सोमवार, 30 मार्च 2015

हनुमान जयंती पर चन्द्रग्रहण की छाया--मनोकामना पूरी करने के लिए करे उपाय ग्रहण के समय

इस बार हनुमान जयंती पर चन्द्रग्रहण की छाया--मनोकामना पूरी करने के लिए करे उपाय ग्रहण के समय
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4 अप्रैल को हनुमान जयंती है। इसी दिन भारतीय समयानुसार शाम 3.45 से शाम 7.15 बजे तक खग्रास चंद्रग्रहण लगेगा, जो अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग समय पर दिखाई देगा। चन्द्रग्रहण भारत सहित अन्य देशों में भी दिखाई देगा। इस दिन जातक को शनि की ढैय्या व साढ़े साती से बचने के लिए हनुमान जी उपासना करें। मंगल दोष नविारण के लिए भी हनुमत उपासना श्रेष्ठ सिद्ध होगी। अल्प खंडग्रास चंद्रग्रहण तुला राशि में स्वाति नक्षत्र में होगा। ग्रहण का सूतक शाम को 4:21 बजे शुरु होगा।

ग्रहण रात 1:21 शुरु तथा 1:54 पर समाप्त होगा। इसलिए पर्वकाल 33 मिनट होगा। यह ग्रहण वृष, सिंह, धनु, मकर राशि वालों के लिए शुभ तथा मेष, मिथुन, कन्या, कुंभ राशि वालों के लिए मध्यम और कर्क, तुला, वृश्चिक, मीन राशि के जातकों के लिए कष्टप्रद हो सकता है। चन्द्रग्रहण के दिन हनुमान जी का विशेष पदार्थों से अभिषेक लाभकारी होगा। पूजा के लिए सुबह 5:57 से 7:34, अमृत लाभ के लिए दोपहर 12:24 से 3:38 तक का समय शुभ रहेगा।


चन्द्रग्रहण के समय क्या करें?
चन्द्रग्रहण लग रहा है। यह इस साल का पहला दृश्य खग्रास चंद्रग्रहण है। चंद्रग्रहण का कारण विज्ञान यह मानता है कि जब चन्द्रमा और सूर्य के बीच पृथ्वी आ जाती है तो चंग्रहण लगता है।

