यह ब्लॉग खोजें

गुरुवार, 10 जून 2021

दुनिया की तीन मूर्खताएँ उपहासास्पद होते हुए भी कितनी व्यापक हो गई हैं

🪔आत्मचिंतन के क्षण🪔


🕉️  दुनिया की तीन मूर्खताएँ उपहासास्पद होते हुए भी कितनी व्यापक हो गई हैं यह देखकर आश्चर्य होता है-

- पहली यह कि लोग धन को ही शक्ति मानते हैं।

-दूसरी यह कि लोग अपने को सुधारे बिना दूसरों को धर्मोपदेश देते हैं।

-तीसरी यह कि कठोर श्रम से बचे रहकर भी लोग आरोग्य की आकाँक्षा  करते हैं।


🕉️  *संयम शरीर में अवस्थित भगवान् है। सद्विचार मस्तिष्क में निवास करने वाला परमेश्वर है।*  अंतरात्मा में  ईश्वर की और भी ऊँची झाँकी देखनी हो तो सद्भावनाओं के रूप में देखनी चाहिए। ईश्वर दर्शन के लिए कहीं बाहर जाने की आवश्यकता नहीं, उसे अपने भीतर ही देखा जाना चाहिए। उसे प्राप्त करने के लिए संयम, सद्विचार और सद्भाव का विकास करना चाहिए। यही है यथार्थ सत्ता और चैतन्य-चित्त, परिष्कृत आत्मा-परमात्मा की उपलब्धि। इसी भक्तियोग का साधक सच्चे अर्थों में जीवन लाभ व सच्च आनंद प्राप्त करता है।*


🕉️  धर्म पर श्रद्धा रखो, नीति को आचरण में उतारो, अपना उद्धार आप करो, हँसी और मुस्कराहट बिखेरो। जो कार्य करना पड़े उसमें दूसरों की भलाई के तत्त्व जोड़े रखो। अपनी रीति-नीति ऐसी बनाओ जिस पर स्वयं को संतोष मिले और दूसरों को प्रेरणा-यह आत्म कल्याण का मार्ग है।


✍️ *पं श्रीराम शर्मा आचार्य*

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी करें

function disabled

Old Post from Sanwariya