रविवार, 29 मार्च 2015

देना है शुध्द राजपूत या शुध्द ब्राहमण का खून दो ,


इक रोज वर्मा जी ब्लड बैंक के काउंटर पे बैठे थे तभी हाँफते हाँफते एक गबरू जवान मुस्टंडा काउंटर पे आके बोला एक यूनिट ब्लड चाहिए , वर्मा जी ने पूछा कौन से ग्रुप का तो मुस्टंडा बोलता है राजपूत खून दो , 
वर्मा जी चकरा गए , बोले खून ऐसे नहीं आता है ऐ , बी , ऐ बी , और ओ के ब्लड ग्रुप में आता है , 
मुस्टंडा ये ऐ , बी , सी , डी अपने पास रख , हमारे भाई सा राजपूत है उनकी रगों में सिर्फ राजपूत खून पड़ेगा , एक यूनिट किसी राजपूत का खून निकाल के दो जल्दी , हम रक्त शुध्दता वाले लोग है हमें अपने खून में कोई मिलावट नहीं चाहिए , 
अभी वर्मा जी मुस्टंडे को समझा ही रहे थे भाई यहाँ खून ऐसे नहीं मिलता , तब तक जाने कहा से एक पंडित जी भी खून लेने पंहुच गए , पंडित जी ने कहा हमारा लड़का दुर्घटनाग्रस्त है उसे खून की जरुरत है , आप फटाफट एक यूनिट शांडिल्य ब्राहमण का खून निकाल के दे दो , 
वर्मा जी के तो होश ही उड़ गए , वर्मा जी ने पंडित जी से कहा ये ब्लड बैंक है यहाँ क्षत्रिय , ब्राहमण , राजपूत , दलित , पिछड़ा खून की केटेगरी नहीं होती है , हमारे यहाँ जो भी ब्लड डोनेट करता है हम उसका ब्लड ले लेते है और उनको ऐ , बी , ऐ बी और ओ ग्रुप के हिसाब से पाउच में पैक कर के रख देते है , फिर जिसे जरुरत होती है इसी ग्रुप के हिसाब से ब्लड लेकर जाता है , अब भला कैसे पता चलेगा कौन से पाउच में ब्राहमण का खून है, किस में राजपूत का है , किसमें दलित का , किस में पिछड़ा का , किस में मुसलमान , सिख या इसाई का , लोग आते है खून लेकर जाते है मरीज को चढ़ा देते है जात थोड़े न पूछते है, 
पंडित जो बोले राम राम राम राम, तुम ब्लड बैंक वालो ने तो सारा धरम ही भ्रष्ट करके रखा हुआ है, हमने जाने कितने सालो से सब खून को अलगा के रखा है , खून में मिलावट न हो इसलिए दूसरी जात में शादी ब्याह तक नहीं करते है ताकि एक जात एक गोत्र का खून एक जैसा ही रहे , और तुम ब्लड बैंक वालो ने सारी जात और धरम का खून मिला कर मरीजो का जात और धरम ही भ्रष्ट कर रखा है , हमारे सालो से अपनी रक्त शुद्धता को बचाए रखने के लिए जो तपस्या की सब भरभंड कर दिया , 
वर्मा जी ने कहा पंडित जी लड़का सीरियस है ब्लड ग्रुप बोलो और खून ले जाओ जान बचाओ , 
पंडित जी बोले न हम शुध्द शांडिल्य ब्राहमण है , हमारे लड़के को वो खून न चढ़ेगा जिसकी न जात का पता हो न धरम का और न गोत्र का , हम अपनी रक्त शुद्धता से खिलवाड़ नहीं कर सकते , इत्ते में राजपूत गबरू जवान ने भी पंडित जी हाँ में हाँ मिलाई हम भी अपने भाई सा के खून किसी और जात का खून न मिलने देंगे , देना है शुध्द राजपूत या शुध्द ब्राहमण का खून दो , 
वर्मा जी बोले ऐसा कीजिये आप दोनों अपना अपना खून दे दीजिये , मैं चेक कर लेता हूँ अगर मरीज के खून से मैच कर गया तो आप वो ही शुध्द खून उन्हें चढ़ा देना , 
दोनों इस बात के लिए राजी हो गए , खून का नमूना निकाला गया , और दोनों में से किसी का खून मरीज के खून से मैच नही किया , 
वर्मा जी बोले महराज अब बोलो आप दोनों का खून तो अपने ही भाई और बेटे से नहीं मिला , ऐसा करो आप दोनों जन इन्तेजार कर लो , जब कोई राजपूत या ब्राहमण खून आएगा तो वो ले जाना फिर चढ़ा देना और मरीज की जान बचा लेना , लेकिन इसमें टाइम लगेगा आज भी हो सकता है , कल भी लग सकता या फिर हफ्ते या महीने भी लग सकते है , सदियों की पोषित रक्त शुद्धता को बचाना है तो थोडा इन्तेजार थोड़ी तपस्या और तो करनी ही पड़ेगी वरना जात-धरम सब मिटटी में मिल जायेगा , 
पंडित जी का माथा ठनका इतना टाइम लगेगा तो लड़का जान से जायेगा , बाबु साहेब को भी लगा इतने में तो दुलारे भाई सा भगवान् को प्यारे हो जायेंगे , 
फिर दोनों ने चुपचाप वही ऐ , बी , सी , डी वाला ही ब्लड ले लिया जिसकी न जात का पता था, न धरम का और न गोत्र का , बस पाउच पर ऐ और बी ही लिखा था धन और ऋण के साथ जिससे इंसानियत जुड़ती थी दकियानूसी घटती थी....

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