी बात क़भी नहीं बतायेगें ज़ो आपमें देशभगती पैदा कर दे ।। इसलिए आज सारा दिन वो वैलनटाईन डे के ही गुण गायेगें ।
भारत माता के ये 3 पुत्र जो भरी जवानी भारत माता की रक्षा के लिये फाँसी चढ़ गए ।। उनकी शहादत को पुरे भारत की और से शत शत नमन ।।
मानसिक गुलाम और ईसाईयत की और खीचें जा रहे लोग । और लोगो को गुमराह करने वाला मीडिया ,ये बोलीवुड,और सरकारे आपको कभी मानसिक गुलामी से बाहर नहीं आने देगीं । आपका केवल शरीर ही भारतीय रह जाए और आत्मा पुरी अग्रेजो जैसी
हो जाए इसलिए वो आपको को ऐसी बात क़भी नहीं बतायेगें ज़ो आपमें देशभगती पैदा कर दे ।। इसलिए आज सारा दिन वो वैलनटाईन डे के ही गुण गायेगें ।
नोट : इस ब्लॉग पर प्रस्तुत लेख या चित्र आदि में से कई संकलित किये हुए हैं यदि किसी लेख या चित्र में किसी को आपत्ति है तो कृपया मुझे अवगत करावे इस ब्लॉग से वह चित्र या लेख हटा दिया जायेगा. इस ब्लॉग का उद्देश्य सिर्फ सुचना एवं ज्ञान का प्रसार करना है
जागो भारतीय जागो !!
हिंदी अति सरल और मीठी भाषा हैं l कुछ लोगों की अंग्रेजी मानसिकता जो रहते हिंदुस्तान में हॆं,लेकिन स्वतंत्रता के इतने साल बाद भी मानसिक रुप से अभी भी अंग्रेजी के गुलाम हॆं ।वेशर्म इतने कि अपनी इस गुलाम मानस्किता पर अभी भी उन्हें नाज हॆ ।
सच तो यह है कि हिन्दी भारत की आत्मा, श्रद्धा, आस्था, निष्ठा, संस्कृति और सभ्यता से जुड़ी हुई है। हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है ।
जापान, चीन, रूस जैसे विकसित देशों ने अपनी भाषा को महत्त्व दिया है और निरन्तर प्रगतिमान हैं। तभी तो देश के बाहर भी हिंदी ने अपना स्थान बना सकने में सफलता हासिल किया है l नेपाल , मोरिशोस, यहाँ तक चाइना और रसिया में भी हिंदी अच्छी तरह बोली और पढ़ी जाती है l यह अलग बात हैं कि अपने ही कुछ लोग है जो अपनी ही भाषा की इज्जत नहीं करते l
दुर्भाग्य है इस भारत का कि प्रो. एम.एम. जोशी के शोध ग्रन्थ के बाद भौतिक विज्ञान में एक भी दरजेदार शोधग्रंथ हिन्दी में नहीं प्रकाशित हुआ। जबकि हास्यास्पद बाद तो यह है कि अब संस्कृत के शोधग्रंथ भी देश के सैकड़ों विश्वविद्यालय में अंग्रेजी में प्रस्तुत हो रहे है।
जागो भारतीय जागो !! जय हिन्द, जय भारत ! वन्दे मातरम !!
सच तो यह है कि हिन्दी भारत की आत्मा, श्रद्धा, आस्था, निष्ठा, संस्कृति और सभ्यता से जुड़ी हुई है। हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है ।
जापान, चीन, रूस जैसे विकसित देशों ने अपनी भाषा को महत्त्व दिया है और निरन्तर प्रगतिमान हैं। तभी तो देश के बाहर भी हिंदी ने अपना स्थान बना सकने में सफलता हासिल किया है l नेपाल , मोरिशोस, यहाँ तक चाइना और रसिया में भी हिंदी अच्छी तरह बोली और पढ़ी जाती है l यह अलग बात हैं कि अपने ही कुछ लोग है जो अपनी ही भाषा की इज्जत नहीं करते l
दुर्भाग्य है इस भारत का कि प्रो. एम.एम. जोशी के शोध ग्रन्थ के बाद भौतिक विज्ञान में एक भी दरजेदार शोधग्रंथ हिन्दी में नहीं प्रकाशित हुआ। जबकि हास्यास्पद बाद तो यह है कि अब संस्कृत के शोधग्रंथ भी देश के सैकड़ों विश्वविद्यालय में अंग्रेजी में प्रस्तुत हो रहे है।
जागो भारतीय जागो !! जय हिन्द, जय भारत ! वन्दे मातरम !!