लेकिन ज्योतिषशास्त्र में इसकी अपनी मान्यता है जो ग्रहण का कारण राहु केतु को मानता है। शास्त्रों में बताया गया है कि ग्रहण का समय सिद्घियां और मनोकामना पूरी करने के लिए बहुत ही उत्तम समय होता है।
इसलिए ग्रहण के समय खाने-पीने या विपरीत लिंग के व्यक्तियों के साथ मौज मस्ती करने की बजाय अपनी मनोकामना पूरी करने में लगाएं तो आपका भला हो सकता है।
स्त्री पुरुष नहीं करें ग्रहण के समय यह काम
शास्त्रों में ग्रहण के समय स्त्री पुरुषों के लिए कई निमय बताए गए हैं। इनमें सबसे पहला नियम यह है कि स्त्री पुरुष को ग्रहण की अवधि में रति क्रिया यानी शारीरिक संबंध और प्रेमालाप से बचना चाहिए। इस दौरान काम वासना को मन से दूर रखकर ईश्वर का ध्यान चिंतन करना शुभ होता है। जो स्त्री पुरुष रति क्रिया करते हैं उन्हें मृत्यु के बाद नर्क की यातना भोगनी पड़ती है।
ग्रहण के दौरान गर्भवती स्त्रियों के संदर्भ में शास्त्रों में काफी नियम बताए गए हैं। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण की अवधि में गर्भवती स्त्रियों को घर में ही रहना चाहिए, क्योंकि इसका बुरा प्रभाव गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ता है।
ग्रहण के समय गर्भवती स्त्री को कैंची, चाकू या किसी धारदार वस्तु से कोई चीज काटने से बचना चाहिए। सिलाई का काम भी इस समय करना ठीक नहीं होता। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे के शरीर पर जन्म से ही कटे और सिले का निशान आ जाता है।
ग्रहण काल में चन्द्र के प्रभावों को शुभ करने के लिये चन्द्र की वस्तुओं का दान किया जाता है –
शुभ प्रभाव प्राप्त करने के लिए निम्न उपाय करे -
—ग्रहण में बालक, वृद्ध और रोगी के लिए कोई नियम शास्त्रों में नहीं बताया गया है ।
—-चिटियों को पिसा हुआ चावल व आट्टा डाले ।
— चन्द्र की दान वस्तुओं में मोती, चांदी, चावल, मिसरी, सफेद कपड़ा,सफेद फूल, शंख, कपूर,श्वेत चंदन, पलाश की लकड़ी, दूध, दही, चावल, घी, चीनी आदि का दान करना शुभ रहेगा ,
—कुंडली के अनुसार चन्द्रमा को मन और माँ का कारक माना गया है जन्म कुंडली में चन्द्रमा जिस भाव में हो उसके अनुसार दान करना चाहिए . चन्द्र वृष राशी में शुभ और वृश्चिक राशी में अशुभ होता है , जब चन्द्र जन्म कुण्डली मे उच्च का या अपने पक्के भाव का हो तब चन्द्र से सम्बन्धित वस्तुऑ का दान नही करना चाहिए, अगर चन्द्र दितीय चतुर्थ भाव मे हो तो चावल चीनी दुध का दान न करे , यदि चन्द्र वृश्चिक राशी में हो तो चन्द्र की शुभता प्राप्त करने के लिए मन्दिर,मस्जिद, गुरुद्धारा, शमशान या आम जनता के लिए प्याउ( पानी की टंकी ) बनवाए या किसी मिटटी के बर्तन में चिड़ियों के लिये पानी रखे .
—-चन्द्र का वैदिक मंत्र :-
चंद्रमा के शुभ प्रभाव प्राप्त करने हेतु चंद्रमा के वैदिक मंत्र का 11000 जप करना चाहिए।.
—–“””ऊँ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः “””या “””ऊँ सों सोमाय नमः “”
—-चन्द्र दोष दूर करने के लिए सोमवार, अमावस्या का दिन बहुत ही शुभ होता है। किंतु चन्द्र दोष से पीडि़त के लिए चन्द्रग्रहण के दौरान चन्द्र उपासना बहुत ही जरूरी होती है। शिव जी की आराधना करें। अपने श्री इष्ट देवताये नम:, का जाप करे….
इस चंद्रग्रहण पर करें यह प्रयोग, बिजनेस में जरुर मिलेगी सफलता—-
यदि आपका बिजनेस ठीक नहीं चल रहा है तो घबराईए बिल्कुल मत क्योंकि 4 अप्रैल, को आने वाला चंद्र ग्रहण इस समस्या से छुटकारा पाने का श्रेष्ठ अवसर है। बिजनेस की सफलता के लिए चंद्रग्रहण के दिन यह प्रयोग करें-
ऐसे करें प्रयोग—–
ग्रहण से पहले नहाकर लाल या सफेद कपड़े पहन लें। इसके बाद ऊन व रेशम से बने आसन को बिछाकर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं। जब ग्रहण काल प्रारंभ हो तब चमेली के तेल का दीपक जला लें। अब दाएं हाथ में रुद्राक्ष की माला लें तथा बाएं हाथ में 5 गोमती चक्र लेकर नीचे लिखे मंत्र का 54 बार जप करें-
—-मन्त्र “”””ऊँ कीली कीली स्वाहा”””
अब इन गोमती चक्रों को एक डिब्बी में डाल दें और फिर क्रमश: 5 हकीक के दाने व 5 मूंगे के दाने लेकर पुन: इस मंत्र का 54 बार उच्चारण करें। अब इन्हें भी एक डिब्बी में डालकर उसके ऊपर सिंदूर भर दें। अब दीपक को बुझाकर उसका तेल भी इस डिब्बी में डाल दें।
इस डिब्बी को बंद करके अपने घर, दुकान या ऑफिस में रखें। आपका बिजनेस चल निकलेगा।
—-इस चंद्रग्रहण पर करें यह उपाय/टोटका, होगा अचानक धन लाभ—-
तंत्र शास्त्र के अनुसार ग्रहण के दौरान किया गया प्रयोग बहुत प्रभावशाली होता है और इसका फल भी जल्दी ही प्राप्त होता है। इस मौके का लाभ उठाकर यदि आप धनवान होना चाहते हैं तो नीचे लिखा उपाय करने से आपकी मनोकामना शीघ्र ही पूरी होगी और आपको अचानक धन लाभ होगा।
ऐसे करें उपाय/टोटका —-
ग्रहण के पूर्व नहाकर साफ पीले रंग के कपड़े पहन लें। ग्रहण काल शुरु होने पर उत्तर दिशा की ओर मुख करके ऊन या कुश के आसन पर बैठ जाएं। अपने सामने पटिए(बाजोट या चौकी) पर एक थाली में केसर का स्वस्तिक या ऊँ बनाकर उस पर महालक्ष्मी यंत्र स्थापित करें। इसके बाद उसके सामने एक दिव्य शंख थाली में स्थापित करें।अब थोड़े से चावल को केसर में रंगकर दिव्य शंख में डालें। घी का दीपक जलाकर नीचे लिखे मंत्र का कमलगट्टे की माला से ग्यारह माला जप करें-
ये हें मंत्र—-
सिद्धि बुद्धि प्रदे देवि मुक्ति मुक्ति प्रदायिनी।
मंत्र पुते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते।।
मंत्र जप के बाद इस पूरी पूजन सामग्री को किसी नदी या तालाब में विसर्जित कर दें। इस प्रयोग से कुछ ही दिनों में आपको अचानक धन लाभ होगा।
मनोकामना पूरी करने के लिए क्या करें ग्रहण के समय
1 शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के समय गायों को चारा, पक्षियों को अन्न और जरुरतमंदों को वस्त्र एवं अन्य जरुरी सामान देने से अन्य समय में किए गए दान से कई गुणा अधिक पुण्य प्राप्त होता है। इस दान का वर्तमान जीवन से लेकर अगले जन्म तक शुभ फल मिलता है। यह शुभ फल आपकी आयु, स्वास्थ्य, धन और सुख के रुप में प्राप्त होता है।
2 शास्त्रों में यह बताया गया है कि ग्रहण आरंभ होने से पहले स्नान करके शुद्घ वस्त्र पहनें और ग्रहण की अवधि में जिस मंत्र को सिद्घ करना होगा उसका मन ही मन जप करें। इस समय बोलकर मंत्रों का जप नहीं करना चाहिए।
3 ग्रहण के बाद जिस मंत्र का जप किया है उस मंत्र का जप करते हुए हवन करना चाहिए। इसके बाद किसी जरुरतमंद या ब्रह्मण को भोजन करवाएं।
4 ग्रहण काल में ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करने से ग्रहण का कुप्रभाव दूर होगा।
5 अगर आप कोई रत्न या रुद्राक्ष धारण करना चाह रहे हैं तो ग्रहण के समय इसे भगवान की मूर्ति के सामने रखकर उस रत्न से स्वामी का मंत्र जप करें। ग्रहण समाप्त होने के बाद इस रत्न को धारण करने पर रत्न आपको जल्दी लाभ देने शुरु कर देगा। अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए आप यह उपाय कर सकते हैं।

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