नोट : इस ब्लॉग पर प्रस्तुत लेख या चित्र आदि में से कई संकलित किये हुए हैं यदि किसी लेख या चित्र में किसी को आपत्ति है तो कृपया मुझे अवगत करावे इस ब्लॉग से वह चित्र या लेख हटा दिया जायेगा. इस ब्लॉग का उद्देश्य सिर्फ सुचना एवं ज्ञान का प्रसार करना है
कैसे मनायें 'मातृ-पितृ पूजन दिवस'?

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वेलेंनटाईंन डे ( १४ फ़रवरी )

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क्या भारत में सभी सरकारी स्कूल (विद्यालय) बन्द कर देना चाहिए ?
क्या भारत में सभी सरकारी स्कूल (विद्यालय) बन्द कर देना चाहिए ?आज भारत में जितने भी बड़े नेता/अधिकारी/सभी सरकारी शिक्षक हैं उन सभी के बच्चे या तो विदेशों में पड़ रहे हैं या प्राइवेट स्कूलों में ।
**************************************
आजकल सभी सरकारी शिक्षक(96%) अपने बच्चों को तो निजी विद्यालय (प्राइवेट स्कूल) में पड़ना चाहते है लेकिन नोकरी सरकारी स्कूल (विद्यालय)में करना चाहते है क्यूँ ?
आज सरकारी स्कूलों की जो हालत बद से बदतर होती जा रही हैं। किसी प्रेरणा या जवाबदेही के अभाव में सरकारी स्कूलों में शिक्षण इतना दयनीय हो गया है कि शहरी झुग्गी बस्तियों के कई गरीब मां-बाप भी अपने बच्चो को मुफ्त में सरकारी स्कूलों में पढाने की जगह फीस देकर निजी स्कूलो में पढाना बेहतर समझ रहे है।
कर्तव्य-निर्वाह न करने वाले शिक्षकों पर कार्यवाही की जाए।¦
सरकारी स्कूलों (विद्यालय) में निशुल्क पुस्तकों से लेकर, ड्रेस, मध्याह्न भोजन, साइकिल सहित अन्य प्रकार की सुविधा प्रदान कर रही है। लेकिन बच्चे हैं कि लोभ-दबाव में यदि नाम लिखा भी लिया तो शीघ्र ही उनका आना बंद होने लगा। आखिर क्यों?
सब प्राइवेट स्कूलों में चले गए और जाए भी क्यों नहीं साब सरकारी स्कूल का तो भटटा बैठ गया है बच्चों की पढ़ाई सही ढंग से नहीं हो पा रही है।
क्या निजी स्कूल (विद्यालय)सरकारी स्कूलों से बेहतर हैं ? देश के विभिन्न भागों के शोधकर्ताओं ने यह साबित कर दिया है कि प्रति छात्र पर होने वाला खर्च सरकारी स्कूल की तुलना में कहीं कम है। एक और महत्त्वपूर्ण बात यह है कि निजी और गैर -वित्तीय सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों का वेतन सरकारी स्कूलों की तुलना में 5-7 गुना कम है।निजी स्कूल बजट के हिसाब से भी सस्ते हैं।
सरकारी मतलब घोटाला, ग़ैर ज़िम्मेदारी, कोई जवाबदेही नहीं । कोई भी माँ- बाप अपने बच्चों को सरकारी स्कुल (विद्यालय)में नहीं भेजता, सब प्राइवेट स्कूलों (विद्यालय) कि तरफ भाग रहें है ।
अब सरकारी स्कूल में किसी अफ़सर, नेता, व्यापारी, उद्योगपति, डॉक्टर और ऐसे ही किसी ऐसे व्यक्ति के बच्चे नहीं पढ़ते जो उच्च या मध्यवर्ग में आते हैं। जो महंगे निजी स्कूल में नहीं जा सकते वो किसी सस्ते निजी स्कूल में जाते हैं, लेकिन सरकारी स्कूल में नहीं जाते । भारत में सरकारी स्कूलों की हालत हद से ज्यादा दयनीय है।भारत में सभी सरकारी स्कूल (विद्यालय) बन्द कर देना चाहिए
! जय हिन्द, जय भारत ! वन्दे मातरम !!
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आजकल सभी सरकारी शिक्षक(96%) अपने बच्चों को तो निजी विद्यालय (प्राइवेट स्कूल) में पड़ना चाहते है लेकिन नोकरी सरकारी स्कूल (विद्यालय)में करना चाहते है क्यूँ ?
आज सरकारी स्कूलों की जो हालत बद से बदतर होती जा रही हैं। किसी प्रेरणा या जवाबदेही के अभाव में सरकारी स्कूलों में शिक्षण इतना दयनीय हो गया है कि शहरी झुग्गी बस्तियों के कई गरीब मां-बाप भी अपने बच्चो को मुफ्त में सरकारी स्कूलों में पढाने की जगह फीस देकर निजी स्कूलो में पढाना बेहतर समझ रहे है।
कर्तव्य-निर्वाह न करने वाले शिक्षकों पर कार्यवाही की जाए।¦
सरकारी स्कूलों (विद्यालय) में निशुल्क पुस्तकों से लेकर, ड्रेस, मध्याह्न भोजन, साइकिल सहित अन्य प्रकार की सुविधा प्रदान कर रही है। लेकिन बच्चे हैं कि लोभ-दबाव में यदि नाम लिखा भी लिया तो शीघ्र ही उनका आना बंद होने लगा। आखिर क्यों?
सब प्राइवेट स्कूलों में चले गए और जाए भी क्यों नहीं साब सरकारी स्कूल का तो भटटा बैठ गया है बच्चों की पढ़ाई सही ढंग से नहीं हो पा रही है।
क्या निजी स्कूल (विद्यालय)सरकारी स्कूलों से बेहतर हैं ? देश के विभिन्न भागों के शोधकर्ताओं ने यह साबित कर दिया है कि प्रति छात्र पर होने वाला खर्च सरकारी स्कूल की तुलना में कहीं कम है। एक और महत्त्वपूर्ण बात यह है कि निजी और गैर -वित्तीय सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों का वेतन सरकारी स्कूलों की तुलना में 5-7 गुना कम है।निजी स्कूल बजट के हिसाब से भी सस्ते हैं।
सरकारी मतलब घोटाला, ग़ैर ज़िम्मेदारी, कोई जवाबदेही नहीं । कोई भी माँ- बाप अपने बच्चों को सरकारी स्कुल (विद्यालय)में नहीं भेजता, सब प्राइवेट स्कूलों (विद्यालय) कि तरफ भाग रहें है ।
अब सरकारी स्कूल में किसी अफ़सर, नेता, व्यापारी, उद्योगपति, डॉक्टर और ऐसे ही किसी ऐसे व्यक्ति के बच्चे नहीं पढ़ते जो उच्च या मध्यवर्ग में आते हैं। जो महंगे निजी स्कूल में नहीं जा सकते वो किसी सस्ते निजी स्कूल में जाते हैं, लेकिन सरकारी स्कूल में नहीं जाते । भारत में सरकारी स्कूलों की हालत हद से ज्यादा दयनीय है।भारत में सभी सरकारी स्कूल (विद्यालय) बन्द कर देना चाहिए
! जय हिन्द, जय भारत ! वन्दे मातरम !!

नोट : इस ब्लॉग पर प्रस्तुत लेख या चित्र आदि में से कई संकलित किये हुए हैं यदि किसी लेख या चित्र में किसी को आपत्ति है तो कृपया मुझे अवगत करावे इस ब्लॉग से वह चित्र या लेख हटा दिया जायेगा. इस ब्लॉग का उद्देश्य सिर्फ सुचना एवं ज्ञान का प्रसार करना है
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